समलिंगी कहानियाँ

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rajaarkey
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Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:31

यार बना प्रीतम - भाग (9)

गतान्क से आगे........

प्रदीप जब दस साल का था तब प्रभा के पिता की मौत हो गयी. प्रभा अकेली हो गयी. सेक्स की भूखी उस औरत को समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करे. उसका ध्यान अब अप'ने बेटे पर गया. अगर उस'के पिता अपनी बेटी को चोद सकते थे तो वो अप'ने बेटे को क्यों नहीं चोद सक'ती, ऐसा उस'के दिमाग़ में आने लगा.

उसे पता चला कि बचपन से प्रीतम बहुत मतवाला था. यार दोस्तों से गान्ड मरावाता और मार'ता था. बिलकुल अपनी मा और दादा पर गया था, उन्ही का गरम चुदैल स्वाभाव उस'ने पाया था. उस'की यह गान्ड मरा'ने की आदत छुडा'ने को प्रभा ने उसे खुद ही रिझाया और अप'ने साथ संभोग करना सीखा दिया. बस, नौ दस साल की उम्र से ही प्रदीप अपनी मा को चोद'ने लगा.

प्रभा को बहुत सुख मिला पर प्रदीप की समलिंगी संभोग की आदत वह नहीं छुडा पाई. वह गे का गे ही रहा. दूसरी औरतों में उस'की रूचि बिलकुल नहीं थी. जब वह बारह साल का था तो प्रदीप से प्रभा को गर्भ रह गया. प्रीतम पैदा हुआ. तब प्रभा अठ्ठायीस साल की थी. इस हिसाब से प्रीतम प्रभा का बेटा भी था और भांजा और पोता भी. और प्रदीप प्रीतम का पिता, मामा और भाई तीनों था.

प्रीतम भी पक्का चोदू निकाला. आअठ साल की उम्र में ही प्रदीप ने उस'की गान्ड मारना शुरू कर दी. प्रदीप के महाकाय लंड से मरा कर प्रीतम की हालत खराब हो गयी. दो तीन दिन वह बिस्तर में रहा. प्रभा पहले बहुत नाराज़ हुई और उस'ने प्रदीप को खूब पीटा पर आख़िर उस'ने अपना हाथ छोड दिया क्योंकि प्रीतम को भी मज़ा आया था. वह समझ गयी की उस'के दोनों बेटे गे हैं. अप'ने खेल में उस'ने प्रीतम को भी शामिल कर लिया. वैसे वह बहुत खुश थी. दो दो जवान बेटे उसे चोदते और उस'की गान्ड मारते थे. और साथ में एक दूसरे से भी खूब संभोग करते थे.

अब प्रीतम बाईस साल का नौजवान था, प्रदीप चौंतीस का हो गया था और प्रभा पचास की. प्रदीप ने शादी कर'ने से सॉफ इनकार कर दिया था. बोला था कि किसी औरत को चोदेगा और चूसेगा तो सिर्फ़ मा को. बा'की मज़े के लिए तो उसका छोटा भाई था ही.

प्रभा बेचारी बहुत चाह'ती थी कि प्रदीप शादी कर ले. एक दिन प्रदीप मज़ाक में बोला था कि अगर कोई शी मेल या अर्ध नारी मिल जाए तो वह शादी कर लेगा. पर ऐसा नाज़ुक छ्हॉकरा मिलना चाहिए जिस'का लंड मजबूत हो और मस्त चिकनी गान्ड और चूचियाँ भी हों, भले ही नकली चूचियाँ हों. वैसे असली हों तो और अच्च्छा है. कहानी सुन कर मेरा ऐसा तंन गया था कि क्या कहूँ. प्रीतम उसे मुठियाता हुआ बोला.

अब समझा मेरी गान्ड ढीली क्यों है? प्रदीप ने मार मार कर ऐसी कर दी है. बहुत मज़ा आता है उससे मरवा'ने में. तू उसका लंड देखेगा तो घबरा जाएगा! मुझसे बहुत बड़ा है. वह आगे बोला.

और हम दोनों को भी बचपन से चप्पलें चाट'ने का बहुत शौक है. मा की चप्पलें मुँह में लेकर हम चूसाते हैं और चोदते हैं. इसीलिए मा या हम दोनों कभी पुरानी चप्पलें फेकते नहीं. चुदाई के समय पलंग पर बिखरा लेते हैं फूलों जैसे. अब तो सौ के करीब जोड़ियाँ इकठ्थी हो गयी होंगी. तुझे जो पतली वाली सबसे पहले खिलाई वह मैने ही मा से मंगाई थी. वैसे खाईं कभी नहीं यार, तुझे खिला'कर बड़ा मज़ा आया, अब देखेंगे जमे तो

मैने मचल कर उस'की गर्दन में बाँहें डालीं और उसे चूम'ने लगा. वह भी अपना मुँह खोल कर मेरी जीभ चूस'ता हुआ नीचे से ही मेरी गान्ड मार'ने लगा. झड'ने के बाद उस'ने मेरा लंड चूस डाला. इतनी मीठी उत्तेजना मुझे हुई कि मैं करीब करीब रो दिया. घंटे भर हम चुप रहे. सोते समय उससे लिपट कर मैं शरमा कर बोला.

तू सच कह रहा था कि मैं तेरी भाभी बन जाउ? पर फिर तू मुझे नहीं चोदेगा? वह मेरे बाल सहलाता हुआ बोला.

अरे मैने अपनी मा को नहीं छोडा तो तुझे क्या छोडून्गा. समझ ले तीन तीन से तुझे चुदाना पड़ेगा. मैं, प्रदीप और मा. मा है पचास साल की पर बड़ी छिनाल है. साली का मन ही नहीं भरता. मेरे और प्रदीप का संभोग देख'कर बोली कि अगर तुम लोग आपस में चोद सकते हो तो मैं भी क्यों किसी औरत को नहीं चोद सक'ती. उस'ने भी एक दो साथीनें बना लीं. अब कह'ती है कि अगर सुंदर बहू आ जाए तो क्या मज़ा आए. और अगर कोई गान्डू लड़का लड़'की के रूप में मिल जाए तो सोने में सुहागा हो जाए. कुच्छ देर रुक कर वह आगे बोला

अब समझा कुच्छ? हमारे साथ रहना है तो घर की बहू बन कर तुझे सब'की सेवा करनी होगी. पिटाई भी होगी तेरी अगर किसी की बात नहीं मानी. मैं बोला.

