कुँवारियों का शिकार compleet

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories ,erotic stories. Visit mz.skoda-avtoport.ru
rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 12 Nov 2014 03:07

कुँवारियों का शिकार--16

गतान्क से आगे

मैने दोनो के बीच में आकर दोनो को अपने साथ चिपका लिया. दोनो मुझे बहुत प्यार से मस्ती भरी आँखों से मुझे देख रही थी. मैने अरषि से कहा के मेरी जान अब आगे की तैयारी करो. वो उठी और बाथरूम में चली गयी हॉट वॉटर ट्रीटमेंट के तैयारी करने और मैने कणिका को कहा के देखो मज़ा तो लेती रहो पर इसमे इतना ज़्यादा ध्यान मत देना कि पढ़ाई में ध्यान ना रहे. क्योंकि अभी तो तुम्हारी पहली ज़रूरत पढ़ाई है और ये मज़े तो आते रहेंगे. अब तुमने जान लिया है की यह मज़ा क्या है तो यही याद रखना के जैसे भूख लगने पर खाना खाते हैं लेकिन खाते उतना ही हैं के पेट भर जाए. ज़्यादा खाने से पेट खराब हो जाता है. वैसे ही बहुत ज़्यादा मज़े करने से पढ़ाई नही हो पाती और नुकसान हो जाता है. इस बात का ध्यान रखना और पढ़ाई के बाद ही इसके बारे में सोचना. वो बोली के ठीक है मैं पूरा ध्यान रखूँगी के पढ़ाई का कोई नुकसान ना हो.

अरषि ने कहा के सब तैयार है. मैने कणिका को उठाया और कहा के आओ बाथरूम में चलें. कणिका ने खड़े होने की कोशिश की पर उसकी टाँगों ने उसका साथ नही दिया. मैने उसको उठा लिया और लेकर बाथरूम में आ गया और उसे गरम पानी के टब में बिठा दिया. टाँगें बाहर लटका दीं और हाथ से उसकी चूत को सहलाना शुरू किया ताकि उसकी चूत की सिकाई हो जाए और उसको कुच्छ आराम मिले. फिर मैने उसको किस करके उसके मम्मे भी सहलाए और कहा के अपनी चूत की सिकाई तब तक होने दो जब तक यह पानी ठंडा नही हो जाता और तब तक मैं ज़रा अरषि की गर्मी झाड़ दूं. वो मुस्कुराई और बोली के ठीक है.

बेडरूम में वापिस आकर मैने अरषि को अपने साथ चिपका लिया अपनी ओर पीठ करके और उसके मम्मे सहलाने लगा. उसके मम्मों से मेरा दिल भरता ही नही था. फिर मैने उससे पूछा के अरषि एक बात कहूँ? वो बोली के कहो. तो मैने कहा के अभी परसों तुम्हारी डबल चुदाई की है अगर आज दूसरी तरहा करें तो ठीक नही रहेगा? वो बोली के जैसे ठीक समझो. मैं उसको उसी पोज़िशन में उठा के बेड पर आ गया और उसको नीचे कर दिया. अब वो उल्टी हो कर बेड पे लेटी हुई थी. मैं उसके ऊपेर लेट गया अपनी कोहनियों पर अपना भार डाल के और नीचे से उसके मम्मे पकड़ के सहलाने लगा. उसकी साँसें तेज़ होने लगीं तो मैने उसको सीधा लिटा दिया और उसके एक मम्मे को मुँह में भर के चुभलने लगा और दूजे को हाथ से प्यार से मसल्ने लगा. वो मस्ती में उच्छलने लगी और बोली के हाए राम मुझे तो इसमे ही इतना मज़ा आ रहा है. फिर मैने उसको अपनी गोद में बिठा लिया और उसका एक हाथ अपने गर्देन के पीछे से अपने कंधे पर रख दिया और उसके मम्मे को मुँह में ले लिया. मेरा एक हाथ उसके दूसरे मम्मे पर था और दूसरे हाथ से मैने उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया. अपनी बीच की उंगली उसकी चूत की दरार पर फेरते हुए मैने थोड़ी सी उसकी चूत में घुसा दी और अंगूठे से उसके भज्नासे को रगड़ने लगा. वो ह….आ….आ….न, ह….आ….आ….न, आ….ई….स….ए ह….ई क….आ….र….ऊऊऊऊ. थोड़ी देर में ही वो झाड़ गयी और मैने उसको घुमा के अपने सीने में दबा लिया. वो भी मुझसे चिपक गयी और थोड़ा संयत होने के बाद बोली के तुम तो पूरे जादूगर हो ज़रा सी देर में इतना मज़ा दे दिया है के पूच्छो मत. मैने कहा के चुदाई के अलावा भी बहुत सारे तरीके हैं मज़ा लेने और देने के.

थोरी देर में ही कणिका भी उठकर बाहर आ गयी और बोली के अब तो बहुत ठीक लग रहा है पर अभी भी पूरी तरह आराम नही आया. मैने कहा के अभी आ जाएगा और उसको एक मसल रिलाक्सॅंट पेन किल्लर टॅबलेट खिला दी. मैं और अरषि बाथरूम में गये और एक गीले टवल से अपने को सॉफ कर के बाहर आ गये. फिर हमने कपड़े पहने और मैं उनको लेकर कंप्यूटर रूम में आ गया. कणिका को मैने आंटी प्रेग्नेन्सी टॅबलेट भी दी और कहा के इसको कल सुबह नाश्ते के बाद खा ले. उसके कुच्छ भी बोलने से पहले ही अरषि ने उसको समझा दिया के यह क्या है और क्यों ज़रूरी है. कणिका ने प्रशंसा भरी नज़रों से मुझे देखा और मुस्कुरा दी. थोड़ी देर के बाद मैने कणिका को पूछा की अब कैसा लग रहा है? वो बोली के ठीक ही हूँ अब तो. मैने कहा के घर पहुँचते तक बिल्कुल ठीक हो जाओगी और कुच्छ पता नही लगेगा किसी को. वो हंस दी. मैने कहा के तुम्हें अपना आप बदला हुआ लग रहा है. कोई और देखे तो उसको कुच्छ नही पता लगेगा. पर तुम्हे बिल्कुल नॉर्मल रहना है जैसे पहले रहती थी. अगर तुम नॉर्मल नही रहोगी तो क़िस्सी को शक हो सकता है. वो बोली के ठीक है मैं बिल्कुल वैसे ही बिहेव करूँगी जैसे हमेशा करती हूँ. फिर वो दोनो चली गयीं.

मैने आज की रेकॉर्डिंग की डVड बर्न करके लॉकर में रखी और कंप्यूटर से डेलीट करके बाहर आ गया. गेट पर राम सिंग से हमेशा की तरह दो बातें करके मैं घर आ गया.

वो पेरेंट टीचर मीटिंग का दिन था और स्कूल में क्लासस नही हो रही थीं. पेरेंट्स आकर टीचर्स से मिलकर अपने बच्चो के बारे मे बात करके जा रहे थे. पीयान ने अंदर आकर मुझे कहा के कोई नीरू मेडम आपसे मिलना चाहती हैं और उनके साथ उनकी बेटी भी है जो हमारे स्कूल की 12थ की स्टूडेंट है. मैने कहा के अंदर भेज दो. नीरू अंदर आई और उसके पीछे उसकी बेटी भी थी जिसका नाम था आँचल. मैं नीरू को देखता ही रह गया. वो हंसते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाकर मेरी ओर आई और बोली क्यों पहचाना नही क्या या भूल ही गये हो हमको? मैने खड़े होकर उसका हाथ पकड़ा और हंसते हुए बोला के तुम्हे कोई भूल सकता है भला, मैं तो यह सोच रहा था के क्या हम इतने बड़े हो गये हैं या हमारे बच्चे बड़े हो गये हैं? वो भी हंस दी और बोली के कुच्छ भी कह लो बच्चे तो बड़े हो ही गये हैं. और यही बताने मैं आई हूँ के मेरी बेटी का18थ बर्तडे है और पार्टी में तुमको ज़रूर आना है मैं कोई बहाना नही सुनूँगी आंड दट ईज़ फाइनल. मैने कहा के ठीक है अब तुम इतना ज़ोर देकर कह रही हो तो आ जाएँगे पर यह तो बताओ के कब और कहाँ? वो बोली के सॅटर्डे ईव्निंग 7-30 शार्प मेरे घर पे आना है और कहाँ? हां हो सके तो तोड़ा जल्दी आने की कोशिश करना तुमसे कुच्छ बात भी करनी है मुझे. मैने कहा के ठीक है मैं कोशिश करूँगा के 7 बजे ही पहुँच जाऊँगा. फिर वो बाइ करके चली गयी. उसके जाने के बाद मैने घड़ी देखी, छुट्टी का टाइम हो गया था तो मैने भी अपना समान समेटा और चलने को तैयार हो गया. इतने में बेल भी हो गयी और मैं उठकर बाहर आ गया.

घर पहुँच कर मैने खाना खाया और अपने कमरे में आराम करने के लिए लेट गया. रह रह कर मन में एक ख़याल आ रहा था के नीरू को मुझसे क्या बात करनी हो सकती है और वो भी इतने सालों के बाद. सोचते हुए मैं पुरानी यादों में खो गया, अपने कॉलेज के दिन याद आ गये, जब नीरू ने पहली बार मुझसे बात की थी. हालाँकि वो हमारे स्कूल में ही पढ़ी थी पर वो मुझसे 3 साल जूनियर थी. जी हां में कॉलेज में M.एससी. 1स्ट्रीट एअर में था जब हम एक दूसरे के बहुत करीब आ गये थे. उसका यह कॉलेज का 1स्ट्रीट एअर था.

हुआ यूँ के एक दिन मैं कॉलेज पहुँचा ही था और मैन गेट से अंदर जा रहा था के सामने से 4-5 लड़कियाँ आती दिखाई पड़ीं. उनमें दो लड़कियाँ मेरी क्लास की ही थीं तो मैने उनको पूछा के क्या बात है क्लास में नही जाना? वो बोलीं के नही हम सब घूमने जा रही हैं क्लासस बंक करके. मैने कंधे उच्काये और आगे बढ़ने लगा. उनमें से एक लड़की ने मुझे रोक कर पूछा के क्या बात है मुझे जानते नही या पहचाना नही? मैने देखा के वो नीरू थी.

मैने उसको पूछा तुम नीरू हो ना तुम यहाँ क्या कर रही हो? वो बोली के यह मेरी कज़िन्स हैं और मेरे ही बुलाने पर यह मेरे साथ घूमने जा रही हैं. मैने ऐसे ही पूछा के तुम कौन्से कॉलेज में हो. तो वो बोली के मिरंडा में. मैने कहा के बढ़िया है मिलती रहा करो. वो बोली के अब तो मिलते ही रहेंगे क्योंकि हम कोंसिंस का आपस में बहुत प्यार है और मैं आती रहूंगी इनको मिलने तो तुमसे भी कभी कभी मुलाकात हो ही जाएगी. मैने फिर चुटकी ली के कभी कभी क्यों हर बार क्यों नही. वो हंस के बोली ठीक है बाबा जब भी आऊँगी पहले तुमको मिलूँगी फिर इनको. मैने भी हंस कर कह दिया के यह हुई ना बात. फिर वो चली गयीं.

मैं उनको जाते हुए देखता ही रह गया और सोचने लगा के यह नीरू को क्या हो गया है स्कूल में तो कभी मेरी ओर देखती भी नही थी और आज कैसे खुल कर बातें कर रही थी जैसे बहुत पुरानी दोस्ती हो. फिर मैने सोचा के छ्चोड़ो लड़की सुंदर है, बात कर रही है तो अच्छा ही है. कुच्छ दिन बाद मैं कॉलेज से निकल रहा था तो नीरू बाहर ही मिल गयी और कहने लगी के मैं वेट ही कर रही थी तुम सब की. मैने कहा के सब कौन मैं तो अकेला ही हूँ. वो बोली के अभी मेरी कज़िन्स भी आ रही हैं, उनकी भी तो क्लासस ख़तम हो गयी हैं ना. मैने उसको बताया के वो डीप डिस्कशन में बिज़ी हैं फ्रेंड्स के साथ, 5-7 मिनट लग सकते हैं उनको आने में.

