सेक्सी हवेली का सच compleet

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories ,erotic stories. Visit mz.skoda-avtoport.ru
raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: सेक्सी हवेली का सच

Unread post by raj.. » 17 Dec 2014 12:26

"आप ही की तरह हम भी ये कोशिश कर रहे हैं के हवेली को फिर पहले की तरह बसा सकें. कुच्छ लोगों से बात करी है. कल से हमारी ज़मीन पर फिर से काम शुरू हो जाएगा. वहाँ फिर से खेती होगी. और हमने फ़ैसला किया है के खेती के सिवा हम और भी दूसरा कारोबार शुरू करेंगे."

"दूसरा कारोबार?" रूपाली ने उनके सामने बैठते हुए पुचछा

"हां सोचा है के एक कपड़े की फॅक्टरी लगाएँ. काफ़ी दिन से सोच रहे थे. आज उस सिलसिले में पहला कदम भी उठाया है. वकील और फॅक्टरी लगाने के लिए एक इंजिनियर से भी मिलके आए हैं" ठाकुर ने जवाब दिया

"ह्म .... "रूपाली मुस्कुराते हुए बोली.उसने अपना घूँघट हटा लिया था क्यूंकी पायल आस पास नही थी "आपको बदलते हुए देखके अच्छा लग रहा है"

"ये आपकी वजह से है" ठाकुर ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया "और एक और चीज़ करके आए हैं हम आज. वो हमने आपके लिए किया है"

"क्या" रूपाली ने फ़ौरन पुचछा

"वो हम आपको कल बताएँगे. और ज़िद मत करिएगा. हमारे सर्प्राइज़ को सर्प्राइज़ रहने दीजिए. कल सुबह आपको पता चल जाएगा"

ठाकुर ने पहले ही ज़िद करने के लिए मना कर दिया था इसलिए रूपाली ने फिर सवाल नही किया. अचानक उसके दिमाग़ में कुच्छ आया और वो ठाकुर की तरफ देखती हुई बोली

"उस लाश के बारे में कुच्छ पता चला?"

लाश की बात सुनकर ठाकुर की थोड़ा संगीन हुए

"नही. हम इनस्पेक्टर ख़ान से भी मिले थे. वो कहता है के सही अंदाज़ा तो नही पर काफ़ी पहले दफ़नाया गया था उसे वहाँ." ठाकुर ने कहा

"आपको कौन लगता है?" रूपाली ने पुचछा

"पता नही" ठाकुर ने लंबी साँस छ्चोड़ते हुए बोले " हमारे घर से ना तो आज तक कोई लापता हुआ और ना ही ऐसी मौत किसी को आई तो यही लगता है के घर में काम करने वाले किसी नौकर का काम है."

"आपका कोई दूर का रिश्तेदार भी तो हो सकता है" रूपाली ने शंका जताई

"हमारे परदादा ने ये हवेली बनवाई थी. उनकी सिर्फ़ एक औलाद थी, हमारे दादा जी और हमारे दादा की भी एक ही औलाद थी,हमारे पिताजी.तो एक तरह से हमारा पूरा खानदान इसी हवेली में रहा है. इस हवेली से बाहर हमारे कोई परिवार नही रहा." ठाकुर ने जवाब दिया तो पायल को थोड़ी राहत सी महसूस हुई

"हवेली के आस पास बाउंड्री वॉल के अंदर ही इतनी जगह है के ये मुमकिन है के हादसा हुआ और किसी को कानो कान खबर लगी. किसी ने लाश को कोने में ले जाके दफ़ना दिया और वहाँ जबसे हवेली बनी है तबसे हमेशा कुच्छ ना कुच्छ उगाया गया है. पहले एक आम का छ्होटा सा बाग हुआ करता था और फिर फूलों का एक बगीचा. इसलिए कभी किसी के सामने ये हक़ीक़त खुली नही." ठाकुर ने कहते हुए टीवी बंद कर दिया और संगीन आवाज़ में रूपाली से बात करने लगे

"ऐसा भी तो हो सकता है के ये काम किसी बाहर के आदमी का हो जिससे हमारा कोई लेना देना नही" रूपाली बोली

"मतलब?" ठाकुर ने आगे को झुकते हुए कहा

"इस हवेली में पिच्छले 10 साल से सिर्फ़ मैं और आप हैं और एक भूषण काका. यहाँ कोई आता जाता नही बल्कि लोग तो हवेली के नाम से भी ख़ौफ्फ खाते हैं. तो ये भी तो हो सकता है के इसी दौरान कोई रात को हवेली में चुपचाप आया और लाश यहाँ दफ़नाके चला गया. ये सोचकर के क्यूंकी हवेली में कोई आता नही तो लाश का पता किसी को नही चलेगा." रूपाली ने कहा

"हो तो सकता है" ठाकुर ने जवाब दिया "पर उस हालत में हवेली के अंदर लाश क्यूँ? इस काम के लिए तो लाश को कहीं जंगल में भी दफ़ना सकता था"

"हां पर उस हालत में लाश मिलने पर ढूँढा जाता के किसकी लाश है. पर हवेली में लाश मिलने पर सारी कहानी हवेली के आस पास ही घूमके रह जाती जैसा की अब हो रहा है" रूपाली ने कहा तो ठाकुर ने हां में सर हिलाया

कह तो आप सही रही हैं. जो भी है, हम तो ये जानते हैं के हमारी हवेली में कोई बेचारी जान कब्से दफ़न थी. उसके घरवाले पर ना जाने क्या बीती होगी" ठाकुर सोफे पर आराम से बैठते हुए बोले

"बेचारी?" रूपाली ने फ़ौरन पुचछा

"हां हमने आपको बताया नही?" ठाकुर ने कहा "वो ख़ान कहता है के वो लाश किसी औरत की थी."

सारी शाम रूपाली के दिमाग़ में यही बात चलती रही के हवेली में मिली लाश किसी औरत की थी. वो यही सोचती रही के लाश किसकी हो सकती है. जब कुच्छ समझ ना आया तो उसने फ़ैसला किया के भूषण और बिंदिया से इस बारे में बात करेगी के गाओं से पिच्छले कुच्छ सालों में कोई औरत गायब हुई है क्या? पर फिर उसे खुद ही अपना ये सवाल बेफ़िज़ूल लगा. जाने वो लाश कब्से दफ़न है. किसको याद है के गाओं में कौन है और कौन नही.

आख़िर में उसने इस बात को अपने दिमाग़ से निकाला तो बेसमेंट में रखे बॉक्स की बात उसके दिमाग़ में अटक गयी. सोच सोचकर रूपाली को लगने लगा के उसका सर दर्द से फॅट जाएगा.

शाम का खाना खाकर वो अपने कमरे की तरफ बढ़ी. ठाकुर अपने कमरे में पहले ही जा चुके थे. पायल और भूषण किचन की सफाई में लगे हुए थे. रूपाली सीढ़ियाँ चढ़ ही रही थी के बाहर एक गाड़ी के रुकने की आवाज़ सुनकर उसके कदम थम गये. थोड़ी ही देर बाद तेज हवेली में दाखिल हुआ.

वो नशे में धुत था. कदम ज़मीन पर पड़ ही नही रहे थे. उसकी हालत देखकर रूपाली को हैरानी हुई के वो कार चलाकर घर तक वापिस कैसे आ गया. वो चलता हुआ चीज़ों से टकरा रहा था. ज़ाहिर था के उसे सामने की चीज़ भी सॉफ दिखाई नही दे रही थी.

सीढ़ियाँ चढ़कर तेज रूपाली की तरफ आया. उसका कमरे भी रूपाली के कमरे की तरह पहले फ्लोर पर था. रूपाली उसे देखकर ही समझ गयी के वो सीढ़ियाँ चढ़ने लायक हालत में नही है. अगर कोशिश की तो नीचे जा गिरेगा. वो सीढ़ियाँ उतरकर नीचे आई और तेज को सहारा दिया.

उसने एक हाथ से तेज की कमर को पकड़ा और उसे खड़े होने में मदद की. तेज उसपर झूल सा गया जिस वजह से खुद रूपाली भी गिरते गिरते बची.उसने अपने कदम संभाले और तेज को सहारा देकर सीढ़ियाँ चढ़नी शुरू की. तेज ने उसके कंधे पर हाथ रखा हुआ था. रूपाली जानती थी के उसे इतना भी होश नही के इस वक़्त वो उसे सहारा दे रही है और मुमकिन है के वो सुबह तक सब भूल जाएगा.

मुश्किल से सीढ़ियाँ चढ़ कर दोनो उपेर पहुँचे. रूपाली तेज को लिए उसके कमरे तक पहुँची और दरवाज़ा खोलने की कोशिश की. पर दरवाज़ा लॉक्ड था.

"तेज चाबी कहाँ है?"उसने पुचछा पर वो जवाब देने की हालत में नही था.

रूपाली ने तेज को दीवार के सहारे खड़ा किया और उसकी जेबों की तलाशी लेने लगी. तेज उसके सामने खड़ा था और उसका जिस्म सामने खड़ी रूपाली पर झूल सा रहा था. अचानक तेज ने अपने हाथ उठाए और सीधा रूपाली की गान्ड पर रख दिए.

