सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

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The Romantic
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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 06 Nov 2014 15:55


अशोक की मुश्किल
भाग 3
चाची का फ़ैसला…


गतांक से आगे…
सो चाची ने खुल के सामने आने का फ़ैसला कर लिया, जी कड़ा कर धड़कते दिल से बोल ही दिया- “बेटा फ़िर तो तेरी जान बचाने का एक ही तरीका है तू मेरे साथ कर ले।
अशोक-“अरे ये क्या कह रही हैं चाची ये कैसे हो सकता है। हाय मैं मरा! आप तो महुआ की चाची यानि कि मेरी सास हैं। ”
चाची अशोक के पथरीले मर्दाने सीने पर झुक अपने ब्लाउज में उभरते उत्तेजना से कठोर हो रहे निपल रगड़ लण्ड को सहलाते हुए बोलीं- ये सच है कि मैं महुआ की चाची हुँ इस नाते वो मेरी मुँहबोली बेटी हुई उसके एवज में मुँहबोली माँ का फ़र्ज मैं अदा कर चुकी उसकी शादी कर उसका घर बसा दिया उसी नाते मैं तेरी मुँहबोली सास हुँ अस्लियत में मेरा तेरा कोई रिश्ता नहीं। तू एक अन्जान मर्द और मैं एक अन्जान औरत।
अशोक(दर्द से छ्ट्पटाने के बहाने लण्ड अकड़ा के उभारते हुए)-“मगर चाची……!
चाची अपनी धोती खींच के खोलते हुए बोली- “क्या अगर मगर करता है वैसे भी आखिर तू मेरी महुआ बेटी का पति है तेरी सास होने के नाते तेरी जान तेरे शरीर की रक्षा भी तो मेरा फ़र्ज है।”
अशोक(उनके हाथ से झूठ्मूठ लण्ड छुटाने की कोशिश करते हुए)-“मगर चाची बड़ी शरम आ रही है। हाय ये दर्द……!!
चाची ने एक ही झटके में अपना चुट्पुटिया वाला ब्लाउज खोल अपने बड़े बड़े विशाल स्तन अशोक की आँखों के सामने फ़ड़फ़ड़ा के कहा-“ इधर देख बेटा क्या मेरा बदन इस लायक भी नही कि तेरे इस पेट दर्द की मुसीबत की दवा के काम आये।”
ये कह के चाची ने अपना पेटीकोट का नारा खींच दिया पेटीकोट चम्पा चाची के संगमरमरी गुदाज भारी चूतड़ों शानदार रेशमी जांघों से सरक कर उनके पैरों का पास जमीन पर गिर गया। चाची ने अशोक बगल में लेट अपना नंगा बदन के बदन से सटा दिया और अपनी एक जाँघ उसके ऊपर चढ़ा दी। अशोक उत्तेजाना से पागल हुआ जा रहा था।
उनके बड़े बड़े विशाल स्तनों के निपल अशोक के जिस्म में चुभे तो अशोक बोला
- “हाय चाची कहीं कोई आ न जाय, जान न जाय।”
चाची –“ अरे यहाँ कौन आयेगा घर का मुख्य दरवाजा बाहर से बन्द है फ़िर भी आवाज बाहर न जाये के ख्याल से मैं कमरे का दरवाजा भी बन्द कर लेती हुँ।”
ये कह वे जल्दी से उठ कमरे का दरवाजा बन्द करने जल्दी जल्दी जाने लगीं। उत्तेजना से उनका अंग अंग थिरक रहा था। वो आज का मौका किसी भी कीमत पर गवाना नही चाहती थी। अशोक दरवाजे की तरफ़ जाती चाची की गोरी गुदाज पीठ, हर कदम पर थिरकते उनके संगमरमरी गुदाज भारी चूतड़ शानदार रेशमी जांघें देख रहा था।
दरवाजा बन्द कर जब चाची घूंमी तो अशोक को अपना बदन घूरते देख मन ही मन मुस्कराईं और धीरे धीरे वापस आने लगीं। अशोक एक टक उस अधेड़ औरत के मदमाते जवान जिस्म को देख रहा था। धीरे धीरे वापस आती चाची की मोटी मोटी गोरी रेशमी जांघों के बीच उनकी पावरोटी सी फ़ूली हुई दूध सी सफ़ेद चूत थी जो कभी जांघों के बीच विलीन हो जाती तो कभी सामने आ जाती। पास आकर चाची मुस्कुराती हुई उसके बिस्तर के दाहिनी तरफ़ इत्मिनान से खड़ी हो गईं क्योंकि अशोक को अपना बदन घूरते देख वो समझ गईं थी कि उसपर पर चाची के बदन का जादू चल चुका है। खड़े खड़े ही चाचीने उसकी लुंगी हटा कर उसका दस इन्ची लण्ड फ़िर से थाम लिया और हाथ फ़ेर के बोली –“ बेटा तेरा ये नाइसिल पावडर के डिब्बे के जितना लम्बा और मोटा हैवी लण्ड महुआ ले लेती है?”
