बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:37

बात एक रात की--79

गतान्क से आगे.................

चौहान रीमा को लेकर घर पहुँचा. रात के 2 बज गये थे. रास्ते भर उसने रीमा से कोई बात नही की.

घर आ कर उसने रीमा के मूह पर ज़ोर से थप्पड़ मारा, “बता क्या रिश्ता है तेरा उस रोहित पांडे से. कैसे जानता है वो तुझे.”

“हम अच्छे दोस्त हैं, भैया.” रीमा गिड़गिडाई.

“कब बने दोस्त तुम दोनो.”

“कुछ दिन पहले ट्रेन में मिला था वो मुझसे जब मैं बुवा के घर से आ रही थी.”

“अच्छा इतनी जल्दी वो फ्रेंड भी बन गया तेरा. इतनी आज़ादी दे रखी है मैने तुझे और तू फ़ायडा उठा रही है.”

रीमा कुछ नही बोल पाई.

“चल दफ़ा हो जा मेरी नज़रो के सामने से. जल्दी तेरी शादी करके तुझे यहाँ से दफ़ा कर दूँगा. अगले हफ्ते तुझे देखने आ रहे हैं लड़के वाले.”

“भैया अभी तो मैं पढ़ रही हूँ.”

“हां देख रहा हूँ कि कितना पढ़ रही है. चल जा अपने कमरे में. एक ,दो महीने के अंदर ही शादी करवा दूँगा तुम्हारी.”

रीमा सुबक्ते हुए अपने कमरे में आ गयी और गिर गयी बिस्तर पर. दिल घबरा रहा था उसका शादी के नाम से.

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रोहित भी पिंकी के साथ लेकर घर की तरफ चल दिया.

रास्ते में पिंकी ने रोहित को बताया कि कैसे साइको उसे जंगल में ले गया था.

“सुबह सुबह सड़क सुन्शान थी. अचानक हमारी कार के आगे उसने अपनी कार लगा दी और हमें रुकने पर मजबूर कर दिया. नकाब पहन रखा था उसने. ड्राइवर को गोली मार दी उसने और मुझे कुछ सूँघा कर वहाँ जंगल ले गया.”

“इसीलिए मैं तुझे यहाँ से दूर भेज रहा था. कोई बात नही जो हुआ सो हुआ. मैं कल खुद छ्चोड़ कर आउन्गा देल्ही. अब अकेला नही भेजूँगा तुझे. ” रोहित ने कहा.

अगले दिन सुबह 8 बजे रोहित पिंकी को लेकर देल्ही चल दिया. आने, जाने की टॅक्सी बुक कर ली थी उसने.

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पद्‍मिनी के चाचा चाची सुबह सेवेरे ही निकल दिए देल्ही के लिए. पद्‍मिनी के चाचा का देल्ही में किड्नी का ऑपरेशन होना था जिसके लिए उन्हे वहाँ पहुँचना ज़रूरी था. गब्बर को भी उनके साथ ही जाना था. क्रिटिकल सिचुयेशन थी, ऑपरेशन में डेले नही कर सकते थे. वो बोल रहे थे पद्‍मिनी को भी साथ चलने के लिए और उनके साथ ही रहने के लिए. मगर उसने मना कर दिया, “मैं इस घर को छ्चोड़ कर नही जाउन्गि. मम्मी पापा की यादें हैं यहाँ. और वैसे भी भागने से फ़ायडा क्या है. मौत अगर लिखी है तो कही भी आ सकती है.”

सुबह 8 बजे निकले थे वो लोग और पद्‍मिनी उन्हे सी ऑफ करने बाहर तक आई थी. उन्हे सी ऑफ करने के बाद जैसे ही पद्‍मिनी वापिस मूडी घर में जाने के लिए राज शर्मा ने पद्‍मिनी को आवाज़ दी, “पद्‍मिनी जी!”

पद्‍मिनी रुक गयी और पीछे मूड कर देखा. राज शर्मा उसकी तरफ बढ़ रहा था. राज शर्मा उसके पास पहुँच कर बोला, “कैसी हैं आप अब?”

“जिंदा हूँ”

“समझ नही आता कि क्या करूँ आपके लिए.”

“तुम्हे कुछ करने की ज़रूरत नही है.” पद्‍मिनी ने कहा और अपने घर में घुस कर कुण्डी लगा ली और दरवाजे पर खड़ी हो कर सुबकने लगी, “तुमने कौन सा कसर छ्चोड़ी है मुझे परेशान करने की.”

राज शर्मा खड़ा रहा चुपचाप. कर भी क्या सकता था. “मैं भी पागल हूँ. जब पता है कि वो मेरी बात से परेशान ही होती हैं फिर क्यों…और परेशान करता हूँ उन्हे.” राज शर्मा वापिस जीप में आकर बैठ गया चुपचाप.

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….

सुबह 9 बजे ही तैयार हो गया मोहित आज. पूजा के साथ घूमने जो जा रहा था वो.

“कहाँ मिलना है, इस बारे में तो बात ही नही हुई पूजा से. सीधा घर चला जाउ क्या उसे लेने.” मोहित ने सोचा.

“नही..नही..कही नगमा कोई पंगा ना कर दे. शायद पूजा वही बस स्टॉप पर ही मिलेगी.”

जैसा की मोहित ने सोचा था, पूजा उसे बस स्टॉप पर ही मिली.

मोहित को बाइक पर आते देख उसके होंटो पर मुस्कान बिखर गयी. पर अगले ही पल वो उदास भी हो गयी.

मोहित ने उसके सामने बाइक रोकी और बोला, “क्या हुआ पहले मुस्कुराइ और फिर चेहरा लटका लिया.कोई प्राब्लम है क्या पूजा.”

“हां वो पिता जी की तबीयत खराब है कल शाम से. दीदी अकेली परेशान हो रही है. ऐसे में घूमने कैसे जाउ तुम्हारे साथ.”

“ओह…इसमे परेशान होने की कौन सी बात है पूजा. घूमने फिर कभी चलेंगे. तुम घर जाओ और पिता जी की सेवा करो.”

“कॉलेज में एक इंपॉर्टेंट लेक्चर है वो अटेंड करके आ जाउन्गि.”

“गुड, आओ बैठ जाओ, छ्चोड़ देता हूँ तुम्हे कॉलेज मैं.” मोहित ने कहा.

“नही मैं चली जाउन्गि…तुम ड्यूटी के लिए लेट हो जाओगे.”

“हो जाने दो लेट. तुम्हे कॉलेज छ्चोड़े बिना कही नही जाउन्गा. बैठ जाओ प्लीज़ और आज फिर अपना सर रख लेना मेरे कंधे पर. बहुत अतचा लगा था कल जब तुमने सर रखा था मेरे कंधे पर. बहुत रोमॅंटिक फील हो रहा था मुझे.”

“अच्छा…वो तो यू ही रख दिया था मैने, सर में दर्द हो रहा था कल.”

“अच्छा बैठो तो”

पूजा बैठ गयी और जैसे ही मोहित बाइक ले कर आगे बढ़ा पूजा ने सर टिका दिया उसके कंधे पर.

“सर में दर्द हो रहा है ?” मोहित ने पूछा.

“हां, तुम्हे कैसे पता.”

“क्योंकि जैसा कल फील हो रहा था मुझे वैसा ही आज भी फील हो रहा है. हटाना मत सर अपना कॉलेज तक”

“मोहित, तुम्हे बुरा तो नही लगा ना कि मैं आज भी नही चल रही तुम्हारे साथ.”

“पागल हो क्या बुरा क्यों लगेगा. वैसे मेरा मन भी कल से खराब है. कल शमसान गया था पद्‍मिनी के पेरेंट्स के अंतिम संस्कार पर. कल से मन बहुत खराब हो रहा है. बहुत बुरी तरह से कतल किया साइको ने उनका.”

“आख़िर ये साइको पकड़ा क्यों नही जा रहा मोहित.”

“बहुत चालाक है ये साइको पूजा. मगर पकड़ा जाएगा एक ना एक दिन वो. कब तक बचेगा. ”

“हां वो तो है.

बातो बातो में कॉलेज आ गया. मोहित ने बाइक रोक दी गेट के बाहर और पूजा उतर गयी बाइक से.

“पूजा हमेशा ख्याल रखना अपना. सुनसान जगह पर कभी मत जाना. हमेशा ग्रूप में रहना. मेरे लिए अपना ख्याल रखना.”

“तुम्हारे लिए क्यों.”

“क्योंकि मेरी जिंदगी हो तुम.”

“हटो जाओ तुम.” पूजा शर्मा गयी.

“अरे सच कह रहा हूँ. तुम सच में मेरी जिंदगी हो. तुम्हारे बिना नही जी सकता मैं.”

“अच्छा…जाओ लेट हो जाओगे. मेरे भी लेक्चर का टाइम होने वाला है.”

“ओह हां तुम निकलो. बाइ. टेक केर.”

