बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:05

raj sharma stories

बात एक रात की--28

गतान्क से आगे.................

"नही मैं वाहा नही जाउन्गि...तुम जाओ मैं यही वेट करूँगी"

"परवीन वाहा हुआ तो मैं उसे कैसे पहचानूँगा...चलो ना पूजा"

"ठीक है...चलो...पर कोई बकवास मत करना"

"ठीक है अब चलो तो"

बाइक को सड़क किनारे छुपा कर दोनो चुपचाप फार्म हाउस की तरफ चल पड़ते हैं. "हम झाड़ियों के रास्ते जाएँगे सामने से जाना ठीक नही" मोहित ने कहा.

"ह्म्म ठीक कह रहे हो मैं भी ऐसा ही सोच रही थी."

"चुपचाप दबे पाँव मेरे पीछे आ जाओ." मोहित ने कहा.

"तुम चलो मैं आ रही हूँ"

"बहुत सुनसान इलाक़े में बनाया है फार्म हाउस" मोहित ने कहा.

"सस्स्शह तुम्हे कुछ सुनाई दिया" पूजा ने कहा.

"हां...शायद नज़दीक ही कोई है"

"कल साहिब लोगो ने एक लड़की की खूब मारी थी यही इस घास पर" उन्हे आवाज़ आती है.

मोहित और पूजा आवाज़ के नज़दीक पहुँच जाते हैं...पर वो अभी भी झाड़ियों के पीछे रहते हैं.

"चलो यहा से" पूजा ने धीरे से कहा.

"अरे रूको तो लाइव ब्लू फिल्म तो देख ले" मोहित ने कहा.

उनके सामने रामू एक औरत को बाहों में लिए खड़ा था. औरत कोई 35 साल की थी, रंग सॉफ था और शरीर गतिला था.

"क्या यही परवीन है?"

"नही ये उसका नौकर रामू है"

"ह्म्म नौकर ने क्या किस्मत पाई है...क्या माल हाथ लगा है सेयेल के" मोहित ने कहा.

"मुझे लगता है परवीन यहा नही है हमे चलना चाहिए" पूजा ने कहा.

"परवीन का पता तो जानता ही होगा ये नौकर थोड़ा रूको ना" मोहित ने कहा.

"तुम्हारे साहिब आ गये तो?" उस औरत ने पूछा.

"साहिब तो सहर से बाहर गये हैं...कल शाम को ही निकल गये थे यहा से" रामू ने कहा.

"अंदर घर में चलो ना यहा खुले में कुछ अजीब लगता है"

"कल उस लड़की की चुदाई देख कर मन कर रहा है की यही खुले में मस्ती की जाए चलो जल्दी कोड़ी हो जाओ" रामू ने कहा.

"ये किस लड़की की बात कर रहा है पूजा" मोहित ने पूछा.

"मुझे क्या पता...चलो यहा से." पूजा गुस्से में बोली.

"धीरे बोलो बाबा वो लोग सुन लेंगे." मोहित ने कहा.

रामू ने उस औरत को अपने आगे झुका दिया और अपने लंड को उसकी गान्ड पर रगड़ने लगा.

"अफ क्या मस्त गान्ड है कास इस नौकर की जगह मैं होता उसके पीछे....अभी डाल देता पूरा का पूरा लंड गान्ड में" मोहित बड़बड़ाया.

"तुम यहा मस्ती करने आए हो तो...मैं जा रही हूँ." पूजा ने कहा.

मोहित ने पूजा का हाथ पकड़ा और बोला, "रूको तो मैं इस नौकर से परवीन के बारे में पूछूँगा."

"ये काम बाद में कर लेना...मैने तुम्हे ये जगह दीखा दी है अब चलो यहा से" पूजा ने कहा.

"बस थोड़ी देर ये नज़ारा ले लेने दो फिर चलते हैं" मोहित ने कहा.

पूजा पाँव पटक कर रह गयी.

"इस मोटी गान्ड पर लंड रगड़ना अच्छा लगता है मुझे" रामू ने कहा.

"आअहह तो रागडो ना लंड जी भरके किसने रोका है....पर अंदर मत डालना...आहह"

"तेरी चूत मारने से फ़ुर्सत मिले तब ना गान्ड में डालूँगा...वैसे सच सच बता ये गान्ड इतनी मोटी कैसे हो गयी जब तूने मरवाई नही एक भी बार."

"पता नही बचपन से ही ऐसी है....डाल दो ना अब चूत में मैं कब तक झुकी रहूंगी"

"थोड़ा रूको ना इस मोटी गान्ड पर लंड रगड़ कर इसे गरम तो कर लूँ"

"इसके लंड से भी मोटा लंड है मेरा" मोहित ने कहा.

"अच्छा मज़ाक अच्छा कर लेते हो?" पूजा मुस्कुराइ.

"दीखाऊ क्या अभी?" मोहित ने कहा.

"मुझे क्यों दीखाओगे उस औरत को दीखाओ जा के...मेरे उपर कोई असर नही होने वाला."

"हाई काश मैं वाहा जा पाता....क्या मस्त गान्ड है...ऐसी मोटी गान्ड नही मारी मैने आज तक" मोहित ने कहा.

"तुम्हारे जैसे लड़के मुझे बिल्कुल पसंद नही जो कही भी लार टपकाने लगते हैं" पूजा ने कहा.

"पूजा अगर तुम मान जाओ ना तो कसम से किसी की तरफ नही देखूँगा...तुम्हारा मुकाबला कोई नही कर सकता...तुम बिल्कुल पद्‍मिनी जैसी हो....बहुत सुंदर." मोहित ने कहा.

"अच्छा बेहतर हो की तुम दिन में सपने लेना छोड़ दो...तुम्हारे जैसे लोगो से मुझे नफ़रत है नफ़रत."

"उफ्फ तुम्हारी लेने के लिए बहुत पाप्ड बेलने पड़ेंगे" मोहित ने कहा.

"बंद करो बकवास अपनी...मैं वापिस जा कर पद्‍मिनी को सब बता दूँगी कि तुम यहा क्या कर रहे थे."

"नही पूजा ऐसा मत करना वो पहले ही मुझसे नाराज़ है" मोहित ने कहा.

"ठीक है चलो फिर."

"रूको रूको देखो डाल दिया उसने उसकी चूत में थोड़ा तो देख लेने दो." मोहित ने कहा.

"तुम देखो मैं जा रही हूँ" पूजा ने कहा.

पूजा मूड कर दबे पाँव वाहा से चल दी. पूजा के जाते ही मोहित झाड़ियो से बाहर आ गया.

"अरे भाई परवीन जी क्या यही रहते हैं." मोहित ने पूछा.

आनन फानन में जल्दी से रामू ने अपना लंड उस औरत की चूत से निकाला. लंड के बाहर आते ही वो औरत अपने कपड़े जल्दी से ठीक करके वाहा से भाग खड़ी हुई.

"क..क..कौन हो तुम और यहा क्या कर रहे हो." रामू ने कहा.

"भाई मैं परवीन जी के गाँव से आया हूँ उनसे मिलना था. किसी ने इस फार्म हाउस का पता बताया तो चला आया. यहा आया तो क्या देखता हूँ एक महिला झुकी हुई हैं और आप उसकी चूत में लंड डाले खड़े हैं. सोचा वापिस चला जाउ लेकिन फिर रुक गया. सोचा बात करने में हर्ज़ ही क्या है"

"थोड़ी देर रुक नही सकते थे...एक भी धक्का नही मारने दिया उसकी चूत में"

"कोई बात नही मेरे जाने के बाद धक्के मारते रहिएगा...आप बस परवीन जी का घर का अड्रेस दे दो"

"वो तो भाग गयी अब क्या मैं हवा में धक्के मारु." रामू झल्ला कर बोला.

"रुकावट के लिए खेद है भाई...कृपया करके अड्रेस दे दीजिए मैं बहुत परेशान हूँ."

"ठीक है ठीक है अभी देता हूँ." रामू ने कहा.

रामू ने मोहित को अड्रेस दे दिया. अड्रेस ले कर मोहित मुस्कुराता हुआ फार्म हाउस से बाहर आ गया.

पूजा झाड़ियों के रास्ते सड़क पर वापिस आ गयी और मोहित फार्म हाउस से अड्रेस ले कर मेन गेट से बाहर आ गया.

"बड़ी जल्दी वापिस आ गये" पूजा ने पूछा.

"अड्रेस मिल गया तो आ गया...मैं यहा इसी काम से तो आया था...काम होते ही आ गया" मोहित ने कहा.

"ऐसा कैसे हो गया...वो लोग तो"

"हैरान हो ना...मैने सर्प्राइज़्ड एंट्री की वाहा और काम बन गया....तुम थोड़ी देर रुकती तो अच्छा ख़ासा ड्रामा देखने को मिल जाता."

"अब चलें वापिस?" पूजा ने कहा.

"क्या मैं तुम्हे बिल्कुल भी अच्छा नही लगता?" मोहित ने पूछा.

"क्यों ऐसा क्या है तुम में जो मुझे अच्छा लगेगा.? तुम्हारी तो बीवी भी छोड़ गयी ना तुम्हे...अगर तुम में कोई गुण होते तो क्या तुम्हारी बीवी छोड़ के जाती" पूजा ने कहा.

"वो अलग ही कहानी है पूजा...खैर छोड़ो...मुझसे ग़लती हो गयी जो तुम्हे नगमा जैसी समझ बैठा. मुझे लगा तुम नगमा की बहन हो तो उसके जैसी ही होगी. हालाँकि मुझे राज ने बताया तो था कि तुम नगमा जैसी नही हो पर यकीन नही था. तुम्हे पटाने का मेरा तरीका ग़लत था. मुझे तुमसे ऐसी अश्लील बाते नही करनी चाहिए थी. अब मैं कुछ और तरकीब लगाउन्गा." मोहित ने कहा.

"तुम्हारी कोई भी तरकीब काम नही करने वाली...चलो अब"

"ये तो वक्त ही बताएगा." मोहित ने कहा.

दोनो बाइक पर बैठ कर वापिस चल दिए.