अशोक-“ नहीं चाची सिर्फ़ सुपाड़ा किसी तरह सुपाड़े से चोद के झाड़ लेता हूँ उससे कभी मेरी चुदाई की प्यास नहीं बुझी। वो क्या मुझे आज तक अपने जोड़ की औरत मिली ही नहीं डाक्टरों के अनुसार इसीलिए मुझे हमेशा पेट दर्द रहता है।”
अशोक का लण्ड सहलाती चाची के बड़े बड़े विशाल स्तन, उनके खड़े खड़े निपल, मोटी मोटी गोरी रेशमी जांघें, जांघों के बीच उनकी पावरोटी सी फ़ूली हुई दूध सी सफ़ेद चूत ने अशोक की बर्दास्त खत्म कर दी थी। उसने अपना दाहिना हाथ उनकी कमर के पीछे से डालकर उन्हें अपने ऊपर गिरा लिया। उनके बड़े बड़े विशाल स्तनों के निपल अशोक की मर्दानी छाती में धँस गये।
अशोक ने महसूस किया कि चाची का बदन अभी तक जवान औरतों की तरह गठा हुआ है। वो उनके गुदाज कन्धे पर मुँह मारते हुए बोला-“मुझे आज पहली बार अपने पसन्द की औरत मिली है बदन तो आपका ऐसा है चम्पा चाची कि मैं खा जाऊँ मगर अब देखना है कि इस बदन की चूत मेरे लण्ड के जोड़ की है या नहीं।
चाची हँसते हुए बगल में लेट गई और उसका दस इन्ची हलव्वी लण्ड फ़िर से थाम लिया और हाथ फ़ेरते बोलीं-अशोक।
अशोक-“हाँ चाची ।
चाची “आ जा अब तेरे पेट का दर्द ठीक हो जायेगा क्योंकि ये चाची और उसकी चूत तेरे जोड़ की है।”
अशोक उठकर चाची की जाँघों के बीच बैठ गया और उनकी केले के तने जैसी सुडोल संगमरमरी रेशमी चिकनी और गुदाज मोटी मोटी रानों को सहलाते हुए बोला-“ आह चाची आप कितनी अच्छी हो । बोलते हुए उसका हाथ चूत पर जा पहुँचा। जैसे ही अशोक ने पावरोटी सी फ़ूली हुई दूध सी सफ़ेद चूत सहलाई चाची ने सिसकारी ली
"स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सआ---आ---ह आ---आ---ह।”
चाची ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत की फांके फैलायी अब उनकी मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों भारी नितंबों के बीच मे उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत का मुंह खुला दिख रहा था अशोक ने अपने फौलादी लण्ड का सुपाड़ा चूत के मुहाने पर टेक दिया। चाची ने सिसकारी ली –
"स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सआ---आ---ह आ---आ---ह।”
अशोक चूत के मुंह की दोनों फूली फांको के ऊपर अपना फौलादी सुपाड़ा घिसने लगा
चाची की चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी। उत्तेजना में आपे से बाहर हो चाची ने जोर से सिसकारी ली और झुन्झुलाहट भरी आवाज में कहा –
"स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सआ---आ---ह आ---आ---ह अब डाल न।”
ये कह चाची ने उसका लण्ड अपने हाथ से पकड़कर निशाना ठीक किया।
ये देख अशोक ने उन्हें और परेशान करना ठीक नही समझा उसने हाथ बढ़ाकर चाची की सेर सेर भर की चूचियाँ थाम लीं और उन्हें दबाते हुए लण्ड का सुपाड़ा चूत मे धकेला।
पक की आवाज के साथ सुपाड़ा चाची की चूत में घुस गया, पर चाची की चीख निकल गई “आ---आ---ईईईईईह”
क्योंकि चाची की चूत में मुद्दतों से कोई लण्ड नहीं गया था सो वो दर्द से चीख पड़ी थीं पर अशोक के लण्ड के सुपाड़े को बिलकुल कोरी बुर का मजा आ रहा था।
अशोक –“ हाय चाची आपकी चूत तो बहुत टाइट है एकदम कोरी बुर लग रही है।”
चाची(बेकरारी से) –“हाय अशोक बेटा तेरे लण्ड का सुपाड़ा मुझे भी सुहागरात का मजा दे रहा है राजा किस्मत से मुझे ऐसा मर्दाना लण्ड और तुझे अपनी पसन्द की चूत मिली है। मेरी भतीजी महुआ के साथ सुपाड़े से मनाई आधी अधूरी सुहागरात की भरपायी, चाची की चूत में पूरा लण्ड धाँस के आज तू अपने मन की सुहाग रात मना के पूरी कर ले। पर अब जल्दी करमेरी चूत में आग लगी है।”
अशोक -“पर आप पूरा सह लोगी चाची? आपकी चूत भी तो इतनी टाइट छोटी सी ही लगती है मैं आप को तकलीफ़ नहीं पहुँचाना चाहता। मुझे डर लगता है क्योंकि आज तक कोई औरत मेरा पूरा लण्ड सह नहीं पाई है।”
चाची – “अरे तू डर मत बेटा मेरी चूत छोटी होने की वजह से टाइट नहीं है बल्कि इसका टाइट होना एक राज की बात है वो मैं फ़िर बाद में बताऊँगी तू पहले पूरा लन्ड तो डाल मेरी इतने सालों की दबी चुदास भड़क के मेरी जान निकाले ले रही है।
अशोक ने थोड़ा सा लण्ड बाहर खीच के फ़िर धक्का मारा तो थोड़ा और लण्ड अन्दर गया चाची कराहीं–
“उम्महहहहहहहहहहह।”
पर अशोक ने उनके कहे के मुताबिक, परवाह न करते हुए चार धक्कों में पूरा लण्ड उनकी चूत में ठाँस दिया
जैसे ही अशोक के हलव्वी लण्ड ने चाची की चूत की जड़ बच्चेदानी के मुँह पर ठोकर मारी, उनके मुँह से निकला- “ओहहहहहहहहहहह शाबाश बेटा।”
