खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 16:10

खेल खिलाड़ी का पार्ट--61

गतान्क से आगे............-

दिव्या को खबर नही थी कि मूसा के धोखेबाज़ आदमी की मदद से बल्लू भी अपने साथियो के साथ वाहा पहुच चुका था & इस वक़्त सबसे पीछे से उन सब पे नज़र रख रहा था.

"भाई,अंदर चल के उठा लेते हैं सबको."

"चुप,गधे!",बल्लू ने उसे झिड़का,"..कोई कुच्छ नही करेगा.पोलीस भी यहा है.छ्होटी सी भूल भी सारा खेल बिगाड़ सकती है.गाड़ी को इन झाड़ियो के पीछे लो & जब तक मैं ना काहु कोई कुच्छ नही करेगा."

ठीक उसी वक़्त दिव्या ने भी ऐसा ही किया,"देखो,ये लड़का जिसका नाम वरुण है प्रोफेसर दीक्षित के साथ है.कंट्रोल रूम को सारी बात बताओ & चाहे कुच्छ भी हो जाए,मेरे ऑर्डर के बिना कोई कुच्छ नही करेगा.इस लड़के को ज़रा भी भनक नही लगनी चाहिए की हमारी निगाह उसपे है.",सभी पोलीस वाले दम साधे अब बस इंतेज़ार कर रहे थे.

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"सर,ये आख़िरी घर बचा है.".इनस्पेक्टर ने अजीत को वो घर दिखाया जहा किडनॅपर्स अनीश के साथ छुपे थे,"मैं जाऊं इसे चेक करने?"

"चेक करने की क्या ज़रूरत है.देखो गेट पे इतना बड़ा ताला लगा है."

"यानी कि हम ग़लत थे,सर.वो इस इलाक़े मे है ही नही?"

"नही,मैने ऐसा तो नही कहा."

"मगर गेट पे ताला है सर."

"& गेट से बाहर आते गाड़ी के टाइयर्स के निशान भी हैं & वो देखो..",दोनो 1 मारुति आल्टो मे बैठे बंगल का चक्कर लगा रहे थे,"..रसोई का एग्ज़ॉस्ट फन चल रहा है."

"तो क्या करना है,सर?"

"हेलो.",ठीक उसी वक़्त अजीत का मोबाइल बजा.

"अजीत,अभी कुच्छ मत करना..",डीसीपी वेर्मा लाइन पे थे,"..दिव्या ने प्रोफेसर को ढूंड लिया है & ऐसा लगता है कि वो अकेला किडनॅपर्स से सौदा कर रहा है.तुम बस वाहा मुस्तैद रहो & मेरे ऑर्डर्स का इंतेज़ार करो."

"सर.",अजीत ने फोन बंद किया,"..इस बंगले को घेरो मगर ऐसे कि ना बाहर से अंदर जाने वाले को कुच्छ शक़ हो ना ही अंदर मौजूद लोगो को."

"ओके,सर."

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"हीरे कहा हैं?",नक़ाब पहने अरशद प्रोफेसर के सामने आया.

"बच्चा कहा है?"

"देखो,होशियारी मत करो वरना.."

"वरना मुझे पता है,तुम भी मेरे पीछे से आ रहे अपने साथी को कहो कि ज़्यादा नज़दीक ना आए वरना..",प्रोफेसर ने अपनी जॅकेट को पकड़ फैलाया तो अरशद की ज़ुबान सूख गयी & उसने प्रोफेसर के पीछे से आ रहे बालू को रुकने का इशारा किया.प्रोफेसर के पेट पे 2 करीब 4 इंच के स्टील पाइप्स बँधे थे जिनमे से वाइर्स निकलते दिख रहे थे.

"ये क्या मज़ाक है?",अरशद गुस्से से बोला.

"मज़ाक नही बॉम्ब है.1 करोड़ के हीरे ऐसे ही चाहिए तुम्हे.मैने पाइप्स मे एक्सप्लोसिव्स भरे हैं & मेरी जॅकेट की बाई बाज़ू के अंदर से इसका बटन मेरे हाथ मे ये है.",प्रोफेसर ने अपनी बाई हथेली खोली,"..बच्चा दो & हीरे लो."

"ठीक है तुम हमे हीरे दो & मैं तुम्हे कल बच्चा दे दूँगा."

"क्या भाई!",प्रोफेसर हंसा,"..तुम्हे खुद भी अपनी बात पे यकीन हो रहा है!नही,1 हाथ दो दूसरे हाथ लो.या फिर.."

"या फिर क्या?"

"मुझे अपने साथ ले चलो."

"& अपनी मौत बुला लो?",अरशद हंसा,"तुम मुझे क्या इतना बड़ा गधा समझते हो!"

"बिल्कुल नही.तुम्हारे जैसे दिमागदार इंसान कम ही नज़र आते हैं.मगर अभी तो तुम्हे मुझपे भरोसा करना ही पड़ेगा.मैं इसी कारण से पोलीस से भाग के यू अकेला आया हू ताकि तुम्हे कोई ख़तरा ना रहे & फिर बच्चा भी महफूज रहे."

"हूँ..",अरशद ने प्रोफेसर के पीछे खड़े बालू को आँखो से इशारा किया,"ठीक है.हाथ पीछे करो."

"& अपना तुरुप का पत्ता तुम्हे सौंप दू.नही,भाई.मेरी आँखो पे पट्टी बाँध दो मगर मेरे हाथ बाँधने की मत सोचो वरना हम तीनो ये गुफ्तगू उपरवाले के दरबार मे कर रहे होंगे."

"ठीक है.",थोड़ी देर बाद दोनो के बीच पट्टी बाँधे चलता प्रोफेसर वरुण को नज़र आया तो वो भागा & फ़ौरन उस गाड़ी मे बैठ गया जिस से वाहा आया था.इधर बालू & अरशद के साथ प्रोफेसर 1 कार मे निकला मगर अरशद ने कोई कच्ची गोलिया तो खेली नही थी.उसके कहे मुताबिक पहले से ही तैयार देव 1 गाड़ी मे उनके पीछे चलने लगा.वरुण उनके पीछे लग गया.

"कार स्टार्ट करो मगर ध्यान रहे उन्हे हम नज़र नही आने चाहिए.",दिव्या अपनी टीम के साथ इन तीनो गाडियो के पीछे चल दी & सबसे आख़िर मे बल्लू इन सबका पीछा करने लगा.

"सब तैयार रहो.वो यही आ रहे हैं.",अजीत ने अपनी टीम को वाइर्ले से मुस्तैद किया & गौर से बंगल तक आने वाली सड़क को देखने लगा.कुच्छ ही देर बाद उसने देखा कि अरशद की कार वाहा आई जिसमे से बालू ने उतर के आस-पास का मुआयना किया & गेट का ताला खोल गाड़ी को अंदर जाने दिया मगर उसने गेट लॉक नही किया.थोड़ी देर बाद देव भी वाहा पहुँचा & थंब्स अप का इशारा किया इस बात से बेख़बर की पोलीस & बल्लू दोनो उनके पीछे हैं.दोनो ने गेट लॉक किया & अंदर चले गये.

"सर,क्या मैं अंदर जाऊं?",अजीत ने डीसीपी वेर्मा से पुचछा.

"नही,अजीत.मुझे लगता है कि प्रोफेसर के बाहर आने का इंतेज़ार करना चाहिए."

"सर,कही देर ना हो जाए."

"सब्र रखो,अजीत."

"मगर सर..अरे..सर.मैं अभी आपसे बात करता हू.",अजीत ने वाइर्ले नीचे रखा.उसने बल्लू को देख लिया था,"ये यहा क्या कर रहा है.आज तो अच्छा दिन लगता है.",उसने साथ के इनस्पेक्टर से कहा,"..बच्चा तो मिलेगा ही साथ मे ये कुम्भात का दामाद भी हाथ आने वाला लगता है."

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"बॉम्ब खोलो & हीरे दो.हमे उन्हे परखना है कि वो असली हैं या फिर शीशे के मामूली टुकड़े."

"बच्चा कहा है?",अरशद उसे बेसमेंट मे ले गया & दरवाज़ा खोल के दिखाया.

"ठीक है.ये रहे हीरे.तसल्ली कर लो.",प्रोफेसर ने पोटली उसे थमायी & कमरे मे घुस गया & अपनी जक्सेट उतार दी,"..ये लो बॉम्ब.उसने पाइप्स & तार अपने जिस्म से अलग किए& लापरवाही से अरशद की ओर उच्छल दिया तो वो घबरा के 2 कदम पीछे हटा तो प्रोफेसर हंसा,"..नक़ली है,भाई."

अरशद ने जेब से बंदूक निकाल के सामने तानी तो प्रोफेसर ने हाथ उठा दिए,"घूम जाओ.",नक़ाब पहने दीप्ति वाहा आई & उसने प्रोफेसर के हाथ नीचे कर बाई मे 1 हथकड़ी डाली जिसके दूसरे सिरे पे 1 मज़बूत चैन थी.,चैन के दूसरे सिरे पे 1 & हथकड़ी थी जिसके सिरे को उसने उसी रोड मे बाँधा जिसमे अनीश का पैर बाँधा था.दास्तानो के बावजूद प्रोफेसर समझ गया था कि वो कोई लड़की है & अब उसे यकीन हो गया था कि सेठ मोहन लाल के यहा डकैती करने वाला गॅंग ही अभी उसके सामने था.दीप्ति उसे बाँधने के बाद दरवाजा बंद कर चली गयी.

"बेटा,घबराना मत.मुझे तुम्हारे पापा ने भेजा है तुम्हे घर लाने को.",उसने सहमे अनीश को समझाया मघर वो बेचारा उसपे भरोसा नही कर पा रहा था.तब प्रोफेसर ने उसे उसके बचपन की वो तमाम बाते बताई जो जसजीत प्रधान ने उसे बताई थी.थोड़ी ही देर मे अनीश का डर कम हो गया था.

"अंकल,हम यहा से कब जाएँगे?"

