Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:05

जाल पार्ट--60

गतान्क से आगे......

“ये किसका घर है रंभा?”

“यहा के वाइड का.”

“यहा क्या मिला है तुम्हे?”

“ये.”,रंभा ने चौखट पे बैठे शख्स के चेहरे पे टॉर्च की रोशनी मारी.उस शख्स ने बहुत धीरे से हाथ उठाके रोशनी को रोका & फिर आँखे मीचे हाथ नीचे कर रोशनी मारने वाले को देखने लगा लेकिन वो कुच्छ बोला नही.देवेन आगे बढ़ा & उस शख्स के चेहरे को गौर से देखा & उसके मुँह से हैरत भरी चीख निकल गयी.

“हैं!ये तो..ये तो..विजयंत मेहरा है.!”

"ये मुझे नदी के किनारे पड़ा मिला था..",वाइड देवेन को विजयंत मेहरा के मिलने की कहानी सुना रहा था,"..यहा से बहुत आयेज.मैं उधर जड़ी-बूटियाँ चुनने जाता हू."

"आपने पोलीस को इत्तिला नही की?"

"की थी लेकिन यहा कोई पक्की चौकी नही है बस 1 हवलदार आता है हफ्ते मे 1 बार.उसने इसे देखा & बोला कि नदी मे गिर गया होगा.उसने कहा कि वो जाके थानेदार को बता देगा & फिर वोही ये पता करेगा कि इसके जैसे हुलिए वाले किसी आदमी के गुम होने की रपट लिखाई गयी है या नही."

"फिर?"

"फिर वो आअज तक यहा नही आया है."

"हूँ..वैसे इसे हुआ क्या है?..ये बोलता क्यू नही?"

"ये देखो..",वाइड काफ़ी उम्रदराज़ था & काफ़ी देर बैठने के बाद उठने मे उसे काफ़ी तकलीफ़ होती थी.वो धीरे से उठा & कमरे मे बैठे उन्हे देखते विजयंत की ओर गया.विजयंत सब सुन रहा था,उन्हे देख रहा था लेकिन उसकी आँखो मे कही भी वो भाव नही था जिसे देख ये लगे कि उसे उनकी बातें समझ आ रही थी या नही,"..इस जगह..",उसने उसके माथे पे बाई तरफ बॉल हटा के दिखाया,"..पे गहरी चोट लगी थी इसे.मैने खून रोक के टाँके लगाए.ये बोलता क्यू नही इसका कारण मुझे नही पता.पर इतना ज़रूर है कि इसके दिमाग़ पे ज़ोर की चोट लगी है & उसी वजह से या तो इसकी याददाश्त गयी है या फिर सोचने & बोलने की ताक़त.",वो वापस अपनी जगह पे बैठ गया.

"वैसे इसे बातें समझ मे तो आती है.इसे भूख लगती है,प्यास लगती है.कहो तो खड़ा हो जाएगा,बोलो तो बैठ जाएगा मगर खुद कुच्छ कहेगा नही ना ही इशारा करेगा."

"हूँ..हम इसे अपने साथ ले जाते हैं.वाहा शहर मे सरकारी लोगो के हवाले कर देंगे तो फिर ज़रा आपका हवलदार भी चौकस होगा.ढीला लगता है मुझे वो."

"बहुत अच्छे.ज़रा यहा की बिजली के बारे मे भी बात करना."

"ज़रूर.",दोनो विजयंत को वाहा से ले निकल आए.रंभा ने वाइड को कुच्छ पैसे दे दिए थे.उसे अजीब सी खुशी हो रही थी लेकिन उसकी निगाह गाड़ी चलाते देवेन पे भी थी जो बहुत संजीदा लग रहा था.अब देवी फार्म पे हुई किसी बात की वजह से या फिर विजयंत के मिलने की वजह से,ये उसकी समझ मे नही आ रहा था.देवेन उसे चाहने लगा था & वो ये भी जानता था कि रंभा के ताल्लुक़ात विजयंत के साथ भी हैं.उसने उसे सवेरे ही कहा था कि इस बात से उसे कोई ऐतराज़ नही कि वो उसके अलावा किसी & को भी चाहे लेकिन था तो वो 1 मर्द ही.

"क्या हुआ था वाहा?बताए क्यू नही?",रंभा ने अपना सर उसके कंधे पे रख दिया & उसकी बाई बाँह सहलाने लगा.

"बताता हू.",देवेन ने उसके सर को थपथपाया & कार चलते हुए उसे सारी बात बतानी शुरू की.

"गाड़ी रोकिए!",सारी बात सुनने के बाद वो बोली.

"क्या हुआ रंभा?"

"गाड़ी रोकिए!",वो रुवन्सि हो गयी थी.देवेन ने ब्रेक लगाया तो वो उसके गले लग गयी & रोने लगी.देवेन उसके जज़्बातो को समझ रहा था.1 कामीने के स्वार्थ ने तीन जिंदगियो को इतने दिनो तक खुशी से महरूम रखा था & उनमे से 1 तो अब इस दुनिया मे थी भी नही.

"इतना ख़तरा मोल लिया आपने..आप कितना चाहते थे मा को आज सही मयनो मे समझ आ रहा है मुझे..उसके धोखे की ग़लतफहमी से ही इतनी नफ़रत पैदा हुई थी आपके दिल में.",रंभा की रुलाई थम गयी थी & वो उसके गाल के निशान को सहला रही थी.

"हां,मगर आज सारी ग़लतफहमी दूर हो गयी बस 1 बात का गीला रह गया की सुमित्रा मेरी सच्चाई जाने बगैर चली गयी.",रंभा की रुलाई दोबारा छूट गयी.देर तक देवेन उसे बाहो मे भर समझाता रहा.उसने मूड के पिच्छली सीट पे बैठे विजयंत को देखा.उसने 1 बार आवाज़ होने पे आँखे खोली थी & फिर सो गया था.

"चलो,अब चुप हो जाओ.हमे यहा से जल्द से जल्द निकलना है.बालम सिंग ड्रग डीलर था & उसके मरने के बाद अब उसके लोग & पोलीस कुत्तो की तरह पूरे इलाक़े को सूंघ-2 के छनेन्गे.",उसने फिर कार स्टार्ट की तो सीधा क्लेवर्त जाके ही रोकी.रंभा होटेल वाय्लेट पहुँच समीर को विजयंत के मिलने के बारे मे बताना चाहती थी लेकिन देवेन ने उसे रोका.उसे कुच्छ खटक रहा था.

"रंभा,तुम मुझे ये बताओ कि समीर जब कंधार पे पोलीस को मिला था तो उसने क्या बताया था?",वो रात अभी भी उसके ज़हन मे ताज़ा थी बाद मे उसने & अख़बारो मे भी पढ़ा था & खबरों मे भी सुना था कि कैसे ब्रिज & सोनिया उस साज़िश मे शामिल थे & यही बात उसे खटक रही थी.रंभा ने उसे सारी बात बता दी.

"लेकिन आप ये क्यू पुच्छ रहे हैं?"

"अब मेरी समझ मे आया कि मुझे क्या खटक रहा था.",उसने खुशी से स्टियरिंग पे हाथ मारा,"..समीर झूठ क्यू बोल रहा है,रंभा?"

"क्या?समीर..झूठ..मेरी समझ मे नही आई आपकी बात.",रंभा के माथे पे शिकन पड़ गयी थी.

"उसने ये क्यू कहा कि झरने पे उसके हाथ पाँव बँधे होने के कारण वो अपने बाप की मदद नही कर सका जबकि हक़ीक़त ये थी कि उसके पाँव खुले थे."

"क्या?!"

"हां & उसे तो ये दिखना ही नही चाहिए था कि ब्रिज & सोनिया 1 साथ आए कि उसका बाप अकेला आया."

"क्यू?"

"क्यूकी उसकी आँखो पे पट्टी बँधी थी."

"क्या?!..",रंभा के चेहरे पे काई भाव आके चले गये..समीर झूठ बोल रहा था लेकिन क्यू?..विजयंत की मौत क्या 1 हादसा नही साज़िश थी?..समीर क्या नाराज़ था उसे रंभा से शादी करने पे ग्रूप से अलग करने से?..तो इसका मतलब था कि वो उस से बेइंतहा मोहब्बत करता था लेकिन उसके नमूने तो वो उस पार्टी मे देख ही चुकी थी जब वो कामया से प्यार के वादे कर रहा था..आख़िर सच क्या था?..समीर का मक़सद क्या था?

वो पलटी & पिच्छली सीट पे बेख़बर सोए विजयंत को देखा,"अब क्या करें?",उसने देवेन की ओर देखा.पहली बार उसे इस सारे मामले मे डर का एहसास हुआ था.

"पहले तो तुम समीर को इस बारे मे ज़रा भी भनक नही लगने दोगि..समीर क्या किसी को भी नही!ये राज़ सिर्फ़ मेरे तुम्हारे बीच रहेगा."

"ठीक है मगर इनका क्या करें?..इन्हे इलाज की ज़रूरत है वो भी बहुत उम्दा इलाज."

"हूँ..वो तो मैं करवा दूँगा."

"मगर कैसे?"

"वो मुझपे छ्चोड़ो."

"ओफ्फो..",तनाव की वजह से रंभा झल्ला गयी,"..मुझे भी तो बताइए कुच्छ..दिन मे भी मुझे अकेला भेज दिया & अब अभी भी नही बता रहे हैं!",खीजती रंभा देवेन को किसी बच्ची की तरह लगी..थी तो वो 1 बच्ची ही..वो तो हालात की दरकार थी की वो जल्दी बड़ी हो गयी.

"मैं इसका इलाज कारवंगा.इसे अपने साथ ले जाके..",उसने उसे अपनी ओर खींचा & उसके चेहरे को चूमने लगा.रंभा की खिज भी गायब होने लगी,"..गोआ मे."

"गोआ?"

"हां,गोआ."

देवेन विजयंत मेहरा को गोआ कैसे ले गया ये वही जानता था.कुच्छ रास्ता उसने ट्रेन से कुच्छ बस से & कुच्छ टॅक्सी से तय किया.किसी के माशूर इंडस्ट्रियलिस्ट विजयंत मेहरा को पहचान लेने का ख़तरा था & इसीलिए उसे इतनी सावधानी बरतनी पड़ी.रंभा ने विजयंत की बेतरटीबी से बढ़ी दाढ़ी & बालो को बस थोड़ा सा काटा-च्चंता & बालो की पोनीटेल बनाके उसे ढीली टी-शर्ट & जेनस पहना दी थी ताकि वो कोई हिपी जैसा लगे & वो खुद डेवाले वापस लौट गयी थी.

समीर उस वक़्त बॉमबे मे था & उसने उस बात का फयडा उठाके उसकी चीज़ो की तलाशी ली लेकिन उसे कुच्छ भी ऐसा नही मिला जोकि गुत्थी सुलझाने मे उसकी मदद करता & तब उसे अपनी सहेली सोनम की याद आई & उसने उसे मिलने के लिए 1 5-स्तर होटेल के कॉफी शॉप मे बुलाया.

"सोनम,आजकल ऑफीस मे सब कैसा चल रहा है?"

"ठीक-ठाक लेकिन तू क्यू पुच्छ रही है?"

"& आज से पहले कैसा चल रहा था?",रंभा ने उसके सवाल को नज़रअंदाज़ कर दिया.

"मैं तेरी बात समझ नही पा रही,रंभा.",सोनम के माथे पे बल पड़ गये.

