खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 11:03

गतान्क से आगे..............

2 दिन हो गये थे उसे जसजीत प्रधान के घर पे नज़र रखते हुए.उसने पहली मंज़िल का ताला भी खोल लिया था & अपना होटेल छ्चोड़ अब उसी बंगल मे च्छूप के रह रहा था.उसे प्रधान के घर की रोज़ की रुटीन का अंदाज़ा हो गया था.उसने दूरबीन नीचे रखी & छत के कमरे का दरवाज़ा बंद कर पहली मंज़िल पे आ गया.घर पूरा खाली था & वो 1 कमरे मे 1 चादर बिच्छा के सोता था.उस कमरे की खिड़की से भी प्रधान का बंगंग्ला दिखता था.उसे घर मे आने वाले & घरवालो के बाहर जाने का & उनके लौटने का वक़्त तो पता चल गया था लेकिन अब उसे घरवालो का पीछा करना था ये जानने के लिए वो कहा-2 जाते थे & इस काम के लिए उसे कोई सवारी चाहिए थी. वो चादर पे लेट गया & इस नयी उलझन को सुलझाने का रास्ता सोचने लगा.उसका काम 1 मोटरसाइकल से हो जाता लेकिन मोटरसाइकल आएगी कहा से?वो कहीसे उठा सकता था लेकिन फिर अगर गाड़ी के मालिक ने पोलीस मे रपट लिखाई तो गड़बड़ हो जाएगी.उसने तय कर लिया कि कल वो ज़रूर पुरानी गाडियो के डीलर्स & बाज़ार का चक्कर लगाएगा.तभी उसका काम आगे बढ़ सकता था. दिव्या ने अपने मुखबिरो को काम पे लगा दिया था.लूट हाल ही मे हुई थी & डेवाले के सारे अपराधियो को भी ये जानने की बड़ी खलबली मची थी कि आख़िर इतनी बड़ी डकैती को इतनी सफाई से अंजाम दिया किसने था.दिव्या ने फाइल मे इनस्पेक्टर की रिपोर्ट पढ़ी थी,उसने सभी जाने-माने लूटेरो & जो भी शक़ के दायरे मे आया उसे पकड़ के सख्ती से पुचहताच्छ की थी मगर कोई सुराग हाथ नही लगा था.दिव्या & प्रोफेसर दोनो का ही मानना था कि ये काम किसी बाहर के गॅंग का है. दिव्या ने पोलीस नेटवर्क की वेबसाइट का इस्तेमाल करते हुए मुल्क के सभी पोलीस महकमो को उस हार & बाकी ज़ेवरो की तस्वीर की कॉपी & केस के बारे मे ज़रूरी जानकार भेज दी थी.वो लुटेरे निकल तो भागे थे मगर वो उनके लिए लूट के माल को ठिकाने लगाना इतना मुश्किल कर देना चाहती थी कि हार कर उन चूहो मे से किसी 1 को उस बिल से बाहर सर निकलना पड़े जिनमे वो जा छुपे थे. सेठ मोहल लाल की दुकान से लूटे गये सारे के सारे पैसे उसकी काली दौलत का हिस्सा तो थे नही.दिव्या ने सेठ के अकूउंतस को उसके मॅनेजर के साथ बात को जाँचा फिर उसके बॅंक से उसकी पेमेंट्स की डीटेल्स निकलवाई & उसे कुच्छ नोटो के नंबर मिल ही गये.उसने ये जानकारी भी मैल कर दी थी. तफ़तीश बड़ा ही उबाउ काम होता है.कयि बार अपराधी महीनो क्या सालो बाद पकड़ मे आता है.दिव्या को इस बात को अच्छे से जानती थी & वो जानती थी कि सब्र रखने के & चौकन्ना रहने के अलावा वो ज़्यादा कुच्छ नही कर सकती.उसने शहर के सभी दारू के अड्डो का 1 चक्कर लगाया था.ज़ारायंपेशा लोग ऐसी जगहो पे आते ही रहते हैं चाहे वो शराबी हो या ना हो.होता ये है कि ज़्यादातर जुर्म करने वालो के शौक शराब,लड़की & जुआ-ये तीन ही होते हैं & बहुत मुमकिन था कि उन 4 लूटेरो मे से किसी 1 के मुँह से कही कुच्छ निकला हो या फिर लूट की तैय्यारि मे इस्तेमाल गाड़ी & हथ्यारो का इंतेज़ाम करते हुए उन्होने कुच्छ सुराग छ्चोड़ा हो. लुटेरो ने वारदात के बाद लूट मे इस्तेमाल की गयी सफेद मारुति ओमनी वन को 1 सुनसान रास्ते पे छ्चोड़ दिया था.उसके बाद वो शहर से कैसे निकले ये किसी को पता नही था.वो वॅन इस वक़्त फोरेन्सिक लॅब मे रखी थी जहा के टेक्नीशियन्स ने उस वॅन का चप्पा-2 छान मारा था. "कुच्छ काम की चीज़ मिली?",दिव्या ने लब मे घुसते ही सवाल दागा. "जी,एसीपी.",ड्र.अस्थाना ने अपना चश्मा उतारा & दिव्या के साथ आए प्रोफेसर की ओर सवालिया निगाहो से देखा. "ओह..आइ'म सॉरी,डॉक्टर.",दिव्या ने दोनो का तर्रुफ कराया,"..ये हैं ड्र.अस्थाना जोकि हमारे केस के सबूतो की जाँच कर रहे हैं & ड्र.साहब ये हैं प्रोफेसर अजिंक्या दीक्षित.हमारे डीसीपी साहब ने इन्हे कुच्छ दिन हमारे डिपार्टमेंट के काम-काज के तौर तरीक़ो को देखने की इजाज़त दी है.ये इनकी रिसर्च का हिस्सा है." "नाइस टू मीट यू,प्रोफेसर डिक्सिट." "सिर्फ़ प्रोफेसर कहिए,डॉक्टर.",दोनो मर्दो ने हाथ मिलाया. "सर ये है आपकी रिपोर्ट.",ड्र.अस्थाना की जवान,खूबसूरत असिस्टेंट के आते ही प्रोफेसर की बाँछे खिल गयी.लब के फर्श पे थोड़ा पानी गिरा था जिसे उस लड़की ने देखा नही & जैसे ही उसका पाँव उसपे पड़ा वो फिसल गयी.