कुँवारियों का शिकार compleet

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories ,erotic stories. Visit mz.skoda-avtoport.ru
rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 14:06

कुँवारियों का शिकार--27

गतान्क से आगे..............

मैं बेड पर मरियम की बगल में लेट गया और उसको अपनी बाहों में भर लिया. उसकी चूचियाँ मेरी छाती में गढ़ने लगीं. वो अभी तक रह रह कर कांप उठती थी. पीछे से तनवी भी उसके साथ चिपक गयी और उसस्क्कॉ तसल्ली देते हुए बोली के क्यों मरियम पूरा मज़ा आया ना. मरियम एक अद्भुत मुस्कान के साथ बोली के हां दी जो मैने कभी ख्वाब में भी नही सोचा था वो मज़ा मुझे आया पर लंड जब पहली बार अंदर गया था तो बहुत दर्द हुआ था. तनवी बोली के होता है जब कुमारी झिल्ली को लंड फाड़ता है तो दर्द होता है मुझे भी हुआ था पर उसके बाद तो मज़ा ही मज़ा है. अब अगली बार जब तुम अपनी चूत में लंड घुस्वावगी तो कोई दर्द नही होगा. दी अगली बार कब आएगी, मरियम ने पूछा? एक महीने से पहले नही, तनवी ने जवाब दिया. मैने भी मरियम को कहा के देखो अगर तुम ज़्याद चुदवाऑगी तो तुम्हारी चूत ढीली पड़ जाएगी और फिर जब शादी के बाद तुम्हारा खाविंद तुम्हारी चूत मारेगा तो उसे पता लग जाएगा के तुम पहले ही बहुत चुद चुकी हो तो तुम्हारे लिए मुश्किल होगी. और अगर चूत टाइट हो तो खाविंद को पता नही चलता. क्योंकि झिल्ली का ना होना चुदे होने का सबूत नही है. झिल्ली तो ज़्यादा खेल कूद और ज़्यादा साइकल चलाने से भी कट फॅट जाती है.

फिर अब तुमने चुदाई का मज़ा ले लिया है तो अब तुमको इसकी तरफ से अपना ध्यान हटाकर अपनी पढ़ाई में लगना होगा ताकि तुम अच्छे नम्बरो से पास होकर अपना और स्कूल का नाम करो. तुम्हारे घर के लोग भी तुमसे खुश होंगे और तुम्हे अच्छे कॉलेज में दाखिला भी मिलेगा आगे पढ़ाई के लिए और इसके लिए तुम्हारे अब्बू और अम्मी भी तुम्हें नही रोकेंगे. वो बोली के यह बात तो बिल्कुल ठीक है. मैं ऐसा ही करूँगी. फिर मैने तनवी से कहा के मरियम को हॉट वॉटर ट्रीटमेंट देने का इंतेज़ां करे. तनवी बाथरूम में चली गयी और मैने मरियम को पेन किल्लर टॅबलेट खिला दी. फिर उसको प्यार से अपनी गोडे में उठाकर बाथरूम में ले आया और तनवी द्वारा तैयार टब में मरियम को बिठा दिया और उसको कहा के पानी में बैठी रहना और अपनी चूत की सिकाई करना जब तक पानी ठंडा ना हो जाए.

फिर मैं तनवी को लेकर बाहर आ गया और उसको अपनी बाहों में लेकर कहा के तनवी डियर अगर तुम्हारी भड़की हुई भावनाओं को रात को शांत किया जाए तो कैसा रहेगा? वो तुनक कर बोली कि मेरी याद आ गयी? मैने उसको अपनी बाहों में भींच कर कहा के मैं अपने दोस्तों को कभी नही भूलता और मैने फ़ैसला किया है के तुम पर महीने में एक बार की पाबंदी नही होगी और तुम जब भी चाहोगी मैं तुम्हारी चुदाई कर दूँगा पर फिर भी यही काहूँग कि जितना ज़्यादा संयम से काम लोगि तुम्हारा ही फयडा होगा. उसने कहा के उसे किसी संयम की ज़रूरत नही है उसके पास उसकी दादी का नुस्ख़ा है जिसके 5 दिन के इस्तेमाल से उसकी चूत नयी जैसी हो जाएगी और कोई नही कह सकेगा के पहले चुद चुकी है. मैं बड़ी हैरानी से उसको देखता रहा और पूछा के सच में क्या यह संभव है? वो मुस्कुराते हुए बोली के बिल्कुल संभव है यह ट्राइड आंड टेस्टेड है और कोई भी शक़ नही है इसमे, हर बार यह उम्मीद से बढ़कर साबित हुआ है क्योंकि यह एक बिल्कुल नयी बात है जिसे आम लोग जानते ही नही हैं तो मानेंगे कैसे. फिर वो हंसते हुए बोली के ऐसा करो के तुम मुझे चोद-चोद कर मेरी चूत ढीली कर दो फिर मैं 5 दिन इस नुस्खे को तैयार करके इस्तेमाल करूँगी और फिर खुद ही देख लेना के क्या रिज़ल्ट निकलता है.

मैं मुस्कुराए बिना ना रह सका और कहा के इतना बढ़िया निमंत्रण मैं कैसे अस्वीकार कर सकता हूँ? ठीक है फिर आज से ही शुरू कर देते हैं तुम्हारी चूत ढीली करने का प्रोग्राम. वो भी हंस दी. इतने में मरियम भी बाथरूम से निकल कर आ गयी. उसने एक बड़ा सा टवल लपेट रखा था और उसकी चाल में लड़खड़ाहट बिल्कुल महसूस नही हो रही थी. मैने उसको अपने पास बुलाया और उसका टवल खोल कर उसकी चूत को चेक किया. चूत पर अभी भी थोरी सूजन थी और वो फूली हुई भी थी. फिर मैने एक अस्ट्रिंजेंट क्रीम लेकर थोरी सी उसकी चूत पर लगाई और हल्के हाथ से मालिश कर दी. वो कब मेरी गोद में बैठ गयी मुझे पता ही नही चला. मरियम ने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दीं और मुझे चूम कर बोली के आज जो मज़ा आया हा वो सारी उमर उसको नही भूल सकेगी. मैने भी उसको वापिस किस किया और कहा के इसको चाहे ना भूलना पर अपनी पढ़ाई को ही अब याद रखना और कुच्छ दिन के लिए इसको अपने दिमाग़ में सुला देना और इम्तिहान तक जागने मत देना. वो हंस पड़ी और बोली मुश्किल तो होगी पर मैं कर लूँगी. तनवी ने उसको कपड़े निकाल कर दिए और दोनो अपने-अपने कपड़े पहनकर तैयार हो गयीं और तनवी उसको ले कर घर छ्चोड़ने के लिए चल दी.

कोई डेढ़ घंटे के बाद तनवी वापिस आई और बोली के सब ठीक है कोई परेशानी नही हुई बल्कि उसकी बहनें ही घर में थीं और उन्होनें बहुत ज़िद की के मैं वहाँ रुकू और चाय पी कर जाऊं पर मैने ऑटो वेट कर रहा है कहकर मना कर दिया और आ गयी. मैने उसको अपनी बहो में ले लिया और अपने साथ सटा कर कहा के बहुत बढ़िया है फिर आज अपना ईनाम लेने के लिए नीचे आओगी या मैं ऊपेर आकर दूं? वो बोली के मैं ही नीचे आकर ले लूँगी और ऊपेर अपने रूम में चली गयी.

फिर मैने अपने साइन-बोर्ड पेंटर को बुलवाया और जिम क्लब का साइन-बोर्ड बनाने को कहा. उसके आने पर मैने उसको बताया के लॅडीस जिम क्लब (गर्ल्स ओन्ली) का साइन-बोर्ड बना के ले आए और नीचे लिख दे के ‘फॉर मेंबरशिप कोंट: मिस तनवी – 98********’. उसको जगह बताई और माप लेकर वो चला गया यह कहकर के अगले दिन सुबह 10 बजे वो बोर्ड लगा देगा. मैं लेटकर सोचने लगा के चलो अबकाम शुरू होने वाला है लेकिन बहुत होशियारी से चलना होगा कहीं किसी को भनक भी लग गयी तो बहुत बड़ी मुसीबत आ जाएगी. मैने एक बार फिर सारे इंतेज़ामों के बारे में सोचा और एक-एक करके मन ही मन उनको चेक किया और सब कुच्छ ठीक पाकर मुझे तसल्ली हुई और मैं थोरी देर सोने की कोशिश करने लगा. रात को पता नही कितनी देर जागना पड़े तनवी की चुदाई करने में.

