बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:28

बात एक रात की--67

गतान्क से आगे.................

"बेवकूफ़ फोन पे बात की मैने. मुझे विजय पर शक था. वो अक्सर ड्यूटी से गायब रहता है. मैने चौहान से फोन करके पूछा कि क्या विजय के पास ब्लॅक स्कॉर्पियो है, तो उसका जवाब हां था. नज़र रखो विजय पर. इसीलिए बुलाया तुम्हे यहाँ."

"मैं खुद यही सोच रहा था मेडम."

"अब सोचो कम और काम ज़्यादा करो. मुझे कुछ नतीजा चाहिए जल्दी समझे वरना...."

"समझ गया मेडम, इज़ाज़त दीजिए मुझे."

"हां जाओ और विजय के साथ साथ बाकी तीनो पर भी नज़र रखो. साइको इन चारो में से ही कोई है."

"बिल्कुल मेडम ऐसा ही करूँगा. वैसे विजय कल से गायब है फिर से. आज भी ड्यूटी पर नही आया वो." रोहित ने कहा.

"तभी तो मुझे शक है उस पर. नाउ डोंट वेस्ट युवर टाइम."

"जी मेडम" रोहित ने कहा और उठ कर बाहर आ गया.

"उफ्फ जान निकाल देती हैं मेडम." रोहित ने बाहर आ कर कहा.

..............................

.....................................................

शाम के 6 बज रहे हैं. हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा है.

सरिता विजय की पत्नी, बाजार से कुछ समान ले कर लौट रही है. घर पहुँच कर वो पाती है की उनके घर के बाहर कोई खड़ा है बाइक ले कर. वो उसे पहचान जाती है. "ये तो मोहित है."

मोहित सरिता को देखते ही बोला, आपका ही इंतेज़ार कर रहा था मैं. कैसी हैं आप."

"मैं ठीक हूँ, अंदर आइए."

सरिता ने दरवाजे का ताला खोला और मोहित को अंदर इन्वाइट किया.

"मेरे पति घर पर नही हैं. आप अच्छे वक्त पर आयें हैं. मैं बिना किसी चिंता के अपना क़र्ज़ उतार सकती हूँ."

"कहाँ हैं आपके पति देव."

"देल्ही गये हैं कल से किसी काम से. अब कल ही लोटेंगे"

"ह्म्म..."

"वैसे मुझे डर लग रहा है, पर अपना क़र्ज़ मैं चुकाना चाहती हूँ. आपके सामने हूँ आप जैसा चाहें कर सकते हैं."

"आप हर क़र्ज़ से आज़ाद हैं सरिता जी. मुझे आपसे कुछ नही चाहिए. मैं तो वैसे ही मिलने आया था. बस एक बात बता दीजिए अगर हो सके तो."

"जी पूछिए." सरिता ने कहा.

"आपके पति के पेट पर निशान क्यों है, बहुत बड़ा लंबा सा."

"आप क्यों जान-ना चाहते हैं?"

"प्लीज़ हो सके तो बता दीजिए...मुझसे कारण मत पूछिए."

"उस रात आपके जाने के बाद मेरे पति घर आए थे. उन पर साइको ने हमला किया था. उनके पेट पर वार किया. किसी तरह से बच गये वो. बड़ी मुस्किल से घर पहुँचे थे."

"ह्म्म तो आप कौन से हॉस्पिटल में ले गयी थी उन्हे."

"उन्होने मना कर दिया हॉस्पिटल जाने से. कह रहे थे की सबको पता चलेगा तो पोलीस की बदनामी होगी. वैसे मैं खुद एक डॉक्टर हूँ. मैने घर पर ही जैसे तैसे ऑपरेट किया. थॅंक गॉड सब कुछ ठीक रहा."

"ह्म्म....."

"आप ये सब क्यों जान-ना चाहते थे."

"कोई ख़ास बात नही वैसे ही. अब मैं चलता हूँ. टेक केर."

सरिता को तो कुछ भी समझ नही आ रहा था

मोहित आ गया चुपचाप बाहर और बाइक पर बैठ कर घर की तरफ चल दिया.

मोहित घर पहुँचा तो उसे अपने घर के बाहर पूजा खड़ी मिली.

"तुम यहाँ क्या कर रही हो पूजा. लोग देखेंगे तो क्या सोचेंगे"

"क्यों कर रहे हो ये सब. कुछ बदल नही जाएगा खून ख़राबे से."

"मैं कुछ समझा नही." मोहित ने हैरानी भरे शब्दो में कहा.

"मैने अभी अभी देखा कल का न्यूज़ पेपर. विक्की और परवीन को किसी ने बेरहमी से मार दिया."

"अच्छा हुआ वो लोग इसी लायक थे. पर उन्हे किसी ने नही बल्कि साइको ने मारा है."

"मेरी आँखो में देख कर बोलो क्यों कर रहे हो ये सब."

"अंदर चल कर बात करते हैं, लोग देख रहे हैं." मोहित ने कहा और कमरे का ताला खोल दिया. "आओ बैठ कर आराम से बातें करते हैं."

"कोई बात नही करूँगी जब तक ये सब बंद नही करोगे." पूजा ने कहा.

"तुम्हे कुछ ग़लत-फ़हमी हो गयी है. मैने कुछ नही किया ऐसा."

"मतलब की तुम रुकोगे नही, खून की होली खेलते रहोगे. मेरी चिंता नही तुम्हे बिल्कुल भी क्या."

"क्या मतलब.... आओ आओ अंदर आओ अब काम की बात की तुमने. पहली बार तुम्हारी आँखो में मेरे लिए प्यार दिखाई दे रहा है."

"ये प्यार नही तुम्हारे लिए चिंता है. रोक दो ये सब वरना तुमसे कभी बात नही करूँगी."

"2 लोग बाकी हैं अभी पूजा. न्याय पूरा करूँगा मैं अधूरा नही."

"मतलब तुम नही रुकोगे."

"नही."

पूजा चल पड़ी मूड कर अपने घर की तरफ. मोहित ने उसे रोकने की कोशिस नही की.

"तुम समझ नही रही हो पूजा. अगर ये लोग जिंदा रहे तो परेशान करते रहेंगे तुम्हे. इनका मारना ज़रूरी है. तभी तुम शांति से जी पाओगि.

पूजा चल तो पड़ी थी मूह फेर कर अपने घर की ओर पर उसके कदम आगे ही नही बढ़ रहे थे. बहुत धीरे-धीरे बढ़ रही थी वो आगे. वो किसी उधेड़बुन में थी. अचानक वो रुक गयी और अपने कदम वापिस मोहित के घर की तरफ मोड़ दिए. "मैं नही करने दूँगी मोहित को ये सब, उसे मेरी बात मान-नी पड़ेगी." पूजा ने ध्रिद निस्चय से कहा और तेज कदमो से चल पड़ी.

2 मिनिट में ही पूजा वापिस मोहित के घर के बाहर थी. मोहित ने पूजा के जाने के बाद दरवाजा बंद कर लिया था. वो नहाने की तैयारी कर रहा था. सारे कपड़े निकाल कर बस अंडरवेर में था. कंधे पर तोलिया टाँग रखा था.दरवाजा खड़का तो हड़बड़ा गया वो. फुर्ती से टोलिया लपेट कर दरवाजा खोला उसने.

"पूजा तुम रूको...रूको मैं कपड़े पहन लूँ" मोहित ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया.

पूजा हंस पड़ी मोहित को ऐसी हालत में देख कर. मोहित ने तुरंत कपड़े पहन कर दरवाजा खोला, "आओ पूजा, मुझे लगा तुम चली गयी. मैं नहाने जा रहा था. सॉरी."

पूजा अंदर आ गयी और बोली, "मेरी खातिर रुक जाओ मोहित. मुझे ये सब ठीक नही लग रहा. तुम्ही बताओ क्या हाँसिल होगा मुझे उनके मरने से. कुछ भी तो नही. मेरे साथ जो होना था हो ही चुका है. कुछ भी तो बदल नही जाएगा. तुम बेकार में उनके गंदे खून से अपने हाथ रंग रहे हो."

"क्या तुम्हे नही लगता कि उन्हे उनके किए की सज़ा मिलनी चाहिए." मोहित ने कहा.

"सज़ा तो मुझे भी मिलनी चाहिए उस हिसाब से. मेरी खुद की कम ग़लतियाँ नही हैं. आँख मिच कर अपना सब कुछ सोन्प दिया था मैने विक्की को. क्या मैने ग़लत नही किया. चौहान और परवीन को मैने भी थोड़ा ही सही सहयोग तो दिया. क्या मैं पापी नही हूँ. मुझे मारो सबसे पहले. तुम मेरे लिए कर रहे हो ना ये सब. प्यार करते हो मुझसे तुम. लेकिन मोहित जिसे तुम प्यार करते हो उसके दामन पर दाग है. मैं तुम्हारे प्यार के लायक नही हूँ. मुझे भी तो मारो. मैं भी उतनी ही पापी हूँ जीतने की ये लोग जिन्हे तुम मारने पर उतारू हो." पूजा ने भावुक शब्दो में कहा.

"पूजा मुझे पता है किसकी कितनी ग़लती है. तुम्हारे साथ प्यार का नाटक हुआ, तुम्हारी वीडियो बनाई गयी. तुम्हे ब्लॅकमेल किया गया. चौहान ने तुम्हारी मजबूरी का फ़ायडा उठाया और अपने कुकर्म में परवीन को भी सामिल किया. मानता हूँ मैं कि थोड़ा सहयोग दिया होगा तुमने उन्हे. पर शायद वो सहयोग तुम्हारी मजबूरी थी. तुम्हारी कहानी सुन कर तो यही लगा था मुझे. तुम पापी हो ही नही सकती. पापी वो लोग हैं जिन्होने तुम्हारे मासूम चरित्र की धज्जियाँ उड़ाई. नही छोड़ूँगा मैं बाकी के 2 लोगो को भी."

"नही मोहित प्लीज़. कहने को प्यार करते हो मुझसे और मेरी एक बात भी मान-ने को तैयार नही. क्या यही प्यार है तुम्हारा. तुम ये भी नही सोच रहे हो कि अगर तुम्हे ही साइको समझ लिया गया तो फिर क्या होगा."

"क्या तुम प्यार करने लगी हो मुझसे पूजा जो कि इतनी चिंता कर रही हो मेरी."

"प्यार मेरे लिए एक कन्फ्यूषन बन गया है. प्यार नही कर पाउन्गि जिंदगी में दुबारा. इंसानियत के नाते तुम्हारी चिंता है मुझे."