रूपाली उच्छल पड़ी और तभी उसे तेज की जेब में रखी चाभी मिल गयी. उसने कमरे का दरवाज़ा खोला और सहारा देकर तेज को अंदर लाई.

बिस्तर पर लिटाकर रूपाली तेज के जूते उतारने लगी.उसने उस वक़्त एक नाइटी पहेन रखी और नीचे ना तो ब्रा था ना पॅंटी. तेज के सामने झुकी होने के कारण उसकी नाइटी का गला सामने की और झूल रहा था और उसकी दोनो छातियाँ झूलती हुई दिख रही थी.

नशे में धुत तेज ने गर्दन उठाकर जूते उतारती रूपाली की तरफ देखा. रूपाली ने भी नज़र उठाकर उसकी और देखा तो पाया तो तेज की नज़र कहीं और है. तभी उसे अपनी झूलती हुई छातियों का एहसास हुआ और वो समझ गयी के तेज क्या देखा रहा. उसने अपनी नाइटी का गला पकड़कर फ़ौरन उपेर किया पर तब्भी तेज ने ऐसी हरकत की जिसके लिए वो बिल्कुल तैय्यार नही थी.

उसने रूपाली के दोनो हाथ पकड़े और उसे अपने साथ बिस्तर पर खींच लिया. इससे पहले के रूपाली कुच्छ समझ पाती या कुच्छ कर पाती वो उसके उपेर चढ़ गया और हाथों से पकड़कर उसकी नाइटी उपेर खींचने लगा

"तेज क्या कर रहे हो?" रूपाली फ़ौरन गुस्से में बोली पर तेज कहाँ सुन रहा था. वो तो बस उसकी नाइटी उपेर खींचने में लगा हुआ.

"खोल ना साली" तेज नशे में बड़बड़ाया

उसकी बात सुनकर रूपाली समझ गयी के वो उसे उन्हीं रंडियों में से एक समझ रहा था जिन्हें वो हर रात चोदा करता था. हर रात वो उसे सहारा देती थी और वो उन्हें चोद्ता था पर फ़र्क़ सिर्फ़ ये था के आज रात वो घर पे था और सहारा रूपाली दे रही थी.

रूपाली ने पूरी ताक़त से तेज को ज़ोर से धकेल दिया और वो बिस्तर से नीचे जा गिरा. रूपाली बिस्तर से उठकर उसकी तरफ गुस्से से मूडी ताकि उसे सुना सके पर तेज ने एक बार "ह्म्‍म्म्म" किया और नीचे ज़मीन पर ही करवट लेकर मूड सा गया. रूपाली जानती थी के वो नशे की वजह से नींद के आगोश में जा चुका था. उसने बिस्तर से चादर उठाई और तेज के उपेर डाल दी.

अपने कमरे में जाकर रूपाली बिस्तर पर लुढ़क गयी. बिस्तर पर लेटकर वो अभी जो हुआ था उस बारे में सोचने लगी. उसे 2 बातों की खुशी थी. एक तो ये के आज रात तेज घर लौट आया था. और दूसरा उसकी हरकत से ये बात सही साबित हो गयी थी के उसके लिए अगर यहीं घर में ही चूत का इंतज़ाम हो जाए तो शायद वो अपना ज़्यादा वक़्त घर पे ही गुज़ारने लगे.

हल्की आहट से रूपाली की आँख खुली. उसने कमरे के दरवाज़े की तरफ नज़र की तो देखा के ठाकुर अंदर आ रहे थे. रूपाली ने फ़ौरन नज़र अपने बिस्तर के पास नीचे ज़मीन पर डाली. पायल वहाँ नही थी. आज रात वो अपने कमरे में ही सो गयी थी. रूपाली ने राहत की साँस ली और ठाकुर की तरफ देखकर मुस्कुराइ.

"पता नही कब आँख लग गयी" कहते हुए उसने घड़ी की तरफ नज़र डाली. रात के 11 बज रहे थे.

"आप आई नही तो हमें लगा के पायल आज भी आपके कमरे में ही सो रही है इसलिए हम ही चले आए" ठाकुर ने उसके करीब आते हुए कहा

"पायल का नाम बड़ा ध्यान है आपको" रूपाली ने मुस्कुराते हुए कहा तो जवाब में ठाकुर भी मुस्कुरा दिए.

रूपाली बिस्तर पर अपनी टांगे नीचे लटकाए बैठी थी. ठाकुर उसके सामने आकर खड़े हुए और झुक कर उसके होंठों को चूमा.

"हमें तो सिर्फ़ आपका नाम ध्यान है" ठाकुर ने कहा और हाथ रूपाली की छाती पर रखकर दबाने लगे. रूपाली ने ठाकुर के होंठ से होंठ मिलाए रखे और नीचे उनका पाजामा खोलने लगी. नाडा खुलते ही पाजामा सरक कर नीचे जा गिरा और लंड उसके हाथों में आ गया.

फिर कमरे में वासना का वो तूफान उठा जो दोनो से संभाला नही गया. कुच्छ ही देर बाद रूपाली ठाकुर के उपेर बैठी उनके लंड पर उपेर नीचे कूद रही थी. उसकी चूचियाँ उसके जिस्म के साथ साथ उपेर नीचे उच्छल रही थी जिन्हें ठाकुर लगातार ऐसे दबा रहे थे जैसे आटा गूँध रहे हों.

"क्या बाआआआत है आजज्ज मेरी ककककचातियों से हाआआआथ हट नही रहे आआआपके?" रूपाली ने महसूस किया था के आज ठाकुर का ध्यान उसकी चूचियों पर कुच्छ ज़्यादा ही था

"कहीं कल रात की देखी पायल की तो याद नही आ रही?" वो लंड पर उपेर नीचे होना बंद करती हुई बोली और मुस्कुराइ

जवाब में ठाकुर ने उसे फ़ौरन नीचे गिराया और फिर चुदाई में लग गये. कमरे में फिर वो खेल शुरू हो गया जिसमें आख़िर में दोनो ही खिलाड़ी जीत जाते हैं और दोनो ही हार जाते हैं.

एक घंटे की चुदाई के बाद ठाकुर और रूपाली बिस्तर पर नंगे पड़े हुए ज़ोर ज़ोर से साँस ले रहे थे.

"हे भगवान" रूपाली अपनी चूचियों पर बने ठाकुर के दांतो के निशान देखते हुए बोली "आज इनपर इतनी मेहरबानी कैसे?"

"ऐसे ही" ठाकुर ने हस्ते हुए कहा

"ऐसे ही या कोई और वजह? कहीं किसी और का जिस्म तो ध्यान नही आ रहा था? जो कल तो यहाँ था पर आज आपको वो दीदार नही हुआ?" रूपाली ने उठकर बैठते हुए कहा

तभी घड़ी में 12 बजे

ठाकुर उठे और उठकर रूपाली के होंठ चूमे

"क्या हुआ?" रूपाली अचानक दिखाए गये इस प्यार पर हैरान होती बोली

"जनमदिन मुबारक हो" ठाकुर ने कहा

रूपाली फ़ौरन दोबारा घड़ी की तरफ देखा और डेट याद करने की कोशिश की. आज यक़ीनन उसका जनमदिन था और वो भूल चुकी थी. एक दिन था जब वो बेसब्री से अपने जमदीन का इंतेज़ार करती थी और पिच्छले कुच्छ सालों से तो उसे याद तक नही रहता था के कब ये दिन आया और चला गया. उसके पिच्छले जनमदिन पर भी उसे तब याद आया जब उसके माँ बाप और भाई ने फोन करके उसे बधाई दी थी

"मुझे तो पता भी नही था के आपको मालूम है मेरा जनमदिन" रूपाली ने कहा

"मालूम तो हमेशा था" ठाकुर ने जवाब दिया "माफी चाहते हैं के आज से पहले कभी हमने आपको ना कोई तोहफा दिया और ना ही इस दिन को कोई एहमियत"

तोहफा सुनते ही रूपाली फ़ौरन बोली

"तो इस बार भी कहाँ दिया अब तक?"

"देंगे. ज़रूर देंगे. बस कल सुबह तक का इंतेज़ार कर लीजिए" ठाकुर ने मुस्कुराते हुए कहा

थोड़ी देर बाद वो उठकर अपने कमरे में चले गये और रूपाली नींद के आगोश में

अगले दिन सुबह रूपाली उठकर नीचे आई ही थी के उसके भाई का फोन आ गया

"जनमदिन मुबारक हो दीदी" वो दूसरी तरफ फोन से लगभग चिल्लाते हुए बोला "बताओ आपको क्या तोहफा चाहिए?"

"मुझे कुच्छ नही चाहिए" रूपाली ने भी हासकर जवाब दिया "मम्मी पापा कहाँ हैं?"

उसे थोड़ी देर अपने माँ बाप से बात की. वो लोग खुश थे के रूपाली इस साल अपने जनमदिन पर खुश लग रही थी. वरना पहले तो वो बस हां ना करके फोन रख देती थी. उसके बाद रूपाली ने कुच्छ देर और अपने भाई इंदर से बात की जिसने उसे बताया के वो उससे कुच्छ वक़्त के बाद मिलने आएगा.