वो बड़ी प्यारी स्माइल देके बोली के कोई बात नही इसी बहाने तुम से बातें कर लूँगी, नही तो तुम कहाँ हमसे बात करते हो. मैने कहा मैं तो स्कूल में भी तुमसे बात करना चाहता था पर तुम कभी मेरी तरफ देखती भी नही थी और ऐसे बिहेव करती थी जैसे मैं हूँ ही नही. वो बोली के तब मैं तुमसे डरती थी के प्रिन्सिपल का बेटा है इतनी लड़कियाँ इसकी दोस्त हैं और मुझसे सीनियर है, मैं किस गिनती में आती हूँ. मैने कहा के नही ऐसी तो कोई भी बात नही थी तुमको ऐसा क्यों लगा मैं नही जानता, मैने कभी ऐसा बिहेव भी नही किया. कभी कोई आटिट्यूड भी नही दिखाया किसी को. वो बोली हां लेकिन पता नही क्यों मुझे तुमसे डर ही लगता था और मैं जानबूझ कर तुम्हारे सामने भी नही आती थी. पर चलो कोई बात नही और शोखी से बोली के अब कसर निकाल लेंगे. मैने कहा के वो कैसे? वो हंस दी और बोली की यह क्या क्वेस्चन अवर शुरू कर दिया है? यह बताओ के मुझे पिक्चर कब दिखा रहे हो? और हां ना नही बोलना, अगर दिखानी नही है तो टाइम बोलो मैं दिखा दूँगी. मैने कहा के जब कहो तब दिखा दूँगा और तुम क्यों दिखओगि मैं ही दिखा दूँगा जो भी कहोगी वो दिखा दूँगा तुम बोलो तो सही. वो बोली के ऐसे चॅलेंज ना करो मुश्किल में पड़ जाओगे. अब बात इज़्ज़त की बन गयी थी तो मैने कहा के तुम आवाज़ करो और फिर देखो. वो बोली के ठीक है बॉब्बी का प्रिमियर शो दिखा सकते हो तो दिखा दो. मैने भी जोश में कह दिया के ठीक है तैयार रहना ये ना हो के बाद में कहो के ईव्निंग शो है मैं नही जा सकती मैं तो ऐसे ही मज़ाक कर रही थी.

वो हंस दी और हाथ आगे बढ़के बोली नही पक्का प्रॉमिस, मैं हर हाल में चालूंगी. मैने भी उसका हाथ पकड़ के हल्के से दबाया और कहा ठीक है फिर मिलते हैं. वो बोली के हां ठीक है. तब तक उसकी कज़िन्स भी आ गयीं और वो सब बाइ बाइ करती हुई चली गयीं. अब मुझे प्रिमियर शो की 2 टिकेट्स का इंटेज़ाम करना था और यह कोई मामूली काम नही था.

मैं सोचता रहा फिर याद आया के मेरे एक स्कूल के दोस्त का फॅमिली बिज़्नेस है फिल्म डिस्ट्रिब्यूशन का और वो काई फिल्म्स फाइनान्स भी कर चुके हैं. वो शायद मेरी हेल्प कर सके. मैने तुरंत उसको फोन किया तो वो बोला की राज शर्मा जी आज कैसे याद आ गयी हमारी? मैने उसको कहा के दोस्त एक बहुत ज़रूरी काम है और वो तुम्हारे सिवा कोई नही कर सकता. वो बोला चलो काम से ही सही पर याद तो आई. बोलो क्या काम है. अगर मेरे से हो सका तो ज़रूर कर दूँगा. मैने उसको कहा के देख यार हो सका तो नही ज़रूर करना है यह काम, तुम मेरी आखरी उम्मीद हो. वो बोला ऐसी क्या बात है यार तुम बताओ तो सही. मैने उसको कहा के यार बॉब्बी के प्रिमियर की 2 टिकेट्स चाहियें और मैं प्रॉमिस कर चुक्का हूँ, अगर नही मिली तो मेरी बहुत इन्सल्ट हो जाएगी. वो बोला के हमारे होते हुए तुम्हारी इन्सल्ट कौन कर सकता है? समझ लो कि तुम्हारा काम हो गया. मैने कहा के सच? वो बोला दोस्त तेरा यार उस फिल्म का डिसट्रिब्युटर है और अगर तेरा यह काम ही नही कर सका तो क्या फायडा. मैं सुनकर खुश हो गया और उसको बोला की यार तूने तो मेरी सारी मुश्किल हल कर दी. उसने कहा के शाम तक मेरे पास टिकेट्स भिजवा देगा और फोन रख दिया.

मैने एक ठंडी साँस भरी और भगवान को धन्यवाद किया. शाम को एक पीयान टाइप का आदमी आया जो मुझे पूछ रहा था. नौकर ने आ कर मुझे बताया और मैं उसके पास आया और पूछा के क्या बात है. उसने एक छ्होटा सा लिफ़ाफ़ा मेरी तरफ बढ़ा दिया और मैं देखते ही समझ गया के इसमे टिकेट्स हैं. मैने उसको टिप देनी चाही तो वो बोला के नही सर मैं नही ले सकता. मैने ज़बरदस्ती उसकी जेब में पैसे डाले और कहा के कोई बात नही रख लो. वो चला गया. मैने जल्दी से अंदर आकर लिफ़ाफ़ा खोला तो देखा उसमे एक कॉंप्लिमेंटरी पास फॉर टू था बॉब्बी के प्रिमियर शो का आज़ स्पेशल इन्वाइटी. मैं तो हैरान रह गया. मैने अपने दोस्त को फोन किया और पूछा के यह क्या है तो वो बोला यार आम खाओ गुठलियाँ मत गिनो. तुमने हमें इतनी ऐश करवाई है आज मैं तुम्हारे लिए इतना भी नही कर सकता क्या? मैं चुप रह गया. फिर उसने बताया कि वो भी वहीं होगा और हमें प्रिमियर के फंक्षन में भी शामिल करवाएगा और फिल्मी लोगों से भी मिलवा देगा. मैने कहा के ठीक है भाई तुमने तो मुझे थॅंक यू कहने लायक भी नही छोड़ा. वो बोला के कहना भी मत, अपना ही डाइलॉग याद कर लो के दोस्ती में थॅंक यू और सॉरी नही होता. मैने कहा के हां याद है इसीलिए तो कहा है. फिर वो बोला के आ जाना टाइम पे नही तो मैन गेट्स लॉक कर दिए जाएँगे और फिर फिल्मी लोगों के जाने के बाद ही खुलेंगे. मैने कहा के ठीक है दोस्त और फोन रख दिया.

अब मैं बहुत खुश था और मुझे इंतेज़ार था प्रिमियर शो का और नीरू को वहाँ लेजाकार अचंभित करने का. फिर वो दिन भी आ गया. मैने नीरू को फोन किया और पूछा के उसको कहाँ से पिक करना है? वो बोली के घर से और कहाँ से? मैने कहा अच्छी तरह सज धज के तैयार हो जाए. वो बोली के ऐसा क्या एक पिक्चर देखने ही तो जाना है तो मैने कहा के मत भूलो के ये प्रिमियर शो है इसलिए क्या पता फिल्मी लोगों से मिलने का मौका भी मिल जाए तो क्या ऑर्डिनरी कपड़ों में उनको मिलेंगे. वो हंस दी और बोली के अपनी ऐसी किस्मेत कहाँ. मैने कहा के देखो कोई पता नही होता के कब क्या हो जाए. वो बोली के चलो ठीक है बहुत ज़्यादा तो नही फिर भी वो अच्छे से तैयार हो जाएगी.

मैं टाइम से पहले ही तैयार होकर घर से निकल पड़ा कार लेकर. नीरू भी तैयार मिली और हम टाइम से 10 मिनट पहले ही पहुँच गये. वहाँ पहुँच कर नीरू हैरान रह गयी, इतनी सारी भीड़ देखकर. वो बोली की हाए राम इतनी भीड़ हम कैसे अंदर जाएँगे और कार कहाँ पार्क करेंगे? मैने कहा के चिंता ना करो मैं हूँ ना तुम्हारे साथ. मैने कार का हॉर्न बजाकर थोड़ा रास्ता बनाया और कार आगे को बढ़ा दी. आगे सेक्यूरिटी गार्ड ने हमें हाथ देकर रोका तो मैने शीशा नीचे करके उसको स्पेशल इन्वाइटी का कार्ड दिखाया तो एकदम अटेन्षन मुद्रा में सल्यूट करके बोला आप सीधे अंदर ले जाएँ गाड़ी को और अंदर ही पार्क कर दें. मैं कार अंदर ले गया और आगे एक और सेक्यूरिटी गार्ड मिला उसने हमें रोका और बड़े अदब से उतरने को कहा. हम दोनो उतरे और उसने कार की चाबी मेरे से ले लीं और एक टोकन मुझे थमा दिया और बोला के साहिब मैं कार पार्क कर दूँगा आप वापिस आके टोकन दे के अपनी कार ले जा सकते हैं. फिर उसने हमें कहा के आप लिफ्ट से सीधे ऊपेर चले जायें यह ऊपेर स्पेशल इन्वाइटी एरिया में ही रुकेगी. नीरू यह सब देखकर हैरान हो रही थी.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--16

gataank se aage..............

Maine dono ke beech mein aakar dono ko apne saath chipka liya. Dono mujhe bahut pyar se masti bhari aankhon se mujhe dekh rahi theen. Maine Arushi se kaha ke meri jaan ab aage ki taiyaari karo. Wo uthi aur bathroom mein chali gayee hot water treatment ke taiyaari karne aur maine Kanika ko kaha ke dekho maza to leti raho par issmein itna zyada dhyan mat dena ki padhaai mein dhyan na rahey. Kyonki abhi to tumhari pehli zaroorart padhaai hai aur ye maze to aatey rahenge. Ab tumne jaan liya hai ki yeh maza kya hai to yahi yaad rakhna ke jaise bhookh lagne par khana khatey hain lekin khatey utna hi hain ke pet bhar jaaye. Zyada khane se pet kharaab ho jata hai. Vaise hi bahut zyada mazey karne se padhaai nahi ho pati aur nuksaan ho jata hai. Iss baat ka dhyan rakhna aur padhaai ke baad hi isske baare mein sochna. Wo boli ke theek hai main poora dhyan rakhoongi ke padhaai ka koyi nuksaan na ho.

Arushi ne kaha ke sab taiyaar hai. Maine Kanika ko uthaya aur kaha ke aao bathroom mein chalein. Kanika ne khadey hone ki koshish ki par usski tangon ne usska saath nahi diya. Maine ussko utha liya aur lekar bathroom mein aa gaya aur ussey garam paani ke tub mein bitha diya. Tangein bahar latka deen aur haath se usski choot ko sehlana shuru kiya taki usski choot ki sikayi ho jaaye aur ussko kuchh aaraam miley. Phir maine ussko kiss karke usske mammey bhi sehlaye aur kaha ke apni choot ki sikayi tab tak hone do jab tak yeh paani thanda nahi ho jaata aur tab tak main zara Arushi ki garmi jhaad doon. Wo muskurayee aur boli ke theek hai.

Bedroom mein wapis aakar maine Arushi ko apne saath chipka liya apni ore peeth karke aur usske mammey sehlaney laga. Usske mammon se mera dil bharta hi nahi tha. Phir maine usse poochja ke Arushi ek baat kahoon? Wo boli ke kaho. To maine kaha ke abhi parson tumhari double chudayee ki hai agar aaj dossri tarha karein to theek nahi rahega? Wo boli ke jaise theek samjho. Main ussko ussi position mein utha ke bed par aa gaya aur ussko neeche kar diya. Ab wo ulti ho kar bed pe leti hui thi. Main usske ooper let gaya apni kohniyon par apna bhaar daal ke aur neeche se usske mammey pakad ke sehlaney laga. Usski saansein tez hone lageen to maine ussko seedha lita diya aur usske ek mammey ko munh mein bhar ke chubhlaney laga aur duje ko haath se pyar se masalne laga. Wo masti mein uchhalne lagi aur boli ke haye ram mujhe to issmein hi itna maza aa rahi hai. Phir maine ussko apni god mein bitha liya aur usska ek haath apne garden ke peeche se apne kandhe par rakh diya aur usske mammey ko munh mein le liya. Mera ek haath usske doosre mammey par tha aur doosre haath se maine usski choot ko sehlana shuru kar diya. Apni beech ki ungli usski choot ke daraar par pherte huey maine thori si usski choot mein ghusa di aur angoothe se usske bhagnaase ko ragadne laga. Wo H….a….a….n, H….a….a….n, A….i….s….e H….i K….a….r….oooooooo. Thori der mein hi wo jhad gayee aur maine ussko ghuma ke apne seene mein dabaa liya. Wo bhi mujhse chipak gayi aur thora sanyat hone ke baad boli ke tum to poore jaadugar ho zara si der mein itna maza de diya hai ke poochho mat. Maine kaha ke chudayee ke alaava bhi bahut saare tareeke hain maza lene aur dene ke.

Thori der mein hi Kanika bhi uthkar bahar aa gayee aur boli ke ab to bahut theek lag raha hai par abhi bhi poori tarah aaraam nahi aaya. Maine kaha ke abhi aa jayega aur ussko ek muscle relaxant pain killer tablet khila di. Main aur Arushi bathroom mein gaye aur ek geele towel se apne ko saaf kar ke bahar aa gaye. Phir hamne kapde pehne aur main unko lekar computer room mein aa gaya. Kanika ko maine anti pregnancy tablet bhi di aur kaha ke issko kal subah naashte ke baad kha le. Usske kuchh bhi bolne se pehle hi Arushi ne ussko samjha diya ke yeh kya hai aur kyon zaroori hai. Kanika ne prashansa bhari nazron se mujhe dekha aur muskura di. Thori der ke baad maine Kanika ko poochha kea b kaisa lag raha hai? Wo boli ke theek hi hoon ab to. Maine kaha ke ghar pahunchte tak bilkul theek ho jaogi aur kuchh pata nahi lagega kissi ko. Wo hans di. Maine kaha ke tumhein apna aap badla hua lag raha hai. Koyi aur dekhe to ussko kuchh nahi pata lagega. Par tumhe bilkul normal rehna hai jaise pehle rehti thi. Agar tum normal nahi rahogi to kissi ko shak ho sakta hai. Wo boli ke theek hai main bilkul vaise hi behave karoongi jaise hamesha karti hoon. Phir wo dono chali gayeen.

