बात एक रात की compleet

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories ,erotic stories. Visit mz.skoda-avtoport.ru
rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 13 Dec 2014 00:53

बात एक रात की--100

गतान्क से आगे.................

"राज शर्मा तुम पद्‍मिनी के साथ ही रहो...नीचे हर तरफ नज़र रखना."

"जी सर." राज शर्मा ने कहा.

रोहित उपर पहुँचा तो हैरान रह गया. पद्‍मिनी के कमरे में बिस्तर पर एक पैंटिंग पड़ी थी. साइको कहीं नही दीख रहा था.

"हर तरफ ध्यान से देखो...वो ज़रूर यही कही होगा." रोहित ने कहा.

रोहित ने पैंटिंग को गौर से देखा. पैंटिंग में घुटनो पर सर टीका कर एक लड़की बैठी थी. उसकी पीठ में खंजर गढ़ा था. लड़की का चेहरा पद्‍मिनी से मिलता जुलता था. लड़की के चारो तरफ हरी हरी घास थी.

"सर यहाँ कोई भी नही है."

"ऐसा कैसे हो सकता है. दुबारा अच्छे से चेक करो."

रोहित ने खुद उपर के फ्लोर को अच्छे से चेक किया पर वहाँ साइको का नामो निसान नही था.

"हमारे आते ही निकल गया क्या वो. इतना डरपोक है तो क्यों करता है ये काम." रोहित ने सोचा.

"राज शर्मा ने कहा कि वो बहुत देर से उपर ही था. क्या कर रहा था वो यहा? क्या वो पद्‍मिनी के लिए नही आया था यहाँ? क्या उसे सिर्फ़ ये पैंटिंग रखनी थी यहाँ? या फिर हो सकता है कि हमारे साइरन की आवाज़ सुन कर भागा हो. साइको का मायाजाल है ये...कुछ भी हो सकता है."

घर के आस-पास हर तरफ देखा गया मगर साइको नही मिला.

“वो पद्‍मिनी के कमरे की खिड़की से दाखिल हुआ था अंदर. खिड़की का दरवाजा टूटा हुआ है.” रोहित ने कहा.

“सर बहुत देर रहा उपर वो…क्या किया होगा उसने उपर इतनी देर?” राज शर्मा ने पूछा

“उपर एक पैंटिंग पड़ी है…लेकिन वो यहाँ आकर तो नही बनाई उसने. कलर फ्रेश तो नही हैं. पता नही क्या किया उसने इतनी देर उपर. शायद दहशत फैलाना चाहता हो पद्‍मिनी के मन में. या फिर वो नीचे आता थोड़ी देर में पर पोलीस के आते ही भाग गया.”

“सर यहाँ जो लोग भी थे मेरे साथ सब मार दिए उसने. बंदूक की गोली की एक आवाज़ तक नही सुनाई दी. सभी को सूट किया उसने छुप कर.” राज शर्मा ने कहा.

“ह्म्‍म्म…बहुत बुरा हुआ…ये पोलीस वालो को मारे जा रहा है और हम कुछ नही कर पा रहे.”

“सर आज बचता नही वो अगर नीचे आता तो. हमने आयिल गिराया था सीढ़ियों पर लेकिन वो हमारे जाल में फँसा ही नही.”

“मैं तुम्हे दूसरे लोग दे देता हूँ…फिलहाल निकलता हूँ. सहर में एक राउंड ले लेता हूँ. कही से तो भागा होगा वो.” रोहित ने कहा.

रोहित 4 कॉन्स्टेबल और 2 गन्मन वही छोड़ कर चला गया. मोबाइल जॅमर का कुछ पता नही चला. वैसे फोन में सिग्नल वापिस आ गया था. शायद साइको अपना जॅमर वापिस ले गया था.

रोहित के जाने के बाद राज शर्मा ने कॉन्स्टेबल्स और गन्मन को तैनात कर दिया. बाहर अच्छे से सभी को सतर्कता का आदेश दे कर राज शर्मा वापिस पद्‍मिनी के पास आया और बोला, “अगर आपकी इज़ाज़त हो तो मैं आपके साथ ही रहना चाहूँगा”

“नही तुम मेरे साथ नही रह सकते. तुम्हारा कोई भरोसा नही है.”

“पर मैं आपको अब अकेला नही छोड़ सकता. पता नही क्या गेम खेल रहा है साइको. मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है.”

“कैसी गड़बड़?”

“देखिए ना उसने सभी को मार दिया था यहा. सिर्फ़ मैं और आप बचे थे. सब कुछ उसके कंट्रोल में था…फिर भी वो बस एक पैंटिंग रख कर चला गया. कुछ अजीब सा लगता है. कोई बहुत ही ख़तरनाक गेम लगती है उसकी जो कि हम समझ नही पा रहे.”

“डराओ मत मुझे.”

“देखिए आप कुछ भी कहें पर मैं आपको अकेले छोड़ने वाला नही हूँ अब. हर वक्त आपके साथ ही रहूँगा…यही अंदर.”

“तुम ये सब जान बुझ कर बोल रहे हो ताकि तुम्हे मेरे साथ छेड़कानी के मोके मिलते रहें हैं ना?”

“आपकी कसम खा कर कहता हूँ ऐसा कुछ नही है. मुझे सच में गड़बड़ लग रही है.”

“ठीक है फिर…मैं मम्मी-डेडी के कमरे में सो जाती हूँ तुम उस कमरे में सो जाओ.”

“नही ये नही चलेगा.”

“तो क्या मुझसे चिपक कर रहोगे तुम”

राज शर्मा ने पद्‍मिनी को बाहों में भर लिया और बोला, “बुराई क्या है आपके साथ रहने में. हम प्यार करते हैं एक दूसरे से.”

“हां पर हमारी शादी नही हुई अभी और तुम पागलपन सवार है. मुझे तुमसे डर लगता है.”

“किस बात का डर?”

“छोड़ो तुम नही समझोगे…”

“ठीक है ऐसा करते हैं आप अपने पेरेंट्स के बेडरूम में सो जाओ मैं चदडार बिछा कर उसके बाहर लेट जाता हूँ. ये तो ठीक रहेगा ना. या फिर इसमे भी कोई दिक्कत है.”

“पर तुम ज़मीन पर कैसे सो पाओगे.”

“आपके लिए कही भी सो जाउन्गा. और वैसे भी मुझे जागना है. दिमाग़ की दही कर दी है इस साइको ने. सब को मार कर घर में घुसा और बिना किसी हंगामे के चुपचाप चला गया. इस पहेली को सुलझाना होगा. मुझे नींद नही आएगी…आप निसचिंत हो कर सो जाओ.”

“ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी. नींद तो मुझे भी नही आएगी शायद. फिर भी सोने की कोशिस करती हूँ. सर बहुत भारी हो रहा है.”

“हां आप सो जाओ…लेकिन एक गुड नाइट किस तो देती जाओ.” राज शर्मा ने पद्‍मिनी के होंटो को जाकड़ लिया अपने होंटो के बीच.

पद्‍मिनी ने कोई ज़्यादा विरोध नही किया.

“बस अब जाउ…हर वक्त एक ही काम में मन रहता है तुम्हारा.”

“क्या करें ये प्यार मजबूर कर देता है इस सब के लिए.” राज शर्मा ने कहा.

“रहने दो प्यार मैं भी करती हूँ पर तुम तो पागल हो गये हो.”

पद्‍मिनी ने राज शर्मा को एक चदडार और तकिया दे दिया और अपने बेडरूम में जाते वक्त बोली, “यहा नींद ना आए तो उस बेडरूम में सो जाना जाकर.”

“जी बिल्कुल. आपको नींद ना आए तो मेरी बाहों में चली आना मैं लोरी सुना कर सुना दूँगा आपको.”

“पता है मुझे तुम क्या सूनाओगे…गुड नाइट.” पद्‍मिनी बेडरूम में घुस गयी.

राज शर्मा चदडार बीचा कर लेट गया. वो गहरे ख़यालों में खो गया.

“क्या चाहता है ये साइको…हर बार कुछ अलग सा करता है. इस बार क्या गेम है इसकी. पता लगा कर रहूँगा मैं भी चाहे कुछ हो जाए.”

राज शर्मा के मन में उथल पुथल चल रही थी. नींद कोसो दूर थी उसकी आँखो से. उसकी आँखो के सामने सब कुछ हुआ था. इसलिए उसके दिमाग़ का इन सवालों में उलझना लाज़मी था.

“वो सिर्फ़ पैंटिंग रखने के लिए तो यहा नही आया था. इतने पोलीस वालो को मारा उसने. इतना ख़तरा मोल लिया. और जब सिचुयेशन उसके कंट्रोल में थी तो चला गया. इट्स वेरी…वेरी स्ट्रेंज.” राज शर्मा ने सोचा.

नींद पद्‍मिनी की आँखो से भी कोसो दूर थी. साइको का ख़ौफ़ उसके दिलो दिमाग़ को घेरे हुए था.अचानक उसे ख्याल आया, “मुझे कंफर्टबल बिस्तर पर नींद नही आ रही तो राज शर्मा को ज़मीन पर कैसे नींद आ रही होगी.”

कुछ सोच कर वो उठी और बेडरूम का दरवाजा खोल कर बाहर आई, “तुम जाग रहे हो.”

“आपके बिना नींद कैसे आएगी.”

“रहने दो…मैं ये कहने आई थी कि दूसरे बेडरूम से गद्दा ले आओ यहा फर्श पर नींद नही आएगी.”

राज शर्मा उठा और पद्‍मिनी के पास आ कर उसके चेहरे पर हाथ रख कर बोला, “गद्दे को मारिए गोली और आप आ जाओ यहाँ. सच तो ये है कि हमें एक दूसरे के बिना नींद नही आएगी.” राज शर्मा ने कहा

“ऐसा कुछ नही है…मुझे तो इस साइको ने जगा रखा है. पता नही क्या चाहता है?”

“तो क्या मुझसे दूरी बर्दास्त कर लेती हैं आप.”

“हां बल्कि तुमसे दूरियाँ तो दिल को सुकून देती हैं” पद्‍मिनी ने हंसते हुए कहा.

“अच्छा अगर हमेशा के लिए दूर हो गये आपसे तो सुकून से भर जाएगी जींदगी आपकी.”

पद्‍मिनी ने राज शर्मा के मुँह पर हाथ रखा, “चुप रहो…मज़ाक कर रही थी मैं.”

राज शर्मा ने पद्‍मिनी का हाथ पकड़ा और बोला, “आओ ना साथ लेट कर प्यारी-प्यारी बाते करेंगे. वैसे भी नींद तो आएगी नही हमें क्यों ना साथ रह कर ये पल हसीन बना दें.”

