मेरी चूत पसंद है compleet

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raj..
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Re: मेरी चूत पसंद है

Unread post by raj.. » 02 Nov 2014 18:19

इसी दौरान गौतम ने
एकबार करिश्मा की कमर को कस कर पकड़ लिया और अपनी कमरउछाल
करके एक धक्का मारा तो उसके लंड का सुपरा करिश्मा की गंद की
छेद मे घुस गया . फिर गौतम ने जल्दी से एक और जोरदार धक्का
मारा तो उसका पूरा का पूरा लंड करिश्मा की गंद मे घुस गया और
गौतम की झांते करिश्मा की चूतर को छूने लगी. अपनी गंद मे
गौतम का लंड को घुसते ही करिश्मा एक बार ज़ोर से चीखी और चिल्ला
कर बोली, "साले बहन्चोद, दूसरे की बीवी की गंद मुफ़्त मे मिल गयी तो
क्या उसको फाड़ना ज़रूरी है? भोसरि के निकाल अपना मूसर जैसा लंड
मेरी गंद से और जा अपना लंड अपनी मा की गंद मे या उसकी बुर मे
डाल. अरे रमेश तुम्हे दिख नही रहा है, तुम्हारा दोस्त मेरी गंद
फाड़ रहा है? अरे कुछ करो भी, रोको गौतम को, नही तो गौतम
मेरी गंद मार मार कर मुझे गॅंडू बना देगा फिर तुम भी मेरी
चूत छोड़ कर के मेरी गंद ही मारना." रमेश अपना लंड सुमन की
गंद के अंदर बाहर करते करिश्मा से बोला, "अरे रानी, क्यों चिल्ला
रही हो. गौतम तुम्हे अभी छोड़ देगा और एक-दो बार गंद मरवाने से
कोई गॅंडू नही बन जाता है. देखो ना मैं भी कैसे गौतम की बीवी की
गंद मे अपना लंड अंदर बाहर कर रहा हूँ. तुमको अभी थोरी देर
के बाद गंद मरवाने मे भी बहुत मज़ा मिलेगा. बस चुपचाप
अपनी गंद मे गौतम का लंड पिलवती जाओ और मज़ा लुटो. इतना सुनते ही
गौतम ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर करिश्मा की एक चूंची
पकड़ कर मसल्ने लगा और अपना कमर हिला हिला कर अपना लंड
करिश्मा की गंद के अंदर बाहर करने लगा. थोरी देर के करिश्मा
को भी मज़ा आने लगा और वो अपनी कमर चला चला कर गौतम का
लंड अपनी गंद से खाने लगी. थोरी देर के बाद रमेश और
गौतम दोनो ने सुमन और करिश्मा की गंद को अपने लंड की
पिचकारी से भर दिया और सुस्त हो कर सोफा मे लेट गये.इसतरह से
रमेश और करिश्मा जब तक गौतम और सुमन के घर पर रुके
रहे तब तक दोनो दोस्त एक दूसरे की बिवीओ की चूत चोद चोद कर मज़ा
मारते रहे. कभी कभी तो दोनो दोस्त करिश्मा या सुमन को एक साथ
चोद्ते थे. एक बिस्तेर पर लेट कर नीचे से अपना लंड चूत मे डालता
था और दूसरा अपना लंड ऊपर से गंद मे डालता था. करिश्मा और
सुमन भी हर समय अपनी चूत या गंद मरवाने के लिए तैय्यार
रहती थी. जब सब लोग घर के अंदर रहते थे तो सभी नंगे ही
रहते थे. करिश्मा और सुमन भी नंगी हो कर ही चाइ या खाना
बनाती थी और जब भी रमेश या गौतम उनके पास आता था तो वो
झुक कर उनका लंड अपने मुँह मे भर कर चुस्ती थी और जैसे ही
लंड खड़ा हो जाता था तो खुद अपने हाथों से खड़े लंड को अपनी
चूत से भिड़ा कर खुद धक्का मार कर अपनी चूत मे भर लेती थे.
