बाली उमर की प्यास compleet

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raj..
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Re: बाली उमर की प्यास

Unread post by raj.. » 11 Dec 2014 16:14

बाली उमर की प्यास पार्ट--51

गतान्क से आगे................

मानव ने बिना वक़्त गँवाए अंजलि को डिग्जी से बाहर निकल कर उसके हाथ पाँव खोले...,"अंजू.. तुम.. ऐसे... तुम्हे तो....!"

"पिंकी....!" चेहरे पर बँधी पट्टी के हटते ही अंजलि लगभग चिल्ला पड़ी...,"पिंकी को बचाओ जल्दी प्लीज़... वो.. हॅरी उसको....!"

"रिलॅक्स... पिंकी बिल्कुल ठीक है... पर तुम...!" मानव के चेहरे की रौनक उसकी खुशी बयान कर रही थी....

"नही... ववो.. हॉस्टिल में नही है... हॅरी उसको....!" अंजलि ने एक बार फिर कुच्छ बताने की कोशिश की... पर इस बार भी मानव ने उसको टोक दिया..,"हाँ.. हाँ... मुझे पता है... वो हॅरी के साथ बाहर आकर इन्न लोगों के चंगुल में फँस गयी थी... पर अब वो बिल्कुल ठीक है.... तुम फिकर मत करो... तुम तो ठीक हो ना...?"

"अच्च्छा!" अंजू खुश होकर बोली...,"वो सब पकड़े गये क्या....?"

"हाँ... चलो अब... तुम बच कैसे गयी?" मानव ने उसके साथ वापस ज़ीप में बैठते हुए पूचछा तो अंजलि के चेहरे पर टीस उभर आई...,"बेचारी मनीषा को इन्न लोगों ने मार दिया.... उसने मुझे बचाने के लिए अपनी जान गँवा दी....!"

"क्या? कौन मनीषा?... वही तुम्हारे गाँव वाली....?" मानव उच्छल पड़ा....

"हाँ... मैं उस बुड्ढे को बाथरूम में बंद करके आपके पास फोन कर रही थी तो 'वह' प्रेम दरवाजा तोड़कर अंदर आ गया... वा तो मुझे मार ही देता अगर मनीषा उसके साथ छ्चीना झपटी नही करती तो.... गोली 'उस' बेचारी को लग गयी...." अंजलि ने बोलते बोलते बुरा सा मुँह बना लिया....,"वह मुझे भी मारने वाला था... पर हॅरी ने उसको मना कर दिया....?"

"हॅरी ने मना कर दिया? मैं कुच्छ समझा नही....!" मानव ने चौंक कर अंजलि की तरफ देखा.....

"आपने उसको नही पकड़ा क्या?.... हॅरी ही तो इन्न सबका 'बॉस' है....!"

"कियेयीययाया?" ठगे से रह गये मानव के पैर ब्रेक्स पर दाबते चले गये...,"तत्तूम्हे कैसे पता....?" मानव ने फटाफट अपना मोबाइल निकलते हुए कहा और थाने में फोन किया....,"हेलो पूरी?"

"पूरी तो गया जनाब!.. जल्दी बोलो... मेरे पास टाइम नही है...." उधर से आवाज़ आई....

"कहाँ गया....? तुम कौन बोल रहे हो?"

"सब उपर गये... मैं भी चलता हूँ... अलविदा.. हा हा हा हा... बाइ इनस्पेक्टर साहब...!"

"हेलो... हेलो.. कौन? हॅरी.... ओह्ह्ह शिट... मुझसे इतनी बड़ी चूक कैसे हो गयी....!" मानव ने झल्लाते हुए स्टियरिंग पर मुक्का मारा और इसके साथ ही गाड़ी को रफ़्तार देते हुए उसने शहर भर में वी.टी. शुरू कर दी....

******************************

**********

"ओह माइ गोद..." मानव ने थाने में जाते ही अपना माथा पकड़ लिया.... थाने में उस वक़्त मौजूद तीनो पोलीस वालों की लाशे यहाँ वहाँ बिखरी पड़ी थी.... मानव भाग कर लोक्कूप की तरफ गया... अंदर फैला खून बयान कर रहा था कि किस निर्दयता से हॅरी ने उन्न सब को मौत के घाट उतारा होगा.... लोक्कूप रूम में भी 2 लाशे ही बची थी बस...,"सस्सालाअ!"

********************************

थाने में पूरी पोलीस फोर्स के साथ ही आंब्युलेन्स भी आ चुकी थी.... सब के सब अपने अपने कामो में व्यस्त थे.... मानव उनको इन्स्ट्रक्षन देकर वापस ऑफीस में आ गया....

"तुम्हे कैसे पता लगा कि हॅरी बॉस है....?" अपना सिर पकड़े ऑफीस में बैठा मानव अब सिवाय लकीर पीटने के; और कर ही क्या सकता था..... अंजलि भी उसके सामने सिर झुकाए बैठी थी.....

"मनीषा के मरने के बाद उसने खुद मुझे फोन पर बात की थी......वह मुझे वापस भेजने के मूड में नही था.... मैं रोने लगी तो उसने मुझे कहा था कि चिंता मत करो... पिंकी का वेट कर रहा हूँ, गुरुकुल के बाहर... वो भी तुम्हे यहीं मिलेगी....!" अंजलि ने बताया.....

"पर....!" मानव कुच्छ बोलते बोलते रुक गया...,"खैर.. अब तो वैसे भी सॉफ हो चुका है कि हॅरी ही इनका 'बॉस' था.... वैसे मनीषा वहाँ कैसे पहुँची... और उसने तुम्हे बचाने के लिए अपनी जान क्यूँ दी.....?"

"उसी ने हम सब को बचाने के लिए तरुण को मारा था.... तरुण इन्न सब के साथ ही काम करता था.... वह हम तीनो को भी इसी दलदल में घसीटना चाहता था..." यहाँ से शुरू करके अंजलि ने पूरी कहानी मानव को सुना दी....

" ओह्ह्ह.... ये हॅरी तो तुम्हारे गाँव का ही है ना?" मानव ने पूचछा....

"नही... हमारे गाँव का नही है... इसका दवाइयों का कुच्छ बिज़्नेस है... हमारे गाँव में पता नही क्यूँ रहता था.... गाँव वालों को कुच्छ पता होगा.... पर क्या पता उनको भी ना पता हो!"

"एक मिनिट... चलो महिला थाने चलते हैं... शायद सीमा या डॉली से कुच्छ पता चले, उसके बारे में.....!" मानव ने कहा और अंजलि को अपने साथ लेकर निकल पड़ा.......

************

"मुझे उस'से पहली बार अर्चना मेडम ने बात करवाई थी सर.... हमें तो आज तक ये भी नही पता की 'बॉस' कौन है... सिर्फ़ प्रेम और अजय ही उस'से मिलते थे, एक आध बार....." सीमा थाने में बैठी अपनी बर्बाद हो चुकी जिंदगी पर आँसू बहा रही थी.....

"कौन अर्चना मेडम?" मानव ने अपनी थयोरियाँ चढ़ा कर पूचछा.....

"जब में स्कूल में पढ़ती थी तो हमारे स्कूल में टीचर थी... आजकल प्रिन्सिपल हैं.....!"

"ओह्ह्ह... मैं समझ गयी... वही ना जो तुमसे उस दिन गुरुकुल में बात कर रही थी....!" अंजलि ने तुरंत पूचछा.... सीमा ने सहमति में सिर हिला दिया...,"हां!"

"वो तो इसी शहर में रहती हैं.... तुम यहीं आराम करो अंजू...!" मानव तुरंत खड़ा हो गया...," 2 लेडी कॉन्स्टेबल्स को बुलाओ अभी....!"

*************************

"कौन?...." तीन चार बार बेल बजाने पर एक आदमी की आवाज़ आई....

"दरवाजा खोलो...!" मानव ने आवाज़ सुन'ने के बाद कहा....

"पर कौन है भाई... इतनी रात को...?" अंदर से दरवाजा खोले बिना ही एक बार फिर से पूचछा गया....

"पोलीस है... जल्दी खोलो...!" भाननाए हुए मानव ने गुस्से में दरवाजे पर ठोकर मारते हुए कहा.....

"आप... पर यहाँ क्यूँ....?" घबराकर आदमी ने दरवाजा खोल दिया.....

"तेरी बीवी कहाँ है...?" मानव ने पूचछा.....

"ववो.. वो तो बाहर गयी है..... क्यूँ?" आदमी हड़बड़ा गया था.....

"जल्दी बता वरना....!" मानव अब और समझौते के मूड में नही था.. उसने अपनी रेवोल्वेर निकाल ली...,"बहुत हो गया तुम्हारा धंधा.... बता कहाँ है तेरी बीवी....?"

"ववो... उसको किसी ने बुलाया था.... कह रही थी कुच्छ एमर्जेन्सी है..... पर आप क्यूँ...?"

"किसने?... कहाँ बुलाया है?"

"ये तो पता नही सर...!"

"कब?" मानव ने फिर पूचछा.....

"अभी... 20 मिनिट पहले..... पर आप...!"

"तेरी बीवी है वो.. और तुझे ये पता नही की उसको इतनी रात को...." बोलते बोलते मानव रुका और फिर अचानक चिल्लाया..,"फोन लगा.... फोन लगा उसको.. वरना ववो गयी जान से... वो उसको भी मार देगा स्साला....!"

"पर वो उसको क्यूँ मारेगा... बहुत शरीफ लड़का है वो तो...." हड़बड़ाहट में आदमी के मुँह से निकल ही गया...,"एक मिनिट.. मैं फोन करके बताता हूँ उसको....!"

"नही उठा रही... लगता है वाइब्रेशन पर होगा... म्यूज़िक चला रखा होगा ना.....!" आदमी ने फीकी हँसी हंसते हुए जवाब दिया.....

मानव ने उसके हाथ से फोन झपट कर साथ आई महिला पोलिसेकार्मी को दे दिया...,"ट्राइ करते रहो.. उठा ले तो मुझे देना.... मुझे तो लगता है कि वो भी गयी...!"

"हां.. अब तू बोल... कौन है 'वो' शरीफ लड़का....!" मानव ने उस आदमी के कॉलर पकड़ लिए.....

"म्मूंुझे.. मुझे कुच्छ नही मालूम...!" आदमी घिघियाते हुए बोला.....

"अच्च्छा! तुझे ये पता है कि 'वो' शरीफ लड़का है.... तुझे अपनी बीवी के इतनी रात में बाहर जाने पर भी कोई ऐतराज नही है.... जल्दी बता दे.... उस शरीफ लड़के ने पिच्छले तीन घंटे में अपने सब साथियों को मार दिया है.... तीन पोलीस वालों को मार कर थाने से भागा है.... तेरी बीवी भी शायद अब तक मर् चुकी होगी.... समझ गया तू.... अब जल्दी से बता दे वरना तेरा खून भी उसके सिर लग जाएगा...!" मानव ने गुर्रकार कहा....

"बा...बाब...बताता हूँ.. प्लीज़.. गोली मत चलना...!" कनपटी पर रेवोल्वेर तनी देख कर आदमी के रौंगटे खड़े हो गये....,"मुझे ज़्यादा नही पता.. पर.. पर मेरी बीवी ने एक बार बताया है कि वो 'जुलना' का रहने वाला है... हॅरी नाम है... मुझे इस'से ज़्यादा कुच्छ नही पता......!"

"तुम कभी मिले हो उस'से?"

"नही... पर मेरी बीवी की आल्बम में फोटो है उसका.....!" आदमी ने घिघियाते हुए बताया.. रिवॉलव अब तक उसकी कनपटी पर ही थी.....

"उसको पता है कि तुझे उसके बारे में कुच्छ पता है...?" मानव ने पूचछा....

"नही...!" आदमी ने ना में सिर हिला दिया.....

"फोटो लेकर आ उसका....!" मानव ने रेवोल्वेर वापस रखते हुए कहा.....

"ज्जई... लाता हूं... ववो.. फोन मिला की नही....?"

"नही... जल्दी कर.....!"

"ये लीजिए सर...!" आदमी ने फोटो लाकर मानव को दे दिया.....

मानव ने फोटो को गौर से देखा और अपनी जेब में डाल लिया....,"चल.. गाड़ी में बैठ... ताला लगा दे यहाँ....!"

"प्पर... पर मैं क्यूँ सर?"

"जिंदा रहना है कि नही.....?" मानव मुड़कर गुर्राया....

"ज्जई... चलता हूँ......!"

*****************

वो लोग अभी थाने पहुँचे भी नही थे कि मानव के मोबाइल पर एक और खबर आ गयी...,"सर... ववो... पटियाला चौंक के पास अभी एक औरत की लाश मिली है..... लगता है गला घौंत कर मारा गया है उसको....!"

"उफ़फ्फ़... गयी..." मानव के मुँह से निकला...,"गाड़ी में है क्या?"

"नही सर... ऐसे ही फूटपाथ की साइड में पड़ी थी.... कोई सभ्य लेडी मालूम होती हैं....."

"हुंग.... शभ्य साली.....!" मानव बड़बड़ाया.... और पिछे बैठे आदमी को टोका...,"नंबर. क्या है तेरी बीवी की गाड़ी का?"

"ज्जई... डल 9क्प 7457...!"

"कलर...?"

"जी ब्लॅक... होंडा सिटी!"

मानव फोन पर निर्देश देने लगा....," ववो.. ब्लॅक कलर की होंडा सिटी में मिलेगा... 7457.... बचना नही चाहिए वो... किसी भी कीमत पर....!"

"मेडम किधर हैं...!" आनन फानन में एक पोलीस वाला लगभग भागते हुए महिला थाने में घुसा....

"सो रही हैं... क्यूँ?" रात की ड्यूटी पर तैनात एक महिला पोलिसेकार्मी ने पूचछा....

"इनस्पेक्टर साहब ने उन्न लड़कियों को एक लाश की शिनाख्त के लिए थाने बुलाया है... एक लेडी को भी साथ में....!" पोलीस वाले ने कहा.....

"मैं... मैं तो ड्यूटी पर हूँ... एक मिनिट... शिल्पा को जागती हूँ...." पोलीस वाली ने कहा और स्टाफ वॉर्ड में जाकर शिल्पा को जगा दिया...,"उठ.. ड्यूटी पर जाना है तुझे...!" पोलीस वाला उसके साथ साथ ही था.....

"अर्रे हां... उस लड़की को बुलाया होगा... अंजलि को...! उसको यही छ्चोड़ गये थे ना...! उनकी जान पहचान की है..." महिला पोलीस कर्मी ने कहा....,"मैं अभी उठाती हूँ...!"

"अंजलि?.. नही नही... उन्न दोनो को... ववो.. क्या नाम थे यार... डॉली और सीमा... हां....!" पोलीस वाले ने कहा....

"ठीक है... लाओ.. उनका पर्चा दो!" महिला पोलीस कर्मी ने हाथ बढ़ा कर कहा....

"पर्चा सुबह भेज देंगे यार.... तुम्हे नही पता कितनी मारा मारी चल रही है... ववो.. कमीना...!"

"पर कहीं मेडम गुस्सा ना करें सुबह उठकर... ये ऐसी ही है...चिड़चिड़ी सी.... क्या करूँ... अब जगाउन्गि तो गुस्सा करेंगी...!"

"छ्चोड़ ना यार... रोज रोज तो ऐसे होता है... मैं जाते ही जनाब का फोन करवा दूँगा.....!" पोलीस वाला उनके साथ बाहर आ गया....

"दीदी दीदी....!" उनके बाहर निकलते ही भयभीत सी अंजलि ने चदडार से मुँह निकाल कर अपनी साइड में सो रही पोलीस वाली को जगाया.....

"सोने दे ना यार.... अब तो आई हूँ.... सुबह होने वाली है वैसे भी...!" पोलीस वाली ने उसको झिड़कते हुए कहा.....

"दीदी.. ववो... हॅरी...!" अंजलि ने उसको एक बार फिर हिलाया.....

"क्या हॅरी हॅरी यार... तू ज़्यादा जासूस मत बन.... पकड़ा जाएगा अपने आप... पोलीस वालों ने चारों और नाके लगा रखे हैं... सो जा....!"

"वो.. ववो.. यहीं आया हुआ है.. पोलीस की वर्दी में है....!"

"सीसी..क्क्याअ...!" पोलीस वाली की नींद एक दम उड़ गयी... पर उठ कर बैठ जाने के बावजूद उसकी आवाज़ नही निकली....,"कहाँ...?"

"अभी अंदर आया था... मैने थोड़ी सी चदडार उठाकर देखा.....!" अंजलि लेते लेते बोल रही थी... वह बहुत ज़्यादा डर गयी थी.....

"कुच्छ हथियार था क्या उसके पास...?" पोलीस वाली ने सहम कर पूचछा....

"पता नही.. ये तो...!" अंजलि ने जवाब दिया.....

"सो जा... अपने साथ मुझे भी मरवाएगी क्या? 6-7 खून तो पहले ही कर चुका है... उसको क्या फ़र्क़ पड़ेगा....?" पोलीस वाली वापस लेट गयी... और डरी सहमी हुई चदडार की औट में से ही दरवाजे को घूर्ने लगी......

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"फोन ज़रूर करवा देना मेडम के पास... मेरी ड्यूटी 7 बजे ख़तम होगी.... उस'से पहले पर्चा भिजवा देना या इन्न लड़कियों को...." पोलीस वाली ने शिल्पा को उन्न दोनो लड़कियों के हाथों में लगी हथकड़ियों का दूसरा छ्होर थामकर पोलीस ज़ीप में बैठाते हुए कहा.....

"तुम फिकर मत करो!" ड्राइविंग सीट पर बैठा हॅरी मुस्कुराया और गाड़ी स्टार्ट करके दौड़ा दी.........

"क्या क्या बता दिया इनस्पेक्टर साहब को...?" हॅरी ने गाड़ी चलाते हुए एक पोलीस नाके से पार करके पूचछा..... पोलीस की गाड़ी देख कर नाके पर खड़े पोलीस वालों ने अपने बारर्ओर खींच लिए थे.... सुबह के तीन बजे भारी ट्रक्स और सायरेन बजाती घूम रही गाड़ियों के अलावा कुच्छ दौड़ भी नही रहा था शहर की सड़कों पर......

"हमें कुच्छ पता ही नही है सिर... हमने तो आज तक उसको देखा भी नही है.... हम क्या बतायें?" डॉली ने मुरझाए चेहरे से साथ बैठी शिल्पा को देखते हुए कहा.... साँवली सी शिल्पा शक्ल सूरत की बड़ी प्यारी थी.... नयी नयी पोलीस में भरती हुई थी... जोश अभी कायम था... जवानी भी...!

"पर.. तुम शहर से बाहर कहाँ लेकर जा रहे हो.... इनस्पेक्टर साहब कहाँ हैं....?" शिल्पा उनीनदी सी थी... अचानक उसने बाहर झाँक कर पूचछा.....

"एक डेड बॉडी मिली है.... साहब वहीं पर हैं... इनको शिनाख्त के लिए बुलाया है....!" हॅरी अब निसचिंत हो चुका था......

