दो भाई दो बहन compleet

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raj..
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Re: दो भाई दो बहन

Unread post by raj.. » 24 Dec 2014 00:55

रिया समझ गयी जितना जय को सेक्स के इन खेल मे मज़ा आता है उतना

रानी को नही.

रिया उसके लंड को अपने मुँह मे ले जोरों से चूसने लगी.

"जय क्या तुम रानी की चूत चूस्ते हो?" रिया ने फिर पूछा.

"क्या बात है कहीं तुम सेक्स पर कोई रिसर्च तो नही कर रही हो ना?"

जय ने खिलखिलाते हुए जवाब दिया.

"तुम चूस्ते हो कि नही पहले मुझे जवाब दो?" रिया ने अपनी बात पर

ज़ोर देते हुए कहा.

"मुझे लगता है कि उसे अच्छा नही लगता," जे ने जवाब दिया, "जब हम

शुरू मे मिले थे तो मेने कई बार चूसी थी.. लेकिन अब नही."

रिया को पता था कि उसके भाई को क्या पसंद है... उसने उसके लंड की

गोलैईयों पर अपनी जीब फिराई और फिर चाटते हुए अपनी जीब उपर को ले

लाई...थोड़ी देर सूपदे को चाटने के बाद उसने उसके लंड को मुँह मे

लिया और चूसने लगी.

"ऑश हाआँ रिया कितना अछा लंड चूसना जानती हो तुम ऑश. तुम्हारी

इस कला को कितना मिस किया है मैने" जय सिसक पड़ा.

"तो आ जाते मेरे पास मेने कब मना किया है.. तुम जब चाहो मुझे

पा सकते हो.. " रिया ने कहा, "और तुम्हे पता है कि मुझे तुम्हारे

लंड का अमृत अछा लगता है और में हमेशा तुम्हारा लंड चूसने को

तैयार हूँ."

जय को पहले को वो दिन याद आने लगे जब रिया उसके लंड को चूसा

करती थी... "तुम्हारा मुँह कितना गरम है.. कितना अच्छा लग रहा है..."

रिया जोरों से जय के लंड को चूसने लगी.. और जब उसका लंड पूरी

तरह तन कर किसी लोहे की सलाख की तरह हो गया तो वो बोली, "अब तुम

तैयार हो गये हो.. क्या मेरी चूत मे अपना लंड घूसाना चाहोगे?"

"जय मुस्कुरा पड़ा... "तुम्हे पता है कि तुम्हारी चूत मारने मे मुझे

कितना मज़ा आता है."

"मुझे किस आसन से चोद्ना चाहोगे?" रिया ने पूछा.

"तुम घुटनो के बल घोड़ी बन जाओ... में पीछे से तुम्हारी चूत मे

लंड घूसा तुम्हे ज़ोर ज़ोर से चोदुन्गा.. और जब तुम्हारी चूत पानी

छोड़ देगी तो में अपने लंड को तुम्हारी गंद मे घूसा अपना पानी छोड़

दूँगा." जय ने जवाब दिया.

रिया उसके लंड से हटी और घुटनो के बल घोड़ी बन गयी.. "बड़े

शैतान हो तुम."

"हां ठीक मेरी बड़ी बेहन की तरह..." उसने मुस्कुराते हुए कहा.

क्रमशः..................

raj..
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Re: दो भाई दो बहन

Unread post by raj.. » 24 Dec 2014 00:56

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गतान्क से आगे.......

रिया ने अपने चेहरे को पलंग पर टिका दिया था और अपनी जंघे खोल

दी थी... जय उसके खूबसूरत बदन को और फूली हुई चूत को देखने

लगा... चूत उत्तेजना मे सूज चुक्की थी और उसकी पंखुड़ीयाँ बाहर को

निकली हुई थी... उसने अपने लंड को पहले तो उसकी गीली चूत पर

घिसा और फिर धीरे से अंदर घुसा दिया.. रिया कराह उठी..

"ऑश जय..." उसने कराहते हुए पलंग के कोने को कस कर पकड़ लिया...

"तुम्हारा लंड कितना सख़्त है.. ऑश आज चोदो अपनी बेहन को फाड़ दो

उसकी चूत को."

जय ने उसके दोनो कुल्हों को पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा...

रिया की सिसकियाँ बढ़ रही थी.. और वो उछल उछल कर उसकी चूत

चोदने लगा.

'श हाईन ऐसे ही ज़ोर ज़ोर से ओह हां चोदो."

जय धक्के लगाते हुए उसकी पीठ कर झुक गया और उसकी चुचि को

पकड़ मसल्ने लगा.. साथ ही वो अपने लंड को और ज़ोर से अंदर बाहर

करने लगा....

रिया को बहोत अच्छा लग रहा था.. खुशी के मारे उसकी आँखों मे आँसू

आ गये.. वो पीछे को होकर उसके धक्कों का साथ देने लगी.. ..

"हां जय चोदो मुझे ऑश हां और ज़ोर ज़ोर से ऐसे ही मस्लो मेरी

चुचि को ऑश हां."

