बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:21

बात एक रात की-- 58

गतान्क से आगे...........

ट्रेन ठीक 7 बजे पहुँच गयी देहरादून. रोहित और रीमा ने ख़ुसी ख़ुसी एक दूसरे को बाइ किया और अपने अपने रास्ते निकल पड़े.

ठीक 10 बजे रोहित थाने में था.

"आ गये आप?" चौहान ने कहा

"जी हां आ गये."

"ए एस पी साहिबा आपका इंतजार कर रही हैं. संभाल कर रहना कयामत है कयामत. मेरी तो जान झूठी आपके आने से. अब साइको का केस आप संभालेंगे."

"कोई बात नही साइको को भी देख लेंगे. मैं ए एस पी साहिबा से मिल कर आता हूँ."

इनस्पेक्टर रोहित पांडे शालिनी के कॅबिन की तरफ चल दिया.

"अब पता चलेगा इसे की पोलीस की नौकरी क्या होती है...रोहित पांडे हा." चौहान बड़बड़ाया.

रोहित घुस गया आ स प साहिबा के कॅबिन में. शालिनी फोन पर व्यस्त थी. रोहित चुपचाप अंदर आ कर उनकी टेबल के सामने खड़ा हो गया. शालिनी ने फोन पटका और बोली, "यस हू आर यू."

"आइ आम रोहित मेडम. रोहित पांडे..."

"ओह हां...आज ही आ गये तुम."

"अब जब आपने मेरा सस्पेन्षन कॅन्सल करवा दिया तो देर क्यू करता आने में."

"गुड...बैठो, मैने तुम्हारा सर्विस रेकॉर्ड देखा. मैं तुम्हे एक इंपॉर्टेंट केस देना चाहती हूँ. हॅंडल कर पाओगे."

"बेशक मेडम आप हुकुम कीजिए, मेरा सेस्पेन्षन अच्छा काम करने के कारण ही हुआ था. पॉलिटीशियन के बेटे को रेप के केस में अंदर डाल दिया था मैने. सज़ा भी दिलवाता उसे. पर मुझे अवॉर्ड तो क्या मिलता उल्टा सस्पेन्षन ऑर्डर मिल गया. पुणे चला गया था मैं तो अपने चाचा जी के पास.."

"बस बस ज़्यादा कहानियाँ मत सूनाओ. मैं जानती हूँ सब तभी तुम्हे वापिस लिया गया है महकमे में."

"बहुत कड़क है भाई ये तो." रोहित ने सोचा.

"साइको किल्लर का केस अब से तुम हॅंडल करोगे. और मुझे रिज़ल्ट्स चाहिए. बहुत दबाव है उपर से."

"आइ विल डू मी बेस्ट मेडम. आपको निरास नही करूगा." रोहित ने कहा.

"जाओ जाकर चौहान से सारा केस रेकॉर्ड ले लो. उस साइको ने एंपी की बेटी को अगवा कर रखा है और बदले में पद्‍मिनी को माँग रहा है. हुमैन एंपी की बेटी को भी शूरक्षित छुड़ाना है और पद्‍मिनी को भी उसे नही सोंपना. अब तुम देखो तुम क्या कर सकते हो. मुझे जल्द से जल्द वो साइको सलाखो के पीछे चाहिए."

"मुझे उम्मीद है की आपको निरास नही कारूगा."

"तुम्हारे पास ऑप्षन भी नही है. अगर कुछ नही कर पाए तो मैं तुम फिर से सस्पेंड हो जाओगे. ईज़ दट क्लियर.

"सभी कुछ क्लियर हो गया अब तो."

"गुड, नाउ गो आंड डू युवर ड्यूटी. और मुझे शकल तभी दिखाना जब कुछ कर लो. ईज़ दट क्लियर."

"सभी कुछ क्लियर है मेडम." रोहित का गला सुख गया बोलते-बोलते.

"फाइन, यू कॅन गो नाउ."

रोहित बाहर आया तो उसके माथे पे पसीने थे.

"बाप रे बाप...सही कहता था वो कमीना चौहान ये तो सच में कयामत है...उफ्फ हालत खराब कर दी. "

रोहित सीधा चौहान के कमरे की तरफ चल दिया.

"गुड मॉर्निंग सर."

"गुड मॉर्निंग भोलू...कैसे हो?"

"ठीक हूँ सर. अच्छा लगा आपको वापिस देख कर." भोलू ने कहा.

रोहित चौहान के कमरे में घुसा तो वो चाय पी रहा था.

"बैठे रहते हैं आप यहाँ...चाय पीते रहते है. तभी तो मुजरिम खुले आम घूम रहे हैं." रोहित ने कहा.

"ज़्यादा बकवास तो करो मत. तुम अभी नये नये हो पोलीस में. देखता हूँ क्या करोगे. ज़्यादा ही दम है तो पाकड़ो इस साइको को जिसने बाहर में आतंक मचा रखा है."

"केस रेकॉर्ड्स तो दे दो सारा उसके बिना क्या घंटा पाकडूँगा मैं."

"देता हूँ...पहले चाय तो पी लू...मेरे साथ ज़्यादा पंगा मत लिया कर...बड़ी मुस्किल से बहाल हुआ है नौकरी पे. फिर से सस्पेंड हो सकते हो. तुम्हे पता नही मैं कौन हूँ."

"इसको अगर पता चल गया कि मैने इसकी बहन की ली है तो बीफ़र जाएगा ये." रोहित ने मन में सोचा और हँसने लगा.

"क्या हुआ हंस क्यों रहे हो?" चौहान ने पूछा.

"कुछ नही आप मुझे रेकॉर्ड्स दे दो. वक्त कम है मेरे पास. कुछ नही किया तो फिर से सस्पेंड हो जाउन्गा."

"वो तो तुम्हे होना ही है." चौहान ने उठते हुए कहा.

चौहान ने सारा रेकॉर्ड रोहित को सोन्प दिया और रोहित ने बड़ी बारीकी से सब कुछ पड़ा.

"ह्म्म....एक बात है...इस साइको का कोई पॅटर्न नही है जिसे समझ कर हम कुछ अनॅलिसिस कर सकें. या फिर पॅटर्न है...जो समझ नही आ रहा. ये केके कौन हो सकता है. इतना मुस्किल केस और इतना कम वक्त. रोहित बेटा तेरी सस्पेन्षन तो फिर से पक्की है."

रोहित सब कुछ पढ़ कर अपने कॅबिन से बाहर निकला तो उसने देखा की शालिनी चेहरे पर शिकन सी लिए अपने कॅबिन से निकल रही हैं.

रोहित की हिम्मत नही हुई शालिनी के पास जाने की. शालिनी उसके आगे से निकली तो बोली, "स्टडी किया तुमने केस?"

"हां मेडम कर लिया."

"चलो एसपी साहिब ने बुलाया है मुझे. तुम भी साथ चलो."

"जैसी आपकी मर्ज़ी मेडम." रोहित ने कहा. "डाँट पड़ेगी शायद ए एस पी साहिबा को. क्योंकि वो कमीना डाँट-ने के लिए ही बुलाता है. बहुत डांटा था एक बार बुला के मुझे साले ने."

"मेडम क्या आप मिली हैं एसपी साहिब से पहले."

"हां मिली हूँ...जब यहाँ जाय्न किया था तभी मिली थी. आज उन्होने पहली बार बुलाया है."

"बुरा ना माने तो एक बात कहूँ." रोहित ने कहा.

"अपना मूह बंद रखो...मुझे ज़्यादा बकवास सुन-ना अच्छा नही लगता."

रोहित की तो बोलती बंद हो गयी. एसपी साहिब के यहाँ पहुँच कर शालिनी ने कहा, "तुम यही रूको मैं मिल कर आती हूँ. कोई भी ज़रूरत हुई तो तुम्हे बुला लूँगी."

"ठीक है मेडम मैं यही खड़ा हूँ."

शालिनी अंदर घुस गयी. वो काफ़ी तनाव में थी.

"आओ...आओ ए एस पी साहिबा, क्या हुआ साइको के केस का. एंपी की बेटी का कुछ पता चला. कुछ कर भी रही हो या हाथ पे हाथ धार के बैठी हो."

"सर हम पूरी कोशिस कर रहे हैं."

"क्या कोशिस कर रही हो तुम. 24 घंटे से ज़्यादा हो गये एंपी की बेटी को अगवा हुए. कुछ नही किया तुमने अब तक. सारी डाँट तो मुझे खानी पड़ रही है."

"सर आइ आम ट्राइयिंग माइ बेस्ट."

"बुलशिट....अगर बेस्ट ट्राइ किया होता तो कोई रिज़ल्ट होता तुम्हारे पास.पोलीस में आने की बजाए मोडीलिंग करनी चाहिए थी तुम्हे. आ गयी यहाँ अपनी गान्ड मरवाने के लिए पोलीस में. जाओ दफ़ा हो जाओ और कुछ करो वरना बर्खास्त कर दूँगा तुम्हे."

शालिनी को इस तरह की फटकार का अंदाज़ा नही था. वो कुछ भी नही बोल पाई.

"मुझे वो साइको जींदा या मुर्दा चाहिए. निसा और पद्‍मिनी दोनो को कुछ नही होना चाहिए...जाओ अब यहाँ से खड़ी खड़ी क्या सोच रही हो."

"थॅंक यू सर." शालिनी कुछ और नही बोल पाई और चुपचाप बाहर आ गयी.

जब वो बाहर आई तो उसकी आँखे नम थी.

रोहित शालिनी को देखते ही समझ गया कि खूब डाँट पड़ी है उन्हे. उसने कुछ नही पूछा शालिनी से. डर भी तो था उसे कही वो उस पर ना भड़क जाए.

..............................

...............................

लंच ब्रेक में पद्‍मिनी अपनी एक कोलीग के साथ थोड़ा बाहर टहलने आई तो राज शर्मा की तो आँखे खिल गयी. पहुच गया टहलता टहलता उसके पास.

"पद्‍मिनी जी ज़्यादा दूर मत जाना. यही आस पास ही रहना." राज शर्मा ने कहा.

पद्‍मिनी ने कोई जवाब नही दिया पर उसकी कोलीग बोली, "तो ये हैं तुम्हारी शूरक्षा के लिए तुम्हारे साथ."

"हां यही है. वैसे इन्होने मूत दिया था एक बार मेरे सामने...डर के मारे. पता नही कैसी शूरक्षा करेंगे."

पद्‍मिनी के साथ जो थी वो तो लोटपोट हो गयी

राज शर्मा का चेहरा उतर गया वो समझ ही नही पाया कि क्या करे फिर भी वो बोला, "थोड़ी प्राब्लम है मुझे. वो अचानक डर गया था मैं उस दिन. बचपन में भी हुआ था एक दो बार ऐसा. इलाज़ भी करवाया मैने. सब ठीक हो गया था. पर उस दिन फिर से ऐसा हो गया."

"पद्‍मिनी तुम भी कितनी खराब हो. इनकी मादिकाल प्राब्लम है और तुम मज़ाक बना रही हो इनका."

राज शर्मा की बाते सुन कर पद्‍मिनी भी सकपका गयी थी. उसे अहसास हुआ कि उसने क्यों अपनी कोलीग के सामने ऐसा बोल दिया. उसने अपनी कोलीग से कहा, "तुम जाओ मैं अभी आती हूँ."

"क्या बात है. लाते मत हो जाना वरना बॉस से डाँट पड़ेगी."

"हां मैं बस आ ही रही हूँ." पद्‍मिनी ने कहा.

वो चली गयी तो पद्‍मिनी बोली, सॉरी राज शर्मा पता नही क्यों मैने ऐसा बोल दिया. ई आम रियली सॉरी. मैने सुना तो था इस बारे में की ऐसा होता है. पर आज यकीन हुआ कि डर के कारण ऐसा हो सकता है."

"कोई बात नही पद्‍मिनी जी. बहुत सालो बाद हुआ था ऐसा. कोई बात नही मेरे कारण किसी के चेहरे पे हँसी आ गयी. बहुत बड़ी बात है ये. आप जाओ..... लेट हो जाओगे."

"आगे से मैं मन में सोच कर भी नही हँसूगी. आइ आम रियली सॉरी."

"आप हँसिए ना दिक्कत क्या है. मेरे कारण आपके चेहरे पे मुस्कान आ जाए तो मेरे लिए बहुत बड़ी बात होगी."

"बस-बस अब फ्लर्ट शुरू मत करो. चलती हूँ मैं." पद्‍मिनी कह कर ऑफीस की तरफ मूड गयी.

दोनो को ही ज़रा भी खबर नही थी कि दूर से दो खुन्कार आँखे लगातार उन्हे देख रही हैं.

"देखता हूँ कब तक बचोगी तुम. तुम्हारे लिए तो ऐसा आर्टिस्टिक प्लान है मेरा कि तुम्हे फकर होगा कि तुम मेरे हाथो मारी गयी...हे....हे...हे" साइको हँसने लगा.