प्रोफेसर बिजली की तेज़ी से आगे बढ़ा & उसके गिरने से पहले ही उसे थाम लिया. "थॅंक्स." "माइ प्लेषर,ब्यूटिफुल लेडी.",दिव्या ने देखा की प्रोफेसर लड़की की कमर थामे उसे सीधा खड़ा करने मे कुच्छ ज़्यादा ही वक़्त ले रहा था & उसे हैरत हुई ये देख के की लड़की भी मुस्कुरा रही थी,उसे बुरा नही लग रहा था..हां शर्म ज़रूर आ रही थी उसे.उसके लाल गाल इस बात की गवाही दे रहे थे.प्रोफेसर ने लड़की को सीधा खड़ा किया & जब वो जाने लगी तो उसे रोका & उसके गाल पे गिर आई उसके बाल की एक लात को उसके कान के पीछे कर दिया.दिव्या ने थोड़ा ज़ोर से अपना गला सॉफ किया तो लड़की प्रोफीसोर का शुक्रिया अदा करती मुस्कुराती वाहा से चली गयी.दिव्या को लड़की पे गुस्सा भी आया साथ ही कुच्छ अजीब सा महसूस हुआ.उसे प्रोफेसर पे तो गुस्सा आ ही रहा था मगर उस से भी ज़्यादा लड़की पे.ऐसा क्यू? "ये देखिए ऑफीसर हमे वॅन की 1 सीट से एक केमिकल के ट्रेसस मिले हैं जिसे आमतौर पे ब्रांचॉडिलेटर कहा जाता है.",ड्र.अस्थाना की आवाज़ ने उसका ध्यान केस पे वापस लाया. "ये किस काम आता है?" "जब ये हमारी सांस के साथ अंदर जाता है तो हमारी सांस के रास्ते या एरवे को फैला सांस लेना आसान कर देता है." "डॉक्टर,ये दवा है क्या?" "राइट दिव्या जी.ये अस्थमा इनिलर पंप्स मे पाया जाता है." "यानी 1 लूटेरा दमे का मरीज़ है." "ऐसा भी तो हो सकता है कि लुटेरो ने वॅन जहा से खरीदी हो यहा जहा ठीक कराई हो वाहा के किसी आदमी के पंप के ट्रेसस हो ये?",प्रोफेसर अब संजीदा हो चुका था. "वेरी गुड पॉइंट,प्रोफेसर." "ऐसा नही हो सकता." "इतने यकीन से कैसे कह सकती हैं आप?",प्रोफेसर ने मुस्कुरा के दिव्या को देखा. "ये गाड़ी चुराई गयी थी." "क्या?" "जी.इसे 1 महीना पहले चुराया गया & फिर रंगा गया.इस वॅन के चॅसी नंबर से इसके असली मालिक का पता चल गया है,उसने वारदात से 1 महीने पहले इसकी चोरी की रिपोर्ट कराई थी.",दिव्या ने रिपोर्ट के आगे के पन्ने को सामने किया,"..इसी लब की रिपोर्ट है.वॅन वारदात के कम से कम 1 महीने पहले रंगी गयी.उस से पहले इसका रंग गहरा नीला था.वॅन के नेगीने की ट्यूनिंग कराई गयी थी वो भी 1 महीने पहले.उसके बाद लुटेरो ने वॅन को कही बाहर खड़ा कर के छ्चोड़ा ताकि उसका नया पैंट थोड़ा पुराना लगने लगे.हां,वन के टाइर्स बिल्कुल नये हैं & वारदात से 1 दिन पहले बदले गये थे क्यूकी वो ज़रा भी नही घिसे थे." "इसका मतलब है कि लूटेरे दुकान के कही आस-पास से ही आए थे.",प्रोफेसर सोचते हुए अपने उपरी होठ के उपर अपने दाए हाथ के अंगूठा & पहली उंगली ऐसे चला रहा हो जैसे मुछ वाले अपनी मुछ सवारते हैं. "थॅंक यू,डॉक्टर.कुच्छ और पता चले तो मुझे जल्द से जल्द बताईएएगा." "ज़रूर." "प्रोफेसर,आप 1 बात कान खोल के सुन लें.."थोड़ी देर बाद दोनो जीप मे बैठे लब से वापस जा रहे थे. "बोलिए,हुज़ूर.मेरे कान तो हमेशा ही खुले रहते हैं." "जब तक आप मेरे साथ हैं आपको मेरे डिपार्टमेंट की मर्यादा का ख़याल रखना होगा." "हां,ठीक है.पर मैने ऐसा क्या किया?मैने तो किसी को मुझे घूस देने से मना नही किया.",दिव्या ने खा जाने वाली निगाहो से उसे देखा,"..आइ मीन पोलिसेवालो का तो धर्म ही है घुस लेना,नही....ओह्ह..सॉरी..अब मज़ाक नही.बिल्कुल संजीदा हू..बोलिए मैने क्या किया?" "ड्र.अस्थाना की असिस्टेंट के साथ आप क्या कर रहे थे?" "अरे कुच्छ कर ही कहा पाया!अपनी तो किस्मत खराब है.कोई हाथ लगाने नही देता तो कोई हाथ से फिसल जाता है.",प्रोफेसर ने दिव्या के जिस्म को निहारा.पता नही ऐसा क्या था उन नज़रो मे की दिव्या की धड़कने तेज़ हो जाती थी,उसे बहुत गुस्सा आता था जब भी प्रोफेसर उसे ऐसे देखता था. "मुझे लगता है आप उसके कुच्छ ज़्यादा ही करीब जा रहे थे." "हां तो उसे तो बहुत अच्छा लग रहा था.आख़िर उसे गिरने से बचाया था मैने & उसने कोई शिकायत भी नही की." "जब तक आप मेरे साथ हैं आप किसी और लड़की के करीब नही जाएँगे." "जो हुक्म,मल्लिका!",प्रोफेसर ने सीट पे बैठे-2 गुलाम की तरह सिर झुकाया,"..बंद केवल आपके करीब रहेगा!",इस आदमी से कुच्छ कहना फ़िज़ूल था!दिव्या ने कोई जवाब नही दिया & सामने रास्ते पे नज़रे गढ़ा दी.1 बात तो थी,प्रोफेसर के साथ उसका काम आसान हो गया था.कल सेठ & आज रिपोर्ट के बाद उसका ये कहना कि अपराधी कही दुकान के पास से ही आए थे,अस्थमा की दवा के साथ उसे ये भी 1 अहम सुराग मिला था..लेकिन ये आदमी ऐसा क्यू है?काश ज़रा गंभीर,ज़रा संजीदा होता तो शायद वो..दिव्या ने उस ख़याल को अधूरा ही छ्चोड़ दिया. ------------------------------

