raj sharma stories मस्त घोड़ियाँ compleet

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rajaarkey
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Re: raj sharma stories मस्त घोड़ियाँ

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 13:07

मस्त घोड़ियाँ-15

गतान्क से आगे........................

मेहता सीधे संध्या के दूध को मसल-मसल कर लाल कर रहा था

उधर मम्मी जी और रोहित की नींद एक साथ खुली और मम्मी जी जैसे ही बाथरूम मे जाकर मुतने बैठी रोहित ने पिछे से जाकर मम्मी जी के भारी चूतादो के बीच से हाथ डाल कर उनकी चूत को पकड़ लिया, मम्मी जी एक दम से सन्न रह गई लेकिन जब उन्हे रोहित के होने का एहसास हुआ तब कुछ नॉर्मल हुई, उन्होने कहा बेटा मूत तो लेने दो फिर आराम से कर लेना,

रोहित - मम्मी जी आप मुतो ना मैने तो बस अपना हाथ लगा रखा है मैं तो बस आप मुतती जाना और मैं आपकी चूत को सहलाता जाउन्गा बस,

मम्मी- सी अया बेटे ऐसे पेशाब नही आएगा पानी आएगा,

रोहित- मम्मी कोशिश करो तब तक मैं आपके इस लहसुन को रगड़ता हू,

मम्मी जी मूतने की कोशिश करने लगी और फिर एकदम से उन्होने एक तेज धार मारना शुरू कर दी और फिर क्या था वह रुक-रुक कर मूतने लगी और रोहित उनकी चूत को सहलाता रहा, मूतने के बाद मम्मी जी ने साडी नीचे की और बिस्तेर पर आ गई, रोहित मम्मी जी की मोटी गंद को सहलाते हुए उनकी साडी पूरी कमर तक करके उनकी चूत को फैला लेता है चूत से मूत की गंध सूंघते ही रोहित मम्मी जी की चूत को पागलो की तरह चाटने लगता है

और मम्मी जी आह बेटे आह रोहित करते हुए उसका सर सहलाने लगती है, मम्मी जी की चूत फूल के कुप्पा हो जाती है और उनकी गुलाबी सूजी हुई चूत की फांको को फैला-फैला कर रोहित चूसने लगता है, कभी वह बुर के दाने को चूस्ता है कभी चूत के गुलाबी छेद को चाट्ता है, उसके बाद रोहित अपना लंड गछ से मम्मी जी की चूत मे पेल देता है और मम्मी जी आह आह करते हुए अपनी गंद हिलाने लगती है,

इधर रोहित मम्मी जी की चूत की मस्त ठुकाई कर रहा था और उधर संध्या अपने पापा के मस्त लंड पर कूदने लगी थी, मेहता ने संध्या को खड़े होकर अपने लंड पर टांग लिया था और खूब कस-कस के अपनी बेटी की चूत मार रहा था, उस पूरा दिन मेहता ने अपनी बेटी की मस्त ठुकाई की और रोहित ने भी अपनी मम्मी जी की चूत मार-मार कर एक दम लाल कर देता है, रात को मेहता एक बार अपनी बीबी को चोद्ता है

और रोहित संध्या को उसके बाद रोहित और सासू जी एक साथ सोते है और संध्या अपने पापा के पास पूरी नंगी होकर सोने चली जाती है, रात भर संध्या की चूत उसके पापा मस्त तरीके से ठोकते है उधर रोहित भी अपनी सास की खूब तबीयत से चुदाई करता है,

अगले दिन रोहित और संध्या वहाँ से विदा लेकर अपने घर की ओर चल देते है जब घर पहुचते है तो पता चला बुआ जी सुबह ही अपने घर चली गई उनके यहाँ कुच्छ ज़रूरी काम निकल आया था

संध्या और रोहित घर पहुचते है और सामने से मंजू आ जाती है,

मंजू- मुस्कुराते हुए घूम आए दोनो, क्या बात है संध्या बहुत खुस नज़र आ रही है लगता है बहुत दिनो बाद अपने पापा से मिली है,

संध्या- मम्मी मज़ा तो बहुत आया पर रोहित को शायद मज़ा नही आया, क्यो रोहित

रोहित- नही मम्मी बहुत मज़ा आया पर आप कहाँ बन ठन के जा रही है,

मंजू- मैं तो कही नही जा रही हू बस आज नई साडी पहन कर सजने का मन किया तो पहन ली

संध्या- मम्मी कुछ भी कहो आज आप बहुत सुंदर लग रही है,

मंजू- अच्छा अब तारीफ बंद करो और रोहित देख तेरा मामा तेरा कब से इंतजार कर रहा है मेरे कमरे मे बैठा है,

संध्या- मम्मी पापा कहाँ गये है और संगीता भी नही नज़र आ रही है,

मंजू- बहू संगीता और तेरे पापा छत पर बैठे है तू जा कर कपड़े बदल ले मैं अभी पड़ोसी के यहाँ से आती हू,

मम्मी की बात सुन कर संध्या दबे पाँव छत की ओर चल दी और जब छत पर पहुच कर देखा तो पापा कुर्सी पर बैठे थे और संगीता को अपनी गोद मे बैठा कर उसकी मस्त ठोस चुचियो को मसल रहे थे, संध्या ने जानबूझ कर घुघाट कर लिया और अपने ब्लौज के दो बटन खोल कर सीधे पापा के सामने चली गई और उनके पेर च्छू लिए,

मनोहर- अरे संध्या तू कब आ गई बेटी

संगीता- वाह भाभी बड़े टाइम पर आई हो पापा अभी तुम्हारी ही बाते कर रहे थे,

मनोहर- संगीता जा हम तीनो के लिए चाइ बना ला यही बैठ कर चाइ पीते है तब तक मैं संध्या बेटी से कुछ बाते करना चाहता हू

संगीता- ठीक है पापा मैं अभी आती हू और संगीता वहाँ से नीचे चली जाती है,

मनोहर- संध्या का हाथ पकड़ अपने करीब खीच लेता है और उसे अपनी गोद मे बैठा कर उसके मोटे-मोटे दूध को सहलाते हुए, बहू तुम एक दिन के लिए क्या जाती हो तुम्हारे बिना मन ही नही लगता है,

संध्या- पापा मेरी भी तो यही हालत है मुझे भी आपकी बहुत याद सता रही थी,

मनोहर- अपने पापा से मिली, मेहता तो बहुत खुस हो गया होगा तुझे देख कर, तूने बताया नही उसे कि हम भी अपनी बहू को अपनी पॅल्को पर बैठा कर रखते है,

संध्या- हस्ते हुए पापा मैने यह नही कहा कि आप मुझे अपनी पॅल्को पर बैठा कर रखते है बल्कि मैने तो यह कहा कि आप तो हमे अपने .....

मनोहर- संध्या के दूध दबाता हुआ, बोलो- बोलो बहू तुमने क्या कहा अपने पापा से

संध्या- मनोहर के मोटे लंड को उसकी लूँगी से बाहर निकाल कर उसके सूपदे को खोलती हुई पापा हमने तो अपने पापा से यही कहा है कि मेरे ससुर तो मुझे दिन रात अपने मोटे लंड पर बैठाए रहते है,

मनोहर- संध्या के गालो को चूमता हुआ उसकी नाभि से नीचे हाथ लेजा कर उसकी साडी के अंदर हाथ डाल कर अपनी बहू की मस्त गुदाज चूत को अपने हाथो मे भर कर, बेटी फिर तुम्हारे पापा ने क्या कहा

संध्या- पापा ने कहा कि ऐसे ही अपने ससुर जी की सेवा करती रहना आज उन्ही के कारण तुम्हारी जिंदगी खुशहाल है

मनोहर- नही बेटी इसमे मेरा कोई हाथ नही है सब अपनी किस्मत का खाते है,

संध्या- नही पापा आपका वह एहसान कभी नही भुलाया जा सकता है, अगर आप मुझे नही बचाते तो मैं आज शायद जिंदा ही ना होती,

मनोहर- चलो छ्चोड़ो इन पुरानी बातो को और फिर मनोहर ने संध्या को सीधा करके उसकी साडी को उसकी मोटी गंद तक उठा दी और उसकी फूली हुई चूत जो उसकी पॅंटी मे कसी हुई थी को अपने मूह से दबा-दबा कर चूमने लगा और अपने दोनो हाथो से अपनी बहू के भारी चुतडो को सहलाने लगा,

संध्या- आह पापा आपकी इसी हरकत ने तो मेरी चूत मे पानी भरना शुरू कर दिया था तभी तो पहली मुलाकात मे ही आपका मोटा लंड मेरी चूत को फाड़ चुका था, पापा सच आपसे अपनी चूत मराने मे बहुत मज़ा आता है,

तभी संगीता दूसरी ओर से आते हुए, लीजिए गरमा-गरम चाइ का आनंद लीजिए और फिर संध्या और पापा दोनो को चाइ देकर संगीता भी वही बैठ कर चाइ पीने लगी,

संगीता- भाभी पापा तुम्हे कल से ही याद कर रहे थे कह रहे थे संध्या के बिना घर मे अच्छा नही लगता है, पापा अगर भाभी आपकी बहू ना होती बल्कि बेटी होती तब,

