खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:57

खेल खिलाड़ी का पार्ट--49

गतान्क से आगे............-

"सारे शहर मे हमारे आदमी फैले हैं मगर अभी तक नही पता चला कि उस लड़के को कौन उठा ले गया है!",बल्लू ने गुस्से से बिस्तर पे मुक्का मारा.ये शायद उसकी अब तक की सबसे बड़ी नाकामयाबी थी & वो इस बात को हाज़ाम नही कर पा रहा था.

"साले,इतना परेशान क्यू होता है?",रानो ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया & उसके सीने को सहलाने लगी,"..अभी तो 1 दिन भी नही हुआ है.पता चल जाएगा.",रानो को भी उतना ही गुस्सा & खिज हो रही थी मगर वो जानती थी कि उसे जताने से इस वक़्त कोई फ़ायदा नही.वैसे भी उसके बाबा तो एमएलए बनाने ही वाले थे,अब लड़का चाहे जहा हो.

"तू समझ नही रही,रानो.उस लड़के का हमारे हाथो मे आना कितना ज़रूरी है.",उसने सीने पे फिरते रानो के हाथो को थाम के चूम लिया तो रानो सामने आ उसके दोनो तरफ बिस्तर पे घुटने जमा उसकी गोद मे बैठ गयी.बल्लू ने महसूस किया कि सलवार के पतले कपड़े के नीचे रानो ने पॅंटी नही पहनी है & इस एहसास से उसका लंड जागने लगा.

"तू फिर बकवास कर रहा है!",रानो ने उसके गाल पे चपत लगाई,"..बाबा एमएलए बन ही जाएँगे अब लड़का जाए भाड़ मे!"

"यही तो तू ग़लत सोच रही है.",बल्लू के हाथ रानो की कमीज़ मे घुस उसकी मखमली पीठ पे चलने लगे,"..जसजीत प्रधान का हारना बहुत ज़रूरी है,रानो नही तो बाबा का एमएलए बनाने का कोई फ़ायदा नही.जसजीत की सरकार बन गयी तो बाबा एमएलए बन के क्या उखाड़ लेंगे!",हाथ आगे ला उसने सलवार की डोर को ढीला किया & फिर पीछे ले जा रानो की गंद को मसल्ने लगा.

"मगर जसजीत तो अभी भी हारेगा?"

"और अगर बच्चा चुनाव से पहले मिल गया तो?..फिर तो जसजीत दोगुने हौसले के साथ प्रचार करेगा.लोगो की सहानुभूति भी उसके साथ होगी & फिर क्या होगा?",रानो ने खुद ही अपनी कमीज़ उपर कर अपनी चूचिया अपने आशिक़ के प्यासे होंठो से लगा दी थी,"..इसलिए बच्चा हमारे क़ब्ज़े मे होना बहुत ज़रूरी है.",बल्लू ने अपने मुँह से 1 पल को उसकी छाती मुँह से निकली & बात पूरी कर फिर से भर ली.

"तू फ़िक्र मत कर..बात मेरी समझ मे आ गयी है.अब कुच्छ और रास्ता भी सोचना ही पड़ेगा.",रानो ने आँखे बंद की & अपने परेशान आशिक़ को सुकून पहुचाने लगी.

सुबह हुई मगर अंजलि की ज़िंदगी मे तो अभी भी रात चल रही थी.अब तो आँसू भी सुख गये थे मगर दिल का दर्द था की कम ही नही हो रहा था.जसजीत ने उसे बताया कि अनीश को छुड़ाने के लिए क्या-2 कोशिशें की जा रही हैं लेकिन उस बेचारी को तो तभी चैन मिलता जब उसके जिगर का टुकड़ा उसकी आँखो के सामने होता.कल रात से उसने अपने दूसरे बेटे अंकुर को 1 पल के लिए भी खुद से जुदा नही किया था.

"मिस्टर.प्रधान,आप समझ ही सकते हैं कि उन्हे बहुत गहरा सदमा पहुँचा है,उपर से वो खुद को दोषी मान रही हैं..",साइकिट्रिस्ट ड्र.माल जसजीत को समझा रहे थे,"..मैं हर रोज़ उनसे मिलूँगा.ज़रूरत पड़ी तो दिन भर यही रहूँगा मगर 1 बात को प्लीज़ समझिए,ऐसे हाल मे प्रोग्रेस बहुत धीरे होती है.मेरी आपसे रिक्वेस्ट है कि प्लीज़,आप उनके सामने अपना हौसला मत खोइएगा."

"आप बेफ़िक्र रहें,डॉक्टर.",ड्र.माल शहर के जाने-माने साइकिट्रिस्ट थे & इंसानी दिमाग़ के सोचने के तरीके को बड़ी गहराई से समझते थे.वो जानते थे कि प्रधान को भी उनकी मदद की ज़रूरत थी मगर प्रधान जैसे नेता का अहम उसे ये मानने को तैय्यार नही होने देगा सो वो बस बातचीत के ज़रिए प्रधान के दिल की थाह ले उसे भी समझा रहे थे.

"अरे,कहा चली गयी थी सुबह-2?",मुकुल ने नीना को घर मे दाखिल होते देखा तो पुचछा.वो थोड़ी दूरी पे खड़ा अपने भाई & डॉक्टर को बाते करता देख रहा था.

"जॉगिंग.",नीना उसके करीब आई,"..मैने नौकरो को नाश्ते मे कुच्छ हल्का बनाने के लिए कह दिया है.ज़रा अपने भाय्या से बोल के अंकुर को तो भाभी के पास से ले आओ.वो बच्चा है,उसपे भी तो इन सब बातो का असर पड़ेगा.",मुकुल की हैरानी का ठिकाना ही नही था..नीना को उसके भाई-भाभी-भतीजे की परवाह हो रही थी,"..अब ऐसे क्या देख रहे हो?..बोलो ना!..ओफ्फो..अब मैं ही बात करती हू.",नीना आगे बढ़ी फिर जैसे कुच्छ याद आया तो घूमी,"..& सुनो मैं नाश्ते के बाद ज़रा बाहर जाऊंगी..कुच्छ काम है..लंच तक वापस आ जाऊंगी."

"ओके.",मुकुल को बहुत खुशी हुई थी.वो नीना को अपने भाई & डॉक्टर से बाते करते देख रहा था.उस बेचारे को अगर ये पता होता कि उसकी बीवी किस लिए दिन मे जाने वाली है तो शायद उसके जज़्बात बिल्कुल उलट होते.

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"बलदेव,मैं तो अपने सारे आदमियो का इस्तेमाल कर रहा हू लेकिन..",भाय्या जी कान से मोबाइल लगाए अपने सरकारी बंगल के बेडरूम मे खड़े थे.उन्होने दीवार घड़ी की ओर देखा,11 बजने ही वाले थे & नीना अब आने ही वाली थी.चुनाव के चलते उन्हे सांस लेने की भी फ़ुर्सत नही थी मगर नीना के हुस्न ने उन्हे मजबूर कर दिया था कि वो आज अपने सारे कामो को टाल दें.

"लेकिन क्या रघु?"

"बलदेव,मेरे पोलीस मे कयि सोर्सस हैं मगर ये मामला बहुत ज़्यादा नाज़ुक है.अब अगर उन्हे लगा कि मैं इस मामले मे कुच्छ ज़्यादा दिलचस्पी ले रहा हू तो कही उन्हे शक़ ना हो जाए."

"तो तुम चाहते हो कि पोलीस को जो भी पता चले वो जानकारी मैं तुम तक पहुँचा दू?"

"मान गये,बलदेव.",रघु कुम्भात हंसा,"..तुम्हारा दिमाग़ तो दिन बा दिन & पैना हो रहा है."

"तुमसे ज़्यादा नही रघु.",भाय्या जी भी हँसे,"..फ़िक्र मत करो,तुम्हे पोलीस की हर बात की खबर मिलती रहेगी.",उन्होने फोन काट दिया.

"साहब,ये मेम्साब आई हैं.",1 नौकर ने उसे नीना का कार्ड दिया.

"उन्हे अंदर भेजो.",नौकरो को सख़्त ताकीद थी कि कोई भी उन्हे डिस्टर्ब ना करे.

"हेलो,बलदेव जी.",नीना कमरे मे आई तो भाय्या जी की जैसे सांस ही अटक गयी.नीना ने 1 लाल & काले प्रिंट्स की सारी पहनी थी जिसके झीने आँचल से उसके स्लीव्ले ब्लाउस मे से झाँकट हल्का सा क्लीवेज दिख रहा था.झीनी सारी मे से उसका गोरा पेट & गहरी नाभि भी झलक रहे थे.वो बहुत सोच-समझ के ऐसे तैय्यार हुई थी ताकि 1 तरफ तो भाय्या जी उसके हुस्न का अच्छे से दीदार कर पाएँ मगर दूसरी ओर उन्हे ये ना लगे की नीना उनकी बाहो मे गिरने को तैय्यार है.

"हेलो,नीना जी.",आगे बढ़ उन्होने उसका नाज़ुक हाथ थाम के दबा दिया & उसकी आँखो मे झाँका,"..आइए बैठिए.",नीना कमरे मे लगे सोफे पे बैठ गयी.उसने गौर किया कि भैया जी ने उसे सीधा अपने बेडरूम मे मिलने को बुलाया है यानी की उनके इरादे बिल्कुल भी नेक नही थे.

"बताइए,बलदेव जी.कैसे मदद कर सकते हैं आप हमारी?"

"देखिए,नीना जी.मुझे बस इतना करना है कि मैं बद्डल से 1 कमज़ोर उम्मीदवार खड़ा कर दू फिर मुकुल जी जीत जाएँगे.उसके बाद यहा विधान सभा मे जो अलग-2 कोँमिटीस बनती हैं,उनमे उन्हे शामिल करना तो मेरे लिए कोई बड़ी बात नही मगर.."

"मगर क्या ?",भाय्या जी सोफे पे उसके साथ ही बैठे थे & नीना ने भी मौका पाते अपना दाया हाथ उनकी बाई जाँघ पे रख दिया.भाय्या जी का जिस्म उस एहसास से सुलगने लगा.

"मगर नीना जी..",उन्होने अपना बाया हाथ उसके हाथ के उपर रखा,"..इसके लिए मुझे अपने पार्टी वर्कर्स की नाराज़गी झेलनी पड़ेगी."

"तो आप ये काम नही करेंगे?",नीना बनावटी मायूसी से बोली & इसके असर से भाय्या जी अछूते नही रहे.मुसीबत मे फँसी लड़की को देख मर्द ना केवल उसकी मदद करना चाहता है बल्कि उसके जिस्म मे इस बात से जोश भी भर जाता है.ऐसा ही भाय्या जी के साथ भी हुआ.

"मैना ऐसा तो नही कहा.",भैया जी ने अपना हाथ नीना के हाथ से उठाया & उसकी पीठ पे रख दिया.ब्लाउस का बॅक भी गहरा था & उनका हाथ नीना की नंगी पीठ से लगा तो उस पल दोनो के ही जिस्मो मे हरारत पैदा हो गयी,"..मैं तो बस इतना कह रहा था..",भैया जी जानते थे कि ये बहुत नाज़ुक मोड़ है.अभी तक तो ऐसा लग रहा था कि नीना उनकी बात मान जाएगी मगर कही ऐसा नही हुआ तो बहुत फ़ज़ीहत भी हो सकती थी,"..कि नीना जी मैं इसके बदले मे कुच्छ चाहता हू."

"क्या बलदेव जी?",नीना ने हाथ बहुत हल्के से उनकी जाँघ पे दबाया.

"कि आप हमसे इसी तरह कभी-कभार मिल लिया करें.",नीना खामोश हो गयी & अपना हाथ उनकी जाँघ से खिच लिया.भैया जी को लगा की सब चौपट हो गया जबकि ये सब नीना की चाल का हिस्सा था.उसे बहुत मज़ा आ रहा था वो भैया जी जैसे ताक़तवर इंसान को अपनी उंगली पे नचा रही थी.

"क्या हुआ नीनाज़ी?मेरी बात अच्छी नही लगी आपको?",भैया जी उस से और सॅट गये.

"बलदेव जी..",नीना उठ गयी & थोड़ी दूर पे उनकी ओर पीठ कर खड़ी हो गयी,"..मुझसे मिलके क्या फ़ायदा होगा आपको?",नीना घबराने का नाटक कर रही थी.

"मैं 1 तन्हा इंसान हू,नीना जी.आज आपसे मिला तो लगा जैसे आप मेरी तन्हाई दूर करने मे मददगार साबित हो सकती हैं.",वो उसके पीछे आ गये & उसके कंधो पे अपने हाथ रख दिए,"..मैं तो बस ये चाहता हू कि जब भी कभी फ़ुर्सत हो & आपकी मर्ज़ी तो हम दोनो कुच्छ वक़्त साथ गुज़ार लें.अब अगर मैं ही आपको पसंद नही तो.."

"नही-2 ऐसी बात नही है.",नीना घूमी & अपना हाथ उनके होंठो पे रख दिया & फिर शर्मा के ऐसे खींच लिया जैसे उस से अंजाने मे ये हो गया हो,"..आप तो बहुत ही अच्छे इंसान हैं & दिलचस्प भी.",वो हल्के से मुस्कुराइ & मगर अगले पल फिर परेशान सूरत बनाके फिर से घूम गयी,"..लेकिन मैं 1 औरत हू,बलदेव जी.दुनिया तो नही समझेगी ना हमारी दोस्ती को.अगर कल को किसी को भनक लग गयी तो मेरा क्या होगा?",भैया जी की खुशी का ठिकाना नही था.नीना को पता चल जाने का डर था,उनसे मिलने पे ऐतराज़ नही!अब वक़्त आ गया था उनके अगले कदम का.