"रंभा,जब समीर लापता हुआ था & दाद उसकी खोज मे गये थे तो सब ठीक चल रहा था यहा?",अब सोनम सोच मे पड़ गयी.उसका दिल धड़कने लगा कि वो उसे प्रणव के बारे मे बताए या नही.उसे ये भी डर था की कही रंभा को उसके ब्रिज से जुड़े होने की बात तो पता नही चल गयी.

"क्या हू सोनम?तू चुप क्यू है?",रंभा ने उसके हाथ के उपर अपना हाथ रखा तो सोनम ने नज़रे उपर की.रंभा की नज़रो मे उसे कोई शक़ नही दिख रहा था बल्कि चिंता दिख रही थी.

"रंभा..वो.."

"हां,बोल ना!"

"देख,मुझे ये बात शायद विजयंत सर को या तुम्हे या फिर समीर को बता देनी चाहिए थी पर मैं बहुत घबरा गयी थी."

"मगर क्यू,सोनम?",उस वक़्त सोनम ने फ़ैसला किया कि अब अपने दिल का बोझ हल्का करने के लिए अपनी सहेली को सब बता देना ही सही होगा.

"यहा नही.मेरे घर चल.",दोनो वाहा से निकले & उसके घर पहुँचे.

"अब तो बता."

"रंभा,मुझे नही पता कि तुम मेरे बारे मे क्या सोचोगी लेकिन आज मैं तुम्हे सब बता देना चाहती हू..",सोनम ने ब्रिज से मिलने से लेके प्रणव के शाह से कोई डील करने तक की सारी बातें बता दी.रंभा उसे खामोशी से देख रही थी..सोनम ब्रिज की जासूस थी..& उसे भनक भी नही लगी..उस से दोस्ती भी क्या इसीलिए गाँठि उसने?..",तू मुझे धोखेबाज़ समझ रही है ना?..लेकिन रंभा,मैने तेरी दोस्ती से कभी फयडा उठाने की कोशिश नही की.हां,शुरू मे मैने सोचा था कि समीर से तेरी नज़दीकी का फयडा उठाऊं & उस वक़्त तुझे खोदती भी रहती थी ताकि कुच्छ इन्फर्मेशन मेरे हाथ लगे लेकिन बाद मे मुझे खुद पे बड़ी शर्म आई..",सोनम की आँखे छलक आई थी..क्या ग़लती थी उसकी?..& उस से भी बड़ा सवाल क्या वो इस बात का फ़ैसला करने वाली कौन होती है?..वो भी तो उसी के जैसी थी..बस अपना फयडा देखने वाली.

वो अपनी सुबक्ती हुई सहेली के करीब गयी & उसकी पीठ पे हाथ रखा,"कुच्छ ग़लत नही किया तूने.तेरी जगह मैं भी होती तो शायद ऐसा ही करती.",सोनम के दिल का गुबार उसकी आँखो से अब फूट-2 के बहने लगा & वो रंभा के गले से लग गयी,"..बस हो गया,अब चुप हो जा..कहा ना तेरी कोई ग़लती नही..हम जैसी लड़कियो को ऐसे फ़ैसले तो लेने ही पड़ते है ना!बस चुप हो जा!",1 बच्चे की तरह उसने उसे समझाया.

सोनम को अब बहुत हल्का महसूस हो रहा था,"अब मेरी बात गौर से सुन,सोनम.डॅड की मौत की जो कहानी हमने सुनी है उसमे कुच्छ झूठ है."

"क्या?!मगर तुझे कैसे पता?"

"वो मैं तुझे बाद मे बताउन्गि क्यूकी अभी तक मुझे भी नही पता सही बात का.देख,उनकी मौत मे ब्रिज कोठारी का हाथ तो नही था."

"क्या?!"

"हां.",उसे देवेन ने बता दिया था कि सोनिया उस रात उसके ससुर के साथ होटेल से निकली थी & कंधार पहुँची थी ना कि अपने पति के साथ,"..& ये काम परिवार के ही किसी सदस्य का है."

"मतलब प्रणव?"

"तेरी बातो से मुझे उसपे भी शक़ होने लगा है."

"उसपे भी?"

"हां,पहले तो मुझे समीर पे शक़ था."

"वॉट?!"

"हां.अब हम दोनो को ये पता लगाना है कि आख़िर है कौन & उसे क्या फयडा हुआ डॅड की मौत से?"

"फयडा..हूँ..लेकिन समीर को क्या फयडा होगा..ग्रूप तो उसेही मिलना था अपने पिता के बाद."

"हां मगर मेरे लिए झगड़ा किया था उनसे उसने लेकिन..लेकिन फिर सब होने के बाद वो मुझसे ही बेरूख़् हो गया है."

"अच्छा?"

"हां,यार वो मेरे साथ सोता है,मेरे जिस्म को प्यार करता है लेकिन अब उसका प्यार मेरे दिल तक जैसे पहुँच ही नही पाता..मैं तो उसके साथ पहले जैसे ही बर्ताव करती हू मगर वो जैसे मुझे..मुझे.."

"भूल गया है?",सोनम ने सहेली की बात पूरी करनी चाही.

"नही.भूला नही जैसे अब मैं उसके लिए कोई मायने नही रखती."

"हूँ..तो तुझसे शादी भी कही उसकी किसी चाल का हिस्सा तो नही था?",रंभा ने चौंक के सहेली को देखा..इस तरह तो सोचा भी नही था उसने..मगर चल क्या हो सकती थी & क्यू?..फिर वही क्यू?..यानी मक़सद..समीर का मक़सद क्या था?..अगर शादी भी चाल थी तो उस चल का मक़सद था क्या?..रंभा का सर घूमने लगा था!

"तू थी तो है,रंभा?..ये ले पानी पी.",.सोनम ने उसे पनिका ग्लास थमाया & उसके साथ बैठ गयी.रंभा गतगत सारा पानी पी गयी.

"यार,हम कहा फँस गयी हैं!",उसने अपनी सहेली को देखा,"..बचपन से लेके जवानी ऐसे कमिनो मे गुज़ारे की दौलत & ऊँचा तबका हमारी ख्वाहिश ही नही जुनून भी हो गया लेकिन क्या ये सब उतनी ज़रूरी चीज़ें हैं जितना ये हमे लगती थी?",रंभा ने बहुत गहरी बात कह दी थी.सोनम ने आँखे झुका ली थी,"चल यार.अब ऐसे मुँह मत लटका.चल कही बाहर चल के बढ़िया खाना खाते हैं.इस मुसीबत से तो मैं निपट ही लूँगी.कोई मेरा इस्तेमाल करे & मैं उसे सबक ना सिखाऊँ,ऐसा तो होगा नही!",दोनो हंसते हुए उठे & बाहर जाने की तैय्यरी करने लगे.

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क्रमशः.......

JAAL paart--60

gataank se aage......

“ye kiska ghar hai rambha?”

“yaha ke vaid ka.”

“yaha kya mila hai tumhe?”

“ye.”,rambha ne chaukhat pe baithe shakhs ke chehre pe torch ki roshni mari.us shakhs ne bahut dhire se hath uthake roshni ko roka & fir aankhe meeche hath neeche kar roshni marne vale ko dekhne laga lekin vo kuchh bola nahi.deven aage badha & us shakhs ke chehre ko gaur se dekha & uske munh se hairat bhari chikh nikal gayi.

“hain!ye to..ye to..Vijayant Mehra hai.!”

"Ye mujhe nadi ke kinare pada mila tha..",Vaid Deven ko Vijayant Mehra ke milne ki kahani suna raha tha,"..yaha se bahut aage.main udhar jadi-butiyan chunane jata hu."

"aapne police ko ittila nahi ki?"

"ki thi lekin yaha koi pakki chauki nahi hai bas 1 hawaldar aata hai hafte me 1 baar.usne ise dekha & bola ki nadi me gir gaya hoga.usne kaha ki vo jake thanedar ko bata dega & fir vohi ye pata akrega ki iske jaise huliye vale kisi aadmi ke gum hone ki rapat likhayi gayi hai ya nahi."

"fir?"

"fir vo aaaj tak yaha nahi aaya hai."

"hun..vaise ise hua kya hai?..ye bolta kyu nahi?"

"ye dekho..",vaid kafi umradaraz tha & kafi der baithne ke baad uthne me use kafi taklif hoti thi.vo dhire se utha & kamre me baithe unhe dekhte vijayant ki or gaya.vijayant sab sun raha tha,unhe dekh raha tha lekin uski aankho me kahi bhi vo bhav nahi tha jise dekh ye lage ki use unki baaten samajh aa rahi thi ya nahi,"..is jagah..",usne uske mathe pe bayi taraf baal hatake dikhaya,"..pe gehri chot lagi thi ise.maine khoon rok ke tanke lagaye.ye bolta kyu nahi iska karan mujhe nahi pata.par itna zarur hai ki iske dimagh pe zor ki chot lagi hai & usi vajah se ya to iski yaaddasht gayi hai ya fir sochne & bolne ki taaqat.",vo vapas apni jagah pe baith gaya.

"vaise ise baaten samajh me to aati hai.ise bhookh lagti hai,pyas lagti hai.kaho to khada ho jayega,bolo to baith jayega magar khud kuchh kahega nahi na hi ishara karega."

"hun..hum ise apne sath le jate hain.vaha shehar me sarkari logo ke hawale kar denge to fir zara aapka hawaldar bhi chaukas hoga.dhila lagta hai mujhe vo."

"bahut achhe.zara yaha ki bijli ke bare me bhi baat karna."

"zarur.",dono vijayant ko vaha se le nikla aaye.rambha ne vaid ko kuchh paise de diye the.use ajib si khushi ho rahi thi lekin uski nigah gadi chalate deven pe bhi thi jo bahut sanjida lag raha tha.ab Devi Farm pe hui kisi baat ki vajahse ya fir vijayant ke milne ki vajah se,ye uski samajh me nahi aa raha tha.deven use chahne laga tha & vo ye bhi janta tha ki rambha ke tallukat vijayant ke sath bhi hain.usne use savere hi kaha tha ki is baat se use koi aitraz nahi ki vo uske alawa kisi & ko bhi chahe lekin tha to vo 1 mard hi.

"kya hua tha vaha?batae kyu nahi?",rambha ne apna sar uske kandhe pe rakh diya & uski bayi banh sehlane laga.

"batata hu.",deven ne uske sar ko thapthapaya & car chalate hue use sari baat batani shuru ki.

"gadi rokiye!",sari baat sunane ke baad vo boli.

"kya hua rambha?"

"gadi rokiye!",vo ruwansi ho gayi thi.deven ne brake lagaya to vo uske gale lag gayi & rone lagi.deven uske jazbato ko samajh raha tha.1 kamine ke swarth ne teen sindagiyo ko itne dino tak khushi se mehrum rakha tha & unme se 1 to ab is duniya me thi bhi nahi.

"itna khatra mol liya aapne..aap kitna chahte the maa ko aaj sahi mayno me samajh aa raha hai mujhe..uske dhokhe ki galatfehmi se hi itni nafrat paida hui thi aapke dil men.",rambha ki rulayi tham gayi thi & vo uske gaal ke nishan ko sehla rahi thi.

"haan,magar aaj sari galatfehmi door ho gayibas 1 baat ka gila reh gaya ki sumitra meri sachchai jane bagair chali gayi.",rambha ki rulai dobara chhut gayi.der tak deven use baaho me bhar samjhata raha.usne mud ke pichhli seat pe baithe vijayant ko dekha.usne 1 baar aavaz hone pe aankhe kholi thi & fir so gaya tha.