“नही राज शर्मा मुझे नींद आ रही है…जाने दो”

“झूठ…प्यार में साथ रहना चाहिए ना कि अलग-अलग. नींद आएगी तो यही सो जाना”

“राज शर्मा मज़ाक नही है ये कोई…छोड़ो.” पद्‍मिनी ने गुस्से में कहा.

“आप को साथ रहने को बोल रहा हूँ…कोई सुहागरात मनाने को नही बोल रहा. जाओ जाना है तो…मुझे तो नींद नही आ रही.” राज शर्मा ने पद्‍मिनी का हाथ छोड़ दिया.

राज शर्मा फर्श पर पड़ी चदडार पर आ कर लेट गया पद्‍मिनी खड़ी-खड़ी देखती रही. अजीब सी स्थिति में फँस गयी थी वो. राज शर्मा की नाराज़ भी नही देख सकती थी और उसके पास भी नही जा सकती थी.

“कैसे लेट जाउ इसके पास जाकर…इसका भरोसा तो कोई है नही.” पद्‍मिनी ने सोचा.

राज शर्मा आँखो पर बाजू रख कर पड़ा था. ऐसा लग रहा था जैसे कि बहुत नाराज़ है पद्‍मिनी से. पद्‍मिनी खड़े-खड़े उसे देख रही थी. अजीब कसंकश में थी वो. ना वो राज शर्मा को नाराज़ छोड़ कर वापिस बेडरूम में जा सकती थी और ना राज शर्मा के पास जा कर लेट सकती थी. कुछ सोच कर वो आगे बढ़ी और राज शर्मा के पास आकर बैठ गयी और धीरे से बोली, “नाराज़ हो गये मुझसे?”

राज शर्मा ने कोई जवाब नही दिया. चुपचाप पड़ा रहा.

“बात नही करोगे मुझसे…” पद्‍मिनी ने बड़ी मासूमियत से कहा.

“ओह आप…आप कब आई. मुझे तो नींद आ गयी थी.” राज शर्मा ने कहा.

“नाराज़ हो गये मुझसे?”

राज शर्मा अचानक उठा और पद्‍मिनी को बिस्तर पर लेटा कर चढ़ गया उसके उपर.

“आपसे नाराज़ हो कर कहाँ जाउन्गा. मुझे पता था कि आप ज़रूर आएँगी.”

“मैं बात करने आई हूँ ना कि ये सब करने…हटो.” पद्‍मिनी छटपटाते हुए बोली.

राज शर्मा ने बिना कुछ कहे पद्‍मिनी की गर्दन पर अपने गरम-गरम होन्ट टिका दिए. पद्‍मिनी के शरीर में बीजली की लहर दौड़ गयी. वो बोली, “हट जाओ राज शर्मा…प्लीज़.”

मगर राज शर्मा पद्‍मिनी की गर्दन को यहाँ वहाँ चूमता रहा. पद्‍मिनी छटपटाती रही उसके नीचे.

अचानक वो रुक गया और अपने होन्ट हटा लिए पद्‍मिनी की गर्दन से.

“क्या बात है. आपके हर अंग में कामुक रस है. म्रिग्नय्नि सी आँखें हैं आपकी और म्रिग्नय्नि सी ही गर्दन है. मज़ा आ गया”

“अब हटने का कष्ट करोगे?”

राज शर्मा हँसने लगा और बोला, “बिल्कुल नही…आज थोड़ा आगे बढ़ेंगे प्यार में.”

“क्या मतलब?”

राज शर्मा ने पद्‍मिनी के उभारो को थाम लिया दोनो हाथो से. पद्‍मिनी के पैरो के नीचे से ज़मीन निकल गयी.

“राज शर्मा…ये क्या कर रहे हो…हटो.” पद्‍मिनी ने राज शर्मा के हाथ दूर झटक दिए.

“छू लेने दीजिए ना…प्यार करते हैं हम आपसे कोई मज़ाक नही.”

“अब तो ये सब मज़ाक ही बन चुका है. तुम मेरे शरीर से खेल रहे हो और कुछ नही. शक होता है मुझे कि ये प्यार है तुम्हारा या हवस.”

“लव ईज़ प्यूरेस्ट फॉर्म ऑफ लस्ट…आइ गेस. जब प्यार हो गया आपको मुझसे तो खुद को बंधनों में क्यों जाकड़ रखा है आपने. आज़ाद कीजिए खुद को और मेरे साथ प्यार के हसीन सफ़र पर चलिए. यकीन दिलाता हूँ आपको कि आप निराश नही होंगी.”

क्रमशः........................

..

BAAT EK RAAT KI--100

gataank se aage.................

"Raj sharma tum padmini ke saath hi raho...neeche har taraf nazar rakhna."

"ji sir." Raj sharma ne kaha.

Rohit upar pahuncha to hairaan rah gaya. Padmini ke kamre mein bistar par ek painting padi thi. Psycho kahi nahi deekh raha tha.

"har taraf dhyaan se dekho...vo jaroor yahi kahi hoga." rohit ne kaha.

Rohit ne painting ko gaur se dekha. Painting mein ghutno par sar tika kar ek ladki baithi thi. Uski peeth mein khanjar gada tha. Ladki ka chehra padmini se milta julta tha. Ladki ke chaaro taraf hari hari ghaas thi.

"sir yaha koyi bhi nahi hai."

"aisa kaise ho sakta hai. Dubaara achche se check karo."

Rohit ne khud upar ke floor ko achche se check kiya par vaha psycho ka naamo nisaan nahi tha.

"hamaare aate hi nikal gaya kya vo. Itna darpok hai to kyon karta hai ye kaam." rohit ne socha.

"Raj sharma ne kaha ki vo bahut der se upar hi tha. Kya kar raha tha vo yaha? Kya vo padmini ke liye nahi aaya tha yaha? Kya use sirf ye painting rakhni thi yaha? Ya phir ho sakta hai ki hamaare siren ki awaaj sun kar bhaaga ho. Psycho ka maayajaal hai ye...kuch bhi ho sakta hai."

Ghar ke aas-paas har taraf dekha gaya magar psycho nahi mila.

“vo padmini ke kamre ki khidki se daakhil hua tha ander. Khidki ka darvaaja tuta hua hai.” Rohit ne kaha.

“sir bahut der raha upar vo…kya kiya hoga usne upar itni der?” Raj sharma ne pucha

“upar ek painting padi hai…lekin vo yaha aakar to nahi banaayi usne. Color fresh to nahi hain. Pata nahi kya kiya usne itni der upar. Shaayad dahshat failana chaahta ho padmini ke man mein. Ya phir vo neeche aata thodi der mein par police ke aate hi bhaag gaya.”

“sir yaha jo log bhi the mere saath sab maar diye usne. Bandook ki goli ki ek awaaj tak nahi sunaayi di. Sabhi ko soot kiya usne chup kar.” Raj sharma ne kaha.

“hmmm…bahut bura hua…ye police walo ko maare ja raha hai aur hum kuch nahi kar pa rahe.”

“sir aaj bachta nahi vo agar neeche aata to. Hamne oil giraaya tha seedhiyon par lekin vo hamaare jaal mein phansa hi nahi.”

“main tumhe dusre log de deta hun…philhaal nikalta hun. sahar mein ek round le leta hun. kahi se to bhaaga hoga vo.” Rohit ne kaha.

Rohit 4 constable aur 2 gunman vahi chod kar chala gaya. mobile jammer ka kuch pata nahi chala. Vaise phone mein signal vaapis aa gaya tha. shaayad psycho apna jammer vaapis le gaya tha.

Rohit ke jaane ke baad Raj sharma ne constables aur gunman ko tainaat kar diya. Baahar achche se sabhi ko satarkta ka aadesh de kar Raj sharma vaapis padmini ke paas aaya aur bola, “agar aapki izaazat ho to main aapke saath hi rahna chaahunga”

“nahi tum mere saath nahi rah sakte. Tumhaara koyi bharosa nahi hai.”

“par main aapko ab akela nahi chod sakta. Pata nahi kya game khel raha hai psycho. Mujhe kuch gadbad lag rahi hai.”

“kaisi gadbad?”

“dekhiye na usne sabhi ko maar diya tha yaha. Sirf main aur aap bache the. Sab kuch uske control mein tha…phir bhi vo bas ek painting rakh kar chala gaya. kuch ajeeb sa lagta hai. koyi bahut hi khatarbnaak game lagti hai uski jo ki hum samajh nahi pa rahe.”

“daraao mat mujhe.”

“dekhiye aap kuch bhi kahein par main aapko akele chodne wala nahi hun ab. Har vakt aapke saath hi rahunga…yahi ander.”

“tum ye sab jaan bujh kar bol rahe ho taaki tumhe mere saath chedkaani ke moke milte rahein hain na?”

“aapki kasam kha kar kahta hun aisa kuch nahi hai. mujhe sach mein gadabd lag rahi hai.”

“theek hai phir…main mammi-dady ke kamre mein so jaati hun tum us kamre mein so jaao.”

“nahi ye nahi chalega.”

“to kya mujhse chipak kar rahoge tum”

Raj sharma ne padmini ko baahon mein bhar liya aur bola, “buraayi kya hai aapke saath rahne mein. Hum pyar karte hain ek dusre se.”

“haan par hamaari shaadi nahi hui abhi aur tum paagalpan sawaar hai. mujhe tumse dar lagta hai.”

“kis baat ka dar?”

“chodo tum nahi samjhoge…”

“theek hai aisa karte hain aap apne parents ke bedroom mein so jaao main chaddar beecha kar uske baahar late jaata hun. ye to theek rahega na. ya phir isme bhi koyi dikkat hai.”

“par tum jamin par kaise so paaoge.”

“aapke liye kahi bhi so jaaunga. Aur vaise bhi mujhe jaagna hai. deemag ki dahi kar di hai is psycho ne. sab ko maar kar ghar mein ghusa aur bina kisi hangaame ke chupchaap chala gaya. is paheli ko suljhana hoga. Mujhe neend nahi aayegi…aap nischint ho kar so jaao.”

“theek hai jaisi tumhaari marji. Neend to mujhe bhi nahi aayegi shaayad. Phir bhi sone ki koshis karti hun. sar bahut bhaari ho raha hai.”

“haan aap so jaao…lekin ek good night kiss to deti jaao.” Raj sharma ne padmini ke honto ko jakad liya apne honto ke beech.

Padmini ne koyi jyada virodh nahi kiya.

“bas ab jaaun…har vakt ek hi kaam mein man rahta hai tumhaara.”

“kya karein ye pyar majboor kar deta hai is sab ke liye.” Raj sharma ne kaha.

