Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:00

जाल पार्ट--54

गतान्क से आगे......

उंगली बटन से उपर गयी फिर अंगूठे के साथ मिल कर बॉटन को खोल दिया.रंभा ने दोनो होंठ दन्तो मे दबा लिए.देवेन आगे झुका & उस खुले बटन के पीछे के हिस्से को बहुत हल्के से चूम लिया.रंभा ने आह भरते हुए सर पीछे कर लिया.देवेने ने उसके बाए हाथ मे बँधी घड़ी की चैन मे अपनी उंगली फँसाई & खड़ा होते हुए उसी चैन से रंभा के हाथ को उठाने लगा.अब वो रंभा के सामने खड़ा था & उसका हाथ उसने उपर ले जाके उसके सर के उपर दीवार से लगा दिया था.वो रंभा के चेहरे को निहार रहा था..सुमित्रा उसके करीब थी..उसके सामने थी..वही लरजते होंठ..वही दिलकश सूरत..वही शर्मोहाया & वही मस्ती!

उसकी निगाहो की तपिश को झेलना रंभा के नैनो के बस मे नही था.उसने आँखे बंद कर ली.पल-2 देवेन की गर्म साँसे उसके चेहरे के & करीब आ रही थी.उसके होंठ खुद बा खुद खुल गये थे.अगेल ही पल उसके जिस्म मे सिहरन दौड़ गयी.देवने के तपते होंठ उसके नर्म लबो से आ लगे थे.वो बस अपने लबो से उसके होंठो को सहला रहा था.रंभा की साँसे धौकनी की तरह चल रही थी.उसके काँपते होंठ देवेन के होंठो से मिलने को बेकरार हो रहे थे & जैसे ही देवेन ने होटो का दबाव बढ़ाया,रंभा ने भी उसे चूम लिया & उसकी आँखो से आँसुओ की 2 बूंदे टपक पड़ी.ये खुशी के आँसू थे.देवने के चूमने गर्मजोशी थी,शिद्दत थी लेकिन उस से भी ज़्यादा 1 एहसास था हिफ़ाज़त का,सुकून का.रंभा ने खुद को पूरी तरह से उसके हवाले कर दिया था.वो उसके होटो को बस अपने होंठो से चूम रहा था.अभी तक ज़ुबान फिराई तक नही थी उसने & रंभा की चूत का बुरा हाल हो गया था.

रंभा ने बेसबरा हो अपने दाए हाथ को थोड़ा आयेज कर देवेन के बाए हाथ को थाम दोनो की उंगलियो को आपस मे फँसा लिया था.देवेन उसके बाए हाथ को उपर दीवार पे सटा अपने दाए हाथ को उसकी कलाई से नीचे सरका रहा था.रंभा की बाँह का अन्द्रुनि हिस्सा बहुत मुलायम था & उसकी छुअन ने देवेन के लंड को बिल्कुल सख़्त कर दिया था.

“हाआअन्न्‍न्णनह..!”,रंभा गुदगूदे एहसास से चिहुनक & किस तोड़ दी.देवेन का हाथ उसकी गुदाज़ बाँह पे फिसलता हुआ बिकुल नीचे बाँह की बगल से आ लगा था & उस कोमल जगह पे उसकी उंगली के फिरने से उसे गुदगुदी महसूस हुई थी & उसने बाँह नीचे कर ली थी.देवेन ने फिर से बाँह को उपर दीवार से सटा दिया & उसकी आँखो मे देखने लगा.उन नज़रो मे उसकी चाहत थी & रंभा को उनमे दिखती उसके इश्क़ की ख्वाहिश ने खुशी से भर दिया.उन नज़रो मे उसके जिस्म की हसरत भी थी & उस एहसास को समझते ही रंभा के चेहरे की लाली & बढ़ गयी & उसकी पलके बंद हो गयी.

देवेन के होंठ उसके गालो को चूम रहे थे.रंभा गर्दन घुमा के अपने गुलाबी गाल उसे पेश कर रही थी & जैसे ही वो नीचे हुआ उसने सर उठा अपनी गोरी गर्दन अपने महबूब की खिदमत मे पेश कर दी.वो हौले-2 मुस्कुराती हुई बस उस रोमानी लम्हे का मज़ा ले रही थी.देवेन के होंठ उसके गले से उसके दाए कंधे पे पहुँचे & वो चूमते हुए अपनी नाक से उसकी वेस्ट & ब्रा के स्ट्रॅप्स को नीचे करने की कोशिश करने लगा.रंभा को फिर से गुदगुदी हुई & उसने कंधा सिकोडा लेकिन देवेन को दूर करने की कोई कोशिश नही की.वो उसके स्ट्रॅप्स को कंधे के किनारे पे कर के वाहा पे चूम रहा था.कुच्छ देर बाद उसके होंठ उसकी गर्दन के नीचे के गड्ढे को चूमते हुए दूसरे कंधे पे पहुँचे.

“आन्न्न्नह..!”,रंभा चिहुनक के बाँह नीचे करने लगी क्यूकी देवेन के होंठ उसकी चिकनी बगल से जा लगे थे.देवने उस जगह के उतने मुलायम होने से हैरान था.वाहा के बाल कितने भी साफ कर लो,वो जगह औरत के बाकी जिस्म की तरह उतनी कोमल नही होती लेकिन रंभा को तो उपरवाले ने कुच्छ ज़्यादा ही फ़ुर्सत मे बनाया था.देवेन ने उसकी बाँह को मज़बूती से दीवार से लगे & अपनी ज़ुबान से उसकी बगल को चखने लगा.रंभा की सांस अटक गयी,ऐसे वाहा पे उसे किसी ने प्यार नही किया था.देवने की आतुर ज़ुबान से उसे गुदगुदी के साथ सिहरन भरा एहसास हो रहा था.उस अनूठे एहसास को उसका जिस्म ज़्यादा नही झेल पाया & देवेन के बाए हाथ की उंगलियो को बहुत ज़ोर से कसते,काँपते हुए आहे भरती रंभा झाड़ गयी.

वो गिर ही जाती अगर देवेन उसकी कमर को जाकड़ उसे बाहो मे थाम ना लेता.उसने भी अपने हाथ उसके कंधो पे रख दिए थे.वो उसके लंड की सख्ती महसूस कर रही थी & वो भी उसके मुलायम जिस्म के आकार को अपने जिस्म से मिलते महसूस कर रहा था.दोनो की नज़रे आपस मे उलझी हुई थी & उनके रास्ते 1 दूसरे का हाल दोनो को मिल रहा था.देवेन ने उसे वैसे ही उठा लिया & लिए-दिए बिस्तर पे लेट गया.उसके जिस्म के भार के नीचे दबी रंभा ने अपनी बाहे उसकी गर्दन पे कस प्यार से उसके बालो मे हाथ फेरा & दोनो के होंठ 1 शिद्दत भरी किस मे जुड़ गये.दोनो 1 दूसरे की ज़ुबानो से खेल रहे थे,उन्हे चूस रहे थे.उनके हाथ 1 दूसरे के चेहरे पे घूम रहे थे अपनी हसरत,अपनी बेकरारी बयान कर रहे थे.दोनो को अब कोई होश नही था सिवाय इसके के की उनकी पसंद के शख्स का जिस्म उनकी बाहो मे है & वो उसे जी भर के प्यार कर सकते हैं.

काफ़ी देर के बाद जब सांस लेने की ज़रूरत महसूस हुई तो दोनो के लब जुदा हुए.दोनो तेज़ी से साँसे लेते हुए 1 दूसरे को देख रहे थे.रंभा ने नशीली आँखो से देखते हुए अपने अरमानो को ज़ाहिर करते हुए देवने के सीने पे हाथ फिराए तो उसने उसके हाथ शर्ट की बटन पे रख दिए.रंभा को उसकी गर्म निगाहो से शर्म आ रही थी.उसने मुँह फेर लिया & बटन खोलने लगी.आख़िरी बटन खोल उसने अपनी मा के प्रेमी-जोकि अब उसका प्रेमी बन चुका था,को देखा तो वो उठा & अपनी कमीज़ निकाल दी.उसका चौड़ा सीना ज़्यादातर सफेद & कुच्छ काले घने बालो से पूरा ढँका हुआ था.

रंभा का दिल खुश हो गया & उसके हाथ देवेन के सीने पे चले गये.उसकी आँखो मे उसके जिस्म की तारीफ उतर आई थी & वासना के डोरे भी.सीने के बालो को हसरत से छुते हुए उसने उपर देखा तो देवेन को खुद को देख मुस्कुराते पाया & शर्मा के उसने हाथ खीच लिए.देवेन हंस दिया & उसके चेहरे पे उंगली फिराने लगा.रंभा ने आँखे बंद कर चेहरा दाई तरफ घुमा लिया....आज उसका इंतेज़ार ख़त्म हुआ!..सुमित्रा उसके साथ थी..& वो उसे अपना बनाने वाला था!देवेन की उंगली उसके चेहरे से उतर के उसकी गर्दन से होते हुए उसके क्लीवेज के पास आ के रुकी.रंभा धड़कते दिल से सीने के उभारो को उपर-नीचे करते उसे देखने लगी.

देवेन की उंगली 1 पल को वाहा रुक उसके बाए कंधे पे गयी & उसकी वेस्ट के स्ट्रॅप को नीचे सरका दिया.रंभा ने भी कंधे सिकोड उसे उतरने की इजाज़त दे दी.देवेन ने उसके दूसरे कंधे से भी स्ट्रॅप उतार वेस्ट को उसके सीने के नीचे सरका दिया.काले ब्रा मे क़ैद रंभा की चूचियाँ उसकी सांसो की बेकरारी की कहानी कहती उपर-नीचे हो रही थी.देवेन का हाथ उतरी वेस्ट के नीचे उसके पेट पे रखा था & वाहा धीरे-2 सहला रहा था.दोनो 1 तक 1 दूसरे को देखे जा रहे थे.

वो फिर झुका & उसे चूमने लगा.उसने रंभा के चेहरे को अपनी किस्सस से ढँक दिया.वो उसके बालो को सहलाती उसके होंठो का लुत्फ़ उठा रही थी.देवेन उसके सीने पे आया मगर चूमा नही.रंभा अब तड़प रही थी उसके होंठो और हाथो को वाहा महसूस करने के लिए.उसकी चूत बहुत ज़्यादा कसमसा रही थी.देवेन उसके सीने के उभारो को देखता हुआ नीचे आया & उसकी वेस्ट उठाके उसके पेट को चूमने लगा.गोल पेट पे उसके तपते लब महसूस करते रंभा की आहे निकलनी शुरू हो गयी.

देवेन के होंठो मे गर्मजोशी थी,जोश था लेकिन वो ज़रा भी बेसब्र नही था.उसके पास मानो वक़्त ही वक़्त था रंभा को प्यार करने के लिए & खुद के झड़ने की उसे जैसे कोई चिंता ही नही थी!.रंभा की नाभि मे दाए हाथ की सबसे बड़ी,बीच की उंगली घुसा के उसे कुरेदते हुए जब उसने उसमे हौले से जीभ फिराई तो रंभा ने बदन को कमान की तरह मोड़ लिया.उसकी नाभि की गहराई नाप के देवेन उसके पेट को & चूमने के बाद देवेन ने & नीचे का रुख़ किया.

उसने जीन्स के उपर से ही रंभा की जाँघो को चूमा.कसी जीन्स & पॅंटी के अंदर उसकी चूत अब बिल्कुल बावली हो गयी थी.देवेन उसके पैरो तक पहुँच गया था & अब उसकी उंगलिया चूस रहा था.उसने उसके तलवे चूमे & फिर से उसकी टांगो के रास्ते उसकी जाँघो तक आ गया & उसकी चूत के उपर आया..क्या कर रहा है वो?..ये सुमित्रा की बेटी है..उसके साथ ये सब..उसका दिल उसे अचानक रोकने लगा था..तो क्या हुआ?..वो भी चाहती है तुम्हे..आगे बढ़ो..बुझाओ अपनी & उसकी प्यास..

रंभा शायद उसकी उलझन समझ गयी थी.देवेन का दाया हाथ उसके पेट पे था & वो उसके उपर झुका कशमकश मे पड़ा था.उसने अपना बया हाथ उसके पेट पे रखे हाथ पे रखा & उसे उठाके अपनी जींस के ज़िप पे रख दिया.देवेन ने गर्दन घुमा उसे देखा तो रंभा ने हां मे सर हिलाया.देवेन उसे देखे जा रहा था.उसकी आँखो मे इजाज़त दिख रही थी उसे..हसरत भी..जोश भी..खुमारी भी..वो सारे एहसास जो उसके दिल मे भी घूमड़ रहे थे.रंभा ने उसके ज़िप पे रखे हाथ को दबाया तो उसके हाथ ने खुद बा खुद ज़िप नीचे खींच दी.

देवेन ने चौंक के ज़िप की तरफ देखा & फिर रंभा की तरफ.वो मुस्कुरा रही थी.उस मुस्कान मे बस खुशी थी,केवल खुशी.देवेन के होंठो पे भी वैसी ही मुस्कान खेलने लगी & उसके हाथ रंभा की जीन्स के वेयैस्टबंड मे फँस गये.उसने बहुत प्यार से जीन्स को नीचे खींचा.रंभा ने कमर उपर उचका दी & वो उसकी कसी जीन्स को धीरे-2 नीचे करने लगा.वो उसके पैरो के पास गया & जीन्स को पकड़ के नीचे किया.उसके कपड़े उतरने मे कोई जल्दबाज़ी नही थी.रंभा को पता था की वो बहुत जोश मे है लेकिन उस वक़्त भी उसे उसका ख़याल था & वो हर काम उसके आराम & मज़े को मद्देनज़र रख के कर रहा था.

