अंजाना रास्ता compleet

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rajaarkey
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Re: अंजाना रास्ता

Unread post by rajaarkey » 13 Oct 2014 09:50

दीदी दुबारा

से गरम भी हो गई और पीछे खिसकते हुए वो एक बार फिर से मेरी कमर पर आ कर

बैठ गई और अपने हाथ से मेरे तनतनाये हुए लण्ड को अपनी मुठ्ठी में कस

हिलाते हुए अपने चुत्तरों को हवा में उठा लिया और लण्ड को चुत के होंठो

से सटा कर सुपाड़े को रगड़ने लगी. सुपाड़े को चुत के फांको पर रगड़ते चुत के

रिसते पानी से लण्ड की मुंडी को गीला कर रगड़ती रही. मैं बेताबी से दम

साधे इस बात का इन्तेज़ार कर रहा था की कब दीदी अपनी चुत में मेरा लौड़ा

लेती है. मैं निचे से धीरे-धीरे गांड उछाल रहा था और कोशिश कर रहा था की

मेरा सुपाड़ा उनके बूर में घुस जाये. मुझे गांड उछालते देख दीदी मेरे लण्ड

के ऊपर मेरे पेट पर बैठ गई और चुत की पूरी लम्बाई को लौड़े की औकात पर

चलाते हुए रगड़ने लगी तो मैं सिस्याते हुए बोला "दीदी प्लीज़….ओह….सीईई अब

नहीं रहा जा रहा है….जल्दी से अन्दर कर दो ना…..उफ्फ्फ्फ्फ्फ……ओह

दीदी….बहुत अच्छा लग रहा है….और तुम्हारी चु…चु….चु….चुत मेरे लण्ड पर

बहुत गर्म लग रही है….ओह दीदी…जल्दी करो ना….क्या तुम्हारा मन नहीं कर

रहा है….." अपनी गांड नचाते हुए लण्ड पर चुत रगड़ते हुए दीदी बोली

"हाय…भाई जब इतना इन्तेजार किया है तो थोड़ा और इन्तेजार कर लो….देखते

रहो….मैं कैसे करती हूँ….मैं कैसे तुम्हे जन्नत की सैर कराती हूँ….मजा

नहीं आये तो अपना लौड़ा मेरी गांड में घुसेड़ देना…..….अभी देखो मैं

तुम्हारा लण्ड कैसे अपनी बूर में लेती हूँ…..लण्ड सारा पानी अपनी चुत से

पी लुंगी…घबराओ मत….. अपनी दीदी पर भरोसा रखो….ये तुम्हारी पहली चुदाई

है….इसलिए मैं खुद से चढ़ कर करवा रही हूँ….ताकि तुम्हे सिखने का मौका

मिल जाये….देखो…मैं अभी लेती हूँ……" फिर अपनी गांड को लण्ड की लम्बाई के

बराबर ऊपर उठा कर एक हाथ से लण्ड पकड़ सुपाड़े को बूर की दोनों फांको के

बीच लगा दुसरे हाथ से अपनी चुत के एक फांक को पकड़ कर फैला कर लण्ड के

सुपाड़े को उसके बीच फिट कर ऊपर से निचे की तरफ कमर का जोर लगाया. चुत और

लण्ड दोनों गीले थे. मेरे लण्ड का सुपाड़ा वो पहले ही चुत के पानी से गीला

कर चुकी थी इसलिए सट से मेरा पहाड़ी आलू जैसा लाल सुपाड़ा अन्दर दाखिल हुआ.

