माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

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The Romantic
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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:32

रीमा बोली की अरे पहले कपडे उतार के मुझे नंगा कर दे फिर मेरे होठों का रस पी लेना मैं भागी थोडी ही जा रही हूँ। मैने कहा नही माँ चाहे थोडी देर ही सही पर मैं पहले तुम्हारे होंठो कर रस पीयूगाँ। इस पर रीमा ने कहा ठीक है पी ले मेरे होंठ। माँ हूँ क्या करू बेटे की बात माननी ही पडेगी। मैं बोला ओह माँ तुम कितनी अच्छी हो। इस पर रीमा बोली के बस ५ मिनट ही। मैंने कहा ठीक है। फिर मैंने अपने होठं रीमा के होठ से लगा दिये और एक किस ले लिया। फिर मैं अपने हाथ उसकी गर्दन के पीछे ले गया और उसके मुँह को अपनी तरफ खीचा और अपनी जीभ निकाल कर उसके होंठो पर जीभ फिराने लगा। थोडी देर इसी तरह से जीभ फिराने के बाद मैंने उसका निचला होंठ अपने होंठो के बीच पकड लिया और फिर उस पर जीभ फिराने लगा।

उसके होंठो को चुसने से पहले मै गीला कर देना चाहता था। थोडी देर तक इसी तरह उसके होंठो को गिला करने के बाद मैने उसके होंठ चुसने शुरू कर दिये। मैं बहुत जोर जोर से उसके होंठो को चूस रहा था। रीमा भी अपनी जीभ निकाल कर मेरे उपरी होंठ के उपर फिरा रही थी और साथ ही साथ अपना बहुत सा थूक अपने नीचले होंठ के पास जमा कर रही थी जिस से मैं ज्यादा से ज्यादा उसके स्वादिष्ट थूक को पी सकूँ। मैं भी हर थोडी देर मे नीचले होंठ को छोड कर उसका थूक अपनी जीभ की मदद से उसके होंठो पर मलने लगता और अच्छी तरह से मल कर फिर से उसके होंठ को चुसने लगता करीब २ मिनट तक मैं ऐसा ही उसके साथ करता रहा। मैं इतनी जल्दी नही छोडना चाहता था पर क्या करता मेरे पास सिर्फ़ ५ मिनट थे और मैं भी रीमा को जल्दी से जल्दी नंगा कर देना चाहता था।

फिर मैंने उसका निचला होंठ छोड कर उसका उपरी होंठ अपने दोनो होंठो के बीच पकड लिया। और उसको भी अपने थूक से गीला कर दिया। रीम ने भी मेरा नीचला होंठ अपने थूक से गिला कर दिया था। थोडी देर तक मैं उसके होंठ को गीला करता रहा और और चुसता रहा फिर एक दम से मैंने अपनी जीभ को नुकीला कर के उसके दाँतों और होंठो के बीच डाल दी और उसके दाँतों पर फिराने लगा। वोह भी अपनी जीभ को नुकीली बना कर मेरे जीभ के नीचे गोल गोल घुमाने लगी। जिससे उसकी जीभ से लार निकल कर मेरे मुहँ मे गिरने लगी और मेरी जीभ के नीचे जमा होने लगी।

थोडी देर इसी तरह से उसके दाँत और होंठ के बीच की और उसके जीभ से टपकती लार मेरे मुँह मे जमा हो गयी। फिर मैंने रीमा के होंठ मुँह मे लेकर चूसने लगा तथा साथ ही साथ मुँह के अन्दर जमी स्वादिष्ट लार को भी मैं पी गया। ये लार मेरे लिये अम्रत थी। फिर थोडी देर तक इसी तरह मैं उसका होंठ चुसता और लार पीता रहा। और जैसे ही करीब ५ मिनट हुये मैंने आखरी बार उसके होंठो पर अपने होठ रखे और एक गहरा चुम्बन लेकर उससे अलग हो गया। फिर मैंने पूछा मजा आया माँ। तो रीमा बोली हाँ बेटा बहुत मजा आया।