"तुमने बाहर कहा था की क्या मेरी चिंता नही तुम्हे, क्यों कहा था ऐसा तुमने"

"तुम अगर मेरे लिए खून ख़राबा करोगे तो क्या ख़ुसी मिलेगी मुझे. परेशान ही तो रहूंगी. जब प्यार करते हो मुझसे तो क्या मुझे परेशानी में डालोगे. तुम ऐसा करोगे तो क्या मैं चिंता नही करूँगी तुम्हारी. ख़तरनाक खेल खेल रहे हो तुम जिसमे तुम्हारी जान भी जा सकती है."

"वाउ...तुम्हे मेरी फिकर हो रही है. यही तो प्यार है. देखा पटा ही लिया मैने तुम्हे." मोहित ने हंसते हुए कहा.

"दुबारा प्यार मेरे लिए असंभव है. प्यार नही है ये. तुम्हारी चिंता है मुझे और कुछ नही...मोहित. कर बैठती प्यार तुमसे इस दीवाने पन के लिए अगर प्यार में धोका ना खाया होता मैने. प्यार नही कर पाउन्गि तुम्हे, मजबूर हूँ अपने दिल के हातो. लेकिन तुम अगर मुझे सच में प्यार करते हो तो तुम्हे तुरंत ये खून ख़राबा बंद करना पड़ेगा."

मोहित ने गहरी साँस ली और बोला, "ठीक है पूजा, एनितिंग फॉर यू. लेकिन कम से कम इस विजय का खेल तो ख़तम करने दो. वही है वो साइको जिसने शहर में आतंक मचा रखा है."

"कौन विजय?"

"वही पोलीस वाला जो तुम्हे ज़बरदस्ती घर ले गया था. उसका नाम विजय है"

"अगर ऐसा भी है तो तुम क्यों क़ानून अपने हाथ में लेते हो. मेरे जीते जी तुम कुछ नही करोगे ऐसा समझ लो. मुझे मार दो फिर कर लेना जो करना है"

"अच्छा ठीक है बाबा. मैं ये बात इनस्पेक्टर रोहित को बता देता हूँ. देख लेंगे आगे वो खुद."

"थॅंक यू मोहित. बहुत शुकून मिला मेरे दिल को ये सुन कर. काश तुम मुझे पहले मिले होते." पूजा ने गहरी साँस ली.

"पूजा इंतेज़ार करूँगा तुम्हारा. मुझे यकीन है कि तुम मेरे प्यार से दूर नही रह पाओगि. मेरा प्यार सच्चा है तो तुम्हे भी प्यार हो ही जाएगा."

पूजा की आँखे भी भर आई और वो मुस्कुरा भी पड़ी मोहित की बात पर. एक साथ दो भावनाए जाग गयी थी पूजा के अंदर. "मैं चलती हूँ मोहित. दीदी मेरे लिए परेशान हो रही होगी."

"मिलती रहना मुझसे, एक आचे दोस्त तो हम रह ही सकते हैं."

"हां बिल्कुल" पूजा मोहित की आँखो में देख कर मुस्कुराइ और धीरे से दरवाजा खोल कर बाहर निकल गयी.

"कितना प्यार है तुम्हारी आँखो में मेरे लिए, पर तुम स्वीकार नही करना चाहती इस प्यार को. देखता हूँ मैं भी कब तक धोका दोगि खुद को." मोहित ने कहा.

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क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--67

gataank se aage.................

"bevkoof phone pe baat ki maine. Mujhe vijay par shak tha. Vo aksar duty se gaayab rahta hai. Maine chauhan se phone karke pucha ki kya vijay ke paas black scorpio hai, to uska jawaab haan tha. Najar rakho vijay par. Isiliye bulaaya tumhe yahan."

"main khud yahi soch raha tha madam."

"ab socho kam aur kaam jyada karo. Mujhe kuch natija chaahiye jaldi samjhe varna...."

"samajh gaya madam, izaazat dijiye mujhe."

"haan jaao aur vijay ke saath saath baaki tino par bhi nazar rakho. Psycho in chaaro mein se hi koyi hai."

"bilkul madam aisa hi karunga. Vaise vijay kal se gaayab hai phir se. Aaj bhi duty par nahi aaya vo." rohit ne kaha.

"tabhi to mujhe shak hai us par. Now dont waste your time."

"ji madam" rohit ne kaha aur uth kar baahar aa gaya.

"uff jaan nikaal deti hain madam." rohit ne baahar aa kar kaha.

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Shaam ke 6 baj rahe hain. Halka-halka andhera hone laga hai.

Sarita vijay ki patni, bajaar se kuch samaan le kar laut rahi hai. Ghar pahunch kar vo paati hai ki unke ghar ke baahar koyi khada hai bike le kar. Vo use pahchaan jaati hai. "ye to mohit hai."

mohit sarita ko dekhte hi bola, aapka hi intezaar kar raha tha main. Kaisi hain aap."

"main thik hun, ander aaiye."

sarita ne darvaaje ka taala khola aur mohit ko ander invite kiya.

"mere pati ghar par nahi hain. Aap ache vakt par aayein hain. Main bina kisi chinta ke apna karz utaar sakti hun."

"kaha hain aapke pati dev."

"delhi gaye hain kal se kisi kaam se. Ab kal hi lotenge"

"hmm..."

"vaise mujhe dar lag raha hai, par apna karz main chukaana chaahti hun. Aapke saamne hun aap jaisa chaahein kar sakte hain."

"aap har karz se azaad hain sarita ji. Mujhe aapse kuch nahi chaahiye. Main to vaise hi milne aaya tha. Bas ek baat bata dijiye agar ho sake to."

"ji puchiye." sarita ne kaha.

"aapke pati ke pet par nishaan kyon hai, bahut bada lamba sa."

"aap kyon jaan-na chaahte hain?"

"please ho sake to bata dijiye...mujhse kaaran mat puchiye."

"us raat aapke jaane ke baad mere pati ghar aaye the. Un par psycho ne hamla kiya tha. Unke pet par vaar kiya. Kisi tarah se bach gaye vo. Badi muskil se ghar pahunche the."

"hmm to aap kaun se hospital mein le gayi thi unhe."

"unhone mana kar diya hospital jaane se. kah rahe the ki sabko pata chalega to police ki badnaami hogi. Vaise main khud ek doctor hun. Maine ghar par hi jaise taise operate kiya. Thank god sab kuch thik raha."

"hmm....."

"aap ye sab kyon jaan-na chaahte the."

"koyi khaas baat nahi vaise hi. Ab main chalta hun. Take care."

sarita ko to kuch bhi samajh nahi aa raha tha

mohit aa gaya chupchaap baahar aur bike par baith kar ghar ki taraf chal diya.

Mohit ghar pahuncha to use apne ghar ke baahar puja khadi mili.

"tum yahan kya kar rahi ho puja. Log dekhenge to kya sochenge"

"kyon kar rahe ho ye sab. Kuch badal nahi jaayega khun kharaabe se."

"main kuch samjha nahi." mohit ne hairaani bhare shabdo mein kaha.

"maine abhi abhi dekha kal ka news paper. Vikky aur parvin ko kisi ne berahmi se maar diya."

"achchaa hua vo log isi laayak the. Par unhe kisi ne nahi balki psycho ne maara hai."

"meri aankho mein dekh kar bolo kyon kar rahe ho ye sab."

"ander chal kar baat karte hain, log dekh rahe hain." mohit ne kaha aur kamre ka taala khol diya. "aao baith kar araam se baatein karte hain."

"koyi baat nahi karungi jab tak ye sab band nahi karoge." puja ne kaha.

"tumhe kuch galat-fahmi ho gayi hai. Maine kuch nahi kiya aisa."

"matlab ki tum rukoge nahi, khun ki holi khelte rahoge. Meri chinta nahi tumhe bilkul bhi kya."

"kya matlab.... Aao aao ander aao ab kaam ki baat ki tumne. Pahli baar tumhaari aankho mein mere liye pyar dikhayi de raha hai."

"ye pyar nahi tumhaare liye chinta hai. Rok do ye sab varna tumse kabhi baat nahi karungi."

"2 log baaki hain abhi puja. Nyay pura karunga main adhura nahi."

"matlab tum nahi rukoge."

"nahi."

puja chal padi mud kar apne ghar ki taraf. Mohit ne use rokne ki koshis nahi ki.

"tum samajh nahi rahi ho puja. Agar ye log jinda rahe to pareshaan karte rahenge tumhe. Inka marna jaroori hai. Tabhi tum shaanti se ji paaogi.

puja chal to padi thi muh pher kar apne ghar ki aur par uske kadam aage hi nahi badh rahe the. Bahut dhire-dhire badh rahi thi vo aage. Vo kisi udhedbun mein thi. Achaanak vo ruk gayi aur apne kadam vaapis mohit ke ghar ki taraf mod diye. "main nahi karne dungi mohit ko ye sab, use meri baat maan-ni padegi." puja ne drid nischay se kaha aur tej kadmo se chal padi.

2 minute mein hi puja vaapis mohit ke ghar ke baahar thi. Mohit ne puja ke jaane ke baad darvaaja band kar liya tha. Vo nahaane ki taiyari kar raha tha. Saare kapde nikaal kar bas underwear mein tha. Kandhe par toliya taang rakha tha.darvaaja khadka to hadbada gaya vo. Furti se toliya lapet kar darvaaja khola usne.

"puja tum ruko...ruko main kapde pahan lun" mohit ne turant darvaaja band kar diya.

puja hans padi mohit ko aisi haalat mein dekh kar. Mohit ne turant kapde pahan kar darvaaja khola, "aao puja, mujhe laga tum chali gayi. Main nahaane ja raha tha. Sorry."

puja ander aa gayi aur boli, "meri khaatir ruk jaao mohit. Mujhe ye sab thik nahi lag raha. Tumhi bataao kya haansil hoga mujhe unke marne se. Kuch bhi to nahi. Mere saath jo hona tha ho hi chuka hai. Kuch bhi to badal nahi jaayega. Tum bekaar mein unke gande khun se apne haath rang rahe ho."

"kya tumhe nahi lagta ki unhe unke kiye ki saja milni chaahiye." mohit ne kaha.

"saja to mujhe bhi milni chaahiye us hisaab se. Meri khud ki kam galtiyan nahi hain. Aankh mich kar apna sab kuch sonp diya tha maine vikky ko. Kya maine galat nahi kiya. Chauhan aur parvin ko maine bhi thoda hi sahi sahyog to diya. Kya main paapi nahi hun. Mujhe maaro sabse pahle. Tum mere liye kar rahe ho na ye sab. Pyar karte ho mujhse tum. Lekin mohit jise tum pyar karte ho uske daaman par daag hai. main tumhaare pyar ke laayak nahi hun. Mujhe bhi to maaro. Main bhi utni hi paapi hun jitne ki ye log jinhe tum maarne par utaaru ho." puja ne bhaavuk shabdo mein kaha.