शाम को मेरी आँख खुली कोई 7-30 बजे और मैं फ्रेश होकर आधे घंटे के बाद ऊपेर तनवी के यहाँ पहुँच गया. मुझे देखकर तनवी बहुत खुश हुई और बोली के राज तुम हो बहुत स्वीट. वादे के पक्के और सब दोस्तों का ख़याल रखने वाले. तुम सही अर्थों में दोस्ती का मतलब ही नही दोस्ती निभाना भी जानते हो. मैने हंसते हुए कहा के बातें बनाना तो कोई तुमसे सीखे और आगे बढ़कर उसको अपनी बाहों में ले लिया. फिर वो हंसते हुए बोली के मैं तो आने वाली थी क्योंकि तुम्हें कहकर आई थी. मैने उसको कहा के मैं भी तो तुमको लेने ही आया हूँ और साथ ही एक गिलास वो शरबत भी पीना चाहता हूँ. वो मुस्कुराई और मुझे हाथ पकड़ कर अंदर ले गयी और एक गिलास शरबत पिलाया. फिर हम नीचे आ गये. नौकर को मैने कह ही रखा था के खाना बना के रख देगा और मैं ले लूँगा. तनवी ने खाना गरम किया और हम जल्दी से खाना खाकर निबट गये. फिर दोनो ने मिल कर बर्तन समेटे और एक सेट बर्तनों का साफ करके रख दिया ताकि नौकरों को पता ना लगे की मेरे साथ किसी और ने भी खाना खाया था.

हम दोनो बेडरूम में आ गये. आते ही मैने सबसे पहले अपने कपड़े उतारे और पूरी तरह नंगा हो गया. तनवी मुस्कुराई और उसने भी मेरा अनुसरण करते हुए अपने सारे कपड़े उतार फेंके और मेरी तरह पूरी नंगी होकर मुझसे लिपट गयी और बोली आज का दिन बहुत लंबा हो गया था मेरे लिए. मैने उसको कहा के हो जाता है और वो कहते हैं ना इंतेज़ार की घड़ियाँ लंबी होती हैं. पर अब तो कोई इंतेज़ार बाकी नही रहा ना. तनवी हंस पड़ी और मुझसे कस के लिपट गयी. मैं उसको अपने साथ चिपकाए हुए ही बेड पर ले आया और फिर शुरू हुआ चुदन चुदाईका खेल जो 2 घंटे से ज़्यादा चला और इस दौरान मैने उसको दो बार चोदा और वो पता ही नही कितनी बार झड़ी क्योंकि मैं दूसरे राउंड में उसकी मस्त चुदाई करते हुए 5 के आगे गिनना भूल गया.

क्रमशः..................

KUNWARIYON KA SHIKAAR--27

gataank se aage..............

Main bed par Mariyum ki bagal mein let gaya aur ussko apni bahon mein bhar liya. Usski choochiyaan meri chhati mein gadne lageen. Wo abhi tak reh reh kar kamp uthatii thi. Peechhe se Tanvi bhi usske saath chipak gayee aur ussko tasalli detey huey boli ke kyon Mariyum poora maza aaya na. Mariyum ek adbhut muskaan ke saath boli ke haan Di jo maine kabhi khwaab mein bhi nahi socha tha wo maza mujhe aaya par lund jab pehli baar andar gaya tha to bahut dard hua tha. Tanvi boli ke hota hai jab kumara jhilli ko lund phadta hai to dard hota hai mujhe bhi hua tha par usske baad to mazaa hi maza hai. Ab agli baar jab tum apni choot mein lund ghuswaogi to koyi dard nahi hoga. Di agli baar kab aayegi, Mariyum ne poochha? Ek mahine se pehle nahi, Tanvi ne jawab diya. Maine bhi Mariyum ko kaha ke dekho agar tum zyad chudwaogi to tumhaari choot dheeli pad jayegi aur phir jab shadi ke baad tumhara khavind tumhari choot maarega to usse pat lag jayega ke tum pehle hi bahut chud chuki ho to tumhare liye mushkil hogi. Aur agar choot tight ho to khavind ko pata nahi chalta. Kyonki jhilli ka na hona chude hone ka sabot nahi hai. Jhilli to zyada khel kood aur zyada cycle chalaane se bhi kat phat jaati hai.

Phir ab tumne chudayee ka maza le liya hai to ab tumko isski taraf se apna dhyan hatakar apni padhayee mein lagna hoga taki tum achhey numberon se pass hokar apna aur school ka naam karo. Tumhare ghar ke log bhi tumse khush honge aur tumhe achhe college mein daakhila bhi milega aage padhayee ke liye aur isske liye tumhaare abbu aur ammi bhi tumhein nahi rokenge. Wo boli ke yeh baat to bilkul theek hai. Main aisa hi karoongi. Phir maine Tanvi se kaha ke Mariyum ko hot water treatment dene ka intezaam karey. Tanvi bathroom mein chali gayee aur maine Mariyum ko pain killer tablet khila di. Phir ussko pyar se apni gode mein uthakar bathroom mein le aaya aur Tanvi dwara taiyaar tub mein Mariyum ko bitha diya aur ussko kaha ke paani mein baithi rehna aur apni choot ki sikayi karna jab tak paani thanda na ho jaaye.

Phir main Tanvi ko lekar bahar aa gaya aur ussko apni bahon mein lekar kaha ke Tanvi dear agar tumhaari bhadki hui bhavnaaon ko raat ko shant kiya jaaye to kaisa rahega? Wo tunak kar boli ki meri yaad aa gayee? Maine ussko apni bahon mein bheench kar kaha ke main apne doston ko kabhi nahi bhoolata aur maine faisla kiya hai ke tum par mahine mein ek baar ki pabandi nahi hogi aur tum jab bhi chahogi main tumhari chudayee kar doonga par phir bhi yahi kahoong ki jitna zyada sanyam se kaam logi tumhaara hi fayda hoga. Ussne kaha ke usse kissi sanyam ki zaroorat nahi hai usske paas usski daadi ka nuskha hai jisske 5 din ke istemaal se usski choot nayi jaisi ho jayegi aur koyi nahi keh sakega ke pehle chud chuki hai. Main badi hairani se ussko dekhta raha aur poochha ke sach mein kya yeh sambhav hai? Wo muskuraate huey boli ke bilkul sambhav hai yeh tried and tested hai aur koyi bhi shaq nahi hai issmein, har baar yeh ummeed se badhkar saabit hua hai kyonki yeh ek bilkul nayi baat hai jissey aam log jaante hi nahi hain to manenge kaise. Phir wo hanste huey boli ke aisa karo ke tum mujhe chod-chod kar meri choot dheeli kar do phir main 5 din iss nuskhe ko taiyaar karke istemaal karoongi aur phir khud hi dekh lena ke kya result nikalta hai.

Main muskuraaye bina na reh saka aur kaha ke itna badhiya nimantran main kaise asweekar kar sakta hoon? Theek hai phir aaj se hi shuru kar dete hain tumhaari choot dheeli karne ka programme. Wo bhi hans di. Itne mein Mariyum bhi bathroom se nikal kar aa gayi. Ussne ek bada sa towel lapet rakha tha aur usski chaal mein ladkhadahat bilkul mehsoos nahi ho rahi thi. Maine ussko apne paaz bulaya aur usska towel khol kar usski choot ko check kiya. Choot par abhi bhi thori soojan thi aur wo phooli hui bhi thi. Phir maine ek astringent cream lekar thori si usski choot par lagayee aur halke haat se maalish kar di. Wo kab meri gode mein baith gayee mujhe pata hi nahi chala. Mariyum ne apni bahein mere galey mein daal deen aur mujhe choom kar boli ke aaj jo maza aaya ha wo saari umar ussko nahi bhool sakegi. Maine bhi ussko wapis kiss kiya aur kaha ke issko chahey na bhoolna par apni padhayee ko hi ab yaad rakhna aur kuchh din ke liye issko apne dimaag mein sulaa dena aur imtihaan tak jaagne mat dena. Wo hans padi aur boli mushkil to hogi par main kar loongi. Tanvi ne ussko kapde nikaal kar diye aur dono apne-apne kapde pahankar taiyaar ho gayeen aur Tanvi ussko le kar ghar chhodne ke liye chal di.

Koyi dedh ghante ke baad Tanvi wapis aayee aur boli ke sab theek hai koyi pareshani nahi hui balki usski behnen hi ghar mein theen aur unhonein bahut zid ki ke main wahan rukoon aur chaye pi kar jaaoon par maine auto wait kar raha hai kehkar mana kar diya aur aa gayee. Maine ussko apni bahaon mein le liya aur apne saath sataa kar kaha ke bahut badhiya hai phir aaj apna eenaam lene ke liye neeche aaogi ya main ooper aakar doon? Wo boli ke main hi neeche aakar le loongi aur ooper apne room mein chali gayee.