"बस बेटा,आज शाम तक.",प्रोफेसर जानता था कि हीरे परखने मे इतना वक़्त तो लगेगा ही.

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"भाई,अंदर चलें?"

"नही,अभी नही.उस प्रोफेसर को बाहर आता दिखने दो फिर तुम मे से 2 लोग उस पोलिसेवली को उलझाना & हम सब उनलोगो से हीरे & बच्चा,दोनो छ्चीन लेंगे."

अजीत का दिमाग़ बड़ी तेज़ी से घूम रहा था.जिसने भी अनीश को किडनॅप किया था वो तो बस मोहरा थे.चाल कोई और चल रहा था & वो जानता था कि CM अत्रे के सिवा वो और कोई नही हो सकता.रघु कुम्भात उर्फ बाबा पे उसने आज तक हाथ नही डालने दिया था & आज जहा बच्चा क़ैद था,उस घर के बाहर उसका दाया हाथ माना जाने वाला बल्लू खड़ा था.1 बार बच्चा सही-सलामत मिल जाए फिर वो इस घिनोने खेल के खिलाड़ियो को क़ानून के शिकंजे मे जाकड़ के रहेगा.

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वरुण की समझ मे नही आ रहा था कि वो आख़िर यहा बैठा कितनी देर तक इंतेज़ार करे,प्रोफेसर ने उस से कहा था की ख़तरे की सूरत मे वो उसे कोई ना कोई इशारा ज़रूर करेगा लेकिन कही उन सबने प्रोफेसर को मौका दिए बिना उसका काम तमाम कर दिया हो तो?..उसने अपनी जेब मे रखी पिस्टल को च्छुआ & सोचा कि बस घर मे घुस जाए लेकिन प्रोफेसर ने उसे सख़्त हिदायत दी थी कि वो उस पिस्टल का इस्तेमाल आख़िरी रास्ते के तौर पे करेगा.उसने खुद को संभाला & घर की ओर देखने लगा.

सभी पोलिसेवालो का भी यही हाल था.सभी घर पे धावा बोलना चाहते थे मगर अनीश का ख़याल आते ही वो रुक जाते थे.

और घर के अंदर आँखो पे सुनरो का लेंस लगाए देव 1-1 हीरे को बारीकी से परख रहा था.दोपहर बाद 3 बजे उसने लेंस उतारा & अरशद की ओर देख के सर हिलाया.हीरे बिल्कुल असली थे.सभी घर से निकलने की तैइय्यारी करने लगे.दीप्ति & चार्ली समान बाँधने लगे & अरशद & बालू ये तसल्ली करने मे लग गये कि घर मे उन्होने कोई सुराग तो नही छ्चोड़ा था.देव हीरो को 5 हिस्सो मे कर अलग-2 पोटलियो मे बाँधने लगा.आधे घंटे मे सब तैय्यार थे.अरशद ने उस आर्म्स डीलर के दिए कपड़े & जूते उठाए & अनीश के पास चला गया.सारे गॅंग मेंबर्ज़ हॉल मे शांत बैठे थे.वो जताना नही चाह रहे थे मगर सभी के दिल ज़ोरो से धड़क रहे थे & मन ही मन सब यही दुआ कर रहे थे कि बस अब सब कुच्छ ठीक-तक ख़त्म हो जाए.

"क्या?!..कब?..ओह्ह..!..तो मैं क्या करू,सर?",दिव्या & अजीत दोनो को 1 साथ ही 1 बहुत ही चौंकाने वाली खबर मिली.

"कुच्छ नही,अजीत.तुम वही डटे रहो.",डीसीपी वेर्मा ने ऑर्डर दिया.

"सर,मुझे बंगले के अंदर का दरवाज़ा खुलता दिख रहा है.मैं देखने जा रहा हू.",उसने ऑपरेटर को वाइर्ले थमाया & आगे बढ़ने की सोचने लगा.बंगले के बाहर 1 फ्रेंच कट दाढ़ी वाला शख्स खड़ा था & अंदर से बालू & देव उस से मिलने & बाहर का मुआयना करने निकले थे.ये वाजी आर्म्स डीलर था जिसकी तलाश अजीत को अपनी पिच्छली पोस्टिंग से थी.अब उसकी समझ मे सारा खेल आ गया था,CM & अवस्थी ने इसी के ज़रिए इस गॅंग से किडनॅपिंग करवाई थी.

"चलो!",गेट खुलते देख बल्लू चिल्लाया & 4 गुंडे दिव्या की टीम की ओर गोलिया चलाते जबकि वो खुद 5 लोगो के साथ बंगल की ओर भागा.अगले ही पल बालू & देव वही ढेर थे.

"पहले एसीपी दिव्या की टीम को मुसीबत से निकालो.",अजीत ने अपनी टीम को ऑर्डर दिया & गुणडो पे पीछे से गोलिया बरसानी शुरू कर दी.तब तक बल्लू बंगले के अंदर था मगर वाहा उसका सामना अरशद,दीप्ति & चार्ली की गोलीबारी से हुआ.

"अंकल..",अनीश रोने लगा.वो नये कपड़े पहन चुका था.

"कुच्छ नही होगा,बेटा.मैं हूँ ना.",प्रोफेसर ने उसे गोद मे उठाया & बेसमेंट से निकला.ठीक उसी वक़्त वरुण सभी की नज़र बचा के पीछे की दीवार फाँद अंदर घुसा.बल्लू का 1 गुरगा उसके सामने आ गया & उसपे गोली चलानी ही चाही कि वरुण ने अपने हाथ मे पकड़े रिवॉलव का घोड़ा दबा दिया.गोली सीधा बदमाश के सीने के पार हो गयी & वो कटे पेड़ की तरह गिर गया.वरुण का पूरा बदन कांप रहा था & वो पसीने से नहा गया था,ये पहला मौका था जब उसने किसी इंसान की जान ली थी.

शोरॉगुल से वो वापस होश मे आया & घर मे दाखिल हुआ.अंदर तो जैसे जंग के मैदान का नज़ारा था.बल्लू के 2 आदमी मर चुके थे जबकि चार्ली भी मौत की नींद सो चुका था.प्रोफेसर ने वरुण को 1 कमरे की आड़ मे खड़े देखा तो उसे बाहर जाने का इशारा किया मगरा तब तक गुन्दो से निबट के पोलीस के दोनो जाँबाज़ अफ़सर अपनी टीम्स के साथ घर पे धावा बोल चुके थे.

किसी की कुच्छ समझ मे नही आ रहा था बस अपने दुश्मन को देखते बंदूक का घोड़ा दबा रहे थे.प्रोफेसर ने अपने जिस्म को ढाल बना के अनीश के सामने लगाया & वाहा से निकलने लगा कि तभी उस आर्म्स डीलर ने उसे दबोच लिया.अनीश को छ्चोड़ प्रोफेसर उस से गुत्थम-गुत्था हो गया.उसने उसे फर्श पे पटका & सीने पे कुच्छ मुक्के बरसाए & फिर उसे उठाके वाहा हॉल मे फेंक दिया जहा गोलीबारी हो रही थी.उसने धुएँ के बीच बस इतना देखा कि उस हथियारपोश को 1 गोली लगी उसने अनीश को थामा & 1 बंद खिड़की को लात मारा खोला & बाहर कूद गया.

वो जानता था की इस वक़्त सभी बौखलाए हैं & अनीश पोलीस की गोली का भी शिकार बन सकता है.वो बंगल के पीछे की ओर जा ही रहा था कि उसके सर पे पीछे से वार हुआ & वो गिर पड़ा.बल्लू ने उसे 2-3 लाते जमाई & अनीश को उठा वाहा से भागा.

"उस्ताद,अंदर मरे आदमी से ये पोटली मिली है.",बल्लू ने उस से चार्ली के हिस्से के हीरे लिए & वाहा से गोलिया डॉड्ज करता बाहर अपनी गाड़ी मे भागा.प्रोफेसर उसके पीछे दौड़ा मगर बल्लू बहुत तेज़ था.प्रोफेसर गाड़ी का पीछा करने लगा मगर उसके हाथ बस पीछे लगा लोहे क्रॅश गार्ड ही आ पाया.उसे थामे प्रोफेसर सड़क पे तेज़ चल रही गाड़ी के साथ घिसटने लगा.

"सर,वो बच्चे को प्रोफेसर से छ्चीन भाग रहा है.",1 इनस्पेक्टर ने सभी को सावधान किया तो अजीत & दिव्या बल्लू के बचे-खुचे गोली चलाते गुणडो से उसे वाहा निबटने को छ्चोड़ 1 पोलीस जीप की ओर दौड़े.अजीत ड्राइव करने लगा & दिव्या ने अपनी पिस्टल निकाल ली.

"वो अजीत..वो वरुण की वॅन है..वरुण भी अपनी गाड़ी से बल्लू के पीछे लगा था,"उसी के पीछे चलो.",बल्लू अपनी कार डेवाले से बाहर डेवाले की पहाड़ियो की ओर ले जा रहा था.प्रोफेसर ने 1 मोड़ पे गाड़ी के थोड़ा धीमा होते ही उसे छ्चोड़ दिया & जल्दी से पीछे आ रही वरुण की वॅन मे सवार हो गया.घुमावदार रस्तो कभी ऊँचे हो रहे थे कभी नीचे ऐसे ही 1 रास्ते पे प्रोफेसर वरुण को बल्लू के पीछे लगे रहने का इशारा कर वॅन से कूद गया.दरअसल बल्लू बहुत चालाक था,पहले तो उसने अपनी गाड़ी 1 पहाड़ी पे चढ़ाना शुरू कर दिया & जब पीछे आती दोनो गाड़ियाँ उसके पीछे चढ़ाई चढ़ने लगी तो उसने 1 कच्चे रास्ते पे गाड़ी उतार उसे फिर से वापस उधर मोड़ दिया जिधर से आया था.अब बाकी दोनो गाडिया उसकी तरह उसी कच्चे रास्ते से उतरने मे नाकामयाब रही & उन्हे गाड़ी घुमाने मे देर लगी.ये देख प्रोफेसर वॅन से कूद गया & कच्चे रास्ते पे भागने लगा.

