खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:44

खेल खिलाड़ी का पार्ट--37

गतान्क से आगे............-

प्रोफेसर दीक्षित दिव्या के बदन से उठ घुटनो पे बैठ गया.सिकुड़ने के बावजूद उसका लंड इतना बड़ा था कि आराम से उसकी महबूबा की गुलाबी चूत के अंदर पड़ा था.दिव्या ने देखा तो उसे प्रोफेसर की आँखो मे फिर वही प्यरा,चाहत & तड़प दिखी.उसने अपनी बाहे आगे कर प्रोफेसर की मज़बूत बाहें थामी & उनका सहारा ले उठ बैठी.प्रोफेसर ने अपने घुटने थोड़े फैलाए ताकि लंड चूत के अंदर ही रहे & दिव्या भी आराम से बिस्तर पे उसके सामने बैठ जाए.दिव्या ने अपने घुटने मोड़ तलवे प्रोफेसर के जिस्म के दोनो ओर बिस्तर पे जमाए & उसके चेहरे को हाथो मे भर लिया.

"क्या जादू कर दिया है तुमने मुझपे,दिव्या?",प्रोफेसोर ने उसकी दाई हथेली चूम ली,"ऐसी दीवानगी,ऐसी शिद्दत भरी चाहत तो मैने पहले कभी महसूस नही की!"

"सच,कभी नही?",दिव्या ने उसकी आँखो मे बड़ी गहरी निगाहो से देखा तो प्रोफेसर ने आँखे मूंद ली & उसकी हथेली को होंठो से सटा लिया.

"1 लड़की थी..",प्रोफेसर ने आँखे खोल दिव्या को देखा जिसे वाहा अब फिर से तड़प नज़र आई.उसने झट से अपने हाथ उसके होंठो पे रख दिए.

"ना!",दिव्या ने उसके दाए गाल को चूमा,"..बहुत दर्द हुआ था ना तुम्हे?",प्रोफेसर ने आँखे मींच ली & हा मे सर हिलाया.

"कभी भूले नही तुम वो गम बस उसके उपर हँसी-मज़ाक की चादर डाल ली.....1 लड़की से दूसरी..दूसरी से तीसरी..तुम उसी की तलाश मे घूमते रहे.है ना?",प्रोफेसर ने आँखे खोली जो हल्की सी नम थी.

"दिव्या..",उसकी आवाज़ और भारी हो गयी थी,".तुम्हे कैसे पता?"

"दिल से दिल को राह होती है,अजिंक्या.",उसने अपना बाया हाथ उसके दिल पे & उसका दाया हाथ अपने सीने पे रखा,"..मैं वो लड़की नही लेकिन अगर मेरे साथ से तुम्हारा गम दूर होता है,तुम्हे खुशी मिलती है तो मैं तुम्हारी तुम्हारी बाहो मे पड़ी रहूंगी."

"ओह..दिव्या!",प्रोफेसर ने उसे बाहो मे भरा तो दिव्या ने भी अपनी बाहे उसके गले मे डाल दी,"..लेकिन तुम तो अभी जवान हो..सारी उम्र पड़ी है तुम्हारे सामने..फिर मैं किसी को बंधन मे बाँधने मे विश्वास नही करता."

"प्रोफेसर अजिंक्या दीक्षित..",दिव्या ने प्यार से उसके दोनो कान खींचे,"..जैसे तुम हो वैसी ही मैं भी हू.तुम्हारे साथ मुझे सबसे ज़्यादा अच्छा लगता है & तुमने भी इसी बात का इकरार किया है लेकिन अगर तुम किसी और से भी मिलो तो मुझे ऐतराज़ नही.मान लो,मैं कहु की तुम सिर्फ़ मेरे होके रहो & कल को तुम्हे कोई लड़की मुझसे भी ज़्यादा अच्छी लगे तो तुम क्या करोगे?..मुझसे च्छुपके उस से मिलोगे & फिर क्या होगा..मुझे पता चलेगा..हम झगदेंगे..अलग होंगे & 1 नया दर्द पाल लेंगे.",प्रोफेसर अचरज से उसे देख रहा था.

"..इस से अच्छा है कि हम दोनो 1 दूसरे को आज़ाद रखें.हम साथ खुश है ना?",प्रोफेसर ने हां मे सर हिलाया,"..तो फिर इस खुशी को खुद से डोर क्यू करें?वैसे भी हम दोनो जानते हैं कि हम औरो के साथ भी वक़्त गुज़ार ले फिर भी जो नशा,जो मादहोशी हमे 1 दूसरे की बाँहो मे महसूस होते हैं वो कही और नही हो सकते....ये खूबसूरत जिस्म..",दिव्या ने उसके चौड़े कंधो पे उंगलिया फिराई,"..मुझे भी बहुत पसंद है..& इस जिस्म के मालिक की शख्सियत की तो मैं दीवानी हो गयी हू."

"दिव्या मेरी जान..!",प्रोफेसर ने अपने होंठ अपनी महबुआ के होंठो से सटा दिया तो उसने भी उसे बाहो मे और कस लिया.दोनो के नाज़ुक अंग 1 बार फिर जाग उठे थे & दोनो फिर से मस्ताने सफ़र पे निकल पड़े थे.

जब प्रोफेसर दीक्षित & दिव्या शाम को 8 बजे क्लब नीयान मे दाखिल हो रहे थे ठीक उसी वक़्त डेवाले ईस्ट से लोक विकास पार्टी का उमीड़वार रघु कुम्भात उर्फ बाबा बलदेव काबरा उर्फ भाय्या जी के साथ चुनाव प्रचार कर रहा था.1 ट्रक के उपर दोनो खड़े थे जोकि बहुत भीड़ भरे इलाक़े से गुज़र रहा था.लोग बाबा के नाम के नारे लगा रहे थे.

हर गुंडे की तरह बाबा को भी जैल & मौत का ख़ौफ़ था.जैल की सैर तो उसने कयि बार की थी मगर नेताओ & अफसरो से नज़दीकियो ने अब उसे इस परेशानी से थोड़ा सुकून दिलाया था मगर मौत का ख़ौफ़ तो बरकरार था.उसके दुश्मन अगर हमला कर देते तो क्या होता?इसी कारण उसने अपनी हवेली के आसपास के काफ़ी बड़े इलाक़े के लोगो की मदद करना शुरू किया.उस इलाक़े मे परेशानी होने पे सभी बाबा का दरवाज़ा ही खखटाते थे & अंजाने मे उसकी चौकीदारी का काम करते थे.

ये लोग रघु के चुनाव मे खड़े होने से बहुत खुश थे & सभी जानते थे कि यहा से लोक विकास की जीत पक्की है.भाय्या जी को कयि सवालो का सामना करना पड़ा था,जहा भी कोई पत्रकार मिलता उनसे इसी बारे मे पुछ्ता कि 1 गुंडे को उन्होने चुनाव का टिकेट क्यू दिया मगर भाय्या जी हर सवाल से कन्नी काट जाते.

ट्रक धीरे-2 लोगो की भीड़ चीरता आगे बढ़ रहा था,"रंजीता नही आई?",भाय्या जी हाथ जोड़े लोगो को देख मुस्कुरा रहे थे.

"मैने ही उसे नही आने को बोला फिर लोग उस से सवाल करेंगे तो वो गरम खोपड़ी कही किसी का भेजा ना उड़ा दे!",दोनो हँसने लगे.

"रघु,काम कब हो रहा है?"

"20 तारीख की शाम को.बेफ़िक्र रहो,सब ठीक से होगा."

"हूँ.",ट्रक वैसे ही आगे बढ़ता रहा.

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ऐसा ही कुच्छ नज़ारा बद्डल की गलियो मे भी था जहा मुकुल अपने चुनाव के लिए प्रचार कर रहा था.सवेरे से ही वो आज इलाक़े के दौरे पे था,दिन मे तो नीना उसके साथ थी & महेश अरोरा भी मगर इस वक़्त नीना थकान का बहाना कर वाहा के उनके मकान मे रुक गयी थी.ये मकान मुकुल ने फॅक्टरी बनाते वक़्त ही खरीदा था ताकि कभी ज़रूरत पड़े तो रुकने का 1 ठिकाना हो.महेश भी कही नज़र नही आ रहा था.

"ऊहह..जल्दी से करो..कही वो आ ना जाए.....आहह..जुंगली!",नीना सारी कमर तक उठाए 1 शेल्फ पे बैठी थी & महेश उसकी टाँगो के बीच खड़ा उसकी चूत मे लंड घुसा के धक्के लगा रहा था.नीना की बात सुन उसने उसके खुले ब्लाउस & उपर किए ब्रा मे से निकली चूचियो पे सजे शहद के रंग के बाए निपल को काट लिया था.

"उस काम का क्या हुआ?",नीना उसकी कमर थामे उसकी चुदाई झेल रही थी.

"1 आदमी मिल गया है जोकि काम कर देगा.",महेश अब उसके निपल पे जीभ फिरा रहा था.

"कौन है वो?",नीना उसकी नंगी गंद को ज़ोरो से दबा रही थी.

"हीरा..मेरी फॅक्टरी मे काम करता है.भरोसे का आदमी है.आज ड्राइवर बीमार पड़ गया तो मुकुल की कार वही तो चला रहा था."

"हूँ..",नीना ने उसके सर को अपने सीने पे दबाया & उसकी चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी.

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"तुम्हारी & अंजलि प्रधान की दोस्ती कहा तक पहुँची?",राम्या बिस्तर पे अपने घुटनो & हाथो पे थी & भाय्या जी पीछे से अपने घुटनो पे खड़े हो उसकी चूत मे अपना लंड घुसा रहे थे.

"उउम्म्म्मम.....बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी है.लोग बाते कर रहे हैं कि आख़िर ऐसा मुमकिन कैसे हुआ.....ऊव्वववव.....1 दूसरे के घर आना-जाना भी शुरू हो गया है हमारा...आईयइईई...हाआंन्‍णणन्.....!",राम्या अपने दाए हाथ को नीचे ले जाके अपने दाने को रगड़ते हुए अपने नेता से चुद रही थी.

"बहुत बढ़िया काम किया है तुमने..तड़क....!",भाय्या जी ने दाए हाथ से उसकी गंद की गोरी,दाई फाँक पे ज़ोर का थप्पड़ लगाया.

"ओईई...हाईईइ...तड़प...तड़प...तडप्प....तडप्प्प्प....!",राम्या की आहें भाय्या जी की चुदाई & उनके थप्पड़ सब तेज़ होते जा रहे थे.

"ध्यान रहे कि कुच्छ भी हो जाए आने वाली 20 तारीख को तुम उस से नही मिलॉगी.",भाय्या जी उसकी लाल हो चुकी गंद को मसल रहे थे.

"क्यू?....आआहह..!",राम्या की उंगली बहुत तेज़ी से उसके दाने को रगड़ रही थी.

"जैसा कह रहा हू वैसा करो..समझी...!",भाय्या जी आगे झुके & उसके दाए कान को काट लिया,"..अब ये बताओ कि इस वक़्त तुम्हारा पति क्या कर रहा होगा?",वो उसके उपर झुके उसके कान मे जीभ चलाते हुए उसे चोद रहे थे.

"अपना पिल्लू जैसा लंड पकड़ के मेरी याद मे बैठा होगा!",राम्या के जवाब ने उन्हे खुश कर दिया & दोनो अपनी-2 हवस मे और डूब गये.

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"मुकुल,मुझे अब वापस डेवाले जाना है.",मुकुल वापस आ गया था & महेश & कुच्छ और लोगो के साथ खाना खा रहा था.

"नीना,ड्राइवर आज आया नही & मुझे तो रात को रुकना है & महेश को भी वरना ये तुम्हे छ्चोड़ आते."

"तो आज गाड़ी कौन चला रहा था?",जवाब मे मुकुल ने महेश की ओर देखा.

"मेरा आदमी है,भाभी."

"तो उसे ही कह दीजिए,प्लीज़ की मुझे घर छ्चोड़ दे क्यूकी श्लोक को मैं नौकरो के भरोसे पे रात को नही छोड़ सकती."

"लेकिन..",महेश थोड़ा हिचकिचाया.

"प्लीज़."

"ओके..हीरा!",महेश ने उसे आवाज़ दी.

थोड़ी ही देर बाद गाड़ी डेवाले की ओर भागी जा रही थी.

"तुम्हारा नाम हीरा है ना?",नीना ने पीछे की सीट से पुचछा.

"जी."

"तुम्हे महेश जी ने 1 बहुत ज़रूरी काम सौंपा है ना.",हीरा के पाँव ब्रेक पे लग गये & नीना आगे की सीट से टकराते-2 बची.

"क्या हुआ?चौंक क्यू गये?",हीरा पीछे देख रहा था,"..दरअसल इस काम मे जितना फयडा महेश का है उतना ही मेरा भी है & तुम्हारा भी हो सकता है.महेश तो तुम्हे पैसे दे ही रहा है मैं भी दूँगी,तुम्हे बस इतना करना होगा कि कुच्छ भी होने के बाद सबसे पहले मुझे बताओगे & करने के पहले मुझसे पुछोगे लेकिन इसकी भनक महेश को नही लगना चाहिए."