..............................

......................

राज जाय्निंग की फॉरमॅलिटी पूरी करने के बाद सीधा शालिनी ठाकुर के रूम की तरफ चल दिया. वो उसका धन्यवाद करना चाहता था. जब वो कमरे में घुसा तो शालिनी अख़बार पढ़ रही थी. राज भाग कर शालिनी के कदमो में गिर गया और उसके पैर पकड़ लिए.

"अरे ये क्या कर रहे हो कौन हो तुम और तुम्हे अंदर किसने आने दिया"

राज ने सर नीचे झुकाए हुए कहा,"मैं राज शर्मा हूँ मेडम...आप यहा ना आती तो मेरी जाय्निंग कभी नही हो पाती."

"उठो....तुम अब एसआइ हो और ऐसे आम आदमी की तरह बिहेव मत करो वरना अभी वापिस नौकरी से निकाल दूँगी" शालिनी ने गुस्से में कहा.

राज फ़ौरन खड़ा हो गया.

"अरे ये तो बहुत यंग है...मैने सोचा कोई काफ़ी उमर की होगी. बेकार में पाँव छू कर अपनी फ़ज़ीहत करवा ली" राज ने सोचा.

"तुमने जाय्निंग कर ली" शालिनी ने पूछा.

"हां मेडम" राज ने जवाब दिया.

"जब किसी सीनियर के सामने जाओ तो हाथ पीछे रखो...क्या इतना भी नही जानते...जेब से बाहर निकालो हाथ आंड स्टॅंड प्रॉपर्ली" शालिनी ने कहा.

राज ने फ़ौरन हाथ जेब से निकाल कर पीछे कर लिए, "सॉरी मेडम मेरा पहला दिन है और आप जैसी सुंदर लड़की सामने है...मेरा दीमाग नही चल रहा. आगे से ध्यान रखूँगा"

"मैं कोई लड़की नही हूँ तुम्हारी बॉस हूँ...बिहेव युवरसेल्फ"

"सॉरी मेडम"

तभी चौहान अंदर आता है.

"मिस्टर चौहान इसको ट्रैनिंग पर भेज दो." शालिनी ने कहा.

"मेडम ट्रैनिंग में ये अब अगले साल ही जा पाएगा...अभी इन्स्टिट्यूट में ट्रैनिंग चालू है..और वाहा जगह भी नही है" चौहान ने कहा.

"ठीक है फिर ऐसा करो इसे अपने साथ रखो और काम सिख़ाओ. इसको ट्रेन करना तुम्हारी ज़िम्मेदारी है" शालिनी ने कहा.

"मुझे अपने साथ रख लीजिए ना मेडम...मुझे लगता है आप मुझे ज़्यादा अच्छे से सीखा सकती हैं" राज ने कहा.

"तुम्हारी राय माँगी किसी ने मिस्टर राज. जैसा कहा है वैसा करो...तुम्हारी कोई शिकायत नही आनी चाहिए" शालिनी ने कहा.

"अफ ये तो तीखी मिर्ची है इतनी सुंदर लड़की पोलीस में क्या कर रही है." राज ने मन ही मन सोचा.

"यू कॅन गो नाउ" शालिनी ने कहा.

राज वही खड़ा रहा. चौहान ने उसे चलने का इशारा किया तब उसे समझ में आया कि उसे भी बाहर जाने को कहा गया है.

बाहर आ कर चौहान बोला, बर्खुरदार जाय्निंग तो तुमने कर ली...अपनी नौकरी बच्चाए रखना चाहते हो तो एक बात ध्यान रखना. अपने सीनियर के आगे कभी ज़्यादा मूह मत खोलना. मैं भी तुम्हारा सीनियर हूँ ये भी याद रखना. अभी तुम बच्चे हो सब सीख जाओगे" चौहान ने कहा.

"आपका क्या रॅंक है?"

"मैं इनस्पेक्टर हूँ वर्दी देख कर पता नही चलता क्या"

"पता चल गया सर...पता चल गया."

तभी राज को ध्यान आया, "अरे ये तो वही है जिसने पूजा को सड़क पर उतारा था."

"चलो तुम्हारी ट्रैनिंग शुरू की जाए...जाओ मेरे लिए चाय ले कर आओ" चौहान ने कहा.

"चाय सर?" राज हैरानी में बोला.

पीछे से शालिनी आ रही थी उसे ये बात सुन ली

"मिस्टर चौहान मैने राजवीर को तुम्हारे अंडर ट्रेन करने के लिए लगाया है ना कि चाय लाने के लिए." शालिनी ने रोब से कहा.

"नही मेडम आप ग़लत समझ रही हैं...मैं तो ये कह रहा था कि चलो चाय पी कर किल्लर वाले केस की इंक्वाइरी के लिए चलते हैं" चौहान ने कहा.

"ठीक है....मुझे रिपोर्ट देते रहना की क्या सीखा रहे हो इसे"

"जी मेडम"

"गजब की ऑफीसर हैं ये तो...इनके साथ काम करके मज़ा आएगा" राज बड़बड़ाया.

"कयामत है ये हम सब के लिए जितना जल्दी समझ लो अच्छा है" चौहान ने राज की बात पर रिक्ट किया.

"लेकिन बहुत खूबसूरत कयामत है...ऐसी कयामत को तो मैं हमेशा सीने से लगा कर रखूं" राज ने सोचा.

"क्या सोच रहे हो चलो हमे इन्वेस्टिगेशन के लिए निकलना है" चौहान ने कहा.

"मेरी वर्दी सर?" राज ने पूछा.

"अरे वर्दी भी मिल जाएगी अभी ऐसे ही चलो" चौहान ने कहा.

"जैसा आप कहें सर"

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--28

gataank se aage.................

"nahi main vaha nahi jaaungi...tum jaao main yahi wait karungi"

"parveen vaha hua to main use kaise pahchaanunga...chalo na puja"

"theek hai...chalo...par koi bakwaas mat karna"

"theek hai ab chalo to"

bike ko sadak kinaare chupa kar dono chupchaap farm house ki taraf chal padte hain. "hum jhaadiyon ke raaste jaayenge saamne se jaana theek nahi" mohit ne kaha.

"hmm theek kah rahe ho main bhi aisa hi soch rahi thi."

"chupchaap dabe paanv mere peeche aa jaao." mohit ne kaha.

"tum chalo main aa rahi hun"

"bahut shunsaan ilaake mein banaaya hai farm house" mohit ne kaha.

"sssshhhh tumhe kuch shunaayi diya" puja ne kaha.

"haan...shaayad nazdik hi koi hai"

"kal saahib logo ne ek ladki ki khub maari thi yahi is ghaas par" unhe awaaj aati hai.

Mohit aur puja awaaj ke nazdik pahunch jaate hain...par vo abhi bhi jhaadiyon ke peeche rahte hain.

"chalo yaha se" puja ne dheere se kaha.

"arey ruko to live blue film to dekh le" mohit ne kaha.

Unke saamne ramu ek aurat ko baahon mein liye khada tha. Aurat koi 35 saal ki thi, rang saaf tha aur sharir gathila tha.

"kya yahi parveen hai?"

"nahi ye uska naukar ramu hai"

"hmm naukar ne kya kismat paayi hai...kya maal haath laga hai saale ke" mohit ne kaha.

"mujhe lagta hai parveen yaha nahi hai hame chalna chaahiye" puja ne kaha.

"parveen ka pata to jaanta hi hoga ye naukar thoda ruko na" mohit ne kaha.

"tumhaare saahib aa gaye to?" us aurat ne pucha.

"saahib to sahar se baahar gaye hain...kal shaam ko hi nikal gaye the yaha se" ramu ne kaha.

"ander ghar mein chalo na yaha khule mein kuch ajeeb lagta hai"

"kal us ladki ki chudaayi dekh kar man kar raha hai ki yahi khule mein masti ki jaaye chalo jaldi kodi ho jaao" ramu ne kaha.

"ye kis ladki ki baat kar raha hai puja" mohit ne pucha.

"mujhe kya pata...chalo yaha se." puja gusse mein boli.

"dheere bolo baba vo log shun lenge." mohit ne kaha.

Ramu ne us aurat ko apne aage jhuka diya aur apne lund ko uski gaanD par ragadne laga.

"uff kya mast gaanD hai kaas is naukar ki jagah main hota uske peeche....abhi daal deta pura ka pura lund gaanD mein" mohit badbadaaya.

"tum yaha masti karne aaye ho to...main ja rahi hun." puja ne kaha.

Mohit ne puja ka haath pakda aur bola, "ruko to main is naukar se parveen ke baare mein puchunga."

"ye kaam baad mein kar lena...maine tumhe ye jagah deekha di hai ab chalo yaha se" puja ne kaha.

"bas thodi der ye nazaara le lene do phir chalte hain" mohit ne kaha.

Puja paanv patak kar rah gayi.

"is moti gaanD par lund ragadna achcha lagta hai mujhe" ramu ne kaha.

"aaahhh to ragdo na lund ji bharke kisne roka hai....par ander mat daalna...aahhh"

"teri chut maarne se fursat mile tab na gaanD mein daalunga...vaise sach sach bata ye gaanD itni moti kaise ho gayi jab tune marvaayi nahi ek bhi baar."

"pata nahi bachpan se hi aisi hai....daal do na ab chut mein main kab tak jhuki rahungi"

"thoda ruko na is moti gaanD par lund ragad kar ise garam to kar lun"

"iske lund se bhi mota lund hai mera" mohit ne kaha.

"achcha majaak achcha kar lete ho?" puja muskuraayi.

"deekhaaun kya abhi?" mohit ne kaha.

"mujhe kyon deekhaaoge us aurat ko deekhaao ja ke...mere upar koi asar nahi hone waala."

"hi kaas main vaha ja paata....kya mast gaanD hai...aisi moti gaanD nahi maari maine aaj tak" mohit ne kaha.

"tumhaare jaise ladke mujhe bilkul pasand nahi jo kahi bhi laar tapkaane lagte hain" puja ne kaha.