शिल्पा ने मुँह पिचकाया और वापस सीट से सॅट कर अपनी आँखें बंद कर ली.....

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"आए... गया क्या वो?" बाहर तैनात पोलीस वाली जैसे ही पानी पीने के लिए अंदर आई... अंजलि के साथ लेटी हुई पोलीस वाली ने चदडार से मुँह निकाल कर पूचछा....

"हां... गया...! लड़कियों को लेने आया था...." पानी पीकर वापस मुड़ते हुए पहली ने जवाब दिया.....

"फिर....?" दूसरी उच्छल कर बैठ गयी......

"फिर क्या? भेज दिया.... पर्चा सुबह आएगा....!"

"किययाया? अरी 'ववो' हॅरी था.... उन्न लड़कियों का बॉस?"

ड्यूटी पर तैनात पोलीस वाली की तो जैसे जान ही निकल गयी...,"ययए... ये क्या कह रही है तू...? पहले क्यूँ नही बताया...? गयी मेरी नौकरी तो... हे भगवान.....! ये मुझसे क्या हो गया....."

"मैं कौनसा उसको जानती थी.... इस'ने बताया है अभी... मुझे तो अब पता चला...."

"पर दीदी.. मैने तो...!" अंजलि बोलने लगी तो पोलीस वाली ने उसको झिड़क दिया...,"चुप कर... अभी भी टाइम है... वी.टी. करवा दे.... शकुंतला को बोलकर... वरना तू तो गयी....!"

"पर... पर... कहेंगे क्या? ववो तो ऐसे उल्लू बना गया जैसे....!" पहली ने पूचछा....

"ऐसे मत कहना... बोलना पोलीस की वर्दी में आया था और आते ही कनपटी पर रेवोल्वेर लगाकर छुड़ा ले गया.... फालतू में चूतिया बन'ने की ज़रूरत नही है.. समझी... कर दे फोन.....!"

"पर... पर ववो तो... उसके साथ मैने शिल्पा को भी भेज दिया.... उसको तो सब पता है ना... वो तो सच ही बताएगी बाद में....!" पहले वाली काँपने लगी थी......

"उसका क्या पता अब बचेगी भी या नही... बाद की बाद में सोचेंगे... तू वी.टी. करवा जल्दी.... शहर में होगा तो पकड़ तो लेंगे उसको... कौनसी गाड़ी में आया था.....?"

"पोलीस ज़ीप थी.... चल मेरे साथ आजा यार... तू उसको बता देना देना क्या बोलना है...?"

"क्यूँ घबरा रही है यार..... यहाँ कम से कम मर्डर तो नही किए.... सिटी थाने में देखा क्या हाल करके गया है.... कुच्छ नही बिगड़ेगा तेरा.... चल मैं चलती हूँ तेरे साथ...."

************

"व्हाआत....? ये क्या बक रहे हो...." मानव सुनते ही उच्छल पड़ा....

"जी सर... अभी वी.टी. हुई है...." वाइर्ले ऑपरेटर लगभग भागता हुआ ऑफीस में आया था....,"वह मेरी बेटी शिल्पा को भी ज़बरदस्ती पोलीस ज़ीप में बिठाकर ले गया...... जल्दी कुच्छ कीजिए सर....!" डब्ल्यू.ओ. हाथ जोड़कर गिड़गिदने लगा.....

"इसकी मा की... स्साला.... पोलीस ज़ीप कहाँ से आई उसके पास...?" मानव ने खड़ा होते ही टेबल पर मुक्का मारा.....,"कौनसी ज़ीप थी....?"

"इसके बारे में उनको कुच्छ नही पता सर.... आप कुच्छ कीजिए ना...!"

"घंटा ड्यूटी करती हैं स्साली ववो... कम से कम ज़ीप का नंबर. तो देख लेती.... कितनी देर पहले हुआ है ये सब....?"

"अभी 1 मिनिट पहले ही रिपोर्ट हुई है साहब.... 5 मिनिट पहले वारदात हुई है... मेरी बेटी तो वैसे भी बहुत भोली है जनाब....!" डब्ल्यू.ओ. गिड़गिडया... उसको बस अपनी बेटी की पड़ी थी.....

"भोली है तो इस लाइन में क्या...." मानव गाली बकते बकते रह गया.... पर वो बुरी तरह भनना गया था...," साले तनख़्वाह पाने के लिए भरती हो जाते हैं.... ज़ीप निकलवओ बाहर....!"

गतान्क से आगे................

Manav ne bina waqt ganwaye Anjali ko diggi se bahar nikal kar uske hath paanv khole...,"Anju.. tum.. aise... tumhe toh....!"

"Pinky....!" Chehre par bandhi patti ke hatate hi Anjali lagbhag chilla padi...,"Pinky ko bachao jaldi pls... wo.. Harry usko....!"

"Relax... Pinky bilkul theek hai... par tum...!" Manav ke chehre ki rounak uski khushi bayan kar rahi thi....

"Nahi... wwo.. hostel mein nahi hai... Harry usko....!" Anjali ne ek baar fir kuchh batane ki koshish ki... par iss baar bhi Manav ne usko tok diya..,"Haan.. haan... mujhe pata hai... wo Harry ke sath bahar aakar inn logon ke changul mein fans gayi thi... par ab wo bilkul theek hai.... tum fikar mat karo... tum toh theek ho na...?"

"Achchha!" Anju khush hokar boli...,"Wo sab pakde gaye kya....?"

"Haan... chalo ab... Tum bach kaise gayi?" Manav ne uske sath wapas zeep mein baithte huye poochha toh Anjali ke chehre par tees ubhar aayi...,"Bechari Manisha ko inn logon ne maar diya.... Usne mujhe bachane ke liye apni jaan ganwa di....!"

"Kya? koun Manisha?... wahi tumhare gaanv wali....?" Manav uchhal pada....

"Haan... Main uss buddhe ko bathroom mein band karke aapke paas fone kar rahi thi toh 'wah' Prem darwaja todkar andar aa gaya... wah toh mujhe maar hi deta agar Manisha uske sath chheena jhapti nahi karti toh.... Goli 'uss' bechari ko lag gayi...." Anjali ne bolte bolte bura sa munh bana liya....,"Wah mujhe bhi maarne wala tha... par Harry ne usko mana kar diya....?"

"Harry ne mana kar diya? Main kuchh samjha nahi....!" Manav ne chounk kar Anjali ki taraf dekha.....

"aapne usko nahi pakda kya?.... Harry hi toh inn sabka 'Boss' hai....!"

"Kyaaaaaaa?" thage se rah gaye Manav ke pair brakes par dabte chale gaye...,"Tttumhe kaise pata....?" Manav ne fatafat apna mobile nikalte huye kaha aur thane mein fone kiya....,"Hello Puri?"

"Puri toh gaya Janaab!.. Jaldi bolo... mere paas time nahi hai...." udhar se aawaj aayi....

"Kahan gaya....? Tum koun bol rahe ho?"

"Sab upar gaye... main bhi chalta hoon... Alwida.. ha ha ha ha... bye inspector sahab...!"

"Hello... hello.. koun? Harry.... Ohhh Shit... mujhse itni badi chook kaise ho gayi....!" Manav ne jhallate huye steering par mukka mara aur iske sath hi gadi ko raftaar dete huye Usne shahar bhar mein V.T. shuru kar di....

******************************

**********

"Oh my God..." Manav ne thane mein jate hi apna matha pakad liya.... Thane mein uss waqt moujood teeno police waalon ki laashe yahan wahan bikhari padi thi.... Manav bhag kar lockup ki taraf gaya... andar faila khoon bayan kar raha tha ki kis nirdayata se Harry ne unn sab ko mout ke ghat utaara hoga.... Lockup room mein bhi 2 laashe hi bachi thi bus...,"sssaalaaa!"

********************************

Thane mein poori police force ke sath hi ambulance bhi aa chuki thi.... sab ke sab apne apne kaamo mein vyast the.... Manav unko instruction dekar wapas office mein aa gaya....

"Tumhe kaise pata laga ki Harry boss hai....?" Apna sir pakde office mein baitha Manav ab sivay lakeer peetne ke; aur kar hi kya sakta tha..... Anjali bhi uske saamne sir jhukaye baithi thi.....

"Manisha ke marne ke baad usne khud mujhe fone par baat ki thi......Wah mujhe wapas bhejne ke mood mein nahi tha.... Main rone lagi toh usne mujhe kaha tha ki chinta mat karo... Pinky ka wait kar raha hoon, gurukul ke bahar... wo bhi tumhe yahin milegi....!" Anjali ne bataya.....

"Par....!" Manav kuchh bolte bolte ruk gaya...,"khair.. ab toh waise bhi saaf ho chuka hai ki Harry hi inka 'Boss' tha.... Waise Manisha wahan kaise pahunchi... aur usne tumhe bachane ke liye apni jaan kyun di.....?"

"Usi ne hum sab ko bachane ke liye Tarun ko mara tha.... Tarun inn sab ke sath hi kaam karta tha.... wah hum teeno ko bhi isi daldal mein ghaseetna chahta tha..." Yahan se shuru karke Anjali ne poori kahani Manav ko suna di....

" Ohhh.... ye Harry toh tumhare gaanv ka hi hai na?" Manav ne poochha....

"Nahi... hamare gaanv ka nahi hai... iska dawaaiyon ka kuchh business hai... hamare gaanv mein pata nahi kyun rahta tha.... gaanv walon ko kuchh pata hoga.... par kya pata unko bhi na pata ho!"

"Ek minute... chalo mahila thane chalte hain... shayad Seema ya Dolly se kuchh pata chale, uske baare mein.....!" Manav ne kaha aur Anjali ko apne sath lekar nikal pada.......

************

"Mujhe uss'se pahli baar Archna madam ne baat karwayi thi sir.... hamein toh aaj tak ye bhi nahi pata ki 'Boss' koun hai... Sirf Prem aur ajay hi uss'se milte the, ek aadh baar....." Seema thane mein baithi apni barbaad ho chuki jindagi par aansu baha rahi thi.....

"koun Archna madam?" Manav ne apni tyoriyan chadha kar poochha.....

"Jab mein school mein padhti thi toh hamare School mein teacher thi... aajkal Principal hain.....!"

"Ohhh... main samajh gayi... wahi na jo tumse uss din gurukul mein baat kar rahi thi....!" anjali ne turant poochha.... Seema ne sahmati mein sir hila diya...,"Haan!"

"Wo toh isi shahar mein rahti hain.... Tum yahin aaram karo Anju...!" Manav turant khada ho gaya...," 2 lady constables ko bulao abhi....!"

*************************

"Koun?...." Teen char baar bell bajane par ek aadmi ki aawaj aayi....

"Darwaja kholo...!" Manav ne aawaj sun'ne ke baad kaha....

"Par koun hai bhai... itni raat ko...?" andar se darwaja khole bina hi ek baar fir se poochha gaya....

"Police hai... jaldi kholo...!" Bhannaye huye Manav ne gusse mein darwaje par thokar maarte huye kaha.....

"aap... par yahan kyun....?" Ghabrakar aadmi ne darwaja khol diya.....

"Teri biwi kahan hai...?" Manav ne poochha.....

"wwo.. wo toh bahar gayi hai..... kyun?" Aadmi hadbada gaya tha.....

"Jaldi bata warna....!" Manav ab aur samjhoute ke mood mein nahi tha.. usne apni revolver nikal li...,"Bahut ho gaya tumhara dhandha.... bata kahan hai teri biwi....?"

"wwo... usko kisi ne bulaya tha.... kah rahi thi kuchh emergency hai..... par aap kyun...?"

"kisne?... kahan bulaya hai?"

"ye toh pata nahi Sir...!"

"Kab?" Manav ne fir poochha.....

"Abhi... 20 minute pahle..... par aap...!"

"teri biwi hai wo.. aur tujhe ye pata nahi ki usko itni raat ko...." Bolte bolte Manav ruka aur fir achanak chillaya..,"Fone laga.... fone laga usko.. warna wwo gayi jaan se... wo usko bhi maar dega Ssala....!"

"Par wo usko kyun maarega... bahut shareef ladka hai wo toh...." Hadbadahat mein aadmi ke munh se nikal hi gaya...,"ek minute.. main fone karke batata hoon usko....!"

"Nahi utha rahi... lagta hai vibration par hoga... music chala rakha hoga na.....!" aadmi ne feeki hansi hanste huye jawab diya.....

Manav ne uske hath se fone jhapat kar sath aayi mahila policekarmi ko de diya...,"Try karte raho.. utha le toh mujhe dena.... mujhe toh lagta hai ki wo bhi gayi...!"

"Haan.. ab tu bol... koun hai 'wo' Shareef ladka....!" Manav ne uss aadmi ke collar pakad liye.....

"mmumujhe.. mujhe kuchh nahi maloom...!" Aadmi ghighiyate huye bola.....

"achchha! tujhe ye pata hai ki 'wo' shareef ladka hai.... tujhe apni biwi ke itni raat mein bahar jane par bhi koyi aitraaj nahi hai.... Jaldi bata de.... Uss shareef ladke ne pichhle teen ghante mein apne sab saathiyon ko maar diya hai.... teen police waalon ko maar kar thane se bhaga hai.... teri biwi bhi shayad ab tak mar chuki hogi.... Samajh gaya tu.... ab jaldi se bata de warna tera khoon bhi uske sir lag jayega...!" Manav ne gurrakar kaha....

"ba...bab...batata hoon.. plz.. goli mat chalana...!" Kanpati par revolver tani dekh kar aadmi ke roungate khade ho gaye....,"Mujhe jyada nahi pata.. par.. par meri biwi ne ek baar bataya hai ki wo 'Julana' ka rahne wala hai... Harry naam hai... Mujhe iss'se jyada kuchh nahi pata......!"

"tum kabhi mile ho uss'se?"

"Nahi... par meri biwi ki album mein foto hai uska.....!" Aadmi ne ghighiyate huye bataya.. revolver ab tak uski kanpati par hi thi.....

"Usko pata hai ki tujhe uske baare mein kuchh pata hai...?" Manav ne poochha....

"Nahi...!" aadmi ne na mein sir hila diya.....

"Foto lekar aa uska....!" Manav ne revolver wapas rakhte huye kaha.....

"jji... lata hoon... wwo.. fone mila ki nahi....?"

"Nahi... jaldi kar.....!"

"Ye lijiye Sir...!" Aadmi ne foto lakar Manav ko de diya.....

Manav ne foto ko gour se dekha aur apni jeb mein daal liya....,"Chal.. gadi mein baith... tala laga de yahan....!"

"ppar... par main kyun Sir?"

"Jinda rahna hai ki nahi.....?" Manav mudkar gurraya....

"jji... chalta hoon......!"

*****************

Wo log abhi thane pahunche bhi nahi the ki Manav ke mobile par ek aur khabar aa gayi...,"Sir... wwo... Patiyala chounk ke paas abhi ek aurat ki lash mili hai..... lagta hai gala ghount kar mara gaya hai usko....!"

"Ufff... gayi..." Manav ke munh se nikla...,"Gadi mein hai kya?"

"Nahi Sir... aise hi footpath ki side mein padi thi.... koyi sabhya lady maloom hoti hain....."

"Hunh.... Sabhya Sali.....!" Manav badbadaya.... aur pichhe baithe aadmi ko toka...,"No. kya hai teri biwi ki gadi ka?"

"Jji... DL 9CP 7457...!"

"colour...?"

"ji black... Honda city!"

Manav fone par nirdesh dene laga....," Wwo.. black colour ki honda city mein milega... 7457.... bachna nahi chahiye wo... kisi bhi keemat par....!"

"Madam kidhar hain...!" aanan faanan mein ek Police wala lagbhag bhaagte huye mahila thane mein ghusa....

"So rahi hain... kyun?" raat ki duty par tainaat ek mahila policekarmi ne poochha....

"Inspector sahab ne unn ladkiyon ko ek lash ki shinakht ke liye thane bulaya hai... ek lady ko bhi sath mein....!" Police waale ne kaha.....

"Main... main toh duty par hoon... ek minute... Shilpa ko jagati hoon...." police wali ne kaha aur staff ward mein jakar Shilpa ko jaga diya...,"Uth.. duty par jana hai tujhe...!" Police wala uske sath sath hi tha.....

"arrey haan... Uss ladki ko bulaya hoga... Anjali ko...! Usko yahi chhod gaye the na...! unki jaan pahchan ki hai..." Mahila police karmi ne kaha....,"main abhi uthati hoon...!"

"Anjali?.. nahi nahi... unn dono ko... wwo.. kya naam the yaar... dolly aur Seema... haan....!" Police wale ne kaha....

"theek hai... lao.. unka parcha do!" Mahila police karmi ne hath badha kar kaha....

"Parcha subah bhej denge yaar.... tumhe nahi pata kitni mara mari chal rahi hai... wwo.. kamina...!"

"Par kahin madam gussa na karein subah uthkar... ye aisi hi hai...chidchidi si.... kya karoon... ab jagaaungi toh gussa karengi...!"

"chhod na yaar... roj roj toh aise hota hai... main jate hi janaab ka fone karwa doonga.....!" Police wala unke sath bahar aa gaya....

"didi didi....!" Unke bahar nikalte hi Bhaybheet si Anjali ne chaddar se munh nikal kar apni side mein so rahi police wali ko jagaya.....

"Sone de na yaar.... ab toh aayi hoon.... subah hone wali hai waise bhi...!" Police wali ne usko jhidakte huye kaha.....

"Didi.. wwo... Harry...!" Anjali ne usko ek baar fir hilaya.....

"kya Harry harry yaar... tu jyada jasoos mat ban.... pakda jayega apne aap... police waalon ne charon aur naake laga rakhe hain... so ja....!"

"wo.. wwo.. yahin aaya hua hai.. police ki wardi mein hai....!"

"kk..kkyaaa...!" Police wali ki neend ek dum ud gayi... par uth kar baith jane ke bawjood uski aawaj nahi nikli....,"Kahan...?"

"abhi andar aaya tha... maine thodi si chaddar uthakar dekha.....!" Anjali lete lete bol rahi thi... wah bahut jyada darr gayi thi.....

"Kuchh hathiyaar tha kya uske paas...?" Police wali ne saham kar poochha....

"Pata nahi.. ye toh...!" Anjali ne jawab diya.....

"so ja... apne sath mujhe bhi marwayegi kya? 6-7 khoon toh pahle hi kar chuka hai... usko kya farq padega....?" Police wali wapas late gayi... aur dari sahmi huyi chaddar ki aut mein se hi darwaje ko ghoorne lagi......

****************************************

"Fone jaroor karwa dena madam ke paas... meri duty 7 baje khatam hogi.... uss'se pahle parcha bhijwa dena ya inn ladkiyon ko...." Police wali ne Shilpa ko unn dono ladkiyon ke hathon mein lagi hathkadiyon ka dusra chhor thamakar police zeep mein baithate huye kaha.....

"Tum fikar mat karo!" Driving seat par baitha Harry muskuraya aur gadi start karke douda di.........

"Kya kya Bata diya inspector sahab ko...?" Harry ne gadi chalate huye ek police naake se paar karke poochha..... Police ki gadi dekh kar naake par khade police waalon ne apne barrior kheench liye the.... subah ke teen baje bhari trucks aur sairen bajati ghoom rahi gadiyon ke alawa kuchh doud bhi nahi raha tha shahar ki sadkon par......

