बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:13

बात एक रात की-- 49

गतान्क से आगे...........

मोहित अब बिल्कुल ठीक था. लेकिन उसका दिल बीमार हो गया था शायद. बिके लेकर वो पूजा के कॉलेज के सामने खड़ा था. कॉलेज की लड़किया अंदर बाहर जा रही थी लेकिन पूजा उसे कही नज़र नही आ रही थी. उसके चेहरे पर निराशा उभरने लगी थी.

"कहाँ हो पूजा तुम. हर वक्त क्लास में बैठी रहती हो क्या." मोहित ने सोचा.

तभी उसे दो लड़कियों के साथ कॉलेज के गेट से पूजा निकलती हुई दिखाई दी. मोहित का चेहरा खिल उठा. उसने तुरंत बाइक स्टार्ट की और पूजा के आगे रोक दी. अचानक अपने सामने बाइक देख कर लड़किया थीतक गयी. पूजा की आँखो में खून उतर आया.

"तुम! तुम यहाँ क्या कर रहे हो?" पूजा ने पूछा.

"तुम जानती हो इसे." एक लड़की ने पुछस.

"हां हमारे पड़ोस में रहता है."

"दिल में भी तो नही रहता कहीं...हे...हे...हे." दूसरी लड़की ने चुस्की ली.

"ऐसा कुछ नही है. आइ हटे हिं."

मोहित सब सुन रहा था. "नफ़रत में भी उनकी प्यार नज़र आता है, मैं लाख संभालू दिल को ये उनकी ओर खींचा जाता है."

"ये तो कोई शायर लगता है हे..हे..हे." दोनो लड़किया हँसने लगी.

"चलो यहाँ से ये पागल है." पूजा दोनो को लेकर आगे बढ़ गयी. लेकिन दोनो लड़किया पीछे मूड के मोहित को देखती रही.

"हमें छोड़ के जा रही हो, हम तड़प कर रह जाएँगे

तुम्हारे साथ तो दो कलियाँ हैं हम अकेले रह जाएँगे."

"वाउ सो रोमॅंटिक. देखा वो हमें कलियाँ कह रहा है. रूको ना यार अच्छा बंदा लगता है." एक लड़की ने कहा.

"बहुत बड़ा फ्लर्ट है वो. चलो हमें मूवी के लिए देर हो जाएगी." पूजा ने कहा.

ये बात मोहित ने भी सुन ली. उन तीनो ने एक ऑटो पकड़ा और थियेटर के लिए निकल पड़ी. पीछे पीछे मोहित ने भी अपनी बाइक लगा दी.

"अगर तुम्हे पटा नही पाया तो जिंदगी बेकार है मेरी." मोहित ने सोचा.

थियेटर पहुँच कर तीनो लड़किया अंदर घुस्स गयी. उन्होने मोहित को नही देखा. मोहित भी टिकेट ले करूके पीछे पीछे आ गया.

"हाई...ये तो दीवाना लगता है. तुम्हारे पीछे यहाँ तक आ गया."

"मज़ाक कर रही हो ना कविता?" पूजा ने पूछा.

"मूड के तो देख वो बिल्कुल तेरे पीछे बैठा है." कविता ने कहा.

अभी पिक्चर शुरू नही हुई थी. इसलिए लाइट जली हुई थी.

पूजा ने तुरंत पीछे मूड कर देखा, "तुम यहाँ भी आ गये. क्या चाहते हो तुम."

मोहित पूजा की ओर झुका और बोला, "मुझे जो चाहिए वो तुम्हे पता है. इनके सामने कैसे कहु समझा करो."

"शट उप." पूजा ने डाँट दिया.

"क्या कह रहा था वो चुपके से तुझे?" कविता ने पूछा.

"कुछ नही...तू उस पर ज़्यादा ध्यान मत दे...पागल है वो." पूजा ने कहा.

लाइट बंद हो गयी और पिक्चर शुरू हो गयी. मोहित पूजा की तरफ झुका और बोला, "हम दोनो साथ में देखे ये रोमॅंटिक पिक्चर तो ज़्यादा अच्छा लगेगा. पीछे आ जाओ ना मेरे साथ. मेरे साथ की सीट खाली पड़ी है."

"क्या समझते हो खुद को तुम. तुम बुलाओगे और मैं आ जाउन्गि हा. तुम्हारे पास आएगी मेरी जुत्ति. चुपचाप बैठे रहो वरना चप्पल मारूँगी निकाल के."

"नही नही ऐसा काम मत करना. आज तक मैने चप्पल नही खाई." मोहित ने कहा.

"नही खाई तो अब खाओगे. मुझे गुस्सा मत दिलाओ चुपचाप बैठे रहो"

मोहित वापिस चुपचाप सीट पर बैठ गया.

"क्या करू ये तो आग उगल रही है?" मोहित बड़बड़ाया.

कुछ देर बाद कविता को पता नही क्या सूझी, वो अपनी सीट से उठ कर मोहित के पास आ कर बैठ गयी. पूजा भी ये देख कर हैरान रह गयी. लेकिन वो कुछ नही बोली. मोहित तो हैरान था ही.

"तुम्हारा शायराना अंदाज मुझे बहुत अच्छा लगा. मेरा नाम कविता है. क्या मुझपे कविता लिखोगे." कविता मोहित के घुटने पर हाथ रख कर बोली.

"मैं कोई शायर नही हूँ देवी जी. वो तो मैं यू ही कुछ जोड़-तोड़ कर बोल रहा था आपकी सहेली के लिए. पूजा से मेरा टांका भिड़वा दो ना." मोहित ने कहा.

"मुझे लगता है उसका तुम्हारे में कोई इंटेरेस्ट नही है. तुम किसी और पर ट्राइ क्यों नही करते."

"किस पर ट्राइ करू आप ही बता दो."

"मैं हूँ ना. तुम शायर हो. मैं तुम्हारी कविता बन जाउन्गि." कविता का हाथ धीरे धीरे मोहित की जाँघ की तरफ बढ़ रहा था.

"ये आप क्या कह रही है." मोहित तो भोंचक्का रह गया. लेकिन उसने कविता का हाथ नही हटाया. हटाता भी क्यों. ऐसा रोज रोज थोडा होता है किसी के साथ.

"आपका हाथ ग़लत जगह पर पहुँच रहा है. आपकी सहेली ने देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी."

"छोड़िए ना उसे अपनी बात कीजिए." कविता का हाथ मोहित के लंड पर पहुँच गया. लंड पर कविता का हाथ पड़ते ही वो तुरंत हार्ड हो गया.

"आअहह आप तो शीतम ढा रही हैं मुझ पर." मोहित ने कहा.

कविता ने मोहित की पॅंट की ज़िप खोल दी और उसके तने हुए मोटे लंड को बाहर खींच लिया.

"ओह माइ गॉड इट्स आ वंडरफुल कॉक. इट्स ह्यूज. मैने इतना बड़ा नही देखा आज तक."

"देवी जी कितने देखे हैं आप ने ये भी बता दीजिए."

"मेरे अब तक तीन बाय्फ्रेंड रहे हैं और मैने तीनो के देखे हैं."

"बहुत खूब. देखे ही हैं या लिए भी हैं आपने." मोहित ने चुस्की ली.

"तुम्हे क्या लगता है?"

"नही लिए होंगे. आप सिर्फ़ देखती होंगी उन्हे हैं ना." मोहित ने मज़ाक में कहा.

"नही जनाब तीनो पूरे के पूरे लिए हैं. तुम्हारा क्या विचार है. मुझसे दोस्ती करोगे?"

"मैं पूजा को चाहता हूँ." मोहित ने कहा.

कविता ने मोहित के लंड को ज़ोर से दबाया और बोली, "पूजा को मारिए गोली. वहाँ तुम्हे कुछ नही मिलेगा. देखा नही वो तुमसे बात भी नही कर रही. वो तुम्हे पागल कह रही थी. खुद पागल है वो."

पूजा और दूसरी लड़की रीमा पिक्चर देखने में मगन थे. उन्हे इस बात का अंदाज़ा भी नही था की उनके पीछे कविता मोहित का लंड हाथ में लिए बैठी है.

"मैं तुम्हे वो ख़ुसी दूँगी कि भूल जाओगे सब कुछ." कविता ने कहा और आगे झुक कर मोहित के लंड को अपने होंठो में दबा लिया.

"आअहह पहली बार ये किसी के मूह में गया है."

कविता ने मोहित के लंड से मूह हटाया और बोली, "क्या? इतने सेक्सी डिक को अभी तक ब्लो जॉब नही मिली. आइ कॅंट बिलीव इट."

"नही मिली तो नही मिली अब क्या कर सकते हैं. हर लड़की मूह में नही लेती है."

"मुझसे दोस्ती करोगे तो मज़े में रहोगे. आइ लव टू सक. कोई शायरी कहो ना."

"मेरे लंड को लिया आपने मूह में तो मच्छल उठा हूँ मैं

मगर अगर पूजा ने देख लिया तो बर्बाद हो जाउन्गा."

"ये कैसी शायरी है. पूजा को बीच में क्यों लाते हो." कविता ने कहा और फिर से मोहित के लोंड को मूह में घुसा लिया.