"इस बात की का गारंटी है कि आप अपनी कही बात से नही मुकरेंगी?"

"इस बात की क्या गॅरेंटी है कि महेश काम होने के बाद तुम्हे रास्ते से नही हटाएगा?",हीरा खामोश हो गया & थोड़ा परेशान दिखने लगा.

"देखो,मेरे साथ रहोगे तो फ़ायदे मे रहोगे क्यूकी मुझे भी महेश के राज़ पता हैं & वो मुझे नुकसान नही पहुँचा सकता फिर अगर उसने तुम्हे रास्ते से हटाने की कोशिश कि तो मैं तुम्हे आगाह कर दूँगी."

"मेमसाहब,मुझपे ऐसी मेहेरबानी क्यू?"

"क्यूकी मुझे भी महेश पे पूरा भरोसा नही."

"& मुझपे है?",हीरा हंसा.

"हां,क्यूकी तुम्हे बस पैसो से मतलब है & वो मैं तुम्हे दूँगी."

"मुझे पैसो के अलावा कुच्छ और भी चाहिए.",उसने नीना के सीने की ओर देखा.नीना को गुस्सा तो बहुत आया मगर और कोई चारा नही था,बहुत ज़रूरी था कि हीरा उसकी मुट्ठी मे रहे.

"क्या?",उसने अंजान बनते हुए पुचछा.

"इतनी भी भोली मत बानिए.आप अच्छी तरह से मेरा मतलब समझ रही हैं."

"नही,मैं नई समझ रही."

"ठीक है.मैं आपके साथ काम करूँगा मगर मुझे पैसो के साथ आपका बदन भी चाहिए."

"पागल मत बनो."

"ठीक है.तो काम भूल जाइए.",उसने कार दोबारा स्टार्ट की & आगे बढ़ा दी.पूरे रास्ते दोनो खामोश रहे.फ़ौरन बात मान लेना हीरा को शक़ मे डाल सकता था.नीना जान बुझ के वक़्त लगा रही थी ताकि उसे पूरा यकीन हो जाए कि वो पशोपेश मे पड़ी है & समझ नही पा रही कि क्या करे.

कार उसके घर पहुँच चुकी थी.नीना कार से उतरी & बिना हीरा की ओर देखे आगे बढ़ गयी फिर रुकी & बिना मुड़े बोली,"तुम आज रात यही रुक जाओ.",& तेज़ी से घर मे दाखिल हो गयी.उसे बुरा तो लग रहा था..1 इंसान जिसकी औकात नही थी कि वो उसके पाँव की धूल भी च्छुए,वो

उसके जिस्म से खेलेगा लेकिन हालात ही कुच्छ ऐसे थे कि उसे ये करना पड़ रहा था.

हीरा गाड़ी मे ही सो गया था & नीना अपने कमरे मे श्लोक के साथ.उसने तय कर लिया था कि उसे इस इंसान से कैसे निबटना है,वो उसे अपना जिस्म सौंपेगी लेकिन कुच्छ इस तरह से कि वो उसका दीवाना हो जाए.रात के 12.30 बजे जब श्लोक गहरी नींद मे था तो नीना दबे पाँव उठी & नीचे आई.उसने घर का दरवाज़ा खोला तो थोड़ी देर बाद हीरा कार से उतर के उसके सामने खड़ा था.वो जागता हुआ उसकी राह देख रहा था.

उसके अंदर आने पे नीना ने दरवाज़ा बंद किया & निचली मंज़िल के 1 कमरे मे आ गयी.उसके पीछे-2 हीरा भी अंदर आ गया & दरवाज़ा बंद कर दिया.कुच्छ पल दोनो यू ही खामोश रहे.नीना हीरा की ओर पीठ किए खड़ी थी,वो चाहती थी कि उसे पूरा यकीन हो जाए कि वो इस वक़्त मजबूरी मे उसका साथ दे रही है.

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--37

gataank se aage............-

Professor Dixit divya ke badan se uth ghutno pe baith gaya.sikudne ke bavjood uska lund itna bada tha ki aaram se uski mehbuba ki gulabi chut ke andar pada tha.divya ne dekha to use professor ki aankho me fir vahi pyra,chahat & tadap dikhi.usne apni baahe aage kar professor ki mazbut baahen thami & unka sahara le uth baithi.professor ne apne ghutne thode failaye taki lund chut ke andar hi rahe & divya bhi aaram se bistar pe uske samne baith jaye.divya ne apne ghutne mod talve professor ke jism ke dono or bistar pe jamaye & uske chehre ko hatho me bhar liya.

"kya jadu kar diya hai tumne mujhpe,divya?",profesor ne uski dayi hatheli chum li,"aisi deewangi,aisi shiddat bhari chahat to maine pehle kabhi mehsus nahi ki!"

"sach,kabhi nahi?",divya ne uski aankho me badi gehri nigaho se dekha to professor ne aankhe mund li & uski hatheli ko hotho se sata liya.

"1 ladki thi..",professor ne aankhe khol divya ko dekha jise vaha ab fir se tadap nazar aayi.usne jhats e apne hath uske hotho pe rakh diye.

"na!",divya ne uske daye gaal ko chuma,"..bahut dard hua tha na tumhe?",professor ne ankhe meench li & haa me sar hilaya.

"kabhi bhule nahi tum vo ghum bas uske upar hansi-mazak ki chadar daal li.....1 ladki se dusri..dusri se teesri..tum usi ki talash me ghumte rahe.hai na?",professor ne ankhe kholi jo halki si nam thi.

"divya..",uski aavaz aur bhari ho gayi thi,".tumhe kaise pata?"

"dil se dil ko raah hoti hai,Ajinkya.",usne apna baya hath uske dil pe & uska daya hath apne seene pe rakha,"..main vo ladki nahi lekin agar mere sath se tumhara ghum door hota hai,tumhe khushi milti hai to main taumra tumhari baaho me padi rahungi."

"oh..divya!",professor ne use baho me bhara to divya ne bhi apni baahe uske gale me daal di,"..lekin tum to abhi jawan ho..sari umra padi hai tumhare samne..fir main kisi ko bandhan me baandhne me vishwas nahi karta."

"professor ajinkya dixit..",divya ne pyar se uske dono kaan khinche,"..jaise tum ho vaisi hi main bhi hu.tumhare sath mujhe sabse zyada achha lagta hai & tumne bhi isi bat ka ikrar kiya hai lekin agar tum kisi aur se bhi milo to mujhe aitraz nahi.maan lo,main kahu ki tum sirf mere hoke raho & kal ko tumhe koi ladki mujhse bhi zyada achhi lage to tum kya karoge?..mujhse chhupke us se miloge & fir kya hoga..mujhe pata chalega..hum jhagdenge..alag honge & 1 naya dard paal lenge.",professor achraj se use dekh raha tha.

"..is se achha hai ki hum dono 1 dusre ko azad rakhen.hum sath khush hai na?",professor ne haan me sar hilaya,"..to fir is khushi ko khud se door kyu karen?vaise bhi hum dono jante hain ki hum auro ke sath bhi waqt guzar le fir bhi jo nasha,jo maadhoshi hume 1 dusre ki baho me mehsus hote hain vo kahi aur nahi ho sakte....ye khubsurat jism..",divya ne uske chuade kandho pe ungliya firayi,"..mujhe bhi bahut pasand hai..& is jism ke malik ki shakhsiyat ki to main deewani ho gayi hu."

"divya meri jaan..!",professor ne apne honth apni mehbua ke hotho se sata diya to usne bhi use baho me aur kas liya.dono ke nazuk ang 1 bar fir jaag uthe the & dono fir se mastane safar pe nikal pade the.

Jab Professor Dixit & Divya sham ko 8 baje Club Neon me dakhil ho rahe the thik usi waqt Devalay East se Lok Vikas Party ka umeedvar Raghu Kumbhat urf Baba Baldev Kabra urf Bhaiyya ji ke sath chunav prachar kar raha tha.1 truck ke upar dono khade the joki bahut bheed bhare ilake se guzar raha tha.log baba ke naam ke nare laga rahe the.

har gunde ki tarah baba ko bhi jail & maut ka khauf tha.jail ki sair to usne kayi baar ki thi magar netao & afsaro se nazdikiyo ne ab use is pareshani se thoda sukun dilaya tha magar maut ka khauf to barkarar tha.uske dushman agar humla kar dete to kya hota?isi karan usne apni haweli ke aaspaas ke kafi bade ilake ke logo ki madad karna shuru kiya.us ilake me pareshani hone pe sabhi baba ka darwaza hi khakhatate the & anjane me uski chaukidari ka kaam karte the.

ye log raghu ke chunav me kahde hone se bahut khush the & sabhi jante the ki yaha se lok vikas ki jeet pakki hai.bhaiyya ji ko kayi sawalo ka samna karna pada tha,jaha bhi koi patrakar milta unse isi baare me puchhta ki 1 gunde ko unhone chunav ka ticket kyu diya magar bhaiyya ji har sawal se kanni kaat jate.

truck dhire-2 logo ki bheed cheerta aage badh raha tha,"Ranjita nahi aayi?",bhaiyya ji hath jode logo ko dekh muskura rahe the.

"maine hi use nahi aane ko bola fir log us se sawal karenge to vo garam khopdi kahi kisi ka bheja na uda de!",dono hansne lage.

"raghu,kaam kab ho raha hai?"

"20 tarikh ki sham ko.befikr raho,sab thik se hoga."

"hun.",truck vaise hi aage badhta raha.

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aisa hi kuchh nazara Baddal ki galiyo me bhi tha jaha Mukul apne chunav ke liye prachar kar raha tha.savere se hi vo aaj ilake ke daure pe tha,din me to nina uske sath thi & Mahesh Arora bhi magar is waqt nina thakan ka bahana kar vaha ke unke makan me ruk gayi thi.ye maka mukul ne factory banate waqt hi kharida tha taki kabhi zarurat pade to rukne ka 1 thikana ho.mahesh bhi kahi nazar nahi aa raha tha.

"oohhhhh..jaldi se karo..kahi vo aa na jaye.....aahhhhh..jungli!",nina sari kamar tak uthaye 1 shelf pe baithi thi & mahesh uski tango ke beech khada uski chut me lund ghusa ke dhakke laga raha tha.nina ki baat sun usne uske khule blouse & upar kiye bra me se nikli chhatiyo pe saje shehad ke rang ke baye nipple ko kaat liya tha.

"us kaam ka kya hua?",nina uski kamar thame uski chudai jhel rahi thi.

"1 aadmi mil gaya hai joki kaam kar dega.",mahesh ab uske nipple pe jibh fira raha tha.

"kaun hai vo?",nina uski nangi gand ko zoro se daba rahi thi.

"Hira..meri factory me kaam karta hai.bharose ka aadmi hai.aaj driver bimar pad gaya to mukul ki car vahi to chala raha tha."

"hun..",nina ne uske sar ko apne seene pe dabaya & uski chudai ka lutf uthane lagi.

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"tumhari & Anjali pradhan ki dosti kaha tak pahunchi?",Ramya bistar pe apne ghutno & hatho pe thi & bhaiyya ji peechhe se apne ghutno pe kahde ho uski chut me apna lund ghusa rahe the.

"uummmmm.....bahut achhi dosti ho gayi hai.log baate kar rahe hain ki aakhir aisa mumkin kaise hua.....ooww....1 dusre ke ghar aana-jana bhi shuru ho gaya hai humara...aaiyyeeeeee...haaannnnn.....!",ramya apne daye hath ko neeche le jake apne dane ko ragadte hue apne neta se chud rahi thi.

"bahut badhiya kaam kiya hai tumne..tadak....!",bhaiyya ji ne daye hath se uski gand ki gori,dayi fank pe zor ka thappad lagaya.

"ouiiiii...haiiii...tadap...tadap...tadapp....tadapppp....!",ramya ki aahen bhaiyya ji ki chudai & unke thappad sab tez hote ja rahe the.

"dhyan rahe ki kuchh bhi ho jae aane wali 20 tarikh ko tum us se nahi milogi.",bhaiyya ji uski laal ho chuki gand ko masal rahe the.

"kyu?....aaaahhhhhhh..!",ramya ki ungli bahut tezi se uske dane ko ragad rahi thi.

"jaisa keh raha hu vaisa karo..samjhi...!",bhaiyya ji aage jhuke & uske daye kaan ko kaat liya,"..ab ye batao ki is waqt tumhara pati kya kar raha hoga?",vo uske upar jhuke uske kaan me jibh chalate hue use chod rahe the.

"apna pillu jaisa lund pakad ke meri yaad me baitha hoga!",ramya ke jawab ne unhe khush kar diya & dono apni-2 hawas me aur doob gaye.

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"mukul,mujhe ab vapas devalay jana hai.",mukul vapas aa gaya tha & mahesh & kuchh aur logo ke sath khana kha raha tha.

"nina,driver aaj aya nahi & mujhe to raat ko rukna hai & mahesh ko bhi varna ye tumhe chhod aate."

"to aaj gadi kaun chala raha tha?",jawab me mukul ne mahesh ki or dekha.

"mera aadmi hai,bhabhi."

"to use hi keh dijiye,please ki mujhe ghar chhod de kyuki Shlok ko main naukro ke bharose pe raat ko nahi chod sakti."