Phir maine apne sign-board painter ko bulwaya aur Gym Club ka sign-board banane ko kaha. Usske aane par maine ussko bataya ke Ladies Gym Club (Girls Only) ka sign-board bana ke le aaye aur neeche likh de ke ‘for Membership Cont: Miss Tanvi – 98********’. Ussko jagah bataayi aur maap lekar wo chala gaya yeh kehkar ke agle din subah 10 baje wo board laga dega. Main letkar sochne laga ke chalo ab kaam shuru hone waala hai lekin bahut hoshiyaari se chalna hoga kahin kissi ko bhanak bhi lag gayi to bahut badi museebat aa jaayegi. Maine ek baar phir saare intezaamon ke baare mein socha aur ek-ek karke man hi man unnko check kiya aur sab kuchh theek paakar mujhe tasalli hui aur main thori der sone ki koshish karne laga. Raat ko pata nahi kitni der jaagna padey Tanvi ki chudayee karne mein.

Shaam ko meri aankh khuli koyi 7-30 baje aur main fresh hokar adhe ghante ke baad ooper Tanvi ke yahan pahunch gaya. Mujhe dekhkar Tanvi bahut khush huyi aur boli ke Raj tum ho bahut sweet. Vaade ke pakke aur sab doston ka khayal rakhne waale. Tum sahi arthon mein dosti ka matlab hi nahi dosti nibhana bhi jaante ho. Maine hanste huey kaha ke baatein banaana to koyi tumse seekhe aur aage badhkar ussko apni bahon mein le liya. Phir wo hanste huey boli ke main to aane waali thi kyonki tumhein kehkar aayi thi. Maine ussko kaha ke main bhi to tumko leney hi aaya hoon aur saath hi ek gilaas wo sharbat bhi peena chahta hoon. Wo muskurayee aur mujhe hath pakad kar andar le gayee aur ek gilaas sharbat pilaya. Phir hum neeche aa gaye. Naukar ko maine keh hi rakha tha ke khana bana ke rakh dega aur main le loonga. Tanvi ne khana garam kiya aur hum jaldi se khana khakar nibat gaye. Phir dono ne mil kar bartan sametey aur ek set bartanon ka saaf karke rakh diya taki naukaron ko pata na lagey ki merey saath kissi aur ne bhi khana khaya tha.

Hum dono bedroom mein aa gaye. Aate hi maine sabse pehle apne kapde utaare aur poori tarah nanga ho gaya. Tanvi muskurayee aur ussne bhi mera anusaran karte huey apne saare kapde utaar phenke aur meri tarah poori nangi hokar mujhse lipat gayee aur boli aaj ka din bahut lamba ho gaya tha merey liye. Maine ussko kaha ke ho jata hai aur wo kehte hain na intezaar ki ghadiyaan lambi hoti hain. Par ab to koyi intezaar baaki nahi raha na. Tanvi hans padi aur mujhse kass ke lipat gayee. Main ussko apne saath chipkaye huey hi bed par le aaya aur phir shuru hua chudan chudayee ka khel jo 2 ghante se zyada chala aur iss dauraan maine ussko do baar choda aur wo pata hi nahi kitni baar jhadi kyonki main doosre round mein usski mast chudayee karte huey 5 ke aagey ginana bhool gaya.

kramashah......


rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 14:07

कुँवारियों का शिकार--28

गतान्क से आगे..............

इसी तरह दो हफ्ते बीत गये. हमारा चुदन चुदाई का खेल चलता रहा कभी मैं ऊपेर चला जाता और कभी तनवी नीचे आ जाती और इन दो हफ्तों में शायद दो या तीन दिन ही हमने यह खेल नही खेला वरना रोज़ ही हम इस में मशगूल रहे. जिम क्लब का बोर्ड लग गया था. मेंबर्ज़ डालने के लिए तनवी को मैने बोल दिया था. तनवी लड़कियों से बात करके उन्हें तैयार करने का काम शुरू करने वाली थी. उधर मरियम काएक्सपेरिमेंट बहुत पॉज़िटिव रहा था. दो हफ्तों में मरियम अपने पुराने लेवेल के बहुत करीब पहुँच गयी थी और वो तनवी को थॅंक्स बोलने भी आई थी. तनवी ने उसको समझा दिया था के वो अपनी पढ़ाई की ओर ध्यान दे ताकि अब जो उसमे इंप्रूव्मेंट्स नज़र आनी शुरू हुई हैं वो बनी रहें. मरियम प्रॉमिस करके गयी थी के वो ऐसा ही करेगी और क्योंकि अब उसकी जिगयसा शांत हो चुकी थी इसीलिए वो अपनी पढ़ाई पर ज़्यादा कॉन्सेंट्रेट कर पा रही थी. प्रिया और नेहा ने भी मेरे कहने पर तनवी से बात की थी और वो भी अपनी पढ़ाई के बारे में संतुष्ट थीं कि अब वो अच्छी तरह से कॉन्सेंट्रेट कर रही हैं. मैने सब रेस्पॉन्सिबिलिटी तनवी को दे दी थी और वो अब मेरे द्वारा मार्क की गयी लड़कियों पर ध्यान दे रही थी. मैने तनवी को सीक्ट्व की कोई जानकारी नही होने दी थी. वो सारी स्टडी मैं खुद ही करता था और किसी भी लड़की के बारे में यदि मुझे कोई शक़ होता तो मैं तनवी को उसकी मार्क्स की डीटेल दे देता था और फिर वो नज़र रखती थी और निश्चय करती थी कि आगे क्या करना है.

क्लब की मेंबरशिप के लिए काफ़ी अप्लिकेशन्स आ गयी थीं.तनवी ने 18-20 साल की लड़कियों को मेंबरशिप देनी शुरू कर दी और 8 लड़कियाँ मेंबर भी बन गयी थीं. जिम स्टार्ट कर दिया था और तनवी सुबह ही 6 बजे से 7 बजे तक सबको एक्सर्साइज़ करवाती थी. वो एक जानकार लड़की होने के कारण सब ठीक से संभाल पा रही थी. मैं भी वहीं अपनी एक्सर्साइज़ करता था और मेरा टाइम भी वही था. मेरा एक्विपमेंट हेवी था और अलग कोने में था. तीन तरफ दीवार थी और एक तरफ ग्लास था और उसी तरफ डोर भी था. मेरी पीठ ग्लास की तरफ होती थी पर अंदर मिरर लगे होने से मैं पूरे हॉल को आराम से देख सकता था. बाहर से बहुत ध्यान से देखने पर भी केवल इतना नज़र आता था कि अंदर कोई है या नही. मैं अंदर अपनी एक्सर्साइज़स करता था 40-45 मिनट तक और फिर बाहर मेरे रूम के सामने गर्ल्स के लिए तोड़ा सा हेवी एक्विपमेंट भी था उनके लिए जो ज़्यादा वेट लॉस के लिए एक्सर्साइज़ करना चाहती थीं. उनको एक्सर्साइज़ मैं करवाता था और केवल 15 मिनट. तनवी ने पहले 15 मिनट का एरोबिक एक्सर्साइज़ का रुटीन बनाया था बॉडी वॉर्म-अप के लिए फिर 30 मिनट बॉडी टोनिंग की लाइट एक्शेरेरसिसेस का रुटीन था और एंड में 15 मिनट हेवी एक्सर्साइज़ वाली लड़कियाँ मेरी तरफ आ जाती थीं और बाकी लड़कियों को तनवी वेट मेंटेनेन्स एक्सर्साइज़स करवाती थी. लड़कियों में दो तो मेरे पड़ोस में से थीं कोयल 18 साल और शिल्पी 19 साल और दो मेरी कॉलोनी की ही थीं बिंदु 18 साल और ऋतु 20 साल और पास ही रहती थीं. बाकी 4 लड़कियाँ थोड़ी दूर से आती थीं और इनमें दो बहनें नाज़िया 20 साल और ज़ाकिया 22 साल भी थीं और बाकी दोनो लड़कियाँ थीं निक्की 18 साल और नीशी 21 साल. सभी लड़कियाँ सुंदर ही थीं पर दोनो बहनें और दो और लड़कियाँ, एक मेरे पड़ोस की शिल्पी और एक मेरी कॉलोनी की ऋतु कुच्छ ज़्यादा ही सुंदर थीं. वैसे जवानी से भरपूर हर लड़की सुंदर ही दिखती है.