फोन रूपाली ने रखा ही था के उसके पिछे से तेज की आवाज़ आई

"जनमदिन मुबारक हो भाभी"

वो पलटी तो तेज खड़ा मुस्कुरा रहा था. ज़ाहिर था के उसे अपनी कल रात की हरकत बिल्कुल याद नही थी

"शुक्रिया" रूपाली ने भी उस बात को भूलकर हस्ते हुए जवाब दिया

"तो क्या प्लान है आज का?" तेज वहीं बैठते हुए बोला

"मैं कोई स्कूल जाती बच्ची नही जो अपने जनमदिन पर कोई प्लान बनाऊँगी. कोई प्लान नही है." रूपाली उसके सामने बैठते हुए बोली "वैसे आप क्या कर रहे हैं आज?"

"वो जो आपने मुझे कल करने को कहा था" तेज ने जवाब दिया "माफ़ कीजिएगा कल कहीं काम से चला गया था. पर वाडा करता हूँ के आज से हवेली की सफाई का काम शुरू हो जाएगा"

रूपाली तेज की बात सुनकर दिल ही दिल में बहुत खुश हुई. कोई भी वजह हो पर वो उसकी बात सुनता ज़रूर था.

"चाय लोगे?" रूपाली ने तेज से पुचछा. उसने हां में सर हिला दिया

थोड़ी ही देर बाद ठाकुर भी सोकर जाग गये. बाहर आकर उन्होने रूपाली को फिर से जनमदिन की बधाई दी. क्यूंकी घर में तेज और पायल भी थे इसलिए रूपाली ने अब अपना घूँघट निकाल लिया था

"आइए आपको आपका तोहफा दिखाते हैं" ठाकुर ने जवाब दिया

वो उसे बाहर लेकर उस जगह पर पहुँचे जहाँ उनकी गाड़ी खड़ी रहती थी.

कवर में ढाकी हुई अपनी कार की तरफ इशारा करते हुए वो बोले

"आपका तोहफा बेटी"

रूपाली को कुच्छ समझ नही आया. ठाकुर उसे अपनी 11 साल पुरानी गाड़ी तोहफे में दे रहे हैं. वो हैरानी से ठाकुर की तरफ देखने लगी

"आपकी कार?"

"नही" ठाकुर कार की तरफ बढ़े और कवर खींच कर उतार दिया "आपकी कार"

रूपाली की आँखें खुली रह गयी. कवर के नीचे ठाकुर की पुरानी कार नही बल्कि चमकती हुई एक नयी बीएमडब्ल्यू खड़ी थी

"ये कब लाए आप?" वो कार के पास आते हुए बोली

"कल शाम जब आप नीचे बेसमेंट में थी" ठाकुर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया

"और आपकी कार?"रूपाली ने चारों तरफ नज़र दौड़ाई

"वो बेच दी. हमने सोचा के आप ये गाड़ी चलाएंगी तो हम आपकी गाड़ी ले लेंगे" ठाकुर ने अपनी जेब से चाबियाँ निकालते हुए कहा "टेस्ट राइड हो जाए?"

रूपाली ने जल्दी से चाभी ठाकुर से ली और एक छ्होटे बच्चे की तरह खुश होती कार का दरवाज़ा खोला. उसकी खुशी में ज़ोर से चिल्लाने की आवाज़ सुनकर तेज भी बाहर आ गया था और खड़ा हुआ उन्हें देख रहा था.

रूपाली उसे देखकर बोली

"तेज देखो हमारी नयी कार " वो अब सच में किसी स्कूल जाती बच्ची की तरह खुशी से उच्छल रही थी. उसे ये भी ध्यान नही था के उसका घूँघट हट गया है और वो ठाकुर के सामने बिना पर्दे के थी जो तेज देख रहा था.

तेज ने रूपाली की बात पर सिर्फ़ अपनी गर्दन हिलाई और पलटकर फिर हवेली में चला गया. उसका यूँ चले जाना रूपाली को थोड़ा अजीब सा लगा. जाने क्यूँ उसे लग रहा था के तेज को ठाकुर को यूँ कार लाकर रूपाली को देना पसंद नही आया.

अगले एक घंटे तक रूपाली कार लिए यहाँ से वहाँ अकेले ही भटकती रही. उसने ठाकुर को भी आपे साथ नही आने दिया था. अकेले ही कार लेकर निकल गयी थी.

तकरीबन एक घंटे बाद वो हवेली वापिस आई और ठाकुर के बुलाने पर उनके कमरे में आई.

"ये रहा आपका दूसरा तोहफा" ठाकुर ने एक एन्वेलप उसकी तरफ बढ़ते हुए कहा

"ये क्या है?" रूपाली ने एन्वेलप की तरफ देखा

"हमारी वसीयत जो हमने बदल दी है. इसमें लिखा है के अगर हमें कुच्छ हो जाए तो हमारा सब कुच्छ आपको मिलेगा." ठाकुर ने कहा

"पिताजी" रूपाली वहीं कुर्सी पर बैठ गयी. उसे यकीन सा नही हो रहा था

"क्या हुआ" ठाकुर ने पुचछा "ग़लत किया हमने कुच्छ?"

"हां" रूपाली ने जवाब दिया. "आपको ऐसा नही करना चाहिए था"

"पर क्यूँ?" ठाकुर उसके करीब आते हुए बोले

"क्यूंकी आपकी 3 औलाद और हैं. दोनो बेटे तेज और कुलदीप और आपकी एकलौती बेटी कामिनी. उनका हक़ इस जायदाद पर हमसे ज़्यादा है."

वो हम नही जानते" ठाकुर बोले "हमने अपना सब कुच्छ आपके नाम कर दिया है. अगर आप उन्हें कुच्छ देना चाहती हैं तो वो आपकी मर्ज़ी है. हम समझते हैं के ये फ़ैसला आपसे बेहतर कोई नही कर सकता"

"नही पिताजी. आपको ये वसीयत बदलनी होगी" रूपाली ने कहा तो ठाकुर इनकार में गर्दन हिलाने लगे

"ये अब नही बदलेगी हमारा जो कुच्छ है वो अब आपका है. अगर आप बाँटना चाहती हैं तो कर दें. और वैसे भी ....." ठाकुर ने अपनी बात पूरी नही की थी के रूपाली ने हाथ के इशारे से उन्हें चुप करा दिया.

ठाकुर ने हैरानी से उसकी तरफ देखा. रूपाली ने इशारा किया के दरवाज़े के पास खड़ा कोई उनकी बात सुन रहा है. रूपाली चुप चाप उतार दरवाज़े तक आई और हल्का सा बंद दरवाज़ा पूरा खोल दिया. बाहर कोई नही था.

"वहाँ हुआ होगा आपको" ठाकुर ने कहा पर रूपाली को पूरा यकीन था के उसने आवाज़ सुनी है.

"शायद" रूपाली ने कहा और फिर ठाकुर की तरफ पलटी

"आपको हमारे लिए ये वसीयत बदलनी होगी. या फिर अगर आप चाहते हैं के हम जायदाद आगे बराबर बाँट दे तो वकील को बुलवा लीजिए" रूपाली ने कहा

"ठीक है. हम उसे फोन करके बुलवा लेंगे. अब खुश?" ठाकुर ने हाथ जोड़ते हुए कहा

रूपाली धीरे से मुस्कुराइ और हाथ में एन्वेलप लिए कमरे से निकल गयी.

raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: सेक्सी हवेली का सच

Unread post by raj.. » 17 Dec 2014 12:28

सेक्सी हवेली का सच -पार्ट- 14



बाकी का दिन हवेली की सफाई में ही गुज़र गया. तेज गाओं से कुच्छ आदमी लेकर आ गया और वो सारा दिन हवेली के आस पास उगे हुए जंगल को काटकर सॉफ करने में लगे रहे. पूरा दिन काम चलने के बाद भी हवेली के कॉंपाउंड का सिर्फ़ एक हिस्सा ही सॉफ हो सका. वजह थी के गाओं से सिर्फ़ 3 आदमी ही हवेली में आकर काम करने को राज़ी हुए थे. बाकियों ने तो हवेली में काम करने के नाम से ही इनकार कर दिया था.

तेज के कहने पर खुद पायल भी उन आदमियों के साथ मिलकरकाम करने लगी. दिन ढलने पर वो आदमी काम अगले दिन जारी रखने की बात कहके अपने अपने घर चले गये.

रात को खाने की टेबल पर ठाकुर और रूपाली अकेले ही थे. तेज किसी काम का बहाना करके घर से निकला था और अब तक लौटा नही था और रूपाली ये बात जानती थी के वो रात भर अब घर नही आने वाला था. वो खुद सारा दिन बिंदिया की राह देखती रही थी पर बिंदिया नही आई थी. रूपाली ने दिल में फ़ैसला किया के कल और बिंदिया का इंतेज़ार करेगी और अगर वो नही आई तो उससे एक आखरी बार बात करके किसी और औरत को घर में काम के बहाने रख लेगी जो तेज को बिस्तर पर खुश रखने के बहाने घर पर रोक सके. पर उसके सामने मुसीबत दो थी. एक तो ये के किसी ऐसी खूबसूरत औरत को ढूँढना जिसपर तेज खुद ऐसे ही नज़र डाले जैसे उसने बिंदिया पर डाली थी और दूसरी मुसीबत थी के अगर कोई ऐसी औरत मिल भी जाए तो उसे तेज का बिस्तर गरम करने के लिए राज़ी कैसे करे.

