खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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खेल खिलाड़ी का compleet

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 10:33

खेल खिलाड़ी का पार्ट--1

सुनसान सड़क पे देर रात वो लड़की तेज़ कदमो से बढ़ी चली जा रही थी.उसके चुस्त सलवार कमीज़,हाथ मे पकड़े मोबाइल & कंधे पे लटके बॅग को देख के सॉफ ज़ाहिर था कि वो पास की किसी बिल्डिंग के दफ़्तर मे काम करती थी & आज उसे वाहा से निकलने मे देर हो गयी थी.

सड़क इतनी सुनसान थी की 1 आवारा कुत्ता भी कही दिखाई नही दे रहा था.तभी लड़की के कानो मे पीछे से किसी वहाँ के आने की आवाज़ आई.उसने इस उम्मीद से गर्दन घुमाई की कोई टॅक्सी या ऑटो-रिक्शा होगा मगर वो तो कोई वॅन थी.लड़की फिर से तेज़ी से आगे बढ़ने लगी.

"मस्त माल है,बच्चू!",वॅन उसके करीब आ गयी थी & बिल्कुल धीमी हो उसके साथ चल रही थी.लड़की ने गर्दन घुमाई तो वन का पिच्छला दरवाज़ा पीच्चे सरका पाया.अंदर की सीट पे 1 लंबा,भरी शरीर का शख्स बैठा था जिसकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी & तंबाकू से पीले हो चुके दाँत उसकी छिछोरि मुस्कान के चलते नुमाया थे.उसके साथ पिच्छली सीट पे 1 आदमी बैठा था & आगे 2 और लोग थे.चारो शक्ल से ही ज़ारायाम पेशा लगते थे.

लड़की ने अपनी चाल & तेज़ कर दी,"हाई!गंद तो देखो साली की!",उस शख्स ने जोकि सबका सरदार लगता था फबती कसी तो लड़की और घबरा गयी.उसे पता था कि तेज़ चाल के चलते उसकी 28 इंच की कमर & ज़्यादा बल खाने लगी होगी & उसके नीचे उसकी 36 इंच की गंद भी और मटकने लगी होगी.उसका चेहरा लाल हो रहा था.

"छ्चोड़ो बिल्ला उस्ताद.जाने दो.कही इस लौंडिया के चक्कर मे निकलने मे देर ना हो जाए."

"अबे,चुप!",बिल्ला की नज़रे तो उस लड़की की गंद से चिपकी ही हुई थी जोकि चलते हुए अपने मोबाइल के बटन्स दबाए जा रही थी,"..इसे तो साथ ले चलते हैं.रास्ता काटने मे आसानी होगी.गाड़ी लगा सामने,छोटू.",ड्राइवर ने वॅन को तिर्छि कर उस लड़की के सामने कर उसका रोका & बैठे-2 ही बिल्ला ने अपने बाए हाथ से लड़की की दाई बाँह उसकी कलाई के उपर पकड़ी.

उसके बाद जो हुआ उसने सभी गुणडो को हैरान कर दिया & वो कुच्छ पॅलो के लिए मानो जैसे बुत बन गये & यही कुच्छ पल उनकी मुसीबत का सबब बने.लड़की ने दाए हाथ को ज़रा सा घुमा के बिल्ला की बाई कलाई पकड़ी & उसे घुमा दिया.बिजली की फुर्ती से उसने अपना मोबाइल अपने कुर्ते की जेब मे डाला & बाए कंधे से बॅग को नीचे गिरा दिया.

बिल्ला ने अपना दाया हाथ बढ़ा के अपना बाया हाथ लड़की की गिरफ़्त से छुड़ाने की कोशिश करनी ही चाही थी कि लड़की के बाए हाथ का कराटे चॉप उसकी गर्दन की दाई तरफ पड़ा & जैसे उसे लकवा मार गया.लड़की ने अपनी बाई टांग को बिल्ला की सीट पे टीकाया & फिर उसी के सहारे बिल्ला का हाथ खींच उसे गाड़ी से नीचे गिरा दिया.

