Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 14 Dec 2014 06:03

जाल पार्ट--25

गतान्क से आगे.

विजयंत उसकी गोरी बाँह से होता हुआ उसकी गर्दन तक पहुँचा & 1 बार फिर दाए कंधे के उपर से उसने अपनी बहू के रसीले होंठो को चूमने की ख्वाहिश जताई लेकिन इस बार भी उसने उसे धकेल के खुद से अलग किया & उस से दूर लड़खड़ाते भागी.

विजयंत ने हाथ बढ़ाया & इस बार उसके हाथ मे उसला लहराता आँचल आ गया.रंभा झटके से घूमी & वो नज़ारा देख विजयंत का हलाक सूख गया.आँचल हटने से उसकी तेज़ धड़कनो की कहानी कहता नारंगी ब्लाउस के गले मे से झँकता क्लीवेज & गोल नाभि से सज़ा उसका चिकना पेट.विजयंत उसके हुस्न को आँखो से पीते हुए उसका पल्लू पकड़े उसके गिर्द घूमने लगा.रंभा को उसकी निगाहें भी अपने जिस्म को जलती लग रही थी.वो बस आँखे बंद किए अपनी मुत्ठिया भिंचे चुपचाप खड़ी थी.कोई & मौका होता तो वो अपने आशिक़ के साथ नज़रे मिलाके उसे खुद को निहारते देखती लेकिन आज नही,आज उसे विजयंत को ये सुख नही देना था.

विजयंत घूम रहा था & लिपटी सारी खुल रही थी लेकिन पूरी तरह से नही क्यूकी वो उसकी बहू की कमर मे अटकी जो थी.रंभा ने अपनी पलके आधी खोली,उसे देखने से लग रहा था कि वो नशे मे है.विजयंत उसके करीब आया & फजूल जिसे उसने रंभा की पीठ पे होंठ फिराते वक़्त पॅंट की जेब मे रख लिया था,उसे निकाला.वो उसकी सारी को पकड़े उसे देखे जा रहा था.रंभा ने देखा उन आँखो मे उसके जिस्म की बहुत तारीफ थी.

"आहह..!",रंभा की आह ना चाहते हुए भी निकल गयी.विजयंत ने काम ही ऐसा किया था.गुलाब की लंबी डंठल को उसने उसकी सारी जहा अटकी वाहा उसकी सारी & कमर के बीच मे घुसाया & उसी डंठल से उसकी सारी की अटकी परतों को बाहर निकालने लगा.ऐसा करने से डंठल रंभा के निचले पेट को खरोंच उसके जोश को & बढ़ाने लगा.अब उसकी चूत मे उठ रही कसक बहुत तेज़ हो गयी थी.विजयंत ने फूल को बेड पे फेंका & उसकी सारी को फर्श पे गिराया & झुक के बैठ गया.

उसने बाए हाथ को रंभा की कमर की दाई तरफ जमाया & दाए हाथ की उंगलियो को उसके पेट पे फिराया,रंभा ने अपने बाल पकड़े & बड़ी मुश्किल से अपनी आह को दबाया.विजयंत आगे हुआ & उसके पेट को चूम लिया.उसके चूमने मे मस्ती थी,गर्मी थी जो रंभा की तड़प मे इज़ाफ़ा कर रही थी.वो पेट को चूमता उसकी नाभि की ओर पहुँचा & रंभा का दिल खुशी से उच्छलने लगा कि अब वो उसकी नाभि की गहराई नपेगा लेकिन नही वो नाभि के ठीक नीचे के हिस्से को होंठो मे दबा के काटने जैसी हरकत कर रहा था.रंभा को पता भी ना चला & उसकी कमर हिलने लगी & वो थोड़ा च्चटपटाने लगी.चूत की कसक अब बिल्कुल चरम पे थी.विजयंत वैसे ही उसकिनाभि के नीचे अपने होंठो से चबाए जा रहा था,फ़र्क बस ये था कि अब उसकी ज़ुबान भी उस हिस्से पे घूम रही थी.रंभा अपने बालो मे उंगलिया फिराती,सर झटकती कसमसा रही थी की उसे लगा की उसकी चूत की कसक बिकुल अपनी इंतेहा पे पहुँच गयी है & वो चीखी.उसे लगा कि उसकी टाँगे जवाब दे रही हैं.वो आँहे भरते हुए झाड़ रही थी.

विजयंत ने वैसे ही उसके पेट से खेलते हुए उसकी कमर को थाम उसे गिरने से रोक लिया & घुमा के दीवार के सहारे खड़ा कर दिया.जब वो थोड़ा संभली तो उसकी कमर के बाई तरफ लगे पेटिकोट के हुक & ज़िप को खोल दिया.पेटिकोट फ़ौरन फर्श पे गिरा नज़र आने लगा.विजयंत ने उसकी कमर से हाथ हटाए & उठ खड़ा हुआ.रंभा अभी भी थोड़ा कांप रही थी.उसने उसके दोनो हाथ थामे & उन्हे अपने सीने पे रख दिया.वो उसका इशारा समझ गयी-वो उसे अपनी कमीज़ खोलने को कह रहा था.उसने नज़रे नीची कर ली लेकिन विजयंत ने उसकी ठुड्डी पकड़ चेहरा उठाके फिर से वही इशारा किया.वो 1 बार फिर उसके & दीवार के बीच फँसी थी.उसने नज़रे नीची की & उसके बटन्स खोलने लगी.अंदर काफ़ी बाल नज़र आ रहे थे.विजयंत के इशारे पे उसने शर्ट को उसके कंधो से सरकाया & वो भी फर्श पे उसकी सारी & पेटिकोट के साथ गिरी दिखने लगी.

रंभा की आँखे फैल गयी थी.विजयंत का गोरा सीना बहुत चौड़ा & मज़बूत था & सुनहरे बालो से भरा हुआ था.ऐसे ही सीने तो उसे पसंद थे.उसका पेट ज़रा भी बाहर नही निकला था & बाजुओ का घेरा तो इतना बड़ा था कि शायद उसके दोनो हाथो मे नही समाता.कसरती बदन की 1-1 मांसपेशी जैसे तराशि हुई थी.विजयंत ने उसके हाथ सीने पे रख दिए.उसके दिल ने तो कहा की पूरे सीने को सहलाए,उसे चूमे & अपनी सारी हसरतें पूरी कर ले लेकिन नही उसे ऐसा नही करना था.वो वैसे ही खड़ी रही केवल उसका सीना उपर-नीचे होता रहा.विजयंत मुस्कुराया & उसके हाथो के उपर अपने बड़े-2 हाथ जमाए & उन्हे नीचे फिसलाने लगा.उसने रंभा के हाथ अपने पेट से होते हुए अपनी पॅंट की बेल्ट पे रख दिए.रंभा उसका इशारा समझ गयी & 1 पल के बाद उसकी पॅंट खोल दी.पॅंट सर्की तो विजयंत ने उस से अपनी टाँगे निकाली.अब बस 1 सफेद अंडरवेर उसके बदन मे था.रंभा ने सोचा था कि वो उधर नही देखेगी लेकिन उसकी निगाह पड़ी & अंडरवेर से चिपक गयी.इतना फूला अंडरवेर उसने आज तक नही देखा था.लंड के आकर की कल्पना से ही उसकी चूत मे दोबारा कसक उठने लगी.

विजयंत की जंघे किसी पेड़ की मोटी शाख जैसी थी & वो भी घने बालो से ढँकी थी.रंभा ने नज़रे उपर कर ली लेकिन विजयंत की निगाहो से नही मिलाई.विजयंत झुका & उसके होंठो से अपने होंठ सटा दिए.1 नयी बिजली की लहर रंभा के बदन मे दौड़ गयी & वो थरथरा उठी.पहली बार विजयंत ने उसके होंठ चूमे थे.उसकी किस मे गर्मजोशी थी लेकिन बदहवासी नही.अभी तक जितने मर्द उसके जिस्म का लुत्फ़ उठाने की खुशकिस्मती पाए थे,उनमे से सभी मस्ती मे पागल हो जाते थे & उनकी किस मे बड़ी बेसब्री होती थी.विजयंत की किस बहुत मस्त थी लेकिन रंभा को 1 पल को भी नही लगा कि वो उसके जिस्म को देख अपना काबू खो रहा है.उसे अच्छी लगी ये बात.विजयंत के होंठ उसके लबो को चूम उसकी मस्ती को कम नही होने दे रहे थे.वो थोड़ा लड़खड़ाई & उसके ससुर की मज़बूत बाहो ने उसे अपने आगोश मे भर लिया.उसका सीना विजयंत के चौड़े सीने से पिस गया & उसके हाथ अपने आप उसके कंधे पे लग गये.

विजयंत के होंठ उसके होंठो का रस पिए जा रहे थे & अब उसकी ज़ुबान का स्वाद भी चखना चाहते थे.रंभा ने अपने होंठ अलग करने की कोशिश की,मस्ती की शिद्दत बहुत बढ़ गयी थी & वो सिहर रही थी.विजयंत के सख़्त हाथ उसकी कमर & पीठ पे थे,उसका सीना उसकी चूचियो को दबा रहा था & नीचे चूत से उपर पेट पे उसका सख़्त लंड वो महसूस कर रही थी.उसकी चूत मे मस्ती की लहरे कसका बन के उमड़े जा रही थी.वो अब कमज़ोर पड़ रही थी & इसी बात का फ़ायदा उठाके विजयंत ने अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे घुसा दी & रंभा की ज़ुबान जैसे ही उस से टकराई & गुत्थमगुत्था हुई,उसके बदन मे तूफान आ गया जोकि उसकी चूत से उठा था.उसकी आहें ससुर के लबो से सिले होंठो के बावजूद सुनाई दे रही थी & वो 1 बार फिर कमर हिलाते काँपने लगी थी.अभी तक वो पूरी नंगी भी नही हुई थी,उसके किसी नाज़ुक अंग को उसके ससुर ने च्छुआ तक नही था & वो दोबारा झाड़ रही थी.

रंभा के पैरो ने फिर जवाब दिया तो विजयंत ने दाई बाँह जोकि उसकी कमर को कसे थी उसे उसकी गंद के नीचे लगाया & बिना किस तोड़े उसकी जाँघो को पकड़ उसे गोद मे उठा लिया & उसे बिस्तर पे ले गया.रंभा की ज़ुबान को विजयंत अपनी ज़ुबान से छेड़े चले जा रहा था.वो अपनी बाई करवट पे लेता उसे अपने से चिपकाए चूमे चला जा रहा था.उसका दाया हाथ उपर आया & अपनी बहू की पीठ के पार ब्लाउस के स्ट्रॅप के हुक्स को खोल दिया.

रंभा उसकी इस हरकत से चौंक गयी & किस तोड़ दी.विजयंत की बाई बाँह उसके उपरी पीठ के पार थी & उसने उसी मे उसे कसे हुए रंभा के ब्लाउस को दाए हाथ से पकड़ उसकी गर्दन से निकाल दिया & उसके जुड़े को खोल उसके लंबे बालो को आज़ाद किया & फिर नीचे देखा.रंभा ने नारंगी रंग का ही स्ट्रेप्लेस्स ब्रा पहना था & विजयंत के सीने से दबे होने के कारण ऐसा लगता था कि उसकी चूचिया ब्रा के उपर से छलक जाना चाहती हो.उसने गुजरात के बीच पे भी उसे ब्रा & पॅंटी मे देखा था लेकिन आज की बात ही और थी.

