खानदानी चुदाई का सिलसिला

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rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:27



'' सुजीत क्या कर रहा है ? मेरे लिए एक विस्की तो बना ज़रा. और बाकी सब से भी पुच्छ ले कि क्या लेंगे ?'' बाबूजी ने सुजीत को कहा.

सुजीत ने बाबूजी का ड्रिंक बनाया और बाकी सब से भी पुछा. उसने सबके मुताबिक ड्रिंक्स सर्व कर दी. मर्दों ने विस्की और बियर ली और औरतों ने जूस के साथ वोद्का. सॅटर्डे ईव्निंग्स का यही हिसाब था. सभी लोग शाम को ड्रिंक्स लेते थे. ड्रिंक्स सर्व हो रही थी तो मिन्नी और सखी किचन से स्नॅक्स लेने चली गई.

'' भाभी आज बाबूजी कुच्छ कहानी सुनाने वाले हैं. अपने घर की हिस्टरी. आप को अपने घर की हिस्टरी तो पता होगी ना ? मुझे कह रहे थे कि अब तुम्हारे को बताने का टाइम आ गया है. पता नही क्या ख़ास बात है ??!!'' सखी ने स्नॅक्स लगाते हुए कहा.

'' मुझे भी कुच्छ बातें पता हैं पर शायद पूरी नही. बाबूजी से कभी हमने नही पुछा पर मुझे लगता है कि उन्होने कुच्छ बातें नही बताई हमें. क्या वजह है ये तो पता नही, शायद आज कुच्छ नया सुनने को मिले.'' मिन्नी ने जवाब दिया.

स्नॅक्स सर्व हो गए. ड्रिंक्स की चुस्कियाँ लेते हुए बाबूजी चुप थे. टीवी बंद कर दिया था. सब लोग बीच बीच में उनको देख रहे थे. इतना सीरीयस बाबूजी को कभी किसी ने नही देखा था. बाबूजी ने खामोशी को तोड़ते हुए अपने गले को सॉफ किया. सबको उनके सोफा के नज़दीक आके बैठने को कहा. तीनो मर्द एक सोफा पे बैठ गए. मिनी और राखी कार्पेट पे बैठी थी और सखी ने नज़दीक का सोफा ले लिया.

'' आआज मैं तुम लोगों को अपने परिवार की कुच्छ ऐसी बातें बताने जा रहा हूँ जो आजतक तुमको नही कही. इसलिए ध्यान से सुनना और समझना. इन बातों का तुम लोगों की पुरानी, आज की और आने वाली ज़िंदगी से बहुत बड़ा रिश्ता है. '' बाबूजी बोले.

सब एक तक उनकी ओर देखे जा रहे थे. बाबूजी ने आगे बताना शुरू किया.

'' बात मेरे दादाजी यानी तुम्हारे परदादा (ग्रेट ग्रॅंडफादर) के ज़माने की है. हमारे दादा काफ़ी अमीर लोगों में से थे. दादी भी एक अच्छे खानदान की थी. दादाजी के 2 भाई थे जिनकी शादी नही हुई थी. दादाजी की शादी को करीब 6 साल हो चुके थे पर घर में कोई औलाद नही थी. काफ़ी कोशिशों और पूजा पाठ के बाद मेरे पिताजी का जनम हुआ. उनके जनम की खुशी में एक बड़ा भोज रखा गया. ग़रीबों को दान दिया गया. भोज ख़तम होने के बाद एक साधु वहाँ पहुँचे. दादी थकान के मारे घर में जा चुकी थी और दादाजी कुच्छ हिसाब देख रहे थे. साधु के आने की खबर किसी ने उनको नही दी. साधु ने एक नौकर को दादाजी को बुलाने को कहा. पर उस नौकर ने ज़ियादा ध्यान नही दिया. इस पर साधु बिगड़ गये. उन्हे काफ़ी क्रोध आ गया. गुस्से में वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगे. उनकी बात सुन के दादाजी बाहर आए और उन्हे समझाने की कोशिश की. पर उस समय तक साधु ने अपने कमंडल में से जल निकाल लिया था और दादाजी को श्राप देने लगे.''

