बदले की आग compleet

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rajaarkey
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Re: बदले की आग

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 16:43

बदले की आग (भाग - 7)

मैने फिर से कॅमरा बिस्तर पर फोकस किया और उसे चालू कर दिया. 30 मिनिट बाद वह रसोई का काम ख़तम कर के कम'रे मैं आई और मेरे पास लेट गयी. मैने उसे फ़ौरन बाँहों में ले लिया और उस'के होंठों पर चुंबनों की बरसात शुरू कर डी. फिर उस'के गले को चूम'ते हुए मैं उस'की चूचियों को चूस'ने लगा वह अब सिसक रही थी..

आह विशाल. चूस लो इन्हें, दीदी के स्तनों की तरह इन मैं से भी दूध निकाल दो. चूस लो इन्हें, चूसो. आ डााआबाऊ मेरे मॅमन को. आह बहुत मज़ा मिल रहा है.. फिर मैं उस'की चूत की तरफ बढ और मैने आप'ने दोनों हाथों से उस'की चूत के होठों को खोला. वाउ! क्या गुलाबी रंगत की चूत थी, साली की, मुझ से रहा नहीं गया. मैने उस'के भगोष्ट पर काट लिया.. वह चिल्ला पऱी.

विशाल क्या कर रहे हो, दर्द होता है. मैने फिर उस'के भगोष्ट पर जीभ फेरी अब उस'ने सिस'कारी ली.

आह... क्या मज़ा है? विशाल. अब हम 69 में आ गये. मैं मधु के मुख में लंड पेले ऊपर था और उस'की चूत में मैने आप'ना मुख डाल रखा था.

चूस इस मस्ताने लंड को.. चूसो. . मैने जीभ उस'की चूत में डाल दी. उस'ने एक ज़ोरदार सिस'कारी भारी.

ऊह.. विशाल मैं पागल हो जवँगी. हहााआ... और कुच्छेक मिनिट बाद ही उस'की चूत रस से भर'ने लगी. छूट से एक सौंधी महक फूट पऱी.

विशाल मैं झऱ रही हून. हा.... और मैने उस'का सारा चूत का राज पी लिया.. क्या नमकीन चूत का राज था. मज़ा आ गया. फिर मैने आप'ना लंड उस'के मूँ'ह में गहरा दे दिया. वह किसी कइत्तिया की तरह उसे चाट रही थी. साली छूसा बहुत अच्च्छा करती थी. अपनी बऱी बहन से भी अच्च्छा. जब मेरा लंड पूरी तरह टन गया तो मैने उसे कहा की,

अब फिर से तेरी चुदाई होनी है.. लेट जा और अपनी टाँगों को खोल दो, उस'ने वैसे ही किया. मैं उस'की टाँगों के बीच मैं आ गया. अपना लंड उस'की चूत पर रखा और धक्का लगाया मेरा लंड आधा उस'की चूत में चला गया. फिर दूसरे धक्के से पूरा लंड उस'की चूत में चला गया क्योंकि उस'की चूत उसी के माल से भारी हुई थी. रास्ता चिकना था. ळौऱे को अंदर जेया'ने मैं कोई दिकाट नहीं हुई. वह कामुक सिस'कारी ले रही थी. अभी 5 मिनिट ही हुआ था उसे चोद'ते हुए के फोन की घन्टी बाज उठि. मैने साइड तबले से फोन उठाय और हेलो कहा ही था की दूसरी तरफ से कामिनी बोली,

हेलो विशाल डार्लिंग क्या हाल हैं आप के. अभी भी जाग रहे हो. मेरा मुन्ना परेशान तो नहीं कर रहा ना. जब वापस अवँगी तो मुन्ने को खूब प्यार करूँगी और सारी कसर निकाल दूँगी. मैं कुच्छ डर गया की साली मधु'ने अगर नीचे से सिस'कारी ली तो उसे पता नहीं चल जाए. मैं जितनी जल्दी हो सके फोन बंद करना चाह'ता था लेकिन कामिनी तो मूड मैं थी, बोली,

विशाल तुम्हारे बगैर नींद नहीं आती. यार तुम भी चले आ'ते तो क्या मज़ा आता डियर. मैं तो यहाँ भी मज़े मैं हून. अब तुम्हें क्या बताओन. मैने साथ ही मधु को देखा उस'के होंठों पर मुस्कान थी. रात के वक़्त फोन की आवाज़ उसे भी सॉफ सुनाई पऱ रही थी.