रिया जोरों से सिसकती रही और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.. ठीक

जैसे जय ने कहा था..

जय ने अपने हाथ उसकी चुचियों पर हटाया और अपने लंड को उसकी चूत

से बाहर निकाल लिया... फिर उसने अपनी दो उंगलियों को उसकी चूत मे

डाल गीला किया और फिर उसके कुल्हों को थोडा फैला अपनी उंगली उसकी

गंद मे घुसा दी.. .....

"ऑश हां अच्छा लग रहा है." रिया बोल पड़ी.

जय ने अब अपने लंड को उसकी गंद के छेद पर रखा और थोड़ी देर

घिसने के बाद उसे अंदर घुसा दिया.. फिर थोड़े धीमे धक्के लगाने

लगा.... रिया के बदन मे मस्ती बढ़ती जा रही थी वो अपने कुल्हों को

पीछे कर उसके धक्कों का साथ देने लगी....

जय अब ज़ोर ज़ोर के धक्के लगाने लगा था.... जय अपने लंड को उसकी

गंद के अंदर बाहर कर रहा था और साथ ही अपनी उंगलियों से उसे चोद

रहा था.... रिया की सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी....

"ऑश चोदो मुझे और ज़ोर से चोदो हाआँ और ज़ोर से ओह जय

चोदो और ज़ोर से..."

"श रिया तुम्हारी गंद तो आज बहुत ही मज़े दे रही है..." जय ने

अपने लंड के ज़ोर ज़ोर के धक्के उसकी गंद मे मारते हुए कहा.

ज़ोर ज़ोर के धक्के मार आख़िर जय ने अपना वीर्य उसकी गंद मे छोड़ दिया.

उसने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और अपने वीर्य को उसकी गंद से

बहते देखते रहा.

"आज मज़ा आ गया जय ... सही मे मुझे इसकी और तुम्हारी ज़रूरत

थी... " रिया ने अपने भाई से कहा, "तुम बहोत अच्छे हो."

"तुम्हारी मदद करके मुझे भी खुशी हो रही है.. " जय ने उसके हाथ

को अपने हाथ मे लेते हुए कहा.

"हाँ जय आज बहोत ही अछा लगा." रिया ने अपने भाई को चूम लिया.

"खाना अछा था ना?" रेस्टोरेंट से बाहर आकर जीत ने रोमा से पूछा.

"हां बहोत ही टेस्टी था." रोमा ने उसके हाथ को अपने हाथ मे लेते हुए

जवाब दिया. "ख़ास तौर पर तुम साथ थे तो और मज़ा आ गया."

"क्या में तुम्हे घर छोड़ दूं या फिर......"

रोमा जीत की हालत बोलने के ढंग पर खिलखिला उठी... उसने कहा ही

इस ढंग से था.. "मुझे या फिर ज़्यादा अछा लगेगा." रोमा ने कहा.

रोमा को विश्वास था कि या फिर का मतलब जीत उसे अपने घर ले जाना

चाहता है.. फिर भी वो अंजान बनी उसके साथ खड़ी रही.

दोनो आकर जीत की गाड़ी मे बैठ गये.. रास्ते मे जीत ने गाड़ी एक वाइन

शॉप पर रोक कर एक रेड वाइन की बॉटल खरीद ली.

raj..
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Re: दो भाई दो बहन

Unread post by raj.. » 24 Dec 2014 00:56

"ये वो फिर का पहला हिस्सा है.." जीत ने मुस्कुराते हुए कहा तो रोमा

ने उसके होंठो को चूम लिया. रोमा ने उसके होठों को खोलते हुए अपनी

जीब उसके मुँह मे डाली तो जीत ने अपनी जीब उसकी जीब से मिला दी...

दोनो एक दूसरे को चूमने चाटने लगे.

घर पहुँच कर जीत ने रोमा क लिविंग रूम मे बिताया और स्टेरीयो पर

म्यूज़िक की सीडी लगाकर वाइन की बोतटे ले किचन मे चला गया.

जब वो लौटा तो उसके हाथों मे एक सुंदर ट्रे थी और उसपर दो क्रिस्टल

ग्लास रखे हुए थे.... उसने वाइन दो ग्लासो मे डाली और एक ग्लास रोमा

को पकड़ा दिया.

रोमा को जीत के साथ बहोत ही अछा लग रहा था.. वो उसके साथ किसी

राजकुमारी की तरह पेश हो रहा था और साथ ही उसके हर व्यवहार मे एक

स्टाइल था जो रोमा को बहोत पसंद आ रहा था....

"बहुत दिनो बाद इतनी अच्छी वाइन टेस्ट कर रही हूँ... शुक्रिया

जीत.." रोमा ने वाइन के ग्लास मे से सीप लेते हुए कहा.

जीत सोफे पर उसके बगल मे बैठ कर उसने अपना हाथ सोफे के पुष्ट पर

ठीक उसके पीछे रख दिया.... रोमा ड्रिंक के साथ स्टेरीयो पर बजते

म्यूज़िक का मज़ा ले रही थी तभी उसकी निगाह जीत पर पड़ी तो उसने

देखा कि वो उसकी चुचियों को घूर रहा था.... उसने गुस्से से जीत की

तरफ देखा.

