कुँवारियों का शिकार compleet

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rajaarkey
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Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 15:08

कुँवारियों का शिकार--33

गतान्क से आगे..............

मैने अपने दोस्त से उसे दुबारा चेक करने के लिए कहा और ये भी पता करने के लिए कहा के तनवी की बहन की ससुराल वालों के मेरी ससुराल वालों से कैसे और क्या संबंध थे. कुच्छ दिन मे उसने मुझे फाइनल रिपोर्ट दे दी और उसमे दी गयी जानकारी सबसे अधिक चौंकाने वाली थी. तनवी का कुच्छ ना कुच्छ चक्कर मेरे साले से था और उसी के कारण मेरी ससुराल और तनवी की बहन की ससुराल वालों के जो बहुत अच्छे संबंध थे वो खराब हो चुके थे और इसी वजह से ही तनवी की बड़ी बहन ने अपने मायके से संबंध ख़तम कर लिया था. और शायद इसीलिए तनवी ने अपने बारे मे सब कुच्छ बता कर भी अपनी बड़ी बहन का कोई ज़िकार तक नही किया था. एक और बात जो खुल कर सामने आई वो ये थी के तनवी के पिता एक खानदानी वैद्य थे और उसकी ननिहाल का भी यही खानदानी काम था. अब मुझे पता चला के तनवी को देसी दवाओं की जानकारी कैसे और कहाँ से थी और उसका वो चॅलेंज जो उसकी चूत के बारे मे था, के मैं उसको चोद चोद कर कितनी भी ढीली कर दूँ वो उसको दुबारा किसी दवा के इस्तेमाल से केवल 5 दिन मे ठीक कर लेगी और ऐसी लगेगी जैसे कुँवारी लड़की की चूत होती है.

लेकिन सभी बातों का निचोड़ ये था के कहीं भी 2 और 2 मिलकर 5 नही हो रहे थे और ना ही 3 हो रहे थे. पर परेशानी ये थी के 2 जमा 2 कहीं से 4 भी तो नही हो रहे थे. मतलब ये कि मैं वापिस वहीं पहुँच गया था जहाँ से शुरू हुआ था और मुझे इतना सब कुच्छ जान कर भी ये नही पता चला था कि तनवी क्या चाहती है और उसके साथ कौन है और अगर वो किसी के लिए काम कर रही है तो वो कौन है और उसकी मंशा क्या है. मैने बहुत सोचा और इसके बारे मे मुझे कोई समाधान नही सूझा कि कैसे और क्या करने से सब पता लगे. फिर मैने अपने डीटेक्टिव फ्रेंड से ही अपनी समस्या का समाधान पूछा. उसने मुझे अपने ऑफीस मे बुलाया और मैने उसको अपने और तनवी के संबंधों को छोड़कर बाकी की सारी ही जानकारी दी और उसको पूछा के समस्या का कोई समाधान है तो बताए. वो हंस पड़ा और बोला के यार तूने पहले क्यों नही ये सब बताया. सीधा सा समाधान है के उसकी कॉल डीटेल्स निकलवा लेते हैं सब अपने आप पता चल जाएगा किसको फोन करती है और किसका फोन आता है. मैने उसको तनवी का नंबर दिया और उसने कहा के वो कॉल डीटेल्स नही ले सकता वो तो मुझे ही लानी पड़ेंगी. मैने पूछा के वो कैसे? तो उसने बताया के हमारा एक और दोस्त है जो उसी फोन कंपनी मे काफ़ी ऊँची पोस्ट पर है और शायद वो मेरी मदद कर सके.

मैने वहीं से उस दोस्त को फोन किया और तुरंत मिलने की इच्छा की और कहा के बहुत ज़रूरी काम है. उसने कहा के अभी तो वो ऑफीस मे ही है तो मैने कहा के मैं वहीं आ जाता हूँ. उसने कहा के मोस्ट वेलकम. मैं उसके ऑफीस पहुँच गया और अपना कार्ड उसके पास भेजा. उसने तुरंत मुझे अंदर बुलवाया और हाथ मिलाने के बाद मुझे बैठने को कहा और पूछा के बोलो क्या काम है? मैने उसका नॉटेपद उठाया और उसपर तनवी का नंबर लिख कर उसकी ओर बढ़ा दिया और कहा की इस नंबर की कॉल डीटेल्स चाहिए. उसने मेरी ओर देखा और बोला कि ऐसी क्या बात हो गयी तो मैने कहा के कुच्छ नही बस थोड़ी सी एंक्वाइरी करनी है. उसने कहा के अगर ये पोस्ट पैड है तो मैं पिच्छले 3 बिलिंग साइकल की रिपोर्ट तुम्हे दे सकता हूँ और अगर प्रीपेड है तो देखना पड़ेगा. मैने कहा के देखो, मेरा 3 महीने की डीटेल्स से भी काम हो जाएगा. उसने अपने कंप्यूटर मे वो नंबर फीड किया और बोला के नंबर प्रीपेड है, मैं देखता हूँ. फिर उसने और कुछ देर लगा कर कहा के राज यू आर वेरी लकी के अभी तो डीटेल्स मिल जाएँगी क्योंकि ये पुराना नंबर है और पुराने सॉफ्टवेर मे ही अभी चल रहा है. अगर तुम नेक्स्ट वीक आते तो मैं तुम्हे हेल्प नही कर पाता. फिर तो केवल डी.सी.पी. के ऑर्डर पर ही ये डीटेल्स निकाली जा सकती थीं. मैने कहा के चलो अच्छी बात है अब मुझे डीटेल्स निकाल दो. उसने कहा के उसने प्रिनटाउट ऑर्डर कर दिया है अभी पेओन लेकर आ जाएगा और बताओ क्या लोगे. फिर उसने कोल्ड ड्रिंक मंगवा ली और कोल्ड ड्रिंक आने के थोड़ी देर बाद ही पेओन प्रिनटाउट भी दे गया. मैने कोल्ड ड्रिंक ख़तम की और अपने दोस्त को कहा कि मेरे लिए कोई भी काम हो तो बेजीझक मुझे बताए. उसने हंसते हुए कहा के अगले साल….. तुम्हारा बेटा और कहीं जा भी नही सकता मेरे दोस्त, मैने उसकी बात काटी. वो हंस पड़ा और बोला के राज तुम नही बदले. और ना ही बदलूँगा, कह कर मैं वापिस अपने डीटेक्टिव दोस्त के ऑफीस की ओर चल पड़ा.

वहाँ पहुँचकर मैने लिस्ट उसके सामने रख दी और उसने उसकी 3-4 फोटोकॉपीस निकाल लीं और ओरिजिनल मेरी ओर सरका दी और बोला के देख लो इसमे कोई नंबर जाना पहचाना है तो. मैने देखा तो कोई नंबर ऐसा नही लगा जो मेरी पहचान का हो. फिर हम ने लिस्ट के बारे मे विचार विमर्श किया और उसने कहा के वो पता करेगा सब पर कॉल करके और कुच्छ भी जानकारी होगी तो मुझे बताएगा. मुझे भी उसने कहा के मैं अपने फोन से वो सारे नंबर्स डाइयल करके देखूं के कोई जानकार का नंबर तो नही है उसमे. काई बार नंबर याद नही रहते पर सेव किए हुए होते हैं तो सामने आ जाते हैं और कॉल कनेक्ट होने से पहले ही काट दूँ तो कन्फर्म भी हो जाएगा और उधर किसी को पता भी नही चलेगा. मैं समझ गया और उसको कुच्छ पैसे देकर वहाँ से आ गया. वो तो नही ले रहा था पर मैने ही ज़बरदस्ती दिए क्योंकि मैं जानता हूँ की इस काम मे कितना खर्चा होता है.

मैं घर पहुँचा और लिस्ट को दुबारा स्टडी करने लगा. मुझे कोई भी नंबर पहचाना हुआ नही लगा. फिर मुझे याद आया कि तनवी ने जब पहली बार मेरे पीसी को चेक किया था तो किसी से बात भी की थी. मैने वो रेकॉर्डिंग चेक की और उसका टाइम चेक किया और कॉल लिस्ट मे उसी टाइम की इनकमिंग कॉल चेक की और वो नंबर नोट कर लिया. फिर मैने अपने दोस्त को फोन करके उसे वो नंबर दिया और कहा के मुझे इस नंबर पर शक़ है और वो इसको इन्वेस्टिगेट करके मुझे बताए कि ये किसका है. मेरे दोस्त ने मुझे कहा के वो मुझे अगले दिन ही बता देगा के वो नंबर किसका है.

मैं अभी सोचों मे ही था कि तनवी आ गयी. मैने उसे बैठने को कहा और वो बैठ गयी. मुझे सोच मे देख कर वो बोली कि क्या बात है बहुत उदास लग रहे हो? मैने कहा नही कुच्छ खास नही पर आज मुझे अपनी पत्नी की बहुत याद आ रही है. कल उसकी बरसी है. उसने मेरी ज़िंदगी ही बदल के रख दी थी. मेरे जैसे आदमी को उसने प्यार से ऐसे बाँध लिया था की मैं अपने आप को बदलने पर मजबूर हो गया. उसके जाने के इतने टाइम बाद भी मैं अपने आप को पूरी तरह संभाल नही पाया हूँ. मेरे मा, पिताजी और भाई के साथ वो भी चली गयी. मेरी तो पूरी दुनिया ही ख़तम हो गयी. मैं ज़िंदा रहा तो सिर्फ़ अपने बच्चों के लिए. मुझे उन तीनों के जाने का इतना दुख नही हुआ जितना उसके जाने का. उसको तो मैने जाना था लेने के लिए 3 दिन बाद. पर अचानक मा, पिताजी और भाई का शिमला जाने का प्रोग्राम बन गया 3-4 दिन का और जब उसे पता चला कि वो वापिस चंडीगढ़ होकर ही आ रहे हैं तो उसीने ज़िद करी के वो भी उनके साथ ही वापिस आ रही है.

मैं चुप हुआ तो तनवी मेरे पास आ गयी और मेरे बालों मे हाथ फिरा कर बोली की बहुत प्यार करते थे तुम उनको. वो बहुत अच्छी थीं और अच्छे लोग दुनिया मे ज़्यादा दिन नही रहते. मैं भी अपने पिताजी को बहुत मिस करती हूँ. पर क्या करें यहाँ आ कर इंसान हार जाता है. मेरी तरह तनवी की भी आँखे गीली थीं. फिर मैं उठकर बैठ गया और तनवी को अपने साथ चिपका लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा. तनवी ने कहा के मैं नही जानती थी कि तुम अपनी पत्नी से इतना प्यार करते थे. मैने कहा के वो थी ही ऐसी. उसने मुझे इतना प्यार दिया और कभी भी कोई भी शर्त नही रखी. वो प्यार से सब कुच्छ मनवा लेती थी. और ये उसकी सबसे बड़ी खूबी थी कि जो भी बात होती थी उसको बहुत अच्छे से समझ कर ही आगे का सोचती थी. कभी किसी बात पर हमारा मतभेदभी होता था तो वो अपनी बात या तो अच्छे से समझा देती थी या मेरी बात को समझकर मान जाती थी.

कितनी अच्छाइयाँ गिन्वाऊ उसकी. वो तन की सुन्दर तो थी ही, मन से और भी अधिक सुन्दर थी. पति-पत्नी मे प्यार होना बहुत अच्छी बात है, जो हमारे बीच मे था, पर उसके भी ऊपेर होती है अंडरस्टॅंडिंग जो की हमारे बीच मे प्यार से भी अधिक थी. दोनो एक दूसरे को कॉंप्लिमेंट करते थे. एक दूसरे के पूरक थे हम दोनो. उसके बाद तो जैसे मैं खो गया था. बच्चो का ख्याल ना होता तो शायद मैं कभी उभर ही ना पाता उसके वियोग से. मैं संभाला तो केवल और केवल बच्चो की खातिर और उनकी वजह से. नहीं तो पता नही मेरा क्या होता. तनवी जो खामोशी से मेरा प्रलाप सुन रही थी, भावुक हो गयी और मुझे दिलासा देते हुए बोली कि हां कुच्छ लोग ऐसे ही होते हैं कि इंसान उन्हे कभी नही भूल पाता. पर तुमने उनके बाद अपनी ज़िम्मेवारियों को बहुत अच्छे से निभाया है और दोनो बच्चो को काबिल और अच्छा इंसान ही नही बनाया उनकी शादी भी अच्छी तरह से करके उनको बढ़िया तरीके से सेट्ल कर दिया है, जो की अपने आप मे एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. वो जहाँ कहीं भी हैं उन्हे इस बात की बहुत खुशी होगी की उनके दोनो बच्चे खुश हैं और वेल सेटल्ड हैं और तुमने उनकी देखभाल मे कोई कमी नही आने दी.

फिर पता नही क्या हुआ कि तनवी एक दम चौंक कर मुझसे अलग हो गयी और बोली कि मैं अभी आती हूँ ज़रा ऊपेर मुझे कुच्छ काम याद आ गया है. मैं 10-15 मिनट मे आती हूँ. कह कर वो ऊपेर चली गयी. मैं अपने ख्यालों मे गुम था. 5-6 मिनट के बाद जाने क्यों मैं उठकर अपने पीसी पर आया और उसमे सीक्ट्व को खोलकर तनवी को देखने लगा. तनवी अपने फोन पर किसी से बात कर रही थी और उसकाचेहरा गुसे मे तमतमा रहा था. मैने वॉल्यूम बढ़ाया और उसकी आवाज़ आने लगी…….नही भाय्या आपको बहुत बड़ी ग़लतफहमी हुई है राज के बारे मे. पता नही आपको क्यों ऐसा लगा. सच बात तो ये है कि मैं बहुत गिल्टी फील कर रही हूँ. इतनी शरम आ रही है मुझे कि मैं राज से कैसे नज़र मिला सकूँगी. फिर थोड़ी देर चुप रहने के बाद वो बोली की ठीक है भाय्या, बाइ. और उसने फोन काट दिया.