"hamein kuchh pata hi nahi hai Sir... hamne toh aaj tak usko dekha bhi nahi hai.... ham kya batayein?" Dolly ne murjhaye chehre se sath baithi Shilpa ko dekhte huye kaha.... Sanwli si Shilpa shakl soorat ki badi pyari thi.... nayi nayi police mein bharti huyi thi... josh abhi kayam tha... jawani bhi...!

"Par.. tum shahar se bahar kahan lekar ja rahe ho.... Inspector sahab kahan hain....?" Shilpa uneendi si thi... achanak usne bahar jhank kar poochha.....

"ek dead body mili hai.... sahab wahin par hain... inko shinakht ke liye bulaya hai....!" Harry ab nischint ho chuka tha......

Shilpa ne munh pichkaya aur wapas seat se sat kar apni aankhein band kar li.....

************************************

"Aey... gaya kya wo?" bahar tainaat Police wali jaise hi pani peene ke liye andar aayi... Anjali ke sath leti huyi police wali ne chaddar se munh nikal kar poochha....

"Haan... gaya...! ladkiyon ko lene aaya tha...." Pani peekar wapas mudte huye pahli ne jawaab diya.....

"fir....?" dusri uchhal kar baith gayi......

"Fir kya? bhej diya.... parcha subah aayega....!"

"Kyaaaa? ari 'wwo' Harry tha.... unn ladkiyon ka boss?"

Duty par tainaat police wali ki toh jaise jaan hi nikal gayi...,"yye... ye kya kah rahi hai tu...? pahle kyun nahi bataya...? gayi meri noukri toh... hey bhagwaan.....! ye mujhse kya ho gaya....."

"Main kounsa usko jaanti thi.... iss'ne bataya hai abhi... mujhe toh ab pata chala...."

"Par didi.. maine toh...!" Anjali bolne lagi toh police wali ne usko jhidak diya...,"Chup kar... abhi bhi time hai... V.T. karwa de.... shakuntala ko bolkar... warna tu toh gayi....!"

"Par... par... kahenge kya? wwo toh aise ulloo bana gaya jaise....!" pahli ne poochha....

"Aise mat kahna... bolna police ki wardi mein aaya tha aur aate hi kanpati par revolver lagakar chhuda le gaya.... faaltu mein chutiya ban'ne ki jarurat nahi hai.. samjhi... kar de fone.....!"

"par... par wwo toh... Uske sath maine Shilpa ko bhi bhej diya.... usko toh sab pata hai na... wo toh sach hi batayegi baad mein....!" Pahle wali kaampne lagi thi......

"Uska kya pata ab bachegi bhi ya nahi... baad ki baad mein sochenge... tu V.T. karwa jaldi.... shahar mein hoga toh pakad toh lenge usko... kounsi gadi mein aaya tha.....?"

"Police zeep thi.... chal mere sath aaja yaar... tu usko bata dena dena kya bolna hai...?"

"kyun ghabra rahi hai yaar..... yahan kam se kum murder toh nahi kiye.... city thane mein dekha kya haal karke gaya hai.... kuchh nahi bigadega tera.... chal main chalti hoon tere sath...."

************

"whaaat....? ye kya bak rahe ho...." Manav sunte hi uchhal pada....

"Ji Sir... abhi V.T. huyi hai...." Wireless operator lagbhag bhagta hua office mein aaya tha....,"Wah meri beti Shilpa ko bhi jabardasti police zeep mein bithakar le gaya...... jaldi kuchh kijiye Sir....!" W.O. hath jodkar gidgidane laga.....

"Iski maa ki... ssala.... Police zeep kahan se aayi uske paas...?" Manav ne khada hote hi table par mukka mara.....,"kounsi zeep thi....?"

"Iske baare mein unko kuchh nahi pata Sir.... aap kuchh kijiye na...!"

"Ghanta duty karti hain ssali wwo... kam se kam zeep ka no. toh dekh leti.... kitni der pahle hua hai ye sab....?"

"Abhi 1 minute pahle hi report huyi hai sahab.... 5 minute pahle waardaat huyi hai... meri beti toh waise bhi bahut bholi hai janaab....!" W.O. gidgidaya... usko bus apni beti ki padi thi.....

"Bholi hai toh iss line mein kya...." Manav gali bakte bakte rah gaya.... par wo buri tarah bhanna gaya tha...," Saale tankhwah paane ke liye bharti ho jate hain.... Zeep nikalwao bahar....!"


raj..
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Re: बाली उमर की प्यास

Unread post by raj.. » 11 Dec 2014 16:15

बाली उमर की प्यास पार्ट--52

गतान्क से आगे................

"हां, बाहर आ जाओ!" हॅरी किसी से फोन पर बात कर रहा था....

"अभी और कितनी दूर जाना है...", शिल्पा ने एक बार फिर गर्दन उचका कर गाड़ी चला रहे हॅरी पर निगाह डालने की कोशिश की....

"फिकर मत करो...!" हॅरी ने कहते कहते गाड़ी सड़क के बाईं और करके ब्रेकेस लगा दिए... तभी तकरीबन 25-30 साल का एक युवक ज़ीप की पिच्छली सीट खोलकर उसमें आ चढ़ा...,"हे... चलो नीचे उतर कर उस गाड़ी में बैठो...!" उसका दूसरा साथी बाहर खड़ा अपने दाँतों में से कुच्छ निकालने की कोशिश कर रहा था....

सीमा और डॉली अचंभित सी उन्न दोनो को देखने लगी.... वो दोनो उनको अच्छि तरह जानती थी.... पर साथ बैठी शिल्पा और आगे बैठे 'पोलीस वाले' की वजह से वो एक दूसरी का चेहरा ताक कर ही रह गयी....

"ये सब क्या है... अभी और कितना आगे चलना है... ये दोनो कौन हैं...?" शिल्पा ने हड़बड़ा कर एक बार फिर पूचछा.....

"सब समझ आ जाएगा.. हे हे हे...", इस बार जवाब गाड़ी में चढ़े युवक ने दिया और अपनी हथेली शिल्पा की जाँघ पर रख कर दबा दी.. और फिर गुर्राते हुए रेवोल्वेर निकाल कर कहा,"चलो नीचे...!"

"ययए... ये क्या कर रहे हो..." अपने गालों पर रेवोल्वेर की नोक सटी देख कर शिल्पा अपनी जाँघ पर रखी हथेली का विरोध करना तो जैसे भूल ही गयी.... युवकों की शकल सूरत और तेवरों से उसको वो दोनो पेशेवर मुजरिम लग रहे थे... सूखे पत्ते की तरह कांपना शुरू कर चुकी हाथ में थमी हथकड़ियों को झट से छ्चोड़ते हुए तुरंत नीचे आ गयी....,"क्क्या है ये सब...?"

नीचे खड़े युवक ने शिल्पा के नीचे आते ही उसका हाथ पकड़ लिया,"चलो.. उस गाड़ी में...!"

"ययए... ये तो कमाल हो गया यार.... तुम कैसे...?" डॉली खुशी से उच्छलते हुए सीमा के साथ लगभग भाग कर सड़क से नीचे उतर कर खड़ी की गयी गाड़ी में आकर बैठ गयी...,"आए... चल हमारी बेड़ियाँ खोल... ययएए... ये तो वही लड़का है ना जो....!" डॉली ने हॅरी को पोलीस वाले के भेष में ज़ीप से उतर कर गाड़ी की तरफ आते देखा तो अवाक रह गयी.... सीमा का भी यही हाल था.....

******************************

*******************

"डॅमिट यार... अगर वो ज़ीप में था तो गया कहाँ.... हर चौराहे पर पोलीस है... फिर भी...." मानव झुंझला उठा था..... वह अंबेडकर चोवोक पर बॅरियर लगाए खड़े पोलीस वालों से बात कर रहा था.....

"सर आपके वी.टी. करवाने के बाद हमने हर गाड़ी को चेक किया है.... चाहे वो लाल बत्ती वाली गाड़ी ही क्यूँ ना हो....!" पोलीस वाले ने सिर झुका कर अदब से जवाब दिया... हताशा और निराशा सबके चेहरों से साफ झलक रही थी.....

"क्या उस'से पहले कोई पोलीस ज़ीप शहर से बाहर गयी है?" मानव ने पूचछा.....

"आज तो पोलीस की हर गाड़ी रोड पर है सर.... पर फिर भी हमने एहतियात के तौर पर पास वाले थानो में भी एलेर्ट कर दिया था.....

मानव ने जेब से मोबाइल निकाल कर समय देखा.. सुबह के 6:00 बजने वाले थे...,"मैं जुलना जा रहा हूँ..... तुम चौकस रहना... वो दिन निकलने पर किसी दूसरी गाड़ी से शहर के बाहर निकलने की कोशिश कर सकते हैं....." मानव ने कुच्छ और ज़रूरी हिदायतें दी और वापस गाड़ी में बैठ गया.....

********************************************

"ययए सब आख़िर चाहते क्या हैं...? तुम भी इन्न लोगों से मिले हुए हो लगता है!" जैसे ही हॅरी अकेला शिल्पा के पास आया, वो बरस पड़ी..... उसको बाहर दोनो लड़कियों के खिलखिलाने की आवाज़ें आ रही थी....

"हा हा हा हा.....बड़ी जल्दी समझ गयी तुम...! वैसे तुम्हे पोलीस में भरती किसने कर लिया....?" हॅरी अट्टहास सा करता हुआ आपाधापी में खड़ी शिल्पा के सामने बिस्तर पर पसर गया,"साले पोलीस वालों ने आज बहुत भगाया.... मुझे इतना काम करने की आदत नही है.....!"

"क्क्या मतलब...?" शिल्पा आस्चर्य से हॅरी का चेहरा घूरते हुए बोली....

"छ्चोड़ो.... आओ... थोड़ी मालिश कर दो.. मेरा बदन दुख रहा है....!" हॅरी बत्तीसी निकाल कर बोला और अपनी कमर में अटकाई हुई सी माउज़र निकाल कर टेबल पर रख दी......

ख़तरा भाँप चुकी शिल्पा भला यह मौका कैसे गँवाती... उसने फुर्ती दिखती हुए माउज़र लपक कर हॅरी की और तान दी...,"तो तुम इन्न लोगों के साथ मिले हुए हो... मैं तुम्हे छ्चोड़ूँगी नही....

"मुझे भी पोलीस वालों जितना चूतिया समझती है क्या सस्साली? इसमें गोली तेरा बाप डालेगा... मैं सब कुच्छ सब्र से करता हूँ... पर उन्न लोगों को सोन्प दिया तो तुझे कच्चा चबा जाएँगे.... समझ गयी....? अब इसको टेबल पर रख कर मेरे पास आ जा... वरना मैं उनको अंदर बुला लूँगा.....!" हॅरी ने लेते हुए ही कहा और फिर अपनी आँखें बंद कर ली.......

"मुंम्म्मय्यययी......." शिल्पा ने चुपचाप माउज़र को टेबल पर वापस रखा और रोने लगी....

"तू तो सच में चूतिया है...." हॅरी ने आँखें खोल कर टेबल से माउज़र उठाई और उसकी मॅग्ज़ाइन निकाल ली...," आज तो मैं गया था काम से.... साला भूल ही गया था कि तू पोलीस वाली है और तुझे गन चलानी आती है.... हा हा हा हा... ये ले... अब खेल ले इसके साथ... मेरा काम तो तू करेगी नही... लगता है मुझे उन्न दोनो को गिफ्ट में देना पड़ेगा तुझे.....!"

"प्ल्ज़... प्ल्ज़... मुझे छ्चोड़ दो... !" शिल्पा तुरंत हॅरी के पैरों में गिरकर गिड़गिदने लगी...,"मुझे जाने दो यहाँ से... मैं किसी को कुच्छ नही बोलूँगी.....!"

हॅरी बिस्तर पर सिरहाने को ऊँचा करके अढ़लेता सा हो गया और उसने कसमसाती हुई शिल्पा को अपनी बाहों में खींच लिया.....,"मैं लड़कियों को नही मारता... 'प्यार' करता हूँ... यही मेरा पेशा है....!"

आतंक के मारे बौखलाई हुई शिल्पा अपने आपको हॅरी के पहलू में सिमट'ते हुए पाकर विरोध तक नही कर सकी.... उसके आँसुओं से नमकीन हुए जा रहे उसके होन्ट जैसे ही हॅरी ने 'अपने' कब्ज़े में लिए; वह सिसक उठी... भय के मारे.....!

**************************************

"इसको पहचानते हो क्या? हॅरी को!" मानव जुलना कस्बे में जाकर दुकान दारों को अपने साथ लाई फोटो दिखा दिखा कर थक चुका था... उसकी उम्मीद ढीली पड़ने ही लगी थी कि एक जगह पान की दुकान पर बात बन गयी.....

"हां साहब... पर आप क्यूँ पूच्छ रहे हो?... ये तो निहायत ही शरीफ लड़का था....!"

"शरीफ माइ फुट, सस्सलाअ...!" मानव के मुँह से निकला... फिर अचानक ही उसने थयोरियाँ चढ़ा कर पूचछा..,"था मतलब?"

"मतलब अब वो यहाँ नही रहता साहब.... तीन चार साल हो गये.... घर वालों से अनबन के चलते वो घर छ्चोड़ कर चला गया था.....!"

"हूंम्म..... कौन कौन है इसके घर में... अब?" मानव ने उत्सुक होकर पूचछा...,"वो तो यहीं रहते होंगे ना...?"

"हां.... ये थोडा सा आगे चलकर पहली गली में तीसरा... नही नही... एक मिनिट... चौथा मकान है.... मम्मी पापा और छ्होटा बेटा ही रहते हैं यहाँ बस....!" दुकानदार ने अंदाज़ा लगाकर बताया....

"घरवालों से अनबन की कोई खास वजह....?" मानव ने एक और सवाल किया....

"इतना तो मालूम नही साहब.... पर लड़का बहुत शरीफ था.... राम क़ास्स्साम!"

"हूंम्म... थॅंक्स!" मानव ने कहा और दोनो पोलीस वालों को साथ लेकर आगे बढ़ गया.......

"ये आप क्या कह रहे हैं इनस्पेक्टर साहब... हॅरी तो कभी ऐसा सोच भी नही सकता...!" आलीशान बंगले में पोलीस वालों के सामने बैठे हॅरी के पिता जी मानव की बात सुनते ही उच्छल पड़े......

"देखिए में यहाँ झक मारने नही आया हूँ.... अगर आप मुझे उसके पते ठिकाने नही बताते तो मजबूरन मुझे आपको साथ लेकर जाना पड़ेगा..... फ़ायडा इसी में है कि आप उसके बारे में जितना जानते हैं, यहीं बता दें...." मानव व्याकुल हो उठा था....

"मैं मज़ाक नही कर रहा इनस्पेक्टर साहब... उस जैसा लड़का आपको शायद ही कोई और मिलेगा.... उसने तो आज तक चींटी भी नही मारी... आप खून करने की बात कर रहे हैं.....!" पिता जी ने दोहराया.....

"देखिए मैं उसका रिश्ता लेकर यहाँ नही आया हूँ जो आप उसकी तारीफों के पुल बाँधे जा रहे हैं... उसका ठिकाना बता दीजिए!" मानव ने अपने तेवर बदल कर कहा...

"सॉरी इनस्पेक्टर... मुझे पता होता तो मैं तीन साल से यहाँ बैठा उसकी राह नही देख रहा होता... उसको गले से लगाकर वापस ले आता...!" पिताजी की आँखों में आँसू उमड़ पड़े....

"तो फिर आपको मेरे साथ चलना पड़ेगा...!" मानव की तमाम कोशिशों के बाद भी हॅरी के घर वालों ने जब संतोषजनक जवाब नही दिया तो मानव कुर्सी से खड़ा हो गया....

"मुझे तो हमेशा से पता था वो ऐसा है.... आप ही सिर पे चढ़ा के रखते थे उसको.... देख लिया नतीजा... कटवा ली ना अपनी नाक... घर तक पोलीस आ गयी... अब भुग्तो... लगा लो उसको वापस लाकर कलेजे से.... अरे 'वो' बस दिखने का ही शरीफ था... पर मेरी तो आपने कभी सुनी ही नही.... पहले ही जायदाद से बेदखल कर देते तो आज ये दिन ना देखना पड़ता....." काफ़ी देर से मुँह बनाए उनकी बातें सुन रही औरत से रहा ना गया.... शायद वो हॅरी की माताजी थी.....

मानव ने तिर्छि नज़रों से देखते हुए हॅरी की माताजी की बातों का अर्थ निकालने की कोशिश की.... पर कुच्छ समझ में नही आया... अमूमन ऐसी बातें पिता के मुँह से सुन'ने को मिल जाती हैं.. पर.....

"नमस्ते अंकल!" बाहर से भागते हुए अंदर आए बच्चे पर भी मानव ने पैनी निगाह डाली.... करीब 8-9 साल का वो बच्चा आते ही अपनी मम्मी की गोद में बैठ गया......

"क्या ये आपकी दूसरी शादी है....?" मानव ने तर्कपूर्ण ढंग से सोचने के बाद पिताजी से सवाल किया.....

"चलिए.... मेरे साथ उपर चलिए.... सब बताता हूँ आपको...!" हॅरी के पिताजी ने कहा और खड़े होकर सीढ़ियों की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया......

"हां हां... बता दो सब कुच्छ... सारा दोष मुझ पर ही मढ़ देना... तुम्हारा बड़ा 'नाम' हो जाएगा इस'से... हॅरी तो हीरा है हीरा.... हाथ कंगन को आरसी क्या....! सब कुच्छ तुम्हारे सामने आ गया ना....! भुगतो अब...." माता जी अपने पति का इनस्पेक्टर को अकेले में उपर ले जाना बर्दाश्त ना कर सकी.... और कुच्छ ना कुच्छ बड़बड़ाती ही रही......

****************

"हॅरी हमारा बेटा नही है इनस्पेक्टर साहब!" उपर जाते ही पिताजी ने बात साफ करके मानव को चौंकने पर मजबूर कर दिया....

"'हमारा बेटा नही है' मतलब?... आपका बेटा नही है या फिर.....?"

"वो हम दोनो का ही बेटा नही है... हमने उसको गोद लिया था....!" पिताजी ने सपस्ट किया.....,"दरअसल शादी के केयी साल तक जब हम दोनो को कोई बच्चा नही हुआ तो हम दोनो ने हताश होकर बच्चा गोद लेने का फ़ैसला किया था.... पर हॅरी के घर में आने के 15 साल बाद भगवान ने मेरी बीवी की सुन ली.... मैं तब बच्चा नही चाहता था... पर.... मुझे पता था उसके बाद यही होगा.... मयूर के पैदा होने के बाद से ही सावित्री को 'हॅरी' खटकने लगा था.... पर मेरा विश्वास कीजिए इनस्पेक्टर साहब... 'वो' तो सच में हीरा था हीरा.....!" पिताजी ने अपनी नाम हो चुकी आँखों को च्छुपाने के लिए अपना मुँह फेर लिया......