'' जा आज मैं तुझे श्राप देता हूँ कि तेरे घर में आज के बाद 3 पीढ़ी तक किसी भी पुरुष को अपनी औलाद का सुख प्राप्त नही होगा. ये इस साधु का श्राप है तुझे''

ये सुनते ही दादाजी साधु के पैरों में गिर गए और उनसे माफी माँगने लगे. उन्होने साधु को बहुत समझाया कि उनकी कोई ग़लती नही है. अगर उन्हे पता होता कि वो घर पे आए हैं तो खुद उनकी सेवा करते. काफ़ी माफी माँगने पे साधु का मन पसीज गया. उन्होने कहा कि श्राप तो वापिस नही हो सकता पर एक उपाय बता दूँगा. साधु ने बताया कि दादाजी का वंश तो चलेगा पर कोई भी पुरुष अपनी पत्नी से औलाद पैदा नही कर पाएगा. ये बात दादजी को पूरी तरह समझ नही आई पर इससे पहले वो कुच्छ कहते साधु वहाँ से चले गए.

कुच्छ समय बाद दादाजी के दोनो छ्होटे भाईओ की शादी हुई पर उनको भी काफ़ी समय तक कोई औलाद नही हुई. इधर मेरे पिताजी भी घर में अकेले थे. दादी को कोई दूसरी औलाद नही हो रही थी. तब एक दिन दादाजी को साधु की कही बातें याद आई और वो उसका मतलब समझ गए. उन्होने घर के सभी मर्दों और औरतों की बैठक बुलाई और साधु के श्राप और उसके उपाए के बारे में बताया. दादाजी के हिसाब से साधु के उपाए में कोई भी मर्द अपनी पत्नी से संतान सुख नही प्राप्त कर सकता परंतु घर की दूसरी इस्त्री से संतान सुख अवश्य मिल सकता है.

बस तब से हमारे खानदान में भाईओं का अपनी अपनी बीवी को बदलने का रिवाज बन गया. दादाजी और उनके भाईओं की कुल मिलाके 4 औलादे हुई पर मेरे पिताजी को छोड़ के बाकी सब अलग अलग भाईओं / बहुओं के संभोग से हुई. मेरे पिताजी की शादी के बाद उनके 2 भाईओं की शादी हुई पर एक का जल्दी निधन हो गया. अब मेरे पिताजी और उनके 2 भाईओं को घर की 3 औरतों को सुख देना था. उन 3 भाइयो से हम 4 भाई और एक बहेन हुई. बहेन सबसे बड़ी थी तुम्हारी कंचन बुआ.

हम 4 भाईओं में से मैं सबसे छ्होटा था. मेरी उमर उस समय 10 साल की थी जब बड़े भैया की शादी हुई. मैं उन दिनो शहर में पढ़ाई कर रहा था. दीदी की तब शादी हो चुकी थी. घर में बड़े भैया, भाभी, मझले दोनो भाई और हमारे 2 चाचा / चाची (उनमे से कौन किसके पिता थे पता नही) रहते थे. जब भाभी को 2 साल तक कोई बच्चा नही हुआ तो बड़े भैया ने दोनो चाचा से निवेदन किया कि वो अपनी बहू को बच्चे का सुख दें. पर साथ ही साथ दोनो छ्होटे भाई भी कोशिश करते रहे. फिर सबसे पहले राजू का जनम हुआ. तब मझले भैया की भी शादी हो गई. मेरी उमर उन दिनो 13 साल की थी उसके और 2 साल के बाद मझली भाभी से सुजीत का जनम हुआ. तब मैं 15 साल का हो चुका था. मैं भी कुच्छ समय के लिए गाँव चला गया. तब मुझे पहली बार अपनी दोनो भाभियो के साथ सोने का मौका मिला. उसके बाद संजय का जनम हुआ. अब तुम तीनो को ये तो पता है कि मैं तुम्हारा पिता नही हूँ पर शायद मैं संजय का पिता हो सकता हूँ और शायद नही भी. तुम तीनो के असली पिता कौन हैं ये किसी को भी नही पता.

उसका मेन कारण है कि जब बड़ी भाभी को सबसे पहले चाचा लोगों के साथ सोना था तब से बड़े भैया ने ये रीत बनाई कि एक रात में वो किसी एक के साथ नही सोएंगी. कम से कम 2 मर्द एक साथ होंगे. इसकी वजह थी कि खानदान में कभी किसी को ये ना पता चले कि होने वला बच्चा हम लोगों का भाई है या हमारी औलाद. इसलिए हमेशा किसी ना किसी चाचा के साथ कोई ना कोई भाई ज़रूर होता था. कभी कभी तो 3 लोग एक साथ होते थे.

rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:27



अब इश्स हिसाब से तुम मेरे भाई भी हो सकते हो और मेरे भतीजे भी. चूँकि मेरी खुद की शादी कभी नही हुई इसलिए मैं सिर्फ़ संजय का पिता हो सकता हूँ.