--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- सुबह की किर्ने खिड़की के अधखुले पर्दो से अंदर दाखिल हो उस पुराने स्टाइल के डिज़ाइनर पलंग पे सोई लड़की पे पड़ी.लड़की का गेहुआ रंग भोर की पहली किर्णो से चमक उठा.उसके जिस्म पे ब्लाउस & पेटिकोट थे जो बिल्कुल बेतरतीब थे.लड़की का बाया घुटना उपर मुड़ा हुआ था & पेटिकोट उसकी कमर तक आ गया था & उसकी मस्त जंघे नुमाया थी.लड़की का कद बहुत छ्होटा था,बस 5 फिट से 1-2 इंच उपर होगी.उसके ब्लाउस के उपर के 2 बटन खुले थे & गहरी नींद मे उसका उपर-नीचे होता सीना बड़ा दिलकश लग रहा था.लड़की की छातियाँ थी भी कमाल की.कम से कम 38 इंच की तो ज़रूर होंगी.लड़की का चेहरा बड़ा खूबसूरत था.छ्होटी सी नाक थोड़ा उपर को उठी हुई देख चूम लेने का दिल करता था.लड़की का बदन थोड़ा भारी था,उसके ब्लाउस & पेटिकोट के बीच से दिखता उसका पेट इस बात की गवाही दे रहा था.उसके चेहरे से उसकी उम्र 22-23 साल से ज़्यादा नही लग रही थी. सूरज की किर्णो ने पाँव थोड़ा और पसारे & अब उसके प्यारे चेहरे को चूमने लगी तो उसकी नींद खुली.वो उठ बैठी & हाथ उपर ले जाते हुए अंगड़ाई ली.उसकी ऊँची छातियाँ थोड़ा और उभर गयी & पेटिकोट के उपर से उसकी बगल मे कमर का माँस बड़े दिलकश अंदाज़ मे थरथराया.अगर कोई मर्द उस वक़्त वाहा मौजूद होता तो उस लड़की को बाहो मे ज़रूर भर लेता.अंगड़ाई लेते ही उसे जैसे कुच्छ याद आया & उसने अपने बिस्तर पे देखा,"साला!अभी तक नही आया!" वो बिस्तर से उतरी & बिना अपना लिबास ठीक किए कमरे से बाहर निकल गयी.कमरे से निकल लड़की आगे बढ़ी तो सामने से 1 मुस्टंड सा आदमी चला आ रहा था,"क्यू बे?वो साला आया नही अभी तक?" "आ गये दीदी.पीछे हैं.",उसने आँखे झुकाके जवाब दिया.लड़की तेज़ कदमो से उधर चल पड़ी.ये 1 पुरानी हवेली थी & काफ़ी बड़ी लेकिन ज़रूरत का हर मॉडर्न साज़ो-समान & सजावट यहा थी.बड़ा अनूठा लगता था,100 साल से भी ज़्यादा पुरानी दीवारो के बीच आजके ज़माने की चीज़ें.लड़की उस आदमी की बताई जगह पे हवेली के पिच्छले हिस्से पे पहुँची जहा छत पे 1 स्विम्मिंग पूल बना हुआ था.लड़की स्विम्मिंग पूल के दूसरी तरफ बने कमरो मे से एक मे घुसी,अंदर 1 हॅटा-कॅटा,घुटे सर वाला जवान 1 कुर्सी पे बैठा था. उसे घेरे 4-5 मुस्टंडे बैठे थे जो उस लड़की को देखते ही उठ खड़े हुए & सर झुकाए कमरे से उसे सलाम करते निकलने लगे. ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- क्रमशः........

raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 11:03

KHEL KHILADI KA paart--12

gataank se aage.............. 2 din ho gaye the use Jasjit Pradhan ke ghar pe nazar rakhte hue.usne pehli manzil ka tala bhi khol liya tha & apna hotel chhod ab usi bungle me chhup ke reh raha tha.use pradhan ke ghar ki roz ki routine ka nadaza ho gaya tha.usne durbin neeche rakhi & chhat ke kamre ka darwaza band kar pehli manzil pe aa gaya.ghar pura khali tha & vo 1 kamre me 1 chadar bichha ke sota tha.us kamre ki khidki se bhi pradhan ka bungla dikhta tha.use ghar me aane vale & gharwalo ke bahar jane ka & unke lautne ka waqt to pata chal gaya tha lekin ab use gharwalo ka peechha karna tha ye jaanane ke liye vo kaha-2 jaate the & is kaam ke liye use koi sawari chahiye thi. vo chadar pe let gaya & is nayi uljhan ko suljhane ka rasta sochne laga.uska kaam 1 motorcycle se ho jata lekin motorcycle aayegi kaha se?vo kahise utha sakta tha lekin fir agar gadi ke malik ne police me rapat likhayi to gadbad ho jayegi.usne tay kar liya ki kal vo zarur purani gadiyo ke dealers & bazar ka chakkar lagayega.tabhi uska kaam aage badh sakta tha. Divya ne apne mukhbiro ko kaam pe laga diya tha.loot haal hi me hui thi & Devalay ke sare apradhiyo ko bhi ye jaanane ki badi khalbali machi thi ki aakhir itni badi dacoity ko itni safai se anjam diya kisne tha.divya ne file me inspector ki report padhi thi,usne sabhi jane-mane lootero & jo bhi shaq ke dayre me aya use pakad ke sakhti se puchhtachh ki thi magar koi surag hath nahi laga tha.divya & Professor dono ka hi maanana tha ki ye kaam kisi bahar ke gang ka hai. divya ne police network ki website ka istemal karte hue mulk ke sabhi police mehkamo ko us haar & baki zevaro ki tasvir ki copy & case ke bare me zaruri jankar bhej di thi.vo lutere nikal to bhage the magar vo unke liye loot ke maal ko thikane lagana itna mushkil kar dena chahti thi ki haar kar un chuho me se kisi 1 ko us bil se bahar sar nikalna pade jinme vo ja chhupe the. Seth Mohal Lal ki dukan se loote gaye sare ke sare paise uski kali daulat ka hissa to the nahi.divya ne seth ke acoounts ko uske manager ke sath bath ke jancha fir uske bank se uski payments ki details nikalwayi & use kuchh noto ke number mil hi gaye.usne ye jankari bhi mail kar di thi. taftish bada hi ubau kaam hota hai.kayi baar apradhi mahino kya salo baad pakad me aata hai.divya ko is baat ko achhe se janti thi & vo janti thi ki sabra rakhne ke & chaukanna rehne ke alawa vo zyada kuchh nahi kar sakti.usne shehar ke sabhi daru ke addo ka 1 chakkar lagaya tha.zarayampesha log aisi jagaho pe aate hi rehte hain chahe vo sharabi ho ya na ho.hota ye hai ki zyadatar jurm karne valo ke shauk sharab,ladki & jua-ye teen hi hote hain & bahut mumkin tha ki un 4 lootero me se kisi 1 ke munh se kahi kuchh nikla ho ya fir loot ki taiyyari me istemal gadi & hathyaro ka intezam karte hue unhone kuchh surag chhoda ho. lutero ne vardat ke baad loot me istemal ki gayi safed Maruti Omni van ko 1 sunsan raste pe chhod diya tha.uske baad vo shehar se kaise nikle ye kisi ko pata nahi tha.vo van is waqt forensic lab me rakhi thi jaha ke technicians ne us van ka chappa-2 chhan mara tha. "kuchh kaam ki chiz mili?",divya ne lab me ghuste hi sawal daga. "ji,ACP.",Dr.Asthana ne apna chashma utara & divya ke sath aye professor ki or sawaliya nigaho se dekha. "oh..i'm sorry,doctor.",divya ne dono ka tarruf karaya,"..ye hain dr.asthana joki huamre case ke sabuto ki janch kar rahe hain & dr.sahab ye hain Professor Ajinkya Dixit.huamre DCP sahab ne inhe kuchh din humare department ke kaam-kaaj ke taur tariko ko dekhne ki ijazat di hai.ye inki research ka hissa hai." "nice to meet you,professor dixit." "sirf professor kahiye,doctor.",dono mardo ne hath milaya. "sir ye hai aapki report.",dr.asthana ki jawan,khubsurat assistant ke aate hi professor ki banchhen khil gayi.lab ke farsh pe thoda pani gira tha jise us ladki ne dekha nahi & jaise hi uska panv uspe pada vo fisal gayi.professor bijli ki tezi se aage badha & uske girne se pehle hi use tham liya. "thanx." "my