आज तक चाची ने जिस तरह के लण्ड की कल्पना अपनी चूत के लिए की थी अशोक के लण्ड को उससे भी बढ़ कए पाया उनके आनन्द का पारावार नहीं था। चाची ने अपनी टाँगे उठा के अशोक के कन्धों पर रख ली। अशोक ने उनकी जांघों के बीच बैठे बैठे ही चुदाई शुरू की। पॉव कन्धों पर रखे होने से लण्ड और भी अन्दर तक जाने लगा। उनके गोरे गुलाबी गद्देदार चूतड़ अशोक की जॉंघों से टकराकर उसे असीम आनन्द देने लगे। साथ ही उसको उनकी सगंमरमरी जॉंघों पिन्डलियों को सहलाने और उनपर मुँह मारने में भी सुविधा हो गई। उसके हाथ चाची की हलव्वी चूचियाँ थाम सहला रहे थे बीच बीच में वो झुककर उनके निपल जीभ से सहलाने और होठों में दबाके चूसने लगता।
धीरे धीरे चाची के बड़े बड़े स्तनों पर उसके हाथों और होठों की पकड़ मजबूत होती गई और कमरे में सिसकारियॉ गूँजने लगी। चाची टॉगें ऊपर उठाकर फैलाती गईं अशोक की रफ्तार बढ़ती गई और अब उसका लण्ड धॉस के पूरा अन्दर तक जा रहा था। अब दोनों घमासान चुदाई कर रहे थे। अब चाची अपने भारी चूतड़ उछाल उछाल के चुदवाते हुए सिसकारियॉं भरते हुए बड़बड़ा रही थीं- “शाबाश बेटा! मिटाले अपना पेट का दर्द और बुझा दे इस चुदासी चाची की उमर भर की चुदास, जीभर के चोद।
अशोक चाची के दबाने मसल़ने से लाल पड़ बडे़ बड़े स्तनों को दोनों हाथों में दबोचकर चूत में धक्का मारते हुए कह रहा था- “उम्म्हये चाची तुम कितनी अच्छी हो सबसे अच्छी हो, इस तरह पूरा लण्ड धँसवा धँसवा के आजतक किसी ने मुझसे नही चुदवाया इतना मजा मुझे कभी नहीं आया। उम्म उम्म उम्म लो और लो चाची आह”
चाची (भारी चूतड़ उछाल उछाल के सिसकारियॉं भरते हुए)- “इस्स्स्साह बेटा! किसी लण्ड की कीमत उसके जोड़ की चूत ही जान सकती है उन सालियों को क्या पता तेरे लण्ड की कीमत, मेरी चूत तेरे लण्ड के जोड़ की है तेरा लंड तो लाखों मे एक है बेहिचक चोदे जा, फ़ाड़ दे अब जबतक तू यहाँ है रोज मेरी चूत फ़ाड़ मैं रोज तेरे लंड से अपनी चूत फ़ड़वाऊंगी ह्म्म उम्म्म्ह उम्म्म ह्म्म उम्म्म्ह उम्म्म!!!!!!! अब तू जब भी यहाँ आयेगा मेरी चूत को अपने लण्ड के लिए तैयार पायेगा।
अब दोनों दनादन बिना सोचे समझे पागलों की तरह धक्के लगा रहे थे दोनों को पहली बार अपने जोड़ के लन्ड और चूत जो मिले थे। आधे घण्टे कि धुँआधार चुदाई के बाद अचानक अशोक के मुँह से निकला - आह चाची लगता है मेरा होने वाला है। आआअह अआआह मुझसे रुका नहीं जायेगा।
चाची-“ उम्मईईईईईईईईईई मैं भी झड़नेवाली हूँ बेटा।”
आ---आ---ह आ---आ---ह उ—ईईई ह्म्म आ--ईईई आ---आ---ह आ---आ---ह उ—ईईई आ--ईईई,. " मैं तो गईई‍र्‍र्‍र्‍र्ईईई।
“आह चाची आ---आ---ह आ---आ---ह उ—ईईई आ--ईईई आ---आ---ह आ---आ---ह उ—ईईई आ—ईईई मेरा भी छुट गया आह।”
अशोक थक कर चाची के बदन पर बिछ सा गया। वो अपनी उखड़ी सॉसों को सम्हालने की कोशिश करते हुए उनका चिकना बदन सहलाने लगा।
चाची –“अब दर्द कैसा है बेटा।
अशोक उनके ऊपर से हट बगल में लेट बोला- अब आराम है चाची।
फ़िर मुस्कुरा के उनकी चूत पर हाथ फ़ेर के बोला-“आपकी इस दवा ने जैसे सारा दर्द निचोड़ लिया।”
क्रमश:………………


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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 06 Nov 2014 15:57

अशोक की मुश्किल
भाग 4
राज की बात…

गतांक से आगे…
चाची ने भी मुस्कुरा के उसकी तरफ़ करवट ली और अपनी गोरी मोटी मांसल चिकनी जाँघ उसके ऊपर चढ़ा लन्ड पे रगड़ते हुए बोलीं- “एक बात सच सच बताना बेटा मैं बुरा नहीं मानूँगी। देख मैं भी उम्र दराज औरत हूँ मैंने भी दुनियाँ देखी है ये बता कि सचमुच तेरे पेट में दर्द था या तू सिर्फ़ मुझे चोदने का बहाना खोज रहा था क्योंकि मैंने तेरी आँखों को चोरी चोरी मेरा बदन घूरते देखा है।”
अशोक ने फ़िर झूठ का सहारा लिया-“अब क्या बताऊँ चाची दोनों बातें सही हैं। दरअसल चुदाई की इच्छा होने पर मुझे पेट दर्द होता है। जब आपको रसोई में सिर्फ़ धोती ब्लाउज में देखा………………।”
“तो पेट दर्द शूरू होगया।” चाची ने मुस्कुरा के वाक्य पूरा किया।
अशोक ने झेंपते हुए कहा-
“अरे छोड़िये न चाची”
कहते हुए उनके बायें स्तन के निपल को उंगलियों के बीच गोलियाते मसलते हुए और दायें स्तन के निपल पर जीभ से गुदगुदा के स्तन का निपल अपने होठों मे दबा उनके विशाल सीने में अपना मुँह छिपा लिया और उनके मांसल गुदाज बदन से लिपट गया.

