खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:21

खेल खिलाड़ी का पार्ट--28

गतान्क से आगे ......

"कैसे पहुचाएँगे उसके परिवार को नुकसान..उफ्फ..?",राम्या डेस्क पे पड़ी उनके धक्के झेल रही थी.उसकी छल्छलाती चूचिया भाय्या जी को ललचा रही थी.उन्होने उन्हे दबोच लिया & दबाने लगे.उनकी उंगलिया उसके निपल्स को मसल रही थी.शाम का वक़्त था & भाय्या जी का कॅबिन ज़रा अलग-थलग था वरना राम्या की मस्तानी आहें कोई भी सुन लेता.

"वक़्त आने पे टीवी पे सुन लेना.",भाय्या जी मुस्कुराए & आगे झुक के तेज़ धक्के लगाने लगे,"..अब ज़रा दूसरी बात करो.",राम्या उनका इशारा समझ गयी & मुस्कुराइ.भाय्या जी की माँग से उसे 1 बार फिर मस्ती चढ़ने लगी थी.

"कल रात दीपक ने मुझे चोदा.",भाय्या जी का चेहरा लाल हो गया था & उनकी आँखो मे बस वासना थी,"..अब तो मुझे उसका पतला लंड महसूस भी नही होता,भाय्या जी..मुझे तो बस आपका मोटा,तगड़ा लंड ही रास आता है अब....आहह....थोड़ा धीरे करिए ना!",राम्या ने मुँह बनाके बड़ी मासूमियत से कहा.इस बात ने आग मे घी का काम किया & भाय्या जी उसकी मोटी जंघे पकड़े & ज़ोरदार तरीके से उसकी चुदाई करने लगे.

"धीरे क्यू?तुम्हे तो ये लंड रास आता है ना बा!ये लो.."

"ऊव्ववव..!"

"ये लो..!",तमतमायए चेहरे के साथ भाय्या जी अपनी प्रेमिका की चूत बड़ी बेरेहमी से चोद रहे थे & राम्या को भी दर्द हो रहा था मगर उस से भी कही ज़्यादा मज़ा आ रहा था.राज्य का इतना बड़ा राजनेता उसके जिस्म,उसकी चूत का दीवाना था!चाहता तो कोई भी जवान,कमसिन लड़की उसके बिस्तर की शोभा बन सकती थी लेकिन उसने उसे चुना था.."उउन्न्ह..हॅयियी....ओफफफफ्फ़...ऊहह....!"

राम्या की चूत ने फिर से पानी बहाना शुरू कर दिया था.उसने बेचैन हो भाय्या जी के हाथ पकड़ उन्हे अपने उपर गिरा लिया & उन्हे बाहो मे भर चूमने लगी.भाय्या जी ने उसे डेस्क से उठा के बिठा लिया & अपनी बाहो मे झूला झूलते आहे भरते चोदने लगे.वो अपनी मंज़िल के बहुत करीब थे.तभी राम्या ने चीख मारी & अपना सर पीछे झुका दिया & आँखे बंद कर ली.उसके चेहरे को देखने से ऐसा लगता था मानो वो बहुत तकलीफ़ मे हो मगर हक़ीक़त ये थी कि वो झाड़ रही थी.उसके चेहरे के भाव देख भाय्या जी भी अपने उपर काबू ना रख सके & उनका बदन झटके खाने लगा.वो भी अपनी प्रेमिका की चूत को अपने वीर्य से भरते हुए झाड़ गये.

"मम्मी..!",डरते-2 श्लोक ने नीना के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया.

"हटो..",अपने उपर झाड़ रहे महेश को नीना ने धकेला,"..मैने कहा था ना कि कोई आ जाएगा!"..नीना जल्दी-2 कपड़े पहन रही थी,"..जल्दी से बाथरूम मे जाओ.",महेश ने अपने कपड़े समेटे & बाथरूम मे घुस गया.

"अरे आ गया बेटा.",नीना ने श्लोक के बाल सहलाए.

"मम्मी.."

"हां,बेटा."

"वो आप ऐसे क्यू कराह रही थी?",नीना के चेहरे का रंग उड़ गया मगर उसने खुद को संभाला.

"वो..बेटा..म-मैं सो गयी थी..कोई बुरा सपना देख रही थी..उसी मे नींद मे कराही होंगी..तुमहरे खटखटाने से ही तो मेरी आँख खुली.",नीना बेटे के कंधे पे हाथ रख उसके कमरे की ओर बढ़ चली.

"इस हफ्ते तुम्हारा हिस्टरी का टेस्ट है ना?"

"हां."

"उसकी तैय्यारि शुरू की?"

"अभी नही."

"चलो,मुझे दिखाओ कौन-2 से चॅप्टर्स आने वाले हैं?",नीना बेटे के साथ उसके कमरे मे घुस गयी & दरवाज़ा लगा लिया.मौके का फ़ायदा उठा के महेश वाहा से निकल लिया.

"फ्री हो?",दिव्या ने अभी घर मे कदम रखा ही था की अजीत का फोन आ गया.