pleasure,beautiful lady.",divya ne dekha ki professor ladki ki kamar thame use seedha khada karne me kuchh zyada hi waqt le raha tha & use hairat hui ye dekh ke ki ladki bhi muskura rahi thi,use bura nahi lag raha tha..haan sharm zarur aa rahi thi use.uske laal gaal is baat ki gawahi de rahe the.professor ne ladki ko seedha khada kiya & jab vo jane lagi to use roka & uske gaal pe gir aayi uske baal ki 1 lat ko uske kaan ke peechhe kar diya.divya ne thoda zor se apna gala saaf kiya to ladki profeesor ka shukriya ada karti muskuarti vaha se chali gayi.divya ko ladki pe gussa bhi aya sath hi kuchh ajib sa mehsus hua.use professor pe to gussa aa hi raha tha magar us se bhi zyada ladki pe.aisa kyu? "ye dekhiye officer hume van ki 1 seat se 1 chemical ke traces mile hain jise aamtaur pe bronchodilator kaha jata hai.",dr.asthana ki aavaz ne uska dhyan case pe vapas laya. "ye kis kaam aata hai?" "jab ye humari sans ke sath andar jata hai to humare sans ke raste ya airway ko faila sans lena aasan kar deta hai." "doctor,ye dawa hai kya?" "right divya ji.ye asthma inhaler pumps me paya jata hai." "yani 1 lootera dame ka mariz hai." "aisa bhi to ho sakta hai ki lutero ne van jaha se kharidi ho yaha jaha thik karayi ho vaha ke kisi aadmi ke pump ke traces ho ye?",professor ab sanjida ho chuka tha. "very good point,professor." "aisa nahi ho sakta." "itne yakin se kaise keh sakti hain aap?",professor ne muskura ke divya ko dekha. "ye gadi churayi gayi thi." "kya?" "ji.ise 1 mahina pehle churaya gaya & fir ranga gaya.is van ke chassis number se iske asli malik ka pata chal gaya hai,usne vardat se 1 mahine pehle iski chori ki report karayi thi.",divya ne report ke aage ke panne ko samne kiya,"..isi lab ki report hai.van vardat ke kam se kam 1 mahine pehle rangi gayi.us se pehle iska rang gehra neela tha.van ke negine ki tuning karayi gayi thi vo bhi 1 mahine pehle.uske baad lutero ne van ko kahi bahar khada kar ke chhoda taki uska naya paint thoda purana lagne lage.haan,van ke tires bilkul naye hain & vardat se 1 din pehle badle gaye the kyuki vo zara bhi nahi ghise the." "iska matlab hai ki lootere dukan ke kahi aas-paas se hi aye the.",professor sochte hue apne upri hoth ke upar apne daye hath ke angutha & pehli ungli aise chala raha ho jaise muchh vale apni muchh sawarte hain. "thank you,doctor.kuchh aur pata chale to mujhe jald se jald bataiyega." "zarur." "professor,aap 1 baat kaan khol ke sun len.."thodi der baad dono jeep me baithe lab se vapas ja rahe the. "boliye,huzur.mere kaan to humesha hi khule rehte hain." "jab tak aap mere sath hain aapko mere department ki maryada ka khayal rakhna hoga." "haan,thik hai.par maine aisa kya kiya?maine to kisi ko mujhe ghus dene se mana nahi kiya.",divya ne kha jane vali nigaho se use dekha,"..i mean policevalo ka to dharm hi hai ghus lena,nahi....ohh..sorry..ab mazak nahi.bilkul sanjida hu..boliye maine kya kiya?" "dr.asthana ki assistant ke sath aap kya kar rahe the?" "are kuchh kar hi kaha paya!apni to kismat kharab hai.koi hath lagane nahi deta to koi hath se fisal jata hai.",professor ne divya ke jism ko nihara.pata nahi aisa kya tha un nazro me ki divya ki dhadkane tez ho jati thi,use bahut gussa ata tha jab bhi professor use aise dekhta tha. "mujhe lagta hai aap uske kuchh zyada hi karib ja rahe the." "haan to use to bahut achha lag raha tha.aakhir use girne se bachaya tha maine & usne koi shikayat bhi nahi ki." "jab tak aap mere sath hain aap kisi aur ladki ke karib nahi jayenge." "jo hukm,mallika!",professor ne seat pe baithe-2 ghulam ki tarah sir jhukaya,"..band kewal aapke karib rahega!",is aadmi se kuchh kehna fizul tha!divya ne koi jawab nahi diya & samne raste pe nazre gada di.1 baat to thi,professor ke sath uska kaam asan ho gaya tha.kal seth & aaj report ke baad uska ye kehna ki apradhi kahi dukan ke paas se hi aye the,asthma ki dawa ke sath use ye bhi 1 aham surag mila tha..lekin ye aadmi aisa kyu hai?kash zara gambhir,zara sanjida hota to shayad vo..divya ne us khayal koa dhura hi chhod diya. ------------------------------