रूपाली अपनी ही सोच में खाना ख़तम करके उठ ही रही थी के पायल अंदर आई.

"हो गया मालकिन" उसने रूपाली से कहा

हवेली में सारा दिन कॅटाइ और सफाई होने के कारण हवेली के बिल्कुल सामने कॉंपाउंड में काफ़ी सूखे पत्ते जमा हो गये थे. हवा तेज़ थी इसलिए रूपाली को डर था के वो उड़कर हवेली के अंदर ना आ जाएँ इसलिए उसने पायल को कहा था के अंधेरा होने से पहले हवेली के दरवाज़े के ठीक सामने से पत्ते हटा दे. उसने सोचा था के काम जल्दी हो जाएगा पर बेचारी पायल को काम ख़तम करते करते अंधेरा हो गया था. वो काफ़ी थॅकी हुई भी लग रही थी. पायल को उसपर तरस आ गया.

"भूख लगी होगी तुझे. जा पहले हाथ धोकर खाना खा ले. नहा बाद में लेना. सारे दिन से कुच्छ नही खाया तूने." उसने पायल से कहा

पायल हां में सर हिलाती किचन में दाखिल हो गयी. वो वहीं बैठकर खाना खा लेती थी.

खाना ख़तम करके ठाकुर उठकर अपने कमरे में चले गये. जाने से पहले उन्होने एक आखरी नज़र रूपाली पर डाली और उस नज़र में सॉफ ये इशारा था के वो रात को रूपाली के कमरे में आ जाएँगे.

रूपाली किचन में दाखिल हुई तो सामने नीचे बैठी पायल खाना खा रही थी. उसने सलवार कमीज़ पहेन रखा था. वो नीचे झुकी हुई ज़मीन पर बैठी खाना खा रही थी. पायल उसके करीब जाकर खड़ी हुई तो उपेर से पायल का क्लीवेज सॉफ नज़र आया. देखते ही पायल के दिमाग़ में ख्याल आया के जब तक बिंदिया या कोई दूसरी औरत आती है, तब तक क्यूँ ना पायल कोई ही तैय्यार किया जाए. एक कच्ची कली चोदने को मिले तो तेज भला बाहर कही मुँह मारने को क्यूँ जाएगा. मॅन में ख्याल आते ही वो मुस्कुराइ. पायल को तैय्यार करना कोई मुश्किल काम नही था. जिस तरह से पायल बेसमेंट में उसके सामने नंगी होकर उसकी बाहों में आ गई थी उससे सॉफ ज़ाहिर था के जो आग माँ के जिस्म में है वही बेटी कोई भी तोहफे में मिली है. अगर पायल एक औरत के साथ अपना जिस्म मिला सकती है तो मर्द के साथ तो और भी ज़्यादा आसानी होगी. बस एक काम जो करना था वो था उसे तैय्यार करना जो रूपाली ने फ़ौरन सोच लिया के उसे कैसे करना है. वो आगे बढ़ी और किचन में कुच्छ ढूँढने लगी. उसे एक चीज़ की ज़रूरत थी जो उसके काम में मददगार साबित हो सकती थी और जल्दी ही वो चीज़ उसे मिल भी गयी.

"खाना ख़तम करके मेरे कमरे में आ जाना." उसने पायल से कहा और किचन से बाहर निकली.

भूषण भी काम ख़तम करके कॉंपाउंड में बने अपने छ्होटे से कमरे की तरफ जा रहा था. रूपाली उसे देखकर मुस्कुराइ और अपने कमरे में चली गयी.

थोड़ी ही देर बाद पायल भी रूपाली के पिछे पिछे उसके कमरे में आ गयी.

"जी मालकिन?" उसने रूपाली से पुचछा

"कितनी गंदी हो रखी है तू. ऐसे मत आ. जा पहले नाहके आ" रूपाली ने उसे कहा.

पायल पलटकर जाने लगी तो रूपाली ने उसे रोक लिया

"एक काम कर. यहीं मेरे बाथरूम में नहा ले."

"आपके बाथरूम में?" रूपाली ने पुचछा

"हां मेरे बाथरूम में ही नहा ले. और एक बात बता. तू साडी नही पेहेन्ति?"

पायल ने इनकार में सर हिलाया

"मेरे पास है ही नही"

"रुक ज़रा" कहती हुई रुआली अपनी अलमारी की तरफ बढ़ी और अपनी एक पुरानी साडी निकाली. साडी पुरानी ज़रूर थी पर देखने में बहुत सुंदर थी.

"ये तू रख ले" रूपाली ने कहा तो पायल खुशी से उच्छल पड़ी

"सच मालकिन?" पायल झट से साडी पकड़ते हुए बोली

"हां. आज से तेरी हुई" रूपाली ने सारी के साथ का ब्लाउस और पेटीकोट भी पायल को देखते हुए कहा "अब जाके नहा ले. फिर तेरे से एक ज़रूरी बात करनी है"

पायल हां में सर हिलाती हुई बाथरूम की तरफ बढ़ी. रूपाली भी उसके पिछे पिछे बाथरूम में आ गयी और वहाँ रखी हुई चीज़ें दिखाने लगी

"ये शॅमपू है और ये कंडीशनर. और ये बॉडी लोशन है" उसने पायल से कहा

"ये सब क्या है मालकिन? साबुन कहाँ है?" पायल ने बाथरूम में चारों और देखते हुए पुचछा

रूपाली हल्के से मुस्कुरा दी.

"तूने ये सब कभी इस्तेमाल नही किया ना? चल मैं बताती हूँ" उसने कहाँ तो पायल उसे देखने लगी. जैसे रूपाली के बात आगे कहने का इनेज़ार कर रही हो

"ऐसे क्या देख रही है?" रूपाली ने कहा "नहाना शुरू कर. मैं बताती रहूंगी के क्या कैसे लगाना है. पहली बार मैं बता दूँगी बाद में तू खुद ही कर लेना."

पायल एकटूक उसे देखने लगी

"आपके सामने?" उसने रूपाली से पुचछा

"हां तो क्या हुआ?" रूपाली ने जवाब दिया "तेरे पास ऐसा क्या है जो मैने नही देखा?"

"शरम आती है मालकिन" पायल ने सर झुकाते हुए बोला

"अरे मेरी शर्मीली बन्नो अब टाइम खराब मत कर. चल कपड़े उतार जल्दी से" रूपाली ने थोड़ा आगे बढ़ते हुए कहा

"दरवाज़ा?" पायल ने बाथरूम के खुले हुए दरवाज़े की तरफ इशारा करते हुए कहा

"कमरे के अंदर का दरवाज़ा बंद है. कोई नही आएगा. चल जल्दी कर. सारी रात यहाँ खड़े खड़े गुज़ारनी है क्या?"

रूपाली ने कहा तो पायल ने धीरे से अपनी कमीज़ उतारनी शुरू की.

कुच्छ ही देर बाद पायल बाथरूम में मादरजात नंगी खड़ी थी. रूपाली ने उसे सर से पावं तक एक बार देखा

"तू उमर से भले बच्ची हो पर तेरा जिस्म तो पूरी भरी हुई औरत को भी मात दे जाए" रूपाली ने कहा तो पायल शर्माके नीचे देखने लगी

"चल शवर के नीचे खड़ी हो जा" रूपाली ने कहा तो पायल शोवेर के नीचे खड़ी हो गयी और अपने जिस्म को पानी से भिगोने लगी.

बाथरूम में एक तरफ खड़ी रूपाली उसके हसीन जिस्म को देख रही थी. थोड़ी ही देर में पायल सर से लेकर पावं तक पूरी भीग गयी.

"हाथ आगे कर" रूपाली ने कहा तो पायल ने अपना हाथ आगे कर दिया. रूपाली ने उसके हाथ में शॅमपू डाल दिया

"अब इससे अपने बाल धो ताकि वो बाल लगें.तेरे सर पे उगी हुई झाड़ियाँ नही" उसने पायल से कहा

पायल अपने हाथ उठाकर अपने सर में शॅमपू लगाने लगी. हाथ उपेर होने से उसकी दोनो छातियों भी उपेर को हो गयी थी और हाथ की हरकत के साथ हिल रही थी. पायल की नज़र भी उसकी छातियों के साथ ही उपेर नीचे हो रही थी.

जब शॅमपू पूरे बालों पर लग गया तो रूपाली ने उसे धोने को कहा और फिर कंडीशनर लगाने को कहा. वो भी लगकर धुल गया.