मनोहर- हस्ते हुए तब तू मेरी बहू होती और क्या,

संध्या- अरे संगीता पापा अपनी बहू और बेटी मे अंतर नही समझते है,

संगीता- अच्छा अभी पता चल जाएगा, अच्छा पापा बताओ भाभी ज़्यादा सुंदर है या मैं

पापा- बेटी औरतो की सुंदरता देखने के लिए उन्हे पूरी नंगी होना पड़ता है तभी तो मैं बता सकता हू कि कौन ज़्यादा सुंदर है,

संगीता- तो ठीक है और फिर संगीता जाकर छत का दरवाजा लगा कर आ जाती है और फिर अपने पापा के सामने अपनी स्कर्ट और शर्ट उतार कर ब्रा और पॅंटी मे पापा के पास खड़ी होकर उनका लंड सहलाते हुए देखो पापा अब मैं कैसी लग रही हू,

मनोहर- मुस्कुराते हुए संगीता की मोटी गंद को अपने हाथो से दबाते हुए बेटी अभी तेरी भाभी ने कहाँ कपड़े उतारे है तब संगीता ने झट से मेरी साडी को पकड़ कर खींच दिया और मैं एक बार गोल घूम गई और अब मैं ब्लॉज और पेटिकोट मे अपने ससुर के सामने खड़ी थी मेरी कसी हुई मोटी चुचिया ब्लौज फाड़ कर बाहर आने को मचल रही थी चूत तो पहले से ही गीली हो गई थी तभी संगीता ने मेरे पेटिकोट का नाडा भी खींच दिया और मेरा पेटिकोट देखते-देखते मेरे पेरो मे जा गिरा और मेरा गुदाज उठा हुआ पेट गहरी नाभि और मेरी पॅंटी के उपर से उभरी हुई चूत देख कर मेरे ससुर जी की आँखो मे चमक आ गई, हालाकी संगीता का बदन भी बहुत भरा हुआ और सेक्सी था लेकिन मैं थोड़ा ज़्यादा चुदी हुई थी इसलिए मेरे बदन पर थोड़ी चर्बी चढ़ जाने से मैं बहुत ही गुदाज और मस्त नज़र आने लगी थी,

पापा ने मुझे और संगीता की गंद को थाम कर अपने मूह की तरफ खींचा और पहले संगीता की चूत को उसकी पॅंटी के उपर से चूम लिया और फिर मेरी चूत को भी पॅंटी के उपर से चूमने लगे पापा ने मेरी चूत से अपने मूह को कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से दबा दिया और मैं सिहर उठी,

संगीता- अब बोलिए पापा कौन ज़्यादा सुंदर है

मनोहर- मुस्कुराते हुए, बेटी अभी तो तुम दोनो ने कपड़े पहने हुए है तभी संगीता ने थोड़ी दूर जाकर अपनी भारी गंद हमारी तरफ घूमाकर अपनी पॅंटी धीरे से नीचे सरकाना शुरू कर दिया वह जैसे-जैसे अपनी पॅंटी नीचे सरक रही थी वैसे ही वह अपनी गंद के छेद को भी फैला कर हमे दिखा रही थी उसकी गुलाबी गंद का छेद बहुत लपलपा रहा था और मैं पापा के लंड को सहला रही थी और पापा मेरी चूत और गंद को बुरी तरह दबा-दबा कर मज़ा ले रहे थे,

संगीता ने अपनी पॅंटी पूरी उतार दी और फिर झुक कर अपनी गंद और चूत के छेद को फैला-फैला कर मुझे और पापा को दिखाने लगी, फिर संगीता ने अपनी ब्रा का हुक्क खोल कर अपने मोटे-मोटे दूध को भी नंगा कर दिया और अपने हाथो से अपने दूध को दबाते हुए कहने लगी चलो भाभी अब तुम्हारी बारी है आ जाओ जल्दी से और फिर मैने जब पापा की ओर देखा तो उन्होने खुद ही मेरी पॅंटी उतार दी और मेरे नंगे चूतादो की दरार को उंगली से सहलाते हुए मुझे उधर जाने के लिए धकेल दिया मैं उनकी मंशा समझ गई और संगीता की ओर अपनी मोटी गंद हिलाते हुए जाने लगी पापा मेरी मोटी गंद को देख कर मस्त होने लगे,

जब मैं संगीता के पास पहुच गई तब मैं सीधी होकर खड़ी हुई तब मेरी चिकनी फूली चूत पापा के सामने आ गई मैने धीरे से अपनी चूत को सहलाते हुए अपनी ब्रा का हुक्क खोल कर उसे उतार दिया और इसके साथ ही मेरे मोटे-मोटे दूध जो की संगीता से भी काफ़ी बड़े थे एक दम से बाहर आ गये,

मैं अच्छी तरह जानती थी कि पापा को मेरा जिस्म संगीता से भी ज़्यादा अच्छा लगता है लेकिन मैं और पापा संगीता के सामने ऐसी कोई बात नही करते थे कि उसका मन छ्होटा हो,

संगीता- अब बोलिए भी पापा अब तो हम दोनो पूरी नंगी हो गई और फिर संगीता ने एक बार घूम कर अपनी गंद अपने पापा को दिखाई और फिर मुझे भी पकड़ कर एक बार घुमा कर मेरे चूतादो को फैला कर पापा को दिखाया,

मनोहर- मुस्कुराते हुए, भाई तुम दोनो ही हुस्न की परी हो तुम दोनो ही बहुत खुब्शुरत हो बस एक ही अंतर है तुम दोनो मे,

संगीता- वह क्या

क्रमशः......................

MAST GHODIYAN-15

gataank se aage........................

mehta sidhe sandhya ke doodh ko masal-masal kar lal kar raha tha

udhar mummy ji aur rohit ki neend ek sath khuli aur mummy ji jaise hi bathroom mai jakar muthne bethi rohit ne pichhe se jakar mummy ji ke bhari chutado ke beech se hath dal kar unki chut ko pakad liya, mummy ji ek dam se san rah gai lekin jab unhe rohit ke hone ka ehsas hua tab kuch normal hui, unhone kaha beta mut to lene do phir aaram se kar lena,

rohit - mummy ji aap muto na maine to bas apna hath laga rakaha hai mai to bas aap mutti jana aur mai appki chut ko sahlata jaunga bas,

mummy- si aaah bete aise peshab nahi aayega pani aayega,

rohit- mummy koshish karo tab tak mai aapke is lahsun ko ragdta hu,

mummy ji mutne ki koshish karne lagi aur phir ekdam se unhone ek tej dhar marna shuru kar di aur phir kya tha vah ruk-ruk kar mutne lagi aur rohit unki chut ko sahlata raha, mutne ke bad mummy ji ne sadi niche ki aur bister par aa gai, rohit mummy ji ki moti gand ko sahlate huye unki sadi puri kamar tak katke unki chut ko phaila leta hai chut se mut ki gandh sunghte hi rohit mummy ji ki chut ko paglo ki tarah chatne lagta hai

aur mummy ji aah bete aah rohit karte huye uska sar sahlane lagti hai, mummy ji ki chut phul ke kuppa ho jati hai aur unki gulabi suji hui chut ki phanko ko phaila-phaila kar rohit chusne lagta hai, kabhi vah bur ke dane ko chusta hai kabhi chut ke gulabi chhed ko chatta hai, uske bad rohit apna land gach se mummy ji ki chut mai pel deta hai aur mummy ji aah aah karte huye apni gand hilane lagti hai,

idhar rohit mummy ji ki chut ki mast thukai kar raha tha aur udhar sandhya apne papa ke mast land par kudne lagi thi, mehta ne sandhya ko khade hokar apne land par tang liya tha aur khub kas-kas ke apni beti ki chut mar raha tha, us pura din mehta ne apni beti ki mast thukai ki aur rohit ne bhi apni mummy ji ki chut mar-mar kar ek dam lal kar deta hai, rat ko mehta ek bar apni bibi ko chodta hai

aur rohit sandhya ko uske bad rohit aur sasu ji ek sath sote hai aur sandhya apne papa ke pas puri nangi hokar sone chali jati hai, rat bhar sandhya ki chut uske papa mast tarike se thokte hai udhar rohit bhi apni sas ki khub tabiyat se chudai karta hai,

agle din rohit aur sandhya vaha se vida lekar apne ghar ki aur chal dete hai jab ghar pahuchte hai to pata chala bua ji subah hi apne ghar chali gai unke yaha kuchh jaruri kam nikal aaya tha

sandhya aur rohit ghar pahuchte hai aur samne se manju aa jati hai,

manju- muskurate huye ghum aaye dono, kya bat hai sandhya bahut khus najar aa rahi hai lagta hai bahut dino bad apne papa se mili hai,

sandhya- mummy maza to bahut aaya par rohit ko sahyad maza nahi aaya, kyo rohit

rohit- nahi mummy bahut maza aaya par aap kaha ban than ke ja rahi hai,

manju- mai to kahi nahi ja rahi hu bas aaj nai sadi pahan kar sajne ka man kiya to pahan li

sandhya- mummy kuch bhi kaho aaj aap bahut sundar lag rahi hai,

manju- achcha ab tarif band karo aur rohit dekh tera mama tera kab se intjar kar raha hai mere kamre mai betha hai,

