कमसिन कलियाँ compleet

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The Romantic
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Re: कमसिन कलियाँ

Unread post by The Romantic » 11 Dec 2014 04:47

कमसिन कलियाँ--13

गतान्क से आगे..........

राजेश: डार्लिंग…बस बहुत नहला दिया है…अगर अब इस को इसकी जगह पर नहीं बिठाया तो यह यहीं पर ढेर हो जाएगा।

(करीना को अपने अगोश में लेकर प्यार से चूमते हुए बेड पर लिटा देता है। नग्नता में भी करीना गजब की सुन्दर दिखती है। वासना के उन्माद में कमसिन जवानी बेड पर अपनी ही लगाई हुई आग में तड़पती हुई बार-बार अपनी टांगों को खोलती है और अपने ही हाथों से अपने स्तनों को पीसती हुई राजेश को आमंत्रित करती है। करीना के आग से तपते हुए जिस्म को अपने जिस्म से ढक देता है।)

राजेश: लव…अबकी बार हमारा मिलन बेरोकटोक होगा और दर्द भी नही होगा…तैयार हो…

करीना: प्रिय…अब देर मत करो…आह…मेरा शरीर आग में तप रहा है…

(यह सुन कर राजेश बालोंरहित कटिप्रदेश और योनिमुख को अपनी उंगलियों से टटोलने में लग जाता है। राजेश की उँगलियाँ जुड़ी हुई संतरे की फाँकों को खोल कर अलग करती है। अपनी उंगली से अकड़ी हुई घुन्डी को छेड़ता है। गीली होने की वजह से अकड़ी हुई घुन्डी और भी ज्यादा संवेदनशील हो चुकी है।)

करीना: .उई...माँ….उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह.....

(राजेश अपनी उंगली से घुन्डी का घिसाव जारी रखता है। अपने होठों की गिरफ्त में करीना के होंठों को ले लेता है। एक हाथ से कभी उन्नत और सुडौल स्तनों पर उँगलियॉ फिराता और कभी दो उँगलियों मे स्तनाग्र को फँसा कर तरेड़ता, कभी एक कलश को अपनी हथेली मे छुपा लेता और कभी दूसरी को जोर से मसक देता। करीना भी असीम आनंद में लिप्त होती जा रही हैं।)

राजेश: (करीना के निचले होंठ को चूसते और धीरे से काटते हुए) करीना…करीना…

(राजेश अपने तन्नायें हुए लिंग मुठ्ठी में लेकर एक दो झट्के देकर योनिमुख पर टिका देता है। जलती हुई सलाख एहसास होते ही करीना के मुख से एक सिसकारी निकल जाती है। राजेश प्यार से संतरे की फाँकों को खोल कर घुन्डी को दबाते हुए सरकते हुए योनिच्छेद के मुख पर लगा कर अपने लिंग को ठेलता है। संकरी परन्तु गीली जगह होने की वजह से फुला हुआ सुपाड़ा फिसल कर जगह बनाते हुए अन्दर घुस जाता है।)

करीना: …उ.उई.माँ..अँ.उ… उक.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह.....

(राजेश धीरे-धीरे आगे पीछे होते हुए लिंग का घिसाव अन्दर तक करीना को विचलित कर देता है। उत्तेजना और मीठे से दर्द में तड़पती करीना के होंठों को राजेश अपने होंठों से सीलबंद कर देता है। बार-बार हल्की चोट मारते हुए राजेश जगह बनाते हुए एक भरपूर धक्का लगाता है। आग में तपता हुआ लिंग प्रेम रस से सरोबर जड़ तक धँस जाता है। करीना की आँखें एक बार फिर से खुली की खुली रह गयी और मुख से दबी हुई चीख निकल गयी। पर इस बार की चीख प्यार के एकाकार की है।)

करीना: …आह..ह..ह.…हाय

राजेश: (पुरी तरह अपने लिंग को जड़ तक बिठा कर) करीना…करी…ना अब की बार दर्द तो नहीं हुआ…

करीना: न…हीं…उफ..ए…आह..ह..हा.य

(करीना की योनि ने भी राजेश के लिंग को अपने शिकंजे मे बुरी तरह जकड़ रखा है। क्षण भर रुक कर, राजेश ने करीना के नितंबो को दोनों हाथों को पकड़ कर एक लय के साथ आगे-पीछे हो कर वार शुरु करता है। लिंगदेव का फूला हुआ नंगा सुपाड़ा करीना की बच्चेदानी के मुहाने को खोलता हुआ अन्दर तक धँस कर बैठ जाता है। धीरे से राजेश लिंगदेव को गरदन तक बाहर निकालता है और फिर उतनी ताकत से अन्दर धकेल देता है। करीना की योनि भी अब इस प्रकार के दखल की आदि हो गयी है।)

राजेश: (गति कम करते हुए) करीना अब दर्द तो नहीं हो रहा है…

करीना: नहीं…बहुत अच्छा और मीठा सा दर्द हो रहा है…ऐसा लगता है कि मै पूरी तरह से भर गयी हूँ…

राजेश: (रोक कर)…तुम्हारी चू…त बहुत टाईट है…मेरे लं…ड को तो जैसे निचोड़ रही हो। तुम्हें इन नये शब्दों का ज्ञान है कि नहीं?

करीना: (अपनी टाँगे राजेश की कमर के इर्द-गिर्द कस कर लपेटते हुए) आह…न…हीं…नही…

(पन्द्रह-बीस धक्कों मे ही राजेश के जिस्म मे लावा खौलना आरंभ हो गया है और ज्वालामुखी फटने से पहले आखिरी वार करते हुए अपने लिंग के सुपाड़े को बच्चेदानी के अन्दर धँसा देता है। इस वार को करीना बरदाश्त नहीं कर पाती और धनुषाकार बनाती हुई करीना की योनि झरझरा कर बहने लगती है। उसकी आँखों के सामने तारे नाँचने लगते हैं और राजेश के लिंग को गरदन से जकड़ कर योनिच्छेद दुहना शुरु कर देते है। इसका एहसास होते ही सारे बाँध तोड़ते हुए लिंगदेव भी बिना रुके लावा उगलना शुरु कर देते है। करीना की योनि को राजेश अपने प्रेमरस से लबालब भरने के बाद निढाल होकर पड़ जाता है। राजेश अपने लिंग को फँसाये रखता है और नई-नवेली संकरी जगह का लुत्फ लेता है। एक बार फिर करीना भावविभोर होकर बेहोश हो जाती है।)

राजेश: (उपर से हटते हुए अपने सिकुड़ते हुए लिंग को बाहर निकालते समय कार्क खुलने की आवाज का एहसास होता है) करीना…करीना…

करीना: (कुछ क्षणों के बाद)….गअँ.न्ई…आह..... (अपनी आँखें खोलती हुई) डार्लिंग…

राजेश: (करीना के सिर को सहारा दे कर उठाते हुए) करीना…आज एक बार फिर…।

करीना: (पल्कें झपकाती हुई) हाँ, एक बार फिर से साँस घुटती हुई लगी और मेरी आँखों के आगे अंधेरा छा गया।

राजेश: बहुत कामुक हो…अगर इस उमर में यह हाल है तो आगे क्या होगा…।

करीना: यह तो आपके एक आँख वाले अजगर का कमाल है…पता नहीं पर ऐसा लगता है कि मेरे पेट को भेद कर सीधे ह्र्दय पर वार करता है…(अपना हाथ नीचे की ओर ले जाकर योनिमुख से रिसते हुए प्रेमरस को पौंछती है।)

राजेश: पहले कुछ देर आराम कर लो फिर अगले राउन्ड की तैयारी करेंगे…

(राजेश प्यार से करीना को बाँहों मे भर कर उसके होंठों को चूमता है। दो नग्न जिस्म एक दूसरे के साथ लिपटे हुए पड़े है…कि दरवाजे पर आहट होती है।)

सीन-21

(आहट सुन कर राजेश जल्दी से करीना के नग्न जिस्म को सुन्दरी के दुपट्टे से ढक देता है और अपने उपर पास पड़ी हुई चादर को डाल कर, आवाज देता है।)

राजेश: कौन है…अन्दर आ जाओ…

(एक अच्छी कद काठी का वृद्ध हाथ में चाय की ट्रे लेकर अन्दर आता है और उसके पीछे भजिया-पकौड़े की प्लेट थामे सुन्दरी आती है।)

राजेश: आओ शमशेर सिंह…कैसे हो…यहीं बेड पर रख दो।

शमशेर सिंह: ठीक हूँ मालिक…(अपनी गिद्ध सी पैनी नजर से करीना को घूरता हुआ बेड पर सामान सजाता है)

