एक औरत की आत्मकथा

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sexy
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Re: एक औरत की आत्मकथा

Unread post by sexy » 15 Sep 2015 04:13

अब उसने प्रगति को अपनी ओर खींच कर जोर से अपने आलिंगन में ले लिया और वे बहुत देर तक एक दूसरे के साथ जकड़े रहे। सिर्फ उनके होंठ आपस में हरकत कर रहे थे और उनकी जीभ एक दूसरे के मुँह की गहराई नाप रही थी। थोड़ी देर में शेखर ने पकड़ ढीली की तो दोनों अलग हुए।

घड़ी में ५.३० बज रहे थे। समय कम बचा था इसलिए शेखर ने अपने कपड़े उतारने शुरू किये पर प्रगति ने उसे रोक कर खुद उसके कपड़े उतारने लगी। शेखर को निर्वस्त्र कर उसने उसके लिंग को झुक कर पुच्ची की और खड़ी हो गई।

अब शेखर ने उसे नंगा किया और एक बार फिर दोनों आलिंगन बद्ध हो गए। इस बार शेखर का लिंग प्रगति की नाभि को टटोल रहा था। प्रगति ने अपने पंजों पर खड़े हो कर किसी तरह लिंग को अपनी योनि की तरफ किया और अपनी टांगें थोड़ी चौड़ी कर लीं। शेखर का लिंग अब प्रगति की चूत के दरवाज़े पर था और प्रगति उसकी तरफ आशा भरी नज़रों से देख रही थी। शेखर ने एक ऊपर की तरफ धक्का लगाया और उसका लंड चूत में थोड़ा सा चला गया।

अब उसने प्रगति को चूतड़ से पकड़ कर ऊपर उठा लिया और प्रगति ने अपने हाथ शेखर की गर्दन के इर्द-गिर्द कर लिए तथा उसकी टांगें उसकी कमर से लिपट गईं। अब वह अधर थी और शेखर खड़ा हो कर उसे अपने लंड पर उतारने की कोशिश कर रहा था। थोड़ी देर में लंड पूरा प्रगति की चूत में घुस गया या यों कहिये कि चूत उसके लंड पर पूरी उतर गई।

प्रगति ने ऊपर नीचे हो कर अपने आप को चुदवाना शुरू किया। उसे बड़ा मज़ा आ रहा था क्योंकि ऐसा आसन उसने पहली बार ग्रहण किया था। कुछ देर के बाद शेखर ने बिना लंड बाहर निकाले प्रगति को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट कर उसको जोर जोर से चोदने लगा। हालाँकि शेखर आज प्रगति की गांड मारने के इरादे से आया था पर काम और क्रोध पर किसका जोर चलता है !!

शेखर २-३ मिनटों में ही बेहाल हो गया और उसकी पिचकारी प्रगति की योनि में छूट गई। शेखर की यही एक कमजोरी थी कि पहली बार उसका काम बहुत जल्दी तमाम हो जाता था। पर दूसरी और तीसरी बार जब वह सम्भोग करता था तो काफी देर तक डटा रह सकता था।

उसने लंड बाहर निकाला और प्रगति को माथे पर पुच्ची करके बाथरूम चला गया। अपना लंड धो कर वह वापस आ गया। प्रगति जब कुछ देर के लिए बाथरूम गई तो शेखर ने एक गोली खा ली। शाम के ६ बज रहे थे। अभी भी उसके पास करीब २ घंटे थे। जब प्रगति वापस आई तो शेखर ने उससे पूछा कि वह कितनी देर और रुक सकती है।

प्रगति ने भी अपने पति से देर से आने की बात कह दी थी सो उसे भी कोई जल्दी नहीं थी। तो शेखर ने सोचा की शायद आज ही उसकी बरसों की मनोकामना पूरी हो जायेगी। उसने प्रगति से पूछा वह उस से कितना प्यार करती है।

प्रगति ने कहा- इम्तिहान ले कर देख लो !!

शेखर ने कहा- कितना दर्द सह सकती हो?

प्रगति ने कहा- जब औरत बच्चे को जन्म दे सकती है तो बाकी दर्द की क्या बात !!