देवेन ने जीन्स पूरी खींच दी & काली ब्रा & पॅंटी मे बिस्तर पे लेटी लंबी-2 साँसे लेती रंभा को निहारने लगा.रंभा को शर्म आ रही थी..वो पहली बार उसके सामने इस हालत मे थी..नही..ग़लत थी..वो क्लेवर्त मे विजयंत के साथ उसने उसे उसके पूरे नंगे शबाब मे देखा था..हया ने अब तो उसे पूरा आ घेरा & उसने आँखे बंद कर ली.कुच्छ देर तक जब उसने देवेन के हाथो को अपने जिस्म पे महसूस नही किया तो उसने अपनी हया को समझा-बुझा के पॅल्को की चिलमन को ज़रा सा हटाया & उसे वो अपनी पॅंट उतारता दिखा.काले अंडरवेर मे क़ैद उसका लंड बहुत बड़ा था,ये उसे देखते ही वो समझ गयी थी.उसने थूक गटका..उसका हलक सुख गया था आने वाले मज़े के ख़याल से!

देवेन बिस्तर पे आ गया & उसके कंधे पकड़ उसे उठाया.रंभा शर्म से दोहरी हुए जा रही थी..क्या वो उसकी मा को भी ऐसे ही प्यार करता?..इसी तरह बाहो मे भरता?..उसका दिल फिर से गुस्ताख बातें सोचने लगा था.देवेन बिस्तर पे बैठ गया & उसे अपनी टाँगो के बीच अपने पहलू मे ले लिया.रंभा अब अपना दाया कंधा उसके सीने से लगाए उसके बाए कंधे पे सर रखे उसकी बाहो मे थी.

देवेन ने उसे बाई बाँह के सहारे मे घेरा हुआ था & दाए हाथ से उसके हसीन चेहरे को ठुड्डी से उठा रहा था.रंभा को अपनी गंद के बगल मे उसका सख़्त लंड चुभता महसूस हो रहा था.उसकी चूत अब & कसमसने लगी थी.देवेन झुका & रंभा ने खुले होंठो के साथ उसके होंठो का इस्तेक्बाल किया.दोनो पूरी शिद्दत एक साथ 1 दूसरे को चूमने लगे.रंभा के हाथ उसके सर के बालो से लेके कंधो,पीठ & सीने पे घूम रहे थे.देवेन भी उसकी पीठ पे अपने सख़्त हाथ फेरता उसकी कमर को हौले-2 मसलता उसे चूम रहा था.

देवेन मज़बूत शरीर का मालिक था.जैल मे की मशक्कत ने उसके जिस्म को तोड़ा नही था बल्कि फौलाद सा सख़्त बना दिया था.उसका सीना चौड़ा & बाज़ू बड़े मज़बूत थे.जंघे भी पेड़ो के तनो जैसी लग रही थी.रंभा उसकी गिरफ़्त मे महफूज़ महसूस कर रही थी.वो अपनी सारी परेशानियाँ,सारी उलझने भूल गयी थी.विजयंत की बाहो मे भी उसे ये एहसास मिलता था लेकिन देवेन की बाहो मे इस एहसास की तासीर अलग किस्म की थी.

देवेन के बाज़ू जैसे उसे अपनी पनाह मे ले उस से ये वादा कर रहे थे कि वो हमेशा उसकी हिफ़ाज़त करेंगे & यू ही उम्र भर थामे रहेंगे..क्या वजह थी इस बात की?..क्या ये कि वो उसकी मा से सच्चा प्रेम करता था या ये कि उसे पता था की विजयंत कभी उसका पूरी तरह से नही हो सकता था & अब तो खैर वो 1 ख्वाब ही बन गया था!..जो भी हो उसे बहुत सुकून मिल रहा था उसकी बाहो मे & उसका दिल कर रहा था की काश वक़्त यही थम जाए & दोनो क़यामत के दिन तक बस यू ही 1 दूसरे से लिपटे जिस्मो के नशे मे खोए रहें.

दोनो अंजाने मे 1 दूसरे की नकल कर रहे थे.देवेन उसकी मखमली पीठ को सहलाता तो वो भी उसकी सख़्त पीठ को अपने हाथो मे भींचने लगती.रंभा के हाथ उसके सीने के बालो मे घुस जाते तो वो भी उसके क्लीवेज पे बड़े हल्के-2 अपनी दाई हथेली चलाने लगता.उसके हाथ रंभा की मखमली जाँघो पे फिसले तो रंभा ने भी उसकी बालो भरी अन्द्रुनि जाँघो को सहलाया & जब रंभा ने उसके गले मे बाहें डाल उसे ज़ोर से चूमा तो उसने भी जवाब मे बाए हाथ से उसके जिस्म को खुद से पूरा सताते हुए दाए से उसकी ठुड्डी को पकड़ अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे घुसा दी.

"उउन्न्ञनननगगगगगगगघह......!",रंभा ने किस तोड़ी & उसके कंधो पे सर रख वाहा पे चूमते हुए च्चटपटाने लगी.वो फिर से झाड़ गयी थी.देवेन के हाथ उसकी पीठ सहलाते हुए उसे संभालने लगा.थोड़ी देर बाद रंभा ने सर कंधे से थोड़ा उपर करते हुए देवेन के बाए गाल को चूमा तो देवेन ने उसकी पीठ पे दोनो हाथ ले जाके उसकी ब्रा के हुक्स को खोल दिया.लाज की 1 नयी लहर ने रंभा को आ घेरा..वो उसकी नंगी चूचियाँ देखने वाला था..क्या उसे वो खूबसूरत लगेंगी?..क्या पसंद करेगा इन्हे वो?..वो हैरत मे पड़ गयी..आज तक उसके दिल मे कभी भी ऐसा ख़याल नही आया था बल्कि वो तो ये मान के ही चलती थी की उसके जिस्म को नापसंद करने की हिमाकत तो कोई मर्द कर ही नही सकता!

देवेन ने उसके ब्रा को उसकी बाहो से बाहर खींचा & गुलाबी निपल्स से सजी रंभा की बड़ी-2,कसी चूचियाँ उसकी आँखो के सामने छल्छला उठी.देवेन का मुँह खुला खुला रह गया.उसने क्लेवर्त मे उस रात उन्हे इतनी गौर से नही देखा था..बला की खूबसूरत थी वो!..बिल्कुल गोल,कसी & निपल्स का रंग कितना दिलकश था!..कैसे सख़्त हो रहे थे उसके निपल्स..दिल की धड़कनो के साथ उपर-नीचे होता हुआ उसका सीना इस वक़्त & जानलेवा लग रहा था.

देवेन का दाया हाथ काँपते हुए आगे बढ़ा.उसे लग रहा था कि उसके हाथ उस शफ्फाक़ गोरी हुस्न परी के बदन को मैला कर देंगे & वो झिझक रहा था.उसने रंभा की निगाहो मे देखा & उसने सर उसके कंधे से थोड़ा सा उठाके उसके लब चूम लिए.देवेन ने अपना कांपता हाथ आगे बढ़ाया & बहुत हल्के से रंभा की बाई छाती पे रखा.

उस पल दोनो ही के जिस्मो मे बिजली दौड़ गयी.रंभा ने सर पीछे झटकते हुए आह भरी.उसका दिल कर रहा था कि उसका आशिक़ अब उसके उन उभारो को अपने सख़्त हाथो तले रौंद डाले..कुचल दे उन फूलो को & उसके बेचैन दिल को करार पहुचाए!..देवेन उसके सीने को देखते हुए बहुत हल्के हाथो से उसकी बाई चूची को सहला रहा था मानो यकीन करना चाह रहा हो की उसके हाथ उस परी के जिस्म को मैला नही कर रहे.

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क्रमशः.......

JAAL paart--54

gataank se aage......

Ungli button se upar gayi fir anguthe ke sath mil kar botton ko khol diya.rambha ne dono honth danto me daba liye.deven aage jhuka & us khule button ke peechhe ke hisse ko bahut halke se chum liya.rambha ne aah bharte hue sar peechhe kar liya.devene ne uske baye hath me bandi ghadi ki chain me apni ungli phansayi & khada hote hue usi chain se rambha ke hath ko uthane laga.ab vo rambha ke samne khada tha & uska hath usne upar le jake uske sar ke upar deewar se laga diya tha.vo rambha ke chehre ko nihar raha tha..sumitra uske kareeb thi..uske samne thi..vahi larajte honth..vahi dilkash surat..vahi sharmohaya & vahi masti!

Uski nigaho ki tapish ko jhelna rambha ke naino ke bas me nahi tha.usne aankhe band kar li.pal-2 deven ki garm sanse uske chehre ke & karib aa rahi thi.uske honth khud ba khud khul gaye the.agel hi pal uske jism me sihran daud gayi.devne ke tapte honth uske narm labo se aa lage the.vo bas apne labo se uske hotho ko sehla raha tha.rambha ki sanse dhaukni ki tarah chal rahi thi.uske kanpte honth deven ke hotho se silne ko bekarar ho rahe the & jaise hi deven ne hotho ka dabav badhaya,rambha ne bhi use chum liya & uski aankho se aansuo ki 2 boonde tapak padi.ye khushi ke aansu the.devne ke chumne garmjoshi thi,shiddat thi lekin us se bhi zyada 1 ehsas tha hifazat ka,sukun ka.rambha ne khud ko puri tarah se uske hawale kar diya tha.vo uske hotho ko bas apne hotho se chum raha tha.abhi tak zuban firayi tak nahi thi usne & rambha ki chut ka bura haal ho gaya tha.

Rambha ne besabra ho apne daye hath ko thoda aage kar deven ke baye hath ko tham dono ki ungliyo ko aapas me phansa liya tha.deven uske baye hath ko upar deewar pe sata apne daye hath ko uski kalai se neeche sarka raha tha.rambha ki banh ka andruni hissa bahut mulayam tha & uski chhuan ne deven ke lund ko bilkul sakht kar diya tha.

“haaaaannnnnhhhhh..!”,rambha gudgude ehsas se chihunk & kiss tod dii.devne ka hath uski gudaz banh pe fisalta hua bikul neeche banh ki bagal se aa laga tha & us komal jagah pe uski ungli ke firne se use gudgudi mehsus hui thi & usne banh neeche kar li thi.deven ne fir se banh ko upar deewar se sata diya & uski aankho me dekhne laga.un nazro me uski chahat thi & rambha ko unme dikhti uske ishq ki khwahish ne khushi se bhar diya.un nazro me uske jism ki hasrat bhi thi & us ehsas ko samajhte hi rambha ke chehre ki lali & badh gayi & uski palke band ho gayi.

Deven ke honth uske galo ko chum rahe the.rambha gardan ghuma ke apne gulabi gaal use pesh kar rahi thi & jaise hi vo neeche hua usne sar utha apni gori gardan apne mehboob ki khidmat me pesh kar di.vo haule-2 muskurati hui bas us romani lamhe ka maza le rahi thi.deven ke honth uske gale se uske daye kandhe pe pahunche & vo chumte hue apni naak se uski vest & bra ke straps ko neeche karne ki koshish karne laga.rambha ko fir se gudgudi huii & usne kandha sikoda lekin deven ko door karne ki koi koshish nahi ki.vo uske straps ko kandhe ke kinare pe kar ke vaha pe chum raha tha.kuchh der baad uske honth uski gardan ke neeche ke gaddhe ko chumte hue dusre kandhe pe pahunche.

“aannnnhhhhhh..!”,rambha chihunk ke banh neeche karne lagi kyuki deven ke honth uski chikni bagal se ja lage the.devne us jagah ke utne mulayam hone se hairan tha.vaha ke baal kitne bhi saaf kaar lo,vo jagah aurat ke baki jism ki tarah utni komal nahi hoti lekin rambha ko to uparwale ne kuchh zyada hi fursat me banaya tha.deven ne uski banh ko mazbuti se deewar se lagay & apni zuban se uski bagal ko chakhne laga.rambha ki sans atak gayi,aise vaha pe use kisi ne pyar nahi kiya tha.devne ki aatur zuban se use gudgudi ke sath sihran bhara ehsas ho raha tha.us anuthe ehsas ko uska jism zyada nahi jhel paya & deven ke baye hath ki ungliyo ko bahut zor se kaste,kanpte hue aahe bharti rambha jhad gayi.

Vo gir hi jati agar deven uski kamar ko jakad use baaho me tham na leta.usne bhi apne hath uske kandho pe rakh diye the.vo uske lund ki sakhti mehsus kar rahi thi & vo bhi uske mulayam jism ke aakar ko apne jism se milte mehsus kar raha tha.dono ki nazre aapas me uljhi hui thi & unke raste 1 dusre ka haal dono ko mil raha tha.deven ne use vaise hi utha liya & liye-diye bistar pe let gaya.uske jism ke bhaar ke neeche dabi rambha ne apni baahe uski gardan pe kas pyar se uske baalo me hath fera & dono ke honth 1 shiddat bhari kiss me jud gaye.dono 1 dusre ki zubano se khel rahe the,unhe chus rahe the.unke hath 1 dusre ke chehre pe ghum rahe the apni hasrat,apni bekarari bayan kar rahe the.dono ko ab koi hosh nahi tha siway iske ke ki unki pasand ke shakhs ka jism unki baaho me hai & vo use ji bhar ke pyar kar sakte hain.