(उसकी नजर दुपट्टे के नीचे करीना के कमसिन नग्न जिस्म को नापने मे लग जाती है। झीने से दुपट्टे के नीचे करीना का जिस्म की गोलाईयाँ और कमर के कटाव शमशेर सिंह की आँखों के सामने विदित हो रहे है। सीने पर खड़े हुए भूरे शिखर दुपट्टे को टेन्ट बनाते हुए और नग्न केले सी चिकनी पिंडुलियाँ दुपट्टे के बाहर निकली हुई शमशेर सिंह के सीने मे अजीब सा हौल पैदा कर देती है।) राजेश: तुम्हारी बिटिया बहुत खुश है…और सुनाओ खेती का काम कैसा चल रहा है…

शमशेर सिंह: ठीक चल रहा है मालिक…बहुत दिन हुए उस को देखा नहीं अगर आप आज्ञा दें तो हम दोनों उस से शहर जा कर मिल आये…

राजेश: हाँ भई, वह तुम्हारी बेटी है क्यों नहीं परन्तु आजकल बहुत व्यस्त रहती है। उसके पास मेरे लिए भी टाइम नहीं है…ऐसा करना पहले फोन कर लेना और फिर चले जाना…

शमशेर सिंह: ठीक है मालिक…आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो घंटी बजा देना…(कह कर बाहर की ओर निकल जाता है)…सुन्दरी तू भी जल्दी से सामान रख कर वापिस आजा…मुझे कुछ काम है।

सुन्दरी: (मुँह बिचका कर)…हाँ आती हूँ…लगता है कि मालकिन के जिस्म को देख कर बुढ्ढे के जिस्म मे आग लग गयी है। मालिक…इनके क्या हाल हैं…(थोड़ी आँखे मटका कर) कुछ मालिश वगैराह की जरूरत तो नहीं है…

राजेश: तू इनकी फिकर मत कर…जब जरूरत होगी यह अपने आप बता देगी…इनकी मालिश के लिए मै ही काफी हूँ…अब जा…देख रही है न (अपनी चादर को उघाड़ कर लिंगदेव के दर्शन कराते हुए) की मेरा फिर से मचल रहा है…(करीना भी एकटक सारी स्तिथि का चुपचाप जायजा लेती है)

सुन्दरी: अगर ऐसी बात है तो…मै यहीं रुक जाती हूँ…लेकिन पता नहीं फिर पिताजी क्या करेंगें। मैनें कटोरी मै तेल गुनगुना करके रख दिया है…अगर (करीना की ओर रुख करके) आप ज्यादा थक जाएँ तो मुझे बुलवा भेजिएगा मै आपकी मालिश कर दूँगी…(कह कर बाहर निकल जाती है।)

(राजेश और करीना चुपचाप चाय की चुस्कियाँ लेते हुए एक दूसरे को निहारते है)

करीना: आप बड़े बेशर्म हो…सुन्दरी को इसे दिखाने की क्या जरूरत है?

राजेश: उस को जला रहा हूँ…बहुत नखरे दिखा रही थी पिछ्ली बार…तुम्हारे हुस्न को देख कर बैचेन हुए जा रही है…(पकड़ कर दुपट्टा करीना के उपर से खींच कर हटा देता है। निर्वस्त्र करीना जल्दी से अपने हाथ से सीने को ढकती है)

करीना: क्या कर रहे हो…

राजेश: (अपने उपर पड़ी चादर हटा देता है) जो मैनें तुम्हारे साथ किया वही अपने साथ कर रहा हूँ…क्या गलत है…(अपने लिंग को मुठ्ठी मे पकड़ कर अपनी फोरस्किन को हटा कर कुकुरमुत्ते सा सिर के उपर अपने अँगूठे को फिराता है)…देखो यह अब दूसरी पारी खेलने के लिए तैयार हो गया है…

करीना: आप इस…(लिंगदेव को अपने कोमल हाथों में थाम कर सुपाड़े पर अपनी उँगलियॉ फिराते हुए)… को क्या कहते हो?

राजेश: जब सुप्त अवस्था मे हो तो लंड और जब अजगर की तरह फुफकार रहा हो तो लौड़ा…पर इस भाषा का प्रयोग हम दूसरों के सामने नहीं कर सकते…यह सिर्फ दो प्यार करने वाले अकेले में करते है।

करीना: मै इसे क्या बुलाऊँगी…लंड या लौड़ा

राजेश: जब इसके साथ तुम हाथों से या अपने मुख से खेलती हो तो लंड और जब तुम्हारे अन्दर तक धँसा हुआ हो तो लौड़ा…यह सब छोड़ो…तुम्हारा जो भी मन हो वह बोलो…

करीना: अब आगे क्या…(राजेश के लिंग को सहलाते हुए)

राजेश: अभी तुम्हारी मालिश कर देते है…जिससे दूसरा दौर काफी लंबा चल सके…क्या कहती हो…

करीना: पर पहले मैं आपके लंड की मालिश करुँगी…(कहते हुए बेड से उतर कर मेज तक जाती है। राजेश की निगाह उसके स्पंदन करते हुए नितंबों पर जा कर टिक जाती है। पतली कमर और गोल भरे हुए नितंब और उनमे पड़े हुए गड्डे उसके हर कदम काँपते हुए प्रतीत होते है। तेल से भरी कटोरी ले कर जब वह मुड़ कर राजेश की ओर आती है तो राजेश की नजरें करीना के सीने पर आते हुए भूचाल की ओर आकृष्ट हो जाती है। पहली बार राजेश को करीना के कमसिन नग्न जिस्म को दिन की रौशनी मे देखने का मौका मिला है।)

करीना का यह रूप देख कर राजेश का हथियार एक ठुमका लगाता है)

करीना: इस को क्या हुआ…यह क्यों झटके खा रहा है? अब क्या करना है, मुझे बताइए…

राजेश: यह तुम्हारे प्यार में पागल हो गया है…तुम आज मुझे देख लो फिर अगली बार जब हम यहाँ पर मिलेंगे तब तुम मेरी मालिश कर देना…अब तुम सीने के बल बेड पर आराम से लेट जाओ।

(करीना सीने के बल लेट जाती है। राजेश गुनगुने सरसों के तेल को अपनी हथेली पर डाल कर रगड़ता है और फिर कुछ तेल की बूँदें करीना की पीठ पर टपका देता है। करीना की दोनों टांगों को फैला कर और उनके बीच में अपने घुटनों के बल पर बैठ कर पीठ की मालिश आरंभ करता है। पीठ पर दबाव देकर अपनी दोनों हथेलियाँ से कोमल काया को रगड़ता है। कुछ घर्षण की गर्मी और कुछ तेल गरम, करीना के पोर-पोर खोल देती है। हथेली जब फिसलती हुई साइड में उभरे हुए स्तन के भाग पर पहुँचती तो वह अपना हाथ अन्दर सरका कर पुरे कलश को अपनी गिरफ्त में ले कर मसक देता है। अजगर की तरह फनफनाते हुए लिंगदेव भी नितंबो के बीच में बनी दरार में मालिश करने में लगे हुए है।)

करीना: (हर घिसाव पर) आह…हा…य…आ…ह

(थोड़ी देर तक पूरी पीठ मालिश से लाल हो उठी है। राजेश सरक कर पीछे होता है और दोनों नितंबों और जांघों पर थोड़ा सा तेल फैला देता है। अब बड़ी बेदर्दी से जाघों से नितंबो तक रगड़ता है। कभी-कभी अपनी उँगली को दरार में छिपे सूरजमुखी फूल जैसे छिद्र के मुख पर फिराता है। कुछ ही देर में करीना के अंग-अंग का दर्द पुरी तरह से निचोड़ देता है और एक नयी स्फूर्ती सारे शरीर में भर जाती है। राजेश अपनी बीच की उँगली तेल में डुबो कर सूरजमुखी छिद्र के भीतर डालने की कोशिश करता है। करीना अचकचा कर उठती है परन्तु राजेश के दबाव के कारण उठ नहीं पाती है। राजेश एक झटके से अपनी उँगली को अन्दर तक धँसा देता है।)

करीना: उई…ई…ई यह क्या

राजेश: यह तुम्हारा तीसरा मुख है…पहला तुम्हारा मुख, दूसरी तुम्हारी प्यारी सी चूत और तीसरी तुम्हारी गाँड…तुम्हारे दो मुख तो मेरे लंड को निगल चुके है अब तीसरे की बारी है।

करीना: न्…हीं…मुझे…नहीं करना…(अचकचा कर उठने का यत्न करती है)

