पिकनिक का प्रोग्राम compleet

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The Romantic
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पिकनिक का प्रोग्राम compleet

Unread post by The Romantic » 11 Dec 2014 08:09

पिकनिक का प्रोग्राम
मेरा नाम इमरान है। एक बार ट्यूशन में पिकनिक का प्रोग्राम बना। हमारे ट्यूशन में दो लड़के, पांच लड़कियां थीं, और मेडम। उनमें से ठीक पिकनिक के एक दिन पहले एक भाई और एक बहन ने ना जाने का बता दिया। क्योंकी उनके अब्बू की तबीयत खराब हो गयी थी। अब 4 लड़कियां और मैं और मेडम। पिकनिक का प्रोग्राम कैंसिल भी नहीं किया जा सकता था, सारी तैयारी हो चुकी थी। समुंदर किनारे का जाना था, शहर से 10 किलोमीटर के फासले पर। हम सब तैयार होकर बस स्टैंड तक पहुँचे।

बस में बैठे तो एक सीट पर मेडम और दो लड़कियां बैठ गयीं। मेरे साथ दो लड़कियां बैठी, खिड़की के लिए दोनों में झगड़ा हुआ। एक खिड़की के पास बैठी। दूसरी उससे नाराज थी, इसलिए मुझे बीच में बिठाया और खुद रोड साइड पे बैठ गयी। अब दोनों मुझसे उमर में बड़ी थीं। शायद क्लास में कई-कई बार फेल होकर आगे आई थी। हम 10वीं में थे। मेरी उमर जब की *** साल थी तो वो 18-19 साल की होंगी। भरपूर जवान बदन, चौड़े चूतड़ बड़ी-बड़ी छातियों के बीच, मैं दबकर रह गया।

दोनों की छातियां मेरे दोनों कंधों से सटी हुई थीं। मुझे कहने की जरूरत नहीं की मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था। मैं जानबूझ कर उनकी छातियों पर दबाओ डाल रहा था, कभी एक तो कभी दूसरी के। मेरा चेहरा बड़ा ही भोला मासूम सा था, ऐसा सभी कहते थे। इस तरह मंजिल आ गई। हम बस से उतरे और सामान उठाने लगे। मेरे जिम्मे लकड़ी का गट्ठर और एक बाल्टी आई। मैं लकड़ी कंधे पे और एक हाथ में बाल्टी लेकर चलने लगा। मेरा लण्ड खड़ा था पैंट में जरा साइड हो गया था। जिससे उसका उभार साफ दिख रहा था। मुझे अहसास नहीं था।

तभी एक लड़की जीनत की निगाह उसपर पड़ गयी। उसने अपने मुँह में एक हाथ रख लिया और दौड़कर आगे गयी। और दूसरी लड़की सोमन को बताया और उसने भी मुड़कर देखा, तब मुझे एहसास हुआ। मैंने फौरन हाथ से बाल्टी को नीचे रखा और लण्ड को अड्जस्ट करने लगा। उन दोनों को हँसता देखकर पीछे मेडम के साथ चलने वाली लड़की पिरी और कोमल उनके पास पहुँची और उनसे पूछने लगीं। फिर सब मुड़-मुड़कर मुझे देखने लगीं, और हँसने लगीं। उनमें पिरी सबसे गोरी और उसकी चूचियां सबसे बड़ी थीं। मुझे उसकी चूचियां देखने में बड़ा मजा आता था।

उसके बाद जीनत हसीन थी। उसकी भी चूचियां पिरी के ही सामान बड़ी थीं। लेकिन वो उतनी गोरी नहीं थी। हम चलते-चलते समुंदर के किनारे झाड़ियों के अंदर गये। मेडम ने कहा की लड़कियां हैं, कपड़े वगैरह बदलने के लिए एकांत चाहिए। लोगों की भीड़ से जरा दूर ही डेरा जमाना है। फिर हमें एक बढ़िया जगह मिल गयी। आज भीड़ बहुत कम थी। चारों तरफ झाड़ियां थी, बीच में थोड़ा साफ जगह थी। शायद यहाँ हाल ही में किसी ने सफाई करके पिकनिक की होगी।
हमने वहीं जमने का फासला किया। फिर मैं पेशाब करने चला गया। जब पेशाब कर रहा था तो मुझे झाड़ी के पीछे से कुछ खुसुर फुसुर की आवाज आई। मैं डर गया, मैंने समझा कोई जानवर तो नहीं। मैंने जितनी जल्दी पेशाब करने की कोशिश की उतना ही पेशाब निकलता रहा। मैं लौटा तो मेरे पीछे-पीछे जीनत और सोनम भी झाड़ी के पीछे से निकलकर आई। मैं समझ गया की यही दोनों थीं।

मेरे नजदीक आकर जीनत बोली- “तुम बैठकर पेशाब नहीं करते…”

मैंने कहा- “तुमने देखा क्या…”

उसने कहा- “और नहीं तो क्या…”

मैंने पूछा- “तुम वहाँ क्यों गयी थी…”

उसने कहा- “अरे वो हमें नहीं लगती क्या… तुम्हारी अम्मी को बोल दूँगी की मुसलमान होकर खड़ा-खड़ा पेशाब करता है…”

“यह बात ठीक नहीं, पिकनिक की बात घर तक नहीं जानी चाहिए…” मैंने कहा।

हमारी बहस को सुनकर मेडम पूछी- क्या हुआ।

मैंने कहा- मेडम, मैं खड़ा होकर पेशाब कर रहा था। जीनत बोल रही है अम्मी को बोल देगी।

मेडम ने सबको बुलाया की इधर आओ, पिरी, कोमल, सोनम, जीनत और हम सब उनके सामने खड़े थे। उन्होंने कहा- “सब कान खोलकर सुन लो, यहाँ तुम पिकनिक में मस्ती करने आए हो, जो चाहो करो। यहाँ की बात यहीं छोड़कर जाना। घर तक कोई बात नहीं पहुँचनी चाहिए। बोलो मंजूर है तो पिकनिक करो वरना अभी वापस चलो। मुझे कोई लफड़ा नहीं चाहिए…”

सबने कहा- ठीक है मेडम। जीनत ने भी कहा।

फिर मेडम के कहने पर उसने मुझसे सारी कहा। फिर अपनी चुलबुली अंदाज में मुझे कमर में गुदगुदी करते हुए कहा- इमरान जरा हँस ना।