"हां.",जब तक दिव्या कुच्छ और बोलती फोन कट गया.दिव्या अजीत के बारे मे सोचते हुए अपनी कमीज़ उतारने लगी की दरवाज़े की घंटी बज उठी.

"ऑफ..ओह..ये बहादुर भी ना!कितनी बार कहा है की जब तक मैं ना बोलू आने की ज़रूरत नही लेकिन इसे तो बस जल्दी काम निबटाने की पड़ी रहती है.",दिव्या बड़बड़ाई.उसकी शर्ट के सारे बटन्स खुले हुए थे & वो वैसे ही दरवाज़े तक आ गयी.

"बहादुर!थोड़ी देर मे आना.",उसने बिना दरवाज़ा खोले कहा.

"मेडम,बहादुर नही मैं हू.",अजीत की आवाज़ सुनते ही दिव्या ने फ़ौरन दरवाज़ा खोला.

"ओह..आइ'म सॉरी!मुझे लगा बहादुर है.",अजीत अंदर दाखिल हुआ & दरवाज़ा बंद कर दिया.उसकी निगाहे दिव्या की खुली शर्ट से दिख रहे उसके काले ब्रा मे से झँकते क्लीवेज & सपाट पेट पे घूमने लगी.

"क्या देख रहे हो?"

"तुम्हारा दरवाज़ा खोलने का अंदाज़ तो बड़ा क़ातिलाना है!",अजीत मुस्कुराया तो दिव्या ने अपनी शर्ट उतार दी.

"और मेहमआनो का इस्तेक्बाल करने का अंदाज़?",दिव्या ने कमर पे हाथ रख शोखी से उसे देखा.

"उसका तो जवाब नही.",अजीत ने उसे बाहो मे कस लिया & दोनो प्रेमी 1 दूसरे को बड़ी शिदत से चूमने लगे.1 पल को अजीत की आँखो के सामने मेघना का मासूम चेहरा घूम गया..क्या वो सही कर रहा था?..अपनी प्यारी बीवी से ऐसी नाइंसाफी की सरासर ग़लत नही थी?..उसी वक़्त उसे एहसास हुआ कि दिव्या के हाथ उसकी कमीज़ के बटन्स को ढीला कर रहे हैं & जैसे ही उसके नाख़ून अजीत की पीठ पे फिरे अजीत अपनी बीवी & उस से बेवफ़ाई के बारे मे बिल्कुल भूल गया & प्रेमिका के आगोश & उसकी जोशीली किस मे खो गया.

दोनो आमने-सामने खड़े 1 दूसरे को बाहो मे भरे चूम रहे थे.आगोश इतना कसा हुआ था की दिव्या की बड़ी चूचियाँ अजीत के सीने से बिल्कुल पिस गयी थी & उसका सीना लगभग सपाट लग रहा था.दोनो के पेट सटे हुए थे & दोनो अपनी टाँगो के बीच के नाज़ुक अंगो को आपस मे रगड़ रहे थे.अजीत की उंगलियो ने ब्रा होक्स खोले तो दिव्या ने 1 पल को किस तोड़ उसे ब्रा निकालने दिया & उसके निकलते ही दोबारा अपने लब अजीत के लबो से सी दिए.

"मैं लंच मे तुम्हारे कॅबिन मे आया था..",काई पॅलो बाद अजीत ने किस तोड़ दिव्या को घुमा उसकी पीठ अपने सीने से सटा दी & उसकी चूचियो को हाथो मे तौलते हुए उसके दाए गाल पे अपने होंठो को रगड़ने लगा,"..पर तुम थी नही."

"उम्म..केस के सिलसिले मे गयी थी.",दिव्या उस से अलग हुई & उसका हाथ पकड़ घर के अंदर उसके कमरे मे बने बाथरूम मे ले गयी.

"वही सेठ मोहन लाल वाला केस?",अजीत उसकी पॅंट का बटन खोल रहा था & वो उसकी.

"हां.",अजीत नीचे बैठ गया तो दिव्या ने उसके कंधो पे हाथ टीका दिए & अपनी पॅंट निकालने मे उसकी मदद की,"..अजीत,केस उतना सीधा लगता नही जितना शुरू मे लगा था..उउन्न्ह..!"

"क्यू?",अजीत बैठा हुआ उसके पेट को हल्के-2 चूम रहा था.गोरे पेट पे उसकी गरम साँसे & काली पॅंटी के वेयैस्टबंड के ठीक उपर उसके गर्म होंठो की च्छुअन दिव्या को मस्त कर रही थी.

"हमे पता चला कि 1 लड़की भी उन लुटेरो से मिली हुई है & वो सेठ के यहा सेलेज़्गर्ल की नौकरी करती थी.",उसकी गोल नाभि को अपनी ज़ुबान से गीला करते हुए अजीत ने उसकी पॅंटी सरका उसे बिल्कुल नंगा कर दिया था & अब उसकी कमर को बाहो मे कस उसकी गंद को दबाता हुआ उसकी चूत की दरार के ठीक उपर की जगह पे चूम रहा था,"..ऊन्ह..वो लड़की गायब हो गयी है & जब उसके बारे मे सुराग जुटाने..ऊव्ववव..!",अजीत की जीभ ने उसके दाने को बुरी तरह से छेड़ दिया था.