"अब ये ले" रूपाली ने बॉडी वॉश की बॉटल आगे करते हुए कहा "इसे भी शॅमपू की तरह अपने हाथ पर निकाल और फिर साबुन की तरह अपने बदन पर लगा"

पायल ने बॉटल हाथ में ली और ढक्कन खोलकर जैसे ही बॉटल को दबाया तो बहुत सारा बॉडी वॉश उसके हाथ पर आ गिरा

"ओफहो बेवकूफ़" रूपाली ने आगे बढ़कर उसके हाथ से बॉटल ले ली "एक साथ इतना सारा नही. थोड़ा थोड़ा लेते हैं. अब जो हाथ में है उसे अपने बदन पर लगा"

रूपाली के कहने पर पायल ने सारा बॉडी वॉश अपने चेहरे पर लगा लिया और अगले ही पल सिसक पड़ी

"मालकिन आँख जल रही है"

"तो तुझे किसने कहा था के सारा मुँह पे रगड़ ले. धो इसे अब और यहाँ आके बैठ" रूपाली ने आगे बढ़कर नाल चालू किया

चेहरे से बॉडी वॉश धोकर पायल ने रूपाली की तरफ देखा

"अब यहाँ आके बैठ. मैं ही लगा देती हूँ" रूपाली ने कहा तो पायल झिझकति हुई वहीं बाथ टब के किनारे पर बैठ गयी. रूपाली आकर उसके पिछे खड़ी हुई और अपने हाथ में बॉडी वॉश लिया.

रूपाली ने सबसे पहले बॉडी वॉश पायल की छातियों पर ही लगाया और हाथों से उसकी छातियाँ मसल्ने लगी. पायल की दोनो चूचियाँ उसके हाथ के दबाव से हल्के हल्के दब रही थी. फिर इसी तरह से उसने पायल के पेट पर बॉडी वॉश लगाया और फिर उसकी टाँगो पर. इस सारे काम में रूपाली पायल को नहला कम रही थी उसके जिस्म को सहला ज़्यादा रही थी. उसकी टाँगो के बीच नमी आनी शुरू हो रही थी. सामने बैठी एक नंगी लड़की को देखकर उसके जिस्म में फिर वासना का तूफान ज़ोर मार रहा था. रूपाली के हाथ फिर पायल की चूचियों पर पहुँच गये और वो उसके सामने घुटनो पर बैठ गयी और दोनो हाथों से उसकी छातियाँ दबाने लगी.

"हो गया मालकिन" पायल ने धीमी आवाज़ में कहा पर रूपाली ने जैसे सुना ही नही. वो उसी तरह उसकी चूचियो पर हाथ फेरती रही. अचानक उसने पायल का एक निपल अपने उंगलियों में पकड़ा और धीरे से दबाया.

"आआहह "पायल ने सिसकारी भरी "दर्द होता है मालकिन. अब बस करिए. हो गया. मैं धो लेती हूँ"

रूपाली ने उसकी तरफ देखा और उठ खड़ी हुई. उसने पायल का हाथ पकड़कर उसे खड़ा किया और शवर के नीचे ले जाकर शवर ऑन कर दिया. पर इस बार पायल के साथ वो खुद भी पानी में भीग रही थी. वो शवर के नीचे से हटी नही. पायल दीवार की तरफ मुँह किए खड़ी थी और रूपाली उसके पिछे खड़ी उसकी कमर से बॉडी वॉश धो रही थी. वो खुद भी पानी में पूरी तरह भीग चुकी थी और कपड़े बदन से चिपक गये थे. उसके हाथ पायल की कमर से सरकते हुए उसकी गान्ड तक आए और रूपाली ने अपने दोनो हाथों से उसकी गान्ड को पकड़कर दबाया. दबाने से पायल भी ज़रा आगे को हुई और बिकुल दीवार के साथ जा लगी. रूपाली ने थोड़ा सा आगे होकर उसकी गर्दन को चूम लिया. उसे यकीन नही हो रहा था के वो खुद एक औरत होकर एक नंगी लड़की के जिस्म को चूम रही है पर उसके जिस्म मेी उठती लहरें उस इस बात का सबूत दे रही थी के उसे मज़ा आ रहा था. गले पर चूमती ही पायल सिहर उठी

"क्या कर रही हैं मालकिन?" उसने रूपाली से पुचछा

"ऐसे ही खड़ी रह" कहकर रूपाली थोड़ा पिछे हटी और अपनी सलवार और कमीज़ उतारकर एक तरफ फेंक दी. अगले ही पल उसकी ब्रा और पॅंटी भी उसके बाकी कपड़ो के साथ पड़े थे और रूपाली पूरी तरह नंगी होकर एक बार फिर पिछे से पायल के साथ चिपक गयी.

अपने नंगे जिस्म पर रूपाली का नंगा जिस्म महसूस हुआ तो पायल सिहर उठी

"मालकिन" उसके मुँह से निकला पर वो अपनी जगह से हिली

"घबरा मत" रूपाली अपना मुँह उसके कान के पास ले जाकर धीरे से बोली "अब तेरी तरह मैं भी बिल्कुल नंगी हूँ"

कहकर रूपाली ने एक बार फिर पायल को गर्दन पर चूमा.पायल चुप चाप दीवार से लगी खड़ी थी और पायल ने उसे पिछे से गर्दन और कमर की उपरी हिस्से पर चूमना शुरू कर दिया. उसके हाथ पायल के पुर जिस्म पर घूम रहे थे, सहला रहे थे. रूपाली खुद वासना के कारण पागल हुई जा रही थी. बिल्कुल किसी मर्द की तरह वो पायल से बिल्कुल चिपक कर खड़ी हो गयी और उसका नंगा जिस्म महसूस करने लगी. पायल रूपाली से कद में थोड़ी छ्होटी थी. रूपाली ने अपने घुटने थोड़े मोड और अपनी चूत पायल की गान्ड पर दबाई जैसे उसके सामने एक लंड लगा हो जिसे वो पायल की गान्ड में घुसा रही हो. इस हरकत ने उसके जिस्म पर ऐसा असर किया के उसे अपने घुटने कमज़ोर होते महसूस होने लगे और वो पायल को ज़ोर से पकड़कर उससे चिपक गयी और अपनी चूत को पायल की गान्ड पर रगड़ने लगी.

"ओह पायल" रूपाली हल्के से पायल के कान में बोली. उसके हाथ पायल की कमर से हटकर आगे आए और पायल की चूचियों को पकड़ लिया. चूचियाँ हाथ में आई ही थी के रूपाली ने उन्होने पूरी ताक़त से दबा दिया और अपनी चूचियाँ पायल की कमर पे रगड़ने लगी. चूचियाँ इतनी ज़ोर से दबी तो पायल फिर सिहर उठी

"मालकिन" वो भी बिल्कुल पायल के अंदाज़ में धीरे से बोली "क्या कर रही हैं आप?"

"मज़ा आ रहा है?" रूपाली ने उसी तरह उसकी चूचियाँ दबाते हुए पुचछा. नीचे से उसकी कमर ऐसे हिल रही थी जैसे पायल की गान्ड मार रही हो

पायल ने जवाब नही दिया

"बोल ना" रूपाली ने उसकी चूचियों पर थोड़ा दबाव और बढ़ाया पर पायल फिर भी नही बोली

रूपाली ने अपना एक हाथ उसकी छाती से हटाया और उसके पेट पर से होते हुए नीचे ले जाने लगी. हाथ जैसे ही टाँगो के बीच पहुँचा तो पायल ने अपनी टांगे कसकर बंद कर ली. रूपाली ने अपना हाथ उसकी चूत के उपेर की तरफ रखा और ज़ोर से रगड़ा.

"मज़ा आ रहा है?" उसने अपना सवाल दोहराया और हाथ ज़बरदस्ती पायल की टाँगो में घुसकर उसकी चूत की मुट्ठी में पकड़ लिया. इस बार पायल से भी बर्दाश्त नही हुआ.

"आआआआआआअहह मालकिन. बहुत अच्छा लग रहा है. क्या कर रही हैं आप?" वो हल्के से चिल्लाई

"तुझे जवान कर रही हूँ" रूपाली ने जवाब दिया और पायल को अपनी तरफ घुमाया "तुझे जवानी के मज़े लेना सीखा रही हूँ"

अब पायल और रूपाली एक दूसरे की तरफ चेहरा किए खड़ी थी. पायल की कमर दीवार से लगी हुई थी. दोनो की आँखें मिली और एक पल के लिए एक दूसरे को देखती रही. रूपाली ने पायल के चेहरे को गौर से देखा. उसकी आँखों में वासना के डोरे सारे नज़र आ रहे थे. रूपाली आगे बढ़ी और अपने होंठ पायल के होंठों पर रख दिया. उसका एक हाथ पायल की चूचियों पर और दूसरा सरक कर उसकी चूत पर पहुँच गया.

रूपाली ने पायल के होंठ क्या चूमे के पायल उसकी बाहों में आ गिरी. उसने अपनी दोनो बाहें रूपाली के गले में डाली और उससे लिपट गयी. रूपाली समझ गयी के उसका काम बन चुका है. वो पायल के पूरे चेहरे को चूमने लगी और चूमते हुए गले पर और फिर पायल की चूचियों पर आ गयी. एक हाथ अब भी पायल की चूत रगड़ रहा था. पाया की दोनो टाँगें काँप रही थी और उसकी आँखें बंद थी. दोनो हाथों से उसने अब भी रूपाली को पकड़ा हुआ था. रूपाली ने उसका एक निपल अपने मुँह में लिया और चूसने लगी और थोड़ी देर बाद यही दूसरे निपल के साथ किया.

