महँगी चूत सस्ता पानी compleet

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rajaarkey
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Re: महँगी चूत सस्ता पानी

Unread post by rajaarkey » 09 Dec 2014 16:23

महँगी चूत सस्ता पानी--8

गतान्क से आगे…………………………….

दीदी अपनी अलसाई आवाज़ में कहती जातीं .."वाह रे वाह ..तू भी कितना कुछ सीख लिया ...मेरी हर जागेह चुदाइ कर रहा है .. देख ना एक चूत के ना मिलने से तुझे और कितनी नयी नयी जागेह मिल रही है मुझे चोद्ने को...........हाां चोद रे किशू ...चोद ले रे ..जहाँ जी चाहे चोद ..सब कुछ तेरा ही तो है ....हाआँ अपनी ख्वाहिश पूरी कर ले..मैं भी तुझे खुश देखना चाहती हूँ ..... आआआहह चाट और चाट ..और चूस ....उईईईईईईई .....हाआँ मेरी नाभि के अंदर जीभ घूसा ...हाआँ ........जीभ से वहाँ भी चोद .....उफफफफफफफफफफ्फ़ ...........आाआऐययईईई.....हाँ हां ऐसे ही ....." वह अपना पेट और उपर कर लेती ..जिस से मेरी जीभ और भी अंदर घूस जाती उनकी नाभि में ....

और मेरा चाटना , चूसना , जांघों को चोद्ना ज़ोर और ज़ोर पकड़ता गया ..उनकी जंघें टाइट और टाइट होती गयी....उनकी जंघें मेरे लौडे के रस से इतनी गीली थीं के मुझे लंड पेलने में कोई दिक्कत नहीं होती ..एक दम मक्खन जैसा था

दीदी की चूत से भी लगातार पानी रिस रहा था, उन्हें अपनी नाभि में मेरे जीभ का चलाना बहुत ही एग्ज़ाइट कर रहा था .....

अपनी चूतड़ उछाल उछाल कर मस्ती में डूबी थीं ..और मैं उन्हें उनके पेट से उनको जकड़ा था , मुलायम और सपाट पेट ....जीभ नाभि के अंदर डाल देता ..और लंड जांघों के बीच एक अजीब मस्ती के सफ़र का आनंद ले रहा था..

"आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह......हाईईईईईईईईई..हाां किशू.........मेला बच्छााआआ ....आआआआअहह ....."

" दिदीइ.....आआआआआ ......बस और नहीं .......ऊऊऊऊऊऊ ..." और मैं उनके जांघों पर जोरदार पिचकारी चोद्ना शुरू कर दिया ...जांघों पर ..उनके पेट पर ...उनकी छाती पर ..लॉडा हाथ से थामे झटके पर झटका देता जाता ..मेरे रस की गर्मी..उसकी तेज़ फूहार से दीदी का सारा बदन झुरजुरी से कांप उठा और वह भी चूतड़ उछाल उछाल कर अपनी चूत से पानी छ्चोड़े जा रही थी ........

हम दोनों के अंदर की सारी मस्ती , सारी खूषी , सारी ललक बाहर आ रही थी ..एक दूसरे पर हम छिड़के जा रहे थे ....

कुछ देर तक हम ऐसे एक दूसरे की बाहों में पड़े थे......

अब तक सुबेह काफ़ी निकल चूकि थी ..बाहर चिड़ियों का चहचाहना और सूरज की किरणों ने हमारी आँखें खोलीं ....

दीदी ने अंगडायाँ लेते हुए मुझे अपने उपर से हटाया ......उफ़फ्फ़ दीदी की अंगड़ाई ने फिर से मेरे अंदर हलचल मचानी शुरू कर दी....

पर इसके पहले के मैं कुछ कर पाता , "बस किशू ....देख अब सब लोग जाग गये हैं ..कोई आ जाए तो मुश्किल हो जाएगी..मैं जा रही हूँ " और वो मेरे लौडे को कस के दबाती हुई बाहर निकल गयी ....

मैं दीदी को देखता रहा.......और फिर मैं भी बाथरूम के अंदर चला गया ...

उस दिन नाश्ते के टेबल पर जब दीदी ने मुझे खिलाना शुरू किया ..मेरी माँ ने दीदी के हाथ थामते हुए कहा "अरे पायल ..अब तो तू इसे अपने हाथ से खाने दे...तू जब चली जाएगी तो किस के हाथ से खाएगा ..क्या भूखा ही रहेगा ..??" और फिर मेरी तरफ देखते हुए कहा "किशू तू भी खुद से खाना शुरू कर दे ..दीदी का लाड़ प्यार बहुत हो गया..!"

मैं जानता था एक दिन ये होनेवाला ही है ..मैं चूप रहा.....मुझे अंदर से जैसे किसी ने झकझोर दिया था..मैं आसमान से सीधे ज़मीन पर आ टपका था..वास्तविकता और सचाई मेरे सामने खड़ी थी.....

दीदी समझ गयीं मुझे गहरा धक्का लगा था ....." ठीक है बुआ ..पर आज तो खिलाने दे ..कल से किशू खुद ही खाएगा ..है ना किशू .....?"

मैं क्या बोलता ??? ..एक बहुत ही आभार से भरी नज़रों से दीदी की ओर देखा ..दीदी अपने आँचल से अपनी आँखें पोंछते हुए मुझे खिलाने लगीं.

शाम को जब स्कूल से आया ..दीदी ने दरवाज़ा खोला ...... आज फिर घर में सन्नाटा था ..

" कहाँ हैं सब लोग दीदी ..???" मैने पूछा ..

'' माँ और बुआ शादी की शॉपिंग को गये हैं और पापा ( मामा) और फूफा ऑफीस से कब तक आएँगे किसे मालूम..????"

मेरे चेहरे पे चमक आ गयी ..मेरा मन गुदगुदी से खिल उठा

मैने दीदी को अपनी बाहों में जाकड़ लिया , अपने सीने से लगाता हुआ उन्हें चूमने लगा

" ओओओओओओह्ह दीदी यानी के हम दोनों अकेले .....??????"

" अरे बाबा अभी तो छ्चोड़ ना किशू ..चल हाथ मुँह धो ले साथ में नाश्ता करते हैं ....फिर कुछ और .." और मुस्कुराते हुए मुझे अपने से अलग किया .

तभी कॉल बेल की तीखी आवाज़ आई........

" अभी कौन आ गया.." मैने झुंझलाते हुए बड़बड़ाता हुआ दरवाज़ा खोला..

बाहर स्वेता दीदी खड़ी थीं.........

मैं एक टक उन को(स्वेता दीदी) देखता रहा....मेरी आँखें चौंधिया गयीं , पालक झपकने को तैयार ही नहीं ....