"puja mujhe pata hai kiski kitni galti hai. Tumhaare saath pyar ka naatak hua, tumhaari video banaayi gayi. Tumhe blackmail kiya gaya. Chauhan ne tumhaari majboori ka faayda uthaaya aur apne kukarm mein parvin ko bhi saamil kiya. Maanta hun main ki thoda sahyog diya hoga tumne unhe. Par shaayad vo sahyog tumhaari majboori thi. Tumhaari kahaani sun kar to yahi laga tha mujhe. Tum paapi ho hi nahi sakti. Paapi vo log hain jinhone tumhaare maasum charitra ki dhajjiyan udaayi. Nahi chodunga main baaki ke 2 logo ko bhi."

"nahi mohit please. Kahne ko Pyar karte ho mujhse aur meri ek baat bhi maan-ne ko taiyar nahi. Kya yahi pyar hai tumhaara. Tum ye bhi nahi soch rahe ho ki agar tumhe hi psycho samajh liya gaya to phir kya hoga."

"kya tum pyar karne lagi ho mujhse puja jo ki itni chinta kar rahi ho meri."

"pyar mere liye ek confusion ban gaya hai. pyar nahi kar paaungi jindagi mein dubaara. Insaaniyat ke naate tumhaari chinta hai mujhe."

"tumne baahar kaha tha ki kya meri chinta nahi tumhe, kyon kaha tha aisa tumne"

"tum agar mere liye khun kharaba karoge to kya khusi milegi mujhe. Pareshaan hi to rahungi. Jab pyar karte ho mujhse to kya mujhe pareshaani mein daaloge. Tum aisa karoge to kya main chinta nahi karungi tumhaari. Khatarnaak khel khel rahe ho tum jisme tumhaari jaan bhi ja sakti hai."

"wow...tumhe meri fikar ho rahi hai. Yahi to pyar hai. Dekha pata hi liya maine tumhe." mohit ne hanste hue kaha.

"dubaara pyar mere liye asambhav hai. Pyar nahi hai ye. Tumhaari chinta hai mujhe aur kuch nahi...mohit. Kar baithti pyar tumse is dewane pan ke liye agar pyar mein dhoka na khaya hota maine. Pyar nahi kat paaungi tumhe, majboor hun apne dil ke haato. Lekin tum agar mujhe sach mein pyar karte ho to tumhe turant ye khun kharaba band karna padega."

mohit ne gahri saans li aur bola, "thik hai puja, anything for you. Lekin kam se kam is vijay ka khel to khatam karne do. Vahi hai vo psycho jisne shahar mein aatank machchaa rakha hai."

"kaun vijay?"

"vahi police wala jo tumhe jabardasti ghar le gaya tha. Uska naam vijay hai"

"agar aisa bhi hai to tum kyon kaanun apne haath mein lete ho. Mere jite ji tum kuch nahi karoge aisa samajh lo. Mujhe maar do phir kar lena jo karna hai"

"achchaa thik hai baba. Main ye baat inspector rohit ko bata deta hun. Dekh lenge aage vo khud."

"thank you mohit. Bahut shukun mila mere dil ko ye sun kar. Kaash tum mujhe pahle mile hote." puja ne gahri saans li.

"puja intezaar karunga tumhara. Mujhe yakin hai ki tum mere pyar se dur nahi rah paaogi. Mera pyar sachchaa hai to tumhe bhi pyar ho hi jaayega."

puja ki aankhe bhi bhar aayi aur vo muskura bhi padi mohit ki baat par. Ek saath do bhaavnaye jaag gayi thi puja ke ander. "main chalti hun mohit. Didi mere liye pareshaan ho rahi hogi."

"milti rahna mujhse, ek ache dost to hum rah hi sakte hain."

"haan bilkul" puja mohit ki aankho mein dekh kar muskurayi aur dhire se darvaaja khol kar baahar nikal gayi.

"kitna pyar hai tumhaari aankho mein mere liye, par tum swikaar nahi karna chaahti is pyar ko. Dekhta hun main bhi kab tak dhoka dogi khud ko." mohit ne kaha.

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Kramashah..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:29

बात एक रात की--68

गतान्क से आगे.................

रोहित ने भोलू को बुलाया और कहा, "सब-इनस्पेक्टर विजय की फोटो चाहिए मुझे."

"उनकी फोटो का क्या करेंगे सर."

"है कुछ काम, तुम फोटो लाओ."

"जी सर."

रोहित ने भोलू के जाने के बाद राज शर्मा को फोन मिलाया, "हेलो राज शर्मा, एक बात बताओ क्या पद्‍मिनी ने सब-इनस्पेक्टर विजय को देखा है क्या"

"नही सिर विजय उसके सामने नही आया कभी." राज शर्मा ने जवाब दिया.

"ह्म्म कल सुबह मैं विजय की फोटो लेकर आउन्गा पद्‍मिनी को दिखाने के लिए. मुझे लग रहा है कि विजय ही साइको है."

रोहित ने अचानक फोन काट दिया. उसके दरवाजे पर विजय खड़ा था.

"गुड ईव्निंग सर कैसे हैं आप." विजय ने कहा.

"विजय तुम आओ...आओ." रोहित ने कहा.

"अभी अभी देल्ही से आया हूँ सर. जल्द मिलूँगा आपसे." विजय कह कर चला गया वहाँ से.

"वेरी स्ट्रेंज. मैं उसका सीनियर हूँ, अंदर बुला रहा हूँ और वो टाल कर चला गया. शायद उसने फोन पर मेरी बाते सुन ली." रोहित सोच में पड़ गया.

तभी रोहित का फोन बाज उठा. फोन उसकी छोटी बहन पिंकी का था.

"भैया मेरे बर्तडे पर तो वक्त से आ जाओ. मम्मी, पापा भी नही हैं आज यहाँ. ऐसा बर्तडे कभी नही मना मेरा कभी ." पिंकी ने कहा.

"आ रहा हूँ बस थोड़ी देर में. बता क्या गिफ्ट लाउ तेरे लिए."

"मुझे कॅश दे देना मैं खुद खरीद लूँगी. तुम्हारा लाया गिफ्ट कभी अच्छा नही लगता ."

"जैसी तेरी मर्ज़ी.... आ रहा हूँ थोड़ी देर में."

कुछ देर रोहित यू ही बैठा रहा और विजय के बारे में सोचता रहा. "इसे रंगे हाथ पकड़ना होगा तभी बात बनेगी....फिलहाल घर चलता हूँ वरना पिंकी जान ले लेगी."

रोहित चल दिया अपनी जीप में घर की तरफ. रास्ते से उसने एक शोरुम से जीन्स खरीद ली पिंकी के लिए. घर पहुँच कर रोहित ने चुपचाप दरवाजा खोला. "ये अंधेरा क्यों कर रखा है पिंकी ने." रोहित ने तुरंत लाइट जलाई.

मगर लाइट जला कर जैसे ही वो मुड़ा उसके पाँव के नीचे से ज़मीन निकल गयी. ड्रॉयिंग रूम के बीचो बीच एक कुर्सी पर पिंकी बैठी थी बिना कपड़ो के. उसके हाथ बँधे हुए थे. उसके बिल्कुल पीछे एक नकाब पोश खड़ा था जिसने की पिंकी के सर पर बंदूक तान रखी थी.

"मैने सोचा बर्तडे पर मैं भी शामिल हो जाउ...हहहे. अपनी पिस्टल मुझे दे दो और हाथ उपर करके खड़े हो जाओ." नकाब पोश ने कहा.

"विजय यू बस्टर्ड...तुम्हारी इतनी हिम्मत"

"मेरे पीछे पड़े हो हा. आज पता चलेगा तुम्हे...हाहाहा. जल्दी से अपनी पिस्टल मुझे दो वरना तुम्हारी बहन का भेजा उड़ा दूँगा."

रोहित के पास कोई चारा नही था. उसने बंदूक निकाल कर ज़मीन पर रख दी और पाँव से ठोकर मार कर नकाब पोश की तरफ धकैल दी.

"गुड.... अब अपने हाथ उपर करो. कोई भी हरकत की तो अंजाम बहुत बुरा होगा सर हाहाहा."

“मिस्टर रोहित पांडे सामने सोफे पर देखो एक इंजेक्षन पड़ा है. वो लगा लो अपने हाथ में. और कोई भी होशियारी की तो भेजा उड़ा दूँगा तुम्हारी बहन का.”

“तुम चाहते क्या हो?”

“चुपचाप वो इंजेक्षन लगाओ…वरना देर नही करूँगा इसका भेजा उड़ाने में.”

रोहित ने इंजेक्षन उठाया और बोला, “मुझे ये इंजेक्षन लगाना नही आता. मैं कोई डॉक्टर नही हूँ जो इंजेक्षन ठोक लूँ अपने हाथ में.”

“ज़्यादा बकवास मत करो…कुछ ज़्यादा नही करना तुम्हे…बस इंजेक्षन घुसा लो कही भी हहहे.”

“तुम पागल हो.”

“हाहाहा…जल्दी करो वरना…”

रोहित सोच में पड़ गया. “

“क्या सोच रहे हो जल्दी करो….वरना.”

“तुम ये सब क्यों कर रहे हो.”

“ज़्यादा बाते मत करो जो कहा है वो करो…वरना” नकाब पोश ने पिंकी के मूह पर चाँटा मारा. उसका मूह पहले से सूजा हुआ था. वो रोने लगी चाँटा पड़ते ही.

“चुप कर साली, अपने भैया को बोल जो कहा है वो करे वरना तेरा वो हाल करूँगा कि तेरी रूह काँप उठेगी.

“कामीने दूर रह मेरी बहन से वरना जिंदा नही छोड़ूँगा तुझे.” रोहित चिल्लाया.

“अच्छा ये ले एक और मारा साली को.”

“भैया……मुझे बचा लो….”

“तुम चाहते क्या हो सॉफ-सॉफ बोलो. ये इंजेक्षन मैं क्यों लगाउ.”

“क्योंकि मैं कह रहा हूँ इसलिए. अब मैं दुबारा नही कहूँगा. ज़रा भी देर की तो इसका भेजा उड़ा दूँगा.”

रोहित असमंजस में पड़ गया की क्या करे क्या ना करे. “देखो एक बात ध्यान से सुनो. तुम मुझे गोली मार दो बेसक पर मेरी बहन को कुछ मत करो. उसे इस सब से दूर रखो. वो ये सब नही सह सकती. प्लीज़.”

“आया तो मैं तुम्हे मारने ही था. ये मिल गयी तो मज़ा और भी ज़्यादा आएगा. बर्तडे के लिए घर सज़ा रखा है पर किसी को बुलाया ही नही. ऐसा क्यों. अच्छा किया जो मैं आ गया. हहहे.”

“तुम आख़िर चाहते क्या हो.”

“मैं चाहता हूँ कि तुम्हारी बहन मेरा लंड चूसे और तुम चुपचाप बैठ कर देखो. बोलो करोगे ऐसा.”