मैंने भी उसकी कमर पे गुदगुदी कर दी। वो नीचे रेत में लोटपोट होने लगी, मैं उसे गुदगुदाने के लिए नीचे बैठा और उसे गुदगुदाने के लिए हाथ बढ़ाया तो वो घूम गयी। ऐसे की मेरे हाथ ने उसकी चूचियां को पकड़ लिया, यह सबने देखा। और सबके मुँह खुले के खुले रह गये। मैंने हड़बड़ा कर हाथ हटा लिया। मैंने सबसे कहा की मैंने जानबूझ कर नहीं किया।

“हम तुम्हें बड़ा शरीफ समझते थे, तुम क्या निकले…” जीनत ने पूरी ड्रामेबाज की तरह कहा- “अब दूसरा भी दबा दो वरना छोटा बड़ा हो जाएगा…”

हमारे यहाँ एक कहावत है- “एक हाथ या एक कान कोई छू दे तो वो दुख़ता रहेगा। या फूल जाएगा जब तक वोही आदमी दूसरा हाथ या कान ना छू दे तो…”

मेरी हिम्मत नहीं हुई की दूसरा दबाऊँ। अब जीनत खड़ी हो गयी। मैं भी खड़ा हो गया लेकिन अब भी जीनत की निगाह मेरे लण्ड के उभार पर थी। और वो बार-बार इसके बारे में दूसरी लड़कियों से बात कर रही थी, और खिलखिला रही थी। फिर हम खेलने लगे। मुझको पोलिस बनाया गया। मुझसे 10 कदम की दूरी पर चारों लड़कियां खड़ी थी। जैसे ही “जाओ” कहा जाना था मुझे दौड़ाकर उनमें से किसी एक को पकड़ना था।

“जाओ” बोला गया। मैं उनको दौड़ाने लगा, मेरी टारगेट थी पिरी, सबसे गोरी, सबसे भारी बदन वाली। दौड़ते हुए मैंने उसे कमर के पीछे से पकड़ा वो लड़खड़ा कर गिरी।

क्योंकी रेत पे दौड़ना आसान नहीं था, और गिरने में कोई हर्ज नहीं था। मैं उसके ऊपर गिरा मेरे दोनों हाथों में उसकी दोनों चूचियां थी, और मेरा लण्ड उसकी गाण्ड पे था। कुछ ही सेकेंड में हम खड़े हो गये, लेकिन मेरे लण्ड को बड़ा मजा आया।

फिर पिरी हमें दौड़ाने लगी। उसने जीनत को पकड़ा। जीनत भी भारी बदन की थी वो भी तेज दौड़ नहीं पा रही थी। जीनत ने दौड़ाना शुरू किया, उसका टारगेट मैं था। उसने सबको छोड़कर मुझे दौड़ाना शुरू किया। मैं समझ गया। मैंने भी ज्यादा परेशान ना करके उसे पकड़ने दिया।

उसने भी मुझे पीछे से पकड़ा लेकिन, उसका हाथ ठीक मेरे लण्ड पर था। उसने कपड़े के ऊपर से उसे पकड़ रखा था। मैं गिर गया वो मेरे ऊपर गिरी, और हाँफने लगी। वो दिखा ऐसे रही थी की उसने मेरे लण्ड को जानबूझ कर नहीं पकड़ा। लेकिन मुझे लग रहा था की वो मेरे लण्ड की लंबाई और मोटाई नाप रही है। हम जब उठे तो वो दौड़कर दूसरी लड़कियों के पास गयी।

वो इशारे से मेरे लण्ड की लंबाई और मोटाई बताने लगी।

पिरी उसे डाँट रही थी- तू बिल्कुल बेशरम हो गयी है।

जीनत ने कहा- सिर्फ़ आज के दिन जरा बेशरमी कर लेने दे ना यार।

बाकी दोनों मजा ले रही थी। और हैरत कर रही थीं। फिर मैं दौड़ाने लगा, सोचा सबको एक-एक बार पकड़ूं। इस बार मैंने कोमल को निशाना बनाया, वो काफी तेज थी। मैं उसे दौड़ाते हुए काफी दूर ले गया और उसे दबोच लिया। वो भी मेरे साथ रेत पर गिरी। मैंने उसकी चूचियां पकड़ रखी थी।

वो हँस रही थी, फिर बोली- उठो ना।

मैं उठ गया। वो सीधी होकर लेट गयी और इशारे से मुझे अपने ऊपर चढ़ने को कहा। मैं उसके ऊपर लेट गया उसने जल्दी से मेरे गाल पे किस कर दिया, और एक हाथ से मेरे लण्ड को टटोलने लगी। उतने में बाकी लड़कियां भी पहुँच गयीं।
और जीनत ने कहा- “हाय क्या सीन है…”

कोमल ने कहा- “खाली क्या तू ही मजा लेगी। प्राइवेट माल है क्या…”

मैं हैरत में पड़ गया। सोचने लगा- “यार लड़किया भी लड़कों को माल कहती हैं क्या…”

जीनत ने बिल्कुल बेशरमी की हद कर दी। बोली- मजा लेना है तो कपड़े उतार के ले ना। हाहाहा…”

सब हँसने लगीं। कोमल और मैं खड़े हो गये। मेरा लण्ड अब पूरी तरह खड़ा था, पैंट से साफ दिख रहा था।

पिरी बोली- सब तो दिख रहा है पैंट पहनने का फायदा क्या है। निकाल भी दो।

मैं नाराज होने का नाटक करने लगा और दूसरी तरफ देखने लगा।

पिरी दौड़कर मुझसे पीछे से लिपट गयी, और कहने लगी- “बुरा मान गये…”

मैंने रोनी सी सूरत बनाकर कहा- “मेरा बड़ा है तो मैं क्या करूँ… जिसने बनाया है उसको बोलो। अभी मैं मेडम के पास नहीं जाऊँगा…”

पिरी ने कहा- पेशाब कर लो।

जीनत ने कहा- पेशाब करने से नहीं होगा मुट्ठी मारनी पड़ेगी हाहाहा…

सोनम बोली- यार तुझे क्या-क्या नहीं मालूम।

जीनत ने कहा- मैंने एक किताब में पढ़ा है। लड़के मुट्ठी मारते हैं।

मैं जाकर उससे पीछे से लिपट गया और कहा- बता किताब में क्या लिखा है, मुट्ठी कैसे मरते हैं।