पूजा कॉलेज के अंदर चली गयी और मोहित अपने ऑफीस की तरफ चल दिया.

जब वो ऑफीस पहुँचा तो उसके कमरे के बाहर एक खुब्शुरत लेडी बैठी थी कुर्सी पर.

“आप का परिचाय.”

“मेरा नाम दीपिका है. मुझे आपके बॉस ने आपसे मिलने को कहा है. मैं गौरव मेहरा की बीवी हूँ.”

“ओह हां याद आया. प्लीज़ कम इन.” मोहित ने कहा.

मोहित कमरे में घुस गया. पीछे पीछे दीपिका भी आ गयी.

मोहित के बैठते ही वो उसके सामने बैठ गयी. दीपिका ने जीन्स और टॉप पहना हुआ था. टॉप कुछ इस तरह का था कि उसके बूब्स को वो बहुत अच्छे से बाहर की हवा दे रहा था . ना चाहते हुए भी मोहित की निगाह चली गयी उसके बूब्स पर. बस निपल्स छुपे हुए थे अंदर वरना तो सब कुछ बाहर ही था .

“ठर्कि लगती है ये एक नंबर की. जानबूझ कर दिखा रही है अपना समान. सुबह सुबह इसे ही आना था ऑफीस.”

“आपके बॉस ने आपको बता ही दिया होगा सब कुछ.” दीपिका ने कहा.

“जी हां बता दिया है. तो आपको लगता है कि आपके पति के किसी लड़की के साथ नज़ायज़ संबंध हैं और आपको सबूत चाहिए ताकि आप तलाक़ के लिए कोर्ट में जा सकें. ईज़ दट राइट.”

“यस आब्सोल्यूट्ली.”

“ठीक है आज से ही काम शुरू हो जाएगा.”

“टोटल कितनी पेमेंट करनी होगी मुझे.”

“उसके बारे में आप बॉस से बात कर लीजिए. मैं वो मॅटर्स हॅंडल नही करता.” मोहित ने कहा.

“थॅंक यू वेरी मच. मुझे जल्द से जल्द कुछ सबूत चाहिए. मैं उस वहशी के साथ नही रह सकती. आप मेरे कपड़े देख रहे हैं. बहुत रिवीलिंग हैं ना.”

मोहित के समझ में नही आया कि वो क्या कहना चाहती है. “क्या मतलब ..”

“मेरा पति मुझे रिवीलिंग कपड़े पहनाता है. उसे अच्छा लगता है जब दुनिया मुझे ऐसे कपड़ो में देखती है. ये टॉप जो आप देख रहे हैं कल ही लाकर दिया उन्होने. उनकी चाय्स के अनुसार कपड़े पहन-ने होते हैं मुझे.”

“ओह..वेरी बॅड.”

“आपको ये सब बताया क्योंकि आप मेरी छाती को देख रहे थे और शायद मुझे ग़लत समझ रहे थे. मेरे पास कोई भी चारा नही होता है ये कपड़े पहन-ने के सिवा. मुझे उनसे तलाक़ चाहिए और बिना सबूत के तलाक़ मिलेगा नही. उनके काई औरतो से संबंध हैं लेकिन अधिकतर वो कामिनी के साथ रहते हैं. आप इन्वेस्टिगेशन करेंगे तो सब जान जाएँगे. मैं चलती हूँ.” दीपिका उठ कर चली गयी.

मोहित तो देखता ही रह गया उसे. बहुत ही अजीब सा कुछ कहा था उसने. “क्या ऐसा हो सकता है शायद हो भी सकता है. एक से बढ़कर एक नमूने हैं दुनिया में.”

मोहित अपने सीक्रेट इंत्रुएमेंट्स लेकर निकल पड़ा. एक तो बड़ा कॅमरा था उसके पास जो कि विज़िबल था. एक सीक्रेट कॅमरा उसकी पेन में भी था जो कि किसी को दिखता नही था .

मोहित ने इंक्वाइरी की तो पता चला की दीपिका सही कह रही थी. गौरव मेहरा अमीर था और खूब पैसे वाला था. बहुत सारे शॉंक पाल रखे थे उसने. उसका ज़्यादा तर कामिनी से ही मिलना जुलना रहता था. मोहित ने कामिनी का अड्रेस पता किया और पहुँच गया उसके घर. वो एक बड़े से फ्लॅट में अकेली रहती थी. फ्लॅट उसे गौरव मेहरा ने ही लेकर दिया था. मोहित उसके घर पहुँचा. दरवाजे पर कान लगा कर देखा तो पाया कि अंदर से कुछ आवाज़े आ रही हैं. आवाज़े कुछ इस तरह की थी जिस तरह कि काम-क्रीड़ा के वक्त निकलती हैं

लॉक खोलने में तो मोहित माहिर था ही. खोल कर घुस गया चुपचाप अंदर.

“आअहह चूस ये लंड. अच्छे से चूस.”

मोहित उस बेडरूम की तरफ बढ़ा जहा से आवाज़ आ रही थी. कमरे का दरवाजा हल्का सा खुला था. क्योंकि मैं दरवाजा बंद था इसलिए बेडरूम का दरवाजा बंद करना भूल गये थे शायद वो लोग.

मोहित ने झाँक कर देखा तो दंग रह गया. अंदर कामिनी के साथ गौरव मेहरा नही बल्कि उसका छोटा भाई संजीव मेहरा था. दीपिका मोहित को परिवार के लोगो की फोटो दे गयी थी इसलिए उसने संजीव को पहचान लिया था.

“भैया की रखैल को चोदने का मज़ा ही कुछ और है.” संजीव ने कहा.

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--79

gataank se aage.................

Chauhan rima ko lekar ghar pahuncha. Raat ke 2 baj gaye the. Raaste bhar usne rima se koyi baat nahi ki.

Ghar aa kar usne rima ke muh par jor se thappad maara, “bata kya rishta hai tera us rohit panday se. kaise jaanta hai vo tujhe.”

“hum ache dost hain, bhaiya.” Rima gidgidaayi.

“kab bane dost tum dono.”

“kuch din pahle train mein mila tha vo mujhse jab main buva ke ghar se aa rahi thi.”

“achchaa itni jaldi vo friend bhi ban gaya tera. Itni azaadi de rakhi hai maine tujhe aur tu faayda utha rahi hai.”

Rima kuch nahi bol paayi.

“chal dafa ho ja meri nazro ke saamne se. jaldi teri shaadi karke tujhe yahan se dafa kar dunga. Agle hafte tujhe dekhne aa rahe hain ladke wale.”

“bhaiya abhi to main padh rahi hun.”

“haan dekh raha hun ki kitna padh rahi hai. chal ja apne kamre mein. Ek ,do mahine ke ander hi shaadi karva dunga tumhaari.”

Rima subakte hue apne kamre mein aa gayi aur gir gayi bistar par. Dil ghabra raha tha uska shaadi ke naam se.

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Rohit bhi pinki ke saath lekar ghar ki taraf chal diya.

Raaste mein pinki ne rohit ko bataaya ki kaise psycho use jungle mein le gaya tha.

“Subah subah sadak sunshaan thi. achaanak hamaari car ke aage usne apni car laga di aur hamein rukne par majboor kar diya. Nakaab pahan rakha tha usne. Driver ko goli maar di usne aur mujhe kuch sungha kar vahan jungle le gaya.”

“isiliye main tujhe yahan se dur bhej raha tha. koyi baat nahi jo hua sho hua. Main kal khud chhod kar aaunga delhi. Ab akela nahi bhejunga tujhe. ” rohit ne kaha.

Agle din subah 8 baje rohit pinki ko lekar delhi chal diya. Aane, jaane ki taxi book kar li thi usne.

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Padmini ke chachchaa chachi subah severe hi nikal diye delhi ke liye. Padmini ke chachchaa ka delhi mein kidney ka operation hona tha jiske liye unhe vahan pahunchna jaroori tha. hemant ko bhi unke saath hi jaana tha. critical situation thi, operation mein delay nahi kar sakte the. Vo bol rahe the padmini ko bhi saath chalne ke liye aur unke saath hi rahne ke liye. magar usne mana kar diya, “main is ghar ko chhod kar nahi jaaungi. Mammi papa ki yaadein hain yahan. Aur vaise bhi bhaagne se faayda kya hai. maut agar likhi hai to kahi bhi aa sakti hai.”

Subah 8 baje nikle the vo log aur padmini unhe si off karne baahar tak aayi thi. unhe si off karne ke baad jaise hi padmini vaapis mudi ghar mein jaane ke liye Raj sharma ne padmini ko awaaj di, “padmini ji!”

Padmini ruk gayi aur piche mud kar dekha. Raj sharma uski taraf badh raha tha. Raj sharma uske paas pahunch kar bola, “kaisi hain aap ab?”

“jinda hun”

“samajh nahi aata ki kya karun aapke liye.”