"lekin..",mahesh thoda hichkichaya.

"please."

"ok..hira!",mahesh ne use aavaz di.

thodi hi der baad gadi devalay ki or bhagi ja rahi thi.

"tumhara naam hira hai na?",nina ne peechhe ki seat se puchha.

"ji."

"tumhe mahesh ji ne 1 bahut zaruri kaa saunpa hai na.",hira ke panv brake pe lag gaye & nina aage ki seat se takrate-2 bachi.

"kya hua?chaunk kyu gaye?",hira peechhe dekh raha tha,"..darasal is kaam me jitna fayda mahesh ka hai utna hi mera bhi hai & tumhara bhi ho sakta hai.mahesh to tumhe paise de hi raha hai main bhi dungi,tumhe bas itna karna hoga ki kuchh bhi hone ke baad sabse pehle mujhe bataoge & karne ke pehle mujhse puchhoge lekin iski bhanak mahesh ko nahi lagna chahiye."

"is baat ki ka guararntee hai ki aap apni kahi baat se nahi mukrengi?"

"is baat ki kya guarantee hai ki mahesh kaam hone ke baad tumhe raste se nahi hatayega?",hira khamosh ho gaya & uthoda pareshan dikhne laga.

"dekho,mere sath rahoge to fayde me rahoge kyuki mujhe bhi mahesh ke raaz pata hain & vo mujhe nuksan nahi pahuncha sakta fir agar usne tumhe raste se hatane ki koshish ki to main tumhe aagah kar dungi."

"memsahab,mujhpe aisi meherbani kyu?"

"kyuki mujhe bhi mahesh pe pura bharosa nahi."

"& mujhpe hai?",hira hansa.

"haan,kyuki tumhe bas paiso se matlab hai & vo main tumhe dungi."

"mujhe paiso ke alawa kuchh aur bhi chahiye.",usne nina ke seene ki or dekha.nina ko gussa to bahut aaya magar aur koi chara nahi tha,bahut zaruri tha ki hira uski mutthi me rahe.

"kya?",usne anjan bante hue puchha.

"itni bhi bholi mat baniye.aap achhi tarah se mera matlab samajh rahi hain."

"nahi,main nai samajh rahi."

"thik hai.main aapke sath kaam karunga magar mujhe paiso ke sath aapka badan bhi chahiye."

"pagal mat bano."

"thik hai.to kaam bhil jaiye.",usne car dobara start ki & aage badha di.pure raste dono khamosh rahe.fauran baat maan lena hira ko shaq me daal sakta tha.nina jaan bujh ke waqt laga rahi thi taki use pura yakin ho jaye ki vo pashopesh me padi hai & samajh nahi pa rahi ki kya kare.

car uske ghar pahunch chuki thi.nina car se utri & bina hira ki or dekhe aage badh gayi fir ruki & bina mude boli,"tum aaj raat yahi ruk jao.",& tezi se ghar me dakhil ho gayi.use bura to lag raha tha..1 insan jiski aukat nahi thi ki vo uske panv ki dhul bhi chhue,vo

uske jism se khelega lekin halaat hi kuchh aise the ki use ye karna pad raha tha.

hira gadi me hi so gaya tha & nina apne kamre me shlok ke sath.usne tay kar liya tha ki use is insan se kaise nibatna hai,vo use apna jism saunpegi lekin kuchh is tarah se ki vo uska deewana ho jaye.raat ke 12.30 baje jab shlok gehri nind me tha to nina dabe panv uthi & neeche aayi.usne ghar ka darwaza khola to thodi der baad hira car se utar ke uske samne khada tha.vo jaagta hua uski raah dekh raha tha.

uske andar aane pe nina ne darwaza band kiya & nechli manzil ke 1 kamre me aa gayi.uske peechhe-2 hira bhi andar aa gaya & darwaza band kar diya.kuchh pal dono yu hi khamosh rahe.nina hira ki or pith kiye khadi thi,vo chahti thi ki use pura yakin ho jaye ki vo is waqt majoboori me uska sath de rahi hai.

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:46

खेल खिलाड़ी का पार्ट--38

गेंक से आगे............-

दरअसल थोड़ी देर पहले महेश ने चुदाई ख़त्म होने के बाद 1 बात कही थी जिसके चलते वो इस गलिज़ इंसान को अपना जिस्म सौंपने को मजबूर हो गयी थी.जब नीना ने पुछा कि काम हो जाने के बाद अगर हीरा ने उन्हे ब्लॅकमेल करने की कोशिश की तो वो क्या करेगा तो महेश ने बिना हिचके कहा कि वो पहले ही सोच चुका है कि काम ख़त्म होने के साथ-2 हीरा भी ख़त्म हो जाएगा.नीना ने पहली बार महेश का ये ख़तरनाक पहलू देखा था & तभी उसके दिमाग़ मे ये ख़याल आया कि महेश ऐसा उसके साथ भी तो कर सकता है....आख़िर महेश उसकी मदद क्यू कर रहा था?..उसने कयि बार उस से पुचछा था मगर हर बार उसका जवाब यही होता था कि वो मुकुल के ज़रिए बद्डल से और पैसा कमाना चाहता था लेकिन अब नीना को यकीन हो गया था कि बात कुच्छ और ही थी.

"हुन्ह..!",हीरा ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया & उसके दाए गाल & गर्दन को चूमने लगा तो नीना कसमसाने लगी.हीरा की बाहे काफ़ी मज़बूत थी & उसे नीना के रूखे रवैयययए की कोई परवाह नही थी.उसे भी अपनी किस्मत पे यकीन नही हो रहा था की ऐसी ऊँचे दर्जे वाली खूबसूरत औरत उसकी बाहो मे है!

नीना को अपनी पीठ के निचले हिस्से पे उसका खड़ा लंड महसूस हुआ तो वो उसकी बाहो से छूटने को तड़प उठी.हीरा ने उसे घुमा के उसका चेहरा अपनी ओर किया & उसके होंठो को चूमने की कोशिश करने लगा.नीना मुँह घुमा के उसकी कोशिश नाकाम कर रही थी & हीरा के होंठ कभी उसके गालो से तो कभी गले से टकरा जाते.बेसबरा हीरा थोड़ा आगे बढ़ा तो वो लड़खड़ा गयी & उसके साथ हीरा भी & दोनो पीछे बिस्तर पे गिर पड़े.

ये बात हीरा के लिए और अच्छी हो गयी,अब नीना उसके जिस्म के नीचे दबी थी & वो उसके उपर चढ़ा उसे चूम रहा था.1 बार फिर हीरा उसके गुलाबी लबो को चूमने लगा तो नीना ने दाई तरफ चेहरा घुमा दिया.उसने अपनी नाक उसके गाल पे लगा नीना के चेहरे को सीधा कर फिर चूमने की कोशिश की तो नीना ने इस बार चेहरा बाई तरफ कर लिया.

"देखो,मेडम..",हीरा ने दाया हाथ उसकी कमर के नीचे से निकाला & उसका चेहरा पकड़ के सीधा किया,"..ढंग से चुदोगि तो ना अभी तकलीफ़ होगी ना बाद मे वरना मैने ये बात कही बाहर बोल दी तो..-"

"-..तो क्या?!",नीना ने उसकी बात बीच मे काटी,"..तुम क्या मैं ही अभी बाहर जाके चिल्ला-2 के बोलूँगी कि तुमने मेरे साथ ज़बरदस्ती की है फिर क्या होगा?",हीरा की भावे सिकुड गयी,"..तुम बोलॉगी की मैने तुम्हे ना नही किया था लेकिन 1 बात बताओ लोग मेरी बात का यकीन करेंगे या तुम्हारी जो पहले भी हवालात की सैर कर चुका है?..1 बात कान खोल के सुन लो हीरा ये मेरी मजबूरी है..महेश से हम दोनो को ख़तरा है इसलिए मैं इस वक़्त तुम्हारे साथ हू."

"देखो,मेम्साब..",हीरा ने उसका चेहरा छ्चोड़ उसके बालो की लट को जो माथे पे गिर आई थी,हटाया,"..मेरे लिए भी ये 1 सौदा है.तुम्हे महेश पे नज़र रखनी है & मुझे भी उस से होशियार रहना है.अब हम दोनो उसके बारे मे 1 दूसरे को बताएँगे लेकिन फीस तो लगेगी ना!तो ये फीस मुझे ठीक से चाहिए & मैं यकीन दिलाता हू कि आगे से तुम जैसा कहोगी वही करूँगा.बोलो?",हीरा उसके गुलाबी होंठो पे अपना दाया अंगूठा चला रहा था.

नीना को उसकी बातो मे हवाबाजी नही लगी,उसे लगा कि वो जो कह रहा है वो करेगा,"..मैं कैसे यकीन करू तुम्हारा?"

"ठीक है..",उसका अंगूठा वैसे ही उन नर्म होंठो पे घूम रहा था,"..सुनो,20 तारीख की शाम को काम होने के बाद मैं जहा रहूँगा वाहा का पता है ये & उसके बाद मुझे महेश ने..",हीरा बोल रहा था & नीना सुन रही थी..ये सब तो तय नही हुआ था..यानी महेश का अपना भी कोई मक़सद था & वो किसी बिज़्नेसमॅन का मक़सद नही था.

हीरा ने अंगूठा हटाया & नीना के होंठो से अपने होंठ लगा दिए,इस बार नीना ने उसे रोका नही.कुच्छ देर तक वो उसके होंठो को चूमता रहा मगर जैसे ही उसने अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे डालने की कोशिश की तो नीना ने उसके सीने पे हाथ रख अपने होंठ अलग किए,"महेश काम शुरू होने पे तुमसे कैसे कॉंटॅक्ट करेगा?"

"ना फोन से,ना मिल के.",हीरा ने उसकी नाइटी उसके बाए कंधे से नीचे कर वाहा पे चूमा & फिर उसकी गर्दन मे मुँह घुसा दिया,"..हर रोज़ वो वाहा आएगा जहा मैं च्छूपा रहूँगा & आगे के बारे मे बताएगा.वैसे भी मुझे बस वाहा च्छूपे रहना है,बाकी काम तो महेश खुद करेगा.",उसने दूसरे कंधे पे भी वही हरकत दोहराई & फिर वापस अपने होंठ नीना के होंठो से लगा दिए.

महेश ने उसे इस बारे मे कुच्छ नही बताया था,उसने तो कहा था कि सब कुच्छ उसका आदमी यानी कि हीरा संभालेगा..उसने झूठ क्यू बोला था?..हीरा का दाया हाथ उसकी नाइटी को नीचे से उठा उसकी मखमली बाई जाँघ पे चल रहा था.उसके मज़बूत जिस्म के नीचे दबी नीना के जिस्म मे भी अब हुलचूल होने लगी थी लेकिन उसका ज़हन खुद को उस इंसान से मज़ा लेने को तैय्यार नही कर पा रहा था.हीरा ने अपनी दाई टांग को नीना की टाँगो के बीच कर उन्हे थोड़ा फैलाया & उसकी चूत के बगल मे लंड को रगड़ते हुए उसे चूमने लगा.इस बार उसने अपनी जीभ नीना के मुँह मे दाखिल करा ही दी & उसकी जीभ से लड़ा दी.नीना को ये हरकत अच्छी नही लगी मगर उसका जिस्म गर्म होने लगा था.

"आहह....छ्चोड़ो..प्लीज़...नही!",हीरा ने जी भर के उसे चूमा & किस के अंत तक नीना की चूत ने भी रिसना शुरू कर दिया.वो उठा & उसकी टाँगो को 1 साथ हवा मे उठा लिया & उसकी गोरी जाँघो को पागलो की तरह चूमने लगा.नीना का जिस्म उसके आतुर होंठो के नीचे बावला हो रहा था & वो आँखे बंद कर कसमसाने लगी थी.हीरा के होंठ तो उसकी टाँगो से चिपक के रह गये थे.वो घुटनो पे खड़ा हो गया था & उसकी टाँगो को सीधा कर उसके अपीरो को अपने चेहरे से साटा उन्हे चूम रहा था & उसके हाथ उसकी चूत के ठीक नीचे उसकी जाँघो के बीच घुस उन्हे सहला रहे थे.नीना अब ज़ोरो से आहे भर रही थी.दिमाग़ का कोई कोना अभी भी हीरा के लिए घिन से भरा था लेकिन जिस्म अब पूरी तरह से उस से मिलने को तड़प रहा था.

"आआन्न्‍नणणनह.....आआहह....!",सफेद पॅंटी के अंदर ज्यो ही हीरा का बाया हाथ घुसा & उसकी गीली चूत को हल्के से कुरेदा,नीना झाड़ गयी.उसने अपना बदन बाई तरफ घूमाते हुए अपना चेहरा 1 तकिया खींच उसमे च्छूपा लिया & सुबकने लगी.हीरा मुस्कुरा रहा था.उसने कयि औरतो को चोदा था,कुच्छ शरीफ,कुच्छ बाज़ारु,कुच्छ को उनकी मर्ज़ी से,कुच्छ को ज़बरदस्ती लेकिन आज पहली बार उसे खुद के मर्द होने का एहसास हुआ था.1 औरत जो उसकी पहुँच से दूर थी,उस जैसी औरतो के बारे मे वो केवल सपने देख सकता था,आज उसके हाथ से झाड़ रही थी.