जीनत ने हाथ से इशारा करके बताया ऐसे। फिर मुझसे कहा- तू ने तो जैसे कभी मारा नहीं होगा।

मैं शर्मा कर रह गया। फिर खेल शुरू हुआ। अब सोनम पकड़ी गयी। उसने भी मुझे ही टारगेट बनाया।

मैं उसे दौड़ाते हुए काफी दूर ले गया। वो मुझे एक झाड़ी के पीछे ले गयी और मेरे लण्ड को सहलाते हुए कहा- “दिखाओ ना…”

मुझे समझ में नहीं आ रहा था क्या करूँ। किसी लड़की को पहले कभी दिखाया नहीं था। मेरी शरम अभी टूटी नहीं थी। मैं वर्जिन था।

सोनम ने कहा- “जल्दी करो, नहीं तो वो लोग आ जाएंगे…” वो मेरे सामने घुटनों पर बैठ गयी। मेरे पैंट की चैन खोलकर अंदर हाथ डालकर लण्ड को पकड़ लिया और लण्ड को खींचकर बाहर निकाल लिया। उसके मुँह से निकला- “बाप रे… इतना लंबा और इतना मोटा…” और हाथ में लेकर सहलाने लगी, यानी मुट्ठी मारने लगी। वो जितना सहलाती लण्ड उतना तगड़ा और सख़्त होता गया।

मैं आँखें बंद करके सिसकारी भर रहा था। वो मूठ मारती गयी। कब बाकी लड़कियां आ गईं हमें पता नहीं चला।

“वाह सोनम तू तो सबसे चालू निकली…” जीनत बोली।

सोनम शर्मा के बोली- “सबसे पहले मैंने छुआ है, ये मेरा है…” फिर बोली- “यार जीनत मैं कब से मुट्ठी मार रही हूँ। यह तो और सख़्त हो गया है। नरम कैसे होगा…”

जीनत बोली- “तू हट मुझे देखने दे। सब तुझे थोड़े बता दूँगी। तू मेरा ही ज्ञान मुझसे पहले आजमाने चली थी…” जीनत ने घुटनों के बल बैठकर लण्ड को मुँह में डाल लिया और चूसने लगी। बाकी लड़कियां खुले मुँह से देखने लगी।

“यार जीनत तू पहले यह सब कर चुकी है ना…” पिरी बोली।

जीनत के मुँह में मेरा लण्ड था, वो वैसे ही नहीं नहीं कहने लगी। कुछ देर चूसने के बाद उसने मुँह से लण्ड निकाला, मैं कराह रहा था।

पिरी बोली- “क्या हुआ… दर्द हो रहा है…”

मैंने कहा- “हाँ…”

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Re: पिकनिक का प्रोग्राम

Unread post by The Romantic » 11 Dec 2014 08:10


फिर कोमल बैठ गयी और वो तो किसी पक्की खिलाड़ी की तरह लण्ड से लेकर अंडों तक चाटने लगी, फिर चूसने लगी। बोली- “मुसलमान लड़कों का लण्ड कितना साफ होता है। कोई गंध मैल नहीं…”

फिर सबने पिरी को चूसने को कहा तो वो शर्माते हुए बोली- “मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता…”

जीनत बोली- पहले पहल सब ऐसा ही कहती हैं, मुफ़्त का माल है चख ले।

वो मुट्ठी में लेकर हिलाने लगी। मेरी तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी। मेरे बदन में ऐंठन शुरू हुई। मैंने अपने हाथ में लण्ड पकड़ लिया और कराहते हुए मेरे लण्ड से पिचकारी छूटने लगी। लड़कियां हैरत से नजारा देखने लगीं। पिचकारी कम से कम 5-6 फीट दूर तक जा रही थी। कई बार पिचकारी की धार छूटी फिर बंद हो गई। अब लण्ड आहिस्ता-आहिस्ता नरम होने लगा। मैंने सबको थैंक्स कहा। एक-एक को गले लगाकर गालों पर किस किया।

जब जीनत की बारी आई तो उसने होंठ चुसा दिया। फिर सबने हैरत का इजहार किया। जीनत ने कहा- “फिल्मों में नहीं देखा क्या… बोल दो नहीं देखा…”

सब हँसने लगे। हम मेडम के पास आए। मेडम गुस्से से आग बबूला हो रही थी- “खाना नहीं बनाना क्या… नहाने नहीं जाना क्या…”

“वो मेडम…” जीनत मेरे और सोनम की तरफ इशारा करके बोली- “इन दोनों को लेटरीन लगी थी इसलिए…”

मेडम बोली- तू चुप तेरी किसी बात पर मुझे यकीन नहीं।

पिरी झट से बोली- “हाँ मेडम…”

मेडम बोली- “मुझे बच्चा समझ रखा है। ठीक है तुम मस्ती करो। एक ही लड़का पे हो, उसके साथ जो चाहो करो लेकिन काम भी तो करना है ना…”

“हाँ मेडम…” कहकर सब काम पर लग गयीं।

मुझे और पिरी को पानी लाने का जिम्मा दिया गया। हम पानी लाने निकल गये। जीनत मेरे साथ जाना चाहती थी, लेकिन मेडम ने उसे जाने नहीं दिया। वो समझ गयी थी की मेरे और जीनत के बीच कुछ खास है। जबकी ऐसा कुछ नहीं था। बल्कि मुझे पिरी ही ज्यादा अच्छी लगती थी।

हम जब मेडम से कुछ दूर हो गये, तो पिरी बोली- “तुम जीनत को चाहते हो…”

मैंने कहा- “नहीं तो…”

“वो तो ऐसा दिखाती है जैसे वो तुम्हें चाहती है…”

मैंने कहा- मुझे उसकी नहीं मालूम।

“फिर तुम किसको…” कहकर रुक गयी।

मैंने कहा- “मैं सच बता दूँ… तुम किसी को बोलोगी तो नहीं…”

पिरी बोली- बताओ ना मैं वादा करती हूँ नहीं बताऊँगी।

मैंने कहा- मैं सिर्फ़ तुम्हारे लिए पिकनिक में आया हूँ।

पिरी बोली- मैं तो तुमसे बहुत बड़ी हूँ।

मैंने कहा- प्यार में उम्र की कोई सीमा नहीं होती। वो तो शादी के लिए होती है।

पिरी बोली- तो तुम प्यार किसी और से शादी किसी और से करोगे।

मैंने कहा- करना पड़ेगा। सभी ऐसा करते हैं। सब प्यार करने वाले शादी थोड़े कर पाते हैं।