"ओह्ह्ह... पर वो घर छ्चोड़ कर क्यूँ गया? क्या आपकी बीवी....?"

"हां..." पिताजी की गर्दन हां में हिली और झुकी हुई ही रह गयी...,"कोई कितना बर्दाश्त करेगा....!"

"उसको इस घर से कोई लगाव था भी या नही...?"

"था इनस्पेक्टर साहब.... वो तो मयूर को भी अपनी जान से ज़्यादा चाहता था... दरअसल नफ़रत का तो उसको पता ही नही था कि क्या होती है.... एक दिन उसकी मम्मी ने उस पर 'गोद लिया हुआ' कहकर ताने मारने शुरू कर दिए और मयूर का हक़ खाने वाला कहने लगी... उसके बाद केवल 2 दिन और ही 'वो' यहाँ रुका था बस... कुच्छ नही पता मुझे... कम से कम मुझे बता कर तो चला जाता.....!" अब तक पिताजी की आँखें बरसने लगी थी....

"ओह्ह.. आइ'म सॉरी... शायद 'इसी' नफ़रत ने उसको 'ऐसा' रास्ता इख्तियार करने पर मजबूर कर दिया..... मैं अपना नंबर. छ्चोड़ कर जा रहा हूँ... अगर आपको...."

"वो ऐसा नही कर सकता इनस्पेक्टर... मैं अब भी दावे के साथ कह सकता हूँ... आपको ज़रूर कोई ग़लतफहमी हुई है... वह मर जाएगा पर ऐसा काम नही करेगा....!"

"देखते हैं.... फिलहाल तो उसको ढूँढना है.....!" मानव ने कहकर उनके कंधे पर हाथ रखा और दोनो नीचे उतरने लगे......

..........................................

"शिवा...!" हॅरी करीब एक घंटे बाद कमरे में शिल्पा को रोती छ्चोड़ कर बाहर आया....

"जी बॉस...!" हॅरी को देखते ही शिवा तुरंत खड़ा हो गया.....

"उन्न दोनो का क्या किया?"

"बाँध के डाल दिया पिछे वाले कमरे में..... रात को ही टपकाना है ना?"

"अंदर जाकर पोलीस वाली की सी.डी. बना लो.... उसके बाद इसको दिखा भी देना...!" हॅरी ने उसको आदेश दिया.....

"पर बॉस..." शिवा पास आकर बोला.....," पोलीस वाली को धंधे में लाना ठीक नही है... लड़कियाँ तो और भी मिल जाएँगी...... ये 'साली' कभी भी फंस्वा सकती है.....!"

"भेजा नही है तो ज़्यादा टेन्षन मत लिया कर..... आज तक तुम लोग इसीलिए प्रेम की जगह नही ले पाए थे..... चल छ्चोड़... अंदर जाकर इसकी सी.डी. बना लो..... नरेश को चढ़ा देना पहले... इस साले को केमरा पकड़ना नही आता.... और हां ज़रा संभाल कर... कुँवारी थी अभी तक...." हॅरी ने मुस्कुरकर कहा तो नरेश की बाँच्चें खिल गयी....,"थॅंक यू बॉस!"

*******************************

"ये ज़ीप यहीं मिली तुम्हे....?" मानव हाइवे पर ज़ीप बरामद होने की सूचना मिलने के कारण सीधा वहीं पहुँच गया था......

"जी जनाब...! किसी को अभी हमने अंदर भी बैठने नही दिया है.....!" हवलदार ने आकर सल्यूट बजाया....

"हूंम्म.... इसका मतलब वो यहाँ से पैदल....!" मानव टहलता हुआ सड़क किनारे पहुँचा और सड़क से नीचे टाइरन की छाप देख कर अपना सिर खुज़ाया...,"गाड़ी में गया है स्साला... कोई और अब भी उसकी मदद के लिए है....!"

"जी जनाब!" हवलदार ने टाल ठोनकी....

"ज़ीप में चेक करो कुच्छ मिल जाए तो.... एक मिनिट... स्टियरिंग मत छ्छूना.... मुझे कुच्छ और भी मामला लग रहा है...." कहते हुए मानव गाड़ी के टायरों के निशान के पास बैठ गया.... और बारीकी से निरीक्षण करते ही उसकी आँखें चमक उठी....,"तुम शहर जाने वाली गाड़ियों को भी चेक कर रहे थे क्या?"

"जी जनाब... आपका फोन आने के बाद तो हमने 'मुरारी' की गाड़ी को भी नही छ्चोड़ा... आने जाने वाले सारे वेहिकल अच्छि तरह चेक किए थे.....

"गुड.... यहाँ से वो गाड़ी घूमाकर वापस ले गये हैं... अगर वो शहर में नही घुसे तो कहीं आसपास ही हैं.... छ्होटे रास्तों पर तो वैसे भी सबने खास तौर पर चेकिंग की होगी... वो 100 % साथ वाले सेक्टर में ही मिलेंगे....!" मानव उतावला सा होकर अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ा और हेडक्वॉर्टर फोन किया....,"सर, मुझे करीब 50 पोलीस वालों की ज़रूरत है....!"

"काम'ऑन मानव... शहर में कोई आतंकवादी नही घुसे हैं... क्या करोगे इतनी फोर्स का.....?" एस.पी. साहब ने बिगड़े हुए लहजे में सवाल किया..... वो भी पोलीस वालों की हत्या और एक महिला पोलीस कर्मी की किडनॅपिंग से सकते में थे.....!

"सर मुझे घर घर की तलाशी लेनी पड़ेगी... वो लोग शर्तियाँ शहर में ही हैं...!" मानव ने ज़ोर देकर कहा....

"पागल हो गये हो क्या? घर घर की तलाशी......!"

"सॉरी सर... ई मीन सेक्टर 37 में घर घर की तलाशी.... ज़्यादा घर नही हैं यहाँ.... कुल मिलकर 4-5 घंटे का ही काम होगा.... मुझे हर व्यक्ति सिविल ड्रेस में चाहिए.....!"

"कितनी किरकिरी कारवाओगे यार... मीडीया हँसेगा हम पर.... नो! आइ वल्न'ट अल्लोव यू" एस.पी. साहब ने तल्खी से कहा.....

"प्लीज़ सर... आइ नीड युवर को-ऑपरेशन.... मैं शाम तक उन्हे गिरफ्तार कर ही लूँगा....!"

"ओ.के... मुझे उपर बात करने दो.... आइ'ल्ल कॉल यू बॅक!" एस.पी. साहब ने कहा और फोन काट दिया.....

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"काम हो गया बॉस!" शिवा अपनी चैन बंद करते हुए बाहर निकला... उस'के हाथों में वीडियो केमरा भी था.... पर बॉस... वो तो स्यूयिसाइड करने की बात कर रही है... हमने बहुत समझाया कि उसको बहुत पैसे मिलेंगे पर.....!"

"तुमसे जितना कहा जाए उतना ही किया करो.... वीडियो दिखाई उसको....?"

"जी बॉस... तभी तो...." शिवा ने सिर झुका लिया.....

"जाओ अब तोड़ा आराम कर लो.... मुझे बात करने दो उस'से.....!" हॅरी मुस्कुराया और कमरे के अंदर चला गया....

"सॉरी जान... पर क्या करता... आख़िर जान का सवाल है....!" हॅरी उसके पास जाकर बैठ गया......

"हाथ मत लगाओ मुझे... वैसे भी मुझे मारना है... तुम अभी क्यूँ नही मार देते.....!" शिल्पा बिलख उठी.....

"मुझे मारने से गुस्सा शांत हो जाएगा क्या?" हॅरी ने बत्तीसी निकाली पर रोती हुई शिल्पा रोती ही रही.....

"क्यूँ मरना चाहती हो...? सेक्स तो हर इंसान की ज़रूरत है... मैने किया था तो तुम थोड़ा थोड़ा एंजाय कर रही थी... मैने महसूस किया.... इन्न लोगों ने भी किया.. इसीलिए नाराज़ हो क्या?" हॅरी ने कहते हुए एक बार फिर शिल्पा को छ्छूने की कोशिश की तो शिल्पा बिफर पड़ी...,"अभी कसर रह गयी है तो और बुला लो... फिर सी.डी. बेचकर मुनाफ़ा कमाना और मुझे ब्लॅकमेल करना....!"

"ओह नो...! ये सब किसने कहा? साले हरामी... मुश्किल में गधे को भी बाप बनाना पड़ता है.......!" हॅरी ने गुस्से में कहा और फिर शांत होकर बोला...,"अगर में कहूँ कि ऐसा नही होगा तो...? उल्टा मैं तुम्हे एक अनोखा तोहफा देने वाला हूँ... हे हे हे...!"

उसके बाद करीब 5 मिनिट तक कमरे में सिर्फ़ शिल्पा के रोने की आवाज़ें आती रही... धीरे धीरे जब वह शांत हुई तो उसी ने चुप्पी तोड़ी..," कम से कम इस घटिया काम की वीडियो तो ना बनाते.... 2 महीने बाद मेरी शादी है... और तुम......!"

"देखो.. तुम जब चुप हो जाओगी तभी मैं कुच्छ बोलूँगा... ठंडे दिमाग़ से फ़ैसला करना.... मैं तुम्हारी प्रमोशन करवाने की सोच रहा हूँ... हे हे हे....!" हॅरी अपना पासा फैंक कर चुप हो गया... उसे शिल्पा से कुच्छ जवाब मिलने की उम्मीद थी... पर उस वक़्त शिल्पा कुच्छ और सोचने की हालत में थी ही नही......

"मुझे मार कर तो तुम्हरा गुस्सा शांत हो जाएगा ना....? प्रमोशन तो मिलेगी ही... शायद वीरता पदक भी मिल जाए... सोच लो....!" हॅरी ने कहा और अपनी माउज़र एक बार फिर उसकी ओर सरका दी....

शिल्पा ने एक बार हॅरी को घूर कर देखा और फिर अपनी नज़रें झुका ली... अरमान तो शायद उसके यही थे... पर उसको यकीन था कि माउज़र में अब की बार तो शर्तिया गोलियाँ नही मिलेंगी.....

"फ़ैसला तुम्हारा है... एक तरफ सी.डी. बन'ने के कारण तुम स्यूयिसाइड करने की बात बोल रही हो... दूसरी तरफ मैं तुम्हे प्रमोशन का चान्स और तुम्हारी सी.डी. वापस लौटने का ऑफर दे रहा हूँ... सोच लो... क्या नुकसान है...?"

"तुम..." शिल्पा की आँखों की पुतलियान आसचर्यजनक ढंग से फैल गयी..,"तुम ऐसा क्यूँ करोगे....?"

"तुम सिर्फ़ आम खाओ....! आज रात यही माउज़र तुम्हारे हाथ में होगी....वो भी फुल्ली लोडेड.... हम पाँचों का एनकाउंटर कर दो... सिर्फ़ शिवा और नरेश को ये नही बोलना है कि तुम बाद में उन्हे भी मार दोगि... मैं उनको विश्वास दिला दूँगा कि तुम उनको नही मारोगी... उसके बाद तुम्हे सिर्फ़ पोलीस के पास फोन करना है कि तुमने बड़ी बहादुरी से हम सबको मार गिराया.... सो सिंपल... मुझे मारने के बाद सी.डी. मेरी जेब से निकाल कर जला देना.....!" हॅरी ने पैतरा फैंका.....

"पर... पर तुम खुद को क्यूँ मरवाओगे....?" शिल्पा अपने साथ हुए हादसे को भूल कर हॅरी की कहानी में खोई हुई थी......

"बस... यही समझ लो कि दुनिया से मन भर गया है.... जैल नही जाना चाहता... आज नही तो कल पकड़ा ही जाउन्गा....!"

"पर तुम खुद भी तो अपने आपको और बाकी लोगों को मार सकते हो... मुझसे क्यूँ बोल रहे हो...?" शिल्पा असमन्झस में थी.....

"तुम्हारे लिए... सिर्फ़ तुम्हारे लिए... कल रात उन्न दोनो को लाने के लिए मुझे तुम्हाए साथ लाना पड़ा... और फिर आज जो कुच्छ हुआ.. उसकी कीमत अदा करके जाना चाहता हूँ.... बोलो!"

"नही... तुम मज़ाक कर रहे हो... है ना?"

"अगर तुम्हे लगता है तो.... कहो तो तुम्हारे सामने बाकी लोगों को मार कर दिखाउ? पर इस'से तुम्हारी बहादुरी कम हो जाएगी... हे हे हे...!" हॅरी हंसता रहा.. उसको समझ आ चुका था कि शिल्पा तैयार हो गयी है.....

"नही... पर तुम पागल हो क्या?" शिल्पा ने आस्चर्य से पूचछा......

"हाआँ....! हा हा हा हा हा..." हॅरी ने ज़ोर का ठहाका लगाया....,"और मेरे पास मेडिकल सर्टिफिकेट भी है... इसका... कहो तो दिखाउ?"

"नही रहने दो..." शिल्पा ने कहा और फिर हिचकिचा कर बोली...,"तो...कब?"

"आज रात को.... मैं और बाकी दोनो लड़कियाँ बँधे हुए होंगे और ये दोनो लड़के तुम्हारी मदद करेंगे.... हमें मारने के बाद जब ये दोनो हम तीनो को खोले तो तुम इनको भी.... समझ गयी ना?"

शिल्पा ने एक गहरी साँस ली.... उसको हॅरी की बातों पर विश्वास नही हो रहा था.. होता भी कैसे...?

"तैयार हो तो बोलो वरना मुझे कुच्छ और....." हॅरी बात कह ही रहा था कि शिवा और नरेश हड़बड़ाहट में भागे हुए सीधे आकर कमरे में घुस गये...,"बॉस.. मारे गये... बाहर 2 आदमी खड़े हैं... कद काठी से पोलीस वाले लग रहे हैं..... लगता है हम फँस गये......!"

"ओह.. शिट... 2 ही हैं या...?" हॅरी ने उत्तेजित होकर पूचछा....

"गेट पर तो 2 ही हैं बॉस... क्या पता बाहर....!"

"सावधानी से उनको अंदर बुला लो... वापस मत...."

"बचाआओ..... बचाअ...." शिल्पा पोलीस आने की बात सुनकर खुद को काबू में नही रख पाई.....

"स्स्साआआअलि.... कुतिया... मैं तुझे प्रमोशन दिलाने जा रहा था और तू...." हॅरी ने अपना जबड़ा भींच कर शिल्पा का मुँह दबाया और गोली सीधी उसके बायें सीने में उतार दी....

"बॉस... गोली की आवाज़ तो... अया..." शिवा को गोली मारने की वजह जब तक नरेश समझ पाता..वह भी एक भयानक चीख के साथ अपना दम तोड़ चुका था.... हॅरी पिछे वाली खिड़की से सीधा नीचे कूदा और अंदर सीमा और डॉली की ओर भागा....

जब तक पोलीस वाले हरकत में आकर दीवार कूदकर अंदर पंहूचते... कोठी में तीन गोलियाँ और चल चुकी थी.....

"हेलो..हेलो.. सर! यहाँ 375 में गोलियाँ चली हैं अंदर.. हमें लगता है वो यहीं छुपे हुए हैं... आप..!" बाहर खड़े पोलीस वाले ने तुरंत एस.आइ. के पास फोन घुमा दिया था...

"तो फोन कहे कर रहे हो यार.. अंदर जाकर पाकड़ो उनको.. हम अभी वहाँ पहुँच रहे हैं...!" उधर से फटी हुई आवाज़ आई...

"पर सर.. डंडे से हम गन का मुकाबला कैसे... कम से कम हथियार देकर तो...!" पोलीस वाला कह ही रहा था जब आख़िरी गोली चली थी...

"ओ.के. ओ.के. होल्ड ऑन दा स्पॉट.. मैं इनस्पेक्टर साहिब को सूचित करके अभी बाकी लोगों को वहीं भेज रहा हूँ... देखना कहीं पिछे से ना भाग जायें...!" एस.आइ. ने कहा..

"नही सर.. भागने का तो....," सिपाही के बोलते बोलते फोन काट गया...," काट दिया साले ने... कह रहा है अंदर जाकर पकड़ लो.. जैसे... इनकी मा की चूत.. साले खुद तो रेवोल्वेर टांगे चालान काट'ते रहते हैं... हम को बोल रहे हैं कि डंडा दिखा कर किल्लर को पकड़ लो.. हिस्स्स...!" सिपाही बड़बड़ाया...

"अब तो कोई आवाज़ नही आ रही यार... लगता है सारी गोलियाँ ख़तम हो गयी इनकी... अंदर चलकर देखें क्या...?" दूसरे सिपाही ने गेट से अंदर झाँकते हुए कहा....

"तू पागल है क्या..? क्या पता हमारे लिए बचा कर रखी हों एक आध... तुझे जाना है तो जा.. मुझे बहादुरी दिखाने का शौक नही है फोकट में... बात करता है..."दूसरा अधेड़ उमर का पोलीस वाला बड़बड़ाया..,"तू यहीं खड़ा रह.. मैं पीछे जाकर देखता हूँ..."

**********************

इनस्पेक्टर मानव करीब 5 मिनिट में ही बताई गयी जगह पर पहुँच गया था... कुच्छ और पोलीस वाले भी तब घर में घुसे ही थे.....

"तुम उपर जाकर देखो...!" मानव ने एक साथी से कहा बंद कमरे के बाहर खड़े होकर ऊँची आवाज़ में कहा..,"तुम आज नही बच सकते! बहुत खून बहा लिया तुमने... चुपचाप बाहर आ जाओ...!"

प्रत्युत्तर में आवाज़ उपर से आई,"सिर्र्ररर... शिल्पा!"

"एक मिनिट यहीं रहना..." मानव ने कहा और उपर की और भगा... उपर कमरे में जाते ही वहाँ पड़ी तीन लाशों को देख मानव का कलेजा छल्नी हो गया,"ओह्ह माइ गॉड! बहुत कमीना है स्साला...!" मानव के मुँह से निकला और उसने हड़बड़ाहट में शिल्पा की नब्ज़ चेक की.. कुच्छ भी नही बचा था....

"ववो नीचे ही है...!" मानव गुस्से में दनदनाता हुआ वापस नीचे उतरा..,"तोड़ दो दरवाजा... इस साले को तो मैं....!"

मानव का आदेश मिलते ही एक हत्ते कत्ते पोलीस वाले ने खींच कर दरवाजे पर लात मारनी शुरू कर दी... तीन चार प्रयासों के बाद उनको दरवाजा तोड़ने में सफलता मिल गयी...,"ध्यान से...!" मानव ने निर्देश देकर अंदर पहला कदम रखते ही उसकी साँसे ठंडी पड़ गयी.. सीमा और डॉली की खून से लथपथ लाशें एक दूसरी से बँधी हुई पड़ी थी....

"अभी भी मौका है... हाथ उठाकर बाहर निकल आओ वरना....!" मानव ने कहा और धीरे धीरे दाईं तरफ वाले दरवाजे को खोला... पर वहाँ भी उसको निराशा ही हाथ लगी....