एक हफ़्ता तक करिश्मा और रमेश अपने दोस्त के घर बने रहे और
फिर वापस अपने घर के लिए चल पड़े .जब प्लॅन मे रमेश और
करिश्मा अपने घर के लिए जा रहे थे तो रमेश ने करिश्मा से
पूछा, क्यों करिश्मा रानी, एक बात सही सही बताओ, कौन ज़्यादा अच्छा
चोद्ता है, मैं, गौतम या पिताजी?" रमेश की बात सुन कर
करिश्मा बिलकूल अचम्भित हो गयी, फिर उसने धीरे से पूछी,
"पिताजी से चुदाई की बात तुमको कैसे मालूम? तुम तो अपनी सुहागरात
पर ड्यूटी पर थे?" तब रमेश धीरे से करिश्मा को चूमते हुए
बोला, "हाँ, तुम ठीक कह रही हो, मुझे उस दिन ड्यूटी पर जाना पड़ा.
जब मैं अपनी ड्यूटी से करीब एक घंटे के बाद लौटा तो देखा तुम
पिताजी का लंड पकड़ चूस रही हो और पिताजी तुम्हारी चूत मे
अपनी उंगली पेल रहें है. ये देख मैं चुप चाप कमरे के बाहर
खड़ा हो कर तुम्हे और पिताजी को चुदाई ख़तम होते वक़्त तक
देखा और फिर लौट गया और सुबह ही घर पर आया." "क्या तुम
मुझसे नाराज़ हो" करिश्मा धीरे से रमेश से पूछी. "नही,
मैं तुम से बिल्कुल भी नाराज़ नही हूँ. तुमने पिताजी को अपनी चूत दे
कर एक बहुत बड़ा उपकर किया है" रमेश बोला. करिश्मा ये सुन कर
बोली, "वो कैसे". तब रमेश बोला, "अरे मेरी माताजी अब बूढ़ी हो
गयी हैं और उनको टांग उठाने मे तकलीफ़ होती है, लेकिन पिताजी
अभी भी जवान हैं. उनको अगर घर पर चूत नही मिलती तो वो
ज़रूर बाहर जाकर अपना मुँह मारते. उसमे हम लोगो की
बदनामी होती. हो सकता कि पिताजी को कोई बीमारी हो जाती. लेकिन अब
ये सब न्ही होगा क्योंकी उनको घर पर ही तुम्हारी चूत चोदने को
मिल जाया करेगी." "तो क्या मुझको पिताजी से घर मे बराबर
चुदवाना पड़ेगा?" करिश्मा पलट कर रमेश से पूछी. "नही
बराबर नही, लेकिन जब उनकी मर्ज़ी हो तुम उनको अपनी चूत देने से
मना मत करना." "लेकिन अगर तुम्हारी माताजी ने देख लिया तो?"
करिश्मा ने पूछी. "तब की बात तब देखी जाएगी" रमेश ने कहा.
फिर करिश्मा और रमेश अपने घर आ गये और अपने
अपने काम पर लग गये.

raj..
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Re: मेरी चूत पसंद है

Unread post by raj.. » 02 Nov 2014 18:19

रमेश अब पूरी तरह से ड्यूटी करता और रात तो
करिश्मा को नंगी करके खूब चोद्ता था. रसिकलाल जी भी कभी
कभी करिश्मा को मौका देख चोद लेते थे. फिर कुछ दीनो के बाद
करिश्मा और रमेश साथ साथ करिश्मा के मैके पर गये.
ससुराल मे रमेश का बहुत आब-भगत हुआ. करिश्मा के जितने
रिश्तेदार थे उन सभी ने रमेश और करिश्मा को खाने पर बुलाया.
रमेश और करिश्मा को मज़े ही मज़े थे. अपनी ससुराल मे भी
रमेश करिश्मा को रात को दो-तीन दफ़ा ज़रूर चोद्ता था और कभी
मौका मिल गया तो दिन को करिश्मा को बिस्तर पर लेटा कर चुदाई चालू
कर देता था. एक दिन रमेश पास की किसी दुकान पर गया हुआ था.
करिश्मा कमरे मे बैठ कर पेपर पढ़ रही थी. एकाएक
करिश्मा को अपनी मा, रजनी जी , की रोने की आवाज़ सुनाई दिया.