वो दोनो धीरे धीरे बोल रहे थे लेकिन फिर भी डिस्टर्बेन्स हो रही थी पूजा को. उसे समझ तो कुछ नही आ रहा था लेकिन ख़ुसर फुसर से परेशान हो रही थी.

"क्यों बाते कर......" पूजा पीछे मूड कर बोली लेकिन बोलते बोलते रुक गयी क्योंकि वो भोंचक्की रह गयी थी.

मोहित का लंड तो पूजा को नही दिखा. वो तो कविता के मूह में छिपा था. वैसे भी अंधेरा था. पूजा को समझने में देर नही लगी कि उसके बिल्कुल पीछे ब्लो जॉब दी जा रही है. मोहित की आँखे बंद थी. वो तो पहली ब्लो जॉब के सरूर में खोया था. लेकिन कोयिन्सिडेन्स था कि जब पूजा पीछे मूडी उसकी आँखे खुल गयी.

"अरे हटो क्या कर रही हो. मेरी तो आँख ही लग गयी थी. ये सब क्या हो रहा है यहाँ." मोहित ने कविता के सर को धक्का दिया.

कविता ने लंड को मूह से निकाल दिया और बोली, "ये क्या बोल रहे हो?"

तभी उसकी नज़र पूजा पर गयी, "अच्छा पूजा ने देख लिया ह्म्म. हे..हे...हे...पूजा तुम्हे तो कोई दिक्कत नही है ना."

"तुम दोनो भाड़ में जाओ मुझे कुछ नही लेना देना." पूजा वापिस मूड गयी.

"करवा दिया मेरा काम खराब तुमने. अब दुबारा ऐसा मत करना लीव मी अलोन."

"मैं बाहर टाय्लेट में जा रही हूँ. आ जाओ पूरा अंदर ले लूँगी." कविता ने कहा.

"तू तो मुझे भी अंदर ले लेगी पूरा. मुझे माफ़ करो मेरा कोई इंटेरेस्ट नही है. आपने बहुत मनोरंजन कर दिया मेरा अब प्लीज़ मुझे अकेला छोड़ दो. मुझे मूवी देखनी है."

"मूवी देखने तो नही आए थे तुम. झूठ बोल रहे हो."

मोहित ने अपने लंड को वापिस पॅंट में डाल लिया और चुपचाप बैठ गया. कविता भी चुपचाप वही बैठी रही.

"पूजा सॉरी, ये सब कविता ने किया. सच में मेरी कोई मर्ज़ी नही थी." मोहित ने पूजा की तरफ झुक कर कहा.

"आइ डोंट गिव ए डॅम अबौट इट. लीव मी अलोन." पूजा ने गुस्से में कहा.

कविता ये देखते हुए भी की मोहित उसमे कोई इंटेरेस्ट नही ले रहा है फिर भी उसके पास से नही उठी. मोहित तो हैरान और परेशान बैठा था. पूजा के सामने उसकी छवि और खराब हो गयी थी.

"लगता है कोई चान्स नही है मेरा अब. अब तो और भी मुस्किल हो गयी है. क्या करू अब?" मोहित सोच में डूबा था.

"तुम कहा खो गये? इस पूजा की चिंता आप मत कीजिए, ये ऐसी ही है तुनक मिज़ाज़."

"फिर किसकी चिंता करू अगर उसकी नही करू तो" मोहित इरिटेटेड टोन में बोला.

"मुझमे क्या कमी है. मुझे तुम्हारा शायराना अंदाज़ पसंद आया. मुझे लगा कि हम अच्छे दोस्त बन सकते हैं. लेकिन तुम तो खफा ही हो गये."

"देखो मैं सिर्फ़ पूजा के लिए यहाँ बैठा हूँ वरना कब का चला जाता. मुझे अकेला छोड़ दो प्लीज़."

"मज़ा तो तुम्हे खूब आ रहा था जब मैं सक कर रही थी. पूजा ने देख लिया तो तुम अपना मज़ा भूल गये. मैं हर किसी को ब्लो जॉब नही देती हूँ. रही बात पूजा की तो सुनो उसका अफेर है एक लड़के से. खूब अच्छे से देती है ये उसे. तुम उस पर वक्त बर्बाद मत करो. मेरा ब्रेकप हो चुका है और मैं अभी फ्री हूँ. मुझे यकीन है कि हमारी खूब जमेगी."

"किसके साथ अफेर है पूजा...विक्की के साथ?" मोहित ने पूछा.

"हां हां, तुम्हे कैसे पता?"

"तुम्हे उस से कोई लेना देना नही है."

"उफ्फ यही अदा तुम्हारी जान ले रही है. जालिम हो एक नंबर के तुम तो."

"मेरी मा छोड़ दे अकेला मुझे तू अब. मुझे पूजा के साथ सेट्टिंग करनी है जो कि तुम्हारे होते नही हो पाएगी."

"पूजा के चक्कर में तुम वेट आंड हॉट पुश्सी से हाथ धो बैठोगे. आइ आम रेडी फॉर यू. टेक मी."

"माइ गॉड...तुम्हारे जैसी लड़की नही देखी मैने आज तक जो खुद अपनी चूत पारोष दे बिना माँगे."

"अब पारोष दी है तो ये बताओ कि खाओगे की नही."

ना चाहते हुए भी इन बातो से मोहित के अंदर बेचैनी होने लगी थी. उसका लंड हरकत करने लगा था. कविता शायद ये समझ रही थी. उसने मोहित के घुटने पर हाथ रख कर धीरे धीरे हाथ को मोहित के लंड तक सरका लिया था. उसके उत्तेजित लंड को वो महसूस कर रही थी.

क्रमशः.........................

BAAT EK RAAT KI-- 49

gataank se aage...........

Mohit ab bilkul theek tha. Lekin uska dil beemaar ho gaya tha shaayad. Bike lekar vo puja ke college ke saamne khada tha. College ki ladkiya ander baahar ja rahi thi lekin puja use kahi nazar nahi aa rahi thi. uske chehre par niraasha ubharne lagi thi.

"kaha ho puja tum. Har vakt class mein baithi rahti ho kya." mohit ne socha.

Tabhi use do ladkiyon ke saath college ke gate se puja nikalti hui dikhaayi di. Mohit ka chehra khil utha. Usne turant bike start ki aur puja ke aage rok di. Achaanak apne saamne bike dekh kar ladkiya theetak gayi. Puja ki aankho mein khun utar aaya.

"tum! Tum yahan kya kar rahe ho?" puja ne pucha.

"tum jaanti ho ise." ek ladki ne puchs.

"haan hamaare padosh mein rahta hai."

"dil mein bhi to nahi rahta kahi...he...he...he." dusri ladki ne chuski li.

"aisa kuch nahi hai. I hate him."

mohit sab sun raha tha. "nafrat mein bhi unki pyar nazar aata hai, main laakh sambhaalu dil ko ye unki aur kheencha jaata hai."

"ye to koyi shaayar lagta hai he..he..he." dono ladkiya hansne lagi.

"chalo yahan se ye paagal hai." puja dono ko lekar aage badh gayi. Lekin dono ladkiya peeche mudke mohit ko dekhti rahi.

"hamein chod ke ja rahi ho, hum tadap kar rah jaayenge

tumhaare saath to do kaliyaan hain hum akele rah jaayenge."

"wow so romantic. Dekha vo hamein kaliyaan kah raha hai. Ruko na yaar achcha banda lagta hai." ek ladki ne kaha.

"bahut bada flirt hai vo. Chalo hamein movie ke liye der ho jaayegi." puja ne kaha.

Ye baat mohit ne bhi sun li. Un teeno ne ek auto pakda aur theater ke liye nikal padi. Peeche peeche mohit ne bhi apni bike laga di.

"agar tumhe pata nahi paaya to jindagi bekaar hai meri." mohit ne socha.

Theater pahunch kar teeno ladkiya ander ghuss gayi. Unhone mohit ko nahi dekha. Mohit bhi ticket le karooke peeche peeche aa gaya.

"hi...ye to deewana lagta hai. Tumhaare peeche yahan tak aa gaya."

"majaak kar rahi ho na kavita?" puja ne pucha.

"mudke to dekh vo bilkul tere peeche baitha hai." kavita ne kaha.

Abhi picture shuru nahi hui thi. Isliye light jali hui thi.

Puja ne turant peeche mud kar dekha, "tum yahan bhi aa gaye. Kya chaahte ho tum."

mohit puja ki aur jhuka aur bola, "mujhe jo chaahiye vo tumhe pata hai. Inke saamne kaise kahu samjha karo."

"shut up." puja ne daant diya.

"kya kah raha tha vo chupke se tujhe?" kavita ne pucha.

"kuch nahi...tu us par jyada dhyaan mat de...paagal hai vo." puja ne kaha.

Light band ho gayi aur picture shuru ho gayi. Mohit puja ki taraf jhuka aur bola, "hum dono saath mein dekhe ye romantic picture to jyada achcha lagega. Peeche aa jaao na mere saath. Mere saath ki seat khaali padi hai."

"kya samajhte ho khud ko tum. Tum bulaaoge aur main aa jaaungi huh. Tumhaare paas aayegi meri jutti. Chupchaap baithe raho varna chappal maarungi nikaal ke."

"nahi nahi aisa kaam mat karna. Aaj tak maine chappal nahi khaayi." mohit ne kaha.