मैने देखा कि तनवी की आँखे भीगी हुई थीं और वो बहुत ही बेचैन नज़र आ रही थी. फिर उसके चेहरे के भाव बदले और ऐसा लगा जैसे उसने कोई निश्चय कर लिया है और उसके चेहरे पर एक अलग आत्मविश्वास झलकने लगा. फिर वो कमरे से बाहर आ गयी. मैने भी पीसी ऑफ किया और अपने बेडरूम मे आकर पहले की तरह लेट गया. थोड़ी देर के बाद ही तनवी आ गयी और मेरे पास आकर अपना चेहरा झुका कर बैठ गयी. मैने उसका हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा तो वो मुझ पर ढेर हो गयी और मुझसे लिपट कर रोने लगी. मैने उसको पूछा कि क्या हुआ रो क्यों रही हो. उसने कहा कि राज बात ही ऐसी है कि मैं अपने आप मे बहुत बुरा फील कर रही हूँ और समझ नही पा रही की तुम्हे कैसे और क्या कहूँ. मुझे कुच्छ कन्फेस करना है और मैं समझ नही पा रही हूँ कि कैसे और कहाँ से शुरू करूँ. मैने कहा के कहीं से भी शुरू करो कोई फ़र्क नही पड़ता, पर अपने दिल पर कोई बोझ मत रखो और बेझिझक जो भी कहना चाहती हो कह डालो. उसने कहा की ठीक है मैं शुरू से ही सब कुच्छ बताती हूँ.

और तनवी ने बोलना शुरू किया. उसी के शब्दों मे: राज मैने तुम्हे बताया नही के मेरी एक बड़ी बहन भी है जो चंडीगढ़ मे रहती है. वो मुझसे 8 साल बड़ी है. एक ग़लतफहमी की वजह से हमारे उसके साथ संबंध टूट चुके हैं. हुआ यूँ कि उसकी शादी के 2 साल बाद उसका पहला बच्चा होने वाला था तो मैं अपनी मा के साथ उसके यहाँ चली गयी थी क्योंकि उसके घर मे और कोई औरत नही है. डेलिवरी के टाइम पर मेरी बहन 3 दिन हॉस्पिटल मे थी और मेरी मा भी उसके साथ हॉस्पिटल मे ही रही. घर पर मैं और मेरे जीजा अकेले थे. मेरे जीजा ने दूसरे दिन मेरी मासूमियत और नासमझी का फ़ायडा उठाना चाहा और इसके पहले की मैं कुच्छ समझती या बोलती उनके पड़ोस मे रहने वाले सुरेश भैया वहाँ आ गये और उन्होने मेरे जीजा को बहुत डांटा और मुझे अपने साथ लेकर हॉस्पिटल आ गये. वो मेरे जीजा से उमर मे बड़े हैं इसलिए मेरी बहन उनको भैया कहकर बुलाती थी और इसीलिए मैं भी उनको भैया ही कहती थी.

हमारे हॉस्पिटल पहुँचने पर भैया ने मा और बहन को कुच्छ नही बताया और यही कहा कि मैं हॉस्पिटल आना चाहती थी इसलिए वो मुझे अपने साथ ले आए हैं. अभी वो इतना बता ही रहे थे कि मेरे जीजा उनकी पत्नी को साथ लेकर हॉस्पिटल पहुँच गये और हमे वहाँ देखकर चौंकने का नाटक करते हुए सुरेश भैया को बुरा भला कहने लगे उनके और मेरे उल्टे सीधे संबंध जोड़कर और भाभी ने भी जीजा का साथ दिया, जाने क्या पट्टी पढ़ा कर लाए थे जीजा उनको. भैया एकदम सकपका गये और इतना ही बोले कि तनवी से पूच्छ लो क्या सच है. मेरे कुच्छ बोलने से पहले ही जीजा बोल पड़े कि तनवी तो वही बोलेगी जो सुरेश ने उसको पढ़ाया है. मैं रोने लगी तो मेरी बहन ने भी उनके इल्ज़ाम सच मानते हुए मुझे ही बुरा कहा और बोली कि अब क्यों रो रही है मुँह काला करते हुए नही रोई. मा ने उसे चुप कराया और सुबह होते ही मुझे लेकर वापिस आ गयी. पूरे रास्ते हम दोनो मे कोई बात नही हुई.

घर पहुँच कर मा ने पिताजी को सारी बात बताई तो मेरे पिताजी ने मुझसे पूछा कि तनवी ये सब क्या है. मैं अपने आप को रोक ना पाई और चिल्ला कर बोली के सब झूठ है सुरेश भैया ने तो मुझे जीजा से बचाया है, वो ना आते तो जाने जीजा मेरे साथ क्या करते. फिर मैने सारी बात मा और पिताजी को बताई. पिताजी को बहुत गुसा आया. मा भी सन्न रह गयी और इतना ही बोली के उन्हे विश्वास तो नही हुआ था कि सुरेश भैया ऐसा कुच्छ कर सकते हैं पर क्योंकि जीजा के साथ भाभी भी ऐसा कह रही थी तो वो कुच्छ बोल नही सकी.

पिताजी तुरंत चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गये. सबसे पहले सुरेश भैया को मिलकर उन्होनें मेरी बात की पुष्टि की और फिर बहन के घर गये और पहले तो बहन को समझाने की कोशिश की और फिर जीजा से भी बात की. जीजा अपनी ग़लती को नही माने और बहन ने भी उनकासाथ ही दिया. पिताजी गुसे मे दोनो को बुरा भला कह कर और ये कह कर कि वो सारी उमर उनकी सूरत नही देखेंगे वापिस आ गये. सुरेश भैया से सारी बात पिताजी ने भाभी के सामने ही करी ताकि उनके दिल मे भैया के लिए कोई बुरी भावना ना रहे.

पिताजी के घर आते ही सुरेश भैया का फोन आया और उन्होने पिताजी से कहा की पिताजी को भैया के लिए अपने बेटी-दामाद से झगड़ा नही करना चाहिए था. पिताजी ने कहा की बेटी-दामाद हैं इसीलिए सिर्फ़ इतना ही करके आ गया हूँ कोई और होता तो पता नही क्या कर बैठता. मेरी मा रोने लगी और फोन लेकर सुरेश भैया से बोली की बेटा मुझे माफ़ कर देना मैं भी तुम्हे ही ग़लत समझ बैठी. सुरेश भैया ने कहा की नही माजी माफी की कोई बात नही है आपकी जगह मैं होता तो मैं भी वही करता जो आपने किया. फिर मा ने कहा की बेटा उनकी खबर हमे देते रहना अब उनका मुँह तो मैं नही देखूँगी, पर है तो बेटी इसलिए उनकी खबर से ही संतोष कर लूँगी. भैया ने कहा की ठीक है वो फोन करके उनकी खबर देते रहेंगे. हालाँकि भैया के और उनके घर वालों के उस घर से कोई संबंध नही रहे पर खबर तो दे ही सकते हैं उनकी.

इतना कह कर तनवी कुच्छ रुकी और मुझसे बोली के राज तुम जानते हो ये सुरेश भैया कौन हैं? मैं मुस्कुरा दिया और कहा कि हां वो मेरा साला है. तनवी चौंक कर बोली तुम्हे कैसे पता? मैने कहा कि वो सब बाद मे पहले तुम अपनी बात पूरी कर्लो. तनवी ने फिर बोलना शुरू किया.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--33

gataank se aage..............

Maine apne dost se use dubara check karne ke liye kaha aur ye bhi pata karne ke liye kaha ke Tanvi ki bahan ki sasural waalon ke meri sasuraal waalon se kaise aur kya sambandh the. Kuchh din me usne mujhe final report de di aur usme di gayee jaankaari sabse adhik chaunkaane waali thi. Tanvi ka kuchh na kuchh chakkar mere saale se tha aur usi ke kaaran meri sasural aur Tanvi ki bahan ki sasural walon ke jo bahut achche sambandh the wo kharab ho chuke the aur isi vajah se hi Tanvi ki badi bahan ne apne mayake se sambandh khatam kar liya tha. Aur shayad isiliye Tanvi ne apne baare me sab kuchh bata kar bhi apni badi bahan ka koyi zikar tak nahi kiya tha. Ek aur baat jo khul kar saamne aayee wo ye thi ke Tanvi ke pita ek khandaani vaidya the aur uski nanihaal ka bhi yahi khandaani kaam tha. Ab mujhe pata chala ke Tanvi ko desi dawaon ki jaankaari kaise aur kahan se thi aur uska vo challenge jo uski choot ke baare me tha, ke main usko chod chod kar kitni bhi dheeli kar doon wo usko dubara kisi dawa ke istemaal se keval 5 din me theek kar legi aur aisi lagegi jaise kunwaari ladki ki choot hoti hai.

Lekin sabhi baaton ka nichod ye tha ke kahin bhi 2 aur 2 milkar 5 nahi ho rahe the aur na hi 3 ho rahe the. Par pareshaani ye thi ke 2 jama 2 kahin se 4 bhi to nahi ho rahe the. Matlab ye ki main wapis wahin pahunch gaya tha jahan se shuru hua tha aur mujhe itna sab kuchh jaan kar bhi ye nahi pata chala tha ki Tanvi kya chahti hai aur uske saath kaun hai aur agar wo kisi ke liye kaam kar rahi hai to wo kaun hai aur uski mansha kya hai. Maine bahut socha aur iske baare me mujhe koyi samadhan nahi soojha ki kaise aur kya karne se sab pata lagey. Phir maine apne detective friend se hi apni samasya ka samadhan poochha. Usne mujhe apne office me bulaya aur maine usko apne aur Tanvi ke sambandhon ko chodkar baaki ki saari hi jaankari di aur usko poochha ke samasya ka koyi samadhan hai to bataye. Wo hans pada aur bola ke yaar tune pahle kyon nahi ye sab bataya. Seedha sa samadhan hai ke uski call details nikalwa lete hain sab apne aap pata chal jayega kisko phone karti hai aur kiska phone aata hai. Maine usko Tanvi ka number diya aur usne kaha ke wo call details nahi le sakta wo to mujhe hi laani padengi. Maine poochha ke wo kaise? To usne bataya ke hamara ek aur dost hai jo usi phone company me kaafi oonchi post par hai aur shayad wo meri madad kar sake.

Maine wahin se us dost ko phone kiya aur turant milne ki ichcha ki aur kaha ke bahut zaroori kaam hai. Usne kaha ke abhi to wo office me hi hai to maine kaha ke main wahin aa jaata hoon. Usne kaha ke most welcome. Main uske office pahunch gaya aur apna card uske paas bheja. Usne turant mujhe andar bulwaya aur haath milaane ke baad mujhe baithne ko kaha aur poochha ke bolo kya kaam hai? Maine uska notepad uthaya aur uspar Tanvi ka number likh kar uski or badha diya aur kaha ki is number ki call details chahiye. Usne meri or dekha aur bola ki aisi kya baat ho gayi to maine kaha ke kuchh nahi bas thori si enquiry karni hai. Usne kaha ke agar ye post paid hai to main pichhle 3 billing cycle ki report tumhe de sakta hoon aur agar prepaid hai to dekhna padega. Maine kaha ke dekho, mera 3 mahine ki details se bhi kaam ho jayega. Usne apne computer me wo number feed kiya aur bola ke number prepaid hai, main dekhta hoon. Phir usne aur kucch der laga kar kaha ke Raj you are very lucky ke abhi to details mil jayengi kyonki ye purana number hai aur purane software me hi abhi chal raha hai. Agar tum next week aate to main tumhe help nahi kar paata. Phir to keval D.C.P. ke order par hi ye details nikaali ja sakti theen. Maine kaha ke chalo achchi baat hai ab mujhe details nikaal do. Usne kaha ke usne printout order kar diya hai abhi peon lekar aa jayega aur batao kya loge. Phir usne cold drink mangwa li aur cold drink aane ke thori der baad hi peon printout bhi de gaya. Maine cold drink khatam ki aur apne dost ko kaha ki mere liye koyi bhi kaam ho to bejijhak mujhe bataye. Usne hanste hue kaha ke agle saal….. Tumhara beta aur kahin ja bhi nahi sakta mere dost, maine uski baat kaati. Wo hans pada aur bola ke Raj tum nahi badle. Aur na hi badloonga, kah kar main waapis apne detective dost ke office ki or chal pada.

Wahan pahunchkar maine list uske saamne rakhdi aur usne uski 3-4 photocopies nikaal leen aur original meri or sarka di aur bola ke dekh lo isme koyi number jaana pehchaana hai to. Maine dekha to koyi number aisa nahi laga jo meri pehchaan ka ho. Phir humne list ke baare me vichar vimarsh kiya aur usne kaha ke vo pata karega sab per call karke aur kuchh bhi jaankari hogi to mujhe batayega. Mujhe bhi usne kaha ke main apne phone se wo saare numbers dial karke dekhoon ke koyi jaankaar ka number to nahi hai usme. Kayi baar number yaad nahi rahte par save kiye hue hote hain to saamne aa jaate hain aur call connect hone se pahle hi kaat doon to confirm bhi ho jayega aur udhar kisi ko pata bhi nahi chalega. Main samajh gaya aur usko kuchh paise dekar wahan se aa gaya. Wo to nahi le raha tha par maine hi zabardasti diye kyonki main jaanta hoon ki is kaam me kitna kharcha hota hai.

Main ghar pahuncha aur list ko dubara study karne laga. Mujhe koyi bhi number pehchana hua nahi laga. Phir mujhe yaad aaya ki Tanvi ne jab pehli baar mere PC ko check kiya tha to kisi se baat bhi ki thi. Maine wo recording check ki aur uska time check kiya aur call list me usi time ki incoming call check ki aur wo number note kar liya. Phir maine apne dost ko phone karke use wo number diya aur kaha ke mujhe is number par shaq hai aur wo isko investigate karke mujhe bataye ki ye kiska hai. Mere dost ne mujhe kaha ke wo mujhe agle din hi bata dega ke wo number kiska hai.

