मस्तानी ताई

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raj..
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Re: मस्तानी ताई

Unread post by raj.. » 05 Nov 2014 03:59



में खुश था के मा के प्रति ग़लत विचार अब मेरे मॅन में नही आरहे थे, रात में अचानक मेरी नींद खुल गयी, मेने देखा मा मेरे पास ही सोई है, मा ने सारी निकाल दी थी और वो सिर्फ़ पेटिकोट ओर ब्लाउस में सो रही थी, और उनका पेटिकोट घुटनो तक आगेया था, में उठा और बाथरूम चले गया, मेरे दिमाग़ में मा को लेके फिर से कामुक विचार आने लगे थे, मेने बोहत कोशिश की पर अपने आप को उनके बारे में सोचने से रोक नही पाया, में फिर से अपने बिस्तर पे आया और सोने का प्रयास करने लगा, पर में अपने मंन पे काबू ना पा सका, फिर मेने मा को छुने का सोचा, मेने अपने काँपते हुए हाथ मा के हाथ पे रखे, मुझे बोहत डर भी लग रहा था और यह सब करने में एक मज़ा भी आरहा था, मा मेरी तरफ पीठ कर के सो रही थी, मा के कोई हरकत ना दिखाने पे मेने मा के हाथ पे अपने हाथ हल्के से घुमाने लगा, ओह्ह कितना मज़ा आरहा था, मेरा लंड पॅंट में टाइट हुआ जा रहा था, फिर मेने अपना हाथ उनके हाथ से हटाके उनकी पीठ पे रख दिया, उनकी पीठ का स्पर्श बड़ा ही सुखदायी था, में अपना हाथ उनकी पीठ पे घुमा रहा था, और उनकी कमर पे भी घुमा रहा था, मेरे अंडर का शैतान सिर्फ़ अपनी वासना की भूक मिटाना जानता था, अब मुझे इस बात की भी परवाह नही थी के वो भूक में अपनी मा को च्छू के बुझा रहा हूँ, मेने धीरे धीरे अपने आप को उनसे सटा दिया, अब मा की गांद मेरे लंड से हल्का हल्का टच हो रही थी, और मेरा हाथ उनकी कोमल पीठ के स्परश का आनंद ले रहा था, मा ने कोई भी हरकत नही की और मेने अपने लंड को मा की गांद से थोड़ा और सटा दिया, अब उनके चूतड़ की गर्मी मुझे अपने लंड पे महसूस हो रही थी, और मेरा लंड उनकी गांद की दरार में फँस रहा था, अब मेने अपना हाथ उनकी कमर और चूतड़ के एरिया पे रख दिया और उनके चूतड़ को हल्के हल्के सहलाने लगा, और साथ साथ कोई हरकत ना होने पे उनकी गांद में अपना लंड भी दबाए जा रहा था, में धीरे धीरे अपना हाथ उनकी झंघों पे घुमाने लगा, मा कोई भी हरकत नही कर रही थी, तो मेने उनका पेटिकोट उपर उठाना शुरू कर दिया, ओह दोस्तों मुझे इतना मज़ा कभी नही आया, मेरा लंड मा की मोटी मुन्सल गांद में फँसा हुआ, मेरे हाथ उनकी झंघों को फील कर रहे थे, और में अपने आप को सातवे आसमान पे पा रहा था, मेने धीरे धीरे मा का पेटिकोट कमर तक उठा दिया था, ऑश कितना मज़ा आरहा था उनकी चिकनी