शालिनी और रोहित थाने वापिस आ गये. शालिनी बिना कुछ कहे अपने कॅबिन की तरफ चली गयी. रोहित ने कुछ भी कहना ठीक नही समझा क्योंकि ए एस पी साहिबा सारा गुस्सा उस पर निकाल सकती थी.

शालिनी ने थोड़ी देर बाद खुद ही रोहित को अपने पास बुला लिया.

"कहिए मेडम क्या हूकम है?" रोहित ने कहा.

"केस फाइल पढ़के तुम्हे क्या लगता है" शालिनी ने पूछा.

"देखिए मेडम अभी तक तो मुझे बस 2 बाते ही काम की लगी हैं. एक विटनेस है पद्‍मिनी जिसने साइको को देखा है. जितने भी क्रिमिनल्स की फोटोस हमारे पास हैं वो सभी पद्‍मिनी को दिखानी होंगी. शायद ये साइको कोई पुराना मुजरिम हो. दूसरी बात काम की है उस आदमी का नाम जो उस रात सुरिंदर से मिलने आया था. लेकिन वो नाम अधूरा है. केके का कुछ भी मतलब हो सकता है. मैं कल पद्‍मिनी से मिलूँगा. उसे सभी क्रिमिनल्स की फोटोस देखाउन्गा. हो सकता है उनमे से ही हो कोई साइको. इसी बहाने पद्‍मिनी से मुलाकात भी हो जाएगी."

"क्या तुम जानते हो पद्‍मिनी को."

"जी हां. कॉलेज में पढ़ते थे हम साथ."

"इस चौहान ने कोई काम ढंग का नही किया. क्रिमिनल्स की फोटोस तो बहुत पहले दिखानी चाहिए थी पद्‍मिनी को."

"एक बात और है मेडम. ज़्यादा तर मर्डर जंगल के आस पास हुए हैं. ज़रूर कुछ गड़बड़ है जंगल में."

"ओह हां राज शर्मा भी यही कह रहा था."

"कौन राज शर्मा मेडम?"

"सब इनस्पेक्टर है वो. अभी थोड़े दिन पहले ही जाय्न किया है उसने. मैने उसे 24 घंटे पद्‍मिनी की प्रोटेक्षन की ड्यूटी पर लगा दिया है."

"ये काम किसी नौसिखिए को नही देना चाहिए था मेडम."

"मेरी जड्ज्मेंट पर सवाल मत करना कभी. ईज़ दट क्लियर."

"जी मेडम सब कुछ क्लियर है"

"देखो एक बात ध्यान से सुनो. एक बात और है जो तुम्हे फाइल में नही मिलेगी." शालिनी ने जंगल की घटना सुनाई.

"उस साइको ने जो गोली चलाई थी मुझ पर वो पोलीस महकमे की है. मुझे यहाँ किसी पर विस्वास नही है. इसलिए राज शर्मा को पद्‍मिनी की शूरक्षा पर लगाया है. और इसी लिए तुम्हारा सस्पेन्षन कॅन्सल करवा कर तुम्हे ये केस सोन्पा है. अब समझे कुछ. बिना सोचे समझे कुछ मत बोला करो." शालिनी ने कहा.

"सॉरी मेडम" रोहित का चेहरा लटक गया.

"इट्स ओके...पर आगे से ध्यान रखना. मेरे सामने सोच समझ कर बोलना."

"ध्यान रखूँगा मेडम."

"ये पद्‍मिनी को फोटोस दिखाने वाला आइडिया अच्छा है. यही काम करो पहले" शालिनी ने कहा.

"बिल्कुल मेडम. पर ये काम कल ही हो पाएगा. सभी क्रिमिनल्स की फोटोस उपलब्ध नही है आज."

"तब तक फील्ड एंक्वाइरी करो. किसी को कुछ तो पता होगा साइको के बारे में."

"वही करने जा रहा हूँ मेडम. आप इज़ाज़्त् दे तो मैं चलु."

"येस ऑफ कोर्स...गुड लक."

रोहित कमरे से बाहर आ गया. "भोलू जीप लग्वाओ मेरी हमें फील्ड में निकलना है."

क्रमशः.........................

BAAT EK RAAT KI-- 58

gataank se aage...........

train theek 7 baje pahunch gayi dehradun. Rohit aur reema ne khusi khusi ek dusre ko bye kiya aur apne apne raaste nikal pade.

Theek 10 baje rohit thaane mein tha.

"aa gaye aap?" chouhaan ne kaha

"ji haan aa gaye."

"A S P Saahiba aapka intjaar kar rahi hain. Sambhal kar rahna kayaamat hai kayaamat. Meri to jaan jhuthi aapke aane se. Ab psycho ka case aap sambhaalenge."

"koyi baat nahi psycho ko bhi dekh lenge. Main A S P Saahiba se mil kar aata hun."

inspector rohit panday shaini ke cabin ki taraf chal diya.

"ab pata chalefa ise ki police ki naukri kya hoti hai...rohit panday huh." chouhaan badbadaaya.

rohit ghuss gaya A S P saahiba ke cabin mein. Shalini phone par vyast thi. Rohit chupchaap ander aa kar unki table ke saamne khada ho gaya. Shalini ne phone patka aur boli, "yes who are you."

"i am rohit madam. Rohit panday..."

"oh haan...aaj hi aa gaye tum."

"ab jab aapne mera suspension cancel karva diya to der kyu karta aane mein."

"good...baitho, maine tumhara service record dekha. Main tumhe ek important case dena chaahti hun. Handle kar paaoge."

"beshak madam aap hukum kijiye, mera sespension achcha kaam karne ke kaaran hi hua tha. Politician ke bete ko rape ke case mein ander daal diya tha maine. Saja bhi dilvaata use. Par mujhe award to kya milta ulta suspension order mil gaya. Pune chala gaya tha main to apne chachcha ji ke paas.."

"bas bas jyada kahaaniya mat sunaao. Main jaanti hun sab tabhi tumhe vaapis liya gaya hai mahakme mein."

"bahut kadak hai bhai ye to." rohit ne socha.

"psycho killer ka case ab se tum handle karoge. Aur mujhe results chaahiye. Bahut dabaav hai upar se."

"i will do my best madam. Aapko niraas nahi karooga." rohit ne kaha.

"jaao jaakar chouhaan se saara case record le lo. Us psycho ne MP Ki beti ko agva kar rakha hai aur badle mein padmini ko maang raha hai. Humain mp ki beti ko bhi shurakshit chudana hai aur padmini ko bhi use nahi sonpna. Ab tum dekho tum kya kar sakte ho. Mujhe jald se jald vo psycho salaakho ke peeche chaahiye."

"mujhe ummeed hai ki aapko niraas nahi karooga."

"tumhaare paas option bhi nahi hai. Agar kuch nahi kar paaye to main tum phir se suspend ho jaaoge. Is that clear.

"sabhi kuch clear ho gaya ab to."

"good, now go and do your duty. Aur mujhe shakal tabhi dikhana jab kuch kar lo. Is that clear."

"sabhi kuch clear hai madam." rohit ka gala sukh gaya bolte-bolte.

"fine, you can go now."

rohit baahar aaya to uske maathe pe pasine the.

"baap re baap...sahi kahta tha vo kamina chouhaan ye to sach mein kayaamat hai...uff haalat kharab kar di. "

rohit seedha chouhaan ke kamre ki taraf chal diya.

"good morning sir."

"good morning bholu...kaise ho?"

"theek hun sir. Achcha laga aapko vaapis dekh kar." bholu ne kaha.

Rohit chouhaan ke kamre mein ghusaa to vo chaay pee raha tha.

"baithe rahte hain aap yahan...chaay peete rahte hai. Tabhi to mujrim khule aam ghum rahe hain." rohit ne kaha.

"jyada bakwaas to karo mat. Tum abhi naye naye ho police mein. Dekhta hun kya karoge. Jyada hi dam hai to pakdo is psycho ko jisne baahar mein aatank machcha rakha hai."

"case records to de do saara uske bina kya ghanta pakdunga main."

"deta hun...pahle chaay to pee lu...mere saath jyada panga mat liya kar...badi muskil se bahaal hua hai naukri pe. Phir se suspend ho sakte ho. Tumhe pata nahi main kaun hun."

"isko agar pata chal gaya ki maine iski bahan ki li hai to beefar jaayega ye." rohit ne man mein socha aur hansne laga.

"kya hua hans kyon rahe ho?" chouhaan ne pucha.

"kuch nahi aap mujhe records de do. Vakt kam hai mere paas. Kuch nahi kiya to phir se suspend ho jaaungaa."

"vo to tumhe hona hi hai." chouhaan ne uthte hue kaha.

Chouhaan ne saara record rohit ko sonp diya aur rohit ne badi baariki se sab kuch pada.

"hmm....ek baat hai...is psyco ka koyi pattern nahi hai jise samajh kar hum kuch analysis kar sakein. Ya phir pattern hai...jo samajh nahi aa raha. Ye kk kaun ho sakta hai. Itna muskil case aur itna kam vakt. Rohit beta teri suspension to phir se pakki hai."

rohit sab kuch padh kar apne cabin se baahar nikla to usne dekha ki shalini chehre par shikan si liye apne cabin se nikal rahi hain.

Rohit ki himmat nahi hui shalini ke paas jaane ki. Shalini uske aage si nikli to boli, "study kiya tumne case?"

"haan madam kar liya."

"chalo SP Saahib ne bulaaya hai mujhe. Tum bhi saath chalo."

"jaisi aapki marji madam." rohit ne kaha. "Daant padegi shaayad A S P saahiba ko. Kyonki vo kamina daant-ne ke liye hi bulaata hai. Bahut daanta tha ek baar bula ke mujhe saale ne."

"madam kya aap mili hain SP saahib se pahle."

"haan mili hun...jab yahan join kiya tha tabhi mili thi. Aaj unhone pahli baar bulaaya hai."

"bura na maane to ek baat kahun." rohit ne kaha.

"apna muh band rakho...mujhe jyada bakwaas sun-na achcha nahi lagta."

rohit ki to bolti band ho gayi. SP saahib ke yahan pahunch kar shalini ne kaha, "tum yahi ruko main mil kar aati hun. Koyi bhi jaroorat hui to tumhe bula lungi."

"theek hai madam main yahi khada hun."

shalini ander ghuss gayi. Vo kaafi tanaav mein thi.

"aao...aao A S P Saahiba, kya hua psycho ke case ka. mp ki beti ka kuch pata chala. Kuch kar bhi rahi ho ya haath pe haath dhar ke baithi ho."

"sir hum puri koshis kar rahe hain."

"kya koshis kar rahi ho tum. 24 ghante se jyada ho gaye mp ki beti ko agva hue. Kuch nahi kiya tumne ab tak. Saari daant to mujhe khaani pad rahi hai."

"sir i am trying my best."

"bullshit....agar best try kiya hota to koyi result hota tumhaare paas.police mein aane ki bajaaye modeling karni chaahiye thi tumhe. Aa gayi yahan apni gaanD marvaane ke liye police mein. Jaao dafa ho jaao aur kuch karo varna barkhast kar dunga tumhe."

shalini ko is tarah ki phatkaar ka andaja nahi tha. Vo kuch bhi nahi bol paayi.

"mujhe vo psycho jeenda ya murda chaahiye. Nisa aur padmini dono ko kuch nahi hona chaahiye...jaao ab yahan se khadi khadi kya soch rahi ho."

"thank you sir." shalini kuch aur nahi bol paayi aur chupchaap baahar aa gayi.

Jab vo baahar aayi to uski aankhe nam thi.

Rohit shalini ko dekhte hi samajh gaya ki khub daant padi hai unhe. Usne kuch nahi pucha shalini se. Dar bhi to tha use kahi vo us par na bhadak jaaye.

.............................................................

Lunch break mein padmini apni ek colleague ke saath thoda baahar tahalne aayi to Raj sharma ki to aankhe khil gayi. Pahuch gaya tahlta tahalta uske paas.

"padmini ji jyada dur mat jaana. Yahi aas pas hi rahna." Raj sharma ne kaha.

Padmini ne koyi jawaab nahi diya par uski colleague boli, "to ye hain tumhaari shuraksha ke liye tumhaare saath."

"haan yahi hai. Vaise inhone moot diya tha ek baar mere saamne...dar ke maare. Pata nahi kaisi shuraksha karenge."

padmini ke saath jo thi vo to lotpot ho gayi

Raj sharma ka chehra utar gaya vo samajh hi nahi paaya ki kya kare phir bhi vo bola, "thodi problem hai mujhe. Vo achaanak dar gaya tha main us din. Bachpan mein bhi hua tha ek do baar aisa. Ilaaz bhi karvaaya maine. Sab theek ho gaya tha. Par us din phir se aisa ho gaya."

"padmini tum bhi kitni khraab ho. Inki madical problem hai aur tum majaak bana rahi ho inka."