--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- subah ki kirne khidki ke adkhule pardo se andar dakhil ho us purane style ke designer palang pe soyi ladki pe padi.ladki ka gehua rang bhor ki pehli kirno se chamak utha.uske jism pe blouse & petticoat the jo bilkul betartib the.ladki ka baya ghutna upar muda hua tha & petticoat uski kamar tak aa gaya tha & uski mast janghe numaya thi.ladki ka kad bahut chhota tha,bas 5 ft se 1-2 inch upar hogi.uske blouse ke upar ke 2 button khule the & gehri nind me uska upar-neeche hota seena bada dilkash lag raha tha.ladki ki chhatiya thi bhi kamal ki.kamse kam 38 inch ki to zarur hongi.ladki ka chehra bada khubsurat tha.chhoti si naak thoda upar ko uthi hui dekh chum lene ka dil karta tha.ladki ka badan thoda bhari tha,uske blouse & petticoat ke beech se dikhta uska pet is baat ki gawahi de raha tha.uske chehre se uski umra 22-23 saal se zyada nahi lag rahi thi. suraj ki kirno ne panv thoda aur pasare & ab uske pyare chehre ko chumne lagi to uski nind khuli.vo uth baithi & hath upar le jate hue angdayi li.uski oonchi chhatiya thoda aur ubhar gayi & petticoat ke upar se uski bagal me kamar ka mans bade dilkash andaz me thartharaya.agar koi mard us waqt vaha maujood hota to us ladki ko baaho me zarur bhar leta.angdayi lete hi use jaise kuchh yaad aya & usne apne bistar pe dekha,"sala!abhi tak nahi aya!" vo bistar se utri & bina apna libas thik kiye kamre se bahar nikal gayi.kamre se nikal ladki aage badhi to samne se 1 mustand sa aadmi chala aa raha tha,"kyu be?vo sala aaya nahi abhi tak?" "aa gaye didi.peechhe hain.",usne aankhe jhukake jawab diya.ladki tez kadmo se udahr chal padi.ye 1 purani haweli thi & kafi badi lekin zarurat ka har modern sazo-saman & sajawat yaha thi.bada anutha lagta tha,100 saal se bhi zyada purani deewaro ke beech aajke zamane ki chizen.ladki us aadmi ki batayi jagah pe haweli ke pichhle hisse pe pahunchi jaha chhat pe 1 swimming pool bana hua tha.ladki swimming pool ke dusri taraf bane kamro me se 1 me ghusi,andar 1 hatta-katta,ghute sar vala jawan 1 kursi pe baitha tha. use ghere 4-5 mustande baithe the jo us ladki ko dekhte hi uth khade hue & sar jhukaye kamre se use salam karte nikalne lage. ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- क्रमशः...........

raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 04 Nov 2014 11:04

गतान्क से आगे..............