sandhya- mummy papa kaha gaye hai aur sangita bhi nahi najar aa rahi hai,

manju- bahu sangita aur tere papa chhat mai bethe hai tu ja kar kapde badal le mai abhi padosi ke yaha se aati hu,

mummy ki bat sun kar mai dabe panv chhat ki aur chal di aur jab maine chhat mai pahuch kar dekha to papa kursi par bethe the aur sangita ko apni god mai betha kar uski mast thos chuchiyo ko masal rahe the, maine janbujh kar ghughat kar liya aur apne blauj ke do button khol kar sidhe papa ke samne chali gai aur unke per chhu liye,

manohar- are sandhya tu kab aa gai beti

sangita- wah bhabhi bade time par aai ho papa abhi tumhari hi bate kar rahe the,

manohar- sangita ja hum tino ke liye chai bana la yahi beth kar chai pite hai tab tak mai sandhya beti se kuch bate karna chahta hu

sangita- thik hai papa mai abhi aati hu aur sangita vaha se niche chali jati hai,

manohar- sandhya ka hath pakad apne karib khich leta hai aur use apni god mai betha kar uske mote-mote doodh ko sahlate huye, bahu tum ek din ke liye kya jati ho tumhare bina man hi nahi lagta hai,

sandhya- papa meri bhi to yahi halat hai mujhe bhi aapki bahut yaad sata rahi thi,

manohar- apne papa se mili, mehta to bahut khus ho gaya hoga tujhe dekh kar, tune bataya nahi use ki hum bhi apni bahu ko apni palko par betha kar rakhte hai,

sandhya- haste huye papa maine yah nahi kaha ki aap mujhe apni palko par betha kar rakhte hai balki maine to yah kaha ki aap to hame apne .....

manohar- sandhya ke doodh dabata hua, bolo- bolo bahu tumne kya kaha apne papa se

sandhya- manohar ke mote land ko uski lungi se bahar nikal kar uske supade ko kholti hui papa hamne to apne papa se yahi kaha hai ki mere sasur to mujhe din rat apne mote land par bethaye rahte hai,

manohar- sandhya ke galo ko chumta hua uski nabhi se niche hath lejakar uski sadi ke andar hath dal kar apni bahu ki mast gudaj chut ko apne hantho mai bhar kar, beti phir tumhare papa ne kya kaha

sandhya- papa ne kaha ki aise hi apne sasur ji ki seva karti rahna aaj unhi ke karan tumharai jindagi khushal hai

manohar- nahi beti isme mera koi hath nahi hai sab apni kismat ka khate hai,

sandhya- nahi papa aapka vah ehsan kabhi nahi bhulaya ja sakta hai, agar aap mujhe nahi bachate to mai aaj shayad jinda hi na hoti,

manohar- chalo chhodo in purani bato ko aur phir manohar ne sandhya ko sidha karke uski sadi ko uski moti gand tak utha di aur uski phuli hui chut jo uski panty mai kasi hui thi ko apne muh se daba-daba kar chumne laga aur apne dono hantho se apni bahu ke bhari chutado ko sahlane laga,

sandhya- aah papa aapki isi harkat ne to meri chut mai pani bharna shuru kar diya tha tabhi to pahli mulakat mai hi aapka mota land meri chut ko fad chuka tha, papa sach aapse apni chut marane mai bahut maza aata hai,

tabhi sangita dusri aur se aate huye, lijiye garma-garam chai ka anand lijiye aur phir sandhya aur papa dono ko chai dekar sangita bhi vahi beth kar chai pine lagi,

sangita- bhabhi papa tumhe kal se hi yaad kar rahe the kah rahe the sandhya ke bina ghar mai achcha nahi lagta hai, papa agar bhabhi aapki bahu na hoti balki beti hoti tab,

manohar- hast huye tab tu meri bahu hoti aur kya,

sandhya- are sangita papa apni bahu aur beti mai antar nahi samjhte hai,

sangita- achcha abhi pata chal jayega, achcha papa batao bhabhi jyada sundar hai ya mai

papa- beti aurto ki sundarta dekhne ke liye unhe puri nangi hona padta hai tabhi to mai bata sakta hu ki kaun jyada sundar hai,

sangita- to thik hai aur phir sangita jakar chhat ka darwaja laga kar aa jati hai aur phir apne papa ke samne apni skirt aur shirt utar kar bra aur panty mai papa ke pass khadi hokar unka land sahlate huye dekho papa ab mai kaisi lag rahi hu,

manohar- muskurate huye sangita ki moti gand ko apne hantho se dabate huye beti abhi teri bhabhi ne kaha kapde utare hai tab sangita ne jhat se meri sadi ko pakad kar khinch diya aur mai ek bar gol ghum gai aur ab mai blauj aur petikot mai apne sasur ke samne khadi thi meri kasi hui moti chuchiya blauj fad kar bahar aane ko machal rahi thi chut to pahle se hi gili ho gai thi tabhi sangita ne mere petikot ka nada bhi khinch diya aur mera petikot dekhte-dekhte mere pero mai ja gira aur mera gudaj utha hua pet gahri nabhi aur meri panty ke upar se ubhari hui chut dekh kar mere sasur ji ki aankho mai chamak aa gai, halaki sangita ka badan bhi bahut bhara hua aur sexy tha lekin mai thoda thuki hui thi isliye mere badan par thodi charbi chadh jane se mai bahut hi gudaj aur mast najar aane lagi thi,

papa ne mujhe aur sangita ki gand ko tham kar apne muh ki taraf khincha aur pahle sangita ki chut ko uski panty ke upar se chum liya aur phir meri chut ko bhi panty ke upar se chumne lage papa ne meri chut se apne muh ko kuch jyada hi jor se daba diya aur mai sihar uthi,

sangita- ab boliye papa kaun jyada sundar hai

manohar- muskurate huye, beti abhi to tum dono ne kapde pahne huye hai tabhi sangita ne thodi dur jakar apni bhari gand hamari taraf ghumakar apni panty dhire se niche sarkana shuru kar diya vah jaise-jaise apni panty niche sarka rahi thi vaise hi vah apni gand ke chhed ko bhi phaila kar hame dikha rahi thi uski gulabi gand ka chhed bahut laplapa raha tha aur mai papa ke land ko sahla rahi thi aur papa meri chut aur gand ko buri tarah daba-daba kar maza le rahe the,

sangita ne apni panty puri utar di aur phir jhuk kar apni gand aur chut ke chhed ko phaila-phaila kar mujhe aur papa ki dikhane lagi, phir sangita ne apni bra ka huck khol kar apne mote-mote doodh ko bhi nanga kar diya aur apne hantho se apne doodh ko dabate huye kahne lagi chalo bhabhi ab tumhari bari hai aa jao jaldi se aur phir maine jab papa ki aur dekha to unhone khud hi meri panty utar di aur mere nange chutado ki darar mai ungli se sahlate huye mujhe udhar jane ke liye dhakel diya mai unki mansha samajh gai aur sangita ki aur apni moti gand hilate huye jane lagi papa meri moti gand ko dekh kar mast hone lage,

jab mai sangita ke pas pahuch gai tab mai sidhi hokar khadi hui tab meri chikni phuli chut papa ke samne aa gai maine dhire se apni chut ko sahlate huye apni bra ka huck khol kar use utar diya aur iske sath hi mere mote-mote doodh jo ki sangita se bhi kaphi bade the ek dam se bahar aa gaye,

mai achchi tarah janti thi ki papa ko mera jism sangita se bhi jyada achcha lagta hai lekin mai aur papa sangita ke samne aisi koi bat nahi karte the ki uska man chhota ho,

sangita- ab boliye bhi papa ab to hum dono puri nangi ho gai aur phir sangita ne ek bar ghum kar apni gand apne papa ko dikhai aur phir mujhe bhi pakad kar ek bar ghuma kar mere chutado ko phaila kar papa ko dikhaya,

manohar- muskurate huye, bhai tum dono hi husn ki pari ho tum dono hi bahut khubshurat ho bas ek hi antar hai tum dono mai,

sangita- vah kya

kramashah......................


rajaarkey
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Re: raj sharma stories मस्त घोड़ियाँ

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 13:09

मस्त घोड़ियाँ--16

गतान्क से आगे........................