बिल्ला भी शातिर अपराधी था & अपनी हैरानी से बाहर भी आ चुका था.वो पीठ के बल सड़क पे लेटे ही अपनी बाई टांग को चला लड़की की टाँगो पे मार उसे नीचे गिराने की कोशिश की मगर लड़की होशियार थी,वो उसका वार बचाते हुए हवा मे उच्छली & अपना बाया घुटना मोड़ उसके सीने पे लॅंड कराया.

बिल्ला दर्द से छॅट्पाटा उठा.उसके बाकी साथी तब तक वॅन से उतर अपने कपड़ो मे च्छूपे हथ्यार बाहर निकाल के उसकी ओर आ चुके थे की तभी ना जाने कहा से 14-15 पोलिसेवाले वाहा आ गये & उन्हे घेर लिया.थोड़ी ही देर बाद सभी बदमाश पोलीस वॅन मे हथकड़ियो से बँधे बैठे थे.

"आहह....ये लड़की है कौन यार?",दर्द से कराहते बिल्ला ने वॅन के दरवाज़े पे ताला लगाते हवलदार से पुचछा.

"एसीपी दिव्या माथुर.",हवलदार मुस्कुराता हुआ वाहा से चला गया.

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दिव्या माथुर पोलीस की क्राइम ब्रांच की शायद सबसे तेज़-तर्रार अफ़सर थी.बचपन से ही दिव्या को खेल-कूद मे बड़ी दिलचस्पी थी.स्कूल & फिर कॉलेज की बॅडमिंटन,वॉलीबॉल & जाइमनॅसटिक्स टीम शायद ही कभी उसके बिना किसी मुक़ाबले मे हिस्सा लेती थी.कॉलेज पार करते-2 उसने ताए क्वान दो मे भी महारत हासिल कर ली थी & पोलीस ट्रैनिंग के दौरान करते के गुर भी उसने बहुत जल्दी सिख लिए थे.

खेल ने उसमे खुद्दारी & हौसले का जज़्बा भरा & जब सिविल सर्विस का इम्तिहान पास करने पे उसकी पसंद पुछि गयी तो उसने बेझिझक पुलिस सर्विस को चुना.मा-बाप समझाते रह गये कि अड्मिनिस्ट्रेटिव सर्विस चुन ले पर दिव्या खुद को 1 दफ़्तर मे दिन भर बैठे सोच के ही घबरा जाती थी.

ट्रैनिंग के बाद जब वो एसीपी दिव्या माथुर बनके डेवाले आई तो वाहा के आला अफसरो को भी इस नयी अफ़सर की काबिलियत पता चलने मे ज़्यादा वक़्त नही लगा & उन्होने फ़ौरन उसे वाहा की क्राइम ब्रांच मे पोस्ट कर दिया.कल सुबह ही जैसे ही दिव्या को मुखबिरो के हवाले से खबर मिली कि बिल्ला जिसने कुच्छ ही दिन पहले 1 सुपारी किल्लिंग की थी,कल रात शहर से भागने वाला है तो उसने उसे पकड़ने की प्लॅनिंग शुरू कर दी.उसके मातहत काम करने वाले इनस्पेक्टर्स जिनमे से कुच्छ उस से उम्र मे काफ़ी बड़े थे & उनका तजुर्बा भी उस से कही ज़्यादा था,उसे नकबंदी करने की सलाह दी मगर दिव्या ने उनकी बात नही मानी.