यार पीटोगे क्यों मुझे? मैं तो गुलाम हूँ, हर बात मानूँगा. वैसे मुझे प्रदीप से शादी की बात जम'ती है पर डर भी लग'ता है. मेरी हालत कर दोगे तीनों मिल कर. वह सीरियस होकर बोला.

हाँ, यह तो सच है. गाँव में बहू की क्या हालत होती है यह तू जान'ता है. असल में मा, मेरे और प्रदीप के मन में बड़े बुरे विक्ऱुत ख़याल आते हैं. प्रदीप भी कह रहा था कि कोई छोकरा बहू बन के आए तो सब मुराद पूरी कर लेना. मा तो क्या क्या सोच'ती है, तू सुनेगा तो घबरा जाएगा. और एक बात है. हम जैसे रखें रहना पड़ेगा, जो कहें वह करना पड़ेगा. और जो खिलाएँ वह खाना पड़ेगा. ऐसी ऐसी चीज़ें खिलाई जाएँगी कि किसीने सोचा भी नहीं होगा. पक्के गान्डू और चुदैल कुटैल लड़'के को बहुत मज़ा आएगा हमारी बहू बन'कर अपनी दुर्गति करा'ने में भी. और रही पिटायी की बात, वो तो सिर्फ़ मज़े के लिए होगी. मा और प्रदीप के दिमाग़ में बहुत दिनों से ये चल रहा है, कहते हैं कि कोई फँस जाए तो खूब पीटेन्गे और चोदेन्गे. चिक'ने छ्होरों को पीट'ने का मज़ा ही कुच्छ और है

मेरा मन डान्वाडोल हो रहा था. बहुत डर लग रहा था पर दो मस्त बड़े लंड वाले जवानों और एक अधेड चुदक्कड नारी से मिल'ने वाली तरह तरह की कामुक गंदी और विक्ऱुत यातनाओं की सिर्फ़ कल'पना से ही मैं विभोर हो रहा था. मैने प्रीतम से पूच्छा.

खा'ने की क्या बात कर रहा था यार? वह मुस्करा कर बोला.

तू ही समझ ले, कोई ज़बरदस्ती नहीं है. चप्पल तो तू खाता ही है. मूत भी पीता है. अब ऐसा और क्या है जो अप'ने शरीर से हम तीनों तुझे खिला सकते हैं? तू ठीक से सोच कर बता. तेरी परीक्षा ले रहा हूँ ऐसा समझ ले. रात भर हम'ने संभोग किया, इत'ने हम इन गंदी बातों से उतावले हो गये थे. सुबह देर से उठे. प्रीतम तैयार होकर कॉलेज को निकला. मैने मना कर दिया. बोला आज मूड नहीं है. वह मुस्कराया और चला गया.

मैं झट से तैयार हो कर बाजार गया. अपनी छा'ती और कूल्हों का नाप मैने ले लिया था. चौंतीस और छत्तीस. फेमिन में ब्रा का नाप लेने का लेख आया था, वा मैने पढ़ा था. बाजार से 34 डी डी कप साइज़ की नाइलान की पैडेड ब्रा और 36 साइज़ की पैंटी खरीदी. शाडी पेटीकोट और ब्लओज़ का कपड़ा लिया. एक दर्जी से दुग'ने पैसे देकर साम'ने ही ब्लओज़ सिलवाया. झूट मूट कहा कि बहन के लिए चाहिए. फिर हाई हील की सैंडल ली. अंत में एक लंबे बालों का विग खरीदा.

वापस आया तो बुरी तरह लंड खड़ा था. किसी तरह मूठ मार'ने से खुद को रोका और सो गया. शाम को उठ'कर अप'ने सिंगार में जुट गया. नहा कर पहले पैंटी और ब्रा पहनी. ब्रा के अंदर बहुत सारे रुमाल ठूंस लिए जिससे वह फूल जाए. फिर विग लगाया. आईने में देखा तो विश्वास ही नहीं हुआ. मैं बहुत ही सेक्सी बड़े स्तनों वाली अर्धनग्न कन्या जैसा लग रहा था. बस पैंटी में तंबू बनाता मेरा लंड यह ब'ता रहा था कि मैं मर्द हूँ. उसे पेट से सटा'कर पेटीकोट पहन और नाडी से लंड पेट पर बाँध लिया.

फिर मैने साड़ी और ब्लओज़ पह'ने. साड़ी दो तीन बार उतारना और पहनना पड़ी पर आख़िर में जम गयी. अंत में सैंडल पह'ने और लिपस्टिक लगा ली. अब प्रीतम के आने का इंतजार था. बेल बजी और मैने धडकते दिल से दरवाजा खोला. प्रीतम चकरा गया कि कहीं ग़लत घर तो नहीं आ गया.

आप कौन? सुकुमार कहाँ है? मैने दरवाजा लगा लिया और उससे लिपट कर चूमते हुए बोला.

हाय सैंया, अपनी रानी को नहीं पहचाना? उस'की आँखों में वासना छलक आई.

क्या दिख'ता है यार तू सुकुमार, सॉरी, मैं कहना चाह'ता था कि क्या दिख'ती है तू माधुरी रानी, एकदम ब्यूटी क्वीन. साला प्रदीप, अब देख'ता हूँ कैसे शादी नहीं करता! कह'कर वह मुझे खींच कर पलंग पर ले गया और मुझे पटक कर मुझ पर चढ कर मुझे बेतहाशा चूम'ने लगा. जल्द ही उसका तन्नाया लंड मेरी गान्ड में था.

दो घंटे बाद जब वह रुका तो लस्त हो गया था. दो बार उस'ने मेरी गान्ड मारी थी. मुझे पूरा नंगा नहीं किया था, ब्रा और पैंटी रह'ने दिए थे. मेरा अर्धनग्न रूप उसे बहुत उत्तेजक लग रहा था. पैंटी में छेद कर'के उसीमेंसे उस'ने मेरी गान्ड मारी थी. जब उस'ने मेरी गान्ड में से लंड निकाला तो मैं उसे मुँह में लेता हुआ बोला.

अपनी रानी की प्यास नहीं बुझायेँगे क्या स्वामी? मैने कब से पानी नहीं पिया. आपका इंतजार कर'ती रही. मैं जान बूझ कर घर की बहू जैसा बोल रहा था. मेरा सिर पकड़'कर पेट पर दबाते हुए वह मेरे मुँह में मूत'ने लगा.