Kafi der ke baad jab sans lene ki zarurat mehsus hui to dono ke lab juda hue.dono tezi se sanse lete hue 1 dusre ko dekh rahe the.Rambha ne nashili aankho se dekhte hue apne armano ko zahir karte hue Devne ke seene pe hath firaye to usne uske hath shirt ki button pe rakh diye.rambha ko uski garm nigaho se sharm aa rahi thi.usne munh fer liya & button kholne lagi.aakhiri button khol usne apni maa ke premi-joki ab uska premi ban chuka tha,ko dekha to vo utha & apni kamiz nikal di.uska chauda seena zyadatar safed & kuchh kale ghane baalo se pura dhanka hua tha.

rambha ka dil khush ho gaya & uske hath devben ke seene pe chale gaye.uski aankho me uske jism ki tarif utar aayi thi & vasna ke dore bhi.seene ke baalo ko hasrat se chhute hue usne upar dekha to deven ko khud ko dekh muskurate paya & sharma ke usne hath khicnh liye.deven hans diya & uske chehre pe ungli firane laga.rambha ne aankhe band kar chehra dayi taraf ghuma liya....aaj uska intezar khatm hua!..sumitra uske sath thi..& vo use apna banane wala tha!deven ki ungli uske chehre se utar ke uski gardan se hote hue uske cleavage ke paas aa ke ruki.rambha dhadakte dil se seene ke ubharo ko upar-neeche karte use dekhne lagi.

deven ki ungli 1 pal ko vaha ruk uske baye kandhe pe gayi & uski vest ke strap ko neeche sarka diya.rambha ne bhi kandhe sikod use utarne ki ijazat de di.deven ne uske dusre kandhe se bhi strap utar vest ko uske seene ke neeche sarka diya.kale bra me qaid rambha ki chhatiyan uski sanso ki bekarari ki kahani kehti upar-neeche ho rahi thi.deven ka hath utri vest ke neeche uske pet pe rakha tha & vaha dhire-2 sehla raha tha.dono 1 tak 1 dusre ko dekhe ja rahe the.

vo fir jhuka & use chumne laga.usne rambha ke chehre ko apni kisses se dhank diya.vo uske baalo ko sehlati uske hotho ka lutf utha rahi thi.deven uske seene pe aaya magar chuma nahi.rambha ab tadap rahi thi uske hotho & hatho ko vaha mehsus karne ke liye.uski chut bahut zyada kasmasa rahi thi.deven uske seene ke ubharo ko dekhta hua neeche aaya & uski vest uthake uske pet ko chumne laga.gol pet pe uske tapte lab mehsus karte rambha ki aahe nikalni shuru ho gayi.

deven ke hotho me garmjoshi thi,josh tha lekin vo zara bhi besabr nahi tha.uske paas mano waqt hi waqt tha rambha ko pyar karne ke liye & khud ke jhadne ki use jaise koi chinta hi nahi thi!.rambha ki nabhi me daye hath ki sabse badi,beech ki ungli ghusa ke use kuredte hue jab usne usme haule se jibh firayi to rambha ne badan ko kaman ki tarah mod liya.uski nabhi ki gehrai naap ke deven uske pet ko & chumne ke baad deven ne & neeche ka rukh kiya.

usne jeans ke upar se hi rambha ki jangho ko chuma.kasi jeans & panty ke andar uski chut ab bilkul bawli ho gayi thi.deven uske pairo tak pahunch gaya tha & ab uski ungliya chus raha tha.usne uske talwe chume & fir se uski tango ke raste uski jangho tak aa gaya & uski chut ke upar aaya..kya kar raha hai vo?..ye Sumitra ki beti hai..uske sath ye sab..uska dil use achanak rokne laga tha..to kya hua?..vo bhi chahti hai tumhe..aage badho..bujhao apni & uski pyas..

rambha shayad uski uljhan samajh gayi thi.deven ka daya hath uske pet pe tha & vo uske upar jhuka kashmakash me pada tha.usne apna baya hath uske pet pe rakhe hath pe rakha & use uthake apni jenas ke zip pe rakh diya.deven ne gardan ghuma use dekha to rambha ne haan me sar hilaya.deven use dekhe ja raha tha.uski aankho me ijazat dikh rahi thi use..hasrat bhi..josh bhi..khumari bhi..vo sare ehsas jo uske dil me bhi ghumad rahe the.rambha ne uske zip pe rakhe hath ko dabaya to uske hath ne khud ba khud zip neeche khinch di.

deven ne chaunk ke zip ki taraf dekha & fir rambha ki taraf.vo muskura rahi thi.us muskan me bas khushi thi,keval khushi.deven ke hotho pe bhi vaisi hi muskan khelne lagi & uske hath rambha ki jeans ke waistband me phans gaye.usne bahut pyar se jeans ko neeche khincha.rambha ne kamar upar uchka di & vo uski kasi jeans ko dhire-2 neeche karne laga.vo uske pairo ke paas gaya & jeans ko pakad ke neeche kiya.uske akpde utarne me koi jaldbazi nahi thi.rambha ko pata tha ki vo bahut josh me hai lekin us waqt bhi use uska khayal tha & vo har kaam uske aaram & maze ko maddenazar rakh ke kar raha tha.

deven ne jeans puri khinch di & kali bra & panty me bistar pe leti lambi-2 sanse leti rambha ko niharne laga.rambha ko sharm aa rahi thi..vo pehli baar uske samne is halat me thi..nahi..galat thi..vo Clayworth me Vijayant ke sath usne use uske pure nange shabab me dekha tha..haya ne ab to use pura aa ghera & usne aankhe band kar li.kuchh der tak jab usne deven ke hatho ko apne jism pe mehsus nahi kiya to usne apni haya ko samjha-bujha ke palko ki chilman ko zara sa hataya & use vo apni pant utarta dikha.kale underwear me qaid uska lund bahut bada tha,ye use dekhte hi vo samajh gayi thi.usne thuk gatka..uska halak sukh gaya tha aane vale maze ke khayal se!

deven bistar pe aa gaya & uske kandhe pakad use uthaya.rambha sharm se dohri hue ja rahi thi..kya vo uski maa ko bhi aise hi pyar karta?..isi tarah baaho me bharta?..uska dil fir se gustakh baaten sochne laga tha.deven bistar pe baith gaya & use apni tango ke beech apne pehlu me le liya.rambha ab apna daya kandha uske seene se lagaye uske baye kandhe pe sar rakhe uski baaho me thi.

Deven ne use baayi banh ke sahare me ghera hua tha & daye hath se uske haseen chehre ko thuddi se utha raha tha.Rambha ko apni gand ke bagal me uska sakht lund chubhta mehsus ho raha tha.uski chut ab & kasmasane lagi thi.deven jhuka & rambha ne khule hotho ke sath uske hotho ka istekbal kiya.dono puri shiddat ek sath 1 dusre ko chumne lage.rambha ke hath uske sar ke baalo se leke kandho,pith & seene pe ghum rahe the.deven bhi uski pith pe apne sakht hath ferta uski kamar ko haule-2 masalta use chum raha tha.

deven mazbut sharir ka malik tha.jail me ki mashakkat ne uske jism ko toda nahi tha balki faulad sa sakht bana diya tha.uska seena chauda & bazu bade mazbut the.janghe bhi pedo ke tano jaisi lag rahi thi.rambha uski giraft mne mehfuz mehsus kar rahi thi.vo apni sari pareshaniyan,sari uljhane bhul gayi thi.Vijayant ki baaho me bhi use ye ehsas milta tha lekin deven ki baaho me is ehsas ki taseer alag kism ki thi.

deven ke bazu jaise use apni panah me le us se ye vada kar rahe the ki vo humesha uski hifazat karenge & yhu hi umra bhar thame rahenge..kya vajah thi is baat ki?..kya ye ki vo uski maa se sachcha prem karta tha ya ye ki use pata tha ki vijayant kabhi uska puri tarah se nahi ho sakta tha & ab to khair vo 1 khwab hi ban gaya tha!..jo bhi ho use bahut sukun mil raha tha uski baaho me & uska dil kar raha tha ki kash waqt yehi tham jaye & dono qayamat ke din tak bas yu hi 1 dusre se lipte jismo ke nashe me khoye rahen.

dono anjane me 1 dusre ki nakal kar rahe the.deven uski makhmali pith ko sehlata to vo bhi uski sakht pith ko apne hatho me bhinchne lagti.rambha ke hath uske seene ke balo me ghus jate to vo bhi uske cleavage pe bade halke-2 apni dayi hatheli chalane lagta.uske hath rambha ki makhmali jangho pe fisle to rambha ne bhi uski baalo bhari andruni jangho ko sehlaya & jab rambha ne uske gale me baahen daal use zor se chuma to usne bhi jawab me baye hath se uske jism ko khud se pura satate hue daye se uski thuddi ko pakad apni zuban uske munh me ghusa di.

"uunnnnnngggggggghhhhhhhh......!",rambha ne kiss todi & uske akndhe pe sar rakh vaha pe chumte hue chhatpatane lagi.vo fir se jhad gayi thi.deven ke hath uski pith sehlate hue use sambhalne laga.thodi der baad rambha ne sar kandhe se thoda upar karte hue deven ke baye gaal ko chuma to deven ne uski pith pe dono hath le jake uski bra ke hooks ko khol diya.laaj ki 1 nayi lehar ne rambha ko aa ghera..vo uski nangi chhatiyan dekhne vala tha..kya use vo khubsurat lagengi?..kya pasand karega inhe vo?..vo hairat me pad gayi..aaj tak uske dil me kabhi bhi aisa khayal nahi aaya tha balki vo to ye maan ke hi chalti thi ki uske jism ko napasand karne ki himakat to koi mard kar hi nahi sakta!

deven ne uske bra ko uski baaho se bahar khincha & gulabi nipples se saji ram,bha ki badi-2,kasi chhatiyan uski aankho ke samne chhalchhala uthi.deven ka munh khula khula reh gaya.usne Clayworth me us raat unhe itni gaur se nahide kha tha..bala ki khubsurat thi vo!..bilkul gol,kasi & nipples ka rang kitna dilkash tha!..kaise sakht ho rahe the uske nipples..dil ki dhadkano ke sath upar-neeche hota hua uska seena is waqt & jaanlewa lag raha tha.

deven ka daya hath kanpte hue aage badha.use lag raha tha ki uske hath us shaffaq gori husn pari ke badan ko maila kar denge & vo jhijhak raha tha.usne rambha ki nigaho me dekha & usne sar uske kandhe se thoda sa uthake uske lab chum liye.deven ne apna kanpta hath aage badhaya & bahut halke se rambha ki bayi chhati pe rakha.

us pal dono hi ke jismo me bijli daud gayi.rambha ne sar peechhe jhatakte hue aah bhari.uska dil kar raha tha ki uska aashiq ab uske un ubharo ko apnme sakht hatho tale raund dale..kuchal de un phoolo ko & uske bechain dil ko karar pahuchaye!..deven uske seene ko dekhte hue bahut halke hatho se uski bayi chhati ko sehla raha tha mano yakin karna chah raha ho ki uske hath us apri ke jism ko maila nahi kar rahe.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:01

जाल पार्ट--55

गतान्क से आगे......

कुच्छ पलो बाद जब उसे ये भरोसा हो गया तो वो अपनी उंगली को उसकी चूची पे दायरे की शक्ल मे घुमाने लगा.उंगली चूची की पूरी गोलाई पे घूमते हुए उसके निपल की ओर बढ़ रही थी & निपल पे पहुँचते ही उसने उसे ऐसे दबाया जैसे कोई बटन दबा रही हो.रंभा चिहुनकि और अपना सीना और आगे कर दिया.देवेन अब उसकी चूचियो को सख़्त हाथ से दबाने लगा.रंभा उसकी गोद मे कसमसाते हुए आहे भरने लगी.

देवेन ने उसके सीने के उभारो को जम के मसला.रंभा के चेहरे पे शिकन पड़ गयी थी.उसे बहुत मज़ा आ रहा था.उसके जिस्म मे दर्द उठने लगा था,मीठा दर्द & उसकी चूत तो रस की धार बहा ही रही थी.वो अपने होंठो को अपने ही दन्तो से काट रही थी.देवेन तो जैसे उसे भूल ही गया था और उसे बस उसकी चूचियाँ ही दिख रही थी.वो उन्हे देखते हुए उन्हे दबा रहा था.रंभा ने उसका चेहरा पकड़ के उपर किया तो उसने उसे चूम लिया.बहुत देर तक वो उसकी चूचियाँ दबाते हुए,उसके निपल्स को रगड़ते हुए उसे चूमता रहा.

उसके बाद वो नीचे हुआ & उन मस्ती भरे उभारो को अपने मुँह मे भर लिया.उसकी बाई बाँह पे टिकी रंभा पीछे झुक ज़ोर-2 से आहें भरने लगी.देवेन की आतुर ज़ुबान उसकी चूचियो को मुँह मे भर चाट रही थी & वो अपनी भारी जंघे आपस मे रगड़ते हुए अपनी चूत को समझा रही थी.रंभा के दिल मे भी अपने प्रेमी के जिस्म को चूमने की ख्वाहिश हुई & वो आगे हुई & अपने सीने से देवेन का सर उपर उठाया & झुक के वैसे ही उसके सीने को चूमने लगी जैसे वो उसके सीने को चूम रहा था.

वो मस्त आवाज़ें निकालते हुए उसके सीने के घने बालो मे अपनी नाक घुसा के रगड़ रही थी & उसके निपल्स को चूस रही थी.देवेन जैल से निकलने के बाद कयि औरतो के साथ हुम्बिस्तर हुआ था.कुच्छ पेशेवर थी & कुच्छ वो थी जिन्हे उस से रिश्ता जोड़ने की उम्मीद थी.उन सभी औरतो मे से किसी ने आज तक उसके निपल्स के साथ ऐसे खिलवाड़ नही किया था.वो आहे भरते हुए उसकी पीठ पे हाथ फिराने लगा .रंभा उसके सीने को चूमते हुए थोड़ा नीचे गयी & फिर उपर आ उसे बाहो मे भर उसके सीने मे मुँह च्छूपा लिया.