Raj sharma ki baate sun kar padmini bhi sakpaka gayi thi. Use ahsaas hua ki usne kyon apni colleague ke saamne aisa bol diya. Usne apni colleague se kaha, "tum jaao main abhi aati hun."

"kya baat hai. Late mat ho jaana varna boss se daant padegi."

"haan main bas aa hi rahi hun." padmini ne kaha.

Vo chali gayi to padmini boli, sorry Raj sharma pata nahi kyon maine aisa bol diya. I am really sorry. Maine suna to tha is baare mein ki aisa hota hai. Par aaj yakin hua ki dar ke kaaran aisa ho sakta hai."

"koyi baat nahi padmini ji. Bahut saalo baad hua tha aisa. Koyi baat nahi mere kaaran kisi ke chehre pe hansi aa gayi. Bahut badi baat hai ye. Aap jaao..... late ho jaaoge."

"aage se main man mein soch kar bhi nahi hansugi. I am really sorry."

"aap hansiye na dikkat kya hai. Mere kaaran aapke chehre pe muskaan aa jaaye to mere liye bahut badi baat hogi."

"bas-bas ab flirt shuru mat karo. Chalti hun main." padmini kah kar office ki taraf mud gayi.

Dono ko hi jara bhi khabar nahi thi ki dur se do khunkaar aankhe lagaatar unhe dekh rahi hain.

"dekhta hun kab tak bachogi tum. Tumhaare liye to aisa artistic plan hai mera ki tumhe fakar hoga ki tum mere haatho maari gayi...he....he...he" psycho hansne laga.

shalini aur rohit thaane vaapis aa gaye. Shalini bina kuch kahe apne cabin ki taraf chali gayi. Rohit ne kuch bhi kahna thik nahi samjha kyonki A S P saahiba saara gussa us par nikaal sakti thi.

Shalini ne thodi der baad khud hi rohit ko apne paas bula liya.

"kahiye madam kya hukam hai?" rohit ne kaha.

"case file padhke tumhe kya lagta hai" shalini ne pucha.

"dekhiye madam abhi tak to mujhe bas 2 baate hi kaam ki lagi hain. Ek witness hai padmini jisne psycho ko dekha hai. Jitne bhi criminals ki photos hamaare paas hain vo sabhi padmini ko dikhani hongi. Shayad ye psycho koyi purana mujrim ho. Dusri baat kaam ki hai us aadmi ka naam jo us raat surinder se milne aaya tha. Lekin vo naam adhura hai. Kk ka kuch bhi matlab ho sakta hai. Main kal padmini se milunga. Use sabhi criminals ki photos dekhaaunga. Ho sakta hai unme se hi ho koyi psycho. Isi bahaane padmini se mulaakat bhi ho jaayegi."

"kya tum jaante ho padmini ko."

"ji haan. College mein padhte the hum saath."

"is chouhaan ne koyi kaam dhang ka nahi kiya. Criminals ki photos to bahut pahle dikhani chaahiye thi padmini ko."

"ek baat aur hai madam. Jyada tar murdur jungle ke aas paas hue hain. Jaroor kuch gadbad hai jungle mein."

"oh haan Raj sharma bhi yahi kah raha tha."

"kaun Raj sharma madam?"

"sub inspector hai vo. Abhi thode din pahle hi join kiya hai usne. Maine use 24 ghante padmini ki protection ki duty par laga diya hai."

"ye kaam kisi nausikhiye ko nahi dena chaahiye tha madam."

"meri judgement par swaal mat karna kabhi. Is that clear."

"ji madam sab kuch clear hai"

"dekho ek baat dhyaan se suno. Ek baat aur hai jo tumhe file mein nahi milegi." shalini ne jungle ki ghatna sunayi.

"us psycho ne jo goli chalaayi thi mujh par vo police mahakme ki hai. Mujhe yahan kisi par viswaas nahi hai. Isliye Raj sharma ko padmini ki shuraksha par lagaaya hai. Aur isi liye tumhara suspension cancel karva kar tumhe ye case sonpa hai. Ab samjhe kuch. Bina soche samjhe kuch mat bola karo." shalini ne kaha.

"sorry madam" rohit ka chehra latak gaya.

"its ok...par aage se dhyan rakhna. Mere saamne soch samajh kar bolna."

"dhyaan rakhunga madam."

"ye padmini ko photos dikhane wala idea achcha hai. Yahi kaam karo pahle" shalini ne kaha.

"bilkul madam. Par ye kaam kal hi ho paayega. Sabhi criminals ki photos uplabdh nahi hai aaj."

"tab tak field enquiry karo. Kisi ko kuch to pata hoga psycho ke baare mein."

"vahi karne ja raha hun madam. Aap izaazt de to main chalu."

"yes of course...good luck."

rohit kamre se baahar aa gaya. "bholu jeep lagvaao meri hamein field mein nikalna hai."

Kramashah.........................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:22

बात एक रात की-- 59

गतान्क से आगे...........

रोहित जीप में बैठ कर चल पड़ा. "कल्लू जुर्म की दुनिया की सारी जानकारी रखता है. उसी से मिलता हूँ जाकर."

कुछ ही देर बाद रोहित कल्लू के घर के बाहर खड़ा था. उसने घर का दरवाजा खड़काया.

"कौन है? बाद में आना अभी टाइम नही है." अंदर से आवाज़ आई.

रोहित भड़क गया उसने दरवाजे पर ज़ोर से लात मारी और दरवाजा खुल गया. रोहित अंदर आया तो दंग रह गया.

कल्लू एक महिला के उपर चढ़ा हुआ था. वो चूत में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहा था.

"अबे रुक...मुझे ज़रूरी बात करनी है तुझसे."

"अभी नही रुक सकता. अभी तो शुरूर आया है चुदाई का. ठोक लेने दो सर"

"कितना वक्त लगाएगा तू..मेरे पास टाइम नही है." रोहित ने कहा.

"मेरी चम्मक छल्लो तू बता कितनी देर चुद्वायेगि तू."

"जब तक तुम्हारा मन करे आआहह."

"देखा सर थोड़ी देर रुकना पड़ेगा आपको. रोज रोज इस तरह नही देती ये चूत. आज दे रही है तो मुझे टोटल मस्ती कर लेने दो."

रोहित ने पिस्टल निकाली और कल्लू के सर पर रख दी. "तेरी मस्ती पूरी होने तक का वक्त नही है मेरे पास. रुक जा वरना गोली मार दूँगा."

कल्लू ने उस महिला की चूत से लंड निकाल लिया. वो महिला अपने कपड़े पहन कर वहाँ से चली गयी. "सर आप भी ना हमेशा घोड़े पर सवार हो कर आते हो. लीजिए रुक गया. क्या बात है बोलिए."

"साइको किल्लर जिसने बाहर में आतंक मचा रखा है...क्या कुछ जानते हो उसके बारे में." रोहित ने पूछा.

"मुझे कुछ नही पता सर उसके बारे में. बल्कि किसी को कुछ नही पता. मैं तो खुद डरा रहता हूँ उस से.मैं कभी रात को बाहर नही घूमता अब. 9 बजने से पहले ही घर आ जाता हूँ. सॉरी मैं इस बारे में आपकी कोई मदद नही कर सकता. मुजरिमो की दुनिया में उसका कोई निसान नही है""

"ह्म्म....चल ठीक है कोई बात नही." रोहित ने कहा और 500 का नोट थमा दिया कल्लू को. "ये दरवाजा ठीक करवा लेना."

रोहित जीप में बैठ कर चल दिया.

"लगता है ये साइको एक ऐसा व्यक्ति है जिसकी कि समाज में इज़्ज़त है. वो पद्‍मिनी को इसलिए माँग रहा है क्योंकि उसे डर है कि कही वो बेनकाब ना हो जाए. शायद वो सारे आम हमारे सामने घूमता हो रोज पर हम उसे पहचान नही पाते क्योंकि हमे ज़रा भी अंदाज़ा नही रहता कि वो कातिल हो सकता है. मिस्टर साइको तुम्हे छोड़ूँगा नही मैं. देखता हूँ कब तक बचोगे.""

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...............................................

शाम हो चुकी है और पद्‍मिनी ऑफीस से निकल रही है. राज शर्मा आस यूषुयल ख़ुसी से झूम उठता है. फ़ौरन आ जाता है वो पद्‍मिनी के पास.

"हो गयी छूटी आपकी." राज शर्मा ने पूछा.

"राज शर्मा तुम अपनी ड्यूटी पर ध्यान रखो. मुझसे फालतू की बाते मत किया करो"

"आप मुझसे खफा-खफा क्यूँ रहती है. प्यार करते हैं आपसे, कोई मज़ाक नही" आख़िर ज़ज्बात में बह कर राज शर्मा के मूह से निकल ही गयी दिल की बात. वो खुद पछताया बोल कर क्योंकि पद्‍मिनी की आँखे ये सुनते ही गुस्से से लाल हो गयी. थप्पड़ जड़ दिया उसने राज शर्मा के गाल पर.

"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये बोलने की...दफ़ा हो जाओ यहाँ से. नही चाहिए मुझे कोई प्रोटेक्षन."

"सॉरी पद्‍मिनी जी ग़लती हो गयी. मूह से निकल गया यू ही. कहना नही चाहता था आपसे कुछ भी. पर पता नही क्यों ये सब बोल दिया मैने." राज शर्मा गिड़गिडया.

"तुम्हारा मूत अपने आप निकल जाता है. मूह से भी कुछ भी निकल जाता है. तुम आख़िर हो क्या."

बेचारा राज शर्मा करे भी तो क्या करे. कुछ भी नही बोल पाया पद्‍मिनी को. बस सर झुकाए खड़ा रहा. पद्‍मिनी को ज़रा भी अहसास नही हुआ कि वो सच में उसे प्यार करता है. वो तो अपने सपने के कारण राज शर्मा से चिड़ी हुई थी और कुछ भी करके उस बद्शुरत सपने को टालना चाहती थी. इसी बोखलाहट में थप्पड़ जड़ दिया था उसने राज शर्मा के मूह पर.

"चुप क्यों खड़े हो बोलते क्यों नही कुछ" पद्‍मिनी ने कहा.

"क्या कहु आपसे. गुनहगार हू आपका. चलिए आप लेट हो रही हैं...सॉरी मैं आगे से ऐसा नही बोलूँगा."

"तुम्हारे बस में कुछ है भी. तुम्हारा तो सब कुछ अपने आप निकल जाता है." पद्‍मिनी ने कहा और अपनी कार में बैठ गयी.

राज शर्मा भी अपनी जीप में बैठ कर उसके पीछे चल दिया. घर पहुँच कर पद्‍मिनी सीधा घर में घुस गयी. वो राज शर्मा से कोई बात नही करना चाहती थी.

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घने जंगल का द्रिस्य है. चारो तरफ खौफनाक सन्नाटा है. पद्‍मिनी और राज शर्मा घबराए खड़े हैं.घबराए भी क्यों ना उनके सामने साइको खड़ा है उनकी तरफ बंदूक ताने.

"तुम दोनो डिसाइड कर्लो पहले कौन मरना चाहता है." साइको ने कहा.

"हमने डिसाइड कर लिया. पहले तुम मरोगे." राज शर्मा ने पाँव से मिट्टी उछाल दी साइको की तरफ और उस पर टूट पड़ा. साइको के हाथ से पिस्टल छूट कर दूर गिर गयी. उसका चाकू भी ज़मीन पर गिर गया. मगर साइको पिस्टल के बिना भी बलशाली था. वो राज शर्मा पर भारी पड़ रहा था. किसी तरह राज शर्मा के हाथ चाकू आ गया और उसने चाकू साइको के पेट में गाढ दिया. साइको ढेर हो गया ज़मीन पर. राज शर्मा को लगा साइको का काम ख़तम. वो पद्‍मिनी की तरफ बढ़ा. लेकिन तभी साइको बोला, "पहले पद्‍मिनी ही मरेगी...बचा सको तो बचा लो."

राज शर्मा ने तुरंत पीछे मूड कर देखा. साइको के हाथ में पिस्टल थी और उसने पद्‍मिनी को निशाना बना रखा था. वक्त रहते राज शर्मा पद्‍मिनी और गोली के बीच आ गया और राज शर्मा ज़मीन पर ढेर हो गया. गोली बिल्कुल दिल के पास लगी थी.

पद्‍मिनी भाग कर आई राज शर्मा के पास और फूट फूट कर रोने लगी. "ऐसा क्यों किया तुमने. मुझे मर जाने देते."

"प्यार करते हैं आपसे, कोई मज़ाक नही" राज शर्मा ने कहा और उसने दम तौड दिया.

"राज शर्मा!" और पद्‍मिनी चिल्ला कर फ़ौरन उठ गयी गहरी नींद से. सपना था ही कुछ ऐसा. उसने अपने दिल पर हाथ रखा और बोली, "प्यार करते हैं आपसे, कोई मज़ाक नही...राज शर्मा ने यही कहा था शाम को. उफ्फ क्या हो रहा है मेरे साथ. इतने अजीब सपने क्यों आते हैं मुझे. ओह..राज शर्मा मुझे क्यों परेशान कर रहे हो."