मनोहर- यही की जब मैं तुम्हे चोदने का मन करता हू तो तुम्हे आगे से चोदने का मन होता है और जब संध्या को चोदने का मन करता है तो संध्या को पिछे से चोदने का मन होता है,

संगीता- इसका मतलब आप यह कहना चाहते है कि आपको मेरी चूत बहुत पसंद है और भाभी की मोटी गंद बहुत पसंद है,

मनोहर- हाँ बस ऐसा ही समझ लो, फिर क्या था हम दोनो धीरे से पापा के पास जाकर उनसे चिपक गई और पापा कभी मेरी गंद को सहलाते कभी मेरी चूत मे उंगली डाल कर हिलाते और कभी संगीता की चूत को सहलाने लगते,

हम दोनो घुटने के बल वही बैठ गई और पापा का मोटा लंड निकाल कर चूसने लगी, कभी मैं पापा का टोपा चुस्ती तो संगीता उनके गोते चूसने लगती और कभी मैं उनके गोटे सहलाती तब संगीता उनके लंड के फूले हुए सूपदे को चूसना शुरू कर देती,

पापा भी बारी-बारी से कभी मेरे दूध दबाते और कभी संगीता के दूध को मासल्न लगते थे, कुछ देर बाद पापा कुर्सी से खड़े हो गये और उनका मोटा लंड आसमान की ओर सर उठा कर खड़ा हो गया पापा ने हम दोनो की गंद पर थपकीया मारते हुए हमे घोड़ी बना कर झुका दिया और फिर पापा ने मेरी गंद और चूत को पागलो की तरह फैला-फैला कर चाटना शुरू कर दिया मैं एक दम मस्ती मे मस्त होने लगी और अपनी गंद पापा के मूह पर मारने लगी,

तभी पापा ने संगीता की चूत को अपने मूह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया, पापा संगीता की चूत चूस्ते हुए मेरी चूत मे तीन उंगलिया डाल कर आगे पिछे करने लगे उधर संगीता कुछ ज़्यादा ही रसीली हो रही थी और कह रही थी,

संगीता- ओह पापा चतो और चतो अपनी बेटी की चूत चाट-चाट कर लाल कर दो बहुत चुदासी बेटी है आपकी खूब चूसो आह आ आह आ

तभी पापा नीचे लेट गये और मेरी गंद को पकड़ कर अपने मूह पर रखने लगे और मैं अपनी दोनो जाँघो को खोल कर पापा के मूह के उपर अपनी चूत रख कर बैठ गई और पापा मेरी चूत को खूब फैला कर चाटने लगे, उधर संगीता पापा के लंड पर अपनी चूत रख कर धीरे-धीरे आँखे बंद करके बैठने लगी तभी पापा ने नीचे से एक कस कर धक्का संगीता की चूत मे मार दिया और संगीता आह करके धम से पापा के लंड पर बैठ गई और उसकी चूत मे पापा का पूरा लंड फस गया,

थोड़ी देर बाद मैं खड़ी हुई और अपना मूह संगीता की ओर करके वापस पापा के सीने पर बैठ गई पापा ने जैसे ही अपनी जीभ से मेरी मोटी गंद के छेद को सहलाया मैने संगीता के होंठो को अपने होंठो मे भर लिया संगीता भी मुझसे चिपक गई और मेरे मोटे-मोटे दूध को खूब कस-कस कर मसल्ने लगी मैने भी संगीता के दूध को खूब कस-कस कर निचोड़ा, पापा जितनी ज़ोर से मेरी गंद के सुराख मे अपनी जीभ रगड़ते मैं भी उतनी ही ज़ोर से संगीता के दूध को मसल्ने लगती,

उधर पापा अपनी कमर उठा-उठा कर संगीता की चूत जितनी ज़ोर से ठोकते संगीता उतना ही मुझसे चिपकने लगती,

मैने संगीता के निप्पल अपने मूह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया और पापा ने मेरी चूत के छेद मे अपनी जीभ घुसा कर रस चूसने लगे, अब पापा बड़ी तेज़ी से संगीता को चोद रहे थे और संगीता भी खूब ज़ोर-ज़ोर से पापा के लंड पर कूद रही थी इधर जितनी तेज़ी से पापा संगीता की चूत मार रहे थे उतनी ही तेज़ी से मेरी चूत को भी चूस रहे थे,

संगीता- ओह पापा और तेज खूब कस कर मारिए और मारिए हाँ ऐसे ही खूब चोदिये आह आह आ

इधर मैं भी पापा के मूह से अपनी चूत रगड़ते हुए ओह पापा खूब ज़ोर से चातिए खूब चुसिये अपनी बहू की चूत ओह ओह आह आ सी सी आह,

कुछ देर बाद संगीता ने पानी छ्चोड़ दिया और उधर पापा ने मेरी चूत का पानी भी चूस-चूस कर झाड़ा दिया, संगीता तो लुढ़क कर हफने लगी पर शायद पापा का पानी नही च्छुटा था और वह खड़े हो गये मैं समझ गई पापा जब तक मुझे नही चोद लेते उनका पानी नही निकलेगा, मैं बिना कुछ कहे सीधे घोड़ी बन गई और फिर

पापा ने मेरी चूत को खूब कस-कस कर ठोकना शुरू कर दिया,

पापा चूत मारने मे एकदम माहिर थे उन्होने मेरी गंद को सहलाते हुए मुझे खूब हुमच-हुमच कर चोदना शुरू कर दिया और मैं किसी कुतिया की तरह अपनी गंद उठाए उनका तगड़ा लंड गपगाप अपनी रसीली चूत मे ले रही थी और सीसीया रही थी ओह पापा और चोदो खूब कस कर चोदो आज फाड़ दो अपनी बहू की चूत आह आह आह

ओह ओह ओह पापा मैं गई और फिर पापा ने एक जबार्दुस्त धक्का मेरी चूत मे ऐसा मारा कि उनका मोटा लंड मेरी बच्चेदनि से टकरा गया और मैं वही पेट के बल लेट गई और पापा मेरी चूत मे जड़ तक अपने लंड को फसाए मेरी गंद के उपर लेट गये और हफने लगे, जब हम दोनो कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे तब संगीता को मस्ती सूझी और वह पापा के उपर आ कर पेट के बल उनसे चिपक कर लेट गई,

कुछ देर बाद मैने जब हरकत की तब पापा ने संगीता को उठा कर खुद भी मेरे उपर से उठ गये और फिर हम तीनो ने जल्दी से कपड़े पहने और नीचे आ गये,

मामा- क्यो भाई रोहित खूब ससुराल के माल का मज़ा ले रहे हो हमे नही बताओगे क्या-क्या हुआ वहाँ

रोहित- अरे मामा बस ये समझ लो हमारे यहाँ ससुराल के जो मज़े है वह दुनिया मे कही नही है बस मस्ती ही मस्ती छाई रहती है,

मामा- यार रोहित एक बात कहु अगर तू बुरा ना माने तो

रोहित- कहो मामा क्या बात है

मामा- रोहित संगीता को चोदने का वैसा मज़ा नही आ पाया जैसा मैं चाहता था बिल्कुल आराम से सारी रात उसे नंगी करके चोदने मे ही ज़्यादा मज़ा आएगा,

रोहित- अरे मामा तुम एक काम क्यो नही करते, मम्मी से बात करके संगीता को कुछ दिनो के लिए अपने घर ले जाओ और फिर 10-15 दिन तक जब तुम रोज संगीता की चूत मरोगे तब तुम्हारा मन भी भर जाएगा और सारी-सारी रात तुम उसे नंगी लेकर पड़े भी रहोगे,

मामा- वाह भान्जे क्या आइडिया दिया है तूने चल अभी दीदी से बात करते है तभी सामने से मंजू आ जाती है,

मंजू- क्या बात करना है भाई दीदी से

मामा- अरे दीदी मैं तो यह कहना चाहता था कि संगीता की मामी कह रही थी कि कुछ दिनो के लिए संगीता को अपने यहाँ लेकर आ जाओ वह भी अपने मामा मामी का घर देख लेगी,

मंजू- अरे तो इसमे तुझे मेरी पर्मिशन की क्या ज़रूरत है तेरी बेटी है जब चाहे ले जा,

मामा- ठीक है दीदी तुम संगीता को कह देना कल तैयार हो जाएगी मैं कल घर जा रहा हू

मंजू- अरे इतनी जल्दी क्या है अभी तुझे आए दिन ही कितने हुए है,

मामा- नही दीदी वहाँ बड़ा काम पड़ा है और घर पर देखभाल करने वाला भी कोई नही है,

अगले दिन संगीता अपने मामा के साथ उनके यहा चली जाती है और घर मे रोहित संध्या और मंजू और मनोहर रह जाते है,

शाम को संध्या और रोहित बालकनी मे खड़े थे रोहित संध्या के दूध दबाता हुआ नीचे से जाती हुई औरतो की गंद देख रहा था और संध्या से उनके बारे मे बाते कर रहा था,

रोहित- देखो संध्या उस औरत की गंद कितनी मोटी है

संध्या- हाँ बिल्कुल मम्मी जी की गंद की तरह लग रही है,

रोहित- संध्या- अभी तक मम्मी को चोदने की इच्छा मन मे ही है तुम कुछ आइडिया क्यो नही बताती हो

संध्या- लगता है मुझे कुछ करना ही पड़ेगा, खेर तुम चिंता मत करो और मैं जैसा कहती हू वैसा ही करना हो सकता है आज रात को ही तुम्हे अपनी मम्मी की चूत और गंद को चोदने का मोका मिल जाए पर जब तुम मम्मी को चोदोगे तब मैं क्या करूँगी,

रोहित- मेरी रानी तुम काफ़ी होशियार हो मैं जानता हू जिस दिन मैं मम्मी की चूत और गंद को चोद रहा होऊँगा उस दिन तुम भी पापा के मोटे लंड से खूब अपनी चूत मरवा रही होगी,

संध्या- सच रोहित पापा से चुदने मे एक अलग ही मज़ा आता है, उनका लंड भी बड़ा मस्त है