यह सुन कर शेखर खुश हो गया और प्रगति को बिस्तर पर उल्टा लेटने के लिए बोला। प्रगति एक अच्छी लड़की की तरह झट से उलटा लेट गई। शेखर ने उसके पेट के नीचे एक मोटा तकिया लगा दिया जिस से उसकी गांड ऊपर की ओर और उठ गई।

शेखर ने अपने बैग से तेल की शीशी, जेली का ट्यूब, छोटा तौलिया और “बलराम” को निकाला और पास की मेज़ पर रख दिया। प्रगति का मुँह तकिये में छुपा था और शायद उसकी आँखें बंद थीं। वह जानती थी कि क्या होने वाला है और वह शेखर की खातिर कोई भी दर्द सहने के लिए तैयार थी।

शेखर ने नारियल के तेल से प्रगति के चूतड़ों की मालिश शुरू की। प्रगति की मांस पेशियाँ जो कसी हुईं थीं उन्हें धीरे धीरे ढीला किया और उसके बदन से टेंशन दूर करने लगा। उसके हाथ कई बार उसकी चूत के इर्द गिर्द और उसके अन्दर भी आने जाने लगे थे। प्रगति को आराम भी मिल रहा था और मज़ा भी आ रहा था।

इस तरह मालिश करते करते शेखर ने प्रगति की गांड के छेद के आस पास भी ऊँगली घुमाना शुरू किया और अच्छी तरह तेल से गांड को गीला कर दिया। अब उसने अपनी तर्जनी ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश की। ऊँगली गांड में थोड़ी सी घुस गई तो प्रगति थोड़ी सी हिल गई।

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Re: एक औरत की आत्मकथा

Unread post by sexy » 15 Sep 2015 04:13

शेखर ने पूछा- कैसा लग रहा है?

तो प्रगति ने कहा- अच्छा !

उसने कहा की अब वह ऊँगली पूरी अन्दर करने की कोशिश करेगा और प्रगति को इस तरह जोर लगाना चाहिए जैसे वह शौच के वक़्त लगाती है। इससे गांड का छेद अपने आप ढीला और बड़ा हो जायेगा। प्रगति ने वैसा ही किया और शेखर की एक ऊँगली उसकी गांड में पूरी चली गई।

शेखर ने कोई और हरकत नहीं की और ऊँगली को कुछ देर अन्दर ही रहने दिया। फिर उसने प्रगति से पूछा- कैसा लग रहा है?

प्रगति ने कहा- ठीक है।

तो शेखर ने धीरे से अपनी ऊँगली बाहर निकाल ली।

अब उसने अपनी ऊँगली पर जेली अच्छी तरह से लगा ली और प्रगति की गांड के बाहर और करीब आधा इंच अन्दर तक अच्छी तरह से जेली मल दी। अब उसने प्रगति से कहा कि जब वह ऊँगली अन्दर की तरफ डालने की कोशिश करे उसी वक़्त प्रगति को शौच वाला जोर लगाना चाहिए। जब दोनों ने ऐसा किया तो ऊँगली बिना ज्यादा मुश्किल के अन्दर चली गई।

शेखर ने ऊँगली अन्दर ही अन्दर घुमाई और बाहर निकल ली। अब उसने अपनी दो उँगलियों पर जेली लगाई और वही क्रिया दोहराई। दो उँगलियों के अन्दर जाने में प्रगति को थोड़ी तकलीफ हुई पर ज्यादा दर्द नहीं हुआ।

शेखर हर कदम पर प्रगति से उसके दर्द के बारे में पूछता रहता था। उसने इसीलिए अपनी उँगलियों के नाखून काट कर फाइल कर लिए थे वरना प्रगति को अन्दर से कट लग सकता था…

एक दो बार जब दो उँगलियों से गांड में प्रवेश की क्रिया ठीक से होने लगी तो उसने दो उँगलियों को गांड के अन्दर घुमाना शुरू किया जिस से गांड का छेद और ढीला हो सके।

इसके बाद उसने “बलराम” को निकाला और उसके अगले ४-५ इंच को अच्छी तरह जेली से लेप दिया। प्रगति की गांड के छेद के इर्द गिर्द और अन्दर भी अच्छे से जेली लगा दी। अब शेखर ने प्रगति की टांगें थोड़ी और चौड़ी कर दी और बलराम को उसकी गांड के छेद पर रख दिया। दूसरे हाथ से वह उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा। बलराम का स्पर्श प्रगति को ठंडा लगा और उसकी गांड यकायक टाइट हो गई।