उसने नीना की टाँगो को नीचे रखा & तकिये को हटा उसके चेहरे को चूमने लगा..ये औरत अगर उसे जान भी देने को कहेगी तो वो दे देगा..अफ....ऐसा रेशम सा जिस्म..इतना मुलायम & चेहरा इतना सुंदर!उसने नीना को बाहो मे भर लिया & उसकी पीठ सहलाने लगा.उसे खुद के ऐसे कोमल बर्ताव पे हैरत हुई & नीना को भी ये उमीद नही थी.झड़ने के बाद औरत अपने साथी से बस दुलार चाहती है वासना नही & हीरा की हरकत ने उसके ज़हन की बची हुई उलझन को भी दूर कर दिया.अब वो सिर्फ़ 1 औरत थी,समाज के ऊँचे दर्जे की इज़्ज़तदार औरत नही & वो सिर्फ़ 1 मर्द था,किसी छ्होटी सी फॅक्टरी मे काम करने वाला मामूली मज़दूर नही.

हीरा ने उसकी नाइटी को ढीला कर उसके गले को नीचे किया & नीना के क्लीवेज को चूमने लगा.नीना आँखे बंद किए हुए पड़ी थी.हीरा उसे चूमते हुसे उसके कपड़े उतार रहा था.हर कपड़ा उतरने के बाद वो थोड़ी देर तक उसके जिस्म को निहारता & फिर चूमता.नीना की चूत देख के तो वो बिल्कुल ही भौंचक्का रह गया & घुटनो पे बैठ उसपे बहुत हल्के-2 हाथ फिराने लगा मानो यकीन करना चाहता हो कि उसके सामने लेटी औरत कोई धोखा नही थी.उसने ऐसी गोरी,गुलाबी,बिना बालो की चिकनी चूत सिर्फ़ नंगी किताबो मे देखी थी.नीना को उसका चेहरा देख हँसी आ गयी जिसे उसने ज़ब्त कर लिया.उसका ये हाल देख उसके मन मे 1 ख़याल आया..यही मौका था इस आदमी को अपना गुलाम बनाने का & उसे महेश के खिलाफ इस्तेमाल करने का.

"क्या देख रहे हो?",वो उठी & अपनी जाँघो को भींच अपनी चूत को च्छूपा लिया & हल्के से मुस्कुराते हुए शरमाने का नाटक करने लगी.हीरा तो अब पूरी तरह से अपने होश खो बैठा & आगे बढ़ नीना को बाहो मे भींचने ही वाला था कि नीना बोली,"..पहले अपने भी उतारो.",उसने किसी शर्मीली जवान लड़की की तरह उसकी कमीज़ को हल्के से खींचा.हीरा ने झटपट अपने कपड़े उतार दिए & नंगा हो गया & अपना 8 इंचा का बिल्कुल काला,झांतो भरा लंड हाथ मे पकड़ हिलाने लगा.नीना समझ गयी कि वो अब रुक नही पाएगा.

वो बिस्तर पे लेट गयी & अपनी टाँगे आपस मे और ज़ोर से भींच ली.हीरा का जोश और बढ़ गया.उसने उसकी जाँघो के बीच दाया हाथ चलाते हुए उसकी चूत को दोबारा कुरेदते हुए उसकी टाँगो को खोल दिया & फ़ौरन उनके बीच आ गया.नीना की टाँगे मोड़ उसने अपना लंड निशाने पे लगाया & ज़ोर का धक्का लगाया.

"हाईईइ...राम्म्म्मम...मैं..मरी...!",जितना दर्द नीना को हुआ नही उस से कही ज़्यादा होने का उसने नाटक किया क्यूकी वो हीरा को और मस्त कर जल्दी से झाड़वाना चाहती थी.हीरा उसके उपर लेट गया & उसकी चूचियो & उनके प्यारे निपल्स को मुँह मे भर चूस्ते उसे चोदने लगा.नीना ने भी उस बाहो मे भर लिया & उसकी पीठ सहलाने लगी.जब उसके हाथो ने हीरा की गंद को छुआ तो हीरा के धक्को की रफ़्तार और बढ़ गयी.नीना की चूत भी अब मस्त हो गयी थी & उसे जिस्म मे अजीब सी कसमसाहट महसूस होने लगी थी.

"हीरा..",उसने उसकी दाई चूची को चूस्ते हीरा का सर उसके बाल पकड़ के उठाया,"..1 काम करोगे?",हीरा ने उसे ज़ोर से चूमा & उसकी बाई चूची को मसलने लगा.नीना को अब मज़ा आने लगा था.हीरा का कड़ा लंड & सख़्त हाथ उसके मुलायम जिस्म को भेद & मसल रहे थे & उसके अंदर मस्ती का तूफान अब ज़ोर पकड़ रहा था.

"तुम बोलो तो..जानेमन...आआहह..!",नीना ने उसी वक़्त अपनी चूत को सिकोड उसके लंड को कस लिया तो उसकी कमर हिलनी और तेज़ हो गयी.

"कल जब महेश फॅक्टरी मे होगा तब मैं उसके घर मे घुस उसकी चीज़े देखना चाहती हू.",उसने अपने नाख़ून उसकी गंद मे धंसा दिए.

"हो जाएगा......आआआहह....!",हीरा पागलो की तरह कमर हिलाते हुए झाड़ रहा था & उसी मे उसने इतनी ज़ोर का धक्का लगाया की लंड चूत मे और गहरे उतरा & नीना के अंदर उमड़े तूफान ने नीना को भी अपने आगोश मे भर लिया.

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डीजे छाज़े ने शोभा/दीप्ति का जो पता लिख के दिया था उसकी मा अब वाहा नही रहती थी.दिव्या & प्रोफेसर दीक्षित ने आस-पास पुछ्ताच की & शहर मे थोड़ा भटकने के बाद आख़िरकार दीप्ति की मा के नये पते पे पहुँच ही गये.

"जी!कहिए?",दरवाज़ा 1 25-26 बरस के लड़के ने खोला जिसने 1 बनियान & शॉर्ट्स पहना हुआ था.देख के लगता था कि बस अभी-2 सोके उठा है

"हमे मिसेज़.काजल दयाल से मिलना है."

"क्या बात है?",लड़के के पीछे 1 औरत वाहा आके खड़ी हो गयी थी.औरत की उम्र तो 46-47 साल की होगी मगर वो 38 से ज़्यादा की नही लग रही थी.उसने 1 ढीला-ढाला कॅफ्टन पहना हुआ था,"मैं ही हू,काजल दयाल."

"आप दीप्ति की मा हैं?"

"हां.",दिव्या ने अपना परिचय दिया तो काजल ने उन्हे अंदर बुलाया & ड्रॉयिंग रूम मे बिठाया.

"डार्लिंग,बस अभी आती हू.",लड़का अंदर चला गया था & उसके पीछे काजल भी.दोनो की बातो & फिर चूमने की आवाज़ सुन प्रोफेसर मुस्कुराया & दिव्या चौंक पड़ी....इस औरत का अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ ऐसा रिश्ता था!

1 ट्रे मे पानी के ग्लास & कुच्छ बिस्किट्स लाके उसने उनके सामने रखा तो दिव्या ने देखा कि कॅफ्टन का गला थोड़ा नीचे हो गया था जिस से उसका क्लीवेज दिख रहा था.काजल प्रोफेसर के सामने वाले सोफे पे टांग पे टांग इस तरह से चढ़ा के बैठी थी कि उसकी गोरी टाँगे जोकि इस उम्र मे भी सुडोल थी,उसे अच्छे से दिखें.

"आपकी तारीफ,गेंटल्मन?",काजल प्रोफेसर से ऐसे मुखातिब हुई जैसे दिव्या तो वाहा मौजूद ही नही थी.प्रोफेसर ने अपना परिचय दिया तो काजल उस से और सवाल करने लगी.

"बिच..!",दिव्या जलन & गुस्से से बुदबुदाई.

"कुच्छ कहा आपने,मिस..?"

"दिव्या..",दिव्या थोड़ी तल्खी से बोली,"..हमारे पास ज़्यादा वक़्त नही है,मेडम इसलिए आप फटाफट अपनी बेटी के बारे मे बताएँ जिसकी हमे 1 रॉबरी के केस मे तलाश है."

"वॉट?",काजल चौंक गयी & अपना हाथ अपने सीने पे रख लिया....उसकी हर अदा से ज़ाहिर था कि उसकी ज़िंदगी मे उसने सबसे ज़्यादा तवज्जो केवल अपने जिस्म & उसके सुकून को दी थी.

"जी.कहा है आपकी बेटी?"

"मुझे नही मालूम,मैने तो..",वो सोचने लगी & जोड़ने लगी,"..1 साल से उपर हो गया,उसकी शक्ल नही देखी."

"फोन तो करती होगी वो आपको?",प्रोफेसर ने अपना पानी का ग्लास उसे दे दिया क्यूकी उसे लगा कि इस वक़्त उसे उसकी ज़्यादा ज़रूरत थी.

"थॅंक्स.",वो शोखी से मुस्कुराइ & पानी पिया,"..नही,हमारा बहुत दीनो से कोई कॉंटॅक्ट नही रहा है."

"वजह?",दिव्या ने पुचछा तो काजल ने लंबी साँस ली & पहली बार संजीदा दिखी.

"देखिए,दीप्ति मेरे पहले पति & मेरी बेटी है.हम दोनो तब अलग हुए जब वो कोई 5 बरस की थी.उसके बाद कुच्छ दिन वो मेरे साथ रही फिर मैने उसे हॉस्टिल भेज दिया."

"काजल..",प्रोफेसर ने उस से उसका खाली ग्लास लिया तो दिव्या ने देखा की काजल ने उसके हाथ को च्छू लिया,वो गुस्से से लाल हो गयी,"..आमतौर पे ऐसे हालात मे मा तो बच्चो को अपने साथ रखना पसंद करती है फिर आपने ऐसा क्यू किया?"

"देखिए,प्रोफेसर मैं 1 आज़ाद ख़याल इंसान हू & मेरी कुcछ ज़रूरते हैं..",उसकी निगाहे & हाव-भाव प्रोफेसर को खुला निमंत्रण दे रहे थे,"..ऐसे मे 1 बच्चे का आस-पास होना अच्छा नही लगता."

"तो आपने उसे पैदा क्यू किया था?",दिव्या की आवाज़ मे गुस्सा था.

"प्लान नही किया था वो तो हमे ख़याल ही नही रहा & वो मेरी कोख मे आ गयी.",काजल बहुत बेबाक थी.

"बुरा मत मानीएगा..",प्रोफेसर मुस्कुराया,"..आप अपने पति से अलग क्यू हुई?"

"वो बड़े आज़ाद ख़यालो के इंसान थे लेकिन सिर्फ़ अपने मामले मे इसलिए जब मैने अपनी आज़ादी को एंजाय करना शुरू किया तो उनके अंदर का बचकाना मर्दाना अहम इस बात को हाज़ाम नही कर पाया,इसलिए हम अलग हो गये."

"दीप्ति अब आपके साथ क्यू रह रही थी?"

"स्कूल ख़त्म होने के बाद उसे यहा के कॉलेज मे दाखिला मिला इसलिए."

"पढ़ाई मे कैसी थी?"

"पता नही.मैं ज़्यादा दखल नही देती थी उसकी ज़िंदगी मे.",दिव्या को हैरानी हुई कोई मा ऐसी भी हो सकती है.

"उसके दोस्तो के बारे मे बताइए?"

"उनके बारे मे भी मुझे ज़्यादा नही पता.वो किसी को घर ही नही लाती थी."

"आप डीजे छाज़े को जानती थी?"

"हां,दीप्ति & उसके बीच कुच्छ था ना?",काजल मुस्कुराइ.दिव्या को लगा जैसे कि बात काजल की बेटी के बारे मे नही किसी अंजन शख्स के बारे मे हो रही है.

"आइ न्यू इट!",प्रोफेसर के हा कहने पे वो खुशी से बोली,"..वैसे बड़ा हॉट लड़का था वो.माइ डॉटर ईज़ ए लकी गर्ल."

"वेल,नोट एनी मोर.",दिव्या खड़ी हो गयी,"..अच्छा आपका बेटा कहा है?"

"बेटा?!",काजल चौंक पड़ी.

"हां,दीप्ति का भाई."

"देखिए,मिस.दिव्या मेरी आजतक बस 1 ही औलाद रही है,दीप्ति.",दिव्या & प्रोफेसर ने 1 दूसरे को हैरत से देखा तो दिव्या ने जवान लुटेरे का स्केच काजल के सामने किया.

"ये..ये कौन है?",काजल सच बोल रही थी,ऐसा प्रोफेसर को यकीन हो गया था.

"प्लीज़,काजल जी..माना कि आप सच कह रही हैं लेकिन हो सकता है इसे आपने अपनी लकड़ी के साथ कभी देखा हो?"

"मुझे लगता है कि ये कभी-कभार उसे छ्चोड़ने आया करता था....फोटोट नही स्केच है ना..इसलिए पक्का नही कह सकती फिर खिड़की से सड़क पे खड़े दोनो को बाते करते देखा था."