"chalo,ab chup ho jao.hume yaha se jald se jald nikalna hai.Baalam Singh drug dealer tha & uske marne ke baad ab uske log & police kutto ki tarah pure ilake ko sungh-2 ke chhanenge.",usne fir car start ki to seedha Clayworth jake hi roki.rambha Hotel Violet pahunch Sameer ko vijayant ke milne ke bare me batana chahti thi lekin deven ne use roka.use kuchh khatak raha tha.

"rambha,tum mujhe ye batao ki sameer jab Kamdhar pe police ko mila tha to usne kya bataya tha?",vo raat abhi bhi uske zehan me taza thi baad me usne & akhbaro me bhi pahda tha & khabron me bhi suna tha ki kaise brij & Soniya us sazish me shamil the & yehi baat use khatak rahi thi.rambha ne use sari baat bata di.

"lekin aap ye kyu puchh rahe hain?"

"ab meri samajh me aaya ki mujhe kya khatak raha tha.",usne khushi se steering pe hath mara,"..sameer jhuth kyu bol raha hai,rambha?"

"kya?sameer..jhuth..meri samajh me nahi aayi aapki baat.",rambha ke mathe pe shikan pad gayi thi.

"usne ye kyu kaha ki jharne pe uske hath panv bandhe hone ke karan vo apne baap ki madad nahi kar saka jabki haqeeqat ye thi ki uske panv khule the."

"kya?!"

"haan & use to ye dikhna hi nahi chahiye tha ki brij & soniya 1 sath aaye ki uska baap akela aaya."

"kyu?"

"kyuki uski aankho pe patti bandhi thi."

"kya?!..",rambha ke chehre pe kayi bhav aake chale gaye..sameer jhuth bol raha tha lekin kyu?..vijayant ki maut kya 1 hadsa nahi sazish thi?..sameer kya naraz tha use rambha se shadi karne pe group se alag karne se?..to iska matlab tha ki vo us se beintaha mohabbat karta tha lekin uske namune to vo us party me dekh hi chuki thi jab vo Kamya se pyar ke vade kar raha tha..aakhir sach kya tha?..sameer ka maqsad kya tha?

vo palti & pichhli seat pe bekhabar soye vijayant ko dekha,"ab kya karen?",usne deven ki or dekha.pehli baar use is sare mamle me darr ka ehsas hua tha.

"pehle to tum sameer ko is bare me zara bhi bhanak nahi lagne dogi..sameer kya kisi ko bhi nahi!ye raaz sirf mere tumhare beech rahega."

"thik hai magar inka kya karen?..inhe ilaj ki zarurat hai vo bhi bahut umda ilaj."

"hun..vo to main karwa dunga."

"magar kaise?"

"vo mujhpe chhodo."

"offoh..",tanav ki vajah se rambha jhalla gayi,"..mujhe bhi to bataiye kuchh..din me bhi mujhe akela bhej diya & ab abhi bhinahi bata rahe hain!",khijti rambha deven ko kisi bachchi ki tarah lagi..thi to vo 1 bachchi hi..vo to halaat ki darkar thi ki vo jaldi badi ho gayi.

"main iska ilaj karaunga.ise apne sat le jake..",usne use apni or khincha & uske chehre ko chumne laga.rambha ki khij bhi gayab hone lagi,"..Goa me."

"goa?"

"haan,goa."

Deven Vijayant Mehra ko Goa kaise le gaya ye vahi janta tha.kuchh rasta usne train se kuchh bus se & kuchh taxi se tay kiya.kisi ke mashoor industrialist Vijayant Mehra ko pehchan lene ka khatra tha & isiliye use itni savdhani baratni padi.Rambha ne vijayant ki betartibi se badhi dadhi & baalo ko bas thoda sa kata-chhanta & baalo ki ponytail banake use dhili t-shirt & jenas pehna di thi taki vo koi hippy jaisa lage & vo khud Devalay vapas laut gayi thi.

Sameer us waqt Bombay me tha & usne us baat ka fayda uthake uski chizo ki talashi li lekin use kuchh bhi aisa nahi mila joki gutthi suljhane me uski madad karta & tab use apni saheli Sonam ki yaad aayi & usne use milne ke liye 1 5-star hotel ke coffee shop me bulaya.

"sonam,aajkal office me sab kaisa chal raha hai?"

"thik-thak lekin tu kyu puchh rahi hai?"

"& aaj se pehle kaisa chal raha tha?",rambha ne useks awal ko nazarandaz kar diya.

"main teri baat samajh nahi pa rahi,rambha.",sonam ke mathe pe bal pad gaye.

"rambha,jab sameer lapata hua tha & dad uski khoj me gaye the to sab thik chal raha tha yaha?",ab sonam soch me pad gayi.uska dil dhadakne laga ki vo use Pranav ke bare me bataye ya nahi.use ye bhi darr tha ki lahi rambha ko uske Brij se jude hone ki baat to pata nahi chal gayi.

"kya hu sonam?tu chup kyu hai?",rambha ne uske hath ke uapr apna hath rakha to sonam ne nazre upar ki.rambha ki nazro me use koi shaq nahi dikh raha tha balki chinta dikh rahi thi.

"rambha..vo.."

"haan,bol na!"

"dekh,mujhe ye baat shayad vijayant sir ko ya tumhe ya fir sameer ko bata deni chahiye thi par main bahut ghabra gayi thi."

"magar kyu,sonam?",us waqt sonam ne faisla kiya ki ab apne dil ka bojh halka karne ke liye apnis aheli ko sab bata dena hi sahi hoga.

"yaha nahi.mere ghar chal.",dono vaha se nikle & uske ghar pahunche.

"ab to bata."

"rambha,mujhe nahi pata ki tum mere bare me kya sochogi lekin aaj main tumhe sab bata dena chahti hu..",sonam ne brij se milne se leke pranav ke Shah se koi deal karne tak ki sari baaten bata di.rambha use khamoshi se dekh rahi thi..sonam brij ki jasoos thi..& use bhanak bhi nahi lagi..us se dosti bhi kya isiliye ganthi usne?..",tu mujhe dhokhebaz samajh rahi hai na?..lekin rambha,maine teri dosti se kabhi fayda uthane ki koshsih nahi ki.haan,shuru me maine socha tha ki sameer se teri nazdiki ka fayda uthaoon & us waqt tujhe khodti bhi rehti thi taki kuchh information mere hath lage lekin baad me mujhe khud pe badi sharm aayi..",sonam ki aankhe chhalak aayi thi..kya galti thi uski?..& us se bhi bada sawal kya vo is baat ka faisla karne vali kaun hoti hai?..vo bhi to usi ke jaisi thi..bas apna fayda dekhne vali.

vo apni subakti hui saheli ke karib gayi & uski pith pe hath rakha,"kuchh galat nahi kiya tune.teri jagah main bhi hoti to shayad aisa hi karti.",sonam ke dil ka gubar uski aankho se ab phoot-2 ke behne laga & vo rambha ke gale se lag gayi,"..bas ho gaya,ab chup ho ja..kaha na teri koi galti nahi..hum jaisi ladkiyo ko aise faisle to lene hi padte hai na!bas chup ho ja!",1 bachche ki tarah usne use samjhaya.

sonam ko ab bahut halka mehsus ho raha tha,"ab meri baat gaur se sun,sonam.dad ki maut ki jo kahani humne suni hai usme kuchh jhuth hai."

"kya?!magar tujhe kaise pata?"

"vo main tujhe baad me bataungi kyuki abhi tak mujhe bhi nahi pata sahi baat ka.dekh,unki maut me Brij Kothari ka hath to nahi tha."

"kya?!"

"haan.",use deven ne bata diya tha ki Soniya us raat uske sasur ke sath hotel se nikli thi & Kamdhar pahunchi thi na ki apne pati ke sath,"..& ye kaam parivar ke hi kisi sadasya ka hai."

"matlab pranav?"

"teri baato se mujhe uspe bhi shaq hone laga hai."

"uspe bhi?"

"haan,pehle to mujhe sameer pe shaq tha."

"what?!"

"haan.ab hum dono ko ye pata lagana hai ki aakhir hai kaun & use kya fayda hua dad ki maut se?"

"fayda..hun..lekin sameer ko kya fayda hoga..group to usehi milna tha apne pita ke baad."

"haan magar mere liye jhagada kiya tha unse usne lekin..lekin fir sab hone ke baad vo mujhse hi berukh ho gaya hai."

"achha?"

"haan,yaar vo mere sath sota hai,mere jism ko pyar karta hai lekin ab uska pyar mere dil tak jaise pahunch hi nahi pata..main to uske sath pehle jaise hi bartav karti hu magar vo jaise mujhe..mujhe.."

"bhool gaya hai?",sonam ne saheli ki baat puri karni chahi.

"nahi.bhoola nahi jaise ab main uske liye koi mayne nahi rakhti."

"hun..to tujhse shadi bhi kahi uski kisi chaal ka hissa to nahi tha?",rambha ne chaunk ke saheli ko dekha..is tarah to socha bhi nahi tha usne..magar chal kya ho sakti thi & kyu?..fir vahi kyu?..yani maqsad..sameer ka maqsad kya tha?..agar shadi bhi chaal thi to us chal ka maqsad tha kya?..rambha ka sar ghumne laga tha!

"tu thi to hai,rambha?..ye le pani pi.",.sonam ne use panika glass thamaya & uske sath baith gayi.rambha gatagat sara pani pi gayi.

"yaar,hum kaha phans gayi hain!",usne apni saheli ko dekha,"..bachpan se leke jawani aise kamiyo me guzri ki daulat & ooncha tabka humari khwahish hi nahi junoon bhi ho gaya lekin kya ye sab utni zaruri chizen hain jitna ye hume lagti thi?",rambha ne bahut gehri baat keh di thi.sonam ne aankhe jhuka li thi,"chal yaar.ab aise munh mat latka.chal kahi bahar chal ke badhiya khana khate hain.is musibat se to main nipat hi lungi.koi mera istemal kare & main use sabak na sikhaoon,aisa to hoga nahi!",dono hanste hue uthe & bahar jane ki taiyyari karne lage.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:06

जाल पार्ट--61

गतान्क से आगे......

रंभा अपने बिस्तर पे लेटी थी,सोनम की बातें उसके ज़हन मे घूम रही थी..प्रणव की हरकतें उसे शक़ के दायरे मे खड़ा ही नही कर थी बल्कि चीख-2 के कह रही थी कि वही मुजरिम है मगर फिर समीर के बदले रवैयययए,उसके झूठे बयान का राज़ क्या था?..प्रणव की हर्कतो से & जिस तरह से उसने रंभा को अपनी बातो के जाल मे फँसाने की कोशिश की थी,उस से इतना तो समझ आ ही रहा था कि वो ट्रस्ट ग्रूप का मालिक बनना चाहता है.महादेव शाह को भी जिस तरह वो कंपनी मे पैसे लगाने के बहाने घुसना चाह रहा था,उस से भी यही लगता था कि शाह उसकी कठपुतली है & उसके ज़रिए वो बाद मे कंपनी का हॉस्टाइल टेकोवर करने की कोशिश कर सकता है.तभी रंभा को याद आया कि आज रात उसने उस से मिलने की बात कही थी.अब देखना था कि वो क्या कहता है & उस से गुत्थी सुलझाने मे कोई मदद मिलती है या नही.तभी उसका मोबाइल बजा.

"हेलो."

"कैसी हो?",लाइन पे देवेन था.रंभा के जिस्म मे उसकी आवाज़ सुनते ही खुशी की लहर दौड़ गयी.वो 1 सफेद कुरती & जीन्स पहन सोनम से मिलने गयी थी & जब लौटी थी तो जीन्स उतार केवल कुरती मे आराम करने लगी थी.