Main abhi sochon me hi tha ki Tanvi aa gayi. Maine use baithne ko kaha aur wo baith gayi. Mujhe soch me dekh kar wo boli ki kya baat hai bahut udaas lag rahey ho? Maine kaha nahi kuchh khas nahi par aaj mujhe apni patni ki bahut yaad aa rahi hai. Kal uski barsi hai. Usne meri zindagi hi badal ke rakh di thi. Mere jaise aadmi ko usne pyar se aise baandh liya tha ki main apne aap ko badalne par majboor ho gaya. Uske jaane ke itne time baad bhi main apne aap ko poori tarah sambhaal nahi paaya hoon. Mere Maa, Pitaji aur Bhai ke saath wo bhi chali gayi. Meri to poori duniya hi khatam ho gayi. Main zinda raha to sirf apne bachhon ke liye. Mujhe un teenon ke jaane ka itna dukh nahi hua jitna uske jaane ka. Usko to maine jana tha leney ke liye 3 din baad. Par achanak Maa, Pitaji aur Bhai ka Shimla jaane ka programme ban gaya 3-4 din ka aur jab use pata chala ki wo wapis Chandigadh hokar hi aa rahe hain to usine zid kari ke wo bhi unke saath hi wapis aa rahi hai.

Main chup hua to Tanvi mere paas aa gayi aur mere baalon me haath phira kar boli ki bahut pyar karte the tum unko. Wo bahut achchi theen aur achche log duniya me zyada din nahi rahte. Main bhi apne pitaji ko bahut mis karti hoon. Par kya karein yahan aa kar insaan haar jaata hai. Meri tarah Tanvi ki bhi aankhe geeli theen. Phir main uthkar baith gaya aur Tanvi ko apne saath chipka liya aur uski peeth par haath pherne laga. Tanvi ne kaha ke main nahi jaanti thi ki tum apni patni se itna pyar karte the. Maine kaha ke wo thi hi aisi. Usne mujhe itna pyar diya aur kabhi bhi koyi bhi shart nahi rakhi. Wo pyar se sab kuchh manwa leti thi. Aur ye uski sabse badi khoobi thi ki jo bhi baat hoti thi usko bahut achche se samajh kar hi aage ka sochti thi. Kabhi kisi baat par hamaara matbhedbhi hota tha to wo apni baat ya to achche se samjha deti thi ya meri baat ko samajhkar maan jaati thi.

Kitni achhaayian ginwaaun uski. Wo tan ki sunder to thi hi, man se aur bhi adhik sunder thi. Pati-patni me pyaar hona bahut achchi baat hai, jo hamaare beech me tha, par uske bhi ooper hoti hai understanding jo ki hamaare beech me pyaar se bhi adhik thi. Dono ek doosre ko compliment karte the. Ek doosre ke poorak the hum dono. Uske baad to jaise main kho gaya tha. Bachcho ka khyaal na hota to shayad main kabhi ubhar hi na paata uske viyog se. Main sambhala to keval aur keval bachcho ki khatir aur unki vajah se. Nahin to pata nahi mera kya hota. Tanvi jo khamoshi se mera pralaap sun rahi thi, bhavuk ho gayi aur mujhe dilaasa dete hue boli ki haan kuchh log aise hi hote hain ki insaan unhe kabhi nahi bhool paata. Par tumne unke baad apni jimmewaariyon ko bahut achche se nibhaya hai aur dono bachcho ko kaabil aur achha insaan hi nahi banaya unki shaadi bhi achchi tarah se karke unko badhiya tareeke se settle kar diya hai, jo ki apne aap me ek bahut badi uplabdhi hai. Wo jahaan kahin bhi hain unhe is baat ki bahut khushi hogi ki unke dono bacche khush hain aur well settled hain aur tumne unki dekhbhaal me koyi kami nahi aane di.

Phir pata nahi kya hua ki Tanvi ek dum chaunk kar mujhse alag ho gayi aur boli ki main abhi aati hoon zara ooper mujhe kuchh kaam yaad aa gaya hai. Main 10-15 min me aati hoon. Kah kar wo ooper chali gayi. Main apne khyalon me gum tha. 5-6 min ke baad jaane kyon main uthkar apne PC par aaya aur usme cctv ko kholkar Tanvi ko dekhne laga. Tanvi apne phone par kisi se baat kar rahi thi aur uska chehra guse me tamtama raha tha. Maine volume badhaya aur uski awaaz aane lagi…….nahi Bhaiyya aapko bahut badi galatfahmi hui hai Raj ke baare me. Pata nahi aapko kyon aisa laga. Sach baat to ye hai ki main bahut guilty feel kar rahi hoon. Itni sharam aa rahi hai mujhe ki main Raj se kaise nazar mila sakoongi. Phir thodi der chup rahne ke baad wo boli ki theek hai Bhaiyya, bye. Aur usne phone kaat diya.

Maine dekha ki Tanvi ki aankhe bheegi hui theen aur wo bahut hi bechain nazar aa rahi thi. Phir uske chehre ke bhaav badale aur aisa laga jaise usne koyi nishchay kar liya hai aur uske chehre par ek alag atmavishwaas jhalakne laga. Phir wo kamre se bahar aa gayi. Maine bhi PC off kiya aur apne bedroom me aakar pahle ki tarah let gaya. Thodi der ke baad hi Tanvi aa gayi aur mere paas aakar apna chehra jhuka kar baith gayi. Maine uska haath pakad kar apni or kheencha to wo kujhpar dher ho gayi aur mujhse lipat kar rone lagi. Maine usko poochha ki kya hua ro kyon rahi ho. Usne kaha ki Raj baat hi aisi hai ki main apne aap me bahut bura feel kar rahi hoon aur samajh nahi pa rahi ki tumhe kaise aur kya kahoon. Mujhe kuchh confess karna hai aur main samajh nahi paa rahi hoon ki kaise aur kahan se shuru karoon. Maine kaha ke kahin se bhi shuru karo koyi fark nahi padta, par apne dil par koyi bojh mat rakho aur bejhijhak jo bhi kahna chahti ho kah dalo. Usne kaha ki theek hai main shuru se hi sab kuchh batati hoon.

Aur Tanvi ne bolna shuru kiya. Usi ke shabdon me: Raj maine tumhe bataya nahi ke meri ek badi bahan bhi hai jo Chandigadh me rehti hai. Wo mujhse 8 saal badi hai. Ek galatfahmi ki vajah se hamaare uske saath sambandh toot chuke hain. Hua yun ki uski shaadi ke 2 saal baad uska pahala baccha hone wala tha to main apni maa ke saath uske yahan chali gayi thi kyonki uske ghar me aur koyi aurat nahi hai. Delivery ke time par meri bahan 3 din hospital me thi aur meri maa bhi uske saath hospital me hi rahi. Ghar par main aur mere jija akele the. Mere jija ne doosre din meri maasoomiyat aur nasamajhi ka faayda uthana chaha aur iske pahle ki main kuchh samajhti ya bolti unke pados me rahne waale Suresh Bhaiyaa wahaan aa gaye aur unhone mere jija ko bahut daanta aur mujhe apne saath lekar hospital aa gaye. Wo mere jija se umar me badey hain isliye meri bahan unko bhaiyaa kahkar bulaati thi aur isiliye main bhi unko bhaiya hi kahti thi.

Hamaare hospital pahunchne par bhaiyaa ne maa aur bahan ko kuchh nahi bataya aur yahi kaha ki main hospital aana chahti thi isliye wo mjuhe apne saath le aaye hain. Abhi wo itna bata hi rahey the ki mere jija unki patni ko saath lekar hospital pahunch gaye aur hame wahan dekhkar chaunkne ka naatak karte hue Suresh Bhaiyaa ko bura bhala kahne lagey unke aur mere ulte seedhe sambandh jodkar aur bhabhi ne bhi jija ka saath diya, jaane kya patti padha kar laaye the jija unko. Bhaiyaa ekdum sakpaka gaye aur itna hi boley ki Tanvi se poochh lo kya sach hai. Mere kuchh bolne se pahle hi jija bol padey ki Tanvi to wahi bolegi jo Suresh ne usko padhaya hai. Main rone lagi to meri bahan ne bhi unke ilzam sach maante hue mujhe hi bura kaha aur boli ki ab kyon ro rahi hai munh kaala karte hue nahi royi. Maa ne use chup karaya aur subah hote hi mujhe lekar waapis aa gayi. Poor raaste hum dono me koyi baat nahi hui.

Ghar pahunch kar maa ne pitaji ko saari baat bataayi to mere pitaji ne mujhse poochha ki Tanvi ye sab kya hai. Main apne aap ko rok na paayi aur chilla kar boli ke sab jhooth hai Suresh Bhaiyaa ne to mujhe jija se bachaya hai, wo na aatey to jaane jija mere saath kya karte. Phir maine saari baat maa aur pitaji ko bataayi. Pitaji ko bahut gusa aaya. Maa bhi sann reh gayi aur itna hi boli ke unhe vishwaas to nahi hua tha ki Suresh Bhaiya aisa kuchh kar sakte hain par kyonki jija ke saath Bhabhi bhi aisa kah rahi thi to wo kuchh bol nahi saki.

Pitaji turant Chandigadh ke liye rawana ho gaye. Sabse pahle Suresh Bhaiyaa ko milkar unhonein meri baat ki pushti ki aur phir bahan ke ghar gaye aur pahle to bahan ko samjhane ki koshish ki aur phir jija se bhi baat ki. Jija apni galati ko nahi maane aur bahan ne bhi unka saath hi diya. Pitaji guse me dono ko bura bhala kah kar aur ye kah kar ki wo saari umar unki soorat nahi dekhenge waapis aa gaye. Suresh Bhaiyaa se saari baat pitaji ne bhabhi ke saamne hi kari taaki unke dil me Bhaiyaa ke liye koyi buri bhavna na rahey.

Pitaji ke ghar aate hi Suresh Bhaiyaa ka phone aaya aur unhone pitaji se kaha ki pitaji ko bhaiyaa ke liye apne beti-damaad se jhagda nahi karna chahiye tha. Pitaji ne kaha ki beti-damaad hain isiliye sirf itna hi karke aa gaya hoon koyi aur hota to pata nahi kya kar baithata. Meri maa roney lagi aur phone lekar Suresh Bhaiyaa se boli ki beta mujhe maaf kar dena main bhi tumhe hi galat samajh baithi. Suresh Bhaiyaa ne kaha ki nahi maaji maafi ki koyi baat nahi hai aapki jagah main hota to main bhi wahi karta jo aapne kiya. Phir maa ne kaha ki beta unki khabar hame dete rehna ab unka munh to main nahi dekhoongi, par hai to beti isliye unki khabar se hi santosh kar loongi. Bhaiyaa ne kaha ki theek hai wo phone karke unki khabar dete rahenge. Halanki Bhaiyaa ke aur unke ghar walon ke us ghar se koyi sambandh nahi rahey par khabar to de hi sakte hain unki.

Itna kah kar Tanvi kuchh ruki aur mujhse boli ke Raj tum jaante ho ye Suresh Bhaiyaa kaun hain? Main muskura diya aur kaha ki haan wo mera saala hai. Tanvi chaunk kar boli tumhe kaise pata? Maine kaha ki wo sab baad me pahle tum apni baat poori karlo. Tanvi ne phir bolna shuru kiya.

kramashah......


rajaarkey
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Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 15:09

कुँवारियों का शिकार--34

गतान्क से आगे..............

उसी के शब्दों मे: एक दिन सुरेश भाय्या ने मुझे फोन किया और कहा कि उन्हे मुझसे बहुत ज़रूरी काम है. ये मेरे देल्ही मे आने के कुच्छ दिन बाद की बात है. मैने पूछा कि क्या काम है तो उन्होनें कहा की काम बहुत टेढ़ा है और मैं ही उसे कर सकती हूँ और इसके लिए वो किसी और को कह भी नही सकते. मैने फिर कहा की अगर मैं उसे कर सकती हूँ तो ज़रूर कर दूँगी आप कहें क्या काम है. उन्होनें कहा कि वो 1-2 दिन मे देल्ही आ कर मुझे बता देंगे. मैं इंतजार करने लगी. सुरेश भाय्या देल्ही आए और मुझे मिले. उन्होनें मुझे तुम्हाए बारे मे बताया और कहा कि उनको शक़ है कि उनकी बहन की मौत जिस आक्सिडेंट मे हुई है उसमे तुम्हारा कुच्छ ना कुच्छ हाथ ज़रूर है. और मुझे ये पता लगाना है कि सच क्या है. मैने पूछा की आप कैसे कह सकते हैं और इतने दिनों के बाद अब क्या और कैसे पता चलेगा. उन्होनें कहा कि उनकी पत्नी तो शुरू से ही कहती आ रही है इस बारे मे और हमे ये भी पता लगा था कि शादी के पहले तुम्हारे बहुत लड़कियों से संबंध थे. फिर अभी कुच्छ दिन पहले उनके साले ने तुम्हे अपनी कार मे 2 लड़कियों के साथ देखा जो चुपके से तुम्हारी कार मे बैठ कर चली गयीं और इत्तेफ़ाक़न उसने कुच्छ घंटों के बाद फिर तुम्हे देखा और वो लड़कियाँ तुम्हारी कार से उतर कर तेज़ी से एक तरफ बढ़ गयीं और एक ऑटो मे बैठ कर चली गयीं. उसने ये बात अपनी बहन को बताई और उसने सुरेश भाय्या को सब बताया और कहा कि हो ना हो राज अपनी पुरानी आदतों को नही छोड़ पाया और इसीलिए उसने दीदी को रास्ते से हटा दिया.

ये सब सुनकर मुझे बड़ा अजीब सा लगा पर मैं भाय्या को मना नही कर सकी और तुम्हारे पास नौकरी के लिए आ गयी. तुमने मुझे नौकरी भी दी और मेरे इशारे का कोई फयडा उठाने की कोशिश नही की तो मुझे तभी लगा कि सुरेश भाय्या को ग़लतफहमी हुई है पर मैं बिना किसी ठोस सबूत के उन्हे कुच्छ नही कह सकती थी. उन्हे लगता कि मैं अपनी जान छुड़ाने के लिए ऐसा कह रही हूँ. फिर मैं एक दिन मौका मिलने पर तुम्हारा ऑफीस का पीसी पूरा खंगाल दिया कि उसमे कोई कॉंटॅक्ट डीटेल या कोई और तुम्हारा नोट या कुच्छ भी ऐसा मिल जाए कि इस बात की पुष्टि हो सके की उस आक्सिडेंट मे तुम्हारा कोई हाथ था या नही. सुरेश भाय्या चाहे जो भी समझ रहे हों मैं तुम्हे बिना किसी सबूत के गुनहगार नही मान सकती थी चाहे वो छ्होटा सा ही कुच्छ क्यों ना हो. कुच्छ तो हो जो इस की कोई भी जानकारी दे सके. पर होता भी कैसे, बेबुनियाद बातो का कोई भी सबूत नही होता. फिर तुमने अपनी थियरी मुझे समझाई और मुझे भी वो समझ मे आ गयी और मैने उस पर तुम्हारा साथ भी देना शुरू कर दिया. और तुम्हारी आज की बातों ने तो मुझे पक्का विश्वास दिला दिया की सुरेश भाय्या सिर्फ़ अपनी पत्नी की बातों के बहकावे मे आ गये हैं और सारा शक़ सिरे से बेबुनियाद है.