"बहुत मज़ा आ रहा है?" उसने फिर पायल से पुचछा

पायल ने सिर्फ़ हां में सर हिलाया.

रूपाली पायल से अलग हुई, उसका हाथ पकड़ा और उसे बाथरूम से लेके बेडरूम में आ गयी.

बेडरूम में लाकर रूपाली ने पायल को धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया. पायल कमर के बल बिस्तर पर जा गिरी और सामने खड़ी नंगी रूपाली को देखने लगी. सर से पावं तक.

"क्या देख रही है?" रूपाली ने अपना एक हाथ अपनी चूचियों पर और दूसरा अपनी चूत पर फिराया "तेरे जैसा ही है. ये दो बड़ी बड़ी चूचियाँ तेरे पास हैं और मेरे पास भी हैं. जो तेरी टाँगो के बीच है वही मेरी टाँगो के बीच में भी है बस तुझपर से ये बाल हटाने है. फिर तेरी जवानी खुलकर सामने आ जाएगी" रूपाली ने पायल के चूत पर उगे हुए बाल की तरफ इशारा किया. शर्मा कर पायल ने अपने एक हाथ से अपनी चूत को छुपा लिया.

रूपाली मुस्कुरा कर बिस्तर पर चढ़ि और पायल के नज़दीक आई. पायल का हाथ उसकी चूत से हटाकर उसने फिर अपना हाथ रख दिया और चूत सहलाने लगी.

"टांगे खोल. पूरी फेला दे" उसने पायल से कहा और इस बार बिल्कुल उल्टा हुआ. रूपाली को उम्मीद थी के पायल मना कर देगी पर पायल ने फ़ौरन अपनी टांगे खोल दी. उसकी चूत खुलकर रूपाली के सामने आ गयी.

रूपाली उठकर पायल की टाँगो के बीच आ गयी और उसकी चूत देखने लगी. ज़िंदगी में पहली बार वो अपने सिवा किसी और औरत की चूत देख रही थी.

"कोई आया है आज तक तेरी टाँगो के बीच में?" उसने पायल की चूत सहलाते हुए कहा. पायल ने आँखें बंद किए हुए इनकार में सर हिलाया

"कोई बात नही. मैं सीखा दूँगी" रूपाली ने कहा और पायल की चूत को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी. पायल जोश में अपना सर इधर उधर करने लगी. रूपाली थोड़ा आगे को झुकी और किसी मर्द की तरह पायल पर पूरी तरह छा गयी. वो पायल के उपेर लेट गयी और उसके होंठ फिर से चूमने लगी. इस बार पायल ने भी जवाब दिया और उसने अपने उपेर लेटी रूपाली को कस्के पकड़ लिया. दोनो एक दूसरे के होंठ चूमने लगी.

"काफ़ी जल्दी सीख रही है" रूपाली ने कहा और नीचे होकर पायल की चूचियाँ चूमने लगी. उसने अपने हाथ से पायल का एक हाथ पकड़ा और लाकर अपनी छाती पर रख दिया

"दबा इसे. जैसे मैं तेरे दबा रही हूँ वैसे ही तू मेरे दबा" उसने पायल से कहा और पायल ने भी फ़ौरन उसकी चूचिया दबाने लगी

"किस्में ज़्यादा मज़ा आ रहा है? अपने चुसवाने में या मेरे दबाने में?" उसने पायल की चूचियाँ चूस्ते हुए कहा

"आआआआहह मालकिन. दोनो में" इस बार पायल ने फ़ौरन जवाब दिया

रूपाली थोड़ी देर तक पायल की दोनो चूचियों को एक एक करके चूस्ति रही और नीचे से अपनी चूत पायल की चूत पर रगड़ने की कोशिश करती रही. थोड़ी देर बाद वो उठकर पायल के उपेर बैठ गयी. टांगे पायल की कमर के दोनो तरफ थी जैसे कोई मर्द किसी औरत को बैठकर चोद रहा हो. वो आगे को झुकी और अपनी छातियाँ पायल के मुँह से लगा दी

"चूस इन्हें" उसने पायल से कहा. पायल ने भी उसकी छातियाँ ऐसे चूसनी शुरू कर दी जैसे काब्से इसी का इंतेज़ार कर रही हो

"तुझे पता है जब मर्द किसी औरत के साथ सोता है तो क्या करता है?" उसने पायल से पुचछा

पायल ने उसकी चूचियाँ चूस्ते हुए हां में सर हिलाया

"क्या करता है?" रूपाली ने अपने दोनो हाथों से पायल का सर पकड़ रखा था और उसे अपनी चूचियों पर दबा रही थी

"यही जो आप कर रही हैं मेरे साथ." पायल ने रूपाली का निपल अपने मुँह से निकालकर कहा और दोबारा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी

"आआआहह "रूपाली के मुँह से निकला. उसने अपना एक हाथ पायल की चूत पर रखा "अरे पगली मैं पुच्छ रही हूँ के यहाँ क्या करता है"

"पता है मुझे" पायल ने कहा "माँ ने बताया था एक बार"

"किसी मर्द ने किया है कभी तेरे साथ ऐसा" रूपाली ने पुचछा तो पायल ने इनकार में सर हिला दिया

"तेरा दिल नही किया कभी करवाने का?" रूपाली ने पुचछा तो पायल ने फिर इनकार में सर हिलाया

"अब तक तो नही किया था कभी"

"अब कर रहा है?" रूपाली ने मुस्कुराते हुए पुचछा तो पायल ने भी शर्माकर मुस्कुराते हुए हां में सर हिला दिया

"तो चल आज मैं ही तेरे लिए मर्द बन जाती हूँ" कहते हुए रूपाली पायल के उपेर से हटी.

रूपाली पायल के उपेर से हटी और फिर उसकी टाँगो के बीच में आकर उसकी चूत सहलाने लगी

"यहाँ पर मर्द अपना लंड घुसाता है" उसने पायल से कहा "लंड जानती है किसी कहते हैं?"

पायल ने हां में सर हिलाया तो रूपाली मुस्कुराने लगी

"जानती सब है तू" कहते हुए रूपाली ने अपनी एक अंगुली धीरे से पायल की चूत में घुसा दी

"आआअहह मालकिन." पायल फ़ौरन बिस्तर पर उच्छली. कमर पिछे को खींचकर उसने रूपाली की अंगुली चूत में से निकल दी

"दर्द होता है" पायल बोली

"पहले थोडा सा होगा पर फिर नही. अब सीधी लेटी रह. हिलना मत वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा" रूपाली ने पायल को हल्के से डांटा और फिर उसकी दोनो टांगे खोल ली.

थोड़ी देर चूत पर हाथ रॅगॅड्कर उसने अपनी बीच की अंगुली पायल की चूत में धीरे धीरे घुसा दी. अपने दूसरे हाथ से वो अपनी चूत रगड़ रही थी

"दर्द होता है मालकिन" पायल फिर बोली

"बस थोड़ी देर. फिर नही होगा" कहते हुए रूपाली ने अपनी अंगुली आगे पिछे करनी शुरू कर दी. नतीजा थोड़ी ही देर में सामने आ गया. जो पायल पहले दर्द से उच्छल रही थी अब वो ही आअहह आअहह करने लगी.

"मैने कहा था ना के मज़ा आएगा" रूपाली ने कहा "और करूँ या निकल लूँ?"

"और करिए" पायल ने आहह भरते हुए कहा

रूपाली ने तेज़ी से उसकी चूत में अंगुली अंदर बाहर करनी शुरू कर दी और अपना दूसरा हाथ अपनी चूत पर तेज़ी से रगड़ने लगी. अचानक उसकी नज़र सामने घड़ी पर पड़ी और उसने अपनी अंगुली पायल की चूत से निकाल ली. पायल ने अपनी आँखें खोलकर उसकी तरफ देखा

"क्या हुआ मालकिन?" उसने रूपाली से पुचछा

"अरे पागल एक मर्द का लंड मेरी अंगुली जितना थोड़े ही होता है. असली मज़ा लेना है तो या तो लंड से ले या लंड जैसी किसी चीज़ से ले" रूपाली बिस्तर से उठते हुए बोली

"मतलब?" पायल ने पुचछा. उसने उठने की कोई कोशिश नही की थी. बिस्तर पर वैसे ही टांगे हिलाए पड़ी थी

"मतलब ये" रूपाली ने टेबल पर रखे हुआ एक खीरा उठाया. यही वो चीज़ थी जो वो थोड़ी देर पहले किचन में ढूँढ रही थी.