उसने उसकी ठुड्डी पकड़ चेहरा उपर किया & उसे चूमने लगा और चूमते हुए उसकी मखमली जाँघो के अन्द्रुनि हिस्सो को सहलाने लगा.रंभा ने जंघे भींच उसके हाथ को क़ैद कर लिया लेकिन फिर भी वो उसकी जाँघो को सहलाता रहा.रंभा अब जोश मे पागल हो गयी थी.उसने बेचैनी से अपनी कमर हिलाई तो देवेन ने उसकी हालत समझते हुए उसे बिस्तर पे लिटा दिया & उसकी पॅंटी खिचने लगा.पॅंटी उसकी चूत से चिपकी हुई थी & जब वो उसके जिस्म से अलग ही तो देवेन उसे सूंघने से खुद को रोक नही पाया.

अब वो उसके सामने बिल्कुल नंगी पड़ी थी & उसका हुस्न अपने पूरे शबाब मे उसके सामने था.रंभा को बहुत शर्म आ रही थी.वो चाह रही थी कि अपने जिस्म को ढँक ले मगर उसकी ये भी ख्वाहिश थी कि देवेन उसके जिस्म को भरपूर प्यार करे.अब ये उलझन तो 1 ही सूरत मे सुलझ सकती थी,अगर वो देवेन के जिस्म को खुद पे ओढ़ ले तो.

"आन्न्‍नणणनह..!",वो ख्यालो मे खोई थी कि देवेन उसकी जाँघो को चूमने लगा था.उसने तड़प के करवट ले ली & देवेन उसकी चौड़ी गंद को चूमने लगा.उसके सख़्त हाथ उसकी गंद को दबाने लगे & वो उसकी कमर के मांसल हिस्से को चूमने लगा.रंभा अब मस्ती मे बिल्कुल पागल हो चुकी थी.बिस्तर की चादर को ज़ोर से भींचते हुए वो आहे भरे जा रही थी.देवेन ने उसे सीधा किया & उसकी जंघे फैला दी.उसने उन्हे फिर से बंद कर लिया लेकिन उसने उसकी अनसुनी करते हुए उन्हे फैलाया & उसकी चूत पे झुक गया.

"हे भगवांनननननणणन्..हाईईईईईईईईई.......!",रंभा चीखी & बिस्तर पे छटपटाने लगी. उसका प्रेमी उसकी चूत चाट रहा था और उसकी ज़ुबान अपने दाने पे महसूस करते ही वो झाड़ गयी थी.उसने देवेन के सर को अपनी मोटी जाँघो मे दबा दिया तो देवेन ने जीभ उसकी चूत मे काफ़ी अंदर तक उतार दी.उसके हाथ उपर आए और अपनी महबूबा की चूचियो पे कस गये.रंभा कभी बेचैनी मे उसके सर के बाल नोचती तो कभी चूचियाँ मसल्ते उसके हाथो पे अपने हाथ दबाती.ना जाने कितनी देर तक वो उसकी चूत से बहते रस को चाटता रहा और वो झड़ती रही.देवेन ने उस जैसी हसीन लड़की नही देखी थी.वो उसे खास लगने लगी थी-शायद सुमित्रा की वजह से.

वो उसके जिस्म को प्यार कर उसे दुनिया की सारी खुशियो से वाकिफ़ कराना चाहता था.उसकी नाज़ुक,गुलाबी,कसी चूत देख उसका दिल खुशी और जोश से भर गया था & उसने उसे जी भर के चटा,चूमा & चूसा था.अपनी उंगली उसमे घुसा उसने उसकी कसावट महसूस की थी और उसका लंड उस एहसास से और सख़्त हो गया था.

रंभा ने नशे मे बोझल पॅल्को को थोड़ा सा खोला तो देखा कि देवेन अपना अंडरवेर उतरने ही वाला है.ठीक उसी वक़्त उसके दिल ने कहा कि उसका लंड विजयंत के लंड जैसा ही होगा & जब अंडरवेर नीचे सरका तो सच मे सामने 9.5 इंच का लंड तना खड़ा था.रंभा ने उसे देखा & अपने नीचे के होंठ को धीरे से काटा.देवेन का दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था..ये क्या हो रहा था उसे?..ये तो वोही एहसास था जो उसे सुमित्रा के करीब आने पे होता था..मगर सुमित्रा को कभी उसने चोदा नही था..फिर आज क्यू वही एहसास उसके दिल मे उमड़ रहा था?

"आन्न्‍न्णनह..!",उसने रंभा की जंघे फैलाई & अपने लंड को हाथ मे थाम उसकी चूत के दाने पे हल्के से मारा.रंभा जैसे दर्द से च्चटपताई.लंड की मार उसे जोश से पागल कर रही थी.अभी तक आहो के सिवा दोनो कुच्छ नही बोले थे & इस वक़्त भी रंभा ने बस कतर निगाहो से अपने आशिक़ को देखा मानो मिन्नत कर रही हो कि और ना तडपाए और दोनो जिस्मो की दूरी को अब हमेशा-2 के लिए मिटा दे.देवेन ने उसकी आँखो को पढ़ लिया & इस बार लंड को उसकी गीली चूत की दरार पे रख आगे झुका.

"आआहह..!"

"ओईईईईईईईईईईईईईईईईई....माआआआआआआआअ..!",दोनो प्रेमी कराह,देवेन उसकी चूत के बेहद कसे होने की वजह से & रंभा उसके लंड की लूंबाई & मोटाई से.देवेन का लंड विजयंत से मोटा था & इस वक़्त अंदर जाते हुए वो रंभा की चूत को बुरी तरह फैला रहा था.रंभा को वही मस्ताना एहसास हुआ जो विजयंत के साथ होता था बल्कि उस से भी कुच्छ ज़्यादा!

देवेन ने झांतो तक लंड को उसकी चूत मे धंसा के ही दम लिया.जैसे ही लंड का सूपड़ा उसकी कोख से सटा रंभा के जिस्म ने झटका खाया & वो झाड़ गयी.रंभा हैरत & खुमारी मे आहें भरने लगी..उसकी मर्दानगी की कायल हो गयी वो उसी पल!..अभी बस लकंड अंदर घुसा था और वो झाड़ गयी थी.

देवेन भी उसकी चूत के सिकुड़ने-फैलने की जानलेवा हरकत से चौक गया था और बड़ी मुश्किल से उसने खुद को झड़ने से रोका था.उसने अब बहुत धीमे और लंबे धक्को से उसकी चुदाई शुरू की.वो लंड पूरा बाहर खींचता और फिर जड तक अंदर घुसा देता.लंड कोख से टकराता तो रंभा के जिस्म मे मानो सितार बजने लगते.वो खुशी मे पागल हो गयी & उसने अपने आशिक़ को अपनी नाज़ुक,गुदाज़ बाहो मे कस लिया & उसके चेहरे पे अपने आभारी होंठो से चूमने लगी.देवेन का लंड उसकी चूत की दीवारो को भी रगड़ रहा था.उसके हाथ उसकी छातियो को मसला रहे थे और होंठ उसके चेहरे से लेके सीने तक घूम रहे थे.रंभा 1 बार फिर मस्ती के आसमान मे ऊँचा उड़ने लगी थी.उसकी चूत से बहते रस की हर तेज़ हो गयी थी.

उसी वक़्त देवेन ने अपनी बाई बाँह उसकी गर्दन के नीचे लगाई और उसे चूमते हुए उसकी बाई जाँघ पे अपना दाया हाथ बेसब्री से फिराने लगा.रंभा ने अपनी टाँगे उसकी कमर पे कैंची की तरह कस दी & कमर उचकाने लगी.देवेन की चुदाई उसे जोश से भर रही थी & उसने टाँगो को नीचे कर उसकी जाँघो पे फँसाया & उनके सहारे & ज़ोर-2 से कमर उचकाने लगी.

देवेन का दाया हाथ मस्ती मे पागल हो उसकी कमर को सहलाते हुए नीचे गया & उसकी गंद की बाई फाँक को दबोच लिया.रंभा ने सर झटकते हुए आह भरी तो देवेन ने उसकी गंद को दबोचे हुए बाई तरफ करवट ले ली.अब दोनो करवट से लेटे हुए थे & रंभा की बाई टाँग देवेन के उपर चढ़ि हुई थी & वो उसे बाँहो मे भरे मदहोश हो चूमे जा रही थी.देवेन उसकी गंद को सहलाता,उसकी दरार मे उंगली फिराता धक्के तेज़ कर रहा था.रंभा उस से बिल्कुल चिपकी हुई थी & उसके नाख़ून देवेन के कंधो & पीठ पे घूम रहे थे.

"उउफफफफफफफफफ्फ़..ओईईईईईईईईईई..माआआआआअ..हाआआआआअन्न्‍नननननननणणन्..!",रंभा ने देवेन के दाए गाल से बाया गाल सटाया हुआ था & उसकी बाई टांग उसकी कमर पे चढ़ि बेचैनी से उपर-नीचे हो रही थी.उसकी कमर आगे-पीछे हो रही थी & जिस्म झटके खा रहा था-वो झाड़ रही थी.देवेन को लंड पे फिर से उसकी चूत की क़ातिल कसावट महसूस हुई & उसके होंठ महबूबा की गर्दन से चिपक गये.

देवेन ने फ़ौरन करवट ली & इस बार पीठ के बल लेट गया.अब रंभा उसके उपर लेटी उसकी गर्दन मे मुँह च्छुपाए साँसे संभाल रही थी.देवेन उसकी पीठ सहला रहा था.कुच्छ पलो बाद देवेन ने उसके रेशमी बालो को उसके चेहरे से हटाया & उसके चेहरे को उपर कर चूमा & फिर उसके कंधे थाम उसे उपर किया.रंभा उसके दोनो तरफ घुटने जमाए उपर हुई.

देवेन की निगाहे अपने होंठो के ताज़ा निशानो से ढँकी उसकी चूचियो से टकराई तो वो खुशी से चमकने लगी.उस चमक को देख रंभा शर्मा गयी & उसने अपने हाथो से अपने दिलकश उभारो को च्छूपा लिया.देवेन ने उसके हाथ पकड़ के उसके सीने से हटाए और अपनी उंगलिया उसकी उंगलियो मे फँसा उन्हे अपनी गिरफ़्त मे ले लिया.उसकी आँखे रंभा के हया और मदहोशी से भरी सूरत से लेके उसकी गीली उसके लंड को अपने अंदर ली चूत तक घूमने लगी.

रंभा ने उसकी निगाहो की तपिश से आहत हो हाथ छुड़ाने की कोशिश की तो देवेन ने हाथो को और मज़बूती से थाम नीचे से कमर उचकाई.

"ऊव्ववव..!",रंभा चिहुनकि मगर उसकी कमर खुद ब खुद हिलने लगी और 1 बार फिर दोनो की चुदाई शुरू हो गयी.कुच्छ ही पल मे रंभा अपने बाल झटकती,जिस्म को कमान की तरह मोडती तेज़ी से कमर हिला रही थी.मस्ती मे पागल हो वो नीचे झुकी & देवेन के हाथ उसके सर के दोनो तरफ जमाते हुए उसे चूमने लगी.देवेन उसकी मदहोशी का पूरा लुत्फ़ उठा रहा था.रंभा उसके सीने को चाट रही थी,उसके निपल्स को काट रही थी.उसकी चूत मे फिर से कसक बहुत क़ातिल हो गयी थी & उसकी कमर बहुत तेज़ी से हिल रही थी.

"उउन्न्ञणणनह...आआहहाआआन्न्‍नननणणन्......!",उसने सर उठा लिया था और उसकी पकड़ देवेन के हाथो पे ढीली हो गयी थी.देवेन ने फ़ौरन उसे बाहो मे भर लिया & करवट ली.दोनो की जद्ड़ोजेहाद से बिस्तर की चादर मूड के 1 कोने मे पहुँच गयी थी & पलंग से नीचे लटक रही थी.देवेन अब अपनी प्रेमिका की चूत मे झाड़ अपने अरमानो को पूरा करना चाहता था.उसकी बाई बाँह अभी भी उसकी गर्दन के नीचे थे.उसने उसे अपने से चिपका के अपने नीचे दबा धक्का मारा तो रंभा कस कर बिस्तर से नीचे लटक गया.

देवेन उसके उपर झुका उसकी गर्दन चूमता उसे चोदने लगा.रंभा अब चीख रही थी.शायद दोनो की आवाज़ें बाहर गाँव की सड़क पे भी सुनाई दे रही थी.जो भी हो,उन दोनो को अब किसी बात की परवाह नही थी.देवेन का दाया हाथ उसके जिस्म के नीचे से उसके बाए कंधे को थामे था & अब उसके धक्के बहुत तेज़ हो गये थे.रंभा समझ गयी थी कि वो भी अपनी मंज़िल तक पहुचना चाहता है.उसके हाथ भी उसके बालो को खींच रहे थे.उसकी चूत की कसक अब चरम पे पहुँच रही थी.

देवेन का लंड उसकी चूत को ऐसे भरे हुए था की उसे पूरा जिस्म भरा-2 लग रहा था.उसके दिल मे कुच्छ बहुत मीठा,कुच्छ बहुत नशीला भरने लगा था.उसे ऐसा शिद्दत भरा एहसास पहले कभी नही हुआ था और वो मस्ती मे आहत हो च्चटपटते हुए देवेन की पीठ नोचने लगी थी.उसकी टाँगे उसकी जाँघो पे चढ़ि उपर -नीचे हो उसकी टाँगो के बालो मे खुद को रगड़ रही थी.देवेन के दिल मे भी खुशी भरी हुई थी-वो खुशी जिसे वो भूल गया था.रंभा को खुद से चिपकाए वो उसे चूमते हुए अब क़ातिल धक्के लगा रहा था.