झंघों पे हाथ घुमाने में, मा बिल्कुल नही हिल रही थी और ना ही कोई रिक्षन दे रहे ही, और में इस बात का पूरा फयडा उठा रहा था, मेने धीरे धीरे हाथ मा की पॅंटी तक पोह्चा दिया, और जैसे ही मेरा हाथ उनकी पॅंटी से टच हुआ मेरे शरीर में जैसे बिजली सी दौड़ गयी और मेरा शायद प्रेकुं च्छुत गया, मुझे अपनी पंत में गीला पं महसूस हो रहा था, मेने अपने आप को मया से और चिपका लिया अब मेरे पेट का हिस्सा और मा की पीठ जुड़ चुकी थी, मा की चूत का स्पर्श पॅंटी के उपर से बड़ा मजेदार थी, मा की चूत फूली हुई थी और मोटी थी, में हल्के हल्के मा की चूत भी दबा रहा था, ओह क्या बताउ दोस्तों कितना मज़ा आरहा था, मेने मा की चूत को पॅंटी हटा के महसूस करने का सोचा तभी मा ने करवट बदली, मेरी तो साँसे रुक गयी और में सोने का नाटक करने लगा और मुझे पता ही नही चला के मुझे कब डर के मारे नींद आगाई, सुबेह जब उठा तो देखा मा नही थी, में फॉरन फ्रेश हुआ और नीचे आगेया, मा और ताइजी और दीदी बैठ के बात कर रहे थे, मुझे देख के मा ने कहा उठ गया बेटा, उन्होने दीदी से कहा, सुजाता बेटा इसके लिए चाइ नाश्ता ले आओ, दीदी वहाँ से किचन में चली गयी, और अब में मा और ताइजी बैठे थे, मा के व्यवहार में कोई फरक ना देख के मेरी जान में जान आई, फिर मेरी नज़र ताइजी पे पड़ी, वो उस वक़्त पाँव मोड बैठी हुई थी और उनकी सारी घुटनो तक उँची हो चुकी थी, उनकी गोरी टांगे देख के मुझे उन्हे चोदने का मॅन कर रहा था, उन्होने मुझे उनकी टाँगो की ओर देखते हुए देख लिया था, उन्होने मुझे एक नॉटी स्माइल दी और अपनी टाँग ढकने के बजाय थोड़ी और खोल दी अब ताइजी की जाँघ का नज़ारा सॉफ था, मेरा लंड पॅंट में खड़ा हो रहा था, ताइजी इस स्तिति का भरपूर फयडा उठा रही थी और मुझे और ललचा रही थी, इतने में दीदी चाइ लेके आ गयी, जैसे ही वो मुझे चाइ दे रही थी, और में चाइ का कप उनके हाथ से लेने के लिए जैसे ही अपना सर उठाया में देखता ही रह गया, दीदी के झुकने की वजह से उनकी चुचियाँ सॉफ दिख रही थी, उन्होने काले रंग की ब्रा पहनी थी और उनकी चुचियाँ बड़ी बड़ी थी, में सोच रहा था, के मेरा यहाँ आना ही ग़लत हो गया, क्यूंकी पहले ताइजी फिर मा फिर पार्वती और अब दीदी को भी में वासना भरी नज़र से देखने लगा था, और में अपने आप को चाइ पीते पीते कोस रहा था, तभी ताइजी ने कहा चल बेटा चाइ पी ली हो तो ज़रा खेतों में चक्कर लगा के आजाएँ, मेने कहा ठीक है, इतने में मा ने भी कहा के में भी आती हूँ, ताइजी के चेहरे पे तो मायूसी आगाई और मेरे भी, खैर हम तीनो खेतों की ओर चल दिए,