"nahi khaayi to ab khaaoge. Mujhe gussa mat dilaao chupchaap baithe raho"

mohit vaapis chupchaap seat par baith gaya.

"kya karoo ye to aag ugal rahi hai?" mohit badbadaaya.

Khuch der baad kavita ko pata nahi kya sujhi, vo apni seat se uth kar mohit ke paas aa kar baith gayi. Puja bhi ye dekh kar hairaan rah gayi. Lekin vo kuch nahi boli. Mohit to hairaan tha hi.

"tumhaara shaayrana andaaj mujhe bahut achcha laga. Mera naam kavita hai. Kya mujhpe kavita likhoge." kavita mohit ke ghutne par haath rakh kar boli.

"main koyi shaayar nahi hun devi ji. Vo to main yu hi kuch jod-tod kar bol raha tha aapki saheli ke liye. Puja se mera taanka bhidva do na." mohit ne kaha.

"mujhe lagta hai uska tumhaare mein koyi interest nahi hai. Tum kisi aur par try kyon nahi karte."

"kis par try karoo aap hi bata do."

"main hun na. Tum shaayar ho. Main tumhaari kavita ban jaaungi." kavita ka haath dheere dheere mohit ki jaangh ki taraf badh raha tha.

"ye aap kya kah rahi hai." mohit to bhonchaka rah gaya. Lekin usne kavita ka haath nahi hataaya. Hataata bhi kyon. Aisa roj roj thoda hota hai kisi ke saath.

"aapka haath galay jagah par pahunch raha hai. Aapki saheli ne dekh liya to musibat ho jaayegi."

"chodiye na use apni baat kijiye." kavita ka haath mohit ke lund par pahunch gaya. Lund par kavita ka haath padte hi vo turant hard ho gaya.

"aaahhh aap to shitam dha rahi hain mujh par." mohit ne kaha.

Kavita ne mohit ki pant ki zip khol di aur uske tane hue mote lund ko baahar kheench liya.

"oh my god its a wonderful cock. Its huge. Maine itna bada nahi dekha aaj tak."

"devi ji kitne dekhe hain aap ne ye bhi bata dijiye."

"mere ab tak teen boyfriend rahe hain aur maine teeno ke dekhe hain."

"bahut khub. Dekhe hi hain ya liye bhi hain aapne." mohit ne chuski li.

"tumhe kya lagta hai?"

"nahi liye honge. Aap sirf dekhti hongi unhe hain na." mohit ne majaak mein kaha.

"nahi janaab teeno purey ke puey liye hain. Tumhaara kya vichaar hai. Mujhse dosti karoge?"

"main puja ko chaahta hun." mohit ne kaha.

Kavita ne mohit ke lund ko jor se dabaaya aur boli, "puja ko maariye goli. Vahaan tumhe kuch nahi milega. Dekha nahi vo tumse baat bhi nahi kar rahi. Vo tumhe paagal kah rahi thi. Khud paagal hai vo."

puja aur dusri ladki reema picture dekhne mein magan the. Unhe is baat ka andaaja bhi nahi tha ki unke peeche kavita mohit ka lund haath mein liye baithi hai.

"main tumhe vo khusi dungi ki bhool jaaoge sab kuch." kavita ne kaha aur aage jhuk kar mohit ke lund ko apne hontho mein daba liya.

"aaahhh pahli baar ye kisi ke muh mein gaya hai."

kavita ne mohit ke lund se muh hataaya aur boli, "kya? Itne sexy dick ko abhi tak blow job nahi mili. I cant believe it."

"nahi mili to nahi mili ab kya kar sakte hain. Har ladki muh mein nahi leti hai."

"mujhse dosti karoge to maje mein rahoge. I love to suck. Koyi shaayri kaho na."

"mere lund ko liya aapne muh mein to machchal utha hun main

magar agar puja ne dekh liya to barbaad ho jaaungaa."

"ye kaisi shaayri hai. Puja ko beech mein kyon laate ho." kavita ne kaha aur phir se mohit ke lond ko muh mein ghusaa liya.

Vo dono dheere dheere bol rahe the lekin phir bhi disturbance ho rahi thi puja ko. Use samajh to kuch nahi aa raha tha lekin khusar phusar se pareshaan ho rahi thi.

"kyon baate kar......" puja peeche mud kar boli lekin bolte bolte ruk gayi kyonki vo bhonchakki rah gayi thi.

Mohit ka lund to puja ko nahi dikha. Vo to kavita ke muh mein cheepa tha. Vaise bhi andhera tha. Puja ko samajhne mein der nahi lagi ki uske bilkul peeche blow job di ja rahi hai. Mohit ki aankhe band thi. Vo to pahli blow job ke saroor mein khoya tha. Lekin coincidence tha ki jab puja peeche mudi uski aankhe khul gayi.

"arey hato kya kar rahi ho. Meri to aankh hi lag gayi thi. Ye sab kya ho raha hai yahan." mohit ne kavita ke sar ko dhakka diya.

Kavita ne lund ko muh se nikaal diya aur boli, "ye kya bol rahe ho?"

tabhi uski nazar puja par gayi, "achcha puja ne dekh liya hmm. He..he...he...puja tumhe to koyi dikkat nahi hai na."

"tum dono bhaad mein jaao mujhe kuch nahi lena dena." puja vaapis mud gayi.

"karva diya mera kaam kharaab tumne. Ab dubaara aisa mat karna leave me alone."

"main baahar toilet mein ja rahi hun. Aa jaaoo pura ander le lungi." kavita ne kaha.

"tu to mujhe bhi ander le legi pura. Mujhe maaf karo mera koyi interest nahi hai. Aapne bahut manoranjan kar diya mera ab please mujhe akela chod do. Mujhe movie dekhni hai."

"movie dekhne to nahi aaye the tum. Jhuth bol rahe ho."

mohit ne apne lund ko vaapis pant mein daal liya aur chupchaap baith gaya. Kavita bhi chupchaap vahi baithi rahi.

"puja sorry, ye sab kavita ne kiya. Sach mein meri koyi marji nahi thi." mohit ne puja ki taraf jhuk kar kaha.

"i dont give a damn about it. Leave me alone." puja ne gusse mein kaha.

kavita ye dekhte hue bhi ki mohit usme koyi interest nahi le raha hai phir bhi uske paas se nahi uthi. Mohit to hairaan aur pareshaan baitha tha. Puja ke saamne uski chavi aur khraab ho gayi thi.

"lagta hai koyi chance nahi hai mera ab. Ab to aur bhi muskil ho gayi hai. Kya karoo ab?" mohit soch mein duba tha.

"tum kaha kho gaye? Is puja ki chinta aap mat kijiye, ye aisi hi hai tunak mizaaz."

"phir kiski chinta karoo agar uski nahi karu to" mohit irritated tone mein bola.

"mujhme kya kami hai. Mujhe tumhaara shaayrana andaaz pasand aaya. Mujhe laga ki hum achche dost ban sakte hain. Lekin tum to khafa hi ho gaye."

"dekho main sirf puja ke liye yahan baitha hun varna kab ka chala jaata. Mujhe akela chod do please."

"maja to tumhe khub aa raha tha jab main suck kar rahi thi. Puja ne dekh liya to tum apna maja bhool gaye. Main har kisi ko blow job nahi deti hun. Rahi baat puja ki to suno uska affair hai ek ladke se. Khub achche se deti hai ye use. Tum us par vakt barbaad mat karo. Mera breakup ho chuka hai aur main abhi free hun. Mujhe yakin hai ki hamaari khub jamegi."

"kiske saath affair hai puja...vikky ke saath?" mohit ne pucha.

"haan haan, tumhe kaise pata?"

"tumhe us se koyi lena dena nahi hai."

"uff yahi ada tumhaari jaan le rahi hai. Jaalim ho ek number ke tum to."

"meri ma chod de akela mujhe tu ab. Mujhe puja ke saath setting karni hai jo ki tumhaare hote nahi ho paayegi."

"puja ke chakkar mein tum wet and hot pushsy se haath dho baithoge. I am ready for you. Take me."

"my god...tumhaare jaisi ladki nahi dekhi maine aaj tak jo khud apni chut parosh de bina maange."

"ab parosh di hai to ye bataao ki khaaoge ki nahi."

na chaahte hue bhi in baato se mohit ke ander bechaini hone lagi thi. Uska lund harkat karne laga tha. Kavita shaayad ye samajh rahi thi. Usne mohit ke ghutne par haath rakh kar dheere dheere haath ko mohit ke lund tak sarka liya tha. Uske uttejit lund ko vo mahsus kar rahi thi.

Kramashah.....................

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:14

बात एक रात की-- 50

गतान्क से आगे...........

"मैने जो तुम्हे पारोशा है उसे देख कर मूह में पानी तो आ गया है तुम्हारे लेकिन पूजा के कारण खाने से डर रहे हो. खाना ठंडा हो जाए इस से पहले खा लो. किस्मत वाले हो तुम जो तुम्हे पारोष रही हूँ. हर किसी को नही परोसती मैं."

"यहाँ कैसे खाउ मेरी मा. पूजा ने देख लिया तो रहा सहा चान्स भी ख़तम हो जाएगा. मुझे बहकाओ मत, अगर मैं बहक गया तो बुरा हाल कर दूँगा मैं तुम्हारा."