"ऊऊऊऊहह..!",रंभा आह भरते हुए उचकी और देवेन की गर्दन के ठीक नीचे पागलो की तरह चूमने लगी.उसकी चूत ने अपनी मस्तानी हरकत शुरू कर दी थी & देवेन भी अब आख़िरी धक्के लगा रहा था.रंभा के होंठो ने अपनी छाप छ्चोड़ने के बाद देवेन के सीने को छ्चोड़ा & वो मदहोशी मे 'ओ' के आकर मे गोल हो गये.रंभा का सर बिस्तर से नीचे लटक गया था & उसके हाथ भी.उसके होंठ थारथरा रहे थे & जिस्म कांप रहा था.झड़ने की ऐसी शिद्दत उसने कभी महसूस नही की थी कि तभी वो बहुत ज़ोर से करही,",ऊऊवन्न्‍नणणनह..!"

"तड़क्कककक..!",उसने अपने चेहरे को पागलो की तरह चूमते देवेन को चांटा मार दिया था.रंभा की आँखो से आँसू छलक गये.देवेन के लंड ने उसकी कोख से टकराते हुए अपने वीर्य की गर्म बारिश सीधा उसके अंदर की थी & उस बौच्हर ने उसके जिस्म को फिर से झाड़वा दिया था.वो उस गहरे एहसास को बर्दाश्त नही कर पाई थी & उस वक़्त देवेन के होंठो की च्छुअन भी वो झेल नही पाई & उसका हाथ उठ गया.वो ज़ोर-2 से सूबक रही थी.देखने वाले को ये लगता कि लड़की तकलीफ़ मे है जबकि सच्चाई ये थी कि उस लड़की ने वो बेइंतहा खुशी पाई थी जिसके आबरे मे उसके सपने मे भी नही सोचा था.

देवेन ऐसे कभी नही झाड़ा था.इतनी कसी चूत मे उसने कभी अपना लंड नही घुसाया था & झाड़ते वक़्त जो खुशी उसे मिली वो बिल्कुल अनूठी थी लेकिन रंभा के थप्पड़ ने उसे हैरत मे डाल दिया & उसे लगा कि उसने कुच्छ ग़लत किया है.आजतक जब भी उसने चुदाई की थी उसके साथ की लड़की झड़ी ज़रूर थी मगर इस तरह से उसने किसी को झाड़ते नही देखा था.उसकी समझ मे नही आ रहा था कि वो क्या करे & वो वैसे ही उसे बाहो मे थामे पड़ा रहा.

काफ़ी देर बाद रंभा होश मे आई & उसकी रुलाई रुकी तो उसने खुद को चिंता से देखते देवेन को देखा.कहते हैं दिल से दिल को राह होती है & उस पल जैसे इसी बात को सच साबित करते हुए रंभा का दिल देवेन की उलझन समझ गया.वो फ़ौरन उपर उचकी & उसे बाहो मे भर उसके गाल को चूमने लगी.देवेन ने वैसे ही सिकुदे लंड को चूत मे डाले हुए उसे बाहो मे भर उसके सर को उपर बिस्तर पे किया.

"सॉरी,आपको मारा मैने.",रंभा की आँखो मे अभी भी नशे के डोरे दिख रहे थे,"..मगर आपने मुझे ऐसे प्यार किया,जैसे कभी किसी ने नही किया है..& मैं वो खुशी झेल नही पाई थी.",बात समझते ही देवेन के होंठो पे मुस्कान आ गयी & उसने उसे गले से लगा लिया,"आइ लव यू."

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क्रमशः.......

JAAL paart--55

gataank se aage......

kuchh palo baad jab use ye bharosa ho gaya to vo apni ungli ko uski choochi pe dayre ki shakl me ghumane laga.ungli choochi ki puri golayi pe ghumte hue uske nipple ki or badh rahi thi & nipple pe pahunchte hi usne use aise dabaya jaise koi button daba rahi ho.rambha chihunki & apna seena & aage kar diya.deven ab uski chhatiyo ko sakht hath se dabane laga.rambha uski god me kasmasate hue aahe bharne lagi.

deven ne uske seene ke ubharo ko jum ke masla.rambha ke chehre pe shikan pad gayi thi.use bahut maza aa raha tha.uske jism me dard uthne laga tha,meetha dard & uski chut to ras ki dhar baha hi rahi thi.vo apne hotho ko apne hi danto se kaat rahi thi.deven to jaise use bhool hi gaya tha & use bas uski chhatiyan hi dikh rahi thi.vo unhe dekhte hue unhe daba raha tha.rambha ne uska chehra pakad ke upar kiya to usne use chum liya.bahuit der tak vo uski choochiyan dabate hue,uske nipples ko ragadte hue use chumta raha.

uske baad vo neeche hua & un masti bhare ubharo ko apne munh me bhar liya.uski bayi banh pe tiki rambha peechhe jhuk zor-2 se aahen bharne lagi.deven ki aatur zuban uski choochiyo ko munh me bhar chaat rahi thi & vo apni bhari janghe aapas me ragadte hue apni chut ko samjha rahi thi.rambha ke dil me bhi apne repmi ke jism ko chumne ki khwahish hui & vo aage hui & apne seene se deven ka sar upar uthaya & jhuk ke vaise hi uske seene ko chumne lagi jaise vo uske seene ko chum raha tha.

vo mast aavazen nikalte hue uske seene ke ghane baalo me apni naak ghusa ke ragad rahi thi & uske nipples ko chus rahi thi.deven jail se nikalne ke baad kayi aurato ke sath humbistar hua tha.kuchh peshevar thi & kuchh vo thi jinhe us se rishta jodne ki umeed thi.un sabhi aurato me se kisi ne aaj tak uske nipples ke sath aise khilwad nahi kiya tha.vo aahe bharte hue uski pith pe hath firane laga .rambha uske seene ko chumte hue thoda neeche gayi & fir upar aa use baaho me bhar uske seene me munh chhupa liya.

usne uski thuddi pakad chehra upar kiya & use chumne laga & chumte hue uski makhmali jangho ke andruni hisso ko sehlane laga.rambha ne janghe bhinch uske hath ko qaid kar liya lekin fir bhi vo uski jangho ko sehlata raha.rambha ab josh me pagal ho gayi thi.usne bechaini se apni kamar hilayi to deven ne uski halat samajhte hue use bistar pe lita diya & uski panty khichne laga.panty uski chut se chipki hui thi & jab vo uske jism se alag hi to deven use sunghane se khud ko rok nahi paya.

ab vo uske samne bilkul nangi padi thi & uska husn apne pure shabab me uske samne tha.rambha ko bahut sharm aa rahi thi.vo chah rahi thi ki apne jism ko dhank le magar uski ye bhi khwahish thi ki deven uske jism ko bharpur pyar kare.ab ye uljhan to 1 hi surat me sulajh sakti thi,agar vo deven ke jism ko khud pe odh le to.

"aannnnnnhhhhhh..!",vo kahyalo me khoyi thi ki deven uski jangho ko chumne laga tha.usne tadap ke karwat le li & deven uski chaudi gand ko chumne laga.uske sakht hath uski gand ko dabane lage & vo uski kamar ke mansal hisse ko chumne laga.rambha ab masti me bilkul pagal ho chuki thi.bistar ki chadar ko zor se bhinchte hue vo aahe bhare ja rahi thi.deven ne sue seedha kiya & uski janghe phaila di.usne unhe fir se band kar liya lekin usne uski ansuni karte hue unhe phailaya & uski chut pe jhuk gaya.

"hey bhagwannnnnnnnn..haiiiiiiiiii.......!",rambha chikhi & bistar pe chhatpatane lagi.sduka premni uski chut chaat raha tha & uski zuban apne dane pe mehsus karte hi vo jhad gayi thi.usne deven ke sar ko apni moti jangho me daba diya to deven ne jibh uski chut me kafi andar tak utar di.uske hath upar aaye & apni mehbooba ki choochiyo pe kas gaye.rambha kabhi bechaini me uske sar ke baal nochti to kabhi choochiyan masalte uske hatho pe apne hath dabati.na jane kitni der tak vo uski chut se behte ras ko chaatata raha & vo jhadti rahi.deven ne us jaisi haseen ladki nahi dekhi thi.vo use khas lagne lagi thi-shayad sumitra ki vajah se.

vo uske jism ko pyar kar use duniya ki sari khushiyo se vakif karana chahta tha.uski nazuk,gulabi,kasi chut dekh uska dil khushi & josh se bhar gaya tha & usne use ji bhar ke chata,chuma & chusa tha.apni ungli usme ghusa usne uski kaswat mehsus ki thi & uska lund us ehsas se & sakht ho gaya tha.

Rambha ne nashe me bojhal palko ko thoda sa khola to dekha ki deven apna underwear utarne hi wala hai.thik usi waqt uske dil ne kaha ki uska lund Vijayant ke lund jaisa hi hoga & jab underwear neeche sarka to sach me samne 9.5 inch ka lund tana khada tha.rambha ne sue dekha & apne neeche ke honth ko dhire se kata.deven ka dil bahut zoro se dhadak raha tha..ye kya ho raha tha use?..ye to vohi ehsas tha jo use Sumitra ke karib aane pe hota tha..magar sumitra ko kabhi usne choda nahi tha..fir aaj kyu vahi ehsas uske dil me umad raha tha?

"aannnnnhhhhh..!",usne rambha ki janghe failayi & apne lund ko hath me tham uski chut ke dane pe halke se mara.rambha jaise dard se chhatpatayi.lund ki maar use josh se pagal kar rahi thi.abhi tak aaho ke siwa dono kuchh nahi bole the & is waqt bhi rambha ne bas katar nigaho se apne aashiq ko dekha mano minnat kar arhi ho ki & na tadpaye & dono jimso ki doori ko ab humesha-2 ke liye mita de.deven ne uski aankho ko padh liya & is baar lund ko uski gili chut ki darar pe rakh aage jhuka.

"aaaahhhhhhhhhh..!"

"ouiiiiiiiiiiiiiiiiiiii....maaaaaaaaaaaaaaaaa..!",dono premi karahe,deven uski chut ke behad kase hone ki vajah se & rambha uske lund ki lumbai & motai se.deven ka lund vijayant se mota tha & is waqt andar jate hue vo rambha ki chut ko buri tarah phaila raha tha.rambha ko vahi mastana ehsas hua jo vijayant ke sath hota tha balki us se bhi kuchh zyada!

deven ne jhanto tak lund ko uski chut me dhansa ke hi dum liya.jaise hi lund ka supada uski kokh se sata rambha ke jism ne jhatka khaya & vo jhad gayi.rambha hairat & khumari me aahen bharne lagi..uski mardangi ki kayal ho gayi vo usi pal!..abhi bas lkund andar ghusa tha & vo jhad gayi thi.

deven bhi uski chut ke sikudne-failne ki jaanlewa harkat se chauk gaya tha & badi mushkil se usne khud ko jhadne se roka tha.usne ab bahut dheeme & lumbe dhakko se uski chudai shuru ki.vo lund pura bahar khinchta & fir jud tak andar ghusa deta.lund kokh se takrata to rambha ke jism me mano sitar bajne lagte.vo khushi me pagal ho gayi & usne apne aashiq ko apni nazuk,gudaz baaho me aks liya & uske chehre pe apne aabhari hotho se chumne lagi.deven ka lund uski chut ki deewaro ko bhi ragad raha tha.uske hath uski chhatiyo ko masla rahe the & honmth uske chehre se leke seene tak ghum rahe the.rambha 1 baar fir masti ke aasman me ooncha udne lagi thi.uski chut se behte ras ki har tez ho gayi thi.

usi waqt deven ne apni bayi banh uski gardan ke neeche lagayi & sue chumte hue uski bayi jangh pe apna daya hath besabri se firane laga.rambha ne apni tange uski kamar pe kainchi ki tarah kas di & kamar uchkane lagi.deven ki chudai use josh se bhar rahi thiu & usne tango ko neeche kar uski jangho pe phansaya & unke sahare & zor-2 se kamar uchkane lagi.

deven ka daya hath masti me pagal ho uski kamar ko sehlate hue neeche gaya & uski gand ki bayi fank ko daboch liya.rambha ne sar jhatakte hue aah bhari to deven ne uski gand ko daboche hue bayi taraf karwat le li.ab dono karwat se lete hue the & rambha ki bayi tang devcen ke upar chadhi hui thi & vo us ebahao me bhare madhosh ho chume ja rahi thi.deven uski gand ko sehlata,uski darar me ungli firata dhakke tez kar raha tha.rambha su se bilkul chipki hui thi & suke nakhun deven ke kandho & pith pe ghum rahe the.

"uuffffffffff..ouiiiiiiiiiiiii..maaaaaaaaaaa..haaaaaaaaaaannnnnnnnnnnn..!",rambha ne deven ke daye gaal se baya gaal sataya hua tha & uski bayi tang uski kamar pe chadhi bechaini se upar-neeche ho rahi thi.uski kamar aage-peechhe ho rahi thi & jism jhatke kha raha tha-vo jhad rahi thi.deven ko lund pe fir se uski chut ki qatil kasawat mehsus hui & uske honth mehbooba ki gardan se chipak gaye.

deven ne fauran karwat li & is baar pith ke bal let gaya.ab rambha uske uapr leti uski gardan me munh chhupaye saanse sambhal rahi thi.deven uski pith sehla raha tha.kuchh palo baad deven ne uske rehmi baalo ko uske chehre se hataya & uske chehre ko upar kar chuma & fir uske kandhe tham use upar kiya.rambha uske dono taraf ghutne jamaye upar hui.

deven ki niaghen apne hotho ke taza nishano se dhanki uski chhatiyo se takrayi to vo khushi se chamkane lagi.us chamak ko dekh rambha sharma gayi & usne apne hatho se apne dilkash ubharo ko chhupa liya.deven ne uske hath pakad ke uske seene se hataye & apni ungliya uski ungliyo me phansa unhe apni giraft me le liya.uski aankhe rambha ke haya & madhoshi se bhari surat se leke uski gili uske lund ko apne andar li chut tak ghumne lagi.

rambha ne uski nigaho ki tapish se aahat ho hath chhudane ki koshish ki to deven ne hatho ko & mazbuti se tham neeche se kamar uchkayi.