फिर हम ऐसे चुप हुए की पानी लेकर आने तक चुप ही रहे। काफी संजीदा भी हो गये थे।

मेडम ने हमें देखकर कहा- तुम लोगों के मुँह ऐसे लटके हुए क्यों हैं…

जीनत ने कहा- हमारी सीरियस देवी जो साथ गयी थीं कुछ डाँट-वाँट दिया होगा।



पिरी बोली- मैंने कुछ नहीं कहा। वो खुद अपने घर की याद करके उदास हो रहा था।

“अरे वाह… घर से 10 किलोमीटर दूर घर की याद आ गई…” मेडम बोली।

सब हँसने लगी। हाहाहाहा…

मैं भी हँसने लगा, बोला- पिरी तुम्हें बहाना भी करना नहीं आया।

फिर सब हँसी मजाक करते हुए खाना बनाने लगे। खाना बन गया तो सब नहाने की तैयारी करने लगे। सब लड़कियों ने सिर्फ़ दुपट्टे अपने बदन से बाँधे। किसी की चूचियां आधा दिख रही थीं तो किसी की गाण्ड आधा दिख रही थी। हमारे बीच में शरम नाम की कोई चीज रही नहीं थी। जैसे मैं लड़का ही नहीं था। या सबने मुझे अपना बदन दिखाने का ठान लिया था।

जब हम समुंदर की तरफ जाने लगे तो मेडम बोली- कोई एक जरा जल्दी आ जाना, फिर मैं नहाने जाऊँगी।
सबसे बुरा हाल पिरी का था। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। मुझे देखकर अजीब सी मुश्कुराहट आ रही थी उसे। उसका दुपट्टा सबसे छोटा था। वो खींच-खींचकर अपनी बुर छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। मुझे इशारा कर रही थी की उसकी बुर देख लूँ।

मैं आगे आगे चल रहा था जब मैं घूमता, वो दुपट्टा हटाकर बुर दिखाती। मैंने तौलिया बाँधा था मेरा लण्ड फनफना उठा था। मैंने भी एक बार बाकी लड़कियों की नजर बचाकर लण्ड उसे दिखा दिया। हम पानी के अंदर घुसे, पानी ठंडा था और लहरें बड़ी-बड़ी थी। मुझे भी डर लग रहा था।

सबने कहा- सब एक जगह हाथ पकड़कर नहाएंगे।

पानी में डूबकर उठने के बाद मैं पागल हो गया। सभी लड़कियों के दुपट्टे उनके बदन से चिपक गये थे, ऐसा लग रहा था वो नंगी थीं। मैं सबसे लिपटता और उनकी चूंचियां जी भरके दबाता वो भी मेरा लण्ड पकड़ती।

फिर मैं पिरी के पीछे से गया और उसे पकड़ा। तो उसने खुद मेरे लण्ड को अपने पीछे से अपनी बुर में डाल लिया। पानी की वजह से या उसकी बुर गीली होने की वजह से लण्ड आधा घुस गया। मैं हैरान था, और जोर से उससे चिपक गया। मैं अंदर-बाहर तो नहीं कर पा रहा था, ना ही मुझे चोदने का कोई अनुभव था। मैं चिपक कर खड़ा रहा।

उधर से जीनत आई और मुझे खींच लिया, और मुझसे लिपट गयी। मुझे लगा वो मेरे और पिरी पर नजर रख रही थी। उसके बर्ताओ से जलन तो नहीं दिख रही थी। लेकिन मुझे लग रहा था की वो मुझ पर सिर्फ़ अपना हक समझ रही थी। वो सामने से मेरे गले में बाहें डालकर खड़ी हो गयी। फिर एक हाथ से मेरे लण्ड को अपनी बुर में डाल लिया। और गले में बाहें डालकर अपने पैर मेरी कमर पे बाँधकर लटक गयी। मेरा लण्ड उसकी बुर में अंदर तक घुस गया। पानी छाती से ऊपर था इसलिए कुछ दिखने वाला नहीं था। वो आँखें बंद करके मेरे लण्ड को महसूस कर रही थी।

सोनम आई और कहा- क्या बच्चों की तरह गोद में लटकी हुई है।

जीनत बोली- “तू लटक के तो देख कितना मजा आता है…” जीनत उतर गई।

और सोनम लटक गयी लेकिन लण्ड को बुर में लिए बगैर ही। जीनत ने नीचे हाथ लेजाकर मेरे लण्ड को उसकी बुर के छेद में डालने लगी। वो आ आ करने लगी लेकिन जीनत ने अंदर डाल ही दिया। अब वो किसी की परवाह किए बिना ऊपर-नीचे होने लगी। मैं बेहोश सा हुआ जा रहा था।

फिर कोमल भी पास आ गयी, बोली- क्या चल रहा है।

सोनम उतर गयी।

जीनत ने कहा- “कोमल तू चित लेट पानी की सतह पर…” तीनों ने उसे पानी पे तैरते रहने के लिए सहारा दिया। और मुझसे कहा की मैं लण्ड उसकी बुर में डालूं।

मैंने वक़्त गँवाए बिना ही लण्ड उसकी बुर में घुसा दिया और बिना कुछ सोचे चोदने लगा।

पिरी बोली- जीनत तेरे पास कमाल के आईडिया हैं।

जीनत बोली- मानती हो ना गुरु।

सब हँसने लगे। कुछ ही देर में मेरा बदन अकड़ने लगा। जीनत समझ गयी और कोमल को मुझसे अलग कर दिया। मैं कराहते हुए पानी में आपना पानी छोड़ने लगा। शायद पहले से ज्यादा मेरा पानी निकला था।

फिर पिरी ने कहा- “मेडम ने कहा था कोई जल्दी आ जाना मैं चलती हूँ…” मुझे भी कहा- “इमरान तुम भी चलो…"

जीनत ने मना किया- “नहीं… इमरान नहीं। सोनम तू जा…”