तो उसकी चमरी उलट गई. मैं आह करके सिस्याया तो दीदी बोली "बस हो गया

भाई…हो गया….एक तो तेरा लण्ड इंतना मोटा है…..मेरी चुत एक दम टाइट

है….घुसाने में….ये ले बस दो तीन और….उईईईइ माँ…..सीईईईई….बहनचोद

का….इतना मोटा…..हाय…य य य…..उफ्फ्फ्फ्फ़…." करते हुए गप गप दो तीन धक्का

अपनी गांड उचकाते चुत्तर उछालते हुए लगा दिए. पहले धक्के में केवल सुपाड़ा

अन्दर गया था दुसरे में मेरा आधा लण्ड दीदी की चुत में घुस गया था, जिसके

कारण वो उईईई माँ करके चिल्लाई थी मगर जब उन्होंने तीसरा धक्का मारा था

तो सच में उनकी गांड भी फट गई होगी ऐसा मेरा सोचना है. क्योंकि उनकी चुत

एकदम टाइट मेरे लण्ड के चारो तरफ कस गई थी और खुद मुझे थोड़ा दर्द हो रहा

था और लग रहा जैसे लण्ड को किसी गरम भट्टी में घुसा दिया हो. मगर दीदी

अपने होंठो को अपने दांतों तले दबाये हुए कच-कच कर गांड तक जोर लगाते हुए

धक्का मारती जा रही थी. तीन चार और धक्के मार कर उन्होंने मेरा पूरा नौ

इंच का लण्ड अपनी चुत के अन्दर धांस लिया और मेरे छाती के दोनों तरफ हाथ

रख कर धक्का लगाती हुई चिल्लाई "उफ्फ्फ्फ्फ़….….कैसा मुस्टंडा लौड़ा पाल

रखा है….ईई….हाय….गांड फट गई मेरी तो…..हाय पहले जानती की….ऐसा बूर फारु

लण्ड है तो….सीईईईइ…..भाई आज तुने….अपनी दीदी की फार दी….ओह सीईईई….लण्ड

है की लोहे का राँड….उईईइ माँ…..गई मेरी चुत आज के बाद….साला किसी के काम

की नहीं रहेगी….है….हाय बहुत दिन संभाल के रखा था….फट गई….रे मेरी तो हाय

मरी…." इस तरह से बोलते हुए वो ऊपर से धक्का भी मारती जा रही थी और मेरा

लण्ड अपनी चुत में लेती भी जा रही थी. तभी अपने होंठो को मेरे होंठो पर

रखती हुई जोर जोर से चूमती हुई बोली "हाय….….आराम से निचे लेट कर बूर का

मजा ले रहा है….भोसड़ी….के….मेरी चुत में गरम लोहे का राँड घुसा कर गांड

उचका रहा है….उफ्फ्फ्फ्फ्फ…भाई अपनी दीदी कुछ आराम दो….हाय मेरी दोनों

लटकती हुई चूचियां तुम्हे नहीं दिख रही है क्या…उफ्फ्फ्फ्फ़…उनको अपने

हाथो से दबाते हुए मसलो और….मुंह में ले कर चूसो भाई….इस तरह से मेरी चुत

पसीजने लगेगी और उसमे और ज्यादा रस बनेगा…फिर तुम्हारा लौड़ा आसानी से

अन्दर बाहर होगा….हाय रा ऐसा करो मेरे राजा….तभी तो दीदी को मजा आएगा

और….वो तुम्हे जन्नत की सैर कराएगी….सीईई…" दीदी के ऐसा बोलने पर मैंने

दोनों हाथो से दीदी की दोनों लटकती हुई चुचियों को अपनी मुठ्ठी में कैद