रोहित- तुम्हे तो कम से कम यह तो पता है कि पापा से चुदने मे कितना मज़ा आता है पर मुझे तो यह भी नही पता की जब मैं अपनी मम्मी को चोदुन्गा तो कितना मज़ा आएगा,

संध्या- चलो आज तुम्हारी इच्छा पूरी कर देती हू लेकिन जैसा मैं कह रही हू वैसा ही करना और फिर संध्या और रोहित वहाँ से अंदर आ जाते है, रात को 9 बजे पापा टीवी के सामने बैठे थे और संध्या उनके पास जाकर बैठ जाती है उधर मंजू अपने रूम मे थी और रोहित अपने रूम से संध्या और पापा को देख रहा था,

संध्या- पापा

मनोहर- हाँ बहू बोलो क्या बात है

संध्या- पापा मुझे दारू पीना है

मनोहर- संध्या को हैरत भरी निगाहो से देखता हुआ, क्या बात कर रही हो बेटी,

संध्या- पापा आज बहुत मन कर रहा है कम से कम बीआर ही पीला दो,

मनोहर- लेकिन बेटी रोहित देखेगा तो क्या बोलेगा, आप फिकर ना करो एक बोत्तेल उनके लिए भी मॅंगा लीजिए ना मैं उन्हे अंदर देकर आ जाउन्गि वह पी लेंगे फिर मैं आपके पास आकर आपके साथ पीना चाहती हू,

मनोहर- लेकिन मंजू ने कुछ कहा तो

संध्या- तो आप मम्मी को कोल्ड्ड्रिंक मे बियर मिला कर उनको भी पिला दीजिए ना,

मनोहर- बहू आज तुम किसी अलग मूड मे लग रही हो क्या बात है साफ-साफ बताओ,

संध्या- पापा मैं चाहती हू आज आप मेरे सामने मम्मी को पूरी नंगी करके चोदिये और फिर उसके बाद आप मुझे मम्मी के सामने पूरी नंगी करके चोदिये, होश मे शायद मम्मी शरमाने लगे इसलिए मैं यह सब कह रही हू,

मनोहर- मुस्कुरकर संध्या की मोटी गंद को सहलाते हुए, एक शर्त पर मैं यह सब कर सकता हू

संध्या- मुझे आपकी सभी शर्त मंजूर है

मनोहर- पहले शर्त तो सुन लो बाद मे कही पलट गई तो

संध्या- मुझे पता है आपकी शर्त, आप आज रात को मेरी गंद मारना चाहते हो ना,

मनोहर- आश्चर्या से संध्या को देखता हुआ, तुम्हे कैसे पता मैं यही शर्त कहने वाला हू

संध्या- पापा उपर वाला भी एक जैसे विचारो वाले लोगो को जल्द ही मिलवा देता है चाहे हिन्दी सेक्सी कहानियाँ के थ्रू ही क्यो ना मिलवाए,

मनोहर- पर बेटी रोहित का क्या करेगे,

संध्या- अरे पापा रोहित भी मम्मी जी को चोद लेगा, हम चारो मिल कर मज़ा लेंगे

मनोहर- पर बेटी यह कैसे संभव है रोहित क्या अपनी मम्मी को चोदेगा

संध्या- क्यो नही पापा जब आप रोहित की बीबी को चोद सकते हो तो रोहित आपकी बीबी को क्यो नही चोद सकता है,

मनोहर मुस्कुराते हुए ठीक है लेकिन यह सब के लिए बियर का नशा काफ़ी नही रहेगा, तो फिर आप क्या लेकर आओगे,

मनोहर- बेटी इसके लिए तो आज मुझे वोद्का लेकर आना पड़ेगी लेकिन ध्यान रखना मंजू को भनक ना लगे कि कोल्ड्ड्रिंक मे वोद्का है,

क्रमशः......................

MAST GHODIYAN--16

gataank se aage........................

manohar- yahi ki jab mai tumhe chodne ka man karta hu to tumhe aage se chodne ka man hota hai aur jab sandhya ko chodne ka man karta hai to sandhya ko pichhe se chodne ka man hota hai,

sangita- iska matlab aap yah kahna chahte hai ki aapko meri chut bahut pasand hai aur bhabhi ki moti gand bahut pasand hai,

manohar- ha bas aisa hi samajh lo, phir kya tha hum dono dhire se papa ke pas jakar unse chipak gai aur papa kabhi meri gand ko sahlate kabhi meri chut mai ungli dal kar hilate aur kabhi sangita ki chut ko sahlane lagte,

hum dono ghutne ke bal vahi beth gai aur papa ka mota land nikal kar chusne lagi, kabhi mai papa ka topa chusti to sangita unke gote chusne lagti aur kabhi mai unke gote sahlati tab sangita unke land ke phule huye supade ko chusna shuru kar deti,

papa bhi bari-bari se kabhi mere doodh dabate aur kabhi sangita ke doodh ko masalne lagte the, kuch der bad papa kursi se khade ho gaye aur unka mota land aasman ki aur sar utha kar khada ho gaya papa ne hum dono ki gand mai thapkiya marte huye hame ghodi bana kar jhuka diya aur phir papa ne meri gand aur chut ko paglo ki tarah phaila-phaila kar chatna shuru kar diya mai ek dam masti mai mast hone lagi aur apni gand papa ke muh mai marne lagi,

tabhi papa ne sangita ki chut ko apne muh mai bhar kar chusna shuru kar diya, papa sangita ki chut chuste huye meri chut mai teen ungliya dal kar aage pichhe karne lage udhar sangita kuch jyada hi rasili ho rahi thi aur kah rahi thi,

sangita- oh papa chato aur chato apni beti ki chut chat-chat kar lal kar do bahut chudasi beti hai aapki khub chuso aah aah aah aah

tabhi papa niche let gaye aur meri gand ko pakad kar apne muh mai rakhne lage aur mai apni dono jangho ko khol kar papa ke muh ke upar apni chut rakh kar beth gai aur papa meri chut ko khub phaila kar chatne lage, udhar sangita papa ke land par apni chut rakh kar dhire-dhire aankhe band karke bethne lagi tabhi papa ne niche se ek kas kar dhakka sangita ki chut mai mar diya aur sangita aah karke dham se papa ke land par beth gai aur uski chut mai papa ka pura land fas gaya,

thodi der bad mai khadi hui aur apna muh sangita ki aur karke vapas papa ke sine par beth gai papa ne jaise hi apni jeebh se meri moti gand ke chhed ko sahlaya maine sangita ke hontho ko apne hontho mai bhar liya sangita bhi mujhse chipak gai aur mere mote-mote doodh ko khub kas-kas kar masalne lagi maine bhi sangita ke doodh ko khub kas-kas kar nichoda, papa jitni jor se meri gand ke surakh mai apni jeebh ragadte mai bhi utni hi jor se sangita ke doodh ko masalne lagti,

udhar papa apni kamar utha-utha kar sangita ki chut jitni jor se thokte sangita utna hi mujhse chipakne lagti,

maine sangita ke nippal apne muh mai bhar kar chusna shuru kar diya aur papa ne meri chut ke chhed mai apni jeebh ghusa kar ras chusne lage, ab papa badi teji se sangita ko chod rahe the aur sangita bhi khub jor-jor se papa ke land par kud rahi thi idhar jitni teji se papa sangita ki chut mar rahe the utni hi teji se meri chut ko bhi chus rahe the,

sangita- oh papa aur tej khub kas kar mariye aur mariye ha aise hi khub chodiye aah aah aah

idhar mai bhi papa ke muh se apni chut ragadte huye oh papa khub jor se chatiye khub chusiye apni bahu ki chut oh oh aah aah si si ah,

kuch der bad sangita ne pani chhod diya aur udhar papa ne meri chut ka pani bhi chus-chus kar jhada diya, sangita to ludhak kar hafne lagi par shayad papa ka pani nahi chhuta tha aur vah khade ho gaye mai samajh gai papa jab tak mujhe nahi chod lete unka pani nahi niklega, maine bina kuch kahe sidhe ghodi ban gai aur phir

papa ne meri chut ko khub kas-kas kar thokna shuru kar diya,

papa chut marne mai ekdam mahir the unhone meri gand ko sahlate huye mujhe khub humach-humach kar chodna shuru kar diya aur mai kisi kutiya ki tarah apni gand uthaye unka tagda land gapagap apni rasili chut mai le rahi thi aur sisiya rahi thi oh papa aur chodo khub kas kar chodo aaj fad do apni bahu ki chut aah aah aah

oh oh oh papa mai gai aur phir papa ne ek jabardust dhakka meri chut mai aisa mara ki unka mota land meri bachchedani se takra gaya aur mai vahi pet ke bal let gai aur papa meri chut mai jad tak apne land ko phasaye meri gand ke upar let gaye aur hafne lage, jab hum dono kuch der aise hi pade rahe tab sangita ko masti sujhi aur vah papa ke upar aa kar pet ke bal unse chipak kar let gai,

kuch der bad maine jab harkat ki tab papa ne sangita ko utha kar khud bhi mere upar se uth gaye aur phir hum teeno ne jaldi se kapde pahne aur niche aa gaye,

mama- kyo bhai rohit khub sasural ke mal ka maza le rahe ho hame nahi bataoge kya-kya hua vaha