“tumhe kuch karne ki jaroorat nahi hai.” padmini ne kaha aur apne ghar mein ghus kar kundi laga li aur darvaaje par khadi ho kar subakne lagi, “tumne kaun sa kasar chhodi hai mujhe pareshaan karne ki.”

Raj sharma khada raha chupchaap. Kar bhi kya sakta tha. “main bhi paagal hun. Jab pata hai ki vo meri baat se pareshaan hi hoti hain phir kyon…aur pareshaan karta hun unhe.” Raj sharma vaapis jip mein aakar baith gaya cupchaap.

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Subah 9 baje hi taiyaar ho gaya mohit aaj. Puja ke saath ghumne jo ja raha tha vo.

“kaha milna hai, is baare mein to baat hi nahi huyi puja se. sidha ghar chala jaaun kya use lene.” Mohit ne socha.

“nahi..nahi..kahi nagma koyi panga na kar de. Shayad puja vahi bus stop par hi milegi.”

Jaisa ki mohit ne socha tha, puja use bus stop par hi mili.

Mohit ko bike par aate dekh uske honto par muskaan bikhar gayi. Par agle hi pal vo udaas bhi ho gayi.

Mohit ne uskev saamne bike roki aur bola, “kya hua pahle muskuraayi aur phir chehra latka liya.koyi problem hai kya puja.”

“haan vo pita ji ki tabiyat kharaab hai kal shaam se. didi akeli pareshaan ho rahi hai. aise mein ghumne kaise jaaun tumhaare saath.”

“oh…isme pareshaan hone ki kaun si baat hai puja. Ghumne phir kabhi chalenge. Tum ghar jaao aur pita ji ki seva karo.”

“college mein ek important lecture hai vo attend karke aa jaaungi.”

“good, aao baith jaao, chhod deta hun tumhe college main.” Mohit ne kaha.

“nahi main chali jaaungi…tum duty ke liye late ho jaaoge.”

“ho jaane do late. Tumhe college chhode bina kahi nahi jaaunga. Baith jaao please aur aaj phir apna sar rakh lena mere kandhe par. Bahut atcha laga tha kal jab tumne sar rakha tha mere kandhe par. Bahut romantic fil ho raha tha mujhe.”

“atcha…vo to yu hi rakh diya tha maine, sar mein dard ho raha tha kal.”

“atcha baitho to”

Puja baith gayi aur jaise hi mohit bike le kar aage badha puja ne sar tika diya uske kandhe par.

“sar mein dard ho raha hai ?” mohit ne pucha.

“haan, tumhe kaise pata.”

“kyonki jaisa kal fil ho raha tha mujhe vaisa hi aaj bhi fil ho raha hai. hataana mat sar apna college tak”

“mohit, tumhe bura to nahi laga na ki main aaj bhi nahi chal rahi tumhaare saath.”

“paagal ho kya bura kyon lagega. Vaise mera man bhi kal se kharaab hai. kal shamsaan gaya tha padmini ke parents ke antim sanskaar par. kal se man bahut kharaab ho raha hai. bahut buri tarah se katal kiya psycho ne unka.”

“aakhir ye psycho pakda kyon nahi ja raha mohit.”

“bahut chalaak hai ye psycho puja. Magar pakda jaayega ek na ek din vo. Kab tak bachega. ”

“haan vo to hai.

Baato baato mein college aa gaya. mohit ne bike rok di gate ke baahar aur puja utar gayi bike se.

“puja hamesa khyaal rakhna apna. Sunsaan jagah par kabhi mat jaana. Hamesa group mein rahna. Mere liye apna khyaal rakhna.”

“tumhaare liye kyon.”

“kyonki meri jindagi ho tum.”

“hato jaao tum.” puja sharma gayi.

“arey sach kah raha hun. Tum sach mein meri jindagi ho. Tumhaare bina nahi ji sakta main.”

“atcha…jaao late ho jaaoge. Mere bhi lecture ka time hone wala hai.”

“oh haan tum niklo. Bye. Take care.”

Puja college ke ander chali gayi aur mohit apne office ki taraf chal diya.

Jab vo office pahuncha to uske kamre ke baahar ek khubshurat lady baithi thi kursi par.

“aap ka parichaiy.”

“mera naam dipika hai. mujhe aapke boss ne aapse milne ko kaha hai. main gaurav mehra ki biwi hun.”

“oh haan yaad aaya. Please come in.” mohit ne kaha.

Mohit kamre mein ghus gaya. piche piche dipika bhi aa gayi.

Mohit ke baithte hi vo uske saamne baith gayi. Dipika ne jeans aur top pahna hua tha. top kuch is tarah ka tha ki uske boobs ko vo bahut atche se baahar ki hawa de raha tha . na chaahte hue bhi mohit ki nigaah chali gayi uske boobs par. bas nipples chupe hue the ander varna to sab kuch baahar hi tha .

“Tharki lagti hai ye ek number ki. Jaanbujh kar dikha rahi hai apna samaan. Subah subah ise hi aana tha office.”

“aapke boss ne aapko bata hi diya hoga sab kuch.” Dipika ne kaha.

“ji haan bata diya hai. to aapko lagta hai ki aapke pati ke kisi ladki ke saath nazaayaj sambandh hain aur aapko sabut chaahiye taaki aap talaak ke liye court mein ja sakein. Is that right.”

“yes absolutely.”

“thik hai aaj se hi kaam shuru ho jaayega.”

“total kitni payment karni hogi mujhe.”

“uske baare mein aap boss se baat kar lijiye. Main vo matters handle nahi karta.” Mohit ne kaha.

“Thank you very much. Mujhe jald se jald kuch sabut chaahiye. Main us vahansi ke saath nahi rah sakti. Aap mere kapde dekh rahe hain. Bahut revealing hain na.”

Mohit ke samajh mein nahi aaya ki vo kya kahna chaahti hai. “kya matlab ..”

“mera pati mujhe revealing kapde pahnaata hai. use achchaa lagta hai jab duniya mujhe aise kapdo mein dekhti hai. ye top jo aap dekh rahe hain kal hi laakar diya unhone. Unki choice ke anusaar kapde pahan-ne hote hain mujhe.”

“oh..very bad.”

“aapko ye sab bataaya kyonki aap meri chaahti ko dekh rahe the aur shaayad mujhe galat samajh rahe the. Mere paas koyi bhi chaara nahi hota hai ye kapde pahan-ne ke shiva. Mujhe unse talaak chaahiye aur bina sabut ke talaak milega nahi. unke kayi aurto se sambandh hain lekin adhiktar vo kamini ke saath rahte hain. Aap investigation karenge to sab jaan jaayenge. Main chalti hun.” Dipika uth kar chali gayi.

Mohit to dekhta hi rah gaya use. Bahut hi ajib sa kuch kaha tha usne. “kya aisa ho sakta hai shaayad ho bhi sakta hai. ek se badhkar ek namune hain duniya mein.”

Mohit apne secret intruements lekar nikal pada. Ek to bada camera tha uske paas jo ki visible tha. ek secret camera uski pen mein bhi tha jo ki kisi ko dikhta nahi tha .

Mohit ne inquiry ki to pata chala ki dipika sahi kah rahi thi. gaurav mehra amir tha aur khub paise wala tha. bahut saare shonk paal rakhe the usne. Uska jyada tar kamini se hi milna julna rahta tha. mohit ne kamini ka address pata kiya aur pahunch gaya uske ghar. Vo ek bade se flat mein akeli rahti thi. flat use gaurav mehra ne hi lekar diya tha. mohit uske ghar pahuncha. Darvaaje par kaan laga kar dekha to paaya ki ander se kuch awaaje aa rahi hain. Awaaje kuch is tarah ki thi jis tarah ki kaam-krida ke vakt nikalti hain

Lock kholne mein to mohit maahir tha hi. Khol kar ghus gaya chupchaap ander.

“aaahhh choos ye lund. Atche se choos.”

Mohit us bedroom ki taraf badha jaha se awaaj aa rahi thi. kamre ka darvaaja halka sa khula tha. kyonki main darvaaja band tha isliye bedroom ka darvaaja band karna bhul gaye the shaayad vo log.

Mohit ne jhaank kar dekha to dang rah gaya. ander kamini ke saath gaurav mehra nahi balki uska chota bhai sanjiv mehra tha. dipika mohit ko parivaar ke logo ki photo de gayi thi isliye usne sanjiv ko pahchaan liya tha.

“bhaiya ki rakhail ko chodne ka maja hi kuch aur hai.” sanjiv ne kaha.

Kramashah..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:38

बात एक रात की--80

गतान्क से आगे.................

मोहित वहाँ से जाने ही वाला था कि उसे कुछ हलचल सुनाई दी अपने पीछे. उसने मूड कर देखा तो पाया कि एक लड़की बिल्कुल नंगी उसकी तरफ बढ़ रही है.

उसने इसारो में पूछा, “कौन हो तुम.”

