खानदानी चुदाई का सिलसिला

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rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:31

खानदानी चुदाई का सिलसिला--4

गतान्क से आगे..............
उनका झरना शुरू होते ही सखी और मिन्नी की चूतो ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया. कमरे में एक साथ 4 लोगों की आआअहह ऊऊऊऊहह की आवाज़ें गूंजने लगी. करीब 15 सेकेंड तक लंड चूतो को भिगोते रहे और चूते लंड को निचोड़ती रही. उसके बाद सब शांत हो गया और सब अपनी अपनी जगह पे अपने अपने पार्ट्नर के पास लूड़क गए.


करीब 10 मिनट सुस्ता लेने के बाद बाबूजी ने राजू और संजय में से किसी एक को राखी को चोदने को और अपना पानी उसकी चूत में ही छोड़ने को कहा. अब तक सभी बहुएँ कॉंट्रॅसेप्टिव पिल्स पे चल रही थी. आज से वो सब बंद कर दिया गया. अब सब बहुओं का बारी बारी से प्रेगञेन्ट होने का टाइम आ चुका था. बाबूजी ने खानदान की रीत के हिसाब से अपने वीर्य के साथ साथ पति को छोड़ बाकी मर्दों से बहुओं को चुदवाना था.

पर उस समय किसी का भी लंड खड़े होने की स्तिथि में नही था. इसलिए मौके को देखते हुए सखी ने कोई सेक्सी बात छेड़ने की सोची. ''बाबूजी एक बात बताइए कि जब आपको घर के इस राज़ का पता था तो आपने हम तीनो बहुओं को कैसे चुना ? क्या आपको यकीन था कि हम इस घर में खुश रह पाएँगी और इस घर के इस रिवाज़ को समझ पाएँगी ? आप बताइए कि आपने हमारे को अपने बेटों के लिए क्यों चुना ?'' सखी चहकते हुए बोली.

बाबूजी के चेहरे पे एक मुस्कान आ गई और उन्होने एक नई कहानी शुरू कर दी. राखी, मिन्नी, सुजीत और संजय कार्पेट पे लेटे हुए उनकी तरफ देखने लगे. पसीने से भीगे हुए बदन, औरतों के खुले बाल, गीली चूते, चमकते हुए लंड सब बाबूजी की कहानी का इंतेज़ार कर रहे थे. सखी अभी भी राजू के 10 इंच के लंड को चूत से सटाये बैठी थी. उसने भी अपने बाल खोल दिए थे और अपनी चूचिओ को ढक लिया था.

'' बेटी ये बात तब की है जब राजू 26 साल का हुआ. बिज़्नेस में ये सेट हो चुका था और मैने सोचा कि अब इसकी शादी हो जानी चाहिए. पर इसका ससुराल कैसा हो लड़की कैसी हो उसका परिवार कैसा हो ये सब बहुत ख़याल रखने वाली बातें थी. क्योंकि अगर घर की पहली बहू का चुनाव ग़लत हो जाता तो इस घर का श्राप सीधा हो जाता और आगे सबको दिक्कत हो जाती. एक दिन मैं काम के सिलसिले में बाहर गाँव गया था. एक दोस्त और उसकी बीवी मेरे साथ थे. मेरे दोस्त की वाइफ काफ़ी सुंदर थी पर मेरा मन कभी खराब नही था.

उस दिन काम के बाद हम लोग वापिस आने लगे तब मिन्नी के गाँव के पास गाड़ी खराब हो गई. जैसा कि तुम जानते हो इसका गाँव यहाँ से सिर्फ़ 40 किमी पे है. हम लोग वहाँ से शहर नही आ सकते थे. तब मैने एक दोस्त को फोन किया और उनसे पुछा कि जिस जगह हम थे वहाँ उनका कोई जानकार या रिश्तेदार था जिसके यहाँ हम रात गुज़ार सकते थे. मिन्नी के पिताजी ने कभी उनसे क़र्ज़ लिया था और मेरे दोस्त ने उनके घर जाने के लिए कहा. मैं मेरा दोस्त और उसकी बीवी मिन्नी के घर पहुँचे. वहाँ पता चला कि इसके पिताजी और 2 घंटे तक आएँगे. उस समय मिन्नी और इसकी सौतेली मा घर पे अकेले थे. इसकी मा ने हमें चाइ नाश्ता दिया और घर के बाहर आँगन में बैठने का इंतज़ाम किया. इसके घर की हालत उन दिनो अच्छी नही थी क्योंकि इसके पिताजी की सेहत अच्छी नही थी और उपर से क़र्ज़ का बोझ भी था.