"सर यहाँ...एक और लाश...!" मानव वापस पलटा ही था कि सामने वाले दूसरे कमरे से आवाज़ आई... मानव फुर्ती दिखाते हुए कमरे तक पहुँचा और अंदर पड़ी लाश देखते ही उसके मुँह से निकला,"हररयययी?"

"साँस चल रही है सर...!सिर्फ़ बेहोश है..." पोलीस वाले ने उसकी नाड़ी छूते ही उच्छल कर कहा..,"इसके पेट में गोली लगी है...!"

"जल्दी इसको हॉस्पिटल पहुँचाओ... चार आदमी जाना साथ और हर पल इस पर नज़र रखना... बहुत शातिर है साला...! बाकी लोगों को भी चेक करो... हरी उप!" मानव उत्तेजित होकर चिल्लाया और कमरे में पिछे की और खुलने वाले दरवाजे से निकल कर सावधानी से बाहर आया.... गीली ज़मीन में पीछे वाली दीवार की तरफ जाते हुए जूतों की छाप और टपका हुआ खून सॉफ दिखाई दे रहा था.... सरसरी नज़र डालने पर ही उसको दीवार के पास एक जोड़ी जूते भी पड़े दिखाई दे गये... फौरी तौर पर ऐसा लग रहा था कि कोई जूते वहाँ निकाल कर दीवार के पार कूदा है...

"इसको किसने गोली मारी...!" मानव उधेड़बुन में वापस अंदर आया और पोलीस वालों से पूछा...,"इश्स मकान की तलाशी लेने कौन आया था...?"

"हम... ववो.. रज़बिर और मैं आए थे जनाब...!" एक पोलीस वाले ने बताया....

"जब तुम्हे शक हुआ तो क्या तुमने ये नही देखा कि घर के पिछे भागने की जगह है...!" मानव ने झल्लते हुए जवाब माँगा....

"पता था जनाब... मैं शक होते ही पिछे जाकर खड़ा हो गया था... वहाँ से कोई नही गया बाहर...!" पोलीस वाले ने झूठ बोलकर अपना बचाव किया.... पर मानव को उसके लहजे पर ही विस्वाश नही हुआ..,"कोई तो ज़रूर भागा है यहाँ से...!" मानव बोलते बोलते पिछे आ गया था..

"नही जनाब... भगा होगा तो पहले ही भागा होगा.... हमारे आने के बाद तो....!"

"बकवास बंद करो... जाकर मकान की तलाशी लो...!" मानव गहरी सोच में डूबा हुआ लग रहा था.....

"साहब.. उन्न लड़कियों की लाश के पास रेवोल्वेर पड़ी है...." एक पोलीस वाला भागते हुए मानव के पास आया....

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"बेटा... वो.. अंजलि को भेज देते तो हम घर चले जाते...!" फोन मानव के घर से आया था... आवाज़ मीनू के पापा की थी....

"ओह.. सॉरी पिताजी! मुझे तो ध्यान ही नही रहा था... आप थोड़ी देर और रुक सकते हैं क्या...?" मानव ने नरम लहज़ा करके बात की....

"वो तो ठीक है पर..." मीनू के पापा बोलते बोलते रुक गये..,"कितनी देर और?"

"मैं बस कुच्छ ही देर में फोन करता हूँ आपको...!" मानव ने बात करके फोन काटा और एक पोलीस वाले को अपने पास बुलाया...," तुम जाकर महिला थाने से अंजलि को लेकर हॉस्पिटल में आ जाओ... मैं वहीं पहुँच रहा हूँ...!"

"जी जनाब... मैं जा रहा हूँ...!" पोलीस वाले ने जवाब दिया....

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"सर... होश आ गया उसको... डॉक्टर ने कहा है आप बात कर सकते हैं...!" एक पोलीस वाले ने हॉस्पिटल के बाहर अंजलि के पास खड़े मानव को सूचना दी तो मानव के कदम तेज़ी से अंदर की ओर बढ़ चले.....

"जी तो चाहता है तुम्हारा यहीं एनकाउंटर कर दूं सस्सले...!" मानव ने अजीब सी नज़रों से उसको देख रहे हॅरी की ओर घूरकर शब्दों को चबाते हुए कहा...

"प्पर.. पर क्यूँ सर...?" हॅरी ने थोड़ा हिलने की कोशिश की और दर्द के मारे कराह कर अपना पेट पकड़ लिया...," मैने क्या किया है...? मैं तो आपका शुक्रगुज़ार हूँ कि आपने मुझे..... वो.. पिंकी ठीक है क्या?"

"बकवास बंद कर... बहुत हो गया नाटक.. स्साले... मेरी मजबूरी नही होती तो एक गोली वहीं तेरे भेजे के पार कर देता..." मानव ने आँखें निकाल कर सख़्त लहजे में कहा..,"तुझे गोली किसने मारी?"

"मुझे कुच्छ भी नही पता सर... मुझे तो 'वो' लोग एक दिन पहले ही उठाकर यहाँ लाए थे..."

"कहा ना बकवास...!" मानव बोलते बोलते अचानक बाकी बचे शब्दों को खा गया..,"अच्च्छा चल बोल... बता..पहले तू ही बोल ले...!"

"सर मुझे सच में नही पता मुझे गोली किसने मारी... मैं तो उनमें से किसी को जानता भी नही हूँ....!"

"अच्च्छा! बहुत खूब...!" मानव ने अपनी पैनी निगाह से उसके चेहरे पर उभरी शिकन का मतलब समझने की कोशिश की," क्यूँ मारी गोली...?"

"मुझे सच में कुच्छ नही पता सर... मैं...." हॅरी ने सिर झुका लिया..,"मैं और पिंकी.... पिंकी कुच्छ देर के लिए गुरुकुल से बाहर मेरे पास आई थी की उन्होने हमें उठा लिया... उसके बाद वो हमें कहीं ले गये और वहाँ से मुझे यहाँ लाकर क़ैद कर लिया था जहाँ से आप अभी... आपने मुझे बचा लिया वरना...."

"आए.. बोला ना बकवास मत कर.. जनाब तेरा यहीं रेमांड ले लेंगे अभी...... फालतू नाटक्बाज़ी करता है...!" साथ खड़े पोलीस वाले ने पॉइंट बनाने की कोशिश की....

"नही नही.. बोलने दे इसको... जी भर कर बोल ले बेटा.... चल बोलता रह!" मानव ने कहा....

"मुझे और कुच्छ भी नही पता सर... मैं और पिंकी एक दूसरे से... आप उसी से पूच्छ लो....!"

"पिंकी अब इस दुनिया में नही है...!" मानव ने पैतरा फैंका...

"किययाया...?" हॅरी के चेहरे पर अविश्वास के भाव उभर आए... ये कैसे हो सकता है सर... नही... ये नही हो सकता.....!"

"मतलब तू ये कहना चाहता है कि जिसने पिच्छले 24 घंटे में पोलीस की नाक में दम करते हुए दर्ज़न भर लोगों को मौत की नींद सुला दिया 'वो' तेरा कोई हमशकाल था... यही ना?"

"क्या कह रहे हैं आप...? मेरी कुच्छ समझ में नही आ रहा....पर पिंकी... वो कैसे..?" हॅरी ने आस्चर्य और शिकन अपने चेहरे पर लाते हुए पूचछा....

"कोई बात नही बेटा.... ठीक हो ले एक बार... सब समझ जाएगा..." मानव ने कहा और तभी उसको कुच्छ ध्यान आया... वह पोलीस वाले को इशारा करके बाहर निकल गया...

******

"तुम हॅरी को कितना जानती हो अंजू...?" मानव ने अंजलि के पास आकर पूचछा...

"ठीक ठाक जानती हूँ.. क्यूँ?" अंजलि ने पलट कर सवाल किया....

"दरअसल.. मुझे लग रहा है कि कुच्छ गड़बड़..."मानव ने थोड़ा रुक कर कुच्छ सोचा और बोला...,"तुम हॅरी से पहली बार कब मिली थी....?"

***************

"मुरारी जी ने आपके लिए ही मेरी ड्यूटी यहाँ लगवाई है....!" मानव के बाहर जाते ही मौका देख कर पोलीस वाला अपनी औकात पर आ गया...

"क्या कह रहे हो..? मेरी कुच्छ समझ में नही आ रहा.. कौन मुरारी जी?" हॅरी ने अपनी पीड़ा पर काबू पाते हुए अंजान सा चेहरा बनाकर पूचछा...

"आप...? तो क्या तुम सच में बॉस नही हो...?"

"एक मिनिट.. दरवाजा बंद करना ज़रा....!" हॅरी के चेहरे पर अजीब से भाव आ गये....

"नही... ऐसे ही धीरे धीरे बोल दो... ये इनस्पेक्टर बड़ा घटिया है... किसी की भी नही सुनता... मुझ पर भी शक कर लेगा...!" पोलीस वाला उसके पास स्टूल लेकर बैठ गया....

"इस नंबर. पर फोन करना... ये तुम्हे सब समझा देगा..." हॅरी ने जल्दी जल्दी में एक नंबर. लिख कर उसको पकड़ा दिया....," आज रात ही इसका एनकाउंटर करवा दे... नही तो ये साला इनस्पेक्टर राम और श्याम की कहानी पर कभी भरोसा नही करेगा...! बाकी सब मैं संभाल लूँगा....!"

"हो जाएगा... पर 'वो' पैसे कहाँ से मिलेंगे...!" पोलीस वाले ने बत्तीसी निकाल ली....

"काम करने से पहले मिल जाएँगे... तू फोन तो कर एक बार...!" हॅरी अब संतुष्ट नज़र आ रहा था....

"पर ये क्या ? आपने खुद को गोली क्यूँ मारी... आप भाग भी तो सकते थे.... !"

"मेरी मति मारी गयी थी क्या जो मैं खुद को गोली मारूँगा... चूतिया लोग साथ रखेंगे तो और क्या होगा...इसकी मा की.. साली सीमा ने मरते मरते ठोक दी.... बेड के ड्रॉयर में से निकाल ली होगी आकर... दीवार पर चढ़ने की कोशिश की थी.. पर..." मानव को अंदर आते देख हॅरी चल रही बात से एक दम पलट गया," मुझे भी वो आजकल में मार ही देते... मेरी किस्मत ही अच्छि थी जो आप लोग आ गये...

"तू जितना स्याना है जनाब उसके डबल हैं... तेरी कहानी यहाँ नही चलने वाली... समझा..!" पोलीस वाला भी गिरगिट की तरह रंग बदल गया था...," पोलीस वालों को मारा है तूने... तू तो गया....!"

"बस कर..." मानव के आते ही पोलीस वाला खड़ा हो गया था....,"बाहर जा थोड़ी देर!"

"जी जनाब!" पोलीस वाले ने अदब से सिर झुकाया और बाहर निकल गया.....

क्रमशः......................

गतान्क से आगे................

"Haan, bahar aa jao!" Harry kisi se fone par baat kar raha tha....

"Abhi aur kitni door jana hai...", Shilpa ne ek baar fir gardan uchka kar gadi chala rahe Harry par nigah dalne ki koshish ki....

"Fikar mat karo...!" Harry ne kahte kahte gadi sadak ke bayin aur karke breakes laga diye... Tabhi takreeban 25-30 saal ka ek yuvak Zeep ki pichhli seat kholkar usmein aa chadha...,"Hey... Chalo neeche utar kar uss gadi mein baitho...!" Uska dusra sathi bahar khada apne daanton mein se kuchh nikalne ki koshish kar raha tha....

Seema aur Dolly achambhit si unn dono ko dekhne lagi.... Wo dono unko achchhi tarah jaanti thi.... Par sath baithi Shilpa aur aage baithe 'Police wale' ki wajah se wo ek dusri ka chehra taak kar hi rah gayi....

"Ye sab kya hai... abhi aur kitna aage chalna hai... ye dono koun hain...?" Shilpa ne hadbada kar ek baar fir poochha.....

"Sab samajh aa jayega.. he he he...", iss baar jawaab gadi mein chadhe yuvak ne diya aur apni hatheli Shilpa ki jangh par rakh kar daba di.. aur fir gurrate huye revolver nikal kar kaha,"Chalo neeche...!"

"yye... ye kya kar rahe ho..." apne gaalon par revolver ki nok sati dekh kar Shilpa apni jaangh par rakhi hatheli ka virodh karna toh jaise bhool hi gayi.... Yuvakon ki shakal soorat aur tewaron se usko wo dono peshewar mujrim lag rahe the... Sookhe patte ki tarah kaanpna shuru kar chuki hath mein thami hathkadiyon ko jhat se chhodte huye turant neeche aa gayi....,"kkya hai ye sab...?"

Neeche khade yuvak ne Shilpa ke neeche aate hi uska hath pakad liya,"Chalo.. uss gadi mein...!"

"yye... ye toh kamaal ho gaya yaar.... tum kaise...?" Dolly khushi se uchhalte huye Seema ke sath lagbhag bhag kar sadak se neeche utaar kar khadi ki gayi gadi mein aakar baith gayi...,"aey... chal hamari bediyan khol... yyye... Ye toh wahi ladka hai na jo....!" Dolly ne Harry ko police wale ke bhesh mein zeep se utar kar gadi ki taraf aate dekha toh awaak rah gayi.... Seema ka bhi yahi haal tha.....

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"Dammit yaar... Agar wo Zeep mein tha toh gaya kahan.... Har chourahe par police hai... fir bhi...." Manav jhunjhla utha tha..... Wah ambedkar chowk par barrier lagaye khade police waalon se baat kar raha tha.....

"sir aapke V.T. karwane ke baad Hamne har gadi ko check kiya hai.... chahe wo laal batti wali gadi hi kyun na ho....!" Police waale ne sir jhuka kar adab se jawab diya... Hatasha aur nirasha sabke chehron se saaf jhalak rahi thi.....

"Kya uss'se pahle koyi police zeep shahar se bahar gayi hai?" Manav ne poochha.....

"aaj toh Police ki har gadi road par hai Sir.... par fir bhi hamne ehtiyaat ke tour par paas waale thano mein bhi elert kar diya tha.....

Manav ne jeb se mobile nikal kar samay dekha.. Subah ke 6:00 bajne wale the...,"Main Julana ja raha hoon..... Tum choukas rahna... Wo din nikalne par kisi dusri gadi se shahar ke bahar nikalne ki koshish kar sakte hain....." Manav ne kuchh aur jaroori hidayatein di aur wapas gadi mein baith gaya.....

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"Yye sab aakhir chahte kya hain...? tum bhi inn logon se mile huye ho lagta hai!" Jaise hi Harry akela Shilpa ke paas aaya, wo baras padi..... Usko bahar dono ladkiyon ke khilkhilane ki aawaajein aa rahi thi....

"ha ha ha ha.....badi jaldi samajh gayi tum...! Waise tumhe police mein bharti kisne kar liya....?" Harry atthas sa karta hua aapadhapi mein khadi Shilpa ke saamne bistar par pasar gaya,"saale police waalon ne aaj bahut bhagaya.... Mujhe itna kaam karne ki aadat nahi hai.....!"

"kkya matlab...?" Shilpa aascharya se Harry ka chehra ghoorte huye boli....

"Chhodo.... aao... thodi malish kar do.. mera badan dukh raha hai....!" Harry batteesi nikal kar bola aur apni kamar mein atakayi huyi se mouser nikal kar table par rakh di......

Khatra bhanp chuki Shilpa bhala yah mouka kaise ganwati... Usne furti dikhati huye Mouser lapak kar Harry ki aur taan di...,"Toh tum inn logon ke sath mile huye ho... Main tumhe chhodungi nahi....

"mujhe bhi police waalon jitna chutiya samajhti hai kya sssaali? Ismein goli tera baap daalega... main sab kuchh sabra se karta hoon... par unn logon ko sonp diya toh tujhe kachcha chaba jayenge.... Samajh gayi....? Ab isko table par rakh kar mere paas aa ja... warna main unko andar bula loonga.....!" Harry ne lete huye hi kaha aur fir apni aankhein band kar li.......

"mummmmyyyyy......." Shilpa ne chupchap mouser ko table par wapas rakha aur rone lagi....

"Tu toh sach mein chutiya hai...." Harry ne aankhein khol kar table se mouser uthayi aur uski magzine nikal li...," aaj toh main gaya tha kaam se.... sala bhool hi gaya tha ki tu police wali hai aur tujhe gun chalani aati hai.... ha ha ha ha... ye le... ab khel le iske sath... mera kaam toh tu karegi nahi... lagta hai mujhe unn dono ko gift mein dena padega tujhe.....!"

"Plz... plz... mujhe chhod do... !" Shilpa turant harry ke pairon mein girkar gidgidane lagi...,"Mujhe jane do yahan se... main kisi ko kuchh nahi boloongi.....!"

Harry bistar par sirhane ko ooncha karke adhleta sa ho gaya aur usne kasmasati huyi shilpa ko apni baahon mein kheench liya.....,"main ladkiyon ko nahi maarta... 'pyaar' karta hoon... yahi mera pesha hai....!"

aatank ke maare boukhalayi huyi Shilpa apne aapko Harry ke pahloo mein simat'te huye pakar virodh tak nahi kar saki.... Uske aansuon se namkeen huye ja rahe uske hont jaise hi Harry ne 'apne' kabje mein liye; wah sisak uthi... bhay ke maare.....!

**************************************

"Isko pahchaante ho kya? Harry ko!" Manav julana kasbe mein jakar dukaan daaron ko apne sath layi foto dikha dikha kar thak chuka tha... uski ummeed dheeli padne hi lagi thi ki ek jagah paan ki dukaan par baat ban gayi.....

"Haan saahab... Par aap kyun poochh rahe ho?... ye toh nihayat hi shareef ladka tha....!"

"shareef my foot, sssalaaa...!" Manav ke munh se nikla... fir achanak hi usne tyoriyan chadha kar poochha..,"tha matlab?"

"Matlab ab wo yahan nahi rahta sahab.... teen char saal ho gaye.... ghar waalon se unban ke chalte wo ghar chhod kar chala gaya tha.....!"

"hummm..... koun koun hai iske ghar mein... ab?" Manav ne utsuk hokar poochha...,"wo toh yahin rahte honge na...?"

"haan.... ye thoda sa aage chalkar pahli gali mein teesra... nahi nahi... ek minute... choutha makaan hai.... mummy papa aur chhota beta hi rahte hain yahan bus....!" Dukaandaar ne andaja lagakar bataya....

"Gharwalon se unban ki koyi khas wajah....?" Manav ne ek aur sawaal kiya....

"itna toh maloom nahi sahab.... par ladka bahut shareef tha.... raam kasssaam!"

"Hummm... thanx!" Manav ne kaha aur dono police waalon ko sath lekar aage badh gaya.......

"Ye aap kya kah rahe hain inspector sahab... Harry toh kabhi aisa soch bhi nahi sakta...!" Aalishan bangle mein police waalon ke saamne baithe Harry ke pita ji Manav ki baat sunte hi uchhal pade......

"Dekhiye mein yahan jhak maarne nahi aaya hoon.... agar aap mujhe uske pate thikane nahi batate toh majbooran mujhe aapko sath lekar jana padega..... faayda isi mein hai ki aap uske baare mein jitna jaante hain, yahin bata dein...." Manav vyakul ho utha tha....