पेट भर कर पी मेरी जान. मैं भी दिन भर नहीं मूता. सुबह जल्दी में तुझे पिलाना भूल ही गया. मेरा लंड अब बुरी तरह से खड़ा था. प्रीतम ऑंढा लेट गया और मैं उस पर चढ'कर उस'की गान्ड मार'ने लगा. आईने में यह द्ऱुश्य बड ही कामुक दिख रहा था कि एक युव'ती एक जवान मर्द की गान्ड मार रही है. प्रीतम भी उत्तेजित होकर बोला.

मा की याद दिला दी तूने. उस'के पास भी दो तीन डिल्डो हैं. जब मूड में आ'ती है तो मेरी या प्रदीप की गान्ड मार लेती है. आज तुझसे मरवा कर ऐसा लग रहा है जैसे उसीसे मरवा रहा हूँ. रात को दो बार और उस'ने मेरी मारी. इस बार मुँह में चप्पल ठूंस कर मेरी गान्ड को उस'ने चोदा. आज मेरे मुँह पर रब्बर बैंड लगा'ने की भी ज़रूरत नहीं पड़ी. मैं वैसे ही उस'की चप्पल चबा चबा कर खा गया. मेरा लंड चूस कर आख़िर उस'ने मुझे झड़ाया और फिर प्यार से मेरा मूत पिया. सोने के पहले वह बड़े प्यार से बोला.

तू करीब करीब पास हो गया है यार परीक्षा में. बस एकाध और चीज़ बची है जिससे मुझे पता चल जाएगा कि तू सच में हमारी दासी बन'कर रह लेगा. मैं जान'ता था. मन ही मन बोला कि सुबह तक रुक मेरे राजा, तुझे पता चल जाएगा कि मैं तुझ से कितना प्यार कर'ता हूँ.

यार का हालुआ

सुबह हम देर से उठे. रविवार था. मेरी नींद जल्दी खुल गयी थी. पड़ा पड़ा मैं प्रीतम के नितंब सहला'ने और चूम'ने लगा. उस'की गुदा को चूमा तो वह जाग गया. वह कुच्छ देर मज़े से गान्ड चुसवाता रहा, फिर उठ कर बैठ गया. चप्पल पहन'कर जब बाथ रूम जा'ने लगा तो मैं भी साथ हो लिया. अंदर पहुँच कर वह बोला.

तू क्यों आ गयी रानी? तेरा अभी काम नहीं है. जा सो जा, मुझे टट्टी करनी है. मेरी ओर वह बड़े गौर से देख रहा था. उस'की आँखों में एक उत्तेजना थी और अपना लंड कस कर मुठिया रहा था. मैं अब भी नारी रूप में था. ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी और विग भी लगाया हुआ था. मैं उस'के साम'ने ज़मीन पर बैठ गया और झुक कर उस'के पैर चूम'ने लगा.

मेरे स्वामी, मुझे माफ़ कीजिए. मुझसे बड़ी गल'ती हुई है. पैर उठा'कर मेरे गालों को अप'ने अन्गूठे से कुरेद'ता हुआ वह बोला.

क्या हुआ रानी? मुझे तो बता. इत'ने दिन आप'के शरीर की यह अमूल्य भेंट मैने बरबाद की है. आज से नहीं कर'ने दूँगी. इसपर मेरा अधिकार है. मैं आप'के शरीर से निकली हर चीज़ खाना चाह'ती हूँ. मेरा यह कर्तव्य है. मेरे स्वामी, मेरे मुँह में टट्टी करो, मुझे खिलाओ अपनी गान्ड का माल, मेरे लिए यह सोने से ज़्यादा कीम'ती है मेरे यार. मेरी यह कामुक बातें सुन'कर प्रीतम वासना से काँप'ने लगा.

सच कह'ता है यार? देख, एक बार शुरू करेगा तो हमेशा करना पड़ेगा. फिर मैं नहीं सुनूँगा तेरी, ज़बरदस्ती किया करूँगा. हाथ पैर बाँध कर तेरे मुँह पर बैठ जाऊँगा मैने ज़मीन पर लेटते हुए कहा.

क्रमशः................


rajaarkey
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Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:31

YAAR BANA PRITAM - BHAAG (9)

gataank se aage........

Pradeep jab das saal ka tha tab Prabha ke pita kee maut ho gayee. Prabha akelee ho gayee. Seks kee bhookhee us aurat ko samajh men naheen aa raha tha ki ab kya kare. Usaka dhyaan ab ap'ne beTe par gayaa. Yah upanyaas aap yahoo groups; deshiromance men padh rahe hain. Agar us'ke pita apanee beTee ko chod sakate the to wo ap'ne beTe ko kyon naheen chod sak'tee, aisa us'ke dimaag men aane lagaa.

Use pata chala ki bachapan se Pradeep bahut matawaala thaa. Yaar doston se gaanD marawaata aur maar'ta thaa. Bilakul apanee maa aur daada par gaya thaa, unheenka garam chudail swabhaav us'ne paaya thaa. Us'kee yah gaanD mara'ne kee aadat chhuDa'ne ko Prabha ne use khud hee rijhaaya aur ap'ne saath sambhog karana sikha diyaa. Bas, nau das saal kee umr se hee Pradeep apanee maa ko chod'ne lagaa.

Prabha ko bahut sukh mila par Pradeep kee samalingee sambhog kee aadat wah naheen chhuDa paayee. Wah ge ka ge hee rahaa. Doosaree auraton men us'kee ruchi bilakul naheen thee. Jab wah baarah saal ka tha to Pradeep se Prabha ko garbh rah gayaa. Pritam paida huaa. Tab Prabha aThThaayees saal kee thee. is hisaab se Pritam Prabha ka beTa bhee tha aur bhaanja aur pota bhee. Aur Pradeep Pritam ka pitaa, maama aur bhaayee teenon thaa.