इसके बाद मैं अपने आप को नही रोक पाई और मैने सब कुच्छ तुम्हे बता दिया है. तुम जो भी सज़ा मुझे देना चाहो दे सकते हो मैं बिल्कुल बुरा नही मानूँगी. और हो सके तो मुझे माफ़ कर देना.

अपनी बात ख़तम करके तनवी ने अपना मुँह नीचे कर लिया और उसकी आँखों से आँसू टपकने लगे. मैने हाथ बढाकर तनवी को अपने निकट किया और उसके आँसू पोन्छ्ते हुए उसे कहा कि मैं बिल्कुल भी नाराज़ या गुस्सा नही हूँ, हां परेशान ज़रूर था पर वही बात की तुम्हारी तरह बिना सबूत और वजह जाने कुच्छ फ़ैसला नही कर सकता था. तनवी चौंक गयी और बोली क्या मतलब. मैने मुस्कुराते हुए उसे सब बताया कि कैसे पीसी से शुरू होकर मैने उसकी जासूसी करवाई थी और परेशान था की वो ऐसा क्यों कर रही है और किसके कहने पर कर रही है. फिर मैने उसे वो नंबर बताया और पूछा के ये सुरेश का नंबर ही है ना. वो चौंक कर बोली कि हां पर तुम्हे कैसे मालूम. मैने कहा की मैं अपनी खोजबीन मे इस नंबर तक पहुँच गया था और कल परसों तक ये भी जान लेता कि ये किसका नंबर है.

फिर मैने उसको वो सवाल किया जो ये सब जान लेने के बाद मुझे सबसे ज़्यादा परेशान कर रहा था. मैने उसको पूछा कि ये बताओ की तुम्हारा मुझसे शारीरिक संबंध बनाने का यही कारण तो नही था. उसकी आँखे एक बार फिर भर आईं और उसने नज़रें उठाकर मेरी तरफ देखा और बोली कि नही वो तो मेरा अपने हालात से एक समझौता था पर हां झूठ नही बोलूँगी, ये ख्याल भी आया था मेरे दिल मे की तुम्हारे और नज़दीक आ जाने से मुझे अपने उस काम मे भी आसानी होगी. उसका सच सुन कर मुझे उस पर बहुत प्यार आया और मैने उसे अपनी बाहों मे भर लिया और कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि एक सच का सामना दिलेरी से करने वाली लड़की मेरी दोस्त है और अब तुम्हे किसी भी प्रकार की चिंता करने की ज़रूरत नही है. मेरे दिल मे तुम्हारी इज़्ज़त और तुम्हारे लिए प्यार और भी बढ़ गया है.

फिर शुरू हुआ वही चिर परिचित चुदन चुदाई का एक नया दौर. इस बार के हमारे मिलन मे शारीरिक संपर्क के साथ साथ कुच्छ और भी था जिसे शब्दों मे नही बयान किया जा सकता. शायद इसी को आत्माओं का मिलना कहते हैं. तनवी का ऐसा समर्पण मैने पहले कभी भी महसूस नही किया था. और कब आँख लग गयी मुझे पता ही नही चला. सुबह जब मैं उठा तो तनवी बेख़बर नंगी लेटी हुई थी मेरी बगल मे और मैं भी पूरी तरह नंगा ही था. उसके चेहरे पर संतुष्टि के बहुत ही प्यारे भाव थे. मैने उसे अपनी बाहों मे भर कर उसका माथा चूम लिया. वो कसमासाई और उसने अपनी आँखे खोली और पूछा सुबह हो भी गयी. फिर उसने अपने कपड़े पहने और बोली कि अब आगे का क्या प्रोग्राम है. मैने मुस्कुरा कर कहा की जैसे चल रहा था वैसे ही चलेगा, कोई ऐतराज़. वो भी शोखी से बोली की ऐतराज़ कैसा और क्यों. मैने तो बस ऐसे ही पूछा था ताकि अब और शिद्दत से काम पे लगूँ और तुम्हे खुश कर दूं. मैं अभी भी गिल्ट फीलिंग से उबर नही पाई हूँ. मैने उसको एक बार फिर अपनी बाहों मे भर लिया और कहा कि भूल जाओ सब कुच्छ और आगे की सोचो.

तनवी एक लंबी साँस लेकर मुझसे अलग होते हुए बोली की एक बहुत बड़ा बोझ उतर गया उसके सर से और जिम के लिए तैयार होने चली गयी. मैं भी अपने नित्य-कर्म से निवरतता होने चला गया और थोड़ी ही देर मे मैं और तनवी लगभग इकट्ठे ही जिम पहुँचे. तनवी जिम मे चली गयी और मैं अभी गेट ही खोल रहा था कि नाज़िया और ज़ाकिया आ पहुँचीं. ज़ाकिया का चेहरा बहुत खिला हुआ था और मेरे कुच्छ पूच्छने से पहले ही उसने आगे बढ़कर मुझे अपनी बाहों मे कस लिया और बोली के राज तुम्हारा आइडिया काम कर गया और बहुत बढ़िया रहा. बहुत मज़ा आया मैं तुम्हारा एहसान कभी नही भूल सकती. मैने भी उसे अपने साथ भींच लिया और कहा कि दोस्ती मे ऐसी बातों की कोई जगह नही होती, दोस्त होते ही एक दूसरे की मदद के लिए हैं. फिर हम सब नीचे जिम मे आ गये और अपने अपने रुटीन मे लग गये.

जिम के बाद मैं ऊपेर आ रहा था तो तनवी भी मेरे साथ हो ली और बोली – “मैने सुरेश भाय्या को सब बता दिया है और समझा दिया है. वो बहुत शर्मिंदा हो रहे थे और कह रहे थे कि उनको तो पहले भी विश्वास नही था पर अपनी पत्नी के बार-बार कहने पर वो भी शंकित हो गये थे परंतु अब वो बहुत शर्मिंदा हैं और तुमसे माफी चाहते हैं.”

मैं: “कोई बात नही तनवी उनको कहना कि मुझे कोई गिला नही है उनकी जगह अगर मैं होता तो शायद मैं भी ऐसा ही सोचता. खैर जो हो गया सो हो गया, मिट्टी डालें उसपर.”

फिर मैने तनवी के सामने ही सुरेश का नंबर मिलाया और बात की. उनके फोन उठाने पर मैने कहा – “सुरेश भाई मैं राज बोल रहा हूँ. तनवी ने आपको सब बता ही दिया है. आपको इस बारे मे कुच्छ भी सोचने की ज़रूरत नही है. मैं बिल्कुल भी नाराज़ नही हूँ और अब आप जब भी मुझे मिलेंगे बिल्कुल ऐसे मिलेंगे जैसे कुच्छ हुआ ही नही है और इसका ज़िकार भी नही करेंगे. एक बात है कि इसके चलते एक बहुत अच्छी बात हुई है और वो ये की आपने अंजाने मे मुझे एक बहुत अच्छी असिस्टेंट दे दी है जो मेरा काम बहुत बढ़िया ढंग से कर रही है और उसने मेरा बोझ बहुत कम कर दिया है. मैं इसके लिए आपका शूकारगुज़ार हूँ.”

सुरेश रुँधे गले से इतना ही बोल पाया, “राज तुम बहुत अच्छे हो.”

मैं: “भाई इंसान कोई बुरा नही होता वक़्त और हालात उसे अच्छा या बुरा बना देते हैं. खैर कोई बात नही ऑल ईज़ वेल दट एंड्स वेल. मेरे लिए तो बहुत ही अच्छा हुआ है. तनवी मेरा काम बहुत अच्छे से कर रही है और मैं वाकाई मे बहुत खुशनसीब हूँ की मुझे एक विश्वस्नीय और ईमानदार असिस्टेंट मिल गयी है. ठीक है भाई अभी मुझे स्कूल के लिए तैयार होना है रखता हूँ.”

और मैने फोन काट दिया. तनवी ने मुझे अपनी बाहों मे भर लिया और बोली के राज इसमे कोई दो राई नही के तुम बहुत अच्छे इंसान हो. मैं हंस दिया और उसको अपनी बाहों मे भींच कर चूमा और उसकी गांद पर एक हल्की सी चपत लगा कर कहा के अच्छे की लगती जल्दी जाओ और स्कूल के लिए तैयार हो जाओ और मुझे भी तैयार होने दो और जल्दी से नीचे आओ नाश्ता इकट्ठे ही करेंगे. वो हँसती हुई ऊपेर भाग गयी.

इसी तरह कयि दिन गुज़र गये. एग्ज़ॅम्स सर पर होने के कारण सभी स्टूडेंट्स पढ़ाई मे लगे थे और इधर उधर से ध्यान हटाया हुआ था. मैने भी सब तरफ से ध्यान हटाकर इसी तरफ लगाया हुआ था. मेरी गतिविधियाँ भी कम हो गयी थीं और पूरा ध्यान इसी तरफ था कि स्कूल कारिज़ल्ट पहले से अच्छा रहे. इसके लिए एक्सट्रा क्लासस और स्पेशल कोचैंग का इंटेज़ाम किया था स्टूडेंट्स के लिए ताकि कोई भी स्टूडेंट पीछे ना रह जाए. यही थी हमारे स्कूल की स्पेशॅलिटी और पहचान की हर स्टूडेंट की स्पेशल केर की जाती थी इंडिविजुयली. फिर एग्ज़ॅम्स भी हो गये और रिज़ल्ट भी आ गया.

स्कूल का ओवरॉल रिज़ल्ट पहले से बेटर ही था और इसके लिए सारे टीचर्स बधाई के पात्र थे. नया सेशन शुरू होने जा रहा था और अडमियन्स के लिए लोग आ रहे थे. केयी सिफारिशें भी आ रही थीं. इन्ही मे एक सिफारिश मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त की भी थी. उसके भाय्या फॉरिज्न सर्विस मे थे और 3 साल उस मे रहने के बाद उनकी वापिस इंडिया पोस्टिंग हो गयी थी. उनकी लड़की का सीनियर.सेकेंडरी मे अडमिज़न करवाना था. मैने उसे कहा की मेरे पास भेज दो अडमिज़न हो जाएगा.

अडमिज़न के लिए भाय्या-भाभी साथ ही आए. मैने उठकर उनका स्वागत किया. अभी मैं उनसे हाथ ही मिला रहा था की एक लड़की अंदर आई और मैं उसे देखता ही रह गया. भाय्या-भाभी को बिठाकर मैने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा के बोली: “हाई, आइ आम प्राची और ये मेरे मम्मी-पापा हैं.”

मैने भी मुस्कुराते हुए उसे कहा: “प्राची बहुत अच्छा है कि तुम भी साथ ही आई हो, समझो कि तुम्हारा अडमिज़न तो हो ही गया है और तुम कल से क्लासस जाय्न कर सकती हो.”

फिर मैने भाय्या को फॉर्म निकाल कर दिया जो उन्होनें भर दिया और अपने बॅग मे से प्राची के सर्टिफिकेट्स और फोटोस साथ लगा दीं. मैने पेओन को बुलाकर फॉर अकाउंट्स मे भिजवा दिया और कहा कि बिल बनवाकर ले आए. वो बिल ले आया और भाय्या ने कॅश गिनकर दे दिया, जिसकी रसीद भी पेओन ले आया. मैने पेओन को कहा कि बुक्स और यूनिफॉर्म भी लाकर दे दे. पीयान रसीद लेकर गया और बुक्स और नोट-बुक्स का पॅकेट और यूनिफॉर्म का बॅग लेकर आ गया. वो भी भाय्या को दे दिया. फिर मैने प्राची को कहा: “प्राची इस स्कूल मे अडमिज़न मिलना अपने आप मे एक उपलब्धि है. यहाँ टीचिंग सिलबस बेस्ड ही नही होती स्टूडेंट बेस्ड भी होती है. तुम्हारी हर कमी का यहाँ पूरा ध्यान रखा जाएगा चाहे वो एक्सट्रा क्लासस के थ्रू हो या स्पेशल कोचैंग से. एक्सट्रा क्लासस के लिए कोई चार्ज नही है पर हां स्पेशल कोचैंग के लिए नॉमिनल चार्ज होता है. नो बंकिंग स्कूल अट ऑल. कोई स्टूडेंट विदाउट इन्फर्मेशन स्कूल नही आता तो क्लास टीचर को उसके मम्मी-पापा से फोन पर बात करके बताना होता है ताकि उन्हे पता रहे कि उनका बच्चा स्कूल नही आया. पूरा स्कूल टाइम मे एक डॉक्टर और एक लेडी डॉक्टर ड्यूटी पर होते हैं ताकि किसी भी स्टूडेंट को कोई भी परेशानी मे अटेंड कर सकें. अगर कोई एमर्जेन्सी हो और हमारे डॉक्टर्स से हॅंडल ना हो सकती हो तो स्टूडेंट्स के फॅमिली डॉक्टर की डीटेल फॉर्म मे ही भरवाई होती है जहाँ स्टूडेंट को ले जाया जाता है और पेरेंट्स को इनफॉर्म कर दिया जाता है. आइ पर्सनली लुक आफ्टर एवेरी स्टूडेंट. आइ आम शुवर तुम्हे यहाँ कोई भी परेशानी नही होगी और तुम एक अच्छी स्टूडेंट बनोगी और अपने साथ साथ स्कूल का नाम भी करोगी.”