"oow.!",rambha chihunki magar uski kamar khud ba khud hilne lagi & 1 baar fir dono ki chudai shuru ho gayi.kuchh hi pal me rambha apne baal jhatakti,jism ko kaman ki tarah modti tezi se kamar hila rahi thi.masti me pagal ho vo neeche jhuki & deven ke hath uske sar ke dono taraf jamate hue use chumne lagi.deven uski madhoshi ka pura lutf utha raha tha.rambha uske seene ko chaat rahi thi,uske nipples ko kaat rahi thi.uski chut me fir se kasak bahut qatil ho gayi thi & uski kamar bahut tezi se hil rahi thi.

"uunnnnnnhhhhhh...aaaahhhhhhhhaaaaaannnnnnnn......!",usne sar utha liya tha & uski pakad deven ke hatho pe dhili ho gayi thi.deven ne fauran use baaho me bhar liya & karwat li.dono ki jaddojehad se bistar ki chadar mud ke 1 kone me pahunch gayi thi & palang se neeche latak rahi thi.deven ab apni premika ki chut me jhad apne armano ko pura karna chahta tha.uski bayi banh abhi bhi uski gardan ke neeche the.usne use apne se chipka ke apne neeche daba dhakka mara to rambha kas ar bistar se neeche latak gaya.

deven uske upar jhuka uski gardan chumta use chodne laga.rambha ab chikh rahi thi.shayad dono ki aavazen bahar ganv ki sadak pe bhi sunai de rahi thi.jo bhi ho,un dono ko ab kisi baat ki parwah nahi thi.deven ka daya hath uske jism ke neeche se uske baye kandhe ko thame tha & ab uske dhakke bahut tez ho gaye the.rambha samjha gayi thi ki vo bhi apni manzil tak pahuchana chahta hai.uske hath bhi uske baalo ko khinch rahe the.uski chut ki kaska ab charam pe pahunch rahi thi.

deven ka lund uski chut ko aise bhare hue tha ki use pura jism bhara-2 lag raha tha.uske dil me kuchh bahut mitha,kuchh bahut nashila bharne laga tha.use aisa shiddat bhara ehsas pehle kabhi nahi hua tha & vo masti me aahat hao chhatapatate hue deven ki pith nochne lagi thi.uski tange uski jangho pe chadi upar -neeche ho uski tango ke baalo me khud ko ragad rahi thi.deven ke dil me bhi khushi bhari hui thi-vo khushi jise vo bhul gaya tha.rambha ko khud se chipkaye vo use chumte hue ab qatil dhakke laga raha tha.

"oooooooohhhhhhhhhhh..!",rambha aah bharte hue uchki & deven ki gardan ke thik neeche paglo ki tarah chumne lagi.uski chut ne apni mastani harkat shuru kar di thi & deven bhi ab aakhiri dhakke laga raha tha.rambha ke hontho ne apni chhap chhodne ke baad deven ke seene ko chhoda & vo madhoshi me 'O' ke aakar me gol ho gaye.rambha kas ar bistar se neeche latak gaya tha & uske hath bhi.uske honth thathara rahe the & jism kanp raha tha.jhadne ki aisi shiddat usne kabhi mehsus nahi kit hi ki tabhi vo bahut zor se karahi,",OOOOONNNNNNHHHHHHHH..!"

"tadakkkkk..!",usne apne chehre ko paglo ki tarah chumte deven ko chanta maar diya tha.rambha ki aankho se aansu chhalak gaye.deven ke lund ne uski kokh se takrate hue apne virya ki garm basrish seedha uske andar ki thi & us bauchhar ne uske jism ko fir se jhadwa diya tha.vo us gehre ehsas ko bardasht nahi kar payi thi & us waqt deven ke hotho ki chhuan bhi vo jhel nahi payi & uska hath uth gaya.vo zor-2 se subak rahi thi.dekhne vale ko ye lagta ki ladki taklif me hai jabki sachchai ye thi ki us ladki ne vo beintaha khushi payi thi jiske abre me uske sapne me bhi nahi socha tha.

deven aise kabhi nahi jhada tha.itni kasi chut me usne kabhi apna lund nahi ghusaya tha & jhadte waqt jo khushi use mili vo bilkul anuthi thi lekin rambha ke thappad ne use hairat me daal diya & use laga ki usne kuchh galat kiya hai.aajtak jab bhi usne chudai ki thi uske sath ki ladki jhadi zarur thi magar is tarah se usne kisi ko jhadte nahi dekha tha.uski samajh me nahi aa raha tha ki vo kya kare & vo vaise hi use baaho me thame pada raha.

kafi der baad rambha hosh me aayi & uski rualyi ruki to usne khud ko chinta se dekhte deven ko dekha.kehte hain dil se dil ko raah hoti hai & us pal jaise isi baat ko sach sabit karte hue rambha ka dil deven ki uljhan samajh gaya.vo fauran upar uchki & use baaho me bhar uske gaal ko chumne lagi.deven ne vaise hi sikude lund ko chut me dale hue use baaho me bhar uske sar ko upar bistar pe kiya.

"sorry,aapko mara maine.",rambha ki aankho me abhi bhi nashe ke dore dikh rahe the,"..magar aapne mujhe aise pyar kiya,jaise kabhi kisi ne nahi kiya hai..& main vo khushi jhel nahi payi thi.",baat samajhte hi deven ke hotho pe muskan aa gayi & usne use gale se laga liya,"i love you."

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:02

जाल पार्ट--56

गतान्क से आगे......

देवेन ने उसके प्यार के इज़हार को सुन सर उपर उठाया & उसकी आँखो मे झाँकने लगा..वो इस लड़की की जान लेना चाहता था लेकिन आज उसे उस से जुदा होने के ख़याल से ही डर लग रहा है..वो उसकी जान बन गयी है..कैसा अजीब खेल खेला था उपरवाले ने..मा की जिस अधूरी चाहत की प्यास ने उसे आजतक बेताब & बहाल कर रखा था,वो आज बेटी की बाहो मे बुझी थी,"आइ लव यू टू.",वो झुका & दोनो के होंठ 1 दूसरे की लज़्ज़त चखने लगे.

"उन्न्ञन्..मत जाइए ना!",बिजली चली गयी थी & देवेन उसकी चूत से लंड खींच उठने लगा था जब रंभा ने उसे रोक दिया था.

"अंधेरे मे तुम दिख नही रही मुझे.लालटेन तो लाने दो.",उसने उसके होंठो पे दाए हाथ की उंगली को फिराया तो रंभा ने मस्ती मे आह भरी और उंगली के पोरो को चूमा & फिर उसे मुँह मे भर चूसने लगी.

"चाँदनी तो आ रही है खिड़की से,लालटेन की क्या ज़रूरत है.",रंभा ने उसे बाहो मे भरे रखा.देवेन हंसा & उंगली को उसके होंठो से हटा अंगूठे को उनपे दबा दिया.रंभा ने उसे शरारत से काट लिया तो दोनो हँसने लगे मगर अगले ही पल देवेन खामोश हो गया और उसके चेहरे पे उदासी की परच्छाई आ गयी.

"क्या हुआ?",रंभा ने उसके चेहरे को हाथो मे थाम लिया.

"कुच्छ नही.बस ये सोच रहा था कि कुच्छ दिन बाद तुम अपनी ज़िंदगी मे लौट जाओगी फिर मैं कैसे जियूंगा?..वही उलझन,वही बेकरारी फिर मेरे सीने को जलाने लगेगी."

"ये उलझन,ये बेकरारी बस चंद दीनो के लिए होगी.",रंभा ने उसके कंधे थामे & पलटने का इशारा किया तो वो उसके नीचे आ गया.रंभा ने चूत से लंड को जुदा किया & उसके सीने को चूमते हुए नीचे जाने लगी.

"मुझे बहलाने की कोशिश कर रही हो?..चंद दिनो की कैसे होगी?..तुम्हारी अपनी ज़िंदगी है,अपनी दुनिया है..आहह..!",देवेन आँखे बंद कर कराहा.रंभा उसके लंड तक पहुँच गयी थी & उसे थाम के चूम लिया था.

"बहलाने की कोशिश नही कर रही.",रंभा ने सूपदे पे लगे उसके वीर्य & अपने रस को चॅटा.उसकी चूत से बह के देवेन का वीर्य उसकी जाँघो से चिपक गया था,"..सच कह रही हू.अब मैं भी आपके बगैर नही रह सकती!",रंभा झुकी & लंड को मुँह मे भर लिया & आँखे बंद कर चूसने लगी.

"ओह..रंभा,पागल मत बनो!",वो उठ बैठा था & लंड चुस्ती रंभा के बाल सहला रहा था,"..मैं बस अपने दिल का हाल कह रहा था.मेरी वजह से अपना बसा-बसाया घर क्यू उजाड़ रही हो?",रंभा ने दाए हाथ के अंगूठे & पहली उंगली के दायरे मे लंड को हिलाना शुरू कर दिया था & साथ-2 उसे चूस भी रही थी.उसका दूसरा हाथ झांतो से घिरे देवेन के आंडो को दबा रहा था.उसने लंड को हिलाना छ्चोड़ा & उसे मुँह मे भरने लगी.उसकी सांस अटकने लगी थी लेकिन उसने लंड को अंदर लेना नही छ्चोड़ा.लंड का कुच्छ हिस्सा उसके हलक मे भी चला गया था.देवेन की कमर अपनेआप हिल गयी.उसे ऐसा लग रहा था मानो वो फिर से अपनी महबूबा के चूत मे लंड घुसा रहा हो.

रंभा उसे जड तक मुँह मे भर चूस रही थी.देवेन उसके बालो को पकड़े बेचैनी मे आहें भर रहा था & उसने अचानक लंड बाहर खींच लिया.हाँफती रंभा ने उसे देखा & मुस्कुराइ.झड़ने के डर से उसने लंड खींच लिया था.उसने देवेन की टाँगे पकड़ उन्हे पलंग से नीचे लटका दिया & फिर ज़मीन पे घुटनो के बल उनके बीच आ गयी.

"इतना सुकून मैने कभी महसूस नही किया..",उसने अपनी भारी-भरकम चूचियो को अपने हाथो मे थामा & देवेन के खड़े लंड को उनके बीचे कस लिया.देवेन ने आह भरते हुए उसके सर को पकड़ लिया.वो अपनी चूचियो को आपस मे भींच उन्हे उपर-नीचे कर लंड को रगड़ने लगी,"..& बसा-बसाया घर?..हुंग!....वो पति जो मुझे खिलोना समझता है & मुझसे बेवफ़ाई कर रहा है..मैने भी उसे धोखा दिया है.उसकी ब्यहता होते हुए उसके पिता के साथ सोई लेकिन कभी बताउन्गि आपको किन हालात मे मेरे ससुर और मैं करीब आए थे..",उसने लंड को और ज़ोर से रगड़ा & झुक के उसके सूपदे को चूमा.

"..मगर वो मुझे किस वजह से धोखा दे रहा है & मुझे छ्चोड़ना चाह रहा है सिवाय इसके कि उसका मन भर गया लगता है!",देवेन ने उसके बाल पकड़ उसे उपर खींचा & बिस्तर पे लेट गया & उसे उपर आने का इशारा किया.रंभा ने सोचा कि वो उसे उपर से लंड अपनी चूत मे लेने को कह रहा है & वो उसके जिस्म के दोनो ओर घुटने जमाके उसपे झुकने लगी कि उसने उसकी कमर पकड़ के उसे आगे किया & अपने मुँह पे बिठा लिया.

"ऊव्वववव....हााअ....मुझे गुदगुदी होती है..नही..!",वो हस्ते हुए मस्त होने लगी.देवेन उसकी अन्द्रुनि जाँघो मे अपनी नाक घुसा के ज़ोर से रगड़ उसे गुदगुदा रहा था.अगले पल उसकी ज़ुबान उसकी चूत की दरार पे दस्तक दे रही थी.

"रंभा,मैं नही जानता कि तुम्हारी शादी मे क्या परेशानी है मगर मेरे साथ तुम्हारा भविश्य कुच्छ भी नही..-",रंभा ने अपनी चूत उसके होंठो पे दबा उसे खामोश कर दिया था.वो भी उसकी अन्द्रुनि जाँघो को सहलाते हुए उसकी चूत चाटने लगा था.

"-..उउन्न्ञणनह..आहह..आप मेरी ज़िंदगी का 1 अहम हिस्सा हैं अब और आगे से मुझसे दूर जाने की बात करने का आपको कोई हक़ नही..ऊव्वववववव..",रंभा मस्ती मे कमर हिलाते हुए आगे झुक गयी.देवेन ने उसके दाने को बहुत धीमे से होंठो से काट लिया था,"..मैं यहा से जाऊंगी अपने पति के पास,उसे & उस लड़की को सज़ा देने के लिया,जिसके लिए वो मुझे छ्चोड़ना चाहता है.मुझे चोट पहुचने की कीमत तो मुझे अदा करनी ही पड़ेगी..आआन्न्न्नह..हााआआन्न्‍ननणणन्..!",रंभा उसके बालो को जकड़े,ज़ोर-2 से कमर हिलाती झाड़ रही थी.देवेन ने उसकी गंद पकड़ उसकी चूत को मुँह से उठाया तो वो आगे हो पेट के बल बिस्तर पे गिर गयी.देवेन उसकी टाँगो के बीचे सर रखे हुए करवट बदल पेट के बल हुआ & उसकी चूत से टपकते रस को चाट लिया.उसकी नज़रो के सामने रंभा की गंद का गुलाबी छेद था.उसकी गंद बहुत मस्त थी.