“rahne do pyar main bhi karti hun par tum to paagal ho gaye ho.”

Padmini ne Raj sharma ko ek chaddar aur takiya de diya aur apne bedroom mein jaate vakt boli, “yaha neend na aaye to us bedroom mein so jaana jaakar.”

“ji bilkul. Aapko neend na aaye to meri baahon mein chali aana main lori suna kar shula dunga aapko.”

“pata hai mujhe tum kya sunaaoge…good night.” Padmini bedroom mein ghus gayi.

Raj sharma chaddar beecha kar late gaya. vo gahre khayaalon mein kho gaya.

“kya chaahta hai ye psycho…har baar kuch alag sa karta hai. is baar kya game hai iski. Pata laga kar rahunga main bhi chaahe kuch ho jaaye.”

Raj sharma ke man mein uthal puthal chal rahi thi. neend koso dur thi uski aankho se. uski aankho ke saamne sab kuch hua tha. isliye uske deemag ka in sawaalon mein ulajhna laazmi tha.

“vo sirf painting rakhne ke liye to yaha nahi aaya tha. itne police walo ko maara usne. Itna khatra mol liya. Aur jab situation uske control mein thi to chala gaya. its very…very strange.” Raj sharma ne socha.

Neend padmini ki aankho se bhi koso dur thi. psycho ka khauf uske dilo deemag ko ghere hue tha.achaanak use khyaal aaya, “mujhe comfortable bistar par neend nahi aa rahi to Raj sharma ko jamin par kaise neend aa rahi hogi.”

Kuch soch kar vo uthi aur bedroom ka darvaaja khol kar baahar aayi, “tum jaag rahe ho.”

“aapke bina neend kaise aayegi.”

“rahne do…main ye kahne aayi thi ki dusre bedroom se gadda le aao yaha fars par neend nahi aayegi.”

Raj sharma utha aur padmini ke paas aa kar uske chehre par haath rakh kar bola, “gadde ko maariye goli aur aap aa jaao yaha. Sach to ye hai ki hamein ek dusre ke bina neend nahi aayegi.” Raj sharma ne kaha

“aisa kuch nahi hai…mujhe to is psycho ne jaga rakha hai. pata nahi kya chaahta hai?”

“to kya mujhse duri bardaast kar leti hain aap.”

“haan balki tumse duriyan to dil ko sukun deti hain” padmini ne hanste hue kaha.

“achcha agar hamesha ke liye dur ho gaye aapse to sukun se bhar jaayegi jeendagi aapki.”

Padmini ne Raj sharma ke munh par haath rakha, “chup raho…majaak kar rahi thi main.”

Raj sharma ne padmini ka haath pakda aur bola, “aao na saath late kar pyari-pyari baate karenge. Vaise bhi neend to aayegi nahi hamein kyon na saath rah kar ye pal hasin bana dein.”

“nahi Raj sharma mujhe neend aa rahi hai…jaane do”

“jhut…pyar mein saath rahna chaahiye na ki alag-alag. Neend aayegi to yahi so jaana”

“Raj sharma majaak nahi hai ye koyi…chodo.” Padmini ne gusse mein kaha.

“aap ko saath rahne ko bol raha hun…koyi suhaagrat manaane ko nahi bol raha. Jaao jaana hai to…mujhe to neend nahi aa rahi.” Raj sharma ne padmini ka haath chod diya.

Raj sharma fars par padi chaddar par aa kar late gaya padmini khadi-khadi dekhti rahi. Ajeeb si stithi mein phans gayi thi vo. Raj sharma ki naraaj bhi nahi dekh sakti thi aur uske paas bhi nahi ja sakti thi.

“kaise late jaaun iske paas jaakar…iska bharosa to koyi hai nahi.” Padmini ne socha.

Raj sharma aankho par baaju rakh kar pada tha. aisa lag raha tha jaise ki bahut naraaj hai padmini se. padmini khade-khade use dekh rahi thi. ajeeb kasamkash mein thi vo. Na vo Raj sharma ko naraaj chod kar vaapis bedroom mein ja sakti thi aur na Raj sharma ke paas ja kar late sakti thi. kuch soch kar vo aage badhi aur Raj sharma ke paas aakar baith gayi aur dheere se boli, “naraaj ho gaye mujhse?”

Raj sharma ne koyi jawaab nahi diya. Chupchaap pada raha.

“baat nahi karoge mujhse…” padmini ne badi maasumiyat se kaha.

“oh aap…aap kab aayi. Mujhe to neend aa gayi thi.” Raj sharma ne kaha.

“naraaj ho gaye mujhse?”

Raj sharma achaanak utha aur padmini ko bistar par leta kar chadh gaya uske upar.

“aapse naraaj ho kar kaha jaaunga. Mujhe pata tha ki aap jaroor aayengi.”

“main baat karne aayi hun na ki ye sab karne…hato.” Padmini chatpataate hue boli.

Raj sharma ne bina kuch kahe padmini ki gardan par apne garam-garam hont tika diye. Padmini ke sharir mein beejli ki lahar daud gayi. Vo boli, “hat jaao Raj sharma…please.”

Magar Raj sharma padmini ki gardan ko yaha vaha chumta raha. Padmini chatpataati rahi uske neeche.

Achaanak vo ruk gaya aur apne hont hata liye padmini ki gardan se.

“kya baat hai. aapke har ang mein kaamuk ras hai. mrignayni si aankhein hain aapki aur mrignayni si hi gardan hai. maja aa gaya”

“ab hatne ka kast karoge?”

Raj sharma hansne laga aur bola, “bilkul nahi…aaj thoda aage badhenge pyar mein.”

“kya matlab?”

Raj sharma ne padmini ke ubhaaro ko thaam liya dono haatho se. padmini ke pairo ke neeche se jamin nikal gayi.

“Raj sharma…ye kya kar rahe ho…hato.” Padmini ne Raj sharma ke haath dur jhatak diye.

“chu lene dijiye na…pyar karte hain hum aapse koyi majaak nahi.”

“ab to ye sab majaak hi ban chuka hai. tum mere sharir se khel rahe ho aur kuch nahi. Shak hota hai mujhe ki ye pyar hai tumhaara ya hawas.”

“love is purest form of lust…I guess. Jab pyar ho gaya aapko mujhse to khud ko bandhanon mein kyon jakad rakha hai aapne. Aazaad kijiye khud ko aur mere saath pyar ke hasin safar par chaliye. Yakin deelaata hun aapko ki aap niraash nahi hongi.”

Kramashah..........................


rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 13 Dec 2014 00:53

बात एक रात की--101

गतान्क से आगे.................

राज शर्मा ने फिर से पद्‍मिनी के उभारों को थाम लिया और उन्हे ज़ोर से दबाते हुए बोला, “माफ़ कीजिएगा मुझे पर मैं अपनी प्रेमिका से दूर नही रह सकता. वो भी तब जब वो मुझे बहुत प्यार करती है.”

अपने उभारों पर राज शर्मा के हाथों का कसाव पड़ने से पद्‍मिनी सिहर उठी. उसकी साँसे तेज हो गयी और टांगे काँपने लगी. हिम्मत जुटा कर वो बोली, “राज शर्मा आइ हेट यू.”

“मज़ाक कर रही हैं आप है ना.”

“मज़ाक नही है ये. ये प्यार नफ़रत में बदल जाएगा अगर तुम नही रुके तो.”

राज शर्मा ने पद्‍मिनी के उभारों को छोड़ दिया और पद्‍मिनी के उपर से हट कर उसके बाजू में लेट गया, “आपकी नफ़रत मंजूर नही है. प्यार में दूरी सह लूँगा.”

“मेरी कुछ मर्यादाए हैं. मैं ऐसा सोच भी नही सकती जैसा तुम मेरे साथ कर रहे हो. प्यार हुआ है हमें शादी नही जो कि कुछ भी कर लोगे तुम.”

“मुझे तो शक है कि शादी के बाद भी हम नज़दीक आ पाएँगे या नही. आप कुछ भी नही करने देंगी मुझे.”

राज शर्मा करवट ले कर लेट गया.

“लो अब नाराज़ हो गये. अपने आप शैतानी करते हो और नाराज़ भी खुद ही हो जाते हो. ये बहुत बढ़िया है. ” पद्‍मिनी ने कहा राज शर्मा के नज़दीक आ कर उस से लिपट गयी.

“हट जाओ तुम अब मैं दूर ही रहूँगा तुमसे. मुझे कुछ नही चाहिए तुमसे. ना अब ना शादी के बाद.”

“प्यार करती हूँ तुमसे कोई मज़ाक नही. क्यों हटु मैं. हां मैं इतना आगे नही बढ़ सकती जितना तुम चाहते हो पर दूर मैं भी नही रह सकती तुमसे.”

“हाहहहाहा….ऐसा जोक आज तक नही सुना मैने. मेरे पेट में दर्द हो जाएगा हंसते-हंसते दुबारा मत सुनाना ऐसा जोक.”

“मैं मज़ाक नही कर रही…काश तुम मुझे समझ पाते.” पद्‍मिनी ने भावुक अंदाज में कहा.

राज शर्मा तुरंत पद्‍मिनी की तरफ मुड़ा और देखा कि पद्‍मिनी सूबक रही है.

“अरे इन म्रिग्नय्नि आँखों में ये आँसू क्यों भर लिए. प्यार में छोटी मोटी लड़ाई तो चलती रहती है.”

“चलती होंगी पर मुझसे तुम्हारी नाराज़गी बर्दास्त नही होती. मुझसे नाराज़ मत हुआ करो.” सारी दुनिया की मासूमियत झलक रही थी पद्‍मिनी की इस बात में.

राज शर्मा ने बाहों में भर लिया पद्‍मिनी को और उसके माथे को चूम कर बोला, “बस चुप हो जाओ. मैं भी क्या करूँ मैं ऐसा ही हूँ. कंट्रोल नही होता मुझसे. ग़लत मत समझो मुझे. मेरी हर बात में प्यार है… बस प्यार. और ये प्यार जींदगी भर रहेगा.”

दोनो एक दूसरे की बाहों में खो गये. इस कदर डूब गये एक दूसरे में कि साइको को बिल्कुल भूल ही गये. कब नींद आ गयी दोनो को पता ही नही चला.

सुबह 8 बजे जब दूध वाले ने बेल बजाई तब पद्‍मिनी की आँख खुली. वो पेट के बल पड़ी थी और राज शर्मा उसके उभारों पर हाथ और टाँगो पर टाँग डाले पड़ा था.

पद्‍मिनी ने धीरे से राज शर्मा का हाथ अपने उभारों से हटाया, “बदमाश कही का नींद में भी चैन नही इसे.”

