कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और compleet

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raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 14:43

शादी सुहागरात और हनीमून--37

गतान्क से आगे…………………………………..

उन्होने एक हाथ मेरी सारी के अंदर डाल के, सीधे मेरे चुतडो को...और अगले पल मेरी पैंटी ज़मीन पे थी. उनके हाथ ने मेरी 'बुलबुल' अब सीधे दबोच ली. मेरे हाथ भी शर्ट के अंदर घुस के...मेने कस के 'उसे' पकड़ लिया. वो अब खुल के फानाफने रहा था. मेरी उंगालिया इतनी खुश थीं...इतने अच्छा लग रहा था...कड़ा कड़ा, मोटा, मुश्किल से पकड़ में आ रहा था. उनके होंठ मेरे होंठो से रस चखने के बाद...मेरे उरोजो के उपरी भाग पे चूम रहे थे, चूस रहे थे. उनके शैतान हाथ ने मेरे ब्लाउस के उपर के बटन खोल दिए थे. एक हाथ मेरे उभार मसल रगड़ रहा था, ब्लाउस के उपर से और दूसरा कस के नीचे सहला रहा था, मेरे निचले होंठो को छेड़ रहा था. मेरा हाथ भी अब उनके पूरी तरह उत्तेजित लंड को कस कस के मुठिया रहा था, आगे पीछे कर रहा था. उन्होने मेरी अच्छि तरह गीली हो चुकी चूत में एक उंगली हल्के से घुसा दी और मेने भी एक झटके में, आगे पीछे करते हुए कस के खींचा और उस की चमड़ी पीछे खींच के सूपड़ा खोल दिया. उनकी उंगली हल्के अंदर बाहर हो रही थी साथ साथ मेरी सांस भी लंबी गहरी...मेरे कोमल हाथ भी अब कस कस के 'उसे' दबा रहे थे भींच रहे थे. उनके अंगूठे ने मेरे उतेज़ित खड़े क्लिट को अचानक छू दिया, फिर तो मेरी सारी देह गनगनाने गयी. एक...दो बार छूने के बाद, उन्होने हल्के से उसे रगड़ना शुरू कर दिया और मे काँपने लगी. अपने आप मेरा अंगूठा, उनके खोले खूब फॉले, बड़े, मोटे सूपदे पे जा के उसे सहलाने रगड़ने लगा और मेने 'उसकी आँख ' छू ली. प्री कम की दो बूँदों ने मेरा अंगूठा गीला कर दिया. उत्तेजित होके उन्होने हल्के से मेरी 'पिंकी' पिंच कर दी.

और तभी दरवाजा ख़टखटाने की आवाज़ हुई...मेने शर्ट से हाथ तुरंत बाहर निकाल लिया और वो भी मुझे छोड़ के...तभी दुबारा...खाट खाट...मेने झट से फर्श पे पड़ी पैंटी उतार के बिस्तर पे तकिये के नीचे दबाया और दरवाजा खोल दिया.

रीमा थी.

उसने पहले मेरी ओर देखा फिर अपने जीजा की ओर, वो दोनो टाँगे सिकोडे अपने शर्ट पे हाथ रखे बैठे थे. लेकिन बिना इस पे गौर किए वो चालू हो गयी,

मे नहाने आई हूँ. सुबह मेने देखा कि दीदी आपका बाथ रूम बहुत अच्छा है और बाथ टब कितना बड़ा है, कितना रिलॅक्सिंग होगा ना...और मेरे कपड़े भी यहीं पे थे तो मेने सोचा यहीं नहा लूँ.

अर्रे तो नीचे भी तो बाथ रूम थे, वहीं नहा लेती. ऐन मौके पे उसने डिस्टर्ब किया था, मुझे बड़ा खराब लग रहा था, 15-20 मिनट बाद में आ जाती तो क्या बिगड़ जाता उसका मे सोच रही थी. मे फिर बोली और कपड़े यहाँ से ले जाती, तुम्हारे जीजा... मेरी बात काट के वो बोली,

मेने भी यही कहा था अंजलि से, लेकिन एक में सोनू नहा रहा था और दूसरे में दीदी कपड़े धूल रही थीं. मेने कहा मे वेट कर लेती हूँ पर अंजलि बोली, नही कहाँ वेट करोगी. भैया और भाभी तो सुबह सुबह ही नहा लेते हैं, उपर बाथ रूम खाली ही होगा.