दोनो बहनों में से नाज़िया थोड़ी सी ओवरवेट थी लेकिन ज़्यादा नही पर फिर भी उसको ध्यान करना ज़रूरी था नही तो वो मोटी हो सकती थी. उसे 3-4 किलो वज़न कम भी करना था हिप्स और कमर से जो उसकी बॉडी के अनुपात से कुच्छ ज़्यादा भरे हुए थे. मेरे पास 3 लड़कियाँ आती थीं. बाकी की दोनो लड़कियों को मामूली सी वेट प्राब्लम थी जो की एक्सर्साइज़स से ठीक हो सकती थी. तनवी ने सबको कलॉरी चार्ट भी बना कर दिया था की अलग अलग तरह के खाने में कितनी कॅलरीस होती हैं और एक दिन में कितनी कॅलरीस कन्स्यूम करनी चाहिए जो नॉर्मल वर्किंग में बर्न हो जाती हैं और कैसी एक्सर्साइज़ से कितनी कॅलरीस बर्न होती हैं ताकि सब ज़्यादा कॅलरीस ना लें और अपने आप को मेनटेन करके रखें. और यह सब शुरू हुए दो हफ्ते होने वाले थे कि एक दिन जब मैं जिम की सीडीयाँ उतर रहा था तो देखा कि दोनो बहनें मेरे आगे थीं. नाज़िया आगे और ज़ाकिया पीच्छे थी. अचानक मैने देखा कि जैसे ही नाज़िया आखरी सीडी पर पर रखने वाली थी कि उसका पैर फिसल गया और उसने घूम कर ज़ाकिया को पकड़ने की कोशिश भी की पर पकड़ ना पाई और गिर गयी. उसकी एक टाँग अपने ही नीचे आ गयी और वो बहुत ज़ोर से चिल्लाई. इतने में तनवी भी आ गयी थी तो मैने और तनवी ने दौड़ कर नाज़िया को उठाया और टेबल पर लिटा दिया.

आज उसने एक ढीला पाजामा और टॉप पहना हुआ था. पाजामा थोड़ा लंबा होने के कारण उसका पैरउसमे फँस गया था और वो गिर गयी थी. तनवी ने उसको पूछा के कहाँ लगी है और कहाँ दर्द हो रही है? उसने हाथ से बताया के दायां घुटने पर बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है. तनवी ने चेक करना चाहा तो ढीले पाजामा में कुच्छ पता नही चल रहा था. उसने तुरंत खींच कर उसका पाजामा नीचे कर दिया और एक टवल उसकी जांघों पर रख दिया. पाजामा उतार कर उसने उसका घुटना देखा तो वो अंदर की तरफ दर्द कर रहा था और थोड़ी सूजन भी आ गयी थी. तनवी ने हाथ लगाकर अच्छी तरह से चेक किया और मुझे बोला के राज इसकी जाँघ को अच्छे से पकड़ लो और जब मैं कहूँ तो क्लॉकवाइज़ हल्का सा प्रेशर रखना ताकि जाँघ दूसरी तरफ ना मूड सके. मैने अपने दोनो हाथों में उसकी जाँघ को अच्छे से पकड़ लिया और तनवी ने उसकी पिंडली पकड़ कर आंटी क्लॉकवाइज़ एक हल्का सा झटका दिया. एक हल्की सी टिक की आवाज़ हुई और नाज़िया ज़ोर से चीखने को हुई पर आआआआआआअँ करके रह गयी और मुस्कुराने लगी. तनवी की ओर देख कर बोली के यह क्या जादू किया है के दर्द एकदम गायब हो गया है. तनवी ने बताया के कुच्छ नही तुम्हारा घुटने का जोड़ हिल गया था जो मैने सेट तो कर दिया है पर अभी तुम्हें इस पर ज़ोर नही डालना है. मुझे उसने कहा के इस पर हल्के हाथ से मसाज करते रहो तब तक मैं लड़कियों की एक्सर्साइज़ शुरू करवा देती हूँ. ज़ाकिया जो सारा रुटीन अच्छे से समझ चुकी थी, को उसने अपनी जगह पर खड़ा कर दिया और कहा कि तुम सबको एक्सर्साइज़ कारवओ और मैं नाज़िया को ऊपेर ले जाकर इसको स्पेशल तेल की मालिश करती हूँ ताकि यह जल्दी ठीक हो सके.

तनवी ने मुझे कहा के मैं नाज़िया को उठा लूँ और ऊपेर ले चलूं. मैने उससे अपने दोनो हाथों में उठा लिया और तनवी ने उसकी टाँग पकड़ ली और हम दोनो उसको लेकर ऊपेर बेडरूम में आ गये. मैने जब नाज़िया को उठाया तो उसने अपना एक बाजू मेरी पीठ पर करके मुझे पकड़ लिया जिस कारण उसका सुडौल मम्मा मेरी छाती से लगा और मैं चौंक गया. उसने ब्रा नही पहनी हुई थी. उसका सख़्त मम्मा मेरी छाती से दबा हुआ था और वो अपने हाथ से मेरी पीठ पर और ज़्यादा दबाव बना रही थी ताकि उसका मम्मा और ज़्याद दबे. तनवी ने नाज़िया को बेड पर लिटा दिया और उसकी टाँग के नीचे एक तकिया लगा दिया और उसको कहा के हिलना मत. मुझे उससणने कहा के घुटने के अंदर और नीचे की तरफ मालिश करते रहो और मैं तेल लेकर आती हूँ. तनवी को उसने थोड़ा साइड करके लेटने को कहा ताकि घुटने के अंदर और नीचे की तरफ मालिश हो सके. फिर वो ऊपेर चली गयी. मैने उसके घुटने की मालिश शुरू की. दोनो हाथों को घुटने पर रखा और उनको अलग दिशाओं में ले जाता. फिर उनको वापिस लाकर घुटने पर मिला देता. जैसा तनवी ने कहा था, मैं हल्के हाथ से ही मालिश कर रहा था. मैने देखा के नाज़िया मेरी ओर ही देख रही थी और मुझसे नज़रें मिलते ही वो मुस्कुरा दी.

उसकी आँखों में लाल डोरे नज़र आ रहे तहे और उनमें एक मस्ती सी नज़र आ रही थी. मैं ऐसी नज़र से अंजान नही था पर अपनी तरफ से कोई पहल नही कर सकता था. हां अपना ऊपेर जाने वाला हाथ मैं ज़्यादा ही ऊपेर ले जाने लगा और करीब करीब उसकी चूत तक ही पहुँच रहा था. उसकी उत्तेजना बढ़ रही थी और उसका सीना ऊपेर नीचे होने लगा था. मैने अपने हाथ को पूरा ऊपेर ले जाना शुरू कर दिया और हर बार जब हाथ ऊपेर जाता तो उसकी जाँघ के जोड़ तक जाकर उसकी चूत को छ्छू कर वापिस आता. तनवी तब तक तेल लेकर आ गयी और मुझे देख कर बोली के दो बूँदें तेल लेकर अपने हाथों पर अच्छी तरह से लगाकर मालिश करो और हर 10 मिनिट के बाद 2-2 बूँदें तेल लगाते रहना. मैने वैसा ही करना शुरू कर दिया. यह तो कोई स्पेशल तेल ही था थोरी देर में ही मेरे हाथ काफ़ी गरम हो गये तो ज़ाहिर है की उसके घुटने पर भी सेक लग रहा होगा. गरमी तो कहीं और भी चढ़ रही थी. मैं देख रहा था की नाज़िया की साँसें भी गरम हो रही थीं और वो काफ़ी तेज़ी से साँस ले रही थी. पर मैं खामोशी से उसके घुटने की मालिश करता रहा और हर बार मेरा हाथ ऊपेर जाता तो उसकी चूत को भी टटोल कर वापिस आता. नाज़िया ने अपने हाथ हिलाने शुरू कर दिए और खुद भी हिलने को हुई तो मैने उसको रोका और कहा के हिलो मत. वो बोली की उसको बेचैनी हो रही है. मैं समझ तो रहा था के क्यों हो रही है पर उसकी बेचैनी को दूर नही कर सकता था. कुच्छ तो पहल उसको ही करनी थी.