"थियेटर खाली ही है. पीछे की तरफ चलते हैं...वहाँ तक पूजा की नज़र नही जाएगी." कविता ने कहा.

मोहित फ़ौरन सीट से उठ जाता है. उसे ऐसा लगता है कि अगर कविता के साथ वो बहक गया तो पूजा को पटाना बहुत ही मुस्किल हो जाएगा. वो पूजा के सर के पास झुका और बोला, "कैसी-कैसी थर्कि सहेलिया बना रखी है तुमने. परेशान कर दिया मुझे. जा रहा हूँ मैं ये अच्छी ख़ासी पिक्चर छोड़ के."

"तो जाओ ना हू केर्स." पूजा ने कहा.

"अपने आशिक़ की कभी तो चिंता किया करो." मोहित ने कहा.

"गो टू हेल"

"ओके गोयिंग, मैं हाथ में फूल ले कर इंतज़ार कारूगा वहाँ तुम्हारा. तुम कब आओगी."

"हेल ईज़ फॉर यू, नोट फॉर मी...गेट लॉस्ट."

"बहुत गरम हो भाई, कसम से बदन जल जाएगा मेरा जब मैं तुमसे लिपटुँगा."

"जाते हो कि नही तुम. मुझे पिक्चर देखने दो."

"जा रहा हूँ जी. बहुत बहुत धन्यवाद आपका."

कविता लगातार मोहित को ही देख रही थी. लेकिन वो उसे इग्नोर करके सीधा बाहर आ गया. उसने अपनी बाइक पर बैठ कर बाइक स्टार्ट की ही थी के उसे कविता आती दिखाई थी.

"आ गयी चूत परोसने वाली क्या करू इसका. जल्दी निकलता हूँ यहाँ से"

लेकिन कविता तो तेज़ी से आकर उसके पीछे बैठ गयी.

"अच्छा किया तुमने जो बाहर आ गये. चलो कही और चलते हैं जहा सिर्फ़ हम तुम हो"

"तुम ऐसे नही मानोगी. चल तेरी चूत की आग बुझाता हूँ आज." मोहित बाइक स्टार्ट करते हुए बोला.

"मैं तो कब से तड़प रही हूँ...बुझाओ ना."

"आज तुझे पता चलेगा कि तूने ग़लत बंदे को पारोष दी चूत अपनी. बहुत बुरी तरह खाता हूँ मैं."

"हाई राम मैं तो मर ही जाउन्गि. जैसे भी खाना खाना ज़रूर."

"थर्कि हो तुम...थर्कि"

"ये थर्कि क्या होता है?" कविता ने पूछा.

"खुद को समझ लॉगी तो थर्कि का मतलब जान जाओगी"

"बहुत अकेली थी मैं कुछ दिनो से. तुम मिले तो बहार आ गयी."

"क्या हुआ तुम्हारे बॉय फ्रेंड का?"

"ब्रेक अप हो गया बताया ना."

"ओह हां तो कोई और बॉय फ्रेंड ढूँढ लो."

"ढूँढ तो लिया... तुम हो ना"

"मैं बिल्कुल नही हूँ समझ लो अच्छे से"

"कोई बात नही आज के लिए तो हो ही."

"बिल्कुल बिल्कुल ये ठीक है"

मोहित का घर वैसे खाली था. लेकिन वो कविता को घर नही ले जाना चाहता था. क्योंकि उसे डर था कि कही रोज ना टपक पड़े वो उसके घर. इसलिए मोहित ने बाइक घने जुंगलो की तरफ मोड़ ली.

"जंगल में मंगल करोगे तुम?" कविता ने पूछा.

"बिल्कुल तुम्हारे जैसी वाइल्ड नेचर की लड़की के लिए ये जंगल ही ठीक है."

मोहित ने बाइक जंगल में घुसा दी और रोक दी. "ज़्यादा अंदर नही जाएँगे यही सड़क के नज़दीक ठीक रहेगा."

"थोड़ा तो आगे चलो...सड़क के किनारे डर लगेगा मुझे."

मोहित ने बाइक वही खड़ी कर दी और कविता का हाथ पकड़ कर थोड़ा और आगे आ गया जंगल में.

"कुछ भयानक सा सन्नाटा है यहाँ. तुम मुझे अपने घर नही ले जा सकते थे क्या? डर लग रहा है मुझे यहाँ." कविता ने कहा.

"डरने की क्या बात है. मैं हूँ ना साथ में."

"फिर भी डर लग रहा है मुझे. प्लीज़ मुझे कही और ले चलो."

"पहले तो बड़ी बेचैन हो रही थी चूत ठुकवाने के लिए...अब तुम्हे डर लग रहा है."

"देखो मुझे पता नही क्यों कुछ अहसास हो रहा है कि यहाँ कुछ गड़बड़ है. देखो ना अजीब सी खामोसी और सन्नाटा है यहाँ. मेरी बात मानो चलो यहाँ से."

"जंगल ऐसे ही होते हैं. यहाँ कोई बॅंड बाजा तो लेकर घूमेगा नही तुम्हारे लिए. अब यहाँ आ गये हैं तो काम करके ही जाएँगे. भड़का दिया है तुमने मुझे अब भुग्तो."

"वो तो मैं भुगत लूँगी पर मेरा यकीन करो यहाँ कुछ अजीब लग रहा है मुझे."

"कुछ अजीब नही है. जल्दी से ये जीन्स नीचे सरकाओ और जो पोज़िशन तुम्हे कंफर्टबल लगे लगा लो. मेरा लंड तैयार है आपके लिए." मोहित ने लंड बाहर खींच लिया.

"इतना प्यारा लंड दिखाओगे तो कोई कैसे थामेगा खुद को. मुझे डर तो लग रहा है. तुम कहते हो तो ठीक है. लेट्स डू इट क्विक्ली."

"क्विक्ली नही देवी जी. अब जब आपने भड़का दिया है मुझे तो बहुत तसल्ली से लूँगा तुम्हारी मैं...जल्दी फ्री नही होने वाली तुम."

"तो फिर घर ले जाते ना मुझे यहाँ क्यों लाए हो. ये जंगल क्या तसल्ली से करने की जगह है."

"तू ख़ामा खा डर रही है. पूरी तरह सेफ है ये .."

"तुम इतने विस्वास से कैसे कह सकते हो."

मोहित के पास कोई जवाब नही था.

.........................................................

राज शर्मा शालिनी के साथ जीप में निकल चुका था. वो ड्राइव कर रहा था और शालिनी साथ बैठी थी.

"ट्रैनिंग कैसी चल रही है तुम्हारी."

"जी मेडम बिल्कुल ठीक चल रही है. चौहान जी बहुत अच्छे से सीखा रहे हैं मुझे." राज शर्मा ने कहा.

"गुड. पद्‍मिनी को मेरे पास ला कर अच्छा किया था तुमने."

"हां मेडम. मुझे यकीन था कि आप सच को समझेंगी. आप ही के कारण तो ये नौकरी मिली है मुझे. मैं तो चक्कर लगा लगा कर थक गया था. आप ना आती तो मेरी जाय्निंग कभी ना होती."

"ईमानदारी से ड्यूटी करना हमेशा. पोलीस में आकर बिगड़ जाते हैं लोग अक्सर."

"आपको शिकायत का मोका नही दूँगा मेडम. वैसे बाहर में कहाँ जाना चाहेंगी आप"

"वैसे ही राउंड लेने का मन था. पूरे बाहर का चक्कर लगाना है मुझे."

"मेडम जी एक बात पुँच्छू बुरा ना माने तो."

"हां पूछो?"

"आप पोलीस में कैसे आ गयी."

"कैसे आ गयी मतलब. सिविल सर्विस का एग्ज़ॅम पास करके आई हूँ."

"सॉरी मेडम मेरा मतलब ये था कि क्या आपका इंटेरेस्ट था पोलीस में या फिर...."

"आइ एफ एस बन-ना चाहती थी मैं तो बन गयी आइ पी एस पर कोई बात नही दिस ईज़ गुड सर्विस."

"मेरी तो हमेशा से इच्छा थी पोलीस में आने की आपके कारण सपना साकार हुआ मेरा. आपका अहसान जिंदगी भर नही भूलूंगा मैं."

"ये कहाँ आ गये हम ये तो दोनो तरफ जंगल है." शालिनी ने कहा.

"हां मेडम ये बहुत बड़ा जंगल है. इसी रोड पर हादसा हुआ था पद्‍मिनी जी के साथ."

"ओह हां याद आया. पहली बार आई हूँ मैं इस तरफ."

"बहुत बड़ा जंगल है मेडम ये बाहर के बीच में. क्रिमिनल लोग अच्छा फ़ायडा उठाते होंगे इसका."

"बिल्कुल सही कह रहे हो. ऐसे सुनसान जंगल अक्सर क्राइम का अड्डा बन जाते हैं. वो...वो...कौन हैं जंगल में."

राज शर्मा फ़ौरन जीप रोक देता है.

"कहाँ मेडम...मुझे कुछ दिखाई नही दिया."

"नही मैने देखा अभी एक साए को इस तरफ. शायद उसने भी हमें देखा. वो छुप गया है शायद. चलो देखते हैं." शालिनी जीप से उतर जाती है.