"puja agar tum maan jaao na to kasam se kisi ki taraf nahi dekhunga...tumhaara mukaabla koi nahi kar sakta...tum bilkul padmini jaisi ho....bahut shunder." mohit ne kaha.

"achcha behtar ho ki tum din mein sapne lena chod do...tumhaare jaise logo se mujhe nafrat hai nafrat."

"uff tumhaari lene ke liye bahut paapad belne padenge" mohit ne kaha.

"band karo bakwaas apni...main vaapis ja kar padmini ko sab bata dungi ki tum yaha kya kar rahe the."

"nahi puja aisa mat karna vo pahle hi mujhse naraaj hai" mohit ne kaha.

"theek hai chalo phir."

"ruko ruko dekho daal diya usne uski chut mein thoda to dekh lene do." mohit ne kaha.

"Tum dekho main ja rahi hun" puja ne kaha.

Puja mud kar dabe paanv vaha se chal di. Puja ke jaate hi mohit jhaadiyo se baahar aa gaya.

"arey bhai parveen ji kya yahi rahte hain." mohit ne pucha.

Aanan phaanan mein jaldi se ramu ne apna lund us aurat ki chut se nikaala. Lund ke baahar aate hi vo aurat apne kapde jaldi se theek karke vaha se bhaag khadi huyi.

"k..k..kaun ho tum aur yaha kya kar rahe ho." ramu ne kaha.

"bhai main parveen ji ke gaanv se aaya hun unse milna tha. Kisi ne is farm house ka pata bataaya to chala aaya. Yaha aaya to kya dekhta hun ek mahila jhuki huyi hain aur aap uski chut mein lund daale khade hain. Socha vaapis chala jaaun lekin phir ruk gaya. Socha baat karne mein harz hi kya hai"

"thodi der ruk nahi sakte the...ek bhi dhakka nahi maarne diya uski chut mein"

"koi baat nahi mere jaane ke baad dhakke maarte rahiyega...aap bas parveen ji ka ghar ka address de do"

"vo to bhaag gayi ab kya main hava mein dhakke maarun." ramu jhalla kar bola.

"rukaavat ke liye khed hai bhai...kripya karke address de dijiye main bahut pareshaan hun."

"theek hai theek hai abhi deta hun." ramu ne kaha.

Ramu ne mohit ko address de diya. Address le kar mohit muskuraata hua farm house se baahar aa gaya.

puja jhaadiyon ke raaste sadak par vaapis aa gayi aur mohit farm house se address le kar main gate se baahar aa gaya.

"badi jaldi vaapis aa gaye" puja ne pucha.

"address mil gaya to aa gaya...main yaha isi kaam se to aaya tha...kaam hote hi aa gaya" mohit ne kaha.

"aisa kaise ho gaya...vo log to"

"hairaan ho na...maine surprised entry ki vaha aur kaam ban gaya....tum thodi der rukti to achcha khaasa drama dekhne ko mil jaata."

"ab chalein vaapis?" puja ne kaha.

"kya main tumhe bilkul bhi achcha nahi lagta?" mohit ne pucha.

"kyon aisa kya hai tum mein jo mujhe achcha lagega.? Tumhaari to biwi bhi chod gayi na tumhe...agar tum mein koi gun hote to kya tumhaari biwi chod ke jaati" puja ne kaha.

"vo alag hi kahaani hai puja...khair chodo...mujhse galti ho gayi jo tumhe nagma jaisi samajh baitha. Mujhe laga tum nagma ki bahan ho to uske jaisi hi hogi. Halaanki mujhe Raj ne bataaya to tha ki tum nagma jaisi nahi ho par yakin nahi tha. Tumhe pataane ka mera tareeka galat tha. Mujhe tumse aisi ashlil baate nahi karni chaahiye thi. Ab main kuch aur tarkib lagaaunga." mohit ne kaha.

"tumhaari koi bhi tarkib kaam nahi karne waali...chalo ab"

"ye to vakt hi bataayega." mohit ne kaha.

Dono bike par baith kar vaapis chal diye.

....................................................

Raj joining ki formality puri karne ke baad seedha shalini thakur ke room ki taraf chal diya. Vo uska dhanyavaad karna chaahta tha. Jab vo kamre mein ghusa to shalini akhbaar padh rahi thi. Raj bhaag kar shalini ke kadmo mein gir gaya aur uske pair pakad liye.

"arey ye kya kar rahe ho kaun ho tum aur tumhe ander kisne aane diya"

Raj ne sar niche jhukaaye hue kaha,"main raajvir singh hun madam...aap yaha na aati to meri joining kabhi nahi ho paati."

"utho....tum ab SI ho aur aise aam aadmi ki tarah behave mat karo varna abhi vaapis naukri se nikaal dungi" shalini ne gusse mein kaha.

Raj fauran khada ho gaya.

"arey ye to bahut young hai...maine socha koi kaafi umar ki hogi. Bekaar mein paanv chu kar apni fazihat karva li" Raj ne socha.

"tumne joining kar li" shalini ne pucha.

"haan madam" Raj ne jawab diya.

"jab kisi senior ke saamne jaao to haath peeche rakho...kya itna bhi nahi jaante...jeb se baahr nikaalo haath and stand properly" shalini ne kaha.

Raj ne fauran haath jeb se nikaal kar peeche kar liye, "sorry madam mera pahla din hai aur aap jaisi shunder ladki saamne hai...mera deemaag nahi chal raha. Aage se dhyaan rakhunga"

"main koi ladki nahi hun tumhaari boss hun...behave yourself"

"sorry madam"

tabhi chauhaan ander aata hai.

"mr chauhan isko training par bhej do." shalini ne kaha.

"madam training mein ye ab agle saal hi ja paayega...abhi institute mein training chaalu hai..aur vaha jagah bhi nahi hai" chauhan ne kaha.

"theek hai phir aisa karo ise apne saath rakho aur kaam sikhaao. Isko train karna tumhaari zimmedaari hai" shalini ne kaha.

"mujhe apne saath rakh lijiye na madam...mujhe lagta hai aap mujhe jyada achche se seekha sakti hain" Raj ne kaha.

"tumhaari raay maangi kisi ne mr raajvir. Jaisa kaha hai vaisa karo...tumhaari koi shikaayat nahi aani chaahiye" shalini ne kaha.

"uff ye to teekhi mirchi hai itni shunder ladki police mein kya kar rahi hai." Raj ne man hi man socha.

"you can go now" shalini ne kaha.

Raj vahi khada raha. Chauhan ne use chalne ka ishaaraa kiya tab use samajh mein aaya ki use bhi baahar jaane ko kaha gaya hai.

Baahar aa kar chauhan bola, barkhurdaar joining to tumne kar li...apni naukri bachchaaye rakhna chaahte ho to ek baat dhyaan rakhna. Apne senior ke aage kabhi jyada muh mat kholna. Main bhi tumhaara senior hun ye bhi yaad rakhna. Abhi tum bachche ho sab seekh jaaoge" chauhan ne kaha.

"aapka kya rank hai?"

"main inspector hun vardi dekh kar pata nahi chalta kya"

"pata chal gaya sir...pata chal gaya."

tabhi Raj ko dhyaan aaya, "arey ye to vahi hai jisne puja ko sadak par utaara tha."

"chalo tumhaari training shuru ki jaaye...jaao mere liye chaaye le kar aao" chauhan ne kaha.

"chaaye sir?" Raj hairaani mein bola.

Peeche se shalini aa rahi thi use ye baat shun li

"mr chauhan maine raajvir ko tumhaare under train karne ke liye lagaaya hai na ki chaaye laane ke liye." shalini ne rob se kaha.

"nahi madam aap galat samajh rahi hain...main to ye kah raha tha ki chalo chaaye pee kar waale case ki inquiry ke liye chalte hain" chauhan ne kaha.

"theek hai....mujhe report dete rahna ki kya seekha rahe ho ise"

"ji madam"

"gajab ki officer hain ye to...inke saath kaam karke maja aayega" Raj badbadaaya.

"kayaamat hai ye hum sab ke liye jitna jaldi samajh lo achcha hai" chauhan ne Raj ki baat par react kiya.

"lekin bahut khubsurat kayaamat hai...aisi kayaamat ko to main hamesha sheene se laga kar rakhun" Raj ne socha.

"kya soch rahe ho chalo hame investigation ke liye nikalna hai" chauhan ne kaha.

"meri vardi sir?" Raj ne pucha.

"arey vardi bhi mil jaayegi abhi aise hi chalo" chauhan ne kaha.

"jaisa aap kahein sir"

Kramashah..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:05

raj sharma stories

बात एक रात की--29

गतान्क से आगे.................

चौहान राज को लेकर सुरिंदर के घर पहुँचता है.

"क्राइम सीन है घबराना मत...चारो तरफ खून बीखरा पड़ा है कही देख कर घबरा जाओ"

"मैने न्यूज़ में सुन लिया था सब सर, मैं इन बातो से नही डरता"

"अच्छा चलो फिर अंदर" चौहान ने कहा.

राज चौहान के पीछे-पीछे सुरिंदर के घर में घुस गया.

"यहा तो कुछ भी नही है" राज ने कहा.

"लासे पीछे पड़ी है बर्खुरदार थोड़ा धीरज रखो" चौहान ने कहा.

"सर ये बेडरूम देखिए...बिस्तर पर काफ़ी उछल-पुथल हुई लगती है" राज ने कहा.

"तुम इस कमरे को अच्छे से चेक करो मैं पीछे जा रहा हूँ, कुछ भी इंपॉर्टेंट लगे तो मुझे बताना" चौहान ने कहा.

"ओके सर मैं यहा देख लेता हूँ" राज ने कहा ,"वैसे भी मुझे लास देखने का कोई सोंक नही है" राज धीरे से बड़बड़ाया.

"क्या कहा तुमने?"

"कुछ नही सर बस यू ही"

"लाश तो तुम्हे अक्सर देखने को मिलेगी बर्खुरदार. पोलीस में आए हो किसी ऐन्जीओ में नही"

"मेरा वो मतलब नही था सर."

"ठीक है...ठीक है चलो जो काम दिया है उसे करो...और मेरे सामने ज़्यादा मत बोला करो"

"सॉरी सर"

"सॉरी हा..."चौहान कह कर आगे बढ़ गया.