उन्होने कपड़े इस तरह पहेन रखे थे.....कपड़े बदन ढँकने के बजाए उन्हें और उभार रहे थे...मानों एक एक अंग कपड़ों को चीरता हुआ बाहर आ जाए ...पतली और तंग टाइट ब्लाउस ......उनकी चूचियों की उभार छुपाने की नाकामयाब कोशिश में जुटी थीं ....गले से नीचे नंगा सीना ........साड़ी नाभि से नीचे ....पेट उघ्ड़ा ......आँचल कंधों से फिसलता हुआ .........

" अरे क्या देख रहा है किशू ..मुझे अंदर तो आने दे..क्या बाहर ही खड़ी रहूं..???" स्वेता दीदी की आवाज़ से मेरा ध्यान उनके शरीर से उनकी आवाज़ पर आया....

"ओह..अरे हां आइए ना .." और मैं दरवाज़े से हट ता हुआ उन्हें अंदर आने का इशारा किया....

मटकती हुई चाल से स्वेता दीदी अंदर आईं .....मैं उनके पिछे था ...उनकी मटकती चाल से उनके दोनों चूतड़ साड़ी से उछल बाहर आने को मचल रहे थे.... उधर उनके चूतड़ उछल रहे थे और इधर मेरे पॅंट के अंदर भी उछल कूद मची थी.......

" पायल कहाँ है किशू..?" उन्होने हंसते हुए पूछा .

"दीदी शायद किचन में हैं ...आप जाइए ना ..देख लीजिए .." मेरा गला सूख रहा था .....स्वेता दीदी की मटकती चाल से , उनकी अजीब मुस्कान से ..उनकी तीखी और पैनी नज़रों से ..मानों वह मुझे खा जाना चाहती हों .....

थोड़ी देर बाद दोनों दीदी किचन से बाहर निकलीं ..

पायल दीदी ने कहा " चल किशू मेरे रूम में ...हम तीनों नाश्ता करते हैं ....."

स्वेता दीदी हाआँ में हां मिलाते हुए मुझे अपनी बाहों से अपने बगल भींच लिया , मैं झिझकता हुआ उनके करीब हो गया

" अरे झिझक क्यूँ रहा है किशू ..मैं भी तो तेरे लिए पायल जैसी ही हूँ ना ..बस तू जैसे अपनी पायल दीदी के साथ खूल कर रहता है ना ......मेरे साथ भी ऐसे ही रहना ..क्यूँ पायल मैने ठीक कहा ना ..??" और मुझे अपने से और भी करीब चिपका लिया ...मैं उनके गुदाज और मुलायम शरीर के स्पर्श , उनके बालों की सुगंध , उनके साँसों के झोंकों से मदहोश हुआ जा रहा था

" अरे हां किशू तू ज़रा भी मत हिचकिचा..स्वेता दीदी बहुत अच्छी हैं , तुम्हारे लिए मेरे से कुछ भी कम नहीं ........." और पायल दीदी की इस बात पर दोनों जोरों से हँसने लगी और हम दीदी के कमरे के अंदर आ गये थे ..

मेरी समझ में कुछ कुछ तो आ ही रहा था ..लगता है दीदी ने अपने और मेरे बारे स्वेता दीदी को सब कुछ बता दिया था ......

मुझे स्वेता दीदी ने अपनी गोद में बिठा लिया ...मैने पायल दीदी की ओर देखा ....मानो मैं कह रहा हूँ...." दीदी मैं जब आप की गोद में नहीं बैठ ता इनके गोद में कैसे बैठूं ..??"

दीदी ने मेरी नज़रों की बात समझ ली और कहा " मेरा राजा भाय्या ..आज पहली बार है ना स्वेता दीदी के लिए ..तू उनकी गोद में आज बैठा रह .." और फिर स्वेता दीदी की तरफ देखते हुए कहा .." स्वेता ..किशू अब बहुत बड़ा हो गया है ..... " और फिर दोनों हँसने लगे ..

" हां रे पायल सही कह रही है तू ..मैं भी देख रही हूँ ना .." और उन्होने मेरे पॅंट के अंदर बने तंबू की तरफ इशारा किया .......जो काफ़ी उँचा हो गया था ..मेरे चूतड़ उनकी गद्दे जैसी मुलायम और गर्म जांघों के उपर था और मुझे अच्छा लग रहा था ...

फिर उन्होने झट अपनी उंगलियों से पॅंट के बटन खोल दिए और कहा " देखें तो ज़रा कितना बड़ा हो गया है ...????"

बटन खुलते ही मेरा लंड उछलता हुआ बाहर आ गया.........अभी भी 4-5 इंच के बराबर तो था ही पर काफ़ी मोटा था ...........

स्वेता दीदी ने झट उसे अपनी मुट्ठी से पकड़ लिया और सहलाने लगीं जैसे उसे महसूस कर मेरे बड़े होने का सबूत देख रही हों ..

पायल दीदी ने मुझे खिलते हुए स्वेता दीदी से पूछा.." क्यूँ दीदी ..अब हो गयी ना तस्सली .? कितना बड़ा है अब मेरा किशू ...??"

उनकी पूरी हथेली मेरे मोटे लंड से भरी थी ...स्वेता दीदी उसे हल्के हल्के दबाते हुए कहा "हां री पायल बहुत बड़ा हो गया है " और धीरे से मेरे लंड की चॅम्डी उपर नीचे करने लगीं ..

मेरे पूरे बदन में झुरजुरी होती जा रही थी ...उन दोनों की बातों से स्वेता दीदी से मेरी झिझक भी दूर हो गयी थी.........

दीदी का हाथ मुझे खिला रहा था और स्वेता के हाथ मेरा लंड सहला रहे थे .दोनों दीदी के बीच मैं मस्ती और आनंद के लहरो में हिचकोले ले रहा था..मैने अपने आप को उनके हवाले कर दिया था...

मेरा खाना ख़त्म हो चूका था दीदी ने थाली उठाई और किचन में रख घर के दरवाज़े को अच्छी तरह बोल्ट कर दिया , वापस आईं और हमारे बगल बैठ गयीं

मैं अभी भी स्वेता दीदी की गोद में ही था ........और मेरा लंड उनके हाथ में ...स्वेता दीदी को मेरा चिकना लंड सहलाने में बड़ा मज़ा आ रहा था...... शायद जितना मज़ा मुझे आ रहा था उस से कहीं ज़्यादा उन्हें ..उनकी आँखें बंद थी और अब एक हाथ से मेरा लंड सहला रही थी और दूसरा हाथ अपनी साड़ी के अंदर डालते हुए अपनी चूत सहला रही थी......

दीदी ने स्वेता की हालत देखी.उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा था......पतली और तंग ब्लाउस के अंदर चूचियाँ कड़क हो गयीं थीए , नंगा सीना दिल की तेज़ धड़कनों से उपर नीचे हो रहा था........