आज वो उसकी बाहो मे थी & माहौल बिल्कुल मस्ताना था.उसने रंभा को देखा तो उन आँखो से छलक रही उसके जिस्म की चाह से वो आहत हो गयी & उसकी बाहो से निकल के घूमी & पेट के बल बिस्तर मे मुँह च्छूपा के लेट गयी.अभी का नज़ारा भी कोई कम मस्त नही था.विजयंत ने उसके बाल उसकी पीठ से हटा के उसके दाए कंधे के उपर से बिस्तर पे कर दिए.उसकी पीठ पे बस 1 पतला सा ब्रा का ट्रॅन्स्परेंट स्ट्रॅप नज़र आ रहा था & ऐसा लगता था मानो पीठ पूरी नंगी ही है.नीचे छ्होटी सी पॅंटी मे च्छूपी उसकी मोटी गंद का दिलकश आकार दिख रहा था.विजयंत का लंड कुच्छ & खड़ा हो गया & अब उसका सिरा उसके अंडरवेर के वेस्ट बंद मे दबा नज़र आ रहा था-वो बाहर आने के लिए छॅट्पाटा रहा था.

विजयंत की निगाह बिस्तर के दूसरे कोने पे पड़े रंभा के बगल मे पड़े गुलाब के फूल पे पड़ी.उसने उसे उठाया & फिर उसकी डंठल को रंभा की गर्दन के पीछे से शुरू करते हुए उसकी नर्म पीठ पे चलाते हुए नीचे आने लगा.रंभा ने सर बिस्तर से उठाया & उसके बालो की आब्नूसी चिलमन के पीछे से विजयंत को 1 दबी आह सुनाई दी.

फूल के डंठल की राह मे ब्रा स्ट्रॅप अड़चन बना तो विजयंत ने उसे खोल दिया.अब खुला ब्रा रंभा की चूचियो के नीचे दबा था.डंठल नीचे बढ़ा चला जा रहा था.रंभा ने आज रात जैसी मस्ती पहले कभी महसूस नही की थी.उसकी चूत मे तो जैसे कसक आज शांत ही नही होने वाली थी.उसने जंघे आपस मे भींच उसे समझाने की कोशिश की.

डंठल उसकी कमर के बीचोबीच उसकी पॅंटी के वेस्ट बंद पे रुकी हुई थी.रंभा का दिल ज़ोरो से धड़क उठा.उसकी गंद उसके ससुर के सामने नंगी होने वाली थी.विजयंत ने बिना उसकी कमरको छुए पॅंटी के बीचोबीच वेयैस्टबंड मे उंगली फँसा के उसे नीचे खींचा.उसके पीछे-2 डंठल रंभा की गंद की दरार मे उतार गयी.

"आननह..!",रंभा ने सर उठाके आह भरी.अब वो बहुत मदहोश हो गयी थी.उसकी कमर बहुत हौले-2 उचक रही थी.पॅंटी उसकी गंद से नीचे उसकी टाँगो से होते हुई बाहर निकाल दी गयी.डंठल उसकी दरार मे & नीचे उतरी तो रंभा की जंघे खुद बा खुद थोड़ी फैल गयी & विजयंत को उसकी रस टपकती चूत दिखाई दी.उसके दिल मे खुशी & जोश का तूफान मच गया.चूत उस फूल से,जिसे उसने हाथ मे थामा हुआ था,भी ज़्यादा नाज़ुक & कोमल थी.

उसने डंठल नीचे की,रंभा दम साधे उसके चूत मे उतरने का इंतेज़ार कर रही थी लेकिन उसके ससुर ने डंठल को उसकी गंद के छेद के बगल से होते हुए उसकी बाई फाँक पे घुमाया & फिर नीचे उसकी बाई जाँघ के पिच्छले,मांसल हिस्से पे चलाते हुए नीचे आने लगा.रंभा ने मुँह बिस्तर मे च्छूपा लिया & आहें उसमे दफ़्न करने लगी.

डंठल उसकी पिछली टांग को सहलाते हुए उसके तलवे को गुदगुदा रही थी.रंभा ने बेचैन हो बाई टांग हवा मे उठा दी तो विजयंत ने डंठल से उसके दाए तलवे को गुदगुदाना शुरू कर दिया.वो उस टांग को भी उठाने ही वाली थी कि उसने उसे तलवे से हटा के टांग पे उपर बढ़ा दिया.डंठल उसकी गंद की दाई फाँक पे पे पहुँची & फिर अचानक उसकी चूत मे घुस गयी.

इस अचानक हमले से रंभा चौंक गयी & बहुत ज़ोर से आ भरी.विजयंत उस डंठल को उसकी चूत मे अंदर-बाहर करने लगा.रंभा के लिए ये सब बिल्कुल नया एहसास था & वो कमर उचकाती हुई तीसरी बार झाड़ गयी.विजयंत ने डंठल को चूत से निकाला & उसके काँपते जिस्म को देखता रहा.जब थरथराहट ख़त्म हुई तो उसने रंभा को सीधा कर दिया.

सामने का नज़ारा देख उसकी ज़ुबान फिर सुख गयी.ऐसा लगता था जैसे खुदा ने सारा हुस्न 1 ही जिस्म मे डाल दिया हो.चेहरे पे बिखरे बालो की चिलमन के बावजूद मस्ती की लकीरें सॉफ दिख रही थी & फिर नीचे सख़्त गुलाबी निपल्स से सजी चूचियाँ जोकि बिल्कुल कसी हुई थी.विजयंत ने अपने सीने पे हाथ फेरा,रंभा को पहली बार वो थोड़ा बेचैन नज़र आया.उसके दिल मे खुशी की 1 लहर उठी की उसके हुस्न उसके ससुर जैसे बांके मर्द को भी बेचैन कर ही दिया लेकिन फिर उसकी आन ने उसे इस खुशी के इज़हार से रोका.

विजयनत उसकी कसी,गुलाबी,चिकनी चूत को देख रहा था.औरत के जिस्म के इस अंग की ना जाने कितनी किसमे वो देख चुका था लेकिन ऐसी चूत उसने आज तक नही देखी थी,"तुम सी हसीन मैने आज तक नही देखी!",ससुर के मुँह से हुस्न की तारीफ सुन शर्म से रंभा ने अपनी आँखे बंद कर ली.उसे ताज्जुब हुआ कि उसे आज शर्म क्यू आ रही थी!..विजयंत की बेबाक नज़रे उसे खुद को चूमती हुई सी लग रही थी लेकिन जैसे उन्होने उसे बाँध भी रखा था & वो करवट ले अपने नंगे तन को च्छुपाने की कोशिश भी नही कर पा रही थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--25

gataank se aage.

vijayant uski gori banh se hota hua uski gardan tak pahuncha & 1 baar fir daye kandhe ke upar se usne apni bahu ke rasile hotho ko chumne ki khwahish jatayi lekin is baar bhi usne use dhakel ke khud se alag kiya & us se door ladkhadate bhagi.

vijayant ne hath badhaya & is baar uske hath me usla lehrata aanchal aa gaya.rambha jhatke se ghumi & vo nazara dekh vijayant ka halak sukh gaya.aanchal hatne se uski tez dhadkano ki kahani kehta narangi blouse ke gale me se jhankta cleavage & gol nabhi se saja uska chikna pet.vijayant uske husn ko aankho se peete hue uska pallu pakde uske gird ghumne laga.rambha ko uski nigahen bhi apne jism ko jalati lag rahi thi.vo bas aankhe band kiye apni mutthiya bhinche chupchap khadi thi.koi & mauka hota to vo apne aashiq ke sath nazre milake use khud ko niharte dekhti lekin aaj nahi,aaj use vijayant ko ye sukh nahi dena tha.

vijayant ghum raha tha & lipti sari khul rahi thi lekin puri tarah se nahi kyuki vo uski bahu ki kamar me atki jo thi.rambha ne apni palke aadhi kholi,use dekhne se lag raha tha ki vo nashe me hai.vijayant uske karib aaya & phjool jise usne rambha ki pith pe honth firate waqt pant ki jeb me rakh liya tha,use nikala.vo uski sari ko pakde use dekhe ja raha tha.rambha ne dekha un aankho me uske jism ki bahut tarif thi.

"aahhhh..!",rambha ki aah na chahte hue bhi nikal gayi.vijayant ne kaam hi aisa kiya tha.gulab ki lambi danthal ko usne uski sari jaha atki vaha uski sari & kamar ke beech me ghusaya & usi danthal se uski sari ki atki parto ko bahar nikalne laga.aisa karne se danthal rambha ke nichle pet ko kharonch uske josh ko & badhane laga.ab uski chut me uth rahi kasak bahut tez ho gayi thi.vijayant ne phool ko bed pe fenka & uski sari ko farsh pe giraya & jhuk ke baith gaya.

usne baye hath ko rambha ki kamar ki dayi taraf jamaya & daye hath ki ungliyo ko uske pet pe fiaraya,rambha ne apne baal pakde & badi mushkil se apni aah ko dabaya.vijayant aage hua & uske pet ko chum liya.uske chumne me masti thi,garmi thi jo rambha ki tadap me izafa kar rahi thi.vo pet ko chumta uski nabhi ki or pahuncha & rambha ka dil khushi se uchhalne laga ki ab vo uski nabhi ki gehrayi napega lekin nahi vo nabhi ke thik neeche ke hise ko hotho me daba ke kaatne jaisi harkat kar raha tha.rambha ko pata bhi na chala & uski kamar hilne lagi & vo thoda chhatpatane lagi.chut ki kasak ab bilkul charam pe thi.vijayant vaise hi uskinabhi ke neeche apne hotho se chabaye ja raha tha,fark bas ye tha ki ab uski zuban bhi us hisse pe ghum rahi thi.rambha apne baalo me ungliya firati,sar jhatakti kasmasa rahi thi ki use laga ki uski chut ki kasak bikul apni inteha pe pahunch gayi hai & vo chikhi.use laga ki uski tange jawab de rahi hain.vo caahe bharte hue jhad rahi thi.

vijayant ne vaise hi uske pet se khelte hue uski kamar ko tham use girne se rok liya & jghuma ke deewar ke sahare khada kar diya.jab vo thoda sambhli to uski kamar ke bayi taraf lage petticoat ke hook & zip ko khol diya.petticoat fauran farsh pe gira nazar aane laga.vijayant ne uski kamar se hath hataye & uth khada hua.rambha abhi bhi thoda kanp rahi thi.usne uske dono hath thame & unhe apne seene pe rakh diya.vo uska ishara samajh gayi-vo use apni kamiz kholne ko keh raha tha.usne nazre neechi kar li lekin vijayant ne uski thuddi pakad chehra uthake fir se vahi ishara kiya.vo 1 baar fir uske & deewar ke beech fansi thi.usne nazre neechi ki & uske buttons kholne lagi.andar kafi baal nazar aa rahe the.vijayant ke ishare pe usne shirt ko uske kandho se sarkaya & vo bhi farsh pe uski sari & petticoat ke sath giri dikhne lagi.

rambha ki aankhe fail gayi thi.vijayant ka gora seena bahut chauda & mazbut tha & sunehre baalo se bhara hua tha.aise hi seene to use pasand the.uska pet zara bhi bahar nahi nikla tha & bazuo ka ghera to itna bada tha ki shayad uske dono hatho me nahi samata.kasrati badan ki 1-1 manspeshi jaise tarashi hui thi.vijayant ne uske hath seene pe rakh diye.uske dil ne to kaha ki pure seene ko sehlaye,use chume & apni sari hasraten puri kar le lekin nahi use aisa nahi karna tha.vo vaise hi khadi rahi keval uska seena upar-neeche hota raha.vijayant muskuraya & uske hatho ke upar apne bade-2 hath jamaye & unhe neeche fislane laga.usne rambha ke hath apne pet se hote hue apni pant ki belt pe rakh diye.rambha uska ishara samajh gayi & 1 pal ke baad uski pant khol di.pant sarki to vijayant ne us se apni tange nikali.ab bas 1 safed underwear uske badan me tha.rambha ne socha tha ki vo udahr nahi dekhegi lekin uski nigah padi & underwear se chipak gayi.itna phoola underwear usne aaj tak nahi dekha tha.lund ke aakar ki kalpana se hi uski chut me dobara kasak uthne lagi.