(राजेश अपनी उंगली को एक बार फिर से तेल में डुबो कर छिद्र में धँसा कर उसके कसाव को अपनी उँगली का आदि करता है। करीना बेहाल हो जाती है और हर वार पर चिहुँक उठती है। राजेश थोड़ी देर के बाद अपने अँगूठे को उँगली की जगह इस्तेमाल करने लगता है। थोड़ा सा छिद्र और खुल जाता है। अब तक करीना का सारा उफ़ान ठंडा पड़ जाता है। राजेश अब अपना पैंतरा बदलता है और अपनी उँगली से करीना की योनिमुख पर वार करता है। दोनों फांकों के बीच में से उँगली सीधी चीरती हुई सीप में छिपी हुई मोती के उपर वार करती है। करीना के मुख से एक लम्बी सिस्कारी निकल जाती है।)

करीना: आ…ह

राजेश: अब बताओ कि कैसा लग रहा है…

करीना: (सिर पटकते हुए) हा…य क्या…हु…आ

(राजेश अपने दो-तरफा वार की गति बढ़ाता है। अपने अँगूठे से छिद्र का मुहाना धीरे से खोलता है और अपनी उँगली से एंठीं हुई घुन्डी को रगड़ता है। दूसरे हाथ से राजेश नितंबों को गूँधता और मसकता है और कभी-कभी दाँतों में दबा कर धीरे से काट लेता है। करीना इन वारों को झेलने में अस्मर्थ पाती है और अचानक योनि में छोटे-छोटे विस्फोट होने लगते है।)

करीना: न…हीं…उफ..ए…आह..ह..हा.य

(राजेश का लिंग भी उन्माद में लार टपकाने लगता है। एक हाथ से करीना को नाभि पकड़ के उठाता है और अपने तन्नायें हुए लिंग को योनिमुख पर लगा कर एक भरपूर वार करता है। लिंगदेव बिना रुके सीधे बच्चेदानी के मुहाने पर वार करते हुए अन्दर तक धँस जाते है। करीना के प्रेमरस में नहाये हुए लिंगदेव धीरे से गति पकड़ते है। अभी भी योनि का संकरापन वैसा ही बना हुआ है जैसा कि पहले दिन था। राजेश एक दो गहरे धक्के मार कर अपने हथियार को बाहर निकाल लेता है और खुले हुए सूरजमुखी आकार के छिद्र के मुहाने पर बिठाता है और फिर धीरे से अन्दर की ओर ढकेलता है। छिद्र के मुहाने को लिंगदेव का सिर धीरे से खोल कर अन्दर जा बैठता है।)

करीना: आ…ईईइ म…र ग…यी…म…आआ…

राजेश: करीना अपने को ढीला छोड़ दो तो कष्ट नहीं होगा…इसे अपने अन्दर आने दो…जितना रोकने की कोशिश करोगी उतना ही ज्यादा कष्ट होगा।

करीना: (शरीर को अकड़ाती हुई) बहुत बेदर्दी हो…मुझे दर्द हो रहा है…

राजेश: (लिंगदेव के सिर पर फन्दा कसता हुआ महसूस करता हुआ) आ…ईइ…ऐसा लगता है कि तुम मेरे लंड का सिर धड़ से अलग कर दोगी…ढीला छोड़ो प्लीज…दर्द हो रहा है…

(करीना अपने शरीर को ढीला छोड़ती है। दर्द से छ्टपटाते हुए राजेश अपने लिंग को बाहर निकाल लेता है। धम्म से करीना बेड पर गिर जाती है छिद्र का मुहाना अब खुला हुआ है। राजेश की नजर अपने लिंग पर पड़ती है। पुरा सुपाड़ा सूज कर लाल हो गया है जैसे कि सारे खून का बहाव कट गया हो…)

राजेश: जानेमन…अगर आज तुम्हारा बस चलता तो मेरा एक तिहाई लंड कट कर कार्क की तरह तुम्हारे अन्दर फिट हो जाता।

करीना: (खिलखिलाती हुई) जान…बहुत दर्द हो रहा है…लाओ इस पर तेल लगा कर मालिश कर देती हूँ।

राजेश: (प्यार से करीना को अपने नीचे लेते हुए) करीना की बच्ची आज मै तेरा तीसरा मुख खोल कर ही दम लूँगा…(और करीना के नग्न जिस्म पर अपने होंठों की मौहर लगाने लगता है)

करीना: प्रिय तीसरे मुख का उदघाटन अगली बार कर लेना…आज…मेरे दूसरे मुख को तृप्त कर दिजिए…न

राजेश: जानेमन तुम कहती हो यही सही (अचानक किसी के हँसने की आवाज आती है)…कौन है…सुन्दरी…यहाँ आ…

(धीरे से दरवाजे के खुलने की आहट आती है और सुन्दरी अन्दर आ जाती है। लता कि तरह लिपटे हुए दो नग्न जिस्मों को नीची निगाह करके घूरती हुई बेड के पास खड़ी हो जाती है। करीना शर्माते हुए अपनी नग्नता छिपाने की कोशिश करती है परन्तु राजेश उसे रोकता है।)

राजेश: तुम नाह्क ही इससे शर्मा रही हो। जब यह बेशर्म दरवाजे की ओट से हमारी काम-क्रीड़ा बड़े चाव से देख रही है तो हम इस से क्यों शर्मायें…क्यों री क्या कर रही है दरवाजे के पीछे खड़ी हो कर…(करीना के उन्नत स्तनों को सहलाते हुए सुन्दरी को घूरता है)…तुझसे जाने को कहा था न…तेरे बाप को पता है कि तू क्या कर रही है…

सुन्दरी: न मालिक…मुझे लगा कि आप मुझे बुलाएँगें तो मैं बाहर आकर खड़ी हो गयी थी…

क्रमशः


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Re: कमसिन कलियाँ

Unread post by The Romantic » 11 Dec 2014 04:48

कमसिन कलियाँ--14

गतान्क से आगे..........

(राजेश गुस्से से सुन्दरी को घूरता है। सुन्दरी के आधे बाहर झाँकते हूई गोलाईयों मे उसकी नजर पल भर के लिए उलझ कर रह जाती है। फिर कुछ सोच कर करीना के होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में ले कर चूमने और चूसने का दौर शुरू करता है। अपने तन्नाते हुए लिंग को करीना की योनिच्छेद पर रगड़ता हुआ एक झटके से अन्दर कर देता है।)

राजेश: (लिंगदेव को पूरा धंसा देने के बाद रुक कर) सुन्दरी देख ले इसने पूरा ले लिया। यही तेरी कमर तोड़ देता था…तू कई दिन चल नही पाती थी। इस को देख ले, यह उमर में यह तेरे से बहुत छोटी है परन्तु कितने प्यार से इसने मुझे अपना लिया है…(पीछे की ओर अपने को खींच कर फनफनाते हुए प्रेमरस में नहायें लिंगदेव को बाहर निकाल लेता है)…इस को कहते है कामदेव कि रति…

करीना: (भावतिरेक में मुंदी आँखों से) डार्लिंग…प्लीज मत तड़पाओ…अन्दर डालो न…

(सुन्दरी का चेहरा वासना की आग में लाल हो गया और सारे शरीर में चींटियॉ सी चलने लगी है। तेज चलती हुई साँसें भारी सीने में कम्पन पैदा कर रही है। किसी नशे में चलती हुई बेड के सिरहाने बैठ कर करीना और राजेश के प्रेमरस मे डूबे हुए लिंगदेव को मुख मे भर कर साफ करती है। राजेश एक झटके से सुन्दरी के मुख से निकाल लेता है और फिर करीना की योनि की गहराई नापने लगता है। सुन्दरी अपने होंठों को चाटती रह जाती है और बड़ी हसरत भरी निगाहों से सामने काम-क्रीड़ा में मस्त युगल जोड़े को घूरती है। राजेश भी नये जोश में तीन-चार करारे धक्के देता है और करीना का ज्वालामुखी फट पड़ता है और योनिमुख से प्रेमरस रिसना शुरु कर देता है। करीना आँखे मूंद कर अपनी टांगे फैलाये बेड पर निढाल पड़ जाती है।)

राजेश: करीना…मेरा क्या होगा…यह तो नाइन्साफी है…

सुन्दरी: मालिक…मेरे उपर दया करिए…मालकिन को आराम करने दें…मेरे अन्दर ज्वर बैठ रहा है…कुछ दया करिए…

राजेश: ठीक है…पहले इसको साफ कर फिर सोचता हूँ…

(झपट कर पूरा लिंग अपने गले तक उतार कर साफ करती है। इधर करीना भी होश में आती है और यह द्र्श्य देख कर हतप्रभ रह जाती है और प्रश्नवाचक द्रष्टि से राजेश की ओर देखती है। राजेश उसे चुप रहने का इशारा करता है।)

