खिलोना compleet

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raj..
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Re: खिलोना

Unread post by raj.. » 22 Oct 2014 03:43

खिलोना पार्ट--20

रीमा ने अपने मन के जज़्बातों को चेहरे पे नही आने दिया,"फिर तो शंतु बेवजह मारा गया."

"ऐसे क्यू कह रही हो?",शेखर की उंगली चूत मे कुच्छ ज़्यादा तेज़ होने लगी थी.

"ये सारा खेल किस लिए खेला आप दोनो ने-पैसों के लिए ही ना?मुझे आप दोनो के साथ चुदाई करके कितना मज़ा मिला है,वो तो मैं लफ़ज़ो मे बयान नही कर सकती.रवि की मौत के बारे मे तो मुझे शुरू से ही कुच्छ खटक रहा था,इसीलिए सवाल करती रहती थी...पर अब मुझे बस इनसे मतलब है.",शोखी से मुस्कुराते हुए उसने दोनो के लंड को अपने हाथो मे पकड़ कर मसल दिया.

शेखर के लिए अब सब्र करना नामुमकिन हो गया,उसने रीमा को पकड़ कर लिटा दिया & उसकी टांगे फैला कर 1 ही झतके मे अपना लंड उसकी चूत मे उतार दिया.फिर उसके उपर लेट उसे चूमते हुए धक्के लगाने लगा.

"..आअहह...!उफफफ्फ़.....कितना मज़ा आ रहा है....इस से बड़ी कोई दौलत हो सकती है दुनिया मे?..आहह...मैं तो बस पूरी ज़िंदगी आपलोगो के साथ बस ऐसे ही चुद्ते हुए गुज़रना चाहती हू...",शेखर के धक्को से रीमा का सर पलंग के किनारे से नीचे लटक गया था & उसके लंबे बाल नीचे ज़मीने को छुते झूल रहे थे.उसने उसे अपनी बाहो मे भर लिया था & उसके बालो मे हाथ घुसाए उसके सर को अपनी चूचियो पे दबा रही थी.उसने देखा कि उसके ससुर दोनो को चुदाई करते देख अपना लंड हिला रहे हैं.

"..आप भी आइए ना...",उसने उनकी तरफ हाथ बढ़ाया तो वीरेंद्र जी फ़ौरन उठ कर उसके पास आ गये.

"इधर नीचे खड़े हो जाइए..",विरेन्द्र जी उसके सर के पीछे खड़े हो गये तो रीमा ने हाथ शेखर के सर से हटा कर अपने पीछे ले जाके अपने ससुर की कमर को पकड़ अपनी ओर खींच उनके लंड को अपने मुँह मे ले लिया.अपनी टांगे उठा के उसने शेखर की कमर को लपेट लिया & नीचे से कमर उचका कर उसके धक्को का जवाब देने लगी.

शेखर काफ़ी देर से गरम था & अब उसकी चूत मे जल्द से जल्द झड़ना चाहता था.रीमा की चूचियो को दबोच उसने उसके निपल्स को अपनी उंगलियो मे मसल्ते हुए अपने मुँह मे भरा & गहरे धक्के लगाने लगा.रीमा का भी बुरा हाल था,ससुर का लंड मुँह मे होने के कारण वो आहे नही भर सकती थी पर उसकी चूत अब कुच्छ ही देर मे पानी छ्चोड़ कर झड़ने वाली थी.उसने विरेन्द्र जी की गंद को खरोंछते हुए उसकी फांको को फैलाया & अपनी 1 उंगली उनके गंद के छेद मे डाल दी.

