मा बेटा और बहन compleet

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raj..
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Re: मा बेटा और बहन

Unread post by raj.. » 14 Oct 2014 01:29

मेने जैसे ही शुमैला की चूत को चूमा शुमैला की तो जैसे जान ही निकल

गई उस ने गांद उठा कर अपनी चूत को मेरे मुँह पे और दबा दिया. मम्मी इतने

मे शुमैला के पहलू मे आ गई और शुमैला की चूचियाँ चूसने लगी.

मेने ज़ुबान निकाल कर शुमैला की चूत के लबो पर फैरनी शुरू कर दी

शुमैला की चूत का ज़ायक़ा मेरी ज़ुबान पे आने लगा और मे भी दीवाना हो

गया. आज तो बहुत मज़ा आ रहा था. अकेले मे तो खूब चाटा था पर आज मम्मी

के सामने ही मज़ा ज़्यादा आ रहा था. मम्मी उसकी चूचियों को चूस रही थी.

शुमैला तड़प रही थी मस्ती से. मे और ज़ोर से शुमैला की चूत चाटने लगा.

शुमैला भी अपनी गांद उठा उठा कर मेरी ज़ुबान को अपनी चूत के और अंदर

लेने की कोशिश कर रही थी. उस के मुँह से हल्की हल्की आवाज़ मे तेज़ तेज़

सिसकियाँ निकालने लगीं.

मम्मी ने शुमैला को बुरी तरह कसमसाते हुए महसूस कर के कहा, "आमिर बेटा

बस करो तेरी बहन मज़े से मर जाएगी. उठो अब मे बताती हूँ क्या करना

है." मम्मी ने मेरे सिर मे हाथ फेरते हुए मुझे शुमैला की चूत से

उठाया.

मे मम्मी की तरफ देखने लगा. मेरे गालो पे शुमैला की चूत का सारा पानी

लगा हुआ था. मेने उसकी चूत से मुँह हटाया तो

शुमैला ने कसमसाना बंद कर दिया लेकिन उस की आँखूं मे से आँसू निकलने

लगे थे.

"उपेर आओ, इस की टाँगो के दरमियाँ और शुमैला की चूत पे अपना लंड

रखो." मम्मी के मुँह से ये सुन कर ऐक बार तो मुझे यकीन नही हुआ कि आज दिल

की मुराद पूरी होगी. मे बहुत खुश था कि आज बहन को चोद्ने का मौका मम्मी

दे रही हैं. फिर मे अपने घुटनो के बल उपर आ गया. अब मेरा लंड शुमैला

की चूत के बिल्कुल सामने था. मम्मी ने हाथ बढ़ा के मेरा लंड पकड़ा और

शुमैला की चूत के लबो पे फैरने लगी. शुमैला की चूत पे मेरा गरम

गरम लंड जैसे ही लगा उस ने ऐक झरजरी सी ली. मुझे भी इस मे बहुत मज़ा

आ रहा था. मम्मी को तो कई बार चोदा था पर शुमैला की कुँवारी चोद्ने का

पहला मौका था. मे थोड़ा और झुक गया अब मम्मी मेरा लंड शुमैला की चूत

की फांको के बीच ऊपर से नीचे फेरने लगी. शुमैला की गीली गीली चूत

मे गुदगुदी करने लगी.

"अया ह आअहह आ ह्म्‍म्म्मम." शुमैला के मुँह से बाक़ायदा सिसकियाँ निकलने

लगी.

"अरे बेटी मज़ा आने पर ऐसे ही होता है. अभी तू आहिस्ता आहिस्ता सिसक रही है

जब भाई का लंड अंदर जाकर तुझे चोदेगा तो मज़े से चिल्लाने लगेगी तू. मज़ा

आरहा है ना तुम दोनो को?" मम्मी ने शुमैला की तरफ मुँह कर के कहा.

मेने हां किया और शुमैला ने भी सर हिला दिया.

मे और शुमैला दोनो ही सरूर की दुनियाँ मे डूब चुके थे. मे ज़रा सा

अनबॅलेन्स हुआ और मेरा हार्ड लंड शुमैला की चूत के छेद मे घुस गया.