पद्‍मिनी सपने के बाद बहुत बेचैन हो गयी थी. उसने घड़ी की तरफ देखा तो पाया कि रात के 2 बज रहे हैं. वो उठी और पानी पिया.

पानी पीने के बाद पद्‍मिनी खिड़की में आई और परदा हटा कर बाहर देखा. उसे अपने घर के बाहर सिर्फ़ राज शर्मा दिखाई दिया. वो जीप का बाहरा लेकर खड़ा था. राज शर्मा ने पद्‍मिनी को खिड़की से झाँकते हुए देख लिया. वो तुरंत जीप का सहारा छोड़ कर सीधा खड़ा हो गया...जैसे कि कुछ कहना चाहता हो.

पद्‍मिनी ने फ़ौरन परदा छोड़ दिया और वापिस आ कर बिस्तर पर गिर गयी. बहुत कोशिस की उसने दिमाग़ को डाइवर्ट करने की मगर बार बार उसके दिमाग़ में राज शर्मा के यही बोल गूँज रहे थे, "प्यार करते हैं आपसे, कोई मज़ाक नही."

निसा अचानक उठती है और खुद को कमरे में अकेला पाती है. वो पाती है कि उसके शरीर पर अब एक भी कपड़ा नही है. उसे याद आता है कि साइको ने उसे कुछ खाने को दिया था. खाते ही वो गहरी नींद सो गयी थी. उसका सर घूम रहा था.वो दीवार घड़ी की और देखती है. घड़ी 2 बजा रही थी.

"ये दिन के 2 बजे हैं या रात के 2" निसा सोचती है. मगर उसके पास जान-ने का कोई चारा नही है. उस कमरे में कोई खिड़की नही है. एक दरवाजा है जो कि बंद है. वो चारो तरफ ध्यान से देखती है. उसे एक टाय्लेट दिखाई देता है. वो उठती है और काँपते हुए टाय्लेट

की तरफ बढ़ती है. टाय्लेट में कोई दरवाजा नही है. वो अंदर झाँक कर देखती है तो पाती है कि टाय्लेट में भी कोई खिड़की नही है.

"ये कैसा कमरा है. कोई खिड़की नही है इसमे. और वो साइको कहाँ है?"

निसा टाय्लेट से दरवाजे की तरफ बढ़ती है. वो दरवाजे पर कान लगा कर देखती है. उसे बस सन्नाटा सुनाई देता है.

"कोई भी आवाज़ नही आ रही कही से...आख़िर मैं कहा हूँ. क्या ये कमरा देहरादून में ही है या कही और. डेडी प्लीज़ कुझ कीजिए मैं मरना नही चाहती." निसा फूट फूट कर रोने लगती है.

तभी निसा को दरवाजे पर कुछ हलचल सुनाई देती है और वो फ़ौरन भाग कर बिस्तर पर आकर लेट जाती है और अपनी आँखे बंद कर लेती है. उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगता है.

दरवाजा खुलता है और धदाम की आवाज़ होती है. निसा उत्शुकता में आँखे खोल कर देखती है. "रामू काका!"

रामू निसा के घर का नौकर था. कोई 45-46 साल की उमर का था. निसा ने रामू को देखते ही अपने उभारो पर हाथ रख लिए. मगर उसकी योनि को छुपाने के लिए कुछ नही बचा था.

"मेम्साब! आअहह" रामू कराहते हुए बोला. उसके सर से खून निकल रहा था.

साइको ने रामू को कमरे में पटका था. जिस से धदाम की आवाज़ हुई थी

"अब तुम क्या करना चाहते हो?" निसा रोते हुए बोली.

"जब तक पद्‍मिनी को मुझे नही सौंपा जाता क्यों ना एक-आध गेम हो जाए." साइको ने कहा

"अब कौन सी गेम खेलना चाहते हो...प्लीज़ मुझे जाने दो" निसा रोने लगी

"वाउ क्या ख़ौफ़ है तुम्हारी आँखो में. सच में मज़ा आ गया. अब और मज़ा आएगा."

"मुझे यहाँ क्यों लाए हो भाई." रामू ने पूछा.

"डरो मत तुम. बल्कि गर्व करो कि तुम मेरी आर्ट का हिस्सा बन-ने जा रहे हो."

रामू को कुछ समझ नही आया.

"खेल बहुत सिंपल है. ये चाकू देखो" साइको ने हाथ में पकड़े चाकू को हिलाया.

रामू बड़ी हैरानी से सब सुन रहा था. उसके रोंगटे खड़े हो रखे थे.

"तुम्हारे पास तीन ऑप्षन्स है. पहली ऑप्षन ये है कि ये चाकू लो और अपना पेट चीर लो. तुम्हारी मेम्साब को जाने दूँगा मैं अगर ऐसा करोगे तो."

रामू ने निसा की ओर देखा. उसकी रूह काँप उठी थी ये सब सुन कर.

"दूसरी ऑप्षन है कि तुम ये चाकू लो और निसा का पेट चीर डालो. उसका पेट चीरने के बाद तुम यहाँ से जा सकते हो. तुम्हे कुछ नही कारूगा."

रामू की तो आँखे फटी की फटी रह गयी.

"तीसरा ऑप्षन भी है. तुम अपनी मेम्साब की चूत में लंड डाल दो. मगर लंड उसकी मर्ज़ी से डालना. रेप की इज़ाज़त नही है तुम्हे. आधा घंटा है तुम्हारे पास इन तीनो में से एक काम करने का. कुछ भी नही किया तो तुम्हे काट डालूँगा. लो पाकड़ो ये चाकू." साइको ने चाकू रामू को दे दिया और खुद कुर्सी पर हाथ में पिस्टल ले कर बैठ गया.

रामू असमांजस में था कि क्या करे. खुद का पेट वो चीर नही सकता था. तीसरा काम भी वो नही कर सकता था. बस एक ही ऑप्षन बचा था कि वो काट डाले निसा को.

"दूसरी ऑप्षन ही ठीक है रामू. चीर दे पेट मेम्साब का. उनके मरने से तुम जिंदा रह सकते हो तो क्या दिक्कत है." वो काँपते हुए हाथ में चाकू लिए निसा की तरफ बढ़ता है.

"माफ़ करना मेम्साब और कोई चारा नही है. आप आँखे बंद कर लो"

"नमक हराम, अपना पेट क्यों नही चीर लेते. दिखा दी अपनी औकात तुमने." निसा चिल्लाई.

"मुझे भी जीने का हक़ है. आपके मरने से मैं जींदा रह सकता हूँ तो क्या दिक्कत है." रामू चाकू हवा में लहराता है. निसा काँप उठती है.

"रूको...तीसरी ऑप्षन भी तो है." निसा रोते हुए कहती है.

रामू का हाथ हवा में ही रुक जाता है. "तो क्या आप डलवा लेंगी?"

"हां आ जाओ" निसा फूट फूट कर रोने लगती है.

साइको तालिया पीटने लगता है. "वाह भाई वाह, क्या बात है. ये तो पूरी बेशर्मी पर उतर आई है. कितनी प्यास है इसकी चूत में लंड के लिए. अपने नौकर का लेने के लिए भी तैयार हो गयी है. ऐसी बदचलन रंडी मैने आज तक नही देखी. निसा जी हॅट्स ऑफ टू यू. कीप इट अप. जल्दी करो 5 मिनिट बर्बाद कर चुके हो तुम रामू. आधा घंटा है सिर्फ़ तुम्हारे पास."

रामू की तो आँखे ही चमक उठी थी ये सुनके. उसके लिंग में तुरंत हरकत होने लगी थी. उसने चाकू एक तरफ रखा और चढ़ गया बिस्तर पर.

"कहीं और मत छूना मुझे." निसा ने कहा

"ये करने को मिल रहा है, यही बहुत बड़ी बात है" रामू ने कहा और अपनी पॅंट उतार दी. फुर्ती से उसने अंडरवेर भी उतार दिया. बहुत बेचैन हो रहा था.

निसा ने अपनी आँखे बंद कर ली. टाइम बीत-ता जा रहा था. रामू ने तुरत अपने लिंग पर थूक लगाया और टिका दिया निसा की योनि पर.

एक ही धक्के में रामू ने पूरा लिंग निसा की योनि में उतार दिया. "आआआहह....नूऊओ" निसा कराह उठी.

निसा सोच रही थी कि अब साइको रामू का गला काट देगा और ये गंदा काम जल्दी ख़तम हो जाएगा. इसीलिए तो वो इसके लिए तैयार भी हुई थी.

पर वो चोंक गयी. रामू ने मज़े से धक्के लगाने शुरू कर दिए और ऐसा कुछ नही हुआ जैसा वो सोच रही थी. उसने साइको की तरफ देखा. वो कुर्सी पर बैठा था. उसके चेहरे पर नकाब था. इसलिए वो उसके चेहरे के भाव नही देख पाई. पर वो समझ गयी कि वो पूरे द्रिस्य का आनंद ले रहा था.

पहली बार निसा की योनि में लिंग अंदर बाहर घूम रहा था. मगर वो कुछ भी फील नही कर पा रही थी. उसकी आँखे टपक रही थी. रामू तो लगा हुआ था अपने काम में. उसे तो जैसे जन्नत मिल गयी थी.तूफान मचा दिया था उसने बिस्तर पर. भरपूर मज़ा ले रहा था वो निसा का. रुका नही एक भी बार. निसा की आँखो के आँसू भी नही दीखे उसे. लगा रहा बस. अपने चरम पर पहुँच कर गिर गया वो निसा के उपर और बोला, "माफ़ करना मुझे मेम्साब. कोई और चारा नही था."

मगर तभी छींख गूँज उठी रामू की कमरे में. साइको ने उसकी गर्दन के पीछे सर के बिल्कुल नीचे चाकू घुसा दिया. बड़ी बेरहमी से उसने वो चाकू नीचे की ओर खींचा और रामू की पीठ चीर डाली. चारो तरफ खून ही खून फैल गया. बिस्तर लाल हो गया. साइको ने रामू को टाँग पकड़ कर निसा के उपर से खींचा और ज़मीन पर पटक दिया.

"क्या सीन बना है. क्यों री रंडी. मिल गया तेरी चूत को पानी. अब तो खुस है तू. मैं चाहता था कि वो तुझे काट डाले. मगर नही. तुझे तो लंड चाहिए था उसका. भुज गयी प्यास तेरी अब. अपनी चूत में लंड ले ले कर लोगो को मरवा रही है. तेरे जैसी रंडी नही डेक्खी दुनिया में. बस बहुत हो गया तेरा ये गंदा खेल. नही चलने दूँगा मैं ये सब. साइको ने निसा के बाल पकड़े और उसे घसीट कर रामू की लास पर पटक दिया. इसके साथ तू भी मरेगी अब. मुझे रंडी बिल्कुल पसंद नही." साइको की बातो में बहुत कठोरता थी

और फिर कमरे में दरिंदगी का वो खेल हुआ जिसे देख कर किसी की भी रूह काँप जाए. बड़ी बेरहमी से काट डाला था साइको ने निसा को. दम तौड दिया था उसने बहुत जल्दी. मगर साइको का चाकू नही थमा. वार पर वार करता रहा वो.

"मेरी ग़मे खराब करती है साली. मैं क्या यहाँ पॉर्न देखने बैठा था जो कि लंड ले लिया तूने मज़े से. साली रंडी..........." पता नही और क्या क्या बकवास करता रहा वो.

कमरे में बहुत ही दर्दनाक और खौफनाक द्रिस्य हुआ था. जिसका पूरा वर्णन बहुत ही मुस्किल है.

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क्रमशः.........................

BAAT EK RAAT KI-- 59

gataank se aage...........

rohit jeep mein baith kar chal pada. "kallu jurm ki duniya ki saari jaankari rakhta hai. Usi se milta hun jaakar."

kuch hi der baad rohit kallu ke ghar ke baahar khada tha. Usne ghar ka darvaja khadkaya.

"kaun hai? Baad mein aana abhi time nahi hai." ander se awaaj aayi.

Rohit bhadak gaya usne darvaaje par jor se laat maari aur darvaaja khul gaya. Rohit ander aaya to dang rah gaya.

Kallu ek mahila ke upar chadha hua tha. Vo chut mein jor jor se dhakke laga raha tha.

"abey rook...mujhe jaroori baat karni hai tujhse."

"abhi nahi rook sakta. Abhi to shurur aaya hai chudayi ka. Thok lene do sir"

"kitna vakt lagaayega tu..mere paas tume nahi hai." rohit ne kaha.

"meri chammak challo tu bata kitni der chudvaayegi tu."

"jab tak tumhaara man kare aaaahhhhh."