बाबूजी के मूह से ये सब सुनके सब स्तब्ध रह गए. सबके चेहरे के रंग उड़ चुके थे. 3 भाईओं के ये तो पता था कि बाबूजी उनके पिता नही हैं चाचा हैं पर जैसा कि उनके घर का नियम बनाया गया था कि हर किसी को बाबूजी कहा जाता था. ये वजह उन्हे आज समझ आई.

'' मेरे बच्चों ये बहुओं के साथ सोने का रिवाज और भाईओंका आपस में एक दूसरे की बिवीओ को बाँटना हमारे खानदान में 3 पीडी से चला आ रहा है. तुम लोग अब आख़िरी पीडी हो जिस पे ये श्राप है उसके बाद सब नॉर्मल हो जाएगा. मैने सोच रखा था कि जब तक तुम तीनो की शादी नही हो जाती तब तक ये बात तुम लोगों से छुपा के रखूँगा. मेरे मन में बस एक ही चीज़ थी कि तुम लोग आपस में एक साथ रहो और मिलजुल के चलो. ये बात अब मैं गर्व से कह सकता हूँ कि हम सब एक बड़ा अच्छा परिवार हैं. और मुझे उमीद है कि आगे भी ऐसे ही रहेंगे.''
क्रमशः..............................

rajaarkey
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Re: खानदानी चुदाई का सिलसिला

Unread post by rajaarkey » 30 Dec 2014 02:28


khaandaani chudaai ka silsila--2

gataank se aage..............
Babuji ne apni unglian ab Minni ki choot men rakh ke angoothe se uski bur ke daane ka gharshan shuru kar dia tha. Angoothe ke dabaaw men dana kaafi sakht ho gaya tha. Minni ki bur ka dana kaafi mota tha. Raju aur Sanjay dono k uski choot choosne men bahut aanand aata tha. Woh dono baari baari se shuru ke dino men chhutti waale din uski choot chooste rehte the. Minni Sunday aur Monday ko koi kaam nahi karti thi. Saturday raat se uski jo chudaai shuru hoti thi ki puchho nahi. Teeno ladke aur sasur ek ke baad ek usko chodte aur usse khelte. Monday dopahar ke baad woh thora kaam karne layak hoti thi.

Jab Rakhi ghar men aai to kuchch din uske sath bhi yahi hua, par phir dhire dhire sabke routine set ho gae. Hariya kaka ko pehle bilkul chance nahi milta tha. Par Rakhi ke aane ke baad unko bhi mauka milne laga. 65 varsh ki aayu tak bhi woh kaafi gatheele mard the. Lund medium size ka tha par chudaai men nipun the. Unhone dono bahuon ko achha khaane ke saath saath mast chudaai ki kuchch baaten bhi sikhai. Unki wajah se hi Minni aur Rakhi ke sambandh bhi bane. Kitchen men Rakhi ke saamne jab woh Minni ki lete to Rakhi saari utha ke apni choot sehlaati . Aise hi ek din unhone Minni se uski choot chatwa di. Woh din tha aur aaj din tab se dono bahuen aapas men maza lene ka koi bhi mauka nahhi chhorti. Akele hon ya sabke beech din men ek doosre ki choot chaate bagair unko neend nahi aati. Jaroori nahi hai ki woh dono jhade par chusaai karna aur karwaana ab ek aadat ban gai hai.

Ye sochte hue aur sasur ji ke pyaar karne ke tarike se Minni ko maza aur susti aane lage the. Uski aankhen band thi par tabhi uski bagal men sasur ji ne apni jeebh se chaata aur uske shareer men jhurjhuri daud gai. Use apni baglen chatwaane men bhi bahut maza aata tha. 2 - 3 baar to usne apni bagal men lode bhi lie the. Babuji ke aisa karte hi uski chihunk nikal gai. babuji ne muskuraate hue uski aadhi khuli nasheeli aankhon men jhaanka aur uska pyaara sa chumban lia. Apni jeebh pe babuji ki jeebh ka sprash achha lag rha tha. Honth kholte hue Minni ne poori jeebh andar le li aur dono ki jeebhen aapas men kushti karne lagi. babuji sarw gun sampann chodu the. Aurat ko kab kis cheez ki zaroorat hai achhe se bhaanp lete the. Kiss karta karte unhone bahu ko apne upar le lia. Lund ne choot pe dastak di aur choot ne dwaar khol die. Lund maharaj dhire dhire gili choot ke patal kholte hue andar ghus gae.

