बिन बुलाया मेहमान compleet

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raj..
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Re: बिन बुलाया मेहमान

Unread post by raj.. » 11 Nov 2014 08:17

चाचा ने तुरंत गगन से डाइयरी ले ली और बोला, "नही बेटा कुछ ख़ास नही है इसमे रहने दो बाद में इतमीनान से पढ़ना."

"नही चाचा जी पढ़ने दीजिए ना इन्हे. गगन पढ़ो बहुत अच्छी अच्छी बाते लिखी है इसमे."मैने तुरंत गगन को उकसाया. चाचा मेरी तरफ गुस्से में घूर रहा था.

"निधि इतना कह रही है तो पढ़ ही लेता हूँ चाचा जी" गगन ने चाचा के हाथ से डाइयरी वापिस ले ली.

चाचा की हालत पतली होती दिख रही थी. गगन ने डाइयरी पढ़नी शुरू कर दी. मैं वही दीवार से सॅट कर खड़ी हो गयी.

डाइयरी के 2 पेज पढ़ने के बाद गगन ने मेरी तरफ देखा और बोला, "सच में बहुत अच्छी अच्छी बाते लिखी हैं इस डायरी में. ब्रह्म्चर्य के बारे में बहुत अच्छा लिखा है चाचा जी ने. थॅंक्स निधि मैं ये डाइयरी आज रात को पूरी पढ़ लूँगा."

ये सुनते ही मेरे होश उड़ गये. मैने तुरंत गगन के हाथ से डायरी खींच ली और पढ़ने लगी. उसमे सच में ब्रह्म्चर्य के बारे में लिखा था. मेरा तो सर घूमने लगा.

"क्या हुआ बेटी. गगन को पढ़ने दो ना. तुम तो पढ़ ही चुकी हो."चाचा ने मुस्कुराते हुए कहा.

"हां निधि मुझे दो. चाचा जी शायद ये दुबारा पढ़ना चाहती है. पर निधि अब पहले मैं पढ़ुंगा तब तुम दुबारा पढ़ना ओक."गगन डाइयरी हाथ में लिए वहाँ से उठ गया और कमरे से बाहर चला गया.

मैं इतने सदमे में थी कि समझ ही नही पा रही थी कि क्या हो रहा है. चाचा बेड से उठ कर मेरे पास आया और धीरे से बोला, "क्या हुआ तुम इतनी हैरान और परेशान सी क्यों हो गयी अचानक निधि बेटी. सब ठीक तो है ना."

"देख लूँगी तुम्हे मैं. छ्चोड़ूँगी नही तुम्हे मैं." मैने कहा.

मैं कमरे से जाने लगी तो चाचा ने मेरे नितंबो पर ज़ोर से हाथ मारा और बोला, "बहुत मस्त गान्ड है तुम्हारी. मज़ा आ गया आज."

मैं दाँत भींच कर रह गयी और बिना कुछ कहे कमरे से बाहर आ गयी. मैं सीधा अपने बेडरूम में आई. गगन डाइयरी पढ़ने में मगन था.

"गगन चाचा जी वैसे नही हैं जैसे दिखते हैं." मैने कहा.

"हां ये पढ़ कर अब मुझे भी यही लग रहा है. बहुत उँची और गहरी बाते लिखी है जीवन के बारे में चाचा जी ने. थॅंक्स आ लॉट डार्लिंग फॉर गिविंग दिस डाइयरी टू मी. और हां मैं बताना भूल गया. तुम तैयार हो जाओ. हम मूवी देखने जा रहे हैं."

सुनते ही मैं झूम उठी. और तुरंत सब कुछ भूल कर तैयार होने लगी. जब हम निकलने लगे तो मुझे बहुत बड़ा शॉक लगा. गगन ने मुझे नही बताया था कि चाचा भी हमारे साथ मूवी देखने चल रहा है. वो तैयार खड़ा था दरवाजे के पास. मेरा उसे देखते ही सारा मूड खराब हो गया.हम ने मेट्रो स्टेशन के लिए ऑटो किया और 5 मिनिट में स्टेशन पहुँच गये. मेट्रो में बहुत भीड़ थी. लोग एक दूसरे से सॅट कर खड़े थे. बैठने को सीट नही थी सभी भरी हुई थी. मैं गगन और चाचा एक साथ खड़े हो गये थे. गगन मेरे बाई तरफ था और चाचा मेरे पीछे. मुझे पूरा यकीन था कि चाचा ज़रूर कोई ना कोई छेड़खानी करेगा. मैने प्लान बनाया कि जैसे ही वो मुझे कही छुएगा मैं गगन को बोल दूँगी देखने को कि देखो कॉन छू रहा है मुझे. कुछ देर तक कुछ नही हुआ.