Maine aaj ki recording ki DVD burn karke locker mein rakhi aur computer se delete karke bahar aa gaya. Gate par Ram Singh se hamesha ki tarah do baatein karke main ghar aa gaya.

Wo parent teacher meeting ka din tha aur school mein classes nahi ho rahi theen. Parents aakar teachers se milkar apne bacchon ke baare main baat karke jaa rahey thhe. Peon ne andar aakar mujhe kaha ke koi Neeru Madam aapse milna chahti hain aur unke saath unki beti bhi hai jo hamaare school ki 12th ki student hai. Maine kaha ke andar bhej do. Neeru andar aayi aur usske peechhe usski beti bhi thi jisska naam tha Aanchal. Main Neeru ko dekhta hi rah gaya. Wo hanste huey apna haath aage badhakar meri ore aayi aur boli kyon pehchana nahi kya ya bhool hi gaye ho humko? Maine khade hokar usska haath pakda aur hanste huey bola ke tumhe koyi bhool sakata hai bhala, main to yeh soch raha tha ke kya hum itne bade ho gaye hain ya hamaare bacche bade ho gaye hain? Wo bhi hans di aur boli ke kuchh bhi keh lo bacche to bade ho hi gaye hain. Aur yahi bataane main aayi hoon ke meri beti ka 18th birthday hai aur party mein tumko zaroor aana hai main koyi bahana nahi sunoongi and that is final. Maine kaha ke theek hai ab tum itna zor dekar keh rahi ho to aa jayenge par yeh to batao ke kab aur kahan? Wo boli ke Saturday evening 7-30 sharp merey ghar pe aana hai aur kahan? Haan ho sakey to thora jaldi aaney ki koshish karna tumse kuchh baat bhi karni hai mujhe. Maine kaha ke theek hai main koshish karoonga ke 7 baje hi pahunch jaaoonga. Phir wo bye karke chali gayi. Usske jaane ke baad maine ghadi dekhi, chutti ka time ho gaya tha to maine bhi apna samaan sameta aur chalne ko taiyaar ho gaya. Itne mein bell bhi ho gayi aur main uthkar bahar aa gaya.

Ghar pahunch kar maine khana khaya aur apne kamre mein araam karne ke liye let gaya. Reh reh kar man mein ek khayal aa raha tha ke Neeru ko mujhse kya baat karni ho sakti hai aur wo bhi itne saalon ke baad. Sochte huey main puraani yaadon mein kho gaya, apne college ke din yaad aa gaye, jab Neeru ne pehli baar mujhse baat ki thi. Halanki wo hamare school mein hi padhi thi par wo mujhse 3 saal junior thi. Ji haan mein college mein M.Sc. 1st year mein tha jab hum ek doosre ke bahut kareeb aa gaye thhe. Usska yeh college ka 1st year tha.

Hua yun ke ek din main college pahuncha hi tha aur main gate se andar ja raha tha ke saamne se 4-5 ladkiyaan aati dikhayi padeen. Unmein do ladkiyaan meri class ki hi theen to maine unko poochha ke kya baat hai class mein nahi jaana? Wo boleen ke nahi ham sab ghoomne ja rahi hain classes bunk karke. Maine kandhe uchkaaye aur aage badhne laga. Unmein se ek ladki ne mujhe rok kar poochha ke kya baat hai mujhe jaante nahi ya pehchana nahi? Maine dekha ke wo Neeru thi.

Maine ussko poochha tum Neeru ho na tum yahaan kya kar rahi ho? Wo boli ke yeh meri cousins hain aur merey hi bulane par yeh merey saath ghoomne jaa rahi hain. Maine aise hi poochha ke tum kaunse college mein ho. To wo boli ke Miranda mein. Maine kaha ke badhiya hai milti raha karo. Wo boli ke ab to milte hi rahenge kyonki hum consins ka aapas mein bahut pyar hai aur main aati rahoongi inko milne to tumse bhi kabhi kabhi mulakat ho hi jayegi. Maine phir chutki li ke kabhi kabhi kyon har baar kyon nahi. Wo hans ke boli theek hai baba jab bhi aaoongi pehle tumko miloongi phir inko. Maine bhi hans kar keh diya ke yeh hui na baat. Phir wo chali gayeen.

Main unko jaate huey dekhta hi rah gaya aur sochne laga ke yeh Neeru ko kya ho gaya hai school mein to kabhi meri ore dekhti bhi nahi thi aur aaj kaise khul kar batein kar rahi thi jaise bahut puraani dosti ho. Phir maine socha ke chhodo ladki sundar hai, baat kar rahi hai to achha hi hai. Kuchh din baad main college se nikal raha tha to Neeru bahar hi mil gayi aur kehne lagi ke main wait hi kar rahi thi tum sab ki. Maine kaha ke sab kaun main to akela hi hoon. Wo boli ke abhi meri cousins bhi aa rahi hain, unki bhi to classes khatam ho gayi hain na. Maine ussko bataya ke wo deep discussion mein busy hain friends ke saath, 5-7 min lag sakte hain unko aane mein.

Wo badi pyari smile deke boli ke koyi baat nahi issi bahaane tum se baatein kar loongi, nahi to tum kahan hamse baat karte ho. Maine kaha main to school mein bhi tumse baat karna chahta tha par tum kabhi meri taraf dekhti bhi nahi thi aur aise behave karti thi jaise main hoon hi nahi. Wo boli ke tab main tumse darti thi ke principal ka beta hai itni ladkiyaan isski dost hain aur mujhse senior hai, main kiss ginti mein aati hoon. Maine kaha ke nahi aisi to koyi bhi baat nahi thi tumko aisa kyon laga main nahi jaanta, maine kabhi aisa behave bhi nahi kiya. Kabhi koyi attitude bhi nahi dikhaya kissi ko. Wo boli haan lekin pata nahi kyon mujhe tumse dar hi lagta tha aur main jaanboojh kar tumhare samne bhi nahi aati thi. Par chalo koyi baat nahi aur shokhi se boli ke ab kasar nikaal lenge. Maine kaha ke wo kaise? Wo hans di aur boli ki yeh kya question hour shuru kar diya hai? Yeh batao ke mujhe picture kab dikha rahey ho? Aur haan na nahi bolna, agar dikhaani nahi hai to time bolo main dikha doongi. Maine kaha ke jab kaho tab dikha doonga aur tum kyon dikhaogi main hi dikha doonga jo be kahogi wo dikha doonga tum bolo to sahi. Wo boli ke aise challenge na karo mushkil mein pad jaoge. Ab baat izzat ki ban gayi thi to maine kaha ke tum awaz karo aur phir dekho. Wo boli ke theek hai Bobby ka premier show dikha sakte ho to dikha do. Maine bhi josh mein keh diya ke theek hai taiyar rehna ye na ho ke baad mein kaho ke evening show hai main nahi ja sakti main to aise hi mazaak kar rahi thi.

Wo hans di aur haath aage badhake boli nahi pakka promise, main har haal mein chaloongi. Maine bhi usska haath pakad ke halke se dabaya aur kaha theek hai phir milte hain. Wo boli ke haan theek hai. Tab tak usski cousins bhi aa gayeen aur wo sab bye bye karti hui chalee gayeen. Ab mujhe premier show ki 2 tickets ka intezaam karna tha aur yeh koi mamooli kaam nahi tha.

Main sochta raha phir yaad aaya ke merey ek school ke dost ka family business hai film distribution ka aur wo kayi films finance bhi kar chuke hain. Wo shayad meri help kar sakey. Maine turant ussko phone kiya to wo bola ki Raj sharma ji aaj kaise yaad aa gayee hamaari? Maine ussko kaha ke dost ek bahut zarooi kaam hai aur wo tumare siwa koyi nahi kar sakta. Wo bola chalo kaam se hi sahi par yaad to aayee. Bolo kya kaam hai. Agar merey se ho saka to zaroor kar doonga. Maine ussko kaha ke dekh yaar ho saka to nahi zaroor karna hai yeh kaam, tum meri aakhri ummeed ho. Wo bola aisi kya baat hai yaar tum batao to sahi. Maine ussko kaha ke yaar Bobby ke premier ki 2 tickets chahiyein aur main promise kar chukka hoon, agar nahi mili to meri bahut insult ho jaayegi. Wo bola ke hamare hotey huey tumhari insult kaun kar sakta hai? Samajh lo ki tumhara kaam ho gaya. Maine kaha ke sach? Wo bola dost tera yaar uss film ka distributor hai aur agar tera yeh kaam hi nahi kar saka to kya fayda. Main sunkar khush ho gaya aur ussko bola ki yaar tune to meri saari mushkil hal kar di. Ussne kaha ke sham tak mere paas tickets bhijwa dega aur phone rakh diya.

Maine ek dhandi saans bhari aur bhagwan ko dhanyavaad kiya. Shaam ko ek peon type ka aadmi aaya jo mujhe pooch raha tha. Naukar ne aa kar mujhe bataya aur main usske paas aaya aur poochha ke kya baat hai. Ussne ek chhota sa lifafa meri taraf badha diya aur main dekhte hi samajh gaya ke issmein tickets hain. Maine ussko tip deni chahi to wo bola ke nahi sir main nahi le sakta. Maine zabardasti usski jeb mein paise daale aur kaha ke koyi baat nahi rakh lo. Wo chala gaya. Maine jaldi se andar aakar lifafa khola to dekha ussmein ek complimentary pass for two tha Bobby ke premier show ka as special invitee. Main to hairaan reh gaya. Maine apne dost ko phone kiya aur poochha ke yeh kya hai to wo bola yaar aam khao guthliyaan mat gino. Tumne hamein itni aish karwayee hai aaj main tumhaarey liye itna bhi nahi kar sakta kya? Main chup reh gaya. Phir ussne bataya ki wo bhi wahin hoga aur hamein premier ke function mein bhi shamil karvayega aur filmi logon se bhi milwa dega. Maine kaha ke theek hai bhai tumne to mujhe thank you kehne layak bhi nahi chhora. Wo bola ke kehna bhi mat, apna hi dialogue yaad kar lo ke dosti mein thank you aur sorry nahi hota. Maine kaha ke haan yaad hai issiliye to kaha hai. Phir wo bola ke aa jaana time pe nahi to main gates lock kar diye jayenge aur phir filmi logon ke jaane ke baad hi khulenge. Maine kaha ke theek hai dost aur phone rakh diya.

Ab main bahut khush tha aur mujhe intezaar tha premier show ka aur Neeru ko wahan lejakar achambhit karne ka. Phir wo din bhi aa gaya. Maine Neeru ko phone kiya aur poochha ke ussko kahaan se pick karna hai? Wo boli ke ghar se aur kahaan se? Maine kaha achhi tarah saj dhaj ke taiyar ho jaye. Wo boli ke aisa kya ek picture dekhne hi to jaana hai to maine kaha ke mat bhoolo ke ye premier show hai issliye kya pata filmi logon se milne ka mauka bhi mil jaaye to kya ordinary kapdon mein unko milengey. Wo hans di aur boli ke apni aisi kismet kahaan. Maine kaha ke dekho koi pata nahi hota ke kab kya ho jaaye. Wo boli ke chalo theek hai bahut zyada to nahi phir bhi wo achhe se taiyar ho jayegi.

Main time se pehle hi taiyar hokar ghar se nikal pada car lekar. Neeru bhi taiyar mili aur hum time se 10 min pehle hi pahunch gaye. Wahan pahunch kar Neeru hairaan reh gayi, itni saari bheed dekhkar. Wo boli ki haye ram itni bheed hum kaise andar jayenge aur car kahaan park karenge? Maine kaha ke chinta na karo main hoon na tumhare saath. Maine car ka horn bajakar thora raasta banaya aur car age ko badha di. Aage security guard ne hamein haath dekar roka to maine sheesha neeche karke ussko special invitee ka card dikhaya to ekdum attention mudra mein salute karke bola aap seedhe andar le jaayen gaadi ko aur andar hi park kar dein. Main car andar le gaya aur aagey ek aur security guard mila ussne hamein roka aur badey adab se utarne ko kaha. Hum dono utare aur ussne car ki keys merey se le leen aur ek token mujhe thama diya aur bola ke sahib main car park kar doonga aap waapis aake token de ke apni car le ja sakte hain. Phir ussne hamein kaha ke aap lift se seedhe ooper chaley jaayein yeh ooper special invitee area mein hi rukegi. Neeru yeh sab dekhkar hairaan ho rahi thi.

kramashah......


rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 12 Nov 2014 03:08

कुँवारियों का शिकार--17

गतान्क से आगे..............