rohit- are mama bas ye samajh lo hamare yaha sasural ke jo maje hai vah duniya mai kahi nahi hai bas masti hi masti chhai rahti hai,

mama- yaar rohit ek bat kahu agar tu bura na mane to

rohit- kaho mama kya bat hai

mama- rohit sangita ko chodne ka vaisa maza nahi aa paya jaisa mai chahta tha bilkul aaram se sari rat use nangi karke chodne mai hi jyada maza aayega,

rohit- are mama tum ek kam kyo nahi karte, mummy se bat karke sangita ko kuch dino ke liye apne ghar le jao aur phir 10-15 din tak jab tum roj sangita ki chut maroge tab tumhara man bhi bhar jayega aur sari-sari rat tum use nangi lekar pade bhi rahoge,

mama- wah bhanje kya idea diya hai tune chal abhi didi se bat karte hai tabhi samne se manju aa jati hai,

manju- kya bat karna hai bhai didi se

mama- are didi mai to yah kahna chahta tha ki sangita ki mami kah rahi thi ki kuch dino ke liye sangita ko apne yaha lekar aa jao vah bhi apne mama mami ka ghar dekh legi,

manju- are to isme tujhe meri permission ki kya jarurat hai teri beti hai jab chahe le ja,

mama- thik hai didi tum sangita ko kah dena kal taiyar ho jayegi mai kal ghar ja raha hu

manju- are itni jaldi kya hai abhi tujhe aaye din hi kitne huye hai,

mama- nahi didi vaha bada kam pada hai aur ghar par dekhbhal karne wala bhi koi nahi hai,

agle din sangita apne mama ke sath unke yaha chali jati hai aur ghar mai rohit sandhya aur manju aur manohar rah jate hai,

sham ko sandhya aur rohit balkani mai khade the rohit sandhya ke doodh dabata hua niche se jati hui aurto ki gand dekh raha tha aur sandhya se unke bare mai bate kar raha tha,

rohit- dekho sandhya us aurat ki gand kitni moti hai

sandhya- ha bilkul mummy ji ki gand ki tarah lag rahi hai,

rohit- sandhya- abhi tak mummy ko chodne ki ichcha man mai hi hai tum kuch idea kyo nahi batati ho

sandhya- lagta hai mujhe kuch karna hi padega, kher tum chinta mat karo aur mai jaisa kahti hu vaisa hi karna ho sakta hai aaj rat ko hi tumhe apni mummy ki chut aur gand ko chodne ka moka mil jaye par jab tum mummy ko chodege tab mai kya karungi,

rohit- meri rani tum kaphi hoshiyar ho mai janta hu jis din mai mummy ki chut aur gand ko chod raha hounga us din tum bhi papa ke mote land se khub apni chut marwa rahi hogi,

sandhya- sach rohit papa se chudne mai ek alag hi maza aata hai, unka land bhi bada mast hai

rohit- tumhe to kam se kam yah to pata hai ki papa se chudne mai kitna maza aata hai par mujhe to yah bhi nahi pata ki jab mai apni mummy ko chodunga to kitna maza aayega,

sandhya- chalo aaj tumhari ichcha puri kar deti hu lekin jaisa mai kah rahi hu vaisa hi karna aur phir sandhya aur rohit vaha se andar aa jate hai, rat ko 9 baje papa tv ke samne bethe the aur sandhya unke pas jakar beth jati hai udhar manju apne room mai thi aur rohit apne room se sandhya aur papa ko dekh raha tha,

sandhya- papa

manohar- ha bahu bolo kya bat hai

sandhya- papa mujhe daru pina hai

manohar- sandhya ko hairat bhari nigaho se dekhta hua, kya bat kar rahi ho beti,

sandhya- papa aaj bahut man kar raha hai kam se kam beear hi pila do,

manohar- lekin beti rohit dekhega to kya bolega, aap fikar na karo ek bottel unke liye bhi manga lijiye na mai unhe andar dekar aa jaungi vah pi lenge phir mai aapke pas aakar aapke sath pina chahti hu,

manohar- lekin manju ne kuch kaha to

sandhya- to aap mummy ko colddrink mai beer mila kar unko bhi pila dijiye na,

manohar- bahu aaj tum kisi alag mood mai lag rahi ho kya bat hai saf-saf batao,

sandhya- papa mai chahti hu aaj aap mere samne mummy ko puri nangi karke chodiye aur phir uske bad aap mujhe mummy ke samne puri nangi karke chodiye, hosh mai shayad mummy sharmane lage isliye mai yah sab kah rahi hu,

manohar- muskurakar sandhya ki moti gand ko sahlate huye, ek shirt par mai yah sab kar sakta hu

sandhya- mujhe aapki sabhi shirt manjur hai

manohar- pahle shirt to sun lo bad mai kahi palat gai to

sandhya- mujhe pata hai aapki shirt, aap aaj rat ko meri gand marna chahte ho na,

manohar- ashcharya se sandhya ko dekhta hua, tumhe kaise pata mai yahi shirt kahne wala hu

sandhya- papa upar wala bhi ek jaise vicharo wale logo ko jald hi milwa deta hai chahe exbii ke through hi kyo na milwaye,

manohar- par beti rohit ka kya karege,

sandhya- are papa rohit bhi mummy ji ko chod lega, hum charo mil kar maza lenge

manohar- par beti yah kaise sambhav hai rohit kya apni mummy ko chodega

sandhya- kyo nahi papa jab aap rohit ki bibi ko chod sakte ho to rohit aapki bibi ko kyo nahi chod sakta hai,

manohar muskurate huye thik hai lekin yah sab ke liye beer ka nasha kaphi nahi rahega, to phir aap kya lekar aaoge,

manohar- beti iske liye to aaj mujhe vodka lekar aana padegi lekin dhyan rakhna manju ko bhanak na lage ki colddrink mai vodka hai,

kramashah......................

rajaarkey
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Re: raj sharma stories मस्त घोड़ियाँ

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 13:13

मस्त घोड़ियाँ--17

गतान्क से आगे........................

संध्या- आप फिकर ना करो पापा मैं सब संभाल लूँगी और फिर संध्या वहाँ से उठ कर अपने रूम मे आ जाती है,

रोहित अपनी बीबी की प्लॅनिंग से खुस हो जाता है और संध्या के आते ही उसके होंठो को चूम कर उसकी मोटी गंद पर थप्पड़ मारते हुए मुस्कुरकर वाकई रानी तुम कमाल की प्लॅनिंग करती हो,

संध्या- चलो अपना लंड बाहर निकालो आज मैं इसकी सरसो के तेल से अच्छी मालिश कर देती हू आख़िर आज यह अपनी मम्मी की मोटी गंद को और फूली चूत को जो फाड़ने वाला है और फिर संध्या रोहित के खड़े मोटे लंड को तेल से नहलकर उसकी मालिश करने लगती है, और उसे रात की प्लॅनिंग बताने लगती है,

रोहित सारी बाते ध्यान से समझ कर संध्या की प्लॅनिंग की तारीफ करते हुए उसे चूम लेता है तभी बाहर से पापा की आवाज़ आती है अरे संध्या बेटी ज़रा यहाँ आना और संध्या अपने तेल से भीगे हाथ को ऐसे ही लेकर पापा के पास पहुच जाती है और

संध्या- क्या बात है पापा

मनोहर- अरे यह तेरे हाथ मे इतना तेल कैसे लगा रखा है

संध्या- कुछ नही बस सोचा आपके मोटे लंड पर थोड़ा तेल लगा दू आख़िर आज आप अपनी बहू की मोटी गंद जो मारने वाले हो और फिर संध्या पापा के लंड पर तेल मलने लगती है और अपने रूम की ओर मुस्कुरकर देखती है और रोहित भी उसकी छीनल्पने को देख कर मुस्कुरा देता है,

शाम को पापा शराब लेने के लिए चले गये और मैं और मम्मी छत पर खड़ी होकर रोड का नज़ारा लेने लगी

मंजू- क्यो संध्या तूने बताया नही अपने पापा के यहाँ तूने और रोहित ने कितने मज़े मारे थे, मुझे तो तब

पता चला जब इन्होने मुझे बताया, अपने ससुर को तो झट से बता देती है पर मुझे बताने मे तुझे शर्म

आती है क्या,

संध्या- अरे नही मम्मी ऐसी बात नही है बस मुझे मोका ही नही लगा नही तो क्या मैं आपसे ऐसी बाते

छुपाटी,

मंजू- अच्छा तो यह बता क्या तेरे पापा ने तुझे खूब चोदा था,

मम्मी के सवाल को सुन कर मैं समझ गई कि आज मेरी रंडी सास खूब चुदासी लग रही है आज साली को इतना गरम

कर देती हू कि यही खड़ी-खड़ी मूतने लगे,

संध्या- हाँ मम्मी मेरे जाते ही पापा ने मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे मोटे-मोटे दूध को खूब

कस-कस कर दबाने लगे और मेरे होंठो को चूमने लगे,

मंजू- फिर तूने क्या किया

संध्या- मैने मम्मी झट से पापा का लूँगी मे खड़ा मोटा लंड अपने हाथो मे पकड़ कर दबोच लिया