शुमैला ने बड़ी ही मुश्किल से अपनी चीख अपने होंठो मे दबाई लेकिन फिर

भी ज़रा सी निकल ही गई. मम्मी का हाथ भी मेरे लंड के साथ शुमैला की

चूत को जा लगा था.

"बस इतनी सी बात थी बेटी. आमिर आहिस्ता आहिस्ता अब और नीचे जाओ, और अंदर करो

अपना लंड अपनी बहन की चूत मे. लेकिन देखो आहिस्ता करना पहली बार है.

क्यों बेटी आज पहली बार चुद्वा रही हो ना?" मम्मी ने हाथ दोनो के बीच से

हटा कर मेरे सिर पे फेरते हुए कहा.

"जी मम्मी आज पहली बार भाईजान का अंदर जा रहा है." शुमैला ने अब खुलकर

बिना शरम के कहा.

अब मे आहिस्ता आहिस्ता अपने मोटे लंबे लंड को शुमैला की चूत मे अंदर केरने

लगा. शुमैला अपना सिर इधेर उधेर मारने लगी. उस ने आँखे ज़ोर से बंद कर

लीं थीं और टाँगो को बंद केरने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसकी टाँगों

के बीच मे था.

"बाअस्स्स!!! अया आह अह्ह्ह्ह!!!" शुमैला के मुँह से निकला वो दर्द से मरी जा रही

थी.

"रूको." मम्मी ने मुझ से कहा.

मे मम्मी की बात सुन वहीं रुक गया. शुमैला तेज़ तेज़ साँसे ले रही थीं.

उस की चूचियाँ उस के सीने पे पूरी तरहा फूल और पिचक रही थी. मम्मी उस

के सिर मे हाथ फैरने लगी.

"मम्मी भाई जान से कहो अपना लंड मेरी चूत से निकाले नही तो मे मर जाऊं

गी. आ आ." शुमैला ने मम्मी की तरफ देखते हुए कहा.

"बेटी यही दर्द तो लड़कियों को वह मज़ा देता है जिसके लिए लड़कियाँ कुच्छ भी

कर सकती हैं. तुम बहुत खुशनसीब हो जो तुमको तुम्हारा भाई ही तुम्हे यह

पहला दर्द दे रहा है. अभी मज़ा आएगा. अब कुछ नही हो गा. पहली बार होता है

मुझे भी हुआ था. ये बर्दाश्त कर लो तो समझो बोहत मज़ा आए गा, ज़रा सी देर

और." मम्मी ने शुमैला के बालो मे हाथ फेरते हुए उस समझाइया.

"नही, नही!!! बाकी फिर कभी इसे कहो निकाल ले,आह आह आहह!!" शुमैला ने सिर

हिलाते हुए कहा.

raj..
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Re: मा बेटा और बहन

Unread post by raj.. » 14 Oct 2014 01:30

"अरे बेटी क्या कर रही है. अभी जब मज़ा आएगा तब देखना." मम्मी ने उसकी

चूचियों को सहलाते कहा.

"नही मम्मी आपने कहा था कि आप भाई जान से चुदवाकर मुझे दिखाइंगी. अब आप

ही चुद्वाइये भाई जान से, मुझे छ्चोड़ो." शुमैला तड़प्ते हुए बोली.

"अच्छा मे कुछ केरती हूँ!" ये कहती हुई मम्मी मेरे पास आई. मे आधा लंड

शुमैला की टाइट चूत मे फँसाए हुए वहीं झुका हुया था. मेरा अपना

वज़न मेरे हाथो पर था जो शुमैला की साइड मे बेड पे रखे थे.

"बेटा जब मे इस की किस्सिंग करने लगूँ तो तुम ऐक ही झटके से पूरा अंदर

कर देना और वहीं रुके रहना समझे." मम्मी ने मेरे कान मे सरगोशी की और

खुद जा कर शुमैला के होंठो को चूमने लगी.