मैने उसकी कमर में हाथ डाला और बोला आओ डियर ऊपेर चलें. हम ऊपेर आ गये. लिफ्ट में से निकलते ही मैने इधर उधर नज़रें दौड़ाइं तो देखा के मेरा दोस्त कुच्छ लोगों से बातें कर रहा है. मुझे देखते ही वो उनको एक्सक्यूस मी कहके मेरी ओर लपका. वेलकम राज भाई आपकाबहुत बहुत धन्यवाद जो आप यहाँ पधारे. मैं कुच्छ बोलता उसने पहले ही मुझे आँख मारके इशारा कर दिया. मैं चुप ही रहा और फिर मैने उसका और नीरू का परिचय कराया और उसने नीरू को हाथ जोड़ कर नमस्ते किया. मैने बड़ी मुश्किल से अपनी हँसी रोकी. नीरू हक्की बक्की सब देख रही थी. मैने उसका हाथ दबा कर उसके कान में हल्के से कहा के रिलॅक्स तो वो थोड़ी नॉर्मल हुई.

फिर पिक्चर का टाइम हुआ तो एक-एक दो-दो करके सब लोग हॉल में दाखिल हो गये. हमें सबसे पीछे की रो में सेंटर कॉर्नर की सीट पर बिठाया गया. कॉर्नर पे मैने नीरू को बिठा दिया और मैं उसके साथ वाली सीट पर बैठ गया. अब नीरू मेरी ओर मुँह करके बोली के सब क्या है राज. मैने कहा के तुमने पहली बार कुच्छ फरमाइश की तो मैं कैसे पूरी ना करता हां यह अलग बात है कि मेरी मदद मेरे दोस्त ने की जिसको मैने तुम्हे अभी मिलवाया था, वो फिल्म डिसट्रिब्युटर है और यह फिल्म वही डिसट्रिब्यूट कर रहा है देल्ही रीजन में. वो बोली तो यह बात है. मैने कहा के हां बात तो यही है पर भगवान की मर्ज़ी से बड़े स्टाइल में तुम्हारी इक्षा पूरी हो गयी. अभी फिल्मी लोग भी आने वाले हैं इंटर्वल के आस पास और हो सकता है के ऋषि और डिंपल भी आयें लेकिन अनाउन्स इसलिए नही किया के इन लोगों का पक्का कुच्छ नही होता आयें या ना आयें. हां प्रोड्यूसर और कुच्छ कास्ट आंड क्र्यू तो ज़रूर आयेंगे और हम सबको मिलेंगे भी. वो बहुत खुश हुई और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरा गाल चूम कर बोली मैं बहुत खुश हूँ राज, तुम बहुत अच्छे हो. मैने कहा ओये मेम साहिब मैं कोई अच्छा वछा नही हूँ मैं राज हूँ अपनी तरह का सिंगल पीस और मैं खूबसूरत लड़कियों का रसिया हूँ समझी, मुझसे बचना मुश्किल है. वो हंसते हंसते सीट पर दोहरी हो गयी और मेरा हाथ जो उसने अपने हाथ मे पकड़ा हुआ था उसके दोहरे होने पर उसके मम्मों के नीचे दब गया और मैं चौंक गया. उसने ब्रा नही पहनी थी और मैने महसूस किया के उसको ज़रूरत भी नही थी क्योंकि उसके मम्मे एकदम कड़क थे.

मैने अपना हाथ खींचना चाहा तो वो बोली के क्या बात है मेरा हाथ पकड़ना अच्छा नही लगा क्या. मैने कहा के अच्छा तो बहुत लग रहा है पर मैं भी कुच्छ पकड़ना चाहता था. क्या, उसने पूछा तो मैं अपना हाथ उसकी गर्दन के पीछे से उसके कंधे पर ले गया तो वो फिर बोली बस. मैने कहा के अभी तो हाथ का आधा सफ़र ही हुआ है और कहते कहते मैने हाथ नीचे करते हुए उसके खुले गले के टॉप में डाल दिया और उसकाएक मम्मा हाथ में भर के तोलने लगा. उसके मम्मे के मेरे हाथ में आते ही दोनो को जैसे करेंट सा लगा. मेरे हाथ ने पूरी तरह से मम्मे कानाप-तोल किया और फिर हल्के से दबाया. ऐसे लगा जैसे कोई टेन्निस की बॉल हाथ में आई हो पर टेन्निस की बॉल तो बहुत खुरदरी होती है, यह तो बहुत ही मुलायम थे और चिकने इतने के हाथ फिसल जाए. वो बोली क्या कर रहे हो मैने आज तक किसी को इन्हें छ्छूने नही दिया. मैने कहा के ठीक है आज तक नही किसी ने च्छुआ होगा इनको पर आज तो तुम पूरी तैयारी के साथ आई हो इनको छुआने को. वो चौंक के बोली तुम्हे कैसे पता. मैने कहा के मैं पहले ही तुम्हे अपना इंट्रो बता चुका हूँ, और बाकी की जो आधी लाइन रह गयी थी वो भी सुन लो के उड़ती चिरिया के पर ही नही गिन लेते हैऔर उसको पकड़ के रख लेते हैं अपने पास. नीरू से कुच्छ भी बोलते नही बना.

मैने उसकी गर्दन पर हल्का सा दबाव डाल कर उसको अपनी ओर किया और उसके गाल से गाल लगाकर प्यार से पूछा के सच बताना क्या मेरी जड्ज्मेंट ग़लत है, देखो अब हम दोस्त हैं झूठ तो बोलना नही और डरो नही अगर तुम नही चाहोगी तो मैं कुच्छ नही करूँगा और वैसे भी मुझे लड़कियों से ज़बरदस्ती करना बिल्कुल पसंद नही है पर सच बताना. वो बोली के तुम सच में बहुत चालाक हो. मैं आई तो यही सोच कर थी पर इतनी जल्दी तुम शुरू हो जाओगे यह नही सोचा था, इसीलिए थोड़ा चौंक गयी थी. मैने कहा चलो अब तो डर ख़तम हो गया. जहाँ तक चाहोगी वहीं तक करूँगा और आगे तुम्हारी मर्ज़ी के बिना नही बढ़ूंगा. बड़े प्यार से उसने कहा के वो सब जानती है बस पहले हिम्मत नही जुटा पाई थी, डरती थी, फिर उस दिन कॉलेज में मिले तो हिम्मत करके बात शुरू करदी और आज यहाँ तक पहुँच गये अब आगे भी पहुँच जाएँगे.

मैं दिल ही दिल में खुश हुआ के यह तो पूरी तरह से तैयार है. मैने उसके मम्मे को प्यार से सहलाया तो उसका निपल जो सर उठा कर खड़ा हो गया था मेरी हथेली गुदगुदाने लगा. मैने अपना दूसरा हाथ ऊपेर किया और उसके टॉप को उसके कंधे से नीचे खींच लिया. टॉप थोड़ा नीचे आया और मैने अपने हाथ में पकड़े मम्मे को ऊपेर किया तो वो टॉप में से बाहर आ गया और मैने अपना मुँह नीचे करके उसके निपल को मुँह में भर लिया और चाटने और चूसने लगा. नीरू के मुँह से स….ई….ई….ई…. की आवाज़ निकली और उसने मेरा सर अपने मम्मे पर दबा दिया. मैने अपना सर उठाकर इधर उधर देखा सब फिल्म देखने में व्यस्त थे और हमारी तरफ किसी की तवज्जो नही थी. मैं दोबारा उसे मम्मे को चुभलने में लग गया.

उसने 4-5 मिनट कुच्छ नही कहा फिर बोली के यहाँ मत करो प्लीज़. मैने भी उसकी बात समझी और हट गया. फिर वो बोली के कही प्राइवसी में मिल सकते हैं. मैने कहा के यार तुम जब कहो तब मिल सकते हैं. ठीक है मैं तुम्हें फोन करूँगी जैसे ही कोई मौका बनेगा. इसके बाद हमने पूरी पिक्चर देखी और इंटर्वल में प्रिमियर का प्रोग्राम भी देखा और फिल्मी लोगों से भी मिले. नीरू बहुत खुश हुई. पिक्चर ख़तम हुई तो मैने उसको घर छोड़ा और अपने घर चला आया.

कुच्छ दिन बाद उसका फोन आया और उसने पूछा के कल मिल सकते हो. अगला दिन फुल वर्किंग डे था तो मैने पूछा के कब तो उसने बोला मॉर्निंग में ही हम कॉलेज बंक कर लेंगे. मैने कहा के ठीक है मैं तुमको 9 बजे पिक कर लूँगा. वो कहने लगी के 9 नही 8-30 मैं घर से निकलती हूँ तो तुम मुझे उसी वक़्त बाहर से पिक कर लेना. मैने कहा के ओके और फोन काट दिया. अब मुझे फिकर थी के लेके कहाँ जाउ नीरू को? फार्म हाउस में रेनवेशन का काम चल रहा था. एक फ्लोर लिया था लास्ट एअर पिताजी ने, पर उसकी चाबी तो मा के कपबोर्ड की ड्रॉयर में रहती थीं और वहाँ तक पहुँचना आसान नही था. फिर मुझे याद आया के मा कयि दिन से पिताजी को कालकाजी मंदिर ले जाने के लिए ज़िद कर रही हैं तो क्यों ना उनको थोड़ा सा भर दूं तो शायद वो सुबह-सुबह पिताजी को लेकर मंदिर चली जायें तो मैं चाबी निकाल लूँगा.

मैं मा के पास आया और इधर उधर की बातें करने के बाद उनसे पूछा के क्या आप कालकाजी मंदिर हो आए हो? मा बोली के कहाँ तेरे पिताजी चल ही नही रहे. मैने कहा के क्या मा तुम ज़ोर देकर नही कहती हो इसलिए नही ले जा रहे अगर तुम थोड़ा दबाव देके कहो ना तो वो तुमको मना कर ही नही सकते. मा बोली के हट शरारती कहीं का. मैने कहा मा अगर तुम कल जा रही हो तो मेरे लिए भी प्रार्थना करना के इस बार भी एम.एससी. में मैं फर्स्ट ही रहूं. मा बोली के तू भी चल हमारे साथ और आप ही कर लेना प्रार्थना. मैने कहा के नही मा मैं कल तो नही जा सकता पर हां अगर इस बार भी फर्स्ट आया तुम्हारी प्रार्थना के बाद तो मैं पूजा करवाने तुम्हारे साथ ज़रूर चलूँगा. मा बोली के पक्कावादा, तो मैने कहा के गॉड प्रॉमिस. मा जानती थी के जब मैं गॉड प्रॉमिस बोलता हूँ तो पूरा ज़रूर करता हूँ. बहुत खुश हुई मा और रात को डिन्नर पे पिताजी के पीछे ही लग गयी के कल तो हर हाल में आप मुझे कालकाजी मंदिर ले के जा रहे हो. आख़िर पिताजी मान गये सुबह 6-00 बजे से पहले पहले ही जाने को ताकि वापिस आकर स्कूल भी जा सकें टाइम पर.

मैं सुबह 6-30 का अलार्म लगा के सोया और उठकर सीधा मा-पिताजी के कमरे में गया और मा का कपबोर्ड खोलकर उसमे से कीस निकली और अपने कमरे में आ के तैयार होने लगा. मा पिताजी आ गये और मैं उनके साथ बैठ कर नाश्ता करके कॉलेज का बोलकर निकल आया. वैसे तो मैं कॉलेज यूनिवर्सिटी स्पेशल में मस्ती करते हुए जाता था पर आज तो स्पेशल मस्ती का दिन था इसलिए मैने कार निकाल ली थी. ठीक टाइम पर मैने नीरू को पिक किया और चल दिया अपने ठिकाने की ओर. नीरू ने पूच्छा के कहाँ जा रहे हैं तो मैने कहा के हमारा एक और घर है जो पिताजी ने एक फ्लोर खरीद रखा है और वहाँ कोई नही रहता है, हम वहीं जा रहे हैं. नीरू बोली के वा क्या बात है, सब काम तुम्हारे पूरी तरह फिट होते हैं. मैने कहा के फिट रखने पड़ते हैं नही तो सेवा कैसे कर पाउन्गा और मेवा कैसे मिलेगा. वो हंस दी और बोली के वाह क्या बात है. थोड़ी देर में हम मकान पर पहुँच गये. हमारा फर्स्ट फ्लोर था और प्लॉट एरिया था 500 ज़्क.य्ड्स. पूरा फर्निश्ड था. साइड में 10 फुट की गली थी और उस में एक डोर था और स्टेर्स थीं. मैने कार बाहर पार्क की और नीरू को लेकर अंदर चला गया. हम ऊपेर आ गये और मैने मैन डोर खोला और दोनो अंदर चले गये.