विरेन्द्र जी कराह उठे & कमर हिलाकर अपनी बहू के मुँह को चोदने लगे.तीनो तेज़ी से अपनी-2 मंज़िल की ओर बढ़े चले जा रहे थे.तभी शेखर का बदन झटके खाने लगा & वो रीमा की छाती मे अपने दाँत गढ़ाता हुआ उसकी चूत को अपने पानी से भरने लगा.उसके इन आख़िरी धक्को ने रीमा की चूत को भी पस्त कर दिया & उसने भी अपने जेठ की कमर को अपनी टांगो मे कस के जाकड़ लिया & झाड़ गयी.झाड़ते वक़्त उसकी उंगली विरेन्द्र जी की गंद मे कुच्छ ज़्यादा ही अंदर चली गयी & 1 तेज़ आह के साथ वो भी अपने लंड को उसके मुँह मे खाली करने लगे.रीमा ने गतगत उनका सारा पानी पी लिया.

शेखर उसके सेनए पे सर रखे हाँफ रहा था & विरेन्द्र जी अपना सिक्युडा लंड उसके मुँह से खींच अब उसके बगल मे लेट गये.शेखर भी उसके उपर से उतर उसकी दूसरी तरफ लेट गया.थोड़ी देर तक तीनो बस ऐसे ही आँखे बंद किए लेटे रहे.

फिर रीमा ने करवट बदली & शेखर के सीने से जा लगी & उसके निपल्स को अपने नखुनो से हल्क-2 कुरेदने लगी & उसके चेहरे को चूमने लगी.शेखर उसकी पीठ सहलाने लगा.रीमा ने सोच लिया था कि वो इन दोनो बाप-बेटे को आज 1 पल भी आराम नही करने देगी जिस से कि वो जल्द से जल्द तक कर सो जाएँ.

raj..
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Re: खिलोना

Unread post by raj.. » 22 Oct 2014 03:43

अब वो अपना चेहरा उठा शेखर के सीने पे झुक उसके निपल्स को चूस रही थी & उसका हाथ उसकी छाती & पेट पे घूम रहा था.हाथ घूमते-2 शेखर के सिकुदे,गीले लंड पे पहुँच गया,"..ओह्ह..ये तो अभी भी गीला है..इसे साफ कर देती हू.",और रीमा शेखर के सीने को चूमती हुई नीचे जाने लगी.जब वो उसकी नाभि के पास पहुँची तो उसने उसमे अपनी जीभ फिरा दी.शेखर के मुँह से मस्ती भरी आह निकल गयी.

उसकी नाभि को चाटने के बाद रीमा और नीचे पहुँची & उसकी झांतो को चूमते हुए उसकी लंड की जड़ तक आके उसे वाहा पे चूम लिया.शेखर 1 बार फिर गरम होने लगा था.रीमा ने लंड को हाथ मे लिया & चाट कर उसका गीलापन साफ करने लगी.उसके सूपदे को उसने बिना मुँह मे लिए बस अपनी जीभ फिरा के पूरा चॅटा.शेखर का लंड उसकी इस हरकत से फिर खड़ा हो गया.रीमा ने उसके आंडो को दबाया & आधे लंड को मुँह मे लिया & आधे को हाथ से हिलाने लगी.

उसने आँखो के कोने से देखा की विरेन्द्र जी कमरे से बाहर जा रहे हैं...कही दूसरे कमरे मे सोने तो नही जा रहे...इसका मतलब उसे पहले शेखर को थकाना हो गा & बाद मे उन्हे.वो आँखे बंद कर उसके लंड से खेलने लगी.शेखर मस्ती मे आहे भरता हुआ उसके सर को पकड़ अपने लंड पे दबाने लगा.तभी रीमा ने लंड छ्चोड़ दिया & अपने घुटने उसके बदन के दोनो तरफ रख उसके उपर आ गयी.शेखर ने हाथ बढ़ा कर उसे पकड़ना चाहा तो उसने उसके हाथो को पकड़ उसके सर के दोनो तरफ पलंग पे दबा दिया.