अच्च्छा विशाल क्या कर रहे हो. उन्ह... मेरा मुन्ना, अरे वही जो तुम्हारे नीचे लटक रहा है, उस'की बऱी याद आ रही है.

कामिनी कुच्छ नहीं कर रहा यार. अभी शवर ले रहा था तब बात रूम के बेसिन की नाली बाँध हो गयी थी. वही खोल रहा था. अभी मैने डन्ड नाली मैं डाला ही था की तुम्हारा फोन आ गया. डंडे को नाली मैं ही छोऱ के तुम्हारा फोन अटेंड कर रहा हून. मेरा लंड अभी भी मधु की चूत में ही था. मैने मधु को आप'ने होंठों पर अंगुल रख के चुप रह'ने का इशारा किया पर मधु वैसे ही बहुत समझ'दार थी. वह बिल्कुल खामोश थी.

अच्च्छा आप का बहुत बहुत शुक्रिया की आप'ने डन्ड नाली में ही छोऱ के मेरा फोन अटेंड किया. यार नाली कीट'नी बऱी है वैसे शायद डन्ड बऱ है तभी नाली ठीक से सॉफ नहीं हो रही है आप'से.

तुम साली बीवियाँ जब डोर होती हो तो ऐसी ही बातें कर'ती हो. यह मैं नॉर्मल होने के लियेMअधु को भी सुना रहा था.

अच्च्छा एक चुम्मा दो ना विशाल मुझे नींद नहीं आ रही थी. तुम्हें तो पता है ना जब तक तुम्हारी बाँहों में ना जौन तो मुझे नींद नहीं आती. चलो एक चुम्मा दो फोन पर. मैने फोन मधु के गाल के पास रख ज़ोर ज़ोर के मधु के गाल के टीन चार चुममे लिए. इधर मेट्री साली के मैं असली चुममे ले रहा था और उधर मेरी बीवी आप'नी चूत में अंगुल पेले हुए समझ रही थी की मैं चुममे हवा में उच्छाल रहा हून. इस'के बाद कामिनी ने ही फोन बंद कर दिया. मैने मधु से कहा,

सालीजी सीख लो. जब अपने मियाँजी से डोर होगी तब ऐसी ही बातें कर'ना.

जीजू साली की चूत में जऱ तक लंड पेल रखा है अब और सीख'ना क्या बाकी रह गया. पूरी ट्रैनिंग तो दे डी है. बेचारे होने वाले मियाँजी को तो जूठी पट्तल मिलेगी. मधु की इस बात ने मुझे बदले की बात फिर से याद दिला डी. मैं सोच'ने लगा की मुझे भी तो जूठी पट्तल मिली है. जैसे जैसे मैं सोच रहा था वैसे वैसे मैं आवेश में पागल हो रहा था.

उस आवेश में मैने मधु की धुआँ धार चुदाई शुरू कर डी. आप'ने ही ख़यालों में मैं मधु को ताबऱ तोऱ चोद'ता रहा और चोद'ता रहा. मधु क्या कर रही है और क्या कह रही है इस'का मुझे ज़रा भी होश नहीं था. जब होश आया तो सुबह हो चुकी थी और मधु मुझे जगा रही थी.

जीजू उठो. रात में शायद आप'ने मुझे कामिनी दीदी समझ लिया था. मेरी तो आप'ने जान ही निकाल दी थी पर कामिनी के भाग खुल गये हैं और मुझे मेरी जान निकल'ने का ज़रा भी गम नहीं है. मैं फ़ौरन उठा. जब तक मैं तैयार होके बात रूम से आया तब तक मधु चाय नाश्ता के साथ मेरा इंत'ज़ार कर रही थी.

कुच्छ देर बाद रूचि भी आ गई. मैने सेफ से फिल्म निकाली और रूचि को दे दी. दोनों बहनें दरवाजा खोल के घर से बाहर जा चुकी थी. फिर दोनों मुऱी और दोनों मुस्क्राके मेरी और देखी और आगे निकल गई.

rajaarkey
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Re: बदले की आग

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 16:44

बदले की आग (भाग - 8)