भाय्या-भाभी मेरी बातें बड़े आनंद से सुन रहे थे और मुस्कुरा रहे थे. भाय्या ने कहा: “ठीक है राज हमे जाना है और अबसे प्राची तुम्हारे हवाले है. मुझे पूरा विश्वास है कि तुम उसकी बहुत अच्छी देखभाल करोगे.” उन्होने अपनी जेब से एक चेक़ निकाला और मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा: “मुझे तुम्हारे ट्रस्ट का नाम नही पता था तो मैने ब्लॅंक ही रख छोड़ा है और अमाउंट भी तुम खुद ही भर लेना.”

मैने चेक़ उठाया और उनके सामने ही फाड़ दिया और गुस्से से उन्हे कहा: “आप मेरे बड़े भाई हैं, मैं आपकी बहुत इज़्ज़त करता हूँ इसलिए कुच्छ कह नही सकता पर आप मुझे शर्मिंदा तो ना करें.” भाय्या मुझे प्यार से देखते रहे और उठ गये. मैं भी खड़ा हो गया. वो मेरे पास आए और मुझे गले से लगा कर बोले: “नाराज़ मत हो भाई पर ऐसा दस्तूर है इसलिए हो गया. आइ आम सॉरी अगर तुम्हे बुरा लगा है तो.”

मैं मुस्कुरा दिया और प्राची से कहा कि कल से जाय्न करोगी ना. उसके हां मे सर हिलाने पर मैने कहा: “ठीक है कल असेंब्ली मे ना जाकर मेरे पास आना मैं तुम्हे ब्रीफ कर दूँगा स्कूल के बारे मे और तुम्हारी हॉबीस वग़ैरा भी नोट कर लूँगा. उसके बाद रेग्युलर क्लासस कर लेना.” फिर मैने भाय्या-भाभी को बाहर तक छोड़ा और उनको और प्राची को विदा करके अपने ऑफीस मे आकर बैठ गया.

दिल मे बहुत हलचल मची हुई थी. दिल-ओ-दिमाग़ पर प्राची ही च्छाई हुई थी. वो थी ही इतनी सुन्दर. मैं आपको प्राची के बारे मे बताना ही भूल गया. वो 18 साल की 5’-4” लंबी गोरी चित्ति दुबली पतली लड़की थी. केसर मिले दूध जैसी रंगत, 32-26-30 की फिगर जो उसके टाइट जीन्स और टॉप मे सॉफ झलक रही थी. बड़ी-बड़ी शरबती आँखे, उनपर कमान जैसे भोन्हे (आइब्राउस). सबसे आकर्षक बात थी उसके चेहरे की मासूमियत. कुल मिलाकर वो रति का अवतार लगती थी. मैं तो बस उसकी मोहिनी का शिकार हो गया था और अब मुझे बेसब्री से इंतजार था अगले दिन उस से मिलने का.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--34

gataank se aage..............

Usi ke shabdon me: Ek din Suresh Bhaiyya ne mujhe phone kiya aur kaha ki unhe mujhse bahut zaroori kaam hai. Ye mere Delhi me aaney ke kuchh din baad ki baat hai. Maine poochha ki kya kaam hai to unhonein kaha ki kaam bahut tedha hai aur main hi use kar sakti hoon aur iske liye wo kisi aur ko kah bhi nahi sakte. Maine phir kaha ki agar main use kar sakti hoon to zaroor kar doongi aap kahein kya kaam hai. Unhonein kaha ki wo 1-2 din me Delhi aa kar mujhe bata denge. Main intjaar karne lagi. Suresh Bhaiyya Delhi aaye aur mujhe miley. Unhonein mujhe tumhaae baare me bataya aur kaha ki unko shaq hai ki unki bahan ki maut jis accident me hui hai usme tumhara kuchh na kuchh haath zaroor hai. Aur mujhe ye pata lagana hai ki sach kya hai. Maine poochha ki aap kaise kah sakte hain aur itne dinon ke baad ab kya aur kaise pata chalega. Unhonein kaha ki unki patni to shuru se hi kahti aa rahi hai is baare me aur hame ye bhi pata laga tha ki shaadi ke pahle tumhaare bahut ladkiyon se sambandh the. Phir abhi kuchh din pahle unke saale ne tumhe apni car me 2 ladkiyon ke saath dekha jo chupke se tumhaari car me baith kar chali gayeen aur ittefaqan usne kuchh ghanton ke baad phir tumhe dekha aur wo ladkiyaan tumhaari car se utar kar tezi se ek taraf badh gayeen aur ek auto me baiath kar chali gayeen. Usne ye baat apni bahan ko bataayi aur usne Suresh Bhaiyya ko sab bataya aur kaha ki ho na ho Raj apni puraani aadaton ko nahi chod paaya aur isiliye usne didi ko raaste se hata diya.

Ye sab sunkar mujhe bada ajeeb sa laga par main Bhaiyya ko mana nahi kar saki aur tumhaare paas naukri ke liye aa gayi. Tumne mujhe naukri bhi di aur mere isharey ka koyi fayda uthaane ki koshish nahi ki to mujhe tabhi laga ki Suresh Bhaiyya ko galatfahmi hui hai par main bina kisi thos saboot ke unhe kuchh nahi kah sakti thi. Unhe lagta ki main apni jaan chhudaane ke liye aisa kah rahi hoon. Phir main ek din mauka milne par tumhaara office ka PC poora khangaal diya ki usme koyi contact detail ya koyi aur tumhaara note ya kuchh bhi aisa mil jaaye ki is baat ki pushti ho sake ki us accident me tumhara koyi haath tha ya nahi. Suresh Bhaiyya chahey jo bhi samajh rahey hon main tumhe bina kisi saboot ke gunahgaar nahi maan sakti thi chahey wo chhota sa hi kuchh kyon na ho. Kuchh to ho jo is ki koyi bhi jaankaari de sake. Par hota bhi kaise, bebuniyaad batoon ka koyi bhi saboot nahi hota. Phir tumne apni theory mujhe samjhaayi aur mujhe bhi wo samajh me aa gayi aur maine us par tumhaara saath bhi dena shuru kar diya. Aur tumhaari aaj ki baton ne to mujhe pakka vishwaas dila diya ki Suresh Bhaiyya sirf apni patni ki baaton ke behkaave me aa gaye hain aur saara shaq sirey se bebuniyaad hai.

Iske baad main apne aap ko nahi rok paayi aur maine sab kuchh tumhe bataa diya hai. Tum jo bhi sazaa mujhe dena chaho de sakte ho main bilkul bura nahi manoongi. Aur ho sake to mujhe maaf kar dena.

Apni baat khatam karke Tanvi ne apna munh neeche kar liya aur uski aankhon se aansu tapakne lagey. Maine haath badhakar Tanvi ko apne nikat kiya aur uske aansu ponchhte hue use kaha ki main bilkul bhi naaraaz ya gusa nahi hoon, haan pareshaan zaroor tha par wahi baat ki tumhaari tarah bina saboot aur vajah jaane kuchh faisla nahi kar sakta tha. Tanvi chaunk gayi aur boli kya matlab. Maine muskuraate hue use sab bataya ki kaise PC se shuru hokar maine uski jaasoosi karvaayi thi aur pareshaan tha ki wo aisa kyon kar rahi hai aur kiske kahne par kar rahi hai. Phir maine use wo number bataya aur poochha ke ye Suresh ka number hi hai na. Wo chaunk kar boli ki haan par tumhe kaise maloom. Maine kaha ki main apni khojbeen me is number tak pahunch gaya tha aur kal parson tak ye bhi jaan leta ki ye kiska number hai.

Phir maine usko vo sawaal kiya jo ye sab jaan leney ke baad mujhe sabse zyada pareshaan kar raha tha. Maine usko poochha ki ye batao ki tumhaara mujhse shareerik sambandh banaaney ka yahi kaaran to nahi tha. Uski aankhe ek baar phir bhar aayeen aur usne nazarein uthakar meri taraf dekha aur boli ki nahi wo to mera apne haalaat se ek samjhauta tha par haan jhooth nahi boloongi, ye khyal bhi aaya tha mere dil me ki tumhaare aur nazdeek aa jaane se mujhe apne us kaam me bhi aasaani hogi. Uska sach sun kar mujhe us par bahut pyaar aaya aur maine use apni bahon me bhar liya aur kaha ki mujhe bahut khushi hai ki ek sach ka saamna dileri se karne waali ladki meri dost hai aur ab tumhe kisi bhi prakaar ki chinta karne ki zaroorat nahi hai. Mere dil me tumhaari izzat aur tumhaare liye pyar aur bhi badh gaya hai.

Phir shuru hua wahi chir parichit chudan chudayi ka ek naya daur. Is baar ke hamaare milan me shareerik sampark ke saath saath kuchh aur bhi tha jisey shabdon me nahi bayaan kiya ja sakta. Shayad isi ko aatmaaon ka milna kahte hain. Tanvi ka aisa samarpan maine pahle kabhi bhi mehsoos nahi kiya tha. Aur kab aankh lag gayi mujhe pata hi nahi chala. Subah jab main utha to Tanvi bekhabar nangi leti hui thi meri bagal me aur main bhi poori tarah nanga hi tha. Uske chehre par santushti ke bahut hi pyaare bhaav the. Maine use apni bahon me bhar kar uska matha choom liya. Wo kasmasaayi aur usne apni aankhe kholi aur poochha subah ho bhi gayi. Phir usne apne kapde pehne aur boli ki ab aage ka kya programme hai. Maine muskurakar kaha ki jaise chal raha tha vaise hi chalega, koyi aitraaz. Wo bhi shokhi se boli ki aitraaz kaisa aur kyon. Maine to bas aise hi poochha tha taki ab aur shiddat se kaam pe lagoon aur tumhe khush kar doon. Main abhi bhi guilt feeling se ubar nahi paayi hoon. Maine usko ek baar phir apni bahon me bhar liya aur kaha ki bhool jaao sab kuchh aur aage ki socho.

Tanvi ek lambi saans lekar mujhse alag hote hue boli ki ek bahut bada bojh utar gaya uske sar se aur gym ke liye taiyaar hone chali gayi. Main bhi apne nitya-karm se nivritta hone chala gaya aur thodi hi der me main aur Tanvi lagbhag ikatthe hi gym pahunche. Tanvi gym me chali gayi aur main abhi gate hi khol raha tha ki Nazia aur Zakia aa pahuncheen. Zakia ka chehra bahut khila hua tha aur mere kuchh poochhne se pahle hi usne aage badhkar mujhe apni bahon me kass liya aur boli ke Raj tumhaara idea kaam kar gaya aur bahut badhiya raha. Bahut mazaa aaya main tumhaara ehsaan kabhi nahi bhool sakti. Maine bhi use apne saath bheench liya aur kaha ki dosti me aisi baaton ki koyi jagah nahi hoti, dost hote hi ek doosre ki madad ke liye hain. Phir hum sab neeche gym me aa gaye aur apne apne routine me lag gaye.

Gym ke baad main ooper aa raha tha to Tanvi bhi mere saath ho lee aur boli – “Maine Suresh Bhaiyya ko sab bataa diya hai aur samjha diya hai. Wo bahut sharminda ho rahey the aur kah rahey the ki unko to pahle bhi vishwaas nahi tha par apni patni ke baar-baar kahne par wo bhi shankit ho gaye the parantu ab wo bahut sharminda hain aur tumse maafi chahte hain.”

Me: “Koyi baat nahi Tanvi unko kahna ki mujhe koyi gila nahi hai unki jagah agar main hota to shayad main bhi aisa hi sochta. Khair jo ho gaya so ho gaya, mitti daalein uspar.”

Phir maine Tanvi ke saamne hi Suresh ka number milaya aur baat ki. Unke phone uthaane par maine kaha – “Suresh Bhai main Raj bol raha hoon. Tanvi ne aapko sab bataa hi diya hai. Aapko is baare me kuchh bhi sochne ki zaroorat nahi hai. Main bilkul bhi naraaz nahi hoon aur ab aap jab bhi mujhe milenge bilkul aise milenge jaise kuchh hua hi nahi hai aur iska zikar bhi nahi karenge. Ek baat hai ki iske chalte ek bahut achchi baat hui hai aur wo ye ki aapne anjaane me mujhe ek bahut achchi assistant de di hai jo mera kaam bahut badhiya dhang se kar rahi hai aur usne mera bojh bahut kam kar diya hai. Main iske liye aapka shukarguzaar hoon.”

Suresh rundhe galey se itna hi bol paaya, “Raj tum bahut achchey ho.”

Me: “Bhai insaan koyi bura nahi hota waqt aur halaat use achha ya bura bana dete hain. Khair koyi baat nahi all is well that ends well. Mere liye to bahut hi achha hua hai. Tanvi mera kaam bahut achche se kar rahi hai aur main wakayi me bahut khushnaseeb hoon ki mujhe ek vishwasneeya aur imaandaar assistant mil gayi hai. Theek hai bhai abhi mujhe school ke liye taiyaar hona hai rakhta hoon.”

Aur maine Phone kaat diya. Tanvi ne mujhe apni baahon me bhar liya aur boli ke Raj isme koyi do rai nahi ke tum bahut achche insaan ho. Main hans diya aur usko apni bahon me bheench kar chooma aur uski gaand par ek halki si chapat laga kar kaha ke achche ki lagti jaldi jao aur school ke liye taiyaar ho jao aur mujhe bhi taiyaar hone do aur jaldi se neeche aao naashta ikatthe hi karenge. Wo hansti hui ooper bhaag gayi.

Isi tarah kayi din guzar gaye. Exams sar par hone ke kaaran sabhi students padhaayi me lagey the aur idhar udhar se dhyaan hataya hua tha. Maine bhi sab taraf se dhyaan hataakar isi taraf lagaya hua tha. Meri gatividhiyan bhi kam ho gayi theen aur poora dhyaan isi taraf tha ki school ka result pahle se achha rahey. Iske liye extra classes aur special coaching ka intezaam kiya tha students ke liye taki koyi bhi student peechhe na reh jaaye. Yahi thi hamaare school ki speciality aur pehchaan ki har student ki special care ki jaati thi individually. Phir exams bhi ho gaye aur result bhi aa gaya.