Pritam bhee pakka chodoo nikalaa. AaTh saal kee umr men hee Pradeep ne us'kee gaanD maarana shuroo kar dee. Pradeep ke mahaakaay lunD se mara kar Pritam kee haalat kharaab ho gayee. Do teen din wah bistar men rahaa. Prabha pahale bahut naaraaj huee aur us'ne Pradeep ko khoob peeTa par aakhir us'ne apana haTh chhoD diya kyonki Pritam ko bhee maja aaya thaa. Wah samajh gayee ki us'ke donon beTe ge hain. Ap'ne khel men us'ne Pritam ko bhee shaamil kar liyaa. Waise wah bahut khush thee. Do do jawaan beTe use chodate aur us'kee gaanD maarate the. Aur saath men ek doosare se bhee khoob sambhog karate the.

Ab Pritam baayees saal ka naujawaan thaa, Pradeep chauntees ka ho gaya tha aur Prabha pachaas kee. Pradeep ne shaadee kar'ne se saaf inkaar kar diya thaa. Bola tha ki kisee aurat ko chodega aur choosega to sirf maa ko. Ba'kee maje ke liye to usaka chhoTa bhaayee tha hee.

Prabha bechaaree bahut chaah'tee thee ki Pradeep shaadee kar le. Ek din Pradeep majaak men bola tha ki agar koee shee mel ya ardh naaree mil jaaye to wah shaadee kar legaa. Par aisa naajuk chhokara milana chaahiye jis'ka lunD majaboot ho aur mast chikanee gaanD aur choochiyaan bhee hon, bhale hee nakalee choochiyaan hon. Waise asalee hon to aur achchha hai. Kahaanee sun kar mera aisa tann gaya tha ki kya kahoon. Pritam use muThiyaata hua bolaa.

Ab samajha meree gaanD Dheelee kyon hai? Pradeep ne maar maar kar aisee kar dee hai. Bahut maja aata hai usase marawa'ne men. Too usaka lunD dekhega to ghabara jaayegaa! Mujhase bahut baDa hai. Wah aage bolaa.

Aur ham donon ko bhee bachapan se chappalen chaaT'ne ka bahut shauk hai. Maa kee chappalen munh men lekar ham choosate hain aur chodate hain. iseeliye maa ya ham donon kabhee puraanee chappalen fekate naheen. Chudaayee ke samay palang par bikhara lete hain foolon jaise. Ab to sau ke kareeb joDiyaan ikaThThee ho gayee hongee. Tujhe jo patalee waalee sabase pahale khilaayee wah maine hee maa se mangaayee thee. Waise khaayeen kabhee naheen yaar, tujhe khila'kar baDa maja aayaa, ab dekhenge jame to

Maine machal kar us'kee gardan men baanhen Daaleen aur use choom'ne lagaa. Wah bhee apana munh khol kar meree jeebh choos'ta hua neeche se hee meree gaanD maar'ne lagaa. JhaD'ne ke baad us'ne mera lunD choos Daalaa. itanee meeThee uttejana mujhe huee ki main kareeb kareeb ro diyaa. Ghante bhar ham chup rahe. Sote samay usase lipaT kar main sharama kar bolaa.

Too sach kah raha tha ki main teree bhaabhee ban jaaun? Par fir too mujhe naheen chodegaa? Wah mere baal sahalaata hua bolaa.

Are maine apanee maa ko naheen chhoDa to tujhe kya chhoDoongaa. Samajh le teen teen se tujhe chudaana paDegaa. Main, Pradeep aur maa. Maa hai pachaas saal kee par baDee chhinaal hai. Saalee ka man hee naheen bharataa. Mere aur Pradeep ka sambhog dekh'kar bolee ki agar tum log aapas men chod sakate ho to main bhee kyon kisee aurat ko naheen chod sak'tee. Us'ne bhee ek do saathinen bana leen. Ab kah'tee hai ki agar sundar bahoo aa jaaye to kya maja aaye. Aur agar koee gaanDoo laDaka laD'ke ke roop men mil jaaye to sone men suhaaga ho jaaye. Kuchh der ruk kar wah aage bola

Ab samajha kuchh? Hamaare saath rahana hai to ghar kee bahoo ban kar tujhe sab'kee sewa karanee hogee. PiTaayee bhee hogee teree agar kisee kee baat naheen maanee. Main bolaa.

Yaar peeToge kyon mujhe? Main to gulaam hoon, har baat maanoongaa. Waise mujhe Pradeep se shaadee kee baat jam'tee hai par Dar bhee lag'ta hai. Meree haalat kar doge teenon mil kar. Wah seeriyas hokar bolaa.

Haam, yah to sach hai. Gaanv men bahoo kee kya haalat hotee hai yah too jaan'ta hai. Asal men maa, mere aur Pradeep ke man men baDe bure vikRut khayaal aate hain. Pradeep bhee kah raha tha ki koee chhokara bahoo ban ke aaye to sab muraad pooree kar lena. Maa to kya kya soch'tee hai, too sunega to ghabara jaayegaa. Aur ek baat hai. Ham jaise rakhen rahana paDegaa, jo kahen wah karana paDegaa. Aur jo khilaayen wah khaana paDegaa. Aisee aisee cheejen khilaayee jaayengee ki kiseene socha bhee naheen hogaa. Pakke gaanDoo aur chudail kuTail laD'ke ko bahut maja aayega hamaaree bahoo ban'kar apanee durgati kara'ne men bhee. Aur rahee piTaayee kee baat, wo to sirf maje ke liye hogee. Maa aur Pradeep ke dimaag men bahut dinon se ye chal raha hai, kahate hain ki koee fans jaaye to khoob peeTenge aur chodenge. Chik'ne chhoron ko peeT'ne ka maja hee kuchh aur hai

Mera man DaanwaaDol ho raha thaa. Bahut Dar lag raha tha par do mast baDe lunD waale jawaanon aur ek adheD chudakkaD naaree se mil'ne waalee tarah tarah kee kaamuk gandee aur vikRut yaatanaaon kee sirf kal'pana se hee main vibhor ho raha thaa. Maine Pritam se poochhaa.

Kha'ne kee kya baat kar raha tha yaar? Wah muskara kar bolaa.

Too hee samajh le, koee jabaradastee naheen hai. Chappal to too khaata hee hai. Moot bhee peeta hai. Ab aisa aur kya hai jo ap'ne shareer se ham teenon tujhe khila sakate hain? Too Theek se soch kar bataa. Teree pareexa le raha hoon aisa samajh le. Raat bhar ham'ne sambhog kiyaa, it'ne ham in gandee baaton se utaawale ho gaye the. Subah der se uThe. Pritam taiyaar hokar college ko nikalaa. Maine man kar diyaa. Bola aaj mooD naheen hai. Wah muskaraaya aur chala gayaa.