"क्या सुराग मिला?",अजीत ने उसकी दाई जाँघ उठा अपने बाए कंधे पे चढ़ा उसकी चूत का मुँह थोड़ा खोल दिया ताकि उसकी बेसबरा ज़ुबान उस से रिस रहे रस को पी अपनी प्यास बुझा सके.

"..आँह...आनंह..",दिव्या बाथरूम की दीवार से टिक गयी & अजीत के बालो मे अपनी बेसबरा उंगलिया फिराते हुए उसके सर को अपनी चूत पे धकेलने लगी,"..लड़की 1 घर मे बतौर पेयिंग गेस्ट रहती थी.मकान मालिक निचली मंज़िल पे रहता है & उपर के तीन कमरे उसने उस लड़की समेत तीन लड़कियो को दिए हुए थे..ऊहह....हाईईइ....!",अजीत अपनी जीभ उसकी चूत मे ऐसे घुसा रहा था मानो वो लंड हो & दिव्या उसके कंधे पे जाँघ टिकाए मस्ती मे कमर हिला रही थी.

"..लड़की मकान मालिक को ये बोल के गायब हुई है कि वो वापस अपने शहर जा रही है.मैने देखा की जिस कमरे मे वो रहती थी वाहा की सफाई नही हुई थी....ऊहह..अजीत...हाँ.....",अब केस की बात भुला वो अपनी चूत मे मच रही खलबली पे ध्यान दे रही थी.अजीत तो बस उसकी जाँघ & गंद की फांको को सहलाता उसकी चूत & उसके दाने को चाते जा रहा था.

"ऊव्ववववव..!",अजीत ने चाटते हुए ही अपनी 1 उंगली भी चूत मे घुसा के ज़ोर-2 से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया & दिव्या इस दोहरे हमले को बर्दाश्त नही कर पाई & झाड़ गयी.उसकी चूत ने ढेर सारा रस छ्चोड़ा जिसे अजीत ने फ़ौरन पी लिया.चूत को जीभ से सॉफ करने के बाद अजीत उठा तो दिव्या के चेहरे पे मस्ती,मदहोशी & सुकून के मिले-जुले भाव ने उसके जिस्म की आग को और भड़का दिया.वो आगे झुका & उसकी मांसल कमर को दबाते हुए उसे चूमने लगा.

"अरे..ये क्या?",प्रेमी के होंठो की लज़्ज़त का लुत्फ़ उठाते हुए दिव्या ने हाथ बगल मे ले जा शवर चालू कर दिया था जिसकी फुहार उसके होंठो से लगे बेख़बर अजीत पे पड़ते ही वो चौंक उठा था.दिव्या खिलखिला उठी & शवर गेल की शीशी उठा उसके सीने पे बहुत सा गेल गिरा दिया.अपने कोमल हाथो से जब उसने अजीत के बालो भरे सीने पे फ़ौरन ही झाग कर दिया.

अजीत ने भी गेल लिया & दिव्या के सीने पे मलने लगा,"आगे बताओ."

"कमरे मे तब से सफाई नही हुई थी जब से वो लड़की जिसका नाम शोभा है,अब सेठ को तो यही नाम पता है,यहा से भागी है.",दिव्या ने अजीत को बाहो मे भर लिया & उसकी पीठ पे झाग मलने लगी & उसके होंठ चूमने लगी.अजीत का अंडरवेर मे क़ैद लंड उसकी चूत के थोड़ा उपर ही सटा था & वो हौले-2 अपनी कमर हिला उसे अपने जिस्म से रगड़ रही थी.

"..लड़की ने कमरे मे कुच्छ भी नही छ्चोड़ा था सिवाय 1 चीज़ के...उउम्म्म्म..क्या करते हो?",अजीत के हाथ उसकी गंद पे साबुन मल रहे थे & उन्होने वाहा चिकोटी काट ली जिस वजह से दिव्या ने प्यार से उसे डॅप्टा था मगर अजीत उसकी गंद की कसी फांको को वैसे ही अपने हाथो तले मसलता रहा.

"& वो चीज़ क्या थी?",दिव्या ने अजीत को शवर के सामने किया & उसके जिस्म से साबुन सॉफ करने लगी.

"1 फोटो.",अजीत ने अपना जिस्म धुलते ही दिव्या को फुहार के नीचे किया & अपने हाथो से उसके जिस्म से साबुन की पर्ते अलग करने लगा.

"वाउ!ये तो काम की चीज़ है.",दिव्या ने शवर बंद किया & अजीत को दीवार से लगा उसके सीने को चूमने,चाटने लगी.

"अरे उस लड़की का फोटो तो हमे पहले ही मिल गया था..",वो अजीती के निपल्स को चूमते हुए नीचे की ओर जा रही थी.