करने की कोशिश करते हुए दबाने लगा और अपने गर्दन को थोड़ा निचे की तरफ

झुकाते हुए एक चूची को मुंह में भरने की कोशिश की. हो तो नहीं पाया मगर

फिर भी निप्पल मुंह में आ गया उसी को दांत से पकड़ कर खींचते हुए चूसने

लगा. दीदी अपनी गांड अब नहीं चला रही थी वो पूरा लण्ड घुसा कर वैसे ही

मेरे ऊपर लेटी हुई अपनी चूची दबवा और निप्पल चुसवा रही थी. उनके माथे पर

पसीने की बुँदे छलछला आई थी. मैंने चूची का निप्पल को दीदी के चेहरे को

अपने दोनों हाथो से पकड़ कर उनका माथा चूमने लगा और जीभ निकल का उनके माथे

के पसीने को चाटते हुए उनकी आँखों को चुमते हुए नाक पर जीभ फिरते हुए

चाटा दीदी अपनी गांड अब नहीं चला रही थी वो पूरा लण्ड घुसा कर वैसे ही

मेरे ऊपर लेटी हुई अपनी चूची दबवा और निप्पल चुसवा रही थी. उनके माथे पर

पसीने की बुँदे छलछला आई थी. मैंने चूची का निप्पल को दीदी के चेहरे को

अपने दोनों हाथो से पकड़ कर उनका माथा चूमने लगा और जीभ निकल का उनके माथे

के पसीने को चाटते हुए उनकी आँखों को चुमते हुए नाक और उसके निचे होंठो

के ऊपर जो पसीने की छोटी छोटी बुँदे जमा हो गई थी उसके नमकीन पानी को पर

जीभ फिराते हुए चाटा और फिर होंठो को अपने होंठो से दबोच कर चूसने लगा.

दीदी भी इस काम में मेरा पूरा सहयोग कर रही थी और अपने जीभ को मेरे मुंह

में पेल कर घुमा रही थी. कुछ देर में मुझे लगा की मेरे लण्ड पर दीदी की

चुत का कसाव थोड़ा ढीला पर गया है. लगा जैसे एक बार फिर से दीदी की चुत से

पानी रिसने लगा है. दीदी भी अपनी गांड उचकाने लगी थी और चुत्तर उछालने

लगी थी. ये इस बात का सिग्नल था का दीदी की चुत में अब मेरा लण्ड एडजस्ट

कर चूका है. धीरे-धीरे उनके कमर हिलाने की गति में तेजी आने लगी. थप-थप

आवाज़ करते हुए उनकी जान्घे मेरी जांघो से टकराने लगी और मेरा लण्ड सटासट

अन्दर बाहर होने लगा. मुझे लग रहा था जैसे चुत दीवारें मेरे लण्ड को जकड़े

हुए मेरे लण्ड की चमरी को सुपाड़े से पूरा निचे उतार कर रागड़ती हुई अपने

अन्दर ले रही है. मेरा लण्ड शायद उनकी चुत की अंतिम छोर तक पहुच जाता था.

दीदी पूरा लण्ड सुपाड़े तक बाहर खींच कर निकाल लेती फिर अन्दर ले लेती थी.

दीदी की चुत वाकई में बहुत टाइट लग रही थी. मुझे अनुभव तो नहीं था मगर

फिर भी गजब का आनंद आ रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे किसी बोत्तल में मेरा