उसका कहना था कि बिल्ला तो नकबंदी की उमीद ही कर रहा होगा.क्यू ना कुच्छ ऐसा किया जाए जिसकी उसे बिल्कुल उमीद ना हो & फिर उसे पकड़ने मे आसानी हो.तभी दिव्या ने ये प्लान बनाया.इस प्लान मे अगर ज़रा भी गड़बड़ होती या उसकी टीम उसके मोबाइल के मेसेज मिलने के बाद वक़्त पे नही पहुँचती तो दिव्या की जान भी जा सकती थी मगर दिव्या ने इतने दीनो मे जो सबसे बड़ा सबक सीखा था वो ये की अगर उसने ख़तरे के डर से कदम पीछे खींचे तो मुजरिम आगे बढ़ जाएगा & वो उस से मुक़ाबला हार जाएगी & हार लफ्ज़ से उसे सख़्त नफ़रत थी.

"मेडम.",1 हवलदार ने उसे सलाम ठोंका.

"हूँ.",दिव्या ने 1 बार फाइल से नज़र उठाके उसे आराम से होने का इशारा किया & फिर वापस फाइल निपटाने लगी.पोलीस की नौकरी के बाद दिव्या ने 1 और सबक सीखा था की चाहे फ़ौजी बन सरहद पे क्यू ना तैनात हो जाओ,बिना काग़ज़ काले किए काम नही चलने वाला!

"आप जब दफ़्तर से बाहर थी तो डीसीपी साहब का मेसेज आया था इंटरकम पे कि शाम को 7 बजे आप उनके कॅबिन मे रिपोर्ट करें,उन्हे कल के एनकाउंटर के बारे मे आपसे रिपोर्ट लेनी है.",हवलदार ने सलाम ठोंका & कॅबिन से बाहर चला गया.

दिव्या हल्के से मुस्कुराइ & फाइल पूरी करती रही.

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 10:33

"एसीपी दिव्या माथुर रिपोर्टिंग,सर.",दिव्या ने डीसीपी प्रदीप वेर्मा को सलाम ठोंका तो उन्होने अपनी फाइल से सर उठाया & अपना पढ़ने का चश्मा उतारा.दिव्या ने इस वक़्त वर्दी पहनी हुई थी & अगर कोई उसे अभी देखता तो यही कहता कि वो असली पोलीस अफ़सर नही है बल्कि कोई अदाकारा है जो पोलीस वाली का रोल अदा कर रही है.दिव्या थी ही इतनी हसीन.खूबसूरत चेहरे पे सजी नाक बहुत हल्की सी उपर उठी थी & ऐसा लगता था मानो वो बहुत गुरूर वाली लड़की है.सच पुछिये तो उसे थोड़ा गुरूर था भी & होता क्यू नही!वो केवल खूबसूरत ही नही थी बल्कि उसका जिस्म भी बड़ा पूर्कशिष था.

5'8" कद की दिव्या की वर्दी की ढीली कमीज़ भी उसकी 38द साइज़ की छातियो के आकर को छुपाने मे नाकाम रहती थी.कुद्रत ने उसे थोड़ा भारी काठी से नवाज़ा था मगर रोज़ाना वरजीओश ने उसके जिस्म को बिल्कुल चुस्त रखा था & माँस की 1 भी फालतू परत उसके जिस्म पे नही दिखती थी.

"अट ईज़.",डीसीपी वेर्मा ने अपनी फाइल किनारे की & चश्मा डेस्क पे रख अपनी कुर्सी पे पीछे हो उसे देखने लगे.दिव्या ने मुस्कुराते हुए अपनी टोपी उतार कर डेस्क पे रखी & अपने बँधे बालो को खोल दिया.काले,घने बॉल उसकी कमर तक लहराने लगे.उसने अपनी बेल्ट खोली & उसे भी डेस्क पे रखा & आगे बढ़ सीधा डीसीपी वेर्मा की गोद मे जा बैठी.