इतनी भारी-भरकम होने के बावजूद माँस कही से भी लटका नही था.उसने जोश मे भर उसकी गंद की दोनो फांको को काट लिया & उन्हे मसलते हुए उसकी गंद के छेद को अपनी ज़ुबान से छेड़ने लगा.

"तुम कोई ग़लत कदम नही उथाओगि.",वो उसकी गंद को फैलते हुए छेद मे उंगली कर रहा था.

"ऊन्न्‍नणणनह..उसके लिए आप बेफ़िक्र रहिए..इतनी भी गरम मिजाज़ नही हू..ऊव्ववववववव..!",उंगली बहुत अंदर तक घुस गयी थी.

देवेन विजयंत की ही तरह रंभा के गंद के च्छेद को उंगली कर के थोड़ा फैलाना चाहता था ताकि लंड आसानी से उसके अंदर जा सके.रंभा उसकी उंगली की रगड़ से मदहोश हुए जा रही थी.देवेन ने उसके पेट के नीचे हाथ लगा के उसकी कमर उपर की तो रंभा ने भी गंद हवा मे उठा ली & चेहरा बिस्तर मे च्छूपा लिया.उसकी उंगलिया अब बिस्तर के गद्दे को नोच अपनी बेचैनी को शांत करने की कोशिश अकर रही थी क्यूकी चादर तो अब कमरे के फर्श पे थी.

देवेन काफ़ी देर तक उसकी गंद मे उंगली करता रहा & जब उसे लगा कि अब उसका च्छेद थोड़ा खुल गया है तो उसने अपनी महबूबा के पीछे घुटनो पे पोज़िशन ली.रंभा ने गद्दे को ज़ोर से भींच लिया,लंड अब बस उसकी गंद मे घुसने ही वाला था.उसकी धड़कने तेज़ हो गयी & उसने झुके हुए ही सर को नीचे कर अपनी टाँगो के बीच देखा.देवेन उसकी कमर थामे लंड को उसकी गंद पे टीका के धक्का दे रहा था.

"आाआईयईईईईईईईईईईईईईईयययययययययययईईई..!",उसकी चीख तो पूरे गाँव मे गूँजी होगी!देवेन का लंड कुच्छ ज़्यादा ही मोटा था & उसने उस ज़रा से छेद को बहुत फैला दिया था.रंभा सर उठाके छॅट्पाटा रही थी.देवेन धीरे-2 लंड को छेद मे & अंदर उतार रहा था.

"आआन्न्न्नह.....उउन्न्ञणनह..ओफफफफफ्फ़....ओह..!",देवेन ने लंड को आधे से ज़्यादा अंदर घुसा दिया था.इतनी अंदर उसकी गंद मे आजतक कोई लंड नही गया था.देवेन आगे झुका & रंभा की चूचियो को हाथो मे भर उसकी गर्दन के पीछे चूमने लगा.रंभा का दर्द अब कम हो रहा था & उसने बाई तरफ चेहरा घुमाया & अपने महबूब के होंठो को चूम लिया.थोड़ी देर तक देवेन उसे वैसे ही उसकी चूचियो मसलते हुए चूमते रहा.जब रंभा ने अपनी ज़ुबान उसके मुँह से खींच उसकी ज़ुबान को अपने मुँह मे ले चूसा तो वो समझ गया कि अब वो तैय्यार है & उसने आधे घुसे लंड के धक्के लगाने शुरू कर दिए.

"उउगगगघह..बहुत बड़ा है आपका..उउफफफफ्फ़..!",रंभा ने आह भरी,"..पता है..ऊव्ववव..जब मेरी चूत मे था तो मुझे कितना भरा-2 लग रहा था?..मैने वैसा कभी महसूस नही किया किसी के साथ..उउम्म्म्ममममम..!",देवेन ने अपनी प्रेमिका के निपल्स को मसल उसे चूम लिया था.रंभा की गंद उसके लंड के धक्को से आहत हो उसपे सिकुड जाती थी & वो मस्ती मे पागल हो जाता था.

"तुम्हारी बाहो मे आके आज मेरी सारी बेताबी,सारा गुस्सा जैसे ख़त्म हो गया..",उसने रंभा के दाने को दाए हाथ से रगड़ना शुरू कर दिया था,"..अब मैं सुकून से मार सकता हू!",उसके धक्के तेज़ हो गये थे.

"ऊहह..ऐसी बातें मत कीजिए प्लीज़..........ऊव्ववववववव..!",रंभा तेज़ी से गंद पीछे धकेल रही थी.देवेन उसकी कसी गंद के एहसास से लंड को अब रोक नही पा रहा था.उसकी उंगली ने रंभा को भी झड़ने पे मजबूर कर दिया था,"..ओओओओऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईईईईईईई माआआअन्न्‍नननणणन्..!",झड़ने के करीब पहुँचते ही देवेन के लंड का सूपड़ा थोड़ा फूला & रंभा की संकरी गंद & फैल गयी & वो चीखते हुए झाड़ गयी.देवेन ने अपनी उंगली को उसकी चूत मे क़ैद होते महसूस किया & उसकी गंद को लंड पे कसते & वो भी आह भरते हुए उसकी पीठ पे गिर गया & उसका जिस्म झटके खाने लगा.रंभा की गंद उसके गाढ़े वीर्य से भर रही थी.

रंभा बिस्तर पे लेट गयी थी & उसके उपर देवेन लेटा उसके बालो को चूम रहा था.लंड जब पूरा सिकुदा तो देवेन ने उसे बाहर खींचा & करवट ली.रंभा घूमी और उसकी बाई बाँह के घेरे मे आ उसके सीने के बालो मे मुँह च्छूपा सोने लगी.देवेन ने उसे आगोश मे कस लिया.आज अरसे बाद उसे अच्छी नींद आनेवाली थी.

जिस्म पे कुच्छ रेंगने के एहसास से रंभा की नींद खुली.उसने आँखे खोली तो पाया की देवेन के हाथ उसके जिस्म पे घूम रहे थे.अलसाई सी मुस्कान उसके होंठो पे खेलने लगी.देवने उसकी चूत मे उंगली घुसा रहा था.उसने हल्की सी आह भर अपने जागे होने का एहसास देवेन को दिलाया.देवेन उसे देख मुस्कुराया & उसकी चूत मे वैसे ही उंगली घुसाता रहा.रंभा समझ गयी थी कि वो क्या कर रहा है.उसकी उंगली उसे मस्त कर रही थी & वो लेटे हुए उसमे खोती ये देखने लगी की देवेन उसका जी-स्पॉट ढूँढने मे कामयाब होता है या नही.

“आन्न्‍ननणणनह..!”,कुच्छ ही पॅलो बाद चूत की दीवार पे उसके जिस्म के सबसे नाज़ुक,कोमल हिस्से पे उंगली का दबाव पड़ते ही वो चिहुनक उठी & आहें भरने लगी.जिस्म के मज़े की इंतेहा से उसके दिल मे जज़्बातो का सैलाब उमड़ आया था & वो सिसक रही थी.देवेन ने उसकी टाँगे फैलाई और अपने लंड को उसकी चूत मे घुसा के उसके जी-स्पॉट पे दबाने की कोशिश करने लगा.रंभा का जिस्म झटके खाने लगा.मज़ा हद्द से ज़्यादा था,थोड़ी देर पहले हुई उनकी पहली चुदाई से भी ज़्यादा!उसकी आँखो से आँसू बहने लगे थे & वो लगभग बेहोश सी हो गयी थी.

देवेन ने लंड पूरा अंदर घुसाया & उसके उपर लेट उसे बाहो मे भर लिया.जोश मे मदहोश रंभा ने प्रेमी के जिस्म पे अपनी संगमरमरी बाहें बँधी & उसकी चुदाई का भरपूर लुत्फ़ उठाने लगी.उसकी कोख से टकराता लंड उसे हर पल जन्नत का 1 नया नज़ारा दिखा रहा था.रंभा मस्ती मे चूर अपने आशिक़ के जिस्म को खुद से चिपकाए बस चुदी जा रही थी कि देवेन उसकी बाहो से निकल घुटनो पे बैठ गया.रंभा ने उसे सवालिया निगाहो से देखा तो उसने उसके उपरी बाज़ू पकड़ उसे उठा के अपनी गोद मे ले लिया & वैसे ही लंड चूत मे घुसाए उसे लिए-दिए बिस्तर से उतर गया.

रंभा ने अपनी बाहें उसकी गर्दन मे डाल दी & उसके बाए कंधे पे चेहरा टिका दिया.देवेन ने उसे कमरे के दरवाज़े के पास की दीवार से लगाया & चंद धक्के लगाए.रंभा के शिकन भरे चेहरे पे मुस्कान भी खेल रही थी.उसने सोचा कि देवेन खड़े होके उसकी चुदाई करना चाहता है लेकिन उसका इरादा तो कुच्छ & था.रंभा को थामे वो कमरे से बाहर निकल गया.रंभा उसकी मर्दानगी की पूरी तरह से कायल हो गयी थी.पहले तो बिस्तर मे उसकी हर्कतो ने उसे उसका दीवाना बना दिया था & अब जिस तरह से उसने उसे उठा रखा था,वो उसकी जिस्मानी ताक़त की भी मुरीद हो गयी थी.

देवेन उसे लेके गुसलखाने मे आ गया था.गुसलखाना पुराने ढंग का था.1 कमरा था जिसमे पीतल की बल्टियाँ रखी थी & 2-3 लोटे.1 लकड़ी का छ्होटा सा तख्त भी रखा था & उसी पे देवेन अपनी महबूबा को लिए हुए बैठ गया.रंभा मुस्कुराइ & उसके बालो को सहलाते हुए चूमने लगा.देवेन ने भी उसकी ज़ुबान चूसी & फिर 1 लोटे मे पानी ले उसके सर पे हौले से डाला.रंभा हँसी & दूसरे लोटे को उठा के उसका पानी देवेन के सर पे उलट दिया.दोनो ने 1 दूसरे के जिस्मो को नहलाना शुरू कर दिया.देवेन ने उसकी पीठ को सहलाते हुए उसकी गर्दन चूमि & फिर 1 साबुन उठा उसकी पीठ पे लगाने लगा.रंभा मुस्कुराते हुए उसे चूमने लगी.

देवेन के हाथ सामने आए तो रंभा ने उस से साबुन लिया & फिर उसकी पीठ पे मलने लगी.दोनो 1 दूसरे की आँखो मे झाँक रहे थे.देवेन का सख़्त लंड अभी भी रंभा की चूत मे था & जिस्मो की हर्कतो से वो उसकी चूत मे हुलचूल मचाता तो मज़े की लहर उसके बदन मे दौड़ जाती.रंभा हाथ सामने लाई तो देवेन ने फिर से उस से साबुन ले लिया & उसकी दाई जाँघ पे मलने लगा.रंभा की अन्द्रुनि जाँघो पे जब उसने अपना दाया हाथ चलाया तो रंभा की आँखो मे नशा भर गया.वो अपने महबूब को देखे जा रही थी & देवेन भी उसकी निगाहो मे झाँक रहा था.उसने बाए हाथ से रंभा की टांग को थामा & उसके सीने पे दाया हाथ रख के दबाया तो रंभा उसका इशारा समझते हुए पीछे लेट गयी & फर्श से अपना सर टीका दिया.देवेन ने उसकी बाई टांग को उठाके अपने दाए कंधे पे रखा & उसपे साबुन घिसने लगा.रंभा की आँखे मस्ती मे बंद हो गयी थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--56

gataank se aage......

deven ne uske pyar ke izhar ko sun sar upar uthaya & uski aankho me jhankne laga..vo is ladki ki jaan lena chahta tha lekin aaj use us se juda hone ke khayal se hi darr lag raha hai..vo uski jaan ban gayi hai..kaisa ajib khel khela tha uparwale ne..maa ki jis adhuri chahat ki pyas ne use aajtak betaab & behaal kar rakha tha,vo aaj beti ki baaho me bujhi thi,"i love you too.",vo jhuka & dono ke honth 1 dusre ki lazzat chakhne lage.

"Unnnn..mat jaiye na!",Bijli chali gayi thi & deven uski chuty se lund khinch uthne laga tha jab rambha ne use rok diya tha.

"andhere me tum dikh nahi rahi mujhe.lalten to lane do.",usne uske hotho pe daye hath ki ungli ko firaya to rambha ne masti me aah bhari & ungli ke poro ko chuma & fir use munh me bhar chusne lagi.

"chandni to aa rahi hai khidki se,lalten ki kya zarurat hai.",rambha ne use baaho me bhare rakha.deven hansa & ungli ko uske hotho se hata anguthe ko unpe daba diya.rambha ne use shararat se kaat liya to dono hansne lage magar agle hi pal deven khamosh ho gaya & uske chehre pe udasi ki parchhayi aa gayi.

"kya hua?",rambha ne uske chehre ko hatho me tham liya.

"kuchh nahi.bas ye soch raha tha ki kuchh din baad tum apni zindagi me laut jaogi fir main kaise jiyunga?..vahi uljhan,vahi bekarari fir mere seene ko jalane lagegi."

"ye uljhan,ye bekarari bas chand dino ke liye hogi.",rambha ne uske kandhe thame & palatne ka ishara kiya to vo uske neeche aa gaya.rambha ne chut se lund ko juda kiya & uske seene ko chumte hue neeche jane lagi.