अंजलि की बच्ची, आज तेरी ने फडवाइ तो...मेरे दिमाग़ में बबूले बन रहे थे.

ठीक ही तो है यहीं नहा लो और कहो तो मे नहला भी दूँगा. उसके जीजू अब फिर साली को देख के मूड में आ रहे थे. मे भी नॉर्मल हो रही थी, शरारात से मेने रीमा को उनके शर्ट की ओर इशारा किया. उसने, जब तक वो सम्हले सम्हाले, एक झटके में हाथ शर्ट के उपर से हटा के बोला,

हे जीजू ये क्या छिपा रखा है. और हाथ के हटते ही शर्ट में तने 'टेंट पॉल' पूरे बलिश्त भर का,

वो शर्मा गयी और ये झेंप गये.

बात बदल के वो बोली, नही जीजू रहने दीजिए आज मुझे जल्दी है. अभी आपको पिक्चर के लिए भी चलना है. और वैसे भी मे अब आपको इतने सस्ते में नही छोड़ने वाली, कल तक तो हूँ ना तो कल नहला दीजिएगा...

सुन कोई जल्दी वल्दी नही है, वो जो इंपोर्टेड शॅमपू लाए थे नीला, कहाँ रखा है, मेने पूछा.

वो वहीं टब के पास रखा है. वो बोले.

और उसे लगा के आधे घंटे तक बॉल वैसे है रखना पड़ता है, है ना.

बिना मेरा मतलब समझे उन्होने हामी भरी.

देख... मे रीमा से बोली, तू तब तक अपने कपड़े निकाल...

यहीं जीजू के सामने...क्या दीदी वो अचरज से बोली.

मुझे कोई एतराज नही है बल्कि मे निकालने में मदद कर सकता हूँ. खुश हो के वो बोले.

तुम दोनो ने...अर्रे मेरा मतलब था नहाने के बाद पहनने वाले...तब तक ये तुम्हारे लिए बढ़िया बबल बाथ बना देंगें, अरमॅटिक सेंट डाल के...जाइए ना, बड़ा साली साली करते रहते हैं साली के लिए इतना तो करिए. वो चुपचाप चले गये.

जब तक वो लौट के आए रीमा ने अपनी ड्रेस निकाल के रखी थी, एक नुडल स्ट्रिंग की टांक टॉप और एक हिप हगिंग जीन्स.

क्यों जीजू..., कैसे लगती है ड्रेस मेरी. वो हंस के बोली.

उन की तो जैसे जान निकल गयी. वो मुश्किल से बोले, एकदम सेक्सी, चलो नहालने नही दे रही हो तो ड्रेस पहनाने में कहो तो तुम्हारी मदद कर दूं... वो फिर वापस अपनी स्पिरिट में आ गये थे.

वो कुछ बोलती उस के पहले बात काट के मे बोली, बाथ टब में कम से कम आधे घंटे रिलॅक्स करना, एक दम फ्रेश हो जाएगी. और उसी के साथ शम्पू भी...बाल में लगा के आधे घंटे तक कम से कम छोड़ देना और फिर शवर में धूल लेना. देख जल्दी कोई नही है, अभी सिर्फ़ साढ़े ग्यारह बजे हैं. साढ़े बारह तक भी तुम तैयार हुई तो खाना डेढ़ दो से पहले होने वाला नही और पिक्चर भी साढ़े तीन से है. इस लिए तुम आराम से नहा धो के तैयार हो जाओ. कपड़े लेती जा वहीं ड्रेसिंग रूम में चेंज कर लेना और कुछ मेकप वेकप करना हो तो वो भी सब है वहाँ पे.