"Main majak nahi kar raha inspector sahab... Uss jaisa ladka aapko shayad hi koyi aur milega.... Usne toh aaj tak cheenti bhi nahi mari... aap khoon karne ki baat kar rahe hain.....!" Pita ji ne dohraya.....

"dekhiye main uska rishta lekar yahan nahi aaya hoon jo aap uski taareefon ke pul baandhe ja rahe hain... uska thikana bata dijiye!" Manav ne apne tewar badal kar kaha...

"Sorry inspector... Mujhe pata hota toh main teen saal se yahan baitha uski raah nahi dekh raha hota... usko gale se lagakar wapas le aata...!" Pitaji ki aankhon mein aansoo umad pade....

"toh fir aapko mere sath chalna padega...!" Manav ki tamaam koshishon ke baad bhi Harry ke ghar waalon ne jab santoshjanak jawab nahi diya toh Manav kursi se khada ho gaya....

"Mujhe toh hamesha se pata tha wo aisa hai.... aap hi sir pe chadha ke rakhte the usko.... dekh liya nateeja... katwa li na apni naak... ghar tak police aa gayi... ab bhugto... laga lo usko wapas lakar kaleje se.... Arey 'wo' bus dikhne ka hi shareef tha... par meri toh aapne kabhi suni hi nahi.... pahle hi jaydaad se bedakhal kar dete toh aaj ye din na dekhna padta....." Kafi der se munh banaye unki baatein sun rahi aurat se raha na gaya.... Shayad wo Harry ki mataji thi.....

Manav ne tirchhi najron se dekhte huye Harry ki mataji ki baaton ka arth nikalne ki koshish ki.... par kuchh samajh mein nahi aaya... amooman aisi baatein pita ke munh se sun'ne ko mil jati hain.. par.....

"Namastey uncle!" Bahar se bhagte huye andar aaye bachche par bhi Manav ne paini nigah dali.... kareeb 8-9 saal ka wo bachcha aate hi apni mummy ki god mein baith gaya......

"kya ye aapki dusri shadi hai....?" Manav ne tarkpoorn dhang se sochne ke baad pitaji se sawaal kiya.....

"Chaliye.... mere sath upar chaliye.... sab batata hoon aapko...!" Harry ke pitaji ne kaha aur khade hokar seedhiyon ki taraf badhna shuru kar diya......

"haan haan... bata do sab kuchh... sara dosh mujh par hi madh dena... tumhara bada 'naam' ho jayega iss'se... Harry toh Heera hai heera.... hath kangan ko aarsi kya....! Sab kuchh tumhare saamne aa gaya na....! Bhugto ab...." Mata ji apne pati ka Inspector ko akele mein upar le jana bardasht na kar saki.... aur kuchh na kuchh badbadati hi rahi......

****************

"Harry hamara beta nahi hai inspector sahab!" Upar jate hi pitaji ne baat saaf karke Manav ko chounkne par majboor kar diya....

"'hamara beta nahi hai' matlab?... aapka beta nahi hai ya fir.....?"

"wo hum dono ka hi beta nahi hai... hamne usko god liya tha....!" Pitaji ne sapast kiya.....,"Darasal shadi ke kayi saal tak jab hum dono ko koyi bachcha nahi hua toh hum dono ne hatash hokar bachcha god lene ka faisla kiya tha.... Par Harry ke ghar mein aane ke 15 saal baad bhagwan ne meri biwi ki sun li.... Main tab bachcha nahi chahta tha... par.... Mujhe pata tha uske baad yahi hoga.... mayur ke paida hone ke baad se hi savitri ko 'Harry' khatkane laga tha.... Par mera vishvas kijiye inspector sahab... 'wo' toh sach mein Heera tha Heera.....!" Pitaji ne apni nam ho chuki aankhon ko chhupane ke liye apna munh fer liya......

"Ohhh... par wo ghar chhod kar kyun gaya? kya aapki biwi....?"

"haan..." Pitaji ki gardan haan mein hili aur jhuki huyi hi rah gayi...,"koyi kitna bardasht karega....!"

"Usko iss ghar se koyi lagaav tha bhi ya nahi...?"

"Tha inspector sahab.... wo toh Mayur ko bhi apni jaan se jyada chahta tha... darasal nafrat ka toh usko pata hi nahi tha ki kya hoti hai.... Ek din uski mummy ne uss par 'god liya hua' kahkar taane maarne shuru kar diye aur Mayur ka haq khane wala kahne lagi... Uske baad kewal 2 din aur hi 'wo' yahan ruka tha bus... kuchh nahi pata mujhe... kum se kum mujhe bata kar toh chala jata.....!" Ab tak pitaji ki aankhein barasne lagi thi....

"ohh.. i'm sorry... shayad 'isi' nafrat ne usko 'aisa' raasta ikhtiyaar karne par majboor kar diya..... main apna no. chhod kar ja raha hoon... agar aapko...."

"Wo aisa nahi kar sakta inspector... main ab bhi dawe ke sath kah sakta hoon... aapko jaroor koyi galatfahmi huyi hai... wah mar jayega par aisa kaam nahi karega....!"

"Dekhte hain.... filhaal toh usko dhoondhna hai.....!" Manav ne kahkar unke kandhe par hath rakha aur dono neeche utarne lage......

"Shiva...!" Harry kareeb ek ghante baad kamre mein Shilpa ko roti chhod kar bahar aaya....

"Ji boss...!" Harry ko dekhte hi Shiva turant khada ho gaya.....

"unn dono ka kya kiya?"

"Bandh ke daal diya pichhe wale kamre mein..... raat ko hi tapkana hai na?"

"Andar jakar police wali ki C.D. bana lo.... Uske baad isko dikha bhi dena...!" Harry ne usko aadesh diya.....

"par boss..." Shiva paas aakar bola.....," Police wali ko dhandhe mein lana theek nahi hai... ladkiyan toh aur bhi mil jaayengi...... ye 'sali' kabhi bhi fanswa sakti hai.....!"

"bheja nahi hai toh jyada tension mat liya kar..... aaj tak tum log isiliye Prem ki jagah nahi le paye the..... chal chhod... andar jakar iski C.D. bana lo..... Naresh ko chadha dena pahle... iss saale ko camra pakadna nahi aata.... aur haan jara sambhal kar... kunwari thi abhi tak...." Harry ne muskurakar kaha toh Naresh ki baanchhein khil gayi....,"thank you boss!"

*******************************

"Ye zeep yahin mili tumhe....?" Manav highway par zeep baramad hone ki soochna milne ke karan seedha wahin pahunch gaya tha......

"Ji janab...! kisi ko abhi hamne andar bhi baithne nahi diya hai.....!" Hawaldaar ne aakar salute bajaya....

"hummm.... Iska matlab wo yahan se paidal....!" Manav tahalta hua sadak kinare pahuncha aur sadak se neeche tyron ki chhap dekh kar apna sir khujaya...,"gadi mein gaya hai ssala... koyi aur ab bhi uski madad ke liye hai....!"

"ji janab!" hawaldaar ne taal thonki....

"Zeep mein check karo kuchh mil jaye toh.... ek minute... steering mat chhoona.... mujhe kuchh aur bhi maamla lag raha hai...." Kahte huye Manav gadi ke tayron ke nishan ke paas baith gaya.... aur bariki se nirikshan karte hi uski aankhein chamak uthi....,"tum shahar jane wali gaadiyon ko bhi check kar rahe the kya?"

"ji janab... aapka fone aane ke baad toh hamne 'Murari' ki gadi ko bhi nahi chhoda... aane jane wale sare vehicle achchhi tarah check kiye the.....

"Good.... yahan se wo gadi ghumakar wapas le gaye hain... agar wo shahar mein nahi ghuse toh kahin aaspaas hi hain.... chhote raaston par toh waise bhi sabne khas tour par checking ki hogi... Wo 100 % sath wale sector mein hi milenge....!" Manav utaawala sa hokar apni gadi ki taraf badha aur headquarter fone kiya....,"Sir, mujhe kareeb 50 police waalon ki jarurat hai....!"

"comm'on Manav... shahar mein koyi aatankwadi nahi ghuse hain... kya karoge itni force ka.....?" S.P. sahab ne bigde huye lahje mein sawaal kiya..... Wo bhi police waalon ki hatya aur ek mahila police karmi ki kidnapping se sakte mein the.....!

"sir mujhe ghar ghar ki talashi leni padegi... wo log shartiyan shahar mein hi hain...!" Manav ne jor dekar kaha....

"pagal ho gaye ho kya? ghar ghar ki talashi......!"

"sorry Sir... I mean sector 37 mein ghar ghar ki talashi.... jyada ghar nahi hain yahan.... kul milakar 4-5 ghante ka hi kaam hoga.... Mujhe har vyakti civil dress mein chahiye.....!"

"kitni kirkiri karwaoge yaar... media hansega hum par.... no! I wouln't allow you" s.P. sahab ne talkhi se kaha.....

"pls sir... I need your co-operation.... main sham tak unhe giraftaar kar hi loonga....!"

"O.K... mujhe upar baat karne do.... i'll call you back!" S.P. sahab ne kaha aur fone kaat diya.....

***************************

"Kaam ho gaya boss!" Shiva apni chain band karte huye bahar nikla... Uss'ke hathon mein video camra bhi tha.... par Boss... wo toh suicide karne ki baat kar rahi hai... hamne bahut samjhaya ki usko bahut paise milenge par.....!"

"Tumse jitna kaha jaye utna hi kiya karo.... Video dikhayi usko....?"

"Ji boss... tabhi toh...." Shiva ne sir jhuka liya.....

"Jao ab thoda aaram kar lo.... mujhe baat karne do uss'se.....!" Harry muskuraya aur kamre ke andar chala gaya....

"sorry jaan... par kya karta... aakhir jaan ka sawaal hai....!" Harry uske paas jakar baith gaya......

"Hath mat lagao mujhe... waise bhi mujhe marna hai... tum abhi kyun nahi maar dete.....!" Shilpa bilakh uthi.....

"Mujhe maarne se gussa shant ho jayega kya?" Harry ne batteesi nikali par roti huyi shilpa roti hi rahi.....

"Kyun marna chahti ho...? Sex toh har insaan ki jarurat hai... maine kiya tha toh tum thoda thoda enjoy kar rahi thi... maine mahsoos kiya.... Inn logon ne bhi kiya.. isiliye naraj ho kya?" Harry ne kahte huye ek baar fir Shilpa ko chhoone ki koshish ki toh Shilpa bifar padi...,"abhi kasar rah gayi hai toh aur bula lo... fir C.D. bechkar munafa kamana aur mujhe blackmail karna....!"

"Oh No...! ye sab kisne kaha? Saale harami... mushkil mein gadhe ko bhi baap banana padta hai.......!" Harry ne gusse mein kaha aur fir shant hokar bola...,"agar mein kahoon ki aisa nahi hoga toh...? Ulta main tumhe ek anokha tohfa dene wala hoon... he he he...!"

Uske baad kareeb 5 minute tak kamre mein sirf shilpa ke rone ki aawajein aati rahi... dheere dheere jab wah shant huyi toh usi ne chuppi todi..," Kam se kam iss ghatiya kaam ki video toh na banate.... 2 mahine baad meri shadi hai... aur tum......!"

"dekho.. tum jab chup ho jaogi tabhi main kuchh boloonga... thande dimag se faisla karna.... Main tumhari promotion karwane ki soch raha hoon... he he he....!" Harry apna paasa faink kar chup ho gaya... use Shilpa se kuchh jawaab milne ki ummeed thi... par uss waqt Shilpa kuchh aur sochne ki halat mein thi hi nahi......

"Mujhe maar kar toh tumhra gussa shant ho jayega na....? promotion toh milegi hi... shayad veerta padak bhi mil jaye... soch lo....!" Harry ne kaha aur apni mouser ek baar fir uski aur sarka di....

Shilpa ne ek baar harry ko ghoor kar dekha aur fir apni najarein jhuka li... Armaan toh shayad uske yahi the... par Usko yakeen tha ki mouser mein ab ki baar toh shartiya goliyan nahi milengi.....

"Faisla tumhara hai... ek taraf C.D. ban'ne ke karan tum suicide karne ki baat bol rahi ho... dusri taraf main tumhe promotion ka chance aur tumhari C.D. wapas loutane ka offer de raha hoon... Soch lo... kya nuksaan hai...?"

"tum..." Shilpa ki aankhon ki putaliyan aascharyajanak dhang se fail gayi..,"tum aisa kyun karoge....?"

"Tum sirf aam khao....! aaj raat yahi mouser tumhare hath mein hogi....wo bhi fully loaded.... hum paanchon ka encounter kar do... Sirf Shiva aur Naresh ko ye nahi bolna hai ki tum baad mein unhe bhi maar dogi... main unko vishvas dila doonga ki tum unko nahi maarogi... Uske baad tumhe sirf police ke paas fone karna hai ki tumne badi bahaduri se hum sabko maar giraya.... So simple... Mujhe maarne ke baad C.D. meri jeb se nikal kar jala dena.....!" Harry ne paitra fainka.....

"par... par tum khud ko kyun marwaoge....?" Shilpa apne sath huye haadse ko bhool kar Harry ki kahani mein khoyi huyi thi......

"Bus... yahi samajh lo ki duniya se man bhar gaya hai.... jail nahi jana chahta... aaj nahi toh kal pakda hi jaaunga....!"

"Par tum khud bhi toh apne aapko aur baki logon ko maar sakte ho... mujhse kyun bol rahe ho...?" Shilpa asamanjhas mein thi.....

"tumhare liye... sirf tumhare liye... kal raat unn dono ko lane ke liye mujhe tumhae sath lana pada... aur fir aaj jo kuchh hua.. uski keemat ada karke jana chahta hoon.... Bolo!"

"nahi... tum majak kar rahe ho... hai na?"

"agar tumhe lagta hai toh.... kaho toh tumhare saamne baki logon ko maar kar dikhaaun? par iss'se tumhari bahaduri kam ho jayegi... he he he...!" Harry hansta raha.. usko samajh aa chuka tha ki Shilpa taiyaar ho gayi hai.....

"Nahi... par tum pagal ho kya?" Shilpa ne aascharya se poochha......

"haaan....! ha ha ha ha ha..." Harry ne jor ka thahaka lagaya....,"aur mere paas medical certificate bhi hai... iska... kaho toh dikhaaun?"

"nahi rahne do..." Shilpa ne kaha aur fir hichkicha kar boli...,"toh...kab?"

"aaj raat ko.... main aur baki dono ladkiyan bandhe huye honge aur ye dono ladke tumhari madad karenge.... hamein maarne ke baad jab ye dono hum teeno ko khole toh tum inko bhi.... samajh gayi na?"

Shilpa ne ek gahri saans li.... usko Harry ki baaton par vishvas nahi ho raha tha.. hota bhi kaise...?

"taiyaar ho toh bolo warna mujhe kuchh aur....." Harry baat kah hi raha tha ki Shiva aur Naresh hadbadahat mein bhage huye seedhe aakar kamre mein ghus gaye...,"Boss.. maare gaye... bahar 2 aadmi khade hain... kad kathi se police waale lag rahe hain..... lagta hai hum fans gaye......!"

"Oh.. shit... 2 hi hain ya...?" Harry ne uttejit hokar poochha....

"gate par toh 2 hi hain boss... kya pata bahar....!"

"sawdhani se unko andar bula lo... wapas mat...."

"bachaaaao..... bachaaa...." Shilpa police aane ki baat sunkar khud ko kabu mein nahi rakh payi.....

"sssaaaaaaali.... kutiya... main tujhe promotion dilane ja raha tha aur tu...." Harry ne apna jabada bheench kar Shilpa ka munh dabaya aur goli seedhi uske bayein seene mein utaar di....

"Boss... goli ki aawaj toh... aaah..." Shiva ko goli maarne ki wajah jab tak Naresh samajh pata..wah bhi ek bhayanak cheekh ke sath apna dum tod chuka tha.... Harry pichhe wali khidki se seedha neeche kooda aur andar Seema aur Dolly ki aur bhaga....

Jab tak police wale harkat mein aakar deewar koodkar andar panhuchte... kothi mein teen goliyan aur chal chuki thi.....

"Hello..Hello.. Sir! yahan 375 mein goliyan chali hain andar.. Hamein lagta hai wo yahin chhupe huye hain... aap..!" Bahar khade police wale ne turant S.I. ke paas fone ghuma diya tha...

"toh fone kahe kar rahe ho yaar.. andar jakar pakdo unko.. Hum abhi wahan pahunch rahe hain...!" Udhar se fati huyi aawaj aayi...

"par Sir.. Dande se hum gun ka mukabala kaise... kam se kum hathiyaar dekar toh...!" Police wala kah hi raha tha jab aakhiri goli chali thi...

"O.K. O.K. hold on the spot.. main inspector sahib ko soochit karke abhi baki logon ko wahin bhej raha hoon... dekhna kahin pichhe se na bhag jaayein...!" S.I. ne kaha..

"nahi Sir.. bhaagne ka toh....," Sipahi ke bolte bolte fone kat gaya...," kaat diya saale ne... kah raha hai andar jakar pakad lo.. Jaise... inki maa ki choot.. saale khud toh revolver taange chaalan kaat'te rahte hain... hum ko bol rahe hain ki danda dikha kar killer ko pakad lo.. hisss...!" Sipahi badbadaya...

"Ab toh koyi aawaj nahi aa rahi yaar... lagta hai sari goliyan khatam ho gayi inki... andar chalkar dekhein kya...?" Dusre sipahi ne gate se andar jhaankte huye kaha....

"tu pagal hai kya..? kya pata hamare liye bacha kar rakhi hon ek aadh... tujhe jana hai toh ja.. mujhe bahaduri dikhane ka shouk nahi hai fokat mein... baat karta hai..."dusra adhed umar ka police wala badbadaya..,"Tu yahin khada rah.. main peechhe jakar dekhta hoon..."

**********************

Inspector Manav kareeb 5 minute mein hi batayi gayi jagah par pahunch gaya tha... kuchh aur police wale bhi tab ghar mein ghuse hi the.....

"tum upar jakar dekho...!" Manav ne ek sathi se kaha band kamre ke bahar khade hokar oonchi aawaj mein kaha..,"Tum aaj nahi bach sakte! bahut khoon baha liya tumne... chupchap bahar aa jao...!"

Pratyuttar mein aawaj upar se aayi,"Sirrrrr... Shilpa!"

"Ek minute yahin rahna..." Manav ne kaha aur upar ki aur bhaga... Upar kamre mein jate hi wahan padi teen laashon ko dekh Manav ka kaleja chhalni ho gaya,"Ohh my God! bahut kamina hai ssala...!" Manav ke munh se nikla aur usne hadbadahat mein Shilpa ki nabj check ki.. kuchh bhi nahi bacha tha....

"wwo neeche hi hai...!" Manav gusse mein dandanata hua wapas neeche utra..,"Tod do darwaja... iss saale ko toh main....!"