"अच्छा.",अजीत ने मज़े मे आँखे बंद कर ली,वो कैसे?"

"1 म्‍मस से लेकिन वो बाद मे बताउन्गी & दिखाउन्गी भी.",दिव्या ने अजीत को आँख मारी & नीचे अपने पंजो पे बैठ गयी फिर उसने उसका अंडरवेर निकाला & उसके मोटे लंड को अपने मुँह के हवाले किया.लंड के सिरे पे लगे प्रेकुं & पानी के मिलेजुले स्वाद ने उसे मस्त कर दिया.

क्रमशः........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:21

KHEL KHILADI KA paart--28

gataank se aage ......

"kaise phunchayenge uske parivar ko nuksan..uff..?",ramya desk pe padi unke dhakke jhel rahi thi.uski chhalchhalati choochiya bhaiyya ji ko lalcha rahi thi.unhone unhe daboch liya & dabane lage.unki ungliya uske nipples ko masal rahi thi.sham ka waqt tha & bhaiyya ji ka cabin zara alag-thalag tha varna ramya ki mastani aahen koi bhi sun leta.

"waqt aane pe tv pe sun lena.",bhaiyya ji muskuraye & aage jhuk ke tez dhakke lagane lage,"..ab zara dusri baat karo.",ramya unka ishara samjh gayi & muskurayi.bhaiyya ji ki maang se use 1 baar fir masti chadhne lagi thi.

"kal raat Deepak ne mujhe choda.",bhaiyya ji ka chehra laal ho gaya tha & unki aankho me bas vasna thi,"..ab to mujhe uska patla lund mehsus bhi nahi hota,bhaiyya ji..mujhe to bas aapka mota,tagda lund hi raas aata hai ab....aahhhhhh....thoda dhire kariye na!",ramya ne munh banake badi masumiyat se kaha.is baat ne aag me ghee ka kaam kiya & bhaiyya ji uski moti janghe pakde & zordar tarike se uski chudai karne lage.

"dhire kyu?tumhe to ye lund raas aata hai na ba!ye lo.."

"oow.!"

"ye lo..!",tamtamayae chehre ke sath bhaiyya ji apni premika ki chut badi berehmi se chod rahe the & ramya ko bhi dard ho raha tha magar us se bhi kahi zyada maza aa raha tha.rajya ka itna bada rajneta uske jism,uski chut ka deewana tha!chahta to koi bhi jawan,kamsin ladki uske bistar ki shobha ban sakti thi lekin usne use chuna tha.."uunnhhh..haiii....offfff...oohhhhhh....!"

ramya ki chut ne fir se pani bahana shuru kar diya tha.usne bechain ho bhaiyya ji ke hath pakad unhe pane upar gira liya & unhe baaho me bhar chumne lagi.bhaiyya ji ne use desk se utha ke bith liya & apni baaho me jhula jhulate aahe bharte chodne lage.vo apni manzil ke bahut karib the.tabhi ramya ne chikh mari & apna sar peechhe jhuka diya & aankhe band kar li.uske chehre ko dekhne se aisa lagta tha mano vo bahut taklif me ho magar haqiqat ye thi ki vo jhad rahi thi.uske chehre ke bhav dekh bhaiyya ji bhi apne upar kabu na rakh sake & unka badan jhatke khane laga.vo bhi apni premika ki chut ko apne virya se bharte hue jhad gaye.

"Mummy..!",darte-2 Shlok ne Nina ke kamre ka darwaza khatkhataya.

"hato..",apne upar jhad rahe Mahesh ko nina ne dhakela,"..maine kaha tha na ki koi aa jayega!"..nina jaldi-2 kapde pehan rahi thi,"..jaldi se bathroom me jao.",mahesh ne apne kapde samete & bathroom me ghus gaya.

"are aa gaya beta.",nina ne shlok ke baal sehlaye.

"mummy.."

"haan,beta."

"vo aap aise kyu karah rahi thi?",nina ke chehre ka rang ud gaya magar usne khud ko sambhala.

"vo..beta..m-main so gayi thi..koi bura sapna dekh rahi thi..usi me nind me karahi houngi..tumahre khatkhatane se hi to meri aankh khuli.",nina bete ke kandhe pe hath rakh uske kamre ki or badh chali.

"is hafte tumhara history ka test hai na?"

"haan."

"uski taiyyari shuru ki?"

"abhi nahi."

"chalo,mujhe dikhao kaun-2 se chapters aane vale hain?",nina bete ke sath uske kamre me ghus gayi & darwaza laga liya.mauke ka fayda utha ke mahesh vaha se nikal liya.

"Free ho?",Divya ne abhi ghar me kadam rakha hi tha ki Ajit ka fone aa gaya.

"haan.",jab tak divya kuchh aur bolti fone kat gaya.divya ajit ke bare me sochte hue apni kamiz utarne lagi ki darwaze ki ghanti baj uthi.