लौड़ा एक कॉर्क के जैसे फंसा हुआ अन्दर बाहर हो रहा है. दीदी को अब बहुत

ज्यादा अच्छा लग रहा था ये बात उनके मुंह से फूटने वाली सिस्कारियां बता

रही थी. वो सीसियते हुए बोल रही थी "आआआ…….सीईईईइ…..भाई बहुत अच्छा लौड़ा

है तेरा…..हाय एक दम टाइट जा रहा है…….सीईईइ हाय मेरी….चुत…..ओह

हो….ऊउउऊ….बहुत अच्छा से जा रहा है…हाय….गरम लोहे के रोड जैसा

है….हाय….कितना तगड़ा लौड़ा है….. हाय मेरे प्यारे…तुमको मजा आ रहा

है….हाय अपनी दीदी की टाइट चुत को चोदने में…हाय भाई बता ना….कैसा लग रहा

है मेरे राजा….क्या तुम्हे अपनी दीदी की बूर की फांको के बीच लौड़ा दाल कर

चोदने में मजा आ रहा है…..हाय मेरे चोदु….अपनी बहन को चोदने में कैसा लग

रहा है….बता ना….अपनी बहन को….साले मजा आ रहा…सीईईई….ऊऊऊऊ…." दीदी गांड

को हवा में लहराते हुए जोर जोर से मेरे लण्ड पर पटक रही थी. दीदी की चुत

में ज्यादा से ज्यादा लौड़ा अन्दर डालने के इरादे से मैं भी निचे से गांड

उचका-उचका कर धक्का मार रहा था. कच कच बूर में लण्ड पलते हुए मैं भी

सिसयाते हुए बोला "ओह सीईईइ….दीदी….आज तक तरसता….ओह बहुत मजा…..ओह

आई……ईईईइ….मजा आ रहा है दीदी….उफ्फ्फ्फ्फ़…बहुत गरम है आपकी चुत….ओह बहुत

कसी हुई….है…बाप रे….मेरे लण्ड को छिल….देगी आपकी चुत….उफ्फ्फ्फ्फ़….एक

दम गद्देदार है…." चुत है दीदी आपकी…हाय टाइट है….हाय दीदी आपकी चुत में

मेरा पूरा लण्ड जा रहा है….सीईईइ…..मैंने कभी सोचा नहीं था की मैं आपकी

चुत में अपना लौड़ा पेल पाउँगा….हाय….. उफ्फ्फ्फ्फ़… कितनी गरम है….. मेरी

सुन्दर…प्यारी दीदी….ओह बहुत मजा आ रहा है….ओह आप….ऐसे ही चोदती

रहो…ओह….सीईईई….हाय सच मुझे आपने जन्नत दिखा दिया….सीईईई… चोद दो अपने

भाई को…." मैं सिसिया रहा था और दीदी ऊपर से लगातार धक्के पर धक्का लगाए

जा रही थी. अब चुत से फच फच की आवाज़ भी आने लगी थी और मेरा लण्ड सटा-सट

बूर के अन्दर जा रहा था. पुरे सुपाड़े तक बाहर निकल कर फिर अन्दर घुस जा

रहा था. मैंने गर्दन उठा कर देखा की चुत के पानी में मेरा चमकता हुआ लौड़ा

लप से बाहर निकलता और बूर के दीवारों को कुचलता हुआ अन्दर घुस जाता. दीदी

की गांड हवा लहराती हुई थिरक रही थी और वो अब अपनी चुत्तरों को नचाती हुई

निचे की तरफ लाती थी और लण्ड पर जोर से पटक देती थी फिर पेट अन्दर खींच

कर चुत को कसती हुई लण्ड के सुपाड़े तक बाहर निकाल कर फिर से गांड नचाती

निचे की तरफ धक्का लगाती थी. बीच बीच में मेरे होंठो और गालो को चूमती और

गालो को दांत से काट लेती थी. मैं भी दीदी के दोनों चुत्तरों को दोनों

हाथ की हथेली से मसलते हुए चुदाई का मजा लूट रहा था. दीदी गांड नचाती

धक्का मारती बोली " ….मजा आ रहा है….हाय….बोल ना….दीदी को चोदने में

कैसा लग रहा है भाई….हाय बहनचोद….बहुत मजा दे रहा है तेरा लौड़ा…..मेरी

चुत में एकदम टाइट जा रहा है….सीईईइ….माधरचोद….इतनी दूर तक आज तक…..मेरी

चुत में लौड़ा नहीं गया….हाय…खूब मजा दे रहा है…. बड़ा बूर फारु लौड़ा है

रे…तेरा….हाय मेरे राजा….तू भी निचे से गांड उछाल ना….हाय….अपनी दीदी की

मदद कर….सीईईईइ…..मेरे सैयां…..जोर लगा के धक्का मार…हाय बहनचोद….चोद दे

अपनी दीदी को….चोद दे….साले…चोद, चोद….के मेरी चुत से पसीना निकाल

दे…भोसड़ीवाले…. ओह आई……ईईईइ…" दीदी एकदम पसीने से लथपथ हो रही थी और

धक्का मारे जा रही थी. लौड़ा गचा-गच उसकी चुत के अन्दर बाहर हो रहा था और

अनाप शनाप बकते हुए दाँत पिसते हुए पूरा गांड तक का जोर लगा कर धक्का

लगाये जा रही थी. कमरे में फच-फच…गच-गच…थप-थप की आवाज़ गूँज रही थी. दीदी

के पसीने की मादक गंध का अहसास भी मुझे हो रहा था. तभी हांफते हुए दीदी

मेरे बदन पर पसर गई. "हाय…थका दिया तुने तो…..मेरी तो एक बार निकल भी गई…

रात का 1 बजा था बाहर जोरो से बारिश हो रही थी ..ज़ोर दार बिजलियाँ कड़क

रही थी..और अंदर रूम मे दो जिस्म एक जान हो रहे थे. मेरे और दीदी के

कपड़े नीचे फर्श पर पड़े थे..और मेरा नंगा बदन अंजलि दीदी के नंगे बदन के

उप्पर लिपटा हुआ आगे पीछे हो रहा था. हम दोनो एक दूसरे के अंदर मानो समा

जाना चाह रहे थे. और तभी

'आअहीश्ह……….ससीहह……"

