माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

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The Romantic
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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:38

रीमा ने कहा बेटा आज मैं बहुत खुश हूँ। मुझे आज तक किसी भी मर्द ने बिना मेरी चूत को स्पर्श किये बिना नही झडाया। चूत छू कर झडाने की तो छोडो कोई भी मेरी चूत बिना चोदे या बिना चाटे मुझे नही झडा पाया। तुम पहले मर्द हो जिसने मुझे इतना गर्म कर दिया की मैं अपनी चूत के दाने को दबाने पर झड पडी। किसी ने भी मेरे बदन को इतना प्यार नही किया जितना तुमने किया मेरे बेटे। हर कोई मेरा मादक बदन देख कर मुझ पर टूट पडता था और थोडी देर मे ही अपना लंड मेरी चूत मे डाल कर मुझ पर चढ बैठता था। या मेरी चूत को मुँह मे लेकर चाटने लगता था। कोई भी मेरे बदन के साथ इस तरह से नही खेला जिस तरह से तुम खेल रहे हो। जबकी मैं इस तरह अपने बदन को प्यार करवाना कितना पंसन्द करती हूँ।

थैंकयू बेटा मेरे बदन से इसतरह खेलने के लिये। मैंने कहा माँ मैं तो हमेशा आप की सेवा मे हाजिर हूँ। आखिर आपका बेटा हूँ अपना कर्तव्य कैसे भूल सकता हूँ। रीमा बहुत खुश हो गयी और अपना मुँह घुमा कर मेरे गाल पर एक चुम्मा ले लिया। फिर मैंने कहा माँ अगर तुम इस स्थीति मे पहुँच गयी थी तो मुझे बता देती मैं तुम्हारी मस्ती झडा देता। इसके लिये मुझे तुमको चोदना भी नही पडता। तुमने अपना पेटीकोट को फाड रखा ही है और उससे तुम्हारी पैन्टी मे छुपी चूत भी नजर आ रही है। मैं अभी नीचे बैठ कर तुम्हारी चूत पैन्टी के उपर से ही चाट कर तुम्हारी मस्ती झडा देता।

रीमा ने कहा तुम बहुत अच्छे बेटे हो मेरे लाल पर मैं उस समय चूत चटा कर झडना नही चाहती थी। मैं बोला माँ वह तो ठीक है पर तुम्हारे झड जाने से तुम्हारा कितना चूत रस बेकार ही चला गया। रीमा ने कहा बेकार कहाँ गया है बेटे सारा रस तो मेरी पैन्टी मै समा गया है। मेरी पैन्टी उतारने के बाद उसको अपने मुँह मै डाल कर चूस लेना सारा रस। मैंने कहा माँ अगर तुम मुझसे चुसवा कर झडवाती तो मुझे सीधे रस मे सोत्र से रस पीने को मिलता और उसमे कितना मजा आता। रीमा ने कहा तो इसमे कौन सी बडी बात है मेरा ब्लाउस और पेटीकोट उतार लेने के बाद पहले चूत चूस कर झडा देना फिर मेरी पैन्टी उतरना ठीक है। मैंने कहा तब ठीक है।

रीमा बोली की तू भी माँ से बिल्कुल बच्चो की तरह जिद करता है जैसे छोटे बच्चे माँ से बचपन मै लालीपॉप के लिये करते है। तो मैंने कहा माँ तुम्हारी चूत मेरे लिये किसी लालीपॉप से कम नही है। इस पर रीमा मुस्कुरायी और बोली लालीपॉप तो बेटा तेरे पास है। जो इस समय मेरे पेटीकोट को गीला करने मैं लगी हुयी है। उसको चुसने का मजा तो मैं लूगी मेरे राजा मेरे पास तो चटपटी चाट का पत्तल है जो मैं तेरे को चाटने को दूँगी। पर अगर तेरे को लालीपॉप का इतना ही शौक है तो उसका इतजाम मैं कर सकती हूँ। मैं उसकी बात मैं छिपे मतलब को समझ कर मुस्कुरा दिया। मैं समझ गया रीमा मेरे साथ छेड छाड कर रही है।