उन्होने चूपचाप उनके ब्लाउस के बटन खोल दिए ..ब्लाउस उनके सीने से अलग कर दिया और ब्रा के स्ट्रॅप्स एक झटके में ही खोल दी...उनकी कड़क चूचियाँ मेरे चेहरे पर उछलती हुई लगी.....मैं उनकी चूचियाँ देखता रहा...गोल गोल ..भारी भारी , नुकीली पर गोल घुंडिया एक दम टाइट ........

" अरे देख क्या रहा है मेरे भोले राजा...मेरी चूचियाँ तो ऐसे चूसता है जैसे आम चूसता है.........चल इन्हें भी चूस ..." दीदी ने मुझे बड़े प्यार से फटकारा और स्वेता की एक चूची अपने हाथ से थामते हुए मेरे मुँह में ठूंस दी....

मैं अपनी लप्लपाति जीभ और चुभलाते होंठों से स्वेता की चूची पर टूट पड़ा ...होंठों से दबाते हुए और जीभ से चाट ते हुए ...स्वेता कांप उठी ..उनकी मेरे लंड पर पकड़ और मजबूत हो गयी.........और अपनी चूत का सहलाना भी तेज़ हो गया .......उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी.........आँखें मस्ती में बंद थीं

तभी दीदी उनकी दूसरी जाँघ पर बैठते हुए अपना मुँह उनकी दूसरी चूची पर लगा दिया और लगीं उसे चूसने ...

एक साथ दोनों चूचियों की चूसाई ......स्वेता कांप उठी..उनका सारा बदन सिहर उठा...

"हाइईईईई रे हाइईइ...दोनों भाई बहन ...उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ..हाआँ हाां चूसो ..मेरा पूरा रस चूस लो ..उफफफफ्फ़ "

दीदी का चेहरा मेरे चेहरे से बिल्कुल सटा था ........उनकी साँसें और मेरी साँसें टकरा रही थी...मैं बीच बीच उनके होंठों को भी चूस लेता .........

हम तीनों एक दूसरे से चिपके अपनी अपनी हरकतों में डूबे थे ..

तीनों बदहावाश थे ........ना कपड़ों का ध्यान ना अपने होश का ख़याल .....

मस्ती का आलम छाया था..इसी मस्ती में हम एक दूसरे के कपड़े उतारते जा रहे थे ..जब जिसका मूड हुआ किसी के कपड़े खींच देता ........

थोड़ी ही देर में तीनों नंगे एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे ..एक दूसरे से लिपटे थे ..

मैं कभी स्वेता दीदी की चूची चूसता , कभी दीदी की चूचियाँ मसल देता .....कभी उनके पेट सहलाता ..कभी स्वेता दीदी की नाभि के अंदर अपनी उंगली डाल देता .....अब मैने भी स्वेता दीदी की चूत में अपनी उंगली लगाई.......उनके खुद की उंगली चलाने से पूरी तरह गीली थी उनकी चूत...मेरी उंगली लगते ही उन्होने अपनी उंगली हटा दी और अपनी उंगली पायल की चूत में लगाते हुए घिसना चालू कर दिया .......

स्वेता दीदी एक हाथ से मेरा लंड सहला रही थी , दूसरे से पायल दीदी की चूत .......मेरा लंड कड़क और कड़क होता जा रहा था , मेरी मस्ती बढ़ती जा रही थी..मैं जितनी मस्ती मेी आता जाता..स्वेता दीदी की चूत उतनी ज़ोर से सहलाता जाता ..मेरी उंगलियाँ उनकी चूत की फांकों पर फिसल रही थी...और इधर स्वेता जितनी मस्ती में आती पायल की चूत उतनी ही तेज़ी से मसल्ति जाती.....

और पायल दीदी तो उनकी चूचियों पर ही टूट पड़ी थीं .............

चप..चप.....पच ..पुच...लॅप लप ...आआआ....उईईईईईई.......हाइईईईईई...की आवाज़ लगातार आ रही थी

और इसी मस्ती की दौर में स्वेता का बदन अकड़ गया ..झटके खाने लगा ....उनके हाथ ढीले पड़ गये ..और उन्होने बूरी तरह अपने चूतड़ उठाए चूत से पानी छोड़ना शुरू कर दिया ...मैं हैरान था .......उनकी चूत से धार इतनी तेज़ निकल रही थी ..मानों वह पेशाब कर रही हों ......

शायद इस तरह एक साथ दोनों चूचियों की चुसाइ , और उनके बदन का एक साथ मेरे और दीदी के सहलाने का असर था...... काफ़ी दिनों से उनकी चुदाइ भी नहीं हुई थी.......अपने पति से अलग थीं .....काफ़ी दिनों से ...इसका मिला जुला असर था ...... उनका इस तरह झड़ना

तभी दीदी ने मेरा कड़क लंड देखा ...इतना कड़ा था के हिल रहा था ,,उन्होने झट अपनी हथेली से उसे जकड़ते हुए जोरों से मुझे मूठ मारने लगीं " हाई रे मेला बच्चा ...ले अब जल्दी आ जा ...हां मेरे हाथ में ही छ्चोड़ दे ..आ ज्जा .."

मैं तो पहले ही से तड़प रहा था दीदी के दो चार बार हाथ उपर नीचे होते ही उनके हाथ में मैने पिचकारी छ्चोड़ दी ...

मैं" दीदी ..दीदी ......." की चीख मारते हुए उन से बूरी तरह लिपट गया....और उनकी चूत में उंगली घिसने लगा ...जो अब तक बूरी तरह गीली हो चूकि थी .......उनकी चूत की फाँक में दो चार बार उंगली उपर नीचे होते ही दीदी भी मुझ से लिपट गयीं और चूतड़ उछालते हुए अपनी चूत से रस की बौछार कर दी.........

क्रमशः……………………

rajaarkey
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Re: महँगी चूत सस्ता पानी

Unread post by rajaarkey » 09 Dec 2014 16:24



Mahangi chut sasta pani--8

gataank se aage…………………………….


Didi apni alsayi awaaz mein kehti jatin .."Waah re waah ..tu bhi kitna kuch sikh liya ...meri har jageh chudaai kar raha hai .. dekh na ek choot ke na milne se tujhe aur kitni nayi nayi jageh mil rahi hai mujhe chodne ko...........haaaan chod re Kishu ...chod le re ..jahan ji chahe chod ..sab kuch tera hi to hai ....haaan apni khwahish poori kar le..main bhi tujhe khush dekhna chahti hoon ..... aaaaaahhhhhhh chaat aur chaat ..aur chooos ....uiiiiiiiii .....haaan mei naabhi ke andar jibh ghoosa ...haaan ........jibh se wahan bhi chod .....ufffffffffff ...........aaaaaaaiiiiii.....han han aise hi ....." Weh apna pet aur upar kar leti ..jis se meri jibh aur bhi andar ghoos jaati unki naabhi mein ....