Manav ka aadesh milte hi ek hatte katte police waale ne kheench kar darwaje par laat maarni shuru kar di... teen char prayaason ke baad unko darwaja todne mein safalta mil gayi...,"dhyan se...!" Manav ne nirdesh dekar andar pahla kadam rakhte hi uski saanse thandi pad gayi.. Seema aur Dolly ki khoon se lathpath laashein ek dusri se bandhi huyi padi thi....

"Abhi bhi mouka hai... hath uthakar bahar nikal aao warna....!" Manav ne kaha aur dheere dheere dayin taraf waale darwaje ko khola... par wahan bhi usko nirasha hi hath lagi....

"sir yahan...ek aur lash...!" Manav wapas palta hi tha ki saamne wale dusre kamre se aawaj aayi... Manav furti dikhate huye kamre tak pahuncha aur andar padi lash dekhte hi uske munh se nikla,"Harryyyy?"

"saans chal rahi hai Sir...!Sirf behosh hai..." Police wale ne uski naadi chhote hi uchhal kar kaha..,"iske pate mein goli lagi hai...!"

"Jaldi isko hospital pahunchao... char aadmi jana sath aur har pal iss par najar rakhna... bahut shatir hai sala...! baki logon ko bhi check karo... Hurry up!" Manav uttejit hokar chillaya aur kamre mein pichhe ki aur khulne wale darwaje se nikal kar saawdhani se bahar aaya.... geeli jameen mein pichhhe wali deewar ki taraf jate huye jooton ke nishaan the


raj..
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Re: बाली उमर की प्यास

Unread post by raj.. » 11 Dec 2014 16:16

बाली उमर की प्यास पार्ट--53

गतान्क से आगे................

"तो तुम कहना चाहते हो कि तुम बेक़ुसूर हो और तुम्हारी शकल का कोई और बंदा पिच्छले 36 घंटे से हमारी नाक में दम कर रहा है...!" मानव ने हॅरी बने उस युवक के साथ जी भर कर माथा पच्ची करने के बाद कहा....

"ज्जई... अगर आप कह रहे हैं कि आपने खुद उसको देखा है तो हो सकता है... पर मुझे इस बारे में सच में कुच्छ नही पता....!" हॅरी लेते लेते जवाब दे रहा था....

"मैं ये सब नही मान सकता... हूबहू शकल... वही आवाज़... ये सब कहानियों में होता है... मुझे उल्लू बनाने की कोशिश ना करो; यही अब तुम्हारे लिए... वैसे तुम रहने वाले कहाँ के हो?" मानव को अचानक कुच्छ ध्यान आया...

"ज्जई... मैं बता दूँगा... पर आप प्लीज़ मेरे घर पर सूचित ना करें... मैने अपना घर छ्चोड़ दिया है...!"

"पूच्छ सकता हूँ क्यूँ...?" मानव ने तिर्छि नज़रों से उसको घूरते हुए पूचछा....

"जी... वो मैं आपको नही बता सकता... " हॅरी ने एक गहरी साँस छ्चोड़ी...,"मैं जुलना से हूँ...!"

"कौन कौन हैं तुम्हारे घर में...?" मानव ने अगला सवाल किया....

"जी.. मम्मी पापा हैं... और एक छ्होटा भाई... मयूर...!"

"मतलब तुम हॅरी ही हो! पर ववो.. कौन है जो ये सब करवा रहा है...? तुम्हारा कोई जुड़वा भाई है क्या?" मानव ने अगला सवाल किया....

"ज्जई.. नही... पर कुच्छ यकीन से कह भी नही सकता...!" हॅरी ने कहा और नज़रें चुरा ली....

"क्या... क्या मतलब?" मानव उसके मुँह से ही सुन'ना चाहता था.....

"जी.. दरअसल मैं उनका गोद लिया हुआ बेटा हूँ... ववो मुझे अनाथालय से लेकर आए थे.... इसीलिए..."

"साला ये चक्कर क्या है..." मानव झुझलाते हुए स्टूल से उठ कर खड़ा हो गया...," अगर तुम बेक़ुसूर हो और हॅरी ही हो तो वो कौन है जिसको कल अंजलि ने देखा था... जो परसों मेरे साथ था... और वो भी बिल्कुल तुम्हारी तरह... कुच्छ फ़र्क तो जुड़वाँ बच्चों में भी होता है...!"

मानव की जब कुच्छ और समझ में नही आया तो उसने घर फोन करके पिंकी को हॉस्पिटल में बुला लिया... और फिर बाहर निकल कर अंजलि को आवाज़ दी..,"इधर आना अंजू...!"

"ज्जई... सर.." अंजलि सहमी हुई सी कमरे में आकर खड़ी हो गयी... हॅरी की ओर उसने देखा तक नही...

"ध्यान से इसको देखो... क्या ये हॅरी ही है?" मानव ने अंजलि से कहा...

अंजलि ने मानव के कहने पर एक सरसरी नज़र हॅरी पर डाली और फिर मानव की ओर देखते हुए अपनी गर्दन 'हां' में हिलाकर झुका ली....

"ऐसे नही.. एक दम ध्यान से देखो... मुझे लगता है कि एक ही शकल के दो आदमी हैं कहानी में.... तुम गौर करके बताओ कि क्या ये वही लड़का है जिसको तुमने गाँव में देखा है...?"

अंजलि ने इस बार देखते हुए हॅरी से नज़रें चार की तो वह मुस्कुरा दिया....,"हां... यही है... कल भी मैने इसी को देखा था थाने में....!" अंजलि ने कन्फर्म किया.....

"हॅरी... पहली बार तुमने इसको कब देखा था....?" मानव ने हॅरी से सवाल किया....

"ज्जई... ये दोनो मेरे ऑफीस में आई थी... तभी मैने इसको और पिंकी को पहली बार देखा था...!" हॅरी बना युवक यहाँ मात खा गया... अंजलि ने कुच्छ याद किया और हॅरी से सीधा सीधा सवाल किया...,"क्या पिंकी को भी तुमने वहीं देखा था पहली बार....?"

हॅरी अंजलि की बात का मतलब समझ गया..,"नही... ऐसे तो मैने कयि बार तुम्हे भी देखा था आते जाते... पर..."

"नही... मैं ये नही कह रही... पिंकी से पहली बार तुम कब मिले थे और क्या बात हुई थी...!" अंजलि तालाब वाली बात याद करके बोली....

"हां... बात तो शायद पहले भी हुई हैं... पर कुच्छ याद नही आ रहा...!" हॅरी हड़बड़ा गया था....

"झूठ!" अंजलि उच्छलते हुए सी बोली...,"वो बात तो तुम भूल ही नही सकते... ये ज़रूर हॅरी नही है...!" अंजलि मानव की और देख कर बोली.....

"ये तुम क्या कह रही हो... मुझे सब कुच्छ याद है... तुम और पिंकी पहली बार मेरे पास ई-पिल लेने आई थी... पिंकी ने माँगी थी और मैं नाराज़ हुआ था... उसके बाद तुम मुझे शहर में मिली... वो सब भी मुझे याद है... बाद में तुम्हारे साथ ही पिंकी पैसे लौटने आई थी.....!" हॅरी हद से ज़्यादा बोलकर सफाई देने लगा....

"तो फिर इसका मतलब यही हुआ कि दूसरा कोई आदमी है ही नही... तुम ही हॅरी हो और तुम ही बॉस हो!" मानव ने निष्कर्ष निकालने की कोशिश की.....

"नही... पहले इस'से पूच्छो की पहली बार ये पिंकी से कहाँ मिला था.... उस बात को तो कोई भूल ही नही सकता.... ये हॅरी नही है अगर इसको नही पता तो....!"

"ऐसी क्या बात है...?" मानव अंजलि के चेहरे पर गौर करता हुआ बोला और फिर अपने आप ही उसको चुप रहने का इशारा किया....,"रहने दो... यही बताएगा.. या फिर....!"

मानव बोल ही रहा था कि बाहर से एक पोलीस वाला पिंकी को साथ लिए कमरे में दाखिल हो गया... पिंकी सहमी हुई भी थी और शरमाई, सकूचाई हुई भी....

"पिंकी... एक बार इसको ध्यान से देख कर बताओ कि क्या यही लड़का हर बार तुमसे मिला है...?" मानव ने पूचछा....

पिंकी ने बिना देखे ही हामी भर दी... हॅरी को कनखियों से उसने देख तो पहले ही लिया था....

"पिंकी! क्या तुम्हे याद है तुम दोनो पहली बार कब मिले थे...?" अंजलि से बिना पूच्छे रहा ना गया....

"हां!" पिंकी ने कहकर सिर झुका लिया..,"तालाब पर!"

"एक मिनिट... अभी तुम कुच्छ मत बोलो...!" मानव ने निर्देश दिया...,"अब कुच्छ याद आया हॅरी जी!"

"ज्जई.." हॅरी हड़बड़ा गया था..,"पर... पर ढंग से याद नही है....!"

"कोई बात नही.. जितना याद है.. वही बता दो!" मानव को कुच्छ ना कुच्छ निष्कर्ष निकालने की उम्मीद बँधने लगी थी....

"बस.. थोड़ा थोड़ा ही याद है.... शायद... नही... कुच्छ याद सा नही आ रहा...!" हॅरी बोलता भी तो क्या बोलता.....

"हो ही नही सकता 'वो' बात याद ना हो..." अंजलि से रहा नही जा रहा था....,"चलो यही बता दो कि जब तुम इसके पास गये तो पिंकी क्या कर रही थी..."

"कहा ना यार कुच्छ याद नही है...!" हॅरी झल्ला उठा....

"मैं बताती हूँ... पिंकी अपनी भैंसॉं को लेने तलब के उस पार गयी थी....!" अंजलि बोल ही रही थी कि हॅरी ने उसको टोक दिया...,"हां हां.. याद आ गया... मैं उधर नहर की तरफ से घूमफिर कर आ रहा था.... तभी ये मुझे मिली थी....!"

"अच्च्छा... अब तो याद आ गया ना... चलो अब बताओ फिर क्या हुआ था... बाकी बात तो तुम भूल ही नही सकते.....!" मानव चुपचाप अंजलि और हॅरी की बातें सुन रहा था... उसको विश्वास था कि अंजलि ठीक चल रही है... इसलिए उसने उसको रोकने की कोई कोशिश नही की.....

"फिर... बस एक आध बात हुई थी और....!"

"ये... हॅरी नही है सर...!" अंजलि ने अपना फ़ैसला सुना दिया...,"उस बात को ये कैसे भूल सकता है जब पिंकी मुसीबत में थी और हॅरी ने इसको बचाया था... दरअसल...!" बोल रही अंजलि को मानव ने बीच में ही टोक दिया...,"एक मिनिट... ये हुई ना बात! अब कुच्छ याद आया हॅरी जी?"

हॅरी के पास अब भी बोलने को कुच्छ नही था... उसको पता था कि इस सवाल का जवाब उसके पास नही है... निढाल सा होकर लेट'ते हुए उसने अपना जबड़ा कस लिया और आँखें बंद कर ली...,"मेरा नाम प्रशांत है!"

पर... लेकिन ये क्या कह...!" पिंकी आसचर्यचकित होकर कुच्छ बोलने को विवश हो ही गयी थी कि मानव ने अपनी आँखों का इशारा करके उसको चुप कर दिया...,"हां.. क्या बोल रहे थे भाई साहब!"

"मेरा नाम हॅरी नही है... मैं तो...!"

"तो फिर हॅरी कहाँ है...?" अब मानव को हॅरी की तलाश थी....

"शिट!" प्रशांत ने हताशा में अपना माथा पीट लिया... उसको मालूम था कि अब उसको सब सच बोलना ही पड़ेगा...," तरुण मेरा बहुत अच्च्छा दोस्त था... एक तरह से इस धंधे में आप उसको मेरा पार्ट्नर कह सकते हैं...."

"मैने पूचछा हॅरी कहाँ है....?" मानव ने गुस्साए हुए लहजे में फिर पूचछा....

"है... जिंदा है... उसकी शकल मुझसे बहुत मिलती थी... उसकी सारी कहानी जान'ने के बाद मुझे उस'से हमदर्दी सी हो गयी थी.... इसीलिए उसको उस वक़्त जान से नही मार पाया.... 'वो' भी मेरी तरह अनाथालय में ही होता अगर उसको किसी ने गोद ना लिया होता... अपनी अपनी किस्मत है!" प्रशांत ने मुँह पिचकाया....

"तो इसका मतलब तुम दोनो भाई हो?" मानव उसके पास आकर बैठ गया.....

"पता नही... शायद भाई ही होंगे.... तभी तो....!"

"तुम पहले हॅरी बताओ कहाँ है..? बाकी बातें बाद में होती रहेंगी....!" मानव उतावला सा होकर बोला.....

"लाइए मैं फोन कर देता हूँ... वो 'लोग' उसको छ्चोड़ देंगे!"

"नही.. तुम अड्रेस बताओ!"

"अगर पोलीस वाले उसको लेने गये तो उसकी लाश ही मिलेगी... मैने उनको समझा रखा था कि उन्हे क्या करना है... फिर भी अगर आप..." प्रशांत को बोलते बोलते मानव ने बीच में ही टोक दिया,"नही... ये लो... फोन करके कह दो...!"

"थॅंक्स!", कहकर प्रशांत ने फोन मिलाया....

"हेलो!"

"हां... कौन है?"

"मैं बोल रहा हूँ...!" प्रशांत ने इतना ही कहा और उधर वाले बंदे को आवाज़ पहचान में आ गयी....,"जी बॉस... पर बॉस...?"

"हॅरी को छ्चोड़ दो.... रात वाला प्रोग्राम कॅन्सल करवा दो....!"

"पर क्यूँ बॉस? ववो.. पैसे तो हमने भिजवा दिए... आपने ही तो बोला था कि...."

"पैसे को मारो गोली यार... उसको छ्चोड़ दो और तुम सब भाग जाओ... सब ख़तम हो चुका है....!"

"पर बॉस....." सामने वाला अब भी दुविधा में था...,"आप कैसे बचेंगे फिर?"

"मैं अब बचना नही चाहता.... छ्चोड़ दो उसको..!" प्रशांत ने कहकर फोन काट दिया.....

"वेरी इंट्रेस्टिंग!" मानव ने उसके हाथ से फोन ले लिया...,"तो तुम हॅरी को मरवा कर उसको 'बॉस!' साबित करना चाहते थे.... हां... अब बताओ पूरी कहानी....!"

प्रशांत ने तकिये से सिर लगाया और कुच्छ दिन पुरानी यादों में चला गया....

तरुण और मैं एक दूसरे को बहुत दीनो से जानते थे.... मनीषा हमारी पहली शिकार थी और उसको मेरे पास तरुण ही लेकर आया था... सब कुच्छ ठीक चल भी रहा था... एक दिन मुझे तरुण ने बताया कि उसके गाँव में एकदम मेरी ही शकल का लड़का रहने के लिए आया है.... यू.पी. में दो चार केस मुझ पर चल रहे थे... पर मैं कभी पकड़ा नही गया था... उन्न मामलों को ख़तम करने के लिए मैने हॅरी को प्रशांत बनाकर मरा हुआ दिखाने का प्लान बनाया और गाँव में आने के कुच्छ दिन बाद ही उसको उठवा लिया था.... पर उसकी बातें सुनकर जाने क्यूँ उस'से हमदर्दी सी हो गयी थी.... खास तौर पर ये जान'ने के बाद कि 'वो' भी शुरुआत के कुच्छ दिन अनाथालय में ही रहा है...

मुझे भी यही लग रहा था कि वो मेरा भाई हो सकता है... पर मैने उसको छ्चोड़ा नही... ऐसी ही किसी एमर्जेन्सी के लिए जिंदा रख लिया था था.... इसके अलावा मुझे गाँव में एक सुरक्षित जगह भी मिल गयी थी.... मैं गाँव में ही रहने लगा....

"पर मैं तुम्हारा फोन कभी ट्रेस नही कर पाया... तुम गाँव में रहते थे... पर तुम्हारी लोकेशन कभी उसके आसपास भी नही लगी...!" मानव ने उसको टोक कर बीच में सवाल किया....

"हां... एक तो मैं अपने नंबर.स फ्रीक्वेंट्ली बदलता था... दूसरे मैं हमेशा अपने सेल पर फॉर्वर्डेड कॉल्स ही रिसीव करता था... शायद इसीलिए...!"

"आगे बोलो....!"

तरुण मीनू को इस बिज़्नेस में लाने की सोच रहा था... उसी दौरान उसने मुझे बताया कि पिंकी ने उसके साथ क्या किया... वो अपने तरीके से बदला लेना चाहता था पर मैने उसको संयम रखने की सलाह दी..... स्कूल की इनकी मूवी देखने के बाद मुझे भी लगने लगा था कि इनको जिस तरह चाहें हम उस तरीके से नचा सकते हैं... और फिर हमारी लिस्ट में ये दो लड़कियाँ और शामिल हो गयी... पर उसी रात तरुण का खून हो गया.... इसके लिए मैं मीनू को ही ज़िम्मेदार मान रहा था क्यूंकी उसी दिन उसने मुझे बताया था कि 'वो' मीनू' से मिलने जा रहा है....

और जब मनीषा ने मुझे बताया कि उसने सोनू को तरुण पर चाकू से हमला करते देखा है तो मैने गुस्से में उसको अपने पास बुलाकर मार डाला... उसके पास तरुण का फोन देख कर मुझे पूरा विश्वास हो गया था कि उसी ने तरुण को मारा है......

बाद में पिंकी मेरे पास आई और मेरे दिमाग़ में एक दूसरा प्लान कौंध गया.... पिंकी ने मुझसे इस लहजे में बात की जैसे ववो मुझे पहले से पसंद करती है.. मैने हॅरी से इस बाबत जानकारी लेनी चाही पर उसने इस बात से ही नकार कर दिया कि ऐसा कुच्छ है.... हां इतना ज़रूर कहा था कि 'ये' उसको अच्छि लगती है और 'वो' इसको कयि बार गुलबो कहकर चिड़ा भी देता है.... मैने अपने तरीके से तरुण की ली हुई कसम का बदला लेने का फ़ैसला कर लिया...... यही मेरा बिज़्नेस भी था..... मैने पिंकी को प्यार के जाल में फँसाया... बाकी तो आप सब को पता ही है.... " प्रशांत ने बात ख़तम करके नज़रें झुका ली....

"मुझे उम्मीद नही थी तुम इतनी जल्दी हार मान कर टूट जाओगे....!" मानव उसको घूरता हुआ बोला....

"मुझे नही पता कि हार क्या होती है और जीत क्या! मैने जिंदगी को हमेशा शतरंज के खेल की तरह जिया है.... मैं सामने वाले की चाल समझे बगैर वार नही करता... पर मेरे मंन में तब से ही एक उधेड़बुन चल रही थी जब से मैने खुद को बचाने के लिए हॅरी का एनकाउंटर करवाने का प्लान बनाया था.... ये सच है कि मैं खुद को अब भी बचा लेना चाहता था... पर पता नही क्यूँ.. मैं इसकी.." हॅरी ने पिंकी की तरफ एक पल के लिए देखा..," इसकी आँखों का सामना नही कर सका..... पता नही क्यूँ... मैं इसको धोखा दे रहा था पर मुझे ये भी लग रहा था कि मैं खुद को ही छल रहा हूँ... पता नही क्यूँ...."