"dekha sir thodi der rukna padega aapko. Roj roj is tarah nahi deti ye chut. Aaj de rahi hai to mujhe total masti kar lene do."

rohit ne pistol nikaali aur kallu ke sar par rakh di. "teri masti puri hone tak ka vakt nahi hai mere paas. Ruk ja varna goli maar dunga."

kallu ne us mahila ki chut se lund nikaal liya. Vo mahila apne kapde pahan kar vahaan se chali gayi. "sir aap bhi na hamesha ghode par sawaar ho kar aate ho. Lijiye ruk gaya. Kya baat hai boliye."

"psycho killer jisne baahar mein aatank machcha rakha hai...kya kuch jaante ho uske baare mein." rohit ne pucha.

"mujhe kuch nahi pata sir uske baare mein. Balki kisi ko kuch nahi pata. Main to khud dara rahta hun us se.main Kabhi raat ko baahar nahi ghumta ab. 9 bajne se pahle hi ghar aa jaata hun. Sorry main is baare mein aapki koyi madad nahi kar sakta. Mujrimo ki duniya mein uska koyi nisaan nahi hai""

"hmm....chal theek hai koyi baat nahi." rohit ne kaha aur 500 ka note thama diya kallu ko. "ye darvaja theek karva lena."

rohit jeep mein baith kar chal diya.

"lagta hai ye psycho ek aisa vyakti hai jiski ki samaaj mein izzat hai. Vo padmini ko isliye maang raha hai kyonki use dar hai ki kahi vo benakaab na ho jaaye. Shaayad vo sare aam hamaare saamne ghumta ho roj par hum use pahchaan nahi paate kyonki hame jara bhi andaja nahi rahta ki vo kaatil ho sakta hai. Mr psycho tumhe chodunga nahi main. Dekhta hun kab tak bachoge.""

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Shaam ho chuki hai aur padmini office se nikal rahi hai. Raj sharma as usual khusi se jhum uthta hai. Fauran aa jaata hai vo padmini ke paas.

"ho gayi chuti aapki." Raj sharma ne pucha.

"Raj sharma tum apni duty par dhyaan rakho. Mujhse phaalto ki baate mat kiya karo"

"aap mujhse khafa-khafa kyun rahti hai. Pyar karte hain aapse, koyi majaak nahi" aakhir jajbaat mein bah kar Raj sharma ke muh se nikal hi gayi dil ki baat. Vo khud pachtaaya bol kar kyonki padmini ki aankhe ye sunte hi gusse se laal ho gayi. Thappad jad diya usne Raj sharma ke gaal par.

"tumhaari himmat kaise hui ye bolne ki...dafa ho jaao yahan se. Nahi chaahiye mujhe koyi protection."

"sorry padmini ji galti ho gayi. Muh se nikal gaya yu hi. Kahna nahi chaahta tha aapse kuch bhi. Par pata nahi kyon ye sab bol diya maine." Raj sharma gidgidaya.

"tumhaara moot apne aap nikal jaata hai. Muh se bhi kuch bhi nikal jaata hai. Tum aakhir ho kya."

bechara Raj sharma kare bhi to kya kare. Kuch bhi nahi bol paaya padmini ko. Bas sar jhukaaye khada raha. Padmini ko jara bhi ahsaas nahi hua ki vo sach mein use pyar karta hai. Vo to apne sapne ke kaaran Raj sharma se chidi hui thi aur kuch bhi karke us badshurat sapne ko taalna chaahti thi. Isi bokhlaahat mein thappad jad diya tha usne Raj sharma ke muh par.

"chup kyon khade ho bolte kyon nahi kuch" padmini ne kaha.

"kya kahu aapse. Gunahgaar hu aapka. Chaliye aap late ho rahi hain...sorry main aage se aisa nahi bolunga."

"tumhaare bas mein kuch hai bhi. Tumhaara to sab kuch apne aap nikal jaata hai." padmini ne kaha aur apni car mein baith gayi.

Raj sharma bhi apni jeep mein baith kar uske peeche chal diya. Ghar pahunch kar padmini seedha ghar mein ghuss gayi. Vo Raj sharma se koyi baat nahi karna chaahti thi.

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Ghane jungle ka drisya hai. Charo taraf khaufnaak sannata hai. Padmini aur Raj sharma ghabraaye khade hain.ghabraaye bhi kyon na unke saamne psycho khada hai unki taraf bandook taane.

"tum dono decide karlo pahle kaun marna chaahta hai." psycho ne kaha.

"hamne decide kar liya. Pahle tum maroge." Raj sharma ne paanv se mitti uchaal di psycho ki taraf aur us par tut pada. Psycho ke haath se pistol choot kar dur gir gayi. Uska chaku bhi jamin par gir gaya. Magar psycho pistol ke bina bhi balshaali tha. Vo Raj sharma par bhari pad raha tha. Kisi tarah Raj sharma ke haath chaku aa gaya aur usne chaku psycho ke pet mein gaad diya. Psycho dher ho gaya jamin par. Raj sharma ko laga psycho ka kaam khatam. Vo padmini ki taraf badha. Lekin tabhi psycho bola, "pahle padmini hi maregi...bachcha sako to bachcha lo."

Raj sharma ne turant peeche mud kar dekha. Psycho ke haath mein pistol thi aur usne padmini ko nishaanaa bana rakha tha. Vakt rahte Raj sharma padmini aur goli ke beech aa gaya aur Raj sharma jamin par dher ho gaya. Goli bilkul dil ke paas lagi thi.

Padmini bhaag kar aayi Raj sharma ke paas aur phoot phoot kar rone lagi. "aisa kyon kiya tumne. Mujhe mar jaane dete."

"Pyar karte hain aapse, koyi mazaak nahi" Raj sharma ne kaha aur usne dam taud diya.

"Raj sharma!" aur padmini chilla kar fauran uth gayi gahri neend se. Sapna tha hi kuch aisa. Usne apne dil par haath rakha aur boli, "pyar karte hain aapse, koyi mazaak nahi...Raj sharma ne yahi kaha tha shaam ko. Uff kya ho raha hai mere saath. Itne ajib sapne kyon aate hain mujhe. Oh..Raj sharma mujhe kyon pareshan kar rahe ho."

padmini sapne ke baad bahut bechain ho gayi thi. Usne ghadi ki taraf dekha to paaya ki raat ke 2 baj rahe hain. Vo uthi aur pani piya.

Pani peene ke baad padmini khidki mein aayi aur parda hata kar baahar dekha. Use apne ghar ke baahar sirf Raj sharma dikhayi diya. Vo jeep ka baahara lekar khada tha. Raj sharma ne padmini ko khidki se jhaankte hue dekh liya. Vo turant jeep ka sahaara chod kar seedha khada ho gaya...jaise ki kuch kahna chaahta ho.

padmini ne fauran parda chod diya aur vaapis aa kar bistar par gir gayi. Bahut koshis ki usne dimaag ko divert karne ki magar baar baar uske dimaag mein Raj sharma ke yahi bol gunj rahe the, "pyar karte hain aapse, koyi mazaak nahi."

nisa achaanak uthti hai aur khud ko kamre mein akela paati hai. Vo paati hai ki uske sharir par ab ek bhi kapda nahi hai. Use yaad aata hai ki psycho ne use kuch khaane ko diya tha. Khaate hi vo gahri neend sho gayi thi. Uska sar ghum raha tha.Vo deewar ghadi ki aur dekhti hai. Ghadi 2 baja rahi thi.

"ye din ke 2 baje hain ya raat ke 2" nisa sochti hai. Magar uske paas jaan-ne ka koyi chaara nahi hai. Us kamre mein koyi khidki nahi hai. Ek darvaaja hai jo ki band hai. Vo chaaro taraf dhyaan se dekhti hai. Use ek toilet dikhayi deta hai. Vo uthti hai aur kaanpte hue toilet

ki taraf badhti hai. Toilet mein koyi darvaja nahi hai. Vo ander jhaank kar dekhti hai to paati hai ki toilet mein bhi koyi khidki nahi hai.

"ye kaisa kamra hai. Koyi khidki nahi hai isme. Aur Vo psycho kaha hai?"

nisa toilet se darvaaje ki taraf badhti hai. Vo darvaaje par kaan laga kar dekhti hai. Use bas sannaata sunaayi deta hai.

"koyi bhi awaaj nahi aa rahi kahi se...aakhir main kaha hun. Kya ye kamra dehradun mein hi hai ya kahi aur. Dady please kujh kijiye main marna nahi chaahti." nisa phoot phoot kar rone lagti hai.

Tabhi nisa ko darvaaje par kuch halchal sunayi deti hai aur vo fauran bhaag kar bistar par aakar late jaati hai aur apni aankhe band kar leti hai. Uska dil jor-jor se dhadakne lagta hai.

Darvaaja khulta hai aur dhadaam ki awaaj hoti hai. Nisa utshukta mein aankhe khol kar dekhti hai. "ramu kaka!"

ramu nisa ke ghar ka naukar tha. Koyi 45-46 saal ki umar ka tha. Nisa ne ramu ko dekhte hi apne ubhaaro par haath rakh liye. Magar uski yoni ko chupaane ke liye kuch nahi bachcha tha.

"memsaab! Aaahhh" ramu karaahte hue bola. Uske sar se khun nikal raha tha.

psycho ne ramu ko kamre mein patka tha. jis se dhadaam ki awaaj hui thi

"ab tum kya karna chaahte ho?" nisa rote hue boli.

"jab tak padmini ko mujhe nahi shonpa jaata kyon na ek-aadh game ho jaaye." psycho ne kaha

"ab kaun si game khelna chaahte ho...please mujhe jaane do" nisa rone lagi

"wow kya khauf hai tumhaari aankho mein. Sach mein maja aa gaya. Ab aur maja aayega."

"mujhe yahan kyon laaye ho bhai." ramu ne pucha.

"daro mat tum. Balki garv karo ki tum meri art ka hissa ban-ne ja rahe ho."

ramu ko kuch samajh nahi aaya.

"Khel bahut simple hai. Ye chaaku dekho" psycho ne haath mein pakde chaaku ko hilaaya.

ramu badi hairani se sab sun raha tha. Uske rongte khade ho rakhe the.

"tumhaare paas teen options hai. Pahli option ye hai ki ye chaaku lo aur apna pet cheer lo. Tumhaari memsaab ko jaane dunga main agar aisa karoge to."

ramu ne nisa ki aur dekha. Uski rooh kaanp uthi thi ye sab sun kar.

"dusri option hai ki tum ye chaaku lo aur nisa ka pet cheer daalo. Uska pet cheerne ke baad tum yahan se ja sakte ho. Tumhe kuch nahi karooga."

ramu ki to aankhe phati ki phati rah gayi.

"teesra option bhi hai. Tum apni memsaab ki chut mein lund daal do. Magar lund uski marji se daalna. Rape ki izaazat nahi hai tumhe. Aadha ghanta hai tumhaare paas in teeno mein se ek kaam karne ka. Kuch bhi nahi kiya to tumhe kaat daalunga. Lo pakdo ye chaaku." psycho ne chaaku ramu ko de diya aur khud kursi par haath mein pistol le kar baith gaya.

Ramu ashmanjas mein tha ki kya kare. Khud ka pet vo cheer nahi sakta tha. Teesra kaam bhi vo nahi kar sakta tha. Bas ek hi option bachchi thi ki vo kaat daale nisa ko.

"dusri option hi theek hai ramu. Cheer de pet memsaab ka. Unke marne se tum jinda rah sakte ho to kya dikkat hai." vo kaanpte hue haath mein chaaku liye nisa ki taraf badhta hai.

"maaf karna memsaab aur koyi chaara nahi hai. Aap aankhe band kar lo"

"namak haraam, apna pet kyon nahi cheer lete. Dikha di apni aukaat tumne." nisa chillayi.

"mujhe bhi jeene ka haq hai. Aapke marne se main jeenda rah sakta hun to kya dikkat hai." ramu chaaku hava mein lahraata hai. Nisa kaanp uthti hai.

"ruko...teesri option bhi to hai." nisa rote hue kahti hai.

Ramu ka haath hava mein hi ruk jaata hai. "to kya aap dalva lengi?"

"haan aa jaao" nisa phoot phoot kar rone lagti hai.

Psycho taaliya peetne lagta hai. "waah bhai waah, kya baat hai. Ye to puri besharmi par utar aayi hai. Kitni pyas hai iski chut mein lund ke liye. Apne naukar ka lene ke liye bhi taiyaar ho gayi hai. Aisi badchalan randi maine aaj tak nahi dekhi. Nisa ji hats off to you. Keep it up. Jaldi karo 5 minute barbaad kar chuke ho tum ramu. Aadha ghanta hai sirf tumhaare paas."

ramu ki to aankhe hi chamak uthi thi ye sunke. Uske ling mein turant harkat hone lagi thi. Usne chaaku ek taraf rakha aur chadh gaya bistar par.