ये आवाज़ हम दोनो के मूह से एक साथ निकली जिसका मतलब था कि मैने अंजलि

दीदी को लड़की से औरत और खुद को लड़के से मर्द बना दिया था. दीदी को इस

बात का सकून था कि उनकी वर्जिनिटी मैने ली और मुझे इस बात का कि मेरी

वर्जिनिटी दुनिया की सबसे खोबसूरत लड़की यानी मेरी अंजलि ने ली.

दोस्तो अब जब भी ये सारी बाते मेरे जेहन मे आती है तो मुझे लगता है कि ये

जिंदगी वाकई मे एक अंजान रास्ता ही तो है. दोस्तो आपको ये कहानी कैसी लगी

ज़रूर बताना दोस्तो फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ तब तक के लिए विदा

आपका दोस्त राज शर्मा

*********** दा एंड ************

rajaarkey
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Re: अंजाना रास्ता

Unread post by rajaarkey » 13 Oct 2014 09:51

Anjaana Rasta --10

gataank se aage................

Didi to TV screen ki tarf dekh rahi thi aur Raj unke chihare ke tarf

par dono rook rook kar baate jaroor kar rahi thie..pata nahi kya baate

thi..par didi ki body language bata rahi thi ki wo baate jara kuch

haat kar thi. Ab taak to Raj ki chaal kaam kar rahi thi..me wakaaye

Raj ki daad dungaa ki uskoo ladkyoo ko patana achchi se atta thaa…Meri

didi jo usko bilkul bhi pasand nahi karte thi unko 15 minutes me hi

usne apne jaal me fasaaleya thaa.(lag bhaag). Mujhe ab undono ke bech

kya baate ho rahi hai unko sunne ke talab hue to mai koi dusare jagah

talask karne laga . Mai dhire se uttar kar dusare room me chala gaya

waha se me unko dekh to nahi paa raha thaa par awaj saaf sunai de rahi

thi.

.Raj Anjali didi se bol raha thaa " Appke baal bahut kubsurrat hai

bikul app ki tarah "

Didi muskuraate hue " achcha jii..lagta hai tumhi mere baal bahut pasand hai"

Raj " are mere pasand naa pujho mujhe to aur bhi bahut kuch pasand hai ….."

Didi: " achcha to bataoo kya kya pasandhai"

Raj: " appke baal..appke ankhiee…appke sexy hoth….."

Raj ki awaj se lag raha tha ki mano usppar nasha ho gaya hai. Dono ke

awajo ka aajr app comparision karo to saaf saf pata chaal rah tha ki

Raj ki awaj bikul awaro jaise aur didi ki ek padthi likhi ladki jaise

.

Tabhi didi ki dhire se ek awaj aaye " ..ahh..ishsssss…issh..A..Raj

mere balo ko kyo khol rahi ho…"

"Kyoo mere hatho me aakar kya inki khobsurati kaam ho gayegee " tabhi

Rajki saas kechne ki awaj aayee shaayad wo Anjali ke balo se attee

kushboo ko sung raha thaa" Wah kya khushbu hai"

Me ye jaan kar aur jyaada bechain ho gaya ki woo didi ke resmi balo ko

openly sung raha hai. Jabki maine Itni dino me ek do baar hi didi ke

reshmi balo ko chuaa thaa aur wo sirf 15 mintes me hi yaha taak pahoch

gayaaa.

" Achcha ek baat pochou ajar tum bura na banoo" Raj ki awaj mere kano me aaye.