कहानी पढ़ने वाले दोस्तो को लगेगा कि जिस लड़की को मैं अभी तक क़ानून की हिफ़ाज़त करने वाली,उसूलो वाली दिखा रहा था वो अपने सीनियर अफ़सर के साथ ऐसा कैसे कर रही है?क्या वो लड़की असल मे भ्रष्ट है या फिर वो अफ़सर उसे मजबूर कर रहा है?ऐसा कुच्छ भी नही है.जब तक दोनो 1 दूसरे की कमीज़ो के बटन्स से उलझे हैं मैं आपको असलियत बताता हू.

दिव्या 1 ज़िंदाडिल लड़की थी.उसे अपने हुस्न & क़ातिलाना जिस्म का एहसास तब हुआ जब वो 12वी क्लास मे थी & 1 लड़के ने उस से प्यार का इज़हार किया.दिव्या को भी वो लड़का अच्छा लगा & चंद मुलाक़ातो बाद जब उस लड़के ने उसके करीब आना चाहा तो उसने उसे मना नही किया.वो लड़का सच मे बहुत खुशनसीब था-आख़िर वो पहला शख्स था जिसने उसके भरे-2,गुलाबी & रसीले होंठो का स्वाद चखा था मगर वो लड़का उतना ही बदनसीब भी था क्यूकी चूमने के बाद उसने अपनी किस्मत कुच्छ ज़्यादा ही आज़माने की कोशिश की & दिव्या की चूचियो को दबा दिया जोकि उस वक़्त भी आम लड़कियो की चूचियो से काफ़ी बड़ी थी.जवाब मे दिव्या का घुटना उसकी टाँगो के बीच जा घुसा & वो लड़का दर्द से बिलबिलता वही गिर पड़ा.

कॉलेज मे भी उसके हुस्न के दीवानो की कमी नही थी मगर दिव्या की तेज़ी & हिम्मत से ज़्यादातर लड़के थोड़ा घबरा जाते थे लेकिन दिव्या के दिल मे भी अरमान थे & उसे भी ये जानना था कि आख़िर दो लोग अपने जिस्मो से कैसे वो मज़ा पाते हैं.कॉलेज के दौरान ही उसने 1 लड़के के साथ चुदाई की & 4-5 बार के बाद ही वो समझ गयी कि उसे ये खेल बहुत पसंद था मगर परेशानी ये थी कि उसका प्रेमी बिस्तर मे उसका मुक़ाबला नही कर पाता था.हर बार दिव्या को मज़ा तो आता मगर साथ ही ऐसा भी लगता मानो कुच्छ कमी रह गयी हो & जैसे अभी उसे उसका प्रेमी थोड़ी और खुशी पहुँचा सकता था.

उसे ये खुशी हासिल हुई पोलीस अकॅडमी के अपने 1 साथी के साथ.अजीत चौहान ने उसे चुदाई की उन बुलंदियो से वाकिफ़ कराया जिनके बारे मे दिव्या ने बस सोचा ही था.उसका 7.5 इंच के लंड की तो दिव्या दीवानी हो गयी थी.वो दिन शायद उसकी ज़िंदगी के सबसे हसीन दिन थे.अजीत 1 बहुत भला इंसान था & दिव्या को बहुत खुश रखता था मगर फिर उसने भी 1 ग़लती कर दी-उसने दिव्या से शादी की बात छेड़ दी.

दिव्या को आज तक शादी करने का कोई ठोस कारण नज़र नही आया था.वो 1 सफल लड़की थी जो अपने पैरो पे खड़ी थी,उसका मानना था कि वो अजीत के साथ ऐसे ही खुश है,शादी करके वो ये सब बिगाड़ना नही चाहती थी.अजीत उसे समझाता रह गया कि शादी के बाद दोनो हरदम साथ रहेंगे मगर दिव्या नही मानी.उसका कहना था कि अभी भी तो साथ हैं.दिव्या के मा-बाप ने भी दिव्या को समझाया कि अजीत जैसा भला लड़का दोबारा नही मिलेगा मगर उन्हे पता था की उनकी बेटी कितनी ज़िद्दी है & अगर उसने 1 बार ना कर दी है तो वो अपने फ़ैसले से हिलने वाली नही.