तुम तो बहुत ही अच्छी किस करते हो बेटा। मैं तो सोच रही थी तुमको किस करने की भी ट्रेनिग देनी पडेगी लेकिन ऐसा लगता तो नही है। मैंने कहा माँ ट्रेनिग कि जरूरत तो मुझे है क्योकि चाहे जितना भी अच्छा किस मैं करता हूँ पर तुमसे अच्छा तो नही हो सकता। रीमा बोली वोह तो तुम ठीक ही कह रहे हो मेरे राजा बेटा ठीक है मैं तुम को पुरी तरह ट्रेन कर दूँगी ठीक है मैंने कहा हाँ माँ। फिर रीमा बोली चल अब जल्दी से मेरे कपडो को उतार कर फेंक दे। मेरी मस्ती होंठ चूसायी के कारण बढ चुकी है और अब मुझे ये कपडे अपने बदन पर बहुत ही बुरे लग रहे है। इस पर मैने कहा माँ तुम मुझको उसी तरह नंगा नाच कर के दिखाओ जैसा तुमने एक बार बताया था चाट पर। करुँगी बेटा वोह भी करुँगी लेकिन सबसे पहले मै तेरे हाथो से नंगी होना चाहती हूँ। जिससे तुझे धीरे धीरे मेरे नंगे होते शरीर को देखने का नजारा जिन्दगी भर याद रहे।बात तो तुम ठीक कह रही हो माँ। मैं जब तुम्हारे कपडे धीरे धीरे उतारुगाँ और तुम्हारे बदन का एक एक हिस्सा नग्न हो कर मेरी आँखो के सामने प्रकट होगा तो पहली बार उस नग्न हिस्से को देखने मे जो मजा आयेगा उसकी छवि तो कभी भी मेरी आँखो से नही जा सकती। रीमा तू बहुत ही समझदार है बेटा तेरे जैसा बेटा पा कर कोई भी माँ धन्य हो जाये। उसकी बात सुनकर मैं थोडा सा शर्मा गया। इसपर रीमा ने कहा हाय देखूँ तो ऐसे शर्मा रहा है जैसे कोई लोडिंया हो। चल अब लग जा काम पर और कर दे अपनी माँ को नंगी। तेरी इस रंडी माँ को कितने ही ग्राहको ने नंगा किया है तू भी कर दे नंगा।

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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:33

देखले अपनी रंडी माँ का नंगा बदन। तेरी इस रंडी माँ का कोई भी दल्ला नही है। तेरी माँ को खुद ही मेहनत करनी पडती है ग्राहको को ढूढने मे। अखिर रंडी हूँ एक दिन धंधा ना करू तो चूत की खुजली रात भर सोने नही देती। तो मेरा दल्ला बनेगा बेटा। मेरी दलाली करेगा। हाय रे क्या मस्त जोडी होगी हमारी रंडी माँ और दलाल बेटा। तेरी ये माँ तुझको दलाली के सारे गुण सिखा देगी। और तुझको अपनी कमायी का आधा हिस्सा भी दूँगी। और तेरे को और नयी नयी रंडीयो की चूत भी दिलवाऊगी उनकी भी दलाली तू ही करना बेटा। बोल बेटा बोल करेगा अपनी माँ की दलाली।

रीमा की इतनी गंदी गंदी बाते सुनकर मेरा लंड मचल उठा था। रीमा फिर बोली बोल रंडी की औलाद भोसडे के पेदायीश हरामी साले तेरी माँ को दस कुत्तो ने चोदा तो तु पैदा हुआ बोलता क्यो नही करेगा अपनी इस रंडी माँ की दलाली। ये सुनकर मेरी हालत बिल्कुल ही खराब हो गयी पुरा बदन मस्ती मे गरम हो गया मेरा लंड मस्त हो कर प्रीकम बहाने लगा। और मैंने बोला हाँ माँ मैं करूगाँ तेरी दलाली। सुनकर रीमा बहुत ही खुश हुयी और मुझको अपने गले से लगा लिया और बोली तू सही मे मेरा बेटा होता तो अब तक मैं तुझसे अपनी दलाली करवा रही होती पर तू चिन्ता मत कर अगर मुझे मौका मिला तो तुझसे अपनी दलाली जरूर करूँगी। फिर वोह मुझसे अलग हो गयी और बोली चल अब खडा खडा क्या देख रहा है उतार मेरे कपडे साले रंडी की औलाद।

मैंने सोचा अब माँ के भरपूर बदन को नंगा देखने का वक्त आ गया है। मैंने सोचा रीमा के कपडे उतारने से पहले आखरी बार उसको गर्म कर दूँ। और यही सोच कर मैंने रीमा से कहा माँ तुम वह पहली औरत होगी जिसको मैं नंगा देखूँगा। तुम्हारे भारी चूचियाँ पहली चूचियाँ होगी जिनको मैं मसलूगाँ। तुम्हारी घुडियाँ(निप्पल्स) पहली घुडियाँ होंगी जिनको मैं चूसूगाँ और खीचूगाँ। तुम्हारे चूतड वह पहले चूतड होंगे जिन को मैं प्यार करूगाँ। तुम्हारी गाँड वह पहली गाँड होगी जिसको मारने से पहले मैं चाट चाट कर गीली कर दूगाँ। और तुम्हारी चूत पहली चूत होगी जिसको मैं चाट चाट कर झडाऊगाँ और फिर उसमे अपना लम्बा लंड डाल कर चोदूगाँ। और तुम ही वह पहली औरत होगी जो मेरा कुवाँरापन ले लोगी।