"aisaa kya pochoge ..pls ahh..tum mere balloo ko itna mutt khicho

dard..hota hai..ahhh...."didi boli

"size kya hai tere kabutaroo ka" Raj bola

"kyaa…kabutar kyaa" didi pareshan hote hue boli

Yaha par maine yee gor kya ki wo ab didi ko " tu " or " tere " keh kar

bula raha thaa…kaha pahle wo app app kar kar baat karraha tha aur kaha

ab "tu " …yaa to didi ne Raj ki iss baat par diyaan nahi diyaa..yaa

phir……

" teri chuchioo ka size " Raj bola

"pagal ho gaye ho kyaa..me tumhri bade behna ki tarh hoo..pls be in

limit..tumne friehship karne ke leye bola hai to sirf friend hi

banoo…. " didi thoda guse se boli.

"are jyaada natak mutt kar …mujhe pata hai tera badan chudaaye mang

raha hai" Raj bhi thoda kadak hota hua bola.

Tabhi kuch kuch gutha guthi se hui aur didi ke halki siskri mere kano

me padi. " Ahh..ishh…chodo mujhe"

Mai ye dekne ke leye pagal sa ho gaya ki akhair ho kya rah hai so mai

wapas pahlewali jagah par agaya.

Maine dekha ki Anjali didi sofe ki side me khade hai aur Raj ke hath

se apne t-shirt k a ek kona chudane ki koshi kar rahi hai . unke lambe

baal pure tarh se khole hue hai..Raj thoda guse me lag raha thaa aur

didi ke chihare par dar saf jalak raha thaa.

Tabhi Raj utha aur usne didi ko apne baho me bhaar leya aur joor se

unke hoto ko chusnee lagaa..didi apne app ko chudane ki pori koshis

kar rahi thi..Raj to Anjali didi ke hoto ko aise chos raha thaa ki

bano unko kha hi gayegaa..rah rah kar wo ddi ko chochyo ko bhi kass

kass kar daba rah thaaa…didi ke muhh se attee dard bhari awaj ye bata

rahi thi ki Rajke sakh pathar jaise hath didi ke tani hue mulaayam

chochyoo ka bura haal kar rahi hai..tabhi didi ne Raj ko ek tarf Dhaka

diya aur wo bhag kar kitchin me chali gayee par Raj koi kachcha

khiladi to nahi thaaa wo lapak kar kitchin me jaa gusaa..excitemnt to

mujhe bhi bahut ho gaye thi ..par Raj ka ye rawaeya dekh mujhe dar

bhilagne laga thaa. Undeer kitchin se bertano ke girne ke awaje ke

sath sath didi ki siskaria bhi a rahi thi.."aahh…Raj….pls chodo

mujhe..ahhi…ishhh…maa…Itni joor se mut

daboo…..plssssmujhe…isshhhhh…aa.mamiiiiii….."didi ke rone keawaje

mujhe pareshan kar rahi thi..Akhair wo mere bade behan hi to thi koi

ajani nahi aur aaj Rajmere hote hue bhi unka balatkar karn eke koshis

kar raha thaa..ab mera mun mujhe dhikkar raha thaa…Mun se sirf ye hi

awaj aa rahi thi ki apne bade behan ko bacha us darinde se ..anuj

…kahi aisa naa ho kit u apne najroo me hi girgayee " ye awaje mere

dill ke andar se aa rahi thi..samay bitata jar aha thaa .Phir wo wakt

aayaa jab me setha bhagta hua neechi kitchin ki tarf gaya ..Andar

jaate hi maine dekha ki Raj ne didi ko pechi se pakda hua hai aur didi

ka pajam aur unki panty unke paro me fasi hai aur didi ki t-shirt door

kitch ke farsh par fati hue padi hai..didi kaa roo roo kar bura haal

thaa aura Raj appna lund peechi se didi ki chot par laga raha

thaai.tabhi undono ki najar kitchin ke gaate par khade mujh par padi .

Mujhe dekhte hi Raj jor se bola

" dekh aaj apne jawan bahan ka balatkar ..aaj isko me apne randi bana

kar rahungaa…."