अब उसका लण्ड कभी चाची की मोटी मोटी चिकनी गुलाबी जांघों कभी भारी नितंबों तो कभी उनकी चूत से रगड़ खा रहा था।
अशोक झेंपते हुए मुस्कुरा के बात बदलने की कोशिश की-“अच्छा ये बताइये आप कह रहीं थी कि चूत टाइट होना राज की बात है। कैसा राज?”
चाची –“ अरे हाँ बेटा ये तो बड़े काम की बात याद दिलाई। तू कह रहा था कि महुआ तेरे लण्ड का सिर्फ़ सुपाड़ा किसी तरह ले पाती है क्योंकि उसकी चूत बहुत छोटी है पहले मेरी भी बल्कि उससे भी छोटी ही थी मेरे मायके के पड़ोस मे एक वैद्यजी रहते हैं उनका एक लड़का चन्दू था जब मैं 15 साल की थी तो वो चन्दूजी 16 या 17 के होंगे। हमारा एक दूसरे के घर आना जाना भी था। अब ठीक से याद नहीं पर धीरे धीरे जाने कैसे चन्दूजी ने मुझे पटा लिया और एक दिन जब हम दोनों के घरों में कोई नहीं था वो मुझे अपने कमरे में ले गये और चोदने की कोशिश करने लगे पर एक तो 15 साल की उम्र, ऊपर से जैसा मैंने बताया मेरी कुंवारी बुर मेरी अन्य सहेलियों के मुकाबले छोटी थी सो लण्ड नहीं घुसा, तभी चन्दू उठा और अपने पिताजी के दवाखाने से एक अजीब मलहम जैसा ले आया, उसे मेरी बुर और अपने लण्ड पर लगाया उसे लगाते ही बुर मे चुदास कि गर्मी और खुजली बढ़ने लगी तभी वो अपना लण्ड मेरी बुर पे रगड़ने लगे थोड़ी ही देर में मैं खुद ही अपनी बुर में उनका लण्ड लेने की कोशिश करने लगी थोड़ी ही देर में आश्चर्यजनक रूप से मैंने उनका पूरा सुपाड़ा अपनी बुर मे ले लिया पर उस दिन उससे ज्यादा नही ले पाई चन्दू ने भी सुपाड़े से ही चोद के संतोष कर लिया।
पर अब तो मुझे भी चस्का लग गया था, अगले दिन फ़िर मैं मौका देख कर उनके के पास पहुंची वो बहुत खुश हुए और हम दोनों चुदाई करने की कोशिश करने लगे। पर मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब आज आधे सुपाड़े के बाद लण्ड ने घुसने से इन्कार कर दिया पूछने पर वो मुस्कुराये और उन्होंने बताया कि उनके वैद्य पिता एक अनोखा मलहम(जो कि उन्होंने कल लगाया था) बनाते हैं। अगर कम उम्र की लड़कियाँ उसे अपनी बुर पे लगा के चुदवाने की कोशिश करें तो धीरे धीरे कुछ ही समय में बुर में रबड़ जैसा लचीलापन आ जाता है पर बुर ढ़ीली नहीं होती यहाँ तक कि भयंकर चुदक्कड़ बन जाने पर भी चूतें कुंवारी बुर की सी टाइट रहती हैं पर साथ ही अपने लचीलेपन के कारण बड़े से बड़ा लण्ड लेने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होती। मैं बहुत खुश हुई।
इस बीच चाचा मलहम ले आये मेरी चूत पर लगाने लगे, मैं तो चुदासी थी ही सो उनसे उस मलहम का इस्तेमाल कर चुदवाने को तैयार हो गई। कुछ ही दिनों में देखते ही देखते मैं आसानी से उनके पूरे लण्ड से चुदवाने लगी। मेरी बुर चुद के बुर से चूत बन गई, पर देखने और इस्तेमाल मे पन्द्रह सोलह साल की बुर ही लगती रही, आज भी लगती है तूने भी देखा और महसूस किया है।चन्दू चाचा से गाँव की शायद ही कोई लड़की बची हो? धीरे धीरे वो बदमाश लड़कियों मे पहले चन्दू चाचा फ़िर चोदू चाचा के नाम से मशहूर हो गये और अभी भी हैं। वो अभी भी अपने हुनर का उस्ताद है और अभी भी नाम कमा रहे है।”