करिश्मा भाग कर अंदर गयी तो देखा कि रजनी जी भगवान के
फोटो केसामने खड़ी खड़ी रो रही है और भगवान से बोल रही
है, "भगवान तुमने ये क्या किया. तुम मेरे पति इतनी जल्दी क्यों
उठा लिए और अगर उनको उठा लिए तो मेरी बदन मे इतना गर्मी
क्यों भर दिया. अब मैं जब जब अपनी लड़की और दामाद की चुदाई देखती
हूँ तो मेरे शरीर मे आग लग जाती है. अब क्या करूँ? कोई रास्ता
तुम्ही दिखला दो, मैं अपने गरम शरीर से बहुत परेशान हो गयी
हूँ." करिश्मा समझ गयी कि क्या बात है. वो झट अपनी मा के
पास जाकर मा को अपने बाहों मे भर ली और पीछे से चूमते
हुए बोली, "मा तुमको इतना दुख है तो मुझसे क्यों नही बोली?" रजनी
जी अपने आपको करिश्मा से छुड़ाते हुए बोली, "मैं अगर तुझसे बता
तो तू क्या कर लेती? तू भी तो मेरी तरह से एक औरत ही है?" "अरे
मुझसे से कुछ नही होता तो क्या तुम्हारा दामाद तो है? तुम्हारा
दामाद ही तुमको शांत करता" करिश्मा अपनी मा को फिर से पकड़ कर
चूमते हुए बोली. "क्या बोली तू, अपने दामाद से मैं अपने जिस्म की भूख
शांत करवाउंगी? तेरा दिमाग़ तो ठीक है?" रजनी जी अपनी बेटी
करिश्मा से बोली. तब करिश्मा अपने हाथों से अपनी मा की
चूंचियों को पकड़ कर दबाते हुए बोली, "इसमे क्या हुआ? तुम जिस्म की
भूख से मरी जा रही हो, और तुम्हारा दामाद तुम्हारे जिस्म की भूक को
मिटा सकता है, अगर तुम्हारी जगह मैं होती तो मैं अपने दामाद के
सामने खुद लेट जाती और उससे कहती आओ मेरे प्यारे दामाद जी मेरे
पास आओ और मेरी जिस्म कीप्यास बुझाओ." "चल हट बड़ी चुड़दकर बन रही
है, मुझे तो ये सोच कर ही शरम आ रही है, कि मैं अपने दामाद
के सामने नंगी लेट कर अपनी टांग उठाउंगी और वो मेरी चूत मे
अपना लंड पेलेगा" रजनी जी मूड कर अपनी बेटी की चूंचियो को
मसल्ते हुए बोली.तभी रमेश, जो कि बाहर गया हुआ था, कमरे मे
घुसा और घुसते घुसते हुए उसने अपनी बीवी और सास की बातों को सुन
लिया. रमेश आगे बढ़ कर अपनी सास के सामने घुटने के बलबैठ
गया और अपनी सास के चूतरों को अपने हाथों से घेर कर पकड़ते
हुए सास से बोला, "मा आप क्यों चिंता कर रही हैं, मैं हूँ ना?
मेरे रहते हुए आपको अपने जिस्म की भूख की चिंता नही करनी
चाहिए. अरे वो दामाद ही बेकार का है जिसके होते हुए उसकी सास अपनी
जिस्म की भूख से पागल हो जाए." "नही, नही, छोड़ो मुझे. मुझे
बहुत शरम लग रही है" रजनी जी अपने आप को रमेश से
छुड़ाते हुए बोली. तभी करिश्मा आगे बढ़ कर अपनी मा की
चूंची को पकड़ कर मसल्ते हुए करिश्मा अपनी मा से बोली,
"क्यों बेकार का शरम कर रही हो मा. मान भी जाओ अपने दामाद की
बात और चुप चाप जो होरहा है उसे होने दो." तब थोरी देर चुप रहने
के बाद रजनी जी अपनी बेटी की तरफ देख कर बोली, "ठीक है, जैसे तुम
लोगो की मर्ज़ी. लेकिन एक बात तुम दोनो कान खोल कर सुन लो. मैं अपने
दामाद के सामने बिल्कुल नंगी नही हो पाउंगी. आगे जैसा तुम
लोग चाहो." इतना सुन कर रमेशने मुस्कुरा कर अपने सास से कहा, "अरे
सासू जी आप को कुछ नही करना है. जो कुछ करना मैं ही
करूँगा, बस आप हमारा साथ देती जाए."फिर रमेश उठ कर खरा
हो गया और अपनी सास को अपने दोनो बाहों मे जाकड़ कर चूमने लगा.