Aur mera chaatna , choosna , janghon ko chodanaa jor aur jor pakadta gaya ..unki janghein tight aur tight hoti gayie....unki janghein mere louDe ke ras se itni gili thin ke mujhe lund pelne mein koi dikkat nahin hoti ..ek dam makkhan jaisa tha


Didi ki choot se bhi lagataar pani ris raha tha, unhein apni naabhi mein mere jibh ka chalaana bahut hi excite kar raha thaa .....

apni chootad uchaal uchaal kar masti mein doobi thin ..aur main unhein unke pet se unko jakda thaa , mulayam aur sapaat pet ....jibh naabhi ke andar daal deta ..aur lund janghon ke bich ek ajib masti ke safar ka anand le raha thaa..

"AAaaaahhhhhh......haiiiiiiiiii..haaaan Kishu.........mela bachhaaaaaaaa ....aaaaaaaaahh ....."

" Didiiiii.....aaaaaaaaaa ......bas aur nahin .......oooooooooooo ..." Aur main unke janghon par jordaar pichkaari chodanaa shuruo kar diya ...janghon par ..unke pet par ...unki chaati par ..lauda haath se thaame jhatke par jhatka deta jata ..mere ras ki garmi..uski tez phoohaar se Didi ka sara badan jhurjhuri se kanp uthaaa aur weh bhi chootad uchaal uchaal kar apni choot se paani chhode ja rahi thie ........

Hum donon ke andar ki saari masti , saari khushi , saari lalak bahar aa rahi thi ..ek doosre par hum chhidake ja rahe the ....

Kuch der tak hum aise ek doosre ki bahon mein pade the......

Ab tak subeh kaphi nikal chooki thi ..bahar chidiyon ka chehchahana aur suraj ki kiranon ne hamaari ankhein kholin ....

Didi ne angdaiyaan lete hue mujhe apne upar se hataya ......ufff Didi ki angdayi ne phir se mere andar halchal machaani shuru kar di....


Par iske pahle ke main kuch kar pata , "Bas Kishu ....dekh ab sab log jaag gaye hain ..koi aa jaye to mushkil ho jayegi..main jaa rahi hoon " Aur vo mere louDe ko kas ke dabaati hui bahar nikal gayi ....

Main Didi ko dekhta raha.......aur phir main bhi bathroom ke andar chala gaya ...

Us din nashte ke table par jab Didi ne mujhe khilana shuru kiya ..meri Maan ne Didi ke haath thaamate hue kaha "Are Payal ..ab to tu ise apne haath se khane de...tu jab chali jayegi to kis ke haath se khayega ..kya bhookha hi rahega ..??" Aur phir meri taraf dekhte hue kaha "Kishu tu bhi khud se khana shuru kar de ..Didi ka laad pyaar bahut ho gaya..!"

Main janta thaa ek din ye honewala hi hai ..main choop raha.....mujhe andar se jaise kisi ne jhakjhor diya tha..main aasmaan se sidhe zamin par aa tapkaa thaa..wastvikta aur sachaai mere saamne khadi thie.....

Didi samajh gayin mujhe gehra dhakaa laga thaa ....." Thik hai Bua ..par aaj to khilaane de ..kal se Kishu khud hi khayega ..hai na Kishu .....?"

Main kya bolta ??? ..ek bahut hi aabhaar se bhari nazaron se Didi ki or dekha ..Didi apne aanchal se apni ankhein ponchte hue mujhe khilane lagin.

Shaam ko jab school se aaya ..Didi ne darwaaza khola ...... aaj phir ghar mein sannata tha ..

" Kahan hain sab log Didi ..???" Maine poochaa ..


'' Maan aur Bua shaadi ki shopping ko gaye hain aur Papa ( Mama) aur Phoopha office se kab tak aayenge kise maloom..????"

Mere chehre pe chamak aa gayie ..mera man gudgudi se khil uthaaa

Maine Didi ko apni bahon mein jakad liya , apne sine se lagata hua unhein choomne laga

" OOOOOOhh Didi yani ke hum donon akele .....??????"

" Are baba abhi to chhod na Kishu ..chal haath munh dho le saath mein nashtaa karte hain ....phir kuch aur .." Aur muskurate hue mujhe apne se alag kiya .

Tabhi call bell ki tikhi awaaz aayi........

" Abhi kaun aa gayaa.." Maine jhunjhlate hue badbadaata hua darwaaza khola..


Baahar Sweta Didi khadi thin.........


Main ek tak un ko(Sweta Didi) dekhta raha....meri ankhein chaundhiya gayin , palak jhapakne ko taiyaar hi nahin ....

Unhone kapde is tarah pahan rakhe the.....kapde badan dhankne ke bajaye unhein aur ubhaar rahe the...manon ek ek ang kapdon ko chirta hua bahar aa jaaye ...patli aur tang tight blouse ......unki choochiyon ki ubhaar chupaane ki nakamyaab koshish mein jooti thin ....gale se niche nanga sina ........saadi nabhi se niche ....pet ughdaa ......aanchal kandhon se phisalta hua .........

" Are kya dekh raha hai Kishu ..mujhe andar to aane de..kya baahar hi khadi rahoon..???" Sweta Didi ki awaaz se mera dhyaan unke sharir se unki awaaz par aayaa....

"Ohhhhh..are han aiye na .." Aur main darwaaze se hat ta hua unhein andar aane ka ishaaraa kiya....

Matakti hui chaal se Sweta Didi andar aayin .....main unke pichhe tha ...unki matakti chaal se unke donon chootad saadi se uchal bahar aane ko machal rahe the.... udhar unke chootad uchal rahe the aur idhar mere pant ke andar bhi uchal kood machi thi.......

" Payal kahan hai Kishu..?" unhone hanste hue poocha .

"Didi shayad kitchen mein hain ...aap jaiye na ..dekh lijiye .." Mera gala sookh raha tha .....Sweta Didi ki matakti chaal se , unki ajib muskaan se ..unki tikhi aur paini nazaron se ..manon weh mujhe khaa jana chahti hon .....


Thodi der baad donon Didiyan kitchen se bahar niklin ..

Payal Didi ne kaha " Chal Kishu mere room mein ...hum tinon nashta karte hain ....."

Sweta Didi haaan mein han milate hue mujhe apni bahon se apne bagal bhinch liya , main jhijhakta hua unke karib ho gaya

" Are jhijhak kyoon raha hai Kishu ..main bhi to tere liye Payal jaisi hi hoon na ..bas tu jaise apne Payal Didi ke saath khool kar rehta hai na ......mere saath bhi aise hi rehna ..kyoon Payal maine thik kaha na ..??" Aur mujhe apne se aur bhi karib chipka liya ...main unke gudaaj aur mulayam sharir ke sparsh , unke balon ki sugandh , unke sanson ke jhonkon se madhosh hua ja raha thaa

" Are han Kishu tu jara bhi mat hichkichaa..Sweta Didi bahut achhi hain , tumhare liye mere se kuch bhi kam nahin ........." Aur Payal Didi ki is baat par donon joron se hansne lagi aur hum Didi ke kamre ke andar aa gaye the ..