राजेश: (लिंग पर से सुन्दरी का सिर हटाते हुए) देख तेरी मालकिन को होश आ गया है…उससे पूछ ले…

सुन्दरी: (घिघियाते हुए स्वर में) मालकिन मर जाऊँगी…मेरी मदद करो…सिर्फ मालिक ही मेरी आग बुझा सकते है…मालकिन…

(करीना को कुछ समझ नहीं आ रहा और वह राजेश की ओर देखती है।)

राजेश: बताओ करीना कि क्या करना है…तुम मेरी बराबर की जोड़ीदार हो…जो तुम कहोगी मै वही करूँगा…

करीना: (थोड़ी असमंजस में) क्या कहूं…(राजेश सिर हिला कर इशारा करता है)…ठीक है…आप इसकी आग बुझा दिजीए…वर्ना यह मर जाएगी…परन्तु इसके पति का क्या होगा…

राजेश: ठीक है। मै इसकी आग तो शान्त कर दूँगा परन्तु मेरी भी एक शर्त है…यह तुम्हारी योनि को अपने मुख से साफ करेगी और मै इसके पीछे से दोनों द्वार खोलूँगा…मंजूर हो तो ठीक है अपितु कुछ नहीं…

सुन्दरी: मालिक मुझे सब मंजूर है…

राजेश: तो अपने कपड़े तो उतार ले…तेरी मालकिन को भी तो तेरा हुस्न दिखा दे…

(सुन्दरी जल्दी से अपनी चोली और लहंगा उतार फेंकती है। तीखे नयन-नक्श, गेहुआं रंग, भरे हुए सुडौल स्तन और उनके शिखर पर भूरे फूले हुए दो निप्पल, घुंघराले बालों से ढका हुआ पागल हो जाये। गले मे पड़ी हुई चेन दोनों स्तनों के बीच की खायी मे झूल रही है। कमर पर चाँदी की करघनी की वजह से उठते हुए गोल नितंब ज्यादा उभरे हुए दिखते है। पाँव की पाजेब उसके जरा से हिलने पर एक संगीतमय ध्वनि छेड़ते हुए लग रहे है। करीना की बात सुनते ही सुन्दरी लेटी हुई करीना के योनिमुख की ओर झपटती है और अपना मुख योनिच्छद पर लगा कर रिस्ता हुआ प्रेमरस को सोखती है और अपनी जुबान से उठी हुई लाल घुंडी को चाटती है। जब तक करीना कुछ समझती, तब तक तो अपनी जुबान को कड़ा कर के मुहाने के भीतर डालने की कोशिश में लग जाती है। एक स्त्री द्वारा ऐसा कार्य का पहला अनुभव करीना को भावविभोर कर देता है।)

राजेश: सुन्दरी तेरी मालकिन की जांघों से उपर और नाभि से नीचे की कोई भी जगह अनछूई नहीं रहनी चाहिए…(कहते हुए सुन्दरी के पीछे की ओर बढ़ जाता है)… और तू तब तक नहीं हटेगी जब तक मैं नहीं हटता।

(राजेश अपने लिंग को मुठ्ठी में लेकर एक दो करारे झटके मारता है। अपने सुपाड़े को सुन्दरी की योनि के मुहाने पर लगा कर आगे की ओर ठेलता है। तन्नायें हुए लिंगदेव अपनी जगह बनाते हुए अन्दर घुस जाते हैं। आधा लिंग घुसाने के बाद राजेश झुक कर सुन्दरी के दोनों स्तनों को अपने हाथों मे लेकर कुछ देर मसकता है और कभी निप्प्लों को तरेड़ता है और कभी खींचता है। इधर करीना सुन्दरी के मुख और जुबान की हरकतों से एक नये प्रकार का अनुभव करती है। वासना की आग में तीन जिस्म भभक उठते हैं। करीना हर्षोन्माद में सिर पटकती है और सुन्दरी की योनि धीरे-धीरे तपते हुए लिंगदेव के अन्दर घुसने का एहसास करती है। राजेश इस नये अनुभव का पूरा लुत्फ लेते हुए करीना के चेहरे पर बदलते हुए भाव को निहारता हुआ एक करारा धक्का देता है और जड़ तक अन्दर धँसा देता है।)

सुन्दरी: (दर्द से बिलबिलाती हुई) हाय…मर गयी दैया री…(औंधे मुँह करीना के उपर गिर जाती है और मुँह खुला का खुला रह जाता है)

राजेश: अरी क्या हुआ…क्या पहली बार लिया है जो इतना शोर मचा रही है।

(सुन्दरी को नितंबों से पकड़ कर पीछे की ओर खींच लेता है। सुन्दरी अपने काम मे वापिस लग जाती है। कमरे में सिस्कारियाँ गूँज रही है और वातावरण को मादक और विलासपूर्ण बना रही हैं। राजेश भी अब लय में पूरी तरह आ गया है। दो चार हल्के धक्के के बाद दो चार करारे धक्के मारता और सुन्दरी के स्तनों को गूँधता हुआ राजेश अपने उफनते हुए लावा को खौलने पर मजबूर कर देता है। इस बीच करीना तीन बार झरझरा कर बह निकली और एक्साइटमेन्ट में बेहोश हो गयी। सुन्दरी की योनि दो बार लावा उगल चुकी और अब तीसरी बार उफान फिर से जोर पकड़ रहा है। एक और करारा धक्का सुन्दरी की योनि में बिजली कड़क गयी और झरझरा कर बह निकली।)

सुन्दरी: मा…लि…क…ह्हा…यउह्…आ…आह्…यह…म्…ररर…ग्…यी…दैया री (कहते हुए निढाल हो कर औंधे मुँह करीना के उपर लेट गयी। राजेश का लिंग अभी भी भन्नायें हुए हवा में लहरा रहा था।)…

राजेश: सुन्दरी…सुन्दरी…इस का क्या करूँ…

सुन्दरी: मालिक…मै इस अजगर से भर पाई…

(राजेश सिरहाने से तीन तकिये ला कर सुन्दरी के पेट नीचे लगा कर उसके नितंबो को उपर उठाता है। अपने लिंग को सरसों के तेल मे नहला कर सुन्दरी के सुरजमुखी छिद्र के मुहाने पर टिका कर एक भरपूर धक्का देता है। तेल की चिकनाई और करारा धक्का लिंगदेव सारी बाधाएं पार करके आधे से ज्यादा अन्दर धँस कर बैठ जाते है।)

सुन्दरी: (बेबसी में चीखती हुई) ममम…र ग्…यीई…ईई…इ मालि…क इसे नि…का…लिए…

राजेश: अब तो गया…अब तू सिर्फ मजे ले…(चीख से करीना को होश आता है और उठ बैठती है)…करीना यहाँ आओ और देखो…(करीना अपने को धीरे से सुन्दरी के नीचे से निकाल कर राजेश के निकट आती है और इस नये आसन को ध्यान से देखती है…राजेश का अभी एक तिहाई लिंग बाहर है)

करीना: अंकल…इसे बहुत दर्द हो रहा है…आप इसको बाहर निकाल लो…

राजेश: यह इसके साथ पहली बार नहीं हुआ है…इसका बाप आगे से नहीं परन्तु पीछे का शौकीन है। तुमने पूछा था कि इस के बाप ने मुझे इसके साथ करने दिया…यही वजह थी। पीछे की आग तो वह बुझा देता था लेकिन अपनी औरत की आगे की आग बुझाने के लिए मेरे पास भेज देता था…समझी कुछ…यह त्रिया-चरित्र कहलाता है…

(राजेश थोड़ा सा पीछे हो कर दो चार छोटे छोटे धक्के लगाता है जैसे कि जगह रमा कर रहा हो। जब आराम से लिंग अन्दर-बाहर होने लगा तो एक और करारा धक्का लगाता है और जड़ तक फँसा देता है। करीना को अपनी ओर खींच कर उसके होंठों को अपने होंठों मे दबा कर उनका गुलाबीपन सोखने लगता है और अपनी हथेली से करीना के स्तन और उन पर विराजमान गुलाबी शिखर को अपनी उंगलियों में फँसा कर तरेड़ता है। सुन्दरी अब शान्त हो कर राजेश के लिंग की लंबाई और मोटाई को महसूस करने की कोशिश करती है। कुछ देर करीना के अंगो के साथ खिलवाड़ करके एक बार फिर से दो चार छोटे छोटे धक्के लगाता है और फिर धीरे-धीरे अपने लिंग की पूरी लंबाई को नापते हुए तेज धक्के देता है। काफी देर से दूध में उफान आ रहा है और दो चार लंबे धक्के लगाते ही जव्लामुखी फट पड़ता है और काफी देर तक झटके लेते हुए अपने प्रेम रस से सुन्दरी की सुरंग भर देता है।)