राज कमरे को बड़े ध्यान से देखता है.

"यहा क्या देखूं बस ये बीखरा हुआ बिस्तर है और ये आल्मिरा है...बाकी तो कुछ नही."

अचानक उसकी नज़र बेड पर पड़े तकिये पर गयी. उसके बिल्कुल पास कुछ चमकीली चीज़ नज़र आ रही थी. राज ने आगे बढ़ कर उसे उठा लिया.

"ये तो सोने की चैन लगती है...ये यहा क्या कर रही है...ह्म्म इस बेड पर अछी ख़ासी गेम खेली गयी है शायद. खेल-खेल में ये चैन गिर गयी होगी...एक बार नगमा भी तो अपनी पायल भूल गयी थी मेरे कमरे में"

राज ने बेड को अच्छे से चेक किया और कुछ नही मिला. लेकिन बेड के पास रखी टेबल पर जो मोबाइल पड़ा था उस पर राज का ध्यान नही गया. राज कमरे से बाहर आने लगा, तभी मोबाइल बज उठा.

राज ने मोबाइल उठा कर ऑन किया और कान से लगा लिया, "सुरिंदर मेरी सोने की चैन तुम्हारे वाहा छूट गयी शायद. मिल जाए तो संभाल कर रख लेना. संजय ने गिफ्ट दी थी वो हमेशा उसे मेरे गले में देखना चाहता है. तुम कुछ बोल क्यों नही रहे... कल रात मज़ा नही आया क्या"

"मज़ा तो उसे आया ही होगा, क्या आपको पता नही कि वो कल रात मारे गये?" राज ने कहा.

"क..क..कौन बोल रहे हो तुम...और ये क्या बकवास कर रहे हो." मोनिका ने कहा.

"मैं सब इनस्पेक्टर राज शर्मा बोल रहा हूँ ज़बान संभाल के बात करो"

मोनिका ने फ़ौरन फोन काट दिया.

"काट दिया फोन क्यों क्या हुआ...अब मैं पोलीस वाला हूँ कोई भी ऐरा ग़ैरा मुझसे ऐसे ही कुछ भी नही बोल सकता."

राज उस बेडरूम से निकल कर घर के पीछे की तरफ चल दिया.

"अफ कितनी बेरहमी से मारा है कामीने ने." राज ने अपनी आँखे बंद कर ली.

"क्यों बर्खुरदार छूट गये पसीने..हे..हे." चौहान हस्ने लगा.

"सर आपको ये सब देखने की आदत हो गयी होगी मैं तो पहली बार देख रहा हूँ"

"कोई बात नही तुम्हे भी आदत हो जाएगी...कुछ मिला उस कमरे में?"

"हां सर ये सोने की चैन मिली है" राज ने कहा.

राज ने फोन वाली बात भी चौहान को बता दी.

"नाम तो पूछ लेते उसका."

"मैं पूछने ही वाला था पर फोन काट दिया उसने."

"ह्म्म कोई बात नही उसके नंबर से उसके घर का पता चल ही जाएगा" चौहान ने कहा.

"सर आपको क्या लगता है ये सब खून क्या कोई औरत कर सकती है" राज ने चौहान का व्यू लेने के लिए पूछा.

"क्यों नही...आज कल कोई भी कुछ भी कर सकता है...इसने देखा था ना उसे अपनी आँखो से" चौहान ने कहा.

"हां पर मुझे वो लड़की कातिल नही लगती" राज ने कहा.

"तुम्हे क्या लगता है उस से फरक नही पड़ता बर्खुरदार यहा सब सबूत बोलते हैं" चौहान ने कहा.

चौहान ने एक कॉन्स्टेबल को आवाज़ दी, "इनको पोस्ट मॉर्टेम के लिए भेज दो"

"जी सर" कॉन्स्टेबल ने कहा.

"चलो बर्खुरदार यहा का काम हो गया."

"अभी कहा जाना है सर"

"पहले थाने चलते है...बाद में सोचेंगे आगे क्या करना है"

चौहान राज को जीप में ले कर पोलीस स्टेशन की तरफ निकल देता है.

"सर एक बात पूछनी थी आपसे बुरा ना माने तो"

"हां-हां पूछो क्या बात है?"

"कल मैने आपको इसी जीप में देखा था आप किसी लड़की को सड़क पर उतार कर आगे बढ़ गये ...वो लड़की कौन थी?"

"क्यों तेरा दिल आ गया क्या उस पर?"

"नही सर मैने उसे कही देखा है...इसलिए पूछ रहा था." राज ने कहा.

"एस्कॉर्ट थी वो...होटेल में पकड़ी थी मैने. बहुत सुंदर थी इसलिए मैने भी हाथ मार लिया. मैने और

परवीन ने मिलके ड्प किया साली का. सारे नखरे उतार दिए उसके. एक बात समझ लो इस नौकरी में तुम्हे एक से बढ़ कर एक आइटम मिलेगी. पर सोच समझ कर खेलना फँस भी सकते हो. आजकल मीडीया बहुत पीछे पड़ी रहती है."

चौहान की बात सुन कर राज का दिल बैठ गया.

"पूजा के साथ इतना कुछ हो गया...किस चक्कर में फँस गयी थी ये पूजा...कुछ समझ नही आ रहा." राज ने सोचा.

"क्या हुआ बर्खुरदार किस सोच में डूब गये."

"कुछ नही सर बस यू ही." राज ने कहा.

राज को पूजा के बारे में सुन कर बहुत बुरा लगा. उसे यकीन नही हो रहा था कि उसके जैसी लड़की ऐसे चक्करो में फँस जाएगी.

"ज़रूर कोई मज़बूरी रही होगी पूजा की" राज ने सोचा.

..............................

....

मोनिका टीवी ऑन करके उसके सामने खड़ी हुई आँखे फाडे न्यूज़ देख रही है.

"ओह माइ गॉड सुरिंदर तो सच में मारा गया...वो दोनो पोलीस वाले भी नही बचे...अगर मैं थोड़ी देर वाहा रुकती तो शायद मेरा भी यही हसर होता....क्या हो रहा है ये इस सहर में"

संजय पीछे से आकर मोनिका को बाहों में भर लेता है और कहता है, "क्या बात है डार्लिंग इतनी परेशान सी क्यों लग रही हो....और ये कैसी न्यूज़ लगा रखी है"

"त...तुम उठ गये" मोनिका ने कहा.

"मैं तो कब से उठा हूँ...तुम बिस्तर से गायब थी"

"मैं नहा धो कर पूजा करती हूँ आजकल इसलिए जल्दी उठ जाती हूँ"

"ह्म्म तभी ये भीनी भीनी खुसबु आ रही है...आओ थोड़ी मस्ती हो जाए."

"मेरा मूड ठीक नही है बाद में"

"मेरी बीवी के नखरे रोज बढ़ते जा रहे हैं कही किसी और से तो दिल नही लगा लिया"

"क...क...कैसी बाते करते हो संजय...तुम्हारे सिवा मैं किसी को प्यार नही कर सकती."

"सच कह रही हो?"

"और नही तो क्या?"

संजय ने मोनिका को बाहों में उठाया और बेडरूम की तरफ चल दिया.

"आज तुम्हारे नखरे नही चलेंगे, आइ विल फक यू हार्ड आंड फास्ट"

"अफ समझा करो संजय अभी मेरा मूड ऑफ है"

"लंड घुस्सते ही मूड ठीक हो जाएगा चिंता मत करो. ऐसे मूड को ठीक करने के लिए ही बनाया गया है ये इंजेक्षन."

संजय मोनिका को बेडरूम में ले आया.

"तुमने ये नही बताया कि तुम वक्त से पहले कैसे पहुँच गये. ट्रेन तो अक्सर लेट हो जाती है तुम तो एक घंटा पहले ही घर भी पहुँच गये." मोनिका ने कहा.

"तुम्हे उस से क्या आ तो गया ना टाइम से घर...अब मूड कराब मत करो....आइ नीड आ नाइस फक नाउ."

मोनिका के दीमाग में अभी भी सुरिंदर के ख्याल घूम रहे थे.."अफ कही मैं ना किसी मुसीबत में फँस जाउ. मेरा नंबर भी पोलीस के पास चला गया...पोलीस ज़रूर यहा भी आएगी अब क्या करूँ....आअहह धीरे से" इधर मोनिका ये सब सोच रही थी उधर संजय उसके बड़े-बड़े बूब्स मसल रहा था.

"क्या हो गया तुम्हे आज...तुम्हे तो ये अच्छा लगता था."

"तुमने ज़रा ज़ोर से दबा दिए थे."

"अच्छा ऐसी बात है...चलो अब आराम से दबाउन्गा तुम अपना मूड ठीक कर लो बस."

"तुम मुझे बस 5 मिनट दो मैं अभी आती हूँ." मोनिका ने कहा.

"अब क्या हुआ तुम्हे?" संजय ने कहा.

"बस डार्लिंग अभी आई...फिर आराम से करेंगे."

"ठीक है जल्दी करो जो करना है...आइ नीड टू फक अट एनी कॉस्ट."

"यू विल फक मी जस्ट वेट आ मिनट." मोनिका ने कहा.

मोनिका भाग कर बाहर आई और अपने मोबाइल को अपने पर्स में से निकाल कर अपने घर की छत की तरफ भागी. छत पर आ कर उसने मोबाइल को ऑफ करके सिम सहित घर के पीछे फैले जंगल में फेंक दिया. "अब पोलीस मुझ तक नही पहुँच सकती....ये मोबाइल भी सुरिंदर का था और सिम कार्ड भी उसी के नाम था." मोनिका ने खुद से कहा.

मोनिका भाग कर वापिस बेडरूम में आ गयी.

"मैं आ गयी" मोनिका ने कहा.

"आ तो गयी अब ये लंड बैठ गया...सक इट आंड मेक इट रेडी फॉर यू"

"लो जनाब ये काम अभी किए देती हूँ" मोनिका ने कहा और संजय की टाँगो के बीच बैठ कर उसके लंड के उपर झुक गयी. मोनिका ने मूह खोल कर संजय के लंड को मूह में ले लिया.