और जैसे ही बल्लू की गाड़ी उसे अपने नीचे आती दिखाई दी,अपनी ख़ैरियत की परवाह किए बिना प्रोफेसर उसपे कूद गया.बल्लू ने छत पे उसके गिरने की आवाज़ सुनते ही गाड़ी को बुरी तरह घुमाना शुरू किया मगर प्रोफेसर अब गुस्से से भरा था.अपने जेब से 1 रुमाल निकाल उसने हाथ पे बँधा & 3-4 मुक्को मे ही पीछे का 1 खिड़की का शीशा तोड़ दिया & अगले ही पल वो गाड़ी के अंदर था.

मगर अंदर घुसते ही प्रोफेसर को 1 बड़ी हल्की घड़ी चलने की आवाज़ सुनाई दी & उसके कान खड़े हो गये.बल्लू को पीछे से दाए हाथ से मारते हुए वो बाए से अनीश के कपड़े टटोलने लगा कि उसका ध्यान अनीश के पैर के जूते पे गया.

"बेटा,जूते उतार!",वो चिल्लाया,"..जूते उतार बेटा!",अनीश बस रोए जा रहा था मगर फिर भी उसने अपने अंकल की बात मानी.पीछे से प्रोफेसर अपने दाए बाज़ू से बल्लू का गला दबा रहा था मगर वो भी कम दिलेर नही था बाए से उसकी गिरफ़्त कमज़ोर करने की कोशिश करता दाए से स्टियरिंग संभाले उसने गाड़ी की रफ़्तार बढ़ा दी थी.

प्रोफेसर ने बाए हाथ से 1 जूते को उठा उसके सोल को खोला,"गाड़ी रोक,बच्चे के पास बॉम्ब है!",वो चिल्लाया.टाइमर मे बस चंद सेकेंड दिख रहे थे.बल्लू ने उसकी 1 ना सुनी & उसका हाथ अपनी गर्दन से झटकते हुए आक्सेलरटोर को कार के फर्श से सटा दिया.

"ये क्या हो रहा है!",दिव्या & अजीत परेशान थे.अब वरुण उनके पीछे हो गया था & उसका दिल भी ज़ोरो से धड़क रहा था.गाड़ी अगले मोड़ पे आँखो से ओझल हो गयी थी कि तभी ज़ोर का धमाका हुआ.दोनो ड्राइवर्स ने जल्दी ब्रेक लगाया.

तीनो उतरे & उस आग के गोले की ओर भागे.सामने का नज़ारा देख उनके हलक सुख गये.बल्लू की गाड़ी के परखच्चे उड़ गये थे.बॉम्ब ने गाड़ी के पेट्रोल टॅंक को भी 1 बॉम्ब मे तब्दील कर दिया था & तभी ऐसा ज़ोर का धमाका हुआ था.

अजीत सर पे हाथ रख के बैठ गया जबकि दिव्या की आँखो से आँसू बह चले.वरुण ज़ोर से चिल्लाता जलती गाड़ी की ओर भागा.अजीत के अंदर जैसे उस बॉम्ब ने 1 ज्वालामुखी का मुँह खोल दिया था.वो उठा & अपनी गाड़ी मे बैठ गया.उसे अब किसी चीज़ की परवाह नही थी.1 मासूम को सत्ता की हवस के खेल मे बलि का मोहरा बनाया गया था & अब उस खिलाड़ी को खेल जीतने की सज़ा मिलेगी.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--61

gataank se aage............-

Divya ko khabar nahi thi ki Musa ke dhokhebaz aadmi ki madad se Ballu bhi apne sathiyo ke sath vaha phunch chuka tha & is waqt sabse peechhe se un sab pe nazar rakh raha tha.

"bhai,andar chal ke utha lete hain sabko."

"chup,gadhe!",ballu ne use jhidka,"..koi kuchh nahi karega.police bhi yaha hai.chhoti si bhul bhi sara khel bigaad sakti hai.gadi ko in jhadiyo ke peechhe lo & jab tak main na kahu koi kuchh nahi karega."

thik usi waqt divya ne bhi aisa hi kiya,"dekho,ye ladka jiska naam Varun hai Professor Dixit ke sath hai.control room ko sari baat batao & chahe kuchh bhi ho jaye,mere order ke bina koi kuchh nahi karega.is ladke ko zara bhi bhanak nahi lagni chahiye ki humari nigah uspe hai.",sabhi police vale dum sadhe ab bas intezar kar rahe the.

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"sir,ye aakhiri ghar bacha hai.".inspector ne Ajit ko vo ghar dikhaya jaha kidnappers Anish ke sath chhupe the,"main jaoon ise check karne?"

"check karne ki kya zarurat hai.dekho gate pe itna bada tala laga hai."

"yani ki hum galat the,sir.vo is ilake me hai hi nahi?"

"nahi,maine aisa to nahi kaha."

"magar gate pe tala hai sir."

"& gate se bahar aate gadi ke tyres ke nishan bhi hain & vo dekho..",dono 1 Maruti Alto me baithe bungle ka chakkar laga rahe the,"..rasoi ka exhaust fan chal raha hai."

"to kya karna hai,sir?"

"hello.",thik usi waqt ajit ka mobile baja.

"ajit,abhi kuchh mat karna..",DCP Verma line pe the,"..divya ne professor ko dhoond liya hai & aisa lagta hai ki vo akela kidnappers se sauda kar raha hai.tum bas vaha mustaid raho & mere orders ka intezar karo."

"sir.",ajit ne fone band kiya,"..is bungle ko ghero magar aise ki na bahar se andar jane vale ko kuchh shaq ho na hi andar maujood logo ko."

"ok,sir."

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"heere kaha hain?",naqab pehne Arshad professor ke samne aaya.

"bachcha kaha hai?"

"dekho,hoshiyari mat karo varna.."

"varna mujhe pata hai,tum bhi mere peechhe se aa rahe apne sathi ko kaho ki zyada nazdik na aaye varna..",professor ne apni jacket ko pakad failaya to arshad ki zuban sukh gayi & usne professor ke peechhe se aa rahe Balu ko rukne ka ishara kiya.professor ke pet pe 2 karib 4 inch ke steel pipes bandhe the jinme se wires nikalte dikh rahe the.

"ye kya mazak hai?",arshad gusse se bola.

"mazak nahi bomb hai.1 crore ke heere aise hi chahiye tumhe.maine pipes me explosives bhare hain & meri jacket ki bayi bazu ke andar se iska button mere hath me ye hai.",professor ne apni bayi hatheli kholi,"..bachcha do & heere lo."

"thik hai tum hume heere do & main tumhe kal bachcha de dunga."

"kya bhai!",professor hansa,"..tumhe khud bhi apni baat pe yakin ho raha hai!nahi,1 hath do dusre hath lo.ya fir.."

"ya fir kya?"

"mujhe apne sath le chalo."

"& apni maut bula lu?",arshad hansa,"tum mujhe kya itna bada gadha samajhte ho!"

"bilkul nahi.tumhare jaise dimaghdar insan kam hi nazar aate hain.magar abhi to tumhe mujhpe bharosa karna hi padega.main isi karan se police se bhag ke yu akela aya hu taki tumhe koi khatra na rahe & fir bachcha bhi mehsuz rahe."

"hun..",arshad ne professor ke peechhe khade balu ko aankho se ishara kiya,"thik hai.hath peechhe karo."

"& apna turup ka patta tumhe saunp du.nahi,bhai.meri aankho pe patti bandh do magar mere hath bandhne ki mat socho varna hum teeno ye guftgu uparwale ke darbar me kar rahe honge."

"thik hai.",thodi der baad dono ke beech patti bandhe chalta professor varun ko nazar aaya to vo bhaga & fauran us gadi me baith gaya jis se vaha aya tha.idhar balu & arshad ke sath professor 1 car me nikla magar arshad ne koi kachchi goliya to kheli nahi thi.uske kahe mutabik pehle se hi taiyar Deva 1 gadi me unke peechhe chalne laga.varun unke peechhe lag gaya.

"car start karo magar dhyan rahe unhe hum nazar nahi aane chahiye.",divya apni team ke sath in teeno gadiyo ke peechhe chal di & sabse aakhir me ballu in sabka peechha karne laga.

"sab taiyar raho.vo yehi aa rahe hain.",ajit ne apni team ko wireless se mustaid kiya & gaur se bungle tak aane vali sadak ko dekhne laga.kuchh hi der baad usne dekha ki arshad ki car vaha aayi jisme se balu ne utar ke aas-paas ka muayana kiya & gate ka tala khol gadi ko andar jane diya magar usne gate lock nahi kiya.thodi der baad deva bhi vaha pahuncha & thumbs up ka ishara kiya is baat se bekhabar ki police & ballu dono unke peechhe hain.dono ne gate lock kiya & andar chale gaye.

"sir,kya main andar jaoon?",ajit ne DCP Verma se puchha.

"nahi,ajit.mujhe lagta hai ki professor ke bahar aane ka intezar karna chahiye."

"sir,kahi der na ho jaye."

"sabr rakho,ajit."

"magar sir..are..sir.main abhi aapse baat karta hu.",ajit ne wireless neeche rakha.usne ballu ko dekh liya tha,"ye yaha kya kar raha hai.aaj to achha din lagta hai.",usne sath ke inspector se kaha,"..bachcha to milega hi sath me ye Kumbhat ka damad bhi hath aane vala lagta hai."

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"bomb kholo & heere do.hume unhe parakhna hai ki vo asli hain ya fir sheeshe ke mamuli tukde."

"bachcha kaha hai?",arshad use basement me le gaya & darwaza khol ke dikhaya.