राजेश: आ…आह्…(करते हुए सुन्दरी के जिस्म को अपने बदन से ढक देता है)

(बिना निकाले करीना के मोहक बदन के साथ फिर से छेड़खानी करने लगता है। एक पट की आवाज के साथ सिकुड़ा हुए लिंगदेव कार्क की तरह बाहर निकल आते है और सुन्दरी का पीछे का सुराख खुला का खुला रह जाता है और धीमी गति से बहुत गाड़ा सफेद रंग का द्र्व्य बाहर रिस कर जांघों से होता हुआ चादर पर फैलने लगता है।)

राजेश (अपनी घड़ी की ओर देखते हुए): जानेमन करीना…आज बहुत देर लग गयी। तुम जल्दी से बाथरूम में जा कर शावर ले लो उसके बाद मै शावर ले कर जल्दी से तैयार हो कर सात बजे तक तुम्हें घर छोड़ दूँगा।

(करीना निर्वस्त्र हो कर कुल्हे मटकाती हुई, इठलाती और बल खाती हुई बाथरूम की ओर रुख करती है। राजेश प्यार से सुन्दरी को उठाता है और उसके होंठों को चूमता हुआ उसके नग्न बदन के साथ कुछ देर खिलवाड़ करता है। थोड़ी देर के बाद सुन्दरी लहंगा और चोली पहन कर अपने घर का रुख करती है।)

राजेश: करीना…जरा दरवाजा खोलो…मुझे बहुत तेज पेशाब लगा है…खोलो…

करीना: वह तो पहले से ही खुला है…

(राजेश बाथरूम का दरवाजा खोल कर सीधा कमोड पर जा कर एक मोटी धार के साथ अपने को हल्का करता है। करीना शावर लेते हुए सब कुछ बड़े ध्यान लगा कर देखती है। हल्का होने के पशचात राजेश की नजर करीना पर पड़ती है। करीना की जवानी का शबाब को एकटक देखता हुआ कमोड पर बैठ जाता है। शावर की तेज धार में करीना अपने अंग-अंग को साफ करती हुई देख कर राजेश से रहा नहीं जाता और करीना के करीब जा कर उसे अपने आगोश मे लेकर साथ-साथ नहाता है। उसके कोमल अंगो के साथ खिलवाड़ करता है। काफी देर पानी में चुहलबाजी करने के बाद दोनों एक दूसरे को बड़े प्यार से टावल से सुखाते है और झटपट कपड़े पहन कर तैयार हो जाते है। करीना और राजेश के चेहरे पर संतुष्टि की आभा झलक रही है। कमरे के बाहर शमशेर सिंह और सुन्दरी खड़े हुए है।)

शमशेर सिंह: मालिक जल्दी वापिस आईए…(स्कूल यूनीफार्म में खड़ी करीना को घूरता है)

राजेश: हाँ अब जल्दी चक्कर लगा करेंगें। सुन्दरी अच्छी तरह साफ-सफाई करके रखना।

सुन्दरी: जी मालिक…

(चलते हुए दो पाँच सौ के नोट शमशेर के हाथों मे रख कर अपनी कार में बैठ जाता है। सुन्दरी की ओर हाथ हिला कर करीना दूसरी ओर से कार में बैठ जाती है। राजेश कार बढ़ा कर सड़क पर ले आता है और एक हाथ करीना के गले में डाल कर अपनी ओर खींच कर उसके होंठों को चूम लेता है।)

राजेश: जानेमन…कैसा रहा आज का दिन…

करीना: स्वप्निल…मेरे जीवन का सबसे अच्छा दिन था।

(ऐसे ही बात करते हुए घर का रास्ता तय करते हैं। राजेश पगडंडी के पास कार खड़ी कर के करीना को छोड़ देता है। करीना भागती हुई अपने घर का रुख करती है। राजेश कार को खड़ी कर के करीना को तब तक देखता है जब तक वह अपने घर का गेट खोल कर अन्दर चली जाती है। राजेश अपने घर की ओर रुख करता है…।)

(राजेश के घर पर सन्नाटा छाया हुआ है। कार खड़ी कर के दरवाजे पर लगी हुई घंटी बजाता है। कुछ देर बाद मुमु दरवाजा खोलती है।उसका गुस्से से मुँख लाल है और मुमु के पीछे टीना खड़ी हुई है। राजेश घर के अन्दर प्रवेश करता है और सीधा जा कर सोफे पर निढाल सा हो कर बैठ जाता है।)

मुमु: कहाँ गये थे…इतनी देर लगा दी…

राजेश: सो सौरी यार…शहर के बाहर गया था क्लाईन्ट से मिलने…पर क्या हुआ…

मुमु: तुम भूल गये कि मुझे इस हफ्ते रोज ट्रेनिंग के लिए जाना है।

राजेश: तो फोन किस लिए है…मुझे फोन कर देती

टीना: (बीच में बात काटते हुए) शाम से फोन मिला रहे है पर आउट ओफ़ रीच आ रहा है।

राजेश: तो कोई बात नहीं…टीना को छोड़ कर टैक्सी ले कर चलीं जाती…तुम्हें लेने के लिए मै और टीना आ जाते…खैर कोई बात नहीं आज रेस्ट कर लो…इसी बहाने आज घर का खाना मिल जाएगा।

टीना: पर मेरा क्या…मेरी तो शाम खराब हो गयी।

राजेश: मेरी प्यारी बेटी…मै कल शाम को आज और कल का हिसाब पूरा कर दूँगा…प्लीज सौरी…माफ कर दो।

मुमु: जल्दी से मुँह-हाथ धो लो…मै खाना लगाती हूँ। टीना तुम जा कर मेज पर सामान लगाओ।

(मुमु और टीना रसोई की ओर रुख करती है। राजेश अपने कमरे की ओर रुख करता है। थोड़ी देर में कुर्ता और लुंगी पहने टीना और मुमु के साथ डाईनिंग टेबल पर आ कर बैठ जाता है। मुमु सब का खाना परोसती है और पूरा परिवार साथ बैठ कर खाना खाता है। खाना खाने के बाद राजेश और टीना टीवी के सामने जा कर बैठ जाते है और मुमु बरतन समेट कर रसोई मे रख कर दोनों के साथ जा बैठती है)

मुमु: क्या टीना आज बोर्ड के फार्म भर दिये…

टीना: हाँ मम्मी। आज ही हमारी सारी क्लास के फार्म भर दिये गये।

मुमु: अब पढ़ाई में ध्यान लगाना शुरु कर दो…वक्त निकलते हुए पता भी नहीं चलेगा।

राजेश: अब बस भी करो…जब देखो पढ़ाई…अभी बहुत समय है। पढ़ लेगी जब वक्त आएगा।

मुमु: हाँ बिगाड़ो मुझे क्या…आज मिसेज शर्मा मिली थी बता रहीं थी कि करीना ने कोई कोचिंग क्लास जोइन कर रखीं है। मै सोच रही हूँ कि टीना को भी उसी क्लास में भर्ती करा दूँ।

टीना: मुझे नहीं जाना। टाइम खराब करना है तो जाओ…

राजेश: मेरे ख्याल में टीना सही कह रही है। करीना ने बताया था कि साइंस में कमजोर होने की वजह से उसने यह क्लास चुनी है। अपनी टीना तो साइंस में अच्छी है पर वैसे भी आगे चल कर इसे साइंस में कोई रुचि नही है। तो क्या फायदा…

मुमु: ठीक है…कुछ तुम सही हो और कुछ तुम्हारी लाडली…मै ही गलत हूँ

टीना: मम्मी का रेकार्ड शुरु हो गया…

राजेश: ठीक है भई, अगली बार करीना आएगी तो पूछूँगा कि इन क्लासेज से उसे कोई फायदा हुआ क्या…अगर वह हाँ कहती है तो टीना को भी भर्ती करा दूँगा…ठीक है

मुमु: हाँ अब ठीक है…तुम्हें बताना भूल गयी की लीना अपनी क्लास के साथ इतवार को सुबह की फ्लाइट से आ रही है। जरा पता करना की इन्डिगो की फ्लाइट कब आती है।

टीना: मै और आप दीदी को लेने जाएगें…

राजेश: हाँ…ठीक है। परन्तु मुमु तुम भी घर पर क्या करोगी…तुम भी चलना…

मुमु: देखूंगी…

राजेश: मै थक गया हूँ…सोने जा रहा हूँ…टीना बेटा तुम भी आराम कर लो…

मुमु: हाँ बहुत रात हो गयी…चलो सोने पर कल जल्दी आना और भूलना नहीं…

(कहते हुए तीनों उठ कर खड़े हो जाते है। मुमु और राजेश अपने कमरे मे जाते हैं और टीना अपने कमरे मे चली जाती है…।)