Main jhaT se taiyaar ho kar baajaar gayaa. Apanee chha'tee aur koolhon ka naap maine le liya thaa. Chauntees aur chhattees. Femin men bra ka naap lene ka lekh aaya thaa, wah maine paDhaa thaa. Baajaar se 34 Dee Dee kap saaiz kee naailaan kee paiDeD bra aur 36 saaiz kee paintee khareedee. SaaDee peTeekoT aur blaauz ka kapaDa liyaa. Ek darjee se dug'ne paise dekar saam'ne hee blaauz silawaayaa. JhooT mooT kaha ki bahan ke liye chaahiye. Fir haai heel kee saindal lee. Ant men ek lambe baalon ka wig khareedaa.

Waapas aaya to buree tarah lunD khaDa thaa. Kisee tarah mooTh maar'ne se khud ko roka aur so gayaa. Shaam ko uTh'kar ap'ne singaar men juT gayaa. Naha kar pahale paintee aur bra pahaneen. Bra ke andar bahut saare rumaal Thoons liye jisase wah fool jaaye. Fir wig lagaayaa. Aaine men dekha to vishwaas hee naheen huaa. Main bahut hee seksee baDe stanon waalee ardhanagn kanya jaisa lag raha thaa. Bas paintee men tamboo banaata mera lunD yah b'ta raha tha ki main mard hoon. Use peT se saTa'kar peTeekoT pahan aur naaDee se lunD peT par baandh liyaa.

Fir maine saaDee aur blaauz pah'ne. SaaDee do teen baar utaarana aur pahanana paDee par aakhir men jam gayee. Ant men saindal pah'ne aur lipasTik laga lee. Ab Pritam aane ka intajaar thaa. Bel bajee aur maine dhaDakate dil se darawaaja kholaa. Pritam chakara gaya ki kaheen galat ghar to naheen aa gayaa.

Aap kaun? Sukumar kahaan hai? Maine darawaaja laga liya aur usase lipaT kar choomate hue bolaa.

Haay sainyaa, apanee raanee ko naheen pahachaanaa? Us'kee aankhon men waasana chhalak aayee.

Kya dikh'ta hai yaar too Sukumar, sorry, main kahana chaah'ta tha ki kya dikh'tee hai too Maadhuri raanee, ekadam byooTee kween. Saala Pradeep, ab dekh'ta hoon kaise shaadee naheen karataa! Kah'kar wah mujhe kheench kar palang par le gaya aur mujhe paTak kar mujh par chaDha kar mujhe betahaasha choom'ne lagaa. Jald hee usaka tannaaya lunD meree gaanD men thaa.

Do ghante baad jab wah ruka to last ho gaya thaa. Do baar us'ne meree gaanD maaree thee. Mujhe poora nanga naheen kiya thaa, bra aur paintee rah'ne diye the. Mera ardhanagn roop use bahut uttejak lag raha thaa. Paintee men chhed kar'ke useemense us'ne meree gaanD maaree thee. Jab us'ne meree gaanD men se lunD nikaala to main use munh men leta hua bolaa.

Apanee raanee kee pyaas naheen bujhaayenge kya swaamee? Maine kab se paanee naheen piyaa. Aapaka intajaar kar'tee rahee. Main jaan boojh kar ghar kee bahoo jaisa bol raha thaa. Mera sir pakaD'kar peT par dabaate hue wah mere munh men moot'ne lagaa.

PeT bhar kar pee meree jaan. Main bhee din bhar naheen mootaa. Subah jaldee men tujhe pilaana bhool hee gayaa. Mera lunD ab buree tarah se khaDa thaa. Pritam ondha leT gaya aur main us par chaDha'kar us'kee gaanD maar'ne lagaa. Yah upanyaas aap yahoo groups; deshiromance men padh rahe hain. Aaine men yah dRushy baDa hee kaamuk dikh raha tha ki ek yuw'tee ek jawaan mard kee gaanD maar rahee hai. Pritam bhee uttejit hokar bolaa.

Maa kee yaad dila dee toone. Us'ke paas bhee do teen DilDo hain. Jab mooD men a'tee hai to meree ya Pradeep kee gaanD maar letee hai. Aaj tujhase marawa kar aisa lag raha hai jaise useese marawa raha hoon. Raat ko do baar aur us'ne meree maaree. is baar munh men chappal Thoons kar meree gaanD ko us'ne chodaa. Aaj mere munh par rubber baind laga'ne kee bhee jaroorat naheen paDee. Main waise hee us'kee chappal chaba chaba kar kha gayaa. Mera lunD choos kar aakhir us'ne mujhe jhaDaaya aur fir pyaar se mera moot piyaa. Sone ke pahale wah baDe pyaar se bolaa.

Too kareeb kareeb paas ho gaya hai yaar pareexa men. Bas ekaadh aur cheej bachee hai jisase mujhe pata chal jaayega ki too sach men hamaaree daasee ban'kar rah legaa. Main jaan'ta thaa. Man hee man bola ki subah tak ruk mere raajaa, tujhe pata chal jaayega ki main tujh se kitana pyaar kar'ta hoon.

Yaar ka haluaa

Subah ham der se uThe. Ravivaar thaa. Meree neend jaldee khul gayee thee. PaDa paDa main Pritam ke nitamb sahala'ne aur choom'ne lagaa. Us'ke guda ko choom to wah jaag gayaa. Wah kuchh der maje se gaanD chusawaata rahaa, fir uTh kar baiTh gayaa. Chappal pahan'kar jab bath room ja'ne laga to main bhee saath ho liyaa. Andar pahunch kar wah bolaa.

Too kyon aa gayee raanee? Tera abhee kaam naheen hai. Ja so jaa, mujhe TaTTee karanee hai. Meree or wah baDe gaur se dekh raha thaa. Us'kee aankhon men ek uttejana thee aur apana lunD kas kar muThiya raha thaa. Main ab bhee naaree roop men thaa. Bra aur paintee pahanee huee thee aur wig bhee lagaaya hua thaa. Main us'ke saam'ne jameen par baiTh gaya aur jhuk kar us'ke pair choom'ne lagaa.

Mere swaamee, mujhe maaf keejiye. Mujhase baDee gal'tee huee hai. Pair uTha'kar mere gaalon ko ap'ne angooThe se kured'ta hua wah bolaa.