"आआहह यू आर आ गुड सकर" संजय कराह उठा.

"तुम आज ओरल का ही मज़ा लो....क्या कहते हो?"

"इतनी आसानी से नही बचोगी तुम...युवर होल विल बी फक्ड नाइस आंड हार्ड बेबी."

मोनिका अभी भी अपने ख़यालो में उलझी थी लेकिन फिर भी वो संजय के साथ नाटक करने की पूरी कोशिस कर रही थी. नॉर्मली अब तक वो खुद ही गरम हो चुकी होती पर आज हालात कुछ और थे. उसके दीमाग की उधेड़बुन उसे परेशान किए थी. किसी तरह से वो संजय के लंड को चुस्ती रही.

"आआहह बस हो गया ये तैयार...आ जाओ अब" संजय ने कहा.

मोनिका टांगे फैला कर लेट गयी.

अरे उपर आ जाओ ना...खुद डालो अंदर" संजय ने कहा.

मोनिका संजय के उपर आ गयी और उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत के होल पर रख लिया. मोनिका के दीमाग में पिछली रात सुरिंदर के घर का नज़ारा घूम गया. संजय ने हल्का सा धक्का मारा और लंड मोनिका की चूत में फिसल गया.

"आअहह सुरिंदर" मोनिका के मूह से निकल गया

"क्या कहा तुमने?"

मोनिका की सिट्टी पिटी गुम हो गयी.

"क..क..कुछ नही संजय."

"तुमने शायद सुरिंदर कहा." संजय ने हैरत भरे लहजे में पूछा.

"हां वो न्यूज़ देख रही थी ना....कल रात जो मारा गया उसका नाम सुरिंदर था...यू ही मूह से निकल गया. मेरे दीमाग में न्यूज़ घूम रही थी." मोनिका ने टालने की कोशिस की.

"पर तुमने लंड के अंदर जाते ही आह भरके सुरिंदर कहा...कही कुछ गड़बड़ तो नही हा."

"ग..गड़बड़ क्या होगी...कहा ना वैसे ही निकल गया मूह से."

संजय ने मोनिका की गान्ड पकड़ कर उसे नीचे की ओर खींचा ताकि उसका पूरा लंड मोनिका की चूत में समा जाए.

"आअहह संजय." मोनिका कराह उठी.

"अबकी बार सही नाम लिया...शाबाश." संजय ने कहा.

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--29

gataank se aage.................

chauhan Raj ko lekar surinder ke ghar pahunchta hai.

"crime scene hai ghabraana mat...chaaro taraf khun beekhra pada hai kahi dekh kar ghabra jaao"

"maine news mein shun liya tha sab sir, main in baato se nahi darta"

"achcha chalo phir ander" chauhan ne kaha.

Raj chauhan ke peeche-peeche surinder ke ghar mein ghuss gaya.

"yaha to kuch bhi nahi hai" Raj ne kaha.

"laase peeche padi hai barkhurdaar thoda dheeraj rakho" chauhan ne kaha.

"sir ye bedroom dekhiye...bistar par kaafi uchal-puthal huyi lagti hai" Raj ne kaha.

"tum is kamre ko achche se check karo main peeche ja raha hun, kuch bhi important lage to mujhe bataana" chauhan ne kaha.

"ok sir main yaha dekh leta hun" raje ne kaha ,"vaise bhi mujhe laas dekhne ka koi sonk nahi hai" Raj dheere se badbadaaya.

"kya kaha tumne?"

"kuch nahi sir bas yu hi"

"laas to tumhe aksar dekhne ko milegi barkhurdaar. Police mein aaye ho kisi ngo mein nahi"

"mera vo matlab nahi tha sir."

"theek hai...theek hai chalo jo kaam diya hai use karo...aur mere saamne jyada mat bola karo"

"sorry sir"

"sorry huh..."chauhan kah kar aage badh gaya.

Raj kamre ko bade dhyaan se dekhta hai.

"yaha kya dekhun bas ye beekhra hua bistar hai aur ye almira hai...baaki to kuch nahi."

achchaanak uski nazar bed par pade takiye par gayi. Uske bilkul paas kuch chamkili cheez nazar aa rahi thi. Raj ne aage badh kar use utha liya.

"ye to sone ki chain lagti hai...ye yaha kya kar rahi hai...hmm is bed par achi khaasi game kheli gayi hai shaayad. Khel-khel mein ye chain gir gayi hogi...ek baar nagma bhi to apni paayal bhul gayi thi mere kamre mein"

Raj ne bed ko achche se check kiya aur kuch nahi mila. Lekin bed ke paas rakhi table par jo mobile pada tha us par Raj ka dhyaan nahi gaya. Raj kamre se baahar aane laga, tabhi mobile baj utha.

Raj ne mobile utha kar on kiya aur kaan se laga liya, "surinder meri sone ki chain tumhaare vaha chut gayi shaayad. Mil jaaye to sambhaal kar rakh lena. Sanjay ne gift di thi vo hamesa use mere gale mein dekhna chaahta hai. Tum kuch bol kyon nahi rahe... kal raat maja nahi aaya kya"

"maja to use aaya hi hoga, kya aapko pata nahi ki vo kal raat maare gaye?" Raj ne kaha.

"k..k..kaun bol rahe ho tum...aur ye kya bakwaas kar rahe ho." monika ne kaha.

"main sub inspector raajvir bol raha hun jabaan sambhaal ke baat karo"

monika ne fauran phone kaat diya.

"kaat diya phone kyon kya hua...ab main police wala hun koi bhi aira gaira mujhse aise hi kuch bhi nahi bol sakta."

Raj us bedroom se nikal kar ghar ke peeche ki taraf chal diya.

"uff kitni berahmi se maara hai kamine ne." Raj ne apni aankhe band kar li.

"kyon barkhurdaar chut gaye pasine..he..he." chauhan hasne laga.

"sir aapko ye sab dekhne ki aadat ho gayi hogi main to pahli baar dekh raha hun"

"koi baat nahi tumhe bhi aadat ho jaayegi...kuch mila us kamre mein?"

"haan sir ye sone ki chain mili hai" Raj ne kaha.

Raj ne phone wali baat bhi chauhan ko bata di.

"naam to puch lete uska."

"main puche hi wala tha par phone kaat diya usne."

"hmm koi baat nahi uske number se uske ghar ka pata chal hi jaayega" chauhan ne kaha.

"sir aapko kya lagta hai ye sab khun kya koi aurat kar sakti hai" Raj ne chauhan ka view lene ke liye pucha.

"kyon nahi...aaj kal koi bhi kuch bhi kar sakta hai...isne dekha tha na use apni aankho se" chauhan ne kaha.

"haan par mujhe vo ladki kaatil nahi lagti" Raj ne kaha.

"tumhe kya lagta hai us se farak nahi padta barkhurdaar yaha sab saboot bolte hain" chauhan ne kaha.

Chauhan ne ek constable ko awaaj di, "inko post mortem ke liye bhej do"

"ji sir" constable ne kaha.

"chalo barkhurdaar yaha ka kaam ho gaya."

"abhi kaha jaana hai sir"

"pahle thaane chalte hai...baad mein sochenge aage kya karna hai"

chauhan Raj ko jeep mein le kar police station ki taraf nikal deta hai.

"sir ek baat puchni thi aapse bura na maane to"

"haan-haan pucho kya baat hai?"

"kal maine aapko isi jeep mein dekha tha aap kisi ladki ko sadak par utaar kar aage badh gaye ...vo ladki kaun thi?"

"kyon tera dil aa gaya kya us par?"

"nahi sir maine use kahi dekha hai...isliye puch raha tha." Raj ne kaha.

"escort thi vo...hotel mein pakdi thi maine. Bahut shunder thi isliye maine bhi haath maar liya. Maine au

parveen ne milke DP kiya saali ka. Saare nakhre utaar diye uske. Ek baat samajh lo is naukri mein tumhe ek se badh kar ek item milegi. Par soch samajh kar khelna phans bhi sakte ho. Aajkal media bahut peeche padi rahti hai."

chauhan ki baat shun kar Raj ka dil baith gaya.

"puja ke saath itna kuch ho gaya...kis chakkar mein phans gayi thi ye puja...kuch samajh nahi aa raha." Raj ne socha.

"kya hua barkhurdaar kis soch mein dub gaye."

"kuch nahi sir bas yu hi." Raj ne kaha.

Raj ko puja ke baare mein shun kar bahut bura laga. Use yakin nahi ho raha tha ki uske jaisi ladki aise chakkaro mein phans jaayegi.

"jaroor koi mazboori rahi hogi puja ki" Raj ne socha.

..................................

Monika tv on karke uske saamne khadi huyi aankhe phaade news dekh rahi hai.

"oh my god surinder to sach mein maara gaya...vo dono police waale bhi nahi bachche...agar main thodi der vaha rukti to shaayad mera bhi yahi hasar hota....kya ho raha hai ye is sahar mein"

sanjay peeche se aakar monika ko baahon mein bhar leta hai aur kahta hai, "kya baat hai darling itni pareshaan si kyon lag rahi ho....aur ye kaisi news laga rakhi hai"

"t...tum uth gaye" monika ne kaha.

"main to kab se utha hun...tum bistar se gaayab thi"

"main naha dho kar puja karti hun aajkal isliye jaldi uth jaati hun"

"hmm tabhi ye bhini bhini khusbu aa rahi hai...aao thodi masti ho jaaye."

"mera mood thik nahi hai baad mein"

"meri biwi ke nakhre roj badhte ja rahe hain kahi kisi aur se to dil nahi laga liya"

"k...k...kaisi baate karte ho sanjay...tumhaare shiva main kisi ko pyar nahi kar sakti."

"sach kah rahi ho?"

"aur nahi to kya?"

sanjay ne monika ko baahon mein uthaaya aur bedroom ki taraf chal diya.