नाज़िया से जब रहा नही गया तो उसने अपने दोनो हाथ उठा कर अपनी गोलैईयों पर रख दिए और उन्हे आहिस्ता आहिस्ता मसलने लगी. उसके हाथों के बीच उसके छ्होटे छ्होटे निपल उसके पतले टॉप में उभर कर नज़र आने लगे थे. तनवी और नाज़िया के आने में अभी समय था. मैने नाज़िया से पूछा की क्या बात है क्या तुम्हारी तकलीफ़ बढ़ गयी है? वो बोली के नही दर्द तो नही हो रहा पर कुच्छ अजीब सा लग रहा है और वो नही जानती कि क्या हो रहा है. मैने फिर पूछा के तुम यह क्या कर रही हो? और मैने अपने हाथ उसके दोनो हाथों पर रख दिए. उसका चेहरा पूरा लाल टमाटर हो गया और वो कुच्छ नही बोली. मैने उसको फिर पूच्छा की यह क्या कर रही हो तो वो बोली के पता नही. मैने कहा के हाथ हटाओ मुझे देखने दो कही यहा भी तो नही लगी है. मैने उसके टॉप के अंदर हाथ डाल कर टॉप को ऊपेर उठाया और उसके हाथों को हटाते हुए उसके मम्मे नंगे कर दिए और उनको दबा दबा के देखने का बहाना करने लगा. क्या मस्त मम्मे थे एकदम सॉलिड रब्बर की डॉग बॉल जैसे और जैसे ही मेरा हाथ नाज़िया के मम्मों पर लगा वो ज़ोर से सीत्कार कर उठी और उसने अपने हाथों से मेरे हाथों को दबा दिया और बोली के ज़ोर से मसल दो इनको बहुत अजीब सा लग रहा है. मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा. मैने कहा के मैं समझ गया हूँ के तुम्हें ठीक कैसे करना है. वो बोली तो जल्दी से करो ना जो भी करना है.

मैं तेज़ी से बाथरूम से टवल लेकर आया और उसकी गांद के नीचे लगा दिया फोल्ड करके और उसकी पॅंटी को नीचे कर दिया और उसकी चूत को देखता ही रह गया. बिना बालों की चूत की दोनो गुलाबी पुट्तियाँ आपस मे जुड़ी हुई थीं और उसके पानी से भीगी हुई थीं. मैने एक हाथ से उसकी चोटिल जाँघ को कस के पकड़ा और दूसरे हाथ की उंगली उसकी चूत की लकीर पर चलाने लगा और साथ ही अपने अंगूठे से उसकी चूत के दाने को रगड़ने लगा. नाज़िया को मैने कहा के अब जो होने वाला है वो होने देना और अपनी टाँग को मत हिलाना और अपना हाथ उसकी जाँघ से उठाकर उसके मम्मों को बारी बारी से मस्सलने लगा. 4-5 मिनट में ही नाज़िया आआआआआआआआआः ऊऊऊऊऊऊऊओ करती झाड़ गयी और मैने टवल से उसकी चूत को पोंछ कर उसकी पॅंटी ठीक कर दी और उसका टॉप नीचे करते हुए कहा कि आज के लिए उसकी बेचैनी का इतना इलाज ही काफ़ी है. उसने चौंक कर मेरी तरफ देखा और शर्मा कर अपनी आँखें झुका लीं. बहुत प्यारी लग रही थी नाज़िया पर समय ना होने के कारण मैं कुच्छ कर नही सकता था. मैने उसको पूछा के कैसे लगा? वो चुप रही तो मैने दुबारा पूछा के बताओ कैसा लगा? वो धीमे स्वर में बोली के बहुत अच्छा लगा. मैने कहा के मज़ा आया? उसने हां में सर हिलाया और आँखें मूंद लीं. मैने कहा की बाकी कल देखेंगे.

थोड़ी देर में ही तनवी और नाज़िया की आपी ज़ाकिया आ गयीं और तनवी ने नाज़िया से पूछा के अब कैसा लग रहा है? नाज़िया बोली के दर्द तो नही है तनवी ने कहा के जानती हूँ. पर अभी तुमको 3 दिन मालिश करवानी पड़ेगी फिर पूरा आराम आएगा. आज का दिन तो तुम अपना पैर नीचे नही लगाना और इस पर अपना वज़न बिल्कुल नही डालना. कल तुम्हे चेक करके ही पता चलेगा कि कैसा है और क्या करना है. फिर तनवी ने उसकी टाँग पर नीचे की ओर एक खपकची बाँध दी जो उसकी जाँघ से ले कर उसकी पिंडली तक थी और उसको कहा के इसको खोले नही. ज़ाकिया से उसने कहा के उम्मीद तो है के अब दर्द नही होगा पर अगर हो तो कोई भी पेन किल्लर टॅबलेट दे देना और कल इसको ज़रूर लेकर आना. फिर मैं और तनवी उनको मेरी कार में घर छ्चोड़ने गये क्योंकि आज वो ऑटो से आई थीं. जब हम वहाँ पहुँचे तो तनवी चौंक गयी पर बोली कुच्छ नही. मैं भी चुप ही रहा. फिर तनवी और ज़ाकिया ने जैसे नाज़िया को कार में बिठाया था वैसे ही निकल कर घर के अंदर ले गयीं और फिर तनवी वापिस आकर कार में बैठी और बोली के चलो.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--28

gataank se aage..............

Issi tarah do hafte beet gaye. Hamara chudan chudayee ka khel chalta raha kabhi main ooper chala jata aur kabhi Tanvi neeche aa jaati aur in do hafton mein shayad do ya teen din hi hamne yeh khel nahi khela varna roz hi hum iss mein mashgool rahey. Gym Club ka board lag gaya tha. Members daalne ke liye Tanvi ko maine bol diya tha. Tanvi ladkiyon se baat karke unhein taiyaar karne ka kaam shuru karne waali thi. Udhar Mariyum ka experiment bahut positive raha tha. Do hafton mein Mariyum apne purane level ke bahut kareeb pahunch gayee thi aur wo Tanvi ko thanks bolne bhi aayee thi. Tanvi ne ussko samjha diya tha ke wo apni padhayee ki ore dhyan de taaki ab jo ussmein improvements nazar aani shuru hui hain wo bani rahein. Mariyum promise karke gayee thi ke wo aisa hi karegi aur kyonki ab usski jigyasa shant ho chuki thi issliye wo apni padhayee par zyada concentrate kar paa rahi thi. Priya aur Neha ne bhi merey kehne par Tanvi se baat ki thi aur wo bhi apni padhayee ke baare mein santusht theen ki ab wo achhi tarah se concentrate kar rahi hain. Maine sab responsibility Tanvi ko de di thi aur wo ab mere dwara mark ki gayee ladkiyon par dhyaan de rahi thi. Maine Tanvi ko cctv ki koyi jaankari nahi hone di thi. Wo saari study main khud hi karta tha aur kissi bhi ladki ke baare mein yadi mujhe koyi shaq hota to main Tanvi ko usski marks ki detail de deta tha aur phir wo nazar rakhti thi aur nishchay karti thi ki aage kya karna hai.

Club ki membership ke liye kaafi applications aa gayee theen.Tanvi ne 18-20 saal ki ladkiyon ko membership deni shuru kar di aur 8 ladkiyaan member bhi ban gayee theen. Gym start kar diya tha aur Tanvi subah hi 6 baje se 7 baje tak sabko exercise karwati thi. Wo ek jaankar ladki hone ke kaaran sab theek se sambhaal pa rahi thi. Main bhi wahin apni exercise karta tha aur mera time bhi wahi tha. Mera equipment heavy tha aur alag kone mein tha. Teen taraf deewaar thi aur ek taraf glass tha aur ussi taraf door bhi tha. Meri peeth glass ki taraf hoti thi par andar mirror lagey hone se main poore hall ko araam se dekh sakta tha. Bahar se bahut dhyan se dekhne par bhi keval itna nazar aata tha ki andar koyi hai ya nahi. Main andar apni exercises karta tha 40-45 min tak aur phir bahar merey room ke saamne girls ke liye thora sa heavy equipment bhi tha unnke liye jo zyada weight loss ke liye exercise karna chahti theen. Unko exercise main karwata tha aur kewal 15 min. Tanvi ne pehle 15 min ka aerobic exercise ka routine banaya tha body warm-up ke liye phir 30 min body toning ki light exerercises ka routine tha aur end mein 15 min heavy exercise waali ladkiyan meri taraf aa jaati theen aur baaki ladkiyon ko Tanvi weight maintenance exercises karwaati thi. Ladkiyon mein do to merey pados mein se theen Koyal 18 saal aur Shilpi 19 saal aur do meri colony ki hi theen Bindu 18 saal aur Ritu 20 saal aur paas hi rehti theen. Baaki 4 ladkiyaan thori door se aati theen aur inmein do behnein Nazia 20 saal aur Zakia 22 saal bhi theen aur baaki dono ladkiyan theen Nikki 18 saal aur Nishi 21 saal. Sabhi ladkiyan sunder hi theen par dono behnein aur do aur ladkiyan, ek mere pados ki Shilpi aur ek meri colony ki Ritu kuchh zyada hi sunder theen. Vaise jawani se bharpoor har ladki sunder hi dikhti hai.