सोनम बोली- मैं नहीं जाती, कोमल को भेज दो।

फिर कुछ सोचकर जीनत ने ही कहा- “ठीक है इमरान को ले जाओ। लड़का साथ में रहना चाहिए।

मैं और पिरी यही चाहते थे। हम खुशी-खुशी वापस झाड़ियों की तरफ चलने लगे।

जब हम पहुँचे तो मेडम बोली- “आ गये…” फिर वो समुंदर की ओर चली गयीं।

मेडम के जाते ही पिरी मुझसे लिपट गयी। और बुरी तरह मुझे चूमने लगी। उसकी सांस उखड़ रही थी। फिर मुझसे अलग हुई और मेरे सामने अपना दुपट्टा उतारकर अलग कर दिया। कहने लगी- इमरान तुम मुझसे प्यार करते हो ना…”

मैंने हाँ में सर हिलाया।

पिरी- “तो मैं चाहती हूँ की तुम मेरा सब कुछ देख लो। और जी भरके प्यार कर लो क्योंकी हमारी शादी तो नहीं हो सकती। लेकिन मैं तुम्हें शादी के सभी शुख देना चाहती हूँ। तुम मुझे भूलोगे तो नहीं ना…”
मैंने कहा- ज़िंदगी भर नहीं।

पिरी ने मेरा तौलिया भी खोल दिया। और उसे निचोड़कर उसी से मेरा बदन पोंछा, और खुद का बदन भी सुखाया। मैं उसकी शख्त, सुडौल, बड़ी-बड़ी, गोरी-गोरी छातियों को देख रहा था। फिर उसके पेट, नाभि और बुर पर नजर गयी। तो मेरे बदन में झुरझुरी सी होने लगी। मेरा लण्ड फिर खड़ा होने लगा था। मैंने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और चूसने लगा। वो सर पीछे करके आ आ करने लगी। फिर उसने मेरे एक हाथ को अपनी बुर पे रखा और कहा उंगली घुसाओ।

मैंने एक उंगली घुसाया।

पिरी ने कहा- इमरान दो उंगली।

मैंने दो उंगली घुसाया।

पिरी- “इमरान जोर-जोर से अंदर-बाहर करो। उम्म्मह… आअहह…”

मैं करने लगा। उसका बदन अकड़ने लगा और उसकी बुर से लावा निकलने लगा। मेरी हथेली भर गयी। मैंने उसे अपने लण्ड पर मल लिया। फिर पिरी ने अपनी सांस को काबू करते हुये एक चादर नीचे बिछाई। और खुद चित होकर लेट गयी।

पिरी ने कहा- “इमरान मेरी बुर में लण्ड घुसाओ। जल्दी मुझे चोदो… जल्दी… नहीं तो जीनत आ जाएगी। वो बड़ी हरामी है। हमें जानबूझ कर पहले भेजी है। पीछे-पीछे खुद भी आ जाएगी…”

मैं जल्दी से बैठा और लण्ड को बुर में घुसा दिया। इस तरह मुझे पहली बार किसी बिल्कुल नंगी लड़की को चोदने का मौका मिल रहा था। मैंने दो चार धक्के ही लगाए थे की जीनत आ गईं, और हमें चुदाई करते हुए देखने लगी।

जीनत हमारे पास बैठ गयी और बोली- “पिरी मुझे मौका मिलेगा क्या…”

पिरी बिल्कुल गिड़गिड़ाते हुए बोली- “प्लीज जीनत अभी-अभी लण्ड अंदर गया है। जरा सा इंतेजार कर ना यार… तू ने आग लगाई है जरा सा ठंडा तो करने दे…”

जीनत ने कहा- तुम तो बहुत देर से आई हो।

पिरी बोली- उसका खड़ा करने में देर हो गयी ना।

जीनत- अच्छा अच्छा तू रो मत, चोदती रह… लेकिन मेरे लिए भी छोड़ना।

पिरी बोली- मेरा पानी निकल जाए तो तुझे दे दूँगी।

मैं पिरी की चूचियां को दोनों हाथों से पकड़कर चूस रहा था और लण्ड अंदर-बाहर कर रहा था।

10 मिनट के बाद ही जीनत बेचैन होने लगी, बोली- “यार पिरी छोड़ ना…” वो भी अब गिड़गिड़ा रही थी की मेडम आ जाएंगी।

जीनत की रोनी आवाज पर पिरी को तरस आ गया। उसने कहा- “ठीक है ले ले…” और मेरे कानों में कहा- “हम फिर कभी मौका निकालेंगे…”

जीनत खुश हो गयी और लेट गयी। और मुझे जल्दी से उसकी बुर में लण्ड डालने को कहने लगी।

मैंने एक बुर से लण्ड निकाला और दूसरी बुर में घुसा दिया। मुझे जीनत पर बड़ा गुस्सा आ रहा था। इसलिए मैं जीनत को गुस्से के साथ धक्के दे रहा था। जबरदस्त धक्के से उसकी आँखों में घबराहट नजर आ रही थी। मैं समझ गया और बोला- यार जीनत तुम्हारी बुर में लण्ड जाते ही मुझे जोश बढ़ गया।

वो खुश हो गयी। मैं चोदता रहा, उसने पानी छोड़ दिया और ढीली पड़ गयी। उतने में हमने देखा की मेडम सामने खड़ी थी।

मेडम- “जीनत यह तुम क्या कर रही हो…”

जीनत ने हड़बड़ा कर कहा- मेडम मैं जब आई तो पिरी चुदवा रही थी, मुझसे रहा नहीं गया।

पिरी सर झुकाए खड़ी थी।

मेडम- “मैं सब समझ गयी। तुम चारों ही मेरी आँखों में धूल झोंक रही हो। अब तुम दोनों क्यों खड़ी हो तुम भी चुदवा लो…”

सोनम जैसे खुश हो गयी और मेरे सामने आकर लेट गयी। मैंने लण्ड झट से उसकी बुर में घुसा दिया और चोदने लगा।

मेडम मेरी पीठ पर हाथ फेर कर कह रही थीं- मारो धक्का।

मैं धक्के पे धक्का मारता गया।

सोनम आ आ करके धक्के पर चीख रही थी।

मेडम ने उसे डाँटा- “चुदवाने का शौक भी है, और चिल्लती भी है। चुप…”

वो चुप हो गई। फिर अचानक वो मुझसे लिपट गयी। उसके नाखून मेरे कंधे में गड़ गये, और उसकी बुर ने पानी छोड़ना शुरू किया।