इतना बताते बताते चाची मारे उत्तेजना के हाँफ़ने लगीं क्योंकि एक तो उनकी ये गरमागरम कहानी ऊपर से उनके जिस्म पर अशोक की हरकतें, इन दोनों बातों ने उन्हें बहुत गरम कर दिया था। इस समय वो चाची की मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों के बीच अपना फ़ौलादी लण्ड दबाकर, बारी बारी से उनके निपल चूसते हुए, अपने हाथों से उनके बड़े बड़े भारी नितंबों को दबोच टटोल रहा था।
अशोक ने पूछा –“उम्म क्या आप उनसे महुआ की चूत ठीक करवा सकती हैं।”
अशोक की हरकतों के कारण सिस्कारियाँ भरते हुए-“इस्स्स्स आ~ह उइइईई अम्म्म्म आआह हाँ पर उसके लिए तो महुआ को चन्दू चाचा से चुदवाना पड़ेगा।”
अशोक बायें हाथ से चाची की पावरोटी सी चूत के मोटे मोटे होठ फ़ैला, दायें हाथ से चूत के मुहाने पर अपने लण्ड का सुपाड़ा धीरे धीरे घिसते हुए बोला- “अरे तो कौन सी उसकी चूत घिस जायेगी उल्टे आपकी तरह हमेशा के लिए जवान बनी रहेगी साथ ही हमेशा के लिए सारी परेशानी दूर हो जायेगी सो अलग।”
चूत पे लण्ड घिसने से चाची की सिसकारियाँ और साँसे और भी तेज होने लगी –“ इस्स्स्स आ~ह उइइईई अम्म्म्म आआ~~ शैतान ! पर तुझे महुआ को फ़ुसलाकर चाचा से चुदवाने के लिए तैयार करना पड़ेगा।”
अशोक- “मेरे ख्याल से चुदाई करते हुए सोचें तो इसका कोई न कोई तरीका सूझ जायेगा।”
अचानक चाची ने एक झटके से उसे पलट दिया और बोली- “अच्छा ख्याल है तू आराम से लेटे लेटे चाची से चुदवाते हुए सोच और चाची का कमाल देख इसबार मैं चोदूंगी, तुझे ज्यादा मजा आयेगा जिससे सोचने में आसानी होगी और तेरा बचखुचा दर्द भी चला जायेगा।”
वो अशोक के ऊपर चढ़ गयी और बायें हाथ की दो उँगलियों से अपनी पावरोटी सी चूत के मोटे मोटे होठ फ़ैलाये और दायें हाथ से उसके लण्ड को थाम, उसका सुपाड़ा अपनी, चुदास से बुरी तरह पनिया रही अपनी चूत के मुहाने से सटाया और दो ही धक्कों में पूरा लण्ड चूत में धंसा लिया और सिसकारियॉं भरते हुए अपने होंठों को दांतों में दबाती हुयी चूतड़ उछाल उछालकर धक्के पे धक्का लगाने लगी ।
अशोक के लिए ये बिलकुल नया तजुर्बा था उसने तो अब तक औरतों को अपने फ़ौलादी लण्ड से केवल डरते,बचते, चूत सिकोड़ते ही देखा था शेरनी की तरह झपटकर लण्ड को निगल जाने वाली चाची पहली औरत थीं सो अशोक को बड़ा मजा आ रहा था। उनके बड़े बड़े उभरे गुलाबी चूतड़ अशोक के लण्ड और उसके आस पास टकराकर गुदगुदे गददे का मजा दे रहे थे। वो दोनों हाथों से उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे उछलने जिस्म को, गुदाज चूतड़ों को दबोचने लगा। उनके उछलते कूदते तरबूज जैसे स्तन देख अशोक उनपर मुँह मारने लगा । कभी निपल्स होठों मे पकड़ चूसने लगता, पर अशोक का पूरा लण्ड अपनी चूत मे जड़ तक ठोकने के जुनून में चाची उसके लण्ड पे इतनी जोर जोर से उछल रहीं थी कि निपल्स बार बार होठों से छूट जा रहे थे। वो बार बार झपट कर उनकी उछलती बड़ी बड़ी चूचियाँ पकड़ निपल्स होठों में चूसने के लिए दबाता पर चाची की धुआँदार चुदाई की उछल कूद में वे बार बार होठों से छूट जा रहे थे करीब आधे घण्टे की धुआँदार चुदाई के बाद इन दोनों खाये खेले चुदक्क्ड़ उस्तादों ने एक दूसरे को सिगनल दिया कि अब मंजिल करीब है सो अशोक ने दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी मसलने से लाल पड़ गई चूचियाँ पकड़कर एक साथ मुंह में दबा ली इस बार और उनके चूतड़ों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़तक लण्ड धॉसकर झड़ने लगा तभी चाची अपनी चूँचियाँ अशोक के मुँह में दे उसके ऊपर लगभग लेट सी गईं और उनके मुँह से जोर से निकला-