पठान सूट पहना वो गंजा भी उठ खड़ा हुआ,"साले!हरामज़ादे!",लड़की जितनी खूबसूरत थी उसकी ज़ुबान उतनी ही गंदी!

"तू तो कल शाम को आने को बोल के गया था,कुत्ते!",वो उसके पास आई & अपने पंजो पे उचक उसके कुर्ते के कॉलर को पकड़ लिया,"..तेरे चक्कर मे ये सारी पहन के बैठी थी अब आएगा,अब आएगा & तू कहा अपनी मरा रहा था!",उसने उसे एक थप्पड़ लगाया.

"साली!पहले तो बस ज़बान चलाती थी,अब हाथ भी चलाने लगी.उसने लड़की के दोनो बाज़ू पकड़ उसे उसकी पीठ के पीछे बाँध दिया लड़की छूटने के लिए कसमसा रही थी &

उसकी आँखो से अंगारे बरस रहे थे.लड़का झुका & लड़की के गुलाबी होंठ चूम लिए.लड़की ने उसके होंठो पे काट लिया.

"आहह..!",लड़के ने उसे परे धकेला तो वो हंसते हुए खड़ी हो गयी.लड़के के उपरी होंठ पे खून की एक बूँद च्चालच्छला आई थी.उसने उसे ज़ुबान से चाता & लड़की को देखा.वो अभी भी पेटिकोट & ब्लाउस मे थी & मस्त लग रही थी.वो आगे बढ़ा & लड़की को अपनी बाहो मे उठा कमरे मे पड़े पलंग पे पटक दिया & उसके उपर सवार हो गया & उसकी गर्दन चूमने लगा.

"पहले ये बता देर क्यू हुई तुझे?",लड़की ने उसके बाल पकड़ उसका सर उठाया तो लड़के ने दाए हाथ से उसके पेटिकोट को उसकी कमर तक कर उसकी बाई जाँघ को सहलाया.

"साला वो हराम जादा पूरे पैसे लेके नही आया था.बैठ के उसे थोड़ा दवा पिलाई तब लाइन पे आया.",उसने फिर से उसकी गर्दन पे अपनी ज़ुबान फेरना शुरू कर दिया.

"तो फोन नही कर सकता था?मैं यहा जल रही थी!",लड़की ने उसके कुर्ते को उपर उठा उसकी पीठ पे अपने हाथ चला शुरू कर दिया था.

"अरे दिमाग़ से उतर गया उस गधे के चक्कर मे!",वो उसकी गंद की दाई फाँक मसल रहा था.

"उउन्न्ञन्..!",लड़की ने अपनी बाई टांग गंजे के जिस्म के नीचे से निकली & उसकी कमर पे चढ़ा दी & उसके कुर्ते को निकालने लगी.कुर्ता निकलते ही लड़के का कसरती सीना उसकी नज़रो के सामने आ गया.उसने उसे फ़ौरन पलट के अपने नीचे किया & लड़के के चिकने सीने पे हाथ फिरते हुए चूमने लगी.लड़के का दया हाथ तो उसकी गंद से चिपका हुआ था & बया लड़की के बालो मे घूम उसके सर को सहला रहा था.

"उनह..उउम्म्म्म....!",लड़की उसकी छाती पे चूमते हुए बीच-2 मे हल्के-2 काट रही थी & उसकी ये हरकत लड़के को दीवाना कर रही थी.

लड़की ने अपने घुटने उस गंजे के दोनो तरफ जमाए & अपनी चूत उसके पाजामे मे खड़े लंड पे रगड़ते हुए उसके सीने को चूमने,काटने लगी.लड़का उसकी चिकनी जाँघो को सहलाए जा रहा था.

"साले..",लड़की ने उसके सीने से अपना सर उठा लिया,"..बस मेरी राणे सो ही चिपका रह हर समय!",वो शोखी से मुस्कुराते हुए उसके सीने पे अपने हाथ फिरा रही थी.