रजनी जी चुप चाप अपने आप को अपने दामाद के बाहों मे छोड़ कर
खड़ी रही. थोरी देर तक अपने सास को चूमने के बाद रमेश
अपने हाथों से अपने सास की चूंची पकड़ कर दबाने लगा. अपनी
चूंचियो पर दामाद का हाथ पड़ते ही रजनी जी उत्तेजना से बिलबिला
उठी और बोलने लगी, "और ज़ोर से दबओ मेरी चूंचियों को बहुत दिन
हो गये किसी ने इस पर हाथ नही लगाया है. मुझे अपने दामाद से
चूंची मसलवाने मे बहुत मज़ा मिल रहा है. और दबओ. आ
बेटी तू भी आ मेरे पास और मेरे इन चूंचियो से खेल." अब रमेश
फिर से अपने सास के पैरों के पास बैठ गया और उनकी सारी के ऊपेर
से ही उनकी चूत को चूमने लगा. रजनी जी अपनी चूत के उपर अपने
दामाद का मुँह लगते ही बिलबिला उठी और ज़ोर ज़ोर से सांस लेने लगी.
रमेश भी उनकी सारी के उपर से ही उनकी चूत को चूमता रहा. थोरी
देर के बाद रजनी जी से सहा नही गया और खुद ही अपने दामाद से
बोली, "अरे अब कितना तर्पाओगे. तुम्हे चूत मे उंगली या जीब घुसानी
है तो ठीक तरीके से घुसाओ. सारी के ऊपर से क्या कर रहे हो?"
अपनी सास की बात सुन कर रमेश बोला, "मैं क्या करता, आपने ही कहा
था आप सारी नही उतारेंगी. इसीलिए मैं आपकी सारी के ऊपर से ही
आपकी चूत चूम रहा हूँ." "वो तो ठीक है, लेकिन तुम मेरी सारी
उठा कर तो मेरी चूत की चुम्मा ले सकते हो?" रजनी जी ने अपने
दामाद से बोली. अपनी सास की बात सुनते ही रमेश जल्दी से अपनी सास की
सारी को पैरों के पास से पकड़ कर ऊपर उठाना शुरू कर दिया और
जैसे ही सारी रजनी जी की जाँघो तक उठ गयी तो रजनी जी नेमारे
शरम के अपना चहेरा अपने हाथों से ढक लिया और अपने दामाद
से बोली, "अब बस भी करो, और कितना सारी उठहाओगे. अब मुझे शरम
आ रही है. अब तुम अपना सर अंदर डाल कर मेरी चूत को चूम लो."
क्रमशः.........

raj..
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Re: मेरी चूत पसंद है

Unread post by raj.. » 02 Nov 2014 18:20

Meri chut pasand hai paart--4

gataank se aage.......
Karishma ne apne hathon se Gautam ke lund ko pakar kar apni chut se bhira
kar Gautam ke god par jhatke sath baith gayee aur Gautam ka lund
Karishma ki chut ke andar chala gaya. Karishma ab Gautam ke god
par baith kar apni chutar utha utha kar Gautam ke lund ka dhakka
apni chut par lene lagee. Kamare sirf phacch, phacch ka awaj gunj
raha tha aur uske sath sath Suman aur Karishma ki siskian.Ramesh
thori der tak Suman ki chut peeche se lund dal kar chodta raha. Thori
der ke bad usne apni ek unglee me thook lag kar Suman ki gand me
unglee karne laga. Apni gand me Ramesh ki unglee ghuste hi Suman
Oh! Oh! Hai! kar uthi. Usne Ramesh se boli, "kya bat hai, ab meri
gand par bhi tumhara nazar par gaya hai. Are pahale meri chut ki aag
ko shant karo phir meri gand ki taraf dekhna." Lekin Ramesh apni
unglee Suman ki gand ke ched par rakh kar dhire dhire ghumane
laga. Thori der ke Ramesh ne apni unglee Suman ki gand me ghuser
diya aur djire dhir andar bahar karne laga. Suman bhi apna hath
neeche le jakar apni chut ki ghundee ko sahalane lagee. Jab apni
thook aur unglee se Ramesh ne Suman ki gand ki ched kafi dhilee
kar lee tab Rameh ne apne lund par thook lagakar Suman ki gand ki
ched par rakha. Apni gand me Rameh ka lund chute hi Suman bol
pari, "are are kya kar rahe ho. Mujhe apni gand nahee chudwana hai.