“विजय तुम्हे शरम आनी चाहिए…ये सब बोलते हुए. क्या तुम्हारी कोई बहन नही.”

“अब तुम पहचान ही गये हो मुझे तो ये नकाब उतार देता हूँ हहहे.” विजय ने नकाब उतार दिया.

“विजय मार दो मुझे अभी…क्योंकि अगर मैं बच गया तो बहुत बुरी मौत दूँगा तुम्हे.”

“हाहाहा, अगर तुम मेरे पीछे ना पड़ते तो ये नौबत नही आती. रहीं बात तुम्हारे मरने की तो वो तो तुम्हे मारना ही है. तुम्हारे साथ तुम्हारी बहन भी मरेगी हाहाहा.”

“तो फिर मारो गोली ये इंजेक्षन का नाटक किसलिए कर रहे हो. चलाओ गोली किस बात का इंतेज़ार कर रहे हो.” रोहित चिल्लाया.

“तुम्हारी बहन बहुत सेक्सी है सिर, सोच रहा था कि आप बेहोश हो जाते तो कुछ मौज मस्ती कर लेता और फिर तुम दोनो का काम ख़तम कर देता. पर नही मुझे लगता है तुम अपनी बहन को चुद-ते हुए देखना चाहते हो.”

रोहित सुन नही पाया ये सब और उसने इंजेक्षन फेंक कर मारा विजय की तरफ. विजय ने फाइयर किया रोहित की तरफ मगर निशाना चूक गया. तब तक रोहित ने आगे बढ़ कर विजय को दबोच लिया. दोनो ज़मीन पर गिर गये. विजय के हाथ में इंजेक्षन आ गया और उसने वो रोहित के गले में गाढ दिया. रोहित के हाथ गन तो आ गयी थी मगर वो चला नही पाया. बेहोश हो कर वो वही गिर गया.

“अब तुम्हारा बर्तडे अच्छे से मनाएँगे हम हाहहाहा.”

“प्लीज़….क्यों कर रहे हो तुम ऐसा.”

“चुप कर साली. मुझे तेरे जैसी कॉलेज गर्ल्स बहुत पसंद है. अभी कुछ दिन पहले एक कॉलेज गर्ल की अच्छे से ली थी. वाह क्या मज़ा दिया था उसने. तू भी मज़े कर आज अपने जनमदिन पर. मरने से पहले थोड़ा मज़ा कर लेगी तो तेरी आत्मा को शांति मिलेगी हाहाहा.”

विजय ने रोहित को एक कुर्सी ले कर उस पर रस्सी से बाँध दिया काश कर और उसके गले पर एक इंजेक्षन लगा दिया. “जल्दी ही होश आ जाएगा इसे और ये खुद तुझे चुद-ते हुए देखेगा. एक बार बहुत डांटा था इसने मुझे एक बात पर पिछले साल. वो भी दो लोगो के सामने. आज तक मैं चुपचाप रहा. पर ये तो मेरे पीछे ही पड़ गया. आज मेरा बदला पूरा होगा.हाहाहा”

“प्लीज़ ऐसा अनर्थ मत करो.” पिंकी सुबक्ते हुए बोली.

“कुछ भी बोलो, मैं तुम्हारी ले कर रहूँगा वो भी तेरे इस भाई के सामने हहहे.”

“तुम सच में साइको हो.”

“हाहहाहा…बहुत खूब….देख देख तेरे भाई को होश आ गया. वेलकम बॅक सर. कैसे हैं आप.”

“विजय तुम्हे तुम्हारे गुनाहो की सज़ा ज़रूर मिलेगी. मैं नही दे पाया तो कोई और देगा मगर तू मरेगा ज़रूर. मैं तो हैरान हू कि तुम्ही हो वो साइको जिसने शहर में आतंक मचा रखा था.”

“ज़्यादा बकवास मत करो और देखो तुम्हारी बहन कैसे मज़े देती है मुझे.”

विजय ने अपनी ज़िप खोल कर अपने लिंग को बाहर निकाल लिया और उसे पिंकी के मूह के आगे झुलाने लगा, “ले अपने बर्तडे के दिन ब्लो जॉब का मज़ा ले हाहाहा.”

“कमिने दूर हटो उस से वरना खून पी जाउन्गा तुम्हारा मैं.”

विजय ने अपनी बंदूक एक तरफ रख दी और पिंकी के उभारो को पकड़ लिया दोनो हाथो से.

कमरे में चींख गूँज उठी पिंकी की. बहुत दर्दनाक चींख. बहुत ज़ोर से दबाया था विजय ने उसके उभारो को.

“कमिने हट जा वरना तेरा वो हाल करूँगा की तेरी रूह काँप उठेगी.”

“अगर तुमने अपना मूह खोल कर ये लंड चूसना शुरू नही किया तो मैं ये बूब्स और ज़ोर से दबाउन्गा.”

पिंकी ने मूह खोलने की बजाए मूह और कस कर बंद कर लिया और अपनी आँखे बंद कर ली.

“अच्छा ये बात है. मैं भी देखता हूँ कि तुम मूह कैसे नही खोलती.” विजय ने अपनी बंदूक उठा ली और रोहित की तरफ तान दी.

“अगर तुरंत मूह खोल कर ये लंड तुमने मूह में नही लिया तो मैं तेरे भाई का भेजा उड़ा दूँगा.”

“पिंकी…कुछ मत करना ऐसा. मर जाने दो मुझे बेसक. मगर इसकी कोई बात मत मान-ना.” रोहित ने भावुक हो कर कहा.

“वाह भाई वाह…क्या बात है. देखता हूँ मैं भी कि ये किसकी बात मानती है. मेरी या तुम्हारी.”

विजय ने अपने लिंग को पिंकी के बंद मूह पर रगड़ना शुरू कर दिया, “जल्दी खोल ये मूह वरना तेरा भाई मारा जाएगा. बिल्कुल चिंता नही है क्या तुझे अपने भाई की. अपने भाई के लिए इतना भी नही कर सकती . कैसी बहन है तू. ठीक है फिर देख अपने भाई को मरते हुए.”

“नही रूको…”

“नही पिंकी…नही…ओह नो…” रोहित ने आँखे बंद कर ली.

पिंकी ने मूह खोल दिया था और विजय ने झट से अपने लिंग को उसके मूह में डाल दिया था. पिंकी की आँखो से आँसुओ की बरसात होने लगी. रोहित छटपटा रहा था कुर्सी पर. आँख खोल कर नही देख पाया कि उसकी छोटी बहन के साथ क्या हो रहा है. आँखे भर आई उसकी ऐसी हालत में. खुद को बहुत ही असहाय महसूस कर रहा था वो. बहुत कोशिस की उसने रस्सी से आज़ाद होने की मगर विजय ने उसे बहुत मजबूती से बाँध रखा था.

विजय ने पिंकी के बॉल खींचे ज़ोर से और बोला, “अच्छे से चूस साली ये क्या मज़ाक लगा रखा है. बिल्कुल मज़ा नही आ रहा.”

इतनी ज़ोर से बॉल खींचे थे विजय ने कि पिंकी ज़ोर से कराह उठी थी. विजय ने उसके मूह से लिंग निकाल लिया और बोला, “कोई फ़ायडा नही तेरे मूह में लंड रखने का. तेरी चूत में डालता हूँ.”

विजय ने बहुत ज़ोर से दबाया फिर से पिंकी के उभारो को. इस बार वो और भी ज़्यादा ज़ोर से चीखी. विजय ने पिंकी के हाथ पाँव खोल दिए कुर्सी से और उसे फर्श पर पटक दिया. कराह उठी पिंकी.

“विजय!” रोहित बहुत ज़ोर से चिल्लाया.

“क्या बात है सर, खोल ही ली आपने आँखे. अब देखिए मैं कैसे लेता हूँ आपकी बहन की हहहे.”

तभी अचानक धदाम की आवाज़ हुई.

“ये कैसी आवाज़ थी.” विजय ने हैरानी में कहा.

रोहित समझ गया कि आवाज़ घर के पीछे से आई है. मगर वो कुछ नही बोला.

“क्या कोई और भी है तुम दोनो के अलावा घर में.” विजय ने पिंकी के बॉल खींचते हुए कहा

“कोई और नही है, बस हम दोनो ही हैं. साथ वाले घर में बच्चे धूम मचाते रहते हैं. वही से आवाज़े आती रहती हैं ऐसी.”

“ह्म्म ठीक है सर, अब आप अपनी बहन को चुद-ते हुए देखिए. आपके घर में भी खूब आवाज़े होंगी अब.”

विजय बंदूक एक तरफ रख कर पिंकी के उपर चढ़ गया. पिंकी ने अपनी आँखे बंद कर ली. “क्या बात है, सो क्यूट. मज़ा आएगा तेरी लेने में.”

“विजय!” रोहित चिल्लाया और बहुत छटपटाया कुर्सी पर.

“हां सर बोलिए क्या बात है…आप बता दीजिए कि कौन सी पोज़िशन में लूँ मैं आपकी बहना की. ये ठीक रहेगी या दोगि स्टाइल लगा लूँ. हाहाहा.”

“कमिने तुझे भगवान कभी माफ़ नही करेंगे” रोहित चिल्लाया.

“हाहहाहा….क्या बात है सर….बस आप माफ़ कर देना, भगवान को मैं संभाल लूँगा.”

पिंकी बहुत छटपटा रही थी विजय के नीचे मगर विजय ने उसे पूरी तरह काबू में कर रखा था. “एक बार घुस्वा लो मेरी जान क्यों छटपटा रही हो. मरने से पहले एक चुदाई तुम्हे अच्छी लगेगी..सच कह रहा हूँ हहहे….क…क…कौन है.” विजय हंसते हंसते अचानक हैरानी में बोला.

“तेरा बाप हूँ बेटा.” मोहित ने विजय को पिंकी के उपर से खींच लिया और उसे ज़ोर से ज़मीन पर पटक दिया और टूट पड़ा उस पर.

विजय जल्दी ही संभाल गया और दोनो के बीच जबरदस्त हाथापाई शुरू हो गयी. कभी मोहित हावी होता था तो कभी विजय.

मोहित के हाथ बंदूक आ गयी किसी तरह. और उसने रख दी विजय के सर पर, “बस खेल ख़तम होता है तुम्हारा. किसी को वादा किया है खून ना बहाने का वरना अभी उड़ा देता भेजा तुम्हारा.”

मगर अचानक विजय ने मोहित की गर्दन पर इंजेक्षन गाढ दिया. मोहित दर्द से कराह उठा. उसकी आँखो के आगे अंधेरा छाने लगा और वो गिर गया विजय के उपर बेहोश हो कर. मगर इस दौरान पिंकी ने एक अच्छा काम किया. उसने रोहित के हाथ, पाँव खोल दिए. “पिंकी तुम अपने कमरे में जाओ…और कुण्डी लगा लो.”