एक तरह से धक्के दे के भेजा मेने. जब तक वो गयी उनकी निगाहे अपनी साली पे टिकी थीं, और उस से उन के 'हार्ड ऑन' की हालत और खराब ही हुई...और वो भी अपने रसीले होंठो पे जीभ फिरा के...

हे तुम बार बार आधे घंटे की बात क्यों कर रही हो, वो शैम्पू तो... उन की बात अन सुनी कर के जैसे ही वो बाथ रूम के अंदर हुई मेने हल्के से उस ओर जाने वाले दरवाजे को बाहर से बोल्ट कर दिया. फिर उन की ओर मूड के प्यार से उनकी नाक पकड़ के बोली,

इस लिए मेरे बुद्धू राजा, कि वो 40-45 मिनट तक बाथ रूम में बंद रहे और हम लोगों के पास ये समय...कुछ समझे. पिछले तीन दिनों से तो तुम्हे खाने के बाद स्वीट डिश की मेने आदत जो लगा दी है वो तो आज तुम्हे मिलने से रही क्योंकि खाने के बाद तो हम सब सीधे पिक्चर ...इस लिए खाने के पहले ही सही...

raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 14:44

हे, तुम कितनी अच्छि हो.... और क्षॅन भर में उनका शर्ट ज़मीन पे था. मे भी पलंग पे, मुझे बसंती की बात याद आ रही थी सारी के फ़ायदे के बारे मे. मेने भी सारी अपनी कमर तक उठा के घुटने मोड़ लिए. वॅसलीन की शीशी हमेशा तकिये के नीचे रहती ही थी. पल भर में वो अंदर थे.

उन्होने इधर उधर कुछ छूने की कोशिश की तो मेने तुरंत मना कर दिया, हे और कुछ नही, और आवाज़ ज़रा भी नही, बस सीधे... मेरे ब्लाउस के एक दो बटन तो उन्होने पहले ही खोल लिए थे.

तुरात फुरात में बाकी बटन भी और ....फिर फ्रंट ओपन ब्रा...मेरे उरोज उनकी मुट्ठी में थे और वो कस के कुचल मसल रहे थे. बिना आवाज़ किए, उन्होने कुशन भी मेरे चुतडो के नीचे लगा दिए और फिर सतसट सतसट...मे भी उनके कंधे पकड़ के पूरा साथ दे रही थी. कभी कमर उचका देती, कभी चूत सिकोड के उनका लंड भींच लेती. थोड़ी ही देर में घमासान चुदाई शुरू हो गयी थी. बिना रुके हम दोनों....दोनों जानते थे वक़्त काम है, इस लिए पूरी ताक़त से खूब पूरी स्पीड से, जल्दी जल्दी चुदाई का मज़ा ले रहे थे. मेरे हाथ कस के उनकी पीठ से चिपके थे. उनका बीयर कैन ऐसा मोटा लंड....मेने अपनी जंघे पूरी तरह से कस के फैला रखी थीं, फिर भी कस कस के लग रहा था कि मेरी...फॅट रही है. हर धक्का उनका पूरे ताक़त से...सूपड़ा सीधे बच्चेदानि से...पूरा जड़ तक अंदर और लंड का बेस सीधे मेरी क्लिट पे कस कस के रगड़ता...बिना रुके वो फिर सुपाडे तक बाहर निकाल के फिर पूरे ज़ोर से अंदर तक ठूंस देते. दर्द के बावजूद मज़ा इतना के मेरे चुतड अपने आप उपर नीचे उठ रहे थे. वो कभी दोनो चून्चिया पकड़ के, दबाते मसलते, कभी चुतड पकड़ के, लगातार...मे दुहरी थी और हर धक्का सीधे मेरी बच्चेदानि पे.

मेरे नाख़ून उनके कंधे में धँस जाते...साथ साथ उनके दाँत मेरे निपल के चारों ओर या मेरी चून्चि पे...कच कचा के वो काट लेते. एक पल के लिए भी स्पीड उन्होने धीमी नही की. मोटे पिस्टन की तरह उनका सख़्त मोटा लंड...पूरी तेज़ी से और मे भी चाह रही थी बस इसी तरह..सतसट....गपगाप. पहली बार वो 'क्विकी' कर रहे थे पर इसमें भी 20-25 मिनट तो उन्हे लगे ही. पहले मे झड़ी और उसके साथ मेरी चूत कस कस के उनका लंड भींचने लगी.