मंजू- क्या खूब मोटा है तेरे पापा का लंड

मैने मम्मी का हाथ पकड़ कर कहा मम्मी पहले मेरी चूत मे हाथ डाल कर उसे सहलाती जाओ तब मैं आपको

सारी बात बता देती हू, मम्मी ने तुरंत अपने हाथ को मेरी साडी मे डाल कर मेरी फूली चूत को अपनी मुट्ठी मे

भर लिया और दबाते हुए कहने लगी,

मंजू- फिर क्या हुआ संध्या बता ना

संध्या- फिर क्या था मम्मी, पापा मेरे चूतादो को खूब कस-कस कर दबाने और मसल्ने लगे

मंजू- सच संध्या तेरे चूतड़ पहले से काफ़ी मोटे हो गये है तेरे पापा को तो तेरी मोटी गंद दबोचने मे

मज़ा आ गया होगा,

संध्या- हाँ मम्मी मैने झट से पापा के मोटे लंड को अपने मूह मे भर कर चूसना चालू कर दिया,

मंजू- और रोहित क्या कर रहा था

संध्या- रोहित मेरी मम्मी की मोटी गंद को खूब कस-कस कर मसल रहा था

मंजू- क्या रोहित को तेरी मम्मी की गंद बहुत पसंद है

संध्या- हाँ मम्मी रोहित ने मम्मी को वही झुका दिया और उनकी साडी उनकी गंद से उठा कर उनकी पॅंटी उतार दी

और फिर रोहित ने कम से कम आधे घंटे तक मम्मी की गोरी-गोरी मोटी गंद को चाट-चाट कर लाल कर दिया,

सच मम्मी रोहित बहुत मस्त तरीके से चूत और गंद चाट्ता है और मोटी-मोटी गंद का तो वह दीवाना है उसे

औरतो के भारी चूतड़ बहुत अच्छे लगते है तभी तो वह दिन रात बस आपकी गंद चोदने के बारे मे सोचता है

मंजू- क्या रोहित को मेरी गंद बहुत अच्छी लगती है

मैने मम्मी की बात सुन कर उनकी साडी के अंदर हाथ डाल कर उनकी चूत को जैसे ही दबोचा ढेर सारा पानी मेरे

हाथो मे लग गया और मैं समझ गई साली पूरी भीग चुकी थी,

संध्या- हाँ मम्मी रोहित तो आपको पूरी नंगी करके चोदना चाहता है

मंजू- क्या उसने तुझसे ऐसा कहा है कि वह मुझे पूरी नंगी करके चोदना चाहता है

संध्या- हाँ मम्मी वह तो कई बार मुझे अपनी मम्मी बना कर भी मेरी गंद मारते है

मंजू- खूब मोटा लंड है ना रोहित का खूब मज़ा आता होगा ना तुझे

संध्या- हाँ मम्मी जब रोहित का मोटा लंड मेरी गंद मे जाता है तो ऐसा लगता है कि रोहित खूब कस-कस कर

अपने लंड को मेरी गंद मे मारे और मुझे खूब रगड़-रगड़ कर चोदे और फिर मैने मम्मी के मोटे-मोटे

दूध को दबाते हुए एक हाथ से मम्मी की गुदा सहलाते हुए कहा मम्मी जब रोहित का मोटा लंड आपकी मोटी

गंद मे जाएगा तब देखना आप मस्त हो जाओगी और खुद ही रोहित से कहोगी की ठोंक बेटा खूब कस-कस कर मार

अपनी मम्मी की मोटी गंद अपने मोटे लंड से मम्मी मेरी बात सुन कर मुझसे बुरी तरह चिपक गई और मैने

मम्मी के होंठो को अपने मूह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया और फिर मैने मम्मी से कहा

संध्या- बोलो मम्मी अपने बेटे का मोटा लंड अपनी इस भारी गंद मे घुसाने का मन कर रहा है ना और फिर

मैने मम्मी की मोटी गंद को कस कर दबोच लिया

मंजू- आह आह हाँ हाँ बेटी मेरा दिल कर रहा है कि रोहित अभी मुझे खूब रगड़-रगड़ कर चोदे मेरी चूत और

गंद अपने मूसल से फाड़ कर रख दे,

मैने मम्मी की चूत मे फिर से अपना हाथ डाल कर मम्मी से कहा बोलो मम्मी चुद्वओगि अपने बेटे से और

फिर मैने अपनी उंगली मम्मी की चूत मे भर दी और मम्मी मुझसे पागलो की तरह लिपट गई और मुझे चूमते

हुए कहने लगी

मंजू- हाय संध्या एक बार मेरी चूत मे रोहित का लंड डलवा दे अया आ आ ओह संध्या

मैने मम्मी की चूत मे तीन उंगलिया डाल कर खूब ज़ोर से उनकी चूत मे आगे धकेलने लगी और मम्मी ने अपनी

टाँगे और चौड़ी कर ली, मैं बड़े आराम से मम्मी की चूत मे उंगली डालने लगी और मम्मी सीसियाते हुए कहने

लगी संध्या बता ना कब मेरी चूत मे तू रोहित का लंड डालेगी, कब मेरा बेटा अपनी मम्मी को पूरी नंगी करके

उसकी चूत मे अपना लंड डालेगा,

संध्या-मम्मी अभी आपको रोहित से चुदवा दूँगी पर आपको भी मेरी एक इक्च्छा पूरी करनी होगी

मंजू- कौन सी इक्च्छा

संध्या- मेरा दिल करता है कि एक बार आप और पापा दोनो मिलकर मुझे चोदो

मंजू- क्यो नही बेटी आज रात तू हमारे रूम मे आ जाना और मेरे और अपने पापा के बीच मे सोना फिर देखना

हम दोनो मिलकर तुझे पूरी तरह मस्त कर देगे

संध्या- नही मम्मी आपके रूम मे नही बल्कि बैठक वाले रूम मे जहाँ से रोहित भी हमे अपने रूम से

देख सके, आप नही जानती रोहित आपको पूरी नंगी देखने के लिए मरा जा रहा है इसलिए आज आप उसे अपनी मोटी

गंद खूब उठा -उठा कर दिखना फिर देखना वह आपकी गंद देख कर आपको नंगी ही उठा कर अपने बेड पर ले

जाएगा और खूब कस-कस कर चोदेगा,

रात को पापा सोफे पर बैठे टीवी देख रहे थे और मैं उनके पास जाकर बैठ गई रोहित पूरा नंगा होकर अपने रूम

से हमे देख रहा था, तभी सामने से मम्मी आ गई मम्मी ने मेकप किया हुआ था और बहुत सेक्सी लग रही

थी वह जैसे ही पापा के पास आ कर खड़ी हुई पापा ने मम्मी की चिकनी कमर को थाम कर उन्हे अपनी गोद मे

खींच कर बैठा लिया और उनके मोटे-मोटे दूध को खूब कस कर दबा दिया,

मंजू- हस्ते हुए अरे छ्चोड़ो ना क्या कर रहे हो सामने बहू बैठी है,

मनोहर- अरे मेरी रानी बहू भी जानती है कि आज तुम्हारी चूत से बहुत पानी आ रहा है खूब मोटा लंड लेने का

मन कर रहा है ना,

मंजू- मुस्कुराते हुए, छ्चोड़िए भी संध्या क्या सोच रही होगी

मनोहर- अरे संध्या से क्यो शर्मा रही हो, लो मैं अभी तुम्हारी शरम दूर कर देता हू और फिर पापा ने

मुझे भी अपनी गोद मे खींच कर बैठा लिया अब पापा एक हाथ से मम्मी के दूध मसल रहे थे और दूसरे

हाथ से मेरे दूध मसल रहे थे,

मंजू- बहुत बेशरम हो तुम, मैं जा रही हू सोने,

संध्या- मम्मी ज़रा बैठिए तो सही मैं अभी कुच्छ खाने पीने के लिए लेकर आती हू और फिर मैं सीधे रोहित के

पास गई और सभी के लिए लार्ज ग्लास ड्रिंक बना कर ले आई, पहले पापा ने एक ग्लास उठा कर एक ही घुट मे ख़तम

कर दिया फिर पापा ने दूसरा ग्लास उठा कर मम्मी के गालो को चूमते हुए कहा ले रानी यह सोमरास पी ले फिर आज

तुझे मस्ती से चोदुन्गा,

मम्मी मेरी ओर देख रही थी और मैने इशारे से उन्हे पीने के लिए कहा और फिर मम्मी पूरा ग्लास पी गई और

मम्मी के चेहरे पर एक मस्ती सी दिखाई देने लगी,

संध्या- पापा मुझे भी अपने हाथो से पिला दो ना

मंजू - बहू तू अपने पति के हाथ से पी

संध्या- नही मम्मी मुझे तो पापा के हाथो से ही पीने मे मज़ा आता है,

क्रमशः......................