वो ढीली पड़ी तो कोमल को लिटाया गया। मैं उसे चोदने लगा, मेरी स्पीड अब बहुत तेज होने लगी। कोमल तड़पती रही। अब वो भी कराह रही थी और मैं भी। मुझे लग रहा था की मेरा पानी निकलने वाला है। वैसे ही मेडम ने हाथ बढ़ाकर मेरे लण्ड को पकड़ लिया, और कोमल की बुर से खींचकर बाहर निकाला।

मेरे लण्ड ने पिचकारी मारी और पिचकारी सामने बैठी पिरी के मुँह में गिरी। पिरी ने दुपट्टा से साफ कर लिया।
मेडम ने लण्ड की ट्यूब को दबाकर पकड़ लिया, जिससे लण्ड से पानी ना निकल सके। ऐसा करने से मुझे दर्द होने लगा।

मैंने कहा- “मेडम छोड़िए, मुझे दर्द हो रहा है…”

उन्होंने अपना मुँह खोला और लण्ड को उसमें डालने ही वाली थीं की उनकी पकड़ ढीली हुई और मेरे लण्ड ने एक और पिचकारी मारी जो मेडम के हलाक तक चली गयी होगी। उन्होंने मुँह बंद किया, वो मनी की धार निकलती गयी मेडम का पूरा मुँह भर गया उन्होंने गटागट गटक लिया।

जीनत उनके पास बैठी थी उसने मुँह खोलकर कहा- मेडम मेरे मुँह में दीजिए ना।

मेडम ने लण्ड उसके मुँह में डाल दिया। मेरे लण्ड ने फिर पिचकारी मारी। जीनत ने उसे पी लिया। फिर लण्ड पिरी ने लिया। और दोनों हाथों में पकड़कर लण्ड चूसने लगी, सारा पानी पी गयी। फिर जीभ से लण्ड को चाटा, और अंडों को भी चाटने लगी। मेरे दिल में उसके लिए जो फीलिंग्स थी उससे मुझे लगा की लण्ड फिर से खड़ा हो जाएगा। मैं अब थक चुका था, लण्ड ढीला पड़ने लगा।

मेडम ने कहा- चलो खाना खाते हैं।

सबने कपड़े पहने। खाने बैठे।

खाने के बाद मैंने कहा- “मेरा सर दर्द कर रहा है…” सब डर गये।

जीनत को फिर भी मजाक सूझ रहा था, बोली- अकेला लड़का इतना मेहनत करेगा तो तबीयत खराब नहीं होगी…”

सब पहले हँसे फिर पिरी ने उसे डाँटा- तुम्हें हर वक़्त मजाक ही करना है।

जीनत बोली- इसमें मजाक क्या है… सच तो है, चलो उसे आराम करने दो।

पिरी ने चादर बिछाई और मुझसे कहा- तुम यहाँ लेट जाओ।

अब सब लोग पिरी की मुझमें दिलचस्पी साफ देख सकते थे। मैं सो गया। नींद भी आ गई पर कुछ ही देर बाद मुझे लगा की मेरे लण्ड को कोई सहला रहा है। मैंने आहिस्ता से एक आँख खोलकर देखा तो मेडम मेरे लण्ड को सहला रही थी, और कह रही थी- “बच्चों किसी को बोलना मत प्लीज…”

सबने कहा- नहीं बोलेंगे।

मैंने आँख फिर बंद कर लिया और मेरे जागते ही मेरा लण्ड भी जागने लगा, फनफनाता हुआ खड़ा हो गया।
मेडम बोली- “बाप रे… बच्चे का लण्ड इतना बड़ा… यह जवान होगा तो इसका क्या हाल होगा। तुम लोगों ने लिया कैसे…”

जीनत बोली- मेडम पहले चूसिये।

मेडम चूसने लगी। थूक से सान दिया।

फिर जीनत बोली- फिर अपनी बुर में रगड़िए।

मेडम बोली- मैं जानती हूँ।

जीनत बोली- आप पूछ रही थी की कैसे लिया… तो इसलिए बता रही थी।

सब हँसने लगे और जीनत को मारने लगे। और इधर मेडम मेरे लण्ड को अपनी बुर में रगड़ रही थी फिर उसपर सावर हो गयीं। और ऊपर-नीचे होने लगीं। वो भारी बदन की थी, बड़ा आहिस्ता-आहिस्ता ऊपर-नीचे हो रही थीं। मुझे मजा नहीं आ रहा था।

मेरे जेहन में तो सिर्फ़ पिरी की गोरी बुर चमक रही थी। पिरी ने मेरे हाथ में पानी छोड़ा था मेरे लण्ड पर नहीं छोड़ा था, और कोमल के पानी छोड़ने के पहले ही मैंने पानी छोड़ दिया था।

कुछ ही देर में मेडम ने पानी छोड़ दिया। उनकी बुर से भी काफी पानी निकला। वो अभी तक कुँवारी थीं। उनके साथ किसी ने बेवफाई की थी इसलिए उन्होंने शादी ना करने का फैसला ले रखा था। अब उनकी उम्र 36 साल की थी। मेरी पैंट घुटनों तक खिंचा गयी था। इसलिए गीला होने का डर नहीं था।

मेडम उतरी और बोली- “बाप रे… क्या लण्ड है… छाती तक घुस जाता है। लो किसे लेना है…”

पिरी लपकी।

जीनत उसे पीछे से खींच रही थी। बोली- तू हर बार पहले क्यों लेगी।

पिरी उसका हाथ झटकते हुए मेरे पास आ गयी और कहा- “मेरा पानी भी नहीं निकला था की तू ने छीन लिया। अभी मैं और कोमल पहले अपना पानी निकालेंगे। फिर तुम दोनों को जितना गाण्ड मरवाना चाहो मरवा लेना।
जीनत बोली- “वाह पिरी… गुड आइडिया, हम सबने चूत तो मरवा लिया लेकिन गाण्ड तो नहीं मरवाया…”

पिरी मेरे ऊपर आकर बैठ गयी, लण्ड को अपनी बुर में डाला और मुझ पर झुक कर मेरे होंठों को चूमने लगी, फिर चूसने लगी, अपनी जीभ मेरे मुँह में डालने लगी। मैं भी उसके होंठ को चूसने लगा।

जीनत बोली- उसे उठा क्यों रही है।

कहानी ज़ारी है… …

The Romantic
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Re: पिकनिक का प्रोग्राम