"thik hai.ye rahe heere.tasalli kar lo.",professor ne potli use thamayi & kamre me ghus gaya & apni jakcet utar di,"..ye lo bomb.usne pipes & taar apne jism se alag kiye& laparwahi se arshad ki or uchhal diya to vo ghabra ke 2 kadam peechhe hata to professor hansa,"..naqli hai,bhai."

arshad ne jeb se banduk nikal ke samne tani to professor ne hath utha diye,"ghum jao.",naqab pehne Dipti vaha aayi & usne professor ke hath neeche kar bayi me 1 hathkadi dali jiske dusre sire pe 1 mazbut chain thi.,chain ke dusre sire pe 1 & hathkadi thi jiske sire ko usne usi rod me bandha jisme anish ka pair bandha tha.dastano ke bavjood professor samajh gaya tha ki vo koi ladki hai & ab use yakin ho gaya tha ki Seth Mohan Lal ke yaha dacoity karne vala gang hi abhi uske samne tha.dipti use bandhne ke baad darwza band kar chali gayi.

"beta,ghabrana mat.mujhe tumhare papa ne bheja hai tumhe gahr lane ko.",usne sehme anish ko samjhaya maghar vo bechara uspe bharosa nahi kar pa raha tha.tab professor ne use uske bachpan ki vo tamam baate batayi jo Jasjit Pradhan ne use batayi thi.thodi hi der me anish ka darr kam ho gaya tha.

"uncle,hum yaha se kab jayenge?"

"bas beta,aaj sham tak.",professor janta tha ki heere parakhne me itna waqt to lagega hi.

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"bhai,andar chalen?"

"nahi,abhi nahi.us professor ko bahar aata dikhne do fir tum me se 2 log us policevali ko uljhana & hum sab unlogo se heere & bachcha,dono chheen lenge."

ajit ka dimagh badi tezi se ghum raha tha.jisne bhi anish ko kidnap kiya tha vo to bas mohra the.chaal koi aur chal raha tha & vo janta tha ki CM Atre ke siwa vo aur koi nahi ho sakta.Raghu Kumbhat urf Baba pe usne aaj tak hath nahi dalne diya tha & aaj jaha bachcha qaid tha,us ghar ke bahar uska daya hath mana jane wala ballu khada tha.1 baar bachcha sahi-salamat mil jaye fir vo is ghinone khel ke khiladiyo ko kanoon ke shikanje me jakad ke rahega.

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varun ki samjh me nahi aa raha tha ki vo aakhir yaha baitha kitni der tak intezar kare,professor ne us se kaha tha ki khatre ki surat me vo use koi na koi ishara zarur karega lekin kahi un sabne professor ko mauka diye bina uska kaam tamam kar diya ho to?..usne apni jeb me rakhi pistol ko chhua & socha ki bas ghar me ghus jaye lekin professor ne use sakht hidayat di thi ki vo us pistol ka istemal aakhiri raste ke taur pe karega.usne khud ko sambhala & ghar ki or dekhne laga.

sabhi policevalo ka bhi yehi haal tha.sabhi ghar pe dhava bolna chahte the magar anish ka khayal aate hi vo ruk jate the.

aur ghar ke andar aankho pe sunaro ka lens lagaye deva 1-1 heere ko bariki se parakh raha tha.dopahar baad 3 baje usne lens utara & arshad ki or dekh ke sar hilaya.heere bilkul asli the.sabhi ghar se nikalne ki taiyyari karne lage.dipti & Charlie saman baandhane lage & arshad & balu ye tasalli karne me lag gaye ki ghar me unhone koi surag to nahi chhoda tha.deva heero ko 5 hisso me kar alag-2 potliyo me bandhne laga.aadhe ghante me sab taiyyar the.arshad ne us arms dealer ke diye kapde & jute uthaye & anish ke paas chala gaya.sare gang members hall me shant baithe the.vo jatana nahi chah rahe the magar sabhi ke dil zoro se dhadak rahe the & man hi man sab yehi dua kar rahe the ki bas ab sab kuchh thik-thak khatm ho jaye.

"Kya?!..kab?..ohh..!..to main kya karu,sir?",Divya & Ajit dono ko 1 sath hi 1 bahut hi chaunkane vali khabar mili.

"kuchh nahi,ajit.tum vahi date raho.",DCP Verma ne order diya.

"sir,mujhe bungle ke andar ka darwaza khulta dikh raha hai.main dekhne ja raha hu.",usne operator ko wireless thamaya & aage badhne ki sochne laga.bungle ke bahar 1 french cut dadhi wala shakhs khada tha & andar se Balu & Deva us se milne & bahar ka muayana karne nikle the.ye vajhi arms dealer tha jiski talash ajit ko apni pichhli posting se thi.ab uski samajh me sara khel aa gaya tha,CM & Awasthi ne isi ke zariye is gang se kidnapping karwayi thi.

"chalo!",gate khulte dekh Ballu chillaya & 4 gunde divya ki team ki or goliya chalate jabki vo khud 5 logo ke sath bungle ki or bhaga.agle hi pal balu & deva vahi dher the.

"pehle ACP divya ki team ko musibat se nikalo.",ajit ne apni team ko order diya & gundo pe peechhe se goliya barsani shuru kar di.tab tak ballu bungle ke andar tha magar vaha uska samna Arshad,Dipti & Charlie ki golibari se hua.

"uncle..",Anish rone laga.vo naye kapde pehan chuka tha.

"kuchh nahi hoga,beta.main hoon na.",professor ne use god me uthaya & basement se nikla.thik usi waqt Varun sabhi ki nazar bacha ke peechhe ki deewar phand andar ghusa.ballu ka 1 gurga uske samne aa gaya & uspe goli chalani hi chahi ki varun ne apne hath me pakde revolver ka ghoda daba diya.goli seedha badmash ke seene ke paar ho gayi & vo kate ped ki tarah gir gaya.varun ka pura badan kanp raha tha & vo paseene se naha gaya tha,ye pehla mauka tha jab usne kisi insan ki jaan li thi.

shorogul se vo vapas hosh me aaya & ghar me dakhil hua.andar to jaise jung ke maidan ka nazara tha.ballu ke 2 aadmi mar chuke the jabki charlie bhi maut ki nind so chuka tha.professor ne varun ko 1 kamre ki aad me khade dekha to use bahar jane ka ishara kiya magara tab tak gundo se nibat ke police ke dono jaanbaz afsar apni teams ke sath ghar pe dhawa bol chuke the.

kisi ki kuchh samajh me nahi aa raha tha bas apne dushman ko dekhte banduk ka ghoda daba rahe the.professor ne apne jism ko dhaal bana ke anish ke samne lagaya & vaha se nikalne laga ki tabhi us arms dealer ne use daboch liya.anish ko chhod professor us se guttham-guttha ho gaya.usne use farsh pe patka & seene pe kuchh mukke barsaye & fir use uthake vaha hall me fenk diya jaha golibari ho rahi thi.usne dhuen ke beech bas itna dekha ki us hathyarfarosh ko 1 goli lagi usne anish ko thama & 1 band khidki ko laat mara khola & bahar kud gaya.

vo janta tha ki is waqt sabhi baukhlaye hain & anish police ki goli ka bhi shikar ban sakta hai.vo bungle ke peechhe ki ro ja hi raha tha ki uske sar pe peechhe se vaar hua & vo gir pada.ballu ne use 2-3 laate jamayi & anish ko utha vaha se bhaga.

"ustad,andar mare aadmi se ye potli mili hai.",ballu ne us se charlie ke hisse ke heere liye & vaha se goliya dodge karta bahar apni gadi me bhaga.professor uske peechhe dauda magar ballu bahut tez tha.professor gadi ka peechha karne laga magar uske hath bas peechhe laga lohe crash guard hi aa paya.use thame professor sadak pe tez chal rahi gadi ke sath ghisatne laga.

"sir,vo bachche ko professor se chheen bhag raha hai.",1 inspector ne sabhi ko savdhan kiya to ajit & divya ballu ke bache-khuche goli chalate gundo se use vaha nibatne ko chhod 1 police jeep ki or daude.ajit drive karne laga & divya ne apni pistol nikal li.

"vo ajit..vo varun ki van hai..varun bhi apni gadi se ballu ke peechhe laga tha,"usi ke peechhe chalo.",ballu apni car Devalay se bahar devalay ki pahadiyo ki or le ja raha tha.professor ne 1 mod pe gadi ke thoda dheema hote hi use chhod diya & jaldi se peechhe aa rahi varun ki van me savar ho gaya.ghumavdar rasto kabhi oonche ho rahe the kabhi neeche aise hi 1 raste pe professor varun ko ballu ke peechhe lage rehne ka ishara kar van se kud gaya.darasal ballu bahut chalak tha,pehle to usne apni gadi 1 pahadi pe chadhana shuru kar diya & jab peechhe aati dono gadiyan uske peechhe chadhai chadhne lagi to usne 1 kachche raste pe gadi utar use fir se vapas udhar mod diya jidhar se aaya tha.ab baki dono gadiya uski tarah usi kachche raste se utarne me nakamyab rahi & unhe gadi ghumane me der lagi.ye dekh professor van se kud gaya & kachche raste pe bhagne laga.

aur jaise hi ballu ki gadi use pane neeche aati dikhayi di,apni khairiyat ki parvah kiye bina professor uspe kud gaya.ballu ne chhat pe uske girne ki aavaz sunte hi gadi ko buri tarah ghumana shuru kiya magar professor ab gusse se bhara tha.apne jeb se 1 rumal nikal usne hath pe bandha & 3-4 mukko me hi peechhe ka 1 khidki ka shisha tod diya & agle hi pal vo gadi ke andar tha.

magar andar ghuste hi professor ko 1 badi halki ghadi chalne ki aavaz sunai di & uske kaan khade ho gaye.ballu ko peechhe se daye hath se marte hue vo baye se anish ke kapde tatolne laga ki uska dhyan anish ke pair ke jute pe gaya.

"beta,jute utar!",vo chillaya,"..jute utar beta!",anish bas roye ja raha tha magar fir bhi usne apne uncle ki baat mani.peechhe se professor apne daye bazu se ballu ka gala daba raha tha magar vo bhi kam diler nahi tha baye se uski giraft kamzor karne ki koshish karta daye se steering sambhale usne gadi ki raftar badha di thi.

professor ne baye hath se 1 jute ko utha uske sole ko khola,"gadi rok,bachche ke paas bomb hai!",vo chillaya.timer me bas chand second dikh rahe the.ballu ne uski 1 na suni & uska hath apni gardan se jhatakte hue accelrator ko car ke farsh se sata diya.