raj..
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Re: मस्तानी ताई

Unread post by raj.. » 05 Nov 2014 03:59



कुछ ही देर में पंप हाउस आगेया, वहाँ पार्वती और भोला दोनो थे, उन्होने हमे देख के प्रणाम किया, फिर ताइजी ने उससे पूछा के सबके पैसे आगाये, उस ने कहा मालिकन सिर्फ़ 2 लोगो के बाकी है, उन्होने आज देने का वादा किया है, फिर ताइजी ने उससे कहा के जाओ अभी लेके आओ, वो ताइजी की बात ख़तम होते ही निकल गया, मा ने ताइजी से कहा के मुझे आप हमारे आम के बाग दिखाओ ना, तो ताइजी ने कहा चलिए, में वहीं बैठा था, तो ताइजी ने कहा तुम नही चलोगे बेटा, मेने कहा नही में यहीं ठीक हूँ आप हो आइए, और फिर वो दोनो आम के बगीचे की तरफ चल दिए, जैसे ही वो थोड़ा दूर पोहच् गये में पंप हाउस के अंडर चला गया, वहाँ पार्वती खाना बना रही थी, वो रोटियाँ सेक रही थी, उसने मुझे देखा नही था, मेने उससे कहा कभी हमे भी रोटियाँ सेकने का मौका दे दो, वो पीछे पलटी और मुझे देख के एक कातिल मुस्कान दी, कहने लगी के सेक लेना साहेब रोका किसने है, मा ताइजी और दीदी को देखने के बाद में चोदाइ के लिए तड़प रहा था, मेने पार्वती का हाथ पकड़कर उसे खड़ा कर दिया, और अपनी बाहों में ले लिया और इससे पहले के वो कुछ बोलती में अपने होंठ उसके होंठ पे रख दिए, वो समझ गयी के आज में बोहत जोश में हूँ, वो देहाती थी पर किस करना उसे अछी तरह आता था, उसने मेरा भरपूर साथ दिया, और अपनी जीभ मेरे मूह में डालके उसे मेरे मूह में घुमाने लगी, में ब्लाउस के उपर से उसकी चुचियों को मसल रहा था, वो भी पागलों की तरह मेरा साथ दे रही थी, फिर मेने बिना देर किए उसे दीवार से सटा दिया और चूमते हुए ही उसकी सारी उपर करने लगा, जैसे ही सारी कमर तक आई, मेने देखा उसने पॅंटी नही पहनी थी और उसकी चूत पे काफ़ी बाल थे, मेने उससे पूछा के पॅंटी क्यूँ नही पहनी वो बोली ऐसे ही अछा लगता है, मेने उससे कहा के चूत के बाल सॉफ रखा करो और मुझे बालों वाली चूत पसंद नही वो बोली अगली बार नही मिलेंगे, फिर में ज़रा सा झुका लंड उसकी चूत के सामने आया, मेने पूरी तेज़ी के साथ लंड उसकी चूत में पेल दिया, आधा ही गया था और मेरी और उसकी जान निकल गयी, उसकी चूत बोहत टाइट थी, और मेरा लंड मुश्किल से आधा अंडर गया, वो कहने लगी साहेब निकाल लो बोहत दर्द हो रहा है, मेने अपना लंड पूरा बाहर निकाला उसकी जान में जान आई, मेने फिर पूरी तेज़ी से लंड उसकी चूत में डाल दिया, उसकी चीख निकल गयी, ओह साआहेबब्ब्ब्ब्बबब क्याआआआ कार्रर्ररर दियाआआआ उउउउउउईईईईई माआआअ मररर्र्र्र्ररर गौईईईई बाहर्र्र्ररर निकाल्लूऊ साहेबब्ब्ब्ब्बबब, मेरा पूरा लंड उसकी चूत में था, और सच बताउ दोस्तों उसकी चूत किसी कुँवारी लड़की जैसी थी, जिसे कभी किसीने चोदा नही हो, मेने उससे पूछा के भोला का लंड छोटा है क्या, वो बोली हाआनन्न साअह्हीएब्ब, उसस्स्काअ लुंद्ड़द्ड बोहत्त्त्त छोटाआ, वो बुरी तरह हाँफ रही थी और अब धीरे धीरे उसको मज़ा आने लगा था,
क्रमशः................


raj..
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Re: मस्तानी ताई

Unread post by raj.. » 05 Nov 2014 04:00

gataank se aage...............