"ठीक नही हू."

"क्यू?क्या हुआ?",देवेन की आवाज़ मे चिंता सॉफ झलक रही थी.

"दूर जाके पुछ्ते हैं कि मैं ठीक हू की नही!",रंभा अपने आशिक़ से मचल गयी तो वो हंस दिया.

"ओह!अब क्या करू?..हालात ही कुच्छ ऐसे हैं.",उसकी आवाज़ रंभा के ज़हन मे उसकी तस्वीर को ताज़ा कर रही थी & उसके जिस्म को भी.रंभा ने अपनी भारी जाँघो को आपस मे रगड़ा & अपनी पॅंटी पे अपना बाया हाथ रख दिया.

"हां,वो तो है.पता है,मामला उतना सीधा नही लग रहा अब.शक़ के दायरे मे केवल समीर ही नही प्रणव भी है."

"क्या?!"

"जी..",रंभा उसे सब बताने लगी.प्रेमी की आवाज़ सुन के ही उसका हाथ पॅंटी मे घुस गया था..जब बातें इतनी संजीदा थी तब तो ये हाल था अगर बाते रोमानी होती तो क्या होता!

"रंभा,मुझे कुच्छ भी ठीक नही लग रहा.बहुत ख़तरा है इस सब मे.तुम छ्चोड़ो उस परिवार को.हम मेहरा के मिलने की बात बता देते हैं & तुम समीर को छ्चोड़ मेरे पास आ जाओ.उसके जितनी दौलत नही मेरे पास पर तुम्हे कोई तकलीफ़ ना होने देने का वादा करता हू मैं!"

"पागल मत बानिए!",रंभा जज़्बाती हो गयी मगर उसकी उंगली उसके दाने को सहलाने लगी थी,"..ऐसा कैसे सोचा आपने की दौलत की वजह से आपके साथ नही रहूंगी मैं?..& अब बताएँगे तो क्या जवाब होगा हमारे पास कि हम दोनो 1 साथ उस गाँव मे कर क्या रहे थे & सनार का वो मुखिया.पोलीस उस तक तो पहुँच ही जाएगी & जब वो ये बताएगा कि हम पति-पत्नी बनके वाहा रहे थे तो फिर क्या होगा?..नही.इस मामले की तह तक पहुँचने पे ही हमे चैन मिल सकता है..आहह..!"

"क्या हुआ?कराही तुम..",मगर देवेन तब तक उसकी बात समझ गया & उसका लंड भी पॅंट मे कुलनूलने लगा,"..खुद से खेल रही हो क्या?",सुने अपने लंड को सहलाया.

"हूँ..आप तो है नही यहा..ऊव्ववव..तो निगोडी उंगली से ही काम चलना पड़ रहा है..ऊहह..कब मिलेंगे हम?..कब दोबारा आपके जिस्म के नीचे पिसुन्गि मैं?..",रंभा अपनी बातो से आप ही मस्त हो रही थी,"..आपके सख़्त हाथ कब मेरी छातियो को मसलेंगे & आपके गर्म होंठ कब उन्हे चूसेंगे?..उफफफफफ्फ़..बोलिए ना!..कब मेरे लब आपके लबो से मिलेंगे & कब आपके मज़बूत जिस्म को मैं चूम पाऊँगी?....ओह..माआआआअ..!",दाने पे उंगली की रगड़ तेज़ हो गयी थी.

"मैं भी तो बेकरार हू..",गोआ की कॉटेज मे बैठे देवेन का लंड भी पॅंट की क़ैद से बाहर आ चुका था & उसकी भींची मुट्ठी मे कसा हिल रहा था,"..तुम्हारे कोमल,नशीले जिस्म के साथ के लिए.तुम मे समाके तुमसे मिलने के लिए.."

"..हाआंन्‍ननणणन्..अब इंतेज़ार नही होता..जल्दी आइए & अपनी इस दीवानी की चूत मे अपना लंड घुसैए..ओईईईईईई..!",जोश मे आहत हो रंभा ने खुद ही अपने दाने को मसल दिया था & दर्द & मस्ती मे चीख पड़ी थी.उसकी बेबाक बातो से देवेन ना केवल चौंका बल्कि जोश मे भी भर गया.उसका दिल चीख उठा रंभा के साथ के लिए & उसके हाथ के हिलने की रफ़्तार बहुत तेज़ हो गयी.

"उउम्म्म्ममममम..आप मेरे उपर हैं..हाआआन्न्‍णणन्..मेरे अंदर..ओईईईई..& ज़ोर से..हान्ंणणन्..ज़ोर से..धक्के लगा..इए...आहह..!",वो झाड़ गयी & उसी वक़्त देवेन के लंड से भी वीर्य की तेज़ धार निकली & सामने के फर्श पे गिर गयी.दोनो कान से फोन लगाए 1 दूसरे की तेज़ सांसो को सुन रहे थे & फोन को ही चूम के अपने-2 प्यार का इज़हार कर रहे थे.

"पागल कर दिया है आपने मुझे!",रंभा ने अपने मोबाइल को चूमा.

"तुमने क्या मुझे ठीक हाल मे छ्चोड़ा है!",दोनो हँसने लगे.देवेन को खुद पे भी हँसी आ रही थी..इस उम्र मे स्कूल के लड़के के सी हरकत!

"अच्छा,मरीज़ कैसा है अब?"

"वो..डॉक्टर को दिखा तो दिया है & वो टेस्ट पे टेस्ट कर रहा है मगर यार बड़ा अजीब सा लगता है उसके साथ रहने मे."

"क्यू?",रंभा ने पॅंटी से हाथ निकल लिया था & कुरती के उपर से अपनी चूचियो को दबा रही थी.

"तुम ही सोचो,1 आदमी जो सब देखता है मगर खुद कुच्छ बोलता नही.,बस 1 रोबोट की तरह तुम्हारी हर बता मान लेता है.जल्दी से यहा आओ ताकि कुच्छ पक्का सोचें इस बारे मे."

"हूँ,करती हू कोई जुगाड़.वैसे उस डॉक्टर का क्या कहना है?"

"3-4 दीनो मे टेस्ट्स की सारी रिपोर्ट्स आ जाएँगी तभी बोलेगा कुच्छ.अच्छा चलो,रखता हू..आ रहा है मरीज़ हाथ मे पानी का ग्लास लिए हुए.प्यास लगी होगी & बॉटल मे पानी होगा नही.ओके,बाइ."

"बाइ..आइ..आइ लव यू.",वो उस से चुड चुकी थी.अभी-2 उसके साथ फोन पे भी चुदाई की थी लेकिन ये 3 लफ्ज़ कहते हुए अभी भी उसे शर्म आ जाती थी.

" आइ लव यू टू.",देवेन हंसा & फोन रख दिया.

रंभा के दरवाज़ा खोलते ही प्रणव ने उसके बंगल मे कदम रखा & हाथ पीछे ले जाके दरवाज़ा बंद किया & फिर उसे बाहो मे भर चूमने लगा,”इस तरह कहा चली गयी थी?”,उसने रंभा को बाहो मे भरे हुए दरवाज़े की बगल की दीवार से लगा दिया,”मेरा कुच्छ तो ख़याल किया होता!”,रंभा अभी भी बस कुरती & पॅंटी मे थी.देवेन के साथ हुई गुफ्तगू ने उसकी आग को बुरी तरह भड़का दिया था,अब वो तो यहा आ नही सकता था तो उसे प्रणव के ज़रिए ही उस आग को ठंडा करना था.प्रणव उसे दीवार से दबाते हुए अपना लंड उसकी चूत पे मसल रहा था & उसकी ज़ुबान से ज़ुबान लड़ा रहा था.

“तुम ही ने तो कहा था कि ग्रूप जाय्न करू..उउम्म्म्मम..!”,प्रणव उसकी कमर को लपेटे उसकी गर्देन चूम रहा था.उसके लंड की रगड़ से मस्त हो रंभा ने अपनी बाई टांग उठा के प्रणव की दाई टांग के उपर रखते हुए उसके पिच्छले हिस्से पे उपर-नीचे चलाया.

“अच्छा किया,बहुत अच्छा किया.”,प्रणव ने उसकी बाई जाँघ को दाए हाथ मे थमते हुए उसे सहलाया.उसके होंठ रंभा के चेहरे & गर्दन को भिगोये जा रहे थे.उसका बाया हाथ रंभा की कुरती मे घुस उसकी पीठ पे घूम रहा था.रंभा भी उसे चूमते हुए उसके सीने पे अपने बेसब्र हाथ चला रही थी.उसने उसे धकेल उसके होंठो को खुद से लगा किया & उसकी टी-शर्ट निकाल दी.उसके बालो भरे सीने मे अपनी उंगलिया फिराते हुए उसने फिर से उसे आगोश मे कसा & उसे चूमने लगी.उसके दिल मे देवेन के जिस्म की याद गूँज रही थी & उस से ना मिल पाने की बेबसी उसके हाथो की हर्कतो से झलक रही थी.

“तुम्हे मुझसे क्या ज़रूरी बात करनी थी,प्रणव?..ऊहह..!”,प्रणव का दाया हाथ उसकी पॅंटी के वेयैस्टबंड मे से घुसता हुआ उसकी गंद की बाई फाँक को दबाने लगा था.रंभा ने मस्ती मे आह भरते हुए सर उपर करते हुए आँखे बंद कर ली थी.

“रंभा,कल को अगर तुम्हेकोम्पनी के शेर्स मिल जाएँ & ग्रूप के अहम फ़ैसले के लिए वोटिंग हो तो तुम किसकी तरफ रहोगी?”,प्रणव ने उसकी कुरती उपर कर निकाली & केवल ब्रा & पॅंटी मे खड़ी रंभा को अपनी गोद मे उठा लिया.रंभा ने अपनी दोनो बाहें उसकी गर्देन मे डाली & उसे चूमने लगी.वो उसे उसके बेडरूम मे ले जा रहा था.

“बड़ा बेतुका सवाल किया है तुमने..ऊव्ववव..!”,प्रणव ने उसे बिस्तर पे गिराया.रंभा थोड़ा उचकी & बिस्तर के किनारे खड़े अपने आशिक़ की ट्रॅक पॅंट को नीचे किया & उसके खड़े लंड को थमते हुए उसकी झांतो को चूम लिया.

“इसमे बेतुका क्या है?..आहह..!”,रंभा की ज़ुबान उसके सूपदे को सहला रही थी.

“पहले तो मैं वोटिंग मेंबर हू नही,ना बनने की सूरत दिखती है तो फिर मैं किसके लिए वोट करूँगी इसका जवाब कैसे दू.”,उफफफफ्फ़..देवेन..ये दूरी क्यू है!..उसने प्रणव के लंड को मुँह मे भा ज़ोर से चूसा & उसकी गंद को बहुत ज़ोर से दबोचा.रंभा की आशिक़ी से झलकती बेचैनी से प्रणव को ये गुमान हुआ कि पिच्छले दिनो रंभा ने उसे बहुत मिस किया & इसीलिए अभी वो इतनी जोशमे है.उसके हाथ रंभा के बालो से नीचे गये & उसके ब्रा के हुक्स खोल दिया.

“फ़र्ज़ करने को कह रहा हू.”,उसकी मखमली पीठ पे उसने अपने हाथ चलाए.रंभा उसके लंड को हिलाते हुए चूसे जा रही थी.