Dono behnon mein se Nazia thori si overweight thi lekin zyada nahi par phir bhi ussko dhyan karna zaroori tha nahi to wo moti ho sakti thi. Usse 3-4 kilo wazan kam bhi karna tha hips aur kamar se jo usski body ke anupat se kuchh zyada bharey huey thhe. Mere paas 3 ladkiyaan aati theen. Baaki ki dono ladkiyon ko mamooli si weight problem thi jo ki exercises se theek ho sakti thi. Tanvi ne sabko calory chart bhi bana kar diya tha ki alag alag tarah ke khaney mein kitni calories hoti hain aur ek din mein kitni calories consume karni chahiye jo normal working mein burn ho jaati hain aur kaisi exercise se kitni calories burn hoti hain taki sab zyada calories na lein aur apne aap ko maintain karke rakhein. Aur yeh sab shuru huey do haftey honey waale thhe ki ek din jab main gym ki seediyaan utar raha tha to dekha ki dono behnein mere aagey theen. Nazia aagey aur Zakia peechhey thi. Achanak maine dekha ki jaise hi Nazia ne aakhri seedi par par rakhne waali thi ki usska pair phisal gaya aur ussne ghoom kar Zakia ko pakadne ki koshish bhi ki par pakad na paayi aur gir gayee. Usski ek taang apne hi neeche aa gayee aur wo bahut zor se chillayi. Itne mein Tanvi bhi aa gayee thi to maine aur Tanvi ne daud kar Nazia ko uthaya aur table par lita diya.

Aaj ussne ek dheela pajama aur top pehna hua tha. Pajama thora lamba hone ke kaaran usska pair ussmein phans gaya tha aur wo gir gayee thi. Tanvi ne ussko poochha ke kahan lagi hai aur kahan dard ho rahi hai? Ussne haath se bataya ke daayan ghutne par bahut zyaya dard ho raha hai. Tanvi ne check karna chaha to dheele pajama mein kuchh pata nahi chal raha tha. Ussne turant kheench kar usska pajama neeche kar diya aur ek towel usski janghon par rakh diya. Pajama utaar kar ussne usska ghutna dekha to wo andar ki taraf dard kar raha tha aur thori soojan bhi aa gayi thi. Tanvi ne haath lagakar achhi tarah se check kiya aur mujhe bola ke Raj isski jaangh ko achhe se pakad lo aur jab main kahoon to clockwise halka sa pressure rakhna taki jaangh doosri taraf na mud sakey. Maine apne dono haathon mein usski jaangh ko achhe se pakad liya aur Tanvi ne usski pindli pakad kar anti clockwise ek halka sa jhatka diya. Ek halki si tik ki awaz hui aur Nazia zor se cheekhne ko hui par aaaaaaaaaaaaan karke reh gayi aur muskuraane lagi. Tanvi ki ore dekh kar boli ke yeh kya jaadu kiya hai ke dard ekdum ghayab ho gaya hai. Tanvi ne bataya ke kuchh nahi tumhara ghutne ka jod hil gaya tha jo maine set to kar diya hai par abhi tumhein iss par zor nahi dalna hai. Mujhe ussne kaha ke iss par halke haath se massage karte raho tab tak main ladkiyon ki exercise shuru karwa deti hoon. Zakia jo saara routine achhey se samajh chuki thi, ko ussne apni jagah par khada kar diya aur kaha ki tum sabko exercise karwao aur main Nazia ko ooper le jakar issko special tel ki maalish karti hoon taki yeh jaldi theek ho sakey.

Tanvi ne mujhe kaha ke main Nazia ko utha loon aur ooper le chaloon. Maine usse apne dono haathon mein utha liya aur Tanvi ne usski taang pakad li aur hum dono ussko lekar ooper bedroom mein aa gaye. Maine jab Nazia ko uthaya to ussne apna ek baaju meri peeth par karke mujhe pakad liya jiss kaaran usska sudaul mamma meri chhati se laga aur main chaunk gaya. Ussne bra nahi pehni hui thi. Usska sakht mamma meri chhati se daba hua tha aur wo apne haath se meri peeth par aur zyada dabaav bana rahi thi taaki usska mamma aur zyad dabey. Tanvi ne Nazia ko bed par lita diya aur usski taang ke neeche ek takiya laga diya aur ussko kaha ke hilana mat. Mujhe ussne kaha ke ghutne ke andar aur neeche ki taraf maalish karte raho aur main tel lekar aati hoon. Tanvi ko ussne thora side karke letne ko kaha taki ghutne ke andar aur neeche ki taraf maalish ho sakey. Phir wo ooper chali gayee. Maine usske ghutne ki maalish shuru ki. Dono haathon ko ghutne par rakha aur unko alag dishaaon mein le jaata. Phir unnko wapis laakar ghutne par mila deta. Jaisa Tanvi ne kaha tha, main halke haath se hi maalish kar raha tha. Maine dekha ke Nazia meri ore hi dekh rahi thi aur mujhse nazarein milte hi wo muskura di.

Usski aankhon mein laal dorey nazar aa rahey thhe aur unmein ek masti si nazar aa rahi thi. Main aisi nazar se anjaan nahi tha par apni taraf se koyi pehal nahi kar sakta tha. Haan apna ooper jaane wala haath main zyada hi ooper le jaane laga aur kareeb kareeb usski choot tak hi pahunch raha tha. Usski uttejana badh rahi thi aur usska seena ooper neeche hone laga tha. Maine apne haath ko poora ooper le jaana shuru kar diya aur har baar jab haath ooper jaata to usski jaangh ke jod tak jaakar usski choot ko chhoo kar wapis aata. Tanvi tab tak tel lekar aa gayi aur mujhe dekhar boli ke do boondein tel lekar apne haathon par achhi tarah se lagakar maalish karo aur har 10 minute ke baad 2-2 boondein tel lagaatey rehna. Maine vaisa hi karna shuru kar diya. Yeh to koyi special tel hi tha thori der mein hi merey haath kafi garam ho gaye to zaahir hai ki usske ghutne par bhi sek lag raha hoga. Garami to kahin aur bhi chadh rahi thi. Main dekh raha tha ki Nazia ki saansein bhi garam ho rahi theen aur wo kaafi tezi se saans le rahi thi. Par main khamoshi se usske ghutne ki maalish karta raha aur har baar mera haath ooper jaata to usski choot ko bhi tatol kar waapis aata. Nazia ne apne haath hilaane shuru kar diye aur khud bhi hilne ko hui to maine ussko roka aur kaha ke hilo mat. Wo boli ki ussko bechaini ho rahi hai. Main samajh to raha tha ke kyon ho rahi hai par usski bechaini ko door nahi kar sakta tha. Kuchh to pahal ussko hi karni thi.

Nazia se jab raha nahi gaya to ussne apne dono haath utha kar apni golaiyon par rakh diye aur unhe ahista ahista masalane lagi. Usske hathon ke beech usske chhote chhote nipple usske patle top mein ubhar kar nazar aane lagey thhe. Tanvi aur Nazia ki aapi ke aane mein abhi samay tha. Maine Nazia se poochha ki kya baat hai kya tumhaari takleef badh gayi hai? Wo boli ke nahi dard to nahi ho raha par kuchh ajeeb sa lug raha hai aur wo nahi jaanti ki kya ho raha hai. Maine phir poochha ke tum yeh kya kar rahi ho? Aur maine apne haath usske dono haathon par rakh diye. Usska chehra poora laal tamatar ho gaya aur wo kuchh nahi boli. Maine ussko phir poochha ki yeh kya kar rahi ho to wo boli ke pata nahi. Maine kaha ke haath hatao mujhe dekhne do kahi yaha bhi to nahi lagi hai. Maine usske top ke andar haath daal kar top ko ooper uthaya aur usske haathon ko hataate huey usske mammey nange kar diye aur unnko dabaa dabaa ke dekhne ka bahana karne laga. Kya mast mammey thhe ekdum solid rubber ki dog ball jaise aur jaise hi mera haath Nazia ke mammon par laga wo zor se sitkar kar uthi aur ussne apne haathon se mere hathon ko dabaa diya aur boli ke zor se massal do inko bahut ajeeb sa lug raha hai. Mujhse bardasht nahi ho raha. Maine kaha ke main samajh gaya hoon ke tumhein theek kaise karna hai. Wo boli to jaldi se karo na jo bhi karna hai.