"आप उसकी फ़िक्र मत कीजिए.मेरे होते आप पे कभी कोई उंगली नही उठेगी.",उसने नीना के कंधे पकड़े & उसे अपनी ओर घुमाया,"..बस इतना बोलिए की आपको मेरी दोस्ती कबूल है?",उन्होने उसके कंधे पकड़ के बेचैनी से कहा.

"हाँ.",नीना अगर फ़िल्मो मे चली जाती तो वाहा राज कर रही होती.सर बाई तरफ घुमा,शर्म से नज़रें नीची कर बहुत धीरे से उसने हा कहा तो भैया जी ने उसे खींच के अपने सीने से लगा लिया.

"बलदेव जी..प्लीज़.",नीना छूटने के लिए कसमसाने लगी तो बलदेव जी उसके चेहरे को चूमने लगे.उनकी खुद समझ मे नही आ रहा था कि उनके जैसा धीरज वाला इंसान इस औरत के लिए ऐसे क्यू पागल हो रहा था.नीना के चेहरे को उन्होने अपनी किस्सस से ढँक दिया & फिर उसे बाहो मे भर अपने सीने से लगा लिया.

"बलदेव जी..",नीना ने उनके सीने से सर उठाके अपने हाथ वाहा पे लगा दिए मानो उन्हे अलग करना चाहती हो,"..प्लीज़ मुझे डर लग रहा है.",नीना मर्दो की फ़ितरत से अच्छी तरह वाकिफ़ थी.उसे पता था कि उसकी ऐसी च्छुई-मुई वाली हरकतें आग मे घी का काम करेंगी.

"हमारे होते हुए डर कैसा!",उन्होने बाए हाथ से नीना की पतली कमर को कसा & दाए से उसके चेहरे को पकड़ उसके होंठो से अपने होंठ लगा दिए.कुच्छ पॅलो तक उसके गुलाबी होंठो को चूमने के बाद उन्होने अपनी ज़ुबान उनपे फिराई तो नीना फिर से छूटने को च्चटपटाने लगी मगर भैया जी उसे जकड़े हुए उसके होंठो से खेलते रहे.वो कोशिश कर रहे थे कि नीना अपने होंठ खोले ताकि वो अपनी ज़ुबान से उसके मुँह का स्वाद चख सकें मगर नीना ने अपने होंठ बंद कर रखे थे.वो 1 पल को भी उन्हे ये एहसास नही होने देना चाहती थी कि वो भी उनसे चुदने को पागल हो रही थी.जब से भैया जी का मोटा लंड उसके पेट से सटा था तब से उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ना शुरू कर दिया था.

भैया जी ने देखा कि नीना अपने होंठ नही खोल रही है तो उनका ध्यान उसके बाकी जिस्म की ओर गया.उन्होने दाया हाथ नीचे नीना के बाए कंधे पे किया & उसके पल्लू को वाहा से सरका दिया फिर उसके होंठो को छ्चोड़ नीचे उसके क्लीवेज को चूमने लगे.

"उन्न....!",नीना ने उन्हे धकेला & उनसे दूर हो अपने हाथो से अपने सीने को ढँके उनकी ओर पीठ कर खड़ी हो गयी.उसका पल्लू अब नीचे ज़मीन पे गिरा था.भाय्या जी की तरफ अब उसकी लगभग नंगी पीठ & कमर थी.उन्होने मुस्कुराते हुए अपना कुर्ता उतारा & अपने सीने को सहलाते नीना के पीछे आ खड़े हुए.वो अपने पंजो पे बैठ गये & नीना की मांसल कमर की बगलो को पकड़ उसकी पीठ चूमने लगे.

"उम्म...आह...छ्चोड़िए..ना....उन्न..प्लीज़...!",नीना की मादक आवाज़ें उनके जोश को बढ़ाए जा रही थी.उन्होने उसकी कमर को बाँहो मे जकड़ा & सामने होते हुए उसके चिकने पेट को चूमने लगे.नीना अब हवा मे उड़ रही थी मगर अभी भी उसका नाटक जारी था.वो भैया जी के बालो को पकड़ उनके सर को अपने पेट से अलग करने की कोशिश करने लगी मगर वो अब कहा मानने वाले थे.उनकी ज़ुबान ने उसके मखमली पेट को तर कर दिया & फिर उसकी नाभि की थाह लेने लगी.नीना की चूत मे तो इस से प्यारी सी कसक हो रही थी & रोम-2 खुशी से नाच रहा था.राज्य का इतना बड़ा नेता उसके सामने घुटनो पे बैठा उसके हुस्न की पूजा कर रहा था!कौन लड़की ऐसी बात से मस्त ना हो जाती!

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--49

gataank se aage............-

"sare shehar me humare aadmi faile hain magar abhi tak nahi pata chala ki us ladke ko akun utha le gaya hai!",Ballu ne gusse se bistar pe mukka mara.ye shayad uski ab tak ki sabse badi nakamyabi thi & vo is baat ko hazam nahi kar pa raha tha.

"sale,itna pareshan kyu hota hai?",Rano ne use peechhe se baaho me bhar liya & uske seene ko sehlane lagi,"..abhi to 1 din bhi nahi hua hai.pata chal jayega.",rano ko bhi utna hi gussa & khij ho rahi thi magar vo janti thi ki use jatane se is waqt koi fayda nahi.vaise bhi uske Baba to MLA banane hi wale the,ab ladka chahe jaha ho.

"tu samajh nahi rahi,rano.us ladke ka huamre hatho me aana kitna zaruri hai.",usne seene pe firte rano ke hatho ko tham ke chum liya to rano samne aa uske dono taraf bistar pe ghutne jama uski god me baith gayi.ballu ne mehsus kiya ki salwar ke patle kapde ke neeche rano ne panty nahi pehni hai & is ehsas se uska lund jagne laga.

"tu fir bakwas kar raha hai!",rano ne uske gaal pe chapat lagayi,"..baba MLA ban hi jayenge ab ladka jaye bhad me!"

"yehi to tu galat soch rahi hai.",ballu ke hath rano ki kamiz me ghus uski makhmali pith pe chalne lage,"..Jasjit Pradhan ka harna bahut zaruri hai,rano nahi to baba ka MLA banane ka koi fayda nahi.jasjit ki sarkar ban gayi to baba MLA ban ke kya ukhad lenge!",hath aage la usne salwar ki dor ko dhila kiya & fir peechhe le ja rano ki gand ko masalne laga.

"magar jasjit to abhi bhi harega?"

"aur agar bachcha chunav se pehle mil gaya to?..fir to jasjit dogune hausle ke sath prachar karega.logo ki sahanubhuti bhi uske sath hogi & fir kya hoga?",rano ne khud hi apni kamiz upar kar apni chhatiya apne aashiq ke pyase hotho se laga di thi,"..isliye bachcha humare kabze me hona bahut zaruri hai.",ballu ne apne munh se 1 pal ko uski chhati munh se nikali & baat puri kar fir se bhar li.

"tu fikr mat kar..baat meri samajh me aa gayi hai.ab kuchh aur rasta bhi scohna hi padega.",rano ne aankhe band ki & apne pareshan aashiq ko sukun pahuchane lagi.

Subah hui magar Anjali ki zindagi me to abhi bhi rat chal rahi thi.ab to ansu bhi sukh gaye the magar dil ka dard tha ki kam hi nahi ho raha tha.Jasjit ne use bataya ki Anish ko chhudane ke liye kya-2 koshishen ki ja rahi hain lekin us bechari ko to tabhi chain milta jab uske jigar ka tukda uski ankho ke samne hota.kal raat se usne apne dusre bete Ankur ko 1 pal ke liye bhi khud se juda nahi kiya tha.

"Mr.Pradhan,aap samajh hi sakte hain ki unhe bahut gehra sadma pahuncha hai,upar se vo khud ko doshi maan rahi hain..",psychiatrist Dr.Mall jasjit ko samjha rahe the,"..main har roz unse milunga.zarurat padi to din bhar yehi rahunga magar 1 bat ko please samajhiye,aise haal me progress bahut dhire hoti hai.meri aapse request hai ki please,ap unke samne apna hausla mat khoiyega."

"aap befikr rahen,doctor.",dr.mall shehar ke jane-mane psychiatrist the & insani dimagh ke sochne ke tarike ko badi gehrayi se samajhte the.vo jante the ki pradhan ko bhi unki madad ki zarurat thi magar pradhan jaise neta ka aham use ye manane ko taiyyar nahi hone dega so vo bas batchit ke zariye pradhan ke dil ki thah le use bhi samjha rahe the.

"are,kaha chali gayi thi subah-2?",Mukul ne Nina ko ghar me dakhil hote dekha to puchha.vo thodi dori pe khada apne bhai & doctor ko bate karta dekh raha tha.

"jogging.",nina uske karib aayi,"..maine naukro ko nashte me kuchh halka banane ke liye keh diya hai.zara apne bhaiyya se bol ke ankur ko to bhabhi ke paas se le ao.vo bachcha hai,uspe bhi to in sab bato ka asar padega.",mukul ki hairani ka thikana hi nahi tha..nina ko uske bhai-bhabhi-bhatije ki parvah ho rahi thi,"..ab aise kya dekh rahe ho?..bolo na!..offoh..ab main hi bat karti hu.",nina age badhi fir jaise kuchh yaad aya to ghumi,"..& suno main nashte ke bad zara bahar jaoongi..kuchh kam hai..lunch tak vapas aa jaoongi."

"ok.",mukul ko bahut khushi hui thi.vo nina ko apne bhai & doctor se bate karte dekh raha tha.us bechare ko agar ye pata hota ki uski biwi kis liye din me jane wali hai to shayad uske jazbat bilkul ulat hote.

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"Baldev,main to apne sare aadmiyo ka istemal kar raha hu lekin..",Bhaiyya ji kan se mobile lagaye apne sarkari bungle ke bedroom me khade the.unhone deewar ghadi ki or dekha,11 bajne hi vale the & nina ab aane hi vali thi.chunav ke chalte unhe sans lene ki bhi fursat nahi thi magar nina ke husn ne unhe majboor kar diya tha ki vo aaj apne sare kaamo ko tal den.

"lekin kya Raghu?"

"baldev,mere police me kayi sources hain magar ye mamla bahut zyada nazuk hai.ab agar unhe laga ki main is mamle me kuchh zyada dilchaspi le raha hu to kahi unhe shaq na ho jaye."

"to tum chahte ho ki police ko jo bhi pata chale vo jankari main tum tak pahuncha du?"

"maan gaye,baldev.",Raghu Kumbhat hansa,"..tumhara dimagh to din ba din & paina ho raha hai."

"tumse zyada nahi raghu.",bhaiyya ji bhi hanse,"..fikr mat karo,tumhe police ki har bat ki khabar milti rahegi.",unhone fone kat diya.

"sahab,ye memsaab aayi hain.",1 naukar ne use nina ka card diya.

"unhe andar bhejo.",naukro ko sakht takeed thi ki koi bhi unhe disturb na kare.

"hello,baldev ji.",nina kamre me ayi to bhaiyya ji ki jaise sans hi atak gayi.nina ne 1 laal & kale prints ki sari pehni thi jiske jhine aanchal se uske sleeveless blouse me se jhankat halka sa cleavage dikh raha tha.jhini sari me se uska gora pet & gehri nabhi bhi jhalak rahe the.vo bahut soch-samajh ke aise taiyyar hui thi taki 1 taraf to bhaiyya ji uske husn ka achhe se deedar kar payen magar dusri or unhe ye na lage ki nina unki baho me girne ko taiyyar hai.

"hello,nina ji.",aage badh unhone uska nazuk hath tham ke daba diya & uski ankho me jhanka,"..aaiye baithiye.",nina kamre me lage sofe pe baith gayi.usne gaur kiya ki bhaiya ji ne use seedha apne bedroom me milne ko bulaya hai yani ki unke irade bilkul bhi nek nahi the.

"bataiye,baldev ji.kaise madad kar sakte hain aap humari?"

"dekhiye,nina ji.mujhe bas itna karna hai ki main Baddal se 1 kamzor umeedvar khada kar du fir mukul ji jeet jayenge.uske bad yaha vidhan sabha me jo alag-2 commitees banti hain,unme unhe shamil karna to mere liye koi badi bat nahi magar.."

"magar kya ?",bhaiyya ji sofe pe uske sath hi baithe the & nina ne bhi mauka pate apna daya hath unki bayi jangh pe rakh diya.bhaiyya ji ka jism us ehsas se sulagne laga.

"magar nina ji..",unhone apna baya hath uske hath ke upar rakha,"..iske liye mujhe apne party workers ki narazgi jhelni padegi."

"to aap ye kaam nahi karenge?",nina banawati mayusi se boli & iske asar se bhaiyya ji achhute nahi rahe.musibat me phansi ladki ko dekh mard na keval uski madad karna chahta hai balki uske jism me is baat se josh bhi bhar jata hai.aisa hi bhaiyya ji ke sath bhi hua.

"maina aisa to nahi kaha.",bhaiya ji ne apna hath nina ke hath se uthaya & uski pith pe rakh diya.blouse ka back bhi gehra tha & unka hath nina ki nangi pith se laga to us pal dono ke hi jismo me hararat paida ho gayi,"..main to bas itna keh raha tha..",bhaiya ji jante the ki ye bahut nazuk mod hai.abhi tak to aisa lag raha tha ki nina unki baat man jayegi magar kahi aisa nahi hua to bahut fajihat bhi ho sakti thi,"..ki nina ji main iske badle me kuchh chahta hu."

"kya baldev ji?",nina ne hath bahuty halke se unki jangh pe dabaya.

"ki aap humse isi tarah kabhi-kabhar mil liya karen.",nina khamosh ho gayi & apna hath unki jangh se khicnh liya.bhaiya ji ko laga ki sab chaupat ho gaya jabki ye sab nina ki chal ka hissa tha.use bahut maza a raha tha vo bhaiya ji jaise taqatwar insan ko apni ungli pe nacha rahi thi.