Mujhe malum hai ki gand marwane se bahut takleef hoti hai. Hato,
Ramesh hato apna lund meri gand se hata lo." Lekin tab tak Ramesh
ne apna khara hua lund Suman ki gand ki ched par rakh kar dabane
laga tha aur thori se der ke bad Ramesh ka lund ka supara Suman ki
gand ki ched me ghus gaya. Suman chilla pari, "arrrreeeee maaaarrrr
dalaaaaaa, Oh! Oh! Ramesssshhh nikallllll loooo apnaaaa
mmuussssaaarrr jjjaaaaiissssaaa lunddddd mmmeerrreeee
gaaaanddd seeee. Maiiiii marrrr jaungeeeee." Lekin Ramesh kahna
sumne wala tha. Who apna kamar kara kar ke aur apna lund ko hath
se pakar ke ek dhakka mara to uska adha lund Suman ki gand me
ghus gaya . Suman chatpatane lagee.Thori der ke bad Ramesh thora
ruk kar ek dhakka aur mara to uska pura ka pura lund Suman ki gand
me ghus gaya aur wo jhuk kar ek hath se Suman ki chunchee
sahalane laga aur dusree hath se Suman ki chut me unglee karne
laga. Lekin Suman mare dard ke chatapata rahee thee aur bol rahee
the, "abe sale bharue Gautam, dekho tumhare samne tumhari bibi ki
gand kaise tumhara dost jabardastee se mar raha hai. Tum kuch
karte kyon nahee. Ab meri gand aaj phat jayegee. Lag raha hai aaj is
chodu Ramesh meri gand mar mar kar meri gand aur bur ek kar
dega. Giatam please tum Ramesh se mujhe bachao." Tab Ramesh
apne ungleon se Suman ki chut me unglee karte hue Suman se bola,
"Are Suman rani, bas thori der tak sabar karo, phir dekhna aaj gand
marwane ne tumhe kitni maza milta hai. Aaj mai tumharee gand mar
kar tumharee chut ki pani nikalunga. Bas tum aise hi jhuk kar khari
raho." Ramesh ki bat sun kar Gautan apna lund se Karishma ki chut
chodta hua Suman se bola, "Rani, aaj tum Ramesh ka mota lund
apni gand dalwa kar khoob maze urao, mai bhi abhi apna lund
Ramesh ki naye biwi ki gand me ghuserta hun and Karishma ki gand
marta hun. Mai sha ki gand mar kar tumhari gand marne ka badla
nikalta hun." Karishma jaise hi Gautam ki bat suni to bol pari, "are
wah kya hisab hai, Ramesh aaj mauka pa kar Suman ki gand mar
raha hai aur uski kimat mujhe apni gand marwa kar chukani paregee.