School ka overall result pahle se better hi tha aur iske liye saare teachers badhaayi ke paatra the. Naya session shuru hone jaa raha tha aur admisions ke liye log aa rahey the. Kayi sifaarishein bhi aa rahi theen. Inhi me ek sifaarish mere ek bahut achche dost ki bhi thi. Uske bhaiyya Forign Service me the aur 3 saal US me rahne ke baad unki waapis India posting ho gayi thi. Unki ladki ka Sr.Secondary me admision karvaana tha. Maine use kaha ki mere paas bhej do admision ho jayega.

Admision ke liye Bhaiyya-Bhabhi saath hi aaye. Maine uthkar unka swaagat kiya. Abhi main unse haath hi milaa raha tha ki ek ladki andar aayi aur main use dekhta hi reh gaya. Bhaiyya-Bhabhi ko bithakar maine uski taraf dekha to wo muskura ke boli: “Hi, I am Prachi aur ye mere mummy-papa hain.”

Maine bhi muskuraate hue use kaha: “Prachi bahut achha hai ki tum bhi saath hi aayi ho, samjho ki tumhaara admision to ho hi gaya hai aur tum kal se classes join kar sakti ho.”

Phir Maine Bhaiyya ko form nikaal kar diya jo unhonein bhar diya aur apne bag me se Prachi ke certificates aur photos saath laga deen. Maine peon ko bulakar for accounts me bhijwa diya aur kaha ki bill banwakar le aaye. Wo Bill le aaya aur Bhaiyya ne cash ginkar de diya, jiski raseed bhi peon le aaya. Maine peon ko kaha ki books aur uniform bhi laakar de de. Peon raseed lekar gaya aur books aur note-books ka packet aur uniform ka bag lekar aa gaya. Wo bhi Bhaiyya ko de diya. Phir maine Prachi ko kaha: “Prachi is school me admision milna apne aap me ek uplabdhi hai. Yahaan teaching syllabus based hi nahi hoti student based bhi hoti hai. Tumhaari har kami ka yahaan poora dhyaan rakha jaayega chahey wo extra classes ke through ho ya special coaching se. Extra classes ke liye koyi charge nahi hai par haan special coaching ke liye nominal charge hota hai. No bunking school at all. Koyi student without information school nahi aata to class teacher ko uskey mummy-papa se phone par baat karke bataana hota hai taaki unhe pata rahey ki unka baccha school nahi aaya. Poora school time me ek Doctor aur ek Lady Doctor duty par hote hain taki kisi bhi student ko koyi bhi pareshaani me attend kar sakein. Agar koyi emergency ho aur hamaare doctors se handle na ho sakti ho to students ke family doctor ki detail form me hi bharwayi hoti hai jahan student ko le jaaya jaata hai aur parents ko inform kar diya jaata hai. I personally look after every student. I am sure tumhe yahan koyi bhi pareshaani nahi hogi aur tum ek achchi student banogi aur apne saath saath school ka naam bhi karogi.”

Bhaiyya-Bhabhi meri baatein bade anand se sun rahey the aur muskura rahey the. Bhaiyya ne kaha: “Theek hai Raj hame jaana hai aur abse Prachi tumhaare hawaale hai. Mujhe poora vishwaas hai ki tum uski bahut achchi dekhbhaal karoge.” Unhone apni jeb se ek cheque nikaala aur meri taraf badhaate hue kaha: “Mujhe tumhaare trust ka naam nahi pata tha to maine blank hi rakh choda hai aur amount bhi tum khud hi bhar lena.”

Maine cheque uthaya aur unke saamne hi phaad diya aur guse se unhe kaha: “Aap mere bade bhai hain, main aapki bahut izzat karta hoon isliye kuchh kah nahi sakta par aap mujhe sharminda to na karein.” Bhaiyya mujhe pyaar se dekhte rahe aur uth gaye. Main bhi khada ho gaya. Wo mere paas aaye aur mujhe galey se lagaa kar bole: “Naraaz mat ho bhai par aisa dastoor hai isliye ho gaya. I am sorry agar tumhe bura laga hai to.”

Main muskura diya aur Prachi se kaha ki kal se join karogi na. Uske haan me sar hilaane par maine kaha: “Theek hai kal assembly me na jaakar mere paas aana main tumhe brief kar doonga school ke baare me aur tumhaari hobbies vagaira bhi note kar loonga. Uske baad regular classes kar lena.” Phir maine Bhaiyya-Bhabhi ko baahar tak choda aur unko aur Prachi ko vida karke apne office me aakar baith gaya.

Dil me bahut halchal machi hui thi. Dil-o-dimaagh par Prachi hi chhayi hui thi. Wo thi hi itni sunder. Main aapko Prachi ke baare me batana hi bhool gaya. Wo 18 saal ki 5’-4” lambi gori chitti dubli patli ladki thi. Kesar miley doodh jaisi rangat, 32-26-30 ki figure jo uske tight jeans aur top me saaf jhalak rahi thi. Badi-Badi sharbati aankhe, unpar kamaan jaise bhonhein (eyebrows). Sabse aakarshak baat thi uske chehre ki maasoomiyat. Kul milaakar wo Rati ka avatar lagti thi. Main to bas uski mohini ka shikaar ho gaya tha aur ab mujhe besabri se intjaar tha agle din us se milne ka.

kramashah......


rajaarkey
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Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 15:11

कुँवारियों का शिकार--35

गतान्क से आगे..............

प्राची ने कुच्छ ऐसा अस्सर डाला था मेरे ज़हन पर कि मुझे और कुच्छ सूझ ही नही रहा था. दोपहर को जब खाने पर बैठे थे तो तनवी से भी मेरी मनोस्थिति च्छूपी ना रह सकी. उसने मुझसे पूच्छ ही लिया: “क्या बात है राज कुच्छ खोए-खोए से और उड्द्वेलित लग रहे हो?” मैं मुस्कुरा दिया और बोला, “तुमने भी भाँप ही लिया तनवी, आज एक नयी अड्मिशन हुई है…….”

“प्राची”, तनवी ने मेरी बात काटी. मैं फिर से मुस्कुराए बिना ना रह सका और बोला, “बहुत ही अच्छे से समझ लेती हो तुम मुझे, मेरा क्या होगा जब तुम चली जाओगी?”

तनवी: “इसमे हैरानी की क्या बात है, वो है ही ऐसी, मैने उससे देखा था तुम्हारे ऑफीस से निकलते, मम्मी-पापा थे शायद उसके साथ. उसको देखते ही मैं समझ गयी कि नयी अड्मिशन हुई है, बुक्स और यूनिफॉर्म बॅग भी तो था. फिर मैने चेक किया तो नाम भी पता चल गया. अब तुम्हारी यह दशा देखकर तो कोई भी 2 और 2 चार कर सकता है.”

मैने तनवी को प्रशंसा भरी नज़रों से देखते हुए कहा, “मैं बहुत भाग्यशाली हूँ के मुझे तुम्हारे जैसी दोस्त मिली है.”

तनवी: “नही, प्राची बहुत भाग्यशाली है के उससे तुमने पसंद कर लिया है और वो तुम्हारे संसर्ग में आकर लड़की से औरत बन-ने जा रही है.”

मैं: “यह क्या कह रही हो तनवी?”

तनवी: “ठीक कह रही हूँ रोमी, मेरा दावा है कि एक महीने के अंदर वो तुम्हारे नीचे उच्छल रही होगी, मैं हूँ ना.”

मेरा लंड उसकी बात सुनकर मेरे जॉकी में उच्छलने लगा. तनवी से मेरी हालत च्छूपी नही थी, उसने हाथ बढ़ा कर मेरी जांघों पर रख दिया और प्यार से सहलाते हुए मेरे आकड़े हुए लंड पर ले आई तो मैने कहा कि क्यों सोए हुए नाग को छेड़ रही हो तो हंस के बोली कि सोया हुआ कहाँ है यह तो जाग गया है और मैं जानती हूँ की इस अंधे नाग को इसके बिल का रास्ता दिखाना है. हम दोनो उठे और बिना देरी किए हुए बेडरूम में आ गये और कब हमारे कपड़े हमारे शरीरों का साथ छ्चोड़ गये और कब हम बेड पर एक दूसरे में समाने को आतुर हो गये और कब एक घंटा बीत गया पता ही नही चला. फिर हम दोनो एक दूसरे की बाहों में सीमटे हुए सो गये और शाम को 6 बजे के बाद हमारी नींद खुली. दोनो इकट्ठे ही उठे और एक दूजे की ओर देख कर मुस्कुराए और एक बार फिर एक दूजे की बाहों में बँध गये. रात का खाना भी हम ने इकट्ठे ही खाया और इकट्ठे ही सोए. आख़िर सुबह भी हो ही गयी.

स्कूल पहुँचे. और प्राची भी आ गयी. पेवं ने जैसे ही बताया मैने उससे अंदर बुला लिया. क्या लग रही थी वो, एकदम गुड़िया सी. स्कूल यूनिफॉर्म में उसकी सुडौल गोरी टाँगें चमक रही थीं. मैने अपने चेहरे पर एक ज़बरदस्त मुस्कान लाते हुए उससे चेर पर बैठने के लिए कहा और उसे बताने लगा.

मैं: “प्राची आज तुम्हारा स्कूल का पहला दिन है और तुम्हारा स्वागत है. मुझे पूरा विश्वास है के यू विल प्रूव टू बी आन असेट टू दा स्कूल. मेरे रहते तुम्हें यहाँ कोई भी परेशानी नही होगी और आशा करता हूँ कि यहाँ तुम्हारा यह साल बहुत अच्छा बीतेगा. मैं स्टूडेंट्स के साथ हमेशा एक दोस्त की तरह रहता हूँ तो क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी?”

प्राची: “(मुस्कुराते हुए) जी मैं बहुत खुश हूँ कि मुझे इतने अच्छे स्कूल में अड्मिशन मिला है. पापा और चाचा बहुत तारीफ़ कर रहे थे स्कूल की और आपकी भी और मैं प्रॉमिस करती हूँ कि आइ विल नेवेर लेट यू डाउन. और मुझे बहुत खुशी होगी आपसे दोस्ती करके.”

मैं: “गुड. किसी भी तरह की कोई भी बात हो तुम मेरे पास बेझिझक आ सकती हो और मैं हर तरह से तुम्हारी मदद करूँगा और बदले में मुझे केवल एक प्रॉमिस चाहिए कि तुम्हारी पढ़ाई में किसी भी तरह की कोई भी कमी नही आनी चाहिए. अगर तुम्हें मुझसे बात करने में कोई परेशानी हो तो तनवी से बात कर सकती हो, मैं तुम्हें तनवी से मिलवा देता हूँ.”

मैने तनवी को इंटरकम पर कॉल करके कहा कि मेरे ऑफीस में आ जाए. तनवी आई तो मैने प्राची से उसे मिलवा दिया और कहा कि उसको सब बातें समझा दे और उसका ध्यान रखे. तनवी उससे अपने साथ ले गयी और जाते जाते मुझे एक अर्थपूर्ण मुस्कान दे गयी.

मैं दोनो को जाते हुए देखता रहा और सोचने लगा कि देखो अब तनवी क्या गुल खिलाती है. मुझे बहुत सोचने पर भी ऐसा नही लगा कि तनवी अपना दावा पूरा कर पाएगी पर फिर यह सोचकर रह गया कि त्रिया चरित्रां, पुरुषास्या भागयाँ देव ना जानाती, का मनुष्या. स्त्री काचरित्रा और पुरुष का भाग्या, देवता नही जानते मनुष्या क्या जानेगा. थोड़ी देर बाद तनवी मेरे पास आई और बोली के ज़्यादा से ज़्यादा एक महीना. मैं मुस्कुरा कर रह गया. प्राची की सूरत मेरी आँखों के सामने घूमती रही सारा दिन.

3-4 दिन के बाद तनवी ने कहा कि ग्राउंड रेडी हो रही है प्राची से तुम्हें मिलाने की. मैने पूछा की कैसे तो वो बोली की आम खाने से मतलब रखो और मुस्कुरा दी. फिर उसने बताया कि प्राची उस में रह कर आई है इसलिए उसे इंग्लीश लॅंग्वेज में तो कोई परेशानी नही है पर यहाँ के हिसाब से उसे ग्रामर और स्पेल्लिंग्स में थोड़ी मुश्किल आ रही है और वही मुश्किल उसे हिन्दी में भी आ रही है. तनवी उससे कोचैंग दे रही थी हर दूसरे दिन एक घंटा पढ़ा कर दोपहर को स्कूल के बाद अपने कमरे में.

कुच्छ दिन बाद तनवी एक शाम को मेरे पास आई और उसने मुझे बताया कि मामला आगे बढ़ना शुरू हो गया है. मेरे पूच्छने पर उसने जो बताया वो उसी के शब्दों में:

हमेशा की तरह आज भी जब प्राची आई तो मैं उसे पढ़ाने बैठी. मैने उस दिन स्कूल से आने के बाद नाहकार केवल एक नाइटी ही पहनी थी और उसके नीचे कुच्छ भी नही पहना था. प्राची उस दिन एक लाइट ब्लू कलर के ढीले से टॉप और बर्म्यूडा शॉर्ट्स में बहुत प्यारी लग रही थी. मैं उसकी ओर देख रही थी तो उसने पूछा के क्या देख रही हैं ऐसे? मैने कहा के प्राची तुम बहुत सुंदर हो, बहुत खुशनसीब होगा जिससे तुम्हें प्यार करने का अवसर मिलेगा. प्राची शर्मा गयी और अपनी नज़रें झुका कर बोली के ऐसी बातें मत कीजिए. मैने कहा के क्यों तुम्हें अच्छी नही लगती ऐसी बातें, तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड नही था क्या उस में. तो प्राची ने कहा के नही उसने कभी इस बारे में सोचा भी नही है. मैने तब तक अपना हाथ उसके घुटने पर रख दिया था और बहुत ही धीरे से उसे सहला रही थी. मैने उससे कहा कि देखो प्राची अब तुम बच्ची नही हो बड़ी हो गयी हो और तुम ना भी चाहो तब भी लड़के तुम्हारे पीछे पड़ेंगे ही दोस्ती करने के लिए और उसके भी आगे बहुत कुच्छ करने के लिए. और बहुत कुच्छ क्या वो चौंक कर बोली? मैने कहा कि तुम हो ही इतनी सुन्दर के किसी का भी दिल तुम्हें प्यार करने को चाहेगा. इस बीच मेरा हाथ लगातार उसके घुटने से आगे बढ़ रहा था बहुत ही धीरे-धीरे और अब उसकी गोरी, चिकनी, कोमल जाँघ को सहला रहा था. प्राची ने मेरे हाथ को हटाने की कोई कोशिश नही की सिर्फ़ अपनी दोनो टाँगें भींच कर मेरे हाथ को जकड़ने की कोशिस ज़रूर की.