"ओके,आप अपने एक्स-हज़्बेंड का नाम बताइए & अगर उनका पता मालूम है तो वो भी लिखवाइए.दीप्ति का कोई समान है आपके पास?"

"जी,नही.वैसे उसके पिता का नाम पता आपको लिखवा देती हू."

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--38

gataank se aage............-

Darasal thodi der pehle Mahesh ne chudai khatm hone ke baad 1 baat kahi thi jiske chalte vo is galiz insan ko apna jism saunpne ko majboor ho gayi thi.jab Nina ne puchha ki kaam ho jane ke baad agar Hira ne unhe blackmail karne ki koshihs ki to vo kya karega to mahesh ne bina hichke kaha ki vo pehle hi soch chuka hai ki kaam khatm hone ke sath-2 hira bhi khatm ho jayega.nina ne pehli baar mahesh ka ye khatarnak pehlu dekha tha & tabhi uske dimagh me ye khayal aaya ki mahesh aisa uske sath bhi to kar sakta hai....aakhir mahesh uski madad kyu kar raha tha?..usne kayi baar us se puchha tha magar har baar uska jawab yehi hota tha ki vo Mukul ke zariye Baddal se aur paisa kamana chahta tha lekin ab nina ko yakin ho gaya tha ki baat kuchh aur hi thi.

"hunhh..!",hira ne use peechhe se baaho me bhar liya & uske daye gaal & gardan ko chumne laga to nina kasmasane lagi.hira ki baahe kafi mazbut thi & use nina ke rukhe ravaiyye ki koi parvah nahi thi.use bhi apni kismat pe yakin nahi ho raha tha ki aisi oonche darje vali khubsurat aurat uski baaho me hai!

nina ko apni pith ke nichle hisse pe uska khada lund mehsus hua to vo uski baaho se chhutne ko tadap uthi.hira ne use ghuma ke uska chehra apni or kiya & uske hotho ko chumne ki koshish karne laga.nina munh ghuma ke uski koshish nakaam kar rahi thi & hira ke honth kabhi uske gaalo se to kabhi gale se takra jate.besabra hira thoda aage badha to vo ladkhada gayi & uske sath hira bhi & dono peechhe bistar pe gir pade.

ye baat hira ke liye aur achhi ho gayi,ab nina uske jism ke neeche dabi thi & vo uske upar chadha use chum raha tha.1 baar fir hira uske gulabi labo ko chumne laga to nina ne dayi taraf chehra ghuma diya.usne apni naak uske gaal pe laga nina ke chehre ko seedha kar fir chumne ki koshish ki to nina ne is baar chehra bayi taraf kar liya.

"dekho,madam..",hira ne daya hath uski kamar ke neeche se nikala & uska chehra pakad ke seedha kiya,"..dhang se chudogi to na abhi taklif hogi na baad me varna maine ye baat kahi bahar bol di to..-"

"-..to kya?!",nina ne uski baat beech me kati,"..tum kya main hi abhi bahar jake chilla-2 ke bolungi ki tumne mere sath zabardasti ki hai fir kya hoga?",hira ki bhave sikud gayi,"..tum bologe ki maine tumhe na nahi kiya tha lekin 1 baat batao log meri baat ka yakin karenge ya tumhari jo pehle bhi hawalat ki sair kar chuka hai?..1 baat kaan khol ke sun lo hira ye meri majburi hai..mahesh se hum dono ko khatra hai isliye main is waqt tumhare sath hu."

"dekho,memsaab..",hira ne uska chehra chhod uske balo ki lat ko jo mathe pe gir aayi thi,hataya,"..mere liye bhi ye 1 sauda hai.tumhe mahesh pe nazar rakhni hai & mujhe bhi us se hoshiyar rehna hai.ab hum dono uske bare me 1 dusre ko batayenge lekin fees to lagegi na!to ye fees mujhe thik se chahiye & main yakin dilata hu ki aage se tum jaisa kahogi vahi karunga.bolo?",hira uske gulabio hotho pe apna daya angutha chala raha tha.

nina ko uski baato me hawabazi nahi lagi,use laga ki vo jo keh raha hai vo karega,"..main kaise yakin karu tumhara?"

"thik hai..",uska angutha vaise hi un narm hotho pe ghum raha tha,"..suno,20 tarikh ki sham ko kaam hone ke baad main jaha rahunga vaha ka pata hai ye & uske baad mujhe mahesh ne..",hira bol raha tha & nina sun rahi thi..ye sab to tay nahi hua tha..yani mahesh ka apna bhi koi maqsad tha & vo kisi businessman ka maqsad nahi tha.

hira ne angutha hataya & nina ke hontho se apne honth laga diye,is baar nina ne use roka nahi.kuchh der tak vo uske hotho ko chumta raha magar jaise hi usne apni zuban uske munh me dalne ki koshish ki to nina ne uske seene pe hath rakh apne honth alag kiye,"mahesh kaam shuru hone pe tumse kaise contact karega?"

"na fone se,na mil ke.",hira ne uski nighty uske baye kandhe se neeche kar vaha pe chuma & fir uski gardan me munh ghusa diya,"..har roz vo vaha ayega jaha main chhupa rahunga & aage ke bare me batayega.vaise bhi mujhe bas vaha chhupe rehna hai,baki kaam to mahesh khud karega.",usne dusre kandhe pe bhi vahi harkat dohrayi & fir vapas apne honth nina ke hontho se laga diye.

mahesh ne use is bare me kuchh nahi bataya tha,usne to kaha tha ki sab kuchh uska aadmi yani ki hira sambhalega..usne jhuth kyu bola tha?..hira ka daya hath uski nighty ko neeche se utha uski makhmali bayi jangh pe chal raha tha.uske mazbut jism ke neeche dabi nina ke jism me bhi ab hulchul hone lagi thi lekin uska zehan khud ko us insan se maza lene ko taiyyar nahi kar pa raha tha.hira ne apni dayi tang ko nina ki tango ke beech kar unhe thoda failaya & uski chut ke bagal me lund ko ragadte hue use chumne laga.is baar usne apni jibh nina ke munh me dakhil kara hi di & uski jibh se lada di.nina ko ye harkat achhi nahi lagi magar uska jism garm hone laga tha.

"aahhhh....chhodo..please...nahi!",hira ne ji bhar ke use chuma & kiss ke ant tak nina ki chut ne bhi risna shuru kar diya.vo utha & uski tango ko 1 sath hawa me utha liya & uski gori jangho ko paglo ki tarah chumne laga.nina ka jism uske aatur hotho ke neeche bawla ho raha tha & vo aankhe band kar kasmasane lagi thi.hira ke honth to uski tango se chipak ke reh gaye the.vo ghutno pe khada ho gaya tha & uski tango ko seedha kar uske apiro ko apne chehre se sataye unhe chum raha tha & uske hath uski chut ke thik neeche uski jangho ke beech ghus unhe sehla rahe the.nina ab zoro se aahe bhar rahi thi.dimagh ka koi kona abhi bhi hira ke liye ghin se bhara tha lekin jism ab puri tarah se us se milne ko tadap raha tha.

"aaaannnnnnhhhhhhh.....aaaahhhhhhhh....!",safed panty ke andar jyo hi hira ka baya hath ghusa & uski gili chut ko halke se kureda,nina jhad gayi.usne apna badan bayi taraf ghumate hue apna chehra 1 takiya khinch usme chhupa liya & subakne lagi.hira muskura raha tha.usne kayi aurato ko choda tha,kuchh sharif,kuchh bazaru,kuchh ko unki marzi se,kuchh ko zabardasti lekin aaj pehli baar use khud ke mard hone ka ehsas hua tha.1 aurat jo uski pahunch se door thi,us jaisi aurato ke bare me vo kewal sapne dekh sakta tha,aaj uske hath se jhad rahi thi.

usne nina ki tango ko neeche rakha & takiye ko hata uske chehre ko chumne laga..ye aurat agar use jaan bhi dene ko kahegi to vo de dega..uff....aisa resham sa jism..itna mulayam & chehra itna sundar!usne nina ko baaho me bhar liya & uski pith sehlane laga.use khud ke aise komal bartav pe hairat hui & nina ko bhi ye umeed nahi thi.jhadne ke baad aurat apne sathi se bas dular chahti hai vasna nahi & hira ki harkat ne uske zehan ki bachi hui uljhan ko bhi door kar diya.ab vo sirf 1 aurat thi,samajj ke oonche darje ki izzatdar aurat nahi & vo sirf 1 mard tha,kisi chhoti si factory me kaam karne vala mamuli mazdur nahi.

hira ne uski nighty ko dhila kar uske gale ko neeche kiya & nina ke cleavage ko chumne laga.nina aankhe band kiye hue padi thi.hira use chumte huse uske kapde utar raha tha.har kapda utarne ke baad vo thodi er tak uske jism ko niharta & fir chumta.nina ki chut dekh ke to vo bilkul hi bhaunchakka reh gaya & ghutno pe baith uspe bahut halke-2 hath firane laga mano yakin karna chahta ho ki uske samne leti aurat koi dhokha nahi thi.usne aisi gori,gulabi,bina baalo ki chikni chut sirf nangi kitabo me dekhi thi.nina ko uska chehra dekh hansi aa gayi jise usne zabt kar liya.uska ye haal dekh uske man me 1 khayal aaya..yehi mauka tha is aadmi ko apna ghulam banane ka & use mahesh ke khilaf istemal karne ka.

"kya dekh rahe ho?",vo uthi & apni jangho ko bhinch apni chut ko chhupa liya & halke se muskurate hue sharmane ka natak karne lagi.hira to ab puri tarah se apne hosh kho baitha & aage badh nina ko baaho me bhinchne hi vala tha ki nina boli,"..pehle apne bhi utaro.",usne kisi sharmili jawan ladki ki tarah uski kamiz ko halke se khincha.hira ne jhatpat apne kapde utar diye & nanga ho gaya & apna 8 incha ka bilkul kala,jhanto bhara lund hath me pakad hilane laga.nina samajh gayi ki vo ab ruk nahi payega.

vo bistar pe let gayi & apni tange aapas me aur zor se bhinch li.hira ka josh aur badh gaya.usne uski jangho ke beech daya hath chalate hue uski chut ko dobara kuredte hue uski tango ko khol diya & fauran unke beech aa gaya.nina ki tange mod usne apna lund nishane pe lagaya & zor ka dhakka lagaya.

"haiiii...rammmmm...main..mari...!",jitna dard nina ko hua nahi us se kahi zyada hone ka usne natak kiya kyuki vo hira ko aur mast kar jaldi se jhadwana chahti thi.hira uske uapr let gaya & uski chhatiyo & unke pyare nipples ko munh me bhar chuste use chodne laga.nina ne bhi us baaho me bhar liya & uski pith sehlane lagi.jab uske hatho ne hira ki gand ko chhua to hira ke dhakko ki raftar aur badh gayi.nina ki chut bhi ab mast ho gayi thi & use jism me ajib si kasmasahat mehsus hone lagi thi.

"hira..",usne uski dayi chhati ko chuste hira ka sar uske baal pakad ke uthaya,"..1 kaam karoge?",hiraq ne use zor se chuma & uski bayi choochi ko maslane laga.nina ko ab maza aane laga tha.hira ka kada lund & sakht hath uske mulayam jism ko bhed & masal rahe the & uske andar masti ka toofan ab zor pakad raha tha.

"tum bolo to..janeman...aaaahhhhh..!",nina ne usi waqt apni chut ko sikod uske lund ko kas liya to uski kamar hilni aur tez ho gayi.

"kal jab mahesh factory me hoga tab main uske ghar me ghus uski chize dekhna chahti hu.",usne apne nakhun uski gand me dhansa diye.

"ho jayega......aaaaaahhhhhhhh....!",hira paglo ki tarah kamar hilate hue jhad raha tha & usi me usne itni zor ka dhakka lagaya ki lund chut me aur gehre utra & nina ke andar umde toofan ne nina ko bhi apne agosh me bhar liya.

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DJ Chaze ne Shobha/Dipti ka jo pata likh ke diya tha uski maa ab vaha nahi rehti thi.Divya & Professor Dixit ne aas-paas puchhtachh ki & shehar me thoda bhatakne ke baad aakhirkar dipti ki maa ke naye pate pe pahunch hi gaye.

"ji!kahiye?",darwaza 1 25-26 baras ke ladke ne khola jisne 1 banyan & shorts pehna hua tha.dekh ke lagta tha ki bas abhi-2 soke utha hai

"hume Mrs.Kajal Dayal se milna hai."

"kya baat hai?",ladke ke peechhe 1 aurat vaha aake khadi ho gayi thi.aurat ki umra to 46-47 saal ki hogi magar vo 38 se zyada ki nahi lag rahi thi.usne 1 dhila-dhala kaftan pehna hua tha,"main hi hu,kajal dayal."

"aap dipti ki maa hain?"

"haan.",divya ne apna parichay diya to kajal ne unhe andar bulaya & drawing room me bithaya.

"darling,bas abhi aati hu.",ladka andar chala gaya tha & uske peechhe kajal bhi.dono ki baato & fir chumne ki aavaz sun professor muskuraya & divya chaunk padi....is aurat ka apne bete ki umra ke ladke ke sath aisa rishta tha!