Meri samajh mein kuch kuch to aa hi raha thaa ..lagta hai Didi ne apne aur mere baare Sweta Didi ko sab kuch bataa diya thaa ......

Mujhe Sweta Didi ne apni god mein bitha liya ...maine Payal Didi ki or dekha ....mano main keh raha hoon...." Didi main jab aap ki god mein nahin baith ta inke god mein kaise baithoon ..??"

Didi ne meri nazaron ki baat samajh li aur kaha " Mera raja bhaiyya ..aaj pehli baar hai na Sweta Didi ke liye ..tu unki god mein aaj baitha reh .." Aur phir Sweta Didi ki taraf dekhte hue kaha .." Sweta ..Kishu ab bahut bada ho gaya hai ..... " Aur phir donon hansne lage ..

" Han re Payal sahi keh rahi hai tu ..main bhi dekh rahi hun na .." Aur unhone mere pant ke andar bane tambu ki taraf ishara kiya .......jo kaphi uncha ho gaya tha ..meri chootad unki gadde jaisi mulayam aur garm janghon ke upar thaa aur mujhe achha lag raha thaa ...

Phir unhone jhat apni ungliyon se pant ke utton khol diye aur kaha " Dekhein to jara kitna bada ho gaya hai ...????"

Button khulte hi mera lund uchalta hua bahar aa gaya.........abhi bhi 4-5 inch ke barabar to tha hi par kaphi mota thaa ...........

Sweta Didi ne jhat use apni muthhi se pakad liya aur sehlaane lagin jaise use mehsoos kar mere bade hone ka saboot dekh rahi hon ..

Payal Didi ne mujhe khilate hue Sweta Didi se poocha.." Kyoon Didi ..ab ho gayi na tassali .? Kitna bada hai ab mera Kishu ...??"

Unki poori hatheli mere mote lund se bhari thi ...Sweta Didi use halke halke dabate hue kaha "Han re Payal bahut bada ho gaya hai " Aur dhire se mere lund ki chamdi upar niche karne lagin ..

Mere poore badan mein jhurjhuri hoti ja rahi thi ...un donon ki baton se Sweta Didi se meri jhijhak bhi door ho gayi thi.........

Didi ka haath mujhe khila raha thaa aur Sweta ke haath mere lund sehla rahe the .donon Didiyon ke bich main masti aur anand ke leheron mein hichkole le raha thaa..maine apne aap ko unke hawale kar diya thaa...

Mera khana khatm ho chooka thaa Didi ne thaali uthayi aur kitchen mein rakh ghar ke darwaaze ko achhi tarah bolt kar diya , wapas aayin aur humare bagal baith gayin


Main abhi bhi Sweta Didi ki god mein hi thaa ........aur mera lund unke haath mein ...Sweta Didi ko mera chikna lund sehlane mein bada maja aa raha tha...... shayad jitna maza mujhe aa raha thaa us se kahin jyada unhein ..unki ankhein band thi aur ab ek haath se mera lund sehla rahi thi aur doosra haath apni saadi ke andar dalte hue apni choot sehla rahi thie......

Didi ne Sweta ki halat dekhi.unki saadi ka pallu niche gira thaa......patli aur tang blouse ke andar choochiyan kadak ho gayin thie , nanga sina dil ki tez dhadkanon se upar niche ho raha thaa........

Unhone choopchaap unke blouse ke button khol diye ..blouse unke sine se alag kar diya aur bra ke straps ek jhatke mein hi khol di...unki kadak choochiyan mere chehre par uchalti hui lagi.....main unki choochiyan dekhta rahaa...gol gol ..bhari bhari , nukili par gol ghundiyan ek dam tight ........


" Are dekh kya raha hai mere Bhole Raja...meri choochiyan to aise choosataa hai jaise aam choosataa hai.........chal inhein bhi choos ..." Didi ne mujhe bade pyaar se fatkaaraa aur Sweta ki ek choochi apne haath se thaamte hue mere munh mein thoons di....

Main apni laplapaati jibh aur chubhlaate honthon se Sweta ki choochi par toot pada ...honthon se dabate hue aur jibh se chaat te hue ...Sweta kanp uthi ..unki mere lund par pakad aur majboot ho gayi.........aur apni choot ka sehlana bhi tez ho gaya .......unke munh se siskariyan nikal rahi thi.........ankhein masti mein band thin


Tabhi Didi unki doosri jangh par baithte hue apna munh unki doosri choochi par laga diya aur lagin use choosne ...

Ek saath donon choochiyon ki choosaai ......Sweta kanp uthie..unka saara badan sihar uthaaa...
"Hai re hai...donon Bhai Bahan ...ufffffffffffffff ..haaan haaaan chooso ..mera poora ras choos lo ..ufffff "

Didi ka chehra mere chehre se bilkul sataa thaa ........unki sansein aur meri sansein takra rahi thi...main bich bich unke honthon ko bhi choos leta .........

Hum tinon ek doosre se chipke apni apni harkaton mein doobe the ..

Tinon badhawaash the ........na kapdon ka dhyaan na apne hosh ka khayal .....

Masti ka alam chaayaa thaa..isi masti mein hum ek doosre ke kapde utaarte jaa rahe the ..jab jiska mood hua kisi ke kapde khinch deta ........

Thodi hi der mein tinon nange ek doosre ke badan se khel rahe the ..ek doosre se lipte the ..

Main kabhi Sweta Didi ki choochi choosataa , kabhi Didi ki choochiyan masal deta .....kabhi unke pet sehlata ..kabhi Sweta Didi ki naabhi ke andar apni ungli daal deta .....ab maine bhi Sweta Didi ki choot mein apni ungli lagayi.......unke khud ki ungli chalane se poori tarah gili thi unki choot...meri ungli lagte hi unhone apni ungli hataa di aur apni ungli Payal ki chut mein lagate hue ghisna chaloo kar diya .......

Sweta Didi ek haath se mera lund sehla rahi thi , doosre se Payal Didi ki choot .......mera lund kadak aur kadak hota jaa raha thaa , meri masti badhti jaa rahi thi..main jitni masti mei aata jata..Sweta Didi ki choot utni jor se sehalata jaata ..meri ungliyaan unki choot ki phankon par phisal rahi thi...aur idhar Sweta jitni masti mein aati Payal ki choot utni hi tezi se masalti jati.....

Aur Payal Didi to unki choochiyon par hi tut padi thin .............

chap..chap.....puch ..puch...lap lap ...aaaaaa....uiiiiiiii.......hai...ki awaaz lagataar aa rahi thi

Aur isi masti ki daur mein Sweta ka badan akad gaya ..jhatke khane lagaa ....unke haath dhile pad gaye ..aur we boori tarah apni chootad uthaye choot se pani chodanaa shuru kar diya ...main hairan thaa .......unki choot se dhaar itni tez nikal rahi thie ..manon weh peshaab kar rahi hon ......