"off..oh..ye Bahadur bhi na!kitni baar kaha hai ki jab tak main na bolu aane ki zarurat nahi lekin ise to bas jaldi kam nibtane ki padi rehti hai.",divya badbadayi.uski shirt ke sare buttons khule hue the & vo vaise hi darwaze tak a gayi.

"bahadur!thodi der me ana.",usne bina darwaza khole kaha.

"madam,bahadur nahi main hu.",ajit ki avaz sunte hi divya ne fauran darwaza khola.

"oh..i'm sorry!mujhe laga bahadur hai.",ajit andar dakhil hua & darwaza band kar diya.uski nigahe divya ki khuli shirt se dikh rahe uske kale bra me se jhankte cleavage & sapat pet pe ghumne lagi.

"kya dekh rahe ho?"

"tumhara darwaza kholne ka andaz to bada qatilana hai!",ajit muskuraya to divya ne apni shirt utar di.

"aur mehmano ka istekbal karne ka andaz?",divya ne kamar pe hath rakh shokhi se use dekha.

"uska to jawab nahi.",ajit ne use baho me kas liya & dono premi 1 dusre ko badi shidat se chumne laga.1 pal ko ajit ki ankho ke samne Meghna ka masoom chehra ghum gaya..kya vo sahi kar raha tha?..apni pyari biwi se aisi nainsafi ky sarasar galat nahi thi?..usi waqt use ehsas hua ki divya ke hath uski kamiz ke buttons ko dhila kar rahe hain & jaise hi uske nakhun ajit ki pith pe fire ajit apni biwi & us se bewafai ke bare me bilkul bhul gaya & premika ke aagosh & uski joshili kiss me kho gaya.

dono aamne-samne khade 1 dusre ko baho me bhare chum rahe the.agosh itna kasa hua tha ki divya ki badi chhatiya ajit ke seene se bilkuil pis gayi thi & uska seena lagbhag sapat lag raha tha.dono ke pet sate hue the & dono apni tango ke beech ke nazuk ango ko aapas me ragad rahe the.ajit ki ungliyo ne bra hoks khole to divya ne 1 pal ko kiss tod use bra nikalne diya & uske nikalte hi dobara apne lab ajit ke labo se see diye.

"main lunch me tumhare cabin me aaya tha..",kayi palo baad ajit ne kiss tod divya ko ghuma uski pith apne seene se sata di & uski chhatiyo ko hatho me taulte hue uske daye gaal pe apne hotho ko ragadne laga,"..par tum thi nahi."

"umm..case ke silsile me gayi thi.",divya us se alag hui & uska hath pakad ghar ke andar uske kamre me bane bathrom me le gayi.

"vahi Seth Mohan Lal vala case?",ajit uski pant ka button khol raha tha & vo uski.

"haan.",ajit neeche baith gaya to divya ne uske kandho pe hath tika diye & apni pant nikalne me uski madad ki,"..ajit,case utna seedha lagta nahi jitna shuru me laga tha..uunnhhhh..!"

"kyu?",ajit baitha hua uske pet ko halke-2 chum raha tha.gore pet pe uski garam sanse & kali panty ke waistband ke thik upar uske garm hotho ki chhuan divya ko mast kar rahi thi.

"hume pata chala ki 1 ladki bhi un lutero se mili hui hai & vo seth ke yaha salesgirl ki naukri karti thi.",uski gol nabhi ko apni zuban se gila karte hue ajit ne uski panty sarka use bilkul nanga kar diya tha & ab uski kamar ko baho me kas uski gand ko dabata hua uski chut ki darar ke thik upar ki jagah pe chum raha tha,"..oonhh..vo ladki gayab ho gayi hai & jab uske bare me surag jutane..OOW.!",ajit ki jibh ne uske dane ko buri tarah se chhed diya tha.

"kya surag mila?",ajit ne uski dayi jangh utha apne baye kandhe pe chadah uski chut ka munh thoda khol diya taki uski besabra zuban us se ris rahe ras ko pi apni pyas bujha sake.

"..aanhh...aannhh..",divya bathrom ki deewar se tik gayi & ajit ke balo me apni besabra ungliya firate hue uske sar ko apni chut pe dhakelne lagi,"..ladki 1 ghar me bataur paying guest rehti thi.makan malik nichli manzil pe rehta hai & upar ke teen kamre usne us ladki samet teen ladkiyo ko diye hue the..oohhhhhh....haiiii....!",ajit apni jibh uski chut me aise ghusa raha tha mano vo lund ho & divya uske kandhe pe jangh tikaye masti me kamar hil arhi thi.

"..ladki makan malik ko ye bol ke gayab hui hai ki vo vapas apne shehar ja rahi hai.maine dekha ki jis kamre me vo rehti thi vaha ki safai nahi hui thi....oohhh..ajit...haan.....",ab case ki bat bhulvo apni chut me mach rahi khalbali pe dhyan de rahi thi.ajit to bas uski jangh & gand ki fanko ko sehlata uski chut & uske dane ko chate ja raha tha.