मगर राज शर्मा की आँख खुल गयी और वो बोला, “क्या हुआ?”

“सुबह हो गयी है”

“अरे हम दोनो साथ सो गये थे…मुझे तो विस्वास ही नही हो रहा.”

“दूध वाला है शायद. हटो मुझे जाने दो.”

“ऐसी नींद कभी नही आई जींदगी में. आने वाली जींदगी बहुत हसीन नज़र आ रही है मुझे. थॅंक यू पद्‍मिनी मेरी जींदगी में आने के लिए.”

पद्‍मिनी शर्मा गयी ये सुन कर और बोली, “बस…बस रहने दो प्यार हो चुका है अब. फ्लर्ट की ज़रूरत नही है तुम्हे.”

“आपसे कभी फ्लर्ट नही किया. बस प्यार किया है.”

“तुम सच में पागल हो.”

“आपके प्यार में पागल हहहे.”

पद्‍मिनी उठ कर चली गयी दूध लेने और राज शर्मा आँखे बंद करके वापिस हसीन ख़यालों में खो गया.

…………………………………………………………………….

रोहित रात भर साइको की तलाश में सहर में भटकने के बाद घर चला गया था. घर जा कर बिस्तर पर गिरते ही उसे बहुत गहरी नींद आ गयी थी.

सुबह 10 बजे उठा वो और तैयार हो कर 11 बजे हॉस्पिटल चल दिया. जब वो हॉस्पिटल पहुँचा तो एसपी साहिब को डिसचार्ज किया जा रहा था. मगर शालिनी को अभी 1 दिन और हॉस्पिटल में रहना था. एसपी साहिब को सी ऑफ करने के बाद वो ए एस पी साहिबा से मिलने पहुँचा.

जब रोहित कमरे में घुसा तो देखा कि चौहान शालिनी से बात कर रहा था. शालिनी ने रोहित को देखा मगर इग्नोर करके चौहान से बाते करती रही.

“ओह मिस्टर रोहित पांडे आए हैं. अच्छा मेडम मैं चलता हूँ.” चौहान रोहित की तरफ हंसता हुआ बाहर चला गया.

रोहित दूर खड़ा सब देखता रहा. वही खड़ा-खड़ा बोला, “मेडम कैसी हैं आप.”

“ठीक हूँ…जिंदा हूँ…अभी तुम जाओ बाद में बात करेंगे.” शालिनी ने बेरूख़ी से कहा.

“तो चौहान अपनी गेम खेल गया. तभी हंस रहा था मेरी तरफ. कोई बात नही मेडम…प्यार पहली बार दूर नही हुआ मुझसे. अब तो आदत सी है इन बातों की. खुश रहें आप हमेशा.” रोहित भारी मन से बाहर आ गया. उसकी आँखे नम थी

पूरा दिन किसी काम में मन नही लगा रोहित का. बस अपनी जीप ले कर सहर में यहाँ वहाँ घूमता रहा. दुबारा हॉस्पिटल नही गया वो. शाम को कोई 5 बजे थाने पहुँचा तो चौहान से वहाँ भी सामना हो गया.

“मिस्टर रोहित पांडे कहाँ थे आप. कब से ढूंड रहा हूँ आपको.”

“फोन नंबर है शायद आपके पास मेरा.”

“ वो सब छोड़ो ये बताओ कि तुम सस्पेंड होने के बाद कहाँ चले गये थे.”

“क्यों आपको क्या लेना देना.”

“क्योंकि आपको वापिस वही जाना पड़ेगा आप सस्पेंड हो गये हैं हहेहहे.”

रोहित की आँखे फटी की फटी रह गयी ये सुन कर.

“क्या बकवास कर रहे हो. क्या ए एस पी साहिबा ने आपको नही बताया. आप तो बहुत मिलते जुलते हैं आजकल उनसे.”

रोहित दाँत भींच कर रह गया. मन तो कर रहा था कि मुँह तौड दे चौहान का मगर चुप रहा.

चौहान ने उसे सस्पेन्षन ऑर्डर थमाया और बोला, “ये लो और दफ़ा हो जाओ यहाँ से. और इस बार वापिस आने की सोचना भी मत क्योंकि मैं ऐसा कभी नही होने दूँगा.”

“ग्रेट बस अब यही होना बाकी था. मेडम को पता था इस बारे में पर बताया नही मुझे. सब कुछ कितना अच्छा हो रहा है.”

रोहित अपनी पिस्टल बेल्ट थाने में जमा करवा कर पैदल ही निकल पड़ा थाने से. पीछे से भोलू ने आवाज़ दी, “सर रुकिये मैं आपको अपने स्कूटर से छोड़ देता हूँ.”

“नही रहने दो भोलू. जींदगी सड़को पर ही बीताई है ज़्यादातर धक्के खाते हुए. अच्छी बात है…कुछ पुरानी यादें ताज़ा हो जाएँगी. वैसे मेरी जगह किसको दिया जा रहा है ये साइको का केस.



“सर सिकेन्दर नाम है उनका. पूरा नाम नही पता मुझे. कल सुबह जाय्न कर लेंगे यहा. सुना है कि काफ़ी शिफारिस लगवा रहे थे वो यहाँ आने के लिए. इस केस पर तो ख़ास नज़र थी उनकी.”

“ह्म्म…ओके मैं चलता हूँ.”

रोहित थाने से बाहर आ गया और सोच में पड़ गया, “कल पद्‍मिनी के घर अटॅक किया साइको ने. फिर बस एक पैंटिंग रख कर चला गया. अब मेरा सस्पेन्षन हो गया. ये केस सिकेन्दर को मिल गया. सब कुछ जुड़ा हुआ है या फिर इत्तेफ़ाक है. कही सब कुछ साइको के मायाजाल का हिस्सा तो नही. और ये सिकेन्दर क्यों ज़ोर लगा रहा था यहाँ आने के लिए. ज़रूर कुछ गड़बड़ है. खैर अब मैं क्या कर सकता हूँ. मेडम नाराज़ हो गयी. नौकरी भी चली गयी. जींदगी भी क्या कुछ नही देखती हमें.”

रोहित मुरझाया हुआ चेहरा ले कर आगे बढ़ा जा रहा था. रह-रह कर शालिनी का चेहरा उसकी आँखो के सामने घूम रहा था.

"एक और प्यार मेरे इज़हार करने से पहले ही ख़तम हो गया. पद्‍मिनी ने भी ठुकरा दिया था मेरा प्यार बिना मेरी बात सुने. मेडम ने भी वही किया. लगता है किस्मत में किसी का प्यार है ही नही."

अचानक रोहित का फोन बजा और उसका ध्यान टूटा.

"किसका फोन है?" रोहित ने फोन जेब से निकालते हुए सोचा.

फोन मोहित का था.

"हेलो...हां मोहित हाउ आर यू."

"मैं ठीक हूँ सर. आप सुनाए. राज शर्मा ने मुझे बताया कि साइको ने पद्‍मिनी के घर अटॅक किया कल रात."

"ये राज शर्मा कौन है?" रोहित ने पूछा.

"सर राज को हम राज शर्मा कहते हैं."

"ओह...हां साइको पूरी प्लॅनिंग से आया था मगर बिना कुछ किए चला गया. पोलीस वालो को मार कर घर में घुसा और एक पैंटिंग रख कर चला गया. पद्‍मिनी तक पहुँचने की कोशिस ही नही की उसने. जबकि सब कुछ उसके कंट्रोल में था. मेरी तो कुछ समझ में नही आ रहा. ये एक मायाजाल है जिसमें हम सब उलझ चुके हैं."

"सर मायाजाल ठीक नाम दिया आपने इसे. सब कुछ उलझा हुआ है."

"भाई मेरी नौकरी चली गयी है. मुझे सर मत कहो. अब मैं इनस्पेक्टर नही हूँ. मुझे रोहित कहो..अच्छा लगेगा मुझे."

"नौकरी चली गयी...पर कैसे?"

"सस्पेंड हो गया हूँ मैं."

"पर किस बात के लिए?"

"यहाँ किसी बात की ज़रूरत नही होती. अगर बात पूछने जाएँगे तो कोई भी उल जलूल बात बोल देंगे."

"किसने किया सस्पेंड आपका, क्या ए एस पी साहिबा ने?"

"नही आइजी साहिब ने सस्पेंड किया है. मेडम का कोई रोल नही है इसमें."

"फिर अब आप क्या करोगे."

"घर जा रहा हूँ फिलहाल. आगे का कुछ नही पता."

"रोहित अगर बुरा ना मानो तो मेरे साथ आ जाओ. हम मिलकर कोई ना कोई सुराग ढूंड ही लेंगे साइको का."

"यार क्या कहु तुम्हे. मैं खुद यही सोच रहा था कि तुम्हारे साथ मिल कर इस साइको की खोज जारी रखूँगा. मगर मोहित हमें कुछ हथियारों की ज़रूरत होगी. खाली हाथ साइको के पीछे घूमना ख़तरे से खाली नही. मेरी पिस्टल तो मैने जमा करवा दी है."

"मेरे पास तो देसी कॅटा है एक. वही रखता हूँ साथ."

"उस से बात नही बनेगी. मैं कुछ करता हूँ. पोलीस की नौकरी का एक्सपीरियेन्स कब काम आएगा. मैं तुम्हे 9 बजे अपने घर मिलूँगा. वही आ जाना. बैठ कर आगे का डिसकस करते हैं."

"रोहित हमें ये जान-ना है कि कर्नल के घर में कौन रह रहा था. मुझे लगता है कि सब तार अब उसी घर से जुड़े हैं."

"हां तुम ठीक कह रहे हो. अभी तक कर्नल के रिलेटिव्स के यहाँ से भी कुछ पता नही चला. शायद वहाँ की लोकल पोलीस कोई इंटेरेस्ट नही ले रही."

"कोई बात नही हम खुद भी जा सकते हैं वहाँ पूछताछ करने."

"हां ठीक है...तुम शाम को घर आना बाकी बातें वही होंगी."

रोहित ने फोन काट दिया. जैसे ही उसने फोन जेब में रखा एक कार रुकी उसके सामने आकर. उसमे से मिनी निकली बाहर और बोली, "क्या हुआ इनस्पेक्टर साहिब...आज पैदल कहाँ घूम रहे हैं."

"मैं अब इनस्पेक्टर नही हूँ...मेरा सस्पेन्षन हो गया है."

"क्या? पर क्यों."

"आपने बदनाम जो कर दिया था मीडीया में हमें."

"देखिए पोलीस पर दबाव बना रही थी मैं और कुछ नही. नतिंग पर्सनल अगेन्स्ट यू."