vijayant ki janghe kisi ped ki moti shakh jaisi thi & vo bhi ghane baalo se dhanki thi.rambha ne nazre upar kar li lekin vijayant ki nigaho se nahi milayi.vijayant jhuka & uske hotho se apne honth sata diye.1 nayi bijli ki lehar rambha ke badan me daud gayi & vo tharthara uthi.pehli baar vijayant ne uske honth chume the.uski kiss me garmjoshi thi lekin badhawasi nahi.abhi tak jitne mard uske jism ka lutf uthane ki khushkismati paye the,unme se sabhi masti me pagal ho jate the & unki kiss me badi besabri hoti thi.vijayant ki kiss bahut mast thi lekin rambha ko 1 pal ko bhi nahi laga ki vo uske jism ko dekh apna kabu kho raha hai.use achhi lagi ye baat.vijayant ke honth uske labo ko chum uski masti ko kam nahi hone de rahe the.vo thoda ladkhadayi & uske sasur ki mazbut baaho ne use apne agosh me bhar liya.uska seena vijayant ke chaude seene se pis gaya & uske hath apne aap uske kandhe pe lag gaye.

vijayant ke honth uske hotho ka ras piye ja rahe the & ab uski zuban ka swad bhi chakhna chhate the.rambha ne apne honth alag karne ki koshish ki,masti ki shiddat bahut badh gayi thi & vo sihar rahi thi.vijayant ke sakht hath uski kamar & pith pe the,uska seena uski chhatiyo ko daba raha tha & neeche chut se upar pet pe uska sakht lund vo mehsus kar rahi thi.uski chut me masti ki lehre kaska ban ke umde ja rahi thi.vo ab kamzor pad rahi thi & isi baat ka fayda uthake vijayant ne apni zuban uske munh me ghusa di & rambha ki zuban jaise hi us se takrayi & gutthamguttha hui,uske badan me toofan aa gaya joki uski chut se utha tha.uski aahen sasur ke labo se sile hontho ke bavjud sunai de rahi thi & vo 1 baar fir kamar hilate kanpne lagi thi.abhi tak vo puri nangi bhi nahi hui thi,uske kisi nazuk ang ko uske sasur ne chhua tak nahi tha & vo dobare jhad rahi thi.

Rambha ke pairo ne fir jawab diya to Vijayant ne dayi banh joki uski kamar ko kase thi use uski gand ke neeche lagaya & bina kiss tode uski jangho ko pakad use god me utha liya & use bistar pe le gaya.rambha ki zuban ko vijayant apni zuban se chhede chale ja raha tha.vo apni bayi karwat pe leta use apne se chipakye chume chala ja raha tha.uska daya hath upar aaya & apni bahu ki pith ke paar blouse ke strap ke hooks ko khol diya.

rambha uski is harkat se chaunk gayi & kiss tod di.vijayant ki bayi banh uske upri pith ke paar thi & usne usi me use kase hue rambha ke blouse ko daye hath se pakad uski gardan se nikal diya & uske jude ko khol uske lambe baallo ko aazad kiya & fir neeche dekha.rambha ne narangi rang ka hi strapless bra pehna tha & vijayant ke seene se dabe hone ke karan aisa lagta tha ki uski chhatiya bra ke upar se chhalak jana chahti ho.usne Gujarat ke beach pe bhi use bra & panty me dekha tha lekin aaj ki baat hi aur thi.

aaj vo uski baaho me thi & mahaul bilkul mastana tha.usne rambha kode kha to un aankho se chhalak rahi uske jism ki chah se vo aahat ho gayi & uski baaho se nikal ke ghumi & pet ke bal bistar me munh chhupa ke let gayi.abhi ka nazara bhi koi kam mast nahi tha.vijayant ne uske baal uski pith se hatake uske daye kandhe ke upar se bistar pe kar diye.uski pith pe bas 1 patla sa bra ka transparent strap nazar aa raha tha & aisa lagta tha mano pith puri nangi hi hai.neeche chhoti si panty me chhupi uski moti gand ka dilkash aakar dikh raha tha.vijayant ka lund kuchh & khada ho gaya & ab uska sira uske underwear ke waist band me daba nazar aa raha tha-vo bahar aane ke liye chhatpata raha tha.

vijayant ki nigah bistar ke dusre kone pe pade rambha ke bagal me pade gulab ke phool pe padi.usne use uthaya & fir uski danthal ko rambha ki gardan ke peechhe se shuru karte hue uski narm pith pe chalate hue neeche aane laga.rambha ne sar bistar se uthaya & uske baalo ki aabnusi chilman ke peechhe se vijayant ko 1 dabi aah sunai di.

phool ke danthal ki raah me bra strap adchan bana to vijayant ne use khol diya.ab khula bra rambha ki chhatiyo ke neeche daba tha.danthal neeche badha chala ja raha tha.rambha ne aaj raat jaisi masti pehle kabhi mehsus nahi ki thi.uski chut me to jaise kasak aaj shant hi nahi hone wali thi.usne janghe aaps me bhinch use samjhane ki koshish ki.

danthal uski kamar ke beechobeech uski panty ke waist band pe ruki hui thi.rambha ka dil zoro se dhadak utha.uski gand uske sasur ke samne nangi hone vali thi.vijayant ne bina uski kamarko chhue panty ke beechobeech waistband me ungli fansa ke use neeche khincha.uske peechhe-2 danthal rambha ki gand ki darar me utar gayi.

"aannhhhhh..!",rambha ne sar uthake aah bhari.ab vo bahut madhosh ho gayi thi.uski kamar bahut haule-2 uchak rahi thi.panty uski gand se neeche uski tango se hote hui bahar nikaal di gayi.danthal uski darar me & neeche utri to rambha ki janghe khud ba khud thodi fail gayi & vijayant ko uski ras tapkati chut dikahyi di.uske dil me khushi & josh ka toofan mach gaya.chut us phool se,jise usne hath me thama hua tha,bhi zyada nazuk & komal thi.

usne danthal neeche ki,rambha dum sadhe uske chut me utarne ka intezar kar rahi thi lekin uske sasur ne danthal ko uski gand ke chhed ke bagak se hote hue uski bayi fank pe ghumaya & fir neeche uski bayi jangh ke pichhle,mansal hisse pe chalate hue eeche aane laga.rambha ne munh bistar me chhupa liya & aahen usme dafn karne lagi.

danthal uski pichli tang ko sehlate hue uske talwe ko gudguda rahi thi.rambha ne bechain ho bayi tang hawa me utha di to vijayant ne danthal se uske daye talwe ko gudgudana shuru kar diya.vo us tang ko bhi uthan ehi wali thi ki usne use talwe se hata ke tang pe upar badha diya.danthal uski gand ki day fank pe pe pahunchi & fir achanak uski chut me ghus gayi.

is achanak humle se rambha chaunk gayi & bahut zor se aah bhari.vijayant us danthal ko uski chut me andar-bahar karne laga.rambha ke liye ye sab bilkul naya ehsas tha & vo kamar uchkati hui teesri baar jhad gayi.vijayant ne danthal ko chut se nikala & uske kanpte jism ko dekhta raha.jab thartharahat khatm hui to usne rambha ko seedha kar diya.

samne ka nazar dekh uski zuban fir sukh gayi.aisa lagta tha jaise khuda ne sara husn 1 hi jism me daal diya ho.chehre pe bikhre baalo ki chilman ke bavjud masti ki lakiren saaf dikh rahi thi & fir neeche sakht gulabi nipples se saji chhatiya joki bilkul kasi hui thi.vijayant ne apne seene pe hath fera,rambha ko pehli baar vo thoda bechain nazar aaya.uske dil me khushi ki 1 lehar uthi ki uske husn uske sasur jaise banke mard ko bhi bechain kar hi diya lekin fir uski aan ne use is khushi ke izhar se roka.

vijaynat uski kasi,gulabi,chikni chut ko dekh raha tha.aurat ke jism ke is ang ki na jane kitni kisme vo dekh chuka tha lekin aisi chut usne aaj tak nahi dekhi thi,"tum si haseen maine aaj tak nahi dekhi!",sasur ke munh se husn ki tarif sun sharm se rambh ne apni aankhe band kar li.use tajjub hua ki use aaj sharm kyu aa rahi thi!..vijayant ki bebak nazre use khud ko chumti hui si lag rahi thi lekin jaise unhone use bandh bhi rakha tha & vo karwat le apne nange tan ko chhupane ki koshish bhi nahi kar pa rahi thi.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 14 Dec 2014 06:04

जाल पार्ट--26

गतान्क से आगे.

विजयंत ने अब डंठल थामी & गुलाब के फूल को उसके बालो से ढँके चेहरे पे फिराया & फिर नीचे ले आया.गुलाब ने उसकी बाई चूची की गोलाई के गिर्द 1 दायरा बनाया & फिर दोनो चूचियो के बीच पहुँचा & यही हरकत दाई चुची के साथ दोहराई.उसने फूल की पंखुड़ियो से उसके निपल्स को छेड़ा तो वो सिहर उठी.रंभा आँखे बंद कर बस मस्ती मे उड़ रही थी.फूल उसकी चूचियो को चूमने के बाद

नीचे उसके पेट पे आया & उसकी नाभि के गिर्द घुमाने लगा.नाभि के छेद को भी विजयंत ने पंखुड़ियो से छेड़ा.रंभा फिर से च्चटपटाने लगी थी.

फूल नीचे आया & उसकी चूत से सॅट गया,"तुम्हारी चूत की पंखुड़ियो की नज़ाकत,इनकी कोमलता के आगे इस गुलाब का हुस्न भी फीका है.मुझे तो डर है कि कही तुम्हारे इस खूबसूरत अंग से रश्क कर ये बेचारा मुरझा ना जाए!",विजयंत ने गुलाब को बिस्तर पे फेंक दिया & रंभा के दाए पैर के पास घुटनो पे बैठ गया.ऐसे शायराना अंदाज़ मे रंभा की तारीफ किसी ने नही की थी.उसका दिल उसे धिक्कार रहा था कि वो ऐसे आशिक़ का इस्तेक्बाल नही कर रही & ना ही अपनी आहो के ज़रिए उसका शुक्रिया अदा कर रही है!

उसने बालो की लड़ियो के पार देखा तो उसे विजयंत गुटनो पे बैठा नज़र आया.उसने उसके दाए पाँव को उठाके होंठो से ऐसे लगाए जैसे वो हुस्न की देवी हो & उसका ससुर उसकी इबादत कर रहा हो.उसने दोनो होंठो को मुँह के अंदर खींच अपनी आह को रोका.विजयंत उसके दाए पैर की सबसे छ्होटी उंगली को चूस रहा था.जब तक वो अंगूठे तक पहुँचा,रंभा मदहोशी मे बिस्तर पे दाए-बाए सर झटक रही थी.

विजयंत उसके पैरो की उंगलियो की पूजा करने के बाद उसकी मखमली टांग के 1-1 हिस्से को अपने होंठो से चूमता उपर उसकी मोटी जाँघ तक आया.रंभा की भारी जाँघ की कसावट उसे बहुत भाई & उसने वाहा केवल चूमा ही नही बल्कि चूस-2 के अपने होंठो के निशान उनपे छ्चोड़ दिए.रंभा अपने सर के दोनो तरफ की चादर को बेचैनी से खींचते आहे भरते कमर उचका रही थी.उसे बस इंतजार था अपने ससुर के होंठो का अपनी चूत से लगने का.

विजयंत उसकी बाई जाँघ को उठाए अपनी दाढ़ी उसपे रगड़ उसके जिस्म की बेचैनी को & बढ़ा रहा था.उसने उसकी जाँघ & कमर के जोड़ पे चूमा & फिर उसकी बाई जाँघ को उठा लिया.उसकी दाढ़ी ने वाहा भी उसे छेड़ा & उसके होंठो ने वाहा भी अपने दस्तख़त किए & फिर नीचे आ फिर से घुटनो पे बैठ वो उसके बाए पैरो की उंगलियो को पूजने लगा.रंभा बेचैनी से कमर उचका रही थी & जंघे भींच रही थी.उसने बेचैन हो अपनी चूचियो को आप ही दबाया तो विजयंत को ध्यान आया कि हुस्न के देवी के उन बला के खूबसूरत अंगो की इबादत तो उसने की ही नही!