"OOWWW.!",ajit ne chatate hue hi apni 1 ungli bhi chut me ghusa ke zor-2 se andar-bahar karna shuru kar diya & divya is dohre humle ko bardasht nahi kar payi & jhad gayi.uski chut ne dher sara ras chhoda jise ajit ne fauran pi liya.chut ko jibh se saaf karne ke bad ajit utha to divya ke chehre pe masti,madhoshi & sukun ke mile-jule bhav ne uske jism ki aag ko aur bhadka diya.vo aage jhuka & uski mansal kamar ko dabate hue sue chumne laga.

"are..ye kya?",premi ke hotho ki lazzat ka lutf uthate hue divya ne hath bagal me le ja shower chalu kar diya tha jiski phuhar uske hotho se lage bekhabar ajit pe padte hi vo chaunk utha tha.divya khilkhila uthi & shower gel ki shishi utha uske seene pe bahut sa gel gira diya.apne komal hatho se jab usne ajit ke balo bhare seene pe fauran hi jhag kar diya.

ajit ne bhi gel liya & divya ke seene pe malne laga,"aage batao."

"kamre me tab se safai nahi hui thi jab se vo ladki jiska nam Shobha hai,ab seth ko to yahi naam pata hai,yaha se bhagi hai.",divya ne ajit ko baaho me bhar liya & uski pith pe jhag malne lagi & uske honth chumne lagi.ajit ka underwear me qaid lund uski chut ke thoda upar hi sata tha & vo haule-2 apni kamar hila use apne jism se ragad rahi thi.

"..ladki ne kamre me kuchh bhi nahi chhoda tha sivay 1 chiz ke...uummmm..kya karte ho?",ajit ke hath uski gand pe sabun mal rahe the & unhone vaha chikoti kat li jipe divya ne pyar se use dapta tha magar ajit uski gand ki kasi fanko ko vaise hi apne hatho tale masalta raha.

"& vo chiz kya thi?",divya ne ajit ko shower ke samne kiya & uske jism se sabun saaf karne lagi.

"1 foto.",ajit ne apna jism dhulte hi divya ko fuhar ke neeche kiya & apne hatho se uske jism se sabun ki parte alag karne laga.

"wow!ye to kam ki chiz hai.",divya ne shower band kiya & ajit ko deewar se laga uske seene ko chumne,chatne lagi.

"are us ladki ka foto to hume pehle hi mil gaya tha..",vo ajity ke nipples ko chumte hue neeche ki or ja rahi thi.

"achha.",ajit ne maze me aankhe band kar li,vo kaise?"

"1 mms se lekin vo baad me bataungi & dikhaungi bhi.",divya ne ajit ko ankh mari & neeche apne panjo pe baith gayi fir usne uska underwear nikala & uske mote lund ko apne munh ke hawale kiya.lund ke sire pe lage precum & pani ke milejule swad ne use mast kar diya.

kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:22

खेल खिलाड़ी का पार्ट--29

गतान्क से आगे ......

"ये फोटो उस कमरे की कपबोर्ड के 1 शेल्फ के पीछे अलमारी की पीछे की दीवार & शेल्फ के बीच फँसा हुआ था..",दिव्या ने लंड के सूपदे को सॉफ करने के बाद लंड को उपर अजीत के पेट से सटा दिया & अपनी जीभ की नोक लंड की जड़ से उपर तक फिराने लगी,"..उस फोटो मे लड़की 1 लड़के के साथ है.दोनो 1 दूसरे के गले मे बाहे डाले अगल-बगल बैठे हैं.लड़के के गले मे बड़ा सा हेडफोनर है & सामने डीजे कॉन्सोल.."

"..लड़के का लिबास & हेरस्टाइल भी किसी डीजे जैसा ही है.दोनो जहा खड़े हैं वो जगह भी नाइट क्लब ही लग रही है..",दिव्या ने बारी-2 अजीत के दोनो आंडो को तब तक चूसा जब तक अजीत के मुँह से आहे ना निकल गयी & वो बेचैनी से अपनी कमर हिलाते हुए दिव्या के सर को अपने लंड पे ठेलने लगा.

"..तो वो डीजे कौन है कुच्छ पता चला?,दिव्या ने कोई जवाब नही दिया क्यूकी वो अब अजीत का लंड चूसने मे पूरी तरह मगन थी.अपने दाए हाथ से लंड को हिलाते हुए वो उसे चूसे जा रही थी.अजीत भी कमर हिला रहा था.दिव्या के हाथ उसके आंडो को टटोल रहे थे & जब उसने अपने नाख़ून से उसके लंड की जड & आंडो के मिलने की जगह पे कुरेदा तो जोश से पागल हो अजीत ने लंड उसके मुँह से खींच उसे उपर उठा लिया.

"..कुच्छ-2 पता चला है..वी..माआंन्‍णणन्..!",अजीत ने उसकी बाई टांग को उठा अपनी बाई बाँह उसके घुटने के नीचे फँसा उसकी बाई जाँघ को थामते हुए अपना तड़प्ता लंड उसकी गुलाबी चूत मे घुसा दिया था.