Main tezi se bathroom se towel lekar aaya aur usski gaand ke neeche laga diya fold karke aur usski pany to neeche kar diya aur usski choot ko dekhta hi reh gaya. Bina baalon ki choot ki dono gulabi puttian apas me judi hui theen aur usske paani se bheegi hui theen. Maine ek haath se usski chotil jaangh ko kass ke pakda aur doosre haath ki ungli usski choot ki lakeer par chalaane laga aur saath hi apne angoothe se usski choot ke daane ko ragadne laga. Nazia ko maine kaha ke ab jo hone wala hai wo hone dena aur apni taang ko mat hilana aur apna haath usski jaangh se uthakar usske mammon ko baari baari se massalne laga. 4-5 min mein hi Nazia aaaaaaaaaaaaaaaaaah oooooooooooooooh karti jhad gayee aur maine towel se usski choot ko ponch kar usski panty theek kar di aur usska top neeche karte huey kaha ki aaj ke liye usski bechaini ka itna ilaaj hi kaafi hai. Ussne chaunk kar meri taraf dekha aur sharma kar apni aankhein jhuka leen. Bahut pyaari llug rahi thi Nazia par samay na hone ke kaaran main kuchh kar nahi sakta tha. Maine ussko poochha ke kaise laga? Wo chup rahi to maine dubara poochha ke batao kaisa laga? Wo dheeme swar mein boli ke bahut achha laga. Maine kaha ke maza aaya? Ussne haan mein sar hilaya aur ankhein moond leen. Maine kaha ki baaki kal dekhenge.

Thori der mein hi Tanvi aur Nazia ki aapi Zakia aa gayeen aur Tanvi ne Nazia se poochha ke ab kaisa lug raha hai? Nazia boli ke dard to nahi hai Tanvi ne kaha ke jaanti hoon. Par abhi tumko 3 din maalish karwani padegi phir poora aaraam aayega. Aaj ka din to tum apna pair neeche nahi lagana aur iss par apna wazan bilkul nahi daalna. Kal tumhe check karke hi pata chalega ki kaisa hai aur kya karna hai. Phir Tanvi ne usski taang par neeche ki ore ek khapacchi baandh di jo usski jaangh se le kar usski pindli tak thi aur ussko kaha ke issko khole nahi. Zakia se ussne kaha ke ummeed to hai ke ab dard nahi hoga par agar ho to koyi bhi pain killer tablet de dena aur kal issko zaroor lekar aana. Phir main aur Tanvi unko meri car mein ghar chhodne gaye kyonki aaj wo auto se aayi theen. Jab hum wahan pahunche to Tanvi chaunk gayee par boli kuchh nahi. Main bhi chup hi raha. Phir Tanvi aur Zakia ne jaise Nazia ko car mein bithaya tha vaise hi nikal kar ghar ke andar le gayeen aur phir Tanvi waapis aakar car mein baithi aur boli ke chalo.

kramashah......


rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 14:09

कुँवारियों का शिकार--29

गतान्क से आगे..............

चलते ही तनवी ने मुझसे पूछा के जानते हो ये कौन हैं? मैं क्या कहता, मैने कहा के नही. तो तनवी ने बताया के यह मरियम की बहनें हैं क्योंकि यह वही घर है जहाँ मैने मरियम को छ्चोड़ा था. मैने कहा के तुमने तो कहा था के उसकी बहनें ही घर में थीं तो तुमने देखा नही था उनको. वो बोली के नही शकल नही देख पाई थी क्योंकि दुपट्टा लपेटा हुआ था. मैं हंस पड़ा. फिर तनवी ने एक धमाका किया कि तुम कहाँ तक पहुँचे नाज़िया के साथ? मैं चौंक कर बोला क्या मतलब? वो बोली के मैं नाज़िया को देखते ही समझ गयी थी के तुमने कुच्छ ना कुच्छ किया है उसके साथ और फिर उसकी चोट तो ठीक हो चुकी थी नीचे ही. तेल की मालिश का तो बहाना था तुम्हारे हाथ लगवाने का. मैने तनवी की ओर देखा तो वो शरारत से मुस्कुरा रही थी. मैने कहा के उसको ज़िंदगी का पहला मज़ा मिला है मेरे हाथों से और ज़्यादा कुच्छ करने का तो टाइम ही नही था.

तनवी बोली के फिकर ना करो अभी वो कल और परसों भी तो मालिश करवाने वाली है जो मेरे हिसाब से काफ़ी होंगे तुम्हारे लिए उसको शीशे में उतारने के लिए. तुम्हारी मदद मेरा तेल कर ही रहा है, उसका कमाल तो तुम देख ही चुके हो. मैने कहा के यह सब तुम्हारे तेल ने किया था, मैं तो समझ रहा था के मेरा स्पर्श उसको उत्तेजित कर रहा है. तनवी मुस्कुराइ और बोली के दोनो का मिलाजुला रिक्षन था. हम घर पहुँचे और अपने अपने कमरे में चले गये तैयार होकर स्कूल जाने के लिए. ऑफीस में पहुँचकर मैने अपना पीसी ऑन किया और उसे क्लियर करने की सोची. मैं हर 15-16 दिन में अपने पीसी की सफाई करता था. मतलब के टेंप फोल्डर, टेंप इंटरनेट फाइल्स, रीसेंट डॉक्युमेंट्स के फोल्डर्स को खाली कर देता था ताकि पीसी की स्पीड अच्छी रहे. सबसे पहले मैने टेंप इंटरनेट फाइल्स, फिर टेंप फोल्डर्स खाली कर दिए.

सबसे आख़िर में मैने माइ रीसेंट डॉक्युमेंट्स का फोल्डर खाली करने के लिए खोला. फोल्डर में फाइल्स कुच्छ ज़्यादा ही थीं. जो कंप्यूटर्स की जानकारी रखते हैं उनको तो समझ आ ही जाएगा पर होता यह है के जब भी कोई फाइल या फोल्डर खोला जाता है कंप्यूटर में तो उसका एक शॉर्टकट रीसेंट डॉक्युमेंट्स फोल्डर में आ जाता है और उसकी प्रॉपर्टीस में जायें राइट क्लिक करके तो पता चल जाता है कि लास्ट आक्सेस कब हुई थी उस फाइल या फोल्डर की. मुझे शक़ हुआ तो मैने सारी फाइल्स देखनी शुरू कर दीं. बहुत सारी फाइल्स ऐसी थीं जिनको मैने पिच्छले 15-20 दिन तो क्या कयि महीनों से आक्सेस नही किया था. इसका एक ही मतलब था के मेरी जानकारी के बिना किसी ने मेरे कंप्यूटर के साथ छेड़-छाड़ की थी. मैने कुच्छ फाइल्स को राइट क्लिक करके उनकी प्रॉपर्टीस चेक की तो पता चला के सब 2 दिन पहले ही असीस्स की गयी थीं 11 और 12 बजे के बीच में. मैने सोचा तो ध्यान आया कि 2 दिन पहले मैं कोई 10-45 पर ऑफीस से निकला था और एक मीटिंग करके मैं 12-30 पर वापिस आ गया था. मैने अपने रूम की सीक्ट्व की रेकॉर्डिंग चेक की तो पता चला के तनवी मेरे पीसी पर 11-12 बजे तक बैठी थी और अच्छी तरह से मेरे पीसी को चेक करके गयी थी. मुझे बहुत हैरानी हुई पर मैने उस वक़्त तनवी से कुच्छ भी कहना उचित नही समझा और छुट्टी होने पर घर आ गया. पर चलने से पहले मैने अपने कंप्यूटर का पासवर्ड बदल डाला और उसमे 5 मिनटका स्क्रीनसावेर लॉक लगा दिया ताकि 5 मिनट इनॅक्टिव रहने पर पीसी लॉक हो जाए और फिर पासवर्ड डालने पर ही खुले. घर आकर मैं सोचता रहा कि मुझे तनवी से बात करनी चाहिए या नही. यह तो अच्छा था के सीक्ट्व की रेकॉर्डिंग के लिए अलग कंप्यूटर था और उसके साथ कोई छेड़-छाड़ नही हुई थी जो मैने चेक कर लिया था. फिर मैने फ़ैसला किया कि अभी तनवी से कोई बात नही करूँगा पर अब उसकी हर हरकत पर नज़र रखूँगा. मैने नीचे जिम में सीक्ट्व कॅमरास फिट करवा दिए थे और अब मैने ऊपेर तनवी के रूम में भी कॅमरास फिट करवाने का इंटेज़ाम कर दिया. अगले दिन ही हमारे स्कूल जाने के बाद कॅमरास फिट हो जाने थे.