"क्या देख लिया इन मेडम साहिबा ने मुझे कुछ दिखाई नही दिया." राज शर्मा जीप से उतरते वक्त बड़बड़ाया.

शालिनी ने अपनी सर्विस पिस्टल निकाल ली और बोली, "कौन है वहाँ बाहर आ जाओ वरना गोली मार दूँगी."

"किसी जुंगली जानवर को ना मार दे ये कयामत. बैठे बिठाये मुसीबत हो जाएगी."

"मेडम शायद कोई जानवर होगा?"

"शट अप यू ईडियट. मेरी आँखे धोका नही खा सकती. मैने देखा था किसी को....हे कौन हो तुम बाहर आओ."

बाहर तो कोई नही आया लेकिन एक गोली तेज़ी से शालिनी की और आई और उसके सर के बिल्कुल बाजू से निकल गयी. शालिनी फ़ौरन ज़मीन पर लेट गयी. राज शर्मा के पास तो कुछ था नही. वो जीप के पीछे छुप गया."मेडम सही कह रही थी. कौन है ये बंदा जो सारे आम पोलीस पर गोली चला रहा है."

शालिनी धीरे धीरे झुके झुके हाथ में पिस्टल लिए आगे बढ़ रही थी. शालिनी ने फाइयर किया. फाइयर होते ही किसी के भागने की आहट हुई. राज शर्मा भी नीचे झुक कर धीरे धीरे शालिनी के पास आ गया.

"आप सही कह रही थी मेडम"

"मैं हमेशा सही कहती हूँ. आगे से मेरी स्टेट्मेंट पर डाउट किया तो सस्पेंड कर दूँगी"

"नही करूगा मेडम. बिल्कुल नही कारूगा. लगता है वो भाग गया."

"मेरे उपर गोली चलाने वाले को मैं छोड़ूँगी नही...चलो पकड़ते हैं उसे."

"मेडम हम सिर्फ़ 2 हैं. और लोगो को बुला लूँ क्या."

"हां चौहान को फोन करो...तब तक हम कोशिस करते हैं उसे पकड़ने की."

"मेडम देख लो ये जंगल है. वो छुपा बैठा होगा कही और हमें निसाने पर ले लेगा. मेरे पास तो कुछ भी नही है. अभी तक सर्विस पिस्टल नही मिली मुझे."

"तुम मेरे पीछे पीछे आओ मैं हूँ ना साथ"

राज शर्मा चौहान को फोन करता है और उसे सारी सिचुयेशन बता देता है. वो कहता है कि 20 मिनिट में पोलीस की 2 पार्टीस पहुँच जाएँगी वहाँ.

"मेडम कही ये साइको ही तो नही है. बिना सोचे समझे पोलीस पर गोली चला दी इसने. ऐसा कोई पागल ही कर सकता है. उसे बाहर आने को ही तो बोल रही थी आप. कुछ और तो नही कहा था उसे."

"सही कह रहे हो शायद ये साइको ही है." शालिनी का ध्यान बोलते वक्त भटक जाता है और वो एक . से टकरा कर गिरने लगती है. राज शर्मा उसे संभालने की कोशिस करता है लेकिन उसका बॅलेन्स भी डगमगा जाता है और वो शालिनी को संभालने की बजाए उसको साथ लेकर उसके उपर गिरता है. बहुत ही चिंता ज़नक और नाज़ुक स्थिति बन जाती है. ए एस पी साहिबा नीचे पड़ी है और अपना राज शर्मा उसके उपर.

क्रमशः........................

.

BAAT EK RAAT KI-- 50

gataank se aage...........

"maine jo tumhe parosha hai use dekh kar muh mein paani to aa gaya hai tumhaare lekin puja ke kaaran khaane se dar rahe ho. Khana thanda ho jaaye is se pahle kha lo. Kismat waale ho tum jo tumhe parosh rahi hun. Har kisi ko nahi parosti main."

"yahan kaise khaaun meri ma. Puja ne dekh liya to raha saha chance bhi khatam ho jaayega. Mujhe bahkaao mat, agar main bahak gaya to bura haal kar dunga main tumhaara."

"theater khaali hi hai. Peeche ki taraf chalte hain...vahaan tak puja ki nazar nahi jaayegi." kavita ne kaha.

Mohit fauran seat se uth jaata hai. Use aisa lagta hai ki agar kavita ke saath vo bahak gaya to puja ko pataana bahut hi muskil ho jaayega. Vo puja ke sar ke paas jhuka aur bola, "kaisi-kaisi tharki saheliya bana rakhi hai tumne. Pareshaan kar diya mujhe. Ja raha hun main ye achchi khaasi picture chod ke."

"to jaao na who cares." puja ne kaha.

"apne aashiq ki kabhi to chinta kiya karo." mohit ne kaha.

"go to hell"

"ok going, main haath mein phool le kar intazaar karooga vahaan tumhaara. Tum kab aaogi."

"hell is for you, not for me...get lost."

"bahut garam ho bhai, kasam se badan jal jaayega mera jab main tumse liptunga."

"jaate ho ki nahi tum. Mujhe picture dekhne do."

"ja raha hun ji. Bahut bahut dhanyavaad aapka."

kavita lagaatar mohit ko hi dekh rahi thi. Lekin vo use ignore karke seedha baahar aa gaya. Usne apni bike par baith kar bike start ki hi thi ke use kavita aati dikhayi thi.

"aa gayi chut parosane waali kya karoo iska. Jaldi nikalta hun yahan se"

lekin kavita to teji se aakar uske peeche baith gayi.

"achcha kiya tumne jo baahar aa gaye. Chalo kahi aur chalte hain jaha sirf hum tum ho"

"tum aise nahi maanogi. Chal teri chut ki aag bujhaata hun aaj." mohit bike start karte hue bola.

"main to kab se tadap rahi hun...bujhaao na."

"aaj tujhe pata chalega ki tune galat bande ko parosh di chut apni. Bahut buri tarah khaata hun main."

"hi ram main to mar hi jaaungi. Jaise bhi khana khana jaroor."

"tharki ho tum...tharki"

"ye tharki kya hota hai?" kavita ne pucha.

"khud ko samajh logi to tharki ka matlab jaan jaaogi"

"bahut akeli thi main kuch dino se. Tum mile to bahaar aa gayi."

"kya hua tumhaare boy friend ka?"

"break up ho gaya bataaya na."

"oh haan to koyi aur boy friend dhundh lo."

"dhundh to liya... tum ho na"

"main bilkul nahi hun samajh lo achche se"

"koyi baat nahi aaj ke liye to ho hi."

"bilkul bilkul ye theek hai"

mohit ka ghar vaise khaali tha. Lekin vo kavita ko ghar nahi le jaana chaahta tha. Kyonki use dar tha ki kahi roj na tapak pade vo uske ghar. Isliye mohit ne bike ghane junglo ki taraf mod li.

"jungle mein mangal karoge tum?" kavita ne pucha.

"bilkul tumhaare jaisi wild nature ki ladki ke liye ye jungle hi theek hai."

mohit ne bike jungle mein ghusaa di aur rok di. "jyada ander nahi jaayenge yahi sadak ke nazdik theek rahega."

"thoda to aage chalo...sadak ke kinaare dar lagega mujhe."

mohit ne bike vahi khadi kar di aur kavita ka haath pakad kar thoda aur aage aa gaya jungle mein.

"kuch bhayaanak sa sannaata hai yahan. Tum mujhe apne ghar nahi le ja sakte the kya? Dar lag raha hai mujhe yahan." kavita ne kaha.

"darne ki kya baat hai. Main hun na saath mein."

"phir bhi dar lag raha hai mujhe. Please mujhe kahi aur le chalo."

"pahle to badi bechain ho rahi thi chut thukvaane ke liye...ab tumhe dar lag raha hai."

"dekho mujhe pata nahi kyon kuch ahsaas ho raha hai ki yahan kuch gadbad hai. Dekho na ajeeb si khaamosi aur sannaata hai yahan. Meri baat maano chalo yahan se."

"jungle aise hi hote hain. Yahan koyi band baaja to lekar ghumega nahi tumhaare liye. Ab yahan aa gaye hain to kaam karke hi jaayenge. Bhadka diya hai tumne mujhe ab bhugto."

"vo to main bhugat lungi par mera yakin karo yahan kuch ajeeb lag raha hai mujhe."

"kuch ajeeb nahi hai. Jaldi se ye jeans neeche sarkaao aur jo position tumhe comfortable lage laga lo. Mera lund taiyaar hai aapke liye." mohit ne lund baahar kheench liya.

"itna pyara lund dikhaaoge to koyi kaise thaamega khud ko. Mujhe dar to lag raha hai. Tum kahte ho to theek hai. Lets do it quickly."

"quickly nahi devi ji. Ab jab aapne bhadka diya hai mujhe to bahut tasalli se lunga tumhaari main...jaldi free nahi hone waali tum."

"to phir ghar le jaate na mujhe yahan kyon laaye ho. Ye jungle kya tasalli se karne ki jagah hai."

"tu khaama kha dar rahi hai. Puri tarah safe hai ye jungle."

"tum itne viswaas se kaise kah sakte ho."

mohit ke paas koyi jawaab nahi tha.