"..लेकिन पूरी बात पता करने के लिए पंचमहल जाना पड़ेगा..ऊहह..हाआंन्न..अजीत...और अंदर घुसाओ ना...हां..!",दिव्या दीवार से टिक गयी थी & अपनी बाहे अजीत के गले मे डाल दी थी जोकि दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़े उसे दबाता ज़ोर के धक्के लगा रहा था.

"ठीक से बताओ.",उसने सर झुकाया & उसकी मोटी,दाई चूची को चूसने लगा.

"ऊन्न्नह....",दिव्या ने उसका सर अपने सीने पे दबाते हुए अपनी कमर को हिलाया,"..प्रोफीसोर दीक्षित मुझे लेके..ओईइ माआ.....यहा के क्लब्स मे गये उस डीजे की तलाश मे....हाई राआंम्म...अजीत....",दिव्या उस से चिपक गयी & अपनी कमर ज़ोर-2 से हिलाने लगी.अजीत समझ गया कि वो झड़ने वाली है सो उसने उसे मज़बूती से थामा & अपने धक्के और गहरे कर दिए.वो लंड सूपदे की जड तक खींचता & फिर ज़ोर से अंदर धकेल्ता.दिव्या उसकी चुदाई से बिल्कुल मदहोश हो गयी थी की तभी अजीत को लंड पे चूत का कसाव बहुत ज़्यादा बढ़ता महसूस हुआ.उसी वक़्त अपने कंधो मे उसे दिव्या के नाख़ून गढ़ते महसूस हुए-दिव्या झाड़ रही थी.

अजीत ने झट से उसकी दूसरी टांग के नीचे भी अपना दूसरा हाथ फँसाया & उसकी गंद की फांको के नीचे हाथ लगा उसे उठा लिया & कमरे मे चला आया.कमरे मे आ दिव्या को लिए-दिए वो बिस्तर पे इस तरह से लेट गया की दिव्या उसके गथिले जिस्म के नीचे थी.दिव्या को उसकी इस हरकत पे बड़ा प्यार आया.वो कभी भी उसे पूरी तरह से सुकून पहुचाए बिना नही झाड़ता था & साथ-2 उसके आराम का भी ख़याल रखता था.2 बार झड़ने की वजह से वो थक गयी थी & इस बात को भाँप के ही अजीत उसे बिस्तर पे ले आया था.

"पहले 3 क्लब्स मे तो कुच्छ भी नही पता चला लेकिन चौथे मे हमारी किस्मत ने हमारा साथ दिया..",अजीत अपनी हथेलियो को बिस्तर पे टीका अपने सीने को दिव्या के सीने से उपर उठा उसे चोद रहा था & वो उसकी मज़बूत बाहे कंधो तक सहला रही थी,"..वाहा के डीजे ने ना केवल तस्वीर वाले डीजे को पहचान लिया बल्कि उसने ये भी बता दिया कि ये पंचमहल के क्लब निंजा मे खींची गयी तस्वीर है....उउम्म्म्म..!",1 बार फिर उसके दिलोदिमाग पे चुदाई की खुमारी छाने लगी थी.उसने अजीत को खींच के अपने उपर गिराया & उसे बाँहो मे भरते हुए अपनी टाँगे उसकी टाँगो के उपर चढ़ा दी.

"ये प्रोफेसर की ही किताबे है ना?",अजीत का इशारा साइड-टेबल पे रखी प्रोफेसर की तोहफे मे दी गयी किताबो की ओर था.

"हूँ..",दिव्या आँखे बंद किए जन्नातकी ओर बढ़ रही थी.

अजीत ने दिव्या को चोदते हुए किताबो को उठाके पलटा & उसकी नज़र हर किताब के पहले पन्ने पे लिखी प्रोफेसर की इबारत पे गयी,"आदमी पहुँचा खिलाड़ी लगता है."

"हूँ....",दिव्या हँसी..वो हँसी जिसके बारे मे लिखना नामुमकिन है..इस हँसी की आवाज़ केवल वो समझ सकते हैं जिन्होने 1 चुदती हुई & उस से ज़बरदस्त लुत्फ़ उठाती औरत को हंसते सुना है..ना वो बहुत ज़ोर की खिलखिलाहट होती है ना ही हल्की सी हँसी..बस 1 ऐसी आवाज़ होती है जो उस औरत को चोद्ते मर्द का जोश और भी बढ़ा देती है,"..वो तो है मगर बड़ा तेज़ दिमाग़ है उसका.इस केस मे उसने भी बड़ी बारीक बाते पकड़ी हैं."

"तुम उसके साथ पंचमहल जाओगी?",अजीत उसकी गर्दन चूमता उसकी चूचियाँ मसल रहा था.