Phir apne sharer ki pyaas bujha ke mein aur taiji ghar ki ore chal pade, ghar ja ke dekha to maa aur didi humara khane ke liye intzar kar rahi thi, hum wahan pohche haath muh dhoya aur khana khane baith gaye, khana khane ke baad mujhe badi neend aarahi thi, mein apne room mein sone chale gaya, aur bistar pe jake let gaya, mein taiji ki gaand maarne ke khayal se hi betaab hua ja raha tha, mera lund phir se khada ho gaya, mein usse pant ke upar se sehlane laga, ab mein taiji ki gaand chatne ke liye aur maarne ke liye tadap raha tha, meine apna lund bahar nikala aur usse sehlane laga, mujhe phir kisi ke aane ki aawaj aayi to meine turant apna lund under kiya, aur sone ka naatak karne laga, dekha to maa aayi thi room mein, unhone mujhe aawaaj di beta so gaya kya, meine neend mein hone ka bahana karte hua kaha, kaho maa kya baat hai, woh boli kuch nahi dekh rahi thi ke soya ke nahi, mein palang pe soya tha, aur maa neeche chataai biccha ke let gayi, woh lete lete puchne lagi, ke beta tujhe yahan acha lagta hai ke nahi, meine aise dikhaya ke mein yahan unke aur papa ke kehne se ruka hun aur mujhe yahan rukne mein koi interest nahi hai, mein aur maa ek dusre ko dekhe bina hi baat kar rahe the, tabhi meine side ki karwat li aur maa ki taraf muda, aur jaise hi muda mein unhe dekhta hi reh gaya, maa ka pallu sarak gaya tha, aur unke bade bade boobs blouse se bahar aane ke liye tadap rahe the, mujhe ek pal ke liye samajh hi nahi aaya ke kya ho raha hai, mujhe bada ajeeb laga aur apne aap pe gussa bhi aaya ke mein apni hi maa ke boobs dekh raha hun, khair mein phir seedha hoke so gaya aur sochne laga ke kis tarah se meri zindegi puri tarah badal gayi hai gaon aate hi, aur ab mujhe chodne ke siway aur kuch nahi sujh raha hai, pehle to apni taiji aur aaj apni maa ke boobs bhi dekh liye, maa in sab baton se anjaan thi aur waise hi lete hue mujhse baat kar rahi thi, meine bohat koshih ki par apna dhyan maa ke boobs se nahi hata paya, isi kashmash mein mere aankh lag gayi, phir kuch der baad jab room mein aawaj hui to meri aankh khul gayi, maa apne bag mein saaman nikal kar cupboard mein rakh rahi thi, maa ki peeth meri taraf thi, mein maa ki taraf gaur se dekha to paya ke maa ka sharer gathila tha, aur woh taiji se jyada fit bhi thi, maa ki gaand gol aur bhari hui thi aur chuchiyan bhi badi badi thi, woh apne kaam mein lagi hui thi aur mein unki gaand ka najara kar raha tha, mujhe bohat ajeeb bhi lag raha tha aur doosri taraf aisa karne se maja bhi aaraha tha, mein apne aap ko maa ki taraf dekhne se rok nahi paya isiliye mein wahan se bahar chale gaya, meine mehsus kiya ke in sab khayalon se mera lund khada ho raha tha, meine neeche aate hi taiji ko dhunda, par woh kahin gayi hui thi, mein kheton ki taraf nikal pada taki apna dhyan maa ki ore se hata sakun, chalte chalte mein pump house tak pohch gaya, meine dekha ke parvati kapde dho rahi hai, mein wahin khada ho ke dekhne laga, usne ab tak mujhe nahi dekha tha, mein usse dekhne laga, usne apni saree ghutno ke upar tak utha rakhi thi aur palla bhi thik nahi tha, woh dikhne mein itni sunder nahi thi aur thodi patli bhi thi, gaand aur chuchiyan bhi maa aur taiji jitni nahi thi, mein itna chut ka pagal ho gaya tha ke mujhe thik si dekhne wali kaamwali ki bhi chut chahiye thi, kuch din pehle Mumbai mein achi achi ladkiyan chodd di thi aur ab yahan sala gaon ki kaamwali bhi mast lag rahi thi, mein kuch der khada hoke dekhne laga uska colour sawla tha, woh jab bhi kapdo pe dhoka maarti to uski gaand piche se unchi ho jati, aur uske chuchiyan ghutno se dab ke bahar aane ki koshish karti thi, mera bada bura haal tha, mujhe chut kisi bhi keemat pe chahiye thi, meine kuch awaaj ki, to uska dhyan meri taraf gaya, usne mujhe Namaste kiya aur apna kaam karne lagi, mere wahan hone pe bhi usne apne kapde thik nahi kiye, waise ek baat bataun doston gaon ki auratein badi tej hoti hai, mein bhi besharam hoke wahin uske aage khada hogaya aur yahan wahan dekhne laga, ab mein uske saamne khada hua tha to uski jhaanghon ke beech ka hissa bhi dikh raha tha,