.........................................................

Raj sharma shalini ke saath jeep mein nikal chuka tha. Vo drive kar raha tha aur shalini saath baithi thi.

"training kaisi chal rahi hai tumhaari."

"ji madam bilkul theek chal rahi hai. Chouhaan ji bahut achche se seekha rahe hain mujhe." Raj sharma ne kaha.

"good. Padmini ko mere paas la kar achcha kiya tha tumne."

"haan madam. Mujhe yakin tha ki aap sach ko samjhengi. Aap hi ke kaaran to ye naukari mili hai mujhe. Main to chakkar laga laga kar thak gaya tha. Aap na aati to meri joining kabhi na hoti."

"imaandaari se duty karna hamesha. Police mein aakar bigad jaate hain log aksar."

"aapko shikaayat ka moka nahi dunga madam. Vaise baahar mein kaha jaana chaahengi aap"

"vaise hi round lene ka man tha. Pure baahar ka chakkar lagaana hai mujhe."

"madam ji ek baat punchu bura na maane to."

"haan pucho?"

"aap police mein kaise aa gayi."

"kaise aa gayi matlab. Civil service ka exam paas karke aayi hun."

"sorry madam mera matlab ye tha ki kya aapka interest tha police mein ya phir...."

"I F S ban-na chaahti thi main to ban gayi I P S par koyi baat nahi this is good service."

"meri to hamesha se icha thi police mein aane ki aapke kaaran sapna saakar hua mera. Aapka ahsaan jindagi bhar nahi bhulunga main."

"ye kaha aa gaye hum ye to dono taraf jungle hai." shalini ne kaha.

"haan madam ye bahut bada jungle hai. Isi road par haadsa hua tha padmini ji ke saath."

"oh haan yaad aaya. Pahli baar aayi hun main is taraf."

"bahut bada jungle hai madam ye baahar ke beech mein. Criminal log achcha faayda uthaate honge iska."

"bilkul sahi kah rahe ho. Aise sunsaan jungle aksar crime ka adda ban jaate hain. Vo...vo...kaun hain jungle mein."

Raj sharma fauran jeep rok deta hai.

"kaha madam...mujhe kuch dikhaayi nahi diya."

"nahi maine dekha abhi ek saaye ko is taraf. Shaayad usne bhi hamein dekha. Vo chup gaya hai shaayad. Chalo dekhte hain." shalini jeep se utar jaati hai.

"kya dekh liya in madam saahiba ne mujhe kuch dikhayi nahi diya." Raj sharma jeep se utarte vakt badbadaaya.

Shalini ne apni service pistol nikaal li aur boli, "kaun hai vahaan baahar aa jaao varna goli maar dungi."

"kisi jungli jaanvar ko na maar de ye kayaamat. Baithe beethaye musibat ho jaayegi."

"madam shaayad koyi jaanvar hoga?"

"shut up you idiot. Meri aankhe dhoka nahi kha sakti. Maine dekha tha kisi ko....hey kaun ho tum baahar aao."

baahar to koyi nahi aaya lekin ek goli teji se shalini ki aur aayi aur uske sar ke bilkul baju se nikal gayi. Shalini fauran jamin par late gayi. Raj sharma ke paas to kuch tha nahi. Vo jeep ke peeche chup gaya."madam sahi kah rahi thi. Kaun hai ye banda jo sarey aam police par goli chala raha hai."

shalini dheere dheere jhuke jhuke haath mein pistol liye aage badh rahi thi. Shalini ne fire kiya. Fire hote hi kisi ke bhaagne ki aahat hui. Raj sharma bhi neeche jhuk kar dheere dheere shalini ke paas aa gaya.

"aap sahi kah rahi thi madam"

"main hamesha sahi kahti hun. Aage se meri statement par doubt kiya to suspend kar dungi"

"nahi karooga madam. Bilkul nahi karooga. Lagta hai vo bhaag gaya."

"mere upar goli chalaane waale ko main chodungi nahi...chalo pakadte hain use."

"madam hum sirf 2 hain. Aur logo ko bula lun kya."

"haan chouhaan ko phone karo...tab tak hum koshis karte hain use pakadne ki."

"madam dekh lo ye jungle hai. Vo chupa baitha hoga kahi aur hamein nisaane par le lega. Mere paas to kuch bhi nahi hai. Abhi tak service pistol nahi mili mujhe."

"tum mere peeche peeche aao main hun na saath"

Raj sharma chouhaan ko phone karta hai aur use saari situation bata deta hai. Vo kahta hai ki 20 minute mein police ki 2 parties pahunch jaayengi vahaan.

"madam kahi ye psycho hi to nahi hai. Bina soche samjhe police par goli chala di isne. Aisa koyi paagal hi kar sakta hai. Use baahar aane ko hi to bol rahi thi aap. Kuch aur to nahi kaha tha use."

"sahi kah rahe ho shaayad ye psycho hi hai." shalini ka dhyaan bolte vakt bhatak jaata hai aur vo ek pathar se takra kar girne lagti hai. Raj sharma use sambhaalne ki koshis karta hai lekin uska balance bhi dagmaga jaata hai aur vo shalini ko sambhaalne ki bajaaye usko saath lekar uske upar girta hai. Bahut hi chinta zanak aur naazuk sthiti ban jaati hai. A S P saahiba neeche padi hai aur apna Raj sharma uske upar.

Kramashah.........................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:15

बात एक रात की-- 51

गतान्क से आगे...........

"मेडम आपको चोट तो नही आई."

"उतरो तो सही पहले मेरे उपर से तुम."

राज शर्मा फ़ौरन एक तरफ़ लूड़क जाता है.

"क्या करना चाह रहे थे एग्ज़ॅक्ट्ली तुम."

"सॉरी मेडम आप गिरने लगी थी. आपको थामने के चक्कर में मैं भी गिर गया."

"आअहह कमर तोड़ दी तुमने मेरी. वैसे मैं बच जाती शायद.... स्टुपिड"

"सॉरी मेडम मैं तो बस....."

"शूट अप... मुझे किसी की मदद की ज़रूरत नही कभी भी समझे तुम. आगे से ऐसा किया तो सस्पेंड कर दूँगी तुम्हे."

"मेरी तो नौकरी हर वक्त तलवार की धार पर लटकी है." राज शर्मा धीरे से बड़बड़ाया.

"क्या कहा तुमने?"

"कुछ नही मैं सोच रहा था कि किस तरफ गया होगा वो पोलीस पर गोली चलाने वाला. जंगल तो बहुत बड़ा है ये. हमें किस तरफ जाना चाहिए."

"जिस तरफ मैं चलूंगी तुम उस तरफ चलोगे बस. बाकी बाते भूल जाओ."

"कयामत से भी कुछ ज़्यादा है मेडम साहिबा संभाल कर रहना होगा इनसे वरना नौकरी गयी समझो." राज शर्मा ने सोचा.

"क्या सोच रहे हो चलो अब या फिर इन्विटेशन देना पड़ेगा तुम्हे"

"चलिए मेडम...आप मुझे पिस्टल दिलवा दीजिए एक ऐसे मोको पर ज़रूरत पड़ जाती है."

"देखेंगे वापिस जा करो अभी चुपचाप आगे बढ़ो"

..............................

..........................

"मेरा यकीन करो मैने गोली की आवाज़ सुनी अभी."

"मुझे क्यों नही सुनी यार तुम थियेटर में तो बड़ी गर्मी दिखा रही थी यहाँ तुम्हारी चूत ठंडी पड़ गयी. अब देनी है तो दो वरना मैं चला. जीन्स भी नही सर्कायि अब तक तुमने."

"एक तो ऐसी जगह ले आए मुझे उपर से ऐसी बाते बोलते हो हा लाओ पहले तुम्हारा लंड चूस्ति हूँ मूड ठीक हो जाएगा मेरा. तुम आस पास नज़र रखना."

कविता मोहित के आगे बैठ जाती है और उसका लंड मूह में ले लेती है.

"आआहह फाइनलि आइ आम गेटिंग आ नाइस ब्लो जॉब इन कंप्लीट प्राइवसी."

जंगल में कितनी प्राइवसी थी वो तो कुछ देर में पता लगने वाला था मोहित को

मोहित आँखे बंद किए पूरा पूरा मज़ा ले रहा था चुसाई का.

"मुझे नही पता था कि ब्लो जॉब इतनी मस्त होती है. वाउ यू आर ग्रेट कविता...आआहह सक इट बेबी." मोहित ने कविता के सर पर हाथ रख दिया.

कविता ने मोहित का लंड मूह से निकाला और बोली, "कुछ शायरी ही कह दो मेरे लिए पूजा के लिए तो खूब कह रहे थे."

"मैं कोई शायर नही हूँ. वो तो बस पूजा को पटाने की कोशिस कर रहा था. कोई रास्ता सुझाओ ना तुम. तुम तो फ्रेंड हो उसकी."

"मैं कुछ नही कर सकती इसमें ये तो उसी पर निर्भर है."

"चलो छोड़ो यू डू युवर ब्लो जॉब."

"मुझसे दोस्ती रखोगे तो ऐसी ब्लो जॉब रोज मिलेगी तुम्हे." कविता ने कहा और मोहित के लंड को मूह में ले लिया.

"यस आअहह कीप सकिंग."