वो उसके दाई तरफ बाई करवट पे लेटा & दाया हाथ उसके पेट पे रख सहलाते हुए अपने नाक & होंठो से उसके बालो की लड़ियो को हटा उसके कोमल चेहरे & गुलाबी होंठो को चूमने लगा.रंभा की भी तारीफ थी कि इतनी मस्ती,ऐसे रोमानी गर्म, माहौल के बावजूद उसने अभी तक 1 बार भी खुद अपनी ज़ुबान ना तो विजयंत के मुँह मे घुसाइ थी ना ही अपने हाथ उसके जिस्म पे लगा उसे इस बात का एहसास दिलाया था कि वो उसकी हर्कतो से मस्ती मे बावली हो गयी है.ये दूसरी बात थी कि कोई अँधा भी बता देता कि रंभा जोश के सातवे आसमान मे उड़ रही थी.

विजयंत ने अपनी दाढ़ी उसके सीने पे रगडी & उसकी नाभि को कुरेदा तो रंभा ने चादर भींचते हुए आह भरी & कमर उचकाई & जैसे ही उसकी बाई चूची के निपल को जीभ से चाटते हुए उसके ससुर ने उसे मुँह मे भरा & उसकी नाभि कुरेदी वो 1 बार और झाड़ गयी.विजयंत ने अपने दोनो हाथ अपनी बहू की चूचियो पे लगा दिए.उसकी छातियाँ देख मर्द पागल हो जाते थे & कई बार इतने बदहवास की रंभा को तकलीफ़ होने लगती थी.

विजयंत को भी जैसा जोश आज की रात चढ़ा था वैसा पूरी ज़िंदगी नही चढ़ा था लेकिन फिर भी रंभा ने उसके चूमने मे वो बदहवासी नही महसूस क़ी.वो जानती थी कि उसका ससुर उसके हुस्न को देख जोश से पागल हो गया है लेकिन फिर भी उसकी गर्मजोशी से भरी ज़ुबान & आतुर हाथ उसे तकलीफ़ नही पहुँचा रहे थे बल्कि जो मज़ा उसे अभी आ रहा था ऐसा उसे ना ही अपने किसी प्रेमी & ना ही पति के साथ आया था.

पता नही कितनी देर तक वो उसकी छातियो के मस्ताने उभारो से खेलता रहा & वो मदहोश होती रही.अपने हाथो को अपने ससुर के बालो को भींचने,उसके गथिले बदन को अपने आगोश मे भरने से उसने अपनी आन से मजबूर हो कैसे रोका था ये वोही जानती थी.

विजयंत ने उसके सीने से सर उठाया तो रंभा ने उसे अधखुली,नशे से बोझल पॅल्को से देखा.वो उसकी जंघे फैला के उनके बीच लेट रहा था.उसने आँखे बंद की & 1 बार फिर अपनी छातियाँ दबाने लगी.विजयंत ने उसकी चूत मे जीभ फिराई तो उसने कमर उचकाई.विजयंत ने उसकी जाँघो मे बाँह फँसा के उसके पेट को दबाते हुए उसकी चूत चाटना शुरू किया & वो अपनी चूचियाँ दबाते हुए आहे भरने लगी.उसकी कमर खुद बा खुद उच्के जा रही थी.

विजयंत उसके दाने को चाट रहा था &वो मस्ती मे उड़ रही थी.उसने अपने हाथ आगे बढ़ा उसकी चूचियो पे रखे तो रंभा ने अपने हाथ वहाँ से खीच लिए & 1 बार फिर बिस्तर की चादर की सलवटो मे इज़ाफ़ा करने लगी.

विजयंत की जीभ ने बहुत जल्द ही उसे झाड़वा दिया लेकिन उसकी चूत से अलग नही हुई.चूत से रस बहे जा रहा था & उसका ससुर उसे चाते जा रहा था.1 मुद्दत के बाद उसे 1 बार & झाड़वाने के बाद विजयंत ने अपना चेहरा उसकी गोद से लगा किया & उसकी टाँगे फैला उनके बीच खड़ा हो गया.रंभा ने अधखुली आँखो से उसे अंडरवेर उतारते देखा & जब उसका लंड बाहर आया तो उसकी आँखे हैरत से फैल गयी.

इतना बड़ा लंड!..रंभा ने ऐसा लंड केवल नंगी फ़िल्मो मे देखा था & उसे हमेशा यही लगता था कि वो फ़िल्मे बनानेवाले कोई कारस्तानी करते होंगे वरना असला ज़िंदगी मे वैसा लंबा लंड होना नामुमकिन है..लेकिनाज़ उसे पता चल रहा था कि वो ग़लत थी.विजयंत उसकी फैली जाँघो के बीच घुटनो पे बैठ गया..लंड 9 इंच से लंबा लगता है..वो नज़रो से उसके लंड को नाप रही थी & मोटाई तो 2.5 इंच से भी ज़्यादा लगती है.

विजयंत ने फॉरेस्किन पीछे की तो उसके 9.5इंच की गोरे लंड का गुलाबी सूपड़ा प्रेकुं से चमकता सामने आ गया..झांते सॉफ कर रखी है इसने.अफ!..रंभा ने आँखे बंद कर ली.उसके ससुर ने यहा आने से पहले अपने होटेल के कमरे मे अपनी झांते सॉफ की थी क्यूकी अपनी खूबसूरत बहू को चोद्ते वक़्त वो बीच मे ज़रा सी भी रुकावट नही चाहता था.

"उउन्न्ह..!",उसने अपने निचले होंठ को दाँत से काटा & चादर पे बेचैनी से हाथ चलाए.विजयंत अपना लंड उसकी चूत की दरार पे फिरा रहा था.रंभा की कमर अब उसके काबू मे नही थी & अपने आप उचकने लगी थी मानो उसकी चूत खुद ही लंड को अंदर लेना चाहती हो.विजयंत चूत की दरार पे लंड को चला उसे पागल कर रहे था & उभरे हुए उसके दाने को अपने सूपदे से छेड़ रहा था.रंभा ने अपने सर के बगल मे दोनो तरफ की चादर को हाथो मे भर के नोचा & ज़ोर से कमर उचकाई & अपना सर पीछे फेंकते हुए जिस्म कमान की तरह मोड़ा.वो लंड की हर्कतो से झाड़ गयी थी.

वो कमर उचकाते हुए झाड़ ही रही थी कि विजयंत ने सूपदे को चूत मे धकेल दिया.कुच्छ उसके धक्के कुच्छ उसकी चूत ने ही उचक के उसके सूपदे को अंदर ले लिया.रंभा के माथे पे शिकन पड़ गयी & उसने दर्द के एहसास से आँखे मींच ली.उसकी चूत को विजयंत का लंड बुरी तरह फैला रहा था.वो बेचैनी से बिस्तर की चादर को पकड़े हुए थी.उसकी आन अभी भी उसे अपने ससुर को उसकी गर्म हर्कतो से पैदा हुई मस्ती के इज़हार से रोक रही थी.

विजयंत ने उसकी चूत के गीलेपन का फ़ायदा उठा के लंड 7 इंच तक अंदर घुसा दिया.वो भी उसकी चूत की कसावट से आहत हुआ था & ज़िंदगी मे पहली बार उसे लगा था कि वो बिना लड़की को झड़वाए खुद पहले झाड़ जाएगा.रंभा को अब दर्द नही हो रहा था.विजयंत ने घुटने पे बैठे-2 ही उसकी चुदाई शुरू की.रंभा को पता ही ना चला & अपने आप उसकी जंघे हवा मे उठ गयी.विजयंत ने उन्हे अपने हाथो मे समेटा & टाँगे फैलाते हुए अपनी बहू के उपर झुक गया.

वो धक्के लगाए जा रहा था & मस्ती मे डूबी रंभा आहे भरे जा रही थी.उसकी कमर उसके ससुर के हर धक्के का जवाब दे रही थी.तभी विजयंत को अपने उपर से काबू हटता महसूस हुआ.रंभा चीख रही थी & 1 बार फिर जिस्म को कमान की तरफ उपर मोदते,सर को पीछे झटकते,बिस्तर की चादर को नोचते झाड़ रही थी & उसकी चूत झाड़ते वक़्त सिकुड-फैल रही थी.

विजयंत ने अपनी ज़िंदगी मे ना जाने कितनी लड़कियो को चोदा था मगर झाड़ते वक़्त ऐसी मस्त हरकत उसने कभी महसूस नही की थी.उसका लंड उस अनूठे एहसास की खुमारी मे खोता अपना रस उगल ही देता लेकिन उस लंड के मालिक ने अपने पे किसी तरह काबू कर ही लिया.

"आईईईईईययययईई......!",रंभा बहुत ज़ोर से चीखी.उसकी चूत की मस्तानी हरकत से आहत हो विजयंत ने ज़ोर का धक्का मारा था & लंड जड़ तक उसकी चूत मे समाता उसकी कोख से जा टकराया था.रंभा के चेहरे पे दर्द की लकीरें खिंच गयी & वो च्चटपटाने लगी.विजयंत झुक के उसके चेहरे को चूमने लगा & चुदाई रोक दी.रंभा छटपटाती रही.विजयंत के होंठ उसके होंठो के करीब आते तो वो अपने होंठ पीछे खींच लेती क्यूकी वो जानती थी कि 1 बार दोनो के लब टकराए तो वो सारी आन भूल के अपने ससुर को चूमती हुई उस से लिपट जाएगी.

कुच्छ देर बाद उसका दर्द ख़त्म हो गया तो विजयंत ने दोबारा चुदाई शुरू की.रंभा का जिस्म हर धक्के पे मज़े से कांप उठता क्यूकी लंड सीधा उसकी कोख पे चोट करता.ऐसा अनूठा मज़ा उसे आज तक नही आया था.वो बस आहें भरे जा रही थी.उसकी मदहोशी का कोई हिसाब नही था लेकिन अभी भी वो अपने ससुर को अपने होंठो का स्वाद चखने नही दे रही थी.

विजयंत उसके गाल से होठ पे पहुँचता तो वो मुँह फेर लेती.विजयंत ने उसकी चूचियो का रुख़ किया & उन्हे चूस्ते हुए अपनी बहू को चोदने लगा.रंभा ने अपनी टाँगे उसकी कमर पे लपेट दी थी लेकिन आपने हाथ अपने सर के दोनो तरफ बिस्तर की चादर पे ही लगाए रखे थे.

विजयंत अब उसकी चूचियो से उठा के अपने हाथ बिस्तर पे जमा के धक्के लगा रहा था.रंभा भी तेज़ी से कमर उचका रही थी.विजयंत भी उसकी कसी चूत के जलवे से आहत हो आहें भर रहा था.अचानक रंभा जिस्म को कमान की तरह मोदते चीखने लगी,उसकी कमर भी बुरी तरह उचक रही थी.रंभा ने झड़ने की शिद्दत इतनी इंतेहा के साथ कभी महसूस नही की थी & वो मदहोशी मे डूबी हुई बस चीखे जा रही थी.

विजयंत भी अब बहुत तेज़ी से धक्के लगा रहा था & झड़ती रंभा की चूत ने जैसे ही सिकुड़ना-फैलना शुरू किया उसके लंड ने देर से अण्दो मे उबाल रहा गर्म वीर्य उसकी चूत मे उदेलना शुरू कर दिया.विजयंत का जिस्म झटके खा रहा था & वो आहें भर रहा था.उसे ऐसा महसूस हो रहा था मानो रंभा की चूत उसके लंड को पकड़ उसके वीर्य को निचोड़-2 के निकाल रही हो.वही रंभा ने उसके वीर्य को सीधा अपनी कोख मे गिरते महसूस किया & उसके झड़ने की मस्ती दुगुनी हो गयी.