मोहित थोड़ा घबरा गया फिर उस लड़की के पास आया और बोला, “कामिनी जी से मिलने आया था पर वो अभी बिज़ी है. बाद में आउन्गा.”

“मैं तो बिज़ी नही हूँ. मुझे बता दीजिए.”

“आप कौन हैं.”

“मेरा नाम कुमकुम है.” उस लड़की ने कहा और मोहित का लिंग पकड़ लिया.

“देखिए मैं इस काम के लिए नही आया था.”

“कोई बात नही आ गये हैं तो ये काम भी हो जाए.”

“जी नही माफ़ कीजिए.” मोहित उसे झटका दे कर वहाँ से बाहर आ गया.

“उफ्फ क्या मुसीबत है. इन्वेस्टिगेशन करनी कितनी मुस्किल होती है .” मोहित वहाँ से झटपट निकल लिया.

कुमकुम उस बेडरूम में घुस गयी जिसमे कामिनी और कुमकुम थे.

“कुमकुम तू कहाँ घूम रही है. चल कामिनी के साथ मिल कर तू भी सक कर.”

“तुम्हारे भैया को पता चल गया ना तो हमारा खून सक कर लेंगे वो.” कुमकुम ने मुस्कुराते हुए कहा.

“भैया तो अपनी दुनिया में खोए रहते हैं आजकल. उन्हे कुछ पता नही चलेगा.”

कुमकुम पास आ गयी और कामिनी के पास बैठ कर वो संजीव की बॉल्स को सक करने लगी. कामिनी उसके लिंग को चूस रही थी और कुमकुम उसकी बॉल्स को.

“आअहह गुड डबल धमाका” संजीव ने कहा

कुछ देर तक वो यू ही सक करते रहे.

“पहले कौन डलवाएगा.” संजीव ने पूछा.

“हम दोनो तैयार हैं. तुम ही तैय करो किसके अंदर डालना है.” कामिनी ने हंसते हुए कहा.

संजीव ने कामिनी को बिस्तर पर पटका और चढ़ गया उसके उपर. एक झटके में उसने पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया.

“आअहह” कामिनी कराह उठी.

“तुम भी पास में लेट जाओ. एक साथ दोनो की लूँगा” संजीव ने कहा.

कुमकुम लेट गयी कामिनी के बाजू में. कुछ देर संजीव कामिनी के अंदर धक्के मारता रहा. फिर उसने अचानक लंड निकाला बाहर और कुमकुम के उपर चढ़ गया और उसकी चूत में लंड घुसा दिया.

“आअहह एस…ऊओह संजीव.” कुमकुम कराह उठी.

संजीव का एक हाथ कामिनी के उनहारो को मसल रहा था और एक हाथ कुमकुम के उभारो को मसल रहा था. पर कुमकुम की चूत में लंड पूरी रफ़्तार से घूम रहा था.

कुछ देर कुमकुम की चूत का आनंद लेने के बाद संजीव वापिस कामिनी पर चढ़ गया और पूरी रफ़्तार से फक्किंग करने लगा. जल्दी ही वो ढेर हो गया कामिनी के उपर. कामिनी भी बह गयी उसके साथ ही.

“मेरा क्या होगा अब. तुम दोनो का तो ऑर्गॅज़म हो गया. मेरे ऑर्गॅज़म का क्या.”

“बस अभी थोड़ी देर में तैयार हो जाउन्गा.”

मोहित भाग कर अपनी बाइक स्टार्ट करने लगा तो उसने देखा कि फ्लॅट के बाहर एक ब्लॅक स्कॉर्पियो आकर रुकी है. उसमे से गौरव मेहरा निकला और सीधा कामिनी के फ्लॅट की तरफ बढ़ा.

“कुछ गड़बड़ होने वाली है इस फ्लॅट में आज.” मोहित ने मन ही मन सोचा.

गौरव मेहरा के पास मास्टर की थी फ्लॅट की. लॉक खोल कर सीधा बेडरूम में आ गया. जब वो वहाँ पहुँचा तो संजीव के साथ कामिनी और कुमकुम आँखे मिचे पड़ी थी.

“बहुत बढ़िया.” गौरव मेहरा ने कहा.

“गौरव …” कामिनी और कुमकुम दोनो ने एक साथ कहा.

गौरव ने बंदूक तान दी कामिनी की तरफ.

“गौरव प्लीज़..मेरी बात……”

आगे कुछ नही बोल पाई कामिनी क्योंकि गोली उसके सर में लगी सीधी. गजब का निशाना था गौरव का.

“भैया प्लीज़…” संजीव गिड़गिदाया.

गौरव ने कामिनी को शूट करने के बाद कुमकुम पर बंदूक तान दी.

“नही गौरव मेरी बात….”

गोली उसके भी सर के आर-पार हो गयी.

“चल निकल यहाँ से वरना तुझे भी मार डालूँगा.” गौरव ने कहा.

संविव ने फ़ौरन कपड़े पहने और चुपचाप वहाँ से निकल गया. गौरव भी फ्लॅट को लॉक करके वहाँ से निकल गया.

मोहित संजीव और गौरव के जाने के बाद चुपचाप फ्लॅट में घुसा. जब वो बेडरूम में पहुँचा तो दंग रह गया.

“ओह माइ गॉड… दोनो को मार दिया उसने. अपने भाई को क्यों नही मारा.” मोहित ने कहा.

मोहित ने ज़्यादा देर वहाँ रुकना ठीक नही समझा और फ़ौरन वहाँ से निकल गया. उसने ये बात फ़ौरन रोहित को फोन करके बताई.

“दोनो लड़कियों को गोली मार दी उसने. ब्लॅक स्कॉर्पियो भी है उसके पास.”

“ह्म्म मुझे पता है कि ब्लॅक स्कॉर्पियो है उसके पास. मैं अभी देल्ही पहुँचा हूँ. अपनी बहन को यहाँ छ्चोड़ने आया था. आ कर देखता हूँ कि क्या माजरा है.”

रोहित देल्ही से लौट-ते ही उस फ्लॅट पर गया. मगर उसे वहाँ कोई लाश नही मिली. मोहित भी उसके साथ ही था.

“सर मैने अपनी आँखो से देखी थी दोनो लड़कियों की लाश”

“इसका मतलब गायब कर दी उसने डेड बॉडीस. इस घटना के बाद ये गौरव मेहरा प्राइम सस्पेक्ट बन गया है.”

“बिल्कुल सर. और उसके पास ब्लॅक स्कॉर्पियो भी है.” मोहित ने रोहित को दीपिका की कही बाते भी बता दी.

“ये सब सुन के तो ये गौरव मेहरा ही साइको लगता है.”

रोहित को कतल का कोई नामो निशान तक नही मिला था उस फ्लॅट में.

"मोहित, तुम्हारे पास गौरव मेहरा और उसके भाई की फोटो है ना?"

"जी हां हैं."

"एक-एक कॉपी मुझे दे दो. पद्‍मिनी से सिनाक्त करवा लेता हूँ. ये दोनो भाई किसी साइको से कम नही हैं."

मोहित ने स्नॅप्स रोहित को दे दी.

"गौरव मेहरा से बाद में मिलूँगा पहले ये स्नॅप्स पद्‍मिनी को दिखा कर आता हूँ."

"आज़ यू विस" मोहित ने कहा.

रोहित वो स्नॅप्स ले कर सीधा पद्‍मिनी के घर पहुँच गया. उसने वो स्नॅप्स राज शर्मा को थमा दी और बोला,"ये स्नॅप्स पद्‍मिनी को दिखाओ और पूछो कि क्या इनमे से कोई साइको है."

"सर वो अभी बहुत परेशान है. किसी से कोई भी बात नही करना चाहती वो."

"मैं समझ रहा हूँ पर हम हाथ पर हाथ रख कर नही बैठ सकते. पद्‍मिनी से रिक्वेस्ट करो वो मान जाएगी. उसे बस ये स्नॅप्स देख कर हां या ना में ही तो जवाब देना है. जाओ ट्राइ करो जा कर."

राज शर्मा स्नॅप्स ले कर घर के दरवाजे की तरफ बढ़ा. उस वक्त रात के 10 बज रहे थे. राज शर्मा को डर लग रहा था दरवाजा खड़काते हुए. मगर उसने खड़का ही दिया.

"क्या है अब?" पद्‍मिनी ने पूछा

"रोहित सर कुछ स्नॅप्स लाए हैं. देख लीजिए हो सकता है इनमे से कोई साइको हो." राज शर्मा ने स्नॅप्स पद्‍मिनी की तरफ बढ़ाते हुए कहा.