रीमा ने पूछा बोल चाहिये क्या। मैंने कुछ जवाब नही दिया। इस पर रीमा मुस्कुरा दी और बोली चल बडी देर हो गयी। ऐसे खडे खडे अब मुझे भी झडे हुये बहुत देर हो गयी है। और मैं फिर से गर्म होने लगी हूँ। तू भी अपना काम बीच मैं छोड कर मजे ले रहा है चल लग जा अपने काम पर अभी तो मेरे बहुत से कपडे उतारने बाकी हैं। जितनी देर करेगा उतनी ही देर मै तुझको मजा मिलेगा। उसकी बात सुनकर मैं अपने काम पर लग गया ब्लाउस के हुक तो मैं खोल चुका था पर उसे अभी तक मैंने उतारा नही था। फिर मैंने अपने हाथ उसके कमर से हट के फिर से उसके ब्लाउस को पकडने लगा जहाँ पर हुक लगे होते है। पर अबकी बार मैंने जानबूझ कर उसके नंगे मम्मो को स्पर्श किया और उनका मजा लिया।

क्रमशः.......................


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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:43

गतांक से आगे.......................

रीमा भी मेरी इस हरकत हो समझ रही थी और मेरी और देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही थी। फिर मेरी पकड मे उसके ब्लाउस के दोनो भाग आ गये और मैं उनको खीच कर उसका ब्लाउस उतारने लगा। मैंने रीमा से कहा माँ अपने हाथ उपर कर लो जिससे मुझको ब्लाउस उतारने मैं आसानी होगी। रीमा बोली थीक है और उसने अपने हाथ उपर कर लिये। और मैं उपर उठा कर उसका ब्लाउस उतारने लगा जैसे ही ब्लाउस उसकी कोहनीयो तक आया तो मेरी नजर उसकी काँख पर गयी। रीमा की काँख के बाल जितना मैं बगल से देख कर सोच रह था उससे काफी बडे और घने थे। मेरा एक बार मन किया के उसकी काँख मे अपना मुँह घुसा दूँ पर मैंने अपने आप को रोक लिया और उसका ब्लाउस उतार लिया।

ब्लाउस उतारते ही मैंने ब्लाउस को अपने मुँह के उपर डाल लिया मेरी नाक के उपर उसके ब्लाउस का वह हिस्सा था जो की पीठ पर होता है। फिर मैंने गहरे गहरे साँस ले कर मैंने सुंघना शुरू कर दिया। उसके बदन कि महक मेरे नाक के रस्ते मेरे शरीर मे घुल रही थी। थोडी देर इसी तरह मैं उसकी पीठ के हिस्से वाले ब्लाउस को सुघंता रहा और फिर मैंने एकदम से जीभ निकाल कर उसके ब्लाउस को चाटना शुरु कर दिया। फिर थोडी देर मैं उसके ब्लाउस को सुघंता और फिर चाटता। और इसी तरह करते करते मैंने रीमा का ब्लाउस पीछे से चाट चाट कर गीला कर दिया।

उसके ब्लाउस को पीठ वाली तरफ से अच्छी तरह से साफ कर लेने के बाद मैंने ब्लाउस के दोनो कपो की और ध्यान दिया। ब्लाउस के कप जहाँ पर उसके दोनो मम्मे आ कर बैठते थे। मैंने उन कपो के जरीये उसके मम्मो का भी स्वाद लेना चाहता था। रीमा मुझको पीछे मुड कर देख रही थी और मुस्कुरा रही थी और शायद मन ही मन खुश हो रही थी की उसके बदन की महक का मेरे उपर ऐसा असर हो रहा है। वह मेरी तरफ पलट कर खडी नही हुयी थी। क्योकी अगर वह पीछे घुमती तो मेरी नजर उसके मम्मो पर जाती और वह अभी यह नही चाहती थी। फिर मैंने एक कप पकड कर उसमे अपनी नाक घुसा दी। और एक गहरी साँस लेकर उसके ब्लाउस और मम्मो के मिली जुली गंध कर आनन्द लिया। वह महक किसी भी इत्र की महक से लाख गुना अच्छी थी।