“फिर भी जवाब देना मुश्किल है..आहह..!”,प्रणव ने उसके मुँह से लंड खींचा & उसे बिस्तर पे धकेल दिया & अपनी पॅंट उतार बिस्तर पे चढ़ गया.रंभा की आँखो मे अब बस वासना का नशा था.प्रणव ने उसकी दाई टांग को उठा लिया & आगे झुकते हुए उसकी दाई जाँघ के अन्द्रुनि हिस्से पे चूमने लगा,”..पता तो चले कि आख़िर वोटिंग हो किस मुद्दे पे रही है..आननह..!”,प्रणव के तपते होंठ उसकी पॅंटी की ओर बढ़ रहे थे जोकि उसकी चूत से रिस्ते रस से गीली हो गयी थी.

“मान लो वोटिंग इस बात के लिए हो रही हो की कंपनी मे किसी बाहर के शख्स को पैसे लगाने की इजाज़त दी जाए तो?”,..महादेव शाह..यही नाम बताया था सोनम ने उसे!..आख़िर प्रणव उसे क्यू कंपनी मे घुसना चाहता है?..उसे क्या फयडा होने वाला है इस से?..शाह पैसा लगाएगा तो फिर वो शेर्स भी लेगा & फिर मालिक तो वो हुआ?

“आन्न्‍ननणणनह..!”,रंभा का दिल देवेन के पास था,दिमाग़ प्रणव के मंसूबो को समझने मे उलझा था मगर जिस्म तो वही प्रणव की हर्कतो का लुत्फ़ उठा रहा था & जैसे ही प्रणव ने जोश मे भर उसकी पॅंटी के उपर से ही उसकी चूत को चूमा वो झाड़ गयी.वो आँखे बंद किए खुमारी मे तेज़ साँसे ले रही थी & वो उसकी ब्रा & पॅंटी उसके जिस्म से जुदा कर रहा था,”..उउन्न्ञणन्..ओह..हान्ंनननणणन्..चूसो ना!”,प्रणव उसके उपर लेट गया था & उसकी छातियो को चूमने के बाद उसकी गर्देन को चूमने लगा था जब रंभा ने उसके बाल पकड़ उसके मुँह को वापस अपने सीने से लगा अपनी ख्वाहिश ज़ाहिर की,”1 बात पुच्छू?..ऊन्नह..!”,प्रणव उसके निपल्स को जीभ से छेड़ते हुए उसकी छातियो को मुँह मे भर रहा था.उसका बाया हाथ तो रंभा के सीने पे ही था मगर दाया उसकी बाई जाँघ को उठाते हुए सहला रहा था.रंभा भी अपने चूत के उपर दबे उसके लंड की गर्मी से बेचैन हो बहुत धीरे-2 अपनी कमर हिला रही थी.

“पुछो ना.”,प्राणवा ने दाया हाथ भी जाँघ से खींच रंभा के सीने से लगाया & उसके दोनो उभारो को दबाते हुए उन्हे चूमने लगा.रंभा ने अपने दोनो घुटने मोड़ अपनी टाँगे फैला अपनी मस्ती का एलान किया.

“कोई दूसरा पैसे लगाएगा तो तुम्हे क्या फयडा होगा?..आईिययययययययईईईई..!”,लंड चूत मे घुस गया था.रंभा ने जिस्म कमान की तरह मोडते हुए आँखे बंद कर ली थी.समीर से मैल्कना हक अगर छीना भी तो वो इन्वेस्टर मालिक बन जाएगा..तुम तो वही के वही रह जाओगे..आन्न्‍नणणनह..हां..पूरा घुसाओ ना..रुक क्यू गये हो?!”,लंड 2 तिहाई अंदर घुसा था जब रंभा ने ये फ़ैसला लिया कि प्रणव से सीधा सवाल कर उसे परखा जाए.उसके सवाल ने प्रणव को चौंका दिया था.

ये लड़की तो बहुत होशियार है!..वो लंड घुसते हुए रुक गया था & उसके मस्ती भरे चेहरे,जिसपे लंड घुसने से हुए हल्के दर्द की लकीरें भी खींची थी,को गौर से देखने लगा.रंभा के बेचैन हाथ उसकी पीठ पे घूमते हुए उस से जैसे चुदाई आगे बढ़ाने की इल्टीजा कर रहे थे & जब उसने उसकी नही सुनी तो हाथो ने उसकी गंद को पकड़ उनमे अपने नाख़ून धंसा दिए.

“आहह..!”,नखुनो की चुभन से आहत हुए प्रणव की कमर अपनेआप हिलने लगी & चुदाई शुरू हो गयी.रंभा के होंठो पे मुस्कान खेलने लगी,”,प्रणव उसके उपर अपना पूरा भार डालते हुए लेट के धक्के लगा रहा था.रंभा को फिर से देवेन की याद आ गयी & उसने उसके जिस्म को बाहो मे भर ज़ोर से दबाया.उसकी टाँगे प्रणव की कमर पे चढ़ गयी & वो नीचे से कमर हिलाने लगी.

“देखो रंभा,तुम इस खानदान की बहू हो & मैं दामाद लेकिन हैसियत हमारी नौकरो वाली है.शिप्रा के नाम शेर्स हैं & उसकी मा के भी जबकि दोनो को ये तक पता नही कि पूरे मुल्क मे कंपनी के कितने दफ़्तर हैं..”,रंभा ने उसके कंधो को थामते हुए ज़ोर से आह भरी & उसका चेहरा ऐसा हो गया जैसे उसे बहुत तकलीफ़ हो रही हो.प्रणव की भी आह निकल गयी क्यूकी रंभा की चूत उसके लंड पे कस-फैल रही थी.उसने खुद पे काबू रखा & अपनी झड़ती महबूबा के बालो को चूमने लगा,”..मुल्क की छ्चोड़ो,दोनो से ये पुछो की डेवाले मे कितने दफ़्तर हैं हमारे तो जवाब नही दे पाएँगी लेकिन जब भी कभी वोटिंग की ज़रूरत पड़ेगी तो उन्हे बुलाया जाएगा..”

“..& हम जो इस ग्रूप की फ़िक्र करते हैं..इसके बारे मे जानते हैं,वो किनारे बैठे तमाशा देखेंगे..”,रंभा तेज़ सांसो & खुमारी के बीच भी उसकी बात को बड़े ध्यान से सुन रही थी.उसने उसके कंधे पकड़े & घूमाते हुए उसे नीचे किया & उसके उपर आ गयी.उसके सीने पे हाथ जमा उसके बालो को नोचती वो कमर हिलाने लगी तो प्रणव ने भी उसकी गंद की फांको को बेरहमी से मसला,”..इसीलिए मैं चाहता हू कि किसी बाहरी आदमी को लाऊँ.”

“ऊन्नह..”,रंभा ने उसके हाथ गंद से हटा के अपनी चूचियो से लगा दिए तो प्रणव ने उन्हे मसलना शुरू कर दिया,”..अभी भी मेरी बात का जवाब नही दिया तुमने, मगर फयडा क्या होगा इस से?..रहेंगे तो हम नौकर के नौकर ही!..आहह..!”,रंभा ने जानबूझ के ‘हम’ लफ्ज़ का इस्तेमाल किया था ताकि प्रणव को ये धोखा हो कि वो पूरी तरह से उसकी तरफ है.उसने उसकी चूचियो को पकड़े हुए ही नीचे खींचा & उसे अपने सीने से चिपकते हुए हाथो को उसकी कमर पे ला जाके उसे कसा & अपने घुटने मोड़ नीचे से ज़ोरदार धक्के लगाने लगा.

“मेरी जान,वो इन्वेस्टर पैसे लगाके ग्रूप के शेर्स लेगा मगर उन शेर्स का असली मालिक मैं रहूँगा & फिर तुम्हारे साथ मिलके मैं इस ग्रूप पे राज करूँगा..ओह..!”,उसके धक्को से आहत रंभा ज़्यादा देर तक बर्दाश्त नही कर पाई थी & फिर से झाड़ गयी थी.वो सर उठाए आँखे बंद किए कराह रही थी & उसकी चूत की हरकत से काबू खो चुका प्रणव का जिस्म झटके खा रहा था & उसका गाढ़ा वीर्य उसकी चूत मे छूट रहा था.रंभा के काँपते लबो ने उस वक़्त देवेन के होंठो की लज़्ज़ात को याद किया & उसके जिश्म मे झुरजुरी दौड़ गयी.

“वो इन्वेस्टर अपने पैसे लगाके तुम्हे मालिक क्यू बनाएगा?”,लंबी-2 साँसे लेती रंभा प्रणव के चेहरे को सहला रही थी.

“उस बेचारे को तो पता भी नही की मेरा असली मक़सद क्या है..”,प्रणव हंसा.अभी तक वो इस खेल मे अकेला था मगर अब वक़्त आ गया था 1 साथी चुनने का & रंभा से बेहतर साथी कोई हो नही सकता था.वो समझदार थी,होशियार थी & सबसे बड़ी बात,वो भी उसी की तरह सोचती थी,”..काम हो जाए उसके बाद उस इन्वेस्टर को मैं बड़ी सफाई से तस्वीर के बाहर कर दूँगा..”,प्रणव की उंगली रंभा के चेहरे पे घूम रही थी,..& फिर उस तस्वीर मे होंगे बस मैं & तुम!”,उसकी उंगली रंभा के गुलाबी लाबो पे आके रुक गयी थी.रंभा का दिल बहुत ज़ोरो से धड़का..तो कही प्रणव ही तो नही विजयंत मेहरा के इस हाल का ज़िम्मेदार?..मगर फिर समीर ने झूठा बयान क्यू दिया था?..अभी तो यही उचित था कि वो प्रणव को इस धोखे मे रखे कि वो उसी के साथ है..अब उसे गोआ जाना ही पड़ेगा.विजयंत का ठीक होना अब बहुत ज़रूरी हो गया था.वही बता सकता था कि उस रात कंधार पे हुआ क्या था..,”क्या सोचने लगी?”,वो प्रणव के सवाल से ख़यालो से बाहर आई.

“यही की प्रणव जी,आप तो बड़े च्छूपे रुस्तम हैं!”,उसने अपने होंठो पे ठहरी उसकी उंगली को काटा.दोनो हँसने लगे & प्रणव उसे बाहो मे भर चूमने लगा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--61

gataank se aage......

Rambha apne bistar pe leti thi,Sonam ki baaten uske zehan me ghum rahi thi..Pranav ki harkaten use shaq ke dayre me khada hi nahi kar thi balki chikh-2 ke keh rahi thi ki vahi mujrim hai magar fir Sameer ke badle ravaiyye,uske jhuthe bayan ka raaz kya tha?..pranav ki harkato se & jis tarah se usne rambha ko apne baato ke jaal me phansane ki koshish ki thi,us se itna to samajh aa hi raha tha ki vo Trust Group ka malik banana chahta hai.Mahadev Shah ko bhi jis tarah vo company me paise lagane ke bahane ghusana chah raha tha,us se bhi yehi lagta tha ki shah uski kathputli hai & uske zariye vo baad me company ka hostile takeover karne ki koshish kar sakta hai.tabhi rambha ko yaad aaya ki aaj raat usne us se milne ki baat kahi thi.ab dekhna tha ki vo kya kehta hai & us se gutthi sulajhne me koi madad milti hai ya nahi.tabhi uska mobile baja.

"hello."

"kaisi ho?",line pe Deven tha.rambha ke jism me uski aavaz sunte hi khushi ki lehar daud gayi.vo 1 safed kurti & jeans pehan sonam se milne gayi thi & jab lauti thi to jeans utar keval kurti me aaram akrne lagi thi.