"kya hua ninaji?meri bat achhai nahi lagi aapko?",bhaiya ji us se aur sat gaye.

"baldev ji..",nina uth gayi & thodi dur pe unki or pith kar khadi ho gayi,"..mujhse milke kya fayda hoga apko?",nina ghabrane ka natak kar rahi thi.

"main 1 tanha insan hu,nina ji.aj apse mila to laga jaise aap meri tanhai door karne me madadgar sabit ho sakti hain.",vo uske peechhe a gaye & uske kandho pe apne hath rakh diye,"..main to bas ye chahta hu ki jab bhi kabhi fursat ho & apki marzi to hum dono kuchh waqt sath guzar len.ab agar main hi aapko pasand nahi to.."

"nahi-2 aisi baat nahi hai.",nina ghumi & apna hath unke hotho pe rakh diya & fir sharma ke aise khinch liya jaise us se anjane me ye ho gaya ho,"..aap to bahut hi achhe insan hain & dilchasp bhi.",vo halke se muskurayi & magar agle pal fir pareshan surat banake fir se ghum gayi,"..lekin main 1 aurat hu,baldev ji.duniya to nahi samjhegi na humari dosti ko.agar kal ko kisi ko bhanak lag gayi to mera kya hoga?",bhaiya ji ki khushi ka thikana nahi tha.nina ko pata chal jane ka darr tha,unse milne pe aitraz nahi!ab waqt a gaya tha unke agle kadam ka.

"aap uski fikr mat kijiye.mere hote aap pe kabhi koi ungli nahi uthegi.",usne nina ke kandhe pakde & use pani or ghumaya,"..bas itna boliye ki apko meri dosti kabul hai?",unhone uske kandhe pakad ke bechaini se kaha.

"han.",nina agar filmo me chali jati to vaha raj kar rahi hoti.sar bayi taraf ghuma,sharm se nazren neechi kar bahut dhire se usne haa kaha to bhaiya ji ne use khinch ke apne seene se laga liya.

"baldev ji..please.",nina chhutne ke liye kasmasane lagi to baldev ji uske chehre ko chumne lage.unki khud samajh me nahi a raha tha ki unke jaisa dhiraj vala insan is aurat ke liye aise kyu pagal ho raha tha.nina ke chehre ko unhone apni kisses se dhank diya & fir use baaho me bhar apne seene se laga liya.

"baldev ji..",nina ne unke seene se sar uthake apne hath vaha pe laga diye mano unhe alag karna chahti ho,"..please mujhe darr lag raha hai.",nina mardo ki fitrat se achhi tarah vakif thi.use pata tha ki uski aisi chhui-mui vali harkaten aag me ghee ka kam karengi.

"humare hote hue darr kaisa!",unhone baye hath se nina ki patli kamar ko kasa & daye se uske chehre ko pakad uske hotho se apne honth laha diye.kuchh palo tak uske gulabi hotho ko chumne ke baad unhone apni zuban unpe firayi to nina fir se chhutne ko chhatpatane lagi magar bhaiya ji use jakde hue uske hotho se khelte rahe.vo koshish kar rahe the ki nina apne honth khole taki vo apni zuban se uske munh ka swad chakh saken magar nina ne apne honth band kar rakhe the.vo 1 pal ko bhi unhe ye ehsas nahi hone dena chahti thi ki vo bhi unse chudne ko pagal ho rahi thi.jab se bhaiya ji ka mota lund uske pet se sata tha tab se uski chut ne pani chhodna shuru kar diya tha.

bhaiya ji ne dekha ki nina apne honth nahi khol rahi hai to unka dhyan uske baki jism ki or gaya.unhone daya hath neeche nina ke baye kandhe pe kiya & uske pallu ko vaha se sarka diya fir uske hotho ko chhod neeche uske cleavage ko chumne lage.

"unn....!",nina ne unhe dhakela & unse door ho apne hatho se apne seene ko dhanke unki or pith kar khadi ho gayi.uska pallu ab neeche zamin pe gira tha.bhaiyya ji ki taraf ab uski lagbhag nangi pith & kamar the.unhone muskurate hue apna kurta utara & apne seene ko sehlate nina ke peechhe a khade hue.vo apne panjo pe baith gaye & nina ki mansal kamar ki baglo ko pakad uski pith chumne lage.

"umm...ahhh...chhodiye..naa....unn..please...!",nina ki madak aavazen unke josh ko badahye ja rahi thi.unhone uski kamar ko baho me jakda & samne hote hue uske chikne pet ko chumne lage.nina ab hawa me ud rahi thi magar abhi bhi uska natak jari tha.vo bhaiya ji ke balo ko pakad unke sar ko apne pet se laga karne ki koshish karne lagi magar vo ab kaha manane vale the.unki zuban ne uske makhmali pet ko tar kar diya & fir uski nabhi ki thah lene lagi.nina ki chut me to asb pyari si kasak ho rahi thi & rom-2 khushi se nach raha tha.rajya ka itna bada neta uske samne ghutno pe baitha uske husn ki puja kar raha tha!kaun ladki aisi bat se mast na ho jati!

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:59

खेल खिलाड़ी का पार्ट--50

गतान्क से आगे............-

उसकी नाभि चाटते हुए भैया जी का दाया हाथ आगे आया & उसकी कमर मे खोंसि सारी को खिच दिया,"ओवव..ये क्या कर रहे हैं!..नहीइ....",वो झुक के उन्हे रोकने लगी मगर भैया जी उसकी नाभि को चाटते रहे & उसकी सारी को उसके जिस्म से अलग करते रहे.भैया जी सारी उतरने के बाद पेटिकोट के उपर से ही उसकी कसी गंद को दबाते हुए उसके पेट को चूमते रहे.नीना का अब मस्ती से बुरा हाल था.उसकी चूत अब और बर्दाश्त करने की हालत मे नही थी & वो जानती थी कि अब वो बस झड़ने ही वाली है.उसकी टाँगो मे जैसे जान ही नही थी & जैसे ही भैया जी की ज़ुबान ने 1 बार फिर उसकी नाभि को चॅटा उसने बहुत ज़ोर की आह भरी & गिरने लगी.

भैया जी फ़ौरन खड़े हुए & उसे बाँहो मे संभाल लिया & उसके दिलकश चेहरे को चूमने लगे.मदहोश नीना ने अपने हाथ उनके नंगे सीने पे जमा दिए मानो अभी भी वो पूरी तरह से तैय्यार ना हो जबकि सच्चाई ये थी कि भैया जी के बालो भरे चौड़े सीने को देख वो खुशी से पागल हो गयी थी & उसका दिल कर रहा था कि अपनी ज़ुबान से उनके निपल्स को चूसे & पेट पे सटे उनके पाजामे मे क़ैद लंड को दबोच ले.भैया जी के होठ उसके गालो से होते हुए उसके लबो पे आए & इस बार उसकी मस्ती का फ़ायदा उठाके उन्होने उसके नर्म लबो के पार अपनी जीभ घुसा ही दी & उसकी ज़ुबान से लड़ा ही दी.जब नीना ने उनकी ज़ुबान अपनी ज़ुबान पे महसूस की तो पहले तो उसने कुच्छ नही किया मगर थोड़ी देर बाद वो उनका साथ देने लगी लेकिन जैसे ही किस की शिदत बढ़ी उसने किस तोड़ दी & उन्हे परे धकेलने लगी मानो ये जता रही को वो इतनी मस्ती बर्दाश्त नही कर पा रही है.

इस बार भैया जी ने अपना बाया हाथ उसकी पीठ के गिर्द बाँधा & दाए को उसकी मोटी गंद के नीचे लगाते हुए उसकी दाई जाँघ को पकड़ते हुए उसे गोद मे उठा लिया & उसके होंठो को चूमते हुए उसे 4 पोस्टर बेड पे ले गये.बिस्तर पे लेटते ही उसके मुड़े घुटनो के कारण नीना का पेटिकोट घुटनो के उपर से ढालाक गया & उसकी जाँघो का हिस्सा नुमाया हो गया.उसकी तेज़ सांसो से उपर-नीचे होता उसका सीना भैया जी की भी धड़कने बढ़ा रहा था.

वो बिस्तर पे चढ़ गये & उसके नंगे घुटने पे हाथ रख उसे उसकी जाँघ पे चलाते हुए उसके पेटिकोट को उसकी कमर तक ले जाने लगे.नीना का हाथ उनके हाथो पे आ लगा & उन्हे रोकने की कोशिश करने लगा.भैया जी ने उसकी आँखो मे अपनी आँखे डाल दी & अपने हाथ को आगे बढ़ाते रहे.नीना की आँखो मे मस्ती & घबराहट का वो अनूठा मिलन था जोकि मर्दो को पागल कर देता है & भैया जी की आँखो मे बस वासना थी जो नीना के दिल को और धड़का रही थी.

उसे देखते हुए उन्होने अपने दोनो हाथो से उसकी संगमरमरी जाँघो पे अपने हाथ रगड़ना शुरू कर दिया.नीना का जिस्म मस्ती मे पूरी तरह डूब चुका था.वो उन्हे रोकने की कोशिश कर रही थी मगर वो उसकी अनसुनी करते हुए उसकी जाँघो को रगड़ते हुए उसकी पॅंटी तक आ पहुँचे थे.उन्होने हाथ पेटिकोट मे घुसा उसकी पॅंटी खींचनी चाही तो नीना उनके हाथ पकड़ने लगी मगर उसकी पॅंटी का भी वही हश्र हुआ जो उसकी सारी का हुआ था.उसके रस से लिसदी पॅंटी बाहर आई तो भैया जी ने उसे चूम लिया.

ये देख नीना ने शर्म से आँखे बंद कर ली & अपने हाथो से अपने पेटिकोट को नीचे कर अपनी नंगी चूत को ढँकने लगी.भैया जी ने पॅंटी को उच्छाल दिया & उसके हाथो को उसके पेटिकोट से हटा दिया & उसकी टाँगो को पकड़ के हवा मे उठा दिया.अब नीना चाहती भी तो अपने पेटिकोट से अपनी चूत को नही ढँक रही थी.भैया जी ने नज़र नीचे झुका के उसकी गुलाबी,गीली चूत को देखा तो उनकी सनसनाहट और बढ़ गयी & चेहरा जोश की इंतेहा से तमतमा गया.नीना ने उनकी ये हालत देख अपनी आँखे ऐसे मूंद ली मानो उसे बहुत ज़्यादा शर्म आ रही हो & अपने हाथो को अपने सर के बगल मे रख तकिये को पकड़ लिया.

भैया जी ने उसकी टाँगो को हवा मे ही छ्चोड़ दिया & अपना सर पेटिकोट मे घुसा दिया,"..नही....ऊहह...क्या कर रहे हैं?...प्लीज़...छ्चोड़िए...हाईईइ.........ऊओनह....!",नीना ने पेटिकोट के उपर से उनके सर को पकड़ उन्हे हटाना चाहा मगर उनकी ज़ुबान मे नीना की चूत का रस लग चुका था & जिस तरह आदमख़ोर शेर इंसानी खून का स्वाद लगने के बाद कुच्छ और नही ख़ाता भैया जी भी अब उसकी चूत से रस की नयी धार छुड़वा के उसे पिए बिना नही मानने वाले थे.

नीना मस्ती & खुशी मे पागल हो अपने लाल पेटिकोट को उपर-नीचे होते देख रही थी.उसके अंदर छुपा सर उसकी चूत की गहराइयो मे अपनी ज़ुबान से उधम मचा रहा था.नीना कभी तकिये को पकड़ती तो कभी भैया जी के सर को.उसकी आहें अब चीखो की शक्ल इकतियार कर चुकी थी मगर भैया जी थे कि रुक होई नही रहे थे.उन्हे उसकी चूत चाटने मे बहुत मज़ा आ रहा था.उसके दाने को अपने अंगूठे & 1 उंगली से मसल के जब वो उसकी चूत मे ज़ुबान फिरते तो नीना अपनी कमर उचकते हुए उनके सर को अपनी जाँघो मे भींच लेती तो उनका दिल & मस्त हो जाता.

कयि पॅलो बाद जब उन्होने नीना की चूत को जी भर के चाट लिया & नीना भी ना जाने कितनी बार झाड़ चुकी तो उन्होने उसके पेटिकोट से सर बाहर निकाला.नीना की खुमारी भरी आँखो मे देखते हुए उन्होने अपने होंठो पे अपनी ज़ुबान फिराके वाहा लगे उसके रस को जब चटा तो नीना ने फिर से शर्मा के आँखे मूंद ली.उसने सोचा की उम्र मे चाहे ये आदमी बड़ा हो मगर इसका जिस्म & इसका जोश किसी भी जवान को शर्म सकते थे.तभी उसे अपने जिस्म पे फिर से अपने इस नये आशिक़ के हाथ महसूस हुए तो उसने आधी पलके खोलिए & देखा की अब उसका पेटिकोट भी उसके जिस्म से अलग हो रहा है.

नीना ने फिर शरमाने का नाटक किया & अपनी जाँघो को भींच अपनी नंगी चूत छिपाने लगी.भैया ने उसकी टाँगो को पकड़ उसे पलट दिया & फिर उसकी उठी हुई मोटी गंद को चूमने लगे.नीना अपनी कोहोनियो पे उचक सर को पीछे फेंकते हुए फिर से आहे भरने लगी.भैया जी उसकी जाँघो के पिच्छले हिस्सो & गंद की फांको को चूम,चूस & हौले-2 काट रहे थे.उसकी चूत की कसक का तो अब बुरा हाल था.अब तो उसे बस उनके लंड का इंतेज़ार था जो अपने वीर्य से उसकी प्यास बुझाता.