मिन्नी उस समय अपनी सौतेली मा का हाथ बटा रही थी. देखने में तब ये उतनी सुंदर नही थी पर इसके हाव भाव में कुच्छ था जो मेरे मन को भा गया. एक सिंपल सलवार सूट में जिस तरीके से चल रही थी और काम कर रही थी मुझे इसमे अपनी बहू का रूप दिखने लगा. मुझे ना जाने क्यों लगा कि ये मेरे घर की बहू बनने के योग्य है. उस रात इसके पिताजी घर नही आ पाए. जिस काम के लिए वो गए थे वो काम पूरा नही हो पाया. इसकी मा ने हमारे लए खाना बनाया और मिन्नी ने हमें खाना परोसा. बाद में इन्होने हम लोगों के सोने का इंतज़ाम वहीं आँगन में कर दिया. इनके घर के आस पास आँगन की दीवार है. मैं मेरा दोस्त और उसकी बीवी वहीं 3 चारपाई पे सोने लगे. उन दोनो की चारपाई आपस मे सटी हुई थी और मेरी उनसे करीब 5 फुट की दूरी पे थी. जैसा कि तुम लोग जानते हो कि मुझे रात में नींद लेट आती है.

करीब रात के 1 बजे तक मैं अपना मूह दूसरी तरफ कर के लेटा रहा. मेरे मंन में मिन्नी को लेके विचार चल रहे थे. राजू के स्वाभाव का मुझे पता था और मुझे यकीन था कि वो इस शादी के लिए कभी ना नही कहेगा. पर मेरे मंन में सबसे बड़ा सवाल ये थे कि क्या मिन्नी कभी भी अपने देवरो से चुदवा पाएगी ? अगर वो मेरे साथ संभोग ना भी करे तो चलेगा पर देवरों से ही उसे संतान सुख मिलेगा तो क्या वो इसके लिए कभी तैयार होगी ? ऐसे ही विचार मुझे परेशान कर रहे थे.

पर जल्दी ही इसका जवाब भी मुझे मिल गया. मेरे दोस्त को शायद गाँव की खुली और शांत जगह में कुच्छ ज़ियादा ही थरक छड़ी हुई थी. वो खुले आसमान के नीचे मेरी पीठ पिछे अपनी बीवी की चूचियाँ मसल रहा था. उसकी बीवी जो एक कड़क माल थी इतनी गरम हो चुकी थी कि उसे मेरी भी परवाह नही थी. उसने अपनी साड़ी का ब्लाउस खोल दिया था और ब्रा को उपर खींच लिया था. मेरा दोस्त उसके मोटे चून्चो से खेल रहा था और वो हल्की सिसकारियाँ ले रही थी. मिन्नी और उसकी मा बेख़बर घर के अंदर सोए हुए थे. कुच्छ देर बाद जब मेरे दोस्त की बीवी की सिसकारियाँ बढ़ गई तो मेरा ध्यान मिन्नी के ख़यालों से हट के उनकी तरफ चला गया. चारपाईं के बीच के डंडे की वजह से मेरे दोस्त से ठीक से मज़े नही लिए जा रहे थे और एक चारपाई पे दो लोग एक साथ सोते तो शायद वो टूट जाती.

rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:32


ये देखते हुए मेरे दोस्त ने अपनी बीवी की टाँगों को घुटनो के नीचे से उसकी चारपाई के किनारे से लटका दिया और उसकी साड़ी उपर करके उसपे चादर डाल दी और खुद नीचे बैठ के उसकी चूत चाटने लगा. तकरीबन इसी समय शायद मिन्नी को पेशाब करना था और वो कमरे से बाहर आई. जिस तरीके से दोस्त की पोज़िशन थी उससे वो सॉफ नज़र नही आ रहा था. केवल उसके शरीर का कुच्छ हिस्सा दिख रहा था. शायद नींद की वजह से मिन्नी का ध्यान उसकी तरफ नही गया. पर थोड़ी ही देर बाद जब वो पेशाब करके लौटी तो उसकी नींद टूट चुकी थी और उसका ध्यान उन मियाँ बीवी पे गया. मिन्नी ने कुच्छ सेकेंड उनको देखा और फिर पकड़े जाने के डर से वो अंदर चली गई. इसके चेहरे पे एक घबराहट और एक जिग्यासा के भाव थे. मैने मिन्नी को आधी खुली आँखों से घर की एक खिड़की के पास छुप के मेरे दोस्त और उसकी बीवी का कांड होते हुए देखा. अब मेरी भी जिग्यासा जाग उठी और मैं उन दोनो के साथ साथ मिन्नी को भी गौर से देखने लगा. मेरा दोस्त चूत के रस का दीवाना है और वो बहुत मस्ती में अपनी बीवी की चूत चूस रहा था.

साड़ी और चादर की वजह से उसे बीच में शायद साँस लेने के लए रुकना पड़ रहा था. उसकी बीवी इतनी गरमा गई थी कि उसने अपने चेहरे से चादर हटा दी थी और बंद आँखों से सिसकियाँ लेते हुए अपनी चूचिओ को मसल रही थी. उसकी बड़ी बड़ी गोल गोल चूचिओ पे चाँद की रोशनी पड़ रही थी. एक दम से रंडी वाले एक्सप्रेशन उसके चेहरे पे थे. उधर मैने देखा की मिन्नी भी उसी की तरह अपने सूट पर से अपनी चूचिओ को सहला रही थी. मुझे लगा कि अब मेरी एक चुदास बहू की तलाश ख़तम होने वाली है. उस औरत को देखते हुए मिन्नी ने अपनी चूचिओ को अपने सूट में से बाहर निकाल दिया. शायद इसने उस रात ब्रा नही पहनी थी. इसके मम्मे भी चाँद की रोशनी में बीच बीच में नज़र आ रहे थे. अपने दाहिने हाथ से इसने एक चूची पकड़ रखी थिया और शायद दूसरे हाथ से ये अपनी मुनिया सहला रही थी. थोड़ी देर में वो औरत झरने लगी. उसकी साँसे तेज़ हो चुकी थी और उसकी छाती ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे हो रही थी. साली के चूचक बहुत कड़े हुए पड़े थे जिन्हे वो बार बार खींच रही थी. मेरे लंड का भी बहुत बुरा हाल था और मैं धोती के अंदर उसे मसल रहा था.

अपनी बीवी को झाड़वा के मेरा दोस्त उसके पास गया और उसके चूचे चूसे. उसने शायद अपनी बीवी को ज़मीन पे कुतिया बना के चूत मरवाने को कहा. पर उसकी बीवी ने उसके कान में कुच्छ कहा और उन दोनो ने अपनी पोज़िशन बदल ली. मेरे दोस्त की बीवी घुटनो के बल साड़ी को कमर पे समेटे ज़मीन पे कुतिया बन गई और मेरे दोस्त ने अपनी टांगे घुटनो से मोड़ के चारपाई की साइड में लटका ली. अब उसने उपर चादर ले ली. उसकी बीवी ने चादर के नीचे घुस के उसका लंड चूसना शुरू कर दिया. अब जिस तरीके से उसकी साड़ी उठी हुई थी उसके मांसल चूतर मेरे को साइड से नज़र आ रहे थे. मेरा मन भी मचल रहा था उसकी चूत मारने के लिए. पर मुझे डर भी लग रहा था. तभी मेरे दिमाग़ में एक विचार आया. कि ये सब तो मिन्नी देख रही है. अगर मैने अपने दोस्त की बीवी की इस स्तिथि में चुदाई की तो एक औरत दो मर्दों से एक साथ चुदेगि. और अगर मिन्नी वो सब देख के भी अंदर नही गई तो इसका मतलब वो मेरी बहू बनने के लए पूरी योग्य है. ये विचार मन में आते ही मेरा डर दूर हो गया और मैने डिसाइड किया कि अपने खानदान के लिए मैं अपने दोस्त का गुस्सा भी से लूँगा. चाहे दोस्ती टूट जाए पर आज मैं अपने बड़े लड़के का रिश्ता पक्का कर के जाउन्गा.