Nahi mai to apni gand me lund nahi pilwatee. Gautam tum meri gand
ke bajay Ramesh ki gand mar kar apna badla nikalo." Gautam tab
Karishma se bola, "nahe meri chuddakar rani, jis tarah se Ramesh ne
meri biwi ki gand me apna lund ghuser kar meri biwi ki gand mar raha
hai, mai bhi usi tarah se Ramesh ki biwi ki gand me apna lund ghuser
kar Ramesh ki biwi ki gand marunga aur tabhi mera badla pura
hoga." Itna kah kar Gautam ne apna lund Karishma ki chut se nikal
liya aur usme phir se thora rhuk laga kar Karishma ki gand se bhira
diya. Karishma apni kamar idhar udhar ghumane lagee lekin Gautam
ne apne hathon se Karishma ka kamar pakar kar apna lund ka adha
supara Karishma ki gand ki ched me dal diya. Karishma dard ke
mare chatpatane lagee.Karishma apni gand se Gautam ka lund ko
nikalne ki koshish kar rahee thee aur Gutam apne lund ko Karishma
ki gand me ghusrne ki koshis kar raha tha. Isi dauran Gautam ne
ekbar Karishma ki kamar ko kas kar pakar liya aur apna kamar
karake ek dhakka mara to uska laure ka supara Karishma ki gand ki
ched me ghus gaya . Phir Gautam ne jaldee se ek aur jordar dhakka
mara to uska pura ka pura lund Karishma ki gand me ghus gaya aur
Gautam ki jhante Karishma ki chutar ko chune laga. Apni gand ne
Gautam ka lund ko ghuste hi Karishma ek jor se chikhee aur chilla
kar boli, "sale bahanchod, dusre ki biwi ki gand muft me mil gaya to
kya usko pharna jaroori hai? Bhosri ke niakl apna musar jaisa lund
meri gand se aur ja apna lund apni maa ki gand me ya uski bur me
dal. Are Ramesh tumhe dikh nahee raha hai, tumhara dost meri gand
phar raha hai? Are kuch karo bhi, roko Gautam ko, nahee to Gautam
meri gand mar mar kar mujhe gandu bana dega phir tum bhi meri
chut chor kar ke meri gand hi marna." Ramesh apna lund Suman ki
gand ke andar bahar karte Karishma se bola, "are rani, kyon chilla
rahee ho. Gautam tumhe abhi chor dega aur ek-do gand marwane se
koi gandu nahi ban jata hai. Dekho na mai bhi kaise Gautam ki biwi ki
gand ne apna lund andar bahar kar raha hun. Tumko abhi thori der
ke bad gand marwane me bhi bahut maza milega. Bas chupchap
apni gand me Gautam ka lund pilwati jao aur maza luto. Itna sunte hi
Gautam ne apna hath aage barha kar Karishma ki ek chunchee
pakar kar masalne laga aur apna kamar hila hila kar apna lund
Karishma ki gand ke andar bahar karne laga. Thori der ke Karishma
ko bhi maza ane laga aur wo apni kamar chala chala kar Gautam ka
lund apni gand se khane lagee. Thori der ke bad Ramesh aur
Gautam dono hi Suman aur Karishma ki gand me apna lund ke
pichkaree se bhar diya aur sust ho kar sofa me let gaye.Istarah se
Ramesh aur Karishma jab tak Gautam aur Suman ke ghar par ruke
rahe tab tak dono dost ek dusre ki biwion ki chut chod chod kar maza
marte rahe. Kabhi kabhi to dono dost Karishma ya Suman ko ek sath
chodte the. Ek bister par let kar neeche se apna lund chut me dalta
tha aur dusra apna lund oper se gand me dalta tha. Karishma aur
Suman bhi har samay apni chut ya gand marwane ke liye tayar
rahatee thee. Jab sab log ghar ke andar rahate the to sabhi nange hi
rahate the. Karishma aur Suman bhi nangee ho kar hi chai ya khana
banatee thee aur jab bhi Ramesh ya Gautam unke pas ata tha to wo
jhuk kar unka lund apne munh me bhar kar chustee thee aur jaise hi
lund khara ho jata tha to khud apne hathon se khare lund ko apni
chut se bhira kar khud dhakka mar kar apni chut me bhar letee the.
Ek hafta tak Karishma aur Ramesh Apne dost ke ghar bane rahe aur
phir wapas apne ghar ke liye chal pare.Jab planr me Ramesh aur
Karishma apne ghar ke liye ja rahe the to Ramesh ne Karishma se
pucha, kyon Karishma rani, ek bat sahi sahi batao, kyon jyada achha
chodta hai, Mai, Guatam ya pitajee?" Ramesh ka bat sun kar
Karishma bilkool achmbhit ho gaye, phir usne dhire se puchee,
"pitajee se chudai ki bat tumko kaise malum? Tum to apni suhagrat
par duty par the?" Tab Ramesh dhire se Karishma ko chumte hue
bola, "han, tum theek kah rahee ho, mijhe us din duty par jana para.