'' Babuuuuujjjiiii... uuummm...ooohhhh..uummm...'' Minni niche se apni bur men ghuse lund se chitkaar uthi.

'' Babuji sach aapke lund ki sawaari men hi jannat hai..haaaiii ..mazaa aa gayaa.. ufff babuji aap nahi hote to meri munia ka kya hota..pata nahi. ye 7 inch ka sakht moosal mere lie dia gaya bhagwaan ka vardaan hai.. jaise ki bhagwaan ne meri munia banate hue keh dia ki ja beti tere sasur iska bhog karenge...ooohhh babuji..aapki gotian kitni sakht hui padi hai..kya inhe bhi andar doge...''' Minni halke halke chootar utha ke lund pe pelte hue babuji ke tatton se khel rahi thi.

'' Ari bahu tere lie hi bana hai ye..aur teri munia iske lie..tu chinta na kar marte dum tak ye teri pyaasi bur ko apna chipchipa paani pilaega. Chal aaja ab apni ye moti moti chhation ko chuswa le apne sasur se. Mere honth bhi pyaase hain. Aaja ab dhoodh pila de mujhe.'' Apni gaand utha ke babuji ne 3 - 4 dhakke lagae aur gaand ko gol gol ghumaya.

Minni aage ko jhuki aur Rajpal ke sir ko pichhe se pakar lia. Jhuk ke apne nipple uske muh men die. ''' AAArrrghhh aaj aap mere sasur kam mere bete ziada ho..apni maa ka dhoodh pio bete..ooohhh..haan choose le madarchod..inhe choose le..aur apni ma ki choot bhi chod le jee bhar ke...uuummmmaaaaaaaa...main to jaldi hi jhad jaungi...phir tu kya karega..ooohhhhh haaaannn..haannnn...babujiii...main jhar jaun apke rod pe...gilaa kar doon kya ise ???? bolo babuji ya meri munia ka ras piyoge ...??''' Minni poori masti men boli.

2 din ki chudaas Minni sirf 5 min men hi jharne ko taiyaar thi. babuji ke dimaag men kuchch soojh nahi raha tha. Kal raat ki Sakhi ki lund chusaai ke baad unhe bhi thora dard tha. Minni ka to kaam hone wala tha to kyon na main ab lund ko thora araam de doon. Saturday hai to ghar men sab ek sath honge aur saturday night bhi manai jaegi. Ye sab sochte hue Babuji ne Minni ke chhochakon pe apne hothon ka pressure bada dia aur niche se gaand utha utha ke uski choot ko raundane lage. Minni ki bur ka dana aage jhuke hone ki wajah se Babuji ke lund ke upar pet ke hisse se ragar kha raha tha. Minni ise sehan nahi kar paai aur bahut zor ke jhatke lete hue jharne lagi. Usne apna badan sidha kar lia aur haath apne baalon ko pichhe se sehlaane lage. Choot ka daane wala hissa Babuji ke pet pe ragarti rahi aur jharti rahi. Babuji uske mummen nochte rahe. Jhatke lete hue uska badan bahut khoobsoorat aur maadak dikh raha tha. Ek baar to Babuji ne socha ki kyon na chudaai poori kar li jae. Par phir socha ki raat ke lie bacha ke rakhta hoon woh ziada achcha rahega.