उसके साथ ही वो भी...लंड पूरी तरह अंदर धंसा हुआ था और वीर्य की लगातार धार बह रही थी.

मेरी बुर तो उससे भर ही गयी थी अब वो निकल के जाँघ पर भी...मेरी सांस अभी भी तेज तेज चल रही थी. तभी...

ठक ठक...ठक ठक दरवाजे पे आवाज़ हुई. वो झट से उठ गये और शर्ट पहन ली. मेने भी ब्रा के हॉक बंद किए तब तक दुबारा...ठक ठक.

ब्लाउस बंद करते हुए मे दरवाजे की ओर बढ़ी...( मुझे फिर बसंती की सारी के फ़ायदे के बारे में सलाह याद आई, फिर से पहनने में कोई टाइम नही, उठो और वो अपने आप ठीक).

अंजलि और रजनी थी, खिलखिलाती....दरवाजा खोलते ही रजनी ने हल्के से मेरे कान में पूछा,

क्यों भाभी , हमने डिस्टर्ब तो नही किया.

नही... हंसते हुए मे बोली. लेकिन 5 मिनट पहले आती तो ज़रूर करती.

टाइट फ्रॉक में, उसके छोटी छोटी टीन बूब्स बड़े ही सेक्सी लग रहे थे. उन्हे हल्के से छू के, मे बोली, हे सोचा क्या. वो उसी तरह धीमे से बोली, क्या. मेने हल्के से पूछा मेरे भाई की प्यास बुझाने के बारे में. वो अदा से हंस के बोली, देखेंगें.

वो दोनो सोफे पे बैठ गयीं और बेड पे कुछ देख के मुस्कराने लगीं. मे सोच में पड़ गयी, मेने उनकी निगाह की तरफ देखा. वो वॅसलीन की खुली शीशी की ओर देख रही थीं. तभी मेरी निगाह बंद दरवाजे की ओर पड़ गयी. चुपके से जाके मेने उसे खोला ही था कि अंजलि बोल पड़ी,

भाभी...रीमा बेचारी को क्यों बंद कर रखा है.

वो बेचारे बड़े अंकनफर्ट फील कर रहे थे. बोले, मे ज़रा नीचे जा रहा हूँ.

जल्दी आईएएगा. मे बोली, आप को रीमा के साथ बाजार जाना है, सासू जी ने बोला है कि इन लोगों के लिए कपड़े लाने के लिए.

ठीक है बस मे जा के आता हूँ. लेकिन वो दरवाजे तक ही पहुचे होंगे कि रीमा निकल पड़ी.

गजब की लग रही थी. गोरी तो वो खूब थी ही. नहा के एक दम फ्रेश, हल्के मेकप में और लेमन येल्लो टांक टॉप में उसके किशोर उभार बस, छलके पड़ रहे थे. टॉप छोटा भी था इस लिए हल्का सा गोरा गोरा पेट भी...जीन्स भी उसने कूल्हे से ही बस अटका के... हिप्स पे एक दम कसी. उनकी निगाहे तो बस चिपक के रह गयीं उपर से उसने और...मुस्करा के बोली, बोलो जीजू मे कैसी लगती हूँ.

मेने कहा, हे तुझे इनके साथ बाजार जाना है. वो खुश होके बोली, एकदम दीदी और उनके साथ चिपक के खड़ी हो गयी. उनके हाथ भी तुरंत उसके कंधे पे और निगाहे कंधे से नीचे...

हे तू कुछ स्वेटर, कार्डिगान पहन ले, ठंडक लग जाएगी.

उसके बदन ढकने से जिसको दिक्कत होती, वो खुद बीच में बोला,

अर्रे कितनी अच्छि तो धूप निकली है...फिर कार में कहाँ से ठंड लगेगी. अगर लगेगी तो मे अपनी जॅकेट दे दूँगा.