इतने मे शुमैला का दर्द कुछ कम हो गया. उसे मम्मी की किस्सिंग का मज़ा आने

लगा और अपनी चूत मे फँसे हुए मेरे लंड का भी मज़ा लेते उसने ज़रा सा

अपनी गांद को उठाया. मे समझ गया कि यही टाइम है और मेने ज़ोर का झटका

दिया कि मेरा पूरा लंड शुमैला की ऊट मे घुस गया और मेरी हल्की हल्की

झांते शुमैला के सॉफ सुथरे प्यूबिक एरिया से जा लगीं और मे वहीं रुक

गया. मुझे महसूस हो रहा था कि मेरा लंड किसी टाइट से शिकंजे मे फँस

गया है. शुमैला के मुँह से निकली हुई चीख मम्मी के मुँह मे ही रह गई.

वह अपना सर ज़ोर से दाई बाईं करने लगी. उस की आँखूं से आँसू निकलने

लगे. उसे महस्सूस हो रहा था कि जैसे उस की चूत मे आग लग गई हो कोई

दहकता हुआ लोहे का रोड उसकी चूत के अंदर घुसा दिया गया हो. मम्मी उस को

चूमे जा रही थी और हाथो से शुमैला की चूचियों को दबा भी रही थी

कुछ देर मे शुमैला का दर्द कम हुआ और वह कुच्छ संभल गई. उस ने ऐक ज़ोर

की साँस ली और बोली, "आअहह मम्मी मुझे तो भाई जान ने मार ही डाला था."

"बेटी अब दर्द कम हुआ ना?"

"हां अब ठीक है." शुमैला अब खुश थी.

"बेटा अब तुम अपना लंड हल्के हल्के अपनी बहन की चूत मे अंदर बाहर करो."

मम्मी ने मुझसे कहा और मे अपने लंड को शुमैला की चूत मे आहिस्ता आहिस्ता

अंदर बाहर केरने लगा.

इससे मुझे और शुमैला को मज़ा आने लगा. शुमैला की सिसकियाँ फिर से गूंजने

लगी. उस ने आँखे बंद कर लीं. मेने भी आँखे बंद कर लीं. मे आज

बहुत मस्त था. मम्मी की चूत चुदि और फैली थी पर शुमैला की तो कुँवारी

थी और बहुत ही कसी और गरम थी. मेरे लंड से मेरी बहन की चूत मे मेरी

ज़ुबान और उंगली ही गयी थी. जाने कब मेरे धक्को मे तेज़ी आ गई. हम दोनो को

ही पता ना चला लेकिन अब दर्द नही केवल मज़ा और सरूर था.

"हां हां हाआअँ और तेज़ तेज़ हा हा हा आ आ, हहाायी ऊओ आह

भाई जान हहान और तेज़." हर झटके के साथ

शुमैला के मुँह से ऐक लफ्ज़ निकल रहा था.

मम्मी शुमैला के पास से हट गई और साथ लेट कर दोनो की चुदाई देखने लगी.

मम्मी के होंठो पे मुस्कान थी. मेने हाथ बेड से हटा लिए और मे शुमैला

पे गिर गया और उसके होंठ चूसने लगा. अब धक्कों मे काफ़ी तेज़ी आ गयी थी.

मेरा लंड शुमैला की गीली चूत मे आराम से आ जा रहा था. मेरे हर झटके

मे मेरे बाल शुमैला की चूत को छू जाते थे. मेरे टेस्टिकल्स शुमैला के

कूल्हों को छू जाते. दोनो पसीने मे नहा गये थे जिस से कमरे मे फूच

फूच की आवाज़े आ रही थीं. दोनो मस्ती मे चूर ऐक दूसरे को खूब जोश से

चोद रहे थे और मम्मी हमारे पास लेटी हमारी चुदाई देख खुश हो रही थी.

वह आज बहुत खुश थी बेटी को बेटे से चुदवाकर. मे भी अपनी बहन को चोद

बहुत मस्त था.