"ye kya ho raha hai!",divya & ajit pareshan the.ab varun unke peechhe ho gaya tha & uska dil bhi zoro se dhadak raha tha.gadi agle mod pe aankho se ojhal ho gayi thi ki tabhi zor ka dhamaka hua.dono drivers ne jaldi brake lagaya.

teeno utre & us aag ke gole ki or bhage.samne ka nazara dekh unke halak sukh gaye.ballu ki gadi ke parkhachche ud gaye the.bomb ne gadi ke petrol tank ko bhi 1 bomb me tabdil kar diya tha & tabhi aisa zor ka dhamaka hua tha.

ajit sar pe hath rakh ke baith gaya jabki divya ki aankho se aansu beh chale.varun zor se chillata jalti gadi ki or bhaga.ajit ke andar jaise us bomb ne 1 jwalamukhi ka munh khol diya tha.vo utha & apni gadi me baith gaya.use ab kisi chiz ki parwah nahi thi.1 masoom ko satta ki hawas ke khel me bali ka mohra banaya gaya tha & ab us khiladi ko khel jeetne ki saza milegi.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 16:10

खेल खिलाड़ी का पार्ट--62 end

गतान्क से आगे............-

"साहब,हम आपको अंदर नही जाने दे सकते."

"सतपाल,अपने साथियो से कहो कि मेरा रास्ता छ्चोड़ें.",ग्लोरीया अपार्टमेंट के फ्लॅट के बाहर खड़े CM अत्रे के बॉडीगार्ड्स को अजीत की आँखो मे उतरा खून सॉफ नज़र आ रहा था.

"साहब,आप होश मे नही हैं."

"होश मे तुम नही हो!",अजीत चीखा,"..इस कामीने अत्रे ने उस मासूम की जान ले ली!"

"क्या?!"

"हां,अपनी आँखो से उसके परखच्चे उड़ते देखता आया हूँ.",अजीत के अंदर का गुबार भी आँसुओ की शक्ल मे बाहर आया,"तुम कुच्छ भी करो,चाहे मेरी जान चली जाए मगर मैं उस सत्ता के लालची को आज अपने हाथो से सज़ा दिए बगैर नही जाऊँगा.",सतपाल का सीनियर अभी तक अजीत को खामोशी से देख रहा था,उसने जेब से 1 चाभी निकाली & दरवाज़ा खोल दिया.अजीत ने उसे देख सर हिलाया & अंदर दाखिल हुआ.

"ये क्या बदतमीज़ी है!",वो फ्लॅट के बेडरूम मे पहुँचा तो उसने देखा कि 1 बहुत हसीन लड़की जिसकी उम्र बमुश्किल 18 बरस होगी बिल्कुल नंगी बिस्तर पे पड़ी थी & अत्रे भी नंगा उसकी चूत चाट रहा था.अजीत को देख वो गुस्से से चीखा & कपड़े पहननाने लगा,"सेक्यूरिटी!सेक्यूरिटी!कहा मर गये?..कौन हो तुम..?..क-क्या चाहिए?",अजीत ने उसकी ओर पिस्टल तानी मगर वो लड़की वैसे ही बिस्तर पे लेटी रही बस थोड़ा उठ के हेअडबोर्ड से टेक लगा के बैठके मुस्कुराने लगी.

"कौन हो भाई..?..क..क्यू म..मारना चाहते हो मुझे..?",अत्रे गिड़गिदा रहा था.

"उस मासूम ने क्या बिगाड़ा था किसी का?मारना था तो उसके बाप को मारते?उसे क्यू?"

"किसकी बात कर रहे हो?..मैने किसी को नही मारा."

"मारा नही मरवाया.प्रधान के बेटे को!"

"क्या?!क्या बकवास कर रहे हो?"

"चुप!ये फ्लॅट है ना सेक्रेटरी अवस्थी का.यही बैठ के तुम दोनो ने अपनी जाती कुर्सी को बचाने के लिए ये किडनॅपिंग का घिनोना खेल रचा था ना उस आर्म्स डीलर के साथ?"

"क्या?!तुम पागल हो!",अत्रे अब गिड़गिदा नही रहा था बल्कि हैरत से भरा था.

"हॅव ए स्मोक.",वो लड़की बिस्तर से उठके 1 सिगरेट सुलगा के अजीत के पास आ खड़ी हुई,"..प्लीज़ हॅव इट.",उसने इसरार किया तो अजीत ने सिगरेट ले लिया,"मैं आपकी कन्फ्यूषन दूर करती हूँ."

"आपने सुना है ना कि पुराने ज़माने मे नगरवधू होती थी."

"क्या बकवास है?",अजीत झल्लाया.

"प्लीज़,हॅव पेशियेन्स.",उसने अजीत के कंधे पे हाथ रखा & तारीफ भरी निगाहो से देखा,"..तो वो नगरवधू होती तो 1 वेश्या ही थी मगर हर कोई उसके पास नही जा सकता था.सबसे पहला हक़ होता था राजा का फिर बाकी जाने-माने लोगो का.तो मैं आज की नगरवधू हू.",उसने बड़े गर्व से कहा.

"..ये फ्लॅट है तो मेरे बाप श्री अवस्थी जी का मगर यहा रहती मैं हू."

"क्या?लेकिन तुम्हे क्या ज़रूरत इस सब की?"

"सभी पैसे के लिए नही करते ये सब.",वो हँसी,"..मेरा शौक है.जानती हू तुम्हारी समझ मे नही आएगा मगर जब CM साहब जैसा ताक़तवर इंसान आपका कद्रदान हो तब आपकी समझ मे आएगा.मेरे पिता को कुच्छ नही पता & यहा कोई साज़िश नही रची जाती बस रोमानी खेल खेले जाते हैं.आप चाहें तो आप का भी यहा स्वागत है.बहुत किस्मत वालो को ये ख़ुशनसीबी मिलती है."

"क्या?!तो आप यहा..",अजीत ने अत्रे की ओर देखा.

"हां..मैं भी चाहता था कि जसजीत परेशान रहे,चुनाव हार जाए & मुझे देल्ही ना जाना पड़े मगर उसके बच्चे को मैने अगवा नही करवाया."

"तो फिर किसने करवाया?",अजीत अब और उलझन मे पड़ गया.

"शायद मैं जानती हू."

"कौन है वो?",वो लड़की उसके करीब आई & उसके कान मे फुसफुसाई.

"क्या?!",तभी उसका मोबाइल बजा,ये दिव्या का नंबर था.

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प्रधान के घर मातम मन रहा था मगर अभी अनीश के जाने का नही बल्कि किसी और बात का.हुआ ये था कि रात भर की चुदाई के बावजूद ना भैया जी का दिल भरा & नीना के उपर भी ना जाने कैसी खुमारी चढ़ि की दोनो ने ये खेल अगले दिन भी जारी रखा.भैया जी ने सवेरे के 4 बजे रघु को फोन कर उसके 1 आदमी को नीना के यहा बुलवा लिया & उसे प्रोफेसर दीक्षित की तस्वीर थमायी.तस्वीर थमाते वक़्त वो केवल पाजामा पहने थे & घर के बाहर आ गये थे.ठीक उसी वक़्त उनकी पुरानी प्रेमिका राम्या सेन अपने पति के साथ उसी रास्ते से जा रही थी.उसकी मंज़िल थी देवी मंदिर जहा आजके रोज़ बड़ी भीड़ होती थी & सवेरे जाके वो उस भीड़ से बचना चाहती थी.राम्या के पति ने तो नही देखा मगर राम्या ने अपने नेता & आशिक़ को यू नंगे बदन घर के बाहर खड़े देखा & सारा माजरा समझ गयी.

इधर उसने महसूस भी किया था कि वो उस से कुच्छ बेरूख़् हो गये हैं.राम्या ने जब देखा कि ये मुकुल प्रधान का घर है तो उसके दिल मे 1 शैतानी ख़याल आया.उसने 1 बूथ से मुकुल को गुमनाम फोन कर दिया कि उसकी बीवी उसी के बिस्तर मे अपने आशिक़ के साथ गुलच्छर्रे उड़ा रही है.मुकुल ने उसे गालिया दी मगर शक़ तो उसे हो ही गया था.वो भागता हुआ सवेरे के 6 बजे के कुच्छ बाद अपने घर पहुँचा.अपनी चाभी से उसने दरवाज़ा खोला & अंदर गया.

"आहह..ऊहह...हाइईईईई...नाआआअ..!",नीना बिस्तर पे पेट के बल पड़ी थी & भैया जी उसके उपर सवार पीछे से उसकी चुदाई कर रहे थे.दाए हाथ को उसके पेट ने नीचे घुसा उन्होने पहले करवट ले & फिर उसे अपने उपर ले लिया & उसके पेट को पकड़ नीचे से धक्के लगाने लगे.नीना के जिस्म का नशा आज पूरी तरह से उनके सर चढ़ गया था.अधखुले दरवाजे की आड़ से मुकुल ने जब ये नज़ारा देखा तो उसके तन-बदन मे आग लग गयी.आँखो से आँसू बहने लगे.आजतक उसे लगता था कि नीना उस से खफा रहती है क्यूकी वो उसके सपने नही पूरे कर पाया मगर उसे कभी ये नही लगा था कि वो बेवफा भी है.उसने नीना के अलावा किसी और औरत का ख़याल भी नही किया था & वो उसी के बिस्तर मे उस इंसान के साथ जोकि उसके भैया का दुश्मन था चुदाई कर रही थी!