"जानता हूँ...यही तो आपका काम है."

"उस दिन के लिए सॉरी. ज़्यादा तेज तो नही लगी थी आपको."

"कोई बात नही मैं वो सब भूल चुका हूँ. मिनी तुम भी काफ़ी समय से इस केस को फॉलो कर रही हो. क्या एक काम कर सकती हो."

"हां बोलो."

"पोलीस से तो निकल गया हूँ पर इस केस को सॉल्व करके रहूँगा मैं. हम एक टीम बना रहे हैं...क्या तुम शामिल होना चाहोगी. बहुत हेल्प मिलेगी हमें."

"ऑफ कोर्स मैं साथ हूँ तुम्हारे. बताओ क्या करना है."

"आज रात ठीक 9 बजे मेरे घर पहुँच जाना. और तुम्हारे पास अब तक की जो भी जानकारी हो लेती आना."

"ओके आ जाउन्गि मैं ठीक 9 बजे."

मिनी कार में बैठ कर चली गयी.

"मिस्टर साइको बेसक मेरी नौकरी चली गयी मगर तुम्हारी तलाश अभी बाकी है. छोड़ूँगा नही तुम्हे मैं." रोहित ने मन ही मन सोचा.

..............................

......

क्रमशः..........................

BAAT EK RAAT KI--101

gataank se aage.................

Raj sharma ne phir se padmini ke ubhaaron ko thaam liya aur unhe jor se dabaate hue bola, “maaf kijiyega mujhe par main apni premika se dur nahi rah sakta. Vo bhi tab jab vo mujhe bahut pyar karti hai.”

Apne ubhaaron par Raj sharma ke haathon ka kasaav padne se padmini sihar uthi. Uski saanse tej ho gayi aur taange kaanpne lagi. Himmat juta kar vo boli, “Raj sharma I hate you.”

“majaak kar rahi hain aap hai na.”

“majaak nahi hai ye. Ye pyar nafrat mein badal jaayega agar tum nahi ruke to.”

Raj sharma ne padmini ke ubhaaron ko chod diya aur padmini ke upar se hat kar uske baaje mein late gaya, “aapki nafrat manjoor nahi hai. pyar mein duri sah lunga.”

“meri kuch maryaadein hain. Main aisa soch bhi nahi sakti jaisa tum mere saath kar rahe ho. Pyar hua hai hamein shaadi nahi jo ki kuch bhi kar loge tum.”

“mujhe to shak hai ki shaadi ke baad bhi hum najdeek aa paayenge ya nahi. Aap kuch bhi nahi karne dengi mujhe.”

Raj sharma karvat le kar late gaya.

“lo ab naraaj ho gaye. Apne aap shaitaani karte ho aur naraaj bhi khud hi ho jaate ho. Ye bahut badhiya hai. ” Padmini ne kaha Raj sharma ke najdeek aa kar us se lipat gayi.

“hat jaao tum ab main dur hi rahunga tumse. Mujhe kuch nahi chaahiye tumse. Na ab na shaadi ke baad.”

“pyar karti hun tumdse koyi majaak nahi. Kyon hatu main. Haan main itna aage nahi badh sakti jitna tum chaahte ho par dur main bhi nahi rah sakti tumse.”

“hahahahaha….aisa joke aaj tak nahi suna maine. Mere pet mein dard ho jaayega hanste-hanste dubara mat sunana aisa joke.”

“main majaak nahi kar rahi…kaash tum mujhe samajh paate.” Padmini ne bhaavuk andaaj mein kaha.

Raj sharma turant padmini ki taraf muda aur dekha ki padmini subak rahi hai.

“arey in mrignayni aankhon mein ye aansu kyon bhar liye. Pyar mein choti moti ladaayi to chalti rahti hai.”

“chalti hongi par mujhse tumhaari naraajgi bardaast nahi hoti. Mujhse naraaj mat hua karo.” Saari duniya ki maasumiyat jhalak rahi thi padmini ki is baat mein.

Raj sharma ne baahon mein bhar liya padmini ko aur uske maathe ko chum kar bola, “bas chup ho jaao. Main bhi kya karun main aisa hi hun. control nahi hota mujhse. Galat mat samjho mujhe. Meri har baat mein pyar hai… bas pyar. Aur ye pyar jeendagi bhar rahega.”

Dono ek dusre ki baahon mein kho gaye. Is kadar dub gaye ek dusre mein ki psycho ko bilkul bhool hi gaye. Kab neend aa gayi dono ko pata hi nahi chala.

Subah 8 baje jab dudh wale ne bell bajaayi tab padmini ki aankh khuli. Vo pet ke bal padi thi aur Raj sharma uske ubhaaron par haath aur taango par taang daale pada tha.

Padmini ne dheere se Raj sharma ka haath apne ubhaaron se hataaya, “badmaash kahi ka neend mein bhi chain nahi ise.”

Magar Raj sharma ki aankh khul gayi aur vo bola, “kya hua?”

“subah ho gayi hai”

“arey hum dono saath so gaye the…mujhe to viswaas hi nahi ho raha.”

“dudh wala hai shaayad. Hato mujhe jaane do.”

“aisi neend kabhi nahi aayi jeendagi mein. Aane wali jeendagi bahut hasin nazar aa rahi hai mujhe. Thank you padmini meri jeendagi mein aane ke liye.”

Padmini sharma gayi ye sun kar aur boli, “bas…bas rahne do pyar ho chuka hai ab. Flirt ki jaroorat nahi hai tumhe.”

“aapse kabhi flirt nahi kiya. Bas pyar kiya hai.”

“tum sach mein paagal ho.”

“aapke pyar mein paagal hehehe.”

Padmini uth kar chali gayi dudh lene aur Raj sharma aankhe band karke vaapis hasin khayaalon mein kho gaya.

…………………………………………………………………….

Rohit raat bhar psycho ki talaash mein sahar mein bhatakne ke baad ghar chala gaya tha. ghar ja kar bistar par girte hi use bahut gahri neend aa gayi thi.

Subah 10 baje utha vo aur taiyaar ho kar 11 baje hospital chal diya. Jab vo hospital pahuncha to SP saahib ko discharge kiya ja raha tha. magar shalini ko abhi 1 din aur hospital mein rahna tha. SP saahib ko see off karne ke baad vo A S P saahiba se milne pahuncha.

Jab rohit kamre mein ghusa to dekha ki chauhan shalini se baat kar raha tha. shalini ne rohit ko dekha magar ignore karke chauhan se baate karti rahi.

“oh mr rohit panday aaye hain. Achcha madam main chalta hun.” chauhan rohit ki taraf hansta hua baahar chala gaya.

Rohit dur khada sab dekhta raha. vahi khada-khada bola, “madam kaisi hain aap.”

“theek hun…jeenda hun…abhi tum jaao baad mein baat karenge.” Shalini ne berukhi se kaha.

“to chauhan apni game khel gaya. tabhi hans raha tha meri taraf. Koyi baat nahi madam…pyar pahli baar dur nahi hua mujhse. Ab to aadat si hai in baaton ki. Khuss rahein aap hamesha.” Rohit bhaari man se baahar aa gaya. uski aankhe nam thi

Pura din kisi kaam mein man nahi laga rohit ka. Bas apni jeep le kar sahar mein yaha vaha ghumta raha. dubara hospital nahi gaya vo. Shaam ko koyi 5 baje thaane pahuncha to chauhan se vaha bhi saamna ho gaya.

“mr rohit panday kaha the aap. Kab se dhund raha hun aapko.”

“phone no hai shaayad aapke paas mera.”

“ vo sab chodo ye bataao ki tum suspend hone ke baad kaha chale gaye the.”

“kyon aapko kya lena dena.”

“kyonki aapko vaapis vahi jaana padesga aap suspend ho gaye hain hehehehe.”

Rohit ki aankhe phati ki phati rah gayi ye sun kar.

“kya bakwaas kar rahe ho. Kya A S P saahiba ne aapko nahi bataaya. Aap to bahut milte julte hain aajkal unse.”

Rohit daant bheench kar rah gaya. man to kar raha tha ki munh taud de chauhan ka magar chup raha.

Chauhan ne use suspension order thamaya aur bola, “ye lo aur dafa ho jaao yaha se. aur is baar vaapis aane ki sochna bhi mat kyonki main aisa kabhi nahi hone dunga.”

“great bas ab yahi hona baaki tha. madam ko pata tha is baare mein par bataaya nahi mujhe. Sab kuch kitna achcha ho raha hai.”

Rohit apni pistol belt thaane mein jama karva kar paidal hi nikal pada thaane se. peeche se bholu ne awaaj di, “sir rukiye main aapko apne scooter se chod deta hun.”

“nahi rahne do bholu. Jeendagi sadko par hi beetayi hai jyadatar dhakke khaate hue. Atchi baat hai…kuch purani yaadein taaja ho jaayengi. Vaise meri jagah kisko diya ja raha hai ye psycho ka case.



“sir sikendar nam hai unka. Pura naam nahi pata mujhe. kal subah join kar lenge yaha. Suna hai ki kaafi shifaris lagva rahe the vo yaha aane ke liye. Is case par to khaas najar thi unki.”

“hmm…ok main chalta hun.”

Rohit thaane se baahar aa gaya aur soch mein pad gaya, “kal padmini ke ghar attack kiya psycho ne. phir bas ek painting rakhb kar chala gaya. ab mera suspension ho gaya. ye case sikendar ko mil gaya. sab kuch juda hua hai ya phir ittefaak hai. kahi sab kuch psycho ke maayajaal ka hissa to nahi. Aur ye sikendar kyon jor laga raha tha yaha aane ke liye. Jaroor kuch gadbad hai. khair ab main kya kar sakta hun. madam naraaj ho gayi. Naukri bhi chali gayi. Jeendagi bhi kya kuch nahi dekhati hamein.”

Rohit murjhaya hua chehra le kar aage badha ja raha tha. Rah-rah kar shalini ka chehra uski aankho ke saamne ghum raha tha.

"ek aur pyar mere izhaar karne se pahle hi khatam ho gaya. Padmini ne bhi thukra diya tha mera pyar bina meri baat sune. Madam ne bhi vahi kiya. Lagta hai kismat mein kisi ka pyar hai hi nahi."

Achaanak rohit ka phone baja aur uska dhyaan tuta.

"kiska phone hai?" rohit ne phone jeb se nikaalte hue socha.

Phone mohit ka tha.

"hello...haan mohit how are you."

"main theek hun sir. Aap sunaaye. Raj sharma ne mujhe bataaya ki psycho ne padmini ke ghar attack kiya kal raat."

"ye Raj sharma kaun hai?" rohit ne pucha.