"kahi aur mat chuna mujhe." nisa ne kaha

"ye karne ko mil raha hai, yahi bahut badi baat hai" ramu ne kaha aur apni pant utaar di. Furti se usne underwear bhi utaar diya. bahut bechain ho raha tha.

Nisa ne apni aankhe band kar li. Time beet-ta ja raha tha. Ramu ne turat apne ling par thuk lagaaya aur tika diya nisa ki yoni par.

Ek hi dhakke mein ramu ne pura ling nisa ki yoni mein utaar diya. "aaaaaahhhhhh....nooooo" nisa karaah uthi.

Nisa soch rahi thi ki ab psycho ramu ka gala kaat dega aur ye ganda kaam jaldi khatam ho jaayega. Isiliye to vo iske liye taiyaar bhi hui thi.

Par vo chonk gayi. Ramu ne maje se dhakke lagaane shuru kar diye aur aisa kuch nahi hua jaisa vo soch rahi thi. Usne psycho ki taraf dekha. Vo kursi par baitha tha. Uske chehre par nakaab tha. Isliye vo uske chehre ke bhaav nahi dekh paayi. Par vo samajh gayi ki vo pure drisya ka aanand le raha tha.

Pahli baar nisa ki yoni mein ling ander baahar ghum raha tha. Magar vo kuch bhi feel nahi kar pa rahi thi. Uski aankhe tapak rahi thi. Ramu to laga hua tha apne kaam mein. Use to jaise jannat mil gayi thi.toofan machcha diya tha usne bistar par. Bharpoor maja le raha tha vo nisa ka. Ruka nahi ek bhi baar. Nisa ki aankho ke aansu bhi nahi deekhe use. Laga raha bas. Apne charam par pahunch kar gir gaya vo nisa ke upar aur bola, "maaf karna mujhe memsaab. Koyi aur chaara nahi tha."

magar tabhi cheenkh gunj uthi ramu ki kamre mein. Psycho ne uski gardan ke peeche sar ke bilkul neeche chaaku ghusaa diya. Badi berahmi se usne vo chaaku neeche ki aur kheencha aur ramu ki peeth cheer daali. Chaaro taraf khun hi khun fail gaya. Bistar laal ho gaya. Psycho ne ramu ko taang pakad kar nisa ke upar se kheencha aur jamin par patak diya.

"kya scene bana hai. Kyon ri randi. Mil gaya teri chut ko paani. Ab to khus hai tu. Main chaahta tha ki vo tujhe kaat daale. Magar nahi. Tujhe to lund chaahiye tha uska. Bhuj gayi pyas teri ab. Apni chut mein lund le le kar logo ko marva rahi hai. Tere jaisi randi nahi dekkhi duniya mein. Bas bahut ho gaya tera ye ganda khel. Nahi chalne dunga main ye sab. Psycho ne nisa ke baal pakde aur use ghasit kar ramu ki laas par patak diya. Iske saath tu bhi maregi ab. Mujhe randi bilkul pasand nahi." psycho ki baato mein bahut kathorta thi

Aur phir kamre mein darindagi ka vo khel hua jise dekh kar kisi ki bhi rooh kaanp jaaye. Badi berahmi se kaat daala tha psycho ne nisa ko. Dam taud diya tha usne bahut jaldi. Magar psycho ka chaaku nahi thama. Vaar par vaar karta raha vo.

"meri game khraab karti hai saali. Main kya yahan porn dekhne baitha tha jo ki lund le liya tune maje se. Saali randi..........." pata nahi aur kya kya bakwaas karta raha vo.

Kamre mein bahut hi dardnaak aur khaufnaak drisya hua tha. Jiska pura varnan bahut hi muskil hai.

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Kramashah.........................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:23

बात एक रात की-- 60

गतान्क से आगे...........

रोहित भोलू के साथ बाहर का चक्कर लगा रहा है.

"सर ये साइको बिना मतलब क्यों मारता फिरता है लोगो को." भोलू ने कहा.

"क्योंकि वो साइको है. पागल हो गया है साला...एक बार मिल जाए मुझे. सारा साइको पाना निकाल दूँगा साले का."

अचानक उनकी जीप के आगे से एक बाइक निकलती है.

"ये कौन घूम रहा है बाइक पर इतनी रात को." रोहित जीप की स्पीड बढ़ा कर बाइक के आगे आ जाता है और बाइक सवार को रुकने पर मजबूर कर देता है.

"ये तो मोहित है?" भोलू कहता है.

"कौन मोहित?"

"मेरे घर के पास ही रहता है सर."

"तुम इतनी रात को कहा घूम रहे हो. किसी का खून करके तो नही आ रहे" रोहित ने पूछा.

"मैं अपनी ड्यूटी से आ रहा हूँ. घर जा रहा हूँ." मोहित ने कहा.

"क्या काम करते हो?" रोहित ने पूछा.

"प्राइवेट डीटेक्टिव हूँ."

"थ्ट्स इंट्रेस्टिंग. साइको का डर नही तुम्हे."

"2 बार सामना हो चुका है उस से. अब दर नही लगता उस से. मुझे मिला दुबारा तो बचेगा नही इस बार वो." मोहित ने कहा.

"पढ़ी है मैने केस फाइल. तुमने उसे घायल किया था."

"हां पेट चीर दिया था मैने उसका." मोहित ने कहा.

"फिर तो उसके पेट पे निसान होना चाहिए. मेरा ध्यान नही गया था इस बात पर. ये बहुत इंपॉर्टेंट क्लू है."

"क्या मैं जा सकता हूँ अब." मोहित ने कहा.

"हां बिल्कुल. क्या तुमने रास्ते में कुछ अजीब देखा. जैसे कि कोई व्यक्ति घूमता हुआ."

"मैने एक ब्लॅक स्कॉर्पियो देखी खड़ी हुई मंदिर के बाहर. मंदिर से एक आदमी निकला और स्कॉर्पियो में बैठ कर चला गया. मैं शकल नही देख पाया उसकी. मुझे ये अजीब सा लगा कुछ." मोहित ने कहा.

"कौन से मंदिर की बात कर रहे हो तुम." रोहित ने पूछा.

"बहुत पुराना सा मंदिर है भोले नाथ का. मैं वहाँ कभी गया नही." मोहित ने कहा

"बस स्टॅंड के सामने जो है उसकी बात तो नही कर रहे कही." रोहित ने कहा.

"हां हां वही मंदिर."

"वो मंदिर नही खंदार है मेरे भाई...मतलब ज़रूर कुछ गड़बड़ है. भालू चलो जल्दी" रोहित ने कहा.

"क्या मैं भी चल सकता हूँ आपके साथ?" मोहित ने कहा.

"आ जाओ...कोई दिक्कत की बात नही है." रोहित ने कहा.

मोहित ने बाइक वही सड़क के किनारे खड़ी कर दी और जीप में बैठ गया.

रोहित ने पूरी स्पीड से जीप सड़क पर दौड़ा दी.

रोहित कुछ ही देर में मोहित और भोलू के साथ उस पुराने मंदिर में पहुँच गया. उसने जीप पार्क की मंदिर के सामने और अपनी पिस्टल निकाल ली. पिस्टल हाथ में ताने वो खंदर में घुस्स गया.

खंदर में काई अलग अलग टूटे हुए कमरे थे जिनकी दीवारे तो थी मगर छत नही थी. रोहित ने एक एक करके सभी तरफ देखा.

“भोलू टॉर्च देना मुझे.” रोहित को शायद कुछ दिखा एक टूटे कमरे में.

भोलू ने टॉर्च रोहित को पकड़ा दी. रोहित ने जब टॉर्च जला कर कमरे की तरफ की तो सभी के होश उड़ गये.

“हे भगवान .” तीनो के मूह से यही निकलता है.

रोहित तुरंत ए एस पी साहिबा को फोन मिलाता है. रात के सादे तीन हो रहे थे. शालिनी गहरी नींद में सोई थी.

“उफ्फ किसका फोन है इस वक्त.” शालिनी ने फोन की तरफ हाथ बढ़ाया.

“सॉरी मेडम आपको इस वक्त डिस्टर्ब कर रहा हूँ.”

“क्या बात है, रोहित?” शालिनी ने पूछा.

“आप तुरंत यहाँ आ जाइए. बहुत भयानक मंज़र क्रियेट किया है साइको ने.” रोहित उसे वो सब बताता है जो कि उसने देखा.

शालिनी तुरंत तैयार हो कर खंदार की तरफ निकल देती है. उसके साथ चार कॉन्स्टेबल्स भी होते हैं. कुछ ही देर में शालिनी वहाँ पहुँच जाती है.

जब शालिनी अपनी आँखो से सब देखती है तो उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं. साइको ने निसा का सर काट कर रामू के सर पर लगा रखा था और रामू का सर काट कर निसा के सर पर लगा रखा था. दोनो लाशो को उसने दीवार के साहारे खड़ा कर रखा था. दीवार पर लिखा था “दो पापी, निसा और रामू आपके सामने हैं. दे आर प्राउड विक्टिम ऑफ माइ आर्टिस्टिक मर्डर.”

“जीसस…दिस साइको ईज़ शिज़ोफ्रेनिक” शालिनी कहती है.

“मेडम, जब मैं इसे पाकडूँगा तो थाने नही लाउन्गा. इसका एनकाउंटर कारूगा मैं.” रोहित ने कहा.

“क्या बकवास कर रहे हो. मेरे सामने ऐसी बात मत करना कभी. हमें जो भी करना है क़ानून के दायरे में करना है.” शालिनी भड़क गयी रोहित की बात सुन कर.

“कौन सा क़ानून मेडम, इसी क़ानून का सहारा ले कर छ्छूट जाते हैं ऐसे लोग. वो पॉलिटीशियन का लड़का जिसे मैने रेप के केस में अंदर किया था आज आज़ाद घूम रहा है. जिसका रेप हुआ था उसने स्यूयिसाइड कर ली है. क्या इंसाफ़ दिया हमने उस बेचारी को. उसे मैं जैल में डालने की बजाए गोली मार देता तो कुछ तो इंसाफ़ मिलता उस बेचारी को.”

“शट अप आइ से, सब तुम्हारी तरह सोचेंगे तो लॉ आंड ऑर्डर की धज़ियाँ उड़ जाएँगी. मेरे सामने ऐसी बाते कभी मत करना.”

“नही कारूगा पर आप खुद सोच कर देखो. क्या ऐसा घिनोना काम कोई इंसान कर सकता है. वो इंसान नही है मेडम. उस पर क़ानून लागू नही होता. जानवर है वो, हैवान है. ऐसे जानवरो को गोली मारनी चाहिए सीधा सर में. मोका नही देना चाहिए कोई भी.”

“तुम जज्बाती हो रहे हो…बाद में बात करेंगे.” शालिनी ने बात को ख़तम करना सही समझा.

“पोस्ट मॉर्टेम के लिए भेज दो दोनो बॉडीस को” शालिनी ने कहा.

“क्या तुमने उस ब्लॅक स्कॉर्पियो का नंबर नोट किया मोहित.” रोहित ने मोहित से पूछा.

“नही, मैने इस बात पर गौर ही नही किया कि ऐसा हो सकता है.” मोहित ने कहा.

“बाहर में जिस-जिस के नाम भी ब्लॅक स्कॉर्पियो है उनका पता करो. ये बहुत इंपॉर्टेंट क्लू है हमारे लिए” शालिनी ने कहा.

“जी मेडम. मैं भी यही सोच रहा था.” रोहित ने कहा.

“टॉर्च दो मुझे.” शालिनी ने कहा.

रोहित ने टॉर्च शालिनी को पकड़ा दी.

शालिनी ने बहुत बारीकी से बॉडीस को एग्ज़ॅमिन किया. “खून उसने कही और किया और बॉडीस यहाँ ला कर सज़ा दी. वो तो पद्‍मिनी को माँग रहा था निसा के बदले में. अभी उसकी दी हुई मोहलत भी पूरी नही हुई थी. आख़िर ये साइको चाहता क्या है.” शालिनी ने कहा.

“पागल है वो मेडम. और पागलो को समझा नही जा सकता.” रोहित ने कहा.

“चलो फिलहाल इन बॉडीस को पोस्ट मॉर्टेम के लिए भेज दो. और हां ध्यान रखना ये न्यूज़ मीडीया में लीक ना हो जाए. सनसनी फैल जाएगी बाहर में. लोग वैसे ही बहुत डरे हुए हैं.”

“मैं ध्यान रखूँगा मेडम?” रोहित ने कहा.

“एक काम करो सभी पोलीस कॉंटरों रूम को अलर्ट कर दो इस ब्लॅक स्कॉर्पियो के बारे में.” शालिनी ने कहा.

“ऑलरेडी कर दिया है. अब खुद भी एक राउंड पर निकल रहा हूँ.”

“गुड. कीप इट अप” शालिनी ने कहा.