"आमिर बेटा अंदर ही मत झाड़ जाना. झड़ने से पहले अपना लंड बाहर निकाल लेना."

मम्मी ने मुझे देखते हुए कहा.

"ओके!" मेने ने तेज़ी से झटके लगाते हुए कहा और फिर कुच्छ देर बाद मेने

अपने लंड शुमैला की चूत से निकाल लिया और साथ मे शुमैला की चूत पर

झड़ने लगा.

"आआआअ!!!!!!!!!!!!!" मेरे मुँह से एक तेज़ सिसकारी निकली और मेरा गर्म गर्म पानी

शुमैला की चूत पे और फव्वारे की तरह उसके पेट और चूचियों पे भी गिरा.

क्रमशः………………………..




Maa beta or bahan-10

gataank se aage…………………
Shumaila ko me ajj Mammi ke saamne chho raha tha. Use behad maza aane laga aur
Mammi ne mere hard lund ko apne haatho me le lia aur phir thora sa jhuk ker
lund pe kissing kerni shuru ker di. Mujhe mammi ki garm garm sansain pagal ker
rahi theen aur meri aankhe band ho gaeen. Udher Shumaila mere aur nazdeek ho
ker mere dono haatho se apni choochiyon ko masalwa rahi thi aur aankhe band
ker ke lambi lambi sansain Le rahi thi. Us ka dil zor zor se dharak raha tha.
Tabhi mammi ne munh khol ker mera aadhe se ziada lund apne under le lia aur
choosne lagi. Mera badan akadne laga. Mammi ne do teen baar hi choosa ki foran
hi mera fowwara Mammi ke munh me hi chhoot gaya. Mammi ko mera namkeen pani
apne munh me aate mehsoos hua lekin Mammi ne mera lund bahar nahi nikala. Wo
waise hi use choosti rahi, ander bahar kerti rahi aur mere ka full load Mammi
munh me bhar gaya.

"Ahhhh! Gande! Itni jaldi." Mammi ne apne dupate se apna munh saaf kerte huye
kahaa tu Shumaila ne bhi aankhe khol ker Mammi ki taraf dekha. Use nahi pata
chal saka keh kia hua hai.

"Mammi aaj pata nahi kya hua." Mane dhire se kahaa.

"Haan mujhe pata hai. Ajj tere haathon me bahan ki choochiyan jo hain. Kaisa
laga?" Mammi ne Kaha.

"Bohat hi aacha Mammi bara maza aaya." Mene masti se bhai aawaz me kaha aur
zor Shumaila ki choochiyan daba diya.

Shumaila ne bari mushkil se apni cheekh roki aur boli, "Kya kerte ho bhaijan
dard hota hai yahaan, ahista pakro na." Shumaila ne

Mere chehre pe haath phairte huye kaha.

"Oh! Sorry Shumaila me darasal jhad gaya tha na pata hi nahi chala."

"Chalo ab tum zara Shumaila ko bhi wo maza do me tumhain dobara hard kerti
hun." Mammi ne kahaa tu mene Shumaila ki bed pe seedha lita dia aur us ki
tangain zara si khol ker us kerwat ke bal us ke upper aa gaya aur Shumaila ke
hontoon pe kissing kerne laga tu Mammi mere semi erected lund ke paas let gai
aur mere lund pe zubaan phairne lagi jis se lund phir se hard hone laga.

Shumaila ne pehle to apne hoonth Kas k band kiye huye the lekin use jab maza
aane laga mere choomne ka to wo bhi response dene lagi us ne apne hoont khol
deye. Ab merei aur Shumaila ki zubanain aik dusre se khailne lageen. Aisi
kissing ka Shumaila ko bohat maza aata tha. Mammi ne choom ke chaat ke choos ke
mera lund phir se hard ker diya tha aur wo musalsal mera lund upper