(राजेश कुछ देर के बिस्तर पर करवटें बदलने के बाद साथ में लेटी हुई मुमु को सोता देख कर उठता है। आज दोपहर की क्रीड़ा से थका हुआ है लेकिन टीना के बारे में सोच कर थोड़ा बेचैन है। चुपचाप उठ कर टीना के कमरे की ओर रुख करता है।)

राजेश: (दरवाजे पर कान लगा कर ठकठकाता है) टीना…टीना…

टीना: …हूँ

राजेश: (कमरे मे घुसते हुए) बेटा…अभी सोई नहीँ क्यों…

(गुलाबी रंग की लम्बी सी टी-शर्ट पहने टीना बेड पर अधलेटी अवस्था में नावल पढ़ रही है। टी-शर्ट जांघों तक खिंचने से केले सी चिकनी दूधिया टांगें कमरे की रौशनी में चमक रही है। पुष्ट सीने की पहाड़ियाँ राजेश की आँखों के सामने हर श्वास के साथ काँपती हुई लगती है।)

टीना: (अंगड़ाई लेते हुए) कुछ नहीं ऐसे ही नावल पढ़ रही थी…

राजेश: (सिरहाने के निकट बैठते हुए) अरे मैनें तो सोचा कि मेरे लिए जाग रही हो…

टीना: मै आपके लिए क्यों जागूँगी… मै तो आपसे बात नहीं करती। मै गुस्सा हूँ।

राजेश: (नजदीक सरकते हुए अपनी एक बाँह टीना की गरदन में डालते हुए) क्यों बेटा… मुझसे क्यों नाराज हो मैनें ऐसा क्या कर दिया…

टीना: आज की एक्सरसाइज नहीं हो पाई… शाम से ही मै आपकी राह देख रही थी…लेकिन आप न…

राजेश: (उसके चेहरे को अपनी ओर घुमाते हुए) सच बताओ… सिर्फ एक्सरसाईज के लिए या फिर जो काम सुबह अधूरा रह गया था उस के लिए…

टीना: (शर्मा कर आँखे झुकाते हुए) पापा… आप बड़े खराब हो।

राजेश: (कन्धे से हाथ हटा कर कमर मेँ डाल कर अपनी ओर खींचते हुए) क्यों तुम्हारे दिल में हलचल नहीं हो रही है… (अपना दूसरा हाथ टीना की जांघों के अन्दरूनी भाग पर फिराते हुए धीरे से योनिमुख की ओर ले जाते हुए)… क्या तुम्हारी पैन्टी के भीतर सुबह से आग नहीं सुलग रही है? अरररे… यह क्या (अपनी उंगलियों को योनि की दरार पर फिराते हुए) पैन्टी नहीं पहनी आज……

टीना: (कसमसाती हुई) पापा… नहीं करिए…(हाथ को पकड़ते हुए)

राजेश: (धीरे-धीरे संतरे सी फांकों को खोलते हुए और खड़े हुए बीज को रगड़ते हुए) क्यों आग बुझानी है कि नहीं…

टीना: आअ…अआह… हूँ।

राजेश: (कमर पर पड़े हुए हाथ को टी-शर्ट के भीतर डाल कर नग्न स्तन को हौले से दबाते हुए) जब तक तुम नहीं बोलोगी मै कुछ भी नहीं करूँगा… और तुम रात भर यूहीं जलती रह जाओगी…

टीना: (गरदन हिला कर हामी भरते हुए) पाप…आह्…नन…हीं

राजेश: (नीचे से अपनी उँगलियों से खिलवाड़ करते हुए) ठीक है…तुम कहती तो मै… (झूठे को अपना हाथ निकालते हुए)… जाता हूँ

टीना: (राजेश के हाथ को अपनी जांघों से भींचते हुए) न…नहीं प्लीज पापा

राजेश: तो बोलो…

टीना: (धीरे से) प्लीज पापा… (सिसकारी भरते हुए) आप को जो करना है करो प्लीज…

राजेश: (शिखर कलश को तरेड़ते हुए) क्या करूँ… अपनी उँगली से या फिर अपने मुख से… (कहते हुए टीना के होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त मे ले कर चूमते और कुछ देर तक पंखुड़ियों से होंठों के रस को सोखते हुए) …बोलो

टीना: (वासना की आग मे तड़पते हुए) पापा, कुछ भी…

राजेश: नहीं… पहले बताओ

टीना: पापा दोनों से… मैं मर जाऊँगी… (कहते हुए अपनी टी-शर्ट उतार फेंकती है और राजेश से लिपट जाती है)

राजेश: बेटा… इस आग को बुझाना बहुत जरूरी है… पर मेरी एक शर्त है मानो तो बोलूँ…

टीना: (एक्साइटिड हो कर) मुझे सब मंजूर है और भी कुछ हो तो वह भी मंजूर है…

राजेश: सोच लो… (कहते हुए टीना के नग्न जिस्म को अपने नीचे लेते हुए)

टीना: मुझे सब मंजूर है।

(ब्लेंक चैक मिलते ही राजेश ने टीना के कमसिन नग्न जिस्म पर छा गया। टीना के होठों को अपने होंठों मे दबा कर चूमने और चूसने लगता है। टीना भी अपने होंठों के साथ अठ्खेलियों करते हुए राजेश का पूरा साथ देती है। टीना की जुबान अपने होठों मे दबा कर चूसता है और कभी अपनी जुबान टीना के होंठों के हवाले कर देता है। काफी देर टीना के गुलाबी होंठों को सोखने के बाद राजेश अपना ध्यान नग्न सीने पर केन्द्रित हो जाता है। टीना के सुडौल स्तनों को अपने हाथों में भरकर बड़े प्यार से दबाने का क्रम शुरु करता है। टीना के अन्दर की धीमी सुलगती हुई वासना की आग अब भड़कने लगी है।)

टीना: प्पा.उई...पअआ.उ…उ.उफ.उ.उ...न्हई…आह..ह..ह.

(तेज चलती हुई साँसें फूले हुए शिखर कलश में अजीब सी कँपन ला रहे है और लगातार राजेश की जुबान के मर्दन से लाल हो गये है। मुख से निकलती हुई लार पुरे पुष्ट स्तन को नहला देती है। कभी नग्न निप्पल को निशाना बनाता है और कभी पूरे स्तन को निगलने की कोशिश करता है। कभी लम्बवत्त निप्पल को अपनी जुबान के अग्र भाग से छेड़ता है और कभी धीरे से दांतों में ले कर चबा देता है।)

क्रमशः


The Romantic
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Re: कमसिन कलियाँ

Unread post by The Romantic » 11 Dec 2014 04:48

कमसिन कलियाँ--15

गतान्क से आगे..........

टीना: (भावविभोर हो कर) प्पा.उई...प लीज…काटिएआ.उ…उ.उफ.उ.उ...न्हई…दर्द्…हो…ओ…ता है…

राजेश: …टाक्सिन बना रहा हूँ।

(एक स्तन छोड़ कर अपना ध्यान दूसरे स्तन पर केन्द्रित करता है। फिर वही चूमने और चूसने के कार्यक्रम को दोहराता है। टीना हर्षोन्मत्त हो कर सिर पटकती है। अबकी बार नग्न होने के कारण टीना के सीने का पोर-पोर अतिसंवेदनशील हो गया है। राजेश का मुख सुडौल स्तनों को पूरी तरह से अपने कब्जे मे ले कर सोखने में लग जाता है। कभी-कभी अपनी जुबान से फुले हुए निप्पलों से छेड़खानी करता है और कभी धीरे से दांतों में ले कर चबा देता है। टीना का शरीर अब उसके काबू मे न रह कर किसी गहरे उन्माद में तड़पता है और उसकी योनिमुख भी फिर से एक बार हरकत मे आ कर अपने आप खुल-बन्द होने लगती है। पिघलता हुआ लावा बाहर की ओर बह कर चादर को गीला कर रहा है।)

टीन: उ.उई...पअ.उ…पा.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह..ह..ह.