"sir Raj sharma ko hum Raj sharma kahte hain."

"oh...haan psycho puri planning se aaya tha magar bina kuch kiye chala gaya. Police walo ko maar kar ghar mein ghusa aur ek painting rakh kar chala gaya. Padmini tak pahunchne ki koshis hi nahi ki usne. Jabki sab kuch uske control mein tha. Meri to kuch samajh mein nahi aa raha. Ye ek maayajaal hai jismein hum sab ulajh chuke hain."

"sir maayajaal theek naam diya aapne ise. Sab kuch uljha hua hai."

"bhai meri naukri chali gayi hai. Mujhe sir mat kaho. Ab main inspector nahi hun. Mujhe rohit kaho..achcha lagega mujhe."

"naukri chali gayi...par kaise?"

"suspend ho gaya hun main."

"par kis baat ke liye?"

"yaha kisi baat ki jaroorat nahi hoti. Agar baat puchne jaayenge to koyi bhi ul jalul baat bol denge."

"kisne kiya suspend aapka, kya A S P saahiba ne?"

"nahi IG saahib ne suspend kiya hai. Madam ka koyi role nahi hai ismein."

"phir ab aap kya karoge."

"ghar ja raha hun philhaal. Aage ka kuch nahi pata."

"rohit agar bura na maano to mere saath aa jaao. Hum milkar koyi na koyi suraag dhund hi lenge psycho ka."

"yaar kya kahu tumhe. Main khud yahi soch raha tha ki tumhaare saath mil kar is psycho ki khoj jaari rakhunga. Magar mohit hamein kuch hathiyaron ki jaroorat hogi. Khaali haath psycho ke peeche ghumna khatre se khaali nahi. Meri pistol to maine jama karva di hai."

"mere paas to desi katta hai ek. Vahi rakhta hun saath."

"us se baat nahi banegi. Main kuch karta hun. Police ki naukri ka experience kab kaam aayega. Main tumhe 9 baje apne ghar milunga. Vahi aa jaana. Baith kar aage ka discuss karte hain."

"rohit hamein ye jaan-na hai ko colonel ke ghar mein kaun rah raha tha. Mujhe lagta hai ki sab taar ab usi ghar se jude hain."

"haan tum theek kah rahe ho. Abhi tak colonel ke relatives ke yaha se bhi kuch pata nahi chala. Shaayad vaha ki local police koyi interest nahi le rahi."

"koyi baat nahi hum khud bhi ja sakte hain vaha puchtaach karne."

"haan theek hai...tum shaam ko ghar aana baaki baatein vahi hongi."

Rohit ne phone kaat diya. Jaise hi usne phone jeb mein rakha ek car ruki uske saamne aakar. Usme se mini nikli baahar aur boli, "kya hua inspector saahib...aaj paidal kaha ghum rahe hain."

"main ab inspector nahi hun...mera suspension ho gaya hai."

"kya? Par kyon."

"aapne badnaam jo kar diya tha media mein hamein."

"dekhiye police par dabaav bana rahi thi main aur kuch nahi. Nothing personal against you."

"jaanta hun...yahi to aapka kaam hai."

"us din ke liye sorry. Jyada tej to nahi lagi thi aapko."

"koyi baat nahi main vo sab bhul chuka hun. Mini tum bhi kaafi samay se is case ko follow kar rahi ho. Kya ek kaam kar sakti ho."

"haan bolo."

"police se to nikal gaya hun par is case ko solve karke rahunga main. Hum ek team bana rahe hain...kya tum shaamil hona chaahogi. Bahut help milegi hamein."

"of course main saath hun tumhaare. Bataao kya karna hai."

"aaj raat theek 9 baje mere ghar pahunch jaana. Aur tumhaare paas ab tak ki jo bhi jaankaari ho leti aana."

"ok aa jaaungi main theek 9 baje."

Mini car mein baith kar chali gayi.

"mr psycho besak meri naukri chali gayi magar tumhaari talaash abhi baaki hai. Chodunga nahi tumhe main." rohit ne man hi man socha.

....................................

Kramashah..........................

rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 13 Dec 2014 00:54

बात एक रात की--102

गतान्क से आगे.................

शालिनी हॉस्पिटल के कमरे में उदास पड़ी थी. सुबह उसने रोहित को इग्नोर किया था और ठीक से बात भी नही की थी. लेकिन जबसे उसे रोहित के सस्पेन्षन का पता चला था तब से बार-बार दरवाजे की ओर देखती थी. कुछ भी आहट होती थी तो आँखो में उम्मीद लेकर दरवाजे की ओर देखती थी कि कही रोहित तो नही.

"रोहित बहुत बुरा लग रहा है मुझे. तुम्हे बात किए बिना ही भगा दिया यहा से. पता नही क्या हो गया था मुझे. चौहान ने जो कुछ बताया तुम्हारे और उसकी बहन के बारे में वो सब सुन कर बहुत बुरा लगा. तुमने मुझे कुछ क्यों नही बताया जबकि मैने तुमसे पूछा भी था. अच्छा नही लगा ये सब सुन कर." शालिनी मन ही मन सोच रही थी.

शालिनी ने फोन उठाया और रोहित को फोन मिलाया. मगर नेटवर्क बिज़ी होने के कारण फोन मिल नही पाया. रोहित ने भी शालिनी का फोन ट्राइ किया मगर एक बार भी नंबर नही मिला.अक्सर वक्त पड़ने पर कम्यूनिकेशन नही हो पाता. ऐसा ही कुछ शालिनी और रोहित के साथ हो रहा था.

“कही मेडम ने मेरे नंबर पर डाइवर्ट तो नही लगा दिया.” रोहित ने सोचा.

………………………………………

रात ठीक 9 बजे रोहित के घर साइको को ट्रॅक करने के लिए टीम तैयार हो रही थी. राज शर्मा भी आ गया था वहाँ पद्‍मिनी को लेकर. एक तरह से एक स्पेशल टास्क फोर्स तैयार हो रही थी.

रोहित ने सभी का स्वागत किया घर पर.

“हम यहा एक ख़ास मकसद से इक्कथा हुए हैं. जैसा कि हम जानते हैं कि सहर में साइको ने ख़ौफ़ मचा रखा है. हम सभी का कभी ना कभी सामना हो चुका है साइको से. इसलिए ये हमारी मोरल ड्यूटी बनती है की उसे पकड़ने की हर संभव कोशिस करें.” रोहित ने कहा.

“मेरा कभी सामना नही हुआ साइको से” मिनी ने कहा.

“ओह मुझे लगा रिपोर्टर होने के नाते तुम भी कही ना कही टकरा गयी होहि साइको से. लेकिन एक बात सुन लीजिए. साइको बिना नकाब के रोज हम सभी के सामने घूम रहा है. वो नकाब इसलिए लगाता है अब क्योंकि वो समाज में अपनी इज़्ज़त खोने से डरता है. मिनी तुम शायद साइको से ज़रूर मिली होगी पर तुम्हे ये नही पता कि वो साइको है.”

“ह्म्म इंट्रेस्टिंग.” मिनी ने कहा.

“सर कल रात उसने बहुत अजीब किया पद्‍मिनी के घर पर. उसकी क्या एक्सप्लनेशन है…वो सिर्फ़ पैंटिंग रखने नही आएगा घर पर.?” राज शर्मा ने कहा

“इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए हम यहा इकट्ठा हुए हैं. चलिए हम सब मिल कर सोचते हैं कि उसने ऐसा क्यों किया होगा.”

“उसे अपने विक्टिम में ख़ौफ़ फैलाने में मज़ा आता है. हो सकता है वो बस ये काम करने गया हो कल रात पद्‍मिनी के घर.” मिनी ने कहा.

“लेकिन इसके लिए उसने बहुत बड़ा ख़तरा मोल लिया. कारण ज़रूर कोई बड़ा होना चाहिए.” रोहित ने कहा.

“हो सकता है कि वो पोलीस से डर से भाग गया हो?” मोहित ने कहा.

“पर पोलीस बहुत देर से पहुँची थी. वो बहुत देर तक उपर घूमता रहा था.” राज शर्मा ने कहा.

“जो पैंटिंग वो लाया था वो भी कोई फ्रेश पैंटिंग नही थी. इसलिए ये भी नही कह सकते कि वो पैंटिंग बना रहा था उपर.” रोहित ने कहा.

“रोहित तुम सही कह रहे थे. ये ज़रूर कोई मायाजाल है साइको का. उसने ऐसा क्यों किया ये सिर्फ़ वही बता सकता है.” मोहित ने कहा.

“मायाजाल तो है पर मुझे यकीन है कि हम सब मिल कर इसे सुलझा सकते हैं.” रोहित ने कहा.

पद्‍मिनी चुपचाप बैठी सब सुन रही थी. रोहित ने उसकी तरफ देखा और बोला, “पद्‍मिनी तुम भी कुछ बोलो.हम सब यहाँ एक मकसद से इकट्ठा हुए हैं. इस से पहले की साइको हमारी आर्ट बना दे हमें उसकी आर्ट बनानी होगी. ये हम तभी कर पाएँगे जब हम उसे ढूंड लेंगे.”

“रोहित मेरे दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया है. मैने उसे देखा था और देख कर भूल गयी. अगर उसका चेहरा याद होता तो कुछ कर भी पाती…अब क्या करूँ कुछ समझ में नही आता.”

“कोई बात नही पद्‍मिनी…तुम हमारे साथ हो यहा यही बड़ी बात है हमारे लिए. कुछ भी ध्यान आए तो शेर ज़रूर करना.” रोहित ने कहा

“हां शुवर.” पद्‍मिनी ने कहा.

“हमारा प्लान ऑफ आक्षन क्या है?” राज शर्मा ने कहा.

“हमें कर्नल के घर के रहश्य से परदा उठाना है. पता करना है कि वहाँ कौन रह रहा था. ये काम मैं और मोहित करेंगे.” रोहित ने कहा.

“मेरे लिए क्या हुकुम है.” मिनी ने पूछा.

“तुम कुछ भी इन्फर्मेशन नही लाई साइको के बारे में.” रोहित ने कहा.

“जितना तुम्हे पता है उतना ही मुझे पता है. ज़्यादा कुछ मैं भी नही जानती.” मिनी ने कहा.

“लेकिन अब हमें सब कुछ जान-ना है इस बारे में. सभी एक दूसरे का नंबर ले लेते हैं. कोई भी नयी जानकारी मिलेगी किसी को तो तुरंत एक दूसरे से कॉंटॅक्ट करेंगे. और राज शर्मा तुम हर वक्त सतर्क रहना. साइको फिर से आएगा वहाँ.”