पिंकी तुरंत भाग गयी वहाँ से और अपने कमरे में आ गयी.

विजय ने मोहित को एक तरफ धकेला और उसके हाथ से बंदूक ले कर रोहित की तरफ तान दी. मगर रोहित आगे ही बढ़ता गया रुका नही.

क्रमशः........................

......

BAAT EK RAAT KI--68

gataank se aage.................

Rohit ne bholu ko bulaaya aur kaha, "sub-inspector vijay ki photo chaahiye mujhe."

"unki photo ka kya karenge sir."

"hai kuch kaam, tum photo laao."

"ji sir."

rohit ne bholu ke jaane ke baad Raj sharma ko phone milaya, "hello Raj sharma, ek baat bataao kya padmini ne sub-inspector vijay ko dekha hai kya"

"nahi sir vijay uske saamne nahi aaya kabhi." Raj sharma ne jawaab diya.

"hmm kal subah main vijay ki photo lekar aaunga padmini ko dikhane ke liye. Mujhe lag raha hai ki vijay hi psycho hai."

rohit ne achaanak phone kaat diya. Uske darvaaje par vijay khada tha.

"good evening sir kaise hain aap." vijay ne kaha.

"vijay tum aao...aao." rohit ne kaha.

"abhi abhi delhi se aaya hun sir. Jald milunga aapse." vijay kah kar chala gaya vahan se.

"very strange. Main uska senior hun, ander bula raha hun aur vo taal kar chala gaya. Shaayad usne phone par meri baate sun li." rohit soch mein pad gaya.

Tabhi rohit ka phone baj utha. Phone uski choti bahan pinki ka tha.

"bhaiya mere birthday par to vakt se aa jaao. Mammi, papa bhi nahi hain aaj yahan. Aisa birthday kabhi nahi mana mere kabhi ." pinki ne kaha.

"aa raha hun bas thodi der mein. Bata kya gift laaun tere liye."

"mujhe cash de dena main khud kharid lungi. Tumhaara laaya gift kabhi achchaa nahi lagta ."

"jaisi teri marji.... aa raha hun thodi der mein."

kuch der rohit yu hi baitha raha aur vijay ke baare mein sochta raha. "ise range haath pakadna hoga tabhi baat banegi....philhaal ghar chalta hun varna pinki jaan le legi."

rohit chal diya apni jip mein ghar ki taraf. Raaste se usnne ek showroom se jeans kharid li pinki ke liye. Ghar pahunch kar rohit ne chupchaap darvaaja khola. "ye andhera kyon kar rakha hai pinki ne." rohit ne turant light jalaayi.

Magar light jala kar jaise hi vo muda uske paanv ke niche se jamin nikal gayi. Drawing room ke bicho bich ek kursi par pinki baithi thi bina kapdo ke. Uske haath bandhe hue the. Uske bilkul piche ek nakaab posh khada tha jisne ki pinki ke sar par bandook taan rakhi thi.

"maine socha birthday par main bhi shamil ho jaaun...hehehe. Apni pistol mujhe de do aur haath upar karke khade ho jaao." nakaab posh ne kaha.

"vijay you bastard...tumhaari itni himmat"

"mere piche pade ho huh. Aaj pata chalega tumhe...hahaha. Jaldi se apni pistol mujhe do varna tumhaari bahan ka bheja uda dunga."

rohit ke paas koyi chaara nahi tha. Usne bandook nikal kar jamin par rakh di aur paanv se thokar maar kar nakaab posh ki taraf dhakail di.

"good.... ab apne haath upar karo. Koyi bhi harkat ki to anjaam bahut bura hoga sir hahaha."

“mr rohit panday saamne sofe par dekho ek injection pada hai. vo laga lo apne haath mein. Aur koyi bhi hoshiyari ki to bheja uda dunga tumhari bahan ka.”

“tum chaahte kya ho?”

“chupchaap vo injection lagaao…varna der nahi karunga iska bheja udaane mein.”

Rohit ne injection uthaaya aur bola, “mujhe ye injection lagaana nahi aata. Main koyi doctor nahi hun jo injection thok lun apne haath mein.”

“jyada bakwaas mat karo…kuch jyada nahi karna tumhe…bas injection ghusa lo kahi bhi hehehe.”

“tum paagal ho.”

“hahaha…jaldi karo varna…”

Rohit soch mein pad gaya. “

“kya soch rahe ho jaldi karo….varna.”

“tum ye sab kyon kar rahe ho.”

“jyada baate mat karo jo kaha hai vo karo…varna” nakaab posh ne pinki ke muh par chaanta maara. Uska muh pahle se sujha hua tha. vo rone lagi chaanta padte hi.

“chup kar saali, apne bhaiya ko bol jo kaha hai vo kare varna tera vo haal karunga ki teri rooh kaanp uthegi.

“kamine dur rah meri bahan se varna jinda nahi chodunga tujhe.” Rohit chillaya.

“achchaa ye le ek aur maara saali ko.”

“bhaiya……mujhe bachchaa lo….”

“tum chaahte kya ho saaf-saaf bolo. Ye injection main kyon lagaaun.”

“kyonki main kah raha hun isliye. Ab main dubara nahi kahunga. Jara bhi der ki to iska bheja uda dunga.”

Rohit asmanjas mein pad gaya ki kya kare kya na kare. “dekho ek baat dhyaan se suno. Tum mujhe goli maar do besak par meri bahan ko kuch mat karo. Use is sab se dur rakho. Vo ye sab nahi sah sakti. Please.”

“aaya to main tumhe maarne hi tha. ye mil gayi to maja aur bhi jyada aayega. Birthday ke liye ghar saja rakha hai par kisi ko bulaya hi nahi. aisa kyon. Achchaa kiya jo main aa gaya. hehehe.”

“tum aakhir chaahte kya ho.”

“main chaahta hun ki tumhaari bahan mera lund choose aur tum chupchap baith kar dekho. Bolo karoge aisa.”

“vijay tumhe sharam aani chaahiye…ye sab bolte hue. Kya tumhari koyi bahan nahi.”

“ab tum pahchaan hi gaye ho mujhe to ye nakaab utaar deta hun hehehe.” Vijay ne nakaab utaar diya.

“vijay maar do mujhe abhi…kyonki agar main bach gaya to bahut buri maut dunga tumhe.”

“hahaha, agar tum mere piche na padte to ye naubat nahi aati. Rahin baat tumhaare marne ki to vo to tumhe marna hi hai. tumhaare saath tumhari bahan bhi maregi hahaha.”

“to phir maaro goli ye injection ka naatak kisliye kar rahe ho. Chalaao goli kis baat ka intezaar kar rahe ho.” Rohit chillaya.

“tumhari bahan bahut sexy hai sir, soch raha tha ki aap behosh ho jaate to kuch mauj masti kar leta aur phir tum dono ka kaam khatam kar deta. Par nahi mujhe lagta hai tum apni bahan ko chud-te hue dekhna chaahte ho.”

Rohit sun nahi paaya ye sab aur usne injection fenk kar maara vijay ki taraf. Vijay ne fire kiya rohit ki taraf magar nisana chuk gaya. tab tak rohit ne aage badh kar vijay ko daboch liya. Dono jamin par gir gaye. Vijay ke haath mein injection aa gaya aur usne vo rohit ke gale mein gaad diya. Rohit ke haath gun to aa gayi thi magar vo chala nahi paaya. behosh ho kar vo vahi gir gaya.

“ab tumhaara birthday ache se manaayenge hum hahahaha.”

“please….kyon kar rahe ho tum aisa.”

“chup kar saali. Mujhe tere jaisi college girls bahut pasand hai. abhi kuch din pahle ek college girl ki ache se li thi. waah kya maja diya tha usne. Tu bhi maje kar aaj apne janamdin par. Marne se pahle thoda maja kar legi to teri aatma ko shaanti milegi hahaha.”

Vijay ne rohit ko ek kursi le kar us par rassi se baandh diya kash kar aur uske gale par ek injection laga diya. “jaldi hi hosh aa jaayega ise aur ye khud tujhe chud-te hue dekhega. Ek baar bahut daanta tha isne mujhe ek baat par pichle saal. Vo bhi do logo ke saamne. Aaj tak main chupchaap raha. Par ye to mere piche hi pad gaya. aaj mera badla pura hoga.hahaha”

“please aisa anarth mat karo.” Pinki subakte hue boli.

“kuch bhi bolo, main tumhari le kar rahunga vo bhi tere is bhai ke saamne hehehe.”

“tum sach mein psycho ho.”

“hahahaha…bahut khub….dekh dekh tere bhai ko hosh aa gaya. welcome back sir. Kaise hain aap.”

“vijay tumhe tumhare gunaho ki saja jaroor milegi. Main nahi de paaya to koyi aur dega magar tu marega jaroor. Main to hairaan hu ki tumhi ho vo psycho jisne shahar mein aatank machchaa rakha tha.”

“jyada bakwaas mat karo aur dekho tumhari bahan kaise maje deti hai mujhe.”

Vijay ne apni zip khol kar apne ling ko baahar nikaal liya aur use pinki ke muh ke aage jhulane laga, “le apne birthday ke din blow job ka maja le hahaha.”

“kamine dur hato us se varna khun pi jaaunga tumhaara main.”

Vijay ne apni bandook ek taraf rakh di aur pinki ke ubharo ko pakad liya dono haatho se.

Kamre mein chinkh gunj uthi pinki ki. Bahut dardnaak chinkh. Bahut jor se dabaaya tha vijay ne uske ubhaaro ko.

“kamine hat ja varna tera vo haal karunga ki teri rooh kaanp uthegi.”

“agar tumne apna muh khol kar ye lund choosna shuru nahi kiya to main ye boobs aur jor se dabaaunga.”

Pinki ne muh kholne ki bajaaye muh aur kash kar band kar liya aur apni aankhe band kar li.

“atcha ye baat hai. main bhi dekhta hun ki tum muh kaise nahi kholti.” Vijay ne apni bandook utha li aur rohit ki taraf taan di.

“agar turant muh khol kar ye lund tumne muh mein nahi liya to main tere bhai ka bheja uda dunga.”

“pinki…kuch mat karna aisa. Mar jaane do mujhe besak. Magar iski koyi baat mat maan-na.” rohit ne bhaavuk ho kar kaha.

“waah bhai waah…kya baat hai. dekhta hun main bhi ki ye kiski baat maanti hai. meri ya tumhaari.”

Vijay ne apne ling ko pinki ke band muh par ragadna shuru kar diya, “jaldi khol ye muh varna tera bhai maara jaayega. Bilkul chinta nahi hai kya tujhe apne bhai ki. Apne bhai ke liye itna bhi nahi kar sakti . kaisi bahan hai tu. Thik hai phir dekh apne bhai ko marte hue.”

“nahi ruko…”

“nahi pinki…nahi…oh no…” rohit ne aankhe band kar li.