Unread post by The Romantic » 11 Dec 2014 08:11

पिरी बोली- “बड़ी पंडित बनती है। इतना भी नहीं जानती की किसी के ऊपर कोई बैठ जाय और वो सोता रहे, ऐसा कहीं होता है। वो तो बहुत पहले से जाग रहा है। मेडम को देखकर चुप था…”

मैं दिल ही दिल सोचने लगा- “पिरी तो बिल्कुल मुझे समझने लगी है…”

पिरी ने कुर्ता भी उतार दिया और मुझे उसकी चूचियां दबाने को बोली।

मैं चूचिया दबाने लगा, चूचुकों को चुटकी में लेकर मसलने लगा। वो लगातार कमर ऊपर-नीचे कर रही थी। आँखें बंद करके आहहाहह… उम्मह… सस्स्शह… करके कूद रही थी। मैं चूचुकों को खींच रहा था जैसे बकरी के चूचुक दुहे जाते हैं।

पिरी मस्ती के साथ कमर हिला रही थी। जैसे वहाँ हम दोनों के सिवा कोई नहीं हो। कभी थोड़ा बदन उठाती, कभी मुझ पर पूरा लेट जाती, लिपट जाती। फिर उसने अपने पैर पे बैठकर दोनों हाथ मेरे सीने में रखकर इस तरह कमर उपर-नीचे करने लगी की मेडम ताली बजाने लगीं।

फिर सभी लड़कियां ताली बजाने लगीं।

पिरी जोश में आ चुकी थी, स्पीड बढ़ती गयी। पशीने से लथफथ हो गई थी। उसका पशीना मेरे बदन पे गिर रहा था और आअनः… आनहा… की आवाज निकाल रही थी। फिर वो मेरे लण्ड पर दबाओ देकर बैठ गयी। और मुँह से हुऊँ… हुऊँ… की आवाज निकालती हुई बुर से पानी छोड़ने लगी। और मुझपर गिर गयी जैसे उसका दम निकल गया हो। मुझे चूमने लगी।

फिर कोमल ने आकर उसे मुझसे अलग किया, और मुझ पर चढ़ गयी। उसने चढ़ते ही स्पीड पकड़ लिया। मैंने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और बुरी तरह दबाने लगा, चूचुकों को मसला। वो किसी शेरनी की तरह फूँकारती हुई हूओन्न्नह… हूओन्न्नह… करती हुई चोदने लगी।

अब मैं भी जोश में आने लगा और नीचे से कमर उछालने लगा। 10 मिनट में वो फारिग हुई।

जीनत आने को थी की मैं पिचकारी मारने लगा। हवा में 4-5 फीट ऊपर तक मेरी पिचकारी उछली और मेरे ऊपर ही गिरने लगी। वो नजारा देखकर सब फिर से तालियां बजाने लगीं।

जीनत उदास हो गई और मेरे ढीले होते लण्ड को बुर में डालने लगी।

मेडम बोली- आधा घंटा इंतेजार करो फिर खड़ा हो जायेगा।

जीनत बोली- मैं इंतेजार नहीं कर सकती और बुर में मेरा ढीला लण्ड ही घुसा लिया, मुझ पर सावर हो गयी। उसने भी कुरती उतार दी, और अपनी चूचियां मेरे छाती पर रगड़ने लगी, मेरे होंठ चूसने लगी।

मैं जीनत से ना जाने क्यों नफरत करने लगा था। मैं उसके चूचियां बड़े बेदर्दी से दबा रहा था जैसे किसी बात की सजा दे रहा हूँ। वो मुझे मारऩे लगी।

सब उसपर बिगड़े- “अरे वाह… चुदक्कड़ क्वीन मारेगी…”

जीनत बोली- “ये बड़ी जोर से चूचियां दबा रहा है…”

पिरी बोली- “मेरे तो चूचुकों को दुह रहा था। मेरी तो जान ही निकल रही थी। लेकिन मैंने उफ भी नहीं किया। हम मजा ले रहे हैं तो उसे भी जिस तरह वो चाहे मजा लेने दे। चिल्लाकर मजा किरकिरा क्यों करती हो…” और मुझे इशारे से उसके चूचुकों को दुहने के लिए कहा।

मैं जीनत की निपलस को चुटकी में पकड़कर बड़ी बेदर्दी से पीसने लगा। वो आ आ करने लगी मैं उसके चूचुकों को दुहने लगा।

वो फिर से चिल्लाने लगी- “ओह्ह माँ मर गई… मर गई…”

सोनम बोली- तू उतर… तुझसे नहीं होगा।

जीनत बोली- मेरी बिल्ली मुझसे म्याऊँ, बैठ चुप होके।

मैंने उसकी चूचुकों को खींचकर अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगा। तब जीनत आहह… आह्ह करके मजा लेने लगी।

मैंने दाँत से काट लिया।

फिर वो चिल्लाई- मर गई।

अब मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था। अब मैं नीचे से कमर उठाकर चोदने लगा। वो भी मजे से चोदने लगी।

पिरी बोली- तू तो गाण्ड मराने वाली थी। चुदवा रही है।

जीनत बोली- हाँ ठीक याद दिलाया। मेरे गाण्ड में घुसा दे ना।

पिरी बोली- नहीं बाबा तू इल्ज़ाम देगी की गाण्ड फट गयी।

जीनत ने सोनम से कहा- सोनम तू घुसा दे।

सोनम आई और लण्ड को बुर से निकालकर गाण्ड के सुराख में ठूँसने लगी। बड़ी मुश्किल से लण्ड थोड़ा अंदर गया। वो जोर लगाने लगी, मैं भी जोर लगा रहा था। लेकिन लण्ड अंदर नहीं जा रहा था।

यह देखकर मेडम बोली- “ऐसे नहीं जाएगा… किसी के पास क्रीम है…”

सोनम ने कहा- “हाँ…”

मेडम बोली- तो लाओ।

सोनम ने क्रीम दिया। तो मेडम ने मेरे लण्ड में क्रीम लगाया और फिर लण्ड को गाण्ड के सुराख में धकेल दिया। अब लण्ड घुसता ही चला गया और जीनत तड़पने लगी।