आँसू पोन्छ्ता मुकुल नीचे बने अपनी स्टडी मे गया.तब तक भैया जी बिस्तर से पैर लटका के बैठ गये थे & नीना भी उनकी गोद मे उनकी ओर पीठ किए बैठी थी.आगे की ओर झुक अपनी बाहे उनकी गिरफ़्त मे कस्वाए वो कमर हिला उनके लंड का लुत्फ़ उठा रही थी की तभी सामने का दरवाज़ा खुला.

"हाआअ....!",चौंक के वो सीधी बैठी & मुँह पे हाथ रखा & जब तक दोनो अलग हो पाते,मुकुल ने पिस्टल की सारी गोलिया उनके जिस्मो मे उतार दी.

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अंजलि बुत बनी बैठी थी.अभी-2 उसे बेटे की मौत की खबर सुनाई गयी थी.कहा गया था कि बल्लू & प्रोफेसर भी उस धमाके मे मारे गये थे.प्रधान के घर के बाहर मीडीया वालो का हुजूम लगा था & ऐसे मे 2 गाडिया उसके बंगले मे दाखिल हुई.सबसे पहली गाड़ी से जेसीपी सिंग & डीसीपी वेर्मा कमिशनर साहब के साथ उतरे & अंदर गये.

"प्रधान साहब,हमे बहुत ज़रूरी बात करनी है आपसे."

"क्या कमिज़िशनर साहब?"

"आपके बेटे को अगवा करने वाले का पता चल गया है & वो यहा आने वाला है?"

"क्या?!कमिशनर साहब मैं उस कुत्ते को अपने हाथो से मारूँगा!",नम आँखो से अँगारे बरस रहे थे.कमरे मे दिव्या भी आ खड़ी हुई थी.

"ज़रूर मारिएगा.",सभी घूमे.प्रधान का मुँह हैरत से खुल गया.सामने प्रोफेसर खड़ा था,"इसे पहचानते हैं.",उसने घायल आर्म्स डीलर का गिरेबान पकड़ के आगे किया.जसजीत के माथे पे पसीना छल्छला आया,"आप तो खुश होंगे ना सोच के कि मैं भी मारा गया अनीश के साथ,हैं?"

"मैं अनीश को लिए-दिए गाड़ी से कूड़ा & फिर धमाका हुआ.तब तक एसीपी दिव्या ने वापस बंगले पे जाके ज़िंदा बचे लोगो को गिरफ़्त मे लिया जिनमे से ये भी था.अभी अजीत जी ने इस से सब कुच्छ उगलवा लिया है & वो ग्लोरीया अपार्टमेंट भी हो आए हैं.अब प्रधान जी आप खुद ही सब बता दीजिए."

"मुझे CM की कुर्सी चाहिए थी..",कुच्छ देर खामोश रहने के बाद प्रधान बोला,"..पार्टी के जो इंटर्नल सॅंपल पोल्स हुए थे,उसमे अत्रे & मुझ मे बहुत फ़र्क नही था.मैं जानता था कि जीतने के बाद भी अत्रे मेरे लिए परेशानी खड़ी कर सकता है.अब हर जगह से उसके आदमियो को हरवाता तो पार्टी हारती & मैं CM नही बन पाता.तो मैने ये खेल खेला.इस से..",आर्म्स डीलर की ओर उंगली उठाके उसने बात आगे बढ़ाई,"..मेरी मुलाकात काफ़ी पहले हुई थी & मैने इसके हथियार बिकवाने & पोलीस से बचाने मे काफ़ी मदद की.बदले मे ये मुझे पैसे देता था.इसलिए मैं ज़्यादा तर बिज़्नेसमॅन से चंदा नही लेता था & ईमानदारी से काम करता था & लोगो के बीच मेरी सॉफ इमेज थी."

"..ग्लोरीया अप्रटमेंट के बारे मे भी इसी ने मुझे बताया था.",प्रधान ने सर झुकाया & वही मुझे अपनी बीवी का 1 राज़ पता चला."

"कि महेश अरोरा उसका पुराना प्रेमी है.",सभी चौंक पड़े क्यूकी अंजलि भी वाहा आ गयी थी,"यही ना..?..हां..था वो मेरा पुराना प्रेमी मगर शादी के बाद मैं सिर्फ़ तुम्हारी थी.उसका ख़याल भी नही आया मेरे दिल में..",वो फफक पड़ी,"..& फिर मेरे बच्चे ने क्या बिगाड़ा था तुम्हारा?!"..वो चीखी,"..क्यू मारा उसे?"

"क्यूकी वो मेरा नही महेश का पाप था!",जसजीत उठ के चीखा तो अंजलि 1 पल उसे देखती रही & फिर हँसने लगी.दिव्या ने उसे बाहर ले जाने की कोशिश की मगर वो हँसती ही रही.

"जसजीत प्रधान,आज तुम हार गये इसलिए नही कि पोलीस को पता चल गया तुम्हारे खेल का मगर इसलिए कि अनीश सचमुच तुम्हारा बेटा था..हां..मैं अनीश की माँ अपने दूसरे बेटे अंकुर की कसम खा के कहती हू कि अनीश के बाप तुम हो.महेश से मेरे जिस्मानी ताल्लुक़ात थे मगर शादी के 3 महीने पहले ही हमारी सगाई से भी पहले मैने उस से नाता तोड़ लिया था..",जसजीत के चेहरे का रंग फक्क पड़ गया.

"..क्यू?..अब बोलो सबसे जीत सकते हो मगर क्या उपरवाले से जीत सकते हो.सोचो,जसजीत तुम अपने बेटे,अपने खून के क़ातिल हो!"

"नही!",जसजीत चीखा,"..तुम झूठ बोलती हो!",वो रो रहा था.

"जाओ जाके टेस्ट करवाओ आजकल तो डीएनए टेस्ट से सब पता चल जाता है.मेरे बेटे के चिथड़े उड़ाए तुमने उनमे से किसी टुकड़े से मिलाओ अपने बाल को,पता चल जाएगा सब तुमको."

"इसकी ज़रूरत नही है.",प्रोफेसर ने चुटकी बजाई & वरुण अनीश को लेके अंदर दाखिल हुआ,"..ये रहा आपका बेटा,अंजलि जी.मैने वादा किया था ना जसजीत जी & उसे पूरा कर रहा हू.",अंजलि दौड़ी & अपने बेटे को सीने से लगा लिया.

"मिस्टर.प्रधान,क्या केवल जनम देने से कोई पिता बन जाता है?अगर आप अनीश के पिता नही भी होते तो क्या होता?..वो तो आपको ही बाप मानता था..& फिर उसे मारने की भी सोच ली आपने..इतनी नफ़रत 1 मासूम से जोकि आपका अपना खून था..& केवल CM बनाने के लिए.जसजीत जी,परिवार से बढ़ के कुच्छ नही होता.ये बात उस से पुछिये जो दुनिया मे तन्हा है.",दिव्या ने देखा कि प्रोफेसर की आवाज़ थोड़ी भारी हो गयी थी & वरुण की आँखे भी नम हो गयी थी इस बात पे.

केस सुलझ चुका था & अब 6 महीने बीत चुके थे.आइए देखते हैं कि सभी किरदार अब क्या कर रहे थे.अपनी प्रेमिका की मौत के बाद पहली बार प्रोफेसर दीक्षित को किसी रिश्ते मे सुकून मिला था.दिव्या & उन्होने शादी तो नही की मगर दोनो ही साथ रहने लगे थे & बहुत खुश थे.प्रोफेसर ने अगली किताब भी लिख ली थी & उसका मैन किरदार दिव्या जैसा ही था लेकिन उसने केवल सेठ मोहन लाल डकैती केस को ही कहानी का रूप दिया था,प्रधान किडनॅपिंग केस को वो यू भुनाता,इतना गलिज़ इंसान तो वो था नही.

जसजीत & मुकुल,दोनो ही भाइयो को सज़ा हुई लेकिन जसजीत को सज़ा हुई आर्म्स डीलर से संत-गाँठ करने की.दोनो भाइयो के बच्चो के खातिर प्रोफेसर ने कमिशनर से हाथ जोड़ के & अजीत के साथ मिलके CM को उसके राज़ का वास्ता दे के असली बात दुनिया से छिपाने को कहा.

अंजलि ने तीनो बच्चो को अपनी छाँव मे ले लिया.श्लोक पे मा के जाने का बहुत असर पड़ा था लेकिन अंजलि ने उस बिन मा के बच्चे को भी वोही प्यार दिया था जोकि वो अपने बेटो को देती थी.1 साइकिट्रिस्ट लगातार अनीश & श्लोक के साथ काम कर रहा था & सभी को उम्मीद थी कि दोनो बच्चे अपने बडो की ग़लतियो के दिए गये ज़ख़्मो से उबर ही जाएँगे.

मेघना को उस रोज़ किसी ने ये कह दिया कि बॉम्ब फटने से अजीत भी मर गया तो उस पल उसे एहसास हुआ कि बेवफा ही सही अजीत उसकी ज़िंदगी था & जब वो सही-सलामत उसके सामने आ खड़ा हुआ तो उसकी खुशी का तो ठिकाना ही नही रहा.उस रात दोनो पति-पत्नी ने अपनी पिच्छली ज़िंदगी की सारी बातें 1 दूसरे को बता दी.जब अजीत को पता चला कि वरुण 3 रात उसके घर रहा मगर उसकी मेघना ने उस से बेवफ़ाई नही की तो उसे खुद पे बड़ी शर्म आई लेकिन मेघना ने उसे अपने आगोश मे भर लिया & उसे सब भूल जाने को कहा.

अजीत ने वरुण से मुलाकात की & उसे 1 स्कूल मे क्रिकेट कोच की नौकरी लगवाई.प्रोफेसर ने कमिशनर को ये कहा कि उस रोज़ वरुण अनीश को किदनपेपर्स से च्छुड़वा रहा था नकि अगवा कर रहा था & उसका सबूत था कि उसने भी अपनी जान पे खेल के उस रोज़ बच्चे को बचाया था.वरुण अब हर हफ्ते प्रोफेसर से मिलने ज़रूर जाता था.उसने उसके जैसा समझदार इंसान आज तक नही देखा था & प्रोफेसर को भी अपना ये नया दोस्त बहुत अच्छा लगता था.