Se niche tak chat rahi thi aur phir wo mere lund ke niche thaili me band balls
ko zubaan se chatne lagi. Mere saath ye pehli baar

ho raha tha. Mere badan me leharain si uthne lageen aura ur aik naya sa saror
aane laga aur meri kissing me josh sa aa gaya aur mene Shumaila ke pore
chahre ko choomna shoru ker dia. Phir us ke kanoon pe aaya aur gardin pe ur phir
dono haath me Shumaila ki choochiyan pakad leen aur us k left nipple ko munh
me le ker choosne laga aur zubaan us pe phairne laga. Shumaila ke dono nipples
hard ho ker khare ho gaye the. Meri zubaan us ke nipple ke gird gol gol ghom
rahi thi aur wo maze ki dunya me aankhe band kiye urr rahi thi. Me
deewanoon ki tarah ab us ki choochiyon ko choos raha tha, kaat raha tha aur dono
haatho se zor zor se sehlaa bhi raha tha.

Tabhi Shumaila ko mehsoos hua ki us ki tangoon ke dermiaan phansi hui chhoti si
choot se pani ka sailaab aa gaya hai. Aur wo jhaDane lagi. Us ne apni tangain aur
bhi phaila leen aur apne kulhoon ko zara sa utha ker apni choot ko apne upper
lete huye apne bhai ki pasliyoon se lagaya aur achhi tarah zor se ragra. Me
ye harkat mehsoos ki aur Shumaila ki choochiyon se haath hataya aur us ki
shalwar utarne laga. Shumaila ne gaand ko utha ker mujhe apni shalwar utarne di.
Is harkat se mera lund Mammi k munh se nikal gaya aur wo uth ker baith gai aur
dekhne lagi ki me Shumaila ki shalwar utar raha hoon.

"Good! Ab aaye ho na dono tum pure maza me! Shabash beta aaj is ko wo maza
dena ki sari zindagi yaad rakhe." Mammi ne josh se bhari awaz me kaha aur
mujhe bhi josh aa gaya aur mene Shumaila ki shalwar utar ker us ki taangain
zara si aur phaila deen aur jhuk gaya Shumaila ki chhoti si choot par munh
rakha.

Mene jaise hi Shumaila ki choot ko chooma Shumaila ki to jaise jaan hi nikal
gai us ne gaand utha ker apni choot ko mere munh pe aur daba diya. Mammi itne
me Shumaila ke pehloo me aa gai aur Shumaila ki choochiyan choosne lagi.
Mene zubaan nikal ker Shumaila ki choot ke laboon per phairni shoru ker di
Shumaila ki choot ka zaiqa meri zubaan pe aane laga aur me bhi deewana ho
gaya. Aaj tu bahut maza aa raha tha. Akele me tu khoob chaaTaa tha par aaj mammi
ke saamne hi maza zyada aa raha tha. Mammi uski choochiyon ko choos rahi thi.
Shumaila tadap rahi thi masti se. Me aur zor se Shumaila ki choot chatne laga.
Shumaila bhi apni gaand utha utha ker meri zubaan ko apni choot ke aur ander
lene ki koshish kar rahi thi. Us ke munh se halki halki awaz me tez tez
siskiyaan nikalne lageen.

Mammi ne Shumaila ko buri tarah kasmsate huye mehsoos ker ke kaha, "Amir beta
bas karoo teri bahan maze se mar jayegi. Utho ab me batati hoon kia kerna
hai." Mammi ne mere sir me haath phairte huye mujhe Shumaila ki choot se
uthaia.

Me Mammi ki taraf dekhne laga. Mere galoon pe Shumaila ki choot ka sara pani
laga hua tha. Mene uski choot se munh hataya tu

Shumaila ne kasmsana band ker dia lekin us ki aankhoon me se aansoo niklne
lage the.