जब दोनों बहनें फिल्म ले कर मेरे घर से चली गई तो मैं सोच'ने लगा की अब आगे क्या किया जाए क्योंकि अभी उन'की माताजी, रागिनिजी और उन के भाई, कौशल से भी बदला लेना था. मैने सोचा की चलो पहले जाके दूसरी फिल्म तो देखूं के अच्च्ची बनी है की नहीं. मैने फिल्म देखी बहुत अच्च्ची बनी थी. अब मेरे पास दोनों बहनों की ब्लू फिल्म थी. जिस'से मैं उन'की मा चोद सक'ता था, मान चाहे ढंग से उन्हें ब्लॅक मैल कर'के आप'ना बदला ले सक'ता था. मैने प्लान बनाना शुरू कर दिया था. जब मैं अपनी ही सोचों मैं गुम था की फोन की घन्टी हुई. मैने बेड रूम का फोन उठाय तो दूसरी तरफ कामिनी की सुरीली आवाज़ आई,

हेलो विशाल क्या हाल हैं आप के?

मैं क्या बताओन डार्लिंग तुम्हें तो पता ही है की जब तुम मेरे पास नहीं होती तो मेरा क्या हाल होता है.

ऑश मेरे छोटे से बच्चे, क्या सच मच तुम मुझे मिस कर रहे हो.

कामिनी, अम्मा अगर तुम इस वाक़त मेरे पास होती तो मैं तुम्हें अपना दिल निकाल कर दिखाता के देखो इस मैं सिर्फ़ तुम्ही तुम हो, मेरी प्यारी बीवी .

श विशाल मैं कितनी खुश किस्मत हून की आप मेरे पति हो, हैं ना.

हन, कामिनी मैं खुश किस्मत हून की तुम मेरी बीवी हो, चलो एक चुम्मा दो. जल्दी से फोन पर वह बोली की,

यहाँ अभी नहीं दे सक'ती क्योंकि सब लोग बैठक मैं ही हैं. अच्च्छा मौसी आप से बात करेंगी. उस'ने मौसी को फोन दे दिया. मैने उन्हें सलाम किया. हाल चाल पूच्छ'ने के बाद वह बोलीं के,

बेट कामिनी को हमारे घर कुच्छ दिनों के लिए छोऱ दो. महीने डेढ़ महीने में तो तुम उसे आप'ने साथ विलायत ले जाओगे. फिर बेटी से कब मिल'ना नसीब होगा ? अब बेट बताओ कामिनी हमारे साथ कुच्छ दिन रह सक'ती है. अगर तुम इजाज़त दो तो, वरना भाई और भाभी आज वापिस आ रहे हैं. हम कामिनी को उन के साथ भेज दें.

नहीं मौसीजी आप कैसी बात करती हैं. कामिनी आप की बेटी है. सिर्फ़ मेरी बीवी ही तो नहीं और इस मैं इजाज़त की क्या बात है? आप लोग जब चाहें तब भेज देना.

बहुत बहुत शुक्रिया, बेट. तुम'ने मेरा मान रखा.

मौसीजी आप मुझे शर्मिंदा कर रही हैं.. मैं भी तो आप का बेट हून.

अच्च्छा बेट फिर हम कामिनी को एक साप्ताह बाद भेज देंगे. उन्हों'ने फोन रख दिया. मैं सोच'ने लगा की चलो एक साप्ताह का वक़्त और मिला और साथ ही मेरा भाग्या तो देखो की कामिनी के चाचा चाची आज वापिस आ रहे हैं और मैं प्लान बना चक्का था. मैने फॉरन उस पर काम शुरू कर दिया. मैने आप'ने दो ख़ास दोस्तों को फोन किया जो की पक्के चोदू और गांडू थे.

वे मेरे बचपन के दोस्त थे और सेयेल पूरा रोब भी रख'ते थे. इस काम के लिए बिल्कुल फिट थे. मुझे भरोसा भी था की वह बात को बाहर नहीं निकालें'गे और मैने उन्हें सब समझा भी दिया था की उन्हें क्या कर'ना है. जब मैं जैसा कहूँगा तब वह वैसा करेंगे. उन्हों'ने कहा की वे मेरे लिए कुच्छ भी कर सक'ते हैं.