भैया जी उसकी गंद को चूमते हुए उपर उसकी कमर & फिर पीठ पे आए & फिर उनके हाथो ने उसके ब्लाउस & ब्रा के हुक्स खोल दिए.उसकी पीठ पे बेसब्री से हाथ फिराते हुए उन्होने उसे अपने गर्म होंठो से चूम-2 के बहाल कर दिया.जब उन्होने नीना की बाहे पलट उसे फिर से उसकी पीठ पे लिटाया & उसकी बाहो से उसकी ना-नुकर के बावजूद उसके ब्लाउस & ब्रा को खींच लिया तो नीना ने अपनी बाहो को अपने सीने पे क्रॉस कर अपनी चूचियों छुपा लिया मगर ऐसा करने से उसकी चूचियो का उपरी हिस्सा & उभर के उसकी बाँहो के उपर से छलक्ने को बेताब हो उठा.भैया जी ने उसकी बाँहो को पकड़ के उसके सीने से उठाया & जब उसके शहद के रंग वाले निपल्स से सजी 36 साइज़ की चूचियाँ देखी तो उनका दिलखुशी से झूम उठा.

"ग़ज़ब का हुस्न है तुम्हारा!कौन कहेगा कि तुम 1 बच्चे की मा हो!",उन्होने उसकी चूचियो को हेल से दबाया,"..कितनी कसी हैं ये अभी भी?तुम हुस्न की मल्लिका हो नीना!",& वो उसके बाई तरफ लेट के उसकी चूचियो चूसने मे लग गये.नीना की आहे कमरे मे गूँज रही थी & गूँज रही थी भैया जी की ज़ुबान की आवाज़ जोकि ऐसा लग रहा था जैसे नीना की मोटी छातियो का सारा का सारा रस आज ही पी जाना चाहती हो!

नीना उनके बालो को नोचती अपना सीना बिस्तर से उचकाती अपने नये प्रेमी के मुँह मे भरती ज़ोर-2 से आहे भर रही थी.भैया जी का बाया हाथ उसकी चूत से जा लगा था.बहुत देर तक भैया जी उसके नाज़ुक अंगो से ऐसे ही खेलते रहे.नीना 1 बार और झाड़ गयी थी & भैया जी ने उसकी चूत से अपनी गीली उंगलिया निकाली & उन्हे उसे दिखाते हुए चाट लिया.

अब भैया जी उसके जिस्म मे उतरना चाहते थे.उसे देखते हुए उन्होने अपना पाजामा उतार अपना 8 इंच का लंबा,मोटा प्रेकुं से भीगा लंड निकाला & उसके घुटने फैला उसकी टांगो के बीच बैठ गये.नीना ने उनके लंड को देख अपना निचला होंठ दाँत से काटा & घबराई शक्ल बना ली.

"क्या हुआ?",भैया जी ने अपना लंड हिलाया.

"डर लग रहा है."

"क्यू?",वो मुस्कुराए & उसकी चूत पे हाथ फेरा.

"आपका बहुत बड़ा है.",उसने अपना सर दाई तरफ घुमा अपने दाए हाथ मे मुँह च्छूपा लिया जैसे उसे बहुत शर्म आ रही हो.

"तो क्या हुआ?"

"दर्द होगा मुझे बहुत.",नीना वैसे ही रही.

"तो आप इस से दोस्ती क्यू नही कर लेती.डर भाग जाएगा.",वो उसके बाई तरफ उसके सर के बगल मे बैठ गये & अपना लंड उसकी आँखो के सामने हिलाने लगे & उसे पकड़ने का इशारा करने लगे.जब नीना सकुचाती दिखी तो उन्होने उसका बाया हाथ पकड़ा & लंड उसमे दे दिया & जब तक उसने खुद उसे हिलाना नही शुरू किया उन्होने उसका हाथ नही छ्चोड़ा.नीना ने शर्म से दाए हाथ मे चेहरा च्छूपा सर दाई तरफ घुमा लिया & लंड हिलाने लगी.उसके नाटक से तो भैया जी पागल ही हो गये थे.उन्होने लंड उसके हाथ से लिया & फिर उसका चेहरा घुमा के अपना लंड उसके होंठो से च्छुआ दिया.

"नही..",नीना फिर से ना-नुकर करने लगी मगर भैया जी ने इसरार कर आख़िर कर अपना लंड उसके मुँह मे दे ही दिया.

"हो गया..",थोड़ी देर बाद ही नीना ने लंड मुँह से निकाला & शर्म से मुस्कुराती हुई बोली तो भैया जी ने 1 बार फिर उसके मुँह मे लंड दे दिया & उसकी मोटी चूचिया दबाने लगे.जब नीना ने लंड पूरा गीला कर दिया तो उन्होने उसके मुँह को आराम दिया & 1 बार फिर उसकी फैली जाँघो के बीच मे घुटनो पे बैठ लंड उसकी गीली चूत पे टीका के धक्का दिया.

"ओईई...",भैया जी लंड अंदर पेलने लगे & नीना चीखने लगी,"..ओईइ मानणन...हैई रामम्म्मम...बहुत बड़ा है....ऊऊव्व्वव...!",उसने दर्द के मारे आँखे मिंच ली & छट-पटाने लगी.भैया जी उसके उपर लेट गये & उसे बाँहो मे भर लिया & उसे चूमते हुए चोदने लगे.नीना की चूत बहुत ज़्यादा कसी हुई थी,राम्या से भी ज़्यादा.उपर से उसकी जवान लड़कियो जैसी शरमाने वाली हर्कतो ने उन्हे और पागल कर दिया था.वो तेज़ धक्के लगा के उसे चोदने लगे तो नीना अपने तकिये को पकड़े छटपटाती आहे भरने लगी.

उनके लंड ने जल्द ही कमाल दिखाया & वो फ़ौरन ही झाड़ गयी.झाड़ते हुए नीना बिल्कुल पागल हो गयी & बिस्तर से उचक के उनके सीने को चूमते हुए अपना दाए हाथ के नाख़ून उनकी गंद मे & बाए के उनकी पीठ मे धंसा दिए.उसकी ये गर्मजोशी भी भैया जी को बहुत भाई & जब झड़ने की खुमारी उतरी & नीना ने शर्मा के फिर से तकिये मे मुँह च्छुपाया तब तो वो उसके बिल्कुल मुरीद हो गये.

उन्होने लंड उसकी चूत से निकाला & उसे खींच के उठा लिया.घुटनो पे खड़े हो उन्होने उसे बाँहो मे भर के चूमा तो इस बार नीना ने भी उनका साथ दिया.उन्होने उसे कुच्छ देर चूमा & फिर उसे बिस्तर के दूसरी ओर पेट के बल लिटा दिया & उसकी गंद को हवा मे उठा दिया फिर वो उसकी चूत को पीछे से चाटने लगे.नीना बिस्तर मे मुँह च्छुपाए फिर से आहे भरने लगी तो उन्होने पीछे से उसकी चूत मे फिर से लंड घुसा दिया & उसे चोदने लगे.

उसकी कमर थामे वो उसे चोद रहे थे.बीच-2 मे उनके हाथ नीना की चौड़ी गंद & नर्म पीठ को सहला रहे थे.जैसे-2 नीना का जोश बढ़ा वैसे-2 वो बिस्तर से सर उठाके बाल झटक-2 के आहे भरने लगी.उसका जोश पल-2 बढ़ता जा रहा था.उसने सामने बिस्तर के कोने पे लगे बेड पोस्टर को दोनो हाथो से थाम लिया & भैया जी के धक्को के जवाब मे अपनी गंद आगे-पीछे हिलाने लगी.

खुमारी कुच्छ और बढ़ी तो उसने पोस्टर को थाम अपने होंठ उस से लगा दिए & उसपे अपने गाल ऐसे रगड़ने लगी मानो वो भैया जी का चौड़ा सीना हो.उसकी इन मस्तानी हर्कतो को देख भैया जी भी जोश से पागल हो गये & उनके धक्के और तेज़ हो गये.इस पोज़िशन मे उनका लंड नीना की चूत की दीवारो से बुरी तरह रगड़ रहा था & नीना उस से बहाल हो पोस्टर को थामे 1 बार और झाड़ गयी.

भैया जी ने उसके कंधे पकड़ उसे पीछे खींचा & बिस्तर पे उसकी बाई करवट पे लिटा दिया तो नीना ने मुँह बिस्तर मे च्छूपा लिया.भैया जी उसकी गंद पे प्यार से हाथ फेरते अपनी बाई कोहनी पे उठाके उसकी चूत चोदने मे लग गये.गंद से हाथ आगे आ नीना की चूचियो से लगे & उन्हे मसल्ने लगे.नीना अब मस्ती की 1 और लहर पे सवार हो गयी थी बस फ़र्क इंतहा था कि इस बार भैया जी भी उसके साथ अपने सफ़र को अंजाम देने को तैय्यार थे.

उसकी दाई बाँह पकड़ उन्होने उसके जिस्म को अपने से सताया & फिर उसकी चूत के दाने को रगड़ते हुए उसके दाए कान मे जीभ फिराते हुए बहुत तेज़ धक्के लगाने लगे.नीना ने हाथ पीछे ले जाके उनके चेहरे को सहलाया & अपनी कमर हिलाने लगी.चूत के दाने के रगडे जाने से वो बहुत ज़्यादा मस्त हो गयी थी.तभी भैया जी ने उसके जिस्म मे अकड़न महसूस की,वो समझ गये की नीना झड़ने वाली है.उन्होने उसके पेट पे अपना दाया हाथ कसा & बाए को उसकी गर्दन से निकाल अपनी 2 उंगलिया उसके मुँह मे डाल दी जिन्हे नीना बड़े मस्ताने अंदाज़ मे चूसने लगी.धक्के अब बहुत तेज़ हो गये थे & भैया जी के आंडो मे हो रहा मीठा दर्द भी.नीना की चूत की कसक भी बहुत बढ़ गयी थी.

उसने मुँह से उंगलिया निकाल अपना बाया गाल बिस्तर पे बेचैनी से रगड़ते हुए ज़ोर से आह भरी,वो झड़ने लगी थी.भैया जी ने भी अपना बाया गाल उसके दाए से लगा दिया & वो भी आहें भरने लगा.उनका जिस्म झटके खा रहा था & नीना ने महसूस किया कि उसकी रस बहाती चूत उनके गर्म वीर्य से भर रही है.भैया जी झड़ते हुए उसके जिस्म को सहला रहे थे & उसके नाम को ले आहे भर रहे थे.नीना हौले से मुस्कुराइ,उसने इस ताक़तवर इंसान को शीशे मे उतार ही लिया था.

मोना उसकी बाहो मे थी & वरुण उसके गोरे गालो को चूम रहा था.मोना की छातियो उसके सीने पे दबी थी & वो तो बस खुशी से पागल था.मोना ने झुक के उसके बालो भरे सीने को चूमना शुरू किया तो वो और मस्त हो गया..वरुण..वरुण..मोना उसका नाम ले रही थी..उसने धीरे से आँखे खोली.."वरुण..वरुण..उठो."

वरुण हड़बड़ा के उठ बैठा"हुंग..क्या हुआ?"

"कुच्छ नही.उजाला होने से पहले तुम स्टोर मे छिप जाओ.",मेघना ने फर्श से उसका बिस्तर उठाना शुरू किया.उसके चेहरे का भी रंग बदला हुआ था.1 पल मे क्या से क्या हो जाता है!जब वरुण ने आँखे खोली थी तो वो अपने सपने की खुमारी मे ही था & उसकी आँखो मे जो प्यार & दीवानगी थी वो उसके उपर झुकी मेघना की आँखो से छुपि ना रह सकती थी & अब मेघना के दिल की उथल-पुथल और बढ़ गयी थी.

उसे कल रात से लेके अभी तक मे पहली बार ये एहसास हुआ कि वो अपने पुराने प्रेमी के साथ घर मे अकेली थी & दोनो ने पूरी रात 1 ही कमरे मे बिताई थी.जहा इस बात ने उसके दिल की धड़कनो को तेज़ किया वही उसके जिस्म मे भी कसक उठने लगी.

"मैं चाइ बनाती हू.तब तक तुम फ्रेश हो लो.",बिना वरुण की ओर देखे वो कमरे से निकल गयी.

"..पोलीस को जिस वॅन की तलाश थी वो उन्हे रेलवे स्टेशन की पार्किंग से मिल गयी है मगर हमारे सूत्रों के मुताबिक अभी तक पोलीस के हाथ कोई ठोस सुराग नही लगा है..",वरुण & मोना छाई पीते हुए टीवी पे खबरें देख रहे थे..तो उसकी वॅन ढूंड ली गयी थी..अब तो बस मूसा ही कुच्छ कर सकता था..2 रातें और फिर तो वो इस शहर से ही दूर चला जाएगा..

"चाइ पी ली?"

हां."

"तो चलो.",वरुण ने घड़ी देखी सवेरे के 5 बजने वाले थे.दोनो छत पे चले आए.मेघना ने कमरा खोला & दोनो अंदर दाखिल हुए.

"गंदा है और समान भी बिखरा पड़ा है.थोड़ा वक़्त होता तो सब ठीक कर देती."

"इस वक़्त ये कमरा मेरे लिए किसी 5-स्टार होटेल के कमरे से भी बढ़ के है.",वरुण ने हंसते हुए मेघना के कंधे पे हाथ रखा तो उसे एहसास हुआ की नाइटी के स्ट्रॅप के नीचे ब्रा का स्ट्रॅप नही है.मोना की नंगी छातियो की तस्वीर उसके ज़हन मे कौंध गयी & उसका लंड जागने लगा,"..ज़्यादा परेशान मत होना & मेरे खाने की फ़िक्र भी मत करना,मोना.मुझे अब ऐसे हलातो की आदत हो गयी है.",वरुण ने 1 कोने मे धूल झाड़ के मोना की दी चादर बिच्छाई & आँखे बंद कर लेट गया.