मैने उस दिन की रेकॉर्डिंग चेक की जो की नॉर्मल ही लग रही थी. 11 बजे तनवी मेरे ऑफीस में दाखिल हुई और मेरे पीसी पर बैठ गयी और उसके आक्षन्स से लग रहा था कि वो फाइल्स खोल कर चेक करती रही थी कि लगभग 11-50 पर तनवी के मोबाइल की घंटी बजी. तनवी ने अपना फोन उठाकर चेक किया और मैन डोर की तरफ देखा और मैन डोर लॉक देखकर उसने फोन उठा लिया और बोली कि हां बोलो क्या बात है. मैं चौंक गया कि तनवी किसके साथ बात कर रही है? फिर तनवी की आवाज़ आई के मैं चेक कर चुकी हूँ पूरा एक घंटा पर मुझे ऐसा कुच्छ नही मिला जो तुम्हारे काम का हो. इसका मतलब था के तनवी मेरा पीसी किसी के कहने पर उसके लिए चेक कर रही थी. तनिवि बोल रही थी के मैने बताया ना मैं उसको शीशे में उतार चुकी हूँ और उसका विश्वास भी जीत चुकी हूँ. कोई फिकर वाली बात नही है मेरी फिकर तो बिल्कुल मत करो. मैं अपने फ़ैसले पर कायम रहा के मैं तनवी से कुच्छ भी नही पूच्हूंगा और उसे बिल्कुल भी नही लगने दूँगा की मुझे कुच्छ पता चल गया है और मैं उस पर नज़र रख रहा हूँ. बल्कि अब मैं अपने पीसी में कोई ऐसी फाइल नही रहने दूँगा जिसके कारण किसी को मेरी गतिविधियों के बारे में पता चल सके. पूरे सीक्ट्व की रेकॉर्डिंग्स का कनेक्षन मैने अपने घर पर करवा दिया और पीसी को घर पर शिफ्ट कर दिया, और उसको बहुत अच्छी तरह से पासवर्ड प्रोटेक्षन और आक्सेस प्रोटेक्षन दे दिया. अब बिना मेरी मर्ज़ी के कोई उस पीसी को खोलकर चेक नही कर सकता था. मैने सोच लिया के कभी-कभी तनवी को मौका दूँगा कि वो मेरे पीसी पर बैठ कर मेरा कुच्छ काम करे ताकि वो आराम से मेरे पीसी को चेक कर सके. इसके दो लाभ होंगे एक तो वो यह समझेगी के मुझे उस पर अधिक विश्वास हो गया है और दूसरा वो बेफिकर होकर मेरे ऑफीस में बैठेगी और हो सकता है के कुच्छ ऐसा कर बैठे कि उसकी असलियत मेरे सामने आ जाए.

क्रमशः.............

KUNWARIYON KA SHIKAAR--29

gataank se aage..............

Chalte hi Tanvi ne mujhse poochha ke jaante ho ye kaun hain? Main kya kehta, maine kaha ke nahi. To Tanvi ne bataya ke yeh Mariyum ki behnein hain kyonki yeh wahi ghar hai jahan maine Mariyum ko chhoda tha. Maine kaha ke tumne to kaha tha ke usski behnein hi ghar mein theen to tumne dekha nahi tha unnko. Wo boli ke nahi shakal nahi dekh paayee thi kyonki dupatta lapeta hua tha. Main hans pada. Phir Tanvi ne ek dhamaka kiya ki tum kahan tak pahunche Nazia ke saath? Main chaunk kar bola kya matlab? Wo boli ke main Nazia ko dekhte hi samajh gayee thi ke tumne kuchh na kuchh kiya hai usske saath aur phir uski chot to theek ho chuki thi neeche hi. Tel ki maalish ka to bahana tha tumhaare haath lagwaane ka. Maine Tanvi ki ore dekha to wo shararat se muskura rahi thi. Maine kaha ke ussko zindagi ka pehla maza mila hai mere haathon se aur zyada kuchh karne ka to time hi nahi tha.

Tanvi boli ke fikar na karo abhi wo kal aur parson bhi to maalish karwaane waali hai jo merey hisaab se kaafi hongey tumhare liye ussko sheeshe mein utarne ke liye. Tumhaari madad mera tel kar hi raha hai, usska kamaal to tum dekh hi chuke ho. Maine kaha ke yeh sab tumhare tel ne kiya tha, main to samajh raha tah ke mera sparsh ussko uttejit kar raha hai. Tanvi muskurayi aur boli ke dono ka milajula reaction tha. Hum ghar pahunche aur apne apne kamre mein chaley gaye taiyaar hokar school jaane ke liye. Office mein pahunchkar maine apna PC on kiya aur usse clear karne ki sochi. Main har 15-16 din mein apne PC ki safayee karta tha. Matlab ke Temp Folder, Temp Internet Files, Recent Documents ke folders ko khali kar deta tha taki PC ki speed achhi rahe. Sabse pehle maine Temp Internet Files, Phir Temp folders khali kar diye.

Sabse aakhir mein maine My Recent Documents ka folder khali karne ke liye khola. Folder mein files kuchh zyada hi theen. Jo computers ki jaankaari rakhte hain unnko to samajh aa hi jayega par hota yeh hai ke jab bhi koyi file ya folder khola jaata hai computer mein to usska ek shortcut Recent Documents folder mein aa jaata hai aur usski properties mein jayein right click karke to pata chal jaata hai ki last access kab hui thi uss file ya folder ki. Mujhe shaq hua to maine saari files dekhni shuru kar deen. Bahut saari files aisi theen jinko maine pichhle 15-20 din to kya kayi mahinon se access nahi kiya tha. Isska ek hi matlab tha ke meri jaankari ke bina kissi ne mere computer ke saath chhed-chhad ki thi. Maine kuchh files ko right click karke unnki properties check ki to pata chala ke sab 2 din pehle hi aceess ki gayee theen 11 aur 12 baje ke beech mein. Maine socha to dhyan aaya ki 2 din pehle main koyi 10-45 par office se nikla tha aur ek meeting karke main 12-30 par wapis aa gaya tha. Maine apne room ki cctv ki recording check ki to pata chala ke Tanvi merey PC par 11-12 baje tak baithi thi aur achhi tarah se merey PC ko check karke gayee thi. Mujhe bahut hairani hui par maine uss waqt Tanvi se kuchh bhi kehna uchit nahi samjha aur chutti hone par ghar aa gaya. Par chalne se pehle maine apne computer ka password badal dala aur ussmein 5 min ka screensaver lock laga diya taki 5 min inactive rehne par PC lock ho jaye aur phir password daalne par hi khule. Ghar aakar main sochta raha ki mujhe Tanvi se baat karni chahiye ya nahi. Yeh to achha tha ke cctv ki recording ke liye alag computer tha aur usske saath koyi chhed-chaad nahi hui thi jo maine check kar liya tha. Phir maine faisla kiya ki abhi Tanvi se koyi baat nahi karoonga par ab usski har harkat par nazar rakhoonga. Maine neeche Gym mein cctv cameras fit karva diye thhe aur ab maine ooper Tanvi ke room mein bhi cameras fit karvane ka intezaam kar diya. Agle din hi humaare school jaane ke baad cameras fit ho jaane thhe.

Maine uss din ki recording check ki jo ki normal hi lag rahi thi. 11 baje Tanvi merey office mein daakhil hui aur merey PC par baith gayee aur usske actions se lag raha tha ki vo files khol kar check karti rahi thi ki lagbhag 11-50 par Tanvi ke mobile ki ghanti baji. Tanvi ne apna phone uthakar check kiya aur main door ki taraf dekha aur main door lock dekhkar usne phone utha liya aur boli ki haan bolo kya baat hai. Main chaunk gaya ki Tanvi kisske saath baat kar rahi hai? Phir Tanvi ki awaz aayee ke main check kar chuki hoon poora ek ghanta par mujhe aisa kuchh nahi mila jo tumhaare kaam ka ho. Isska matlab tha ke Tanvi mera PC kissike kehne par usske liye check kar rahi thi. Tanivi bol rahi thi ke maine bataya na main ussko sheeshe mein utaar chuki hoon aur usska vishwas bhi jeet chuki hoon. Koyi fikar waali baat nahi hai meri fikar to bilkul mat karo. Main apne faisle par kayam raha ke main Tanvi se kuchh bhi nahi poochhunga aur usse bilkul bhi nahi lagne doonga ki mujhe kuchh pata chal gaya hai aur main usspar nazar rakh raha hoon. Balki ab main apne PC mein koyi aisi file nahi rehne doonga jisske kaaran kissiko meri gatividhiyon ke baare mein pata chal sakey. Poore CCTV ki recordings ka connection maine apne ghar par karva diya aur PC ko ghar par shift kar diya, aur ussko bahut achhi tarah se password protection aur access protection de diya. Ab bina meri marzi ke koyi uss PC ko kholkar check nahi kar sakta tha. Maine soch liya ke kabhi-kabhi Tanvi ko mauka doonga ki wo merey PC par baith kar mera kuchh kaam karey taki wo aaram se merey PC ko check kar sakey. Isske do laabh hongey ek to wo yeh samjhegi ke mujhe uss par adhik vishwas ho gaya hai aur doosra wo befikar hokar merey office mein baithegi aur ho sakta hai ke kuchh aisa kar baithe ki usski asliyat merey saamne aa jaaye.