थोडी देर इसी तरह उसकी महक के मजे मैं लेता रहा साथ हि साथ मैं सोच रहा था जब उसके ब्लाउस के उसके बदन से लगने के कारण रीमा का ब्लाउस उसकी महक से इतना सुगंधित को चुका है तो उसके बदन की महक सीधे उसके बदन से लेने मे कितना आंनन्द प्राप्त होगा। यही सोचते हुये मैंने उसके कप पर धीरे धीरे किस करने लगा। किस करते वक्त ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मैं उसके नंगे मम्मो को किस कर रहा हूँ। जिन की झलक उसके ब्लाउस से झाँकते १/४ मम्मो से मैंने ली थी। कुछ देर इसी तरह मैं उसके ब्लाउस के कप को किस करता रहा।

मेरी इस हरकत का असर रीमा पर भी हो रहा था उसकी मस्ती भी बढने लगी थी जिसके भाव उसके चहरे पर साफ नजर आ रहे थे। फिर मैंने रीमा के तरफ देख कर जीभ निकाल कर उसके कप को चाटना शुरू कर दिया। उसका स्वाद बहुत मादक था। पहले २-३ बार मैंने कप को चाटा और थोडी देर रुक कर उसके स्वाद क मजा लिया। फिर अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसके ब्लाउस के कप पर टूट पडा। और जल्दी जल्दी चाटने लगा। मैं उसका कप इस तरह से चाट रहा था की जैसे कई दिन के भूखे कुत्ते को हड्डी मिल गयी हो। थोडी देर मे ही मैंने उसके ब्लाउस के कप को गीला कर दिया। गीला करने के बाद मेरे थुक की गंध उसके ब्लाउस मे उसके बदन की गंध के साथ मिल कर समा गयी। मैंने फिर से ब्लाउस को नाक पर रख कर गहरी साँस लेनी शुरू कर दी। मेरी थूक की महक ने उसके मम्मो कि महक के साथ मिल कर उस मिली जुली महक को और भी मादक बना दिया था।

फिर मैंने दुसरा कप हाथ मै लेकर उसमे अपनी नाक घुसा दी। रीमा से भी अब रहा नही जा रहा था। वह मुझको सामने से देखना चाहती थी। उसने सामने पडी हुयी अपनी साडी उठायी और उसको अपने मम्मो के चारो तरफ लपेट ली जिससे उसके मम्मे साडी मे छिप गये। और वह मेरी तरफ मुँह करके मुझको देखने लगी। मैं अभी भी उसके दुसरे कप को सुंध रहा था। मुझे देख कर रीमा बोली बेटा तेरा लम्बा सुन्दर लंड मेरे बदन और मेरे बदन से लिपटे कपडो को प्यार करते तुम्को देख कर मस्त हो कर लार बहा रहा है। और वह भी मेरे कपडो का भुखा है। तुम अपने लंड के सुपाडे को मेरे दुसरे कप पर छुआ दो जिस से उसका रस मेरे ब्लाउस मे मिल जाये फिर उसको सुंघो और चाटो तुमको एक अलग ही मजा आयेगा।


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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:44