Kya hua raanee? Mujhe to bataa. it'ne din aap'ke shareer kee yah amooly bhent maine barabaad kee hai. Aaj se naheen kar'ne doongee. isapar mera adhikaar hai. Main aap'ke shareer se nikalee har cheej khaana chaah'tee hoon. Mera yah kartavy hai. Mere swaamee, mere munh men TaTTee karo, mujhe khilaao apanee gaanD ka maal, mere liye yah sone se jyaada keem'tee hai mere yaar. Meree yah kaamuk baaten sun'kar Pritam waasana se kaamp'ne lagaa.

Sach kah'ta hai yaar? Dekh, ek baar shuru karega to hamesha karana paDegaa. Fir main naheen sunoonga teree, jabaradastee kiya karoongaa. Haath pair baandh kar tere munh par baiTh jaaoongaa Maine jameen par leTate hue kahaa.

kramashah................


rajaarkey
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Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:32

यार बना प्रीतम - भाग (10)

गतान्क से आगे........

हां प्रीतम राजा, मैं सच कह रहा हूँ. प्लीज़, मिटा दे मेरी भूख. तेरी गान्ड के हालूए के आगे दुनिया की कोई भी मिठायी फीकी है उसे भी अब जल्दी हो रही थी, लंड ऐसा खड़ा था कि जैसे फट जाएगा. मेरे शरीर के दोनों ओर पैर जमा कर वह नीचे बैठ और खिसक'कर निशाना जमा'ने लगा. उस'के मासल भारी भरकम चूतड अब मेरे चेहरे के ठीक ऊपर थे.

मैने अप'ने हाथों से उस'के नितंब चौड़े किए और पास से गुदा के अंदर देखा. मज़ा आ गया. अंदर ठोस टट्टी दिख रही थी. गुदा को चूम'कर मैने उस'में अपनी जीभ डाली उस हालूए का स्वाद लेने को. मेरी जीभ का छ्होर उस ठोस माल में गया और उस कसाले खटमिट्ठे स्वाद से और इस घिनौने काम की कामुक भावना से मेरा लंड लोहे के डंडे जैसा तंन गया.

राजा, मेरे स्वामी, एक एक नीवाला खिलाना, जल्दी नहीं करना, मैं स्वाद ले लेकर खाऊंगी अप'ने प्राणनाथ की टट्टी. कहते हुए मैं मुँह फाड़ कर इंतजार कर'ने लगा. प्रीतम उत्तेजना में मेरे खुले मुँह पर अपना गुदा जमा कर बैठ गया और शुरू हो गया.

ले माधुरी रानी, मज़ा कर, खा मेरी टट्टी. उस'की गान्ड का छेद खुला और एक मोटी ठोस लेंडी मेरे मुँह में उतर'ने लगी. मेरे यार की वह गरम गरम ठोस टट्टी मेरे मुँह में गयी तो मैं झड'ने को आ गया. पूरी बड़ी लेंडी मेरे मुँह में जा'ने के बाद मैने आँखों से उसे इशारा किया और प्रीतम ने गुदा सिकोड कर लेंडी मेरे मुँह में गिरा दी.

मैं मुँह बंद कर के उसे चबा कर खूब स्वाद ले लेकर खा'ने लगा. कड़वे से और कसाले स्वाद के बावजूद मेरी उस कामुक हालत में मुझे वह किसी पकवान से कम नहीं लग रही थी. जब मैने टट्टी निगल ली तो प्रीतम मेरा लंड पकड़'कर बोला.

कैसी लगी रानी, ज़रा ब'ता तो! मज़ा आया? रोज खा सकेगी? मैं होंठ चाटते हुए बोला.

मेरे राजा, अब बाथ रूम में तुम सिर्फ़ नहा'ने को आना. बा'की सब काम मेरे मुँह में ही करना. बहुत अच्च्छा लग रहा है यार, पर अभी बंद मत करो, मैं पेट भर कर खाना चाह'ती हूँ

फ़िक्र मत कर मेरी रानी, अब तो रोज तुझे पेट भर'कर खिलाऊँगा. कह'कर प्रीतम'ने ज़ोर लगा'कर अगला नीवाला अपनी गान्ड से निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया. उस'की साँसें ज़ोर से चल रही थी, अप'ने लंड को पकड़ कर वह कस कर मुठिया रहा था. मैने हाथ बढ़ा'कर उसका हाथ थाम कर उसका हस्तमैथुन बंद किया नहीं तो साला वैसे ही झड जाता.

प्रीतम की गान्ड खाली कर'ने में दस मिनिट लग गये. बीच में एक दो बार प्रीतम अपना पूरा वजन देते हुए मेरे मुँह पर ही बैठ गया. गांद हिला हिला कर वह मेरे मुँह पर अपना गुदा रगड़ रहा था.

खा रानी, ये ले , और टट्टी खा मेरी जानेमन. मेरी रानी के लिए मेरी टट्टी हाजिर है, तुझसे मैं इतना प्यार कर'ता हूँ कि आज के बाद तेरा पेट दिन में दो बार भर दूँगा इस हालूए से वह सिसक सिसक कर हाँफटे हुए कह रहा था.

जब उस'की गान्ड खाली हो गयी तो उस'ने एक गहरी साँस ली. मैने उसका गुदा चाट चाट कर सॉफ किया और अपनी जीभ गहराई तक उस'की गान्ड में डाल कर कण कण ढूँढ कर खा लिया.

प्यास लगी है राजा, अब मूत भी पीला दे तो मेरा खाना पूरा हो जाए. मैने कहा. प्रीतम उठा और झट से उस'ने मुझे दबोच कर मेरा मुँह खोला और अपना बुरी तरह से सूजा हुआ लंड मेरे मुँह में घुसेड दिया. पूरा लॉडा मेरे गले तक उतार'ने के बाद उस'ने मेरा सिर पकड़'कर अप'ने पेट पर दबाया और ज़मीन पर लेट कर मेरे मुँह को घचाघाच चोद'ने लगा.

मैं दम घुट'ने से गोंगिया'ने लगा. गले के अंदर वह मोटा लॉडा घुस'ने से तकलीफ़ हो रही थी पर मज़ा भी आ रहा था. प्रीतम ने परवाह नहीं की और मेरा मुँह चोद'ता रहा. झड कर पहले उसका वीर्य मेरे पेट में गया और फिर बिना रुके उस'ने मेरे मुँह में मूत कर मेरी प्यास बुझा दी.