शिवल्री ईज़ नोट डेड रीमा और उनके साथ दुबक के बोली.

अर्रे जो खुद हीटर हो उसे क्या ठंडक लगेगी. अंजलि ने उसे छेड़ा.

अर्रे जलने वाले जला करें, मे जीजू के पास हूँ. रीमा क्यों चुप होती.

अंजलि, तुम चलोगि बाजार, ... उन्होने पूछा.

नही भैया, असल में मुझे कुछ...काम...थोड़ा बिज़ी हूँ अंजलि ने बहाना बनाया.

अर्रे असली परेशानी काम की...अर्रे बोल ना किस के साथ काम करना है ...या करवाना...है, संजय भैया के साथ ना... मेरी होने वाली प्यारी प्यारी भाभी. अब रीमा ने बदला लिया.

हम सब मुस्करा पड़े. वो बेचारे...उन्होने रजनी से पूछा,

क्यों तू चलेगी. उसने भी सर हिलाते हुए हंस कर जवाब दिया,

ना बाबा ना, मे कबाब में हड्डी नही बनना चाहती, रीमा बहुत गाली देगी.

ठीक है जीजू, हम दोनों चलते हैं, बच्चियों तुम लोगों को जो कुछ चाहिए माँग सकती हो,

चिढ़ाते हुए रीमा बोली, चॉक्लेट, लॉलिपोप... अर्रे.... धीमे से अंजलि रजनी के पास आके बोली,

वैसे मे अपने दो भाई भी लाई हूँ चाहो तो... उन लोगों की नोंक झोंक वहीं छोड़ के मे नीचे किचन की ओर चली.

क्रमशः…………………………….


raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 14:45

शादी सुहागरात और हनीमून--37

gataank se aage…………………………………..

unhone ek hath meri saree ke andar daal ke, seedhe mere chutaDon ko...aur agale pal meri painty jamin pe thi. unke hath ne meri 'bulbul' abh seedhe daboch li. mere hath bhi shirt ke andar ghus ke...mene kas ke 'use' pakad liya. wo abh khul ke phanaaphane raha tha. meri ungaaliyan itni khush thin...itne achcha lag raha tha...kada kada, mota, mushkil se pakad mein a raha tha. unke honth mere hoonton se ras chhakane ke bad...mere urojon ke upari bhaag pe choom rahe the, choos rahe the. unke shaitan hath ne mere blouse ke upar ke button khol diye the. ek hath mere ubhaar masal ragad raha tha, blouse ke upar se aur doosara kas ke niche sahala raha tha, mere nichale hoonton ko ched raha tha. mera hath bhi abh unke poori tarah uttejit lund ko kas kas ke muthiya raha tha, age peeche kar raha tha. unhone meri achchhi tarah gili ho chuki choot mein ek ungali halke se ghusa di aur mene bhi ek jhatake mein, age peeche karte hue kas ke khincha aur us ki chamadi peeche khinch ke supada khol diya. unki ungali halke andar bahar ho rahi thi sath sath meri sans bhi lambi gahari...mere komal hath bhi abh kas kas ke 'use' daba rahe the bhinch rahe the. unke angoonthe ne mere utejit khade clit ko achaanak chho diya, phir to meri sari deh ganaganaane gayi. ek...do bar chhone ke bad, unhone halke se use ragadane shuru kar diya aur me kanpane lagi. apne aap mera angootha, unke khole khoob phole, bade, mote supade pe ja ke use sahalane ragadane laga aur mene 'uski ankh ' chho li. pri kaam ki do boondon ne mera angutha gila kar diya. uttejit hoke unhone halke se meri 'pinki' pinch kar di.

aur tabhi darwaja khatakhatane ki awaaj huyi...mene shirt se hath turant bahar nikal liya aur wo bhi mujhe chod ke...tabhi dubara...khat khat...mene jhat se pharsh pe padi painty utar ke bistar pe takiye ke niche dabaya aur darwaja khol diya.