MAST GHODIYAN--17

gataank se aage........................

sandhya- aap fikar na karo papa mai sab sambhal lungi aur phir sandhya vaha se uth kar apne room mai aa jati hai,

rohit apni bibi ki planning se khus ho jata hai aur sandhya ke aate hi uske hontho ko chum kar uski moti gand par thappad marte huye muskurakar wakai rani tum kamal ki planning karti ho,

sandhya- chalo apna land bahar nikalo aaj mai iski sarso ke tel se achchi malish kar deti hu aakhir aaj yah apni mummy ki moti gand ko aur phuli chut ko jo phadne wala hai aur phir sandhya rohit ke khade mote land ko tel se nahlakar uski malish karne lagti hai, aur use rat ki planning batane lagti hai,

rohit sari bate dhyan se samajh kar sandhya ki planning ki tarif karte huye use chum leta hai tabhi bahar se papa ki aawaj aati hai are sandhya beti jara yaha aana aur sandhya apne tel se bhige hath ko aise hi lekar papa ke pass pahuch jati hai aur

sandhya- kya bat hai papa

manohar- are yah tere hath mai itna tel kaise laga rakha hai

sandhya- kuch nahi bas socha aapke mote land par thoda tel laga du aakhir aaj aap apni bahu ki moti gand jo marne wale ho aur phir sandhya papa ke land par tel malne lagti hai aur apne room ki aur muskurakar dekhti hai aur rohit bhi uski chinalpane ko dekh kar muskura deta hai,

sham ko papa sharab lene ke liye chale gaye aur mai aur mummy chhat par khadi hokar road ka najara lene lagi

manju- kyo sandhya tune bataya nahi apne papa ke yaha tune aur rohit ne kitne maze mare the, mujhe to tab

pata chala jab inhone mujhe bataya, apne sasur ko to jhat se bata deti hai par mujhe batane mai tujhe sharm

aati hai kya,

sandhya- are nahi mummy aisi bat nahi hai bas mujhe moka hi nahi laga nahi to kya mai aapse aisi bate

chhupati,

manju- achcha to yah bata kya tere papa ne tujhe khub choda tha,

mummy ke sawal ko sun kar mai samajh gai ki aaj meri randi sas khub chudasi lag rahi hai aaj sali ko itna garam

kar deti hu ki yahi khadi-khadi mutne lage,

sandhya- ha mummy mere jate hi papa ne mujhe apne sine se laga liya aur mere mote-mote doodh ko khub

kas-kas kar dabane lage aur mere hontho ko chumne lage,

manju- phir tune kya kiya

sandhya- maine mummy jhat se papa ka lungi mai khada mota land apne hantho mai pakad kar daboch liya

manju- kya khub mota hai tere papa ka land

maine mummy ka hath pakad kar kaha mummy pahle meri chut mai hath dal kar use sahlati jao tab mai aapko

sari bat bata deti hu, mummy ne turant apne hath ko meri sadi mai dal kar meri phuli chut ko apni mutthi mai

bhar liya aur dabate huye kahne lagi,

manju- phir kya hua sandhya bata na

sandhya- phir kya tha mummy, papa mere chutado ko khub kas-kas kar dabane aur masalne lage

manju- sach sandhya tere chutad pahle se kaphi mote ho gaye hai tere papa ko to teri moti gand dabochne mai

maza aa gaya hoga,

sandhya- ha mummy maine jhat se papa ke mote land ko apne muh mai bhar kar chusna chalu kar diya,

manju- aur rohit kya kar raha tha

sandhya- rohit meri mummy ki moti gand ko khub kas-kas kar masal raha tha

manju- kya rohit ko teri mummy ki gand bahut pasand hai

sandhya- ha mummy rohit ne mummy ko vahi jhuka diya aur unki sadi unki gand se utha kar unki panty utar di

aur phir rohit ne kam se kam aadhe ghante tak mummy ki gori-gori moti gand ko chat-chat kar lal kar diya,

sach mummy rohit bahut mast tarike se chut aur gand chatta hai aur moti-moti gand ka to vah diwana hai use

aurto ke bhari chutad bahut achche lagte hai tabhi to vah din rat bas aapki gand chodne ke bare mai sochta hai

manju- kya rohit ko meri gand bahut achchi lagti hai

maine mummy ki bat sun kar unki sadi ke andar hath dal kar unki chut ko jaise hi dabocha dher sara pani mere

hantho mai lag gaya aur mai samajh gai sali puri bhig chuki thi,

sandhya- ha mummy rohit to aapko puri nangi karke chodna chahta hai

manju- kya usne tujhse aisa kaha hai ki vah mujhe puri nangi karke chodna chahta hai

sandhya- ha mummy vah to kai bar mujhe apni mummy bana kar bhi meri gand marte hai

manju- khub mota land hai na rohit ka khub maza aata hoga na tujhe

sandhya- ha mummy jab rohit ka mota land meri gand mai jata hai to aisa lagta hai ki rohit khub kas-kas kar

apne land ko meri gand mai mare aur mujhe khub ragad-ragad kar chode aue phir maine mummy ke mote-mote

doodh ko dabate huye ek hath se mummy ki guda sahlate huye kaha mummy jab rohit ka mota land aapki moti

gand mai jayega tab dekhna aap mast ho jaogi aur khud hi rohit se kahogi ki thonk beta khub kas-kas kar mar

apni mummy ki moti gand apne mote land se mummy meri bat sun kar mujhse buri tarah chipak gai aur maine

mummy ke hontho ko apne muh mai bhar kar chusna shuru kar diya aur phir maine mummy se kaha

sandhya- bolo mummy apne bete ka mota land apni is bhari gand mai ghusane ka man kar raha hai na aur phir

maine mummy ki moti gand ko kas kar daboch liya

manju- aah aah ha ha beti mera dil kar raha hai ki rohit abhi mujhe khub ragad-ragad kar chode meri chut aur

gand apne musal se fad kar rakh de,

maine mummy ki chut mai phir se apna hath dal kar mummy se kaha bolo mummy chudwaogi apne bete se aur

phir maine apni ungali mummy ki chut mai bhar di aur mummy mujhse paglo ki tarah lipat gai aur mujhe chumte

huye kahne lagi

manju- hay sandhya ek bar meri chut mai rohit ka land dalwa de aaah aah aah oh sandhya

maine mummy ki chut mai teen ungliya dal kar khub jor se unki chut mai aage dhakelne lagi aur mummy ne apni

tange aur chaudi kar li, mai bade aaram se mummy ki chut mai ungli dalne lagi aur mummy sisiyate huye kahne

lagi sandhya bata na kab meri chut mai tu rohit ka land dalegi, kab mera beta apni mummy ko puri nangi karke

uski chut mai apna land dalega,

sandhya-mummy abhi aapko rohit se chudwa dungi par aapko bhi meri ek icchha puri karni hogi

manju- kaun si icchha

sandhya- mera dil karta hai ki ek bar aap aur papa dono milkar mujhe chodo

manju- kyo nahi beti aaj rat tu hamare room mai aa jana aur mere aur apne papa ke beech mai sona phir dekhna

hum dono milkar tujhe puri tarah mast kar dege

sandhya- nahi mummy aapke room mai nahi balki bethak wale room mai jaha se rohit bhi hame apne room se

dekh sake, aap nahi janti rohit aapko puri nangi dekhne ke liye mara ja raha hai isliye aaj aap use apni moti

gand khub utha -utha kar dikhana phir dekhna vah aapki gand dekh kar aapko nangi hi utha kar apne bed par le

jayega aur khub kas-kas kar chodega,

rat ko papa sofe par bethe tv dekh rahe the aur mai unke pass jakar beth gai rohit pura nanga hokar apne room

se hame dekh raha tha, tabhi samne se mummy aa gai mummy ne makup kiya hua tha aur bahut sexy lag rahi

thi vah jaise hi papa ke pas aa kar khadi hui papa ne mummy ki chikni kamar ko tham kar unhe apni god mai

khinch kar betha liya aur unke mote-mote doodh ko khub kas kar daba diya,

manju- haste huye are chhodo na kya kar rahe ho samne bahu bethi hai,

manohar- are meri rani bahu bhi janti hai ki aaj tumhari chut se bahut pani aa raha hai khub mota land lene ka

man kar raha hai na,

manju- muskurate huye, chhodiye bhi sandhya kya soch rahi hogi

manohar- are sandhya se kyo sharma rahi ho, lo mai abhi tumhari sharam dur kar deta hu aur phir papa ne

mujhe bhi apni god mai khinch kar betha liya ab papa ek hath se mummy ke doodh masal rahe the aur dusre

hath se mere doodh masal rahe the,

manju- bahut beshram ho tum, mai ja rahi hu sone,

sandhya- mummy jara bethiye to sahi mai abhi kuchh khane pine ke liye lekar aati hu aur phir mai sidhe rohit ke

pass gai aur sabhi ke liye larg glass drink bana kar le aai, pahle papa ne ek glass utha kar ek hi ghut mai khatam

kar diya phir papa ne dusra glass utha kar mummy ke galo ko chumte huye kaha le rani yah somras pi le phir aaj

tujhe masti se chodunga,

mummy meri aur dekh rahi thi aur maine ishare se unhe pine ke liye kaha aur phir mummy pura glass pi gai aur

mummy ke chehre par ek masti si dikhai dene lagi,

sandhya- papa mujhe bhi apne hantho se pila do na

manju - bahu tu apne pati ke hath se pi

sandhya- nahi mummy mujhe to papa ke hantho se hi pine mai maja aata hai,

kramashah......................