..............................................................

शालिनी पिस्टल ताने आगे बढ़ रही थी. राज शर्मा उसके पीछे पीछे था.

"कहाँ गया वो?" शालिनी ने कहा.

"इतना बड़ा जंगल है मेडम कही भी जा सकता है वो."

"हर तरफ नज़र रखो तुम वो यही कही छुपा हो सकता है."

"ठीक है मेडम मैं नज़र रखे हुए हूँ." राज शर्मा ने कहा.

अचानक कुछ हलचल होती है और शालिनी थम जाती है. राज शर्मा का ध्यान दूसरी तरफ रहता है वो सीधा ए एस पी साहिबा से टकराता है. उनका सर पेड़ की एक डाली से टकराता है और उनका पारा चढ़ जाता है. राज शर्मा के तो पैरो के नीचे से जैसे ज़मीन निकल जाती है. उस से कुछ कहे नही बनता. चेहरा लटक जाता है बेचारे का.

"ध्यान कहाँ है तुम्हारा कभी मेरे उपर गिर जाते हो कभी पीछे से टकराते हो. ये सारी की सारी गोलिया तुम्हारे भेजे में उतार दूँगी अभी. पता नही किस लंगूर को साथ ले आई मैं."

"सॉरी मेडम मेरा ध्यान दूसरी तरफ था डाँट लीजिए मुझे जितना भी पर लंगूर मत कहिए."

"क्यों ना कहु?"

"लंगूर मुझे अच्छे नही लगते किसी और जानवर का नाम दे दीजिए." राज शर्मा ने गंभीर मुद्रा में कहा.

"जीसस...चुप रहो अभी तुम. क्या तुम्हे कुछ हलचल सुनाई दी सामने की झाड़ियों में."

"हां सुनाई तो दी मेडम"

"बिल्कुल चुपचाप दबे कदमो से चलो आवाज़ मत करना कोई."

"आवाज़ निकालने लायक छोड़ा है आपने जो आवाज़ कारूगा." राज शर्मा धीरे से फुसफुसाया.

"कुछ कहा तुमने?"

"नही नही कुछ नही कहा..चलिए देखते हैं क्या हैं इन झाड़ियों में." राज शर्मा ने धीरे से कहा.

शालिनी दबे पाँव पिस्टल ताने झाड़ियों की और बढ़ी राज शर्मा बिल्कुल उसके पीछे था. झाड़ियों को हटाते हुए शालिनी आगे बढ़ रही थी. झाड़ियों के पीछे कुछ और नही बल्कि एक जुंगली बिल्ली थी शालिनी को देखते ही वो भाग खड़ी हुई. बस दिक्कत ये रही कि वो शालिनी के पाँव के बिल्कुल करीब से भागी. सब कुछ इतनी जल्दी हुआ की शालिनी और राज शर्मा थोड़ा सकपका गये. शालिनी से तो थमा ही नही गया और वो बिल्ली को देखते ही राज शर्मा की तरफ घूमी और कब वो राज शर्मा को लेकर गिर गयी उसे पता ही नही चला. इस बार अपना राज शर्मा नीचे था और ए एस पी साहिबा उपर. "खड़े खड़े देख रहे थे कुछ कर नही सकते थे तुम." शालिनी फ़ौरन उठ खड़ी हुई.

"आप ही ने तो कहा था कि आपको किसी की मदद की ज़रूरत नही. मैने इस लिए नही थामा आपको कि कही मैं सस्पेंड ना हो जाऊ."

"शट अप चलो आगे बढ़ते हैं."

"सॉरी मेडम...चलिए."

.....................................................................

इधर मोहित जन्नत के नज़ारे ले रहा था. कविता के गरम गरम होंठो के बीच उसे अपना लंड बहुत खुसकिस्मत लग रहा था.

"बस कविता बस बहुत हो गया. अब जल्दी से ये जीन्स उतारो तुम्हारी चूत की गर्मी उतारनी है मुझे."

"वो गर्मी कोई नही उतार पाया आज तक." कविता ने हंसते हुए कहा.

"मैं उतारूँगा अब चलो उतारो ये जीन्स."

"यहाँ जंगल में जीन्स नही उतारुँगी मैं. थोड़ा सरका लेती हूँ."

"जो भी करो जल्दी करो. मैं भड़क रहा हूँ."

कविता जीन्स नीचे सरका कर मोहित के आगे घूम जाती है.

"लेट जाओ ना नीचे कमर के बल." मोहित ने कहा.

"नही नही कपड़े गंदे हो जाएँगे...ऐसे आराम से हो जाएगा तुम करो तो."

"वो तो हो जाएगा लेकिन लेटा कर लेने का मन था मेरा. चलो कोई बात नही डॉगी स्टाइल ईज़ ऑल्वेज़ गुड."

कविता झुकी हुई थी मोहित के आगे. बाकी का काम मिहित को करना था. मोहित ने लंड चूत पे रखा और ज़ोर से पुश किया. एक झटके में लंड चूत में सरक गया.

"रास्ता कुछ ज़्यादा ही स्मूद हैं तुम्हारी चूत का. लगता है बहुत लोग घूम चुके हैं यहाँ हे..हे..हे."

"सिर्फ़ तीन घूमे हैं. हां वैसे वो तीनो बहुत बार घूमे हैं आअहह फक." मोहित ने काम शुरू कर दिया था.

"एनीवे इट्स ए नाइस जुवैसी पुश्सी फॉर आ गुड फक." मोहित ने लंड धकेलते हुए कहा.

"आंड यू गॉट सुपर्ब डिक फॉर आ ड्रीम फक."

"ऐसा है क्या तो ये ले आअहह." और मोहित ने अपने आगे झुकी कविता के अंदर लंड के धक्को की बोछार शुरू कर दी.

"आअहह यू आर आ डॅम गुड फकर."

"आंड यू आर डॅम हॉट स्लट."

"ऑफ कोर्स...आआहह फक मी हार्डर."

मोहित कुछ देर तक कविता की चूत ठोकता रहा. अचानक उसने सोचा, "इसे कोई मज़ा तो चखाया ही नही. ऐसा करता हूँ इसकी गान्ड में डालता हूँ. फिर पता चलेगा कि मुझसे पंगा लेने का क्या मतलब है. सारा मामला बिगाड़ दिया आज इसने."

मोहित ने लंड चूत से निकाला और तुरंत गान्ड के छेद पर रख कर ज़ोर से पुश किया. इस से पहले कविता कुछ समझ पाती मोहित के लंड का मूह गान्ड में घुस्स चुका था.

"नहियीईईईईईईईईई मैं अनल नही करती अफ आअहह निकालो."

"अब नही निकलेगा फँस गया है." मोहित ने थोड़ा और पुश किया और आधा इंच और गान्ड में घुस्स गया.

"नो...ओह....नो प्लीज़ निकाल लो. बहुत पेन हो रहा है नहियीईईईई आआआययययीीई." मोहित ने थोड़ा और पुश कर दिया.

..................................

"तुमने ये चीन्ख सुनी लगता है कोई मुसीबत में है." शालिनी ने कहा.

"हां मेडम सुनी...किसी लड़की की चीन्ख लगती है चलिए मेडम देखते हैं."

दोनो आवाज़ की दिशा में बढ़ते हैं.

"नही प्लीज़ रहने दो आआहह."

"आवाज़ नज़दीक से ही आ रही है." शालिनी ने सामने की झाड़ियों को हटाया तो दंग रह गयी. मोहित की पीठ थी उसकी तरफ इसलिए शकल दिखाई नही दी. राज शर्मा भी मोहित को पहचान नही पाया. उन दोनो को यही लगा कि रेप हो रहा है.

शालिनी बिना वक्त गवाए दबे पाँव से आगे बढ़ी और मोहित के सर के पीछे बंदूक रख दी.

"छोड़ दो उसे वरना भेजा उड़ा दूँगी...अपने हाथ उपर करो." शालिनी ने कड़क आवाज़ में कहा.

मोहित की तो सिट्टी पिटी गुम हो गयी. उसने हाथ खड़े कर लिए. लेकिन उसका लंड अभी भी कविता की गान्ड में फँसा था.

राज शर्मा आगे बढ़ता है और कविता से कहता है, हट जाओ आप एक तरफ झुकी ही रहेंगी क्या. हम आ गये हैं अब." कह कर वो मोहित की तरफ देखता है.

क्रमशः.........................

BAAT EK RAAT KI-- 51

gataank se aage...........

"madam aapko chot to nahi aayi."

"utro to sahi pahle mere upar se tum."

Raj sharma fauran ek tarf ludak jaata hai.

"kya karna chaah rahe the exactly tum."

"sorry madam aap girne lagi thi. Aapko thaamne ke chakkar mein main bhi gir gaya."

"aaahhh kamar tod di tumne meri. Vaise main bach jaati shaayad.... stupid"

"sorry madam main to bas....."

"shut up... Mujhe kisi ki madad ki jaroorat nahi kabhi bhi samjhe tum. Aage se aisa kiya to suspend kar dungi tumhe."

"meri to naukri har vakt talvaar ki dhaar par latki hai." Raj sharma dheere se badbadaaya.

"kya kaha tumne?"