फिर आग'ले दिन मैने कामिनी के चाचा के घर फोन किया तो इतेफ़ाक से चाची'ने फोन उठाय. सलाम दुआ के बाद मैने चाची से पूचछा की,

बाकी घर वाले कहाँ हैं? मुझे पता तो था की चाचा और कौशल जॉब पर होंगे. मधु कॉलेज गयी हो'गी. घर मैं सिर्फ़ चाची और रूचि ही होंगे. उन्हों'ने वही बताया जो मैं सोच रहा था. पर वह बोली की,

आज तो बेटा रूचि भी ससुराल गयी है कुच्छ दिनों के लिए. मैं घर मैं अकेली हून. मैं उन्हें बोला की,

चाची क्या आप कुच्छ देर के लिए मेरे घर आ सक'ती हैं. आप से कुच्छ बात करनी है. बहुत ज़रूरी बात है कामिनी के बारे मैं. चाची लगता है मैने कोई ग़लत फ़ैसला किया है जो कामिनी से शादी कर ली.

बेटा मुझे पता था की कामिनी तुम्हारे लायक नहीं है. मैं उन के दिल की बातें कर रहा था. मुझे पता था की वह कामिनी के मा बाप की जायदाद के पीच्चे पऱी है. वह बोली की,

बेटा मैं 10 बजे तक आ जवँगी. मैं बोला की,

चाची मैं इंत'ज़ार कर रहा हून. फोन रख दिया. ठीक 10 बजे रागिनिजी मेरे घर मैं थी. वह बोली,

बेटा तुम्हारी बात सुन'के मैं परेशान हो गयी हून. मैं बोला,

चाची ऐसी कोई बात नहीं है. मैं बस आप से बात कर'ना चाह'ता था. आप फ्री तो हैं ना.

हन बेटा मैं शाम तक फ्री ही हून. तुम बताओ क्या बात है? मैं बोला की,

बताओन या दिखाओं.

मैं समझी नहीं बेट क्या बात है? मैने कहा की,

सोफे पे बैठ जाएँ और मैने तैयार कर'के रखी हुई फिल्म लगा दी. जब उन'की नज़र स्क्रीन पर पऱी तो वह अपनी जगह से उच्छल पऱी क्योंकि जो स्क्रीन पे चल रहा था उस मैं मेरा लंड रूचि की चूत में था. वह उच्छल उच्छल के मस्ती से चुद'वा रही थी. मुझ से वह अपनी शादी शुदा बेटी को छुड़वा'ते टीवी पर देख रही थी. कभी वह स्क्रीन को देखती और कभी मुझे फिर मैने दूसरी कॅसेट लगाई. जिस मैं मैं मधु को लंड चूसा रहा था..

वह फिर से उच्छल पऱी क्योंकि जब मैं मधु को लंड चूसा रहा था तो रूचि पास बैठी हुई थी. मैने फिल्म चल'ने दी. वह देखती रही. लग भाग एक घन्टे के बाद वह बोली की,

तुम'ने मेरी दोनों बेटियों को बर्बाद कर दिया और उस पर तुम'ने दोनों की ऐसी गंदी फिल्म भी बना ली. तुम'ने ऐसा क्यों किया. हम'ने तुम्हारा क्या बिगाऱ था. बिन मा बाप की बच्ची को आप'नी औलाद की तरह पाल के तुम्हें दे दिया तो हम'से कोई गुनाह हो गया तो बताओ बेटे. उस'की नज़र फिर स्क्रीन पर गयी. जहाँ पर मैं रूचि की गान्ड मार रहा था. वह दृश्या चल रहा था. उस'की आँखें और खुल गयी. 10 मिनिट तक वह कुच्छ बोल नहीं सकी फिर उस'ने मूँ'ह खोला की,

विशाल तुम क्या चाह'ते हो और इन फिल्मों को फ़ौरन मुझे दो, किसी'ने देख ली तो मेरी बेटियों की ज़िंद'गी खराब हो जाएगी.

चाची इतनी जल्दी क्या है. कॅसेट्स आप को दे भी देंगे या आग में झोंक देंगेपर उस'की कीमत तो आप'को चुकानी होगी.

विशाल बेटे मैं क्या दूँ, तुम्हारे पास इतना पैसा है की हम तो ग़रीब हैं तुम लोगों के मुक़ाबले में. मैने कहा की,

चाची पैसा कौन माँग रहा है आप से. आप को आज का दिन मेरे साथ गुज़ार'ना है. जैसा मैं कहूँ वैसे करना है. आप'को मेरी गुलाम की तरह रह'ना होगा. मुझे जो करना होगा मैं करूँगा.

मुझे तुम्हारी बात समझ में नहीं आ रही. साफ साफ कहो तुम मुझ'से क्या चाह'ते हो?

तो मेरी प्यारी चाचीजी सुनो. आप'ने फिल्म में जो देखा वही, आप'के साथ भी........