अब वो उसके उपर झुकी थी पर उसका बदन शेखर को बिल्कुल भी नही च्छू रहा था.रीमा नीचे झुकने लगी तो शेखर ने सोचा कि वो उसे चूमेगी पर रीमा उसके होंठो तक अपने होठ लाई & जैसे ही शेखर ने उन्हे अपने होंठो मे दबाना चाहा वो हंसते हुए फिर उपर हो गयी.शेखर हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगा,"..नही..हाथ नही छुड़ाना है..",रीमा शरारत से बोली.

1 बार फिर उसने झुक के शेखर को ललचाया & फिर उसे प्यासा छ्चोड़ दिया.शेखर का खड़ा लंड भी बेकाबू हो रहा था & वो कमर उचका कर उसकी चूत मे उसे घुसाना चाह रहा था.रीमा ने ये देखा तो बहुत धीरे से अपनी कमर नीचे करने लगी & जैसे ही लंड के सूपदे ने उसकी चूत को छुआ वो 1 झटके मे वापस उपर हो गयी.शेखर तो बस पागल ही हो गया.

अपना मुँह उठा कर उसने रीमा की 1 चूची को मुँह मे भरना चाहा तो रीमा ने अपनी चूचियो को उपर खींच लिया & उसे तड़पाने के लिए हंसते हुए उन्हे उसकी आँखो के आगे हिलाने लगी.फिर कमर नीचे लाई & जैसे ही चूत ने लंड को छुआ,फिर से उपर उठ गयी.शेखर अब बुरी तरह तड़प रहा था नीचे से अपनी कमर उचका रहा था,"..अब आ भी जाओ,जान.बैठ जाओ मेरे लंड पे & चूसने दो ये रसीली चूचिया.."

"इतनी भी क्या जल्दी है?बस थोड़ी देर पहले ही तो आपने मेरी चुदाई की थी.",रीमा ने हंस कर उसे और तडपाया तो शेखर हाथ छुड़ाने लगा.इस पे रीमा नीचे झुकी & अपनी छाती उसके मुँह मे दे दी,"..बड़े बेसबरे हैं आप!...ओईइ...!...अफ...काटिए मत ना!दर्द होता है.."


raj..
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Re: खिलोना

Unread post by raj.. » 22 Oct 2014 03:44

फिर वो झुकी & बाद धीरे से उसके लंड को अपनी शेखर के ही पानी से गीली चूत मे घुसाने लगी.जब लंड आधा घुस गया तो वो रुक गयी.इस पर शेखर तड़प उठा & नीचे से कमर उचका कर लंड पूरा अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा पर रीमा बार-2 उठ कर उसकी ये कोशिश नाकाम कर देती.

कुच्छ आहट हुई तो उसने मूड के देखा कि उसके ससुर फिर से कमरे मे आ गये थे & उनके हाथो मे कोई डिबिया थी.रीमा वापस सर घुमाके अपने जेठ को देखने लगी & वैसे ही उसका आधा लंड लिए झुक कर उसके हाथो को आकड़े उसे चूमने लगी.

"ऊओवव्व..!",वो चिहुन्क उठी,विरेन्द्र जी ने उस डिबिया से क्रीम अपनी उंगली मे ले उसे,उसकी गंद की छेद मे घुसा दिया था.रीमा समझ गयी कि ज़िंदगी मे पहली बार आज उसकी गंद भी मारी जाएगी.उंगली के घुसते ही वो खुद ही शेखर के लंड पे बैठ गयी थी & उसे पूरा अपने अंदर ले लिया था.विरेन्द्र जी थोड़ी देर तक उसकी गंद के छेद मे वैसे ही उंगली करते रहे .

शेखर के हाथो पे रीमा की पकड़ ढीली होते ही उसने हाथ छुड़ा रीमा की कमर को जाकड़ लिया & उचक कर उसकी चूचिया चूसने लगा.विरेन्द्र जी ने उंगली निकाली & बिस्तर पे चढ़ अपने बाए घुटने & दाए पैर पे अपना वज़न रख 1 हाथ से अपनी बहू की गंद की फांको को फैला कर उसके छेद को थोडा और खोला & दूसरे से अपने क्रीम से गीले लंड को उसकी गंद मे घुस दिया.