Shayad is tarah ek saath donon choochiyon ki choosai , aur unke badan ka ek saath mere aur Didi ke sehlane ka asar thaaa...... kaphi dinon se unki chudaai bhi nahin hui thie.......apne pati se alag thin .....kaaphi dinon se ...iska mila jula asar thaa ...... unka is tarah jhadnaa

Tabhi Didi ne mera kadak lund dekha ...itna kadaa thaa ke hil raha thaa ,,unhone jhat apni hatheli se use jakadte hue joron se mujhe mooth marne lagin " Hai re mela bachha ...le ab jaldi aa ja ...han mere haath mein hi chhod de ..aa jjaa .."

Main to pahle hi se tadap raha thaa Didi ke do chaar baar haath upar niche hote hi unke haath mein maine pichkaari chhod di ...

Main" Didiiii ..Didiiiie ......." ki chikh marte hue un se boori tarah lipat gaya....aur unki choot mein ungli ghisne laga ...jo ab tak boori tarah gili ho chooki thi .......unki choot ki phank mein do chaar baar ungli upar niche hote hi Didi bi mujh se lipat gayin aur chootad uchaalte hue apni choot se ras ki bauchaar kar din.........
kramashah……………………


rajaarkey
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Re: महँगी चूत सस्ता पानी

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 04:24

महँगी चूत सस्ता पानी--9

गतान्क से आगे…………………………….

हम दोनों एक दूसरे से चिपके थे..और हम दोनों को स्वेता दीदी अपनी बाहों में भरते हुए चूमे जा रही थी......

"वाह रे वा किशू ..तू तो कमाल का हाथ और मुँह चलाता है .......पायल की ट्रैनिंग अच्छी है......" वो बोलती जाती और चूमती जाती.....

"अरे स्वेता अभी तो शो चालू हुआ है ..चल पलंग पर तीनों साथ लेट ते हैं फिर शो का असली मज़ा शुरू होगा...."

और स्वेता दीदी हंसते हुए हम दोनों भाई बहन को अपने से लगाते हुए पलंग की ओर खींचते हुए चल पड़ीं ..........

स्वेता दीदी ने हमें पलंग पर लिटा दिया ..दोनों दीदियो ने अपने भाई को बीच में कर ..मेरे अगल बगल लेट गयीं ..

मैने दोनों की तरफ देखा ..पायल दीदी अधखिली फूल थीं तो स्वेता दीदी पूरी तरह खिली हुई फूल .....

कोई किसी से कम नहीं .....पायल दीदी के शरीर में एक अजीब मादक सुगंध थी ...और स्वेता दीदी का शरीर मुलायम और रस से भरपूर .उन्हें चूसने का मन करता था और पायल दीदी को काट खाने का .......

तभी स्वेता दीदी ने पायल को कहा " पायल ज़रा टाइम का भी ख़याल रखना ..कहीं कोई आ ना जाए .."

" अभी बहुत टाइम है स्वेता ..अभी तो सिर्फ़ 530 बजे हैं .....और शादी की शॉपिंग से वो लोग सात-आठ बजे के पहले नहीं आ सकते ...चल जल्दी कर ना , सोच क्या रही है..???? देख ना किशू कितना मस्त हो कर लेटा है हमारे बीच ......" पायल दीदी ने कहते कहते अपनी टाँगें मेरे पैरों पर रखते हुए मुझे अपनी तरफ खींच लिया ......और मेरे बाल रहित सीने पर अपनी लॅप लपाति जीभ रख दी और लगी चाटने

मैं उनके इस अचानक हमले से चिहूंक उठा ..मेरा सारा शरीर सिहर उठा.....

मैं भी उनकी चूचियाँ अपने हाथों में ले दबाने लगा .........

इधर स्वेता दीदी अपनी चूत मेरे चूतड़ से लगाते हुए घिसने लगीं और मेरा लंड अपने हाथ में भर लिया और हल्के हल्के मसलना शुरू कर दिया ..

मेरे चूतड़ काफ़ी मस्क्युलर और टाइट थे , ये मेरे क्रिकेट खेलने का असर था, भाग दौड़ करने के चलते मेरा शरीर काफ़ी मस्क्युलर था .........और अब तक पूरे बाल नहीं आए थे इसलिए चिकने भी थे....स्वेता दीदी की चूत जैसे मेरे चूतड़ पर फिसल रही थी.........मैने अपनी चूतडो की मसल और भी टाइट कर ली...उन्हें अपनी चूत मेरे गतीले चूतड़ पर घिसने में और भी मज़ा आने लगा..उनके घिसने की स्पीड बढ़ती जा रही थी ...और मेरी चूतड़ उनकी चूतरस से सराबोर हो रहा था....

दीदी मेरे सीने पर ..मेरे सीने की घूंदियो पर जीभ चलाती जातीं ..मेरा पूरा बदन कांप उठ ता..और मैं उतने ही जोरों से उनकी चूचियाँ मसल देता ......जैसे आटा गून्ध्ते हैं ...दीदी की मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी .......मैं उनके आर्म्पाइट पर भी टूट पड़ा........एक अजीब सूगांध थी वहाँ ..मैने अपनी नाक वहाँ लगाई ..और लंबी साँस ले कर सूंघ रहा था, और फिर उसे चाटने लगा ..दीदी ने अपना हाथ और उपर कर दिया .....आहह पूरा आर्म्पाइट मेरे कब्ज़े में था

तीनों फिर से एक दूसरे से चिपके थे और अपनी अपनी हरकतों में मस्त ..

एक दूसरे की शरीर से मनमानी किए जा रहे थे..कोई रोक टोक नहीं , जिसे जहाँ मन आता चाट लेता ..चूस लेता .......

मेरा लॉडा स्वेता दीदी के हाथो में जकड़ा फन्फना रहा था ...कड़क और कड़क होता जाता

दीदी मुझे बूरी तरह चाटे जा रही थीं ..मेरे होंठ चूसे जा रही थी..

अब मैने अपना एक हाथ दीदी की जांघों के बीच ले गया दीदी ने झट अपनी टाँगें फैला दी.उनकी चूत खूल गयी ,,मेरी उंगलियाँ चूत की फाँक में दौड़ रही थी ..

और स्वेता दीदी अपनी एक टाँग मेरे जाँघ पर रख अपनी फैली चूत को और भी फैला ..मेरे चूतड़ से घिसे जा रही थी

उफफफफफफफफफफ्फ़ ...इस दो तरफे हमले से मैं मदहोश था ..मेरा दीदी के आर्म्पाइट चाटने की स्पीड बढ़ गयी और उनकी चूत पर उंगलियाँ भी और तेज़ चलने लगीं

तीनों कराह रहे थे...सिसकारियाँ ले रहे थे .....एक दूसरे को मसल रहे थे , चूस रहे थे चाट रहे थे......