"आप ये डालेंगी? ये तो बहुत मोटा है" पायल ने आँखें फेलाते हुए कहा. उसकी टांगे भी डर से अपने आप बंद हो गयी

"कोई कोई लंड इससे भी मोटा होता है. वो कैसे लेगी?" कहते हुए रूपाली ने पास रखे हेर आयिल की बॉटल उठाई और पूरे खीरे पर आयिल लगा दिया. वो फिर बिस्तर पर चढ़कर पायल के नज़दीक आई और उसकी टाँगें खोलने की कोशिश की

"नही मालकिन" पायल ने कहा "बहुत दर्द होगा"

"अरे हर औरत को होता है. मुझे भी हुआ था पहली बार पर फिर मज़ा आता है. चल अब टांगे खोल" कहते हुए रूपाली ने ज़बरदस्ती पायल की टांगे खोल दी

वो फिर पायल की टाँगो के बीच आ बैठी और खीरा उसकी चूत पर रगड़ने लगी. पायल ने फिर अपनी आँखें बंद कर ली थी. थोड़ा देर ऐसे ही रगड़ने के बाद रूपाली ने थोड़ा सा खीरा पायल की चूत में डालने की कोशिश की. पायल फ़ौरन पिछे को हो गयी

"आह" पायल करही "दर्द होता है"

"चुप कर और टांगे खोल और हिलना मत" रूपाली ने उससे कहा और दोबारा खीरा डालने की कोशिश की. थोड़ी देर ऐसे ही कोशिश करने के बाद जब पायल ने खीरा चूत में डालने नही दिया तो रूपाली बिस्तर से उठकर अपनी अलमार तक गयी और अपने 3 स्कार्फ उठा लाई.

"तू ऐसे नही मानेगी" कहते हुए वो फिर पायल के करीब आई और उसे बिस्तर से बाँधने लगी.

raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: सेक्सी हवेली का सच

Unread post by raj.. » 17 Dec 2014 12:29

सेक्सी हवेली का सच - 15

हेलो दोस्तो कैसे हैं आप उम्मीद करता हूँ आपको पार्ट 14 पसंद आया होगा आपने देखा था रूपाली ने किस तरह से पायल को बिस्तर से बाँध दिया था ओर उसे कली से फूल बनने की राह पर ले चली है अब आगे की कहानी ----

कुच्छ ही देर बाद पायल के हाथ बिस्तर से ऐसे बँधे हुए थे के वो अपना उपरी हिस्सा हिला भी नही सकती थी.

"नही मालकिन" उसने फिर रूपाली से कहा पर रूपाली ने उसकी एक नही सुनी. वो पायल के सर के पास आई और एक स्कार्फ उसकी आँखों पर इस तरह बाँध दिया के पायल को कुच्छ दिखाई ना दे.

"ये क्यूँ मालकिन?" अंधी हो चुकी पायल ने पुचछा

"ताकि तू खीरा देखके इधर उधर उच्छले नही" रूपाली बोली और फिर पायल की टाँगो के पास आके बैठ गयी.

इस बार उसने पायल की टांगे पूरी नही फेलाइ. चूत खोलने के लिए जितनी ज़रूरी थी बस उठी ही खोली और उसकी टाँगो पर आकर बैठ गयी. रूपाली की गान्ड पायल के घुटनो पर थी. अब पायल चाहे जितनी कोशिश कर ले पर वो हिल नही सकती थी.

रूपाली पायल की तरफ देखकर मुस्कुराइ और खीरा पायल की चूत पर रख दिया. पायल का जिस्म एक बार फिर सिहर उठा. रूपाली ने खीरे का दबाव चूत पर डाला तो वो हल्का सा अंदर घुस गया. पायल के मुँह से अफ निकल गयी पर रूपाली इस बार उसकी सुनने के मूड में नही थी. उसने अपना एक हाथ आगे बढ़कर पायल के मुँह पर रखा ताकि वो कोई आवाज़ ना कर सके और धीरे धीरे खीरा चूत में घुसाने लगी. पायल की आँखें फेल्ती चली गयी. उसकी आँखें देखकर ही अंदाज़ा होता था के वो कितनी तकलीफ़ में थी. आँखों से पानी बह निकला. वो सर इधर उधर झटकने लगी पर रूपाली के हाथ की वजह से उसके मुँह से निकली चीख घुटकर रह गयी. आँखों ही आँखों में वो रूपाली से रहम की भीख माँग रही थी पर रूपाली मुस्कुराती रही और तभी रुकी जब खीरा पूरा चूत के अंदर घुस गया.

थोड़ी देर ऐसे ही रुकने के बाद रूपाली पायल से बोली

"हाथ हटा रही हूँ. शोर मत मचाना. मचाया तो मुझसे बुरा कोई ना होगा"

पायल ने हां में सर हिलाया तो रूपाली ने अपना हाथ उसके मुँह से हटा लिया

"बाहर निकालो मालकिन" पायल फ़ौरन बोली "मेरी दर्द से जान निकल रही है"

"बस ज़रा सी देर. और मुँह बंद रख अपना" रूपाली ने डाँटते हुए पायल से कहा तो पायल दर्द का घूंठ पीकर चुप हो गयी. रूपाली ने खीरे की तरफ देखा जो 80% चूत के अंदर था. हल्का सा खून देख कर वो समझ गयी के आज उसने पायल की चूत खोल दी.

उसने झुक कर पायल के होंठ चूमे और उसकी छातियाँ चूसने लगी. कुच्छ देर बाद पायल का कराहना बंद हुआ तो उसने पुचछा

"अब ठीक है?"

"दर्द अब भी है पर कम है" पायल ने जवाब दिया

"अब तू लड़की से औरत बन गयी. आज खीरा कल लंड" रूपाली ने हस्ते हुए कहा और चूत में घुसा हुआ खीरा पकड़कर बाहर को खींचा. थोडा सा खीरा अंदर छ्चोड़कर उसने फिर से पूरा अंदर घुसा दिया और धीरे धीरे खीरे से पायल को चोदने लगी.

"मत करो मालकिन" पायल फिर से कराही "ऐसे दर्द होता है"

"बस थोड़ी देर और" रूपाली ने कहा और ज़ोर से खीरा अंदर बाहर करने लगी. कुच्छ ही पल बाद पायल का कराहना बंद हुआ और वो आह आह करने लगी

"मज़ा आ रहा है?" रूपाली ने फिर पुचछा तो पायल ने हां में सर हिला दिया. उसकी आँखो पर अब भी स्कार्फ बँधा हुआ था और उसे कुच्छ नज़र नही आ रहा था.

अचानक रूपाली एक आहट से चौंक पड़ी और दरवाज़े की तरफ देखा

"रुक ज़रा" उसने पायल से कहा और खीरा उसकी चूत में ही छ्चोड़कर दबे पावं दरवाज़े तक पहुँची. उसने दरवाज़ा इतने धीरे से खोला के ज़रा भी आवाज़ नही हुई. दरवाज़े के बाहर शौर्या सिंग खड़े थे.

दरवाज़ा खुलते ही ठाकुर सामने नंगी खड़ी रूपाली को हैरत से देखने लगे. उन्होने कुच्छ कहने के लिए मुँह खोला ही था के रूपाली ने एक अंगुली अपने होंठो पर रखकर उन्हें चुप रहने का इशारा किया. ठाकुर चुप हो गये और रूपाली के इशारे पर धीरे से कमरे में आए.

कमरे का नज़ारा देखकर वो और भी चौंक पड़े. बिस्तर पर पायल नंगी बँधी हुई थी और उसकी आँखो पर भी पट्टी थी. उन्होने पलटकर रूपाली की तरफ देखा और जो अभी भी उन्हें चुप रहने का इशारा कर रही थी. इशारा में उन्होने पुचछा के ये क्या हो रहा है तो पायल ने मुस्कुरकर उनका हाथ पकड़ा और बिस्तर के करीब ले आई.

"क्या हुआ मालकिन?" पायल ने पुचछा. उसे ज़रा भी अंदाज़ा नही था के इस वक़्त कमरे में उन दोनो के अलावा एक तीसरा आदमी भी मौजूद था.

"कुच्छ नही" रूपाली ने कहा और फिर बिस्तर पर आकर पायल की छातियों पर हाथ फेरने लगी. दूसरे हाथ से उसने फिर खीरा अंदर बाहर करना शुरू कर दिया

"मज़ा आ रहा है ना पायल?" उसने ठाकुर की तरफ देखते हुए पायल से पुचछा. ठाकुर की अब भी कुच्छ समझ नही आ रहा था. वो हैरत से अपने सामने बिस्तर पर पड़ी दोनो नंगी औरतों को देख रहे थे.

"हां मालकिन" पायल ने कहा. अब चूत में अंदर बाहर हो रहे खीरे के साथ उसकी कमर भी उपेर नीचे हो रही थी.

रूपाली ने झुक कर पायल का एक निपल अपने मुँह में लिया और ठाकुर को इशारे से बिस्तर पर नंगे होकर धीरे से आने को कहा.

ठाकुर ने चुप चाप अपने सारे कपड़े उतारे और नंगे होकर बिस्तर पर आ गये.

पायल लेटी हुई थी, रूपाली उसके पास बैठी उसकी चूत में खीरा घुमा रही थी और ठाकुर वहीं रूपाली के पास आकर बैठ गये. रूपाली ने धीरे से उन्हें अपने पास किया और उनका लंड मुँह में लेके चूसने लगी. दूसरे हाथ से खीरा अब भी पायल की चूत में अंदर बाहर हो रहा था. पायल के मुँह से अब ज़ोर ज़ोर से आह आह निकलनी शुरू हो चुकी थी जिससे सॉफ पता चलता था के उसे कितना मज़ा आ रहा है. उसकी साँस भी अब भारी हो चली थी.