ये सोचते ही मैने अपनी धोती कुर्ता खोल दिया और अपनी चारपाई से उठ के दबे पाँव अपने दोस्त की बीवी के पिछे चला गया. उसके चूतर काफ़ी चौड़े थे और उनको देख के मेरे मूह में पानी आ गया. मिन्नी तब भी चुपके चुपके सब देख रही थी. मेरे दोस्त की बीवी की चूत रस से भीगी हुई थी और मुझे यकीन था कि अगर मैने एक झटके में उसके छेद में लंड डाला तो वो बिना चुदे नही रहेगी. बस मुझे अपने लंड का एन ठीक रखना था ताकि जैसे ही मैं नीचे झुकू और उसके बदन से अपना बदन मिलाऊ तो उसको घबरा के इधर उधर होने का मौका ना मिले. इसके लिए मैने अपने 7 इंच के लंड को अच्छे से पूचकारा और उसपे थूक लगाया. ये सब मिन्नी देख रही थी इसका मुझे पता था. मेरे शरीर पे सिर्फ़ एक बनियान थी जिसकी वजह से मुझे दिक्कत हो सकती थी. मैने उसे अपने दाँतों के बीच पकड़ा और एक आख़िरी बार अपने लंड को नीचे से पकड़ते हुए मेरे दोस्त की बीवी की चूत का निशाना लिया. ठीक उसी समय मेरे दोस्त की बीवी ने उसके लंड को अपने मूह से बाहर निकाला और शायद थोड़ा साँस लेने लगी. जैसे ही उसने अपना सिर वापिस नीचे झुकाया मैने एक शॉट में अपना मूसल उसके छेद में पेल दिया. उसकी तर बतर चूत में मेरा थूक से सना लोडा एक तीर की तरह घुसता चला गया और मैने झट से उसकी कमर पकड़ ली. अपने मूह में अपने पति का लंड होने की वजह से वो चीख नही पाई और ना ही वो दर्द शो कर पाई. अगर करती तो उसके लंड को दाँतों से काट लेती.

बस मैने 2 - 3 सेकेंड तक अपना लोडा उसकी चूत की गहराईयो में रोका और फिर धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए. छिनाल ने एक दम सब खुच्छ भाँप लिया पर ना तो उसके मूह से लंड बाहर आया और ना ही उसने अपने चूतर इधर उधर किए. उसके बाद करीब 10 मिनट तक उसकी गदराई जवानी के मज़े लूटे मैने. बीच बीच में मुझे खिड़की के किनारे पे मिन्नी का चेहरा और उसकी चूचिओ के दर्शन हो रहे थे. मैं पूरी मस्ती में अपने दोस्त की बीवी को चोद रहा था. उसने अपना एक हाथ चादर से निकाल के मेरे अंडों को नीचे से सहलाना शुरू कर दिया. उसके चूतर मेरी चुदाइ से मस्ती में काँप रहे थे. मेरे दोस्त को तो अपना लंड चुसवाने से ही फ़ुर्सत नही थी. मेरे लिए इससे रोमांचक बात नही थी कि अपने ही दोस्त की बीवी की चूत की सिकाई अपने ही दोस्त के सामने कर रहा हूँ और उसे पता तक नही. मेरा लंड इस उत्तेजना के मारे और उस औरत के हाथों की नर्मी की वजह से और फूल गया था. मुझे मेरे धक्कों का ख़याल रखना था कि कही चारपाई ना हिलने लगे इसलिए मैने थोड़ा आगे झुक के उसकी कमर के बगल से हाथ डाल के उसकी चूत के दाने को आगे की तरफ से सहलाना शुरू कर दिया. इस पोज़िशन में मैं ज़ियादा धक्के नही मार सकता था और मुझे उसकी चूत के पिछे के हिस्से को घिसना था. वो रांड़ भी कुतिया बनी अपने मूह से गूऊंन्न गूवंन्न करते हुए लंड के चूपे लेती रही और अपनी गांद को मेरे से घिसती रही. 1 ही मिनिट में उसका शरीर काँपने लगा. उसके शरीर की कंपन उसके मूह से होती हुई उसके पति के लंड पे दौड़ गई और वो साला भी झरने लगा. उसकी गरम मुनिया के रस ने जैसे ही मेरे लंड को भिगोया तो उसने अपनी चूत को अंदर की तरफ़ से टाइट किया और मुझसे भी रुका नही गया. मेरे लंड ने भी एक के बाद एक कई पिचकारियाँ मेर दोस्त की बीवी की चूत में दाग दी. करीब 30 सेकेंड तक हम तीन एक साथ छूटते रहे. मेरे दोस्त की बीवी कुच्छ सेकेंड के लिए शांत हुई तो मुझे लगा कि मेरा दोस्त उठ ना जाए. मैने तुरंत अपना लोडा बाहर निकाला और उसे उस रांड़ की गांद पे झाड़ा जिससे कि मेरा बचा हुआ वीर्य उसकी गांद पे लग जाए. फिर मैं अपनी चारपाई के पास खड़ा होके धोती बाँधने लगा. साली उस रांड़ ने एक और मस्त काम किया, जिस हाथ से वो मेरे अंडकोष सहला रही थी उस हाथ से अपनी चूत को कुरेदा और फिर गांद पे फेरा और मेरे दोस्त के शरीर के निचले हिस्से से चादर हटा दी. फिर मेरी तरफ देखते हुए उसने अपने हाथ को चॅटा और अपनी जीभ निकाल के उसपे मेरा वीर्य लगा हुआ दिखाया. फिर अपने पति के लंड पे वही हाथ अच्छे से रगड़ा और उसके लंड के चूपे मारने लगी. करीब 10 चूपे ले लेने के बाद वो उठ के दूसरी चारपाई पे लेट गई.

rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:33



मैने भी लेटने से पहले एक बार खिड़की की तरफ नज़र दौड़ाई तो देखा की मिन्नी भी खड़े खड़े झाड़ रही थी, इसमे उस समय इतना उन्माद भरा था कि इसकी आँखें बंद थी और चूचियाँ खिड़की के सामने खुल के आई हुई थी जैसे के इसे परवाह नही थी कि कोई इसे देख ले. ये नज़ारा देखते ही मेरे मंन को तस्सली मिल गई कि मेरे घर की सबसे बड़ी बहू मुझे मिल गई है. ''

''इसके बाद इसके पिताजी से मैने 2 बार शहर में मुलाकात करके रिश्ता पक्का किया और एक साल बाद ये मेरे घर की बहू बन के आई.'' बाबूजी अब अपना आधा खड़ा लंड सहलाते हुए उठे और मिन्नी को चूम लिया.

'' हाए हाए बाबूजी आप तो सच में बहुत गंदे हो..अपनी बहू की चूचियाँ शादी से पहले ही देख ली..क्या बाबूजी आप जैसा बहू चोदु ससुर तो दुनिया में कहीं नही होगा...उउउम्म्म्मम बाबूजी जाइए मैं आपके लंड से नही खेलती...उउम्म्म्मम ऊओ'' बाबूजी के चुंबन के बीच मिन्नी ने अपनी शिकायत दर्ज की. उसकी चूचिओ पे बाबूजी का हाथ रगड़ खा रहा था.

'' मेरी प्यारी छिनाल बहूरानी......अगर मैने तेरी इन चूचियो को शादी से पहले देखा तो तूने भी मेरे लंड को अच्छे से निहारा था ना उस रात और वो भी मेरे दोस्त की बीवी की चूत में. तो हो गया हिसाब बराबर. चल अब आजा और नखरे ना कर अब मुझे दूध पिला के खुश कर दे नही तो मेरा वोही चूड्दकर लंड खड़ा कैसे होगा. उसे ताक़त कहाँ से मिलेगी....??'' बाबूजी ने नीचे झुकते हुए मिन्नी की घुंडीओ से खेलते हुए उसे पुचकारा.

लंड एक बार फिरसे तन चुके थे और चूते फिर से गीली.....संजय उठा और राखी को साथ लेके डाइनिंग टेबल की तरफ बढ़ गया. उसका 11 इंच का पतला लोडा राखी के हाथ की शोभा बढ़ाए हुए था. राजू ने सखी को अपने पर से उठाया और उसे सोफे पे लिटा दिया और उसकी चूत में जीभ चलाने लगा और सुजीत ने अपना मोटा काला लोडा सखी के मूह की तरफ बढ़ा दिया.

एक बार फिर से खानदानी चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया.........