(राजेश नीचे की ओर रुख करता है। राजेश अपने होंठ नग्न योनिमुख के होंठों पर लगा देता है। अपनी उंगलियों से थोड़ा सा योनिमुख को खोलता है और अपनी जुबान से एंठीं हुई घुन्डी को सहलाता है। इस वार से तिलमिला कर एंठीं हुई घुन्डी रक्तिम लालिमा लिए सिर उठा कर खड़ी हो जाती है। कभी अपनी उंगलियों से योनिच्छेद को छेड़ता और कभी जुबान के अग्र भाग से एंठीं हुई घुन्डी को सहला कर ठोकर मारता है। इस दो तरफा वार को ज्यादा टीना बर्दाश्त नहीं कर पाती और उसकी आँखों के सामने तारे नाँचने लगते है। एक झटका ले कर उसकी योनि झरझरा कर बहने लगती है। राजेश की जुबान भी चटखारे ले कर प्रेम का अम्रित पीने में लग जाती है।)

टीना: (जैसे नशे में हो).उई...पअ.उ…पा.…ल…उफ.उ.उ.ल..न्हई…आह..ह..ह.

(टीना के योनिच्छेद पर मुख लगा कर राजेश सारा अम्रित सोखने मे लग जाता है। अपनी जुबान के अग्र भाग को कड़ा कर के अन्दर डालने की कोशिश करता है। कुछ क्षणों में एक बार फिर से लगातार झटके ले कर टीना की योनि में सैलाब आ जाता है जिसको राजेश फिर से चटखारे ले कर पी जाता है। दोनों थकान से निढाल हो कर बेड पर पड़ जाते हैं और अपनी-अपनी तेज चलती हुई साँसों को काबू में लाने की कोशिश करते है।)

टीना: (गहरी साँसे लेती हुई) पापा… अब मेरा हिस्से का टाक्सिन निकालने का समय आ गया है…

(अब तक दोनों की सारी शर्म काफूर हो चुकी है। टीना अपनी नग्नता को छुपाए बगैर राजेश की लुंगी को हटाती हुई लिंगदेव को अपनी मुट्ठी में ले कर सुपाड़े को उघाड़ती है। आज दोपहर की एक्सरसाइज के बाद फूला हुआ सुपाड़ा लाल से बैंगनी रंग का हो चुका है। कुकुरमुत्ते सामान सिर पर एक आँख के कोर से ओस की बूँद टपक कर टीना की उँगलियों पर गिरती है। टीना शीघ्रता से लिंगदेव के सिर को अपने मुँह में रख कर लोलीपाप की तरह चूसती है। टीना के सिर को पकड़ कर सहारा देते हुए ज्यादा से ज्यादा लिंगदेव को भीतर डालने के लिए प्रेरित करता है। इधर टीना भी अपने होंठों में सुपाड़े को फँसा कर उपर नीचे का खेल बड़ी तन्मयता से खेलने मे मस्त है। धीरे धीरे राजेश अपना नौ इंची हथियार टीना के गले तक उतार देता है। अब टीना की गले की माँसपेशियाँ लिंगदेव के सिर को जकड़ कर मालिश करना आरंभ कर देती है। दो सुन्दरियों को भोगने के बाद भी अब लिंगदेव के अन्दर लावा उफनते हुए छलकने लगता है और धीरे से झटके खाते हुए टीना के गले में बहने लगता है।)

राजेश: आह..ह..ह.हाँ…बेटा टाक्सिन की एक भी बूँद को बर्बाद न करना।

टीना: (सारा प्रेम रस गटकने के बाद सुपाड़े को चूसती हुई)…कैसा लग रहा है पापा

राजेश: स्वप्निल… तुम्हारे गुलाबी होंठों में इसे फँसा हुआ देख कर मै तो निहाल हो गया।

टीना: (राजेश के सीने से लिपटते हुए) पापा…कल आप मुझे इसका (वासना की आग से पिघले हुए लिंगदेव की ओर इशारा करते हुए)…नाम बताने का वादा किया था।

राजेश: हाँ बेटा…इसको इस हालत में लंड कहते है…

टीना: लंड… ऐसा लगता है की लंडन से आया है…

राजेश: जब यह अजगर की तरह फुफकारता है तब इसे लौड़ा कहते है।

टीना: लंड और लौड़ा… आपने क्या नाम दिए हैं।

राजेश: यही नहीं, बेटा यह कुकुरमुत्ते जैसे सिर को टोपी या सुपाड़ा कहते है और दो नीचे अण्डाकार जैसी लटकती हुई वस्तुओं को टट्टे या आँड कहते है। सारा सफेद रंग का गाड़ा द्र्व्य इन्हीं अण्डों में बनता है।

टीना: यह नाम आपने दिए है…

राजेश: न बेटा… यह नाम तो जग प्रचिलित है। सभी इन को इसी नाम से पुकारते है।

राजेश: बेटा तुम्हारे शरीर के संवेदनशील अंगों के भी नाम है…जैसे (स्तन को अपने हथेली से मसकते हुए) इस को चूचक या बोबे या कभी मुम्में भी कहते है। और इसे (तने हुए सिर उठाए शिखर कलश को अपनी उंगलियों के बीच में फँसा कर तरेड़ते हुए) चूची या निप्पल कहते है।

टीना: आपको कौन सा शब्द इनके लिए अच्छा लगता है।

राजेश: (मुस्कुराते हुए) मुझे तो बस इन्हें अपने मुँह मे दबा कर रखना अच्छा लगता है… तुम चाहे इन्हें फिर किसी भी नाम से पुकारो… अब नीचे की ओर रुख करते हैं। बेटा तुम कुछ देर के लिए खड़ी हो जाओ।

(टीना बेड पर खड़ी हो जाती है)

राजेश: (कटिप्रदेश पर अपनी उँगलियॉ फिराते हुए) बेटा…(योनिमुख पर उँगली रख कर) इसे चूत कहते है। (दो जुड़ी हुई फाँकों को खोल कर सिर उठाते हुए बीज पर उँगली रगड़ते हुए) इसको चूत का दाना या क्लिट या कभी बीज कहते है।

टीना: बड़े अजीब नाम है…

राजेश: बेटा जरा घूम जाओ…(राजेश की ओर पीठ करके टीना खड़ी हो जाती है) बेटा तुम्हारा यह तीसरा मुख है…(टीना के सूरजमुखी छिद्र के मुख पर अपनी उँगली फेरते हुए) इसे गाँड कहते है…

टीना: पापा… छि: क्या इसका भी कोई उपयोग है?

राजेश: टीना…एक लड़की के पास एक लौड़े को निगलने के लिए तीन मुख होते है- पहला तुम्हारे चेहरे के होंठों के बीच में है, दूसरा तुम्हारे नीचे के होंठों के बीच में है जिसे सब चूत कहते है और तीसरा तुम्हारे नितंबों के बीच मे छुपा हुआ है जिसे गाँड कहते है। एक लड़की यह पूँजी सिर्फ उसको देती है जिससे वह सबसे ज्यादा प्यार करती है और उस पर सबसे ज्यादा विश्वास करती है।

टीना: पापा मै सबसे ज्यादा आप पर विश्वास और प्यार करती हूँ…

राजेश: बेटा मैं धन्य हो गया… थैंक्स… तुम्हें मेरी शर्त वाली बात याद है न…

टीना: कौन सी शर्त… अच्छा वह… बताईए क्या शर्त थी…मुझे क्या करना होगा।

राजेश: ज्यादा कुछ नहीं… बस… इस (अपने लंड की ओर दिखाते हुए) को अपने तीनों मुख में बारी-बारी से निगलना होगा।

टीना: नहीं…ऐसा नहीं हो सकता

राजेश: क्यों नहीं… क्या मुझसे प्यार नहीं करती

टीना: (राजेश से लिपटते हुए) मै आपसे बहुत प्यार करती हूँ। पर डरती हूँ कि……

राजेश: तुम अपनी बात से मुकर रही हो……याद है न……“मुझे सब मंजूर है”

टीना: (कुछ सोच कर) ठीक है…परन्तु सिर्फ एक बार

राजेश: नहीं…हमारी शर्त में कितनी बार की कोई बात नहीं थी।

टीना: पापा…यह गलत है…

राजेश: हाँ कि नहीं…। मैं तुम्हें सब से ज्यादा प्यार करता हूँ। अगर तुम नहीं चाहोगी तो मैं जबरदस्ती नहीं करूँगा। यह प्यार का खेल है और मै चाहता हूँ कि मेरी बेटी इस खेल में मेरा साथ दे।

टीना: पापा… (कुछ सोचते हुए)… क्या आप मुझे कुछ समय देंगे? मै सोच कर बताऊँगी…

राजेश: ठीक है… मुझे कल सुबह तक बता देना…(टीना अपनी गरदन हिला कर मना करती है) खैर हमारी ट्रेनिंग के टाइम पर बता देना।

टीना: ठीक है…

(राजेश एक बार फिर से टीना के नग्न जिस्म को छेड़ते है। उसके होंठों को चूमता है और उन्नत स्तनों को सहलाता है।)

राजेश: बेटा सोचना…मै चलता हूँ मुझे अब नींद आ रही है…तुम भी थक गयी हो तुम भी सो जाओ…