वरुण का हाथ कंधे पे पड़ते ही मेघना कांप उठी थी.कुच्छ पल वो वरुण को देखते रही फिर कमरे के दरवाज़े पे बाहर से ताला लगा के वापस घर मे चली गयी.

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फोन लाइन शुरू करने से ठीक पहले जेसीपी सिंग ने 1 मीटिंग बुलाई जिसमे प्रोफेसर दीक्षित,दिव्या,अजीत समेत लगभग क्राइम ब्रच के सभी अफ़सर मौजूद थे.

"..वॅन हमे मिल गयी है मगर कोई सुराग नही.जो भी जानकारी अभी तक उस वॅन के बारे मे है,वो ये है कि उसे 1 सेकेंड-हॅंड कार डीलर से खरीदा गया था.1 टीम अभी उस डीलर के पास जा रही है.देखते हैं उस से क्या पता चलता है मगर..",डीसीपी वेर्मा बोलते हुए प्रोफेसर से मुखातिब हुए,"..तो हमारी सारी उमीदे इस वक़्त इस बात पे टिकी हैं कि वो किडनॅपर्स हमसे कॉंटॅक्ट करें & फिर हम बातचीत के ज़रिए बच्चे को वापस लाने की कोशिश करें.

प्रोफेसर को झल्लाहट हो रही थी,इस ज़रा सी बात के लिए उसे बुंगले से यहा बुलाया गया था...नही बात कुच्छ और थी..बग्स तो लगे थे फिर & क्या करना चाह रहे थे ये ..हां!वो मुस्कुराया,"मैने पहले भी कहा है कि मैं पूरी कोशिश करूँगा बशर्ते मेरी बातो को आपलोग माने.",प्रोफेसर कुर्सी से उठ खड़ा हुआ,"..अब बुरा ना माने तो मैं फोन लाइन शुरू होने से पहले बंगल पे पहुँच थोड़ा आराम करना चाहता हू क्यूकी मुझे नही लगता उसके बाद मुझे आराम का ज़रा भी मौका मिलेगा.",प्रोफेसर ने सबको नमस्ते किया & फुर्ती से वाहा से निकल गया.उसके पीछे दिव्या & नामित भट्ट जोकि 1 बिकुल नया अफ़सर था लगभग भागते हुए वाहा से निकले.

बंगल पे पहुँचते ही प्रोफेसर सीधा अपने कमरे मे गया & उसे बंद कर लिया.वो अपने कपड़े बदलने लगा मगर उसकी निगाहें कमरे की दीवारो को टटोल रही थी & कुच्छ पलो बड़ा उन्होने उसे ढूंड ही लिया जिसकी उन्हे तलाश थी.कमरे की 1 दीवार पे 1 लॅंप लगा था जोकि जलता नही था.उस लॅंप के होल्डर के लकड़ी के फेम मे प्रोफेसर को छ्होटा सा सुराख दिखा & वो समझ गया कि यही पे ख़ुफ़िया कॅमरा लगा है.वो मन ही मन हंसा..1 तरफ तो उसे बुलाते हैं काम करने के लिए दूसरी तरफ उन्हे खुद ही उसपे भरोसा नही!इतने दिमाग़ दार लोग & ऐसी बेवकूफी!प्रोफेसर हंसता हुआ बाथरूम मे घुस गया.बंगल के बेसमेंट मे बैठी पोलीस की टीम जोकि उस फुटेज को क्राइम ब्रांच मे बने कंट्रोल रूम तक पहुँचा रही थी ने जब प्रोफेसर को हंसते हुए देखा तो यही सोचा कि किस पागल को ऐसा नाज़ुक काम पकड़ा दिया उनके अफसरो ने!

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--50

gataank se aage............-

uski nabhi chatate hue bhaiya ji ka daya hath aage aya & uski kamar me khonsi sari ko khicnh diya,"oww..ye kya kar rahe hain!..nahiii....",vo jhuk ke unhe rokne lagi magar bhaiya ji uski nabhi ko chatate rahe & uski sari ko uske jism se alag karte rahe.bhaiya ji sari utarne ke bad petticaot ke upar se hi uski kasi gand ko dabate hue uske pet ko chumte rahe.nina ka ab masti se bura hal tha.uski chut ab aur bardasht karne ki halat me nahi thi & vo janti thi ki ab vo bas jhadne hi vali hai.uski tango me jaise jan hi nahi thi & jaise hi bhaiya ji ki zuban ne 1 bar fir uski nabhi ko chata usne bahut zor ki aah bhari & girne lagi.

bhaiya ji fauran khade hue & use baho me sambhal liya & uske dilkash chehre ko chumne lage.madhosh nina ne apne hath unke nange seene pe jama diye mano abhi bhi vo puri tarah se taiyyar na ho jabki sachchai ye thi ki bhaiya ji ke baalo bhare chaude seene ko dekh vo khushi se pagal ho gayi thi & uska dil kar raha tha ki apni zubans e unke nipples ko chuse & pet pe sate unke pajame me qaid lund ko daboch le.bhaiya ji ke hoth uske galo se hote hue uske labo pe aye & is bar uski masti ka fayda uthake unhone uske narm labo ke paar apni jibh ghusa hi di & uski zuban se lada hi di.jab nina ne unki zuban apni zuban pe mehsus ki to pehle to usne kuchh nahi kiya magar thodi der bad vo unka sath dene lagi lekin jaise hi kiss ki shidat badhi usne kiss tod di & unhe pare dhakelne lagi mano ye jata rahi ko vo itni masti bardasht nahi kar pa rahi hai.

is bar bhaiya ji ne apna baya hath uski pith ke gird bandha & daye ko uski moti gand ke neeche lagte hue uski dayi jangh ko pakadte hue use god me utha liya & uske hotho ko chumte hue use 4 poster bed pe le gaye.bistar pe letate hi uske mude ghutno ke karan nina ka petticoat ghutno ke upar se dhalak gaya & uski jangho ka hissa numaya ho gaya.uski tez sanso se upar-neeche hota uska seena bhaiya ji ki bhi dhadkane badha raha tha.

vo bistar pe chadh gaye & uske nange ghutne pe hath rakh use uski jangh pe chalate hue uske petticoat ko uski kamar tak le jane lage.nina ka hath unke hatho pe aa laga & unhe rokne ki koshish karne laga.bhaiya ji ne uski ankho me apni ankhe dal di & apne hath ko age badhate rahe.nina ki ankho me masti & ghabrahat ka vo anutha milan tha joki mardo ko pagal kar deta hai & bhaiya ji ki ankho me bas vasna thi jo nina ke dil ko aur dhadka rahi thi.

use dekhte hue unhone pane dono hatho se uski sangmarmari jangho pe apne hath ragadna shuru kar diya.nina ka jism masti me puri tarah doob chuka tha.vo unhe rokne ki koshish kar rahi thi magar vo uski ansuni karte hue uski jangho ko ragadte hue uski panty tak aa pahunche the.unhone hath petticoat me ghusa uski panty khinchani chahi to nina unke hath pakadne lagi magar uski panty ka bhi vahi hashr hua jo uski sari ka hua tha.uske ras se lisdi panty bahar ayi to bhaiya ji ne use chum liya.

ye dekh nina ne sharm se ankhe band kar li & apne hatho se apne petticoat ko neeche kar apni nangi chut ko dhankne lagi.bhaiya ji ne panty ko uchhal diya & uske hatho uske petticoat se hata diya & uski tango ko pakad ke hawa me utha diya.ab nina chahti bhi to apne petticoat se apni chut ko nahi dhank rahi thi.bhaiya ji ne nazar neeche jhuka ke uski gulabi,gili chut ko dekha to unki san aur badh gayi & chehra josh ki inteha se tamtama gaya.nina ne unki ye halat dekh apni aankhe aise mund li mano use bahut zyada sharm aa rahi ho & apne hatho ko apne sar ke bagal me rakh takiye ko pakad liya.

bhaiya ji ne uski tango ko hawa me hi chhod diya & apna sar petticoat me ghusa diya,"..nahi....oohhh...kya kar rahe hain?...please...chhodiye...haiiii.........ooonhhhhhh....!",nina ne petticoat ke upar se unke sar ko pakad unhe hatana chaha magar unki zuban me nina ki chut ka ras lag chuka tha & jis tarah aadamkhor sher insani khun ka swad lagne ke bad kuchh aur nahi khata bhaiya ji bhi ab uski chut se ras ki nayi dhar chhudwa ke use piye bina nahi maanane wale the.

nina masti & khushi me pagal ho apne laal petticaot ko upar-neeche hote dekh rahi thi.uske andar chhupa sar uski chut ki gehraiyo me apni zuban se udham macha raha tha.nina kabhi takiye ko pakadti to kabhi bhaiya ji ke sar ko.uski ahen ab chikho ki shakl ikhtiyatr kar chuki thi magar bhaiya ji the ki ruk hoi nahi rahe the.unhe uski chut chatane me bahut maza a raha tha.uske dane ko apne anguthe & 1 ungli se masal ke jab vo uski chut me zuban firate to nina apni kamar uchkate hue unke sar ko apni jangho me bhinch leti to unka dil & mast ho jata.

kayi palo bad jab unhone nina ki chut ko ji bhar ke chat liya & nina bhi na jane kitni bar jhad chuki to unhone uske petticoat se sar bahar nikala.nina ki khumari bhari aankho me dekhte hue unhone apne hotho pe apni zuban firake vaha lage uske ras ko jab chata to nina ne fir se sharma ke ankhe mund li.usne socha ki umra me chahe ye aadmi bada ho magar iska jism & iska josh kisi bhi jawan ko sharm sakte the.tabhi use apne jism pe fir se apne is naye aashiq ke hath mehsus hue to usne aadhi palke kholie & dekha ki ab uska petticoat bhi uske jism se alag ho raha hai.

nina ne fir sharmane ka natak kiya & apni jangho ko bhinch apni nangi chut chhipane lagi.bhaiya ne uski tango ko pakad use pakat diya & fir uski uthi hui moti gand ko chumne lage.nina apni kohoniyo pe uchak sar ko peechhe fenkte hue fir se ahe bharne lagi.bhaiya ji uski jangho ke pichhle hisso & gand ki fanko ko chum,chus & haule-2 kat rahe the.uski chut ki kasak ka to ab buar hal tha.ab to us ebas unkelund ka intezar tha jo apne virya se uski pyas bujhata.

bhaiya ji uski gand ko chumte hue upar uski kamar & fir pith pe aye & fir unke hatho ne uske blouse & bra ke hooks khol diye.uski pith pe besabri se hath firate hue unhone use apne garm hotho se chum-2 ke behal kar diya.jab unhone nina ki bahe palat use fir se uski pith pe litaya & uski baaho se uski na-nukar ke bavjud uske blouse & bra ko khinch liya to nina ne apni baaho ko apne seene pe cross kar apni chhatiya chhupa li magar aisa karne se uski chhatiyo ka upri hissa & ubhar ke uski baho ke upar se chhalakne ko betab ho utha.bhaiya ji ne uski baho ko pakad ke uske seene se uthaya & jab uske shehad ke rang vale nipples se saji 36 size ki chhatiya dekhi to unka dilkhushi se jhum utha.

"gazab ka husn hai tumhara!kaun kahega ki tum 1 bachche ki maa ho!",unhone uski choochiyo ko hale se dabaya,"..kitni kasi hain ye abhi bhi?tum husn ki mallika ho nina!",& vo uske bayi taraf let ke uski choochiy chusne me lag gaye.nina ki ahe kamre me gunj rahi thi & gunj rahi thi bhaiya ji ki zuban ki aavaz joki aisa lag raha tha jaise nina ki moti chhatiyo ka sara ka sara ras aaj hi pi jana chahti ho!

nina unke baalo ko nochti apna seena bistar se uchkati apne naye premi ke munh me bharti zor-2 se ahe bhar rahi thi.bhaiya ji ka baya hath uski chut se ja laga tha.bahut der tak bhaiya ji uske nazuk ango se aise hi khelte rahe.nina 1 bar aur jhad gayi thi & bhaiya ji ne uski chut se apni gili ungliya nikali & unhe use dikhate hue chat liya.

ab bhaiya ji uske jism me utarna chahte the.use dekhte hue unhone apna pajama utar apna 8 inch kalumba,mota precum se bhiga lund nikala & uske ghutne faila uski tango ke beech baith gaye.nina ne unke lund ko dekh apna nichla honth dant se kata & ghabrayi shakl bana li.

"kya hua?",bhaiya ji ne apna lund hilaya.

"darr lag raha hai."

"kyu?",vo muskuraye & uski chut pe hath fera.

"apka bahut bada hai.",usne apna sar dayi taraf ghuma apne daye hath me munh chhupa liya jaise use bahut sharm a rahi ho.

"to kya hua?"

"dard hoga mujhe bahut.",nina vaise hi rahi.

"top is se dosti kyu nahi kar leti.darr bhag jayega.",vo uske bayi taraf uske sar ke bagal me baith gaye & apna lund uski ankho ke samne hilane lage & use pakadne ka ishara karne lage.jab nina sakuchati diki to unhone uska baya hath pakda & lund usme de diya & jab tak usne khud sue hilana nahi shurur kiya unhone uska hath nahi chhoda.nina ne sharm se daye hath me chehra chhupa sar dayi taraf ghuma liya & lund hilane lagi.uske natak se to bhaiya ji pagal hi ho gaye the.unhone lund uske hath se liya & fir uska chehra ghuma ke apna lund uske hothos e chhua diya.

"nahi..",nina fir se na-nukar karne lagi magar bhaiya ji ne israr kar akhir kar apna lund uske munh me de hi diya.

"ho gaya..",thodi der bad hi nina ne lund munh se nikala & sharm se muskurati hui boli to bhaiya ji ne 1 bar fir uske munh me lund de diya & uski moti choochiya dabane lage.jab nina ne lund pura gila kar diya to unhone uske munh ko aram diya & 1 bar fir uski faili janghjo ke beech me ghutno pe baith lund uski gili chut pe tika ke dhakka diya.