मैं कमर उछालकर धक्के देने लगा।

जीनत बोली- बस बस और अंदर नहीं… लग रहा है…

लेकिन मैं तो सिर्फ़ उसे तकलीफ देने के लिए ही चोद रहा था। मैंने उसकी कमर को पकड़ लिया और गाण्ड में पूरा लण्ड घुसा दिया।

वो आ आ करती रही।

मैं उसकी गाण्ड मारने लगा। कुछ ही देर में वो फारिग हो गयी। फिर वो आ आ करती मुझ पर गिर गयी।
यह देखकर सोनम आगे बढ़ी और उसे मुझसे अलग किया।

अब जीनत ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।

पिरी को जैसे बहुत मजा आ रहा था। मैं उसकी आँखों में चमक देख रहा था। जैसे मुझे शाबासी दे रही हो।
अब सोनम मुझ पर चढ़ी और मुझे अपने चूचुकों को चुसवाने लगी। और लण्ड को बुर में अंदर कर लिया।
मैं देख रहा था की जीनत अब भी बैठी कराह रही थी।

अब मैं सोनम को चोद रहा था, उसकी चूची पी रहा था। कुछ देर बाद मेरी स्पीड तेज हो गयी और सोनम पूरी तरह मेरा साथ दे रही थी। उसने पानी छोड़ दिया। और मैंने उसे अपने से दूर धकेलकर अलग किया। और खुद भी पिचकारी मारने लगा। अबकी मुझे भी तकलीफ हो रही थी। पानी भी बहुत कम निकला। मेरे लण्ड के अंदर जलन महसूस हो रही थी। सब फारिग हो चुके थे।

मैं उठा और अपनी पैंट पहनी, और सभी ने कपड़े ठीक किए। और घर वापसी की तैयारी करने लगे। सबने आने से पहले आज की बात किसी से ना कहने की कसम खाई।

दूसरे दिन जीनत ट्यूशन नहीं आई। सबको पता था उसकी हालत खराब थी। जब हम पिकनिक से घर वापस आ रहे थे तो वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। गाण्ड निकालकर बड़ी मुश्किल से चल रही थी। कोई भी देखता तो जान जाता की अभी-अभी गाण्ड मरवाकर आई है।

तीसरे दिन सोनम ने ट्यूशन में कहा- “जीनत की हालत बहुत खराब हो गयी थी। वो ठीक से बैठ भी नहीं पा रही थी। अब ठीक है कल से ट्यूशन आएगी…”

जब वो चौथे दिन ट्यूशन में आई तो वो बिलकुल पहले जैसी चुलबुली थी। उसके मुँह में किसी के लिए कोई शिकायत नहीं थी। उसने आते ही खुसुर-फुसुर करना शुरू कर दिया। मुझे बड़ा गुस्सा आ रहा था।
जेबा जो पिकनिक नहीं जा पाई थी। उससे कुछ ज्यादा ही खुसुर-फुसुर होने लगी। 5वें दिन जेबा हम सबको बड़ी अजीब नजरों से देखने लगी। मुझसे बात करने से कतराने लगी।

तो मैंने पूछ लिया- “क्या हुआ… तुम ऐसे क्यों बर्ताओ कर रही हो…”

तो जेबा ने कहा- तुम इतने बुरे हो मैं सोच भी नहीं सकती थी।

मैंने क्या किया…

जेबा- “मैं सब जान गयी हूँ जीनत ने सब बता दिया है।

मैंने यह बात सबको बता दी।

सबने जीनत से झगड़ा किया। लेकिन वो फिर एक प्लान बनाकर लाई और हम सबसे माफी माँगी। और कहा- “इस जेबा की बच्ची को एक बार चुदवा देते हैं। फिर उसका मुँह बंद रहेगा। नहीं तो यह हम सबको बदनाम कर देगी…”

सबने मना किया तो जीनत समझ गई। फिर हम सबसे माफी माँगने लगी- “दोस्तों मुझसे गलती हो गयी, मुझे ही सुधारना होगा। जेबा को चोदना ही होगा। दूसरा कोई रास्ता नहीं है। वो तो हमें ज़नखा वगैरा कहने लगी है। पता नहीं कब उसकी जबान खुल जाए…”

पिरी बोली- “उसके अब्बू तो मोलवी हैं ना। वो स्कूल भी बुर्क़े में आती है वो कैसे चुदवाने को तैयार होगी। असंभव…”

जीनत ने कहा- वो सब तुम लोग मुझ पर छोड़ दो।

मैंने एक दिन जीनत से जब साथ में सिर्फ़ पिरी थी, कहा- “इतने लोगों के रहते नहीं होंगा। सिर्फ़ तुम पिरी और जेबा होगी तब होगा…”

जीनत बोली- “क्यों इतने सबको एक साथ चोद नहीं सकते। हाहाहा…”

मैं फिर लाजवाब हो गया। उसने वादा किया की सिर्फ़ हम तीनों ही होंगे। एक दिन जीनत ने कहा- “आज रात मैंने उसे अपने घर बुलाया है। पिरी तू भी आना। और इमरान तुम रात के 9:00 बजे के बाद आना…”

प्लान के मुताबिक पिरी और जेबा शाम को जीनत के घर पहुँच गये, और जेबा से पिकनिक के बारे में एक-एक डिटेल उसे बताने लगे। और यह भी कहा की उसके ना जाने पर मैं कितना दुखी था। मैं सिर्फ़ उसकी खातिर ही पिकनिक गया था। मैं उससे बहुत मुहब्बत करता हूँ। फिर एक ब्लू फिल्म भी उसे दिखाया, उसे पूरी तरह गरम कर दिया। बताया की लण्ड जब बुर में अंदर-बाहर होता है तो कितना मजा आता है। इस शुख से बढ़कर दुनियां में और कोई शुख है ही नहीं।

अब जेबा खुद मेरे आने की राह देखने लगी। और कहा- अगर मैं नहीं आया तो…”

मैं ठीक 9:00 बजे जीनत के घर पहुँच गया। दरवाजा जीनत ने खोला। उसके घर में कोई नहीं था। सबलोग आउट आफ स्टेशन शादी में गये थे। उसने घर वालों से कह रखा था की उसके दोस्त आ जाएंगे। उसे पढ़ाई करनी है। सब इतमीनान से चले गये। मैं अंदर गया सबने मिलकर रोटी खाया। फिर जेबा के हाथों से दूध भेजा गया। जैसे सुहागरात में दुल्हन के हाथ से दूध भेजा जाता है।