1 tray me pani ke glass & kuchh biscuits lake usne unke samne rakha to divya ne dekha ki kaftan ka gala thoda neeche ho gaya tha jis se uska cleavage dikh raha tha.kajal professor ke samne vale sofe pe tang pe tang is tarah se chadha ke baithi thi ki uski gori tange joki is umra me bhi sudol thi,use achhe se dikhen.

"aapki tarif,gentleman?",kajal professor se aise mukhatib hui jaise divya to vaha maujood hi nahi thi.professor ne apna parichay diya to kajal us se aur sawal karne lagi.

"bitch..!",divya jalan & gusse se budbudayi.

"kuchh kaha aapne,miss..?"

"divya..",divya thodi talkhi se boli,"..humare paas zyada waqt nahi hai,madam isliye aap fatafat apni beti ke bare me batayen jiski jhume 1 robbery ke case me talash hai."

"what?",kajal chaunk gayi & apna hath apne seene pe rakh liya....uski har ada se zahir tha ki uski zindagi me usne sabse zyada tawajjoh kewal apne jism & uske sukun ko di thi.

"ji.kaha hai aapki beti?"

"mujhe nahi malum,maine to..",vo sochne lagi & jodne lagi,"..1 saal se upar ho gaya,uski shakl nahi dekhi."

"fone to karti hogi vo aapko?",professor ne apna pani ka glass use de diya kyuki use laga ki is waqt use uski zyada zarurat thi.

"thanx.",vo shokhi se muskurayi & pani piya,"..nahi,humara bahut dino se koi contact nahi nraha hai."

"vajah?",divya ne puchha to kajal ne lumbi saans li & pehli baar sanjida dikhi.

"dekhiye,dipti mere pehle pati & meri beti hai.hum dono tab alag hue jab vo koi 5 baras ki thi.uske baad kuchh din vo mere sath rahi fir maine use hostel bhej diya."

"kajal..",professor ne us se uska khali glass liya to divya ne dekha ki kajal ne uske hath ko chhu liya,vo gusse se laal ho gayi,"..aamtaur pe aise halaat me maa to bachcho ko apne sath rakhna pasand karti hai fir aapne aisa kyu kiya?"

"dekhiye,professor main 1 azad khayal insan hu & meri kucchh zarurate hain..",uski nigahe & haav-bhav professor ko khula nimantran de rahe the,"..aise me 1 bachche ka aas-paas hona achha nahi lagta."

"to aapne use paida kyu kiya tha?",divya ki aavaz me gussa tha.

"plan nahi kiya tha vo to hume khayal hi nahi raha & vo meri kokh me aa gayi.",kajal bahut bebak thi.

"bura mat maniyega..",professor muskuraya,"..aap apne pati se alag kyu hui?"

"vo bade azad khayalo ke insan the lekin sirf apne mamle me isliye jab maine apni azadi ko enjoy karna shuru kiya to unke andar ka bachkana mardana aham is baat ko hazam nahi kar paya,isliye hum alag ho gaye."

"dipti ab aapke sath kyu reh rahi thi?"

"school khatm hone ke baad use yaha ke college me dakhila mila isliye."

"padhai me kaisi thi?"

"pata nahi.main zyada dakhal nahi deti thi uski zindagi me.",divya ko hairani hui koi maa aisi bhi ho sakti hai.

"uske dosto ke bare me bataiye?"

"unke bare me bhi mujhe zyada nahi pata.vo kisi ko ghar hi nahi lati thi."

"aap dj chaze ko janti thi?"

"haan,dipti & uske beech kuchh tha na?",kajal muskurayi.divya ko laga jaise ki baat kajal ki beti ke bare me nahi kisi anjan shakhs ke bare me ho rahi hai.

"i knew it!",professor ke haa kehne pe vo khushi se boli,"..vaise bada hot ladka tha vo.my daughter is a lucky girl."

"well,not any more.",divya khadi ho gayi,"..achha aapka beta kaha hai?"

"beta?!",kajal chaunk padi.

"haan,dipti ka bhai."

"dekhiye,ms.divya meri aajtak bas 1 hi aulad rahi hai,dipti.",divya & professor ne 1 dusre ko hairat se dekha to divya ne jawan lutere ka sketch kajal ke samne kiya.

"ye..ye kaun hai?",kajal sach bol rahi thi,aisa professor ko yakin ho gaya tha.

"please,kajal ji..maana ki aap sach keh rahi hain lekin ho sakta hia ise aapne apni lakdi ke sath kabhi dekha ho?"

"mujhe lagta hai ki ye kabhi-kabhar use chhodne aya karta tha....fotot nahi sketch hai na..isliye apkka nahi akr sakti fir khidki se sadak pe khade dono ko baate karte dekha tha."

"ok,aap apne ex-husband ka naam bataiye & agar unka pata malum hai to vo bhi likhwaiye.dipti ka koi saman hai aapke paas?"

"ji,nahi.vaise uske pita ka naam pata aapko likhwa deti hu."

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:47

खेल खिलाड़ी का पार्ट--39

गतान्क से आगे............-

"थॅंक यू.",दिव्या उसके हाथ से काग़ज़ ले दरवाज़े से बाहर निकल गयी & उसके साथ प्रोफेसर भी.दोनो गाड़ी तक पहुँचे ही थे कि काजल ने पीछे से प्रोफेसर को आवाज़ दी.प्रोफेसर उसके पास गया तो दिव्या कार मे बैठ गयी.उसने देखा की दोनो हंस-2 के बात कर रहे हैं तो उसे जलन सी हुई.

"क्यू बुलाया था उसने?",प्रोफेसर ने कार स्टार्ट की,"..उस लगा कि मेरा रुमाल अंदर गिर गया है.",प्रोफेसर ने कार आगे बढ़ा दी,"..& फिर उसे मेरा फोन नंबर भी चाहिए था.",प्रोफेसर हंसा तो दिव्या को भी गुस्से के बावजूद हँसी आ गयी.

"अजिंक्या 1 काम करते हैं..",दिव्या ने खिड़की से बाहर देखते हुए कार चलाते प्रोफेसर दीक्षित की बाँह पे हाथ रखा,"..यहा के क्राइम ब्रांच को इस लड़की के बारे मे बता देते हैं."

"ख़याल अच्छा है."

.......................

"ह्म्म..",एसीपी फ़राज़ सोच मे पड़ गया,"..ज़रा सिंग को अंदर भेजो."

"सर!",1 लंबा-तगड़ा सब-इनस्पेक्टर अंदर आया तो फ़राज़ ने उसे दिव्या के लाए स्केचस थमाए & अब तक उसने जो भी बाते पता की थी वो बताई.

"सर,मुझे लगता है हमे कल जो खबर मिली है,उसका इस केस से ज़रूर कोई ताल्लुक है."

"ज़रा मेडम को उस बारे मे बताओ."

"मेडम,1 मुखबिर से हमे पता चला है की रमेश चंद आज कुच्छ चोटी के हीरे खरीदने वाला है.ये रमेश चंद है तो ज़ोहरी लेकिन ये हमेशा चोरी के माल मे ही डील करता है क्यूकी इसमे मुनाफ़ा ज़्यादा होता है लेकिन वो 1 छ्होटी मछली है.हमे खबर मिली है कि आज जो हीरे वो खरीदने वाला है उनकी कीमत कोई 2 लाख रुपयो के करीब होगी.रमेश ऐसी बड़ी डील अकेले नही कर सकता तो इसका मतलब वो बस 1 बीचोलिया है,1 से हीरे लेके दूसरे को बेचेगा & दलाली खा जाएगा."

"आप क्या करने की सोच रहे हैं इस बारे मे?",दिव्या फ़राज़ से मुखातिब हुई.

"राइड डालेंगे.जैसे ही चीज़े अदली-बदली जाएँगी,उन्हे रंगे हाथो पकड़ेंगे ताकि उन्हे सज़ा दिलवाने मे आसानी हो."

"आप बुरा ना माने तो हम भी आपके साथ चलें?"

"ज़रूर मगर आप दोनो सिर्फ़ देख सकते हैं अगर कोई करवाई करनी पड़ी तो आप उसका हिस्सा नही बनेंगे."

"ठीक है."

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"मेमसाहब,आप महेश के घर पहुँचो मैं 30 मिनिट मे वाहा पहुँचता हू."

"ओके.",नीना ने फोन रखा & निकल पड़ी.उसने 1 काली जीन्स & टी-शर्ट पहनी थी & साथ मे काला चश्मा भी लगाया हुआ था.उसके बाद उसने 1 काला दुपट्टा लेके अपने चेहरे पे ऐसे लपेट लिया मानो धूप से बचना चाह रही हो लेकिन उसका असली मक़सद तो अपना चेहरा च्छुपाना था.

20 मिनिट बाद वो महेश के घर के बाहर खड़ी थी तभी वाहा हीरा 1 बाइक से पहुँचा,"ये लो चाभीया & जल्दी अंदर चलो.",महेश फॅक्टरी पहुँचते ही अपनी चाभीया 1 दराज़ मे रख देता था & फिर काम मे मशगूल हो जाता था.इन चाभियो को वो शाम को फॅक्टरी छ्चोड़ते वक़्त ही निकालता था.इसी बात का फ़ायदा उठाके हीरा ने चाभीया निकाल ली थी & अब नीना के साथ महेश के घर मे दाखिल हो रहा था.

नीना यहा पहले भी आ चुकी थी & उसे अंदर के चप्पे-2 के बारे मे मालूम था.वो सीधा महेश के बेडरूम मे पहुँची & उसकी अलमारी खोल देखने लगी.

"हम ढूंड क्या रहे हैं?",हीरा कमरे मे रखे 1 छ्होटे से कपबोर्ड को खंगाल रहा था.

"कोई भी ऐसी चीज़ जोकि महेश के खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है & ध्यान रहे बाद मे सारा समान ज्यो का त्युओ रखना है ताकि उसे शक़ ना हो.",दोनो ने पूरा बेडरूम छान लिया मगर नीना को ऐसा कुच्छ भी हाथ नही लगा जो काम का होता बस कुच्छ

XXX ड्व्ड्स & नंगी किताबें जिनका लुत्फ़ वो महेश के साथ पहले उठा चुकी थी.उसे तलाश थी किसी ऐसे बॅंक स्टेट्मेंट की,किसी ऐसे काग़ज़ात की जिस से महेश के किसी उल्टे-सीधे धंधे का पता चले.वो 1 बिज़्नेसमॅन था & ऐसा हो नही सकता था कि टॅक्स बचाने के लिए उसने कभी कोई क़ानून मरोड़ा ना हो.

1 घंटे तक वो उसके घर को छानते रहे मगर कुच्छ भी हाथ नही लगा.नीना थक के महेश की स्टडी टेबल पे लगी कुर्सी पे बैठ गयी & अपना माथा सहलाने लगी.

"चलें क्या?",हीरा ने 1 शेल्फ की किताबे ठीक कर पुचछा.

"हूँ.",नीना ने आनमने ढंग से स्टडी टेबल की दराजे खोली.1 के नीचे 1 तीन दराजे थी & फिर 1 बड़ा कॅबिनेट.पहली दराज़ मे बस पेंस,स्टप्लेर्स,पिन्स,क्लिप्स जैसी चीज़े पड़ी थी.दूसरी मे 2-3 डाइयरीस थी जोकि बिल्कुल कोरी थी.तीसरी दराज़ मे कुच्छ काग़ज़ात थे & 1 छ्होटा सा फोटो आल्बम जोकि स्टूडियो वाले रील सॉफ करने के बाद मुफ़्त पकड़ाते हैं.

नीना उस आल्बम को पलटने लगी.तस्वीरो को देख के लगता था कि वो महेश के किसी बहुत करीबी रिश्तेदार के किसी जलसे मे खीची गयी हैं.आखरी पन्ने मे नीना को प्लास्टिक कवर मे 2 तस्वीरो के बजाए 3 तस्वीरे दिखी.तीसरी तस्वीर दोनो के बीच च्छूपी हुई थी.नीना ने उस तस्वीर को निकाला & उसके चेहरे का उतरा रंग फिर से खिल उठा....तुम मेरे साथ खेल रहे थे ना महेश,अब मैं तुम्हारे साथ खेलूँगी & इसके साथ भी,उसने तस्वीर मे महेश के साथ खड़ी लड़की को देखा & मुस्कुराइ,"चलो.",वो कुर्सी से उठी & हीरा के साथ निकल गयी.

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पंचमहल पोलीस के जवान एसीपी फ़राज़ के साथ अपनी-2 पोज़िशन संभाले हुए थे.पंचमहल रेलवे स्टेशन के यार्ड के सुनसान हिस्से मे 1 ज़ंग खा रही ट्रेन के कोच के 1 डब्बे मे खड़ा रमेश चंद उस आदमी का इंतेज़ार कर रहा था.पोलीस सभी एंट्री & एग्ज़िट पायंट्स की निगरानी कर रही थी.1 कॉन्स्टेबल डिजिटल वीडियो कॅमरा थामे आगे बढ़ा & उस कोच के बराबर मे लगी दूसरी कोच से रमेश चंद की हर्कतो को कमेरे मे क़ैद करने लगा.