विजयंत का लंड रस बहाते ही चला जा रहा था & रंभा झाडे चले जा रही थी.

"आन्न्‍न्णनह..!",वो चीखी & बिस्तर से उठते हुए उसने ससुर के मज़बूत उपरी बाजुओ मे अपने नाख़ून धंसा दिए.

"आहह..!",नखुनो के धँसने से हल्का सा खून निकला & विजयंत कराहा & उसने 1-2 धक्के और लगा दिए & 1 बार फिर उसके लंड से वीर्य छूटने लगा.वो इतनी देर तक पहले कभी नही झाड़ा था.

रंभा झड़ने की शिद्दत से आहत हो या फिर अपनी आन की वजह से अपने ससुर का पूरे जोश के साथ साथ ना देने की मजबूरी,उसकी आँखे छलक गयी & वो रोने लगी & झाड़ के उसके उपर पड़े हान्फ्ते विजयंत को उसने खुद से अलग किया & सुबक्ती हुई बिस्तर से उतर गयी.

"इन आँसुओ की वजह क्या है?",बाथरूम की ओर जाती रंभा का रास्ता बिस्तर से उतर के विजयंत मेहरा ने रोक लिया था,"..ये कि मैने तुम्हारी मजबूरी का फ़ायदा उठाया या ये कि तुम्हारी आन ने तुम्हे खुल के हम दोनो की चुदाई का मज़ा नही लेने दिया!",रंभा की रुलाई रुक गयी & उसने हैरत से विजयंत को देखा..क्या उसने उसका मन पढ़ लिया था?

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क्रमशः.......

JAAL paart--26

gataank se aage.

vijayant ne ab danthal thami & gulab ke phool ko uske baalo se dhanke chehre pe firaya & fir neeche le aaya.gulab ne uski bayi chhati ki golai ke gird 1 dayra banaya & fir dono chhatiyo ke beech pahuncha & yehi harkat dayi chhati ke sath dohrayi.usne phool ki pankhudiyo se uske nipples ko chheda to vo sihar uthi.rambha aankhe band kar bas masti me ud rahi thi.phool uski choochiyo ko chumne ke baad

neeche uske p[et pe aaya & uski nabhi ke gird ghune laga.nabhi ke chhed ko bhi vijayant ne pankhudiyo se chheda.rambha fir se chhatpatane lagi thi.

phool neeche aaya & uski chut se sat gaya,"tumhari chut ki pankhudiyo ki nazakat,inki komalta ke aage is gulab ka husn bhi pheeka hai.mujhe to darr hai ki kahi tumhare is khubsurat ang se rashk kar ye bechara murjha na jaye!",vijayant ne gulab ko bistar pe fenk diya & rambha ke daye pair ke paas ghutno pe baith gaya.aise shayrana andaz me rambha ki tarif kisi ne nahi ki thi.uska dil use dhikkar raha tha ki vo aise aashiq ka istekbal nahi kar rahi & na hi apni aaho ke zariye uska shukriya ada kar rahi hai!

usne balo ki ladiyo ke paar dekha to use vijayant gutno pe baitha nazar aaya.usne uske daye panv ko uthake hotho se aise lagay jaise vo husn ki devi ho & uska sasur uski ibadat kar raha ho.usne dono hotho ko munh ke nadar khinch apni aah ko roka.vijayant uske daye pair ki sabse chhoti ungli ko chus raha tha.jab tak vo anguthe tak pahuncha,rambha madhoshi me bistar pe daye-baye sar jhatak rahi thi.

vijayant uske pairo ki ungliyo ki puja karne ke baad uski makhmali tang ke 1-1 hisse ko apne hotho se chumta upar uski moti jangh tak aaya.rambha ki bhari jangh ki kaswat use bahut bhayi & usne vaha keval chuma hi nahi balki chus-2 ke apne hotho ke nishan unpe chhod diye.rambha apne sar ke dono taraf ki chadar ko bechaini se khinchte aahe bharte kamar uchka rahi thi.use bas iontezar tha apne sasur ke hotho ka apni chut se lagne ka.

vijayant uski bayi jangh ko uthaye apni dadhi uspe ragad uske jism ki bechaini ko & badha raha tha.usne uski jangh & kamar ke jod pe chuma & fir uski bayi jangh ko utha liya.uski dadhi ne vaha bhi use chheda & uske hotho ne vaha bhi apne dastkhat kiye & fir neeche aa fir se ghutno pe baith vo uske baye pairo ki ungliyo ko pujne laga.rambha bechaini se kamar uchka rahi thi & janghe bhinch rahi thi.usne bechain ho apni chhatiyo ko aap hi dabaya to vijayant ko dhyan aaya ki husn ke devi ke un bala ke khubsurat ango ki ibadat to usne ki hi nahi!

vo uske dayi taraf bayi karwat pe leta & daya hath uske pet pe rakh sehlate hue apne naak & hotho se uske baalo ki ladiyo ko hata uske komal chehre & gulabi hotho ko chumne laga.rambha ki bhi tarif thi ki tini masti,aise romani garm, mahaul ke bavjud usne abhi tak 1 baar bhi khud apni zuban na to vijayant ke munh me ghusai thi na hi apne hath uske jism pe laga use is baat ka ehsas dilaya tha ki vo uski harkato se masti me bawli ho gayi hai.ye dusri baat thi ki koi andha bhi bata deta ki rambha josh ke satve aasman me ud rahi thi.

vijayant ne apni dadhi uske seene pe ragdi & uski nabhi ko kureda to rambha ne chadar bhinchte hue aah bhari & kamar uchkai & jaise hi uski bayi choochi ke nipple ko jibh se chaatate hue uske sasur ne use munh me bhara & uski nabhi kuredi vo 1 baar aur jhad gayi.vijayant ne apne dono hath apni bahu ki choochiyo pe laga diye.uski chhatiya dekh mard pagal ho jate the & kayi baar itne badhawas ki rambha ko taklif hone lagti thi.

vijayant ko bhi jaisa josh aaj ki raat chadha tha vaisa puri zindagi nahi chadha tha lekin fir bhi rambha ne uske chumne me vo badhawasi nahi mehsus ki.vo janti thi ki uska sasur uske husn ko dekh josh se pagal ho gaya hai lekin fir bhi uski garmjoshi se bhari zuban & aatur hath use taklif nahi pahuncha rahe the balki jo maza use abhi aa raha tha aisa use na hi apne kisi premi & na hi pati ke sath aaya tha.

pata nahi kitni der tak vo uski chhatiyo ke mastane ubharo se khelta raha & vo madhosh hoti rahi.apne hatho ko apne sasur ke baalo ko bhinchne,uske gathile badan ko apne agosh me bharne se usne apni aan se majbur ho kaise roka tha ye vohi janti thi.

vijayant ne uske seene se sar uthaya to rambha ne use adhkhuli,nashe se bojhal palko se dekha.vo uski janghe faila ke unke beech let raha tha.usne aankhe band ki & 1 baar fir apni chhatiya dabane lagi.vijayant ne uski chut me jibh firayi to usne kamar uchkayi.vijayant ne uski jangho me banh fansa ke uske pet ko dabate hue uski chut chaatna shuru kiya & vo apni chhatiya dabate hue aahe bharne lagi.uski kamar khud ba khud uchke ja rahi thi.

vijayant uske dane ko chat raha tha &vo masti me ud rahi thi.usne apne hath aage badha uski choochiyo pe rakhe to rambha ne apne hath vahse khicnh liye & 1 baar fir bistar ki chadar ki salwato me izafa karne lagi.

vijayant ki jibh ne bahut jald hi use jhadwa diya lekin uski chut se lag nahi hui.chut se ras bahe ja raha tha & uska sasur use chate ja raha tha.1 muddat ke baad use 1 baar & jhadwane ke baad vijayant ne apna chehra uski god se laga kiya & uski tange faila unke beech khada ho gaya.rambha ne adhkhuli ankho se use underwear utarte dekha & jab uska lund bahar aaya to uski aankhe hairat se phail gayi.

Itna bada lund!..Rambha ne aisa lund keval nangi filmo me dekha tha & use humesha yehi lagta tha ki vo filme bananevale koi karastani karte honge varna asla zindagi me vaisa lumba lund hona namumkin hai..lekinaaj use pata chal raha tha ki vo galat thi.Vijayant uski faili jangho ke beech ghutno pe baith gaya..lund 9 inch se lumba lagta hai..vo nazro se uske lund ko naap rahi thi & motai to 2.5 inch se bhi zyada lagti hai.

vijayant ne foreskin peechhe ki to uske 9.5inch ki gore lund ka gulabi supada precum se chamakta samne aa gaya..jhante saaf kar rakhi hai isne.uff!..rambha ne aankhe band kar li.uske sasur ne yaha aane se pehle apne hotel ke kamre me apni jhante saaf ki thi kyuki apni khubsurat bahu ko chodte waqt vo beech me zara si bhi rukawat nahi chahta tha.

"uunnhhhhh..!",usne apne nichle honth ko dant se kata & chadar pe bechaini se hath chalaye.vijayant apna lund uski chut ki darar pe fira raha tha.rambha ki kamar ab uske kabu me nahi thi & apne aap uchakne lagi thi mano uski chut khud hi lund ko andar lena chahti ho.vijayant chut ki darar pe lund ko chala use pagal kar rahe tha & ubhre hue uske dane ko apne supade se chhed raha tha.rambha ne apne sar ke bagal me dono taraf ki chadar ko hatho me bhar ke nocha & zor se kamar uchkayi & apna sar peechhe fenkte hue jism kaman ki tarah moda.vo lund ki harkato se jhad gayi thi.

vo kamar uchkate hue jhad hi rahi thi ki vijayant ne supade ko chut me dhakel diya.kuchh uske dhakke kuchh uski chut ne hi uchak ke uske supade ko andar le liya.rambha ke mathe pe shikan pad gayi & usne dard ke ehsas se aankhe meench li.uski chut ko vijayant ka lund buri tarah faila raha tha.vo bechaini se bistar ki chadar ko pakde hue thi.uski aan abhi bhi use apne sasur ko uski garm harkato se paida hui masti ke izhar se rok rahi thi.

vijayant ne uski chut ke gilepan ka fayda utha ke lund 7 inch tak andar ghusa diya.vo bhi uski chut ki kasawat se aahat hua tha & zindagi me pehli baar use laga tha ki vo bina ladki ko jhadwaye khud pehle jhad jayega.rambha ko ab dard nahi ho raha tha.vijayant ne ghutne pe baithe-2 hi uski chudai shuru ki.rambha ko pata hi na chala & apne aap uski janghe hawa me uth gayi.vijayant ne unhe apne hatho me sameta & tange failate hue apni bahu ke upar jhuk gaya.

vo dhakke lagaye ja raha tha & masti me doobi rambha aahe bhare ja rahi thi.uski kamar uske sasur ke har dhakke ka jawab de rahi thi.tabhi vijayant ko apne upar se kabu hatata mehsus hua.rambha chikh rahi thi & 1 baar fir jism ko kaman ki taraf upar modte,sar ko peechhe jhatakte,bistar ki chadar ko nochte jhad rahi thi & uski chut jhadte waqt sikud-fail rahi thi.

vijayant ne apni zindagi me na jane kitni ladkiyo ko choda tha magar jhadte waqt aisi mast harkat usne kabhi mehsus nahi ki thi.uska lund us anuthe ehsas ki khumari me khota apna ras ugal hi deta lekin us lund ke malik ne apne pe kisi tarah kabu kar hi liya.