उसने पलट कर देखा तो बलराम को देख कर आश्चर्यचकित रह गई। उसने ऐसा यन्त्र पहले नहीं देखा था। शेखर ने बताया कि इसे उसने खुद ही बनाया है और इसको इस्तेमाल करके वह प्रगति के दर्द को कम करेगा। उसने यह भी बताया कि इस यन्त्र का नाम “बलराम” है। नाम सुन कर प्रगति को हंसी आ गई।

शेखर ने आश्वासन के तौर पर उसकी पीठ थपथपाई और फिर से उलटे लेट जाने को कहा। उसने प्रगति को याद दिलाया की किस तरह (शौच की तरह) उसे अपनी गांड ढीली करनी है जिस से बलराम गांड में जा सके। प्रगति ने सिर हिला कर सहयोग करने का इशारा किया।

अब शेखर ने कहा कि तीन की गिनती पर वह बलराम को अन्दर करेगा। प्रगति तैयार हो गई पर अनजाने में फिर उसकी गांड टाइट हो गई। शेखर ने उसे घबराने से मना किया और उसकी योनि, पीठ तथा चूतड़ों पर प्यार से हाथ सहलाने लगा।

उसने कहा- जल्दबाजी की कोई ज़रुरत नहीं है। अगर तुम तैयार नहीं हो तो किसी और दिन करेंगे।

प्रगति ने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है और मैं तैयार हूँ !

शेखर ने कहा “ओ के, अब मैं तीन गिनूंगा तुम तीन पर अपनी गांड ढीली करना”।

प्रगति ने चूतड़ हिला कर हाँ का इशारा किया। शेखर ने एक, दो, तीन कहते हुए तीन पर बलराम को गांड के छेद में डालने के लिए जोर लगाया। पर प्रगति की कुंवारी गांड बलराम की चौड़ाई के लिए तैयार नहीं थी सो बलराम अपने निशाने से फिसल गया और जेली के कारण बाहर आ गया। शेखर की हंसी छूट गई और प्रगति भी मुस्करा कर पलट गई।

शेखर ने कहा- कोई बात नहीं, एक बार फिर कोशिश करते हैं।

उसने बलराम के सुपारे पर थोड़ी और जेली लगाई और एक-दो-तीन कह कर फिर से कोशिश की। इस बार बलराम करीब आधा इंच अन्दर चला गया। प्रगति के मुँह से एक हलकी सी आवाज़ निकली।

शेखर ने एकदम बलराम को बाहर निकाल कर प्रगति से पूछा कि कैसा लगा? दर्द बहुत हुआ क्या?

प्रगति ने पलट कर उसके होटों पर एक ज़ोरदार चुम्मी की और कहा- तुम मेरा इतना ध्यान रख रहे हो तो मुझे दर्द कैसे हो सकता है !! अब मेरे बारे में सोचना बंद करो और बलरामजी को अन्दर डालो।

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Re: एक औरत की आत्मकथा

Unread post by sexy » 15 Sep 2015 04:14

यह सुनकर शेखर का डर थोड़ा कम हुआ और उसने कहा- ठीक है, चलो इस बार देखते हैं तुम में कितना दम है !!

एक बार फिर जेली गांड और बलराम पर लगा कर उसने एक-दो-तीन कह कर थोड़ा ज्यादा ज़ोर लगाया। इस बार बलराम अचानक करीब डेढ़ इंच अन्दर चला गया और प्रगति ने कोई आवाज़ नहीं निकाली। बस एक लम्बी सांस लेकर छोड़ दी। शेखर ने बलराम को अन्दर ही रहने दिया और प्रगति की पीठ सहलाने लगा। उसने प्रगति को शाबाशी दी और कहा वह बहुत बहादुर है।

थोड़ी देर बाद शेखर ने प्रगति को बताया कि अब वह बलराम को बाहर निकालेगा। और फिर धीरे धीरे बलराम को बाहर खींच लिया। उसने प्रगति से पूछा उसे अब तक कैसा लगा तो प्रगति ने कहा कि उसे दर्द नहीं हुआ और थोड़ा मज़ा भी आया।