मैने डोर लॉक किया और नीरू को एक सोफे पर बिठा दिया. किचन से मैं कोल्ड ड्रिंक्स लेकर आया और हम बैठ के इधर उधर की बातें करने लगे. मैने उसको पूछा के घर वापिस कब जाना है. वो बोली कॉलेज टाइम तो 2 बजे का है लेकिन आगे पीछे हो सकता है. मैं सोफे पर उसके साथ बैठा था. मैने उसका चेहरा अपनी ओर किया और कहा के फिर तो बहुत खुल्ला टाइम है हमारे पास मस्ती करने का. वो बोली के टाइम तो खुल्ला चाहिए भी क्योंकि टाइम लगेगा ही. मैने पूछा के क्यों लगेगा? तो उसने कहा के अपने आप समझ जाओगे. मैने उसका चेहरा अपने पास किया और उसको किस करने लगा. उसने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया. हमारी किस कोई 10 मिनट तक चली. इतनी देर में उसस्के होंठ लाल हो गये. मैने उसको कहा के यार एक बात है तुम्हारे जितनी बोल्ड आंड ब्यूटिफुल लड़की मैने पहले नही देखी तुम बहुत सुन्दर तो हो ही बहुत बोल्ड भी हो.

वो थोड़ा सीरीयस होकर बोली के मेरी फ्रस्ट्रेशन ने मुझे बोल्ड होने पर मजबूर किया है. लकिली तुम मिल गये और मैने तुम्हारे बारे में स्कूल में ही बहुत सुना था के तुम फर्स्ट टाइमर्स के लिए बहुत अच्छे लवर हो. बहुत प्यार से करते हो और बहुत ख्याल रखते हो लड़की का. इसलिए तुमको देखते ही मेरे मन में आया के अब मौका नही गवाना चाहिए और मैने बोल्ड होकर तुमसे बातें शुरू की और फिर और भी बोल्ड हो गयी. मैं चौंक गया और उसको पूछा के तुम सच कह रही हो के यह तुम्हारी पहली बार है और इसके पहले तुमने कभी नही चुडवाया? वो बोली के क्या बोल रहे हो? तो मैने उसको कहा के देखो यार मुझे तो प्रॉपर वर्ड्स ही यूज़ करना अच्छा लगता है. कुच्छ और बोलने से भी लंड तो लंड ही रहता है और चूत चूत ही रहती है और चुदाई भी चुदाई ही रहती है. चूची को ब्रेस्ट कहने से वो कुच्छ और नही बन जाता. फिर जब आपस में हम यह करने ही वाले हैं तो शरम कैसी. हां अभी तुम्हे थोड़ा अजीब लग रहा है पर जब तुम खुद बोलोगि और सुनोगी तो अजीब नही लगेगा बल्कि ऐसे बोलना भी मज़ा देगा और असली मज़े में वृद्धि करेगा. मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराई और बोली तुम्हारी बात तो बिल्कुल ठीक है मैं अभी यूज़्ड तो नही हूँ ना इसलिए मुझे अजीब लगा. मैने कहा के कोई बात नही. फिर मैने उसका हाथ पकड़ा और उसको बेडरूम में ले आया.

वहाँ आकर मैने उसको बेड पर बिठाया और उसस्के साथ बैठ गया. अभी तक तुमने अपने आप को बचा के कैसे रखा हुआ है, मैने पूछा. वो मुस्कुराई और बोली के शायद मैं तुम्हारे लिए ही बची हुई हूँ. स्कूल तक तो मैं बहुत डरती रही थी फिर अभी मैं सोच ही रही थी इस बारे में तो तुम मिल गये उस दिन और फिर मैं अपने आप को रोक नही पाई और तुम्हारे साथ फ्रॅंक होती चली गयी. तुम्हारे बारे में मैने और लड़कियों से सुन रखा था इसीलिए मुझे तुमसे इतना डर भी नही लग रहा था. बोलते हुए वो मेरी ओर ही देख रही थी तो मैने उसको किस करना शुरू कर दिया. वो भी पूरी तरह से मेरा साथ देने लगी. किस करते हुए मैने उसके टॉप को नीचे से पकड़ा और ऊपेर उठाया तो उसने अपनी दोनो बाहें ऊपेर करदी और अपने मुँह को तोड़ा सा परे कर लिया. मैने फुर्ती से उसके टॉप को उसके जिस्म से अलग किया और झुक कर उसके मम्मे को किस कर लिया. आज भी वो बिना ब्रा के थी.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--17

gataank se aage..............

Maine usski kamar mein haath daala aur bola aao dear ooper chalein. Hum ooper aa gaye. Lift mein se nikalte hi maine idhar udhar nazrein daudayeen to dekha ke mera dost kuchh logon se baatein kar raha hai. Mujhe dekhte hi wo unko excuse me kehke meri ore lapka. Welcome Raj Bhai aapka bahut bahut dhanyavaad jo aap yahaan padhaarey. Main kuchh bolta ussne pehle hi mujhe aankh maarke ishaara kar diya. Main chup hi raha aur phir maine usska aur Neeru ka parichay karaya aur ussne Neeru ko haath jod kar Namaste kiya. Maine badi mushkil se apni hansi roki. Neeru hakki bakki sab dekh rahi thi. Maine usska haath daba kar uske kaan mein halke se kaha ke relax to wo thori normal hui.

Phir picture ka time hua to ek-ek do-do karke sab log hall mein daakhil ho gaye. Hamein sabse peeche ki row mein centre corner ki seat par bithaya gaya. Corner pe maine Neeru ko bitha diya aur main usske saath waali seat par baith gaya. Ab Neeru meri ore munh karke boli ke sab kya hai Raj. Maine kaha ke tumne pehli baar kuchh farmaish ki to main kaise poori na karta haan yeh alag baat hai ki meri madad mere dost ne ki jissko maine tumhe abhi milvaya tha, wo film distributor hai aur yeh film wahi distribute kar raha hai Delhi region mein. Wo boli to yeh baat hai. Maine kaha ke haan baat to yahi hai par bhagwan ki marzi se badey style mein tumhari iccha poori ho gayi. Abhi filmi log bhi aane waale hain interval ke aas paas aur ho sakta hai ke Rishi aur Dimple bhi aayein lekin announce issliye nahi kiya ke in logon ka pakka kuchh nahi hota aayein ya na aayein. Haan producer aur kuchh cast and crew to zaroor aayeinge aur hum sabko milengey bhi. Wo bahut khush hui aur ussne mera haath pakad liya aur mera gaal choom kar boli main bahut khush hoon Raj, tum bahut achhe ho. Maine kaha oye mem sahib main koyi achha vachha nahi hoon main Romi hoon apni tarah ka single piece aur main khoobsoorat ladkiyon ka rasiya hoon samjhi, mujhse bachna mushkil hai. Wo hanste hanste seat par dohri ho gayi aur mera haath jo ussne apne haath me pakda hua tha usske dohre hone par usske mammon ke neeche dab gaya aur main chaunk gaya. Ussne bra nahi pehni thi aur maine mehsoos kiya ke ussko zaroorat bhi nahi thi kyonki usske mammey ekdum kadak thhe.

Maine apna haath kheenchna chaha to wo boli ke kya baat hai mera haath pakadna achha nahi laga kya. Maine kaha ke achha to bahut lag raha hai par main bhi kuchh pakadna chahta tha. Kya, ussne poochha to main apna haath usski gardan ke peechhe se usske kandhe par le gaya to wo phir boli bas. Maine kaha ke abhi to haath ka adha safar hi hua hai aur kehte kehte maine haath neeche karte huey usske khule gale ke top mein daal diya aur usska ek mamma haath mein bhar ke tolney laga. Usske mammey ke merey haath mein aate hi dono ko jaise current sa laga. Merey haath ne poori tarah se mammey ka naap-tol kiya aur phir halke se dabaya. Aise laga jaise koi tennis ki ball haath mein aayee ho par tennis ki ball to bahut khurdari hoti hai, yeh to bahut hi mulayam thhe aur chikne itne ke haath phisal jaaye. Wo boli kya kar rahey ho maine aaj tak kissiko inhein chhoone nahi diya. Maine kaha ke theek hai aaj tak nahi kissi ne chhua hoga inko par aaj to tum poori taiyaari ke saath aayee ho inko chhuaane ko. Wo chaunk ke boli tumhe kaise pata. Maine kaha ke main pehle hi tumhe apna intro bata chuka hoon, aur baaki ki jo aadhi line reh gaye thi wo bhi sun lo ke udti chiriya ke par hi nahi gin lete ussko pakad ke rakh lete hain apne paas. Neeru se kuchh bhi bolte nahi bana.

Maine usski gardan par halka sa dabav daal kar ussko apni ore kiya aur usske gaal se gaal lagakar pyar se poochha ke sach batana kya meri judgement galat hai, dekho ab hum dost hain jhooth to bolna nahi aur daro nahi agar tum nahi chahogi to main kuchh nahi karoonga aur vaise bhi mujhe ladkiyon se zabardasti karna bilkul pasand nahi hai par sach batana. Wo boli ke tum sach mein bahut chalaak ho. Main aayee to yahi soch kar thi par itni jaldi tum shuru ho jaoge yeh nahi socha tha, issliye thora chaunk gayee thi. Maine kaha chalo ab to dar khatam ho gaya. Jahan tak chahogi wahin tak karoonga aur aage tumhari marzi ke bina nahi badhoonga. Bade pyar se ussne kaha ke wo sab jaanti hai bas pehle himmat nahi juta payee thi, darti thi, phir uss din college mein miley to himmat karke baat shuru kardi aur aaj yahan tak pahunch gaye ab aagey bhi pahunch jayenge.

Main dil hi dil mein khush hua ke yeh to poori tarah se taiyar hai. Maine usske mammey ko pyar se sehlaya to usska nipple jo sar utha kar khara ho gaya tha meri hatheli gudgudaane laga. Maine apna doosra haath ooper kiya aur usske top ko usske kandhe se neeche kheench liya. Top thora neeche aaya aur maine apne haath mein pakde mammey ko ooper kiya to wo top mein se bahar aa gaya aur maine apna munh neeche karke usske nipple ko munh mein bhar liya aur chaatne aur choosne laga. Neeru ke munh se S….i….i….i…. ki awaz nikli aur ussne mera sar apne mammey par daba diya. Maine apna sar uthakar idhar udhar dekha sab film dekhne mein vyast thhe aur hamari taraf kissi ki tavajjo nahi thi. Main dobara usske mammey ko chubhlane mein lag gaya.

Ussne 4-5 min kuchh nahi kaha phir boli ke yahaan mat karo please. Maine bhi usski baat samjhi aur hat gaya. Phir wo boli ke kahi privacy mein mil sakte hain. Maine kaha ke yaar tum jab kaho tab mil sakte hain. Theek hai main tumhein phone karoongi jaise hi koi mauka banega. Isske baad humne poori picture dekhi aur interval mein premier ka programme bhi dekha aur filmi logon se bhi miley. Neeru bahut khush hui. Picture khatam hui to maine ussko ghar chora aur apne ghar chala aaya.

Kuchh din baad usska phone aaya aur ussne poochha ke kal mil sakte ho. Agla din full working day tha to maine poochha ke kab to ussne bola morning mein hi hum college bunk kar lenge. Maine kaha ke theek hai main tumko 9 baje pick kar loonga. Wo kehne lagi ke 9 nahi 8-30 main ghar se nikalti hoon to tum mujhe ussi waqt bahar se pick kar lena. Maine kaha ke OK aur phone kaat diya. Ab mujhe fikar thi ke leke kahan jaaun Neeru ko? Farm House mein renovation ka kaam chal raha tha. Ek floor liya tha last year pitaji ne, par usski keys to maa ke cupboard ki drawer mein rehti theen aur wahan tak pahunchna aasaan nahi tha. Phir mujhe yaad aaya ke maa kayi din se pitaji ko Kalkaji mandir le jaane ke liye zid kar rahi hain to kyon na unko thora sa bhar doon to shayad wo subah-subah pitaji ko lekar mandir chali jayein to main keys nikal loonga.

Main maa ke paas aaya aur idhar udhar ki batein karne ke baad unse poochha ke kya aap Kalkaji mandir ho aaye ho? Maa boli ke kahan tere pitaji chal hi nahi rahe. Maine kaha ke kya maa tum zor dekar nahi kehti ho issiliye nahi le ja rahe agar tum thora dabaav deke kaho na to wo tumko mana kar hi nahi sakte. Maa boli ke hutt shararti kahin ka. Maine kaha maa agar tum kal ja rahi ho to mere liye bhi prarthna karna ke iss baar bhi M.Sc. mein main first hi rahoon. Maa boli ke tu bhi chal hamare saath aur aap hi kar lena prarthna. Maine kaha ke nahi maa main kal to nahi ja sakta par haan agar iss baar bhi first aaya tumhaari prarthna ke baad to main pooja karwaane tumhare saath zaroor chaloonga. Ma boli ke pakka wada, to maine kaha ke god promise. Maa jaanti thi ke jab main god promise bolta hoon to poora zaroor karta hoon. Bahut khush hui maa aur raat ko dinner pe pitaji ke peechhe hi lag gayee ke kal to har haal mein aap mujhe Kalkaji mandir le ke ja rahe ho. Aakhir pitaji maan gaye subah 6-00 baje se pehle pehle hi jaane ko taaki waapis aakar school bhi jaa sakein time par.