"ouiiiii...",bhaiya ji lund andar pelne lage & nina chikhne lagi,"..ouiiii maannn...haiii raammmmm...bahut bada hai....oooow..!",usne dard ke mare aankhe minch li & chhatpatane lagi.bhaiya ji uske uapr let gaye & use baho me bhar liya & use chumte hue chodne lage.nina ki chut bahut zyada kasi hui thi,Ramya se bhi zyada.upar se uski jawan ladkiyo jaisi sharmane wali harkato ne unhe aur pagal kar diya tha.vo tez dhakke laga ke use chodne lage to nina apne takiye ko pakde chhatapatati aahe bharne lagi.

unke lund ne jald hi kamal dikhaya & vo fauran hi jhad gayi.jhadte hue nina bilkul pagal ho gayi & bistar se uchak ke unke seene ko chumte hue apna daye hath ke nakhun unki gand me & baye ke unki pith me dhansa diye.uski ye garmjoshi bhi bhaiya ji ko bahut bhayi & jab jhadne ki khumari utri & nina ne sharma ke fir se takiye me munh chhupaya tab to vo uske bilkul murid ho gaye.

unhone lund uski chut se nikala & use khinch ke utha liya.ghutno pe khade ho unhone use baho em bhar ke chuma to is bar nina ne bhio unka sath diya.unhone use kuchh der chuma & fir use bistar ke dusri or pet ke bal lita diya & uski gand ko hawa me uthadiya fir vo uski chut ko peechhe se chatne lage.nina bistar me munh chhupaye fir se aahe bharne lagi to unhone peechhe se uski chut me fir se lund ghusa diya & use chodne lage.

uski kamar thame vo use chod rahe the.beech-2 me unke hath nina ki chaudi gand & narm pith ko sehla rahe the.jaise-2 nina ka josh badha vaise-2 vo bistar se sar uthake bal jhatak-2 ke aahe bharne lagi.uska josh pal-2 badhta ja raha tha.usne samne bistar ke kone pe lage bed poster ko dono hatho se tham liya & bhaiya ji ke dhako ke jawab me apni gand aage-peechhe hilane lagi.

khumari kuchh aur badhi to usne poster ko tham apne honth us se laga diye & uspe apne gal aise ragadne lagi mano vo bhaiya ji ka chauda seena ho.uski in mastani harkato ko dekh bhaiya ji bhi josh se pagal ho gaye & unke dhake aur tez ho gaye.is position me unka lund nina ki chut ki deewaro se buri tarah ragad raha tha & nina us se behal ho poster ko thame 1 bar aur jhad gayi.

bhaiya ji ne uske kandhe pakad use peechhe khincha & bistar pe uski bayi karwat pe lita diya to nina ne munh me bsitar me chhupa liya.bhaiya ji uski gand pe pyar se hath ferte apni bayi kohni pe uchke uski chut chodne me lag gaye.gand se hath age a nina ki chochiyo se lage & unhe masalne lage.nina ab masti ki 1 aur lehar pe sawar ho gayi thi bas fark itnha tha ki is baar bhaiya ji bhi uske sath apne safar ko anjam dene ko taiyyar the.

uski dayi banh pakad unhone uske jism ko apne se sataya & fir uski chut ke dane ko ragadte hue uske daye kaan me jiobh firate hue bahut tez dhakke lagane lage.nina ne hath peechhe le jake unke chehre ko sehlaya & apni kamar hilane lagi.chut ke daen ke ragde jane se vo bahut zyada mast ho gayi thi.tabhi bhaiya ji ne uske jism me akdan mehsus ki,vo samajh gaye ki nina jhadne wali hai.unhone uske pet pe apna daya hath kasa & baye ko uski gardan se nikal apni 2 ungliya uske munh me daal di jinhew nina bade mastane andaz me chusne lagi.dhakke ab bahut tez ho gaye the & bhaiya ji ke ando me ho raha mitha dard bhi.nina ki chut ki kasak bhi bahut badh gayi thi.

usne munh se ungliya nikal apna baya gal bistar pe bechaini se ragadte hue zor se ah bhari,vo jhadne lagi thi.bhaiya ji ne bhi apna baya gal uske daye se laga di & vo bhi ahen bharne laga.unka jism jhatke kha raha tha & nina ne mehsus kiya ki uski ras bahati chut unke garm virya se bhar rahi hai.bhaiya ji jahdte hue uske jism ko sehla rahe the & uske naam ko le aahe bhar rahe the.nina haule se muskuaryi,usne is taqatwar insan ko shishe me utar hi liya tha.

Mona uski baaho me thi & Varun uske gore galo ko chum raha tha.mona ki chhatiya uske seene pe dabi thi & vo to bas khushi se pagal tha.mona ne jhuk ke uske balo bhare seene ko chumna shuru kiya to vo aur mast ho gaya..varun..varun..mona uska naam le rahi thi..usne dhire se aankhe kholi.."varun..varun..utho."

varun hadbada ke uth baitha"hunh..kya hua?"

"kuchh nahi.ujala hone se pehle tum store me chhip jao.",Meghna ne farsh se uska bistar uthana shuru kiya.uske chehre ka bhi rang badla hua tha.1 pal me kya se kya ho jata hai!jab varun ne aankhe kholi thi to vo apne sapne ki khumari me hi tha & uski aankho me jo pyar & deewangi thi vo uske upar jhuki meghna ki aankho se chhupi na reh sakti thi & ab meghna ke dil ki uthal-puthal aur badh gayi thi.

use kal raat se leke abhi tak me pehli baar ye ehsas hua ki vo apne purane premi ke sath ghar me akeli thi & dono ne puri raat 1 hi kamre me bitayi thi.jaha is baat ne uske dil ki dhadkano ko tez kiya vahi uske jism me bhi kasak uthne lagi.

"main chai banati hu.tab tak tum fresh ho lo.",bina varun ki or dekhe vo kamre se nikal gayi.

"..police ko jis van ki talash thi vo unhe railway station ki parking se mil gayi hai magar humare sutron ke mutabik abhi tak police ke hath koi thos surag nahi laga hai..",varun & mona chai peete hue tv pe khabren dekh rahe the..to uski van dhoond li gayi thi..ab to bas Musa hi kuchh kar sakta tha..2 raaten aur fir to vo is shehar se hi door chala jayega..

"chai pi li?"

haan."

"to chalo.",varun ne ghadi dekhi savere ke 5 bajne vale the.dono chhat pe chale aaye.meghna ne kamra khola & dono andar dakhil hue.

"ganda hai aur saman bhi bikhra pada hai.thoda waqt hota to sab thik kar deti."

"is waqt ye kamra mere liye kisi 5-star hotel ke kamre se bhi badh ke hai.",varun ne hanste hue meghna ke kandhe pe hath rakha to use ehsas hua ki nighty ke strap ke neeche bra ka strap nahi hai.mona ki nangi chhatiyo ki tasvir uske zehan me kaundh gayi & uska lund jagne laga,"..zyada pareshan mat hona & mere khane ki fikr bhi matkarna,mona.mujhe ab aise halaato ki aadat ho gayi hai.",varun ne 1 kone me dhool jhad ke mona ki di chadar bichhayi & aankhe band kar let gaya.

varun ka hath kandhe pe padte hi meghna kanp uthi thi.kuchh pal vo varun ko dekhte rahi fir kamre ke darwaze pe bahar se tala laga ke vapas ghar me chali gayi.

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fone line shuru karne se thik pehle JCP Singh ne 1 meeting bulai jisme Professor Dixit,Divya,Ajit samet lagbhag crime brach ke sabhi afsar maujood the.

"..van hume mil gayi hai magar koi surag nahi.jo bhi jankari abhi tak us van ke bare me hai,vo ye hai ki use 1 second-hand car dealer se kharida gaya tha.1 team abhi us dealer ke paas ja rahi hai.dekhte hain us se kya pata chalta hai magar..",DCP Verma bolte hue professor se mukhatib hue,"..to humari sari umeede is waqt is baat pe tiki hain ki vo kidnappers humse contact karen & fir hum baatchit ke zariye bachche ko vapas lane ki koshish karen.

professor ko jhallahat ho rahi thi,is zara si baat ke liye use bungle se yaha bulaya gaya tha...nahi baat kuchh aur thi..bugs to lage the fir & kya karna chah rahe the ye ..haan!vo muskuraya,"maine pehle bhi kaha hai ki main puri koshish karunga basharte meri baato ko aaplog maane.",professor kursi se uth khada hua,"..ab bura na mane to main fone line shuru hone se pehle bungle pe pahunch thoda aaram karna chahta hu kyuki mujhe nahi lagta uske baad mujhe aaram ka zara bhi mauka milega.",professor ne sabko namaste kiya & furti se vaha se nikal gaya.uske peechhe divya & Namit Bhatt joki 1 bikul naya afsar tha lagbhag bhagte hue vaha se nikle.

bungle pe pahunchte hie professor seedha apne kamre me gaya & use band kar liya.vo apne kapde badalne laga magar uski nigahen kamre ki deewaro ko tatol rahi thi & kuchh palo bada unhone use dhoond hi liya jiski unhe talash thi.kamre ki 1 deewar pe 1 lamp laga tha joki jalta nahi tha.us lamp ke holder ke lakdi ke fame me professor ko chhota sa surakh dikha & vo samajh gaya ki yehi pe khufiya camera laga hai.vo man hi man hansa..1 taraf to use bulate hain kaam karne ke liye dusri taraf unhe khud hi uspe bharosa nahi!itne dimaghdar log & aisi bevkufi!professor hansta hua bathroom me ghus gaya.bungle ke basement me baithi police ki team joki us footage ko crime branch me bane control room tak pahuncha rahi thi ne jab professor ko hanste hue dekha to yehi socha ki kis pagal ko aisa nazuk kaam pakda diya unke afsaro ne!

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 16:00

खेल खिलाड़ी का पार्ट--51

गतान्क से आगे............-

"साहब,अब मैं क्या जानू..",वो किसान झल्ला गया,"..1 तो मेरा नुकसान हो गया उपर से आप मुझपे ही शक़ कर रहे हैं."

"भाई,तो तुम्हारे खेत मे,तुम्हारे झोंपड़े मे ऐसी महँगी गाड़ी जलेगी तो हम क्या तुम्हारे पड़ोसी से पुछेन्गे!",पोलिसेवाले ने भी उसी के अंदाज़ मे जवाब दिया.

"तो मैं आपको खुद क्यू खबर देता साहब इसके बारे मे?",अब पोलीस वाला खामोश था.वैसे भी उसके दिमाग़ मे कुच्छ चल रहा था.कल ही जसजीत प्रधान का बेटा किडनॅप हुआ था & पोलीस को आज तड़के वो वॅन भी मिल गयी थी जिसकी वो तलाश कर रहे थे मगर कल देर रात वाइर्ले से ये खबर भी आई थी कि किडनॅपिंग की जगह से उस वॅन के अलावा 2 और भारी गाडिया भी निकली थी जैसे कोई सुव.

"हूँ.",उसने अपने रिजिस्टर पे कुच्छ लिखा & अपनी जीप की ओर बढ़ गया.

"पेट्रोल 756 टू कंट्रोल रूम..",अपने जीप के वाइर्ले को उसने हाथो मे लिया.

"कंट्रोल रूम,बोलिए 756.."

"मेरी पोज़िशन है..",& उस पोलिसेवाले ने सारी जानकारी कंट्रोल रूम को दे दी.

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दीप्ति अरशद की गोद मे बैठी उसे चूम रही थी.अरशद के हाथ तो उसकी टाइट जीन्स मे कसी गंद से जैसे चिपक ही गये थे!दोनो बेसमेंट मे अनीश के कमरे के बाहर पहरे पे थे.तभी दोनो के कानो मे किसी के रोने की आवाज़ आई.

"लगता है उठ गया.",दोनो के होंठ जुदा हुए & अरशद ने जल्दी से अपना मास्क पहन लिया.अरशद ने 1 वाइटबोर्ड उठाया & कमरे का दरवाज़ा खोल अंदर दाखिल हुआ & उस वाइट बोर्ड को दीवार से टीका के उसपे ब्लॅक मार्कर से लिखने लगा.

"घबराव मत.तुम बस यहा थोड़े दिन रहोगे.वो बाल्टी तुम्हारे टाय्लेट के लिए है.",अनीश रोना छोड़ बोर्ड पढ़ने लगा.उसने देखा 1 प्लास्टिक की बाल्टी वही रखी थी,"वो पानी की बॉटल मे पीने का पानी है.थोड़ी देर मे तुम्हे खाना मिलेगा.",जब अरशद ने देखा कि अनीश ने सब पढ़ लिया है तो उसने बोर्ड उठाया & बाहर चला गया.

अनीश ने सुबक्ते हुए पानी पिया.वो बच्चा था मगर इतना भी छ्होटा नही कि ये ना समझे कि उसे अगवा कर लिया गया है.पानी पीते ही उसे पेशाब लगा & उसने पहले बंद दरवाज़े को देखा.दरवाज़े मे 1 छ्होटा सा स्लॉट जैसा बना था लेकिन वाहा से अभी कोई देख नही रहा था.उसने पॅंट खोली & बाल्टी मे पेशाब करने लगा.उस स्लॉट मे लगे काले शीशे के दूसरे तरफ से अरशद सब देख रहा था.