“उहहहहहहहहहहह ”
वो जोर से उछलकर अपनी पावरोटी सी फूली चूत में जड़ तक अशोक का भयंकर फ़ौलादी लण्ड धॉंसकर और उसे लण्ड पर बुरी तरह रगड़ते हुए झड़ने लगी ।
दोनो झड़के पूरी तरह से निचुड़ गये थे। चाची बुरी तरह पस्त हो अशोक के ऊपर पड़ी थीं तभी अशोक ने पलट के चाची को नीचे कर दिया। अब अशोक उनके ऊपर आ गया था उसने चाची के बायें स्तन पर हाथ फ़ेरते हुए और दायें स्तन के निपल पर जीभ से गुदगुदाते हुए कहा-“मैंने महुआ को राजी करने का तरीका सोच लिया है बस आप चन्दू चाचा को उनकी दवा के साथ बुलवा लीजिये। सुबह महुआ को फ़ोन करेंगे मैं जैसा बताऊँ आप उससे वैसा कहियेगा समझ लीजिये काम हो गया।”
चाची-“ठीक है सबेरे ही फ़ोन करके मैं चन्दू चाचा को भी बुलवा लेती हूँ।”
फ़िर अशोक ने उन्हें समझाना शुरू किया कि उन्हें सुबह महुआ से फ़ोन पर कैसे और क्या बात करनी है। ऐसे ही एक दूसरे से लिपटे लिपटे सबेरे की योजना पे बात करते हुए कब उन्हें नींद आ गई पता ही नही चला।
क्रमश:……………

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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 06 Nov 2014 16:04

अशोक की मुश्किल
भाग 5
अशोक का प्लान…


गतांक से आगे…

दूसरे दिन सबेरे ही सबेरे चाची ने फ़ोन करके चन्दू चाचा को बुलवा भेजा। फ़िर रोजमर्रा के कामों से निबट कर दोनों ने नाश्ता किया और चाची के कमरे में पलंग पर बैठ इतमिनान से एक बार फ़िर इस बात पर गौर किया कि महुआ से फ़ोन पर कैसे और क्या बात करनी है। पूरी तरह से तैयारी कर लेने के बाद अशोक की योजना अनुसार स्पीकर आनकर महुआ को फ़ोन मिलाया।
महुआ –“हलो!”
चाची-“महुआ बेटी मैं चाची बोल रही हुँ कैसी हो बेटी।
महुआ-“अच्छी हूँ चाची! आप कैसी हैं? रात अशोक वापस नहीं आए लगता है आपके पास रुक गये।
चाची-“ मैं ठीक हुँ बेटी! दामाद जी के साथ तू भी क्यूँ नहीं चली आई चाची से मिलने, महुआ।
महुआ-“मैंने सोंचा ये अपने काम से जा रहे हैं। कहाँ मुझे साथ साथ लिए फ़िरेगें, अकेले रहेंगे, तो काम जल्दी निबटा कर शाम तक वापस आ जायेंगे।
चाची(तेज आवाज में)-“पर क्या तुझे अशोक के अचानक उठने वाले पेट दर्द का ख्याल नहीं आया क्या इस बात का ख्याल रखना तेरी जिम्मेदारी में नहीं आता? मुझे तो इस बात का पता ही नहीं………
महुआ( घबरा के बीच में बात काटते हुए)-“हाय, तो क्या दर्द उठा था?”
चाची-“वरना मुझे कैसे पता चलता? मुझे कोई सपना तो आया नहीं।
महुआ( घबराहट से)- “अशोक ठीक तो है? क्योंकि उसमें तो कोई दवा………
चाची-“……असर नही करती। घबरा मत, अशोक अब ठीक है। वो यही मेरे पास है स्पीकर आन है ले बात कर, बोलो अशोक बेटा। ”
अशोक-“हलो महुआ! घबरा मत मैं ठीक हूँ।“
चाची ने आगे अपनी बात पूरी की-“हाँ तो मैं बता रही थी कि रात का समय, ये एक छोटा सा गाँव, न कोई डाक्टर, ना वैद्य। उसपे तुर्रा ये मैं अकेली बूड्ढी औरत।”
बुड्ढी शब्द सुनते ही अशोक ने आँख मार के उनकी कमर में हाथ डाल के अपने से सटा लिया।
महुआ(फ़िक्र से)- “ये तो मैंने सोंचा ही नही था। अशोक को तो बड़ी तकलीफ़ हुई होगी। फ़िर क्या तरकीब की चाची?