"AAIIIIIYYYYEEEEEEE......!",rambha bahut zor se chjikhi.uski chut ki mastani harkat se aahat ho vijayant ne zor ka dhakka mara tha & lund jad tak uski chut me samata uski kokh se ja takraya tha.rambha ke chehre pe dard ki lakeeren khinch gayi & vo chhatpatane lagi.vijayant jhuk ke uske chere ko chumne laga & chudai rok di.rambha chhatapati rahi.vijayant ke honth uske hontho ke karib aate to vo apne honth peechhe khinch leti kyuki vo janti thi ki 1 baar dono ke lab takraye to vo sari aan bhul ke apne sasur ko chumti hui us se lipat jayegi.

kuchh der baad uska dard khatm ho gaya to vijayant ne dobara chudai shuru ki.rambha ka jism har dhakke pe maze se kanp uthata kyuki lund seedha uski kokh pe chot karta.aisa anutha maza use aaj tak nahi aaya tha.vo bas aahen bhare ja rahi thi.uski madhoshi ka koi hisab nahi tha lekin abhi bhi vo apne sasur ko apne hontho ka swad chakhne nahi de rahi thi.

vijayant uske gaal se hoth pe pahunchta to vo munh fer leti.vijayant ne uski chhatiyo ka rukh kiya & unhe chuste hue apni bahu ko chodne laga.rambha ne apni tange uski kamar pe lapet di thi lekin aapne hath apne sar ke dono taraf bistar ki chadar pe hi lagaye rakhe the.

vijayant ab uski chhatiyo se uth ke apne hath bistar pe jama ke dhakke laga raha tha.rambha bhi tezi se kamar uchka rahi thi.vijayant bhi uski kasi chut ke jalwe se aahat ho aahen bhar raha tha.achanak rambha jism ko kaman ki tarah modte chikhne lagi,uski kamar bhi buri tarah uchak rahi thi.rambha ne jhadne ki shiddat itni inteha ke sath kabhi mehsus nahi ki thi & vo madhoshi me dubi hui bas chikhe ja rahi thi.

vijayant bhi ab bahut tezi se dhakke laga raha tha & jhadti rambha ki chut ne jaise hi sikudna-failna shuru kiya uske lund ne der se ando me ubal raha garm virya uski chut me udelna shuru kar diya.vijayant ka jism jhatke kha raha tha & vo aahen bhar raha tha.use aisa mehsus ho raha tha mano rambha ki chut uske lund ko pakad uske virya ko nichod-2 ke nikal rahi ho.vahi rambha ne uske virya ko seedha apni kokh me girte mehsus kiya & uske jahdne ki masti duguni ho gayi.

vijayant ka lund ras bahate hi chala ja raha tha & rambha jhade chale ja rahi thi.

"AANNNNNHHHHH..!",vo chikhi & bistar se uthate hue usne sasur ke mazbut upri bazuo me apne nakhun dhansa diye.

"aahhhhh..!",nakhuno ke dhansne se halka sa khoon nikla & vijayant karaha & usne 1-2 dhakke aur laga diye & 1 baar fir uske lund se virya chhutne laga.vo itni der tak pehle kabhi nahi jhada tha.

rambha jhadne ki shiddat se aahat ho ya fir apni aan ki vajah se apne sasur ka pure josh ke sath sath na dene ki majburi,uski aankhe chhalak gayi & vo rone lagi & jhad ke uske upar pade hanfte vijayant ko usne khud se alag kiya & subakti hui bistar se utar gayi.

"In aansuo ki vajah kya hai?",bathroom ki or jati Rambha ka rasta bistar se utar ke Vijayant Mehra ne rok liya tha,"..ye ki maine tumhari majburi ka fayda uthaya ya ye ki tumhari aan ne tumhe khul ke hum dono ki chudai ka maza nahi lene diya!",rambha ki rulai ruk gayi & usne hairat se vijayant ko dekha..kya usne uska man padh liya tha?

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 14 Dec 2014 06:05

जाल पार्ट--27

गतान्क से आगे.

"रंभा,जब मैने तुम्हे पहली बार देखा तभी से तुम्हे पाने की ख्वाहिश मेरे दिल मे पैदा हो गयी थी लेकिन फिर तुमने समीर से शादी कर ली & मुझे लगा कि मेरी ये ख्वाहिश अब कभी हक़ीक़त नही बनेगी,लेकिन तक़दीर का खेल देखो कि समीर की गुमशुदगी ने मुझे ये मौका दे दिया.",रंभा अभी भी हैरत से उसे देखे जा रही थी.

"..तुम सोच रही होगी कि मैं कैसा नीच हू जोकि बेटे के मुसीबत मे होने के वक़्त भी अपनी हवस पूरी करने की सोच रहा है.पर मैं क्या करू?तुम इतनी हसीन हो & मैं हू ही ऐसा!"

"..रंभा,मैं 1 कारोबारी हू & मेरा उसूल है कि नुकसान से भी कुच्छ फ़ायदा तो निकाल ही लेना चाहिए.बस इसी लिए मैने तुमसे आज सवेरे अपनी पेशकश की जिसे तुमने मान लिया.चाहती तो तुम अपने कार्ड्स मेरे मुँह पे मार चली जाती.ऐसा तो नही कि तुम्हारे खुद के पैसे नही हैं लेकिन समीर के पैसे छ्चोड़ने तुम्हे मंज़ूर नही था.तुम भी तो मेरे जैसे ही,1 कारोबारी के जैसे ही सोच रही थी.पर ये मत समझो कि मैं तुम्हारी खिल्ली उड़ा रहा हू.नही,बल्कि मुझे ये बात पसंद आई है.तुम बहुत तरक्की करोगी.."

"रंभा,दूसरी बात जो तुम्हारी मुझे अच्छी लगी वो है तुम्हारी आन,तुम्हारा आत्म-सम्मान.तुम्हारा जिस्म मेरे साथ मज़े ले रहा था लेकिन तुमने 1 बार भी उसका इज़हार नही किया.मैं तुम्हारे इस जज़्बे की कद्र करता हू & माफी माँगता हू कि मेरी वजह से ये मोटी छल्के..",उसने उसके आँसुओ से भीगे गाल अपने हाथो से पोन्छे,"..मेरी तो यही तमन्ना रहेगी की तुम्हारे साथ ये जो रिश्ता अभी जुड़ा है उसे मैं मरते दम तक कायम रखू लेकिन अब इसका फ़ैसला तुमपे छ्चोड़ता हू.अगर तुम भी इस रिश्ते को बरकरार रखना चाहती तो ठीक है नही तो अब मैं तुम्हे हाथ नही लगाउन्गा.",& वो उसके रास्ते से हट गया.रंभा बाथरूम मे चली गयी.

उसने देखा की उसके ससुर का वीर्य उसकी चूत से निकल के उसकी जाँघो पे बह रहा था.आज तक उसकी चूत को किसी मर्द ने ऐसे नही भरा था.उसने चूत को धो के साफ किया & फिर वॉशबेसिन पे मुँह धोने लगी..उसका ससुर तो उसे किसी किताब की तरह पढ़ ले रहा था..& चुदाई भी ऐसी कमाल की की थी कि उसका रोम-2 खुशी से भर उठा था..लेकिन उसने उसे मजबूर किया था..उसके तो दिमाग़ मे ये ख़याल कभी आया ही नही था..झूठ!..गुजरात मे गेस्ट हाउस के बाथरूम मे उसने उसी को सोच के अपनी चूत पे उंगली फिराई थी & बाद मे भी 1-2 बार वो उसके शरीर ख़यालो का हिस्सा बना था..तो क्या उसे अपने ससुर का हाथ थाम लेना चाहिए..हां क्यू नही!..लेकिन उसकी सास,ननद..

वो इन्ही ख़यालो मे डूबी थी की उसके ज़हन मे बिजली सी कौंधी..विजयंत ने माना था कि उसने उसकी मजबूरी का फ़ायदा उठाने के लिए कार्ड्स ब्लॉक करवाए थे तो कही उसके जिस्म की हवस मे अँधा होकर उसी ने तो समीर को गायब नही करवाया?..हां ये मुमकिन है..अब तो ससुर जी से रिश्ता कायम रखना ही होगा!

बाथरूम से बाहर निकली तो देखा की विजयंत 2 खाने की तालिया लेके बैठा है.जब वो घर मे दाखिल हुआ था तो उसके हाथ मे जो पॅकेट था उसमे खाना ही था.रंभा की तो सवेरे की ससुर से मुलाकात के बाद भूख ही मर गयी थी लेकिन अब उसकी कारस्तानियो के बाद उसकी भूख जाग गयी थी.विजयंत ने उसे उसकी थाली थमायी & दोनो खामोशी से खाना खाने लगे.खाना ख़त्म होने पे रंभा ने ससुर के हाथ से थाली ली & झूठे बर्तन रसोई मे रखने चली गयी.

जब वो कमरे मे लौटी तो देखा की विजयंत ने वाहा बाकी बत्तियाँ बुझा के सिर्फ़ 1 मद्धम रोशनी वाला लॅंप जला रखा है & वो पलंग के हेआडबोर्ड से टेक लगाके टाँगे फैलाए,कमर तक चादर डाले बैठा है.रंभा अपने बाल ठीक करती धीरे-2 बिस्तर तक आई & उसके दाई तरफ बैठ गयी.विजयंत की बाँह पे उसके नखुनो की खरोन्चे दिख रही थी.उसने उसपे उंगलिया फिराई & फिर 2 पलो के बाद झुक के बहुत हल्के से चूम लिया.

विजयंत समझ गया कि रंभा को उन दोनो का ये रिश्ता मंज़ूर था & उसने उसे दाई बाँह के घेरे मे ले लिया.रंभा ने भी चादर मे घुसते हुए बाया हाथ उसके सीने पे रखा & अपनी छातियाँ उसकी बगल मे दबाते हुए उसके कंधे पे सर रख उसके पहलू मे आ गयी.उसका ससुर उसकी गुदाज़ दाई बाँह को प्यार से सहला रहा था.विजयंत के चौड़े सीने के घने बालो मे उंगलिया फिराना रंभा को बहुत भला लग रहा था.कितनी देर से उसने खुद को ऐसा करने से रोका था मगर अब नही,अब तो वो जितनी मर्ज़ी उतनी देर तक इस मज़बूत जिस्म से खेल सकती थी.

"समीर के साथ क्या हुआ है?..आपको क्या लगता है?",रंभा के दाए हाथ की उंगली ससुर के सीने से उसकी दाढ़ी पे आ गयी थी.उसने विजयंत की ठुड्डी चूमि & फिर उसके होंठो पे उंगली फिराई.विजयंत उसकी कलाई थामे था.उसने पहले उसकी उंगली को चूमा & उसे खुद से थोड़ा & चिपका लिया.रंभा ने भी दाई टांग उठा के ससुर की टांगो पे चढ़ा दी.

"कुच्छ समझ नही आता..",विजयंत के चेहरे पे चिंता नज़र आ रही थी,"..कोई हादसा हुआ होता तो उसकी कार मिलती या फिर..",उसके जैसा मज़बूत दिल वाला शख्स भी बेटे की मौत के बारे मे बोलने से घबरा रहा था,"..& ऐसी दुश्मनी भी नही किसी से कि कोई उसे नुकसान पहुँचाए.",रंभा गौर से उसे देख रही थी....या तो ये आदमी झूठ बोलने मे माहिर है या ये बिल्कुल सच्चा है.

"तो अब क्या करेंगे?",उसका हाथ वापस ससुर के सीने पे फिसलने लगा था & अब धीरे-2 नीचे बढ़ रहा था.उसने अपनी मुलायम तंग से विजयंत की टाँगो के उपर धीरे-2 सहलाना शुरू कर दिया था.उसने नीचे देखा तो चादर मे तंबू बन गया था.उसने चादर को हटा के नीचे फेंक दिया & सामने ताज़ा सॉफ की गयी झांतो की वजह से & लंबा दिखता विजयंत का लंड देख उसकी आँखे चमक उठी.