“रोहित क्यों ना पद्‍मिनी के घर के आस-पास ही हम भी एक कमरा ले लें. साइको पद्‍मिनी के पीछे है. वो वही आएगा दुबारा. हम वही उसे ट्रॅप कर सकते हैं.”

“हां ठीक कह रहे हो. कल ही ये काम कर देंगे. दिन में हम चाहे कही भी रहें पर रात को पद्‍मिनी के घर के आस-पास रहना ज़रूरी है.” रोहित ने कहा.

बाते करते करते 10:30 हो गये. सभी अपने अपने घर चल दिए. रोहित राज शर्मा और पद्‍मिनी के साथ अपनी कार ले कर चल दिया. उसे हॉस्पिटल जाना था शालिनी से मिलने के लिए. रास्ते में रोहित हॉस्पिटल की तरफ मूड गया और राज शर्मा पद्‍मिनी के घर की तरफ. रोहित चाहता था कि उन्हे घर तक छोड़ कर आए मगर राज शर्मा ने मना कर दिया, “सर मैं संभाल लूँगा. आप चिंता मत करो.”

“साइको ने सबके दिमाग़ हिला कर रखे हुए हैं.” राज शर्मा ने कहा.

“हां…उसे समझना बहुत मुस्किल काम है.”

अचानक राज शर्मा ने एक जगह जीप रोक दी.

“क्या हुआ?”

“यहा से मेरा घर काफ़ी नज़दीक है…क्या चलोगि वहाँ?” राज शर्मा ने कहा

“कही भी चलूंगी मैं तुम्हारे साथ पर मेरे साथ शालीनता से पेश आना.”

“ये पाप ही नही कर सकता मैं बाकी कुछ भी कर सकता हूँ आपके लिए.” राज शर्मा ने हंसते हुए कहा.

“अब क्या करूँ…चलना तो पड़ेगा ही तुम्हारे साथ. चलो जो होगा देखा जाएगा.”

“ये हुई ना बात. प्यार में अड्वेंचर का भी अपना ही मज़ा है.” राज शर्मा ने जीप अपने घर की तरफ मोड़ दी.

कोई 10 मिनिट में ही राज शर्मा अपने घर पहुँच गया.

“घर के नाम पर ये छोटा सा कमरा है मेरे पास. छोटा सा किचन है अंदर ही और एक टाय्लेट है. आपकी तरह महलो में नही रहा कभी.” राज शर्मा ने टाला खोलते हुए कहा.

“बस-बस ताना मत मारो. अकेले व्यक्ति के लिए एक कमरा बहुत होता है.”

“हां पर आपसे शादी करने के बाद नया घर लेना होगा मुझे.” राज शर्मा ने कुण्डी खोलते हुए कहा.

“आईए अंदर और इस घर को अपनी उपस्थिति से महका दीजिए.” राज शर्मा ने कहा.

पद्‍मिनी अंदर आई तो हैरान रह गयी, “ऑम्ग ये घर है या कबाड़खाना. सब कुछ बिखरा पड़ा है.”

“कयि दिनो से तो ड्यूटी आपके साथ लगी हुई है. यहा कौन ठीक करेगा आकर सब कुछ. मैं अभी सब ठीक करता हूँ. सारी रात यही बितानी है हमें”

“क्यों क्या अब हम घर नही जाएँगे.”

“क्या ये आपका घर नही.”

“नही वो बात नही है पर.”

“ओह हां ये आपकी हसियत के अनुसार नही है…हैं ना”

“ऐसा नही है राज शर्मा…मेरा वो मतलब नही है. हम एक साथ इस कमरे में कैसे रहेंगे.”

“क्यों कल रात हम एक साथ नही सोए थे क्या छोटे से बिस्तर पर. यहा एक साथ रहने में क्या दिक्कत है. मैं जल्दी से सफाई कर देता हूँ आप बैठिए.” राज शर्मा ने कहा.

पद्‍मिनी ने कुछ नही कहा मगर मन ही मन सोचा, “तुमसे इतना प्यार करती हूँ कि तुम्हारी कोई भी बात टाली नही जाती. उसी चीज़ का तुम फ़ायडा उठा रहे हो.”

कुछ देर पद्‍मिनी राज शर्मा को काम करते हुए देखती रही फिर खुद भी उसके साथ लग गयी. कोई 20 मिनिट में दोनो ने कमरे को एक दम चमका दिया.

“पसीने-पसीने हो गयी मैं तो…नहाना पड़ेगा अब.”

“हां नहा लीजिए…यहा पानी की कोई दिक्कत नही है. सारा दिन पानी रहता है.”

“ठीक है फिर मुझे कोई तोलिया दो मैं नहा कर आती हूँ.”

राज शर्मा ने एक तोलिया थमा दिया पद्‍मिनी को और बोला, “वैसे नहाना मुझे भी था. अगर आप इजाज़त दें तो मैं भी आ जाता हूँ आपके साथ. टाइम की बचत हो जाएगी.”

“क्या करोगे टाइम की बचत करके. सारी रात अब हम यही हैं ना. वेट करो यही चुपचाप…बदमाश कही के.” पद्‍मिनी तोलिया ले कर बाथरूम में घुस गयी.

कोई 20 मिनिट बाद वो नहा कर निकली बाहर तो राज शर्मा के होश उड़ गये.

“ऐसे क्या देख रहे हो.”

“पानी की बूँदो में भीगे हुए ये काले-काले बाल एक कामुक रस पैदा कर रहे हैं मेरे सीने में.”

“चुपचाप नहा लो जाकर…मुझे बाल सुखाने दो.”

राज शर्मा दूसरा तोलिया लेकर घुस गया बातरूम में. वो कोई 10 मिनिट में ही नहा कर निकल आया.

जब वो बाहर निकला तो पद्‍मिनी की पीठ थी उसकी तरफ और वो अपने बाल सूखा रही थी. राज शर्मा उसके सुंदर शरीर को उपर से नीचे तक देखने से खुद को रोक नही पाया. पतली कमर का कटाव देखते ही बनता था. राज शर्मा तो बस देखता ही रह गया. उसकी साँसे तेज चलने लगी. जब उसकी नज़र थोड़ा और नीचे गयी तो उसकी सांसो की रफ़्तार और तेज हो गयी. पतली कमर के नीचे थोड़ा बाहर को उभरे हुए नितंब पद्‍मिनी के योवन की सोभा बढ़ा रहे थे.

“उफ्फ मैं पागल ना हो जाउ तो क्या करूँ.” राज शर्मा ने मन ही मन सोचा.

राज शर्मा धीरे से आगे बढ़ा और दोनो हाथो से पद्‍मिनी के नितंबो को थाम लिया.

“आअहह” पद्‍मिनी उछल कर आगे बढ़ गयी. “क्या कर रहे हो…तुमने तो डरा दिया मुझे.” पद्‍मिनी गुस्से में बोली.

“रोक नही पाया खुद को. सॉरी.”

“कुछ भी कर लो पहले और फिर सॉरी बोल दो. ये बहुत अच्छा तरीका है तुम्हारा.” पद्‍मिनी ने कहा.

“हां तरीका तो अच्छा है हिहिहीही….”

“बदमाश हो तुम एक नंबर के.”

“वो तो हूँ” राज शर्मा ने हंसते हुए कहा.

पद्‍मिनी दीवार पर टाँगे छोटे से शीसे के सामने आकर अपने बाल संवारने लगी, “तुम सच में पागल हो.”

राज शर्मा ने पीछे से आकर पद्‍मिनी को दबोच लिया अपनी बाहों में और पद्‍मिनी के गले पर किस करके बोला, “पद्‍मिनी आइ लव यू.”

“आइ लव यू टू राज शर्मा पर.”

“पर क्या?”

“हम दोनो बिल्कुल अलग हैं राज शर्मा. तुम जो चाहते हो मुझसे उसमें मैं तुम्हारा साथ नही दे सकती.”

“क्या चाहता हूँ मैं ज़रा खुल कर बताओ.”

“तुम्हे सब पता है…नाटक मत करो.”

पद्‍मिनी के इतने नज़दीक आकर राज शर्मा का लिंग काले नाग की तरह फूँकारे मारने लगा था. वो अपने भारी भरकम रूप में आ गया था और पद्‍मिनी को अपने नितंबो पर बहुत अच्छे से फील हो रहा था.

“राज शर्मा प्लीज़ हटा लो इसे.”

“क्या हटा लूँ. कुछ समझ में नही आया.” राज शर्मा ने पद्‍मिनी को और ज़ोर से कश लिया अपनी बाहों में और उसकी गर्दन को चूमने लगा.

क्रमशः........................

..

BAAT EK RAAT KI--102

gataank se aage.................

Shalini hospital ke kamre mein udaas padi thi. Subah usne rohit ko ignore kiya tha aur theek se baat bhi nahi ki thi. Lekin jabse use rohit ke suspension ka pata chala tha tab se baar-baar darvaaje ki aur dekhti thi. Kuch bhi aahat hoti thi to aankho mein ummeed lekar darvaaje ki aur dekhti thi ki kahi rohit to nahi.

"rohit bahut bura lag raha hai mujhe. tumhe baat kiye bina hi bhaga diya yaha se. Pata nahi kya ho gaya tha mujhe. Chauhan ne jo kuch bataaya tumhaare aur uski bahan ke baare mein vo sab sun kar bahut bura laga. Tumne mujhe kuch kyon nahi bataaya jabki maine tumse pucha bhi tha. Achcha nahi laga ye sab sun kar." shalini man hi man soch rahi thi.

Shalini ne phone uthaya aur rohit ko phone milaya. Magar network busy hone ke kaaran phone mil nahi paaya. Rohit ne bhi shalini ka phone try kiya magar ek baar bhi number nahi mila.Aksar vakt padne par communication nahi ho paata. Aisa hi kuch shalini aur rohit ke saath ho raha tha.

“kahi madam ne mere number par divert to nahi laga diya.” Rohit ne socha.

………………………………………

Raat theek 9 baje rohit ke ghar psycho ko track karne ke liye team taiyaar ho rahi thi. Raj sharma bhi a gaya tha vaha padmini ko lekar. Ek tarah se ek special task force taiyaar ho rahi thi.

Rohit ne sabhi ka sawaagat kiya ghar par.

“hum yaha ek khaas maksad se ikkatha hue hain. Jaisa ki hum jaante hain ki sahar mein psycho ne khauf macha rakha hai. hum sabhi ka kabhi na kabhi saamna ho chuka hai psycho se. isliye ye hamaari moral duty banti hai ki use pakadne ki har sambhav koshis karein.” Rohit ne kaha.

“mera kabhi saamna nahi hua psycho se” mini ne kaha.