पद्‍मिनी ने स्नॅप्स पकड़ ली और गौर से देखने लगी. कुछ कन्फ्यूज़्ड सी हो गयी वो गौरव मेहरा की स्नॅप्स देखते हुए. रोहित दूर से पद्‍मिनी के रिक्षन को अब्ज़र्व कर रहा था. पद्‍मिनी को कन्फ्यूज़्ड अवस्था में देख कर वो तुरंत पद्‍मिनी के पास आया और बोला, क्या हुआ पद्‍मिनी, क्या यही साइको है"

"मैं ठीक से कुछ नही कह सकती. मुझे लगता है अब मैं उसका चेहरा भूल चुकी हूँ."

"क्या ... ...ऐसा कैसे हो सकता है."

"मुझे जो लग रहा है मैने बोल दिया. वैसे भी डरी हुई थी मैं उस वक्त. उसका चेहरा मुझे हल्का हल्का याद रहा. मगर अब सब धुंधला धुंधला हो गया है."

"ओह नो पद्‍मिनी ...अगर ऐसा है तो हमारा काम और भी मुस्किल हो जाएगा." रोहित ने कहा.

"मेरा दिमाग़ मेरे बस में नही है. सब खो गया है...बिखर गया है. अब इंतेज़ार है तो बस इस बात का कि वो साइको मुझे भी मार दे आकर ताकि मुझे इस जिंदगी से छुटकारा मिले." ये कह कर दरवाजा पटक दिया उसने.

रोहित और राज शर्मा एक दूसरे को देखते रह गये.

"अब क्या होगा सर"

"पद्‍मिनी ट्रौमा में है. ऐसे में मेमोरी लॉस हो जाना स्वाभाविक है. वैसे भी एक झलक ही तो देखी थी उसने साइको की. कोई बात नही. अब कुछ और सोचना होगा."

वो दोनो बाते कर ही रहे थे कि एक कार रुकी घर के बाहर. उसमे से एक व्यक्ति निकला और घर की तरफ बढ़ा.

मगर गन्मन ने उसे पीछे ही रोक लिया. रोहित और राज शर्मा उसके पास आ गये. रोहित ने पूछा, "किस से मिलना है आपको."

"मुझे पद्‍मिनी से मिलना है."

"क्यों मिलना है?"

"शी ईज़ माइ वाइफ. आपको बताने की ज़रूरत नही है कि क्यों मिलना है."

“क्या …” राज शर्मा और रोहित एक साथ बोले.

राज शर्मा और रोहित दोनो ही शॉक्ड हो गये पद्‍मिनी के हज़्बेंड को देख कर.

वो देखते रहे और वो घर की तरफ बढ़ गया.

“एक मिनिट…तुम्हारे पास क्या सबूत है की तुम पद्‍मिनिन के पति हो.” रोहित ने पूछा.

“पद्‍मिनी बता देगी अभी. उस से मिल तो लेने दो.”

“ह्म्म ठीक है…आओ.” रोहित ने कहा.

सुरेश रोहित और राज शर्मा के साथ दरवाजे की तरफ बढ़ा.

क्रमशः........................

......

BAAT EK RAAT KI--80

gataank se aage.................

Mohit vahan se jaane hi wala tha ki use kuch halchal sunaayi di apne piche. Usne mud kar dekha to paaya ki ek ladki bilkul nangi uski taraf badh rahi hai.

Usne isaaro mein pucha, “kaun ho tum.”

Mohit thoda ghabra gaya phir us ladki ke paas aaya aur bola, “kamini ji se milne aaya tha par vo abhi busy hai. baad mein aaunga.”

“main to busy nahi hun. Mujhe bata dijiye.”

“aap kaun hain.”

“mera naam kumkum hai.” us ladki ne kaha aur mohit ka ling pakad liya.

“dekhiye main is kaam ke liye nahi aaya tha.”

“koyi baat nahi aa gaye hain to ye kaam bhi ho jaaye.”

“ji nahi maaf kijiye.” Mohit use jhatka de kar vahan se baahar aa gaya.

“uff kya musibat hai. investigation karni kitni muskil hoti hai .” mohit vahan se jhatpat nikal liya.

Kumkum us bedroom mein ghus gayi jisme kamini aur kumkum the.

“kumkum tu kaha ghum rahi hai. chal kamini ke saath mil kar tu bhi suck kar.”

“tumhaare bhaiya ko pata chal gaya na to hamaara khun suck kar lenge vo.” Kumkum ne muskuraate hue kaha.

“bhaiya to apni duniya mein khoye rahte hain aajkal. Unhe kuch pata nahi chalega.”

Kumkum paas aa gayi aur kamini ke paas baith kar vo sanjiv ki balls ko suck karne lagi. Kamini uske ling ko choos rahi thi aur kumkum uski balls ko.

“aaahhhh good double dhamaka” Sanjiv ne kaha

Kuch der tak vo yu hi suck karte rahe.

“pahle kaun dalvaayega.” Sanjiv ne pucha.

“hum dono taiyaar hain. Tum hi taiy karo kiske ander daalna hai.” kamini ne hanste hue kaha.

Sanjiv ne kamini ko bistar par patka aur chadh gaya uske upar. Ek jhatke mein usne pura lund uski chut mein daal diya.

“aaahhhh” kamini karaah uthi.

“tum bhi paas mein late jaao. Ek saath dono ki lunga” sanjiv ne kaha.

Kumkum late gayi kamini ke baaju mein. Kuch der sanjiv kamini ke ander dhakke marta raha. Phir usne achaanak lund nikaala baahar aur kumkum ke upar chadh gaya aur uski chut mein lund ghusa diya.

“aaahhhh yes…ooohh sanjiv.” Kumkum karaah uthi.

Sanjiv ka ek haath kamini ke unhaaro ko masal raha tha aur ek haath kumkum ke ubhaaro ko masal raha tha. par kumkum ki chut mein lund puri raftaar se ghum raha tha.

Kuch der kumkum ki chut ka aanand lene ke baad sanjiv vaapis kamini par chadh gaya aur puri raftaar se fucking karne laga. Jaldi hi vo dher ho gaya kamini ke upar. Kamini bhi bah gayi uske saath hi.

“mera kya hoga ab. Tum dono ka to orgasm ho gaya. mere orgasm ka kya.”

“bas abhi thodi der mein taiyaar ho jaaunga.”

Mohit bhaag kar apni bike start karne laga to usne dekha ki flat ke baahar ek black scorpio aakar ruki hai. Usme se gaurav mehra nikla aur sidha kamini ke flat ki taraf badha.

“kuch gadbad hone wali hai is flat mein aaj.” Mohit ne man hi man socha.

Gaurav mehra ke paas master ki thi flat ki. Lock khol kar sidha bedroom mein aa gaya. jab vo vahan pahuncha to sanjiv ke saath kamini aur kumkum aankhe miche padi thi.

“bahut badhiya.” Gaurav mehra ne kaha.

“Gaurav …” kamini aur kumkum dono ne ek saath kaha.

Gaurav ne bandook taan di kamini ki taraf.

“gaurav please..meri baat……”

Aage kuch nahi bol paayi kamini kyonki goli uske sar mein lagi sidhi. Gajab ka nishaana tha gaurav ka.

“bhaiya please…” sanjiv gidgidaaya.

Gaurav ne kamini ko shoot karne ke baad kumkum par bandook taan di.

“nahi gaurav meri baat….”

Goli uske bhi sar ke aar-paar ho gayi.

“chal nikal yahan se varna tujhe bhi maar daalunga.” Gaurav ne kaha.

Sanviv ne fauran kapde pahne aur chupchaap vahan se nikal gaya. gaurav bhi flat ko lock karke vahan se nikal gaya.

Mohit sanjiv aur gaurav ke jaane ke baad chupchaap flat mein ghusa. Jab vo bedroom mein pahuncha to dang rah gaya.

“oh my god… dono ko maar diya usne. Apne bhai ko kyon nahi maara.” Mohit ne kaha.

Mohit ne jyada der vahan rukna thik nahi samjha aur faurn vahan se nikal gaya. usne ye baat fauran rohit ko phone karke bataayi.

“dono ladkiyon ko goli maar di usne. Black scorpio bhi hai uske paas.”

“hmm mujhe pata hai ki black scorpio hai uske paas. Main abhi delhi pahuncha hun. Apni bahan ko yahan chhodne aaya tha. aa kar dekhta hun ki kya maajra hai.”

Rohit delhi se laut-te hi us flat par gaya. magar use vahan koyi laash nahi mili. Mohit bhi uske saath hi tha.

“sir maine apni aankho se dekhi thi dono ladkiyon ki laash”

“iska matlab gaayab kar di usne dead bodies. Is ghatna ke baad ye gaurav mehra prime suspect ban gaya hai.”

“bilkul sir. Aur uske paas black scorpio bhi hai.” mohit ne rohit ko dipika ki kahi baate bhi bata di.

“ye sab sun ke to ye gaurav mehra hi psycho lagta hai.”

Rohit ko katal ka koyi naamo nishaan tak nahi mila tha us flat mein.

"mohit, tumhaare paas gaurav mehra aur uske bhai ki photo hai na?"

"ji haan hain."