चाची-“ऐसी हालत में बिना डाक्टर, वैद्य के कोई कर भी क्या सकता है जब चूरन मालिश किसी भी चीज का असर नहीं हुआ तो मुझसे लड़के का तड़पना देखा नही गया। एक तरफ़ मेरी अपनी मान मर्यादा थी दूसरी तरफ़ मेरी बेटी के सुहाग की जान पे बनी हुई थी मैने सोंचा मेरी मान मर्यादा का अब क्या है मेरी तो कट गई, पर बेटी तेरे और अशोक के आगे तो सारी जिन्दगी पड़ी है । आखीर में जीत तेरी हुई और मुझे वो करना पड़ा किया जो ऐसे मौके पे तू करती है।”
महुआ- “हे भगवान! ये आपने कैसे…चाची… ये समाज……।
अशोक की पहले से सिखाई पढ़ाई तैयार चाची बात काटकर बोली –“मैंने जो किया मजबूरी में किया, आज हम दोनों चाची और भतीजी के पास अशोक के अलावा और कौन सहारा है, भगवान न करे अगर अशोक को कुछ हो जाता तो क्या ये समाज हमें सम्हालता। फ़िर रोने और इस समाज के हाथों का खिलौना बन जाने के अलावा क्या कोई चारा था, सो समाज का नाम तो तू न ही ले तभी अच्छा। तू अपनी बता तेरे लिए अशोक की जान या समाज में से क्या जरूरी था।
महुआ जिन्दगी की इस सच्चाई को समझ भावुक हो उठी- “नहीं नहीं मेरे लिए तो अशोक की जिन्दगी ही कीमती है आपने बिलकुल ठीक किया मेरे ऊपर आपका ये एक और अहसान चढ़ गया।”
चाची की आवाज भी भावुक हो उठी- “अपने बच्चों के लिए कुछ करने में अहसान कैसा पगली।”
महुआ को दूसरी तरफ़ फ़ोन पे ऐसा लगा कि चाची बस रोने ही वाली हैं सो माहौल को ह्ल्का करने की कोशिश में हँस के बोली-“अरे छोड़ो ये सब बातें चाची ये बताओ मजा आया कि नहीं आया तो होगा। सच सच बोलना।”
महुआ की हँसी सुन अशोक और चाची दोनों की जान में जान आई अशोक तो चाची से लिपट गया।
चाची झेंपी हुई आवाज में - “चल हट शैतान! तुझे मजाक सूझ रहा है यहाँ इस बुढ़ापे में जान पे बन आई। कितना तो बड़ा है लड़के का!
कहते हुए चाची ने लुंगी मे हाथ डाल अशोक का हलव्वी लण्ड थाम लिया।
महुआ(हँसते हुए)-“क्या चाची?”
-“चुप कर नट्खट! शुरू में तो मेरी आँखे ही उलटने लगी थीं, लगा कि कही मैं ही ना टें बोल जाऊँ।
चाची ने लण्ड सहलाते हुए साफ़ झूठ बोल दिया। इस बीच अशोक उनका ब्लाउज खोल के गोलाइयाँ सहलाने लगा था।”
महुआ-“अरे छोड़ो चाची! अब तो हम दोनों एक ही केला खा के सहेलियाँ बन गये हैं
मुझसे क्या शर्माना!”
अब चाची को भी जोश आ गया उन्होंने नहले पर दहला मारा- “ठीक है सहेली जी जब मिलोगी तो विस्तार से बता दूँगी पर फ़ोन पर तो बक्श दो। हाँ खूब याद दिलाया इस हादसे के बाद अशोक ने बताया कि तू अभी तक उसका आधा भी…… ।”
महुआ-“मैं क्या करूँ चाची आपने मुझे बचपन से देखा है जानती ही हैं, कहाँ मैं नन्हीं सी जान और कहाँ अशोक। अभी आपने भी मानाकि वो बहुत……।”
चाची-“इसका इलाज हो सकता है बेटी। मेरे गांव के एक चाचा वैद्य हैं। चन्दू चाचा, वो इसका इलाज करते हैं, दरअसल मेरा हाल भी तेरे जैसा ही था मैंने भी उन्हीं से इलाज कराया, ये उनके इलाज का ही प्रताप है कि मैं कल का हादसा निबटा पाई।”
ये कहते हुए चाची ने शैतानी से मुस्कुरा कर अशोक की ओर देखते हुए उसका लण्ड मरोड़ दिया।
फ़िर आगे कहा –“मैंने अशोक से भी बात कर ली है, वो तैयार है। ले तू खुद ही बात कर ले।”
अशोक-“ महुआ! मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ पर रात में इसके अलावा और कोई चारा नजर नही आया।”
महुआ–“छोड़ यार! वैसे अब तबियत कैसी है। चाची ने मुझे वख्त की नजाकत बतायी थी मैं समझती हूँ और हाँ! ये बताओ ये इलाज का क्या किस्सा है? ”
–“ये इलाज भी लगभग उतना ही असामाजिक और शर्मिन्दगी भरा है जितना कि कल का हादसा। पर मेरे तेरे और चाची के बीच शर्माने को अब कुछ बचा तो है नहीं।”
अशोक ने चाची की चूचियों पर अपना सीना रगड़ते हुए जवाब दिया।
महुआ–“अगर तुम्हें मंजूर है तो मुझे कोई एतराज नहीं। वैसे भी ठीक होना तो मैं भी चाहती हूँ शर्मा के पूरी जिन्दगी तकलीफ़ झेलने से तो अच्छा है कि एक बार शर्मिन्दगी उठा के बाकी की जिन्दगी आराम से बितायें।”