ठाकुर ने लंड चूस्ति रूपाली की तरफ देखा और अपना एक हाथ पायल की छाती पर रखने की कोशिश की. रूपाली ने फ़ौरन उनका हाथ खींच लिया और इशारे से कहा के मर्द का हाथ लगने से पायल को पता चल जाएगा के उसकी छाती रूपाली नही कोई और दबा रहा है.

थोड़ी देर यही खेल चलता रहा. पायल अब पूरे जोश में आ चुकी थी. रूपाली ने ठाकुर का लंड मुँह से निकाला और उन्हें पायल की टाँगो के बीच आने का इशारा किया. ठाकुर चुप चाप पायल की टाँगो के बीच आ गये.

"अब मैं तेरी चूत में कुच्छ और घुसाऊंगी" रूपाली ने पायल से कहा

"अब क्या मालकिन?" पायल ने अपनी भारी हो रही साँस के बीच पुछा

"तू बस मज़े ले" रूपाली ने कहा और खीरा चूत से बाहर निकल लिया. उसने पायल की दोनो टांगे मॉड्कर उसकी छातियों से लगा दी ताकि उसकी चूत बिल्कुल उपेर हो जाए और उसकी टांगे ठाकुर के शरीर से ना लगें.

"अपनी टांगे ऐसी ही रखना" उसने पायल से कहा. पायन ने हां में सर हिलाया और अपनी टांगे और उपेर को मोड़ ली. उसके घुटने उसकी चूचियों से आ लगे.

ठाकुर पायल की चूत के बिल्कुल सामने आ गये. रूपाली ने एक हाथ से ठाकुर का लंड पकड़ा और पायल की चूत पर रखकर उन्हें अंदर घुसने का इशारा किया. ठाकुर ने थोडा अंदर दबाया और लंड अंदर घुसने लगा. चूत पहले से ही खुली हुई थी और खीरे पर लगे आयिल की वजह से चिकनी हो रखी थी. लंड फ़ौरन आधे से ज़्यादा अंदर घुसता चला गया. ठाकुर ने मज़े से अपनी आँखें बंद की और बिना कोई आवाज़ के मुँह खोलकर आह कहने का इशारा सा किया. रूपाली समझ गयी के नयी कुँवारी चूत का मज़ा ठाकुर के चेहरे पर झलक रहा है. वो मुस्कुराइ. उसने ठाकुर का लंड अब भी पकड़ रखा था. ठाकुर ने लंड और घुसाने की कोशिश की तो रूपाली ने हाथ से रोक लिया ताकि ठाकुर के अंडे या और कोई जिस्म का हिस्सा पायल को ना छु जाए. ताकि उसे बस ये लगे के कोई लंबी सी चीज़ उसकी चूत में घुसी हुई है.

"ये क्या है मालकिन" पायल ने पुचछा

"है कुच्छ" रूपाली ने जवाब दिया. "मज़ा आ रहा है?"

"हां" पायल ने कहा और आगे बात जोड़ी "खीरे से भी ज़्यादा"

"तो बस मज़े ले" रूपाली ने कहा और ठाकुर को चोदने का इशारा किया.

ठाकुर ने लंड आगे पिछे करना शुरू कर दिया. उनका लंड काफ़ी लंबा था इसलिए रूपाली का हाथ उनके और पायल की चूत के बीच होने के बावजूद काफ़ी लंड चूत के अंदर था. वो धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर करने लगे. अगर तेज़ी से चोद्ते तो शायद पायल को शक हो जाता.

थोड़ी देर चुदाई के बाद अचानक पायल का जिसम अकड़ने लगा. उसकी साँस तेज़ी से चलने लगी और फिर अगले ही पल वो ज़ोर से कराही, जिस्म ज़ोर से हिला और टांगे हवा में सीधी उठ गयी

"मालकिन" वो ज़ोर से बोली. पायल समझ गयी के उसका पानी निकल गया पर उसने ठाकुर को चुदाई जारी रखने का इशारा किया

"ये तेरा पानी निकला है. जब औरत पूरा मज़ा लेने लगती है तो ऐसा होता है. फिकर मत कर. अभी ऐसा ही फिर होगा" उसने पायल से कहा पर पायल तो लगता है जैसे अपनी ही दुनिया में थी. उसे कोई होश नही था. बस ज़ोर ज़ोर से साँस ले रही थी. रूपाली ने उसकी टांगे अब भी हवा में पकड़ रखी थी ताकि वो ठाकुर को ना छु जाए.

थोड़ी देर बाद रूपाली ने ठाकुर को देखा जो पायल आँखें बंद किए पायल को चोदने में लगे हुए थे. उसने ठाकुर को हाथ से हिलाया और अपना हाथ अपनी चूत पर फेरा. ठाकुर समझ गये के वो क्या चाहती है. उन्होने हां में सर हिलाया और पायल की चूत से लंड निकाल लिया.

"आआह " पायल कराही "निकाल क्यूँ लिया मालकिन?"

"अब फिर से यही ले" रूपाली ने खीरा फिर से उसकी चूत में घुसा दिया

"नही खीरा नही. वो जो पहले था वही" पायल वासना में पागल हो रही थी

"वो अब मेरी चूत में है" रूपाली ने कहा और खीरा पायल की चूत में अंदर बाहर करने लगी. उसने पायल के टांगे छोड़ दी थी और कुतिया की तरह पायल की साइड में झुकी हुई थी. ठाकुर उसके पिछे पहुँचे और उसकी गान्ड थामकर अपना लंड रूपाली के चूत में अंदर तक उतार दिया. रूपाली ने एक आह भारी और झुक कर पायल के निपल्स चूसने लगी. पीछे से उसकी चूत में ठाकुर का लंड अंदर बाहर होने लगा.

कमरे में फिर जो तूफान आया वो तब ही रुका जब तीनो थक कर निढाल हो गये. रूपाली का इशारा पाकर ठाकुर जिस तरह चुप चाप कमरे में आए थे वैसे ही निकल गये. रूपाली ने आकर पायल की आँखों पर से पट्टी हटाई और उसके हाथ खोले. पायल को अंदाज़ा भी नही था के वो अभी अभी एक मर्द से चुदी थी. बस बिस्तर पर आँखें बंद किए पड़ी रही. रूपाली ने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और नंगी ही आकर पायल के पास लेट गयी.

सुबह नाश्ते की टेबल पर तीनो मिले. पायल बहुत खुश लग रही थी. ठाकुर और रूपाली उसे देखकर आपस में मुस्कुराए.

ठाकुर ने अपनी कपड़े की फॅक्टरी के सिलसिले में किसी से मिलने जाना था इसलिए वो तैय्यार होकर घर से निकलने लगे. जाते जाते उन्होने रूपाली को अपने कमरे में बुलाया.

"वो कल रात क्या था?" उन्होने रूपाली से पुछा

"कुच्छ नही. बस आपने एक कुँवारी कली को फूल बना दिया" रूपाली ने हस्ते हुए कहा

"पर कैसे?" ठाकुर ने भी हस्ते हुए रूपाली से पुचछा

"आपने हमें हमारे जनमदिन पर कार लाकर दी. बस यूँ समझिए के ये हमारी तरफ से बिर्थडे पार्टी थी आपके लिए. कब कैसे मत पुच्हिए अब" रूपाली ने कहा. उसे खुद पर हैरत हो रही थी. वो दिल ही दिल में ठाकुर को अपने ससुर नही बल्कि अपने प्रेमी की तरह चाहती थी. और उसे इस बात कोई कोई अफ़सोस नही था के उसने खुद अपने प्रेमी को एक पराई औरत के साथ सुलाया था.

ठाकुर के जाने के बाद उसकी समझ ना आया के वो क्या करे. तेज कल रात का गया लौटा नही था इसलिए सफाई के लिए अब तक कोई नही आया था. रूपाली अगले एक घंटे तक उनका इंतेज़ार करती रही पर जब कोई नही आया तो उसने नीचे बेसमेंट में रखे बॉक्स की तलाशी लेने की सोची.

वो उठकर बेसमेंट की और चली ही थी के फोन बज उठा. रूपाली ने फोन उठाया. दूसरी तरफ से एक अजनबी आवाज़ आई.

"मेडम मैं डॉक्टर कुलकर्णी बोल रहा हूँ. ठाकुर साहब का आक्सिडेंट हो गया है. काफ़ी चोट आई हैं. सीरीयस हालत में हैं. आप फ़ौरन हॉस्पिटल आ जाइए."

दोस्तो अब मैं आपसे एक सवाल कर रहा हूँ आप उसका जबाब ज़रूर दे

.एक लड़की बस स्टाप पर खड़ी होकर एक लड़के को इशारे कर के उसे अपना चूची दिखा रही थी ,तो उधर से बस स्टाप के पार से एक लड़का इशारे से उसे अपना लंड दिखा रहा था | तो बताइए लड़की ने लड़के से इशारे में क्या बाते बताई ?