"फिर ये भी नही चाहता था कि मेरे कर्मों की सज़ा मेरा... वो भाई भुगते... बस पता नही क्यूँ.... खैर...!" प्रशांत ने एक लंबी साँस ली और चुप हो गया....

"तो.. तुम शुरू से ही हॅरी नही थे....!" पिंकी आँखें फाड़ कर बोली....

"तालाब वाली बात का मुझे नही पता.. पर तब से जब तुम मेरे पास 'वो' गोलियाँ माँगने आई थी.... मैं ही था.....!"

"जाओ.. तुम थोड़ी देर बाहर बैठो...!" मानव ने अंजू और पिंकी की ओर इशारा किया....

"चलो...!" पिंकी अंजू का हाथ पकड़ कर बाहर ले आई....

"हॅरी मुझसे प्यार करता होगा क्या?" पिंकी अजीब कसंकस में थी.....

"पता नही... वो आए तो उसका गला पकड़ कर पूच्छ लेना.... पर एक बात तुम बिल्कुल सही कह रही थी....!" अंजलि ने कहा....

"क्या?" पिंकी ने अंजलि की आँखों में झाँकते हुए पूचछा.....

"हॅरी ने सच में किसी को भी तालाब वाली बात नही बताई.... अगर वो इसको बता देता तो आज ये बच जाता...!" अंजलि ने कहा....

"हां.. और वो..." पिंकी बीच में ही रुक गयी..,"बता ना! वो मुझसे प्यार कर लेगा ना?"

"मुझे नही पता... मैं तो बस इतना जानती हूँ कि इस चक्कर में झमेले बहुत हैं... मैने तो आज से तौबा कर ली!" अंजलि ने कहा और अपने कान पकड़ लिए

तो दोस्तो बाली उमर की प्यास अब एक बीती बात बन गई थी इसके बाद अंजलि ने फिर कभी सेक्स की बातो पर ध्यान नही दिया और वह अपनी पढ़ाई सीरियस होकर करने लगी फिर मिलेंगे एक नई कहानी बाबुल प्यारे के साथ तब तक के लिए विदा आपका दोस्त राज शर्मा

दा एंड

गतान्क से आगे................

"Toh tum kahna chahte ho ki tum bekusoor ho aur tumhari shakal ka koyi aur banda pichhle 36 ghante se hamari naak mein dam kar raha hai...!" Manav ne Harry bane uss yuvak ke sath ji bhar kar matha pachchi karne ke baad kaha....

"jji... agar aap kah rahe hain ki aapne khud usko dekha hai toh ho sakta hai... par mujhe iss baare mein sach mein kuchh nahi pata....!" Harry lete lete jawab de raha tha....

"Main ye sab nahi maan sakta... Hubahu shakal... wahi aawaj... ye sab kahaniyon mein hota hai... mujhe ulloo banane ki koshish na karo; yahi ab tumhare liye... waise tum rahne wale kahan ke ho?" Manav ko achanak kuchh dhyaan aaya...

"Jji... main bata doonga... par aap pls mere ghar par suchit na karein... maine apna ghar chhod diya hai...!"

"poochh sakta hoon kyun...?" Manav ne tirchhi najron se usko ghoorte huye poochha....

"Ji... wo main aapko nahi bata sakta... " Harry ne ek gahri saans chhodi...,"Main Julana se hoon...!"

"koun koun hain tumhare ghar mein...?" Manav ne agla sawaal kiya....

"Ji.. mummy papa hain... aur ek chhota bhai... Mayur...!"

"matlab tum Harry hi ho! par wwo.. koun hai Jo Ye sab karwa raha hai...? Tumhara koyi judwa bhai hai kya?" Manav ne agla sawaal kiya....

"Jji.. nahi... par kuchh yakeen se kah bhi nahi sakta...!" Harry ne kaha aur najarein chura li....

"Kya... kya matlab?" Manav uske munh se hi sun'na chahta tha.....

"Ji.. darasal main unka god liya hua beta hoon... wwo mujhe anathalya se lekar aaye the.... isiliye..."

"Sala ye chakkar kya hai..." Manav jhujhlate huye stool se uth kar khada ho gaya...," Agar tum bekusoor ho aur Harry hi ho toh wo koun hai jisko kal Anjali ne dekha tha... jo parson mere sath tha... aur wo bhi bilkul tumhari tarah... kuchh fark toh judwan bachchon mein bhi hota hai...!"

Manav ki jab kuchh aur samajh mein nahi aaya toh usne ghar fone karke Pinky ko hospital mein bula liya... aur fir bahar nikal kar anjali ko aawaj di..,"Idhar aana Anju...!"

"Jji... Sir.." Anjali sahmi huyi si kamre mein aakar khadi ho gayi... Harry ki aur usne dekha tak nahi...

"Dhyaan se isko dekho... kya ye Harry hi hai?" Manav ne Anjali se kaha...

Anjali ne Manav ke kahne par ek sarsari nazar Harry par dali aur fir Manav ki aur dekhte huye apni gardan 'haan' mein hilakar jhuka li....

"Aise nahi.. ek dum dhyan se dekho... Mujhe lagta hai ki ek hi shakal ke do admi hain kahani mein.... Tum gour karke batao ki kya ye wahi ladka hai jisko tumne gaanv mein dekha hai...?"

Anjali ne iss baar dekhte huye Harry se najarein char ki toh wah muskura diya....,"Haan... yahi hai... kal bhi maine isi ko dekha tha thane mein....!" Anjali ne confirm kiya.....

"Harry... pahli baar tumne isko kab dekha tha....?" Manav ne Harry se sawaal kiya....

"Jji... Ye dono mere office mein aayi thi... tabhi maine isko aur Pinky ko pahli baar dekha tha...!" Harry bana yuvak yahan maat kha gaya... Anjali ne kuchh yaad kiya aur Harry se seedha seedha sawaal kiya...,"Kya Pinky ko bhi tumne wahin dekha tha pahli baar....?"

Harry Anjali ki baat ka matlab samajh gaya..,"Nahi... aise toh maine kayi baar tumhe bhi dekha tha aate jate... par..."

"Nahi... main ye nahi kah rahi... Pinky se pahli baar tum kab mile the aur kya baat huyi thi...!" Anjali Talab wali baat yaad karke boli....

"Haan... baat toh shayad pahle bhi huyi hain... par kuchh yaad nahi aa raha...!" Harry hadbada gaya tha....

"Jhooth!" Anjali uchhalte huye si boli...,"Wo baat toh tum bhool hi nahi sakte... ye jaroor Harry nahi hai...!" Anjali Manav ki aur dekh kar boli.....

"Ye tum kya kah rahi ho... mujhe sab kuchh yaad hai... Tum aur Pinky pahli baar mere paas I-Pill lene aayi thi... Pinky ne maangi thi aur main naraj hua tha... uske baad tum mujhe shahar mein mili... wo sab bhi mujhe yaad hai... Baad mein tumhare sath hi Pinky paise loutane aayi thi.....!" Harry had se jyada bolkar safayi dene laga....

"Toh fir iska matlab yahi hua ki dusra koyi aadmi hai hi nahi... Tum hi harry ho aur tum hi Boss ho!" Manav ne nishkarsh nikalne ki koshish ki.....

"Nahi... pahle iss'se poochho ki Pahli baar ye Pinky se kahan mila tha.... Uss baat ko toh koyi bhool hi nahi sakta.... Ye Harry nahi hai agar isko nahi pata toh....!"

"aisi kya baat hai...?" Manav Anjali ke chehre par gour karta hua bola aur fir apne aap hi usko chup rahne ka ishara kiya....,"Rahne do... yahi batayega.. ya fir....!"

Manav bol hi raha tha ki bahar se ek police wala Pinki ko sath liye kamre mein dakhil ho gaya... Pinky sahmi huyi bhi thi aur sharmayi, sakuchayi huyi bhi....

"Pinky... ek baar isko dhyan se dekh kar batao ki kya yahi ladka har baar tumse mila hai...?" Manav ne poochha....

Pinky ne bina dekhe hi hami bhar di... Harry ko kankhiyon se usne dekh toh pahle hi liya tha....

"Pinky! kya tumhe yaad hai tum dono pahli baar kab mile the...?" Anjali se bina poochhe raha na gaya....

"Haan!" Pinky ne kahkar sir jhuka liya..,"Talab par!"

"Ek minute... abhi tum kuchh mat bolo...!" Manav ne nirdesh diya...,"Ab kuchh yaad aaya Harry ji!"

"jji.." Harry hadbada gaya tha..,"par... par dhang se yaad nahi hai....!"

"Koyi baat nahi.. jitna yaad hai.. wahi bata do!" Manav ko kuchh na kuchh nishkarsh nikalne ki ummeed bandhne lagi thi....

"Bus.. thoda thoda hi yaad hai.... Shayad... nahi... kuchh yaad sa nahi aa raha...!" Harry bolta bhi toh kya bolta.....

"Ho hi nahi sakta 'wo' baat yaad na ho..." Anjali se raha nahi ja raha tha....,"Chalo yahi bata do ki Jab tum iske paas gaye toh Pinky kya kar rahi thi..."

"Kaha na yaar kuchh yaad nahi hai...!" Harry jhalla utha....

"Main batati hoon... Pinky apni bhainson ko lene talab ke uss paar gayi thi....!" anjali bol hi rahi thi ki Harry ne usko tok diya...,"Haan haan.. yaad aa gaya... Main udhar nahar ki taraf se ghoomfir kar aa raha tha.... tabhi ye mujhe mili thi....!"

"achchha... ab toh yaad aa gaya na... chalo ab batao fir kya hua tha... baki baat toh tum bhool hi nahi sakte.....!" Manav chupchap Anjali aur Harry ki baatein sun raha tha... usko vishvas tha ki Anjali theek chal rahi hai... isliye usne usko rokne ki koyi koshish nahi ki.....

"Fir... bus ek aadh baat huyi thi aur....!"

"Ye... Harry nahi hai Sir...!" Anjali ne apna faisla suna diya...,"Uss baat ko ye kaise bhool sakta hai jab Pinky museebat mein thi aur Harry ne isko bachaya tha... darasal...!" Bol rahi Anjali ko Manav ne beech mein hi tok diya...,"ek minute... ye huyi na baat! Ab kuchh yaad aaya Harry ji?"

Harry ke paas ab bhi bolne ko kuchh nahi tha... usko pata tha ki iss sawaal ka jawaab uske paas nahi hai... Nidhal sa hokar let'te huye usne apna jabada kas liya aur aankhein band kar li...,"Mera naam Prashaant hai!"

par... lekin ye kya kah...!" Pinky aascharyachakit hokar kuchh bolne ko vivash ho hi gayi thi ki Manav ne apni aankhon ka ishara karke usko chup kar diya...,"Haan.. kya bol rahe the bhai sahab!"

"Mera naam Harry nahi hai... Main toh...!"

"toh fir Harry kahan hai...?" Ab Manav ko Harry ki talash thi....

"Shit!" Prashant ne hatasha mein apna matha peet liya... Usko maloom tha ki ab usko sab sach bolna hi padega...," Tarun mera bahut achchha dost tha... ek tarah se iss dhandhe mein aap usko mera partner kah sakte hain...."

"Maine poochha Harry kahan hai....?" Manav ne gussaye huye lahje mein fir poochha....

"Hai... Jinda hai... Uski shakal mujhse bahut milti thi... Uski sari kahani jaan'ne ke baad mujhe uss'se hamdardi si ho gayi thi.... Isiliye usko uss waqt jaan se nahi maar paya.... 'Wo' bhi meri tarah anaathalya mein hi hota agar Usko kisi ne god na liya hota... apni apni kismat hai!" Prashant ne munh pichkaya....

"Toh iska matlab tum dono bhai ho?" Manav uske paas aakar baith gaya.....

"Pata nahi... shayad bhai hi honge.... tabhi toh....!"

"Tum pahle Harry batao kahan hai..? baki baatein baad mein hoti rahengi....!" Manav utaawala sa hokar bola.....

"Layiye main fone kar deta hoon... wo 'log' usko chhod denge!"

"Nahi.. tum address batao!"

"Agar police waale usko lene gaye toh uski lash hi milegi... maine unko samjha rakha tha ki unhe kya karna hai... fir bhi agar aap..." Prashant ko bolte bolte Manav ne beech mein hi tok diya,"nahi... ye lo... Fone karke kah do...!"

"Thanx!", Kahkar Prashant ne fone milaya....

"Hello!"

"haan... koun hai?"

"Main bol raha hoon...!" Prashant ne itna hi kaha aur udhar wale bande ko aawaj pahchan mein aa gayi....,"Ji Boss... par Boss...?"

"Harry ko chhod do.... raat wala program cancel karwa do....!"

"Par kyun Boss? wwo.. paise toh hamne bhijwa diye... aapne hi toh bola tha ki...."

"Paise ko maaro goli yaar... Usko chhod do aur tum sab bhag jao... sab khatam ho chuka hai....!"

"Par Boss....." Saamne wala ab bhi duvidha mein tha...,"aap kaise bachenge fir?"

"Main ab bachna nahi chahta.... chhod do usko..!" Prashant ne kahkar fone kaat diya.....

"Very interesting!" Manav ne uske hath se fone le liya...,"Toh tum Harry ko marwa kar usko 'Boss!' sabit karna chahte the.... haan... ab batao poori kahani....!"

Prashant ne takiye se sir lagaya aur kuchh din purani yaadon mein chala gaya....

Tarun aur main ek dusre ko bahut dino se jaante the.... Manisha hamari pahli shikaar th aur usko mere paas Tarun hi lekar aaya tha... Sab kuchh theek chal bhi raha tha... Ek din mujhe Tarun ne bataya ki uske gaanv mein ekdum meri hi shakal ka ladka rahne ke liye aaya hai.... U.P. mein do char case mujh par chal rahe the... par main kabhi pakda nahi gaya tha... Unn maamlon ko khatam karne ke liye maine Harry ko Prashant banakar mara hua dikhane ka plan banaya aur gaanv mein aane ke kuchh din baad hi usko uthwa liya tha.... Par uski baatein sunkar jaane kyun uss'se hamdardi si ho gayi thi.... khas tour par ye jaan'ne ke baad ki 'wo' bhi shuruaat ke kuchh din anaathalya mein hi raha hai...

Mujhe bhi yahi lag raha tha ki wo mera bhai ho sakta hai... par maine usko chhoda nahi... aisi hi kisi emergency ke liye jinda rakh liya tha tha.... Iske alawa mujhe gaanv mein ek surakshit jagah bhi mil gayi thi.... Main gaanv mein hi rahne laga....

"Par main tumhara fone kabhi trace nahi kar paya... Tum gaanv mein rahte the... par tumhari location kabhi uske aaspaas bhi nahi lagi...!" Manav ne usko tok kar beech mein sawaal kiya....

"Haan... ek toh main apne no.s frequently badalta tha... dusre Main hamesha apne cell par forwarded calls hi receive karta tha... shayad isiliye...!"

"aage bolo....!"

Tarun Meenu ko iss business mein lane ki soch raha tha... Usi douran usne mujhe bataya ki Pinky ne uske sath kya kiya... wo apne tareeke se badla lena chahta tha par maine usko sanyam rakhne ki salah di..... School ki inki movie dekhne ke baad mujhe bhi lagne laga tha ki inko jis tarah chaahein hum uss tareeke se nacha sakte hain... aur fir hamari list mein ye do ladkiyan aur shamil ho gayi... Par usi raat Tarun ka khoon ho gaya.... Iske liye main Meenu ko hi jimmedaar maan raha tha kyunki usi din usne mujhe bataya tha ki 'wo' Meenu' se milne ja raha hai....

aur jab Manisha ne mujhe bataya ki Usne Sonu ko Tarun par chaku se hamla karte dekha hai toh Maine gusse mein usko apne paas bulakar maar daala... uske paas Tarun ka fone dekh kar mujhe poora vishvaas ho gaya tha ki usi ne Tarun ko maara hai......

Baad mein Pinky mere paas aayi aur mere dimag mein ek dusra plan koundh gaya.... Pinky ne mujhse iss lahje mein baat ki jaise wwo mujhe pahle se pasand karti hai.. Maine Harry se iss babat jaankari leni chahi par usne iss baat se hi nkaar kar diya ki aisa kuchh hai.... Haan itna jaroor kaha tha ki 'ye' usko achchhi lagti hai aur 'wo' isko kayi baar gulabo kahkar chida bhi deta hai.... Maine apne tareeke se Tarun ki li huyi kasam ka badla lene ka faisla kar liya...... yahi mera business bhi tha..... Maine Pinky ko pyaar ke jaal mein fansaya... baaki toh aap sab ko pata hi hai.... " Prashant ne baat khatam karke najarein jhuka li....

"Mujhe ummeed nahi thi tum itni jaldi haar maan kar toot jaaoge....!" Manav usko ghoorta hua bola....

"Mujhe nahi pata ki haar kya hoti hai aur jeet kya! Maine jindagi ko hamesha shatranj ke khel ki tarah jiya hai.... Main saamne wale ki chal samjhe bagair waar nahi karta... par Mere mann mein tab se hi ek udhedbun chal rahi thi jab se maine khud ko bachane ke liye Harry ka encounter karwane ka plan banaya tha.... Ye sach hai ki main khud ko ab bhi bacha lena chata tha... par pata nahi kyun.. main iski.." Harry ne Pinky ki taraf ek pal ke liye dekha..," iski aankhon ka saamna nahi kar saka..... pata nahi kyun... Main isko dhokha de raha tha par mujhe ye bhi lag raha tha ki main khud ko hi chhal raha hoon... pata nahi kyun...."

"Fir ye bhi nahi chahta tha ki mere karmon ki saza mera... wo bhai bhugte... bus pata nahi kyun.... khair...!" Prashant ne ek lambi saans li aur chup ho gaya....

"Toh.. tum shuru se hi Harry nahi the....!" Pinky aankhein faad kar boli....

"Talaab wali baat ka mujhe nahi pata.. par tab se jab tum mere paas 'wo' goliyan maangne aayi thi.... main hi tha.....!"

"Jao.. tum thodi der bahar baitho...!" Manav ne Anju aur Pinky ki aur ishara kiya....

"Chalo...!" Pinky Anju ka hath pakad kar bahar le aayi....

"Harry mujhse pyar karta hoga kya?" Pinky ajeeb kasamkas mein thi.....

"Pata nahi... wo aaye toh uska gala pakad kar poochh lena.... par ek baat tum bilkul sahi kah rahi thi....!" Anjali ne kaha....

"Kya?" Pinky ne Anjali ki aankhon mein jhankte huye poochha.....

"Harry ne sach mein kisi ko bhi talaab wali baat nahi batayi.... agar wo isko bata deta toh aaj ye bach jata...!" Anjali ne kaha....

"Haan.. aur wo..." Pinky beech mein hi ruk gayi..,"Bata na! wo mujhse pyar kar lega na?"

"Mujhe nahi pata... main toh bus itna jaanti hoon ki iss chakkar mein jhamele bahut hain... Maine to aaj se touba kar li!" Anjali ne kaha aur apne kaan pakad liye

end