क्रमशः...........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 10:34

KHEL KHILADI KA paart--1

Sunsan sadak pe der raat vo ladki tez kadmo se badhi chali ja rahi thi.uske chust salwar kamiz,hath me pakde mobile & kandhe pe latke bag ko dekh ke saaf zahir tha ki vo paas ki kisi building ke daftar me kaam karti thi & aaj use vaha se nikalne me der ho gayi thi.

sadak itni sunsan thi ki 1 awara kutta bhi kahi dikhayi nahi de raha tha.tabhi ladki ke kano me peechhe se kisi vahan ke aane ki aavaz aayi.usne is umeed se gardan ghumayi ki koi taxi ya auto-rickshaw hoga magar vo to koi van thi.ladki fir se tezi se aage badhne lagi.

"mast maal hai,bachchu!",van uske karib aa gayi thi & bilkul dhimi ho uske sath chal rahi thi.ladki ne gardan ghumayi to van ka pichhla darwaza peechhe sarka paya.andar ki seat pe 1 lamba,bhari sharir ka shakhs baitha tha jiski dadhi badhi hui thi & tambaku se peele ho chuke dant uski chhichhori muskan ke chalte numaya the.uske sath pichhli seat pe 1 aadmi baitha tha & aage 2 aur log the.charo shakl se hi zarayam pesha lagte the.

ladki ne apni chal & tez kar di,"hai!gand to dekho sali ki!",us shakhs ne joki sabka sardar lagta tha fabti kasi to ladki aur ghabra gayi.use pata tha ki tez chal ke chalte uski 28 inch ki kamar & zyada bal khane lagi hogi & uske neeche uski 36 inch ki gand bhi aur matakne lagi hogi.uska chehra laal ho raha tha.

"chhodo Billa ustad.jane do.kahi is laundiya ke chakkar me nikalne me der na ho jaye."

"abe,chup!",billa ki nazre to us ladki ki gand se chipki hi hui thi joki chalte hue apne mobile ke buttons dabaye ja rahi thi,"..ise to sath le chalte hain.rasta kaatne me aasani hogi.gadi laga samne,chhotu.",driver ne van ko tirchhi kar us ladki ke samne kar uska roka & baithe-2 hi billa ne apne baye hath se ladki ki dayi banh uski kalayi ke upar pakdi.

uske baad jo hua usne sabhi gundo ko hairan kar diya & vo kuchh palo ke liye mano jaise but ban gaye & yehi kuchh pal unki musibat ka sabab bane.ladki ne daye hath ko zara sa ghuma ke billa ki bayi kalayi pakdi & use ghuma diya.bijli ki furti se usne apna mobile apne kurte ki jeb me dala & baye kandhe se bag ko neeche gira diya.

billa ne apna daya hath badha ke apna baya hath ladki ki giraft se chhudane ki koshish karni hi chahi thi ki ladki ke baye hath ka karate chop uski gardan ki dayi taraf pada & jaise use lakwa mar gaya.ladki ne apni bayi tang ko billa ki seat pe tikaya & fir usi ke sahare billa ka hath khinch use gadi se neeche gira diya.

billa bhi shatir apradhi tha & apni hairani se bahar bhi aa chuka tha.vo pith ke bal sadak pe lete hi apni bayi tang ko chala ladki ki tango pe maar use neeche girane ki koshish ki magar ladki hoshiyar thi,vo uska vaar bachate hue hawa me uchhli & apna baya ghutna mod uske seene pe land karaya.

billa dard se chhatpata utha.uske baki sathi tab tak van se utar apne kapdo me chhupe hathyar bahar nikal ke uski or aa chuke the ki tabhi na jane kaha se 14-15 policewale waha aa gaye & unhe gher liya.thodi hi der baad sabhi badmash police van me hathkadiyo se bandhe baithe the.