Main subah 6-30 ka alarm laga ke soya aur uthkar seedha maa-pitaji ke kamre mein gaya aur maa ka cupboard kholkar ussmein se keys nikali aur apne kamre mein aa ke taiyar hone laga. Maa pitaji aa gaye aur main unke saath baith kar nashta karke college ka bolkar nikal aaya. Vaise to main college university special mein masti karte huey jaata tha par aaj to special masti ka din tha issliye maine car nikaal li thi. Theek time par maine Neeru ko pick kiya aur chal diya apne thikaane ki ore. Neeru ne poochha ke kahaan ja rahe hain to maine kaha ke hamara ek aur ghar hai jo pitaji ne ek floor khareed rakha hai aur wahaan koyi nahi rehta hai, hum wahin ja rahe hain. Neeru boli ke wah kya baat hai, sab kaam tumhare poori tarah fit hotey hain. Maine kaha ke fit rakhne padte hain nahi to sewa kaise kar paaunga aur mewa kaise milega. Wo hans di aur boli ke wah kya baat hai. Thori der mein hum makaan par pahunch gaye. Hamara first floor tha aur plot area tha 500 sq.yds. Poora furnished tha. Side mein 10 foot ki gali thi aur uss mein ek door tha aur stairs theen. Maine car bahar park ki aur Neeru ko lekar andar chala gaya. Hum ooper aa gaye aur maine main door khola aur dono andar chaley gaye.

Maine door lock kiya aur Neeru ko ek sofe par bitha diya. Kitchen se main cold drinks lekar aaya aur hum baith ke idhar udhar ki baatein karne lagey. Maine ussko poochha ke ghar wapis kab jaana hai. Wo boli college time to 2 baje ka hai lekin aage peechey ho sakta hai. Main sofe par usske saath baitha tha. Maine usska chehra apni ore kiya aur kaha ke phir to bahut khulla time hai hamare paas masti kane ka. Wo boli ke time to khulla chahiye bhi kyonki time lagega hi. Maine poocha ke kyon lagega? To ussne kaha ke apne aap samajh jaaogey. Maine usska chehra apne paas kiya aur ussko kiss karne laga. Ussne bhi mera saath dena shuru kar diya. Hamari kiss koyi 10 min tak chali. Itni der mein usske honth laal ho gaye. Maine ussko kaha ke yaar ek baat hai tumhaare jitni bold and beautiful ladki maine pehle nahi dekhi tum bahut sunder to ho hi bahut bold bhi ho.

Wo thora serious hokar boli ke meri frustration ne mujhe bold hone par majboor kiya hai. Luckily tum mil gaye aur maine tumhaare baare mein school mein hi bahut suna tha ke tum first timers ke liye bahut achhey lover ho. Bahut pyar se karte ho aur bahut khyal rakhte ho ladki ka. Issliye tumko dekhte hi mere man mein aaya ke ab mauka nahi gawana chahiye aur maine bold hokar tumse baatein shuru ki aur phir aur bhi bold ho gayi. Main chaunk gaya aur ussko poochha ke tum sach keh rahi ho ke yeh tumhari pehli baar hai aur isske pehle tumne kabhi nahi chudwaya? Wo boli ke kya bol rahe ho? To maine ussko kaha ke dekho yaar mujhe to proper words hi use karna achha lagta hai. Kuchh aur bolne se bhi Lund to lund hi rehta hai aur choot choot hi rehti hai aur chudayee bhi chudayee hi rehti hai. Mammey ko breast kehne se wo kuchh aur nahi ban jaata. Phir jab aapas mein hum yeh karne hi waale hain to sharam kaisi. Haan abhi tumhe thora ajeeb lag raha hai par jab tum khud bologi aur sunogi to ajeeb nahi lagega balki aise bolna bhi maza dega aur asli mazey mein vriddhi karega. Meri baat sunkar wo muskurayee aur boli tumhari baat to bilkul theek hai main abhi used to nahi hoon na issliye mujhe ajeeb laga. Maine kaha ke koyi baat nahi. Phir maine usska haath pakda aur ussko bedroom mein le aaya.

Wahan aakar maine ussko bed par bithaya aur usske saath baith gaya. Abhi tak tumne apne aap ko bacha ke kaise rakha hua hai, maine poocha. Wo muskurayee aur boli ke shayad main tumhare liye hi bachi hui hoon. School tak to main bahut darti rahi thi phir abhi main soch hi rahi thi iss baare mein to tum mil gaye uss din aur phir main apne aap ko rok nahi payi aur tumhaare saath frank hoti chali gayee. Tumhaare baare mein maine aur ladkiyon se sun rakha tha issliye mujhe tumse itna dar bhi nahi lag raha tha. Bolte hue wo meri ore hi dekh rahi thi to maine ussko kiss karna shuru kar diya. Wo bhi poori tarah se mera saath dene lagi. Kiss karte huey maine usske top ko neeche se pakra aur ooper uthaya to ussne apni dono bahein ooper kardi aur apne munh ko thora sa parey kar liya. Maine furti se usske top ko usske jism se alag kiya aur jhuk kar usske mammey ko kiss kar liya. Aaj bhi wo bina bra ke thi.

kramashah......


rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 12 Nov 2014 03:09

कुँवारियों का शिकार--18

गतान्क से आगे..............

क्या शानदार और जानदार मम्मे थे उसके. मैने उसको कहा के यार तुम्हारे मम्मे तो बहुत ज़बरदस्त हैं, एकदम तन कर खड़े हैं जैसे कोई छ्होटे छ्होटे पहाड़ी टीले हों. बहुत मस्त और सख़्त भी, बहुत ख़याल रखती हो इनका और शायद कभी इनको बेदर्दी से तंग नही किया गया है. मेरे किस करने से उसके निपल उभर कर बहुत ही आकर्षक मुद्रा में तन गये और मैने अपने दोनो हाथों में एक-एक मम्मे को पकड़ा और बहुत हल्के से उसके निपल्स को दबाया. वो तड़प उठी और बोली के मैने कभी किसी को इन्हें टच भी नही करने दिया और तुम पहले शख्स हो जिसने इनको च्छुआ है और किस किया है. मैने उसको कहा के तुम नही जानती के वॉट यू हॅव बीन मिस्सिंग. वो बोली के हां अब लग रहा है कि मैने बहुत कुच्छ मिस किया है बट इट ईज़ नेवेर टू लेट, जब आँख खुली तभी सवेरा समझो. अब मैं भरपूर मज़ा लेना चाहती हूँ और मुझे पता है के तुम मुझे बिल्कुल निराश नही करोगे. मैने कहा के मेरी पूरी कोशिश होती है के मेरे पास आने वाली किसी भी लड़की को चुदाईका पूरा आनंद मिले और कोई भी तकलीफ़ ना हो. पर यह तो तुम जानती हो ना के पहली बार लंड को चूत में डालने पर दर्द होता है. वो बोली के हां बाबा जानती हूँ के पहली बार में दर्द होता है और थोड़ी देर के बाद मज़ा भी खूब आता है. मैने कहा के मैं पूरी कोशिश करता हूँ के पहली चुदाई लड़की के लिए एक भयानक ख्वाब ना बने और बड़े प्यार से लंड को चूत में डालता हूँ. और दर्द के कम होने का इंतेज़ार भी करता हूँ. पर ऐसा कोई तरीका अभी तक नही बना के पहली बार में दर्द ना हो, क्योंकि जो तुम्हारी कुमारी झिल्ली है ना वो जब फटती है तो दर्द होना स्वाभाविक है पर उसके बाद तो मज़े ही मज़े हैं. वो बोली के ठीक है मैं तो मज़े लेना चाहती हूँ और ये जो थोड़ा सा टॅक्स देना पड़ेगा उसके लिए तैयार हूँ.

फिर मैं खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतारने लगा. वो भी खड़ी हो गयी और उसने भी अपने जीन्स उतार दी. नीचे उसने एक पिंक कलर की पॅंटी पहनी हुई थी जिस पर गीलापन सॉफ नज़र आ रहा था. मैं मुस्कुरा दिया तो उसने पूच्छा के क्यों मुस्कुरा रहे हो तो मैने उसको बताया. वो हंस पड़ी और बोली के मैं इतनी एग्ज़ाइटेड हूँ के रह रह कर सिहर जाती हूँ यह सोच सोच कर के आज मैं पहली बार सेक्स करने, मेरा मतलब है के चुदवाने जा रही हूँ. और इसीलिए यह पॅंटी भी गीली हो रही है. मैने कहा के हां डियर अब तुम थोड़ा खुल गयी हो और तुम्हे यह शब्द भी अजीब नही लग रहे. फिर हम पूरी तरह से नंगे होकर एक दूसरे से लिपट गये और जैसे ही मैने उसको अपनी बाहों में लपेटा उसके मम्मो ने मेरे सीने पर मचलना शुरू कर दिया. उनके कोमल दबाव ने मेरे अंदर एक आग भर दी और मेरा खून बहुत तेज़ी से दौड़ने लगा मेरे शरीर में जैसे एक करेंट भर गया हो. दिल की धड़कनें तेज़ हो गयीं. मैने अपनी एक टाँग उसकी टाँगों में फँसा दी और उसकी टाँग जो मेरी टाँगों के बीच मैं आ गयी थी उसको ज़ोर से भींच लिया. उसने भी मेरा अनुसरण करते हुए अपनी टाँगों में मेरी टांग दबा ली. मेरे हाथ उसकी पीठ और उसकी गांद का निरीक्षण करने लगे. क्या चिकना और सख़्त जिस्म था उसका जैसे मेरे हाथ किसी मोम की गुड़िया पर फिर रहे हों. मैं उसको लिए हुए ही बेड पर इस तरह गिर गया के मैं नीचे और वो ऊपेर थी और फिर मैं थोड़ा ऊपेर होते हुए पूरी तरह बेड पर आ गया. नीरू की आँखों में अब लाल डोरे दिखाई दे रहे थे. मैने घूम कर उसको बेड पर लिटा दिया और खुद उसकी लेफ्ट साइड पर चिपक कर लेट गया. उसके सर के नीचे तकिया लगाया और अपना बयाँ हाथ उसस्की गर्दन के नीचे से लाकर उसके बायें मम्मे पर रख दिया. दाईं टाँग से उसकी जाँघ को रगड़ने लगा और दायें हाथ को आज़ाद रहने दिया उसके पूरे शरीर की नाप तोल करने के लिए. मेरा दायां हाथ उसकी बाईं जाँघ पर पहुँचा तो मैने उसको थोड़ा सा अपनी ओर घुमा लिया. केले के तने जैसी जाँघ पर कुच्छ देर घूमने के बाद मेरा हाथ आया उसकी गांद पर. बिल्कुल गोल किसी फुटबॉल की तरह लेकिन मुलायम. गंद को अच्छी तरह से प्यार करने के बाद हाथ ऊपेर की ओर आया ओर उसकी नाज़ुक कमर को सहलाते हुए उसकी पीठ पर गया और वहाँ से ऊपेर की ओर जाकर आगे आया और उसके बायें माम्मे को नीचे से ऊपेर की ओर दबाने लगा. ऊपेर मेरा दायां हाथ था और इसीलिए उसका तना हुआ मम्मा दोनो हाथों के दबाव में आकर और ज़्यादा तन गया तथा और ऊपेर सर उठा लिया उसने. मैने अपना मुँह उस पर लेजाकार उसको अपने मुँह में भरने की भरपूर कोशिश की. पर यह सिर्फ़ कोशिश ही रह गयी क्योंकि वो इतना छ्होटा नही था के मेरे मुँह में आ जाता. फिर भी जितना ज़्यादा से ज़्यादा अपने मुँह में भर सकता था मैने भर लिया और अपनी जीभ उस पर चलाने लगा और जीभ से ही उसके निपल को छेड़ने लगा. नीरू की आहें निकलनी शुरू हो गयीं. वो उत्तेजित हो रही थी और शायद कंट्रोल नही कर पा रही थी. मैने अपनी टाँगों में उसकी जाँघ फसा ली और रगड़ने लगा. वो कांप रही थी और मुझसे अमर बेल की तरह लिपट रही थी.

फिर मैं उसकी टाँगों के बीच में आ गया और उसकी चूत पर अपना मुँह लगा कर अपनी जीभ उसकी चूत की दरार पर चलाने लगा. ऐसे ही करते करते मैने अपनी जीभ कड़ी करके उसकी चूत के मुहाने पर लगा दी. अपने दोनो हाथ लगाकर उसकी चूत की दोनो फाँकें अलग करी और जीभ से चाटने लगा. वो अब एक वाइब्रटर की तरह काँप रही थी और आ……आ……ह, उ……ह……ह की आवाज़ें भी निकाल रही थी. नीरू बैठ गयी और अपने हाथ बढ़ाकर मेरा सर अपनी चूत पर दबा दिया. फिर उसका शरीर बहुत ज़ोर से झटका खा कर कांपा और वो झाड़ गयी.