"में तुम्हारी इस सुंदर टी-शर्ट को देख रहा था सही मे बहोत सुंदर

है...." जीत ने मुस्कुराते हुए कहा.

"सिर्फ़ टी-शर्ट देख रहे था या फिर उसके अंदर छुपी दो नारंगियों

को...." रोमा ने भी मज़ाक करते हुए कहा.

"नारंगियाँ या फिर स्पीड ब्रेकर....." जीत ने कहा.

"स्पीड ब्रेकर इसका क्या मतलब हुआ में कुछ समझी नही..." रोमा ने

पूछा.

"हां मेरी नज़रों मे ये स्पीड ब्रेकर है.... ये नौजवानो की नज़रों

को ठहरा देती है और उसे कुछ और करने ही नही देती... वो भी सिर्फ़

इन्हे घूरता रह जाता है... उसे आगे कुछ करने ही नही देती. " जीत

ने उसकी नज़रों से नज़रें मिलाते हुए कहा.

उसकी बात सुन रोमा ज़ोर से हंस पड़ी... "तुम बहोत शैतान हो?"

जीत उसके सुंदर चेहरे को घूरता रहा फिर उसने उसके माथे को चूम

लिया... "और तुम सही मे बहोत सुन्दर हो."

"सही मे....." रोमा मुस्कुरा पड़ी... और उसके हाथ को अपने हाथ मे ले

सहलाने लगी.

"रोमा ये ठीक नही है..." जीत ने कहा.

रोमा मुस्कुरा पड़ी, "पर में चाहती हूँ... क्या तुम्हारा या फिर सिर्फ़

वाइन पर समाप्त हो जाता है?"

"ये सब तुम पर निर्भर करता है.. ये समाप्त भी हो सकता है और

आगे भी बढ़ सकता है." जीत ने उसे अपनी बाहों मे भरते हुए कहा.

रोमा को जीत की बाहों का घेरा बहोत ही अछा लगा... कितना सुकून और

प्यार था उसकी बाहों मे....अपने आप को कितना सुरख़्शिट महसूस कर

रही थी वो.... उसने अपने होठों को उसके होंठो पर रखा और

चूमने लगी...

जीत ने भी उसका साथ दिया.. वो उसके नीचले होठ को चूसने लगा तो

रोमा ने अपनी जीब उसके मुँह मे डाल दी... जीत ने उसकी जीब को चूस्ते

हुए अपना हाथ उसके पीछे से हटाया और अपने हाथ उसकी चुचियों पर

रख दिए... और टी-शर्ट के उपर से उसकी चुचियों को सहलाने लगा.

"ओह्ह कितना अछा लग रहा है..." रोमा ने उसके होठों को और जोरों से

चूस्ते हुए कहा.

जीत ने जब उसके खड़े निपल को टी-शर्ट के उपर से भींचा तो उसका

बदन कांप उठा... उसने अपनी जीब और उसके मुँह मे घुसा दी... दोनो के

बदन मे गर्मी बढ़ने लगी थी...जीत भी उत्तेजित हो उसकी जीब को

जोरों से चूसने लगा.

उत्तेजना के साथ साथ रोमा की चूत मे भी चिंतियाँ रेंगने लगी.....

उसकी चूत गीली हो रही थी.... चूत का तनाव बढ़ रहा था....उसे

उसके लंड की चाहत होने लगी.

जीत ने अपने मुँह को उसके मुँह पर हटाया और अपनी शर्ट खोलने

लगा.... रोमा प्यार से उसकी चौड़ी छाती को देख रही थी... उसकी

छाती पर उगे घने बॉल उसे बहोत ही अच्छे लग रहे थे.... जीत ने

जब उसकी टी-शर्ट को नीचे से पकड़ा तो वो सिसक पड़ी.. जीत ने उसकी

टी-शर्ट को उठा उसके बदन से निकाल दी.... उसकी आँखे उसकी प्यारी

चुचियों मे खो कर रह गयी..... उसके तन कर खड़े निपल बहोत ही

प्यारे थे..

"तुम सही मे बहोत सुंदर हो?" जीत ने कहा.

"तुम भी कम हॅंडसम नही हो" रोमा ने जवाब दिया.

जीत का मुँह फिर हरकत मे आया वो उसके चेहरे को अपने हाथों मे ले

चूमने लगा... उसकी गरम सांसो को रोमा अपनी गर्दन पर महसूस कर

रही थी... उसके हाथो ने उसकी चुचियों को पकड़ लिया था और धीरे

धीरे भींच रहे थे..... निपल पहले से भी ज़्यादा तन कर खड़े

थे.. उत्तेजना मे वो पेड़ के किसी सूखे पत्ते की तरह कांप रहे

थी...जीत के हाथो का स्पर्श उसकी उत्तेजना और गरमाहट को और बढ़ा

रहे थे.