उनका मुखबिर 1 रेलवे की मालगाड़ियो मे समान चढ़ाने वाला लोडर वही बैठा उन्घ्ने का नाटक कर रहा था & बीड़ी पी रहा था.अब तक वो 3 बीडीया पी के उनके टोट फेंक चुका था.अचानक उसने आँखे खोली & कुच्छ देर बाद अगड़ाई ले खड़ा हो गया फिर उसने बीड़ी ज़मीन पे गिराई & अपनी चप्पल तले मसल वाहा से जाने लगा.उसने पोलीस को उस आदमी के आने का इशारा कर दिया था.सारे पोलीस वाले चौकन्ने हो सभी रस्तो को देखने लगे.कुल 3 जगहो से यार्ड मे घुसा जा सकता था.

1 मोटरसाइकल की हल्की-2 आवाज़ आ रही थी मगर उन रस्तो पे कोई गाड़ी आती दिख नही रही थी.फ़राज़ यार्ड की दीवार के पास लगे समान के पीछे खड़ा हो अंदर आने वाले रास्ते को देख रहा था.तभी दिव्या ने उसके कंधे पे हाथ रख उस ज़ंग लगी गाड़ी के आगे की ओर इशारा किया जहा से 1 मोटरसाइकल ट्रॅक्स पे चलती हुई ट्रेन की ओर आ रही थी.

"चालाक & शातिर लगता है.",फ़राज़ फुसफुसाया & इशारे से अपने लोगो को सावधान किया.बाइक सवार ने बाइक ट्रेन के पहले डब्बे के सामने रोकी & अपनी चाभी निकाल के चारो तरफ देखा.वो काली जॅकेट & जीन्स मे था & सर पे लगा काला हेल्मेट & काला वाइज़र उसके चेहरे को पूरा च्छुपाए हुए था.ट्रेन के आगे कोई एंजिन नही था & पहला डब्बा दरअसल आम ट्रेन का आख़िरी डिब्बा था जिसमे गार्ड कॅबिन होता है.वो उसी कॅबिन से अंदर घुसा & लंबे-2 डॅग भरता रमेश चंद के कॅबिन मे पहुँचा जोकि शुरू से तीसरे नंबर पे था.

रमेश चंद ने अपनी कमीज़ के अंदर से 1 पॉलयथीन का पॅकेट निकाल उसे अंदर रखे नोट दिखाए तो उसने भी जेब से बहुत छ्होटी सी पोटली खोल उसे हीरे दिखाए.फ़राज़,प्रोफेसर & दिव्या ये सब नही देख पा रहे थे मगर सभी कुच्छ पोलीस वीडियो मे रेकॉर्ड हो रहा था.डील होते ही वीडियो-रेकॉर्डिंग करने वाले कॉन्स्टेबल के इशारे पे पोलिसेवालो ने फ़ौरन कोच को घेर लिया,"हाथ उठाके कोच से बाहर आओ.",फ़राज़ की कड़कदार आवाज़ गूँजी.

1 पल को रमेश चंद & वो बिके सवार चौंक गये लेकिन संभालते ही उन्होने भागने की कोशिश की जो की स्वाभाविक था मगर उसके बाद जो हुआ किसी ने उसकी उम्मीद नही की थी.बाइक सवार ने फुर्ती से अपनी जॅकेट से 1 पिस्टल निकाली & रमेश चंद के सीने मे मारी फिर उसके निशाने पे डिब्बे मे 2 तरफ से घुसते कॉन्स्टेबल थे.गोलिया चलाते वो अपनी बाइक की तरफ भागा तो फ़राज़,दिव्या & प्रोफेसर तीनो 1 साथ होश मे आए & उसकी बाइक की ओर भागे.

फ़राज़ ने बाइक पे गोलिया चलाई की उसके टाइयर्स पंक्चर कर दे मगर उसका निशाना चुका & गोली बाइक की सीट पे लगी.बाइक सवार बाइक तक फुँचा,पिस्टल को अपनी जेब के हवाले किया & बाइक पे बैठ गया & बाइक स्टार्ट की मगर ठीक उसी समय उसके करीब सबसे पहले पहुँची दिव्या ने उसे 1 किक उसके सर के पीछे मारी जिस से उसका हेल्मेट गिर गया मगर उस चालाक इंसान ने 1 काला नक़ाब भी पहना था.उसने बाइक गियर मे डाल तेज़ी से आगे बढ़ाई तो फ़राज़ की 1 गोली उसकी दाई बाँह मे लगी & वो चीखा मगर बाइक को धीमा नही किया.

और तब प्रोफेसर दीक्षित जोकि वाहा मौजूद सबसे ज़्यादा उम्र वाला इंसान था किसी 16-17 बरस के लड़के की फुर्ती से कुदा & सीधा बाइक सवार के पीछे सीट पे गिरा.खुद को संभाल उसने पीछे से उसे पकड़ उसे बाइक से गिराने की कोशिश की मगर वो आदमी भी कम नही था.1 हाथ से बाइक के थ्रॉटल को पूरा घुमाए दूसरे से वो अपनी कोहनी बार-2 प्रोफेसर को वाहा मार रहा था जहा उसके गुर्दे थे.प्रोफेसर ने भी पैंतरा बदला & उसकी जेब मे रखी पिस्टल निकालने की कोशिश करने लगा.इस हाल मे भी वो बाइक को तेज़ी से भगाए जा रहा था.जब उसे लगा कि अब प्रोफेसर उसकी पिस्टल निकाल लेगा तब उसने कालाबाज़ी दिखाते हुए बाइक के अगले टाइयर को हवा मे खड़ा कर दिया.

प्रोफेसर अचानक बदले इस पैंतरे से संभाल नही पाया & पीठ के बल गिर गया.पोलीस वाले गोलिया चलाते उसके पीछे भागे मगर वो वाहा से निकल भागने मे कामयाब हो चुका था.

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"मैने कहा था ना कि आपलोग कुच्छ नही करेंगे फिर क्या ज़रूरत थी आपको उस से उलझने की?!",फ़राज़ गुस्से मे बौखलाया हुआ था,"..आपको गोली ना लगे इसलिए मेरे आदमी पीछे से उसपे गोली नही चला पा रहे थे.",हॉस्पिटल के कमरे मे 1 नर्स प्रोफेसर के ज़ख़्मो पे मलम लगा रही थी.

"मिस्टर.फ़राज़,आप भी जानते हैं & मैं भी..",दिव्या की आँखो से अँगारे बरस रहे थे,"..कि हम अगर कुच्छ नही करते तो भी नतीजा वही होता.आप इस बात को मानने से क्यू क़तरा रहे हैं कि आपकी प्लॅनिंग मे कमी रह गयी थी & आपने ये सोचा भी नही था कि वो ट्रॅक्स के रास्ते बाइक से आ सकता है.",बात सही थी & फ़राज़ को भी इस बात पे खिज आ रही थी.वो खामोश हो गया & खिड़की से बाहर देखने लगा.

"एसीपी साहब..",प्रोफेसर दीक्षित को कोई खास चोट नही आई थी बस खरोन्चे थी,"..मैं माफी चाहता हू.आप वाहा के इन-चार्ज थे & हमे आपकी कही बातो को मानना चाहिए थे मगर उस वक़्त मैं ही उसके सबसे करीब था & मुझे लगा कि अगर मैने कोशिश नही की तो वो हमारे हाथ से निकल जाएगा & इसिसलिए मैं उसके उपर कूद गया."

"हूँ.",फ़राज़ ने सर हिलाया & कमरे से निकल गया,"..दफ़्तर चलिए,देखे क्या हाथ लगा है हमारे.",निकलते हुए उसने कहा.

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जसजीत प्रधान तड़के ही उठ गया था & 7 बजते-2 तैय्यार होके लॉन मे बैठा चाइ पीते हुए ख़बरे पढ़ रहा था कि तभी 1 नौकर ने उस से आके कुच्छ कहा,"क्या?!& तुमने उन्हे गेट पे रोक रखा है!बेवकूफ़!",वो कुर्सी से उठा & गेट की ओर लगभग भागने ही लगा,"..जाओ जाके मेमसाहब को बुला के ले आओ."

"फादर..!",जसजीत मुस्कुराता हुआ उस भले चेहरे वाले शख्स के पास पहुँचा जो अपनी कार से उतर उसके दरवाज़े के पास खड़ा था,"..आइ'म सॉरी,फादर.इन लोगो ने आपको ऐसे रोका..आइ'म रियली सॉरी!",फादर ने अपना हाथ बढ़ाया तो हाथ मिलाते हुए वो उन्हे अंदर ले आया.दोनो साथ-2 चलते हुए उसके लॉन मे आ गये.

ये इंसान था फादर विनसेंट ओ'ब्राइयेन,स्ट्रीट.पॅट्रिक'स कॉलेज का प्रिन्सिपल.स्ट्रीट.पॅट्रिक'स डेवाले का ही नही बल्कि मुल्क का जाना-माना कॉलेज था & उसमे दाखिला पाना बड़े फख्र की बात समझी जाती थी.वाहा के स्टूडेंट्स दुनिया भर मे फैले थे & ज़्यादातर बहुत कामयाब थे.उन्ही मे से 1 था जसजीत.जब जसजीत कॉलेज मे था तो फादर विनसेंट प्रिन्सिपल नही थे बल्कि वाहा इंग्लीश पढ़ाया करते थे & शायद कॉलेज के सबसे फॅवुरेट प्रोफेसर थे.

"हेलो अंजलि."

"हेलो,फादर.",अंजलि मुस्कुराइ & 1 कुर्सी पे उन्हे बैठने का इशारा किया,"कैसे हैं आप?"

"बढ़िया.",अंजलि ने उन्हे जूस का 1 ग्लास थमाया.

"थॅंक्स.",वो जसजीत से मुखातिब हुए,"..माफी चाहता हू कि इस वक़्त जब तुम एलेक्षन्स मे इतने बिज़ी हो,तुम्हे परेशान कर रहा हू."

"प्लीज़,फादर.यू शर्मिंदा ना करें.आप क्या कोई गैर हैं?"

"तो बेटा,कल रात तुम आ रहे हो ना?"

"ज़रूर फादर,आन्यूयल चॅरिटी बॉल को मैं कैसे भूल सकता हू."

"थॅंक्स,सोन.अंजलि & तुम वाहा आओगे तो और लोग भी आएँगे & हम ज़्यादा से ज़्यादा पैसे इकट्ठा कर पाएँगे जिस से और ज़्यादा ज़रूरतमंडो की मदद हो पाएगी."

"फादर,आपके किसी काम आ सकु ये तो मेरे लिए हमेशा ही बड़े फक्र की बात रही है."

"स्ट्रीट.पॅट्रिक'स को भी तुमपे नाज़ है बेटा &..",वो अंजलि की ओर घूमे,"..& तुमपे भी,अंजलि.जसजीत की कामयाबी की आधी हक़दार तुम भी हो."

"थॅंक्स,फादर.",अंजलि थोड़ा शर्मा गयी & नज़रे झुका ली & फिर फादर से नज़र बचा अपने पति को देखा.वो भी मुस्कुरा रहा था मगर उस मुस्कुराहट मे खुशी,प्यार के अलावा कुच्छ और भी था..क्या,ये अंजलि समझ नही पाई & फिर फादर & पति की गुफ्तगू मे शामिल हो गयी.

...................

वो तस्वीर बड़ी काम की थी.उसने उसकी कॉपी बनवा "अफ़रा-तफ़री मे ये पोटली उसके हाथो से वही गिर गयी थी & ये पैसे भी वही छूट गये थे.",फ़राज़ ने अपनी मेज़ पे पड़ी चीज़ो की ओर इशारा किया.

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--39

gataank se aage............-

"thank you.",divya uske hath se kagaz le darwaze se bahar nikal gayi & uske sath professor bhi.dono gadi tak pahunche hi the ki kajal ne peechhe se professor ko avaz di.professor uske paas gaya to divya car me baith gayi.usne dekha ki dono hans-2 ke baat kar rahe hain to use jalan si hui.

"kyu bulaya tha usne?",professor ne car start ki,"..us laga ki mera rumal andar gir gaya hai.",professor ne car aage badha di,"..& fir use mera fone number bhi chahiye tha.",professor hansa to divya ko bhi gusse ke bavjud hansi aa gayi.

"Ajinkya 1 kaam karte hain..",Divya ne khidki se bahar dekhte hue car chalate Professor Dixit ki banh pe hath rakha,"..yaha ke crime branch ko is ladki ke bare me bata dete hain."

"khayal achha hai."

"hmm..",ACP Faraz soch me pad gaya,"..zara Singh ko andar bhejo."

"sir!",1 lumba-tagda sub-inspector andar aaya to faraz ne use divya ke laye sketches thamaye & ab tak usne jo bhi baate pata ki thi vo batayi.

"sir,mujhe lagta hai hume kal jo khabar mili hai,uska is case se zarur koi talluk hai."

"zara madam ko us bare me batao."