इस दौरान मैं उस'के चूतडो को बाँहों में भर'कर उस'की गान्ड में उंगली कर रहा था. टट्टी के बाद उस'की गान्ड एकदम गीली चिकनी और गरम हो गयी थी. क्या मज़ा आएगा मेरे यार की वह टट्टी की हुई गान्ड मार'कर, मैं सोच रहा था. इस'लिए मेरे मुँहासे लंड निकाल'कर जब प्रीतम आख़िर उठ'ने लगा तो उसे मैने खींच कर फर्श पर ऑंढा पटक दिया और उस पर चढ कर अपना लंड उस'की गान्ड में उतार दिया.

प्रीतम को आश्चर्य हुआ पर वह अब बहुत अच्छे मूड में था. चुपचाप पड़ा पड़ा मरावाता रहा. मैने मन लगा कर उस'की गान्ड मारी और प्रीतम ने भी मेरा आनंद बढ़ा'ने को अप'ने चूतड उच्छाल उच्छाल कर मरवाई. आख़िर जब हम बेड रूम में गये तो मैं अपनी ब्रा, पैंटी और विग उतार'ने लगा.

रह'ने दे यार, बहुत प्यारा लग'ता है. अब घर में ऐसा ही रहा कर. आदत डाल ले. रात को प्रीतम ने मुझे कहा.

आ यार, देखेगा मेरी मा और प्रदीप की तस्वीर? मैं उच्छल पड़ा. आख़िर उस'ने मुझे अप'ने घर की बहू के रूप में स्वीकार कर लिया था, नहीं तो वह कभी नहीं दिखाता! मैं हमेशा की तरह गान्ड में उसका लंड लेकर उस'की गोद में बैठ था. वह वैसे ही उठ कर मुझे बाँहों में उठ'कर अपनी सूटकेस के पास आया और एक लिफ़ाफ़ा निकाल'कर वापस सोफे पर आ गया. तब तक मैं पैर उठ'कर उस'की गर्दन में बाँहें डाल'कर लटका रहा. अब गान्ड में उसका लंड ना हो तो मुझे अटपटा लग'ता था.

लिफाफे से निकाल'कर उस'ने अपनी मा और प्रदीप की फोटो दिखाई. पहली फोटो में तीनों पूरे कपड़ों में एक साथ खड़े थे. प्रदीप प्रीतम जैसा ही दिख'ता था, ज़रा और लंबा और तगड़ा था. उन'की मा को देख'कर तो मैं दीवाना हो गया. रंग सांवला था, करीब करीब काला ही था पर भरे हुए शरीर की उस नारी को देख'कर ही मन में असीम कामना जाग'ती थी. साड़ी सफेद साड़ी और चोली में उस'के भारी भरकम उरोज आँचल के नीचे से भी दिख रहे थे. बालों में कुच्छ सफेद लटे भी थी. आँखों में छिनालपन लिए वह बड़े शैतानी अंदाज से मुस्करा रही थी.

बस दो फोटो और थी. उन'में चेहरा नहीं था, पर सॉफ था कि किस'की हैं. एक में मा का सिर्फ़ जांघों और गले के बीच का नग्न भाग था. ये बड़े बड़े नारियल जैसे लट'के मम्मे और उनपर जामुन जैसे चूचुक. झाँटें ऐसी घनी कि आधा पेट उन'में धक गया था. दूसरे फोटो में मा की झांतों से भरी चूत में धंसा एक गोरा गोरा लंड था. सिर्फ़ ज़रा सा बाहर था इस'लिए लंबाई तो नहीं दिख रही थी पर मोटायी देख'कर मन सिहर उठ'ता था. किसी बच्चे की कलाई जैसा मोटा डंडा था. मेरे चेहरे पर के भाव देख'कर वह हंस'ने लगा.

मज़ा आएगा जब तेरी गान्ड में यह लंड उतरेगा. तेरा मुँह बाँधना पड़ेगा नहीं तो ऐसा चीखेगा जैसे हलाल हो रहा हो. मुझे भी बहुत दुखा था. मैं बस आठ साल का था जब प्रदीप ने मेरी मारी थी. रात भर बेहोश रहा था मैं. बोल अब भी तैयार है प्रदीप की बहू बन'ने को या डर गया? मैं डर तो गया था पर उस'की मा के सेक्सी देसी रूप और प्रदीप के लंड की कल'पना से लंड में ऐसी मीठी कसक हो रही थी कि मैं मचल उठा.

प्रीतम मेरे राजा, मैं मर भी जाऊं तो भी चलेगा! मुझे गाँव ले चल और तुम तीनों का गुलाम बना ले. दूसरे ही दिन प्रीतम ने मेरे तीन फोटो खींचे. एक पूरे कपड़ों में लड़'की के रूप में और एक सिर्फ़ ब्रा, पैंटी और विग में. पैंटी के ऊपर के भाग से मेरा लंड बाहर निकल'कर दिख रहा था. तीसरे में मैं पूरा नग्न अप'ने स्वाभाविक लड़'के के रूप में था. फोटो के साथ एक चिठ्ठी लिख'कर उस'ने प्रदीप को बताया कि उस'के मन जैसी 'शी मेल' बहू मिल गयी है और उसे पसंद हो तो आगे जुगाड़ किया जाए.

अगले कुच्छ दिन मज़े में गये. हर हफ्ते दो तीन बार प्रीतम एक चप्पल मुझे खिला देता. हां उस दिन के बाद उस'ने मेरे मुँह में टट्टी नहीं की. मैने बहुत मिन्नत की पर वह अडिग रहा. बोला.

अब एकदम तू बहू बन'ने के बाद होगा सब कुच्छ. अभी से तू उसका आदी हो जाएगा तो फिर सुहाग रात में मज़ा नहीं आएगा. मैं चाह'ता हूँ कि कम से कम कुच्छ ऐसे मामलों में तू कुँवारा रहे. इसीलिए चप्पल की जोड़ी भी अब तक मैने एक साथ तेरे मुँह में नहीं ठूँसी. अब गाँव में तीनों मिल'कर तेरे साथ ये सब घिनौने कुकर्म करेंगे तब आएगा मज़ा. और एक बात है, तेरी चप्पालों की कितनी जोड़ियाँ हैं तेरे पास मैने कहा कि आधा दर्जन हैं. मुँह बना'कर वह बोला

कम पड़ेंगीं. आज ही दर्जन भर और ले आते हैं, उन्हें पहनना शुरू कर दे. उस दिन जा'कर मेरे नाप की एक दर्जन चप्पलें हम ले आए. सब पतली नाज़ुक और एकदम पतले पत्तों वाली थी. मेरी पुरानी चप्पलें उस'ने अंदर रख दीं, और बोला कि ये सब नयी चप्पलें रोज बारी बारी से पहनूं, उन्हें घिसना और मेरे पैर का स्वाद लगाना ज़रूरी है.