हाय रे मेरे लाल तुने तो मुझको इतना गरम कर दिया है की अगर और कुछ पल ये कपडे मेरे शरीर पर रहे तो इनमे आग लग जायेगी। बेटा अपनी माँ को और मत तडपा पहले ही वह तुझसे इतने सालो दूर रह कर तडपी है। बेटा अब उतार दे मेरे कपडे। मैंने सोचा अब रीमा के कपडे उतार ही देने चाहिये ज्यादा तडपाना ठीक नही है। कही माँ अपने कपडे उतार कर खुद ही न फेक दे जो की मैं नही चाहता था। और अब मेरा लंड भी रीमा को नंगा देखने के लिये बेताब हुआ जा रहा था। पर साथ ही साथ मुझको ये भी डर था रीमा बहुत ही मस्तानी औरत है। कही उसके मस्ताने नंगे बदन को देख कर मेरा लंड बिना छुये ही झड जाये। और मुझे पता था कि इसके लिये मुझे बहुत मेहनत करनी पडेगी।


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Re: माँ बेटे का अनौखा रिश्ता

Unread post by The Romantic » 29 Oct 2014 15:34

फिर मैं आगे बढा और रीमा के हाथ पकड लिये और उठा कर चूम लिये। और बोल थीक है लाओ माँ उतार देता हूँ मैं तुम्हारे कपडे। ये सुन रीमा ने अपना पल्लू जो कि उसने शुरू मैं अपने पेटीकोट मे खोसं लिया था निकाला और मुस्कुराते हुये मेरे हाथ मैं पकडा और शर्माते हुये बोली लो बेटा। वोह कुछ इस तरह से शर्मायी थी जैसे की नयी नवेली दुल्हन हो जो कि सेक्स के बारे बिल्कुल अंजान है। रीमा सही मे एक खेली खायी औरत थी उसे सब पता था कब और कैसे मर्द के साथ बर्ताव किया जाना चहिये। उसके इस शर्माने ने मेरे शरीर मे मस्ती भरा जोश भर दिया।

वैसे भी अब मेरा हाल भी बुरा हो चुका। मुझको इस कमरे मे आये हुये करीब एक घंटा हो चुका था और तभी से मेरा लंड खडा था। और मेरे आने के थोडी देर बाद ही रीमा ने मेरे कपडे उतार दिये थे। मैंने उसका पल्लू पकडा और मन मे यह निश्चय कर लिया था की उसके बदन के साथ पूरा न्याय करूँगा और धीरे धीरे उसका एक एक अंग निवस्त्र करूगाँ। सबसे पहले मैंने उसका पल्लू पकड कर सूघं लिया। जैसे की मैं रीमा को बता चुका था कि मुझे कपडो कि गंध सूंघना पंसन्द है। मैं उसके हर कपडे को उतारते हुये उसकी खुशबु सूंघना चाहाता था।

उसकी साडी मे से बहुत मादक गंध आ रही थी। इस गंध मे उसकी बदन की खुशबु और पसीने कि गंध मिली हुयी थी। और फिर मैंने उसका पल्लू चूम लिया। जब मैं उसका पल्लू चूम रहा था तो उसकी आँखो मैं आँखो डाल कर देख रहा था। उसकी आँखो मे वासना के लाल डोरे दिखायी दे रहे थे। फिर मैने उसका पल्लू छोड दिया और उसके सामने अपने घुटनो के बल बैठ गया और आगे बढ कर उसकी नाभी का चुम्बन ले लिया। मेरे इस तरह से अचानक चुम्बन ले लेने से उसके मुँह से एक सिस्कारी निकल गयी। उसका पल्लू कालीन पर पडा था और उसके पेटीकोट से जुडा हुआ हिस्से को मैंने अपने हाथ मे पकड लिया।

उसने साडी मे करीब ८ प्लेट डाल रखी थी। मैंने उसका पल्लू पकड कर अपने बदन के उपर डाल लिया। उसकी साडी नायलॉन की थी मेरे नंगे बदन पर उसका स्पर्श काफ़ी अच्छा लग रहा था। रीमा खडी हुयी मेरे हरकतो को देख रही थी। फिर मैंने धीरे से उसकी साडी को खीचा जिससे उसकी एक प्लेट निकल कर बाहर आ गयी मैंने साडी के उस छोटे हिस्से को अपने चहरे पर रखा और सबसे पहले एक गहरी साँस ले कर उसे सुंधा फिर उसके ३-४ चुम्बन ले लिये। रीमा मुझको अपने कपडे उतारते हुये देख रही थी। उसके चहरे मे मेरे लिये वासना और मातृ प्रेम के मिले जुले भाव थे। अब मेरा लंड भी उसकी साडी से टकरा रहा था जिसकी वजह से प्रीकम से भीगा हुआ मेरा लंड उसकी साडी को गिला कर रहा था।