"हां....हन...हन..हाआंन्‍णणन्.......ऊहह......!",पहला हां अजीत की बात का जवाब था & बाकी उसकी अच्छी चुदाई की वजह से मस्ती मे पागल होती दिव्या के दिल की आवाज़ थी लेकिन ना जाने क्यू अजीत को लगा कि दिव्या प्रोफेसर के नाम से गरम हो गयी है.उसके दिल मे प्रोफेसर के लिए जलन पैदा हुई & उसके धक्के और तेज़ हो गये..उसका दिमाग़ उसे समझा रहा था..आख़िर दिव्या पे उसका क्या हक़ है?..वो शादीशुदा है & ये दिव्या की अच्छाई है कि वो अभी भी उसे उसके हसीन जिस्म को प्यार करने दे रही है..लेकिन उसका दिल मानने को तैय्यार नही था..दिव्या बस उसकी है..उसकी चूत मे घुसने का हक़ केवल उसके लंड को है..उसके नर्म होठ उसकी जागीर हैं..ये खूबसूरत बदन केवल उसकी मिल्कियत है!

दीवाने दिल ने उसके जिस्म को भी दीवाना कर दिया..दिव्या अब मस्ती मे चीख रही थी..उसकी टाँगे अब उसकी कमर पे कसी थी & उसके नाख़ून उसकी पीठ,कंधे & गंद को छल्नी कर रहे थे..लेकिन वो बस अपनी जलन की आग मे झुलस्ता धक्के लगाए जा रहा था....उसे ये परवाह भी नही थी कि दिव्या के नखुनो के निशान अगर मेघना ने देख लिए तो क्या होगा..उसे बस दिव्या के जिस्म पे अपना हक़ जताना था..उसकी चूत मे अपना पानी छ्चोड़ के.

कमरे मे दिव्या की चीखे बहुत तेज़ हो गयी & एकैएकखमोश हो गयी क्यूकी दोनो प्रेमी झाड़ चुके थे.दिव्या की चूत फिर से अजीत के लंड पे कस गयी थी & इस बार अपनी प्रेमिका के झाड़ते हाइ अजीत भी झाड़ गया था & उसकी चूत मे अपना वीर्य छ्चोड़ दिया था.दिव्या लंबी-2 साँसे ले रही थी,उसका सीनाबड़े दिलकस अंदाज़ मे उपर-नीचे हो रहा था,उसकी पलाके मुंदी थी & चेहरे पे लाली थी-मस्ती & सुकून की.उसकी चूत मे लंड धंसाए अजीत के दिल का तूफान थम गया था.वो उसे निहार रहा था & उस पल उसे एहसास हुआ कि दिव्या प्रोफेसर से ज़रूर चुदेगी ..कोई कारण,कोई वजह नही थी इस बात के उसके ज़हन मे आने की..उसे अब जलन भी नही हो रही थी बस उसे पता था कि प्रोफेसर & दिव्या ज़रूर हुम्बिस्तर होंगे....वो क्या कर सकता था?..कुच्छ भी नही..आख़िर दिव्या की अपनी ज़िंदगी थी..उसे हक़ था की वो जिसके साथ मर्ज़ी हो उसके साथ सोए..उसके दिल मे हॉक सी उठी..वो बेबस था..

दिव्या अभी भी वैसे ही आँखे बंद किए पड़ी अपनी साँसे संभाल रही थी.अजीत ने बाए हाथ की 1 उंगली से उसके गुलाबी होंठो को सहलाया तो उसने उसे चूम लिया & आँखे खोली.सामने उस इंसान का चेहरा था जिसने उसे अभी जन्नत की सैर कराई थी.उसने उसके चेहरे को हाथो मे भरा & उसके होंठ चूम लिए.इस किस मे वो बेअसबरी,वो बेचैनी नही थी बल्कि बहुत ही सुकून & आराम था.इसका असर अजीत पे भी हुआ & वो अपना दर्द,अपनी जलन भूल 1 बार फिर अपनी प्रेमिका के हुस्न मे खोने लगा.

"तुम्हारे केस का क्या हुआ?",दिव्या नाइटी के उपर गाउन पहन उसकी बेल्ट बाँध रही थी.

"छान-बीन कर रहा हू मगर मुझे लग रहा है मुर्शिद अभी भी कुच्छ च्छूपा रहा है.",अजीत अपनी शर्ट के बटन बंद कर रहा था.दिव्या ने उसकी ओर सवालिया निगाहो से देखा तो उसने आगे कहना शुरू किया.

"उसने मुझसे कहा कि 1 आदमी उसके पास आया & बोला कि आने वाले चुनाव मे उसकी काफ़ी ज़रूरत पड़ेगी & इसके लिए उसे हथ्यार भी चाहिए होंगे जोकि वो उसे अपने आदमी से दिलवाएगा इसलिए तीनो उस रात नसीबपुरा मे इकट्ठा हुए थे.",अजीत ने शर्ट को पॅंट के अंदर डाला.

"गड़बड़ बात ये है,दिव्या कि कोई भी अपराधी ऐसे बस बात पे काम नही करता.जब तक उसे ये तसल्ली ना हो कि सामने वाला शख्स क़ानून का आदमी नही है या फिर उसके किसी दुश्मन का तब तक वो काम के लिए हां नही करता.."