"aaj tumhaare nakhre nahi chalenge, i will fuck you hard and fast"

"uff samjha karo sanjay abhi mera mood off hai"

"lund ghusste hi mood theek ho jaayega chinta mat karo. Aise mood ko theek karne ke liye hi banaaya gaya hai ye injection."

sanjay monika ko bedroom mein le aaya.

"tumne ye nahi bataaya ki tum vakt se pahle kaise pahunch gaye. Train to aksar let ho jaati hai tum to ek ghanta pahle hi ghar bhi pahunch gaye." monika ne kaha.

"tumhe us se kya aa to gaya na time se ghar...ab mood khraab mat karo....i need a nice fuck now."

monika ke deemaag mein abhi bhi surinder ke khyaal ghum rahe the.."uff kahi main na kisi musibat mein phans jaaun. Mera number bhi police ke paas chala gaya...police jaroor yaha bhi aayegi ab kya karun....aaahhhh dheere se" idhar monika ye sab soch rahi thi udhar sanjay uske bade-bade boobs masal raha tha.

"kya ho gaya tumhe aaj...tumhe to ye achcha lagta tha."

"tumne jara jor se daba diye the."

"achcha aisi baat hai...chalo ab araam se dabaaunga tum apna mood theek kar lo bas."

"tum mujhe bas 5 minat do main abhi aati hun." monika ne kaha.

"ab kya hua tumhe?" sanjay ne kaha.

"bas darling abhi aayi...phir araam se karenge."

"theek hai jaldi karo jo karna hai...i need to fuck at any cost."

"you will fuck me just wait a minat." monika ne kaha.

Monika bhaag kar baahar aayi aur apne mobile ko apne purse mein se nikaal kar apne ghar ki chat ki taraf bhaagi. Chat par aa kar usne mobile ko off karke sim sahit ghar ke peeche faile jungle mein fenk diya. "ab police mujh tak nahi pahunch sakti....ye mobile bhi surinder ka tha aur sim card bhi usi ke naam tha." monika ne khud se kaha.

Monika bhaag kar vaapis bedroom mein aa gayi.

"main aa gayi" monika ne kaha.

"aa to gayi ab ye lund baith gaya...suck it and make it ready for you"

"lo janaab ye kaam abhi kiye deti hun" monika ne kaha aur sanjay ki taango ke beech baith kar uske lund ke upar jhuk gayi. Monika ne muh khol kar sanjay ke lund ko muh mein le liya.

"aaaahhhh you are a good sucker" sanjay karaah utha.

"tum aaj oral ka hi maja lo....kya kahte ho?"

"itni aasaani se nahi bachogi tum...your hole will be fucked nice and hard baby."

monika abhi bhi apne khayaalo mein uljhi thi lekin phir bhi vo sanjay ke saath naatak karne ki puri koshis kar rahi thi. Normally ab tak vo khud hi garam ho chuki hoti par aaj haalaat kuch aur the. Uske deemaag ki udhedbun use pareshaan kiye thi. Kisi tarah se vo sanjay ke lund ko chusti rahi.

"aaaahhhhh bas ho gaya ye taiyaar...aa jaao ab" sanjay ne kaha.

Monika taange faila kar let gayi.

Arey upar aa jaao na...khud daalo ander" sanjay ne kaha.

Monika sanjay ke upar aa gayi aur uske lund ko pakad kar apni chut ke hole par rakh liya. Monika ke deemaag mein peechli raat surinder ke ghar ka nazaara ghum gay. Sanjay ne halka sa dhakka maara aur lund monika ki chut mein phisal gaya.

"aaahhhh surinder" monika ke muh se nikal gaya

"kya kaha tumne?"

monika ki sitti pitti gum ho gayi.

"k..k..kuch nahi sanjay."

"tumne shaayad surinder kaha." sanjay ne hairat bhare lahje mein pucha.

"haan vo news dekh rahi thi na....kal raat jo maara gaya uska naam surinder tha...yu hi muh se nikal gaya. Mere deemaag mein news ghum rahi thi." monika ne taalne ki koshis ki.

"par tumne lund ke ander jaate hi aah bharke surinder kaha...kahi kuch gadbad to nahi huh."

"g..gadbad kya hogi...kaha na vaise hi nikal gaya muh se."

sanjay ne monika ki gaanD pakad kar use neeche ki aur kheencha taaki uska pura lund monika ki chut mein sama jaaye.

"aaahhh sanjay." monika karaah uthi.

"abki baar sahi naam liya...sabaas." sanjay ne kaha.

Kramashah..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:06

raj sharma stories

बात एक रात की--30

गतान्क से आगे.................

संजय ने मोनिका की गान्ड पकड़ कर उसके अपने उपर उछालना शुरू कर दिया. हर उछाल के साथ संजय का लंड मोनिका की चूत में अंदर बाहर होता रहा.

"आअहह संजय कीप डूयिंग इट"

"हो गया ना मूड ठीक अब. देखा ये इंजेक्षन बहुत काम का है."

"आअहह संजय आआहह."

संजय मोनिका को 10 मिनट तक यू ही अपने उपर उछालता रहा.

"अब पेट के बल लेट जाओ."

"नही पीछे से नही"

"अनल नही करूँगा घबराओ मत चूत में डालूँगा लेट जाओ" संजय ने कहा.

मोनिका पेट के बल लेट गयी और संजय उसके उपर लेट गया. उसका लंड मोनिका की गान्ड पर पसर गया था.

"पक्का अनल नही करोगे ना"

"हां बाबा...आइ लाइक युवर पुसी मोर दॅन एनितिंग एल्स." संजय ने कहा.

संजय ने मोनिका की गान्ड थपथपाई.

"आआहह"

संजय ने मोनिका की गान्ड को फैला कर उसकी चूत तक पहुँचने का रास्ता बनाया और उसकी चूत में लंड डाल दिया.

"आआअहह संजय"

"मैं डर रहा था कि कही इस बार भी किसी और का नाम ना ले दो"

"बार बार ऐसी ग़लती थोड़ा करूँगी आअहह" मोनिका ने कहा.

संजय मोनिका के उपर पड़ पड़ा उसकी चूत में धक्के लगाता रहा.

"दिस ईज़ फॅंटॅस्टिक फक ऊऊहह आअहह" संजय धक्के मारते हुए बोला.

कुछ देर बाद वो निढाल हो कर मोनिका के उपर गिर गया. "यू आर ऑल्वेज़ आ गुड फक्किंग थिंग"

"क्या मतलब?" मोनिका ने पूछा.

"हर बार तुम्हारे साथ अलग ही मज़ा आता है." संजय ने कहा.

..............................

.......................................................

"विजय कुछ पता चला किसका नंबर है वो." चौहान ने पूछा. राज भी पास में ही बैठा था.

"सर वो नंबर भी सुरिंदर का ही था....मोबाइल ट्रेस किया पर वो जंगल में पड़ा मिला."

"तुम्हे फ़ौरन फोन मुझे देना चाहिए था ईडियट." चौहान राज की तरफ देख कर झल्ला कर बोला.

"सॉरी सर आगे से ध्यान रखूँगा."

"ये बात उस कयामत को ना पता चले वरना मेरी खाट खड़ी कर देगी वो." चौहान ने कहा.

"सर मैं जाउ अब?" राज ने कहा.

"पोलीस की नौकरी चौबीस घंटे की होती है बर्खुरदार कहा जाने की सोच रहे हो" चौहान ने कहा.

"सर आज पहला दिन है...घर पर थोड़ा सेलेब्रेट भी कर लूँ वरना आस पड़ोस के लोग नाराज़ हो जाएँगे"

"ठीक है आज तो जाओ कल से जल्दी जाने की सोचना भी मत" चौहान ने कहा.

राज गहरी साँस ले कर चुपचाप वाहा से निकल लिया.

"उफ्फ ये चौहान ही मिला था मेडम को मुझे ट्रेन करने के लिए" राज ने सोचा.

राज सीधा मोहित के कमरे पर गया. उसने दरवाजा खड़काया. पद्‍मिनी ने दरवाजा खोला.

"आप यहा अकेली हैं गुरु कहा है" राज ने पूछा.

"मोहित मेरे लिए कुछ कपड़े लेने गया है."

"अरे मैं भी सोच ही रहा था कि आप कब तक इन कपड़ो में रहेंगी"

"राज मुझे घर जाना है क्या कुछ हो सकता है." पद्‍मिनी ने पूछा.

"ह्म्म आप चिंता मत करो मैं खुद ले कर जाउन्गा आपको आपके घर बस एक दो दिन रुक जाईए" राज ने कहा.

पद्‍मिनी मायूस हो कर बैठ गयी. तभी मोहित भी आ गया.

"गुरु ये काम अच्छा किया तुमने जो कि पद्‍मिनी जी के लिए कुछ कपड़े ले आए"

"पूजा ने ध्यान दिलाया मुझे तो खुद ख्याल नही था और ना ही पद्‍मिनी ने कुछ कहा"

"पद्‍मिनी जी आप ट्राइ कर लीजिए...हम बाहर जाते हैं आओ गुरु तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है" राज ने कहा.

राज सुरिंदर के घर की सारी घटना मोहित को सुना देता है.

"ह्म....ये सच में बहुत ख़तरनाक है" मोहित ने कहा.

"हां गुरु और पूजा के बारे में कुछ अजीब सी बात पता लगी जिस पर यकीन नही होता"

"क्या पता चला मेरी पूजा के बारे में बताओ?"

"तुम्हारी पूजा...ये पूजा तुम्हारी कब्से हो गयी गुरु" राज ने पूछा.

"बस हो गयी तू अब उस पर लाइन मत मारना अब वो मेरी है" मोहित ने कहा.

"ये खूब रही गुरु...ये ठीक नही कर रहे तुम" राज ने कहा.

"नगमा है ना तेरे पास पूजा का क्या अच्चार डालेगा" मोहित ने कहा.

"ऐसा क्या हो गया जो तुम पूजा के पीछे पड़ गये" राज ने पूछा.

"मैने चॅलेंज लिया है कि उसे पटा कर रहूँगा."