रीमा की बात सुनकर मैंने सोचा रीमा सही कह रही है। और फिर मैं ब्लाउस का कप अपने लंड के पास ले गया और उसके सुपाडे को अपने हाथ से पकड कर धीरे धीरे कप पर फिराने लगा। मेरे लंड के सुपाडे के ब्लाउस पर लगने से मेरे शरीर मैं उत्तेजना के कारण कपकपी आ गयी। मैंने ब्लाउस के कप मे ४-५ जगह लंड से बहता रस लगा दिया। जब मेरा प्रीकम ब्लाउस मे अच्छी तरह से लग गया मैंने उसको उठा कर फिर से अपनी नाक उसमे घुसा दी। और एक गहरी साँस ली। ओहऽऽऽ म मऽऽऽऽऽऽ रीमा का कहना बिल्कुल थीक था उसकी गंघ तो बिल्कुल बदल गयी थी और बहुत ही मादक हो गयी थी। रीमा ने मुझसे पूछा क्यो बेटा कुछ फर्क पडा क्या। मैंने कहा हाँ माँ तुम बिल्कुल थीक कहती थी। माँ तो हमेशा ही सही होती है बेटा माँ की बात मान कर सही से माँ से चुदायी शास्त्र की शिक्षा लेगा तो जीवन मैं कभी भी निराश नही होगा समझा। मैं कहा हाँ माँ।

फिर मैंने उसके ब्लाउस को सुंघना जारी रखा थोडी देर सुंघ कर मैंने उसको चुमना और चाटना शुरू कर दिया। इस कप का स्वाद चख कर मुझे लगा मैंने पहले कप मे क्यो नही अपने लंड का रस मिलाया मिला लिया होता तो उसका स्वाद भी इतना ही स्वादिष्ठ होता। मेरे लंड का रस मिला लेने की वजह से ब्लाउस क स्वाद और भी मस्त हो गया था। और फिर मैंने चाट चाट कर ब्लाउस के दुसरे कप को भी अपने थूक से गीला कर दिया। उसके बाद दोनो कप पर बारी बारी से उस जगह पर किस किया जिस जगह पर मम्मो से बाहर निकलती नुकीली घुडियाँ होती है। किस करके मुझे लगा जैसे की मैं उसकी घुडीयो को किस कर रहा हूँ।

जब मैं पूरी तरह से मम्मो कि प्यार कर चुका और उसका मेरे थूक से सना ब्लाउस अपने हाथ मै लिया खडा हुआ तो रीमा बोली तो बेटा कैसा लगा तुमको मेरा सेक्सी ब्लाउस पंसन्द आया। जब मैंने पहन रखा था तो तुम्हारी हालत खराब थी ये तो मुझको मालूम मैं अब मेरे ब्लाउस को प्यार कर के मेरे चूत के राजा की क्या हालत है। मैं बोला माँ हालत तो अभी भी खराब है। इतनी मस्ती भरी थी इस ब्लाउस मैं मुझे मालूम नही था और उस सारी मस्ती को मैं चाट चाट कर पी गया हूँ जिसकी वजह से मेरे तन बदन मे मस्ती भरी आग लग गयी है। ओहऽऽऽ माँ तुम्हारे बदन की गंध मैं इतनी मादकता है कि ये तुम्हारे कपडो को चुदास रस से भर देते है। जिसको पी कर मेरे बदन का तापमान बढ गया है। अगर मैं तुम्हारे बदन को प्यार करुगाँ तो तुम्हारे बदन को छुते ही मेरी मस्ती झड जायेगी। इसपर रीमा ने कहा नही बेटा मैं ऐसा नही होने दुंगी। तुझसे पहले अपनी जबरदस्त चुदायी कराउगी तभी तुझे झडने दूगी समझ। मैंने उसकी बात सुनकर सर हिला दिया।मैने सर तो हिला दिया था पर मुझे बिल्कुल भी विश्वास नही था की उसको चोदने तक मैं रुक पाउगाँ मेरा अनुमान था की उसको ब्रा पैन्टी मैं देख कर बिना छुये ही मेरी मस्ती झड जायेगी। फिर मैंने सोचा चलो देखते है की रीमा क्या करती है। फिर रीमा बोली मेरा यह ब्लाउस हमारे पहले मिलन की निशानी है। मैं इसको सम्भाल कर रखना चाहती हूँ। लेकिन मैं चाहती हूँ कि तुम इसको अपने लंड रस से भर दो। जिससे मेरे बदन की गंध के साथ साथ तुम्हारे लंड रस की गंध भी इसमे समा जाये। और जब तुम मेरे पास ना हो तो मैं अपने ब्लाउस को सुंघ कर उस मिलन की याद को ताजा कर सकुँ।