"ek-ek copy mujhe de do. Padmini se sinaakth karva leta hun. Ye dono bhai kisi psycho se kam nahi hain."

Mohit ne snaps rohit ko de di.

"gaurav mehra se baad mein milunga pahle ye snaps padmini ko dikha kar aata hun."

"as you wis" mohit ne kaha.

Rohit vo snaps le kar sidha padmini ke ghar pahunch gaya. Usne vo snaps Raj sharma ko thama di aur bola,"ye snaps padmini ko dikhaao aur pucho ki kya inme se koyi psycho hai."

"sir vo abhi bahut pareshaan hai. Kisi se koyi bhi baat nahi karna chaahti vo."

"main samajh raha hun par hum haath par haath rakh kar nahi baith sakte. Padmini se request karo vo maan jaayegi. Use bas ye snaps dekh kar haan ya na mein hi to jawaab dena hai. Jaao try karo ja kar."

Raj sharma snaps le kar ghar ke darvaaje ki taraf badha. Us vakt raat ke 10 baj rahe the. Raj sharma ko dar lag raha tha darvaaja khadkaate hue. Magar usne khadka hi diya.

"kya hai ab?" padmini ne pucha

"rohit sir kuch snaps laaye hain. Dekh lijiye ho sakta hai inme se koyi psycho ho." Raj sharma ne snaps padmini ki taraf badhaate hue kaha.

Padmini ne snaps pakad li aur gaur se dekhne lagi. Kuch confused si ho gayi vo gaurav mehra ki snaps dekhte hue. Rohit dur se padmini ke reaction ko observe kar raha tha. Padmini ko confused avastha mein dekh kar vo turant padmini ke paas aaya aur bola, kya hua padmini, kya yahi psycho hai"

"main thik se kuch nahi kah sakti. Mujhe lagta hai ab main uska chehra bhul chuki hun."

"kya ... ...aisa kaise ho sakta hai."

"mujhe jo lag raha hai maine bol diya. Vaise bhi dari huyi thi main us vakt. Uska chehra mujhe halka halka yaad raha. Magar ab sab dhundhala dhundhala ho gaya hai."

"oh no padmini ...agar aisa hai to hamaara kaam aur bhi muskil ho jaayega." rohit ne kaha.

"mera dimag mere bas mein nahi hai. Sab kho gaya hai...bikhar gaya hai. Ab intezaar hai to bas is baat ka ki vo psycho mujhe bhi maar de aakar taanki mujhe is jindagi se chutkaara mile." ye kah kar darvaaja patak diya usne.

Rohit aur Raj sharma ek dusre ko dekhte rah gaye.

"ab kya hoga sir"

"padmini trauma mein hai. Aise mein memory loss ho jaana swabhaavik hai. Vaise bhi ek jhalak hi to dekhi thi usne psycho ki. Koyi baat nahi. Ab kuch aur sochna hoga."

Vo dono baate kar hi rahe the ki ek car ruki ghar ke baahar. Usme se ek vyakti nikla aur ghar ki taraf badha.

Magar gunman ne use piche hi rok liya. Rohit aur Raj sharma uske paas aa gaye. Rohit ne pucha, "kis se milna hai aapko."

"mujhe padmini se milna hai."

"kyon milna hai?"

"she is my wife. Aapko bataane ki jaroorat nahi hai ki kyon milna hai."

“kya …” Raj sharma aur rohit ek saath bole.

Raj sharma aur rohit dono hi shocked ho gaye padmini ke husband ko dekh kar.

Vo dekhte rahe aur vo ghar ki taraf badh gaya.

“ek minute…tumhaare paas kya saboot hai ki tum padminin ke pati ho.” Rohit ne pucha.

“padmini bata degi abhi. Us se mil to lene do.”

“hmm thik hai…aao.” Rohit ne kaha.

Suresh rohit aur Raj sharma ke saath darvaaje ki taraf badha.

Kramashah..............................

rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:39

बात एक रात की--81

गतान्क से आगे.................

रोहित ने बेल बजाई.

“अब क्या है. मुझे परेशान क्यों…..” पद्‍मिनी बोलते बोलते रुक गयी.

“कैसी हो पद्‍मिनी.” सुरेश ने कहा.

पद्‍मिनी ने कोई जवाब नही दिया.

“पद्‍मिनी क्या ये तुम्हारा पति है.” रोहित ने पद्‍मिनी से पूछा.

“पति नही है…पति था. चले जाओ यहाँ से. मुझे तुमसे कोई बात नही करनी है.” पद्‍मिनी ने दरवाजा वापिस बंद कर दिया.

“पद्‍मिनी रूको.” सुरेश चिल्लाया और दरवाजा पीटने लगा.

“बहुत खूब. पद्‍मिनी के पेरेंट्स के बाद अब सारी जायदाद पद्‍मिनी की है. सब कुछ तुम्हे मिल सकता है, है ना. वाह. हेमंत सही कहता था. तुम सच में राइडर हो. तुम्हारी हर बात में एक राइडर छुपा होता है.”

“बकवास मत करो…मैं अपनी पत्नी से प्यार करता हूँ. हमारे बीच मतभेद हैं, पर हम वो मिल जुल कर सुलझा लेंगे.”

“सुलझा लेना मगर अभी यहाँ से दफ़ा हो जाओ. पद्‍मिनी की सुरक्षा के लिए पोलीस लगी हुई है यहाँ. यहाँ कोई तमासा नही चाहता मैं. वो अभी तुमसे बात नही करना चाहती. बाद में ट्राइ करना मिस्टर राइडर.”

“मेरा नाम सुरेश है. मैं कोई राइडर नही हूँ .”

“ पता है मुझे. पर क़ानूनी भासा में आपने जो हरकत की यहाँ आकर उस से आपको राइडर ही कहा जाएगा. पद्‍मिनी के प्रति अचानक ये प्यार एक राइडर लिए हुए है. पद्‍मिनी की दौलत मिल रही है आपको…इस प्यार के नाटक के बदले…हर्ज़ ही क्या हैं क्यों ..”

“मैं तुम्हारी बकवास सुन-ने नही आया हूँ यहाँ. मिल लूँगा मैं बाद में पद्‍मिनी से. ये मेरे और उसके बीच की बात है तुम अपनी टाँग बीच में मत अड़ाओ.”

“सर ठीक कह रहे हैं मिस्टर राइडर, चले जाओ यहाँ से वरना तुम्हे साइको समझ कर एनकाउंटर कर देंगे तुम्हारा.” राज शर्मा ने कहा.

“देख लूँगा तुम दोनो को मैं.” सुरेश पाँव पटक कर चला गया.

“राज शर्मा तुम यहाँ पूरा ध्यान रखना. जब तक साइको पकड़ा नही जाता हमें पद्‍मिनी की सुरक्षा में कोई कमी नही रखनी.”

रोहित चल दिया वहाँ से थाने की तरफ अपनी जीप ले कर.

“ये पिंकी का फोन क्यों नही मिल रहा.” रोहित ने कहा.

रोहित ने एक बार फिर से ट्राइ किया. इस बार फोन मिल गया.

“हेलो पिंकी…कैसी हो तुम.”

“ठीक हूँ भैया.”

“देखो…देल्ही में माहॉल ठीक नही है आजकल. ज़्यादा इधर-उधर मत घूमना. घर पर ही रहना.”

“जी भैया मैं घर पर ही रहूंगी. आप अपना ख्याल रखना.”

पिंकी को फोन करने के बाद रोहित ने रीमा को फोन मिलाया.

“हाई जानेमन कैसी हो. अब तुम्हारे भैया को पता चल गया है. अब कैसे रेल बनाउन्गा मैं तुम्हारी… .”

फोन के दूसरी तरफ रीमा नही चौहान था. ये सुनते ही पागल हो गया वो

“साले कामीने…कुत्ते…रख फोन. आ रहा हूँ अभी थाने मैं. आज तुझे जिंदा नही छ्चोड़ूँगा. …”

रोहित के तो हाथ से फोन ही छूट गया. बात ही कुछ ऐसी थी

“अब थाने जाना ठीक नही होगा. प्राइवेट बाते सुन ली कमिने ने. चल कर इस गौरव मेहरा की खबर लेता हूँ.”

रोहित गौरव मेहरा के घर की तरफ चल दिया.

गौरव मेहरा के घर पहुँच कर उसने बेल बजाई.

एक नौकर ने दरवाजा खोला.

“यस?”

“गौरव मेहरा है घर पे.”

“जी हां हैं है.”

“बुलाओ उसे. कहो कि इनस्पेक्टर रोहित आया है. कुछ पूछताछ करनी है उस से.” रोहित ने कहा.

“आपने अपायंटमेंट ली है क्या.”

“क्या बकवास कर रहे हो. मैं इनस्पेक्टर हूँ. उस से मिलने के लिए मुझे अपायंटमेंट की कोई ज़रूरत नही है. उस से कहो की चुपचाप आ जाए मुझसे मिलने वरना घसीट कर ले जाउन्गा उसे यहाँ से.”