"thik nahi hu."

"kyu?kya hua?",deven ki aavaz me chinta saaf jhalak rahi thi.

"door jake puchhte hain ki main thik hu ki nahi!",rambha apne aashiq se machal gayi to vo hans diya.

"oh!ab kya karu?..halaat hi kuchh aise hain.",uski aavaz rambha ke zehan me uski tasvir ko taza kar rahi thi & uske jism ko bhi.rambha ne apni bhari jangho ko aapas me ragda & apni panty pe apna baya hath rakh diya.

"haan,vo to hai.pata hai,mamla utna seedha nahi lag raha ab.shaq ke dayre me keval Sameer hi nahi pranav bhi hai."

"kya?!"

"ji..",rambha use sab batane lagi.premi ki aavaz sun ke hi uska hath panty me ghhus gaya tha..jab baaten itni sanjida thi tab to ye haal tha agar baate romani hoti to kya hota!

"rambha,mujhe kuchh bhi thik nahi lag raha.bahut khatra hai is sab me.tum chhodo us parivar ko.hum mehra ke milne ki baat bata dete hain & tum sameer ko chhod mere paas aa jao.uske jitni daulat nahi mere paas par tumhe koi taklif na hone dene ka vada karta hu main!"

"pagal mat baniye!",rambha jazbati ho gayi magar uski ungli uske dane ko sehlane lagi thi,"..aisa kaise socha aapne ki daulat ki vajah se aapke sath nahi rahungi main?..& ab batayenge to kya jawab hoga humare paas ki hum dono 1 sath us ganv me kar kya rahe the & Sanaar ka vo mukhiya.police us tak to pahunch hi jayegi & jab vo ye batayega ki hum pati-patni banke vaha rahe the to fir kya hoga?..nahi.is mamle ki teh tak pahunchne pe hi hume chain mil sakta hai..aahhhh..!"

"kya hua?karahi tum..",magar deven tab tak uski baats amajh gaya & uska lund bhi pant me kulnulane laga,"..khud se khel rahi ho kya?",sune apne lund ko sehlaya.

"hun..aap to hai nahi yaha..oow.to nigodi ungli se hi kaam chalana pad raha hai..oohhhhh..kab milenge hum?..kab dobara aapke jism ke neeche pisungi main?..",rambha apni baato se aap hi mast ho rahi thi,"..aapke sakht hath kab meri chhatiyo ko maslenge & aapke garm honth kab unhe chusenge?..uffffff..boliye na!..kab mere lab aapke labo se milenge & kab aapke mazboot jism ko main chum paoongi?....ohhhhhhhhh..maaaaaaaaa..!",dane pe ungli ki ragad tez ho gayi thi.

"main bhi to bekarar hu..",Goa ki cottage me baithe deven ka lund bhi pant ki qaid se bahar aa chuka tha & uski bhinchi mutthi me kasa hil raha tha,"..tumhare komal,nashile jism ke sat ke liye.tum me samake tumse milne ke liye.."

"..haaaannnnnnn..ab intezar nahi hota..jaldi aaiye & apni is deewani ki chut me apna lund ghusaiye..ouiiiiiiiii..!",josh me aahat ho rambha ne khud hi apne dane ko masal diya tha & dard & masti me chikh padi thi.uski bebak baato se deven na keval chaunka balki josh me bhi bhar gaya.uska dil chikh utha rambha ke sath ke liye & uske hath ke hilane ki raftar bahut tez ho gayi.

"uummmmmmmm..aap mere upar hain..haaaaaannnnn..mere andar..ouiiiiiii..& zor se..haannnnn..zor se..dhakke laga..iye...aahhhhhhhhhhhhhhh..!",vo jhad gayi & usi waqt deven ke lund se bhi virya ki tez dhar nikli & samne ke farsh pe gir gayi.dono kaan se fone lagaye 1 dusre ki tez sanso ko sun rahe the & fone ko hi chum ke apne-2 pyar ka izhar kar rahe the.

"pagal kar diya hai aapne mujhe!",rambha ne apne mobile ko chuma.

"tumne kya mujhe thik haal me chhoda hai!",dono hansne lage.deven ko khud pe bhi hansi aa rahi thi..is umra me school ke ladke ke si harkat!

"achha,mariz kaisa hai ab?"

"vo..doctor ko dikha to diya hai & vo test pe test kar raha hai magar yaar bada ajib sa lagta hai uske sath rehne me."

"kyu?",rambha ne panty se hath nikal liya tha & kurti ke uapr se apni chhatiyo ko daba rahi thi.

"tum hi socho,1 aadmi jo sab dekhta hai magar khud kuchh bolta nahi.,bas 1 robot ki tarah tumhari har bata maan leta hai.jaldi se yaha aao taki kuchh pakka sochen is bare me."

"hun,karti hu koi jugad.vaise us doctor ka kya kehna hai?"

"3-4 dino me tests ki sari reports aa jayengi tabhi bolega kuchh.achha chalo,rakhta hu..aa raha hai mariz hath me pani ka glass liye hue.pyas lagi hogi & bottle me pani hoga nahi.ok,bye."

"bye..i..i love you.",vo us se chud chuki thi.abhi-2 uske sath fone pe bhi chudai ki thi lekin ye 3 lafz kehte hue abhi bhi use sharm aa jati thi.

" i love you too.",deven hansa & fone rakh diya.

Rambha ke darwaza kholte hi Pranav ne uske bungle me kadam rakha & hath peechhe le jake darwaza band kiya & fir use baaho me bhar chumne laga,”is tarah kaha chali gayi thi?”,usne rambha ko baaho me bhare hue darwaze ki bagal ki deewar se laga diya,”mera kuchh to khayal kiya hota!”,rambha abhi bhi bas kurti & panty me thi.Deven ke sath hui guftgu ne uski aag ko buri tarah bhadka diya tha,ab vo to yaha aa nahi sakta tha to use pranav ke zariye hi us aag ko thanda karna tha.pranav use deewar se dabate hue apna lund uski chut pe masal raha tha & uski zuban se zuban lada raha tha.

“tum hi ne to kaha tha ki group join karu..uummmmm..!”,pranav uski kamar ko lapete uski garden chum raha tha.uske lund ki ragad se mast ho rambha ne apni bayi tang utha ke pranav ki dayi tang ke upar rakhte hue uske pichhle hisse pe upar-neeche chalaya.

“achha kiya,bahut achha kiya.”,pranav ne uski bayi jangh ko daye hath me thamte hue use sehlaya.uske honth rambha ke chehre & gardan ko bhigoye ja rahe the.uska baya hath rambha ki kurti me ghus uski pith peg hum raha tha.rambha bhi use chumte hue uske seene pe apne besabr hath chala rahi thi.usne use dhakel uske hotho ko khud se laga kiya & uski t-shirt nikal di.uske baalo bhare seene me apni ungliya firate hue usne fir se use agosh me kasa & use chumne lagi.uske dil me deven ke jism ki yaad gunj rahi thi & us se na mil pane ki bebasi uske hatho ki harkato se jhalak rahi thi.

“tumhe mujhse kya zaruri baat karni thi,pranav?..oohhhhhh..!”,pranav ka daya hath uski panty ke waistband me se ghusta hua uski gand ki bayi fank ko dabane laga tha.rambha ne masti me aah bharte hue sar upar karte hue aankhe band kar li thi.

“rambha,kal ko agar tumhecompany ke shares mil jayen & group ke aham faisle ke liye voting ho to tum kiski taraf rahogi?”,pranav ne uski kurti upar kar nikali & keval bra & panty me khadi rambha ko apni god me utha liya.rambha ne apni dono baahen uski garden me dali & use chumne lagi.vo use uske bedroom me le ja raha tha.

“bada betuka sawal kiya hai tumne..oow.!”,pranav ne use bistar pe giraya.rambha thoda uchki & bistar ke kinare khade apne aashiq ki track pant ko neeche kiya & uske khade lund ko thamte hue uski jhanto ko chum liya.

“isme betuka kya hai?..aahhhhhh..!”,rambha ki zuban uske supade ko sehla rahi thi.

“pehle to main voting member hu nahi,na banana ki surat dikhti hai to fir main kiske liye vote karungi iska jawab kaise du.”,ufffff..deven..ye duri kyu hai!..usne pranav ke lund ko munh me bha zor se chusa & uski gand ko bahut zor se dabocha.rambha ki aashiqi se jhalakti bechaini se pranav ko ye guman hua ki pichhle dino rambha ne use bahut miss kiya & isiliye abhi vo itni joshme hai.uske hath rambha ke baalo se neeche gaye & uske bra ke hooks khol diya.

“farz karne ko keh raha hu.”,uski makhmali pith pe usne apne hath chalaye.rambha uske lund ko hilate hue chuse ja rahi thi.

“fir bhi jawab dena mushkil hai..aahhhh..!”,pranav ne uske munh se lund khincha & use bistar pe dhakel diya & apni pant utar bistar pe chadh gaya.rambha ki aankho me ab bas vasna ka nasha tha.pranav ne uski dayi tang ko utha liya & aage jhukte hue uski dayi jangh ke andruni hisse pe chumne laga,”..pata to chale ki aakhir voting ho kis mudde pe rahi hai..aannhhhhhhhhhh..!”,pranav ke tapte honth uski panty ki or badh rahe the joki uski chut se riste ras se gili ho gayi thi.

“maan lo voting is baat ke liye ho rahi ho ki company me kisi bahar ke shakhs ko paise lagane ki ijazat di jaye to?”,..Mahadev Shah..yehi naam bataya tha Sonam ne use!..aakhir pranav use kyu company me ghusana chahta hai?..use kya fayda hone vala hai is se?..shah paisa lagayega to fir vo shares bhi lega & fir malik to vo hua?

“aannnnnnnhhhhhhhhhhh..!”,rambha ka dil deven ke paas tha,dimagh pranav ke mansubo ko samajhne me uljha tha magar jism to vahi pranav ki harkato ka lutf utha raha tha & jaise hi pranav ne josh me bhar uski panty ke upar se hi uski chut ko chuma vo jhad gayi.vo aankhe band kiye khumari me tez sanse le rahi thi & vo uski bra & panty uske jism se juda kar raha tha,”..uunnnnn..ohhhhhh..haannnnnnnn..chuso na!”,pranav uske upar let gaya tha & uski chhatiyo ko chumne ke baad uski garden ko chumne laga tha jab rambha ne uske baal pakad uske munh ko vapas apne seene se laga apni khwahish zahir ki,”1 baat puchhu?..oonnhhhhhh..!”,pranav uske nipples ko jibh se chhedte hue uski chhatiyo ko munh me bhar raha tha.uska baya hath to rambha ke seene pe hi tha magar daya uski bayi jangh ko uthate hue sehla raha tha.rambha bhji apne chut ke uapr dabe uske lund ki garmi se bechain ho bahut dhire-2 apni kamar hila rahi thi.

“puchho na.”,pranva ne daya hath bhi jangh se khinch rambha ke seene se lagaya & uske dono ubharo ko dabate hue unhe chumne laga.rambha ne apne dono ghutne mod apni tange faila apni masti ka elan kiya.

“koi dusra paise lagayega to tumhe kya fayda hoga?..aaiiyyyyyyyyeeeeeeeeee..!”,lund chut me ghus gaya tha.rambha ne jism Kaman ki tarah modte hue aankhe band kar lit hi.Sameer se mailkana hak agar china bhi to vo investor malik ban jayega..tum to vahi ke vahi reh jaoge..aannnnnnhhhhhhhh..haan..pura ghusao na..ruk kyu gaye ho?!”,lund 2 tihai andar ghusa tha jab rambha ne ye faisla liya ki pranav se seedha sawal kar use parkha jaye.uske sawal ne pranav ko chaunka diya tha.