"सोचा है मैने कुच्छ..उउम्म्म्म..",उसकी बहू उसके सीने को चूम रही थी & चूमते हुए उसके पेट के बिल्कुल निचले हिस्से पे जहा बाल ख़त्म हो रहे थे वाहा पे सहला रही थी.रंभा को अपनी टाँगो पे विजयंत की टाँगो के बालो की छुअन मस्त कर रही थी.उसने अपने होंठो मे उसका बाया निपल लिया & चूस लिया.उसके ससुर ने आह भरते हुए उसके बालो मे उंगलिया फिरा दी.रंभा ने दूसरे निपल को भी थोड़ी देर चूसा & उसके बाद चूमते हुए नीचे जाने लगी,"..लेकिन उस से पहले कल सुबह हम डेवाले जाएँगे."

रंभा अब उसके पहलू से निकल उसकी टाँगो को फैला के उसके लंड को देख रही थी.इतना बड़ा,इतना तगड़ा लंड देख के ही उसे मस्ती चढ़ने लगी थी.उसने लंड के नीचे लटक रहे गोल्फ बॉल जैसे आंडो को थपथपाया..कितने दिनो से वो किसी मर्दाने अंग से इस तरह नही खेली थी.आज वो जी भर के खेलेगी अपने ससुर के लंड से!

उसने लंड को हाथ मे पकड़ा.वो इतना मोटा था कि उसकी मुट्ठी के घेरे मे नही आ रहा था सो उसने दूसरा हाथ भी उसपे कस दिया.अभी भी लंड का काफ़ी बड़ा हिस्सा उसके छ्होटे-2 हाथो की पकड़ के बाहर था.लंड की गर्मी ने उसके जिस्म की तपिश भी बढ़ा दी थी.वो झुकी & गुलाबी सूपदे पे पहली बार अपने होंठो की मोहर लगाई.विजयंत ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली.

रंभा उसके लंड को हिलाते हुए सूपदे को चूस रही थी.कुच्छ देर चूसने के बाद उसने सूपदे को मुँह से निकाला & उसपे जीभ फिराई & फिर लंड को पकड़ उसे अपने दोनो गालो & होंठो पे फिराने लगी.उसने नाक लंड & आंडो के बीच की जगह पे दबाते हुए उसके 1 अंडे को मुँह मे भर के चूसा तो विजयंत अपनी कमर उचकाते हुए सीधा बैठ गया & उसके सर को थाम लिया.

रंभा उसकी मस्ती से बेपरवाह उसके दूसरे अंडे को चूस रही थी कि उसकी नज़र पास पड़े गुलाब के फूल पे पड़ी.उसके ससुर ने उस गुलाब से ही उसे पागल कर दिया था.अब उसकी बारी थी.उसने लंड को छ्चोड़ दिया & गुलाब को हाथ मे ले उसे सुपादे पे रखा.गुलाब की बड़ी सी पंखुड़ी से जब उसने विजयंत के लंड के छेद को छेड़ा तो विजयंत ने आँखे बंद करते हुए ज़ोर से आह भारी.सूपदे की नाज़ुक स्किन पे फिसलती पंखुड़ी 1 अजीब सा मज़ा उसके जिस्म मे भर रही थी.

रंभा ने गुलाब को नीचे सरकाते हुए उसके लंड को फूल से सहलाया & फिर उसके आंडो पे उसी फूल से हल्के से मारा & ससुर को देख मुस्कुराइ.विजयंत ने उसे उपर खींचा & बाहो मे भरते हुए उसके होंठो से अपने होंठ सटा दिए.जब तक वो अपनी ज़ुबान आगे करता,रंभा की ज़ुबान उसके मुँह मे दाखिल हो चुकी थी.वो उसकी मांसल कमर को दबाते हुए उसकी किस का लुत्फ़ उठा रहा था.रंभा उसके चेहरे को पकड़े उसे शिद्दत से चूमे जा रही थी.काफ़ी देर तक दोनो उस मस्तानी किस का लुत्फ़ उठाते रहे,तब तक जब ताकि सांस लेने के लिए उन्हे अलग ना होना पड़ा.

रंभा लंबी-2 साँसे लेती अपने सीने के उभारो को ससुर के मुँह से सटाने लगी.विजयंत ने उसकी गंद की फांको को दबोचा & उसकी चूचियों को चूसने लगा.जब उनके बीच की वादी मे अपना मुँह घुसा के अपनी नाक उसने रगडी तो रंभा ने मस्ती & खुशी से मुस्कुराते हुए आह भरी & अपना सर पीछे झटका.उसके ससुर ने चूत को च्छुआ भी नही था & वो बुरी तरह से कसमसाते हुए रस बहाने लगी थी.

रंभा ने अपनी छातियाँ विजयंत के मुँह से खींची & पीछे हो अपने दोनो घुटने उसकी कमर के दोनो ओर जमाए & चूत को लंड पे झुकाने लगी.उसने बाया हाथ पीछे ले जाके लंड को थामा & फिर चूत को झुका के उसके मत्थे पे रखा & बैठने लगी.उसकी आँखे बंद हो गयी & चेहरा पे बस जोश दिखने लगा.इस पोज़िशन मे लंड 7-8 इंच तक अंदर घुस गया था & उसकी चूत को पूरा भर दिया था.

रंभा उसके सीने पे हाथ जमाए उसे मस्ती भरी निगाहो से देखती कूदने लगी.1 बार फिर चुदाई शुरू हो गयी थी & इस बार दोनो प्रेमी बिना किसी उलझन के उसका लुत्फ़ उठा रहे थे.विजयंत के बड़े हाथ रंभा के पूरे जिस्म पे घूम रहे थे.जब वो उसकी गंद के उभारो को नही दबा रहे होते तो वो उसकी चूचियो की गोलाई नाप रहे होते.उसकी चूचियो को भींचते हुए विजयंत ने अपने दोनो हाथो को उनके बीच की वादी से नीचे किया & उसके पेट को सहलाया.

विजयंत ने बगल मे पड़ा फूल उठाया & इस बार उसकी डंठल को सीधा रंभा के दाने पे लगा दिया.

"आननह....!",रंभा के चेहरे पे मस्तानी शिकाने पड़ गयी & वो मुस्कुराते हुए पीछे हो गयी ताकि उसकी चूत & उसका दाना उसके ससुर को आसानी से दिखें.उसने अपने हाथ विजयंत के पेड़ के तने सरीखी टाँगो पे टिकाए & कमर हिलाने लगी.विजयंत उसकी नज़र से नज़रे मिलाता हुआ उसके दाने पे डंठल रगड़ता रहा.

रंभा की आँखे अब नशे के बोझ तले आधी ही खुली रह पा रही थी.विजयंत की ये हरकत उसे मदहोशी के आलम मे ले गयी थी & अब वो उसे देख चूमने का इशारा करती हुई उसकी जाँघ पे हाथ टिकाए बहुत ज़ोर से कमर हिला रही थी.तभी उसकी चूत ने वही हरकते शुरू कर दी जो वो झड़ने के वक़्त करती थी & विजयंत के चेहरे पे भी उसकी बहू की तरह मस्ती भरी शिकन पड़ गयी & वो आहे भरने लगा लेकिन उसने दाने पे डंठल की रगड़ को नही रोका.

"आन्न्न्नह..डॅड.....!",रंभा झड़ी & उसे अब डंठल की रगड़ नकबीले. बर्दाश्त लगी.उसने फूल को पकड़ के किनारे फेंका & अपने ससुर के उपर झुक गयी.अपनी भारी-भरकम चूचिया उसके बालो भरे सीने पे दबाते हुए वो आहे भरती सुबक्ती हुई उसे दीवानो की तरह चूमने लगी.विजयंत ने उसे बाहो मे भर लिया & उसकी किस का जवाब देता रहा.

जब रंभा थोड़ा संभली तो विजयंत ने उसे बाहो मे भरे-2 पलटा & अपने नीचे कर लिया.रंभा ने सरसुर के बालो मे उंगलिया फिराते हुए उसके सर को थाम लिया & उसकी दाढ़ी पे अपने गाल रगड़ने लगी.

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1 कार रंभा & समीर के बंगल के बाहर खड़ी थी.उसमे 1 शख्स बैठा उपरी मंज़िल की ओर देख रहा था.वो काफ़ी देर से उस बुंगले पे नज़र रखे था.उसने विजयंत को आते देखा था लेकिन अभी उसकी समझ मे ये नही आ रहा था कि उपर अभी कौन जगा था.पहले निचली मंज़िल & उपरी मंज़िल पे बत्तिया जल रही थी लेकिन अभी कुच्छ देर पहले सारे घर की बत्तिया किसी ने बुझाई मगर उपर के कमरे मे तेज़ रोशनी बंद कर मद्धम रोशनी कर दी गयी थी.

उस शख्स ने 1 सिगरेट सुलआगाई. & लाइटर की रोशनी मे उसका चेहरा दिखा जिसपे बाए गाल पे 1 निशान था,लगभग 2 इंच बड़ा.निशान किसी बड़ी पुरानी चोट का लगता था.वो आदमी लगभग 50-55 बरस का होगा & उसके बॉल डाइड थे.सिगरेट पीते हुए वो सोच रहा था..इतनी मुश्किल से उसे इस लड़की का पता मिला था.उसने सोचा था कि अब तलाश ख़त्म हुई & वो उस से बात कर लेगा लेकिन यहा तो और ही कहानी चल रही थी.अब पता नही कब उसका पति मिलेगा & कब वो उस से बात कर पाएगा!..उसने सिगरेट को खिड़की से बाहर फूटपाथ पे फेंका & पॅकेट से दूसरी निकाल के सुलगाई.

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क्रमशः.......

JAAL paart--27

gataank se aage.

"rambha,jab maine tumhe pehli baar dekha tabhi se tumhe pane ki khwahish mere dil me paida ho gayi thi lekin fir tumne Sameer se shadi kar li & mujhe laga ki meri ye khwahish ab kabhi haqeeqat nahi banegi,lekin taqdeer ka khel dekho ki sameer ki gumshudgi ne mujhe ye mauka de diya.",rambha abhi bhi hairat se use dekhe ja rahi thi.

"..tum soch rahi hogi ki main kaisa neech hu joki bete ke musibat me hone ke waqt bhi apni hawas puri karne ki soch raha hai.par main kya karu?tum itni haseen ho & main hu hi aisa!"

"..rambha,main 1 karobari hu & mera usul hai ki nuksan se bhi kuchh fayda to nikal hi lena chahiye.bas isi liye maine tumse aaj savere apni peshkash ki jise tumne maan liya.chahti to tum apne cards mere munh pe maar chali jati.aisa to nahi ki tumahre khud ke paise nahi hain lekin sameer ke paise chhodne tumhe manzur nahi tha.tum bhi to mere jaise hi,1 karobari ke jaise hi soch rahi thi.par ye mat samjho ki main tumhari khilli uda raha hu.nahi,balki mujhe ye baat pasand aayi hai.tum bahut tarakki karogi.."