1 min apni choot se pichkaarian chhorne ke baad Minni nidhaal hoke Babuji ki chhati pe gir gai. Babuji ne use kas ke baandh lia aur halke halke chuban lete rahe. Uski peeth aur gaand pe hath pherte rahe. Lund abhi bhi poora phoola hua choot men tha. Aise kareeb 2 min tak dono lete rahe. Ab Babuji ka lund murjhaane laga tha. Shayad woh bhi susti ke mood men the. Unhone Minni ko apne se alag kia aur dono sasur aur bahu ek doosre se chipak ke so gae. Kareeb ek ghante ke baad Sakhi ne drwaaze pe dastak di aur andar aai. Babuji ka murjhaya hua lund abhi bhi chipchipa sa tha. Sakhi ne aage bad ke ek choopa lia aur supade ke chhed pe apni jeebh chalai. Uske aisa karne se Babuji ki neend toot gai aur Sakhi ke baalon ko pakar ke use apni taraf khincha. Dono ne ek gehra chumban kia aur Sakhi ne apni medium size ki sakht choochion ko thora apne sasur ke seene pe ragra.

'' Babuji , Bhabhi chalie ab uthiye .shaam hone waali hai aur raat ki party ki taiyaari bhi karni hai. Chalie na Babuji aaj ki raat to kaafi lambi rahegi..jaldi uthiye taiyaar ho jaiye, Bhabhi Rakhi bahbhi aapka kitchen men intezaar kar rahi hain.'' Sakhi ne pyaar se bhabhi ke chootar sehlaate hue use uthaya. Aankhen malte hue Minni uthi aur apne kapde leke Babuji ke bathroom men chali gai. babuji wahin lete lete apne lund se khelte hue kuchch soch rahe the. Tabhi Sakhi ne unko taang pe chikoti kaati.

'' Babuji kahan kho gae aap..kya soch rahe hain.. aur aap ye apne pappu se khelna band kijie na..nahi to meri pappi ko kuchch ho jaega aur phir main aap pe chad jaungi..'' Sakhi ne apni saari ke upar se apni choot ko sehlaate hue kaha.

''Kuchch nahi beta . main soch raha tha ki aaj tujhe is ghar men aae hue 3 mahine ho gae. Aaj tujhe bhi is ghar ki history ka pata chalna chahie. Ab tu sab samjh paegi. AAj raat ko main tum logon ko apne pariwaar ki puraani history ke baare men kuchch bataunga.'' Ye kehte hue Babuji uthe aur apna kurta pehen lia. Sakhi ne unke chehre ke bhav dekhe aur samjh lia ki abhi Babuji serious mood men hain. Woh kamre se bahar chali gai. Minni bhi taiyaar hoke bina kuchch kahe jaldi jaldi kamre se bahar chali gai. Babuji apne ateet ki yaad men khoye hue khidki se bahar dekh rahe the.

Shaam ko sab log drwaing room men ikatthe hue. Babuji apne sofa pe aadhe baithe hue the. Sujit aur Sanjay business ki discussion men busy the. Raju aur Sakhi newspaper pad rahe the. Rakhi aur Minni kitchen samet ke aake baith gai. Kuchch der sab araam se yun hi baithe rahe. TV chal raha tha. Babuji ke siwae kisi ka dhyaan TV pe nahi tha. Shaam ke 7.30 hue the.

'' Sujit kya kar raha hai ? Mere lie ek whiskey to bana zara. aur baaki sab se bhi puchh le ki kya lenge ?'' Babuji ne Sujit ko kaha.

Sujit ne Babuji ka drink banaya aur baaki sab se bhi puchha. Usne sabke mutabik drinks serve kar di. Mardon ne whiskey aur beer li aur auraton ne juice ke sath vodka. Saturday evenings ka yahi hisaab tha. Sabhi log shaam ko drinks lete the. Drinks serve ho rahi thi to Minni aur Sakhi kitchen se snacks lene chali gai.

'' Bhabhi aaj Babuji kuchch kahani sunaane waale hain. Apne ghar ki history. Aap ko apne ghar ki history to pata hogi na ? Muje keh rahe the ki ab tumhare ko batane ka time aa gaya hai. Pata nahi kya khaas baat hai ??!!'' Sakhi ne snacks lagate hue kaha.

'' Mujhe bhi kuchch baaten pata hain par shayad poori nahi. Babuji se kabhi hamne nahi puchha par mujhe lagta hai ki unhone kuchch baaten nahi batai hamen. Kya wajah hai ye to pata nahi, shayad aaj kuchch naya sunane ko mile.'' Minni ne jawab dia.