"mujhe behlane ki koshish kar rahi ho?..chand dino ki kaise hogi?..tumhari apni zindagi hai,apni duniya hai..aahhhhhhh..!",deven aankhe band kar karaha.rambha uske lund tak pahunch gayi thi & use tham ke chum liya tha.

"behlane ki koshish nahi kar rahi.",rambha ne supade pe lage uske virya & apne ras ko chata.uski chut se beh ke deven ka virya uski jangho se chipak gaya tha,"..sach keh rahi hu.ab main bhi aapke bagair nahi reh sakti!",rambha jhuki & lund ko munh me bhar liya & aankhe band kar chusne lagi.

"ohhhhhhhhh..rambha,pagal mat bano!",vo uth baitha tha & lund chusti rambha ke baal sehla raha tha,"..main bas apne dil ka haal keh raha tha.meri vajah se apna basa-basaya ghar kyu ujad rahi ho?",rambha ne daye hath ke anguthe & pehli ungli ke dayre me lund ko hilana shuru kar diya tha & sath-2 use chus bhi rahi thi.uska dusra hath jhanto se ghire deven ke ando ko daba raha tha.usne lund ko hilana chhoda & use munh me bharne lagi.uski sans atakne lagi thi lekin usne lund ko andar lena nahi chhoda.lund ka kuchh hissa uske halak me bhi chala gaya tha.deven ki kamar apneaap hil gayi.use aisa lg raha tha mano vo fir se apni mehbooba ke chut me lund ghusa raha ho.

rambha use jud tak munh me bhar chus rahi thi.deven uske baalo ko pakde bechaini me aahen bhar raha tha & usne achanak lund bahar khinch liya.hanfti rambha ne use dekha & muskurayi.jhadne ke darr se usne lund khinch liya tha.usne deven ki tange pakad unhe palang se neeche latka diya & fir zamin pe ghutno ke bal unke beech aa gayi.

"itna sukun maine kabhi mehsus nahi kiya..",usne apni bhari-bharkam chhatiyo ko apne hatho me thama & deven ke khade lund ko unke beeche kas liya.deven ne aah bharte hue uske sar ko pakad liya.vo apni chhatiyo ko aapas me bhinch unhe uapr-neeche kar lund ko ragadne lagi,"..& basa-basaya ghar?..hunh!....vo pati jo mujhe khilona samajhta hai & muhse bewafai kar raha hai..maine bhi use dhokha diya hai.uski byahta hote hue uske pita ke sath soyi lekin kabhi bataungi aapko kin halaat me mere sasur & main karib aaye the..",usne lund ko & zor se ragda & jhuk ke uske supade ko chuma.

"..magar vo mujhe kis vajah se dhokha de raha hai & mujhe chhodna chah raha hai siway iske ki uska man bhar gaya lagta hai!",deven ne uske abal pakd use upar khincha & bistar pe let gaya & use upar aane ka ishara kiya.rambah ne socha ki vo use upar se lund apni chut me lene ko keh raha hai & vo uske jism ke dono or ghutne jamake uspe jhukne lagi ki usne uski kamar pakad ke use aage kiya & apne munh pe bitha liya.

"ooww...haaaaa....mujhe gudgudi hoti hai..nahi..!",vo hasnte hue mast hone lagi.deven uski andruni jangho me apni naak ghusa ke zor se ragad use gudguda raha tha.agle pal uski zuban uski chut ki darar pe dastak de rahi thi.

"rambha,main nahi janta ki tumhari shadi me kya pareshani hai magar mere sath tumhara bhavishya kuchh bhi nahi..-",rambha ne apni chut uske hotho pe daba use khamosh kar diya tha.vo bhi uski andruni jangho ko sehlate hue uski chut chaatne laga tha.

"-..uunnnnnhhhhh..aahhhhhhhh..aap meri zindagi ka 1 aham hissa hain ab & aage se mujhse door jane ki baat karne ka aapko koi haq nahi..oowwww.",rambnha masti me kamar hilate hue aage jhuk gayi.deven ne uske dane ko bahut dhime se hotho se kaat liya tha,"..main yaha se jaoongi apne pati ke paas,use & us ladki ko saza dene ke liya,jiske liye vo mujhe chhodna chahta hai.mujhe chot pahuchane ki keemat to munhe ada karni hi padegi..aaaannnnhhhhhhhhhhh..haaaaaaaannnnnnn..!",rambha uske abalo ko jakde,zor-2 se kamar hilati jhad rahi thi.deven ne uski gand pakad uski chut ko munh se uthaya to vo aage ho pet ke bal bistar pe gir gayi.deven uski tango ke beeche sar rakhe hue karwat badal pet ke bal hua & uski chut se tapakte ras ko chat liya.uski nazro ke samne rambha ki gand ka gulabi chhed tha.uski gand bahut mast thi.

itni bhari-bharkam hone ke bavjud mans kahi se bhi latka nahi tha.usne josh me bhar uski gand ki mdono fanko ko kaat liya & unhe maslate hue uski gand ke chhed ko apni zuban se chhedne laga.

"tum koi galat kadam nahi uthaogi.",vo uski gand ko failate hue chhed me ungli kar raha tha.

"oonnnnnnhhhhhhhhhh..uske liye aap befikr rahiye..itni bhi garam mijaz nahi hu..oowwwww.!",ungli bahut andar tak ghus gayi thi.

Deven Vijayant ki hi tarah Rambha ke gand ke chhed ko ungli kar ke thoda phailana chahta tha taki lund aasni se uske andar ja sake.rambha uski ungli ki ragad se madhosh hue ja rahi thi.deven ne uske pet ke neeche hath laga ke uski kamar upar ki to rambha ne bhi gand hawa me utha li & chehra bistar me chhupa liya.uski unglia ab bistar ke gadde ko noch apni becfhaini ko shant karne ki koshish akr rahi thi kyuki chadar to ab kamre ke farsh pe thi.

deven kafi der tak uski gand me ungli karta raha & jab use laga ki ab uska chhed thoda khul gaya hai to usne apni mehbooba ke peechhe ghutno pe position li.rambha ne gadde ko zor se bhinch liya,lund ab bas uski gand me ghusne hi vala tha.uski dhadkane tez ho gayi & usne jhuke hue hi sar ko neeche kar apni tangol ke beech dekha.deven uski kamar thame lund ko uski gand pe tika ke dhakka de raha tha.

"AAAAAAIIIIIIIIIIIIIIIIYYYYYYYYYYYEEEEEEEEE..!",uski chikh to pure ganv me gunji hogi!deven ka lund kuchh zyada hi mota tha & usne us zara se chhed ko bahut phaila diya tha.rambha sar uthake chhatpata rahi thi.deven dhire-2 lund ko chhed me & andar utar raha tha.

"AAAANNNNHHHHH.....UUNNNNNHHHHHH..OFFFFFF....OHHHHHHHH..!",deven ne lund ko aadhe se zyada andar ghsua diya tha.itni andar uski gand me aajtak koi lund nahi gaya tha.deven aage jhuka & rambha ki chhatiyo ko hatho me bhar uski gardan ke peechhe chumne laga.rambha ka dard ab kam ho raha tha & usne bayi taraf chehra ghumaya & apne mehboob ke hotho ko chum liya.thodi der tak deven use vaise hi uski chhatiyan maslate hue chumte raha.jab rambha ne apni zuban uske munh se khinch uski zuban ko apne munh me le chusa ro vo samajh gaya ki ab vo taiyyar hai & usne aadhe ghuse lund ke dhakke lagane shuru kar diye.

"uugggghhhhhh..bahut bada hai aapka..uufffff..!",rambha ne aah bhari,"..pata hai..oow.jab meri chut me tha to mujhe kitna bhara-2 lag raha tha?..maine vaisa kabhi mehsu nahi kiya kisi ke sath..uummmmmmmm..!",deven ne apni premika ke nipples ko masal use chum liya tha.rambha ki gand uske lund ke dhakko se aahat ho uspe sikud jati thi & vo masti me pagal ho jata tha.

"tumhari baaho me aake aaj meri sari betabi,sara gussa jaise khatm ho gaya..",usne rambha ke dane ko daye hath se ragadna shuru kar diya tha,"..ab main sukun se mar sakta hu!",uske dhakke tez ho gaye the.

"oohhhhhhhhhh..aisi baaten mat kijiye please..........oowwwww.!",rambha tezi se gand peechhe dhakel rahi thi.deven uski kasi gand ke ehsas se lund ko ab rok nahi pa raha tha.uski ungli ne rambha ko bhi jhadne pe majbur kar diya tha,"..OOOOUUUUUUUIIIIIIIIIIII MAAAAAAANNNNNNNN..!",jhadne ke karib pahunchte hi deven ke lund ka supada thoda phoola & rambha ki sankri gand & phail gayi & vo chikhte hue jahd gayi.deven ne apni ungli ko uski chut me qaid hote mehsus kiya & uski gand ko lund pe kaste & vo bhi aah bharte hue uski pith pe gir gaya & uska jism jhatke khane laga.rambha ki gand uske gadhe virya se bhar rahi thi.

rambha bistar pe let gayi thi & uske upar deven leta uske baalo ko chum raha tha.lund jab pura sikuda to deven ne use bahar khincha & karwat li.rambha ghumi & uski bayi banh ke ghere me aa uske seene ke baalo me munh chhupa sone lagi.deven ne use agosh me kas liya.aaj arse baad use achhi nind aanevali thi.

Jism pe kuchh rengne ke ehsas se Rambha ki nind khuli.usne aankhe kholi to paya ki Deven ke hath uske jism pe ghum rahe the.alsayi si muskan uske hotho pe khelne lagi.devne uski chut me ungli ghusa raha tha.usne halki si aah bhar apne jage hone ka ehsas deven ko dilaya.deven use dekh muskuraya & uski chut me vaise hi ungli ghusata raha.rambha samajh gayi thi ki vo kya kar raha hai.uski ungli use mast kar rahi thi & vo lete hue usme khoti ye dekhne lagi ki deven uska g-spot dhoondane me kamyab hota hai ya nahi.

“aannnnnnnhhhhhhhh..!”,kuchh hi palo baad chut ki deewar pe uske jism ke sabse nazuk,komal hisse pe ungli ka dabav padte hi vo chihunk uthi & aahen bharne lagi.jism ke maze ki inteha se uske dil me jazbato ka sailab umad aaya tha & vo sisak rahi thi.deven ne uski tange phailayi & apne lund ko uski chut me ghusa ke uske g-spot pe dabane ki koshish karne laga.rambha ka jism jhatke khane laga.maza hadd se zyada tha,thodi der pehle hui unki pehli chudai se bhi zyada!uski aankho se aansu behne lage the & vo lagbhag behosh si ho gayi thi.

Deven ne lund pura andar ghusaya & uske upar let use baaho me bhar liya.josh me madhosh rambha ne premi ke jism pe apni sangmarmari baahen bandhi & uski chudai ka bharpur lutf uthane lagi.uski kokh se takrata lund use har pal jannat ka 1 naya nazara dikha raha tha.rambha masti me chur apne aashiq ke jism ko khud se chipkaye bas chudi ja rahi thi ki deven uski baaho se nikal ghutno pe baith gaya.rambha ne use sawaliya nigaho se dekha to usne uske upri bazu pakad use utha ke apni god me le liya & vaise hi lund chut me ghusaye use liye-diye bistar se utar gaya.

Rambha ne apni baahen uski gardan me daal di & uske baye kandhe pe chehra tika diya.deven ne use kamre ke darwaze ke paas ki deewar se lagaya & chand dhakke lagaye.rambha ke shikan bhare chehre pe muskan bhi khel rahi thi.usne socha ki deven khade hoke uski chudai karna chhata hai lekin uska irada to kuchh & tha.rambha ko thame vo kamre se bahar nikal gaya.rambha uski mardangi ki puri tarah se kayal ho gayi thi.pehle to bistar me uski harkato ne use uska deewana bana diya tha & ab jis tarah se usne use utha rakha tha,vo uski jismani taqat ki bhi mureed ho gayi thi.

Deven use leke gusalkhane me aa gaya tha.gusalkhana purane dhang ka tha.1 kamra tha jisme pital ki baltiyan rakhi thi & 2-3 lote.1 lakdi ka chhota sa takht bhi rakha tha & usi pe deven apni mehbooba ko liye hue baith gaya.rambha muskurayi & uske baalo ko sehlate hue chumne laga.deven ne bhi uski zuban chusi & fir 1 lote me pani le uske sar pe haule se dala.rambha hansi & dusre lote ko utha ke uska pani deven ke sar pe ulat diya.dono ne 1 dusre ke jismo ko nahlana shuru kar diya.deven ne uski pith ko sehlate hue uski gardan chumi & fir 1 sabun utha uski pith pe lagane laga.rambha muskurate hue use chumne lagi.

Deven ke hath samne aaye to rambha ne us se sabun liya & fir uski pith pe malne lagi.dono 1 dusre ki aankho me jhank rahe the.deven ka sakht lund abhi bhi rambha ki chut me tha & jismo ki harkato se vo uski chut me hulchul machata to maze ki lehar uske badan me daud jati.rambha hath samne layi to deven ne fir se us se sabun le liya & uski dayi jangh pe malne laga.rambha ki andruni jangho pe jab usne apna daya hath chalaya to rambha ki aankho me nasha bhar gaya.vo apne mehboob ko dekhe ja rahi thi & deven bhi uski nigaho me jhank raha tha.usne baye hath se rambha ki tang ko thama & uske seene pe daya hath rakh ke dabaya to rambha uska ishara samjhte hue peechhe let gayi & farsh se apna sar tika diya.deven ne uski bayi tang ko uthake apne daye kandhe pe rakha & uspe sabun ghisne laga.rambha ki aankhe masti me band ho gayi thi.

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kramashah.......