"क्या करू,रानो मेरी जान!",लड़के ने उसे पलट के अपने नीचे कर लिया & उसकी बाई टांग को हवा मे उठा लिया,"..तेरी राणे है ही इतनी क़ातिल!",वो उसकी उठी टांग के तलवे को चूमने लगा तो रानो गुदगुदी होने से खिलखिला उठी & बिस्तर पे कसमसाते हुए उसकी गिरफ़्त से अपनी टांग छुड़ाने की कोशिश करने लगी मगर वो गंजा उसके पाँव की उंगलियो को चूमता हुआ उसके घुटने की तरफ बढ़ रहा था.

उसका बाया हाथ रनो के पेटिकोट के अंदर घुस गया & उसकी झांतो को सहलाने लगा.रानो उसके फौलादी सीने को सहलाते हुए आहे भरने लगी.लड़का थोड़ी देर बाद अपनी ज़ुबान उसकी अन्द्रुनि जाँघ से चिपकाए वाहा पे चूस रहा था.

"हाईईईई.....आआहह कुत्ते,काट मत..!",रानो ने उसके सर को अपनी चूत की ओर ठेला. लड़का उसकी जाँघो को फैला उसकी चूत निहारने लगा.सलीके से तिकोने के आकर मे कटी झांते के बीच उसकी नाज़ुक सी संकरी चूत से पानी की बूंदे रिस रही थी.

"तू तो पूरी गीली है,रानो.",लड़के ने अपनी जीभ चूत से लगाई & उसके रस को चाटने लगा.रानो ने अपनी कमर उच्छलते हुए अपनी दोनो जंघे उसके चौड़े कंधो पे चढ़ा दी & उसके सर को उनकी क़ैद मे भींच अपनी चूत को उसके मुँह पे धकेलने लगी.

"आहह..बल्लू....और चाट मेरे कुत्ते.....हाईईईई!",रानो झाड़ गयी.कल शाम से ही वो अपने प्रेमी के इंतेज़ार मे बैठी थी & उसके अरमान जैसे ही पूरे होते दिखे उसका बदन फ़ौरन मस्ती के समंदर मे डूब गया.उसकी चूत से रस की धार बह रही थी जिसे बल्लू सचमुच किसी कुत्ते की तरह अपनी लपलपाति जीभ से चाट रहा था.सारा रस चाटने के बाद वो फिर से रानो की चमकती जाँघो को चूमने लगा.

"बल्लू,गधे!",रनो उठ बैठी,"..मेरा बाकी बदन भी है चूमने के लिए.",बल्लू हंसता हुआ उठ अपने घुटनो पे हो गया & अपनी महबूबा की आँखो मे देखता हुआ उसके पेटिकोट की डोरी को ढीला करने लगा.डोरी खुलते ही उसने पेटिकोट को उठाके उसके सर के उपर से निकाला & फिर ब्लाउस के उपर से उसकी मस्त छातियो के आकर पे अपने हाथ फिराए.

"ब्लाउस खोल."

रानो ने अपने आशिक़ की ओर शोख निगाहो से देखा & अपने ब्लाउस के बटन्स खोल अपने हाथ पीछे बिस्तर से टीका के बैठ गयी.उसने नीचे ब्रा नही पहना था.बल्लू ने ब्लाउस को उसके उभारो से हटाया & उन मस्त छातियो का दीदार किया,"एक बात समझ नही आती,यार!"

"क्या?",बल्लू उसकी छातियो को सहलाते हुए हल्के-2 दबा रहा था.

"इतनी सी उमर मे पहले तो तेरी छातियो इतनी बड़ी हो गयी हैं लेकिन साली फिर भी ज़रा भी नही झूली हैं!",बल्लू झुका & उसके हल्के भूरे रंग के दाए निपल को चॅटा.

"उम्म्म्म..!",रानो ने आह भारी,"बड़ा तो ये तेरे ही कारण हुई हैं.पिच्छले 3 सालो से कोई दिन ऐसा गया है जब तू यहा हो & तूने इन्हे मसला ना हो..ऊव्ववव!",बल्लू ने उसकी दोनो चूचियो को एक साथ दबा उसके निपल्स को बारी-2 से ज़ोर से चूसा था.रानो के बदन मे बिजली दौड़ गयी.वो अपने घुटनो पे खड़ी हो गयी,बल्लू वैसे ही उसकी छातियो पे अपना मुँह लगाए हुए था.

"और झुकी इसलिए नही हैं..",उसने हाथ नीचे ले जा उसके पाजामे की डोर को खींच हाथ अंदर डाला & उसके लंड को पकड़ लिया,"..क्यूकी जितनी वर्ज़िश तू रोज़ करता है उस से कही ज़्यादा मैं करती हू.",उसने लंड को तेज़ी से हिलना शुरू कर दिया था.सच कह रही थी रानो.उसका जिस्म देख ऐसा नही लगता था मगर वो रोज़ वर्ज़िश करती थी & बड़ी फुर्तीली थी.उसने बाल पकड़ बल्लू का सर अपने सीने से उठाया & फिर झुक के उसके लंड को अपने मुँह मे ले लिया.