मैं उसे बातों मे ही उलझा कर अपने हाथ की कारगुज़ारी चालू रखे हुए थी. प्राची का चेहरा लाल हो रहा था और मैं समझ रही थी की ये सब उसके लिए नया है और उसे इसका कोई अनुभव नही है. प्राची ने कहा की वो मेरी बात का मतलब नही समझी. मैने कहा की देखो प्राची तुम इतनी सनडर हो की तुम्हे हर कोई प्यार करना चाहेगा ऐसे, कहते हुए मैने अपने हाथ को प्यार से उसकी जाँघ पर फिराया तो प्राची के मुँह से एक मादक सिसकारी निकल गयी. मैने तुरंत उसको पूचछा की प्राची तुम्हे अच्छा लगा ना? प्राची का चेहरा लाल अनार हो गया और वो कुच्छ नही बोली सिर्फ़ अपना सर झुका लिया. मैने प्यार से उसकी जाँघ को सहलाना जारी रखा. अब उसकी टाँगें भींची हुई नही तीन.

फिर मैने उसको कहा के प्राची इसके आयेज भी बहुत कुच्छ करना चाहेंगे तुम्हारे साथ. उसने पूचछा की क्या? मैने पूचछा की तुम बुरा तो नही मानोगी? अब बात चल ही पड़ी है तो मैं चाहती हूँ की तुम सब जान लो. प्राची ने प्रश्नवाचक दृष्टि से मेरी ओर देखा. मैने अपना दूसरा हाथ बढ़कर उसकी पीठ के पीच्चे से लेजाकर उसको अपने पास खींचा और फिर उसकी बगल से आयेज निकाल कर उसके माममे पर रख दिया और बहुत ही हल्का सा दबाव डाला. उसका छ्होटा सा मम्मा मेरी हथेली मे पूरा आ गया और उसका कड़क हो चुका मटर के छ्होटे दाने जैसा निपल मेरी हथेली को गुदगुदाने लगा. मेरे इस आक्रमण से प्राची सिहर गयी और उसका पूरा शरीर काँप गया जैसे कोई करेंट उसके शरीर मे दौड़ गया हो. उसने एक गहरी साँस ली और बोली की ये क्या हो रहा है मुझे? मैने पूचछा की तुम्हे अच्छा लग रहा हैं ना प्राची? उसने हन मे अपने सर को हिलाया.

मैने अपने हाथ का दबाव उसके माममे पर तोड़ा बढ़ा दिया और दूसरे हाथ से उसकी जाँघ को सहलाते हुए, अपने हाथ को उसकी बर्म्यूडा शॉर्ट्स के अंदर घुसा दिया. प्राची की जांघों पर गूस बंप्स उभर आए और उसकी साँसें तेज़ हो गयीं. फिर मैने कहा की ये मेरे एक लड़की के प्यार करने से तुम्हे मज़ा आ रहा है तो सोचो की जब एक मर्द तुम्हे ऐसे प्यार करेगा तो कितना आनंद आएगा. प्राची ने कोई जवाब नही दिया और मेरे द्वारा दिए जा रहे आनंद का अनुभव करती रही. मैने अपना हाथ नीचे लाकर उसके टॉप को ऊपेर उठा दिया और उसका एक प्यारा सा मम्मा बाहर निकाल लिया और उसको अपने मुँह मे लेकर चुभलाने लगी. प्राची के शरीर मे सर से पाँव तक एक तेज़ करेंट की लेहायर दौड़ गयी और उसके मुँह से एक ज़ोर की सिसकारी निकली और वो बोली दीदी ये क्या हो रहा है मुझे मैं से नही पा रही हूँ. मैने अपना मुँह उसके माममे से हटा लिया और पूचछा के अगर तुम्हे अच्छा नही लग रहा तो रुक जाती हूँ? वो बोली की नही दीदी बहुत अच्छा लग रहा है आप करती रहो.

मैने अपना मुँह दुबारा उसके मम्मे पर रख दिया और उसको पूरा अपने मुँह मे भर के चूसने लगी. प्राची की साँसें बहुत तेज़ हो गयीं. तुम भी तो मुझे ऐसे ही प्यार करो ना, मैने उसको कहा तो प्राची ने अपना एक हाथ मेरी जांघों पर रख दिया और दूसरा हाथ मेरे एक मम्मे पर और मुझे प्यार से सहलाने लगी. प्राची बोली कि हाए दीदी बहुत मज़ा आ रहा है. मैने उसको पूछा की प्यार करने मे ज़्यादा मज़ा आ रहा है या करवाने मे. प्राची ने कहा के दोनो मे ही आ रहा है. फिर मैने उसका टॉप पूरा उतार दिया और अपनी नाइटी उतार कर पूरी नंगी हो गयी. प्राची मुझे देखती ही रह गयी और बोली की दीदी आप भी बहुत सुंदर हो और आपके बूब्स तो बहुत प्यारे हैं और इतने बड़े हैं और इतने टाइट हैं. मैने उसे कहा कि तुम भी जब मेरी उमर की हो जाओगी प्राची तो तुम्हारे बूब्स भी बड़े हो जाएँगे और इनका ख्याल रखोगी तो टाइट भी रहेंगे.

फिर मैने उसको लीप किस करना शुरू किया तो वो एकदम चिपक गयी मुझसे और वापिस किस करने लगी. मैने उसका बर्म्यूडा भी खोल कर उतार दिया और उसकी लाइट पिंक कलर की पॅंटी भी उतार दी. अब हम दोनो बिल्कुल नंगी एक दूजे से चिपकी हुई थीं. मैने अपनी एक टाँग उठाकर प्राची की टाँगों के बीच मे डाल दी और रगड़ने लगी. एक हाथ से उसकी गोल गांद को सहलाते हुए और कभी दबाए हुए उसको चूमती रही. फिर मैने अपना हाथ आगे लाकर उसकी कुँवारी बिना बालों की मुलायम चूत पर रख दिया जो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. मैने अपनी एक उंगली उसकी चूत की लकीर पर फिराई तो वो काँप कर मुझसे चिपक गयी. मेरी उंगली उसकी गांद के छेद से होती हुई उसके भज्नासे को छ्छू गयी. वो तड़प उठी. मैने कहा की देखो प्राची सबसे ज़्यादा मज़ा तो तुम्हे तब आएगा जब तुम्हारी इस चूत मे किसी मर्द का कड़क लंड घुसेगा.

प्राची बोली कि दीदी मैने तो सुना है की बहुत दर्द होता है जब इसमे वो घुसता है. मैने उसको पूछा के वो क्या? प्राची शर्मा कर बहुत धीमी आवाज़ मे बोली की वही जो आप अभी कह रही थीं, लंड. मैं हंस दी और उसको बोली कि मेरी गुड़िया पहली बार जब लंड किसी की चूत मे घुसता है तो उसकी कुंआरा झिल्ली फॅट जाती है और उसकी वजह से दर्द होता है जो हर लड़की को पहली चुदाई मे सहना पड़ता है. ये दर्द एक बार ही होता है और थोड़ी देर के लिए ही होता है. मज़ा तो उसके बाद मे ही आता है और इतना मज़ा आता है की उसके आयेज सारे मज़े बेकार लगने लगते हैं.

फिर मैने प्राची की दोनो टाँगें खोल दीं और अपने मुँह उसकी चूत पर चिपका दिया. वो चौंक कर बोली ये क्या कर रही हो दीदी? तो मैने कहा के तुम्हारी चूत को चाटने लगी हूँ. वो हैरान होकर बोली कि ऐसे भी करते हैं क्या? मैने कहा के हां तुम देखना कितना मज़ा आएगा तुम्हे और मैने अपनी जीभ उसकी चूत की लकीर पर फिरानी शुरू कर दी. मेरी जीभ जब उसके भज्नासे पर पहुँची तो प्राची ज़ोर से काँप उठी. थोड़ी देर के बाद ही उसने कहा के छोड़ दो दीदी मेरा पेशाब निकलने वाला है. मैने हंस कर कहा कि नही पेशाब नही तुम्हारा पानी निकलने वाला है जो मज़े की चरम सीमा पर निकलता है.

मैने तेज़ी से अपनी जीभ उसकी चूत मे चलानी शुरू कर दी और वो थोड़ी देर मे ही आ……………आ…………….ह, ओ………………ह करती हुई झाड़ गयी. उसका शरीर अकड़ गया और वो हाँफने लगी.फिर मैने प्राची को अपनी बाहों मे कस्स लिया और पूछा कि कैसा लगा मेरी गुड़िया को मेरा प्यार करना. वो शर्मा कर बोली कि दीदी बहुत मज़ा आया, मुझे नही पता था कि इतना मज़ा भी आता है. मैने कहा कि प्राची ये तो कुच्छ भी नही है सिर्फ़ ऊपेरी मज़ा है असली मज़ा तो तुम्हे तब आएगा जब तुम्हारी चूत मे लंड घुसेगा और तुम्हे चोद कर मज़े की चरम सीमा पार कराएगा. प्राची बोली के पता नही वो कब होगा?

मैने कहा के प्राची वो जब भी तुम चाहोगी हो सकता है और अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ. तुम मेरी दोस्त हो और दोस्त ही दोस्त के काम आते हैं. फिर आज जो कुच्छ हुआ है उसके बाद तो हमारी दोस्ती और भी पक्की हो गयी है, है ना? उसने कहा कि वो तो हो गयी है और बहुत ही पक्की हो गयी है पर ………. मैने उसकी बात को काट दिया और कहा कि वो तुम मुझ पर छोड़ दो अगर तुम्हे मुझ पर विश्वास है तो. प्राची बोली की दीदी आप के ऊपेर तो मुझे अपने से भी ज़्यादा विश्वास है.

फिर तनवी ने मुझे कहा के राज तुम अगर चाहो तो कल ही प्राची की कुँवारी चूत का उद्घाटन कर सकते हो. मैने उसे कल भी बुलाया है और वो आ रही है कल दोपहर को 3-4 घंटे के लिए. मेरा लंड अकड़ चुका था उसकी बातें सुनकर. मैने तनवी से कहा कि कल की कल देखेंगे तुम तो पहले आज की बात करो. मैने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और वो मुस्कुरा कर बोली कि वाह राज तुम तो एवर रेडी रहते हो. मैने उसे खींच कर अपने साथ सटा लिया और फिर उसे लेकर बेडरूम मे आ गया. तनवी भी उत्तेजित थी, उसने प्राची को तो चरमा सुख प्रदान कर दिया था पर खुद वंचित रह गयी थी. फिर हम दोनो ने जमकर चुदाई का आनंद लिया. खाने के बाद भी चुदाई का एक और दौर चला और हम दोनो नंगे ही सो गये एक दूजे से चिपक कर.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--35

gataank se aage..............

Prachi ne kuchh aisa assar daala tha merey zehan par ki mujhe aur kuchh soojh hi nahi raha tha. Dopahar ko jab khaane par baithe thhe to Tanvi se bhi meri manosthiti chhupi na reh saki. Ussne mujhse poochh hi liya: “Kya baat hai Romi kuchh khoye-khoye se aur uddvelit lag rahey ho?” Main muskura diya aur bola, “Tumne bhi bhamp hi liya Tanvi, aaj ek nayi admission hui hai…….”

“Prachi”, Tanvi ne meri baat kaati. Main phir se muskuraaye bina na reh saka aur bola, “Bahut hi achhe se samajh leti ho tum mujhe, mera kya hoga jab tum chali jaaogi?”

Tanvi: “Issmein hairani ki kya baat hai, wo hai hi aisi, maine ussey dekha tha tumhaare office se nikalte, mummy-papa thhe shayad usske saath. Ussko dekhte hi main samajh gayi ki nayi admission hui hai, books aur uniform bag bhi to tha. Phir maine check kiya to naam bhi pata chal gaya. Ab tumhaari yeh dasha dekhkar to koyi bhi 2 aur 2 chaar kar sakta hai.”

Maine Tanvi ko prashansa bhari nazron se dekhte huey kaha, “Main bahut bhagyashaali hoon ke mujhe tumhaare jaisi dost mili hai.”

Tanvi: “Nahi, Prachi bahut bhagyashaali hai ke ussey tumne pasand kar liya hai aur wo tumhaare sansarg mein aakar ladki se aurat ban-ne jaa rahi hai.”

Main: “Yeh kya keh rahi ho Tanvi?”

Tanvi: “Theek keh rahi hoon Romi, mera dawa hai ki ek mahine ke andar wo tumhaare neeche uchhal rahi hogi, main hoon na.”

Mera lund usski baat sunkar merey jockey mein uchhalne laga. Tanvi se meri haalat chhupi nahi thi, ussne haath badhkar meri janghon par rakh diya aur pyaar se sehlaate huey mere akde huey lund par le aayee to maine kaha ki kyon soye huey naag ko chhed rahi ho to hans ke boli ki soya hua kahaan hai yeh to jaag gaya hai aur main jaanti hoon ki iss andhe naag ko isski bil ka raasta dikhan hai. Hum dono uthey aur bina deri kiye huey bedroom mein aa gaye aur kab hamaare kapde hamaare shareeron ka saath chhod gaye aur kab hum bed par ek doosre mein samaane ko aatur ho gaye aur kab ek ghanta beet gaya pata hi nahi chala. Phir hum dono ek doosre ki bahon mein simte huey so gaye aur shaam ko 6 baje ke baad humaari neend khuli. Dono ikatthe hi uthe aur ek dooje ki ore dekh kar muskuraye aur ek baar phir ek dooje ki bahon mein bandh gaye. Raat ka khana bhi humne ikatthe hi khaaya aur ikatthe hi soye. Aakhir subah bhi ho hi gayi.