(राजेश बेड से उतर कर अपनी लुंगी ठीक करता है और कमरे से बाहर चला जाता है। टीना भी थकान से बोझिल आँखों को मूंद कर यथावत सो जाती है…)

(सुबह का समय। राजेश चाय की चुस्कियॉ लेते हुए बेडरूम में मुमु से बात कर रहा है।)

राजेश: मुमु…आज मैं पाँच बजे तक आऊँगा तुम तैयार रहना।

मुमु: ठीक है। मगर मुझे आज देर हो जाएगी क्योंकि कल वाला रूटीन भी मुझे आज पूरा करना होगा।

राजेश: ठीक है। कैसा चल रहा है तुम्हारा प्रोग्राम… अच्छा लग रहा है? तुम्हारे चेहरे पर संतुष्टि की रौनक और बदन भी खिला-खिला सा प्रतीत होता है।

मुमु: सच मै सोच भी नहीं सकती थी कि मुझे इस ट्रेनिंग करने से कितना आत्मिक सुख मिलेगा। …खैर छोड़ो। जो भी तुमने मेरे लिए किया वह क्या कम है।

राजेश: भूल जाओ…सब कुछ। बस ऐसे ही खुश रहा करो और वैसे भी इस जीवन में बहुत टेन्शन है। मुझे जल्दी निकलना है मै तैयार होने जा रहा हूँ…तुम नाश्ता वगैरह की तैयारी करो।

(कहते हुए राजेश बाथरूम में घुस जाता है और मुमु बेड से उतर कर रसोई में चली जाती है। थोड़ी देर में राजेश आफिस जाने के लिए तैयार हो कर डाईनिंग टेबल पर आता है। मुमु झटपट उसके लिए नाश्ता टेबल पर सजाती है। अखबार पड़ते हुए राजेश नाश्ता करता है और फिर अपने आफिस की ओर निकल पड़ता है। मुमु भी तैयार होने के लिए बाथरूम की ओर रुख करती है।)

टीना: मम्मी…मम्मी कहाँ पर हो…बड़े जोरों की भूख लग रही है।

मुमु: (कमरे से निकलती हुई) तुम बैठो मै मेज पर नाश्ता लगाती हूँ…

टीना: मम्मी मै कुछ देर के लिए करीना के पास जाना चाहती हूं…

मुमु: ठीक है पर जल्दी आ जाना…

(दोनों माँ और बेटी साथ बैठ कर नाश्ता करते है। थोड़ी देर के बाद, टीना तैयार हो कर करीना के घर चली जाती है। फोन की घंटी बजती है और मुमु फोन पर किसी से गुस्से से बात करती है और फिर बहुत गुस्से से फोन को पटक देती है और रसोई में खाना बनाने के लिए चली जाती है…। शाम के पाँच बज गये है। मुमु जिम जाने के लिए तैयार बैठी हुई है। सामने टीना घड़ी की ओर टिकटिकी लगा कर देख रही है। कार रुकने की आवाज आती है।)

टीना: लगता है पापा आज टाइम से आ गये…(कहते हुए दरवाजा खोलती है और सामने राजेश कार से उतरता हुआ दिखता है।)

राजेश: हाय्…बेटा आज मेरे लिए बड़ी बेचैनी से इंतजार कर रही हो…क्या बात है?

टीना: (झेंप कर) हाय पापा…

(दोनों अन्दर आते है। मुमु सोफे पर बैठी हुई है। राजेश को देख कर उठती है और बाहर निकलती हुई राजेश से कहती है)

मुमु: आप जरा मेरे साथ बाहर आएँगे…

राजेश: (अचंभे में) हाँ क्यों नहीं… (कहते हुए बाहर की ओर मुमु के साथ निकलता है।)

मुमु: आज कितने साल बाद मेरे परिवार को मेरी याद आयी है। पिताजी का फोन आया था मिलने के लिए कह रहे थे…

राजेश: तो मिल लो…इसमें क्या बुराई है। आखिर उन्हें तुम्हारी याद तो आयी।

मुमु: तुम्हें तो सब पता है…फिर भी

राजेश: यह तुम्हारा परिवार है। यह तुम्हें सोचना है कि कैसे इस रिश्ते को निभाओगी। मुझे तो बस अपना वचन याद है…(मुस्कुराते हुए)

मुमु: आप भी न…मै उनसे कोई भी रिश्ता नहीं रखना चाहती… वैसे भी… आज कल तुम्हें पता है कि पिताजी ने स्वर्णआभा की भी जिंदगी बर्बाद कर दी है। …न मैनें सोच लिया है कि मुझे उन के साथ कोई रिश्ता नहीं रखना है।

राजेश: तुम नाहक ही गुस्सा कर रही हो… खुशी-खुशी जिम जा कर ट्रेनिंग करो और मौज करो। भाड़ में जाने दो अपने पिताजी को… जाओ (कहता हुआ मुमु को कार में धकेलता है।)

मुमु: बाय… (कहते हुए कार आगे बढ़ाती है)।

राजेश: बाय… (कहते हुए अपने घर में प्रवेश करता है)

टीना: (खुशी से चहकते हुए) पापा आज का क्या रूटीन है…

राजेश: पहले मेरी शर्त… क्या सोचा?

टीना: (ठुनकते हुए) पहले आप…

राजेश: बेटा आज कोई भी कास्ट्यूम नहीं है… आज सिर्फ तुम्हारे सारे अंगों की एक्सरसाईज होगी।

टीना: तो क्या पहने… क्या वही पुराने कपड़े…

राजेश: नहीं… आज की एक्सरसाईज में कपड़े वर्जित है।

टीना: तो फिर…

राजेश: तुम बिल्कुल ठीक समझ रही हो… इधर आओ (टीना को खींच कर अपने पास बुलाता है) आज का रूटीन हम तुम्हारे कमरे मे करेंगें। चलो…

टीना: क्यों आपके कमरे क्यों नहीं… आपका कमरा बड़ा है और उसमें बहुत विभिन्न प्रकार के मिरर लगे हुए है…

राजेश: तुम्हारी मर्जी…ठीक है मेरे कमरे मे सही। चलें…

(दोनों राजेश के बेडरूम में जाते है। राजेश अपने कमरे पहुँच कर टीना को घुमा कर अपने सामने खड़ा करता है। धीरे से अपनी ओर खींचकर उसके होंठों का रसपान करता है। कभी नीचे के और कभी उपर के होंठ को अपने मुँह में ले कर चूसता है और कभी अपनी जुबान से टीना के गले की गहराई नापता है। टीना कसमसा कर अलग होने की कोशिश करती है।)

राजेश के भी जिस्म मे धीरे-धीरे उत्तेजना से मचल उठता है। वह टीना के नीचे के और कभी उपर के होंठ को अपने मुँह में ले कर चूसता है और कभी अपनी जुबान से टीना के गले की गहराई नापता है। टीना कसमसा कर उससे अलग होने की कोशिश करती है।)

टीना: पापा…पापा हम अपना रूटीन कब करेंगे…

राजेश: अभी करते हैं… पहले मै अपना आज का टैक्स तो वसूल कर लूँ…(कहते हुए फिर से एक बार टीना के गुलाबी होंठों को लाल करने में लग जाता है)

टीना: (सब कुछ जान कर भी अनजान बनते हुए) हूँ…पापा आप…

(टीना के होठों का रसपान करते हुए राजेश अपने हाथ टी-शर्ट के भीतर डाल कर ब्रा को टटोलता है। पर कुछ न पा कर टीना के उन्नत स्तनों को अपनी हथेली में लेकर धीरे से दबाता है। इस हरकत से टीना चिहुँकती है मगर कुछ कह पाने से पहले ही राजेश टी-शर्ट को उतार फेंकता है। टीना का सीना पूर्णता नग्न हो गया है और अब राजेश होंठों को छोड़ कर अपनी हथेली से स्तनों की सुडौलता को नापता हुआ अपने मुख में गुलाबी निप्प्ल को लेकर उनका रस सोखने की कोशिश करता है।)

टीना: आ…ह पापा…

(राजेश स्तनों को अपने मुख के रस से नहलाता हुआ टीना कि स्कर्ट के हुक खोल देता है। ढीली हो जाने से स्कर्ट जांघो से फिसल कर जमीन पर आ जाती है। इन प्ररंभिक वारों से टीना की जवानी भी आवेश में आ जाती है। राजेश स्तनपान करता हुआ टीना की पैन्टी की इलास्टिक मे अपनी उँगलियॉ को फँसा कर उतार देता है। टीना अब पूर्णतः नग्न हो कर राजेश से लिपट जाती है।)

क्रमशः