पोलीस डिपार्टमेंट ने तो न्यूज़ दबा कर रखी मगर सुबह सवेरे हर चॅनेल पर एक वीडियो दिखाई जा रही थी. ये वीडियो साइको ने बनाई थी. उसने कमेरे का फोकस बोडेयस पर कर रखा था और बोल रहा था, “पद्‍मिनी देखो कितना खुब्शुरत कटाल किया है मैने. मैं एक आर्टिस्ट हूँ. तुम मुझसे डरो मत और मुझे एक मोका दो. सच कहता हूँ तुम्हे फकर होगा की तुम मेरे हाथो मारी गयी. एक खूबशुरआत मौत दूँगा तुम्हे मैं. मेरे हाथो मरने के बाद सीधा स्वर्ग जाओगी. तुम बेवजह डर कर भाग गयी उस दिन. तुम बहुत सुंदर हो पद्‍मिनी. तुम्हारे जैसा इस बाहर में कोई नही. तुम्हारे जैसी खुब्शुरत लड़की को खुब्शुरत मौत ही मिलनी चाहिए. और ये काम मैं बखूबी कर सकता हूँ. इन दोनो का खून मैने तुम्हारे कारण किया है. जब तक तुम मेरे पास नही आओगी. ऐसे नज़ारे बाहर वासियों को मिलते रहेंगे. सभी की भलाई इसी में है की तुम मेरे पास आ जाओ और एक खुब्शुरत मौत को स्वीकार करो. ये मत सचना पद्‍मिनी कि अगर तुम नही आओगी मेरे पास तो बच जाओगी. मरना तो तुम्हे है ही. यू कॅन रन बट यू कॅन नेवेर हाइड. तुम्हे तो मैं एक खुब्शुरत मौत दे कर रहूँगा चाहे कुछ हो जाए. आज तक तुम्हारे जैसी सुंदर लड़की को नही मारा. ये इच्छा भी पूरी हो कर रहेगी…हे…हे…हे.”

टीवी पर बार बार ये वीडियो दिखाई जा रही थी.

“ये न्यूज़ वाले भी ना. अपना फ़ायडा देखते हैं बस. मुजरिमो का काम आसान कर देते हैं ये मीडीया वाले. बार बार दिखा रहे हैं ये विसडेव. सनसनी फैलाने में पूरा साथ दे रहे हैं साइको का.” रोहित ने कहा.

“निकल गयी हवा सारी बेटा. अब तुम्हे लग रहा होगा की तुम सस्पेंड ही अच्छे थे, है ना मिस्टर रोहित पांडे.” चौहान ने रोहित का मज़ाक उड़ाया.

“जितने दिन ये केस आपके पास रहा, उतने दिन मेरे पास होता तो ये नौबत ही नही आती. वैसे आप थे कहा रात. ए एस पी साहिबा तो पहुँच गयी वहाँ पर आप नही आए. थे कहाँ आप.”

“मैं कही भी रहूं, तुमसे मतलब. अपना काम करो हा.” चौहान मूह सिकोड कर चला जाता है.

“मुझे तो इस चौहान पर भी शक है. कोई एंक्वाइरी ठीक से नही की इसने. ए एस पी साहिबा कह भी रही थी कि पोलीस महकमे की गोली चली थी उन पर. इस चौहान पर नज़र रखनी पड़ेगी मुझे.” रोहित ने खुद से कहा.

………………………………………………………………………………

………………………………..

जब टीवी पर पद्‍मिनी ने न्यूज़ देखी तो उसके पाँव के नीचे से तो ज़मीन ही निकल गयी. रोंगटे खड़े हो गये उसके न्यूज़ सुन कर. साइको के एक एक बोल ने उसकी रूह को काँपने पर मजबूर कर दिया.

“बेटा कही मत जा तू थोड़े दिन. बस यही घर पर ही रहो.” पद्‍मिनी की मम्मी ने कहा.

“हां बेटा तुम्हारी मम्मी ठीक कह रही है. जब तक ये वाहसी दरिन्दा पकड़ा नही जाता तुम घर पर ही रहो. रोज ऑफीस आने जाने में तुम्हारी जान को ख़तरा रहेगा.” पद्‍मिनी के दादी ने कहा.

राज शर्मा सुबह जब दिन निकलने लगा था तो हवलदारो को चोकस करके जीप में ही शो गया था. 24 घंटे की ड्यूटी थी. थोड़ी नींद भी ज़रूरी थी.पर सादे 9 बजे वो बिल्कुल तैयार था पद्‍मिनी के साथ ऑफीस जाने के लिए. वो इंतजार करता रहा. 10 बज गये तो उसने घर की बेल बजाई. पद्‍मिनी के दादी ने दरवाजा खोला.

“क्या पद्‍मिनी जी आज ऑफीस नही जाएँगी” राज शर्मा ने कहा.

“नही बेटा अब वो ऑफीस नही जाएगी. मैं अपनी बेटी को खोना नही चाहता.” पद्‍मिनी के पिता की आँखे नम हो गयी.

“क्या बात है आप परेशान क्यों लग रहे हैं.” राज शर्मा ने पूछा.

“तुम्हे नही पता कुछ भी? ओह हां तुम तो बाहर बैठे रहते हो. आओ टीवी पर न्यूज़ देखो, सब समझ जाओगे.”

राज शर्मा अंदर आ गया. सोफे पर टीवी के सामने पद्‍मिनी अपनी मम्मी के कंधे पर सर रख कर बैठी थी. राज शर्मा ने जब टीवी पर न्यूज़ देखी तो उसके होश उड़ गये. खंदार का पूरा द्रिस्य दिखाया जा रहा था. लेकिन जब साइको ने पद्‍मिनी के बारे में बोलना शुरू किया तो राज शर्मा आग बाबूला हो गया.

“ये कमीना ऐसा सोच भी कैसे सकता है. मैं उसका खून पी जाउन्गा.” राज शर्मा चिल्लाया.

पद्‍मिनी, पद्‍मिनी के दादी और मम्मी तीनो हैरान रह गये राज शर्मा के रिक्षन पर.

“मेरे होते हुए आपको कुछ नही होगा पद्‍मिनी जी. आप तक पहुँचने से पहले उसे मुझसे टकराना होगा. जब तक मैं जींदा हूँ वो अपने इरादो में कामयाब नही हो सकता.” राज शर्मा ने पद्‍मिनी की ओर देखते हुए कहा.

अनायास ही पद्‍मिनी को रात का सपना याद आ गया जिसमे उसने राज शर्मा को मरते देखा था अपने लिए. कुछ कहना चाहती थी राज शर्मा को पर कुछ बोल नही पाई. शायद अपने मम्मी, पापा की उपस्थिति के कारण चुप रही. मगर उसने एक बार बहुत प्यार से देखा राज शर्मा की तरफ और गहरी साँस ले कर अपनी आँखे बंद कर ली.

राज शर्मा ने पद्‍मिनी की आँखे पढ़ने की कोशिस तो की मगर वो कुछ समझ नही पाया. “क्या था इन म्रिग्नय्नि सी आँखो में जो मैं समझ नही पाया. आँखो की भाषा क्यों नही सीखी मैने.” राज शर्मा सोच में पड़ गया.

“मुझे नींद आ रही है. मैं सोने जा रही हूँ. रात भर ठीक से शो नही पाई” पद्‍मिनी ने कहा और उठ कर वहाँ से चल दी.

“आपकी इज़ाज़त हो तो, क्या मैं पद्‍मिनी जी से अकेले में कुछ बात कर सकता हूँ.” राज शर्मा ने पद्‍मिनी के डेडी से पूछा.

“यही रोक लेते उसे, अब तो वो चली गयी.” पद्‍मिनी के दादी ने कहा.

“बहुत इंपॉर्टेंट बात है प्लीज़.” राज शर्मा ने फिर रिक्वेस्ट की.

“ओके चले जाओ, अभी तो वो अपने कमरे में पहुँची भी नही होगी.”

पद्‍मिनी का कमरा फर्स्ट फ्लोर पर था. और वो सीढ़िया चढ़ रही थी. राज शर्मा दौड़-ता हुआ आया और बोला, “आप बिल्कुल चिंता ना करो, मैं हूँ ना.”

“थॅंकआइयू, मैं खुद को संभाल सकती हूँ. तुम अपना ख्याल रखना राज शर्मा.” पद्‍मिनी सीढ़ियाँ चढ़ कर अपने कमरे में आ गयी और अपना दरवाजा बंद कर लिया.

राज शर्मा भी आ तो गया सीढ़ियाँ चढ़ कर उपर. पर दरवाजा खड़काने की हिम्मत नही जुटा पाया. आ गया वापिस अपना सा मूह लेकर. “अपना ख्याल रखने को क्यों कहा पद्‍मिनी जी ने मुझे. क्या उन्हे मेरी चिंता है. नही…नही शायद उन्होने ऐसे ही कह दिया होगा. वो मेरी फिकर क्यों करेंगी. मैं भी बिल्कुल पागल हूँ. छोड़ दे प्यार के सपने और अपनी पुरानी जिंदगी में वापिस लौट जा. प्यार व्यार अपनी किस्मत में नही है.”

राज शर्मा घर से बाहर आ गया. उसने सभी कॉन्स्टेबल्स को हिदायत दी की हर वक्त बिल्कुल सतर्क रहें.

“मैने किसी को भी लापरवाही करते देखा तो देख लेना, मुझसे बुरा कोई नही होगा.” राज शर्मा ने कहा.

राज शर्मा वापिस घर के बाहर खड़ी अपनी जीप में बैठ गया. “अब इस साइको ने हद कर दी है. पद्‍मिनी जी के बारे में ऐसी बाते बोली. जींदा नही छोड़ूँगा कामीने को, बस मिल जाए एक बार वो मुझे.”

मगर बार-बार राज शर्मा की आँखो के सामने वो द्रिस्य घूम रहा था जब पद्‍मिनी बड़े प्यार से उसे देख रही थी. “कुछ तो था उन मृज्नेयनी सी आँखो में. काश समझ पाता मैं.”

रोहित थाने से निकल ही रहा था कि सामने से ए एस पी साहिबा आ गयी.

क्रमशः.........................

BAAT EK RAAT KI-- 60

gataank se aage...........

Rohit bholu ke saath baahar ka chakkar laga raha hai.

"sir ye psycho bina matlab kyon maarta phirta hai logo ko." bholu ne kaha.

"kyonki vo psycho hai. Paagal ho gaya hai sala...ek baar mil jaaye mujhe. Saara psycho pana nikaal dunga saale ka."

achaanak unki jeep ke aage se ek bike nikalti hai.

"ye kaun ghum raha hai bike par itni raat ko." rohit jeep ki speed badha kar bike ke aage aa jaata hai aur bike sawaar ko rukne par majboor kar deta hai.

"ye to mohit hai?" bholu kahta hai.

"kaun mohit?"

"mere ghar ke paas hi rahta hai sir."

"tum itni raat ko kaha ghum rahe ho. Kisi ka khun karke to nahi aa rahe" rohit ne pucha.

"main apni duty se aa raha hun. Ghar ja raha hun." mohit ne kaha.

"kya kaam karte ho?" rohit ne pucha.

"private detective hun."

"thats interesting. Psycho ka dar nahi tumhe."

"2 baar saamna ho chuka hai us se. Ab dar nahi lagta us se. Mujhe mila dubaara to bachchega nahi is baar vo." mohit ne kaha.

"padhi hai maine case file. Tumne use ghaayal kiya tha."

"haan pet cheer diya tha maine uska." mohit ne kaha.

"phir to uske pet pe nisaan hona chaahiye. Mera dhyaan nahi gaya tha is baat par. Ye bahut important clue hai."

"kya main ja sakta hun ab." mohit ne kaha.

"haan bilkul. Kya tumne raaste mein kuch ajeeb dekha. Jaise ki koyi vyakti ghumta hua."

"maine ek black scorpio dekhi khadi hui mandir ke baahar. Mandir se ek aadmi nikla aur scorpio mein baith kar chala gaya. Main shakal nahi dekh paaya uski. Mujhe ye ajeeb sa laga kuch." mohit ne kaha.

"kaun se mandir ki baat kar rahe ho tum." rohit ne pucha.

"bahut purana sa mandir hai bhole naath ka. Main vahaan kabhi gaya nahi." mohit ne kaha

"bas stand ke saamne jo hai uski baat to nahi kar rahe kahi." rohit ne kaha.

"haan haan vahi mandir."

"vo mandir nahi khandar hai mere bhai...matlab jaroor kuch gadbad hai. Bhalu chalo jaldi" rohit ne kaha.

"kya main bhi chal sakta hun aapke saath?" mohit ne kaha.

"aa jaao...koyi dikkat ki baat nahi hai." rohit ne kaha.

Mohit ne bike vahi sadak ke kinaare khadi kar di aur jeep mein baith gaya.

Rohit ne puri speed se jeep sadak par dauda di.