Reema thi.

usne pehle meri or dekha phir apne jija ki or, wo dono tange sikode apne shirt pe hath rakhe baithe the. lekin bina is pe gaur kiye wo chaloo ho gayi,

me nahaana ai hoon. subah mene dekha ki didi apka bath room bahut achcha hai aur bath thi kitne bada hai, kitne relaxing hoga ne...aur mere kapade bhi yahin pe the to mene socha yahin nahaa loon.

arre to niche bhi to bath room the, wahin nahaa leti. ain mauke pe usne disturb kiya tha, mujhe bada kharaab lag raha tha, 15-20 minat bad mein a jaati to kya bigad jata uska me soch rahi thi. me phir boli aur kapade yahan se le jaati, tumhare jija... meri baat kat ke wo boli,

mene bhi yahi kaha tha Anjali se, lekin ek mein Sonu nahaa raha tha aur doosare mein didi kapade dhul rahi thin. mene kaha me wait kar leti hoon par Anjali boli, nahi kahan wait karogi. bhaiya aur bhabhi to subah subah hi nahaa lete hain, upar bath room khaali hi hoga.

Anjali ki bachchi, aaj teri ne phadwayi to...mere dimag mein baboole ban rahe the.

theek hi to hai yahin nahaan lo aur kaho to me nahaala bhi doonga. uske jiju abh phir saali ko dekh ke mood mein a rahe the. me bhi normal ho rahi thi, shararaat se mene Reema ko unke shirt ki or ishara kiya. usne, jab tak wo samhale samhalen, ek jhatake mein hath shirt ke upar se hata ke bola,

he jiju ye kya chhipa rakha hai. aur hath ke hatate hi shirt mein tane 'tent pol' poore balisht bhar ka,

wo sharma gayi aur ye jhemp gaye.

baat badal ke wo boli, nahi jiju rahane dijiye aaj mujhe jaldi hai. abhi aapko picture ke liye bhi moodane hai. aur waise bhi me abh aapko itne saste mein nahi chodane waali, kal tak to hoon ne to kal nahaala dijiyega...

sun koyi jaldi waldi nahi hai, wo jo imported shampoo laye the nila, kahan rakha hai, mene poocha.

wo wahin thi ke pas rakha hai. wo bole.

aur use laga ke adhe ghante tak ball waise hai rakhane padata hai, hai ne.

bina mera matalab samajhe unhone hami bhari.

dekh... me Reema se boli, tu thi tak apne kapade nikal...

yahin jiju ke saamne...kya didi wo acharaj se boli.

mujhe koi etaraj nahi hai balki me nikalane mein madad kar sakata hoon. khush ho ke wo bole.

tum dono ne...arre mera matalab tha nahaa ke bad pahanne waale...thi tak ye tumhare liye badhiya bubble bath bane dengen, aromatic scent daal ke...jaie ne, bada saali saali karte rahate hain saali ke liye itne to kariye. wo chupachap chale gaye.

jab tak wo laut ke aye Reema ne apni dress nikal ke rakhi thi, ek noodal string ki tank top aur ek hip hugging jeans.

kyon jiju..., kaise lagti hai dress meri. wo hans ke boli.

un ki to jaise jaan nikal gayi. wo mushkil se bole, ekdam sexy, chalo nahaalane nahi de rahi ho to dress pahanene mein kaho to tumhari madad kar doon... wo phir wapas apni spirit mein a gaye the.

wo kuch bolati us ke pehle baat kat ke me boli, bath thi mein kaam se kaam adhe ghante relax karna, ek dam fresh ho jayegi. aur usi ke sath shampoo bhi...baal mein laga ke adhe ghante tak kaam se kaam chod dene aur phir shower mein dhul lene. dekh jaldi koyi nahi hai, abhi sirph sadhe gyarah baje hain. sadhe barah tak bhi tum taiyaar huyi to khane dedh do se pehle hone wala nahi aur picture bi sadhe tin se hai. is liye tum araam se nahaa dho ke taiyaar ho ja. kapade leti ja wahin dressing room mein change kar lene aur kuch makeup wakeup karna ho to wo bhi sab hai wahan pe.