Jab hum apni duty se kareeb ek ghante ke bad lauta to dekha tum
pitajee ka lund pakar choos rahi ho aur pitajee tumharee chut me
apni unglee pel rahen hai. Eh dekh mai chup chap kamare ke bahar
khara ho kar tumhe aur pitajee ka chudai khatam hote waqt tak
dekha aur phir laut gaya aur subah hi ghar par aya." "Kya tum
mujhse naraz ho" Karishma dhire se Ramesh se puchee. "Nahee,
mai tum se bilkul bhi naraz nahee hun. Tumne pitajee ko apni chut de
kar ek bahut bara upkar kiya hai" Ramesh bola. Karishma eh sun kar
boli, "wo kaise". Tab Ramesh bola, "are humari matajee ab budhi ho
gayee hain aur unko tang uthane me takleef hote hai, Lekin pitajee
abhi bhi jawan hain. Unko agar ghar par chut nahee milta to wo
jaroor se bahar jakar apna munh marte. Usme hum logo ki
badnamee hotee. Ho sakta ki pitajee ko koi bimarii ho jatee. Lekin ab
eh sab nhee hoga kyonkee unko ghar par hi tumhree chut chodne ko
mil jaya karega." "To kya mujhko pitajee se ghar me barabar
chudwana parega?" Karishma palat kar Ramesh se puchee. "Nahee
barabar nahee, lekin jab unki marzee ho tum unko apni chut dene se
mana mat karna." "Lekin agar tumharee matajee ne dekh liya to?"
Karishma ne puchi. "Tab ki bat tab dekhi jayegee" Ramesh ne kah.
Phir Karishma aur Ramesh apne ghar aa gaye aur unhone apne
apne kam par lag gaye. Ramesh ab puri tarah se duty karta aur rat to
Karishma ko nangee karke khoob chodta tha. RasikLal Jee bhi kabhi
kabhi Karishma ko mauka dekh chod lete the. Phir kuch dino ke bad
Karishma aur Ramesh sath sath Karishma ke maike par gaye.
Sasural me Ramesh ka bahut ab-bhagat hua. Karishma ke jitney
rishtedar the un sabhi ne Ramesh aur Karishma ko khane par bulaya.
Ramesh aur Karishma ko maze hi maze the. Apne sasural par bhi
Ramesh Karishma ko rat ko do-teen dafa jaroor chodta tha aur kabhi
mauka mil gaya to din ko Karishma ko bistar par leta kar chudai chalu
kar deta tha. Ek din Ramesh pas ke kisi dukan para gaya hua tha.
Karishma kamare me baith kar paper parh rahee thee. Ekaek
Karishma ko apni maa, Rajni jee jee, ki rone ki awaz sunai diya.
Karishma bhag kar andar gayi to dekha ki Rajni jee bhagwanjee ke
photo samne khari khari ro rahee hai aur bhagwanjee se bol rahee
hai, "bhagwan tumne ye kya kiya. Tum mere pati itnee jaldee kyon
utha liyee aur agar unko utha liye to meree badan me itna garmee
kyon bhar diya. Ab mai jab jab apni larki aur damad ki chudai dekhta
hun to meri sharer me aag lag jatee hai. Ab kya karoon? Koi rashta
tumhee dikhla do, mai apni garam sharer se bahut pareshan ho gaya
hoon." Karishma samajh gayee ki kya bat hai. Wo jhat apni maa ke
pas jakar maa ko apne bahon me bhar liya aur peeche se chumte
hue boli, "maa tumko itna dukh hai to mujhse kyon nahee boli?" Rajni
jee apne aapko Karishma se churate hue boli, "mai agar tujhse bata
to tu kya kar leti? Tub hi to meri tarah se ek aurat hi hai?" "Are
mujhse se kuch nahee hota to kya tumhara damad to hai? Tumhara
damad hi tumko shant karta" Karishma apni maa ko phir se pakar kar
chhumte hue boli. "Kya boli tu, apne damad se mai apni jism ki bhukh
shant karwaungee? Tera dimag to thik hai?" Rajni jee ne apni beti
Karishma se boli. Tab Karishma apne hathon se apni maa ki
chuncheon ko pkr kar dabate hue boli, "isme kya hua? Tum jism ki
bhukh se mari ja rahi ho, aur tumhara damad tumhari jism ki bhuk ko
mita sakta hai, agar tumhare jagah mai hoti to mai apne damad ke
samne khud let jati aur usse kahtee aao mere pyare damadjee mere
pas aao aur meri jism ki bujhao." "Chal hat bari chuddakar ban rahi
hai, mujhe to eh soch kar hi sharam aa rahee hai, ki mai apni damad
ke samne nangee let kar apni tang uthaungee aur wo meri chut me
apna lund pelega" Rajni jee mur kar apni beti ki chuncheon ko
masalte he boli.Tabhi Ramesh, jo ki bahar gaya hua tha, kamare me
ghusa aur ghuste ghuste hue usne apni biwi aur sas ki baton ko sun
liya. Ramesh ne age barh kar apne sas ke samne ghutne ke balbaith
gaya aur apni sas ke chutaron ko apne hathon se gher kar pakarte
hue sas se bola, "maa aap kyon chinta kar rahee hain, mai hun na?