usne shayad safed rang ki panty pehni thi, usne mujhe apni chut ki taraf dekh te dekh liya tha, par usne koi reaction nahi diya aur apna kaam karne lagi, mera mann kar raha tha saali ko wahin kapde dhote hue hi chod dun, meine usse pucha ke bhola kahan hai to woh kehne lagi ke woh kisi kaam se bahar gaye hain shaam tak aajayenge, usne kaha saheb aap din mein itni dhoop mein bahar kyun aaye, meine kaha aise hi, woh boli aap under room mein jake baithiye mein paani lati hun, mein under chale gaya, aur khaat pe baith gaya, kuch der baad parvati under aayi aur matke mein se glass pani bhar ke mujhe diya, jab woh mere saamne glass de rahi thi to meine dekha uske blouse ke beech ke 2 hook tute hue hai aur uski safed rang ki bra bhi dikh rahi thi aur thoda hissa chuchi ka bhi dikh raha tha, pallu thik na hone ki wajah se to pehle hi uske chuchi ki lakeer dikh rahi thi, ab yeh dekh mera lund pant mein uchhal ne laga, meine socha kyun na iske upar hi haath saaf kar liya jaye, meine usse kaha ke tumhara kaam ho gaya woh boli haan saheb hogaya hai bas kapde sukhane hain, usne pucha koi kaam hai kya meine kaha haan, to woh boli mein kapde sukha ke aati hun, mein khaat pe let gaya aur uske aane ka intzar karne laga, woh mujhe uske maalik ki tarah hi treat kar rahi thi, kuch der baad woh kapde sukha ke aayi to usne pucha kya kaam hai saheb, meine uske taraf dekha aur kaha tum to puri gili ho chuki ho, woh kehne lagi haan saheb woh dhule hue kapde kandhe pe rakhe to thoda paani gir gaya, meine kaha mere paanv bohat dard kar rahe hain jara daba do, woh boli saheb aap jawan aadmi ho aur bhola bhi ghar pe nahi hai, agar kisi ne dekh liya to bina baat ke badnaami ho jayegi, meine kaha bhola tum keh rahi ho shaam ko aayega to kis baat ki chinta hai, chalo dabao paanv woh boli thik hai, ab woh mere paanv ke pass aake neeche baith gayi aur mere paanv dabane lagi, uske haath shayad kaam karne ki wajah se sakht ho gaye the, mujhe uske haath ka sparsh acha lag raha tha, meine baton baton mein usse kaha tumhare haath mein to bohat dum hai, woh boli saheb kaam bohat ho jata hai isi wajah se aise ho gaye hain, woh mere ghutno ke neeche ka hissa hi daba rahi thi, aur ab woh jab jhukti to uske chuchiyan mujhe saaf najar aati, meine usse kaha jara upar bhi daba do, woh neeche baithe hi ghutno ke upar dabane lagi mujhe usme maja nahi aaraha tha, meine usse kaha tum khaat per baith kar dabao aise ache se nahi daba pa rahi ho, woh kuch boli nahi aur khaat pe aake baith gayi, meine socha kyun na isse seduce kiya jaye, meine usse pucha ke shaadi ko kitna samay hogaya woh boli 4 saal, meine kaha to tumhare bacche kahan hai, to uski aankhon mein aansun aagaye, mein samajh gaya ke baat kya hai, woh kehne lagi ke usse baccha nahi ho pa raha hai, aur sab log usse banjh keh ke bulate hain, usse yeh nahi pata tha ke kis ki wajah se nahi horaha hai, matlab bhola ki wajah se yan uski wajah se, meine kaha to kya tumne doctor se jaanch karwayi to usne kaha nahi, par usse lagta tha ke uski 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maarne chala gaya tha, phir kuch der baad teeno khana banane mein lag gaye aur mein apne room mein jake baith gaya, jab khana taiyaar hua to mujhe neeche bulaya aur hum sab ne milke khana khaya, mein maa se najre nahi mila pa raha tha, khana kha ke mein apne room mein aagaya, taiji tauji ki maalish karne chali gayi, maa aur didi ghar ke baki kaam khatam karne mein lag gaye, kuch der baad jab maa room mein aayi, to woh palang pe aake baith gayi aur idher udher ki baatein karne lagi, woh baat karte hue apne paanv daba rahi thi, meine maa se pucha ke kya baat hai kya paanv dukh raha hai, woh boli haan aaj paanv jara dukh raha hai beta, meine ache mann se unse pucha ke kya mein daba dun, woh boli agar tu thak na gaya ho to, meine kaha isme kya thakne ki baat, layiye mein daba deta hun, maa palang pe let gayi aur mein unke paanv dabane laga, unhe acha lag raha tha, mein saree ke upar se hi daba raha tha, phir maa sogayi, aur mein unke bagal mein so gaya, mujhe neend jaldi aagayi,