'उफफफ्फ़.. किशू तेरा लॉडा कितना हसीन है रे ..कितना चिकना और कड़क ........" स्वेता ने कहा

" तो फिर रोका किसने है स्वेता ..ले ले ना अपने मुँह में .." पायल दीदी ने कहा

और मुझे दीदी ने सीधा लिटा दिया..मेरा लॉडा तननाया हवा से बातें कर रहा था....स्वेता दीदी मेरे पैरों के बीच आ गयीं और लॉडा अपने हाथों से थामते हुए मुँह अंदर कर घूसा दिया ..मेरा लॉडा उनके गरम गरम मुँह के अंदर था ...जीभ . होंठ और हाथों का कमाल मेरे लौडे पर चल रहा था ..मैं मस्ती में भरा था ,,मेरी आँखें बंद थीं....

स्वेता दीदी की शादी का एक्सपीरियेन्स यहाँ काम आ रहा था उनके हाथों की जाकड़, होंठों की पकड़ और जीभ के फेरने से मेरा बूरा हाल था.........लंड अकड़ रहा था ..मेरे पूरे शरीर से सारी सिहरन और मस्ती लंड में बिजली की करेंट की तरह दौड़ रही थी...सब कुछ वहाँ जमा होता जा रहा था , किसी भी समय फॅट पड़ने को तैयार.....

और फिर जैसे बादल फॅट ता है ..मुझे भी ऐसा ही महसूस हुआ......मेरा लंड फॅट पड़ा और मेरा चूतड़ उछाल मारता हुआ स्वेता दी के मुँह में लंड से गरम गरम लावा फूट पड़ा....

मैं झटके पे झटका ख़ाता रहा ..स्वेता दीदी मुँह खोले मेरा रस अंदर लेती रही ..उनका मुँह भर गया......गाल पर भी छींटे थे.....होंठों पर भी फैले थे ....

दीदी उठ कर बैठ गयी ...स्वेता का चेहरा अपने हाथों में ले मेरा रस चाट चाट कर उनका पूरा चेहरा सॉफ कर दिया ......

" उफफफफफफ्फ़ कितना टेस्टी है रे किशू का लंड और उसका रस..." स्वेता दीदी ने मुँह के अंदर का रस निगलते हुई बोल उठीं ..

" तभी तो मैने कहा था ना चूस मेरे भाई का लंड....."

पायल दीदी ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और मुझे अपने सीने से चिपका लिया , मैं सूस्त उनकी चूचियों के उपर सर रखे आँखें बंद किए पड़ा रहा .....

थोड़ी देर बाद मैने आँखें खोलीं ..दोनों मेरे अगल बगल लेती थीं ..टाँगें फैलाए ..चूत फैलाए अपनी अपनी उंगलियों से सहलाती हुई ......

उनकी उंगलियाँ मैने हटाते हुए अपनी उंगलियों से दोनों ओर की दोनों चूतो को सहलाने लगा....

दोनों चूतो का अपना ही मज़ा था .....स्वेता दीदी की चूत फैली थी , मुलायम थी और दीदी की चूत मुलायम पर टाइट ...

मैं मज़े ले ले कर उन्हें सहलाए जा रहा था .. पहले से ही दोनों काफ़ी गरम थीं , मस्त थी और मेरे द्वारा फिर से उनकी चूत सहलाने से वह और भी मस्ती में आ गयीं ..

दोनों ने मुझे जाकड़ लिया ..........और फिर मेरे जाँघ पर अपनी अपनी जाँघ रखे चूतड़ उछाल उछाल अपनी अपनी चूत का रस छोड़ने लगी .......

मैने अपने हाथ दोनों तरफ फैलाए उन्हें अपने से और भी चिपका लिया .......

हम तीनों अब एक थे

दोनों मेरे सीने पर अपना सर रखे हाँफ रहे थे .....और फिर शांत हो कर पड़े रहे .....

तीनों एक दूसरे की बाहों में पस्त हो कर ..अपने अंदर का सारा रस खाली कर ..;एक निचोड़े हुए नींबू की तरह बिल्कुल खाली हो गये थे ......

तभी स्वेता दीदी की नज़र दीवाल पर लगी घड़ी की तरफ गयी....."ऊऊऊओ माअं ,,अरे बाबा 730 बज रहें है री पायल....कुछ होश भी है......" और वह हड़बड़ाती हुई उठ गयी ..जल्दी से कपड़े पहने ..मुझे और दीदी को चूमते हुए कमरे से बाहर निकल पड़ीं

मैने उनकी तरफ देखा ...उन्होने मुड़ते हुए मेरी तरफ ऐसे देखा मानों कह रही हों...."थॅंक यू किशू ..."

मैने एक फ्लाइयिंग किस दी उनको और दीदी को फिर से चिपकता हुआ उन्हें चूम रहा था..

दीदी ने बड़े प्यार से मुझे धकेलते हुए ...मेरे लौडे को मसल्ते हुए , मुस्करती हुई उठ गयी ...और झट कपड़े पहन रूम से बाहर निकल गयीं ...

मैं उनकी मटकती चूतड़ देखता रहा....

और इसी तरह हमारे दिन बीत ते गये ... स्वेता दीदी हम से इतनी घूल मिल गयीं ..जैसे हम तीनों एक हों.....हम एक दूसरे की भावनाओं , इच्छाओं से इस कदर वाक़िफ़ हो गये .किसी को कुछ कहने की ज़रूरत नहीं होती .....मेरे दीदी की चूत को उनकी शादी तक महफूज़ रखने की बात से स्वेता दीदी बहुत प्रभावित थीं .....मेरे भावनाओं की कद्र करती थीं ..और इसलिए उन्होने भी कभी मुझे अपनी चूत में लंड अंदर डालने को मजबूर नहीं किया .....

स्वेता दीदी की भी हम बहुत कद्र करते थे..उनकी भावनाओं को ठेस ना लगे , इसलिए उनके अपने पति से अलग रहने की बात उन से ना कभी दीदी करती ना मैं .

एक दिन खुद उन्होने ही बताया ..

शादी के दो साल बाद भी उन्हें बच्चे नहीं हुए ..जैसा के हमारे समाज में होता है..सारा दोष स्वेता दीदी पर डाल उन के ससूरल वाले दिन रात उन्हें ताना देते रहते .....पति का भी उन्हें कोई सपोर्ट नहीं मिलता ..और कैसे मिलता ..वो खुद नपून्सक था ...... ये बात स्वेता दीदी के अलावा और किसी को नहीं मालूम थी.....

स्वेता दीदी का आभार मान ना तो दूर ..वो अपनी मर्दानगी साबित करने को मार पीट पर भी उतर आया ....ये बात स्वेता दीदी सहेन नहीं कर पाईं ..उनका स्वाभिमान उन्हें एक दिन सब कुछ छ्चोड़ अपनी माँ के यहाँ ले आया ...... उन्होने पास के सरकारी स्कूल में टीचर का काम शुरू कर दिया ..और दुबारा अपनी ससूराल की तरफ मुँह उठा कर भी नहीं देखा...