"Uper aao, is ki tangoon ke dermiaan hi aur Shumaila ki choot pe apna lund
rakho." Mammi ke munh se ye sun ker aik bar to mujhe yakeen nahi hua ki aaj dil
ki muraad pori hogi. Me bahut khush tha ki aaj bahan ko chodne ka mauka Mammi
de rahi hain. Fir Me apne ghutnoo ke bal upper aa gaya. Ab mera lund Shumaila
ki choot ke bilkul samne tha. Mammi ne haath berha ke mera lund pakra aur
Shumaila ki choot ke laboon pe phairne lagi. Shumaila ki choot pe mera garam
garam lund jaise hi laga us ne aik jharjari si li. Mujhe bhi is me bahut maza
aa raha tha. Mammi ki tu kai baar choda tha par Shumaila ki kunwari chodne ka
pahla mauka tha. Me thora aur jhuk gaya ab Mammi mera lund Shumaila ki choot
ke phaanko ke beech opar se niche phairne lagi. Shumaila ki geeli geeli choot
me gudgudi kerne lagi.

"Aaah ahhhh aaahhh aah hmmmmm." Shumaila ke munh se baqaida siskiaan nikalne
lagi.

"Are beti maza aane par aise hi hota hai. Abhi tu ahista ahista sisak rahi hai
jab bhai ka lund andar jakar tujhe chodega tu maze se chillane lagegi tu. Maza
aaraha hai na tum dono ko?" Mammi ne shumaila ki taraf monh ker Ke kaha.

Mene haan kiya aur Shumaila ne bhi sar hila diya.

Me aur Shumaila dono hi saror ki dunya me dhoob choke the. Me zara sa
unbalance hua aur mera hard lund Shumaila ki choot ke chhed me ghus gaya.
Shumaila ne bari hi mushkil se apni cheekh apne hoonthoon me dabai lekin phir
bhi zara si nikal hi gai. Mammi ka haath bhi mere lund ke saath Shumaila ki
choot ko ja laga tha.

"Bus itni si baat thi beti. Amir ahista ahista ab aur niche jao, aur ander karo
apna lund apni bahan ki choot me. Lekin dekho ahista karna pehli baar hai.
Kyon beti aaj pahli baar chudwa rahi ho na?" Mammi ne haath dono ke beech se
hata ker mere sir pe phairte huye kaha.

"Ji Mammi aaj pahli baar bhaijan ka andar ja raha hai." Shumaila ne ab khulkar
bina sharam kaha.

Ab me ahista ahista apne mote lambe lund ko Shumaila ki choot me ander kerne
laga. Shumaila apna sir idher udher marne lagi. Us ne aankhe zor se band ker
leen theen aur taangoon ko band kerne ki koshish kar rahi thi lekin uski taangon
ke beech me tha.

"Baaasss!!! Aaah ah ahhhh!!!" Shumaila ke munh se nikla wo dard se mari ja rahi
thi.

"Ruko." Mammi ne mujh se kaha.

Me Mammi ki baat sun waheen ruk gaya. Shumaila tez tez sansain le rahi theen.
Us ki choochiyan us ke seene pe pori tarha phool aur pichak rahi the. Mammi us
ke sir me haath phairne lagi.

"Mammi bhai jaan se kaho apna lund meri choot se nikale nahi tu me mar jaoon
gi. Aah aah." Shumaila ne mammi ki taraf dekhte huye kaha.

"Beti yehi dard tu ladkiyon ko wah maza deta hai jiske liye ladkiyan kuchh bhi
kar sakti hain. Tum bahut khushnaseeb ho ju tumko tumhara bhai hi tumhe yah
pahla dard de raha hai. Abhi maza ayega. Ab kuch nahi ho ga. Pehli baar hota hai
mujhe bhi hua tha. Ye bardasht ker lo to samjho bohat maza aaye ga, zara si der
aur." Mammi ne Shumaila ke baloon me haath phairte huye us samjhaia.

"Nahi, nahi!!! Baki phir kabhi ise kaho nikal le,ah ah aahh!!" Shumaila ne sir
hilate huye kaha.

"Are beti kya kar rahi hai. Abhi jab maza aayega tab dekhna." Mammi ne uski
choochiyon ko sahlate kaha.

"Nahi Mammi aapne kaha tha ki aap bhai jaan se chudavaakar mujhe dikhaaingi. Ab aap
hi chudwaiye bhai jaan se, mujhe chhodo." Shumaila tadapte hue boli.