"aahhhh....ye ladki hai kaun yaar?",dard se karahte billa ne van ke darwaze pe tala lagate hawaldar se puchha.

"ACP Divya Mathur.",hawaldar muskurata hua vaha se chala gaya.

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divya mathur Devalay Police ki crime branch ki shayad sabse tez-tarrar afsar thi.bachpan se hi divya ko khel-kud me badi dilchaspi thi.school & fir college ki badminton,volleyball & gymnastics team shayad hi kabhi uske bina kisi mukable me hissa leti thi.college paar karte-2 usne tae kwan do me bhi maharat hasil kar li thi & police training ke dauran karate ke gur bhi usne bahut jaldi sikh liye the.

khel ne usme khuddari & hausle ka jazba bhara & jab civil service ka imtihan paas karne pe uski pasand puchhi gayi to usne bejhijhak poluice service ko chuna.maa-baap samajhate reh gaye ki administrative service chun le par divya khud ko 1 daftar me din bhar baithe soch ke hi ghabra jati thi.

training ke baad jab vo ACP bvan devalay aayi to vaha ke ala afsaro ko bhi is nayi afsar ki kabiliyat pata chalne me zyada waqt nahi laga & unhone fauran use vaha ki crime branch me post kar diya.kal subah hi jaise hi divya ko mukhbiro ke hawale se khabar mili ki billa jisne kuchh hi din pehle 1 supari killing ki thi,kal raat shahar se bhagne wala hai to usne use pakadne ki planning shuru kar di.uske mathat kaam karne vale inspectors jinme se kuchh us se umra me kafi bade the & unka tajurba bhi us se kahi zyada tha,use nakabandi karne ki salah di magar divya ne unki baat nahi mani.

uska kehna tha ki billa to nakabandi ki umeed hi kar raha hoga.kyu na kuchh aisa kiya jaye jiski use bilkul umeed na ho & fir use pakadne me asani ho.tabhi divya ne ye plan banaya.is plan me agar zara bhi gadbad hoti ya uski team uske mobile ke message milne ke baad waqt pe anhi pahunchti to divya ki jaan bhi ja sakti thi magar divya ne itne dino me jo sabse bada sabak seekha tha vo ye ki agar usne khatre ke daar se kadam peechhe khinche to mujrim aage badh jayega & vo us se muqabla haar jayegi & haar lafz se use sakht nafrat thi.

"madam.",1 hawaldar ne use salam thonka.

"hun.",divya ne 1 baar file se nazar uthake use aaram se hone ka ishara kiya & fir vapas file niptane lagi.police ki naukri ke baad divya ne 1 aur sabak seekha tha ki chahe fauji ban sarhad pe kyu na tainat ho jao,bina kagaz kale kiye kaam nahi chalne wala!

"aap jab daftar se bahar thi to DCP sahab ka message aaya tha intercom pe ki sham ko 7 baje aap unke cabin me report karen,unhe kal ke encounter ke bare me aapse report leni hai.",hawaldar ne salam thonka & cabin se bahar chala gaya.

divya halke se muskurayi & file puri karti rahi.

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"ACP Divya Mathur reporting,sir.",divya ne DCP Pradip Verma ko salam thonka to unhone apni file se sar uthaya & apna padhne ka chashma utara.divya ne is waqt vardi pehni hui thi & agar koi use abhi dekhta to yehi kehta ki vo asli police afsar nahi hai balki koi adakara hai jo policewali ka role ada kar rahi hai.divya thi hi itni hasin.khubsurat chehre pe saji naak bahut halki si upar uthi thi & aisa lagta tha mano vo bahut gurur wali ladki hai.sach puchhiye to use thoda gurur tha bhi & hota kyu nahi!vo kewal khubsurat hi nahi thi balki uska jism bhi bada purkashish tha.