नौकर चला गया वहाँ से. कुछ देर बाद गौरव मेहरा आया. उसके चेहरे पर गुस्सा था.

“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई बिना मेरी इज़ाज़त के यहाँ तक आने की.”

“ज़्यादा बकवास मत कर. ये बता कि कामिनी और कुमकुम कहाँ हैं.”

“कौन कामिनी और कौन कुमकुम…मैं इन्हे नही जानता.”

“अच्छा…जब थाने में ले जा कर गान्ड पे डंडे मारूँगा ना तो सब याद आ जाएगा तुझे.”

गौरव मेहरा ने तुरंत पिस्टल तान दी रोहित पर और फाइयर किया उसके सर पर. लेकिन रोहित पहले से तैयार था इस बात के लिए. झुक गया नीचे फ़ौरन और दबोच लिया गौरव मेहरा को और पिस्टल रख दी उसके सर पर.

“बाकी की बाते तो होती रहेंगी. फिलहाल तुझे पोलीस वाले पर गोली चलाने के जुर्म में गिरफ्तार करता हूँ मैं.”

रोहित गौरव मेहरा को गिरफ्तार करके थाने ले आया.

"इनस्पेक्टर बहुत बड़ी भूल कर रहे हो तुम. तुम्हे बर्बाद कर दूँगा मैं."

"अपनी चिंता कर तू, मेरी चिंता छ्चोड़ दे. और हां तैयार करले अपनी गान्ड को. डंडा ले कर आ रहा हूँ मैं. मार-मार कर लाल कर दूँगा."

"तुझे ऐसी मौत दूँगा कि तू याद रखेगा."

"याद तो तू रखेगा मुझे...चल अंदर." रोहित ने गौरव मेहरा को सलाखों के पीछे धकैल दिया और ताला लगा दिया.

"20 मिनिट हैं तुम्हारे पास. याद कर्लो कि कामिनी और कुमकुम कौन हैं और उन्हे मार कर कहाँ गायब किया है तुमने. 20 मिनिट में याद नही कर पाए अगर तो फिर मुझे मत बोलना बाद में कि क्यों डंडे मार रहे हो गान्ड पे." रोहित ये बोल कर चला गया वहाँ से.

गौरव मेहरा दाँत भींच कर रह गया.

रोहित अपने कॅबिन कें आ गया. जैसी ही वो कुर्सी पर बैठा भोलू भागता हुआ कॅबिन में आया.

"सर अभी-अभी चौहान सिर आए थे. आपको पूछ रहे थे. बहुत गुस्से में लग रहे थे वो."

"ह्म्म...अब तो नही हैं ना वो यहाँ."

"नही तभी चले गये थे."

"गुड...छोड़ो चौहान को चौहान को देख लेंगे बाद में. तुम फिलहाल अपने रेकॉर्ड्स में चेक करो. इस गौरव मेहरा का ज़रूर कोई पोलीस रेकॉर्ड होगा."

"जी सर अभी चेक करता हूँ."

भोलू ये बोल कर वहाँ से निकला ही था कि एक लेडी कमरे में घुस गयी.

"क्या मैं पूछ सकती हूँ कि आपने गौरव मेहरा को क्यों गिरफ्तार किया है."

"हू आर यू, बाइ दा वे" रोहित ने पूछा.

"मैं स्वेता गुप्ता हूँ, गौरव की वकील."

"खून किए हैं उसने, वो भी 2. ये वजह काफ़ी है उसे गिरफ्तार करने की."

"शो मी अरेस्ट वॉरेंट" स्वेता गुप्ता ने कहा.

"उसने मुझ पर फाइयर किया. इसलिए उठा लाया उसे मैं यहाँ."

"ये इल्लीगल डिटेन्षन है इनस्पेक्टर."

"लीगल ओर इल्लीगल वो बाद में देखेंगे. आप यहाँ से जायें अभी."

तभी रोहित का फोन बज उठा. फोन शालिनी का था.

"यस मेडम?" रोहित ने कहा.

"रोहित, क्या तुमने गौरव मेहरा को गिरफ्तार किया है?"

"जी हां मेडम."

"क्यों अरेस्ट वॉरेंट के बिना तुम कैसे गिरफ्तार कर सकते हो उसे."

"मेडम, उसने मुझ पर फाइयर किया."

"ओह"

"इसलिए मुझे उसे उसी वक्त गिरफ्तार करना पड़ा."

"फिलहाल उसे छ्चोड़ दो. चीफ मिनिस्टर का फोन आया था मुझे अभी अभी. दुबारा पकड़ लेना उसे...मगर पूरे प्रोसीजर से."

"ठीक है मेडम, जैसा आप कहें." रोहित ने कहा.

फोन रखने के बाद रोहित ने भोलू को आवाज़ दी.

"जी सर."

"छ्चोड़ दो गौरव मेहरा को फिलहाल."

"ओके सर."

"स्वेता जी अब तो खुश हैं ना आप. पर उम्मीद है कि जल्द मुलाक़ात होगी. घसीट कर लाउन्गा मैं गौरव मेहरा को उसके घर से. वो भी वॉरेंट के साथ."

"तब की तब देखेंगे." स्वेता ने कहा.

भोलू, गौरव मेहरा को ले आया.

"क्या हुआ मिस्टर पांडे निकल गयी सारी हेकड़ी" गौरव मेहरा ने कहा.

"हाहहाहा... हेकड़ी तो तेरी निकली है बेटा...मुझे सबूत मिल जाने दे...घसीट कर लाउन्गा तुझे वापिस यही" रोहित ने कहा.

"चलो स्वेता..." गौरव ने कहा.

गौरव स्वेता को लेकर बाहर आ गया.

"सारा मूड खराब कर दिया साले ने. तुझे अब मेरा मूड ठीक करना होगा." गौरव ने कहा.

"सर मुझे एक केस के सिलसिले में देल्ही निकलना है तुरंत."

ये सुनते ही गौरव ने बाल पकड़ लिए स्वेता के और बोला, "बहाना बनाती है साली. तुझे कहा था ना कि जब मेरा मन होगा तुझे देनी पड़ेगी."

"आअहह....सॉरी सर...प्लीज़ बॉल छ्चोड़ दीजिए आअहह" स्वेता कराह उठी.

“चल बैठ जल्दी अपनी कार में. तेरे साथ ही चलूँगा मैं और खुद ड्राइव करूँगा. तेरी कार में भी राइड करूँगा और तुझे भी राइड करूँगा, साली कुतिया.”

स्वेता चुपचाप अपनी कार में बैठ गयी. गौरव ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और कार स्टार्ट कर दी.

“तूने आने में इतनी देर क्यों की. तुझे पता है ना मुझे लापरवाही बिल्कुल पसंद नही है.”

“सर जैसे ही मेडम ने फोन किया मैं थाने आ गयी.”

“वो साली तो चाहती ही है कि मैं जैल चला जाउ. मुझसे छुटकारा चाहती है वो. पर मुझसे छुटकारा आसान नही. ये तो तुम भी समझ ही गयी होगी अब.” गौरव ने कहा.

“सर कहा ले जा रहे हैं आप मुझे.”

“अपने घर”

“पर घर पर तो मेडम हैं …”

“तो रहने दो. आज उसके सामने ही लूँगा तेरी. देखता हूँ कैसे रिक्ट करती है.”

गौरव स्वेता को अपने घर ले आया.

क्रमशः........................

......

BAAT EK RAAT KI--81

gataank se aage.................

Rohit ne bell bajaayi.

“ab kya hai. mujhe pareshaan kyon…..” padmini bolte bolte ruk gayi.

“kaisi ho padmini.” Suresh ne kaha.

Padmini ne koyi jawaab nahi diya.

“padmini kya ye tumhaara pati hai.” rohit ne padmini se pucha.

“pati nahi hai…pati tha. chale jaao yahan se. mujhe tumse koyi baat nahi karni hai.” padmini ne darvaaja vaapis band kar diya.

“padmini ruko.” Suresh chillaya aur darvaaja pitne laga.

“bahut khub. Padmini ke parents ke baad ab saari jaydaad padmini ki hai. sab kuch tumhe mil sakta hai, hai na. vaah. Hemant sahi kahta tha. tum sach mein rider ho. Tumhaari har baat mein ek rider chupa hota hai.”

“bakwaas mat karo…main apni patni se pyar karta hun. Hamaare bich matbhed hain, par hum vo mil jul kar suljha lenge.”

“suljha lena magar abhi yahan se dafa ho jaao. Padmini ki suraksha ke liye police lagi huyi hai yahan. Yahan koyi tamaasa nahi chaahta main. Vo abhi tumse baat nahi karna chaahti. Baad mein try karna mr rider.”

“mera naam suresh hai. main koyi rider nahi hun .”