School pahunche. Aur Prachi bhi aa gayi. Peon ne jaise hi bataya maine ussey andar bula liya. Kya lag rahi thi wo, ekdum gudiya si. School uniform mein usski sudaul gori taangein chamak rahi theen. Maine apne chehre par ek zabardast muskaan late huey ussey chair par baithne ke liye kaha aur ussey bataane laga.

Me: “Prachi aaj tumhara school ka pehla din hai aur tumhaara swagat hai. Mujhe poora vishwas hai ke you will prove to be an asset to the school. Mere rehte tumhein yahan koyi bhi pareshaani nahi hogi aur asha karta hoon ki yahan tumhaara yeh saal bahut achha beetega. Main students ke saath hamesha ek dost ki tarah rehta hoon to kyat um mujhse dosti karogi?”

Prachi: “(muskuraate huey) ji main bahut khush hoon ki mujhe itne achhe school mein admission mila hai. Papa aur chacha bahut taareef kar rahey thhe school ki aur aapki bhi aur main promise karti hoon ki I will never let you down. Aur mujhe bahut khushi hogi aapse dosti karke.”

Me: “Good. Kissi bhi tarah ki koyi bhi baat ho tum merey paas bejhijhak aa sakti ho aur main har tarah se tumhaari madad karoonga aur badle mein mujhe keval ek promise chahiye ki tumhaari padhaayi mein kissi bhi tarah ki koyi bhi kami nahi aani chahiye. Agar tumhein mujhse baat karne mein koyi parehaani ho to Tanvi se baat kar sakti ho, main tumhein Tanvi se milwa deta hoon.”

Maine Tanvi ko intercom par call karke kaha ki merey office mein aa jaaye. Tanvi aayi to maine Prachi se ussey milwa diya aur kaha ki ussko sab baatein samjha de aur usska dhyaan rakhey. Tanvi ussey apne saath le gayi aur jaate jaate mujhe ek arthpoorn muskaan de gayi.

Main dono ko jaate huey dekhta raha aur sochne laga ki dekho ab Tanvi kya gul khilaati hai. Mujhe bahut sochne par bhi aisa nahi laga ki Tanvi apna dawa poora kar paayegi par phir yeh sochkar reh gaya ki tiriya charitram, purushasya bhagyam devo na janaati, kaa manushya. Stree ka charitra aur purush ka bhagya, devta nahi jaante manushya kya jaanega. Thodi der baad Tanvi merey paas aayi aur boli ke zyada se zyada ek mahina. Main muskura kar reh gaya. Prachi ki soorat meri aankhon ke saamne ghoomti rahi saara din.

3-4 din ke baad Tanvi ne kaha ki ground ready ho rahi hai Prachi se tumhein milaane ki. Maine poochha ki kaise to vo boli ki aam khaane se matlab rakho aur muskura di. Phir ussne bataya ki Prachi US mein reh kar aayi hai issliye ussey English language mein to koyi pareshaani nahi hai par yahan ke hisaab se ussey grammer aur spellings mein thodi mushkil aa rahi hai aur wahi mushkil ussey Hindi mein bhi aa rahi hai. Tanvi ussey coaching de rahi thi har doosre din ek ghanta padha kar dopahar ko school ke baad apne kamre mein.

Kuchh din baad Tanvi ek shaam ko merey paas aayi aur ussne mujhe bataya ki maamla aage badhna shuru ho gaya hai. Merey poochhne par ussne jo bataya wo ussi ke shabdon mein:

Hamesha ki tarah aaj bhi jab Prachi aayi to main usse padhaane baithi. Maine uss din school se aane ke baad nahakar keval ek nighty hi pehni thi aur usske neeche kuchh bhi nahi pehna tha. Prachi uss din ek light blue color ke dheele se top aur Bermuda shorts mein bahut pyaari lag rahi thi. Main usski ore dekh rahi thi to ussne poochha ke kya dekh rahi hain aise? Maine kaha ke Prachi tum bahut sunder ho, bahut khushnaseeb hoga jissey tumhein pyaar karne ka avsar milega. Prachi sharma gayi aur apni nazarein jhuka kar boli ke aisi baatein mat kijiye. Maine kaha ke kyon tumhein achhi nahi lagti aisi baatein, tumhara koyi boy friend nahi tha kya US mein. To Prachi ne kaha ke nahi ussne kabhi iss baare mein socha bhi nahi hai. Maine tab tak apna haath usske ghutne par rakh diya tha aur bahut hi dheere se ussey sehla rahi thi. Maine ussey kaha ki dekho Prachi ab tum bachhi nahi ho badi ho gayi ho aur tum na bhi chaho tab bhi ladke tumhaare peechhe padenge hi dosti karne ke liye aur usske bhi aage bahut kuchh karne ke liye. Aur bahut kuchh kya wo chaunk kar boli? Maine kaha ki tum ho hi itni sunder ke kissi ka bhi dil tumhein pyaar karne ko chahega. Iss beech mera haath lagataar usske ghutne se aage badh raha tha bahut hi dheere-dheere aur ab usski gori, chikni, komal jaangh ko sehla raha tha. Prachi ne merey haath ko hataane ki koyi koshish nahi ki sirf apni dono taangein bheench kar mere haath ko jakadne ki khoshish zaroor ki.

Main use baaton me hi uljha kar apne haath ki kaarguzaari chaalu rakhey hue thi. Prachi ka chehra laal ho raha tha aur main samajh rahi thi ki ye sab uske liye naya hai aur use iska koyi anubhav nahi hai. Prachi ne kaha ki wo meri baat ka matlab nahi samjhi. Maine kaha ki dekho Prachi tum itni sunder ho ki tumhe har koyi pyaar karna chahega aise, kahte hue maine apne haath ko pyar se uski jaangh par phiraya to Prachi ke munh se ek maadak siskaari nikal gayi. Maine turant usko poochha ki Prachi tumhe achha laga na? Prachi ka chehra laal anaar ho gaya aur wo kuchh nahi boli sirf apna sar jhuka liya. Maine pyaar se uski jaangh ko sehlaana jaari rakha. Ab uski tangein bhinchi hui nahi theen.

Phir maine usko kaha ke Prachi iske aage bhi bahut kuchh karna chahenge tumhaare saath. Usne poochha ki kya? Maine poochha ki tum bura to nahi maanogi? Ab baat chal hi padi hai to main chahti hoon ki tum sab jaan lo. Prachi ne prashnavaachak drishti se meri or dekha. Maine apna doosra haath badhakar uski peeth ke peechhe se lejaakar usko apne paas kheencha aur phir uski bagal se aage nikaal kar uske mamme par rakh diya aur bahut hi halka sa dabaav daala. Uska chhota sa mamma meri hatheli me poora aa gaya aur uska kadak ho chuka matar ke chhote daane jaisa nipple meri hatheli ko gudgudaane laga. Mere is aakraman se Prachi sihar gayi aur uska poora shareer kaamp gaya jaise koyi current uske shareer me daud gaya ho. Usne ek gehri saans li aur boli ki ye kya ho raha hai mujhe? Maine poochha ki tumhe achha lag raha hain na Prachi? Usne haan me apne sar ko hilaya.

Maine apne haath ka dabaav uske mamme par thoda badha diya aur doosre haath se uski jaangh ko sehlaate hue, apne haath ko uski Bermuda shorts ke andar ghusa diya. Prachi ki jaanghon par goose bumps ubhar aaye aur uski saansein tez ho gayeen. Phir maine kaha ki ye mere ek ladki ke pyar karne se tumhe maza aa raha hai to socho ki jab ek mard tumhe aise pyaar karega to kitna anand aayega. Prachi ne koyi jawab nahi diya aur mere dwara diye ja rahe anand ka anubhav karti rahi. Maine apna haath neeche laakar uske top ko ooper utha diya aur uska ek pyara sa mamma bahar nikaal liya aur usko apne munh me lekar chubhlaane lagi. Prachi ke shareer me sar se paanv tak ek tez current ki lehar daud gayee aur uske munh se ek zor ki siskaari nikli aur wo boli didi ye kya ho raha hai mujhe main seh nahi paa rahi hoon. Maine apna munh uske mamme se hata liya aur poochha ke agar tumhe achha nahi lag raha to ruk jaati hoon? Wo boli ki nahi didi bahut achha lag raha hai aap karti raho.

Maine apna munh dubaara uske mamme par rakh diya aur usko poora apne mun me bhar ke choosne lagi. Prachi ki saansein bahut tez ho gayeen. Tum bhi to mujhe aise hi pyaar karo na, maine usko kaha to Prachi ne apna ek haath meri jaanghon par rakh diya aur doosra haath mere ek mamme par aur mujhe pyaar se sehlaane lagi. Prachi boli ki haye didi bahut maza aa raha hai. Maine usko poochha ki pyaar karne me zyada maza aa raha hai ya karwaane me. Prachi ne kaha ke dono me hi aa raha hai. Phir maine uska top poora utaar diya aur apni nighty utaar kar poori nangi ho gayee. Prachi mujhe dekhti hi reh gayee aur boli ki didi aap bhi bahut sunder ho aur aapke boobs to bahut pyaare hain aur itne bade hain aur itne tight hain. Maine use kaha kit um bhi jab meri umar ki ho jaogi Prachi to tumhaare boobs bhi bade ho jayenge aur inka khyal rakhogi to tight bhi rahenge.

Phir maine usko lip kis karna shuru kiya to wo ekdum chipak gayee mujhse aur waapis kis karne lagi. Maine uska Bermuda bhi khol kar utaar diya aur uski light pink color ki panty bhi utaar di. Ab hum dono bilkul nangi ek dooje se chipki hui theen. Maine apni ek taang uthakar Prachi ki taangon ke beech me daal di aur ragadne lagi. Ek haath se uski gol gaand ko sehlaate hue aur kabhi dabaae hue usko choomti rahi. Phir maine apna haath aage laakar uski kunwaari bina baalon ki mulayam choot par rakh diya jo poori tarah se geeli ho chuki thi. Maine apni ek ungli uski choot ki lakeer par phiraayi to wo kaamp kar mujhse chipak gayi. Meri ungli uski gaand ke chhed se hoti hui uske bhagnaase ko chhoo gayee. Wo tadap utthi. Maine kaha ki dekho Prachi sabse zyada maza to tumhe tab aayega jab tumhaari is choot me kisi mard ka kadak lund ghusega.

Prachi boli ki didi maine to suna hai ki bahut dard hota hai jab isme wo ghusta hai. Maine usko poochha ke wo kya? Prachi sharma kar bahut dheemi awaaz me boli ki wahi jo aap abhi kah rahi theen, lund. Main hans di aur usko boli ki meri gudiya pehli baar jab lund kisi ki choot me ghusta hai to uski kumara jhilli phat jaati hai aur uski vajah se dard hota hai jo har ladki ko pehli chudayee me sehna padta hai. Ye dard ek baar hi hota hai aur thodi der ke liye hi hota hai. Maza to uske baad me hi aata hai aur itna maza aata hai ki uske aage saare mazey bekaar lagne lagte hain.

Phir maine Prachi ki dono tangein khol deen aur apne munh uski choot par chipka diya. Wo chaunk kar boli ye kya kar rahi ho didi? To maine kaha ke tumhaari choot ko chaatne lagi hoon. Wo hairaan hokar boli ki aise bhi karte hain kya? Maine kaha ke haan tum dekhna kitna maza aayega tumhe aur maine apni jeebh uski choot ki lakeer par phiraani shuru kar di. Meri jeebh jab uske bhagnaase par pahunchi to Prachi zor se kaamp utthi. Thodi der ke baad hi usne kaha ke chod do didi mera peshaab nikalne waala hai. Maine hans kar kaha ki nahi peshab nahi tumhaara paani nikalne waala hai jo mazey ki charam seema par nikalta hai.

Maine tezi se apni jeebh uski choot me chalaani shuru kar di aur wo thodi der me hi a……………a…………….h, o………………h karti hui jhad gayi. Uska shareer akad gaya aur wo haanfne lagi.Phir maine Prachi ko apni baahon me kass liya aur poochha ki kaisa laga meri gudiya ko mera pyaar karna. Wo sharma kar boli ki didi bahut maza aaya, mujhe nahi pata tha ki itna maza bhi aata hai. Maine kaha ki Prachi ye to kuchh bhi nahi hai sirf ooperi maza hai asli maza to tumhe tab aayega jab tumhaari choot me lund ghusega aur tumhe chod kar mazey ki charam seema paar karaayega. Prachi boli ke pata nahi wo kab hoga?

Maine kaha ke Prachi wo jab bhi tum chahogi ho sakta hai aur agar tum chaho to main tumhaari madad kar sakti hoon. Tum meri dost ho aur dost hi dost ke kaam aate hain. Phir aaj jo kuchh hua hai uske baad to hamaari dosti aur bhi pakki ho gayi hai, hai na? Usne kaha ki wo to ho gayi hai aur bahut hi pakki ho gayi hai par ………. Maine uski baat ko kaat diya aur kaha ki wo tum mujh par chod do agar tumhe mujh par vishwaas hai to. Prachi boli ki didi aap ke ooper to mujhe apne se bhi zyaada vishwaas hai.

Phir Tanvi ne mujhe kaha ke Raj tum agar chaho to kal hi Prachi ki kunwaari choot ka udghaatan kar sakte ho. Maine use kal bhi bulaya hai aur wo aa rahi hai kal dopahar ko 3-4 ghante ke liye. Mera lund akad chuka tha uski baatein sunkar. Maine Tanvi se kaha ki kal ki kal dekhenge tum to pahle aaj ki baat karo. Maine uska haath pakad kar apne lund par rakh diya aur wo muskura kar boli ki wah Raj tum to ever ready rahte ho. Maine use kheench kar apne saath sataa liya aur phir use lekar bedroom me aa gaya. Tanvi bhi uttejit thi, usne Prachi ko to charma sukh pradaan kar diya tha par khud vanchit reh gayi thi. Phir hum dono ne jamkar chudayee ka anand liya. Khane ke baad bhi chudayee ka ek aur daur chala aur hum dono nange hi so gaye ek dooje se chipak kar.

kramashah......