क्या तुम होश मैं तो हो विशाल. मैं तुम्हारी मा की उमर की हून. तुम'ने मेरे बारे में ऐसा सोचा कैसे?

हन चाची आप हो ही ऐसी. आप तो अभी पूरी जवान लगती हो, आप किसी भी तरह 35 साल से ज़्यादा की नहीं लगती हो. आप'को आप'नी बेटियों की रंगिनी की फिल्म चाहिए या नहीं. देखो तुम मेरी बात मान लो और फिल्म ले कर चली जाओ वरना मैं एक कॉपी तुम्हारे बेटी के ससुराल भेज दूँगा और दोनों कॅसेट्स को नेट पर छोऱ दूँगा जिस'से उन्हें सारी दुनिया देखेगी. तुम्हारी बेटियों की ब्लू फिल्म. चलो फ़ैसला जल्दी करो. मैं कामिनी के अंजाने में किए बलात'कार का सोच के दिल को मॅज'बूट कर रहा था और 'आप' से 'तुम' पर उतार आया था.

हम'ने तो तुम्हें एक शरीफ खानदान का समझ के आप'नी बेटी दी थी पर तुम तो ब्लॅक मैल कर'ने लगे. अब समझी तुम'ने ऐसे ही मेरी बेटियों को भी ब्लॅक मैल किया है नहीं तो मेरी बेटियाँ तेरे साथ ऐसी गंदी हर'काटें कभी नहीं कर'ती.

जिसे तुम गंदी हरकत कह रही हो वह तो तुम्हें भी मेरे साथ कर'नी है. ज़रा इस फिल्म में आप'नी बेटियों के चेहरे की तरफ तो देखो, कैसे हंस हंस के और मस्त हो हो के मेरे साथ जवानी का मज़ा लूट रही है. अब बहुत हो गया ज़रा आप'नी इस मस्त जवानी के जलवे आप'ने दामाद को दिखाओ. उस बुड्ढे चाचा में क्या परा है. एक बार मेरी टाँगों के बीच आओगी तो तुम्हें मस्त कर दूँगा. चलो अब धीरे धीरे आप'ने कप'रे उतारो.

पर तुम्हारा क्या भरोसा, काम हो जाने के बाद भी तुम मुझे कॅसेट दोगे या नहीं.

मुझ पर भरोसा रखो. तुम यदि आप'नी इच्च्छा से पूरी मस्ती में मज़ा डोगी तो मुझे इन कॅसेट का क्या कर'ना है.

रागिनिजी खऱी हुई और एक एक कर'के आप'ने कप'रे उतार'ने लगी. दो मिनिट के बाद वह मेरे साम'ने बिल्कुल नंगी खऱि थी. वाउ! क्या चीज़ थी? वह लगता ही नहीं था की 3 बच्चों की मा है और 45 साल की एक अधेऱ औरत है. बिल्कुल अपनी बेटियों की तरह जवान लग रही थी. अब मैं उस'की फिगर आप को बता दूँ. स्तन 40 आकार, कमर 34, गान्ड 40 ज़रूर होगी. क्या लगती थी.? उसे देख'ते ही मेरा लंड खऱ हो गया. मैने वाक़त ज़ाया नहीं किया. फ़ौरन आप'ने कप'रे भी उतार दिया. सोफे पर बैठ गया. बोला की,

रागिनिजी चलो मेरे पास आओ वह मेरे पास आई. मैने उस'का हाथ पकऱ के अपनी तरफ खींचा वह किसी पके फल की तरह मेरी गोद मैं चली आई. मैने किसी भूखे बच्चे की तरह उस'की चूचियों को चूस'ना शुरू कर दिया. वह कोई सहयोग नहीं दे रही थी. पर मैं कहाँ रुक'ने वाला था. मैने 10 मिनिट तक उस'की चूचियों को मुख में भर कर चूसा. साथ ही साथ मैने एक अंगुल उस'की चूत में डाल दी जिस'से वह अब कुच्छ गरम हो गयी थी..

उस'ने मेरा सिर पकऱ के आप'ने स्तन पर दबाना शुरू कर दिया था. साथ साथ उस'के मूँ'ह से कामुक सिस'कारी भी निकल रही थी. मैने अब उस'की चूत को धुआँ धार तरीके से अंगुल कर'ना शुरू कर दिया था. मेरी अंगुल उस'की चूत में फ़च्छ फ़च्छ कर'के जा रही थी. अब तो उस'की हालत बुरी थी. वह आप'ने मज़े को रोक नहीं सक'ती थी. उस'ने उँची आवाज़ मैं सिसक'ना शुरू कर दिया था..