“oh mujhe laga reporter hone ke naate tum bhi kahi na kahi takra gayi hohi psycho se. lekin ek baat sun lijiye. Psycho bina nakaab ke roj hum sabhi ke saamne ghum raha hai. vo nakaab isliye lagaata hai ab kyonki vo samaaj mein apni ijjat khone se darta hai. mini tum shaayad psycho se jaroor mili hogi par tumhe ye nahi pata ki vo psycho hai.”

“hmm interesting.” Mini ne kaha.

“sir kal raat usne bahut ajeeb kiya padmini ke ghar par. Uski kya explanation hai…vo sirf painting rakhne nahi aayega ghar par.?” Raj sharma ne kaha

“isi guthi ko suljhaane ke liye hum yaha ikkatha hue hain. Chaliye hum sab mil kar sochte hain ki usne aisa kyon kiya hoga.”

“use apne victim mein khauf failaane mein maja aata hai. ho sakta hai vo bas ye kaam karne gaya ho kal raat padmini ke ghar.” Mini ne kaha.

“lekin iske liye usne bahut bada khatra mol liya. Kaaran jaroor koyi bada hona chaahiye.” Rohit ne kaha.

“ho sakta hai ki vo police se dar se bhaag gaya ho?” mohit ne kaha.

“par police bahut der se pahunchi thi. vo bahut der tak upar ghumta raha tha.” Raj sharma ne kaha.

“jo painting vo laaya tha vo bhi koyi fresh painting nahi thi. isliye ye bhi nahi kah sakte ki vo painting bana raha tha upar.” Rohit ne kaha.

“rohit tum sahi kah rahe the. Ye jaroorb koyi maayajaal hai psycho ka. Usne aisa kyon kiya ye sirf vahi bata sakta hai.” mohit ne kaha.

“maayajaal to hai par mujhe yakin hai ki hum sab mil kar ise suljha sakte hain.” Rohit ne kaha.

padmini chupchaap baithi sab sun rahi thi. rohit ne uski taraf dekha aur bola, “padmini tum bhi kuch bolo.hum sab yaha ek maksad se ikkatha hue hain. Is se pahle ki psycho hamaari art bana de hamein uski art banaani hogi. Ye hum tabhi kar paayenge jab hum use dhund lenge.”

“rohit mere deemag ne kaam karna band kar diya hai. maine use dekha tha aur dekh kar bhool gayi. Agar uska chehra yaad hota to kuch kar bhi paati…ab kya karun kuch samajh mein nahi aata.”

“koyi baat nahi padmini…tum hamaare saath ho yaha yahi badi baat hai hamaare liye. Kuch bhi dhyaan aaye to share jaroor karna.” Rohit ne kaha

“haan sure.” Padmini ne kaha.

“hamaara plan of action kya hai?” Raj sharma ne kaha.

“hamein colonel ke ghar ke rahashya se parda uthaana hai. pata karna hai ki vaha kaun rah raha tha. ye kaam main aur mohit karenge.” rohit ne kaha.

“mere liye kya hukum hai.” mini ne pucha.

“tum kuch bhi information nahi laayi psycho ke baare mein.” Rohit ne kaha.

“jitna tumhe pata hai utna hi mujhe pata hai. jyada kuch main bhi nahi jaanti.” Mini ne kaha.

“lekin ab hamein sab kuch jaan-na hai is baare mein. Sabhi ek dusre ka number le lete hain. Koyi bhi nayi jaankari milegi kisi ko to turant ek dusre se contact karenge. Aur Raj sharma tum har vakt satark rahna. Psycho phir se aayega vaha.”

“rohit kyon na padmini ke ghar ke aas-paas hi hum bhi ek kamra le lein. Psycho padmini ke peeche hai. vo vahi aayega dubaara. Hum vahi use trap kar sakte hain.”

“haan theek kah rahe ho. Kal hi ye kaam kar denge. Din mein hum chaahe kahi bhi rahein par raat ko padmini ke ghar ke aas-paas rahna jaroori hai.” rohit ne kaha.

Baate karte karte 10:30 ho gaye. sabhi apne apne ghar chal diye. Rohit Raj sharma aur padmini ke saath apni car le kar chal diya. Use hospital jaana tha shalini se milne ke liye. Raaste mein rohit hospital ki taraf mud gaya aur Raj sharma padmini ke ghar ki taraf. Rohit chaahta tha ki unhe ghar tak chod kar aaye magar Raj sharma ne mana kar diya, “sir main sambhaal lunga. Aap chinta mat karo.”

“psycho ne sabke deemag heela kar rakhe hue hain.” Raj sharma ne kaha.

“haan…use samajhna bahut muskil kaam hai.”

Achaanak Raj sharma ne ek jagah jeep rok di.

“kya hua?”

“yaha se mera ghar kaafi nazdik hai…kya chalogi vaha?” Raj sharma ne kaha

“kahi bhi chalungi main tumhaare saath par mere saath shaalinta se pesh aana.”

“ye paap hi nahi kar sakta main baaki kuch bhi kar sakta hun aapke liye.” Raj sharma ne hanste hue kaha.

“ab kya karun…chalna to padega hi tumhaare saath. Chalo jo hoga dekha jaayega.”

“ye hui na baat. Pyar mein adventure ka bhi apna hi maja hai.” Raj sharma ne jeep apne ghar ki taraf mod di.

Koyi 10 minute mein hi Raj sharma apne ghar pahunch gaya.

“ghar ke naam par ye chota sa kamra hai mere paas. Chota sa kitchen hai ander hi aur ek toilet hai. aapki tarah mahlo mein nahi raha kabhi.” Raj sharma ne taala kholte hue kaha.

“bas-bas taana mat maaro. Akele vyakti ke liye ek kamra bahut hota hai.”

“haan par aapse shaadi karne ke baad naya ghar lena hoga mujhe.” Raj sharma ne kundi kholte hue kaha.

“aaeeye ander aur is ghar ko apni upasthiti se mahka dijiye.” Raj sharma ne kaha.

Padmini ander aayi to hairaan rah gayi, “omg ye ghar hai ya kabaadkhana. Sab kuch bikhra pada hai.”

“kayi dino se to duty aapke saath lagi hui hai. yaha kaun theek karega aakar sab kuch. Main abhi sab theek karta hun. Saari raat yahi beetani hai hamein”

“kyon kya ab hum ghar nahi jaayenge.”

“kya ye aapka ghar nahi.”

“nahi vo baat nahi hai par.”

“oh haan ye aapki hasiyat ke anusaar nahi hai…hain na”

“aisa nahi hai Raj sharma…mera vo matlab nahi hai. hum ek saath is kamre mein kaise rahenge.”

“kyon kal raat hum ek saath nahi soye the kya chote se bistar par. yaha ek saath rahne mein kya dikkat hai. main jaldi se safaayi kar deta hun aap baithiye.” Raj sharma ne kaha.

Padmini ne kuch nahi kaha magar man hi man socha, “tumse itna pyar karti hun ki tumhaari koyi bhi baat taali nahi jaati. Usi cheez ka tum faayda utha rahe ho.”

Kuch der padmini Raj sharma ko kaam karte hue dekhti rahi phir khud bhi uske saath lag gayi. Koyi 20 minute mein dono ne kamre ko ek dum chamka diya.

“pasine-pasine ho gayi main to…nahana padega ab.”

“haan naha lijiye…yaha paani ki koyi dikkat nahi hai. saara din paani rahta hai.”

“theek hai phir mujhe koyi toliya do main naha kar aati hun.”

Raj sharma ne ek toliya thama diya padmini ko aur bola, “vaise nahaana mujhe bhi tha. agar aap ijaajat dein to main bhi aa jaata hun aapke saath. Time ki bachat ho jaayegi.”

“kya kroge time ki bachat karke. Saari raat ab hum yahi hain na. wait karo yahi chupchaap…badmaash kahi ke.” Padmini toliya le kar bathroom mein ghus gayi.

Koyi 20 minute baad vo naha kar nikli baahar to Raj sharma ke hosh ud gaye.

“aise kya dekh rahe ho.”

“paani ki bundo mein bheege hue ye kaale-kaale baal ek kaamuk ras paida kar rahe hain mere sheene mein.”

“chupchaap naha lo jaakar…mujhe baal sukhane do.”

Raj sharma dusra toliya lekar ghus gaya bathroom mein. Vo koyi 10 minute mein hi naha kar nikal aaya.

Jab vo baahar nikla to padmini ki peeth thi uski taraf aur vo apne baal sukha rahi thi. Raj sharma uske sundar sharir ko upar se neeche tak dekhne se khud ko rok nahi paaya. patli kamar ka kataav dekhte hi banta tha. Raj sharma to bas dekhta hi rah gaya. uski sanse tej chalne lagi. jab uski nazar thoda aur neeche gayi to uski saanso ki raftaar aur tej ho gayi. Patli kamar ke neeche thoda baahar ko ubhre hue nitamb padmini ke yovan ki sobha badha rahe the.

“uff main paagal na ho jaaun to kya karun.” Raj sharma ne man hi man socha.

Raj sharma dheere se aage badha aur dono haatho se padmini ke nitambo ko thaam liya.

“aaahhh” padmini uchal kar aage badh gayi. “kya kar rahe ho…tumne to dara diya mujhe.” Padmini gusse mein boli.

“rok nahi paaya khud ko. sorry.”

“kuch bhi kar lo pahle aur phir sorry bol do. Ye bahut achcha tarika hai tumhaara.” Padmini ne kaha.

“haan tarika to achcha hai hihihihi….”

“badmaash ko tum ek number ko.”

“vo to hun” Raj sharma ne hanste hue kaha.

Padmini deewar par tange chote se sheese ke saamne aakar apne baal sanvaarne lagi, “tum sach mein paagal ho.”

Raj sharma ne peeche se aakar padmini ko daboch liya apni baahon mein aur padmini ke gale par kiss karke bola, “padmini I love you.”

“I love you too Raj sharma par.”

“par kya?”

“hum dono bilkul alag hain Raj sharma. Tum jo chaahte ho mujhse usmein main tumhaara saath nahi de sakti.”

“kya chaahta hun main jara khul kar bataao.”

“tumhe sab pata hai…naatak mat karo.”

Padmini ke itne najdik aakar Raj sharma ka ling kaale naag ki tarah funkaare maarne laga tha. vo apne bhaari bharkam rup mein aa gaya tha aur padmini ko apne nitambo par bahut achche se feel ho raha tha.

“Raj sharma please hata lo ise.”

“kya hata lun. Kuch samajh mein nahi aaya.” Raj sharma ne padmini ko aur jor se kash liya apni baahon mein aur uski gardan ko chumne laga.

Kramashah..........................