Ye ladki to bahut hoshiyar hai!..vo lund ghusate hue ruk gaya tha & uske masti bhare chehre,jispe lund ghusne se hue halke dard ki lakiren bhi khinchi thi,ko gaur se dekhne laga.rambha ke bechain hath uski pith pe ghumte hue us se jaise chudai aage badhane ki iltija kar rahe the & jab usne uski nahi suni to hatho ne uski gand ko pakad unme apne nakhun dhansa diye.

“aahhhhh..!”,nakhuno ki chubhan se aahat hue pranav ki kamar apneaap hilne lagi & chudai shuru ho gayi.rambha ke hotho pe muskan khelne lagi,”,pranav uske upar apna pura bhaar dalte hue let ke dhakke laga raha tha.rambha ko fir se deven ki yaad aa gayi & usne uske jism ko baaho me bhar zor se dabaya.uski tange pranav ki kamar pe chadh gayi & vo neeche se kamar hilane lagi.

“dekho rambha,tum is khandan ki bahu ho & main damad lekin haisiyat humari naukro vali hai.Shipra ke naam shares hain & uski maa ke bhi jabki dono ko ye tak pata nahi ki pure mulk me company ke kitne daftar hain..”,rambha ne uske kandho ko thamte hue zor se aah bhari & uska chehra aisa ho gaya jaise use bahut taklif ho rahi ho.pranav ki bhi aah nikal gayi kyuki rambha ki chut uske lund pe kas-fail rahi thi.usne khud pe kabu rakha & apni jhadti mehbooba ke baalo ko chumne laga,”..mulk ki chhodo,dono se ye puchho ki Devalay me kitne daftar hain humare to jawab nahi de payengi lekin jab bhi kabhi voting ki zarurat padegi to unhe bulaya jayega..”

“..& hum jo is group ki fikr karte hain..iske bareme jante hain,vo kinare baithe tamasha dekhenge..”,rambha tez sanso & khumari ke beech bhi uski baat ko bade dhyan se sun rahi thi.usne uske kandhe pakde & gumate hue use neeche kiya & uske upar aa gayi.uske seene pe hath jama uske baalo ko nochti vo kamar hilane lagi to pranav ne bhi uski gand ki fanko ko berahmi se masla,”..isiliye main chahta hu ki kisi bahri aadmi ko laoon.”

“oonnhhhhhhh..”,rambha ne uske hath gand se hatake apni choochiyo se laga diye to pranav ne unhe masalna shuru kar diya,”..abhi bhi meri baat ka jawab nahi diya tumne, magar fayda kya hoga is se?..rahenge to hum naukar ke naukar hi!..aahhhhhhhh..!”,rambha ne janbujh ke ‘hum’ lafz ka istemal kiya tha taki pranav ko ye dhokha ho ki vo puri tarah se uski taraf hai.usne uski choochiyo ko pakde hue hi neeche khincha & use apne seene se chipkate hue hatho ko uski kamar pe la jake use kasa & apne ghutne mod neeche se zordar dhakke lagane laga.

“meri jaan,vo investor paise lagake group ke shares lega magar un shares ka asli malik main rahunga & fir tumahre sath milke main is group pe raaj karunga..ohhhhh..!”,uske dhakko se aahat rambha zyada der tak bardasht nahi kar payi thi & fir se jhad gayi thi.vo sar uthaye aankhe band kiye karah rahi thi & uski chut ki harkat se kabu kho chuka pranav ka jism jhatke kha raha tha & uska gadha virya uski chut me chhut raha tha.rambha ke kanpte labo ne us waqt deven ke hotho ki lazzaat ko yaad kiya & uske jsim me jhurjhuri daud gayi.

“vo investor apne paise lagake tumhe malik kyu banayega?”,lambi-2 sanse leti rambha pranav ke chehre ko sehla rahi thi.

“us bechare ko to pata bhi nahi ki mera asli maqsad kya hai..”,pranav hansa.abhi tak vo is khel me akela tha magar ab waqt aa gaya tha 1 sathi chunane ka & rambha se behtar sathi koi ho nahi sakta tha.vo samajhdar thi,hoshiyar thi & sabse badi baat,vo bhi usi ki tarah sochti thi,”..kaam ho jaye uske baad us investor ko main badi safai se tasveer ke bahar kar dunga..”,pranav ki ungli rambha ke chehre pe ghum rahi th,..& fir us tasvir me honge bas main & tum!”,uski ungli rambha ke gulabi labo pe aake ruk gayi thi.rambha ka dil bahut zoro se dhadka..to kahi pranav hi to nahi Vijayant Mehra ke is haal ka zimmedar?..magar fir Sameer ne jhutha bayan kyu diya tha?..abhi to yehi uchit tha ki vo pranav ko is dhokhe me rakhe ki vo usi ke sath hai..ab use Goa jana hi padega.vijayant ka thik hona ab bahut zaruri ho gaya tha.vahi bata sakta tha ki us raat Kamdhar pe hua kyat ha..,”kya sochne lagi?”,vo pranav ke sawal se khayalo se bahar aayi.

“yehi ki pranav ji,aap to bade chhupe rustam hain!”,usne apne hotho pe thehri uski ungli ko kata.dono hansne lage & pranav use baaho me bhar chumne laga.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:07

जाल पार्ट--62

गतान्क से आगे......

"ओह!समीर..आहह..ऐसे ही प्यार करते रहो..!",अपनी डाई बाँह समीर की गर्दन मे डाले कामया उसकी गोद मे बैठी थी.उसने 1 स्कर्ट & ब्लाउस पहना था & समीर उसकी गर्दन से लेके क्लीवेज तक अपने होंठ चला रहा था.उसका बाया हाथ कामया की कमर को थामे था & दया उसकी जाँघो के बीच घुसा वाहा की कोमलता परख रहा था.

"ऊहह..शरीर कहिनके..!",कामया ने मुस्कुराते हुए आशिक़ के गाल पे प्यार भरी चपत लगाई जोकि उसकी पॅंटी मे हाथ घुसा उसकी चूत को सहला रहा था & उसके क्लीवेज को दांतो से हौले-2 काट रहा था,"..उउन्न्ञनह..हाआंन्‍ननणणन्..!",कामया के जिस्म मे बिजली दौड़ रही थी.समीर की उंगली उसकी चूत की दीवारो को रगड़ने लगी थी.

समीर अपनी नाक उसके क्लीवेज मे घुसा के रगड़ते हुए उसके सीने को चूम रहा था.कामया का दिल भी अब उसके होंठो की गर्मी को सीने पे महसूस करने को मचल रहा था.उसने खुद ही अपने ब्लाउस के बटन्स खोल दिए & अपनी छातियो को ब्रा के कप्स से आज़ाद कर दिया.समीर ने अपने मुँह मे उसकी छातियो को बारी-2 से भरना शुरू कर दिया तो कामया सर पीछे झटकते हुए बहुत तेज़ आहें लेने लगी.

"आहह..अब रहा नही जाता,समीर..ओह..जल्दी से मुझे अपनी दुल्हन बनाओ..आन्न्‍नननणणनह..!",समीर की उंगली & ज़ुबान ने उसे उस कगार से नीचे धकेल दिया था जहा से गिरने मे जो मज़ा मिलता है वो & कभी महसूस नही होता,"..फिर हर रात,सारी-2 रात तुम्हारी बाहो मे ऐसे ही गुज़ारुँगी..1 पल को भी तुम्हे खुद से दूर नही जाने दूँगी..",समीर ने उसकी पॅंटी खींची तो कामया ने खुद ही स्कर्ट & पॅंटी को निकाला & उसकी पॅंट ढीली कर उसके जिस्म के दोनो तरफ टाँगे कर उसकी गोद मे बैठते हुए उसके लंड को अपनी गीली चूत मे ले लिया,"..ऊहह..!",लंड अंदर घुसा तो उसने सर को पीछे फेंका & समीर के सर को पकड़ उसे अपनी चूचियो मे दबाते हुए कमर हिलाने लगी.

"बस मानपुर वाला टेंडर खुले & हमे मिले.उसके बाद मैं रंभा को किनारे करूँगा & तुम बनोगी म्र्स.मेहरा.",समीर उसकी कमर को जकड़े उसकी चूचियो को चूस्ते हुए अपनी कमर हिला रहा था.

"मिस्टर.मेहरा,लॅमबर्ट बॅंक के मिस्टर.सूरी आज शाम 6 बजे आपसे मिल नही पाएँगे.",अचानक दरवाज़ा खुला & किसी की गुस्से से भरी आवाज़ आई.दोनो प्रेमी चौंके & कामया ने गर्दन घुमाई.जिस कुर्सी पे दोनो चुदाई कर रहे थे वो बिल्कुल दरवाज़े के सामने थी & समीर को उनकी मोहब्बत मे खलल डालने वाले को देखने के लिए गर्दन नही घुमानी पड़ी थी.

"रंभा..त-तुम..!",समीर खड़ा होने लगा & उसी वक़्त कामया भी उसकी गोद से उतरने लगी मगर वो लड़खड़ा गयी & फर्श पे गिर गयी.समीर जैसे ही खड़ा हुआ उसकी पॅंट सरर से नीचे सरक के उसकी आएडियो के गिर्द फँस गयी.रंभा को दोनो की हालत पे बहुत हँसी आ रही थी लेकिन उसने अपने दिल के भाव को चेहरे पे नही आने दिया.उसे अंदाज़ा तो था कि दोनो का रिश्ता चुदाई तक पहुँच गया होगा & शुरू मे इस ख़याल से उसे काफ़ी गुस्सा भी आया था मगर अब उसकी ज़िंदगी मे देवेन आ चुका था.अब उसे समीर की कोई ज़रूरत नही थी मगर फिर भी इन दोनो को सज़ा तो देनी ही थी.रंभा कुच्छ पल अंगारे बरसाती आँखो से दोनो को देखती रही-दोनो जल्दी-2 अपने-2 कपड़े पहन रहे थे,& फिर दरवाज़ा ज़ोर से बंद करते हुए वाहा से निकल गयी,"..रंभा..रंभा सुनो तो..!"

गलियारे से बाहर जाती रंभा को समीर के घबराए चेहरे को याद कर बहुत हँसी आ रही थी मगर उस से भी ज़्यादा हँसी उसे आई थी उसे देख के चौंक उठे समीर की गोद से फर्श पे दोनो टाँगे फैलाए गिरती कामया को देख के.

समीर ने रंभा से कहा था कि वो आज देर रात बॉमबे से लौटेगा.यही बात सोनम को भी पता थी मगर दोपहर 12 बजे 1 फोन आया जिसे सोनम ने रिसीव किया,"ट्रस्ट ग्रूप,समीर मेहरा'स ऑफीस.हाउ मे आइ हेल्प यू?"

"हेलो,मैं लॅमबर्ट बॅंक से राजिंदर सूरी बोल रहा हू.आज शाम 6 बजे मुझे मिस्टर.मेहरा से ग्रांड वाय्लेट मे मिलना था मगर कुच्छ ऐसी एमर्जेन्सी आ गयी है कि मैं आज उनसे मिल नही पाऊँगा.मैने उनका मोबाइल ट्राइ किया था मगर वो मिल नही रहा तो प्लीज़ उन्हे ये मेसेज दे दीजिएगा & ये भी कह दीजिएगा कि इस बात के लिए मैं माफी चाहता हू.ओके..थॅंक्स!"