ऊह.. विशाल हाय... यह तुम क्या कर रहे हो. ऊह.. उः.. और एक पल के बाद ही वह आप'नी चूत का पह'ला रस छोऱ'ने वाली थी..

मैं झऱ'ने वाली हून. हाा... और मुझे उस'की चूत का राज मेरी अंगुल पर चिप'क'ता हुआ महसूस हुआ. वह झऱ'ने के बाद मेरी गोद मैं ढीली पर गयी. मैने अंगुल उस'की चूत से निकाली और उसे आप'ने मूँ'ह में ले कर चूसा. क्या नमकीन चूत का राज था. कुच्छ वक़्त के बाद उस'ने सिर मेरे कंधों से उठाय. मैने उसे कहा की,

चलो अब तुम्हारी बारी है. मेरा लंड खूब मस्ती से चूसो. इसे चूस कर तेरी दोनों बेटियाँ भी मस्त हो गई थी और बाद में खुद बोल बोल के मुझ'से चुड़वाई थी. वह मेरी गोद से उठि और ज़मीन पर बैठ गयी. बिल्कुल मेरी टाँगों मैं और जब उस'ने गौर से मेरा लंड देखा तो उस'की आँखें खुल गयी.

rajaarkey
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Re: बदले की आग

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 16:45

बदले की आग (भाग - 9)

हाय ! क्या लंड है तुम्हारा विशाल, बहुत बऱ और मस्त है. लगता है किसी घोरे का लंड हो, यह मेरी बेटियों'ने कैसे ले लिया.. इतना बऱ लंड, तब ही मधु सीधी तरह चल नहीं सक'ती थी. मैने पूचछा तो वह बोली थी की मैं गिर गयी थी. अब पता चला की तुम्हारे लौऱे को लेने के बाद वह चल'ने के काबिल नहीं रही होगी..

आह मेरी सासू रानी, अब खूब चूसो मेरा लंड. फिर तुम्हें भी तोचोड़ना है. तुम्हें तब पता चलेगा के असली चोद'ना क्या होता है. चलो, मुख में लो और उस'ने मेरा लंड हाथ मैं लिया.. पहले उसे हाथ से हिलाती रही. फिर उस'ने मूँ'ह खोल के मेरे लौऱे को चूस'ना शुरू कर दिया.. क्या मस्त छूसा कर रही थी साली रन्डी.

आह... चाची क्या मज़ा देती हो. जो मज़ा तुम्हारी छूसा में है वह अभी तुम्हारी बेटियों में पूरा नहीं आया है. आह तुम'ने तो लगता है की छूसा मैं मास्टर्स किया हुआ है.. बिल्कुल रन्डियोन की तरह छूसा करती हो. हााआ और चूसू साली रन्डी. मैं अब उसे चाची नहीं रन्डी कह रहा था. उसे मेरा रन्डी बोलना और गरम कर रहा था.. मैं अब उसे मज़े मैं आ के गालियाँ बक रहा था. मेरी हर गाली पर और जोश से छूसा कर रही थी..

साली रन्डी की औलाद चूसो. साली रन्डी बिल्कुल अपनी बेटियों की तरह हो. साली वह भी तुम'ने रन्डियान पैदा की हैं. आ तुम्हारी बऱी बेटी तो बिल्कुल रन्डी की तरह चुड़वाती थी. अब तुम्हें चोद के पता चलेगा के मा कैसी है.. उ.... ओह और मैं झऱ'ने लगा था..

ऱन्डी मैं झऱ'ने लगा हून. पी जा मेरा माल और मैने अपना सारा माल उस'के मूँ'ह में छोऱ दिया. वह किसी रन्डी की तरह मेरा सारा माल पी गयी लेकिन उस'ने छूसा जारी रखी, कुच्छ 2 मिनिट तक. फिर उस'ने मेरा लंड आप'ने मूँ'ह से निकाला और मेरी आँखों मैं देख'ने लगी. मैने उसे बाज़ू से पकऱ कर उठाय और उसे आप'ने साथ बेड रूम मैं ले गया..