Pinki ne muh khol diya tha aur vijay ne jhat se apne ling ko uske muh mein daal diya tha. pinki ki aankho se aansuvo ki barsaat hone lagi. Rohit chatpata raha tha kursi par. Aankh khol kar nahi dekh paaya ki uski choti bahan ke saath kya ho raha hai. aankhe bhar aayi uski aisi haalat mein. Khud ko bahut hi ashaay mahsus kar raha tha vo. Bahut koshis ki usne rassi se azaad hone ki magar vijay ne use bahut majbuti se baandh rakha tha.

Vijay ne pinki ke baal khinche jor se aur bola, “ache se choos saali ye kya majaak laga rakha hai. bilkul maja nahi aa raha.”

Itni jor se baal khinche the vijay ne ki pinki jor se karaah uthi thi. vijay ne uske muh se ling nikaal liya aur bola, “koyi faayda nahi tere muh mein lund rakhne ka. Teri chut mein daalta hun.”

Vijay ne bahut jor se dabaaya phir se pinki ke ubhaaro ko. Is baar vo aur bhi jyada jor se chinkhi. Vijay ne pinki ke haath paanv khol diye kursi se aur use fars par patak diya. Karaah uthi pinki.

“vijay!” rohit bahut jor se chillaya.

“kya baat hai sir, khol hi li aapne aankhe. Ab dekhiye main kaise leta hun aapki bahan ki hehehe.”

Tabhi achaanak dhadaam ki awaaj huyi.

“ye kaisi awaaj thi.” vijay ne hairaani mein kaha.

Rohit samajh gaya ki awaaj ghar ke piche se aayi hai. magar vo kuch nahi bola.

“kya koyi aur bhi hai tum dono ke alaawa ghar mein.” Vijay ne pinki ke baal khinchte hue kaha

“koyi aur nahi hai, bas hum dono hi hain. Saath wale ghar mein bachche dhum machchaaate rahte hain. Vahi se awaaje aati rahti hain aisi.”

“hmm thik hai sir, ab aap apni bahan ko chud-te hue dekhiye. Aapke ghar mein bhi khub awaaje hongi ab.”

Vijay bandook ek taraf rakh kar pinki ke upar chadh gaya. pinki ne apni aankhe band kar li. “kya baat hai, so cute. Maja aayega teri lene mein.”

“vijay!” rohit chillaya aur bahut chatpataya kursi par.

“haan sir boliye kya baat hai…aap bata dijiye ki kaun si position mein lun main aapki bahna ki. Ye thik rahegi ya doggy style laga lun. Hahaha.”

“kamine tujhe bhagvaan kabhi maaf nahi karenge” rohit chillaya.

“hahahaha….kya baat hai sir….bas aap maaf kar dena, bhagvaan ko main sambhaal lunga.”

pinki bahut chatpata rahi thi vijay ke niche magar vijay ne use puri tarah kaabu mein kar rakha tha. “ek baar ghusva lo meri jaan kyon chatpata rahi ho. Marne se pahle ek chudaayi tumhe achi lagegi..sach kah raha hun hehehe….k…k…kaun hai.” vijay hanste hanste achaanak hairaani mein bola.

“tera baap hun beta.” Mohit ne vijay ko pinki ke upar se khinch liya aur use jor se jamin par patak diya aur tut pada us par.

Vijay jaldi hi sambhal gaya aur dono ke bich jabardast haathapayi shuru ho gayi. Kabhi mohit haavi hota tha to kabhi vijay.

Mohit ke haath bandook aa gayi kisi tarah. Aur usne rakh di vijay ke sar par, “bas khel khatam hota hai tumhaara. Kisi ko vaada kiya hai khun na bahaane ka varna abhi uda deta bheja tumhaara.”

Magar achaanak vijay ne mohit ki gardan par injection gaad diya. Mohit dard se karaah utha. Uski aankho ke aage andhera chaane laga aur vo gir gaya vijay ke upar behosh ho kar. Magar is dauraan pinki ne ek achchaa kaam kiya. Usne rohit ke haath, paanv khol diye. “pinki tum apne kamre mein jaao…aur kundi laga lo.”

pinki turant bhaag gayi vahan se aur apne kamre mein aa gayi.

Vijay ne mohit ko ek taraf dhakela aur uske haath se bandook le kar rohit ki taraf taan di. magar rohit aage hi badhta gaya ruka nahi.

Kramashah..............................

rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:30

बात एक रात की--69

गतान्क से आगे.................

“क्या हुआ चलाओ गोली…रुक क्यों गये.”

“गोली तो तुम्हे मारूँगा ही मैं.” विजय करूरता से बोला.

मगर अगले ही पल बंदूक उसके हाथ से छ्छूट गयी. रोहित ने वार ही कुछ ऐसा किया था. विजय के हाथ पर ही मुक्का मारा था ज़ोर से रोहित ने.

अगला मुक्का विजय के मूह पे लगा. मुक्का इतनी ज़ोर का था कि विजय के 2 दाँत बाहर आ गये और उसका मूह खून से लथपथ हो गया.

उसके बाद तो वो पिता रोहित ने विजय को कि पूछो मत. बहुत ज़्यादा गुस्से में था रोहित. विजय ने हरकत ही कुछ ऐसी की थी. बहुत प्यार करता था रोहित अपनी बहन को और उसने उसके साथ इतनी गंदी हरकत की थी. रोहित रुका नही एक भी बार.

“मेरी बहन को छुआ तूने कामीने, ये हाथ काट डालूँगा मैं. साइको है तू हां, आज तेरा साइको पना निकालता हूँ.” रोहित ने घूँसो की बोचार शुरू कर दी विजय पर.

विजय को खूब पीट कर रोहित ने अपनी बंदूक उठा ली और विजय के सर पर रख दी.

“मुझे जैल में डाल दो. मैने ग़लती की है. मुझे माफ़ कर दो. क़ानून जो सज़ा देगा मुझे मंजूर होगी.”

“क़ानून नही, सज़ा मैं दूँगा तुझे. तेरे पाप का घड़ा भर चुका है अब. न्याय अभी और इसी वक्त होगा.”

“देखो मैं साइको किल्लर नही हूँ.”

“अच्छा फिर कौन हो तुम, उसके भाई हो या बेटे हो…कौन हो.”

“मैं सच कह रहा हूँ. मैं साइको नही हूँ. हां मैने ग़लत किया तुम्हारी बहन के साथ. मुझे ऐसा नही करना चाहिए था. मुझे जैल में डाल दो…मैं भुगत लूँगा चुपचाप अपनी सज़ा.”

“हर मुजरिम पकड़े जाने पर यही कहता है. तुम तो एस.आइ. हो ये बात तो तुम जानते ही होंगे.”

“हां पर मैं सच बोल रहा हूँ. मैं साइको नही हूँ.” विजय गिड़गिडया.

“मुझे आज कम सुन रहा है. और मेरा दिमाग़ भी खराब हो रखा है. मुझे कुछ समझ नही आ रहा कि तुम क्या कह रहे हो. एनीवे हॅव ए नाइस जर्नी टू दा हेल…गुड बाइ.” रोहित ने कहा और विजय का भेजा उड़ा दिया. उसके खून की छींटे उसके मूह पर भी पड़ी.

रोहित ने तुरंत अपनी जेब से फोन निकाला और एएसपी साहिबा को फोन किया, “मैने गोली मार दी है साइको को मेडम…मेरे घर पर लाश पड़ी है उसकी…नही रोक सका खुद को सॉरी.”

बस इतना कह कर फोन काट दिया रोहित ने.

शालिनी 20 मिनिट में पहुँच गयी रोहित के घर. रोहित गुमशुम चुपचाप बैठा था सोफे पर पिंकी के साथ.

दरवाजा खुला ही रख छोड़ा था रोहित ने. मोहित को भी होश आ गया था. रोहित ने शालिनी को फोन करने के बाद डॉक्टर को फोन करके बुला लिया था. डॉक्टर के इंजेक्षन के बाद मोहित को होश आ गया था.

“कौन था ये…रोहित.” शालिनी ने पूछा. शालिनी खून से लटपथ चेहरे को पहचान नही पाई.

“वही जिस पर हमें शक था मेडम, विजय.”

“तुम्हे ये नही करना चाहिए था. अब मुझे मजबूर हो कर तुम्हारे खिलाफ कुछ आक्षन लेना पड़ेगा.”

“ले लीजिए जो आक्षन लेना है…मगर मैं इसे किसी भी हालत में जिंदा नही छ्चोड़ सकता था…मेरे सामने इसने मेरी बहन के साथ…….” आंशु भर आए रोहित की आँखो में.

“बस भैया….बस.” पिंकी ने रोहित के सर पर हाथ रखा.

“ह्म्म…रोहित, ये गोली तुमने सेल्फ़ डिफेन्स में मारी है, ईज़ दट क्लियर.”

“जैसा आप कहें मेडम, मैने आपको सब सच बता दिया.” रोहित ने शालिनी की आँखो में देख कर कहा.

“ये बात हम दोनो के बीच रहेगी. धिंडोरा मत पीटना कि तुमने साइको को गोली मार दी. समझे.” शालिनी ने कहा.

“समझ गया मेडम, समझ गया.” रोहित ने कहा.

“चलो ये केस आख़िर कार क्लोज़ हो गया, कंग्रॅजुलेशन रोहित, गुड जॉब.”

रोहित ने शालिनी की आँखो में देखा और बोला, “थॅंक योउ मेडम…सब आपकी डाँट का नतीजा है.”

शालिनी हंस पड़ी इस बात पर, “वो तो है, और ये मत सोचना कि आगे डाँट नही पड़ेगी. अभी और भी बहुत केसस पड़े हैं जिन्हे तुम्हे हॅंडल करना है. ईज़ दट क्लियर.” हँसी के बाद शालिनी की बात में थोड़ी कठोरता आ गयी थी.

“बिल्कुल मेडम…सब क्लियर है.”

शालिनी की नज़र मोहित पर पड़ी तो वो बोली, "ये यहाँ क्या कर रहा है?"

"ये अगर वक्त पे ना आता तो मेरे सामने ही मेरी बहन का रेप हो जाता. हां मोहित पर तुम यहाँ आए कैसे " रोहित ने कहा.

"मैं आपको बताना चाहता था कि विजय ही साइको है. मैं विजय की बीवी से मिला था. उसने मुझे बताया कि विजय उस रात घायल अवस्था में घर लोटा था जिस रात मेरी साइको से झड़प हुई थी. विजय के पेट को उसकी बीवी ने घर पर ही शिया. इतना क्लू काफ़ी था मुझे समझने के लिए कि विजय ही साइको है. बस ये बात बताने मैं थाने पहुँचा आपसे मिलने. वहाँ पता चला कि आप घर चले गये हैं. आपके घर का अड्रेस ले कर यहाँ आ गया. जब मैं दरवाजे की बेल बजाने लगा तो मुझे अंदर से किसी के चीखने की आवाज़ आई. मैं समझ गया कि कुछ गड़बड़ है. मैने खिड़की से झाँक कर देखा तो मेरे होश उड़ गये. मैं आपके घर के पीछे गया और पीछे का दरवाजा तौड दिया. वही से अंदर आया मैं. बाकी तो आपको पता ही है."