"ऊओउउइईईईई....म्माआआआआआअ.......!",रीमा सूपदे के अंदर जाते ही चीखी.विरेन्द्र जी उसकी कमर को पकड़े दूसरे हाथ से उसकी गोरी पीठ सहलाते हुए लंड को और अंदर पेलने लगे,"..ना..ना...गंद को कसो मत,रीमा..उसे ढीला छ्चोड़ो..बस थोड़ी देर दर्द होगा...फिर तो इतना मज़ा आएगा कि पुछो मत.",रीमा की हालत खराब थी.नीचे से शेखर धक्के लगाता तो वो अपने ससुर के लंड को अपनेआप थोड़ा और अपनी गंद मे ले लेती.वो बहुत धीरे-2 अपने लंड को अंदर घुसा रहे थे.जब आधा लंड अंदर घुस गया तो रीमा को लगा कि अब अगर उसके ससुर ने लंड को और पेला तो उसकी गंद फट जाएगी.

"...आअहह...आईय्य्यीए...बस इतने से ही करिए,पिता..जी.....इस से ज़्यादा मैं नही ले पाऊँगी..बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है.."

"ठीक है.",विरेन्द्र जी ने लंड घुसाना छ्चोड़ दिया & बस स्थिर हो वैसे ही उसकी गंद मे बस लंड डाले खड़े रहे.

नीचे से शेखर उसकी 1 चूची मसल्ते हुए उसकी गर्दन चूम धक्के लगा रहा था.थोड़ी देर बाद रीमा के गंद का दर्द शांत हुआ तो वो भी अपनी कमर हिलाने लगी,विरेन्द्र जी समझ गये कि उनकी बहू अब तैय्यार है.अपने आधे लंड से ही उन्होने उसकी गंद मारना शुरू किया.

जब शेखर कमर उचका कर उसकी चूत चोद्ता ठीक उसी वक़्त विरेन्द्र जी अपनी कमर हिला उसकी गंद मारते.इन दोहरे धक्को से परेशान रीमा ज़ोर-2 से आहे भरने लगी.उसे बहुत मज़ा आ रहा था,उस वक़्त जैसे वो भूल गयी थी कि यही दोनो दरिंदे उसकी जान लेने का मंसूबा भी रखते हैं.वो तो बस अपने दोनो छेदो मे भरे लुंडो से मस्तानी हो हवा मे उड़ रही थी.

उसकी चूत अब तक 2 बार झाड़ चुकी थी & इस बार जो तूफान उसके बदन मे उठ रहा था वो शायद उसे अब तक सबसे गहरा मज़ा देने वाला था.शेखर अब ज़ोर से कमर उचका रहा था & रीमा की बाई चूची को तो मुँह से निकालने का नाम ही नही ले रहा था.विरेन्द्र जी भी 1 हाथ से उसकी कमर & दूसरे से उसकी दाई चूची को दबा तेज़ी से उसकी गंद मारे जा रहे थे.

"ऊऊऊऊओह...........माआआआ.........!",रीमा चिल्लाते हुए झाड़ गयी.झाड़ते वक़्त उसकी गंद & चूत उसके ससुर & जेठ के लुंडो पे ऐसे सिक्डी की वो दोनो भी खुद को संभाल नही पाए & अपना पानी उसके बदन के अंदर गिराने लगे.रीमा हाँफती हुई शेखर के सीने पे गिर गयी & उसकी पीठ पे विरेन्द्र जी गिर गये.थोड़ी देर तक वो दोनो के बीच दबी रही.जब लंड बिल्कुल सिकुड गया तो विरेन्द्र जी ने लंड को धीरे से उसकी गंद से निकाला & उसके उपर से उतर बिस्तर पे निढाल हो गये.