Mere rahte hue apko apni jism ki bhukh ki chinta nahee karnee
chahie. Are wo damad hi bekar ka hai jiske hote hue uski sas apni
jism ki bhukh se pagal ho jaye." "Nahee, Nahee, choro mujhe. Mujhe
bahut sharam lag rahee hai" Rajni jee ne apne aap ko Ramesh se
churate hue boli. Tabhi Karishma ne aage barh kar apni maa ki
chunchee ko pakar kar masalte hue Karishma apni maa se boli,
"kyon bekar ka sharam kar rahi ho maa. Man bhi jao apne damad ki
bat aur chup chap jo horaha use hone do." Tab thori der chup rahane
ke bad Rajni jee apni beti ki taraf dekh kar boli, "teekh hai, jaise tum
logo ki marzee. Lekin ek bat tum dono kan hol kar sun lo. Mai apne
damad ke samne bilkul nangee nahee ho paungee. Aage jaisa tum
log chaho." Itna sun kar Ramesh muskura kar apne sas se kah, "are
sasumaa aap ko kuch nahee karma hai. Jo kuch karma mai hi
karunga, bas aap humara sath deti jaye."Phir Ramesh uth kar khara
ho gaya aur apni sas ko apne dono bahon me jakar kar chumne laga.
Rajni jee chup chap apne aap ko apne damad ke bahon me chor kar
kharee rahee. Thori der tak apne sas ko chumne ke bad Ramesh ne
apne hathon se apne sas ki chunchee pakar kar dabane laga. Apne
chuncheon par damad ka hath parte hi Rajni jee amri such ke bilbila
uthi aur bolne lagee, "aur jor se dabao meri chunceon ko bahut din
ho gaye kisi ne is par hath nahee lagaya hai. Muzhe apne damad se
chunchee masalwane me bahut maza mil raha hai. Aur dabao. Aa
beti tub hi aa mere pas aur mere in chuncheon se khel." Ab Ramesh
phir se apne sas ke pairon ke pas baith gaya aur unki saree ke ooper
se hi unki chut ko chumne laga. Rajni jee apne chut ke oper apne
damad ke munh lagte hi bilbila uthi aur jor jor se sans lene lagee.
Ramesh bhi unki saree ke oper se hi unki chut ko chumta raha. Thori
der ke bad Rajni jee se saha nahee gaya aur khud hi apne damad se
boli, "are ab kitna tarpaoge. Tumhe chut me unglee ya jeebn ghusani
hai to theek tarike se ghusao. Saree ke oper se kya kar rahe ho?"
Apni sas ki bat sun kar Ramesh bola, "mai kya karta, aapne hi kah
tha aap saree nahee utarnge. Isiliye mai apki saree ke oper se hi
apki chut chum raha hoon." "Wo to theek hai, lekin tum meri saree
utha kar to meri chut ki chumma le sakte ho?" Rajni jee ne apne
damad se boli. Apni sas ki bat sunte hi Ramesh jaldi se apni sas ki
saree ko pairon ke pas se pakar kar oper uthana shuru kar diya aur
jaise hi saree Rajni jee ki jangho tak uth gaya to Rajni jee mare
sharam ke apna chehera apne hathon se dakh liya aur apne damad
se boli, "ab bas bhi karo, aur kitna saree uthaoge. Ab mujhe sharam
aa rahee hai. Ab tum apna sar undar dal kar meri chut ko chum lo."
kramashah.........