उसे बिस्तर पे लिट के मैं उस'की टाँगों मैं आ गया. आप'ने लौऱे का सुपारा उस'की चूत के दरवाज़े पर रखी फिर मैने उस'की आँखों मैं देख'ते हुए एक ज़ोर दार झट्क दिया. जैसे ही मेरे लौऱे का सुपारा उस'की चूत में गया उस'के मूँ'ह से एक हल्की चीख निकल गयी. साथ ही गालियाँ भी,

साले हरामी क्या अपनी मा की चूत समझ के इतना ज़ोर का झटका मारा है. साले हरामी यह तेरी मा की चूत नहीं है.. मैं मार गयी. श.. सालएने मेरी चूत फाऱ दी. मैने एक और ज़ोर का झट्क दिया जिस'से मेरा लंड आधा उस'की चूत में चला गया. साथ ही उस'की फिर से चीख निकल गयी. जब उस'का दर्द कुच्छ कम हुआ तो उस'ने मुझ पर गालियों की बौच्हार कर दी.

साले हरामी कुत्ते मैने तुझे कहा था ना की यह तेरी मा की चूत नहीं है जिसे टू चोद रहा है. क्या मार डालेगा मुझे कुत्ते. आहिस्ता आहिस्ता चोद हरामी. अब के तू'ने झट'का ज़ोर से दिया तो तेरी गान्ड में मैं अपना पूरा हाथ दे दूँगी. अब मुझे उस'की गालियाँ सुन के कुच्छ और मज़ा मिल रहा था. मैने अब की बार कहा की 'बेट विशाल, साली हराम जाड़ी'की चूत को फाऱ दे' और साथ ही मैने बिना रुके ज़ोर ज़ोर के झट्के लगाना चालू कर दिया जिस'से वह चीख'ने लगी..

ऊह मैं मार गैिईई सेयेल आदमी का लंड है की घोरे का लंड. मेरी चूत फॅट गयी. हााआ मुझे बचाओ, मेरा छोड़ू दामाद मेरी फाऱ रहा है और मैने और ज़ोर से उसे चॉड्ना शुरू कर दिया.. अब मेरा लंड पूरा उस'की चूत में था. मेरा हर झट्के से लंड उस'की चूत की गहराइयों मैं उतार जाता था. जिस'से अब उसे मज़ा मिल रहा था. अब वह कामुक सिस'कारी पे कामुक सिस'कारी दे रही थी..

हाय... ओह.. और ज़ोर से चोद. क्या लंड है रे तेरा.. आज मुझे सही लौऱे का सुख मिला है... मेरे शोहार का लंड तो तुम्हारे लौऱे का आधा भी नहीं. क्या शानदार लंड है तेरा विशाल, चल और तेज गति से चोद मेरी प्यासी चूत को, मैने अपनी गति बढ दी. मेरा लंड उस'की फैली चूत में ऐसे आ जेया रहा था जैसे कोई पिस्टन और उस'की कामुक सिस'कारी और ज़ोर पकऱ रही थी. लग भाग 2 या 3 मिनिट के बाद ही वह झऱ'ने लगी..

आह विशाल बेट. मैं झऱ'ने लगी हून.. और उस'ने अपनी टाँगों से मेरी कमर को कस के पकऱ लिया और फिर जब वह झऱ चुकी तो उस'की टाँगें ढीली पर गयी. पर मैं रुका नहीं. मैं उसे अब भी धुंवा धार तरीके से चोद रहा था.. कुच्छ वक़्त के बाद वह फिर से सक्रिया हो गयी. उस'ने फिर से सिसक'ना शुरू कर दिया..

विशाल क्या मज़ा है. आज लगता है की मुझे तुम मार ही डालोगे. विशाल बहुत मज़ा आ रहा है. आ... उः... और चोदो बेटे, आप'नी इस रन्डी चाची को खूब चोदो बेट. ऊह.. उः... और चोदो, फार डालो अपनी चाची की चूत. आह... अब तो तुम्हारे चाचा के लौऱे से मुझे मज़ा ही नहीं आएगा. तुम्हारा लंड ही चलेगा अब तो मेरी चूत में. तुम मुझे रोज़ रन्डी की तरह चोद'ना. मैं अब तुम्हारा ही लंड लूँगी और वह फिर से झऱ गयी. मैने अब उसे कहा की,

मेरी रन्डी चाची अब मैं तुम्हें कुतिया बनाके छोड़ूँगा. चलो अब कुतिया की तरह बन जाओ और साथ ही मैने अपना लंड उस'की चूत से निकाल लिया. जैसे ही मेरा लंड उस'की चूत से बाहर आया उस'ने एक ज़ोर दार सिस'कारी ली. फिर जब वह कुतिया की तरह बनी तो मैं उस'के पीच्चे आया और उस'के फैले हुए तरबूज जैसे बऱे बऱे चुत्तऱोन पर आप'नी हथेली कस कस के टीन चार बार पाट'की.