"हे..हे..हा..हा..क्या खूब कही..... चॅलेंज के लिए पूजा ही मिली थी...मेरी चप्पल घिस्स गयी उसे पटाने के चक्कर में...पर उसने एक बार भी घास नही डाली"

"तू बता ना क्या बताने वाला था पूजा के बारे में" मोहित ने कहा.

राज मोहित की चौहान की कही सारी बात बता देता है.

"ये ज़रूर ब्लॅकमेलिंग का चक्कर रहा होगा वरना पूजा ऐसी लड़की नही लगी मुझे"

"ड्प हो चुका है उसके साथ...मुझे तो खुद यकीन नही हुआ" राज बोला.

"कुछ भी हो मैं फिर भी पूजा को पटा कर ही रहूँगा." मोहित ने कहा.

"जैसी तुम्हारी मर्ज़ी गुरु...अब दोस्ती तो नीभानी ही पड़ेगी जाओ मैं रास्ते से हट गया" राज ने कहा.

"अबे तू रास्ते में था कब जो हटेगा...तुझे तो वो बिल्कुल पसंद नही करती." मोहित ने कहा.

"फिर भी मेरा त्याग याद रखना गुरु...कही भूल जाओ" राज ने कहा.

"बिल्कुल मेरे राज तेरा ये महान त्याग मैं हमेशा याद रखूँगा."

दोनो हस्ने लगे और वापिस कमरे की तरफ मूड गये.

"कैसे लगे कपड़े पद्‍मिनी?"

"ठीक हैं...क्या तुमने सोचा कुछ कि आगे क्या करना है...मैं हमेशा यहा इस कमरे में नही पड़े रहना चाहती."

इस से पहले की मोहित कुछ बोल पाता राज बोल पड़ा, "गुरु ऐसा करते हैं....अड्रेस तो है ही आपके पास परवीन का...पहले कन्फर्म कर लेते हैं कि वही किल्लर है, फिर आगे मैं सब संभाल लूँगा. जो इनस्पेक्टर इस केस को हॅंडल कर रहा है उसी के साथ हूँ मैं."

"पहले हम दोनो चलते हैं वाहा...बाद मैं पद्‍मिनी को ले जाएँगे...क्या कहते हो" मोहित ने कहा.

"ठीक है चलो फिर अभी इंतेज़ार किस बात का है" राज ने कहा.

कुछ ही देर बाद मोहित और राज बाइक पर सवार हो कर परवीन के घर की तरफ जा रहे थे.

"ये रहा घर पर कोई दीखाई नही दे रहा." मोहित ने कहा.

"बेल बजाते हैं घर की देखते हैं कौन बाहर आता है" राज ने कहा.

"देख लो कही कोई फ़ज़ीहत हो जाए" मोहित ने कहा.

"सब इनस्पेक्टर तुम्हारे साथ है गुरु चिंता क्यों कर रहे हो"

"तुम साथ हो तभी तो चिंता है" मोहित ने कहा.

"गुरु ऐसा क्यों बोल रहे हो"

"अरे मज़ाक कर रहा हूँ चल बेल मारते हैं."

मोहित घर की बेल बजाता है. कुछ देर बाद दरवाजा खुलता है.

"आप यहा!" मोहित के मूह से निकल गया.

राज भी उस लड़की को देख कर हैरान रह गया.

"ये मेरा घर है तुम दोनो यहा क्या कर रहे हो?"

"लगता है हम ग़लत अड्रेस पर आ गये हमे लगा ये परवीन का घर है" मोहित ने कहा.

" मेरे बड़े भाई हैं वो अभी सहर से बाहर गये हैं, बोलिए क्या काम है"

"छोड़िए हमे उनसे ही काम था...हम फिर कभी मिल लेंगे" मोहित ने कहा.

"जैसी आपकी मर्ज़ी...चाय पानी कुछ लेंगे" लड़की ने कहा.

"पहले हमे अंदर तो बुला लीजिए यहा खड़े-खड़े चाय पीना अजीब लगेगा" राज ने कहा.

"ओह आइ आम सो सॉरी...प्लीज़ कम इन" लड़की ने कहा.

मोहित ने अंदर आते हुए राज की पीठ थपथपाई.

"प्लीज़ हॅव सीट...मैं अभी चाय लाती हूँ" लड़की ने कहा.

"ये तस्वीर किस की है" राज ने कहा.

"अजीब बात है आप लोग भैया से मिलने आए हैं और उनकी तस्वीर नही पहचानते." लड़की ने कहा.

"ये परवीन को नही जानता...मैं जानता हूँ...ये तो बस मेरे साथ आया है" मोहित ने बात संभालने की कोशिस की.

"ह्म्म ठीक है मैं चाय लाती हूँ"

"तूने पहचाना कि नही ये वही लड़की है जिसकी वो लड़का पॉर्न मूवी बना रहा था" मोहित ने कहा.

"पहचान लिया गुरु...ऐसा करते हैं ये फोटो ले चलते हैं...पद्‍मिनी जी को यही दीखा देंगे...क्या बोलते हो" राज ने धीरे से कहा.

"आआययईीीई शू शू हटो यहा से" किचन से आवाज़ आई.

"शायद कोई चूहा या लंड्रोच परेशान कर रहा है लड़की को मैं देख कर आता हूँ" मोहित ने कहा.

"ठीक है जाओ मैं ये तस्वीर ठीकाने लगाता हूँ" राज ने कहा.

मोहित जब किचन में आया तो उसने देखा की वो लड़की चीनी का डब्बा उठाने की कोशिस कर रही है पर डर रही है क्योंकि उस पर एक मोटा सा लंड्रोच बैठा है.

"हा..हा..हे...हे." मोहित हस्ने लगा.

लड़की ने मूड कर देखा और बोली, "आपको हस्ने की बजाय मेरी मदद करनी चाहिए"

"ओह सॉरी" मोहित ने कहा और लड़की के पीछे आ कर सॅट गया. मोहित का लंड अंजाने में ही उस लड़की की गान्ड से टकरा गया और उसमे हरकत होने लगी. अगले ही पल वो मोहित की पॅंट में तन चुका था.

मोहित ने हाथ के झटके से लंड्रोच को हटा दिया. लंड्रोच भाग कर कही छुप गया.

"लीजिए हो गयी आपकी मदद वैसे आपका नाम क्या है?" मोहित ने पूछा.

"संगीता" लड़की ने जवाब दिया.

मोहित ने अपने तने हुए लंड को संगीता की गान्ड पर अच्छे से सटा दिया और बोला, "बहुत अच्छा नाम है, बहुत प्यारा"

संगीता को मोहित का लंड अपनी गान्ड की गहराई तक महसूस हो रहा था और वो सिहर रही थी.

"आप बैठिए मैं चाय लाती हूँ" संगीता ने कहा.

"चाय भी पी लेंगे...आपको कैसा लग रहा है अभी" मोहित ने पूछा.

"क्या मतलब?"

"मतलब की वो लंड्रोच भगा दिया मैने...अब कैसा लग रहा है"

"अच्छा लग रहा है" संगीता ने कहा.

"अगर थोड़ा झुक जाओ तो और भी अच्छा लगेगा" मोहित ने कहा.

"आपका दोस्त बाहर चाय की वेट कर रहा होगा" संगीता ने कहा.

"कोई बात नही चाय तो उसे मिल ही जाएगी...तुम नाडा खोल कर झुक जाओ" मोहित ने कहा.

"मैं तुम्हे जानती तक नही" संगीता ने कहा.

"हमारी दूसरी मुलाकात है ये...हमने ही बच्चाया था तुम दोनो लड़कियो को उस दिन"

"जानती हूँ पर इसका मतलब ये तो नही कि मैं कुछ भी कर लूँ तुम्हारे साथ." संगीता ने कहा.

मोहित ने संगीता की गान्ड पर हल्के हल्के धक्के मारने शुरू कर दिए.

"आहह क्या कर रहे हो" संगीता ने कहा.

"अब तुम झुक नही रही हो तो सोचा कि यू ही मज़े ले लू"

संगीता को मोहित का लंड अपनी गान्ड की दरार पर महसूस हो रहा था.

"ह्म्म यही ठीक है तब तक मैं चाय बनाती हूँ" संगीता ने कहा.

मोहित ने संगीता के आगे हाथ करके उसके नाडे को पकड़ लिया और बोला, "जब मज़े ही लेने हैं तो क्यों ना अच्छे से लिए जायें"

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--30

gataank se aage.................

Sanjay ne monika ki gaanD pakad kar uske apne upar uchaalna shuru kar diya. Har uchaal ke saath sanjay ka lund monika ki chut mein ander baahar hota raha.

"aaahhh sanjay keep doing it"

"ho gaya na mood theek ab. Dekha ye injection bahut kaam ka hai."

"aaahhhh sanjay aaaahhhh."

sanjay monika ko 10 minat tak yu hi apne upar uchaalta raha.

"ab pet ke bal let jaao."

"nahi peeche se nahi"

"anal nahi karunga ghabraao mat chut mein daalunga let jaao" sanjay ne kaha.

Monika pet ke bal let gayi aur sanjay uske upar let gaya. Uska lund monika ki gaanD par pasar gaya tha.

"pakka anal nahi karoge na"

"haan baba...i like your pussy more than anything else." sanjay ne kaha.

Sanjay ne monika ki gaanD thapthapaayi.

"aaaahhhh"

sanjay ne monika ki gaanD ko faila kar uski chut tak pahunchne ka raasta banaaya aur uski chut mein lund daal diya.

"aaaaahhhhh sanjay"

"main dar raha tha ki kahi is baar bhi kisi aur ka naam na le do"

"baar baar aisi galti thoda karungi aaahhh" monika ne kaha.

Sanjay monika ke upar pads pada uski chut mein dhakke lagaata raha.

"this is fantastic fuck oooohhh aaahhh" sanjay dhakke maarte hue bola.

Kuch der baad vo nidhaal ho kar monika ke upar gir gaya. "you are always a good fucking thing"

"kya matlab?" monika ne pucha.

"har baar tumhaare saath alag hi maja aata hai." sanjay ne kaha.

.....................................................................................

"vijay kuch pata chala kiska number hai vo." chauhan ne pucha. Raj bhi paas mein hi baitha tha.