Rohit kuch hi der mein mohit aur bholu ke saath us puraane mandir mein pahunch gaya. usne jeep park ki mandir ke saamne aur apni pistol nikaal li. Pistol haath mein taane vo khander mein ghuss gaya.

Khander mein kayi alag alag tute hue kamre the jinki deevare to thi magar chatt nahi thi. rohit ne ek ek karke sabhi taraf dekha.

“bholu torch dena mujhe.” Rohit ko shayad kuch dikha ek tute kamre mein.

Bholu ne torch rohit ko pakda di. Rohit ne jab torch jala kar kamre ki taraf ki to sabhi ke hosh ud gaye.

“hey bhagvaan .” teeno ke muh se yahi nikalta hai.

Rohit turant A S P saahiba ko phone milaata hai. Raat ke saade teen ho rahe the. Shalini gahri neend mein shoyi thi.

“uff kiska phone hai is vakt.” Shalini ne phone ki taraf haath badhaya.

“sorry madam aapko is vakt disturb kar raha hun.”

“kya baat hai, rohit?” shalini ne pucha.

“aap turant yahan aa jaaiye. Bahut bhayaanak manjar creat kiya hai psycho ne.” rohit use vo sab bataata hai jo ki usne dekha.

Shalini turant taiyaar ho kar khandar ki taraf nikal deti hai. Uske saath chaar constables bhi hote hain. Kuch hi der mein shalini vahaan pahunch jaati hai.

Jab shalini apni aankho se sab dekhti hai to uske rongte khade ho jaate hain. Psycho ne nisa ka sar kaat kar ramu ke sar par laga rakha tha aur ramu ka sar kaat kar nisa ke sar par laga rakha tha. dono laaso ko usne deevar ke saahare khada kar rakha tha. deevar par likha tha “do paapi, nisa aur ramu aapke saamne hain. They are proud victim of my artistic murder.”

“jesus…this psycho is schizophrenic” shalini kahti hai.

“madam, jab main ise pakdunga to thaane nahi laaunga. Iska encounter karooga main.” Rohit ne kaha.

“kya bakwaas kar rahe ho. Mere saamne aisi baat mat karna kabhi. Hamein jo bhi karna hai kaanun ke daayre mein karna hai.” Shalini bhadak gayi rohit ki baat sun kar.

“kaun sa kaanun madam, isi kaanun ka sahaara le kar chhoot jaate hain aise log. Vo politician ka ladka jise maine rape ke case mein ander kiya tha aaj aajaad ghum raha hai. Jiska rape hua tha usne suicide kar li hai. Kya insaaf diya hamne us bechaari ko. Use main jail mein daalne ki bajaaye goli maar deta to kuch to insaaf milta us bechaari ko.”

“shut up I say, sab tumhaari tarah sochenge to law and order ki dhajiyan ud jaayengi. Mere saamne aisi baate kabhi mat karna.”

“nahi karooga par aap khud soch kar dekho. Kya aisa ghinona kaam koyi insaan kar sakta hai. Vo insaan nahi hai madam. Us par kaanun laagu nahi hota. Jaanvar hai vo, haivaan hai. Aise jaanvaro ko goli maarni chaahiye seedha sar mein. Moka nahi dena chaahiye koyi bhi.”

“tum jajbaati ho rahe ho…baad mein baat karenge.” Shalini ne baat ko khatam karna sahi samjha.

“post mortem ke liye bhej do dono bodies ko” shalini ne kaha.

“kya tumne us black scorpio ka number note kiya mohit.” Rohit ne mohit se pucha.

“nahi, maine is baat par gaur hi nahi kiya ki aisa ho sakta hai.” Mohit ne kaha.

“baahar mein jis-jis ke naam bhi black scorpio hai unka pata karo. Ye bahut important clue hai hamaare liye” shalini ne kaha.

“ji madam. Main bhi yahi soch raha tha.” rohit ne kaha.

“torch do mujhe.” Shalini ne kaha.

Rohit ne torch shalini ko pakda di.

Shalini ne bahut baariki se bodies ko examine kiya. “khun usne kahi aur kiya aur bodies yahan la kar saja di. vo to padmini ko maang raha tha nisa ke badle mein. Abhi uski di hui mohlat bhi puri nahi hui thi. aakhir ye psycho chaahta kya hai.” Shalini ne kaha.

“paagal hai vo madam. Aur paaglo ko samjha nahi ja sakta.” Rohit ne kaha.

“chalo philhaal in bodies ko post mortem ke liye bhej do. Aur haan dhyaan rakhna ye news media mein leak na ho jaaye. Sansani fail jaayegi baahar mein. Log vaise hi bahut dare hue hain.”

“main dhyaan rakhunga madam?” rohit ne kaha.

“ek kaam karo sabhi police controm room ko alert kar do is black scorpio ke baare mein.” Shalini ne kaha.

“already kar diya hai. Ab khud bhi ek round par nikal raha hun.”

“good. Keep it up” shalini ne kaha.

Police department ne to news daba kar rakhi magar subah savere har channel par ek video dikhayi ja rahi thi. ye video psycho ne banaayi thi. usne camere ka focus bodeis par kar rakha tha aur bol raha tha, “padmini dekho kitna khubshurat katal kiya hai maine. Main ek artist hun. Tum mujhse daro mat aur mujhe ek moka do. Sach kahta hun tumhe fakar hoga ki tum mere haatho maari gayi. Ek khubshurat maut dunga tumhe main. Mere haatho marne ke baad seedha swarg jaaogi. Tum bevajah dar kar bhaag gayi us din. Tum bahut sundar ho padmini. Tumhaare jaisa is baahar mein koyi nahi. tumhaare jaisi khubshurat ladki ko khubshurat maut hi milni chaahiye. Aur ye kaam main bakhubi kar sakta hun. In dono ka khun maine tumhaare kaaran kiya hai. Jab tak tum mere paas nahi aaogi. Aise nazaare baahar vaasiyon ko milte rahenge. Sabhi ki bhalaayi isi mein hai ki tum mere paas aa jaao aur ek khubshurat maut ko swikaar karo. Ye mat sachna padmini ki agar tum nahi aaogi mere paas to bach jaaogi. Marna to tumhe hai hi. You can ran but you can never hide. Tumhe to main ek khubshurat maut de kar rahunga chaahe kuch ho jaaye. Aaj tak tumhaare jaisi sundar ladki ko nahi maara. Ye icha bhi puri ho kar rahegi…he…he…he.”

Tv par baar baar ye video dikhayi ja rahi thi.

“ye news wale bhi na. apna faayda dekhte hain bas. Mujrimo ka kaam asaan kar dete hain ye media wale. Baar baar dikha rahe hain ye visdeo. Sansani failaane mein pura saath de rahe hain psycho ka.” Rohit ne kaha.

“nikal gayi hawa saari beta. Ab tumhe lag raha hoga ki tum suspend hi achche the, hai na mr rohit panday.” Chouhaan ne rohit ka majaak udaaya.

“jitne din ye case aapke paas raha, utne din mere paas hota to ye naubat hi nahi aati. Vaise aap the kaha raat. A S P saahiba to pahunch gayi vahaan par aap nahi aaye. The kaha aap.”

“main kahi bhi rahun, tumse matlab. Apna kaam karo huh.” Chouhaan muh sikod kar chala jaata hai.

“mujhe to is chouhaan par bhi shak hai. Koyi enquiry thik se nahi ki isne. A S P saahiba kah bhi rahi thi ki police mahakme ki goli chali thi un par. Is chouhaan par najar rakhni padegi mujhe.” Rohit ne khud se kaha.

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Jab tv par padmini ne news dekhi to uske paanv ke neeche se to jamin hi nikal gayi. Rongte khade ho gaye uske news sun kar. Psycho ke ek ek bol ne uski rooh ko kaanpne par majboor kar diya.

“beta kahi mat ja tu thode din. Bas yahi ghar par hi raho.” Padmini ki mammi ne kaha.

“haan beta tumhaari mammi thik kah rahi hai. Jab tak ye vahsi darinda pakda nahi jaata tum ghar par hi raho. Roj office aane jaane mein tumhaari jaan ko khatra rahega.” Padmini ke dady ne kaha.

Raj sharma subah jab din nikalne laga tha to hawaldaaro ko chokas karke jeep mein hi sho gaya tha. 24 ghante ki duty thi. thodi neend bhi jaroori thi.par saade 9 baje vo bilkul taiyaar tha padmini ke saath office jaane ke liye. Vo intjaar karta raha. 10 baj gaye to usne ghar ki bell bajaayi. Padmini ke dady ne darvaaja khola.

“kya padmini ji aaj office nahi jaayengi” Raj sharma ne kaha.

“nahi beta ab vo office nahi jaayegi. Main apni beti ko khona nahi chaahta.” Padmini ke pita ki aankhe nam ho gayi.

“kya baat hai aap pareshaan kyon lag rahe hain.” Raj sharma ne pucha.

“tumhe nahi pata kuch bhi? Oh haan tum to baahar baithe rahte ho. Aao tv par news dekho, sab samajh jaaoge.”

Raj sharma ander aa gaya. sofe par tv ke saamne padmini apni mammi ke kandhe par sar rakh kar baithi thi. Raj sharma ne jab tv par news dekhi to uske hosh ud gaye. Khandar ka pura drisya dikhaya ja raha tha. lekin jab psycho ne padmini ke baare mein bolna shuru kiya to Raj sharma aag babula ho gaya.

“ye kamina aisa soch bhi kaise sakta hai. Main uska khun pee jaaungaa.” Raj sharma chillaya.

Padmini, padmini ke dady aur mammi teeno hairaan rah gaye Raj sharma ke reaction par.

“mere hote hue aapko kuch nahi hoga padmini ji. Aap tak pahunchne se pahle use mujhse takraana hoga. Jab tak main jeenda hun vo apne iraado mein kaamyab nahi ho sakta.” Raj sharma ne padmini ki aur dekhte hue kaha.

Anaayas hi padmini ko raat ka sapna yaad aa gaya jisme usne Raj sharma ko marte dekha tha apne liye. Kuch kahna chaahti thi Raj sharma ko par kuch bol nahi paayi. Shaayad apne mammi, papa ki upasthiti ke kaaran chup rahi. Magar usne ek baar bahut pyar se dekha Raj sharma ki taraf aur gahri saans le kar apni aankhe band kar li.

Raj sharma ne padmini ki aankhe padhne ki koshis to ki magar vo kuch samajh nahi paaya. “kya tha in mrignayni si aankho mein jo main samajh nahi paaya. Aankho ki bhaasa kyon nahi seekhi maine.” Raj sharma soch mein pad gaya.

“mujhe neend aa rahi hai. Main sone ja rahi hun. Raat bhar thik se sho nahi paayi” padmini ne kaha aur uth kar vahaan se chal di.

“aapki izaazat ho to, kya main padmini ji se akele mein kuch baat kar sakta hun.” Raj sharma ne padmini ke dady se pucha.

“yahi rok lete use, ab to vo chali gayi.” Padmini ke dady ne kaha.

“bahut important baat hai please.” Raj sharma ne phir request ki.

“ok chale jaao, abhi to vo apne kamre mein pahunchi bhi nahi hogi.”

Padmini ka kamra first floor par tha. aur vo seedhiya chadh rahi thi. Raj sharma daud-ta hua aaya aur bola, “aap bilkul chinta na karo, main hun na.”

“thankyou, main khud ko sambhaal sakti hun. Tum apna khyaal rakhna Raj sharma.” Padmini seedhiyan chadh kar apne kamre mein aa gayi aur apna darvaaja band kar liya.

Raj sharma bhi aa to gaya seedhiyan chadh kar upar. Par darvaaja khadkaane ki himmat nahi juta paaya. Aa gaya vaapis apna sa muh lekar. “apna khyaal rakhne ko kyon kaha padmini ji ne mujhe. Kya unhe meri chinta hai. Nahi…nahi shaayad unhone aise hi kah diya hoga. Vo meri fikar kyon karengi. Main bhi bilkul paagal hun. Chod de pyar ke sapne aur apni purani jindagi mein vaapis laut ja. Pyar vyar apni kismat mein nahi hai.”

Raj sharma ghar se baahar aa gaya. usne sabhi constables ko hidaayat di ki har vakt bilkul satark rahein.

“maine kisi ko bhi laaparvaahi karte dekha to dekh lena, mujhse bura koyi nahi hoga.” Raj sharma ne kaha.

Raj sharma vaapis ghar ke baahar khadi apni jeep mein baith gaya. “ab is psycho ne had kar di hai. Padmini ji ke baare mein aisi baate boli. Jeenda nahi chodunga kamine ko, bas mil jaaye ek baar vo mujhe.”

Magar baar-baar Raj sharma ki aankho ke saamne vo drisya ghum raha tha jab padmini bade pyar se use dekh rahi thi. “kuch to tha un mrignayni si aankho mein. Kaash samajh paata main.”

rohit thaane se nikal hi raha tha ki saamne se A S P saahiba aa gayi.

Kramashah.........................