महेश अरोरा ने अपनी फॅक्टरी बेच दी थी.सब ख़त्म हुआ तो उसे एहसास हुआ कि वो कितना स्वार्थी & मतलबी इंसान था.आजकल वो हरिद्वार के पास 1 वृद्धाश्रम चला रहा है.

राम्या सेन को लगा कि उसी के फोन ने 2 जाने ले ली & उसने उसी रोज़ पॉलिटिक्स को अलविदा कह दिया.अब वो घर पे रहती है & अपने बेटे की परवरिश पे पूरा ध्यान देती है.उसीका पति जिसे कुच्छ नही पता था,पहले भी उस से खुश था मगर अब तो वो खुशी से पागल रहता है क्यूकी उसकी बीवी हर वक़्त बस अब उसी की खुशी के बारे मे सोचती रहती है.

वो आर्म्स डीलर जैल मे सज़ा काट रहा है & CM से लेके पोलीस तक सभी की 1 ही राय है कि चाहे जो भी हो उस कमीने को कभी भी जैल से बाहर ना आने दिया जाए.

जसजीत को पछतावा है & वो जैल मे क़ैदियो को पढ़ाने का काम कर रहा है.उसने सोच रखा है कि सज़ा पूरी होते ही वो अपनी प्यारी अंजलि को लेके किसी छ्होटी सी जगह रहने चला जाएगा.बच्चे पढ़ें,अपनी ज़िंदगी बनाएँ मगर वो अब अपनी सारी ज़िंदगी अपनी सच्ची पत्नी का दिल खुशियो से भरने मे लगा देगा.

मुकुल जैल मे बहुत खुश है.हर काम मे बढ़-चढ़ के हिस्सा लेता है & उसने भी सोच लिया है कि जैल से निकलते तीनो बच्चो की परवरिश करेगा & अपनी मा समान भाभी को आगे कोई तकलीफ़ नही होने देगा.

अंजलि को भी अब सुकून है.बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है उसके कंधो पे मगर उसका पति अब सही रास्ते पे है ये सोच के उसे बड़ी तसल्ली है.बच्चो के कामो मे उसका वक़्त कैसे काट रहा है उसे पता ही नही चल रहा.

अगर बेचैन है तो बस 2 लोग.वो 2 लोग जिन्होने जुर्म को दिल का सुकून मान लिया था,अपनी परेशानियो से भाग उन्होने उस पेड़ के नीचे पनाह ली थी जो शुरू मे तो छाँव देता है मगर बाद मे केवल कांटो की बारिश करता है.

औरतो की जैल मे क़ैद दीप्ति अपनी जान अरशद की याद मे आँसू बहाती रहती है & मर्दो की जैल मे बंद अरशद हर वक़्त अपने यारो की मौत & महबूबा के जुदाई के दर्द से बेज़ार होता रहता है.

तो दोस्तो कैसी लगी ये कहानी आपको बताना ज़रूर आपके विचारो का इंतजार रहेगा आपका दोस्त राज शर्मा

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कामुक कहानियाँ

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समाप्त

दा एंड

KHEL KHILADI KA paart--62

gataank se aage............-

"sahab,hum aapko andar nahi jane de sakte."

"Satpal,apne sathiyo se kaho ki mera rasta chhoden.",Gloria Apartment ke flat ke bahar khade CM Atre ke bodyguards ko ajit ki aankho me utra khun saaf nazar aa raha tha.

"sahab,aap hosh me nahi hain."

"hosh me tum nahi ho!",ajit chikha,"..is kamine atre ne us masoom ki jaan le li!"

"kya?!"

"haan,apni aankho se uske parkhachche udte dekhta aaya hun.",ajit ke andra ka gubar bhi aansuo ki shakl me bahar aaya,"tum kuchh bhi karo,chahe meri jaan chali jaye magar main us satta ke lalchi ko aaj apne hatho se saza diye bagair nahi jaoonga.",satpal ka senior abhi tak ajit ko khamoshi se dekh raha tha,usne jeb se 1 chabhi nikali & darwaza khol diya.ajit ne use dekh sar hilaya & andar dakhil hua.

"ye kya badtamizi hai!",vo flat ke bedroom me pahuncha to usne dekha ki 1 bahut haseen ladki jiski umra bamushkil 18 baras hogi bilkul nangi bistar pe padi thi & atre bhi nanga uski chut chat raha tha.ajit ko dekh vo gusse se chikha & kapde pehananae laga,"security!security!kaha mar gaye?..kaun ho tum..?..k-kya chahiye?",ajit ne uski or pistol tani magar vo ladki vaise hi bistar pe leti rahi bas thoda uth ke headbord se te k laga ke baithke muskurane lagi.

"kaun ho bhai..?..k..kyu m..maarna chahte ho mujhe..?",atre gidgida raha tha.

"us masoom ne kya bigada tha kisi ka?marna tha to uske baap ko marte?use kyu?"

"kiski baat kar rahe ho?..maine kisi ko nahi mara."

"mara nahi marwaya.Pradhan ke bete ko!"

"kya?!kya bakwas kar rahe ho?"

"chup!ye flat hai na secretary awasthi ka.yehi baith ke tum dono ne apni jati kursi ko bachane ke liye ye kidnapping ka ghinona khel racha tha na us arms dealer ke sath?"

"kya?!tum pagal ho!",atre ab gidgida nahi raha tha balki hairat se bhara tha.

"have a smoke.",vo ladki bistar se uthke 1 cigarette sulga ke ajit ke paas aa khadi hui,"..please have it.",usne israr kiya to ajit ne cigarette le liya,"main aapki confusion door karti hun."

"aapne suna hai na ki purane zamane me nagarvadhu hoti thi."

"kya bakwas hai?",ajit jhallaya.

"please,have patience.",usne ajit ke kandhe pe hath rakha & tarif bhari nigaho se dekha,"..to vo nagarvadhu hoti to 1 veshya hi thi magar har koi uske paas nahi ja sakta tha.sabse pehla haq hota tha raja ka fir baki jane-mane logo ka.to main aaj ki nagarvadhu hu.",usne bade garv se kaha.

"..ye flat hai to mere baap shri awasthi ji ka magar yaha rehti main hu."

"kya?lekin tumhe kya zarurt is sab ki?"

"sabhi paise ke liye nahi karte ye sab.",vo hansi,"..mera shauk hai.janti hu tumhari samajh me nahi ayega magar jab CM sahab jaisa taqatwar insan aapka kadrdan ho tab aapki samajh me aayega.mere pita ko kuchh nahi pata & yaha koi sazish nahi rachi jati bas romani khel khele jate hain.aap chahen to aap ka bhi yaha swagat hai.bahut kismat valo ke ye khushnasibi milti hai."

"kya?!to aap yaha..",ajit ne atre ki or dekha.

"haan..main bhi chahta tha ki Jasjit pareshan rahe,chunav haar jaye & mujhe Delhi na jana pade magar uske bachche ko maine agwa nahi karwaya."

"to fir kisne karwaya?",ajit ab aur uljhan me pad gaya.

"shayad main janti hu."

"kaun hai vo?",vo ladki uske karaib aayi & uske kaan me phusphusayi.

"kya?!",tabhi uska mobile baja,ye divya ka number tha.

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pradhan ke ghar matam man raha tha magar abhi anish ke jane ka nahi balki kisi aur baat ka.hua ye tha ki raat bhar ki chudai ke bavjood na Bhaiya Ji ka dil bhara & Nina ke upar bhi na jane kaisi khunari chadi ki dono ne ye khel agle din bhi jari rakha.bhaiya ji ne savere ke 4 baje Raghu ko fone kar uske 1 admi ko nina ke yaha bulwa liya & use Professor Dixit ki tasvir thamayi.tasvir thamate waqt vo keval pajama pehne the & ghar ke bahar aa gaye the.thik usi waqt unki purani premika Ramya Sen apne pati ke sath usi raste se ja rahi thi.uski manzil thi Devi Mandir jaha aajke roz badi bheed hoti thi & savere jake vo us bhid se bachna chahti thi.ramya ke pati ne to nahid ekha magar ramya ne apne neta & aashiq ko yu nange badan ghar ke bahar khade dekha & sara majra samajh gayi.

idhar usne mehsus bhi kiya tha ki vo us se kuchh berukh ho gaye hain.ramya ne jab dekha ki ye Mukul Pradhan ka ghar hai to uske dil me 1 shaitani khayal aaya.usne 1 booth se mukul ko gumnam fone kar diya ki uski biwi usi ke bistar me apne aashiq ke sath gulchharre uda rahi hai.mukul ne use galiya di magar shaq to use ho hi gaya tha.vo bhagta hua savere ke 6 baje ke kuchh baad apne ghar pahuncha.apni chabhi se usne darwaza khola & andar gaya.

"aahhhh..oohhhhh...haaiiiiii...naaaaaaa..!",nina bistar pe pet ke bal padi thi & bhaiya ji uske upar savar peechhe se uski chudai kar rahe the.daye hath ko uske pet ne neeche ghusa unhone pehle karwat le & fir use apne upar le liya & uske pet ko pakad neeche se dhakke lagane lage.nina ke jism ka nasha aaj puri tarah se unke sar chadh gaya tha.adhkhule darwazae ki aad se mukul ne jab ye nazara dekha to uske tan-badan me aag lag gayi.aankho se aansu behne lage.aajtak use lagta tha ki nina us se khafa rehti hai kyuki vo uske sapne nahi pure kar paya magar use kabhi ye nahi laga tha ki vo bewafa bhi hai.usne nina ke alawa kisi aur aurat ka khayal bhi nahi kiya tha & vo usi ke bistar me us insan ke sath joki uske bhaiya ka dushman tha chudai kar rahi thi!

aansu ponchhta mukul neeche bane apni study me gaya.tab tak bhaiya ji bistar se pair latka ke baith gaye the & nina bhi unki god me unki or pith kiye baithi thi.aage ki or jhuk apni baahe unki giraft me kaswaye vo kamar hila unke lund ka lutf utha rahi thi ki tabhi samne ka darwaza khula.