"Acha me kuch kerti hun!" Ye kehti hui Mammi mere paas aai. Me aadha lund
Shumaila ki tight choot me phansaye huye waheen jhuka huya tha. Mera apna
wazan mere haatho per tha jo Shumaila ki side me bed pe rakhe the.

"Beta jab me is ki kissing kerne lagoon to tum aik hi jhatke se pora andar
kar dena aur waheen ruke rehna samjhe." Mammi ne mere kaan me sargoshi ki aur
khud ja kar Shumaila ke hoonthoon ko choomne lagi.

Itne me Shumaila ka dard kuch kam ho gaya. Use Mammi ki kissing ka maza aane
laga aur apni choot me phanse huye mere lund ka bhi maza lete usne zara sa
apni gaand ko uthaia. Me samajh gaya ki yehi time hai aur mene zor ka jhatka
dia ki mera pora lund Shumaila ki choot me ghus gaya aur meri halki halki
jhantain Shumaila ke saaf suthre pubic area se ja lageen aur me wahin ruk
gaya. Mujhe mehsoos ho raha tha ke mera lund kisi tight se shikanje me phans
gaya hai. Shumaila ke munh se nikli hui cheekh Mammi ke munh me hi reh gai.
Wah apna sar zor se dain bain kerne lagee. Us ki aankhoon se aaonsoon nikalne
lage. Use mehssos ho raha tha ki jaise us ki chhoot me aag lag gai ho koi
dehkata hua lohe ka rod uski choot ke andar ghusa diya gaya ho. Mammi us ko
choome ja rahi thi aur haatho se Shumaila ki choochiyon ko daba bhi rahi thi

Kuch der me Shumaila ka dard kam hua aur wah kuchh sanbhal gai. Us ne aik zor
ki saans liya aur boli, "Aaahhh Mammi mujhe to bhai jaan ne maar hi dala tha."

"Beti ab dard kam hua na?"

"Haan ab theek hai." Shumaila ab khush thi.

"Beta ab tum apna lund halke halke apni bahan ki choot me andar bahar karo."

Mammi ne mujhse kaha aur me apne lund ko Shumaila ki choot me ahista ahista

andar bahar kerne laga.

Isse mujhe aur Shumaila ko maza aane laga. Shumaila ki siskiyaan phir se goonjne

lagi. Us ne aankhe band kar leen. Mene bhi aankhe band kar leen. Me aaj

bahut mast tha. Mammi ki choot chudi aur phaili thi par Shumaila ki tu kunwari

thi aur bahut hi kasi aur garam thi. Mere lund se meri bahan ki choot me meri

zubaan aur ungli hi gayi thi. Jane kab mere dhakko me tezi aa gai. Hamdono ko

hi pata na chala lekin ab dard nahi kewal maza aur sror tha.

"Haan haan haaaaan aur tez tez ha ha ha aah aah, hhhhhhaaaayyy ooohhh aah

bhai jaan hhan aur tez." Har jhatke ke saath

Shumaila ke munh se aik lafz nikal raha tha.

Mammi Shumaila ke paas se hat gai aur saath let ker dono ki chudai dekhne lagi.

Mammi ke honthoon pe muskan thi. Mene haath bed se hata liye aur me Shumaila

pe gir gaya aur uske hoont choosne laga. Ab dhakkon me kafi tezi aa gayi thi.

Mera lund Shumaila ki geeli choot me araam se aa ja raha tha. Mere her jhatke

me mere ball Shumaila ki choot ko chhoo jate the. Mere testicals Shumaila ke

kolhoon ko chho jate. Dono paseene me naha gaye the jis se kamre me phuch

phuch ki awaazain aa rahi theen. Dono masti me chor aik dusre ko khob josh se

chod rahe the aur Mammi hamare paas leti hamari chudai dekh khush ho rahi thi.

Wah aaj bahut khush thi beti ko bete se chudavaakar. Me bhi apni bahan ko chod

bahut mast tha.

"Amir beta andar hi mat jhad jana. Jhadne se pehle apna lund bahar nikal lena."