“ pata hai mujhe. Par kaanuni bhaasa mein aapne jo harkat ki yahan aakar us se aapko rider hi kaha jaayega. Padmini ke prati achaanak ye pyar ek rider liye hue hai. padmini ki daulat mil rahi hai aapko…is pyar ke naatak ke badle…harz hi kya hain kyon ..”

“main tumhaari bakwaas sun-ne nahi aaya hun yahan. Mil lunga main baad mein padmini se. ye mere aur uske bich ki baat hai tum apni taang bich mein mat adaao.”

“sir thik kah rahe hain mr rider, chale jaao yahan se varna tumhe psycho samajh kar encounter kar denge tumhaara.” Raj sharma ne kaha.

“dekh lunga tum dono ko main.” Suresh paanv patak kar chala gaya.

“Raj sharma tum yahan pura dhyaan rakhna. Jab tak psycho pakda nahi jaata hamein padmini ki suraksha mein koyi kami nahi rakhni.”

Rohit chal diya vahan se thaane ki taraf apni jip le kar.

“ye pinki ka phone kyon nahi mil raha.” Rohit ne kaha.

Rohit ne ek baar phir se try kiya. Is baar phone mil gaya.

“hello pinki…kaisi ho tum.”

“thik hun bhaiya.”

“dekho…delhi mein maahol thik nahi hai aajkal. Jyada idhar-udhar mat ghumna. Ghar par hi rahna.”

“ji bhaiya main ghar par hi rahungi. Aap apna khyaal rakhna.”

Pinki ko phone karne ke baad rohit ne rima ko phone milaaya.

“hi jaaneman kaisi ho. Ab tumhaare bhaiya ko pata chal gaya hai. ab kaise rail banaaunga main tumhaari… .”

Phone ke dusri taraf rima nahi chauhan tha. ye sunte hi paagal ho gaya vo

“saale kamine…kutte…rakh phone. Aa raha hun abhi thaane main. Aaj tujhe jinda nahi chhodunga. …”

Rohit ke to haath se phone hi chhut gaya. baat hi kuch aisi thi

“ab thaane jaana thik nahi hoga. Private baate sun li kamine ne. chal kar is gaurav mehra ki khabar leta hun.”

Rohit gaurav mehra ke ghar ki taraf chal diya.

Gaurav mehra ke ghar pahunch kar usne bell bajaayi.

Ek naukar ne darvaaja khola.

“yes?”

“gaurav mehra hai ghar pe.”

“ji haan hain hai.”

“bulaao use. Kaho ki inspector rohit aaya hai. kuch puchtaach karni hai us se.” rohit ne kaha.

“aapne appointment li hai kya.”

“kya bakwaas kar rahe ho. Main inspector hun. Us se milne ke liye mujhe appointment ki koyi jaroorat nahi hai. us se kaho ki chupchaap aa jaaye mujhse milne varna ghasit kar le jaaunga use yahan se.”

Naukar chala gaya vahan se. kuch der baad gaurav mehra aaya. Uske chehre par gussa tha.

“tumhaari himmat kaise huyi bina meri izaazat ke yahan tak aane ki.”

“jyada bakwaas mat kar. Ye bata ki kamini aur kumkum kaha hain.”

“kaun kamini aur kaun kumkum…main inhe nahi jaanta.”

“atcha…jab thaane mein le ja kar gaanD pe dande maarunga na to sab yaad aa jaayega tujhe.”

Gaurav mehra ne turant pistol taan di rohit par aur fire kiya uske sar par. Lekin rohit pahle se taiyaar tha is baat ke liye. Jhuk gaya niche fauran aur daboch liya gaurav mehra ko aur pistal rakh di uske sar par.

“baaki ki baate to hoti rahengi. Philhaal tujhe police wale par goli chalaane ke jurm mein giraftaar karta hun main.”

rohit gaurav mehra ko giraftaar karke thaane le aaya.

"inspector bahut badi bhul kar rahe ho tum. Tumhe barbaad kar dunga main."

"apni chinta kar tu, meri chinta chhod de. Aur haan taiyaar karle apni gaanD ko. Danda le kar aa raha hun main. Maar-maar kar laal kar dunga."

"tujhe aisi maut dunga ki tu yaad rakhega."

"yaad to tu rakhega mujhe...chal ander." rohit ne gaurav mehra ko salaakhon ke piche dhakail diya aur taala laga diya.

"20 minute hain tumhaare paas. Yaad karlo ki kamini aur kumkum kaun hain aur unhe maar kar kaha gaayab kiya hai tumne. 20 minute mein yaad nahi kar paaye agar to phir mujhe mat bolna baad mein ki kyon dande maar rahe ho gaanD pe." rohit ye bol kar chala gaya vahan se.

Gaurav mehra daant bhinch kar rah gaya.

Rohit apne cabin kein aa gaya. Jaisi hi vo kursi par baitha bholu bhaagta hua cabin mein aaya.

"sir abhi-abhi chauhan sir aaye the. Aapko puch rahe the. Bahut gusse mein lag rahe the vo."

"hmm...ab to nahi hain na vo yahan."

"nahi tabhi chale gaye the."

"good...chodo chauhan ko chauhan ko dekh lenge baad mein. Tum philhaal apne records mein check karo. Is gaurav mehra ka jaroor koyi police record hoga."

"ji sir abhi check karta hun."

Bholu ye bol kar vahan se nikla hi tha ki ek lady kamre mein ghus gayi.

"kya main puch sakti hun ki aapne gaurav mehra ko kyon giraftaar kiya hai."

"who are you, by the way" rohit ne pucha.

"Main sweta gupta hun, gaurav ki vakil."

"khoon kiye hain usne, vo bhi 2. Ye vajah kaafi hai use giraftaar karne ki."

"show me arrest warrant" sweta gupta ne kaha.

"usne mujh par fire kiya. Isliye utha laaya use main yahan."

"ye illegal detention hai inspector."

"legal or illegal vo baad mein dekhenge. Aap yahan se jaayein abhi."

Tabhi rohit ka phone baj utha. Phone shalini ka tha.

"yes madam?" rohit ne kaha.

"rohit, kya tumne gaurav mehra ko giraftaar kiya hai?"

"ji haan madam."

"kyon arrest warrant ke bina tum kaise giraftaar kar sakte ho use."

"madam, usne mujh par fire kiya."

"oh"

"isliye mujhe use usi vakt giraftaar karna pada."

"philhaal use chhod do. Chief minister ka phone aaya tha mujhe abhi abhi. Dubaara pakad lena use...magar pure procedure se."

"thik hai madam, jaisa aap kahein." rohit ne kaha.

Phone rakhne ke baad rohit ne bholu ko awaaj di.

"ji sir."

"chhod do gaurav mehra ko philhaal."

"ok sir."

"sweta ji ab to khuss hain na aap. Par ummid hai ki jald mulaqaat hogi. Ghasit kar laaunga main gaurav mehra ko uske ghar se. Vo bhi warrant ke saath."

"tab ki tab dekhenge." sweta ne kaha.

Bholu, Gaurav mehra ko le aaya.

"kya hua mr panday nikal gayi saari hekdi" gaurav mehra ne kaha.

"hahahaha... Hekdi to teri nikli hai beta...mujhe sabut mil jaane de...ghasit kar laaunga tujhe vaapis yahi" rohit ne kaha.

"chalo sweta..." gaurav ne kaha.

Gaurav sweta ko lekar baahar aa gaya.

"saara mood kharaab kar diya saale ne. Tujhe ab mera mood thik karna hoga." gaurav ne kaha.

"sir mujhe ek case ke shilshile mein delhi nikalna hai turant."

ye sunte hi gaurav ne baal pakad liye sweta ke aur bola, "bahaana banaati hai saali. Tujhe kaha tha na ki jab mera man hoga tujhe deni padegi."

"aaahhhh....sorry sir...please baal chhod dijiye aaahhh" sweta karaah uthi.

“chal baith jaldi apni car mein. Tere saath hi chalunga main aur khud drive karunga. Teri car mein bhi ride karunga aur tujhe bhi ride karunga, Saali kuttiya.”

Sweta chupchaap apni car mein baith gayi. Gaurav driving seat par baith gaya aur car start kar di.

“tune aane mein itni der kyon ki. Tujhe pata hai na mujhe laaparvaahi bilkul pasand nahi hai.”

“sir jaise hi madam ne phone kiya main thaane aa gayi.”

“vo saali to chaahti hi hai ki main jail chala jaaun. Mujhse chutkaara chaahti hai vo. Par mujhse chutkaara asaan nahi. Ye to tum bhi samajh hi gayi hogi ab.” Gaurav ne kaha.

“sir kaha le ja rahe hain aap mujhe.”

“apne ghar”

“par ghar par to madam hain …”

“to rahne do. Aaj uske saamne hi lunga teri. Dekhta hun kaise react karti hai.”

Gaurav sweta ko apne ghar le aaya.

Kramashah..............................