"haaaaa....!",chaunk ke vo seedhi baithi & munh pe hath rakha & jab tak dono alag ho pate,mukul ne pistol ki sari goliya unke jismo me utar di.

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Anjali but bani baithi thi.abhi-2 use bete ki maut ki khabar sunayi gayi thi.kaha gaya tha ki ballu & professor bhi us dhamake me mare gaye the.pradhan ke ghar ke bahar media walo ka hujum laga tha & aise me 2 gadiya uske bungle me dakhil hui.sabse pehli gadi se JCP Singh & DCP Verma Commissioner sahab ke sath utre & andar gaye.

"pradhan sahab,hume bahut zaruri baat karni hai aapse."

"kya commisiioner sahab?"

"aapke bete ko agwa karne vale ka pata chal gaya hai & vo yaha aane vala hai?"

"kya?!commissioner sahab main us kutte ko apne hatho se marunga!",nam aankho se angare baras rahe the.kamre me divya bhi aa khadi hui thi.

"zarur mariyega.",sabhi ghume.pradhan ka munh hairat se khul gaya.samne professor khada tha,"ise pehchante hain.",usne ghayal arms dealer ka gireban pakad ke aage kiya.jasjit ke mathe pe paseena chhalchhala aaya,"aap to khush honge na soch ke ki main bhi mar gaya anish ke sath,hain?"

"main anish ko liye-diye gadi se kuda & fir dhamaka hua.tab tak ACP divya ne vapas bungle pe jake zinda bache logo ko giraft me liye jinme se ye bhi tha.abhi ajit ji ne is se sab kuchh ugalwa liya hai & vo gloria apartment bhi ho aaye hain.ab pradhan ji aap khud hi sab bata dijiye."

"mujhe CM ki kursi chahiye the..",kuchh der khamosh rehne ke baad pradhan bola,"..party ke jo internal sample polls hue the,usme atre & mujh me bahut fark nahi tha.main janta tha ki jitne ke baad bhi atre mere liye pareshani khadi kar sakta hai.ab har jagah se uske aadmiyo ko harwata to party harti & main CM nahi ban pata.to maine ye khel khela.is se..",arms dealer ki or ungli uthake usne baat aage badhayi,"..meri mulakat kafi pehle hui thi & maine iske hathyar bikwane & police se bachane me kafi madad ki.badle me ye mujhe paise deta tha.isliye main zyada tar businessman se chanda nahi leta tha & imandari se kaam karta tha & logo ke beech meri saaf image thi."

"..gloria aprtment ke abre me bhi isi ne mujhe bataya tha.",pradhan ne sar jhukaya & vahi mujhe apni biwi ka 1 raaz pata chala."

"ki Mahesh Arora uska purana premi hai.",sabhi chaunk pade kyuki anjali bhi vaha aa gayi thi,"yehi na..?..haan..tha vo mera purana premi magar shadi ke baad main sirf tumhari thi.uska khayal bhi nahi aaya mere dil men..",vo phaphak padi,"..& fir mere bachche ne kya bigada tha tumhara?!"..vo chikhi,"..kyu mara use?"

"kyuki vo mera nahi mahesh ka paap tha!",jasjit uth ke chikha to anjali 1 pal use dekhti rahi & fir hansne lagi.divya ne use bahar le jane ki koshish ki magar vo hansti hi rahi.

"Jasjit Pradhan,aaj tum haar gaye isliye nahi ki police ko pata chal gaya tumhare khel ka magar isliye ki anish sachmuch tumhara beta tha..haan..main anish ki maan apne dusre bete Ankur ki kasam kha ke kehti hu ki anish ke baap tum ho.mahesh se mere jismani tallukat the magar shadi ke 3 mahine pehle hie humari sagai se bhi pehle maine us se nata rod liya tha..",jajsit ke chehre ka rang phak pad gaya.

"..kyu?..ab bolo sabse jeet sakte ho magar kya uparwale se jeet sakte ho.socho,jasjit tum apne bete,apne khun ke qatil ho!"

"nahi!",jasjit chikha,"..tum jhuth bolti ho!",vo ro raha tha.

"jao jake tets karwao aajkal to DNA test se sab pata chal jata hai.mere bete ke chithde udaye tumne unme se kisi tukde se milao apne baal ko,pata chal jeyega sab tumko."

"iski zarurat nahi hai.",professor ne chutki bajayi & varun anish ko leke andar dakhil hua,"..ye raha aapka beta,anjali ji.maine vada kiya tha na jasjit ji & use pura kar raha hu.",anjali daudi & apne bete ko seene se laga liya.

"mr.pradhan,kya keval janam dene se koi pita ban jata hai?agar aap anish ke pita nahi bhi hote to kya hota?..vo to aapko hi baap manta tha..& fir use marne ki bhi soch li aapne..itni nafrat 1 masoom se joki aapka apna khun tha..& keval CM banane ke liye.jasjit ji,parivar se badh ke kuchh nahi hota.ye baat us se puchhiye jo duniya me tanha hai.",divya ne dekha ki professor ki aavaz thdi bhari ho gayi thi & varun ki aankhe bhi nam ho gayi thi is baat pe.

Case sulajh chuka tha & ab 6 mahine beet chuke the.aaiye dekhte hain ki sabhi kirdar ab kya kar rahe the.apni premika ki maut ke baad pehli baar Professor Dixit ko kisi rishte me sukun mila tha.Divya & unhone shadi to nahi ki magar dono hi sath rehne lage the & bahut khush the.professor ne agli kitab bhi likh li thi & uska main kirdar divya jaisa hi tha lekin usne keval Seth Mohan Lal dacoity case ko hi kahani ka roop diya tha,Pradhan kidnapping case ko vo yu bhunata,itna galiz insan to vo tha nahi.

Jasjit & Mukul,dono hi bhaiyo ko saza hui lekin jasjit ko saza hui arms dealer se santh-ganth karne ki.dono bhaiyo ke bachcho ke khatir professor ne commissioner se hath jod ke & Ajit ke sath milke CM ko uske raaz ka vasta de ke asli baat duniya se chhipane ko kaha.

Anjali ne teeno bachcho ko apni chhaon me le liye.Shlok pe maa ke jane ka bahut asar pada tha lekin anjali ne us bin maa ke bachche ko bhi vohi pyar diya tha joki vo apne beto ko deti thi.1 psychiatrist lagatar anish & shlok ke sath kaam kar raha tha & sabhi ko umeed thi ki dono bachche apne bado ki galtiyo ke diye gaye zakhmo se ubar hi jayenge.

Meghna ko us roz kisi ne ye keh diya ki bomb phatne se ajit bhi mar gaya to us pal use ehsas hua ki bevafa hi sahi ajit uski zindagi tha & jab vo sahi-salamat uske samne aa khada hua to uski khushi ka to thikana hi nahi raha.us raat dono pti-patni ne apni pichhli zindagi ki sari baaten 1 dusre ko bata di.jab ajit ko pata chala ki Varun 3 raat uske ghar raha magar uski meghna ne us se bewafai nahi ki to use khud pe badi sharm aayi lekin meghna ne use apne agosh me bhar liya & use sab bhul jane ko kaha.

ajit ne varun se mulakat ki & use 1 school me cricket coach ki naukri lagwayi.professor ne commissioner ko ye kaha ki us roz varun anish ko kidnapeprs se chhudwa raha tha naki agwa kar raha tha & uska saboot tha ki usne bhi apni jaan pe khel ke us roz bachche ko bachaya tha.varun ab har hafte professor se milne zarur jata tha.usne uske jaisa samajhdar insan aaj tak nahi dekha tha & professor ko bhi apna ye naya dost bahut achha lagta tha.

Mahesh Arora ne apni factory bech di thi.sab khatm hua to use ehsas hua ki vo kitna swarthi & matlabi insan tha.aajkal vo haridwar ke paas 1 vriddhashram chala raha hai.

Ramya Sen ko laga ki usi ke fone ne 2 jane le li & usne usi roz politics ko alvida keh diya.ab vo ghar pe rehti hai & apne bete ki parvarish pe pura dhyan deti hai.usika pati jise kuchh nahi pata tha,pehle bhi us se khush tha magar ab to vo khushi se pagal rehta hai kyuki uski biwi har waqt bas ab usi ki khushi ke bare me sochti rehti hai.

vo arms dealer jail me saza kaat raha hai & CM se leke police tak sabhi ki 1 hi rai hai ki chahe jo bhi ho us kamine ko kabhi bhi jail se bahar na aane diya jaye.

jasjit ko pachhtawa hai & vo jail me qaidiyo ko padhane ka kaam kar raha hai.usne soch rakha hai ki saza puri hote hi vo apni pyari anjali ko leke kisi chhoti si jagah rehne chala jayega.bachche padhen,apni zindagi banayen magar vo ab apni sari zindagi apni sachchi patni ka dil khushiyo se bharne me laga dega.

mukul jail me bahut khush hai.har kaam me badh-chad ke hissa leta hai & usne bhi soch liya hai ki jail se nikalte teeno bachcho ki parvarish karega & apni maa saman bhabhi ko aage koi taklif nahi hone dega.

anjali ko bhi ab sukun hai.bahut badi zimmedari hai uske kandho pe magar uska pati ab sahi raste pe hai ye soch ke use badi tasalli hai.bachcho ke kaamo me uska waqt kaise kat raha hai use pata hi nahi chal raha.

agar bechain hai to bas 2 log.vo 2 log jinhone jurm ko dil ka sukun nmaan liya tha,apni pareshaniyo se bhag unhone us ped ke neeche panah li thi jo shuru me to chhanh deta hai magar baad me kewal kanto ki barish karta hai.

aurato ki jail me qaid Dipti apni jaan Arshad ki yaad me aansu bahati rehti hai & mardo ki jail me band arshad har waqt apne yaro ki maut & mehbooba ke judai ke dard se bezar hota rehta hai.

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kaamuk kahaaniyaan

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samaapt

THE END