Didi lachchar najroor se mujhe dekh rahi thi. Aur unki khobsurrat

ankho se niklaate assoo mano mujhe bol rahi ho ki Anuj ab kya soch

raha hai..bacha apne badi bahan ko ..maar daal iss harmi ko.

"Raj …chod mere didi ko.." Me jor se garja na jane muj me Itni jaan

kaha se aa gaye thi.

Ek baar to Raj bhi dar gaya tha.par Anjali didi jaise jawan ko

khubsurat ladki ko wo itnaa karebb akkar kaise chod saktaa thaa.

"tu chup chaap ja kar uppar baitha jaa..nahi to teri gand bhi maar

lunga aaj main…"Raj didi ki choot par lund lagata hua bola. Apne chut

par lund ko mehsoos karte hi didi ki aankhi dar se fail gaye aurroote

hue mere tarf deek kar boli.." Anuj mujhe batchaa le .is darindee

se….." Mere leye itna kafi tha aur pass ek lohi ko rod ko maine apne

hath me leya aur…

"Aaaaaahhhh……………"

Ek awaj hamre ghar me gung gayeee ye awaj Raj ki thi uske ssaar se

khone nikalne laga thaa..kyonki maine wo rod uskes aar par maar de

thi. Mera yee roop dekh Raj ke to toote hi udd gaye woo apne saar ko

pakad hamre ghar se bhag gaya..Aur didi roote hue mere gale lag gaye

mujhe bhi ronaa aa gaya mujhe apne galti kaa ab aahans ho gaya thaa..

Dosto Uus raat maine didi ko ab taak jo bhi hua thaa wo sare baate

bataa dee. Me didi ke paas baitha ye sab bata raha thaa aur roo raha

thaa .didi ne mujhe pyaarse apne sene se laga leyaa. Aur boli ." koi

baat nahi Anuj ..mujhe kushi hai tune mujhe wo sare baate bataayee…aur

aaj joo tune mere leyaa kyaa usse pata chalta hai kit u mujhe kitna

peyar karta hai…." Anjali dii ki ankho se bhi aasu tapak rahi thi.

Phir didi ne mera sar apne sene se uthar kar apne hatho me leyaa .Didi

ke mulaayam hatho ki narmahat mujhe bahut sakun dee rahi thi..Ham dono

ab ek dusare ki annkho mai dekh rahi thi..

" pagle ajar tu mujhe itna peyar karta thaa to tune mujhe ye sab pahle

kyo nahi kaha…Ham dono lagtar ek dusare ke akho me dekh rahi thi dono

ke ankhi asuoo se naam thii..

" Tujko me ek baat kaho" Didi boli

"ji..boleye" Me didi ki khubsurrat akkho ko goor se dikhaataa hua bola

"I LOVE YOU….." yekahte hue Anjali didi thoda agge ke tarf jhuke aur

unhone apne kapaate hue hoth mere hotho par rakh deyee.

"I LOVE YOU TOO….." ise ke sath mere hoth khule aur didi ki garm garm

jibh mere muh ko shukreyaa bolne ke leye mere muh ke andar aa gaya.

Raat ke 1 baje thi bahar joro se baresh ho rahi thi ..jor dar bigleyaa

kadak rahi thi..aur andar room me do jism ek jaan ho rahi thi. Mere

aur didi ke kapde nechi farsh par pade thi..aur mera nanja badan

Anjali didi ke nange badan ke uppar lipta hua agee pechi ho raha thaa.

Ham dono ek dusare ke undhir mano sama jana cha rahi thi. Aur tabhii

'Aaahhhhiishhhhhhh……….ssihhhhh……"

yeawaj hamdono ke muh se ek sath nikale jiska mutlab thaa ki mane

Anjali didi ko ladki se aurat aur khud ko ladke se murd bana diya

thaa. Didi ko is baat ka sakoon thaa ki unki virginity maine le aur

mujhe is baat ka ki mere virginity duneya ki sabse khobsurat ladki

yani meri Anjali nee.

Dosto ab jab bhi ye saree baate mere jehaan me aate hai to mujhe lagta

hai ki ye jindagi vakeye me ek UNJAN RASTA hi to hai.

*********** THI END ************