मैंने कहा थीक हैं माँ मैं अपना लंड रस से इस ब्लाउस को गीला कर देती हूँ तो रीमा बोली नही बेटा ये काम मुझे करने दे इसको करने का हक सिर्फ मेरा है। मैंने कहा थीक है माँ। और उसका ब्लाउस उसके हाथ मैं दे दिया। हाथ मे लेकर रीमा बोली तूने तो इसको बिल्कुल ही गिला कर दिया है रे हर छोटी से छोटी चीज से तेरे को मस्ती चढती है तू तो पक्का से ही रंडी की औलाद है। ला अब अपना लंड पकडने दे मुझे इसका रस अपने ब्लाउस पर तो मल लूँ मैं। मैंने कहा लो पकड लो मेरा लंड माँ। रीमा अपने पंजो के बल झुक कर बैठ गयी। उसका मुँह बिल्कुल मेरे लंड के सामने था। मेरा लंड हाथ मैं लेकर उसने उसके सुपाडे को उपर की खाल के अंदर से निकाला। जिस से गोल्फ बाल जितना मोटा सुपाडा निकल कर बाहर आ गया।

रीमा मेरा सुपाडा देख कर बोली बडा मोटा है रे तेरा सुपाडा मैं रंडी हूँ इतने सारे लंड खा चुकी हूँ। कुछ लंड तो तेरे से भी बडे थे पर लगता है की तेरा ये सुपाडा मेरी चूत तो फाड ही डालेगा आज। उसकी इस बात को मेरी पुरे शरीर मैं एक मस्ती की लहर दौड गयी। फिर रीमा बोली मेरे दाँये कप पर तो तुने अपना मदन रस लगा ही दिया है अब बाकी का रस मै अपने ब्लाउस के बाँय कप और पिछले हिस्से मे लगाउगी। ये कह कर उसने मेरे लंड को मेरे सुपाडे के निचले हिस्से से पकड और सुपाडे के एक हिस्से के रस को ब्लाउस के बाँये कप से पोछ दिया। पोछते वक्त उसने थोडा दवाब अपने मुलायम कोमल उगलीयो से मेरे सुपाडे को दिया। जिससे मेरे लंड ने एक झटका सा लिया मुझे लगा मैं झड ही जाऊगाँ। पर ऐसा हुआ नही। क्योकि उसका दवाब बिल्कुल नपा तुला था।

जिससे मेरे शरीर मैं मस्ती का उबाल तो आया पर वह उबाल मुझको झड नही पाया। फिर उसने ब्लाउस को पीठ के हिस्से की तरफ से पकडा और सुपाडे के दुसरे हिस्से को उसी दवाब के साथ पोछ दिया पर इस बार मेरे मुँह से एक सिसकी निकल गयी। बेटा अब बस तेरे सुपाडे के सर पर थोडा सा रस लगा बाकी रह गया है उसको मैं ब्लाउस का गुथा बना कर पोछ देती हूँ। यह कह कर उसने मेरा लंड अपनी मुठ्ठी मै भर लिया और दुसरे हाथ से ब्लाउस का गुथा बना कर मेरे लंड के सुपाडे पर कस के रगड कर साफ कर दिया। ऐसा करते वक्त उसने मेरे लंड को कस कर अपनी मुठ्ठी मै दबा दिया जिस से थोडा सा दर्द भी हुआ जिससे मेरा ध्यान लंड के सुपाडे पर होने वाली सेन्सेशन पर नही जा सका और सारा ध्यान मेरे लंड मे हुये दर्द पर ही केन्द्रित था। अगर वह ऐसा नही करती तो मैं सुपाडे पर हुयी रगडाहट की वजह से मैं जरूर झड जाता।