उसे थोड़ा बुरा लगा अनीश के मासूम चेहरे को देख के मगर यही उसका काम था.वो वाहा से घुमा तो देखा कि दीप्ति 1 ट्रे लेके आ रही है.उसने उस से ट्रे लिया & दरवाज़ा खोल वापस अंदर गया.गद्दे पे बैठा बहुत सहमा अनीश उसे देख रहा था.उसने ट्रे अनीश के पास रखी & उसकी बाल्टी उठाके बाहर गया फिर 1 दूसरी बाल्टी अंदर रखी & साथ मे पानी की 1 भरी बॉटल भी.वो दरवाज़े के पास आया & बोर्ड उठाके उसपे लिखा,"खा लो.",& उसे अनीश को दिखा के फिर से दरवाज़ा बंद कर दिया.

अनीश ने ट्रे पे से कवर उठाया तो गरम खाने की खुश्बू उसकी नाक से टकराई.ट्रे मे 1 हॉर्लिक्स का मग,मक्खन लगे टोस्ट,2 उबले अंडे,2 गुलाब जामुन,4 स्लाइस फ्रूट केक & 1 सेब रखा था.खाना देखते ही अनीश की भूख जाग गयी.उसे उम्मीद नही थी कि ये बुरे लोग उसे इतना बढ़िया खाना देंगे.

"थॅंक यू.",उसने दरवाज़े की ओर देखा & नाश्ता करने लगा.उस मासूम ने अपने क़ैद करने वालो की गुलामी मंज़ूर कर ली थी.

स्लॉट के शीशे से झँकते अरशद & दीप्ति को कुच्छ ग़लत लग रहा था मगर दोनो ने अपने दिल का एहसास अपने साथी से नही बाँटा & जब 1 दूसरे की ओर देखा तो मुस्कुरा दिए.अरशद ने अपनी महबूबा को बाहो मे भरा & कुर्सी पे बैठ उसे अपनी गोद मे बिठा लिया & दोनो 1 बार फिर 1 दूसरे के नाज़ुक अंगो से खेलने लगे.

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"ऊव्ववव...क्या करते हैं?..छ्चोड़िए ना...हाईईइ..मेरा ब्लाउस तो दीजिए...उन..हुंग....!",नीना का 1 शर्मीली,च्छुईमुई होने का नाटक भैया जी को पागल किए जा रहा था.चुदाई के बाद उसने अपना ब्रा पहन ब्लाउस डालने की कोशिश की तो भैया जी ने ब्लाउस को छ्चीन लिया था & 1 बार फिर उसके ब्रा को नीचे करने लगे थे.

"बहुत देर हो गयी है..ओह्ह्ह्ह..!",वो उसकी चूचियो को चूस रहे थे.नीना का दिल तो कर रहा था कि अभी और थोड़ी देर अपने इस नये प्रेमी की हर्कतो का लुत्फ़ उठाए मगर अब सच मे देर हो चुकी थी & फिर थोड़ा सा तड़पाना भी तो ज़रूरी था तभी तो भैया जी उसके काबू मे रहते.

उसने उनके सर को अपने सीने से अलग किया,"फिर तो मिलूंगी ना!",उसने उनके गालो पे प्यार से चूमा,"..थोड़ा तो सब्र रखिए.",वो बिस्तर से उतर गयी & अपने कपड़े पहनने लगी.भैया जी को भी काम था.वो बिस्तर पे लेटे-2 अपने लंड को सहलाते हुए उस हसीना को कपड़े पहनते देखने लगे.

नीना ने उन्हे देखते पाया तो शर्मा के उनकी ओर पीठ कर ली & अपने ब्लाउस को बाहो मे डालने लगी.ऐसा करने से उसकी मस्त गंद भैया जी की निगाहो के सामने आ गयी.भैया जी ने तय कर लिया था कि नीना को वो अपनी रानी बना के रखेंगे & इसकी जो भी कीमत अदा करनी पड़े करेंगे.उन्होने अपना मोबाइल उठाया & 1 नंबर मिलाया.

"मैं जो कहता हू करो..उसे मैं समझा लूँगा.....कोई बात नही..उसे शाम को मेरे पास भेज देना..हां..नमस्कार.",नीना उनकी बातो को समझने की कोशिश करती हुई सारी कमर मे अटका रही थी की उन्होने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया.

"तुम्हार काम हो गया,जानेमन!",उन्होने उसके पेट को दबाते हुए उसके बाए कान पे काटा तो नीना चिहुनक उठी,"..अब तुम्हारा पति बद्डल से ज़रूर जीतेगा."

"मगर 1 मुश्किल तो अभी भी है.",नीना घूमी.उसके चेहरे पे परेशानी साफ झलक रही थी.भैया जी के सीने के बालो से खेलते हुए उसने चेहरा नीचे कर लिया.

"कैसी मुश्किल मेरी रानी?",भैया जी ने उसकी ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा उपर किया.

"मुकुल जीत भी गया तो क्या होगा सरकार तो जेठ जी की ही बनेगी.वो उसे कभी भी आगे नही बढ़ने देंगे.",मायूस नीना भैया जी को & भी प्यारी लगी.उन्होने उसे अपने आगोश मे भर लिया & उसके सर को चूम लिया.

"नही जीतेगा,नीना.",उन्होने अपना पाजामा उठा के उसमे पैर डाले तो नीना ने उनके हाथो से डोरी ले उसे बाँध दिया.उसकी इस हरकत से भैया जी और खुश हो गये.

"लेकिन कैसे?",नीना ने उनके जिस्म को बाहो मे बाँधा & उनके सीने पे सर टिका के उपर देखा.

"वो तुम मुझपे छ्चोड़ दो.",उन्होने अपना कुर्ता पहना & नीना के साथ बाहर आ गये.खाली हॉल मे वो काफ़ी देर उसे बाहो मे भींच चूमते रहे & उसके नाज़ुक अंगो को कपड़ो के उपर से ही छेड़ते रहे.

"अब बस कीजिए ना!",नीना उनके आगोश से निकल घर से बाहर आ गयी & अपनी कार मे बैठ गयी & एंजिन स्टार्ट किया.

"मैं रात 12 बजे फोन करूँगा."

"ओके.",नीना ने कार गियर मे डाली & वाहा से निकल गयी.

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ठीक 10 बजे सवेरे से सारे न्यूज़ चॅनेल्स पे प्रोफेसर का कहे मुताबिक फोन नंबर फ्लश होना शुरू हुआ & एंकर्स जसजीत प्रधान की ओर से 1 अपील पढ़ने लगे,"..अनीश प्रधान जिनके भी पास है वो इस नंबर पे फोन कर के अपनी माँग बताएँ.प्रधान जी यकीन दिलाते हैं कि उनकी माँगे पूरी करने की हर मुमकिन कोशिश करेंगे.उनकी दरखास्त है कि अनीश को कोई नुकसान ना पहुचाया जाए & स्क्रीन पे आ रहे नंबर पे बात करें.उस नंबर पे आनी वाली कॉल्स की जानकारी गुप्त रहेगी & कॉल करने वाले को कोई नुकसान नही पहुचाया जाएगा.ये भरोसा प्रधान जी उन्हे देना चाहते हैं.."

उसके 1 घंटे बाद तक तो कुच्छ नही हुआ मगर फिर 11 बजे से जो वो फोन बजना शुरू हुआ तो फिर रात के 12 बजे तक बजता ही रहा.उसकी दसो लाइन्स की सभी ऑपरेटर्स का बुरा हाल था.लगता था मानो पूरा डेवाले जानता था कि अनीश कहा है बस पोलीस को ही नही पता था!प्रोफेसर बंगल मे बैठा हर काल गौर से सुनता था & जैसे ही उसे लगता था कि काम की कॉल है वो अपना फोन उठा के कॉलर से बात करता था.पूरे दिन मे प्रोफेसर ने 15 बार अपना फोन उठाया मगर किसी भी बार असली किडनॅपर्स ने फोन नही किया था.

खबर मिलते ही दिव्या अजीत के साथ डेवाले के बाहर उस खेत मे जा पहुँची थी जहा वो जली हुई सुव मिली थी.प्रोफेसर के साथ नामित भट्ट बैठा था.फोरेन्सिक लॅब वाले इलाक़े की छनबीन कर चुके थे & उनके हाथ कुच्छ नही लगा था.जली हुई कार के ढाँचे को उठाके उन्ही के लॅब ले जाने की तैय्यारि हो रही थी.

"अंजलि प्रधान ने कहा था कि उस लड़के ने अनीश को कार से खींच के उसके मुँह पे अपना हाथ दबाया & फिर वॅन की ओर भागा फिर और लोग आ गये & उन्होने बच्चे को सुव मे खींच लिया & दोनो गाड़िया वाहा से निकल गयी.",अजीत जली कार को 1 रिकवरी ट्रक से बँधे जाता देख रहा था.

"कुच्छ गड़बड़ लगती है ना अजीत कि उस लड़के का चेहरा वाहा अंजलि,कॉंप्लेक्स के गार्ड & 1-2 लोगो ने देखा मगर वो 2 लोग चेहरा ढँके हुए थे."

"हूँ....यार ऐसे किडनॅप कौन करेगा?"

"मुझे कुच्छ और ही लगता है."

"क्या?"

"मुझे लगता है कि वो लड़का अनीश को किडनॅप कर रहा था जब किसी और ने उसे उस से छ्चीन लिया."

"यानी कि 2 लोग या 2 ग्रूप 1 ही बच्चे को शिकार करने 1 ही दिन 1 ही वक़्त पे आए थे?",अजीत हैरत से बोला.

"हां."

"दिव्या,ये बड़ी नामुमकिन सी बात लगती है."

"तो तुम्ही बताओ कि क्या हुआ होगा?"

"मेरी कुच्छ समझ मे नही आया.मैं तो बस ये चाहता हू कि 1 बार किडनॅपर्स कॉंटॅक्ट कर लें फिर कुच्छ तो रास्ता समझ मे आ ही जाएगा."

"मेरी बात मानो अजीत..",दिव्या जीप मे बैठ गयी तो अजीत ड्राइविंग सीट पे आ बैठा "कार स्टार्ट की,"..अगर कुच्छ ऐसा हुआ हो जो मुमकिन नही लगता तब नामुमकिन ही हुआ होगा."

"वाउ!राइटर के साथ रह के तुम भी राइटर जैसे बात करने लगी.",गाड़ी चलाता अजीत हंसा.अजीत ने मज़ाक किया था मगर दिव्या के चेहरे पे शर्म की लाली फैल गयी..क्या सचमुच प्रोफेसर दीक्षित का असर उसपे होने लगा था?..वो खिड़की से बाहर देखने लगी.उसे पता नही था पर उसके होंठो पे हल्की सी मुस्कान खेलने लगी थी.

अजीत ने देखा & उस पल अजीत समझ गया कि उसकी प्रेमिका प्रोफेसर के प्यार पे पड़ चुकी है.उसे बुरा लगा & प्रोफेसर से जलन भी हुई मगर अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया..आख़िर दिव्या उसकी बीवी नही थी की उसे केवल उसके साथ ही रिश्ता रखना था!उसने फिर से अपनी प्रेमिका को देखा & उसके हुस्न ने उसके दिल के सोए अरमानो को जगा दिया.वो सवेरे 6 बजे घर गया था & कुच्छ देर सोने के बाद 10 बजे के पहले वापस दफ़्तर आ गया था.अभी यहा आने से पहले भी उसे काफ़ी नींद आ रही थी मगर अब ऐसा कुच्छ नही था.

उसने जीप 1 पगडंडी पे उतार दी,"इधर कहा जा रहे हो?",उसने जीप पेड़ो के झुर्मूते के पीछे रोकी & दिव्या को बाहो मे खींच लिया & उसके चेहरे पे किस्सस की बौछार कर दी.

"पागल हो गये हो अजीत!",दिव्या छट-पटाई मगर उस से चिपकी रही,"..यहा कोई भी आ सकता है..ऊन्न्ह्ह..",अजीत ने उसकी कमीज़ उठाके उसकी पीठ & कमर को सहलाना शुरू कर दिया था & उसके गले को चूम रहा था.

"बस 1 बार करने दो दिव्या फिर ना जाने कब मौका मिले!",अजीत ने हाथ आगे लाके उसके शर्ट के बटन्स खोलने चाहे तो दिव्या ने उसके हाथ पकड़ लिए & आगे बढ़ उसके होंठो पे चूम लिया.कुच्छ देर तक वो उसकी ज़ुबान से अपनी ज़ुबान लड़ाती रही.

"अजीत,अभी नही.समझने की कोशिश करो.ना ये जगह ठीक है ना मौका.हम जल्द ही मिलेंगे.हूँ?",अजीत ने हाँ मे सर हिलाया & 1 बार फिर अपनी महबूबा को चूमा & फिर गाड़ी स्टार्ट कर वापस डेवाले की ओर मोड़ दी.

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"ये देखा तुमने ए?",बालू ने टीवी की ओर इशारा किया.सभी साथ बैठे टीवी देख रहे थे & सभी ने दस्ताने पहन रखे थे.अरशद की सख़्त हिदायत थी कि अपने कमरे & बाथरूम को छ्चोड़ & खाते वक़्त हर वक़्त सभी को दस्ताने पहनने थे ताकि काम ख़त्म होने के बाद जाने से पहले उंगलियो के निशान मिटाने मे उन्हे ज़्यादा तकलीफ़ ना हो.

अरशद ने केवल हां मे सर हिलाया.

"तो उसने तो हमने कहा था कि किडनॅप करने के बाद हम 1 दिन इंतेज़ार करेंगे & फिर बच्चे के घर पे उसके बाप को फोन करेंगे फिरौती के लिए मगर अब क्या करना है?"

"बच्चा क्या कर रहा है ई?"

"सो रहा है."

"मुझे शाम 5 बजे उस से मिलना है.देखता हू क्या बोलता है.सबने खाना खा लिया?",सभी ने हां मे जवाब दिया,"..ठीक है..अभी बेसमेंट मे बी & डी बैठ जाएँगे.मैं ई & सी आराम कर लेते हैं.2 घंटे बाद ई & सी की ड्यूटी होगी,बी & डी आराम करेंगे & मैं उस से मिलने जाऊँगा.",अरशद उठा & अपने कमरे मे चला गया.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--51

gataank se aage............-

"Sahab,ab main kya janu..",vo kisan jhalla gaya,"..1 to mera nuksan ho gaya upar se aap mujhpe hi shaq kar rahe hain."