मैने फुर्ती से उठकर उसकी चूत से निकलते पानी में अपने लंड को अच्छी तरह गीला कर लिया और उसकी चूत के मुहाने पर रख कर हल्कासा दबाया. मेरे लंड का सुपरा उसकी चूत के अंदर चला गया. इस वक़्त वो पूरी तरह से ढीली पड़ी हुई थी इसलिए कोई ज़ोर नही लगाना पड़ा. मेरा लंड भी इतना आकड़ा हुआ था के दीवार में भी घुस जाए. फिर मैने उसके मम्मे चुभलाने और दबाने शुरू कर दिए. वो बहुत जल्दी ही उत्तेजित होने लगी. मैं नीचे से अपने लंड को भी हिला रहा था. इतने कोमल धक्के थे कि मेरा लंड अंदर बाहर तो नही हो रहा था पर उसकी कसी हुई चूत का छल्ला जो मेरे लंड पर कसा हुआ था वो आगे पीछे हो रहा था और हल्का सा घर्षण उसकी चूत के अंदर हो रहा था. इसी तरह करते करते नीरू की उत्तेजना बढ़ती गयी और वो अपना सर इधर उधर झटकने लगी. थोरी देर और उसको उत्तेजित करने के बाद मैं सीधा हुआ और उसकी जंघें पकड़ कर पूरे ज़ोर से एक धक्का लगाया. मेरा लंड उसकी चूत में आधे से थोड़ा ज़्यादा घुस गया. नीरू की एक चीख निकली जो उसने बड़ी मुश्किल से दबाई. उसकी टाँगें बहुत ज़ोर से देर तक काँपति रहीं. मैने अपने आप को वहीं रोक लिया. उसकी सील टूट गयी थी और उसकी चूत से खून निकल कर नीचे टवल को लाल कर रहा था. नीरू के चेहरे पर दर्द के भाव थे और उसकी सारी उत्तेजना ख़तम हो चुकी थी, आँखों से आँसू बह रहे थे. मैने उसको पूछा के क्या बहुत दर्द हुआ डियर. तो वो बोली के बहुत हुआ पर तुम रुक गये हो तो ठीक है. हिलना मत मुझे अभी भी दर्द हो रहा है. मैने कहा के मैं रुका हूँ और जब तक तुम्हारा दर्द कम नही होगा मैं बिल्कुल नही हिलूँगा.

उसकी चूत बहुत ही टाइट थी और मेरा लंड उसमे पूरी तरह से फसा हुआ था. मैं नीचे को झुका और उसके मम्मे को मुँह में लेकर फिर से चुभलना शुरू कर दिया और दूसरे मम्मे को हाथ में लेकर दबाया और प्यार से मसलता रहा. मैने अपना दूसरा हाथ नीचे लाकर उसके भज्नासे को रगड़ना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर में वो फिर से उत्तेजित होने लगी. फिर मैं चौंक गया. नीरू की चूत अब मेरे लंड पर और अधिक कस गयी थी और फिर वो कसाव कम हो गया. मैं समझ गया के उसकी चूत मेरे लंड पर संकुचन से दबाव बढ़ा रही है और फिर खुल रही है. यह सही वक़्त था और मैने अपना लंड एक इंच के करीब बाहर निकाला और फिर अंदर कर दिया बहुत ही प्यार से. नीरू ने एक लंबी साँस ली और अपनी आँखें खोल कर मेरी ओर देखा और मुस्कुरा दी.

मैने उसको पूछा के अब तो दर्द नही हो रहा ना? वो बोली के दर्द तो हो रहा है पर कम हो गया है, साथ ही मज़ा भी आना शुरू हो गया है. मज़े के साथ इस दर्द को तो मैं सह लूँगी. मैने कहा के फिर ठीक है, मैं अभी बहुत प्यार से धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करूँगा और जब तुम कहोगी तब तेज़ी से भी और ज़ोर से भी तुमको चोदून्गा. उसने सर हिला दिया. मैं शुरू हो गया. अंदर करते हुए मैं थोड़ा सा दबाव और डाल देता और मेरा लंड थोड़ा सा और अंदर घुस जाता. करते करते मैने अपना पूरा लंड नीरू की चूत में घुसा दिया. उसकी चूत मेरे लंड पर अपना कसाव बढ़ा कर क़म करती थी तो मेरा घर्षण का आनंद काई गुना बढ़ गया था. मुझे लगा के मुझे जल्द ही कुच्छ करना पड़ेगा नही तो मैं नीरू से पहले ही झाड़ सकता हू जो मुझे बिल्कुल मंज़ूर नही था. यह नीरू की पहली चुदाई थी और अगर मैं पहले झाड़ गया तो बड़ी इन्सल्ट वाली बात होगी और वो क्या कहेगी.

मैने वही किया जो ऐसे वक़्त में करना चाहिए. मैने अपना पूरा ध्यान अपनी उत्तेजना से हटा कर उसको उत्तेजित करने में लगा दिया और खुद एक मशीन की तरह अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा. मेरे दोनो हाथ उसके शरीर से खेल रहे थे. यूँ कहो के उसके पूरे शरीर पर फिसल रहे थे. ज़्यादा से ज़्यादा स्पर्श सुख दे रहे थे उसको. मेरा मुँह लगा हुआ था उसके मम्मों को चुभलाने में. कभी एक मम्मा मेरे मुँह में जाता और मैं उसको चूसने लगता और कभी अपने दाँतों पर अपने होंठ चढ़ाकर उसके निपल तो दबा देता पूरे ज़ोर से और जीभ से चाट लेता. छ्होटी छ्होटी लव बाइट्स उसके मम्मों पर देता अपने दाँतों से.

आख़िर मेरी सारी कोशिशें रंग लाईं और नीरू की उत्तेजना बढ़ने लगी. उसकी साँसें भारी हो गयीं और उसने अपनी टाँगें उठाकर मेरी पीठ पर बाँध लीं और बोली के अब दिखाओ अपना ज़ोर और तोड़ दो मुझे, फाड़ दो मेरी चूत को. इतना तडपाया है इसने मुझे के बता नही सकती. मैने कहा के कोई बात नही अब हम इसको तडपा देंगे. फुट तो गयी है यह और चुद रही है बड़े प्यार से. इसको और नही फाड़ेंगे पर इसको बहुत मारेंगे अपने लंड से. इतना मारेंगे इसको के यह अभी रो पड़ेगी. चिंता मत करो आज इसकी खून के आँसू रोने की बारी है. अब वो नीचे से अपनी गांद उठा कर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी. नीरू ने बोलना शुरू कर दिया. मैं तो पागल थी जो इतना डरती रही. इतना मज़ा आता है चुदवाने में के पहले पता होता तो कब की चुद गयी होती. हाए राज तुम्हारा लंड तो बहुत शानदार है एक दम स्टील रोड की तरह है. मेरी चूत को फाड़ के चोद रहा है मुझे, इतना मज़ा आ रहा है के बता नही सकती. जी करता है के सारी उमर ऐसे ही चुदवाती रहूं और यह चुदाई कभी ख़तम ही ना हो.

मैने अपना चिर परिचित वाक्य दोहराया के माइ डियर नीरू ऑल गुड थिंग्स ऑल्वेज़ कम टू आन एंड. लेकिन कोई बात नही हम फिर से तैयार होकर शुरू हो जाएँगे. आज मैं तुमको जी भर के चोदुन्गा और देखना तुम्हारा भी जी भर जाएगा कम से कम आज के लिए. वो बोली के यही तो वो चाहती है. मैं लगातार अपने धक्कों में वॅरीयेशन लाकर उसको चोद रहा था. नतीजा मेरे अनुकूल निकला और नीरू थोड़ी ही देर में ज़ोर से उछली और ह……आ……आ……य……ए करती हुई झाड़ गयी और उसकी चूत ने मेरे लंड पर अपना कसाव बढ़ाना और कम करना तेज़ कर दिया. मैं भी कुच्छ सेकेंड बाद ही 2-3 करारे धक्के मार के झाड़ गया. मैने अपना लंड पूरा उसकी चूत में घुसा दिया और उसकी चूत में ही अपने वीर्य की गरम बौच्चरें कर दीं. मेरा वीर्य इतनी ज़ोर से उसकी बcचेदानि से टकराया के वो सह नही सकी और दुबारा झाड़ गयी. नीरू ने मुझे अपने ऊपेर खींच लिया और ज़ोर से अपने साथ चिपका लिया. उसकी बाहें मेरी पीठ पर कस गयीं. फिर मैं साइड लेकर लेट गया और नीरू को अपनी बाहों में भींच लिया.

हम थोड़ी देर तक बेसूध से पड़े रहे. फिर मैने प्यार से नीरू के एक मम्मे को अपने हाथ में लेकर सहलाना शुरू किया और दूसरे को मुँह लगाकर चूसने और चाटने लगा. टाइम हमारे पास बहुत था अभी इसलिए मैं एक बार उसको और चोदना चाहता था और पूरे इतमीनान के साथ. नीरू बोली के क्या दिल भरा नही जो फिर शुरू हो गये हो? मैने कहा के दिल कभी नही भरता, यह तो शरीर थक जाता है और थोड़ी देर के लिए तसल्ली भी हो जाती है. तुम बताओ के तुम्हारा दिल क्या कह रहा है. बोली के अच्छा तो लग रहा है. तो मैने कहा के फिर टोका क्यों. वो कहने लगी के ऐसे ही. मैने उसको अपनी बाहों में भींच लिया और कहा के ऐसे ही टोकना नही चाहिए. अगर दिल कर रहा है तो साथ देना चाहिए. वो तुनक कर बोली ठीक है जो तुम्हारा दिल चाहे वो करो, पता नही मैं इतना मज़ा झेल भी सकूँगी या नहीं. मैने उसको तसल्ली दी के तुम अभी बहुत ज़्यादा मज़ा भी ले लोगि तुम्हें कुच्छ नही होगा. देखेंगे कहते हुए उसने मुझे ज़ोर से भींच लिया, वो मेरी बाहों से निकल कर मेरे ऊपेर आई और मुझे चूमने लगी. मैने उसको तसल्ली से गरम किया और उसकी एक और भरपूर चुदाई की जिसमे वो कितनी बार झड़ी याद ही नही क्योंकि दोबारा तैयार होने के बाद मैं तो जल्दी झड़ने वाला नही था. इसके बाद भी हम काई बार अकेले में मिले और चुदाई काखेल खेलते रहे. फिर उसकी शादी हो गयी. उसकी शादी के बाद मेरी उसकी कोई मुलाकात नही हुई क्योंकि जिस घर में उसकी शादी हुई थी वो एक बहुत रिच और फाइ फ्लाइयर जेट-सेट टाइप की फॅमिली थी और हमारा उनसे कोई भी वास्ता नही था.

मैं अपनी यादों के घेरे से बाहर आया और सोचने लगा की इतने अरसे के बाद नीरू को मुझसे क्या काम हो सकता है? फिर मैने इस ख़याल को अपने दिमाग़ से झटक दिया के जो भी होगा वो सॅटर्डे को पता लग ही जाएगा फिकर क्यों करें.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--18

gataank se aage..............

Kya shaandar aur jaandar mammey thhe usske. Maine ussko kaha ke yaar tumhare mammey to bahut zabardast hain, ekdum tan kar kharey hain jaise koi chhote chhote pahari teeley hon. Bahut mast aur sakht bhi, bahut khayal rakhti ho inka aur shayad kabhi inko bedardi se tang nahi kiya gaya hai. Mere kiss karne se usske nipple ubhar kar bahut hi akarshak mudra mein tan gaye aur maine apne dono haathon mein ek-ek mammey ko pakda aur bahut halke se usske nipples ko dabaya. Wo tadap uthi aur boli ke maine kabhi kissi ko inhein touch bhi nahi karne diya aur tum pehle shakhs ho jissne inko chhua hai aur kiss kiya hai. Maine ussko kaha ke tum nahi jaanti ke what you have been missing. Wo boli ke haan ab lag raha hai ki maine bahut kuchh miss kiya hai but it is never too late, jab aankh khuli tabhi savera samjho. Ab main bharpoor maza lena chahti hoon aur mujhe pata hai ke tum mujhe bilkul niraash nahi karoge. Maine kaha ke meri poori koshish hoti hai ke merey paas aane wali kissi bhi ladki ko chudayee ka poora anand miley aur koyi bhi takleef na ho. Par yeh to tum jaanti ho na ke pehli baar lund ko choot mein daalne par dard hota hai. Wo boli ke haan baba jaanti hoon ke pehli baar mein dard hota hai aur thori der ke baad maza bhi khoob aata hai. Maine kaha ke main poori koshish karta hoon ke pehli chudayee ladki ke liye ek bhayanak khwaab na baney aur badey pyar se lund ko choot mein dalta hoon. Aur dard ke kam hone ka intezaar bhi karta hoon. Par aisa koyi tareeka abhi tak nahi bana ke pehli baar mein dard na ho, kyonki jo tumhaari kumari jhilli hai na wo jab phatati hai to dard hona swabhavik hai par usske baad to mazey hi mazey hain. Wo boli ke theek hai main to mazey lena chahti hoon aur ye jo thora sa tax dena padega usske liye taiyar hoon.