अचानक मुझे मेरे नितंबो पर हाथ महसूस हुआ. मैने धीरे से गगन के कान में कहा कि कोई मेरी बॅक को टच कर रहा है. गगन ने मुझे चुप रहने को कहा ताकि टच करने वाले को रंगे हाथो पकड़ा जा सके. मैने आँखो से इशारा किया कि हाथ अभी वही है तो गगन ने तुरंत वो हाथ पकड़ लिया. हैरत की बात ये थी कि वो हाथ चाचा का नही बल्कि मेरे दाहिनी तरफ खड़े आदमी का था. जैसे ही गगन ने उस आदमी का हाथ पकड़ा वो घबरा गया. चाचा ने मोका देख कर उसके मूह पर एक थप्पड़ जड़ दिया. वो माफी माँगने लगा. बाकी लोगो ने भी उसे खरी खोटी सुनाई. मगर मेरा प्लान फिरसे फैल हो गया था. चाचा फिर से बच गया था.


raj..
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Re: बिन बुलाया मेहमान

Unread post by raj.. » 11 Nov 2014 08:18

“सिनिमा में बहुत भीड़ थी. मैने जानबूझ कर चाचा से दूर बैठी थी. चाचा को गगन की साइड वाली सीट पर बैठा दिया था. मुस्किल से 15 मिनिट ही बीते थे कि गगन का मोबाइल बज उठा. गगन ये बोल कर बाहर चला गया कि बॉस का फोन है. गगन के बाहर जाते ही चाचा मेरे पास आ गया और मेरे कान में बोला,

"हर कोई तुम्हारी गान्ड के पीछे पड़ा है. पड़े भी क्यों ना गान्ड ही ऐसी है तुम्हारी."

"चुपचाप मूवी देखो मुझे डिस्टर्ब मत करो." मैने कहा.

गगन आता दीखाई दिया तो चाचा वापिस अपनी सीट पर चला गया. गगन ने आकर मुझे बहुत बड़ा शॉक दिया.

"हनी मुझे जाना होगा. बॉस ने तुरंत ऑफीस बुलाया है कुछ अर्जेंट काम है. तुम लोग मूवी देख कर मेट्रो से ही वापिस चले जाना."

"मैं चाचा के साथ मूवी कैसे देखूँगी."मैने धीरे से कहा.

"वो तो एक सीट छ्चोड़ कर बैठे हैं. वैसे भी कॉमेडी मूवी है. प्लीज़ मुझे जाना ही होगा."गगन चाचा की तरफ बढ़ गया बोल कर और उनके कान में कुछ बोल कर थियेटर से बाहर निकल गया.

मैं अपना सा मूह लेकर रह गयी. गगन के जाते ही चाचा मेरे पास वाली सीट पर आ गया.

"अब हम दोनो साथ में सिनिमा देखेंगे." चाचा ने कहा.

"तुम्हारे गाँव में तो सिनिमा नाम की चीज़ भी नही होगी है ना. बड़ी मुस्किल से नसीब हुई है ये सिनिमा देखने की ऑपर्चुनिटी तुम्हे. इसलिए चुपचाप मूवी देखो बैठ कर." मैने कठोरता से कहा.

"सच सच बताओ क्या कल तुम्हे मज़ा नही आया था. मेरा हाथ लगते ही औरत का अंग अंग थिरकने लगता है. तुम्हारी गान्ड के छेद को बहुत अच्छे से रगड़ा था मैने. कहो तो आज फिर सेवा कर दूं तुम्हारी थोड़ी सी."