"madam,1 mukhbir se hume pata chala hai ki Ramesh Chand aaj kuchh choti ke heere kharidne wala hai.ye ramesh chand hai to johri lekin ye humesha chori ke maal me hi deal karta hai kyuki isme munafa zyada hota hai lekin vo 1 chhoti machhli hai.hume khabar mili hai ki aaj jo heere vo kharidne vala hai unki keemat koi 2 lakh rupayo ke karib hogi.ramesh aisi badi deal akele nahi kar sakta to iska matlab vo bas 1 bicholiya hai,1 se heere leke dusre kop bechega & dalali kha jayega."

"aap kya karne ki soch rahe hain is bare me?",divya faraz se mukhatib hui.

"raid dalenge.jaise hi chize adli-badli jayengi,unhe range hatho pakdenge taki unhe saza dilwane me aasani ho."

"aap bura na mane to hum bhi aapke sath chalen?"

"zarur magar aap dono sirf dekh sakte hain agar koi karvai karni padi to aap uska hissa nahi banenge."

"thik hai."

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"memsahab,aap Mahesh ke ghar pahuncho main 30 minute me vaha pahunchta hu."

"ok.",Nina ne fone rakha & nikal padi.usne 1 kali jeans & t-shirt pehni thi & sath me kala chashma bhi lagaya hua tha.uske baad usne 1 kala dupatta leke apne chehre pe aise lapet liya mano dhoop se bachna chah rahi ho lekin uska asli maqsad to apna chehra chhupana tha.

20 minute baad vo mahesh ke ghar ke bahar khadi thi tabhi vaha Hira 1 bike se pahuncha,"ye lo chabhiya & jaldi andar chalo.",mahesh factory pahunchte hi apni chabhiya 1 daraz me rakh deta tha & fir kaam me mashgul ho jata tha.in chabhiyo ko vo sham ko factory chhodte waqt hi nikalta tha.isi baat ka fayda uthake hira ne chabhiya nikal li thi & ab nina ke sath mahesh ke ghar me dakhil ho raha tha.

nina yaha pehle bhi aa chuki thi & use andar ke chappe-2 ke bare me malum tha.vo seedha mahesh ke bedroom me pahunchi & uski almari khol ekhne lagi.

"hum dhoond kya rahe hain?",hira kamre me rakhe 1 chhote se cupboard ko khangal raha tha.

"koi bhi aisi chiz joki mahesh ke khilaf istemal ho sakti hai & dhyan rahe baad me sara saman jyo ka tyuo rakhna hai taki use shaq na ho.",dono ne pura bedroom chhan liya magar nina ko aisa kuchh bhi hath nahi laga jo kaam ka hota bas kuchh

XXX dvds & nangi kitaben jinka lutf vo mahesh ke sath pehle utha chuki thi.use talash thi kisi aise bank statement ki,kisi aise kagzat ki jis se mahesh ke kisi ulte-seedhe dhandhe ka pata chale.vo 1 businessman tha & aisa ho nahi sakta tha ki tax bachane ke liye usne kabhi koi kanoon maroda na ho.

1 ghante tak vo uske ghar ko chhante rahe magar kuchh bhi hath nahi laga.nina thak ke mahesh ki study table pe lagi kursi pe baith gayi & apna matha sehlane lagi.

"chalen kya?",hira ne 1 shelf ki kitabe thik kar puchha.

"hun.",nina ne anmane dhang se study table ki daraze kholi.1 ke neeche 1 teen daraze thi & fir 1 bada cabinet.pehli daraz me bas pens,staplers,pins,clips jaisi chize padi thi.dusri me 2-3 diaries thi joki bilkul kori thi.teesri daraz me kuchh kagzat the & 1 chhota sa foto album joki studio vale reel saaf karne ke baad muft pakdate hain.

nina us album ko palatne lagi.tasviro ko dekh ke lagta tha ki vo mahesh ke kisi bahut karibi rishtedar ke kisi jalse me khichi gayi hain.aakhri panne me nina ko plastic cover me 2 tasviro ke bajaye 3 tasvire dikhi.teesri tasvir dono ke beech chhupi hui thi.nina ne us tasvir ko nikala & uske chere ka utra rang fir se khil utha....tum mere sath khel rahe the na mahesh,ab main tumhare sath khelungi & iske sath bhi,usne tasvir me mahesh ke sath khadi ladki ko dekha & muskurayi,"chalo.",vo kursi se uthi & hira ke sath nikal gayi.

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Panchmahal police ke jawan ACP faraz ke sath apni-2 position sambhale hue the.panchmahal railway station ke yard ke sunsan hisse me 1 zang kha rahi train ke coach ke 1 dabbe me khada ramesh chand us aadmi ka intezar kar raha tha.police sabhi entry & exit points ki nigrani kar rahi thi.1 constable digital video camera thame aage badha & us coach ke barabar me lagi dusri coach se ramesh chand ki harkato ko camere me qaid karne laga.

unka mukhbir 1 railway ki maalgadiyo me saman chadhane vala loader vahi baitha unghne ka natak kar raha tha & beedi pi raha tha.ab tak vo 3 beediya pi ke unke tote fenk chuka tha.achanak usne aankhe kholi & kuchh der baad agdayi le khada ho gaya fir usne bidi zamin pe girayi & apni chappal tale masal vaha se jane laga.usne police ko us aadmi ke aane ka ishara kar diya tha.sare police vale chaukanne ho sabhi rasto ko dekhne lage.kul 3 jagaho se yard me ghusa ja sakta tha.

1 motorcycle ki halki-2 aavaz aa rahi thi magar un rasto pe koi gadi aati dikh nahi rahi thi.faraz yard ki deewar ke paas lage saman ke peechhe khada ho andar aane vale raste ko dekh raha tha.tabhi divya ne uske kandhe pe hath rakh us zang lagi gadi ke aage ki or ishara kiya jaha se 1 motorcycle tracks pe chalti hui train ki or aa rahi thi.

"chalak & shatir lagta hai.",faraz fusfusaya & ishare se apne logo ko savdhan kiya.bike savar ne bike train ke pehle dabbe ke samne roki & apni chabhi nikal ke charo taraf dekha.vo kali jacket & jeans me tha & sar pe laga kala helmet & kala visor uske chehre ko pura chhupaye hue tha.train ke aage koi engine nahi tha & pehla dabba darasal aam train ka aakhiri dibba tha jisme guard cabin hota hai.vo usi cabin se andar ghusa & lumbe-2 dag bharta ramesh chand ke cabin me pahuncha joki shuru se teesre number pe tha.

ramesh chand ne apni kamiz ke andar se 1 polythene ka packet nikal use andar rakhe note dikhaye to usne bhi jeb se bahut chhoti si potli khol use heere dikhaye.faraz,professor & divya ye sab nahi dekh pa rahe the magar sabhi kuchh police video me record ho raha tha.deal hote hi video-recording karne vale constable ke ishare pe policevalo ne fauran coach ko gher liya,"hath uthake coach se bahar aao.",faraz ki kadakdar aavaz gunji.

1 pal ko ramesh chand & vo bike savar chaunk gaye lekin sambhalte hi unhone bhagne ki koshish ki jo ki swabhavik tha magar uske baad jo hua kisi ne uski umeed nahi ki thi.bike savar ne furti se apni jacket se 1 pistol nikali & ramesh chand ke seene me mari fir uske nishane pe dibbe me 2 taraf se ghuste constable the.goliya chalat vo apni bike ki taraf bhaga to faraz,divya & professor teeno 1 sath hosh me aye & uski bike ki or bhage.

faraz ne bike pe goliya chalayi ki uske tyres puncture kar de magar uska nishana chuka & goli bike ki seat pe lagi.bike savar bike tak phuncha,pistol ko apni jeb ke havfale kiya & bike pe baith gaya & bike start ki magar thik usi samay uske karib sabse pehle pahunchi divya ne use 1 kick uske sar ke peechhe mari jis se uska helmet gir gaya magar us chalak insan ne 1 kala naqab bhi pehna tha.usne bike gear me daal tezi se aage badhayi to faraz ki 1 goli uski dayi banh me lagi & vo chikha magar bike ko dheema nahi kiya.

aur tab professor dixit joki vaha maujood sabse zyada umra vala insan tha kisi 16-17 baras ke ladke ki furti se kuda & seedha bike savar ke peechhe seat pe gira.khud ko sambhal usne peechhe se use pakad use bike se girane ki koshish ki magar vo aadmi bhi kam nahi tha.1 hath se bike ke throttle ko pura ghumaye dusre se vo apni kohni baar-2 professor ko vaha maar raha tha jaha uske gurde the.professor ne bhi paintara badla & uski jeb me rakhi pistol nikalne ki koshish karne laga.is haal me bhi vo bike ko tezi se bhagaye ja raha tha.jab use laga ki ab professor uski pistol nikal lega tab usne kalabazi dikhate hue bike ke agle tyre ko hawa me khada kar diya.

professor achanak badle is paintre se sambhal nahi paya & pith ke bal gir gaya.police vale goliya chalate uske peechhe bhage magar vo vaha se nikal bhagne me kamyab ho chuka tha.

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"maine kaha tha na ki aaplog kuchh nahi karenge fir kya zarurat thi aapko us se ulajhne ki?!",faraz gusse me baukhlaya hua tha,"..aapko goli na lage isliye mere aadmi peechhe se uspe goli nahi chala pa rahe the.",hospital ke kamre me 1 nurse professor ke zakhmo pe malham laga rahi thi.

"mr.faraz,aap bhi jante hain & main bhi..",divya ki aankho se angare baras rahe the,"..ki hum agar kuchh nahi karte to bhi natija vahi hota.aap is baat ko manane se kyu katra rahe hain ki aapki planning me kami reh gayi thi & aapne ye socha bhi nahi tah ki vo tracks ke raste bike se aa sakta hai.",baat sahi thi & faraz ko bhi is baat pe khij aa rahi thi.vo khamosh ho gaya & khidki se bahar dekhne laga.

"ACP sahab..",professor dixit ko koi khas chot nahi aayi thi bas kharonche thi,"..main mafi chahta hu.aap vaha ke in-charge the & hume aapki kahi baato ko maanana chahiye the magar us waqt main hi uske sabse karib tha & mujhe laga ki agar maine koshish nahi ki to vo humare hath se nikal jayega & isisliye main uske upar kud gaya."

"hun.",faraz ne sar hilaya & kamre se nikal gaya,"..daftar chaliye,dekhe kya hath laga hai humare.",nikalte hue usne kaha.

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Jasjit Pradhan tadke hi uth gaya tha & 7 bajte-2 taiyyar hoke lawn me baitha chai peete hue khabre padh raha tha ki tabhi 1 naukar ne us se aake kuchh kaha,"kya?!& tumne unhe gate pe rok rakha hai!bevkuf!",vo kursi se utha & gate ki or lagbhag bhagne hi laga,"..jao jake memsahab ko bula ke le aao."

"father..!",jasjit muskurata hua us bhale chehre vale shakhs ke paas pahuncha jo apni car se utar uske darwaze ke paas khada tha,"..i'm sorry,father.in logo ne aapko aise roka..i'm really sorry!",father ne apna hath badhaya to hath milate hue vo unhe andar le aaya.dono sath-2 chalte hue uske lawn me aa gaye.

ye insan tha Father Vincent O'Brien,St.Patrick's College ka principal.st.patrick's Devalay ka hi nahi balki mulk ka jana-mana college tha & usme dakhila pana bade fakhra ki baat samjhi jati thi.vaha ke students duniya bhar me faile the & zyadatar bahut kamyab the.unhi me se 1 tha jasjit.jab jasjit college me tha to father vincent principal nahi the balki vaha English padhaya karte the & shayad college ke sabse favourite professor the.

"hello Anjali."

"hello,father.",anjali muskurayi & 1 kursi pe unhe baithne ka ishara kiya,"kaise hain aap?"

"badhiya.",anjali ne unhe juice ka 1 glass thamaya.

"thanx.",vo jasjit se mukhatib hue,"..mafi chahta hu ki is waqt jab tum elections me itne busy ho,tumhe paershan kar raha hu."

"please,father.yu sharminda na karen.aap kya koi gair hain?"

"to beta,kal raat tum aa rahe ho na?"

"zarur father,Annual Charity Ball ko main kaise bhul sakta hu."

"thanx,son.anjali & tum vaha aaoge to aur log bhi ayenge & hum zyada se zyada paise ikattha kar payenge jis se aur zyada zaruratmando ki madad ho payegi."

"father,aapke kisi kaam aa saku ye to mere liye humesha hi bade fakra ki baat rahi hai."

"st.patrick's ko bhi tumpe naaz hai beta &..",vo anjali ki or ghume,"..& tumpe bhi,anjali.jasjit ki kamyabi ki aadhi haqdar tum bhi ho."

"thanx,father.",anjali thoda sharma gayi & nazre jhuka li & fir father se nazar bacha apne pati ko dekha.vo bhi muskura raha tha magar us muskurahat me khushi,pyar ke alawa kuchh aur bhi tha..kya,ye anjali samajh nahi payi & fir father & pati ki guftgu me shamil ho gayi.

vo tasvir badi kaam ki thi.usne uski copy banwa "Afra-tafri me ye potli uske hatho se vahi gir gayi thi & ye paise bhi vahi chhut gaye the.",Faraz ne apni mez pe padi chizo ki or ishara kiya.

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kramashah........