'छत' 'छत' की आवाज़ से मैं और मस्त हो गया और अपना लंड फिर से उस'की चूत में सिट्काय और फिर एक झट'के से पूरा लंड उस'की चूत में डाल दिया. अब उसे दर्द नहीं हो रहा था क्योंकि वह दो बार झऱ चुकी थी. उस'की चूत खुल चुकी थी. दो दफ़ा झऱ'ने के कारण वह अच्च्ची तरह से चीक'नी थी जैसे ही मेरा पूरा लंड उस'की चूत में गया उस'ने एक ज़ोर की एक सिस'कारी ली.

विशाल मज़ा आ गया.. उ.... ओह और चोदो. . तुम भी तो औरत को चोद'ने में पुर माहिर हो. मुझ जैसी 45 साल की औरत को भी तुम'ने लऱ'की बना दिया हे रे. मैने फिर से उसे धुंवा धार तरीके से चॉड्ना चालू कर दिया था. मैने उस'की कमर आप'ने दोनों हाथों से पाक'री हुई थी. हर झट'के से उस'की गान्ड जेल्ली की तरह हिल रही थी. कुच्छ 10 मिनिट उसे कुतिया की तरह छोड़'ने के बाद अब मैं झऱ'ने वाला था.

हाय मेरी रागिनी रानी मैं झऱ'ने वाला हून.. आह... मेरी जान. मैं जानता था की जिस'की बेटियों को चोद'ने में इट'ना मज़ा है तो उन'की मा की तो बात ही निराली होगी. तभी तो मैने ऐसा उपाय किया. बोलो मेरी जान! अब भी मुझ'से नाराज़ हो. उस'ने भी सिस'कारी ली.

विशाल बेट मैं भी झऱ'ने वाली हून. तुम मेरी चूत में ही झऱ्न. अरे अब तो तू मेरा सब'से लाद'ला दामाद है. नहीं मेरा सैंया दामाद.

चाची तुम एक रन्डी हो, मेरा माल अपनी चूत से पियोगी. हन मैं तुम्हारी चूत आप'ने माल से भर दूँगा. मेरी रन्डी यह ले मेरा माल. अपने इस 45 साल पूराने भोस'रे से पी जा. ऊह... मेरी रखेल सासू मा और हम दोनों साथ साथ ही झऱ गये. मैं उस'के ऊपर गिर गया. मेरा लंड अब भी उस'की चूत में था. हम दोनों ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रहे थे. लग'भाग 10 मिनिट के बाद मेरा लंड सिकुऱ कर उस'की चूत से बाहर निकल आया. मैं उस'के ऊपर से उठ गया. मैने कहा की,

मैं ज़रा फ्रेश हो के आता हून तुम भी मेरे साथ शवर ले लो. वह बिना कुच्छ बोले मेरे साथ शवर लेने चली गयी. शवर के दौरान ना वह कुच्छ बोली ना मैं. शवर के बाद मैने फोन पे ही खाना माँगा लिया.. इस दौरान वह कुच्छ नहीं बोली, लगता है उसे अब पचहतावा था की यह क्या कर दिया उस'ने, पर यह उस'की मर्ज़ी भी तो नहीं थी, चॉड्ना तो मैने था. उसे अगर खुशी से नहीं तो ज़बेरदास्ती ही चोद देता मैं. 20 या 30 मिनिट बाद दर'वाजे पर घन्टी हुई. मैने दर'वाजे खोला तो वह होटेल का आदमी था, खाना ले कर आया था. मैने उसे पे किया. खाना ले कर डिन्निंग तबले पर रखा और उसे कहा की,

आओ खाना खा लेते हैं. वह चुप छाप उठि और खाना खा'ने लगी. तब उस'ने मेरी तरफ देखा और बोली की,

विशाल तुम'ने ऐसा क्यों किया. मैं बोला की,

चलो चाची पहले खाना खा लो फिर बताऊँगा. और हम दोनों बिना कुच्छ एक डूस'रे से कहे खाना खाने लगे. चाची मुझ'से नज़रें नहीं मिला रही थी और चुप छाप खाना खा रही थी.