"sir vo number bhi surinder ka hi tha....mobile trace kiya par vo jungle mein pada mila."

"tumhe fauran phone mujhe dena chaahiye tha idiot." chauhan Raj ki taraf dekh kar jhalla kar bola.

"sorry sir aage se dhyaan rakhunga."

"ye baat us kayaamat ko na pata chale varna meri khaat khadi kar degi vo." chauhan ne kaha.

"sir main jaaun ab?" Raj ne kaha.

"police ki naukri chaubis ghante ki hoti hai barkhurdaar kaha jaane ki soch rahe ho" chauhan ne kaha.

"sir aaj pahla din hai...ghar par thoda celebrate bhi kar lun varna aas pados ke log naraaz ho jaayenge"

"theek hai aaj to jaao kal se jaldi jaane ki sochna bhi mat" chauhan ne kaha.

Raj gahri saans le kar chupchaap vaha se nikal liya.

"uff ye chauhan hi mila tha madam ko mujhe train karne ke liye" Raj ne socha.

Raj seedha mohit ke kamre par gaya. Usne darvaaja khadkaaya. Padmini ne darvaaja khola.

"aap yaha akeli hain guru kaha hai" Raj ne pucha.

"Mohit mere liye kuch kapde lene gaya hai."

"arey main bhi soch hi raha tha ki aap kab tak in kapdo mein rahengi"

"Raj mujhe ghar jaana hai kya kuch ho sakta hai." padmini ne pucha.

"hmm aap chinta mat karo main khud le kar jaaunga aapko aapke ghar bas ek do din ruk jaaeeye" Raj ne kaha.

Padmini maayus ho kar baith gayi. Tabhi mohit bhi aa gaya.

"guru ye kaam achcha kiya tumne jo ki padmini ji ke liye kuch kapde le aaye"

"puja ne dhyaan dilaaya mujhe to khud khyaal nahi tha aur na hi padmini ne kuch kaha"

"padmini ji aap try kar lijiye...hum baahar jaate hain aao guru tumse kuch jaroori baat karni hai" Raj ne kaha.

Raj surinder ke ghar ki saari ghatna mohit ko shuna deta hai.

"hmm....ye sach mein bahut khatarnaak hai" mohit ne kaha.

"haan guru aur puja ke baare mein kuch ajeeb si baat pata lagi jis par yakin nahi hota"

"kya pata chala meri puja ke baare mein bataao?"

"tumhaari puja...ye puja tumhaari kabse ho gayi guru" Raj ne pucha.

"bas ho gayi tu ab us par line mat maarna ab vo meri hai" mohit ne kaha.

"ye khub rahi guru...ye theek nahi kar rahe tum" Raj ne kaha.

"nagma hai na tere paas puja ka kya achchaar daalega" mohit ne kaha.

"aisa kya ho gaya jo tum puja ke peeche pad gaye" Raj ne pucha.

"maine challenge liya hai ki use pata kar rahunga."

"he..he..ha..ha..kya khub kahi..... challenge ke liye puja hi mili thi...meri chappal ghiss gayi use pataane ke chakkar mein...par usne ek baar bhi ghaas nahi daali"

"tu bata na kya bataane wala tha puja ke baare mein" mohit ne kaha.

Raj mohit ki chauhan ki kahi saari baat bata deta hai.

"ye jaroor blackmailing ka chakkar raha hoga varna puja aisi ladki nahi lagi mujhe"

"DP ho chuka hai uske saath...mujhe to khud yakin nahi hua" Raj bola.

"kuch bhi ho main phir bhi puja ko pata kar hi rahunga." mohit ne kaha.

"jaisi tumhaari marji guru...ab dosti to neebhaani hi padegi jaao main raaste se hat gaya" Raj ne kaha.

"abe tu raaste mein tha kab jo hatega...tujhe to vo bilkul pasand nahi karti." mohit ne kaha.

"phir bhi mera tyaag yaad rakhna guru...kahi bhul jaao" Raj ne kaha.

"bilkul mere Raj tera ye mahaan tyaag main hamesha yaad rakhunga."

dono hasne lage aur vaapis kamre ki taraf mud gaye.

"kaise lage kapde padmini?"

"theek hain...kya tumne socha kuch ki aage kya karna hai...main hamesha yaha is kamre mein nahi pade rahna chaahti."

is se pehle ki mohit kuch bol paata Raj bol pada, "guru aisa karte hain....address to hai hi aapke paas parveen ka...pahle confirm kar lete hain ki vahi killer hai, phir aage main sab sambhaal lunga. Jo inspector is case ko handle kar raha hai usi ke saath hun main."

"pahle hum dono chalte hain vaha...baad main padmini ko le jaayenge...kya kahte ho" mohit ne kaha.

"Theek hai chalo phir abhi intezaar kis baat ka hai" Raj ne kaha.

Kuch hi der baad mohit aur Raj bike par sawaar ho kar parveen ke ghar ki taraf ja rahe the.

"ye raha ghar par koi deekhaayi nahi de raha." mohit ne kaha.

"bell bajaate hain ghar ki dekhte hain kaun baahar aata hai" Raj ne kaha.

"dekh lo kahi koi fazihat ho jaaye" mohit ne kaha.

"sub inspector tumhaare saath hai guru chinta kyon kar rahe ho"

"tum saath ho tabhi to chinta hai" mohit ne kaha.

"guru aisa kyon bol rahe ho"

"arey mazaak kar raha hun chal bell maarte hain."

mohit ghar ki bell bajaata hai. Kuch der baad darvaaja khulta hai.

"aap yaha!" mohit ke muh se nikal gaya.

Raj bhi us ladki ko dekh kar hairaan rah gaya.

"ye mera ghar hai tum dono yaha kya kar rahe ho?"

"lagta hai hum galat address par aa gaye hame laga ye parveen ka ghar hai" mohit ne kaha.

" mere bade bhai hain vo abhi sahar se baahar gaye hain, boliye kya kaam hai"

"chodiye hame unse hi kaam tha...hum phir kabhi mil lenge" mohit ne kaha.

"jaisi aapki marji...chaaye paani kuch lenge" ladki ne kaha.

"pahle hame ander to bula lijiye yaha khade-khade chaaye pina ajeeb lagega" Raj ne kaha.

"oh i am so sorry...please come in" ladki ne kaha.

Mohit ne ander aate hue Raj ki peeth thapthapaayi.

"please have seat...main abhi chaaye laati hun" ladki ne kaha.

"ye tasveer kis ki hai" Raj ne kaha.

"ajeeb baat hai aap log bhaiya se milne aaye hain aur unki tasveer nahi pahchaante." ladki ne kaha.

"ye parveen ko nahi jaanta...main jaanta hun...ye to bas mere saath aaya hai" mohit ne baat sambhaalne ki koshis ki.

"hmm theek hai main chaaye laati hun"

"tune pahchaana ki nahi ye vahi ladki hai jiski vo ladka porn movie bana raha tha" mohit ne kaha.

"pahchaan liya guru...aisa karte hain ye photo le chalte hain...padmini ji ko yahi deekha denge...kya bolte ho" Raj ne dheere se kaha.

"aaaayyyiiii shu shu hato yaha se" kitchen se awaaj aayi.

"shaayad koi chuha ya lundroach pareshaan kar raha hai ladki ko main dekh kar aata hun" mohit ne kaha.

"theek hai jaao main ye tasveer theekaane lagaata hun" Raj ne kaha.

Mohit jab kitchen mein aaya to usne dekha ki vo ladki cheeni ka dabba uthaane ki koshis kar rahi hai par dar rahi hai kyonki us par ek mota sa lundroach baitha hai.

"ha..ha..he...he." mohit hasne laga.

Ladki ne mud kar dekha aur boli, "aapko hasne ki bajaay meri madad karni chaahiye"

"oh sorry" mohit ne kaha aur ladki ke peeche aa kar sat gaya. Mohit ka lund anjaane mein hi us ladki ki gaanD se takra gaya aur usme harkat hone lagi. Agle hi pal vo mohit ki pant mein tan chuka tha.

Mohit ne haath ke jhatke se lundroach ko hata diya. Lundroach bhaag kar kahi chup gaya.

"lijiye ho gayi aapki madad vaise aapka naam kya hai?" mohit ne pucha.

"sangeeta" ladki ne jawaab diya.

Mohit ne apne tane hue lund ko sangeeta ki gaanD par achche se sata diya aur bola, "bahut achcha naam hai, bahut pyara"

sangeeta ko mohit ka lund apni gaanD ki gahraayi tak mahsus ho raha tha aur vo sihar rahi thi.

"aap baithiye main chaaye laati hun" sangeeta ne kaha.

"chaaye bhi pee lenge...aapko kaisa lag raha hai abhi" mohit ne pucha.

"kya matlab?"

"matlab ki vo lundroach bhaga diya maine...ab kaisa lag raha hai"

"achcha lag raha hai" sangeeta ne kaha.

"agar thoda jhuk jaao to aur bhi achcha lagega" mohit ne kaha.

"aapka dost baahar chaaye ki wait kar raha hoga" sangeeta ne kaha.

"koi baat nahi chaaye to use mil hi jaayegi...tum naada khol kar jhuk jaao" mohit ne kaha.

"main tumhe jaanti tak nahi" sangeeta ne kaha.

"hamaari dusari mulaakaat hai ye...hamne hi bachchaaya tha tum dono ladkiyo ko us din"

"jaanti hun par iska matlab ye to nahi ki main kuch bhi kar lun tumhaare saath." sangeeta ne kaha.

Mohit ne sangeeta ki gaanD par halke halke dhakke maarne shuru kar diye.

"aahh kya kar rahe ho" sangeeta ne kaha.

"ab tum jhuk nahi rahi ho to socha ki yu hi maje le lu"

sangeeta ko mohit ka lund apni gaanD ki daraar par mahsus ho raha tha.

"hmm yahi theek hai tab tak main chaaye banaati hun" sangeeta ne kaha.

Mohit ne sangeeta ke aage haath karke uske naade ko pakad liya aur bola, "jab maje hi lene hain to kyon na achche se liye jaayein"

Kramashah..............................