मैने बॉल कटाना कब का छोड दिया था. पहले ही मेरे बाल काफ़ी लंबे थे, अब करीब करीब कंधे तक आ गये थे. जल्दी भी बढाते थे इस'लिए मुझे विश्वास था कि दो तीन माह में चोटी या जूड़ा बाँध'ने लायक हो ही जाएँगे.

मैं अर्धनारी बना

दो हफ्ते बाद प्रदीप का जवाब आया. पढ कर प्रीतम मुस्करा'ने लगा, फिर थोड गंभीर हो गया. मैने धडकते दिल से पूचछा

क्या हुआ यार? प्रदीप भैया को मैं पसंद आया या नहीं?

हां और ना. कह'ता है कि बड़ा प्यारा छोकरा है. देखते ही उसका लंड खड़ा हो गया. पर एक बात पर वह अड़ा है. कह'ता है की चूचियाँ नहीं हैं लड़'के की. प्रीतम बोला.

पर ब्रा तो मैं पहनूंगा ना? और बड़ी पहन लूँगा. मैने कहा.

वह असली चूचियाँ चाह'ता है. तूने देखा है ना उन शी मेल फोटो में? वे लड़'के इंजेक्शन से और ऑपरेशन से सच मुच के मम्मे बढ़ा लेते हैं. प्रदीप चाह'ता है कि तेरी भी वैसी ही चूचियाँ हों. मैं उदास हो गया. असली चूचियाँ मैं कहाँ से लाऊँ? प्रीतम मुझे प्यार से चूम कर बोला.

तू तैयार है क्या चूचियाँ उगा'ने को? फिर मैं जुगाड़ कर'ता हूँ. एक डॉक्टर है मेरी पहचान का. वह ऐसा कर'ता है. बस दो घंटे का ऑपरेशन है. दो हफ्ते में टाँकों के निशाम भी भी गायब हो जाएँगे. फिर मज़ा ही मज़ा है. मैने पूच्छा.

पर यार, सिलिकॉन के इंजेक्शन से तो दस मिनिट में हो जाएगा. फिर ऑपरेशन की क्या ज़रूरत है?

सादे मम्मे थोड़े उगाएँगे तेरे! सच के मम्मे जिन'में दूध भी भरा जा सके. प्रीतम मुस्कराता हुआ बोला. मेरे चेहरे पर झलक आए आश्चर्य को देख'कर उस'ने समझाया.

तेरी छा'ती में चमडी के नीचे दो रब्बर की थैलियाँ भरी जाएँगी. उनका मुँह तेरे चूचुकों के छेद से जोड़ा जाएगा जिससे ऊपर से पिचकारी से उन'में दूध, बीयर, शराब कुच्छ भी भरा जा सके. फिर उन'के चारों ओर स्पंज की गद्दियाँ लगा'कर आख़िर में ऊपर से इंजेक्शन से चमडी के नीचे सिलिकॉन भर देंगे. मस्त बड़ी दुधारू भैंस जैसे थन हो जाएँगे तेरे. तेरी चूचियाँ चूस'ने में फिर बहुत मज़ा आएगा. प्रदीप की बहुत इच्च्छा है कि उस'की बाहू के ऐसे मम्मे हों. बोल, है तैयार? मुझे उलझन में पड देख'कर उस'ने समझाया.

लगा ले मेरी जान, चार पाँच साल ऐश करेंगे. फिर चाहे तो दूसरे ऑपरेशन से निकाल देंगे. तू पहले जैसा वापस हो जाएगा. मैने कल'पना की कि अपनी चूचियाँ मैं खुद मसल रहा हूँ या उन'में दूध भर'कर प्रीतम को चुसवा रहा हूँ. ऐसा लंड तन्नाया कि मैं सिसक कर प्रीतम से चिपट गया.

चल करवा दे यार आज ही, अब मुझसे नहीं रुका जाता. प्रीतम इतना खुश हुआ कि मुझे उठ'कर बाँहों में जकड'कर चूम'ने लगा. उस रात उस'ने मुझे इतना प्यार किया और हौले हौले मन लगा'कर मुझसे हर तरह की इतनी रति की कि मैं निहाल हो गया. उस'ने डॉक्टर को फ़ोन कर'के अगले ही हफ्ते का समय भी ले लिया.

ऑपरेशन आसानी से हो गया. डॉक्टर बूढा खूसट था पर था एकदम एक्स्पर्ट. उस'ने ज़रा भी नहीं पूचछा कि मैं यह क्यों कर रहा हूँ. वह यह भी समझ गया था कि प्रीतम मेरा कौन लग'ता है! उसी से उस'ने पूचछा कि कितनी बड़ी चूचियाँ बनाना है और कितनी केपेसिटी की रब्बर की थैलियाँ अंदर रखना है? प्रीतम तो तैश में बोला कि बना दो चालीस साइज़ की, मस्त एक एक लीटर की चूचियाँ. पर डॉक्टर ने समझाया कि मेरे छरहरे बदन और सीने की चमडी से वे नहीं संभालेंगे, जल्द ही लटक जाएँगे.

डॉक्टर की सलाह पर मेरे छत्तीस साइज़ के स्तन बनाए गये. अंदर पाव पाव लीटर की दो रब्बर की थैलियाँ डाली गयीं. इम्पोर्टेड थी, महँगी पर प्रीतम ने सारे पैसे दिए. लगे हाथ मेरी झाँटें बिलकुल सॉफ कर दी गयीं और एलेक्ट्रोलिसिस से उन्हें जड़ तक ख़तम कर दिया गया. मेरी टाँगें, कांखों के बाल सब जगह के बाल उड़ा दिए गये. सिर के बालों को छोड'कर अब मेरा शरीर एकदम चिकना था.

क्रमशः................