"ह्म्‍म्म....आवाज़ तो हुई थी पीछे, पर ये नही सोचा था मैने कि तुम आए हो." रोहित ने कह कर मोहित को गले लगा लिया "तुम वक्त पर ना आते तो अनर्थ हो जाता. मैं खुद को कभी माफ़ नही कर पाता कि मेरे सामने......"

"अपना फ़र्ज़ निभाया मैने और कुछ नही. मैं चलता हूँ अब." मोहित ने कहा.

विजय की डेड बॉडी को वहाँ से हटा लिया गया. सबके जाने के बाद रोहित ने पिंकी से कहा, "कितना कुछ सहना पड़ा तुम्हे मेरे होते हुए. मुझे माफ़ कर दे."

"भैया ऐसा मत बोलो. उसने हालात ही कुछ ऐसे पैदा कर दिए थे. चलो अब मेरा गिफ्ट दो."

रोहित ने गले लगा लिया पिंकी को और बोला, "दुनिया में सबसे ज़्यादा प्यार करता हूँ मैं तुम्हे."

"मुझे पता है भैया, पता है मुझे."

दोनो भाई बहन भावुक हो रहे थे. उनके रिस्ते में और ज़्यादा गहराई आ गयी थी इस वाकये के बाद.

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अगले दिन सुबह से ही हर न्यूज़ चॅनेल पर एक ही ब्रेकिंग न्यूज़ चल रही थी. विजय की तस्वीर दिखाई जा रही थी और बताया जा रहा था कि कैसे एक पोलीस वाला ही साइको निकला. विजय की बीवी का इंटरव्यू दिखाया जा रहा था जो कि मान-ने को तैयार नही थी कि उसका पति साइको था.

राज शर्मा को ये बात रात को ही पता चल गयी थी. मोहित ने फोन करके उसे सब कुछ बता दिया था. वो ये सुनते ही पद्‍मिनी के घर के दरवाजे की तरफ लपका. रात के 11 बज रहे थे तब. उसने बेल बजाई तो पद्‍मिनी के डेडी ने दरवाजा खोला.

"मुझे अभी अभी पता चला कि साइको मारा गया, क्या मैं पद्‍मिनी जी से मिल सकता हूँ."

"मारा गया वो.....बहुत अच्छा हुआ...अब मेरी बेटी शकुन से जी पाएगी."

"क्या मैं मिल सकता हूँ पद्‍मिनी जी से." राज शर्मा ने कहा.

"वो अभी सोई है गोली ले कर. उसे उठाना ठीक नही होगा."

"चलिए कोई बात नही मैं उनसे कल सुबह मिल लूँगा."

"हां बेटा कल सुबह मिल लेना...."

राज शर्मा तड़प रहा था ये न्यूज़ पद्‍मिनी को सुनने के लिए. मगर कोई चारा नही था उसके पास. जब वो वापिस जीप में आया तो उसे शालिनी का फोन आया, "राज शर्मा साइको विजय ही था आंड ही ईज़ डेड नाउ."

"हां पता चला मुझे मेडम."

"तुम्हारी वहाँ की ड्यूटी ख़तम होती है. तुम अब घर जा सकते हो. कल सुबह थाने आ जाना. और हां बाकी जो भी हैं तुम्हारे साथ उन सब की भी छुट्टी कर दो और कल सुबह थाने आने को बोल दो."

"जी मेडम."

राज शर्मा ने बाकी सभी को भेज दिया मगर खुद अपनी जीप में वही बैठा रहा. उसे पद्‍मिनी से एक बार बात जो करनी थी. बैठा रहा बेचैन दिल को लेकर चुपचाप जीप में. अचानक उसे पता नही क्या सूझी पद्‍मिनी के कमरे की खिड़की को देखते वक्त कि वो उठा और चल दिया उस खिड़की की तरफ.

"ह्म्म चढ़ा जा सकता है उपर." राज शर्मा ने सोचा.

पता नही उसे क्या हो गया था. बिना सोचे समझे चढ़ गया किसी तरह वो दीवार के सहारे और पहुँच गया उस खिड़की तक जिसमे से पद्‍मिनी झँकति थी. खिड़की के सीसे को खड़काया उसने. पद्‍मिनी वाकाई सोई हुई थी. मगर खिड़की के उपर हो रही ठप-ठप से उसकी आँख खुल गयी.

"कौन दरवाजा पीट रहा है इस वक्त" पद्‍मिनी ने आँखे खुलते ही कहा. मगर जल्दी ही वो समझ गयी कि आवाज़ दरवाजे से नही खिड़की से आ रही है. पद्‍मिनी हैरान रह गयी. वो उठी डरते-डरते और खिड़की का परदा हटाया, "राज शर्मा तुम ..........तुम यहाँ क्या कर रहे हो."

"पद्‍मिनी जी साइको मारा गया, अब आपको चिंता की कोई ज़रूरत नही है"

पद्‍मिनी को समझ नही आया कि वो कैसे रिक्ट करे.

"क्या हुआ ख़ुसी नही हुई आपको. मुझे तो बहुत ख़ुसी मिली ये जान कर की अब आपकी जान को कोई ख़तरा नही है."

"राज शर्मा तुम गिर गये तो, ऐसे यहाँ आने की क्या ज़रूरत थी."

"मैने आपके डेडी को बताई ये बात. आपसे मिलने की रिक्वेस्ट भी की मैने. पर उन्होने कहा कि आप गोली ले कर सो रही हैं. रहा नही गया मुझसे और मैं यहाँ आ गया."

"ठीक है, जाओ अब वरना गिर जाओगे."

"आपसे बात करना चाहता हूँ कुछ क्या आप रुक सकती हैं थोड़ी देर."

"पागल हो गये हो क्या, यहाँ खिड़की में टँगे हुए बात करोगे. जाओ अभी बाद में बात करेंगे."

"ठीक है जाता हूँ अभी मगर आप भूल मत जाना मुझे. मेरी यहाँ की ड्यूटी ख़तम होती है. मगर फिर भी मैं सुबह ही जाउन्गा यहाँ से. पूरी रात रोज की तरह आपके घर के बाहर ही गुज़ारुँगा."

"क्यों कर रहे हो ऐसा तुम?"

"फिर से कहूँगा तो आप थप्पड़ मार देंगी."

"नही मारूँगी बोलो तुम."

"प्यार करते हैं आपसे, कोई मज़ाक नही."

"एक बात करना चाहती थी तुमसे मगर अभी नही बाद में. तुम अभी जाओ किसी ने देख लिया तो मेरी बदनामी होगी. क्या तुम्हे अच्छा लगेगा ये."

"नही नही पद्‍मिनी जी मुझे ये बिल्कुल अच्छा नही लगेगा. मैं जा रहा हूँ. मगर मैं सुबह तक यही रहूँगा."

पद्‍मिनी हंस पड़ी राज शर्मा की बात पर और बोली, "जैसी तुम्हारी मर्ज़ी"

"बुरा ना माने तो एक बात कहूँ, थप्पड़ मत मारिएगा."

"हां-हां बोलो."

"आपके चेहरे पर हँसी बहुत प्यारी लगती है, आप हमेशा हँसती रहे यही दुवा करता हूँ."

तभी पद्‍मिनी के रूम का दरवाजा खड़का, "तुम जाओ अब, शायद मम्मी आई हैं. दुबारा मत आना."

"ठीक है, सुबह आपसे मिल कर ही जाउन्गा." राज शर्मा ने कहा.

"अब जाओ भी." पद्‍मिनी ने दाँत भींच कर कहा.

राज शर्मा झट से नीचे उतर गया. उसके चेहरे पर हल्की हल्की मुस्कान थी. "पद्‍मिनी जी कितने प्यार से मिली. थप्पड़ भी नही मारा. कितनी बदल गयी हैं वो."

पद्‍मिनी ने दरवाजा खोला. उसकी मम्मी ही थी. "कैसी तबीयत है"

"ठीक है मम्मी, सर में दर्द है हल्का सा अभी."

"तुम फोन पे बात कर रही थी क्या?"

पद्‍मिनी सोच में पड़ गयी. झूठ बोला पड़ा उसे, "ओह हां मैं फोन पर थी."

"सो जाओ बेटा, आराम करो... तभी तबीयत जल्दी ठीक होगी" पद्‍मिनी की मम्मी कह कर चली गयी.

"क्या ज़रूरत थी राज शर्मा को खिड़की में आने की. बेवजह झूठ बोलना पड़ा." पद्‍मिनी लेट गयी बिस्तर पर वापिस और सो गयी.

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क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--69

gataank se aage.................

“kya hua chalaao goli…ruk kyon gaye.”

“goli to tumhe maarunga hi main.” Vijay karoorta se bola.

Magar agle hi pal bandook uske haath se chhoot gayi. Rohit ne vaar hi kuch aisa kiya tha. vijay ke haath par hi mukka maara tha jor se rohit ne.

Agla mukka vijay ke muh pe laga. Mukka itni jor ka tha ki vijay ke 2 daant baahar aa gaye aur uska muh khun se lathpat ho gaya.

Uske baad to vo pita rohit ne vijay ko ki pucho mat. Bahut jyada gusse mein tha rohit. Vijay ne harkat hi kuch aisi ki thi. bahut pyar karta tha rohit apni bahan ko aur usne uske saath itni gandi harkat ki thi. rohit ruka nahi ek bhi baar.

“meri bahan ko chuv tune kamine, ye haath kaat daalunga main. Psycho hai tu haan, aaj tera psycho pana nikaalta hun.” Rohit ne ghunso ki bochaar shuru kar di vijay par.

Vijay ko khub pit kar rohit ne apni bandook utha li aur vijay ke sar par rakh di.

“mujhe jail mein daal do. Maine galti ki hai. mujhe maaf kar do. Kaanun jo saja dega mujhe manjoor hogi.”

“kaanun nahi, saja main dunga tujhe. Tere paap ka ghada bhar chuka hai ab. Nyay abhi aur isi vakt hoga.”

“dekho main psycho killer nahi hun.”

“atcha phir kaun ho tum, uske bhai ho ya bete ho…kaun ho.”

“main sach kah raha hun. Main psycho nahi hun. Haan maine galat kiya tumhaari bahan ke saath. Mujhe aisa nahi karna chaahiye tha. mujhe jail mein daal do…main bhugat lunga chupchaap apni saja.”

“har mujrim pakde jaane par yahi kahta hai. tum to S.I. ho ye baat to tum jaante hi honge.”