Phir main khara ho gaya aur apne kapde utaarne laga. Wo bhi khari ho gayi aur ussne bhi apne jeans utar di. Neeche ussne ek pink colour ki panty pehni hui thi jis par geelapan saaf nazar aa raha tha. Main muskura diya to ussne poochha ke kyon muskura rahey ho to maine ussko bataya. Wo hans padi aur boli ke main itni excited hoon ke reh reh kar sihar jaati hoon yeh soch soch kar ke aaj main pehli baar sex karne, mera matlab hai ke chudne jaa rahi hoon. Aur issiliye yeh panty bhi geeli ho rahi hai. Maine kaha ke haan dear ab tum thora khul gayi ho aur tumhe yeh shabd bhi ajeeb nahi lag rahey. Phir hum poori tarah se nange hokar ek doosre se lipat gaye aur jaise hi maine ussko apni bahon mein lapeta usske mammon ne mere seene par machalna shuru kar diya. Unke komal dabaav ne mere andar ek aag bhar di aur mera khoon bahut tezi se daudne laga mere shareer mein jaise ek current bhar gaya ho. Dil ki dhadkanein tez ho gayeen. Maine apni ek taang usski tangon mein phansa di aur usski taang jo meri tangon ke beech main aa gayi thi ussko zor se bheench liya. Ussne bhi mera anusaran karte huey apni tangon mein meri tang daba li. Merey haath usski peeth aur usski gaand ka nireekshan karne lagey. Kya chikna aur sakht jism tha usska jaise merey haath kissi mome ki gudiya par phir rahey hon. Main ussko liye huey hi bed par iss tarah gir gaya ke main neeche aur wo ooper thi aur phir main thora ooper hotey huey poori tarah bed par aa gaya. Neeru ki aankhon mein ab laal dorey dikhayee de rahey thhe. Maine ghoom kar ussko bed par lita diya aur khud usski left side par chipak kar let gaya. Usske sar ke neeche takiya lagaya aur apna bayan haath usski gardan ke neeche se laakar usske bayein mammey par rakh diya. Daayeen taang se usski jangh ko ragadne laga aur daayein haath ko azad rehne diya usske poore shareer ki naap tol karne ke liye. Mera dayan haath usski bayeen jaangh par pahuncha to maine ussko thora sa apni ore ghuma liya. Kele ke taney jaisi jaangh par kuchh der ghoomne ke baad mera haath aaya usski gaand par. Bilkul gol kissi football ki tarah lekin mulayam. Gannd ko achhi tarah se pyar karne ke baad haath ooper ki ore aaya ore usski nazuk kamar ko sehlate hue usski peeth par gaya aur wahan se ooper ki ore jaakar aagey aaya aur usske baayein maamey ko neeche se ooper ki ore dabaane laga. Ooper mera dayaan haath tha aur issliye usska tana hua mamma dono haathon ke dabaav mein aakar aur zyada tan gaya tatha aur ooper sar utha liya ussne. Maine apna munh usspar lejakar ussko apne munh mein bharne ki bharpoor koshish ki. Par yeh sirf koshish hi reh gayee kyonki wo itna chhota nahi tha ke merey munh mein aa jata. Phir bhi jitna zyada se zyada apne munh mein bhar sakta tha maine bhar liya aur apni jeebh uss par chalane laga aur jeebh se hi usske nipple ko chhedne laga. Neeru ki aahein nikalni shuru ho gayeen. Wo uttejit ho rahi thi aur shayad control nahi kar pa rahi thi. Maine apni tangon mein usski jaangh phasa li aur ragadne laga. Wo kamp rahi thi aur mujhse amar bel ki tarah lipat rahi thi.

Phir main usski tangon ke beech mein aa gaya aur usski choot par apna munh laga kar apni jeebh usski choot ki daraar par chalaane laga. Aise hi karte karte maine apni jeebh kadi karke usski choot ke muhane par laga di. Apne dono haath lagakar usski choot ki dono phankein alag kareen aur jeebh se chatne laga. Wo ab ek vibrator ki tarah kaamp rahi thi aur A……a……h, U……h……h ki awaazein bhi nikaal rahi thi. Neeru baith gayi aur apne haath badhakar mera sar apni choot par daba diya. Phir usska shareer bahut zor se jhatka kha kar kampa aur wo jhad gayi.

Maine furti se uthkar usski choot se nikalte paani mein apne lund ko achhi tarah geela kar liya aur usski choot ke muhane par rakh kar halka sa dabaya. Mere lund ka supara usski choot ke andar chala gaya. Iss waqt wo poori tarah se dheeli padi hui thi issliye koi zor nahi lagana pada. Mera lund bhi itna akda hua tha ke deewar mein bhi ghus jaaye. Phir maine usske mammey chubhlaane aur dabaane shuru kar diye. Wo bahut jaldi hi uttejit hone lagi. Main neeche se pane lund ko bhi hila raha tha. Itne komal dhakke thhe ki mera lund andar bahar to nahi ho raha tha par usski kasi hui choot ka challa jo mere lund par kasa hua tha wo aage peeche ho raha tha aur halka sa gharshan uski choot ke andar ho raha tha. Issi tarah karte karte Neeru ki uttejana badhti gayee aur wo apna sar idhar udar jhatakne lagi. Thori der aur ussko uttejit karne ke baad main seedha hua aur usski janghein pakad kar poore zor se ek dhakka lagaya. Mera lund usski choot mein aadhe se thora zyada ghus gaya. Neeru ki ek cheekh nikli jo ussne badi mushkil se dabayee. Usski tangein bahut zor se der tak kampti raheen. Maine apne aap ko wahin rok liya. Usski seal toot gayi thi aur usski choot se khoon nikal kar neeche towel ko laal kar raha tha. Neeru ke chehre par dard ke bhaav thhe aur usski saari uttejana khatam ho chuki thi, aankhon se aansu beh rahe thhe. Maine ussko poochha ke kya bahut dard hua dear. To wo boli ke bahut hua par tum ruk gaye ho to theek hai. Hilna mat mujhe abhi bhi dard ho raha hai. Maine kaha ke main ruka hoon aur jab tak tumhara dard kam nahi hoga main bilkul nahi hiloonga.

Usski choot bahut hi tight thi aur mera lund ussmein poori tarah se phasa hua tha. Main neeche ko jhuka aur usske mammey ko munh mein lekar phir se chubhlana shuru kar diya aur doosre mammey ko haath mein lekar dabaya aur pyar se masalta raha. Maine apna doosra haath neeche laakar usske bhagnaase ko ragdna shuru kar diya. Thori hi der mein wo phir se uttejit hone lagi. Phir main chaunk gaya. Neeru ki choot ab mere lund par aur adhik kas gayi thee aur phir wo kasaav kam ho gaya. Main samajh gaya ke usski choot mere lund par sankuchan se dabaav badha rahi hai aur phir khul rahi hai. Yeh sahi waqt tha aur maine apna lund ek inch ke kareeb bahar nikala aur phir andar kar diya bahut hi pyar se. Neeru ne ek lambi saans li aur apni aankhein khol kar meri ore dekha aur muskura di.

Maine ussko poochha ke ab to dard nahi ho raha na? Wo boli ke dard to ho raha hai par kam ho gaya hai, saath hi maza bhi aana shuru ho gaya hai. Mazey ke saath iss dard ko to main seh loongi. Maine kaha ke phir theek hai, main abhi bahut pyar se dheere dheere apne lund ko andar bahar karoonga aur jab tum kahogi tab tezi se bhi aur zor se bhi tmko chodoonga. Ussne sar hila diya. Main shuru ho gaya. Andar karte huey main thora sa dabaav aur daal deta aur mera lund thora sa aur andar ghus jaata. Karte karte maine apna poora lund Neeru ki choot mein ghusa diya. Usski choot mere lund par apna kasav badha kar kam karti thi to mera gharshan ka anand kayi guna badh gaya tha. Mujhe laga ke mujhe jald hi kuchh karna padega nahi to main Neeru se pehle hi jhad sakta hoo jo mujhe bilkul manzoor nahi tha. Yeh Neeru ki pehli chudayee thi aur agar main pehhle jhad gaya to badi insult wali baat hogi aur wo kya kahegi.

Maine wahi kiya jo aise waqt mein karna chahiye. Maine apna poora dhyan apni uttejana se hata kar ussko uttejit karne mein laga diya aur khud ek machine ki tara apne lund ko andar bahar karne laga. Mere dono haath usske shareer se khel rahe thhe. Yoon kaho ke usske poore shareer par phisal rahe thhe. Zyada se zyada sparsh sukh de rahe thhe ussko. Mera munh laga hua tha usske mammon ko chubhlaane mein. Kabhi ek mamma mere munh mein jata aur main ussko choosne lagta aur kabhi apne daanton par apne honth chadhakar usske nipple to daba deta poore zor se aur jeebh se chaat leta. Chhoti chhoti love bites usske mammon par deta apne daanton se.

Aakhir meri saari koshishein rang laayeen aur Neeru ki uttejana badhne lagi. Usski saansein bhaari ho gayeen aur ussne apni taangein uthakar meri peeth par baandh leen aur boli ke ab dikhao apna zor aur tod do mujhe, phaad do meri choot ko. Itna tadpaya hai issne mujhe ke bata nahi sakti. Maine kaha ke koyi baat nahi ab hum issko tadpa denge. Phut to gayee hai yeh aur chud rahi hai badey pyar se. Issko aur nahi phadenge par issko bahut marenge apne lund se. Itna marenge issko ke yeh abhi ro padegi. Chinta mat karo aaj isski khoon ke aansu roney ki baari hai. Ab wo neeche se apni gaand utha kar mere dhakkon ka jawab de rahi thi. Neeru ne bolna shuru kar diya. Main to paagal thi jo itna darti rahi. Itna maza aata hai chudne mein ke pehle pata hota to kab ki chud gayee hoti. Haye Raj tumhara lund to bahut shandaar hai ek dum steel rod ki tarah hai. Meri choot ko phad ke chod raha hai mujhe, itna maza aa raha hai ke bata nahi sakti. Jee karta hai ke saari umar aise hi chudwati rahoon aur yeh chodna kabhi khatam hi na ho.

Maine apna chir parichit vakya dohraya ke my dear Neeru all good things always come to an end. Lekin koyi baat nahi hum phir se taiyaar hokar shuru ho jayenge. Aaj main tumko jee bhar ke chodunga aur dekhna tumhara bhi jee bhar jayega kam se kam aaj ke liye. Wo boli ke yahi to wo chahti hai. Main lagatar apne dhakkon mein variation laakar ussko chod raha tha. Nateeja mere anukool nikla aur Neeru thori hi der mein zor se uchli aur H……a……a……y……e karti hui jhad gayi aur usski choot ne mere lund par apna kasaav badhana aur kam karna tez kar diya. Main bhi kuchh second baad hi 2-3 karaare dhakke maar ke jhad gaya. Maine apna lund poora usski choot mein ghusa diya aur usski choot mein hi apne veerya ki garam bauchharein kar deen. Mera veerya itni zor se usski bacchedaani se takraya ke wo seh nahi saki aur dubara jhad gayi. Neeru ne mujhe apne ooper kheench liya aur zor se apne saath chipka liya. Usski bahein meri peeth par kass gayeen. Phir main side lekar let gaya aur Neeru ko apni bahon mein bheench liya.

Hum thori der tak besudh se padey rahey. Phir maine pyar se Neeru ke ek mammey ko apne haath mein lekar sehlana shuru kiya aur doosre ko munh lagakar choosne aur chatne laga. Time hamare paas bahut tha abhi issliye main ek baar ussko aur chodna chahta tha aur poore itminaan ke saath. Neeru boli ke kya dil bhara nahi jo phir shuru ho gaye ho? Maine kaha ke dil kabhi nahi bharta, yeh to shareer thak jata hai aur thori der ke liye tasalli bhi ho jaati hai. Tum batao ke tumhara dil kya keh raha hai. Boli ke achha to lag raha hai. To maine kaha ke phir toka kyon. Wo kehne lagi ke aise hi. Maine ussko apni bahon mein bheench liya aur kaha ke aise hi tokna nahi chahiye. Agar dil kar raha hai to saath dena chahiye. Wo tunak kar boli theek hai jo tumhara dil chahey wo karo, pata nahi main itna maza jhel bhi sakoongi ya nahin. Maine ussko tasalli di ke tum abhi bahut zyada maza bhi le logi tumhein kuchh nahi hoga. Dekhenge kehte huey ussne mujhe zor se bheench liya, wo meri bahon se nikal kar mere ooper aayi aur mujhe choomne lagi. Maine ussko tasalli se garam kiya aur usski ek aur bharpoor chudayee ki jissmein wo kitni baar jhadi yaad hi nahi kyonki dobara taiyaar hone ke baad main to jaldi jhadne wala nahi tha. Isske baad bhi hum kayee baar akele mein miley aur chudayee ka khel khelte rahe. Phir usski shadi ho gayee. Usski shadi ke baad meri usski koyee mulakat nahi hui kyonki jiss ghar mein usski shadi hui thi wo ek bahut rich aur figh flier jet-set type ki family thi aur hamara unse koi bhi vaasta nahi tha.

Main apni yaadon ke ghere se bahar aaya aur sochne laga ki itne arsey ke baad Neeru ko mujhse kya kaam ho sakta hai? Phir maine iss khayal ko apne dimaag se jhatak diya ke jo bhi hoga wo Saturday ko pata lag hi jayega fikar kyon karein.

kramashah......