Mammi ne mujhe dekhte huye kaha.

"Ok!" Mene ne tezi se jhatke lagate huye kaha aur phir kuchh der baad mene

apne lun Shumaila ki choot se nikal liya aur saath me Shumaila ki choot par

jhadne laga.

"Aaaaaaa!!!!!!!!!!!!!" Mere munh se ek tez siskari nikli aur mera garm garm pani

Shumaila ki choot pe aur fawware ki tarah uske pet aur choochiyon pe bhi gira.

kramashah………………………..

raj..
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Re: मा बेटा और बहन

Unread post by raj.. » 14 Oct 2014 01:32

माँ बेटा ओर बहन-11end

गतान्क से आगे…………………

मैं तो झाड़ा ही साथ ही शुमैला की चूत ने भी मेरा लंड बाहर आते ही बहुत

सा पानी छोड़ दिया. वह भी ऐक बार फिर झड़ने लगी और उस ने अपनी टांगे जो

काफ़ी देर से हवा मे थीं बेड पे रख लीं और मे झड़ने के बाद उसके उपर

ही लेट गया. शुमैला मेरे होंठो को चूमने लगी.

"आअहह भाई जान बहुत शुक्रिया." वह मुझसे बोली.

"शुमैला तुम्हारा भी शुक्रिया." मेने आँखे बंद केरते हुए कहा और दोनो

अपनी साँसे हल्की करने लगे.

काफ़ी देर यूँ ही लेटे रहने के बाद मेने करवट ली और फिर दोनो के दरमियाँ लेट

गया तो मम्मी ने मेरा चेहरा अपनी ओर करते कहा "अब खुश है मेरा राजा बेटा?"

मेने मम्मी के होंठो को जोश से चूम लिया तो मम्मी मुझसे बोली, "ये था तुम्हारे

इतने दिनो का इनाम. अपनी मम्मी की चुदि पुरानी चूत और गांद मारने के बदले

तुमको अपनी बहन की ताज़ी कसी अन्चुदि चूत मिली है." फिर हाथ बढ़ा शुमैला

की एक चूची को पकड़ हल्के से सहलाते कहा, "हाई शुमैला तुम ठीक तो हो ना?"

"हां! मम्मी भाई जान ने तो मेरी फाड़ ही डाली." शुमैला ने हस्ते हुए कहा तो

हम तीनो हस्ने लगे.

"लेकिन मम्मी मज़ा बहुत आया." शुमैला ने छत की तरफ देखते हुए कहा और

उस ने हाथ बढ़ा कर मेरा लंड पकड़ लिया.

मेरा लंड फिर से सेमी एरएसेट हो चुका था. लंड पकड़ते ही उसके मुँह से निकला,

"हाई माँ! ये तो फिर से खड़ा हो रहा है." और फिर तीनो की हँसी निकल गई.

"बेटी इसीलिए तो कह रही थी कि बाहर के लड़के से ख़तरा तो रहता ही है मज़ा

भी पूरा नही आता. घर पर जब तक चाहो चुद्वाति रहो. बाहर वक़्त नही मिलता

जल्दी और घर पर भाई के साथ ही रात भर लेटो. अब ये तुम्हारा है अब इस से

खूब मज़े करो कियूं बेटा?" मम्मी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा.

"हां मम्मी अब यह जब चाहे मेरा लंड अपनी चूत मे ले सकती है." कहते हुए

करवट ले कर मम्मी की चूचियों को चूमा और दोनो चूचियों को दोनो हाथो

मे पकड़ लिया.

"मम्मी अब आप को चोदुन्गा." मेने मम्मी की तरफ देखते हुए कहा.

"हां बाबा करेंगे लेकिन अभी मेरे यहाँ का दरवाज़ा बंद है." मम्मी ने

शलवार के उप्पेर से अपनी चूत पे हाथ लगाते हुए कहा.

"क्या मतलब? मे समझा नही यहाँ दरवाज़ा भी होता है क्या?" मेने हैरान

होते हुए पूछा और दोनो लोग हसणे लगीं.