अशोक –“तब तो मेरे ख्याल से इससे पहले कि कोई और हादसा हो हमें ये इलाज करा लेना चाहिये। अगर तुम्हें एतराज ना हो तो मेरी तरफ़ से पूरी छूट है। चाची तुम्हें ठीक से समझा देंगी ।”
कहकर अशोक ने चाची के पेटीकोट को पकड़ कर नीचे खींच दिया। अब वो पूरी तरह नंगी हो चुकी थीं।
चाची ने अशोक की लुंगी खीच के उसे भी अपने स्तर का कर लिया और नंगधड़ंग उससे लिपटते हुए बोलीं –“मैं चन्दू चाचा को भेज रही हूँ विश्वास रख सब ठीक हो जायेगा, बस तू दिल लगा के मेहनत से उनसे इलाज करवाना। करीब हफ़्ते भर का इलाज चलेगा। अशोक के सामने तुझे झिझक आयेगी और वैसे भी जितने दिन तेरा इलाज चलेगा उतने दिन तुझे अशोक से दूर रहना होगा तो तू उसका ख्याल न रख पायेगी सो उसे मैं तबतक यहीं रोक लेती हूँ।”
महुआ ने फ़िर छेड़ा –“ओह तो जितने दिन मेरा इलाज यहाँ चलेगा उतने दिन अशोक का वहाँ चलेगा। वाह चाची! तुम्हारे तो मजे हो गये, मस्ती करो।”
चाची के भारी चूतड़ों को हाथों से दबोचते हुए, जवाब अशोक ने दिया –“ तुझे ज्यादा ही मस्ती सवार हो रही है ठहर जा, चन्दू चाचा से कह देते हैं वो इलाज के दौरान तेरी मस्ती झाड़ देंगें।”
चाची ने अशोक का लण्ड थाम उसका हथौड़े सा सुपाड़ा अपनी गुलाबी चूत पर रगड़ते हुए कहा-“बिलकुल ठीक कहा बेटा! यहाँ तो जान पे बनी है इसे मस्ती की सूझ रही है।
महुआ-“हाय! तो क्या इलाज में वो सब भी होता……
अशोक (चाची की चूत पे अपने लण्ड का सुपाड़ा हथौड़े की तरह ठोकते हुए)-“और नहीं तो क्या बिना चाकू लगाये आपरेशन हो जायेगा। पर चन्दू चाचा की गारन्टी है और चाची ने तो आजमाया भी है कि उनके मलहम में वो जादु है कि तुझे तकलीफ़ बिलकुल न होगी।”
महुआ –“हे भगवान! ठीक से सोच लिया है अशोक। तुम्हें बाद में बुरा तो नहीं लगेगा।
अशोक(चाची की हलव्वी चूचियों पे गाल रगड़ते हुए) –“तू जानती है कि मैं कोई दकियानूसी टाइप का आदमी तो हूँ नहीं । फ़िर जो कुछ मैंने किया उसके लिए तूने खुले दिल से मुझे उसके लिए माफ़ कर दिया। तो मेरा भी फ़र्ज बनता है कि मैं खुले दिल और दिमाग के साथ तेरा इलाज कराऊँ ताकि तू मेरे साथ जीवन का सुख भोग सके। सो दिमाग पे जोर डालना छोड़ के जीवन का आनन्द लो इलाज के दौरान जैसे जैसे चन्दू चाचा बतायें वैसे वैसे करना।”
चाची –“ठीक है महुआ बेटी चन्दू चाचा, कल शाम तक पहुंच जायेंगे। अच्छा अब फ़ोन रखती हूँ। ऊपरवाला चाहेगा तो सब ठीक हो जायेगा। खुश रहो।”
महुआ –“ठीक है चाची प्रणाम।
सुनकर चाची ने फ़ोन काट दिया और अशोक के ऊपर यह कहते हुए झपटीं –
“इस लड़के को एक मिनट भी चैन नहीं है अरे अपने पास पूरा हफ़्ता है एक मिनट शान्ती से फ़ोन तो कर लेने देता। अभी मजा चखाती हूँ।”
कहते हुए चाची ने अपनी लण्ड से रगड़ते रगड़ते लाल हो गई पावरोटी सी चूत के मोटे मोटे होठ बायें हाथ की उँगलियों से फ़ैलाये और दूसरे हाथ से अशोक का लण्ड थाम उसका हथौड़े सा सुपाड़ा चूत के होठों के बीच फ़ँसा लिया।और इतनी जोर का जोर का धक्का मारा कि अशोक की चीख निकल गई।
चाची बोलीं –“ चीखने से काम नहीं चलेगा अब तो पूरे एक हफ़्ते चाची तेरे पेट दर्द का इलाज करेगी।”
अशोक मक्कारी से मुस्कुराते हुए बोला–“ पर चाची अभी नहाना भी तो है।”
चाची(दोनों के नंगे बदन की तरफ़ इशारा करते हुए) बोलीं –“फ़िर ये सब किसलिए किया, ये आग किसलिए लगा रहा था।”
अशोक –“खुद और आपको नहलाने, और नहाते हुए इस आग को बुझाने के लिए।”
चाची समझ गई कि लड़का उनके भीगते बदन का आनन्द लेते हुए चोदना चाहता है ये सोच उनके भी बदन में अशोक के मर्दाने भीगते शरीर की अपने बदन से लिपटे होने की कल्पना कर सन्सनाहट हुई। अगले ही पल चाची ने अपनी चूत उसके लण्ड से पक से बाहर खींच ली।
चाची कुछ सोच के बोलीं –“ठीक है तो चल नहाने।”
और नंगधड़ंग चाची उसका लण्ड पकड़ के कुत्ते के गले के पट्टे की तरह खींचते हुए बाथरूम की तरफ़ चल दीं।
क्रमश:……………………