ek tarah se dhakke de ke bhija mene. jab tak wo gayi unki nigahe apni saali pe tiki thin, aur us se un ke 'hard on' ki haalat aur kharaab hi huyi...aur wo bhi apne rasile hoonton pe jibh phira ke...

he tum bar bar adhe ghante ki baat kyon kar rahi ho, wo shaimpoo to... un ki baat an suni kar ke jaise hi wo bath room ke andar huyi mene halke se us or jane waale darwaje ko bahar se bolt kar diya. phir un ki or mood ke pyar se unki naak pakad ke boli,

is liye mere buddho raja, ki wo 40-45 minat tak bath room mein band rahe aur ham logon ke paas ye samay...kuch samajhe. pichhale teen dinon se to tumhe khane ke bad sweet dish ki mene aadat jo laga di hai wo to aaj tumhe milne se rahi kyonki khane ke bad to ham sab seedhe picture ...is liye khane ke pehle hi sahi...

he, tum kitani achchhi ho.... aur kshhaN bhar mein unka shirt jamin pe tha. me bhi palang pe, mujhe basanti ki baat yaad a rahi thi saree ke phayaade ke bare me. mene bhi saree apni kamar tak utha ke ghutane mod liye. Vaseline ki shishi hamesha takiye ke niche rahati hi thi. pal bhar mein wo andar the.

unhone idhar udhar kuch chhone ki koshish ki to mene turant manaa kar diya, he aur kuch nahi, aur awaaj jara bhi nahi, bas seedhe... mere blouse ke ek do button to unhone pehle hi khol liye the.

turaat phuraat mein baaki button bhi aur ....phir front open bra...mere uroj unki mutthi mein the aur wo kas ke kuchal masal rahe the. bina awaaj kiye, unhone kushan bhi mere chutaDon ke niche laga diye aur phir satasat satasat...me bhi unke kandhe pakad ke poora sath de rahi thi. kabhi kamar uchaka deti, kabhi choot sikod ke unka lund bhinch leti. thodi hi der mein ghamasan chudai shuru ho gayi thi. bina ruke ham donon....donon jante the waqt kaam hai, is liye poori takat se khoob poori speed se, jaldi jaldi chudayi ka maja le rahe the. mere hath kas ke unki pith se chipake the. unka biyar kain aisa mota lund....mene apni janghe poori tarah se kas ke phaila rakhi thin, phir bhi kas kas ke lag raha tha ki meri...phat rahi hai. har dhakka unka poore takat se...supada seedhe bachchedani se...poora jad tak andar aur lund ka base seedhe meri clit pe kas kas ke ragadata...bina ruke wo phir supade tak bahar nikal ke phir poore jor se andar tak thoons dete. dard ke bawjood maja itne ke mare mere chutaD apne aap upar niche uth rahe the. wo kabhi dono choonchiyan pakad ke, dabate masalate, kabhi chutaD pakad ke, lagatar...me duhari thi aur har dhakka seedhe meri bachchedani pe.

mere nekhoon unke kandhe mein dhans jate...saath saath unke dant mere nipple ke chaaron or ya meri choonchi pe...kach kacha ke wo kat lete. ek pal ke liye bhi speed unhone dhimi nahi ki. mote piston ki tarah unka sakht mota lund...poori teji se aur me bhi chah rahi thi bas isi tarah..satasat....gapagap. pahali bar wo 'quickie' kar rahe the par ismen bhi 20-25 minat to unhe lage hi. pehle me jhadi aur uske saath meri choot kas kas ke unka lund bhinchne lagi.

uske saath hi wo bhi...lund poori tarah andar dhansa hua tha aur veeriya ki lagatar dhar bah rahi thi.

meri bur to usse bhar hi gayi thi abh wo nikal ke jangh par bhi...meri sans abhi bhi tej tej chal rahi thi. tabhi...

thak thak...thak thak darwaje pe awaaj huyi. wo jhat se uth gaye aur shirt pehan li. mene bhi bra ke hok band kiye thi tak dubara...thak thak.

blouse band karte hue me darwaje ki or badhi...( mujhe phir basanti ki saree ke phayaade ke bare mein salaah yaad aayi, phir se pehanene mein koyi time nahi, utho aur wo apne aap theek).