शेखर ने प्रगति को आगाह किया कि इस बार वह बलराम को और अन्दर करेगा और अगर प्रगति को तकलीफ नहीं हुई तो बलराम से उसकी गांड को चोदने की कोशिश करेगा। प्रगति ने कहा वह तैयार है।

पर शेखर ने एक बार फिर सब जगह जेली का लेप किया और तीन की गिनती पर बलराम को घुमाते हुए उसकी गांड के अन्दर बढ़ा दिया। प्रगति थोड़ा कसमसाई क्योंकि बलरामजी इस बार करीब चार इंच अन्दर चले गए थे। शेखर ने प्रगति को और शाबाशी दी और कहा कि अब वह तीन की गिनती नहीं करेगा बल्कि प्रगति को खुद अपनी गांड उस समय ढीली करनी होगी जब उसे लगता है कि बलराम अन्दर जा रहा है।

यह कह कर उसने बलराम को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया। हर बार जब बलराम को वह अन्दर करता तो थोड़ा और ज़ोर लगाता जिससे बलराम धीरे धीरे अब करीब ६ इंच तक अन्दर पहुँच गया था। प्रगति को कोई तकलीफ नहीं हो रही थी। यह उसके हाव भाव से पता चल रहा था। शेखर ने प्रगति की परीक्षा लेने के लिए अचानक बलराम को पूरा बाहर निकाल लिया और फिर से अन्दर डालने की कोशिश की। प्रगति चौकन्नी थी और उसने ठीक समय पर अपनी गांड को ढील दे कर बलराम को अपने अन्दर ले लिया। शेखर प्रगति की इस बात से बहुत खुश हुआ और उसने प्रगति की जाँघों को प्यार से पुच्ची कर दी।

अब वह बलराम से उसकी गांड चोद रहा था और अपनी उँगलियों से उसकी चूत के मटर को सहला रहा था जिससे प्रगति उत्तेजित हो रही थी और अपने बदन को ऊपर नीचे कर रही थी। कुछ देर बाद शेखर ने बलराम को धीरे से बाहर निकाला और प्रगति को पलटने को कहा। उसने प्रगति के पेट और मम्मों को पुच्चियाँ करते हुआ कहा कि उसके हिसाब से वह गांड मरवाने के लिए तैयार है।

प्रगति ने कहा- हाँ, मैं तैयार हूँ पर शेखर के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह जनाब तो तैयार नहीं हैं, लाओ इन्हें मैं तैयार करूँ।

शाम के सात बज रहे थे। अभी एक घंटा और बचा था। प्रगति की उत्सुकता देख कर उसका मन भी गांड मारने के लिए डोल उठा। उसके लंड पर प्रगति की जीभ घूम रही थी और उसके हाथ शेखर के अण्डों को टटोल रहे थे। साथ ही साथ गोली का असर भी हो रहा था।

थोड़ी ही देर में शेखर का लंड ज़ंग के लिए तैयार हो गया। पहली बार गांड में घुसने की उम्मीद में वह कुछ ज़्यादा ही बड़ा हो गया था। प्रगति ने उसके सुपारे को चुम्बन दिया और शेखर के इशारे पर पहले की तरह उलटी लेट गई। शेखर ने उसके कूल्हे थोड़े और ऊपर की ओर उठाये और टांगें और खोल दी। प्रगति का सिर उसने तकिये पर रखने को कहा और छाती को बिस्तर पर सटा दिया। अब उसने प्रगति की गांड की अन्दर बाहर जेली लगा दी और अपने लंड पर भी उसका लेप कर दिया। शेखर ने पीछे से आ कर अपने लंड को उसकी गांड के छेद पर टिकाया और प्रगति को पूछा कि क्या वह तैयार है ।

प्रगति तो तैयार ही थी। शेखर ने धीरे धीरे लंड को अन्दर डालने के लिए ज़ोर लगाया पर कुछ नहीं हुआ। एक बार फिर सुपारे को छेद की सीध में रखते हुए ज़ोर लगाया तो लंड झक से फिसल गया और चूत की तरफ चला गया। शेखर ने एक बार कोशिश की पर जब लंड फिर भी नहीं घुसा तो उसने फिर से बलराम का सहारा लिया। बलराम को जेली लगा कर फिर से कोशिश की तो बलराम आराम से अन्दर चला गया। बलराम से उसकी गांड को ढीला करने के बाद एक और बार शेखर ने अपने लंड से कोशिश की।