Snacks serve ho gae. Drinks ki chuskian lete hue Babuji chup the. TV band kar dia tha. Sab log beech beech men unko dekh rahe the. Itna serious Babuji ko kabhi kisi ne nahi dekha tha. Babuji ne khamoshi ko trte hue apne gale ko saaf kia. Sabko unke sofa ke nazdeek aake baithne ko kaha. Teeno mard ek sofa pe baith gae. Miini aur Rakhi carpet pe baithi thi aur Sakhi ne nazdeek ka sofa le lia.

'' AAj main tum logon ko apne parivaar ki kuchch aisi baaten batane ja raha hoon jo aajtak tumko nahi kahi. Islie dhyaan se sunana aur samjhana. In baaton ka tum logon ki puraani, aaj ki aur aane wali zindagi se bahut bada rishta hai. '' Babuji bole.

Sab ek tak unki aur dekhe jaa rahe the. Babuji ne aage batana shuru kia.

'' Baat mere Dadaji yaani tumhare pardada (great grandfather) ke zamaane ki hai. Hamare dada kaafi ameer logon men se the. Dadi bhi ek achhe khandaan ki thi. Dadaji ke 2 bhai the jinki shaadi nahi hui thi. Dadaji ki shaadi ko kareeb 6 saal ho chuke the par ghar men koi aulaad nahi thi. Kaafi koshishon aur puja paath ke baad mere Pitaji ka janam hua. Unke janam ki khushi men ek bada bhoj rakha gaya. Garibon ko daan dia gaya. Bhoj khatam hone ke baad ek sadhu wahan pahunche. Dadi thakaan ke maare ghar men ja chuki thi aur Dadaji kuchch hisaab dekh rahe the. Saadhu ke aane ki khabar kisi ne unko nahi di. Saadhu ne ek naukar ko Dadaji ko bulaane ko kaha. Par us naukar ne ziada dhyaan nahi dia. is par Saadhu bigad gaye. Unhe kaafi krodh aa gaya. Gusse men wo jor jor se chillane lage. Unki baat sun ke Dadaji bahar aae aur unhe samjhaane ki koshish ki. Par us samay tak Saadhu ne apne kamandal men se jal nikaal lia tha aur Dadaji ko shraap dene lage.''

'' Jaa aaj main tujhe shraap deta hoon ki tere ghar men aaj ke baad 3 peeri tak kisi bhi purush ko apni aulaad ka sukh prapt nahi hoga. Ye is saadhu ka shraap hai tujhe''

Ys sunte hi Dadaji saadhu ke pairon men gir gae aur unse maafi maangne lage. Unhone Saadhu ko bahut samjhaya ki unki koi galti nahi hai. Agar unhe pata hota ki woh ghar pe aae hain to khud unki sewa karte. Kaafi maafi maangne pe Saadhu ka man paseej gaya. Unhone kaha ki shraap to waapis nahi ho sakta par ek upay bata doonga. Saadhu ne bataya ki Dadaji ka vansh to chalega par koi bhi purush apni patni se aulaad paida nahi kar paega. Ye baat Dadji ko poori tarah samjh nahi aai par isse pehle woh kuchch kehte Saadhu wahan se chale gae.

Kuchch samay baad Dadji ke dono chhote bhaaion ki shaadi hui par unko bhi kaafi samay tak koi aulaad nahi hui. Idhar mere pitaji bhi ghar men akele the. Dadi ko koi doosri aulaad nahi ho rahi thi. Tab ek din Dadaji ko saadhu ki kahi baaten yaad aai aur woh uska matlab samjh gae. Unhone ghar ke sabhi mardon aur auraton ki baithak bulaai aur saadhu ke shraap aur uske upaye ke baare men bataya. Dadaji ke hisaab se saadhu ke upaye men koi bhi mard apni patni se santaan sukh nahi prapt kar sakta parantu ghar ki doosri istri se santaan sukh avashya mil sakta hai.

Bas tab se hamare khaandaan men bhaion ka apni apni biwi ko badalne ka riwaj ban gaya. Dadaji aur unke bhaion ki kul milake 4 aulaaden hui par mere Pitaji ko chhor ke baaki sab alag alag bhaion / bahuon ke sambhog se hui. Mere Pitaji ki shaadi ke baad unke 2 bhaion ki shaadi hui par ek ka jaldi nidhan ho gaya. Ab mere pitaji aur unke 2 bhaion ko ghar ki 3 auraton ko sukh dena tha. Un 3 bahion se hum 4 bhai aur ek behen hue. Behen sabse badi thi tumhari Kanchan Bua.