Anjali aur Rajni thi, khilkhilati....darwaja kholte hi Rajni ne halke se mere kaan mein poocha,

kyon bhabhi , hamne disturb to nahi kiya.

nahi... hanste hue me boli. lekin 5 minat pehle ati to jaroor karti.

tight frock mein, uske choti choti teen boobs bade hi sexy lag rahe the. unhe halke se chho ke, me boli, he socha kya. wo usi tarah dhime se boli, kya. mene halke se poocha mere bhai ki pyaas bujhane ke bare mein. wo ada se hans ke boli, dekhengen.

wo dono sophe pe baith gayin aur bed pe kuch dekh ke muskarane lagin. me soch mein pad gayi, mene unki nigah ki taraph dekha. wo Vaseline ki khuli shishi ki or dekh rahi thin. tabhi meri nigah band darwaje ki or pad gayi. chupke se jake mene use khola hi tha ki Anjali bol padi,

bhabhi...Reema bechari ko kyon band kar rakha hai.

wo bechare bade uncomforthile feel kar rahe the. bole, me jara niche ja raha hoon.

jaldi aiyega. me boli, aap ko Reema ke saath bajaar jane hai, sasu ji ne bola hai ki in logon ke liye kapde lane ke liye.

theek hai bas me ja ke ata hoon. lekin wo darwaje tak hi pahoonche hoonge ki Reema nikal padi.

gajab ki lag rahi thi. gori to wo khoob thi hi. nahaa ke ek dam fresh, halke makeup mein aur lemon yellow tank top mein uske kishor ubhaar bas, chhalake pad rahe the. top choota bhi tha is liye halka sa gora gora pet bhi...jeans bhi usne kulhe se hi bas atakaa ke... hips pe ek dam kassi. unki nigahe to bas chipak ke rah gayin upar se usne aur...muskara ke boli, bolo jiju me kaisi lagti hoon.

mene kaha, he tujhe inke saath bajaar jane hai. wo khush hoke boli, ekdam didi aur unke saath chipak ke khadi ho gayi. unke hath bhi turant uske kandhe pe aur nigahe kandhe se niche...

he tu kuch sweater, cardigan pehan le, thandak lag jayegi.

uske badan dhakane se jisko dikkat hoti, wo khud beech mein bola,

arre kitni achchhi to dhop nikali hai...phir car mein kahan se thand lagegi. agar lagegi to me apni jacket de doonga.

chivalry is not dead Reema aur unke saath dubak ke boli.

arre jo khud heater ho use kya thandak lagegi. Anjali ne use cheda.

arre jalne waale jala karen, me jiju ke pas hoon. Reema kyon chup hoti.

Anjali, tum chalogi bajaar, ... unhone poocha.

nahi bhaiya, asal mein mujhe kuch...kaam...thoda busy hoon Anjali ne bahane baanaa.

arre asali pareshani kam ki...arre bol ne kiss ke saath kaam karna hai ...ya karwane...hai, Sanjay bhaiya ke saath ne... meri hone wali pyaari pyaari bhabhi. abh Reema ne badla liya.

ham sabh muskara pade. wo bechare...unhone Rajni se poocha,

kyon tu chalegi. usne bhi sar hilate huye hans kar jawab diya,

ne baba ne, me kabab mein haddi nahi banane chahati, Reema bahut gaali degi.

theek hai jiju, ham donon chalte hain, bachchiyon tum logon ko jo kuch chahiye maang sakti ho,

chidhate hue Reema boli, chocolate, lollipop... arre dhime se Anjali Rajni ke pas aake boli,

waise me apne do bhai bhi lai hoon chaho to... un logon ki nonk jhoonk wahin chod ke me niche kitchen ki or chali.

kramashah…………………………….