"तुम देखो मूवी बैठ कर मैं जा रही हूँ." मैं उठने लगी तो चाचा ने हाथ पकड़ कर बैठा दिया मुझे वापिस.

"नही देखो तुम भी. मैं अब चुप रहूँगा."

क्रमशः…………………………………

raj..
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Re: बिन बुलाया मेहमान

Unread post by raj.. » 11 Nov 2014 08:18

Bin Bulaya Mehmaan-5

gataank se aage……………………
"tum hatate ho ki nahi. main gagan ko bata dungi hat jaao." maine chetavni di.


"bata dena. nuksaan tumhara hi hoga. har koyi meri tarah gaanD se nahi khel sakta."


"shut up. kuch to sharam karo main tumhari beti ke samaan hun." maine kaha.


"tumne bada sammaan diya hai mujhe. jabse yaha aaya hun tumhari aankho mein tiraskaar hi dekha hai."


"aahhhh...chhodo mujhe...tum mujhe yaha nahi cho sakte." maine kaha.



mere nitambo ke upar salwar ke kapde ko ander dhakailte hue chacha ki ungli mere nitamb ke chidra tak ja pahunchi thi. aaj tak kisi ne bhi mujhe vaha nahi chua tha. main thar thar kaampne lagi thi.


"hmm...bahut mast gaanD hai tumhari. gagan iske saath khelta hai ki nahi."chacha ne ghinoni awaaj mein pucha.


"tumhe us se kya matlab. chhodo mujhe."


chacha ne meri baat ansuni karke mere nitamb ke chidra ko ragadna shuru kar diya.


mujhe bahut gussa aa raha tha chacha par magar jab vo mere peechle chidra ko ungli se ragad raha tha to mere sharir mein ajeeb si halchal ho rahi thi. sabse bada jhatka mujhe tab laga jab munjhe apni jaangho ke beech gila gila mahsus hua.


mere peechle chidra par ho rahi ragad ke kaaran meri yoni ne paani chhod diya tha. us vakt main bilkul khaamos ho gayi thi.


"kya hua achha lag raha hai na tumhe nidhi beti." chacha ne besharmi se kaha.


"tumhe sharam aani chaahiye ye sab karte hue."


"aa rahi hai par dil ke haatho majboor hun. kya karun tumhari gaanD hi aisi hai."


"shut up."


achaanak chacha ne kuch ajeeb tarike se mere peechle chidra ko ragda jiske kaaran mere muh se khud b khud shisiki nikal gayi. "aahhh..."


chacha ne mere nitamb se apna haath hata liya aur mere marode hue haath ko bhi chhod diya.

"aage se tamiz se baat karna mere saath samjhi."chacha ne kaha.


"main shaam ko gagan ko sab bataungi. dekhna shaam ko tumhaari khair nahi." main chillaai aur bhaag kar apne bedroom mein ghuss gayi. bedroom mein aate hi maine kundi laga li aur bistar par gir gayi. mera sharir thar thar kaamp raha tha. aaj tak kabhi bhi kisi ne mere saath aisi harkat nahi ki thi.


main apne bistar par padi huyi thar thar kaamp rahi thi. mere peechle chhidra par mujhe abhi bhi chacha ki ungli mahsus ho rahi thi. main viswaas nahi kar pa rahi thi ki mere saath mere hi ghar mein aisa hua hai. main chacha ko buri tarah kos rahi thi.


"aaj gagan ke saamne iski pol khol dungi main. bada baal brahm chaari bana phirta hai. aaj iski khair nahi." maine nischay kiya.


shaam ko gagan ne door bell bajaayi to mujhse pahle chacha ne darvaja khol diya.


"kuch bhi karle dehaati aaj tu bachega nahi"maine man hi man kaha.


gagan chacha ke saath uske kamre mein chala gaya. main toilet mein gayi to meri aankhe chamak uthi. toilet tank par chacha ki diary padi thi. maine vo turant uthayi aur chacha ke kamre mein ghuss gayi. maine dairy gagan ko thama di aur boli,"


gagan ye chacha ji ki diary hai. dekho inhone kitna achha achha likha hai apne baal brahchari jeevan ke baare mein.


gagan ne turant diary le li.