"kuch nahi main soch raha tha ki kis taraf gaya hoga vo poice par goli chalaane wala. Jungle to bahut bada hai ye. Hamein kis taraf jaana chaahiye."

"jis taraf main chalungi tum us taraf chaloge bas. Baaki baate bhool jaao."

"kayaamat se bhi kuch jyada hai madam saahiba sambhal kar rahna hoga inshe varna naukri gayi samjho." Raj sharma ne socha.

"kya soch rahe ho chalo ab ya phir invitation dena padega tumhe"

"chaliye madam...aap mujhe pistol dilva dijiye ek aise moko par jaroorat pad jaati hai."

"dekhenge vaapis ja karo abhi chupchaap aage badho"

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"Mera yakin karo maine goli ki awaaj suni abhi."

"mujhe kyon nahi suni yaar tum theater mein to badi garmi dikha rahi thi yahan tumhaari chut thandi pad gayi. Ab deni hai to do varna main chala. Jeans bhi nahi sarkaayi ab tak tumne."

"ek to aisi jagah le aaye mujhe upar se aisi baate bolte ho huh laao pahle tumhaara lund choosti hun mood theek ho jaayega mera. Tum aas paas nazar rakhna."

kavita mohit ke aage baith jaati hai aur uska lund muh mein le leti hai.

"aaaahhh finaly i am getting a nice blow job in complete privacy."

jungle mein kitni privacy thi vo to kuch der mein pata lagne wala tha mohit ko

Mohit aankhe band kiye pura pura maja le raha tha chusaayi ka.

"mujhe nahi pata tha ki blow job itni mast hoti hai. Wow you are great kavita...aaaahhh suck it baby." mohit ne kavita ke sar par haath rakh diya.

Kavita ne mohit ka lund muh se nikaala aur boli, "kuch shaayari hi kah do mere liye puja ke liye to khub kah rahe the."

"main koyi shaayar nahi hun. Vo to bas puja ko pataane ki koshis kar raha tha. Koyi rasta sujhaao na tum. Tum to friend ho uski."

"main kuch nahi kar sakti ismein ye to usi par nirbhar hai."

"chalo chodo you do your blow job."

"mujhse dosti rakhoge to aisi blow job roj milegi tumhe." kavita ne kaha aur mohit ke lund ko muh mein le liya.

"yes aaahhh keep sucking."

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Shalini pistol taane aage badh rahi thi. Raj sharma uske peeche peeche tha.

"kaha gaya vo?" shalini ne kaha.

"itna bada jungle hai madam kahi bhi ja sakta hai vo."

"har taraf nazar rakho tum vo yahi kahi chupa ho sakta hai."

"theek hai madam main nazar rakhe hue hun." Raj sharma ne kaha.

Achaanak kuch halchal hoti hai aur shalini tham jaati hai. Raj sharma ka dhyaan dusri taraf rahta hai vo seedha A S P saahiba se takraata hai. Unka sar ped ki ek daali se takraata hai aur unka paara chadh jaata hai. Raj sharma ke to pairo ke neeche se jaise jamin nikal jaati hai. Us se kuch kahe nahi banta. Chehra latak jaata hai bechaare ka.

"dhyaan kaha hai tumhaara kabhi mere upar gir jaaate ho kabhi peeche se takraate ho. Ye saari ki saari goliya tumhaare bheje mein utaar dungi abhi. Pata nahi kis langoor ko saath le aayi main."

"sorry madam mera dhyaan dusri taraf tha daant lijiye mujhe jitna bhi par langoor mat kahiye."

"kyon na kahu?"

"langoor mujhe achche nahi lagte kisi aur jaanvar ka naam de dijiye." Raj sharma ne gambhir mudra mein kaha.

"jesus...chup raho abhi tum. Kya tumhe kuch halchal sunaayi di saamne ki jhaadiyon mein."

"haan sunaayi to d madam"

"bilkul chupchaap dabe kadmo se chalo awaaj mat karna koyi."

"awaaj nikaalne laayak choda hai aapne jo awaaj karooga." Raj sharma dheere se phusphusaya.

"kuch kaha tumne?"

"nahi nahi kuch nahi kaha..chaliye dekhte hain kya hain in jhaadiyon mein." Raj sharma ne dheere se kaha.

Shalini dabe paanv pistol taane jhaadiyon ki aur badhi Raj sharma bilkul uske peeche tha. Jhaadiyon ko hataate hue shalini aage badh rahi thi. Jhadiyon ke peeche kuch aur nahi balki ek jungli billi thi shalini ko dekhte hi vo bhaag khadi hui. Bas dikkat ye rahi ki vo shalini ke paanv ke bilkul karib se bhaagi. Sab kuch itni jaldi hua ki shalini aur Raj sharma thoda sakpaka gaye. Shalini se to thama hi nahi gaya aur vo billi ko dekhte hi Raj sharma ki taraf ghumi aur kab vo Raj sharma ko lekar gir gayi use pata hi nahi chala. Is baar apna Raj sharma neeche tha aur A S P saahiba upar. "khade khade dekh rahe the kuch kar nahi sakte the tum." shalini fauran uth khadi hui.

"aap hi ne to kaha tha ki aapko kisi ki madad ki jaroorat nahi. Maine is liye nahi thama aapko ki kahi main suspend na ho jaaoo."

"shut up chalo aage badhte hain."

"sorry madam...chaliye."

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Idhar mohit jannat ke nazaare le raha tha. Kavita ke garam garam hontho ke beech use apna lund bahut khuskismat lag raha tha.

"bas kavita bas bahut ho gaya. Ab jaldi se ye jeans utaaro tumhaari chut ki garmi utaarni hai mujhe."

"vo garmi koyi nahi utaar paaya aaj tak." kavita ne hanste hue kaha.

"main utaarunga ab chalo utaaro ye jeans."

"yahan jungle mein jeans nahi utaarungi main. Thoda sarka leti hun."

"jo bhi karo jaldi karo. Main bhadak raha hun."

kavita jeans neeche sarka kar mohit ke aage ghum jaati hai.

"late jaao na neeche kamar ke bal." mohit ne kaha.

"nahi nahi kapde gande ho jaayenge...aise araam se ho jaayega tum karo to."

"vo to ho jaayega lekin leta kar lene ka man tha mera. Chalo koyi baat nahi doggy style is always good."

kavita jhuki hui thi mohit ke aage. Baaki ka kaam mihit ko karna tha. Mohit ne lund chut pe rakha aur jor se push kiya. Ek jhatke mein lund chut mein sarak gaya.

"rasta kuch jyada hi smooth hain tumhaari chut ka. Lagta hai bahut log ghum chuke hain yahan he..he..he."

"sirf teen ghume hain. Haan vaise vo teeno bahut baar ghume hain aaahhh fuck." mohit ne kaam shuru kar diya tha.

"anyway its a nice juicy pushsy for a good fuck." mohit ne lund dhakelte hue kaha.

"and you got superb dick for a dream fuck."

"aisa hai kya to ye le aaahhhh." aur mohit ne apne aage jhuki kavita ke ander lund ke dhakko ki bochhaar shuru kar di.

"aaahh you are a damn good fucker."

"and you are damn hot slut."

"of course...aaaahhhhh fuck me harder."

mohit kuch der tak kavita ki chut thokta raha. Achaanak usne socha, "ise koyi maja to chakhaya hi nahi. Aisa karta hun iski gaanD mein daalta hun. Phir pata chalega ki mujhse panga lene ka kya matlab hai. Saara maamla bigaad diya aaj isne."

mohit ne lund chut se nikaala aur turant gaanD ke ched par rakh kar jor se push kiya. Is se pahle kavita kuch samajh paati mohit ke lund ka muh gaanD mein ghuss chuka tha.

"nahiiiiiiiiiiiii main anal nahi karti uff aaahhh nikaalo."

"ab nahi niklega phans gaya hai." mohit ne thoda aur push kiya aur aadha inch aur gaanD mein ghuss gaya.

"no...oh....no please nikaal lo. Bahut pain ho raha hai nahiiiiiiii aaaaayyyyiiiii." mohit ne thoda aur push kar diya.

"tumne ye cheenkh suni lagta hai koyi musibat mein hai." shalini ne kaha.

"haan madam suni...kisi ladki ki cheenkh lagti hai chaliye madam dekhte hain."

dono awaaj ki disha mein badhte hain.

"nahi please rahne do aaaahhhhh."

"awaaj nazdik se hi aa rahi hai." shalini ne saamne ki jhadiyon ko hataaya to dang rah gayi. Mohit ki peeth thi uski taraf isliye shakal dikhayi nahi di. Raj sharma bhi mohit ko pahchaan nahi paaya. Un dono ko yahi laga ki rape ho raha hai.

Shalini bina vakt gavaaye dabe paanv se aage badhi aur mohit ke sar ke peeche bandook rakh di.

"chod do use varna bheja udaa dungi...apne haath upar karo." shalini ne kadak awaaj mein kaha.

Mohit ki to sitti pitti gum ho gayi. Usne haath khade kar liye. Lekin uska lund abhi bhi kavita ki gaanD mein phansa tha.

Raj sharma aage badhta hai aur kavita se kahta hai, hat jaao aap ek taraf jhuki hi rahengi kya. Hum aa gaye hain ab." kah kar vo mohit ki taraf dekhta hai.

Kramashah.........................