5'8" kad ki divya ki vardi ki dhili kamiz bhi uski 38D size ki chhatiyo ka aakar ko chhupane me nakam rehti thi.kudrat ne use thoda bhari kathi se navaza tha magar rozana varjiosh ne uske jism ko bilkul chust rakha tha & mans ki 1 bhi faltu parat uske jism pe nahi dikhti thi.

"at ease.",DCP verma ne apni file kinare ki & chashma desk pe rakh apni kursi pe peechhe ho use dekhne lage.divya ne muskurate hue apni topi utar kar desk pe rakhi & apne bandhe balo ko khol diya.kale,ghane baal uski kamar tak lehrane lage.usne apni belt kholi & use bhi desk pe rakha & aage badh seedha DCP verma ki god me ja baithi.

padnevalo ko lagega ki jis ladki ko main abhi tak kanoon ki hifazat karne vali,usoolo valo dikha raha tha vo apne senior afsar ke sath aisa kaise kar rahi hai?kya vo ladki asal me bhrasht hai ya fir vo afsar use majboor kar raha hai?aisa kuchh bhi nahi hai.jab tak dono 1 dusre ki kamizo ke buttons se uljhe hain main aapko asliyat batata hu.

divya 1 zindadil ladki thi.use apne husn & qatilana jism ka ehsas tab hua jab vo 12vi class me thi & 1 ladke ne us se pyar ka izhar kiya.divya ko bhi vo ladka achha laga & chand mulakato baad jab us ladke ne uske karib aana chaha to usne use mana nahi kiya.vo ladka sach me bahut khushnasib tha-aakhir vo pehla shakhs tha jisne uske bhare-2,gulabi & rasile hotho ka swad chakha tha magar vo ladka utna hi badnasib bhi tha kyuki chumne ke baad usne apni kismat kuchh zyada hi aazmane ki koshish ki & divya ki chhatiyo ko daba diya joki us waqt bhi aam ladkiyo ki choochiyo se kafi badi thi.jawab me divya ka ghutna uski tango ke beech ja ghusa & vo ladka dard se bilbilata vahi gir pada.

college me bhi uske husn ke deewano ki kami nahi thi magar divya ki tezi & himmat se zyadatar ladke thoda ghabra jate the lekin divya ke dil me bhi arman the & use bhi ye jaanana tha ki aakhir do log apne jismo se kaise vo maza pate hain.college ke dauran hi usne 1 ladke ke sath chudai ki & 4-5 baar ke bad hi vo samajh gayi ki use ye khel bahut pasand tha magar pareshani ye thi ki uska premi bistar me uska muqabla nahi kar pata tha.har baar divya ko maza to aata magar sath hi aisa bhi lagta mano kuchh kami reh gayi ho & jaise abhi use uska premi thodi aur khushi pahuncha sakta tha.

use ye khushi hasil hui police academy ke apne 1 sathi ke sath.Ajit Chauhan ne use chudai ki un bulandiyo se wakif karaya jinke bare me divya ne bas socha hi tha.uska 7.5 inch ke lund ki to divya deewani ho gayi thi.vo din shayad uski zindagi ke sabse haseen din the.ajit 1 bahut bhala insan tha & divya ko bahut khush rakhta tha magar fir usne bhi 1 galti kar di-usne divya se shadi ki baat chhed di.

divya ko aaj tak shadi karne ka koi thos karan nazar nahi aya tha.vo 1 safal ladki thi jo apne pairo pe khadi thi,uska maanana tha ki vo ajit ke sath aise hi khush hai,shadi karke vo ye sab bigadna nahi chahti thi.ajit use asmjhata reh gaya ki shadi ke baad dono hardam sath rahenge magar divya nahi maani.uska kehna tha ki abhi bhi to sath hain.divya ke maa-baap ne bhi divya ko samjhaya ki ajit jaisa bhala ladka dobara nahi milega magar unhe pata tha ki unki beti kitni ziddi hai & agar usne 1 bar na kar di hai to vo apne faisle se hilne vali nahi.

kramashah...........