"bhai,to tumhare khet me,tumhare jhonpde me aisi mehangi gadi jalegi to hum kya tumhare padosi se puchhenge!",policevale ne bhi usi ke andaz me jawab diya.

"to main aapko khud kyu khabar deta sahab iske bare me?",ab policevala khamosh tha.vaise bhi uske dimagh me kuchh chal raha tha.kal hi Jasjit Pradhan ka beta kidnap hua tha & police ko aaj tadke vo van bhi nil gayi thi jiski vo talash kar rahe the magar kal der raat wireless se ye khabar bhi aayi thi ki kidnapping ki jagah se us van ke alawe 2 aur bhari gadiya bhi nikli thi jaise koi SUV.

"hun.",usne apne register pe kuchh likha & apni jeep ki or badh gaya.

"patrol 756 to control room..",apne jeep ke wireless ko usne hatho me liya.

"control room,boliye 756.."

"meri position hai..",& us policevale ne sari jankari control room ko de di.

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Dipti Arshad ke god me baithi use choom rahi thi.arshad ke hath to uski tight jeans me kasi gand se jaise chipak hi gaye the!dono basement me Anish ke kamre ke bahar pehre pe the.tabhi dono ke kano me kisi ke rone ki aavaz aayi.

"lagta hai uth gaya.",dono ke honth juda hue & arshad ne jaldi se apna mask pehan liya.arshad ne 1 whiteboard uthaya & kamre ka darwaza khol andar dakhil hua & us white board ko deewar se tika ke uspe black marker se likhne laga.

"GHABRAO MAT.TUM BAS YAHA THODE DIN RAHOGE.VO BALTI TUMHARE TOILET KE LIYE HAI.",anish rona chhod board padhne laga.usne dekha 1 plastic ki balti vahi rakhi thi,"VO PANI KI BOTTLE ME PINE KA PANI HAI.THODI DER ME TUMHE KHANA MILEGA.",jab arshad ne dekha ki anish ne sab padh liya hai to usne board uthaya & bahar chala gaya.

anish ne subakte hue pani piya.vo bachcha tha magar itna bhi chhota nahi ki ye na samjhe ki use agwa kar liya gaya hai.pani pite hi use peshab laga & usne pehle band darwaze ko dekha.darwaze me 1 chhota sa slot jaisa bana tha lekin vaha se abhi koi dekh nahi raha tha.usne pant kholi & balti me peshab karne laga.us slot me lage kale shishe ke dusre taraf se arshad sab dekh raha tha.

use thoda bura laga anish ke masoom chehre ko dekh ke magar yehi uska kaam tha.vo vaha se ghuma to dekha ki dipti 1 tray leke aa rahi hai.usne us se tray liya & darwaza khol vapas andar gaya.gadde pe baitha bahut sehma anish use dekh raha tha.usne tray anish ke paas rakhi & uski balti uthake bahar gaya fir 1 dusri balti andar rakhi & sath me pani ki 1 bhari bottle bhi.vo darwaze ke paas aaya & board uthake uspe likha,"KHA LO.",& use anish ko dikhake fir se darwaza band kar diya.

anish ne tray pe se cover uthaya to garam khane ki khushbu uski naak se takrayi.tray me 1 horlicks ka mug,makkhan lage toast,2 uble ande,2 gulab jamun,4 slice fruit cake & 1 seb rakha tha.khana dekhte hi anish ki bhukh jag gayi.use umeed nahi thi ki ye bure log use itna badhiya khana denge.

"thank you.",usne darwaze ki or dekha & nashta karne laga.us masoom ne apne qaid karne walo ki ghulami manzoor kar li thi.

slot ke shishe se jhankte arshad & dipti ko kuchh galat lag raha tha magar dono ne apne dil ka ehsas apne sathi se nahi banta & jab 1 dusre ki or dekha to muskura diye.arshad ne apni mehbooba ko baaho me bhara & kursi pe baith use apni god me bitha liya & dono 1 baar fir 1 dusre ke nazuk ango se khelne lage.

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"oow..kya krte hain?..chhodiye na...haiiii..mera blouse to dijiye...un..hunh....!",Nina ka 1 sharmili,chhuimui hone ka natak Bhaiya ji ko pagal kiye ja raha tha.chudai ke baad usne apna bra pehan blouse dalne ki koshish ki to bhaiya ji ne blouse ko chheen liya tha & 1 baar fir uske bra ko neeche karne lage the.

"bahut der ho gayi hai..ohhhh..!",vo uski chhatiyo ko chus rahe the.nina ka dil to kar raha tha ki abhi aur thodi der apne is naye premi ki harkato ka lutf uthaye magar ab sach me der ho chuki thi & fir thoda sa tadpana bhi to zaruri tha tabhi to bhaiya ji uske kabu me rehte.

usne unke sar ko apne seene se alag kiya,"fir to milungi na!",usne unke gaalo pe pyar se chuma,"..thoda to sabr rakhiye.",vo bistar se utar gayi & apne kapde pehanane lagi.bhaiya ji ko bhi kaam tha.vo bistar pe lete-2 apne lund ko sehlate hue us haseena ko kapde pehante dekhne lage.

nina ne unhe dekhte paya to sharma ke unki or pith kar li & apne blouse ko baaho me dalne lagi.aisa krne se uski mast gand bhaiya ji ki nigaho ke samne aa gayi.bhaiya ji ne tay kar liya tha ki nina ko vo apni rani bana ke rakhenge & iski jo bhi keemat ada karni pade karenge.unhone apna mobile uthaya & 1 number milaya.

"main jo kehta hu karo..use main samjha lunga.....koi baat nahi..use sham ko mere paas bhej dena..haan..namaskar.",nina unki baato ko samjhne ki koshish karti hui sari kamar me atka rahi thi ki unhone use peechhe se baaho me bhar liya.

"tumhar kaam ho gaya,janeman!",unhone uske pet ko dabate hue uske baye kaan pe kata to nina chihunk uthi,"..ab tumhara pati Baddal se zarur jeetega."

"magar 1 mushkil to abhi bhi hai.",nina ghumi.uske chehre pe pareshani saaf jhalak rahi thi.bhaiya ji ke seene ke baalo se khelte hue usne chehra neeche kar liya.

"kaisi mushkil meri rani?",bhiya ji ne uski thuddi pakad uska chehra upar kiya.

"Mukul jeet bhi gaya to kya hoga sarkar to jeth ji ki hi banegi.vo use kabhi bhi aage nahi badhne denge.",mayus nina bhaiya ji ko & bhi payri lagi.unhone use apne agosh me bhar liya & uske sar ko chum liya.

"nahi jeetega,nina.",unhone apna pajama utha ke usme pair dale to nina ne unke hatho se dori le use bandh diya.uski is harkat se bhaiya ji aur khush ho gaye.

"lekin kaise?",nina ne unke jism ko baaho me bandha & unke seene pe sar tika ke upar dekha.

"vo tum mujhpe chhod do.",unhone apna kurta pehna & nina ke sath bahar aa gaye.khali hall me vo kafi der use baaho me bhinch chumte rahe & uske nazuk ango ko kapdo ke upar se hi chhedte rahe.

"ab bas kijiye na!",nina unke agosh se nikal ghar se bahar aa gayi & apni car me baith gayi & engine start kiya.

"main raat 12 baje fone karunga."

"ok.",nina ne car gear me dali & vaha se nikal gayi.

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thik 10 baje savere se sare news channels pe professor ka kahe mutabik fone number flash hona shuru hua & anchors Jasjit Pradhan ki or se 1 appeal padhne lage,"..Anish Pradhan jinke bhi paas hai vo is number pe fone kar ke apni mang batayen.pradhan ji yakin dilate hain ki unki mange puri karne ki har mumkin koshish karenge.unki darkhast hai ki anish ko koi nuksan na pahuchaya jaye & screen pe aa rahe number pe baat karen.us number pe aani vali calls ki jankari gupt rahegi & call karne vale ko koi nuksan nahi pahuchaya jayega.ye bharosa pradhan ji unhe dena chahte hain.."

uske 1 ghante baad tak to kuchh nahi hua magar fir 11 baje se jo vo fone bajna shuru hua to fir raat ke 12 baje tak bajta hi raha.uski daso lines ki sabhi operators ka bura haal tha.lagta tha mano pura Devalay janta tha ki anish kaha hai bas police ko hi nahi pata tha!professor bungle me baitha har caal gaur se sunta tha & jaise hi use lagta tha ki kaam ki call hai vo apna fone utha ke caller se baat karta tha.pure din me professor ne 15 baar apna fone uthaya magar kisi bhi baar asli kidnappers ne fone nahi kiya tha.

Khabar milte hi Divya Ajit ke sath Devalay ke bahar us khet me ja pahunchi thi jaha vo jali hui SUV mili thi.professor ke sath Namit Bhatt baitha tha.forensic lab vale ilake ki chhanbeen kar chuke the & unke hath kuchh nahi laga tha.jali hui car ke dhanche ko uthake unhi ke lab le jane ki taiyyari ho rahi thi.

"Anjali Pradhan ne kaha tha ki us ladke ne Anish ko car se khinch ke uske munh pe apna hath dabaya & fir van ki or bhaga fir aur log aa gaye & unhone bachche ko SUV me khinch liya & dono gaadiya vaha se nikal gayi.",ajit jali car ko 1 recovery truck se bandhe jata dekh raha tha.

"kuchh gadbad lagti hai na ajit ki us ladke ka chehra vaha anjali,complex ke guard & 1-2 logo ne dekha magar vo 2 log chehra dhanke hue the."

"hun....yaar aise kidnap kaun karega?"

"mujhe kuchh aur hi lagta hai."

"kya?"

"mujhe lagta hai ki vo ladka anish ko kidnap kar raha tha jab kisi aur ne use us se chheen liya."

"yani ki 2 log ya 2 group 1 hi bachche ko shikar karne 1 hi din 1 hi waqt pe aaye the?",ajit hairat se bola.

"haan."

"divya,ye badi namumkin si baat lagti hai."

"to tumhi batao ki kya hua hoga?"

"meri kuchh samajh me nahi aaya.main to bas ye chahta hu ki 1 baar kidnappers contact kar len fir kuchh to rasta samajh me aa hi jayega."

"meri baat mano ajit..",divya jeep me baith gayi to ajit driving seat pe aa baitha "car start ki,"..agar kuchh aisa hua ho jo mumkin nahi lagta tab namumkin hi hua hoga."

"wow!writer ke sath reh ke tum bhi writer jaise baat karne lagi.",gadi chalata ajit hansa.ajit ne mazak kiya tha magar divya ke chehre pe sharm ki lali fail gayi..kya sachmuch Professor Dixit ka asar uspe hone laga tha?..vo khidki se bahar dekhne lagi.use pata nahi tha par uske hotho pe halki si muskan khelne lagi thi.

ajit ne dekha & us pal ajit samajh gaya ki uski premika professor ke pyar pe pad chuki hai.use bura laga & professor se jalan bhi hui magar agle hi pal usne khud ko sambhal liya..aakhir divya uski biwi nahi thi ki use keval uske sath hi rishta rakhna tha!usne fir se apni premika ko dekha & uske husn ne uske dil ke soye armano ko jaga diya.vo savere 6 baje ghar gaya tha & kuchh der sone ke baad 10 baje ke pehle vapas daftar aa gaya tha.abhi yaha aane se pehle bhi use kafi nind aa rahi thi magar ab aisa kuchh nahi tha.

usne jeep 1 pagdandi pe utar di,"idhar kaha ja rahe ho?",usne jeep pedo ke jhurmute ke peechhe roki & divya ko baaho me khinch liya & uske chehre pe kisses ki bauchhar kar di.

"pagal ho gaye ho ajit!",divya chhatpatayi magar us se chipki rahi,"..yaha koi bhi aa sakta hai..oonnhh..",ajit ne uski kamiz uthake uski pith & kamar ko sehlana shuru kar diya tha & uske gale ko chum raha tha.

"bas 1 baar karne do divya fir na jane kab mauka mile!",ajit ne hath aage lake uske shirt ke buttons kholne chahe to divya ne uske hath pakad liye & aage badh uske hotho pe chum liya.kuchh der tak vo uski zuban se apni zuban ladati rahi.

"ajit,abhi nahi.samajhne ki koshish karo.na ye jagah thik hai na mauka.hum jald hi milenge.hun?",ajit ne haan me sar hilaya & 1 baar fir apni mehbooba ko chuma & fir gadi start kar vapas Devalay ki or mod di.

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"ye dekha tumne A?",Balu ne tv ki or ishara kiya.sabhi sath baithe tv dekh rahe the & sabhi ne dastane pehan rakhe the.Arshad ki sakht hidayat thi ki apne kamre & bathroom ko chhod & khate waqt har waqt sabhi ko dastane pehanane the taki kaam khatm hone ke baad jane se pehle ungliyo ke nishan mitane me unhe zyada taklif na ho.

arshad ne keval haan me sar hilaya.

"to usne to hume kaha tha ki kidnap karne ke baad hum 1 din intezar karenge & fir bachche ke ghar pe uske baap ko fone karenge firauti ke liye magar ab kya karna hai?"

"bachcha kya kar raha hai E?"

"so raha hai."

"mujhe sham 5 baje us se milna hai.dekhta hu kya bolta hai.sabne khana kha liya?",sabhi ne haan me jawab diya,"..thik hai..abhi basement me B & D baith jayenge.main E & C aaram kar lete hain.2 ghante baad E & C ki duty hogi,B & D aaram karenge & main us se milne jaoonga.",arshad utha & apne kamre me chala gaya.