"rambha,dusri baat jo tumhari mujhe achhi lagi vo hai tumhari aan,tumhara atma-samman.tumhara jism mere sath maze le raha tha lekin tumne 1 baar bhi uska izhar nahi kiya.main tumhare is jazbe ki kar karta hu & mafi mangta hu ki meri vajah se ye moti chhalke..",usne uske ansuo se bhige gaal apne hatho se ponchhe,"..meri to yehi tamnanna rahegi ki tumhare sath ye jo rishta abhi juda hai use main marte dum tak kayam rakhu lekin ab iska faisla tumpe chhodta hu.agar tum bhi is rishte ko barkarar rakhna chahti to thik hai nahi to ab main tumhe hath nahi lagaunga.",& vo uske raste se hat gaya.rambha bathroom me chali gayi.

usne dekha ki uske sasur ka virya uski chut se nikal ke uski jangho pe beh raha tha.aaj tak uski chut ko kisi mard ne aise nahi bhara tha.usne chut ko dho ke saaf kiya & fir washbasin pe munh dhone lagi..uska sasur to use kisi kitab ki tarah padh le raha tha..& chudai bhi aisi kamal ki ki thi ki uska rom-2 khushi se bhar utha tha..lekin usne use majbur kiya tha..uske to dimagh me ye khayal kabhi aaya hi nahi tha..jhuth!..Gujarat me guest house ke bathroom me usne usi ko soch ke apni chut pe ungli firayi thi & baad me bhi 1-2 baar vo uske sharir khayalo ka hissa bana tha..to kya use apne sasur ka hath tham lena chahiye..haan kyu nahi!..lekin uski saas,nanad..

vo inhi khayalo me dubi thi ki uske zehan me bijli si kaundhi..vijayant ne mana tha ki usne uski majburi ka fayda uthane ke liye cards block karwaye the to kahi uske jism ki hawas me andha hokar usi ne to sameer ko gayab nahi karwaya?..haan ye mumkin hai..ab to sasur ji se rishta kayam rakhna hi hoga!

bathroom se bahar nikli to dekha ki vijayant 2 khane ki thaliya leke baitha hai.jab vo ghar me dakhil hua tha to uske hath me jo packet tha usme khana hi tha.rambha ki to savere ki sasur se mulakat ke baad bhukh hi mar gayi thi lekin ab uski karastaniyo ke baad uski bhukh jag gayi thi.vijayant ne use uski thali thamayi & dono khamoshi se khana khane lage.khana khatm hone pe rambha ne sasur ke hath se thali li & juthe bartan rasoi me rakhne chali gayi.

jab vo kamre me lauti to dekha ki vijayant ne vaha baki battiyan bujha ke sirf 1 maddham roshni vala lamp jala rakha hai & vo palang ke heaadbord se tek lagake tange failaye,kamar tak chadar dale baitha hai.rambha apne baal thik karti dhire-2 bistar tak aayi & uske dayi taraf baith gayi.vijayant ki banh pe uske nakhuno ki kharonche dikh rahi thi.usne uspe ungliya firayi & fir 2 palo ke baad jhuk ke bahut halke se chum liya.

vijayant samajh gaya ki rambha ko un dono ka ye rishta manzur tha & usne use dayi banh ke ghere me le liya.rambha ne bhi chadar me ghuste hue baya hath uske seene pe rakha & apni chhatiya uski bagal me dabate hue uske kandhe pe sar rakh uske pehlu me aa gayi.uska sasur uski gudaz dayi banh ko pyar se sehla raha tha.vijayant ke chaude seene ke ghane baalo me ungliya firana rambha ko bahut bahla lag raha tha.kitni der se usne khud ko aisa karne se roka tha magar ab nahi,ab to vo jitni marzi utni der tak is mazbut jism se khel sakti thi.

"sameer ke sath kya hua hai?..aapko kya lagta hai?",rambha ke daye hath ki ungli sasur ke seene se uski dadhi pe aa gayi thi.usne vijayant ki thuddi chumi & fir uske hotho pe ungli firayi.vijayant uski kalai thame tha.usne pehle uski ungli ko chuma & use khud se t5hoda & chipka liya.rambha ne bhi dayi tang utha ke sasur ki tango pe chadha di.

"kuchh samajh nahi aata..",vijayant ke chere pe chinta nazar aa rahi thi,"..koi hadsa hua hota to uski car milti ya fir..",uske jaisa mazbut dil vala shakhs bhi bete ki maut ke bare me bolne se ghabra raha tha,"..& aisi dushmani bhi nahi kisi se ki koi use nuksan pahunchaye.",rambha gaur se use dekh rahi thi....ya to ye admi jhuth bolne me mahir hai ya ye bilkul sachcha hai.

"to ab kya karenge?",uska hath vapas sasur ke seene pe fisalne laga tha & ab dhire-2 neeche badh raha tha.usne apni mulayam tang se vijayant ki tango ke upar dhire-2 sehlana shuru kar diya tha.usne neeche dekha to chadar me tambu ban gaya tha.usne chadar ko hata ke neeche fenk diya & samne taza saaf ki gayi jhanto ki vajah se & lamba dikhta vijayant ka lund dekh uski aankhe chamak uthi.

"socha hai maine kuchh..uummmm..",uski bahu uske seene ko chum rahi thi & chumte hue uske pet ke bilkul nichle hisse pe jaha baal khatm ho rahe the vaha pe sehla rahi thi.rambha ko apni tango pe vijayant ki tango ke baalo ki chhuan mast kar rahi thi.usne apne hotho me uska baya nipple liya & chus liya.uske sasur ne aah bharte hue uske baalo me ungliya fira di.rambha ne dusre nipple ko bhi thodi der chusa & uske baad chumte hue neeche jane lagi,"..lekin us se pehle kal subah hum Devalay jayenge."

rambha ab uske pehlu se nikal uski tango ko faila ke uske lund ko dekh rahi thi.itna bada,itna tagda lund dekh ke hi use masti chadhne lagi thi.usne lund ke neeche latak rahe golf ball jaise ando ko thapthapaya..kitne dino se vo kisi mardane ang se is tarah nahi kheli thi.aaj vo ji bhar ke khelegi apne sasur ke lund se!

usne lund ko hath me pakda.vo itna mota tha ki uski mutthi ke ghere me nahi aa raha tha so usne dusra hath bhi uspe kas diya.abhi bhi lund ka kafi bada hissa uske chhote-2 hatho ki pakad ke bahar tha.lund ki garmi ne uske jism ki tapish bhi badh di thi.vo jhuki & gulabi supade pe pehli baar apne hotho ki mohar lagayi.vijayant ne masti me aankhe band kar li.

rambha uske lund ko hilate hue supade ko chus rahi thi.kuchh der chusne ke baad usne supade ko munh se nikala & uspe jibh firayi & fir lund ko pakad use apne dono galo & hotho pe firane lagi.usne naak lund & ando ke beech ki gaha pe dabate hue uske 1 ande ko munh me bhar ke chusa to vijayant apni kamar uchkate hue seedha baith gaya & uske sar ko tham liya.

rambha uski masti se beparwah uske dusre ande ko chus rahi thi ki uski nazar paas pade gulab ke phool pe padi.uske sasur ne us gulab se hi use pagal kar diya tha.ab uski bari thi.usne lund ko chhod diya & gulab ko hath me le use supade pe rakha.gulab ki badi si pankhudi se jab usne vijayant ke lund ke chhed ko chheda to vijayant ne aankhe band karte hue zor se aah bhari.supade ki nazuk skin pe fisalti pankhudi 1 ajib sa maza uske jism me bhar rahi thi.

rambha ne gulab ko neeche sarkate hue uske lund ko phool se sehlaya & fir uske ando pe usi phool se halke se mara & sasur ko dekh muskurayi.vijayant ne use upar khincha & baaho me bharte hue uske hotho se apne honth sata diye.jab tak vo apni zuban aage karta,rambha ki zuban uske munh me dakhil ho chuki thi.vo uski mansal kamar ko dabate hue uski kiss ka lutf utha raha tha.rambha uske chehre ko pakde use shiddat se chume ja rahi thi.kafi der tak dono us matani kiss ka lutf uthate rahe,tab tak jab taki sans lene ke liye unhe lag na hona pada.

rambha lumbi-2 sanse leti apne seene ke ubharo ko sasur ke munh se satane lagi.vijayant ne uski gand ki fanko ko dabocha & uski chhatiyo ko chusne laga.jab unke beech ki vadi me apna munh ghusa ke apni naak usne ragdi to rambha ne masti & khushi se muskurate hue aah bhari & apna sar peechhe jhatka.uske sasur ne chut ko chhua bhi nahi tha & vo buri tarah se kasmasate hue ras bahane lagi thi.

rambha ne apni chhatiya vijayant ke munh se khinchi & peechhe ho apne dono ghutne uski kamar ke dono or jamaye & chut ko lund pe jhukane lagi.usne baya hath peechhe le jake lund ko thama & fir chut ko jhuka ke uske matthe pe rakha & baithne lagi.uski aankhe band ho gayi & chehra pe bas josh dikhne laga.is position me lund 7-8 inch tak andar ghus gaya tha & uski chut ko pura bhar diya tha.

rambha uske seene pe hath jamaye use masti bhari nigaho se dekhti kudne lagi.1 baar fir chudai shuru ho gayi thi & is baar dono premi bina kisi uljhan ke uska lutf utha rahe the.vijayant ke bade hath rambha ke pure jism pe ghum rahe the.jab vo uski gand ke ubharo ko nahi daba rahe hote to vo uski choochiyo ki golayi naap rahe hote.uski choochiyo ko bhinchte hue vijayant ne apne dono hatho ko unke beech ki vadi se neche kiya & uske pet ko sehlaya.

vijayant ne bagal me pada phool uthaya & is baar uski danthal ko seedha rambha ke dane pe laga diya.

"aannhhhhhh....!",rambha ke chehre pe mastani shikane pad gayi & vo muskurate hue peechhe ho gayi taki uski chut & uska dana uske sasur ko aasani se dikhen.usne apne hath vijayant ke ped ke tane sarikhi nagho pe tikaye & kamar hilane lagi.vijayant uski nazor se nazre milata hua uske dane pe danthal ragadta raha.

rambha ki aankhe ab nashe ke bojh tale aadhi hi khuli reh pa rahi thi.vijayant ki ye harkat use madhoshi ke alam me le gayi thi & ab vo use dekh chumne ka ishara karti hui uski jangh pe hath tikaye bahut zor se kamar hila rahi thi.tabhi uski chut ne vahi harkate shuru kar di jo vo jhadne ke waqt karti thi & vijayan ke chhere pe bhi uski bahu ki tarah masti bhari shikne pad gayi & vo aah bharne laga lekin usne dane pe danthal ki ragad ko nahi roka.

"aannnnhhhhhh..dad.....!",rambha jhadi & use ab danthal ki ragad nakabile bardasht lagi.usne phool ko pakad ke kinare fenka & apne sasur ke upar jhuk gayi.apni bhari-bharkam choochiya uske balo bhare seene pe dabate hue vo aahe bharti subakti hui use deewano ki tarah chumne lagi.vijayant ne use baaho me bhar liya & uski kiss ka jawab deta raha.

jab rambha thoda sambhli to vijayant ne use baaho me bhare-2 palta & apne neeche kar liya.rambha ne sarsur ke baalo me ungliya firate hue uske sar ko tham liya & uski dadhi pe ane gaal ragadne lagi.

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1 car rambha & sameer ke bungle ke bahar khadi thi.usme 1 shakhs baitha upri manzil ki or dekh raha tha.vo kafi der se us bungle pe nazar rakhe tha.usne vijayant ko aate dekha tha lekin abhi uski samajh me ye nahi aa raha tha ki upar abhi kaun jaga tha.pehle nichli manzil & upri manzil pe battiya jal rahi thi lekin abhi kuchh der pehle sare ghar ki battiya kisi ne bujhayi magar upar ke kamre me tez roshni band kar maddham roshni kar di gayi thi.

us shakhs ne 1 cigarette sulagai & lighter ki roshni me uska chehra dikha jispe baye gaal pe 1 nishan tha,lagbhag 2 inch bada.nishan kisi badi purani chot ka lagta tha.vo aadmi lagbhag 50-5 baras ka hoga & uske baal dyed the.cigarette peete hue vo soch raha tha..itni mushkil se use is ladki ka pata mila tha.usne socha tha ki ab talash khatm hui & vo us se baat kar lega lekin yaha to aur hi kahani chal rahi thi.ab pata nahi kab uska pati milega & kab vo us se baat kar payega!..usne cigarette ko khidki se bahar footpath pe fenka & packet se dusri nikal ke sulgai.

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kramashah.......