मैं और दीदी उनके इस साहस भरे कदम से उन की और भी इज़्ज़त करने लगे .. उन दिनों ये माना जाता था के लड़की की डोली ससुराल जाती है और अर्थी ही उसे वहाँ से हटाती है.... स्वेता दीदी का वहाँ से निकल आना एक बहुत बड़ा कदम था .......

हम तीनों तीन शरीर पर एक जान थे....मस्ती के दिन गुज़र रहे थे.....

और फिर आख़िर वो दिन आ ही गया .....पायल दीदी की शादी......

मेरे मामा की एकलौती संतान थी वो..बड़े धूम धाम से उन्होने पायल दीदी को विदा किया ......

मेरी जिंदगी चली गयी........मेरा रोम रोम चीत्कार रहा था..तड़प रहा था.......बिलख रहा था, मेरे हाथ पैर कट गये थे......

मेरा दिल रो रहा था..पर दीदी को हंसते हुए विदा किया ......दीदी मुझे अपने सीने से लगाए फूट पड़ीं ..उनके आंसूओ- का बाँध फूट पड़ा........पर फिर उन्होने अपने आप को संभाला,

" स्वेता ..तू मेले बच्चे का ख़याल रखना ......" और इस से पहले की उनकी छाती फाट पड़ती..उन्होने मुझे अलग किया और कार के अंदर वेट कर रहे जीजा जी के साथ बैठ गयीं ..नये साथी..नयी दुनिया और नये जीवन की शुरुआत की ओर चल पड़ीं ..

मैं खड़ा था ..जब तक के कार मेरी आँखों से ओझल ना हुई.......

कार के धुएँ ने जैसे मेरे जीवन के आहें , सब से खूबसूरत हिस्से को पूरी तरह ढँक दिया ......

स्वेता दीदी मुझे अपने सीने से लगाते हुए घर के अंदर ले गयीं .....

"किशू...मैं पायल तो नहीं बन सकती...पर कभी भी तू मुझे कम नहीं समझना ....."

और फिर मेरे सब्र का बाँध टूट गया.......मैं उनके सीने से लगा फूट फूट कर रो रहा था..बिलख रहा था......एक नन्हें बच्चे की तरह ......स्वेता दीदी चूप थीं .....मेरे बाल सहला रही थीं और ..मैं आँसू बहाए जा रहा था............

जाने कब रोते रोते मैं उनकी गोद में ही सो गया.....

नींद खूली तो देखा मैं पलंग पर अकेला लेटा था .........

मुझे ऐसा महसू हुआ जैसे मेरी पिछली जिंदगी ...पायल दीदी के साथ की जिंदगी ..एक सुखद सपना था .....और मैं अभी अभी ही उस मीठे सपने की नींद से जगा हूँ...

और मैं उस सुखद सपने को अपने मानो-मश्तिश्क में संजोए ...उन सुनहरे यादों का सहारा लिए अपनी नयी जिंदगी की ओर चल पड़ा

एक नया सवेरा ..एक नये दिन की शुरुआत की ओर .............

पर आगे का रास्ता उतना आसान नहीं था ..जिस रास्ते पर मेरे साथ हमेशा ..हर पल .हर वक़्त पायल दीदी मेरे हाथ थामे मेरे साथ रहती ...आज मैं उस रास्ते पर अकेला था ... बेहद अकेला....

दीदी की एक एक बात ..उनका खिलखिलाना..उनका हँसना ..उनकी प्यारी , मुलायम और गर्म गोद...उनका मुझे इतने प्यार से खिलाना ....कुछ भी तो मैं भूल नहीं पाता .....मैं बेचैन हो उठ ता ...पढ़ने बैठ ता तो वो सामने आ जाती...किताबों के हर पन्ने पर जैसे उनकी तस्वीर थी ....

मैं बस चूप चाप किताब खोले देखता रहता ....

मैं एक बेजान च्चाभी वाले खिलोने की तरह बेकार सा हो गया था ,,जैसे उस खिलोने के स्प्रिंग का तनाव ख़त्म हो चूका था ..मेरी जिंदगी के खिलोने की चाभी का तनाव ख़त्म हो चूका था ..

मैं उस शाम भी ऐसे ही टेबल पर सूस्त सा खोया खोया बैठा था .... मेरे सामने किताब खूली थी , पर आँखों में कुछ और ही था..

तभी मुझे किसी के आने की आहट हुई...देखा तो स्वेता दीदी मेरे बगल खड़ी थीं...

वो मेरे सर पर हाथ फेरते हुए मेरे बगल बैठ गयीं ..मुझे अपने सीने से लगा लिया ..मैं उनकी मुलायम , गर्म और गुदज चूचियों के महसूस से थोड़ा आश्वस्त हुआ ..मुझे अच्छा लगा ..

" देख किशू , पायल की याद तो आएगी ही...इतनी जल्दी जानेवाली नहीं ....और उनकी याद तो हमारे साथ हमेशा रहेगी ...मरते दम तक...पर इस तरह उनकी याद को तुम अपनी बर्बादी का कारण क्यूँ बना रहे हो किशू..उनकी याद को तो अपना सहारा बना ले मेरे प्यारे भाय्या ... उन्हें भी कितनी खुशी होगी ..." .

मैं थोड़ी देर तक बिल्कुल चूप उनकी ओर देखता रहा ....मुझे एक दम से उनकी बात ने झकझोर दिया ,,जैसे गहरी नींद से जगा दिया गया हो....स्वेता दीदी ने कितनी बड़ी बात कह दी""उनकी यादों को अपना सहारा बना लो..""

" स्वेता दीदी ,,आप ने सही कहा .....आज के बाद पायल दीदी की याद मुझे हर पल , हर वक़्त रहेगी ..वो मेरे रोम रोम में हमेशा रहेंगी. मैं उन्ही के सहारे आगे और आगे बढ़ूंगा ..काफ़ी आगे .."

इतना सुनते ही स्वेता दीदी ने मुझे अपने सीने से बिल्कुल चिपका लिया .....मुझे चूमने लगीं , मेरे होंठ चूसने लगीं

" हाँ हाँ किशू ......" और अपनी हथेली से मेरे लौडे को पॅंट के उपर से ही सहलाने लगीं .. मेरे कान में फूफूसाते हुए कहा..." तभी तो मैं भी तेरा पूरा ख़याल रख पाऊँगी....वरना पायल जब आएगी मैं क्या जवाब दूँगी...???"

"हाँ स्वेता दीदी ..मुझे भी तो आप का ख़याल रखना पड़ेगा ...." मैने भी मुस्कुराते हुए उन से कहा .....दीदी के जाने के बाद ये मेरी पहली मुस्कान थी ....

क्रमशः……………………