“haan par main sach bol raha hun. Main psycho nahi hun.” Vijay gidgidaya.

“mujhe aaj kam sun raha hai. aur mera dimag bhi kharaab ho rakha hai. mujhe kuch samajh nahi aa raha ki tum kya kah rahe ho. Anyway have a nice jouney to the hell…good bye.” Rohit ne kaha aur vijay ka bheja uda diya. Uske khun ki chinte uske muh par bhi padi.

Rohit ne turant apni jeb se phone nikaala aur ASP saahiba ko phone kiya, “maine goli maar di hai psycho ko madam…mere ghar par laash padi hai uski…nahi rok saka khud ko sorry.”

Bas itna kah kar phone kaat diya rohit ne.

Shalini 20 minute mein pahunch gayi rohit ke ghar. Rohit gumshum chupchaap baitha tha sofe par pinki ke saath.

Darvaaja khula hi rakh choda tha rohit ne. mohit ko bhi hosh aa gaya tha. rohit ne shalini ko phone karne ke baad doctor ko phone karke bula liya tha. doctor ke injection ke baad mohit ko hosh aa gaya tha.

“kaun tha ye…rohit.” Shalini ne pucha. Shalini khun se latpath chehre ko pahchaan nahi paayi.

“vahi jis par hamein shak tha madam, vijay.”

“tumhe ye nahi karna chaahiye tha. ab mujhe majboor ho kar tumhaare khilaaf kuch action lena padega.”

“le lijiye jo action lena hai…magar main ise kisi bhi haalat mein jinda nahi chhod sakta tha…mere saamne isne meri bahan ke saath…….” Aanshu bhar aaye rohit ki aankho mein.

“bas bhaiya….bas.” pinki ne rohit ke sar par haath rakha.

“hmm…rohit, ye goli tumne self defence mein maari hai, is that clear.”

“jaisa aap kahein madam, maine aapko sab sach bata diya.” Rohit ne shalini ki aankho mein dekh kar kaha.

“ye baat hum dono ke bich rahegi. Dhindora mat pitna ki tumne psycho ko goli maar di. samjhe.” Shalini ne kaha.

“samajh gaya madam, samajh gaya.” rohit ne kaha.

“chalo ye case aakhir kaar close ho gaya, congratulation rohit, good job.”

Rohit ne shalini ki aankho mein dekha aur bola, “thank you madam…sab aapki daant ka natija hai.”

Shalini hans padi is baat par, “vo to hai, aur ye mat sochna ki aage daant nahi padegi. Abhi aur bhi bahut cases pade hain jinhe tumhe handle karna hai. is that clear.” Hansi ke baad shalini ki baat mein thodi kathorta aa gayi thi.

“bilkul madam…sab clear hai.”

shalini ki nazar mohit par padi to vo boli, "ye yahan kya kar raha hai?"

"ye agar vakt pe na aata to mere saamne hi meri bahan ka rape ho jaata. Haan mohit par tum yahan aaye kaise " rohit ne kaha.

"main aapko bataana chaahta tha ki vijay hi psycho hai. Main vijay ki biwi se mila tha. Usne mujhe bataaya ki vijay us raat ghaayal awastha mein ghar lota tha jis raat meri psycho se jhadap huyi thi. Vijay ke pet ko uski biwi ne ghar par hi shiya. Itna clue kaafi tha mujhe samajhne ke liye ki vijay hi psycho hai. Bas ye baat bataane main thaane pahuncha aapse milne. Vahan pata chala ki aap ghar chale gaye hain. Aapke ghar ka address le kar yahan aa gaya. Jab main darvaaje ki bell bajaane laga to mujhe ander se kisi ke chinkhne ki awaaj aayi. Main samajh gaya ki kuch gadbad hai. Maine khidki se jhaank kar dekha to mere hosh ud gaye. Main aapke ghar ke piche gaya aur piche ka darvaaja taud diya. Vahi se ander aaya main. Baaki to aapko pata hi hai."

"hmmm....awaaj to huyi thi piche, par ye nahi socha tha maine ki tum aaye ho." rohit ne kah kar mohit ko gale laga liya "tum vakt par na aate to anarth ho jaata. Main khud ko kabhi maaf nahi kar paata ki mere saamne......"

"apna farz nibhaya maine aur kuch nahi. Main chalta hun ab." mohit ne kaha.

Vijay ki dead body ko vahan se hata liya gaya. Sabke jaane ke baad rohit ne pinki se kaha, "kitna kuch sahna pada tumhe mere hote hue. Mujhe maaf kar de."

"bhaiya aisa mat bolo. Usne halaat hi kuch aise paida kar diye the. Chalo ab mera gift do."

rohit ne gale laga liya pinki ko aur bola, "duniya mein sabse jyada pyar karta hun main tumhe."

"mujhe pata hai bhaiya, pata hai mujhe."

dono bhai bahan bhaavuk ho rahe the. Unke riste mein aur jyada gahraayi aa gayi thi is vaakye ke baad.

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Agle din subah se hi har news channel par ek hi breaking news chal rahi thi. Vijay ki tasvir dikhayi ja rahi thi aur bataaya ja raha tha ki kaise ek police wala hi psycho nikla. Vijay ki biwi ka interview dikhaya ja raha tha jo ki maan-ne ko taiyaar nahi thi ki uska pati psycho tha.

Raj sharma ko ye baat raat ko hi pata chal gayi thi. Mohit ne phone karke use sab kuch bata diya tha. Vo ye sunte hi padmini ke ghar ke darvaaje ki taraf lapka. Raat ke 11 baj rahe the tab. Usne bell bajaayi to padmini ke dady ne darvaaja khola.

"mujhe abhi abhi pata chala ki psycho maara gaya, kya main padmini ji se mil sakta hun."

"maara gaya vo.....bahut atcha hua...ab meri beti shakun se ji paayegi."

"kya main mil sakta hun padmini ji se." Raj sharma ne kaha.

"vo abhi shoyi hai goli le kar. Use uthaana thik nahi hoga."

"chaliye koyi baat nahi main unse kal subah mil lunga."

"haan beta kal subah mil lena...."

Raj sharma tadap raha tha ye news padmini ko sunane ke liye. Magar koyi chaara nahi tha uske paas. Jab vo vaapis jip mein aaya to use shalini ka phone aaya, "Raj sharma psycho vijay hi tha and he is dead now."

"haan pata chala mujhe madam."

"tumhaari vahan ki duty khatam hoti hai. Tum ab ghar ja sakte ho. Kal subah thaane aa jaana. Aur haan baaki jo bhi hain tumhaare saath un sab ki bhi chutti kar do aur kal subah thaane aane ko bol do."

"ji madam."

Raj sharma ne baaki sabhi ko bhej diya magar khud apni jip mein vahi baitha raha. Use padmini se ek baar baat jo karni thi. Baitha raha bechain dil ko lekar chupchaap jip mein. Achaanak use pata nahi kya sujhi padmini ke kamre ki khidki ko dekhte vakt ki vo utha aur chal diya us khidki ki taraf.

"hmm chadha ja sakta hai upar." Raj sharma ne socha.

Pata nahi use kya ho gaya tha. Bina soche samjhe chadh gaya kisi tarah vo diwar ke sahaare aur pahunch gaya us khidki tak jisme se padmini jhankti thi. Khidki ke sise ko khadkaaya usne. Padmini vaakayi shoyi huyi thi. Magar khidki ke upar ho rahi thap-thap se uski aankh khul gayi.

"kaun darvaaja pit raha hai is vakt" padmini ne aankhe khulte hi kaha. Magar jaldi hi vo samajh gayi ki awaaj darvaaje se nahi khidki se aa rahi hai. Padmini hairaan rah gayi. Vo uthi darte-darte aur khidki ka parda hataaya, "Raj sharma tum ..........tum yahan kya kar rahe ho."

"padmini ji psycho maara gaya, ab aapko chinta ki koyi jaroorat nahi hai"

padmini ko samajh nahi aaya ki vo kaise react kare.

"kya hua khusi nahi huyi aapko. Mujhe to bahut khusi mili ye jaan kar ki ab aapki jaan ko koyi khatra nahi hai."

"Raj sharma tum gir gaye to, aise yahan aane ki kya jaroorat thi."

"maine aapke dady ko bataayi ye baat. Aapse milne ki request bhi ki maine. Par unhone kaha ki aap goli le kar sho rahi hain. Raha nahi gaya mujhse aur main yahan aa gaya."

"thik hai, jaao ab varna gir jaaoge."

"aapse baat karna chaahta hun kuch kya aap ruk sakti hain thodi der."

"paagal ho gaye ho kya, yahan khidki mein tange hue baat karoge. Jaao abhi baad mein baat karenge."

"thik hai jaata hun abhi magar aap bhul mat jaana mujhe. Meri yahan ki duty khatam hoti hai. Magar phir bhi main subah hi jaaunga yahan se. Puri raat roj ki tarah aapke ghar ke baahar hi gujarunga."

"kyon kar rahe ho aisa tum?"

"phir se kahunga to aap thappad maar dengi."

"nahi maarungi bolo tum."

"pyar karte hain aapse, koyi majaak nahi."

"ek baat karna chaahti thi tumse magar abhi nahi baad mein. Tum abhi jaao kisi ne dekh liya to meri badnaami hogi. Kya tumhe achchaa lagega ye."

"nahi nahi padmini ji mujhe ye bilkul atcha nahi lagega. Main ja raha hun. Magar main subah tak yahi rahunga."

padmini hans padi Raj sharma ki baat par aur boli, "jaisi tumhaari marji"

"bura na maane to ek baat kahun, thappad mat maariyega."

"haan-haan bolo."

"aapke chehre par hansi bahut pyari lagti hai, aap hamesa hansti rahe yahi duva karta hun."

tabhi padmini ke room ka darvaaja khadka, "tum jaao ab, shaayad mammi aayi hain. Dubara mat aana."

"thik hai, subah aapse mil kar hi jaaunga." Raj sharma ne kaha.

"ab jaao bhi." padmini ne daant bhinch kar kaha.

Raj sharma jhat se niche utar gaya. Uske chehre par halki halki muskaan thi. "padmini ji kitne pyar se mili. Thappad bhi nahi maara. Kitni badal gayi hain vo."

padmini ne darvaaja khola. Uski mammi hi thi. "kaisi tabiyat hai"

"thik hai mammi, sar mein dard hai halka sa abhi."

"tum phone pe baat kar rahi thi kya?"

padmini soch mein pad gayi. Jhut bola pada use, "oh haan main phone par thi."

"sho jaao beta, araam karo... tabhi tabiyat jaldi thik hogi" padmini ki mammi kah kar chali gayi.

"kya jaroorat thi Raj sharma ko khidki mein aane ki. Bevajah jhut bolna pada." padmini late gayi bistar par vaapis aur sho gayi.

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Kramashah..............................