"जी..लेकिन..वो..",तब तक सूरी ने फोन रख दिया था,"..तो आज रात को वापस आ रहे थे.",सोनम सोच मे पड़ गयी थी & उसने ये बात फ़ौरन अपनी सहेली को बता दी जिसने उसे ये बात समीर को बताने से मना किया.जिस वक़्त सोनम का फोन आया था उस वक़्त रंभा प्रणव के साथ 1 शॉपिंग माल के बाहर कार मे बैठी थी.उस माल मे विदेशी डिज़ाइनर्स के स्टोर्स थे & वाहा उसे आज उस शख्स से मिलना था जिसका उसने अभी तक बस नाम ही सुना था-महादेव शाह.

"क्या बात है?किसका फोन था?",उसे परेशान देख प्रणव ने पुछा.

"मेरी 1 सहेली थी.उस से भी मिलना है.वही सोच रही थी."

"अच्छा,थोड़ी देर के लिए उसे भूल जाओ & ध्यान से सुनो.शाह ने मुझे कहा था कि वो तुमसे ऐसे मिलना चाहता है कि लगे कि तुम दोनो कही टकरा गये फिर वो तुमसे मेल-जोल बढ़ाएगा & मेरी तारीफ करेगा मगर कुच्छ इस तरह की तुम्हे ये शक़ ना हो कि हम मिले हैं."

"अच्छा.यानी अभी तुम दोनो हो तो मिले हुए मगर दुनिया के लिए तुमने भी डॅड की तरह उसका ऑफर ठुकरा दिया है.अब वो मुझसे तुम्हारे बारे मे ऐसे बात करेगा कि मुझे लगे की तुम दोनो दोस्त तो बिल्कुल नही हो मगर वो फिर भी तुम्हारी काबिलियत का लोहा मानता है.है ना?"

"हां.वो यही सोचता रहेगा कि वो मेरे साथ मिलके तुम्हारा इस्तेमाल कर रहा है जबकि हाक़ेक़त ये होगी कि हम दोनो उस बुड्ढे का इस्तेमाल कर रहे होंगे.",प्रणव उसकी होशियारी पे फिर हैरान हो गया था & 1 पल को उसे ये लगा कि कही उसने इस लड़की को अपने साथ मिलाके कोई ग़लती तो नही की है?..कही ऐसा ना हो कि आगे जाके वो उसे ही कोई धोखा ना दे दे..नही..नही..ऐसा नही हो सकता..इसे भी सहारे की ज़रूरत है & जब समीर जाएगा तो मेरे सिवा और मिलेगा कौन इसे?..,"..चलो,जाओ माल मे & उस से मुलाकात कर लो."

"ओके,डार्लिंग."रंभा ने उसे चूमा & फिर कार से उतार के माल मे चली गयी.कुच्छ पलो बाद 1 मशहूर इटॅलियन डिज़ाइनर का डिज़ाइन किया 1 ईव्निंग गाउन वो देख रही थी & 1 असिस्टेंट उसे उस ड्रेस के बारे मे बता रही थी जब सफेद बालो वाला 1 बूढ़ा मगर चुस्त शख्स उसके सामने आ खड़ा हुआ.असिस्टेंट उसे देख बड़ी शालीनता से पीछे हट गयी.

"एक्सक्यूस मे,आप म्र्स.मेहरा है ना?..म्र्स.रंभा मेहरा?"

"जी."

"इस तरह से आपको परेशान करने के लिए माफी चाहता हू मगर आपको देखा तो आपसे मिलने से खुद को रोक नही पाया.",रंभा ने उसे निगाहो से तोला.बुद्धा देखने मे अच्छा था & क्रीम कलर की कमीज़,भूरी टाइ & काले सूट के साथ आँखो पे चढ़ा रिमलेस चश्मा उसकी शख्सियत को रोबदार बना रहे थे.उसे देखने से ऐसा लगता था जैसे कि वो किसी ऊँचे खानदान से ताल्लुक रखता है.

"हेलो.",रंभा ने हाथ आगे बढ़ाया.

"हाई,मुझे महादेव शाह कहते हैं.",उसने रंभा का हाथ थाम उसे बड़ी शालीनता से चूमा..बुड्ढ़ा लड़कियो को इंप्रेस करना भी जानता था,"..जब आपके पति लापता हुए थे तब मैने आपको खबरों मे देखा था & आपकी हिम्मत की दाद दिए बिना नही रहा था."

"थॅंक यू."

"आपके ससुर मिस्टर.मेहरा के लिए भी मेरे दिल मे बस इज़्ज़त & तारीफ ही थी.मैं उनके साथ काम भी करना चाहता था लेकिन उन्हे मंज़ूर नही था.",रंभा ने उसे सवालीयो निगाहो से देखा.

"मैं 1 इन्वेस्टर हू.कंपनीज़ मे पैसा लगाता हू & बदले मे उनके चंद शेर्स मुझे मिलते हैं & यही मेरी कमाई का ज़रिया है.ट्रस्ट मे भी इनवेस्ट करने की मेरी ख्वाहिश थी मगर मिस्टर.मेहरा नही माने."

"ओह.ये कारोबारी बातें तो मैं नही जानती.",रंभा इस वक़्त 1 अमीर खानदान की बहू थी जिसकी ज़िंदगी बस कपड़े,गहनो & पार्टीस के गिर्द ही घूमती थी.

"& मैं आपसे कोई शिकवा भी नही कर रहा!",वो हंसा तो रंभा भी थोड़ा शरमाते हुए हंस दी..अगर उस बुड्ढे को लड़कियो से चिकनी-चुपड़ी बातें करना आता था तो वो भी मर्दों को अपनी उंगलियो पे नचाने मे माहिर थी!

"आपके पति से मिलने की ख़ुशनसीबी तो अभी तक हासिल नही हुई है मुझे मगर मिस्टर.प्रणव से मैं काई मर्तबा मिला हू.उन्होने भी मेरी पेशकश ठुकरा ही दी थी लेकिन वो आदमी बहुत काबिल हैं.जब तक वो ग्रूप मे हैं,आपकी कंपनी महफूज़ है."

"जी.वो बहुत भले इंसान है & हमसब उन्हे बहुत पसंद करते हैं.कारोबार मे आप हमारे साथ नही जुड़ पाए पर ज़ाति तौर पे तो जुड़ सकते हैं..",ये बात रंभा नेकुच्छ इस तरह से कही कि शाह को लगा कि कही वो उस से दोहरे मतलब वाली बात तो नही कर रही लेकिन रंभा के मासूमियत से मुस्कुराते चेहरे को देख उसे अपनी सोच ग़लत लगी मगर वो सोच मे तो पड़ ही गया था.यही तो रंभा चाहती थी & जान बुझ के उसने वो बात कही थी,"..कभी आइए हमारे घर.आप आदमी दिलचस्प मालूम होते हैं.",शाह फिर से उसकी बात मे मतलब ढूँढने लगा मगर 1 बार फिर रंभा के मासूम चेहरे ने उसे उलझा दिया.

"ज़रूर आऊंगा लेकिन उसके पहले आपको कभी हमारी मेहमाननवाज़ी कबूलनी पड़ेगी."

"ज़रूर.ऐसा करना तो मेरे लिए बड़ी खुशी की बात होगी."

"मेरा यकी कीजिए रंभा जी,आपसे ज़्यादा खुशी मुझे होगी.अच्छा,अब बहुत वक़्त लिया आपका.अब & परेशान नही करूँगा.",वो 1 किनारे हो गया तो रंभा ने अपना हाथ फिर से आगे बढ़ाया.

"नाइस मीटिंग यू,मिस्टर.शाह."

"सेम हियर.",शाह ने उसके हाथ को दोबारा चूमा & फिर स्टोर से बाहर चला गया.

रंभा कोई 15 मिनिट बाद कुच्छ समान खरीद माल से निकली & प्रणव को फोन किया,"मिल लिया उस से.सब ठीक रहा."

"वेरी गुड,डार्लिंग.",रंभा का अगला पड़ाव था ट्रस्ट फिल्म्स का ऑफीस.वो फिल्म जिसके बारे मे रंभा ने गौर किया था कि अगर उसमे 1 साइड हेरोयिन का रोल थोड़ा बढ़ा दिया जाए तो वो और निखर जाएगी,उसकी शूटिंग 70% हो गयी थी & उसी फुटेज को आज डाइरेक्टर,एडिटर,कॅमरमन,राइटर & बाकी लोग देखने वाले थे.फिल्म का हीरो अभी शहर से बाहर था & कामया विदेश से अभी लौटी नही थी.

सोनम के फोन से रंभा का माथा ठनका था & उसने ये फ़ैसला किया कि पहले तो ये पता करेगी कि कामया शहर मे है या नही.अगर वो शहर मे होती तो बहुत मुमकिन था कि उस से मिलने के लिए समीर ने झूठ बोला हो.रंभा कार चलाते हुए सोच रही थी कि कौन हो सकता है जो उसे कामया के शहर मे होने की सही खबर दे सकता था.उसने 1-2 फोन घुमाए तो पता चला कि कामया के शहर मे 4 मकान हैं.वो जिस मकान मे रहती है उसमे उसकी मा भी साथ ही रहती है.2 उसने किराए पे दे रखे हैं.अब बचा 1 & 1 फिल्मी रिपोर्टर से उसे पता चला कि यही वो कबीर के साथ रंगरलियाँ मनाती है.

रंभा ने फिल्म कंपनी के 1 कर्मचारी को कामया से कोई कॉस्ट्यूम्स की फिटिंग सेशन्स का अपायंटमेंट फिक्स करने के बहाने उसी फ्लॅट पे भेजा.लेकिन काम वैसे तो कामया के सेक्रेटरी का था मगर उस से कहने से ये पता नही चलता कि कामया शहर मे थी या नही.लड़का तेज़-तर्रार था & 1 घंटे मे ही इस खबर के साथ वापस लौटा की कामया फ्लॅट पे तो नही थी मगर शहर मे थी.वो सवेरे ही लौटी थी & सीधा अपने फ्लॅट पे गयी थी लेकिन उस लड़के के वाहा पहुचने से 30 मिनिट पहले ही वो वाहा से अकेली कही चली गयी थी.

रंभा अब समझ गयी थी कि कामया कहा मिलेगी.वो प्रीव्यू थियेटर पहुँची & बाकी लोगो के साथ फिल्म के रशस देखने लगी,"अब मुझे फिल्म मेकिंग की बारीकियो के बारे मे तो पता नही..",सारी फुटेज देखने के बाद वो डाइरेक्टर से मुखातिब हुई,"..मगर जो देखा वो कमाल का था!"

"थॅंक यू,मा'म.",डाइरेक्टर तारीफ सुन खुश हो गया था.प्रोड्यूसर्स अमूमन ऐसा कम ही करते थे.

"वैसे 1 बात कहने की हिमाकत करू?"

"अरे!कैसी बात कर रही हैं,मॅ'म!आप प्रोड्यूसर हैं.आप हुक कीजिए."

"जी नही..",.रंभा हँसी,"..हुक्म नही करूँगी वो आपका काम है.1 बात पुच्छनी थी मुझे."

"हां-2."

"वो जो साइड हेरोयिन है उसका किरदार बड़ा पवरफुल है.मान लीजिए उसे थोड़ा बढ़ाते हैं तो फिल्म और अच्छी नही हो जाएगी?",डाइरेक्टर उसके सवाल पे कुच्छ बोला नही & साथ बैठे राइटर को देखा & फिर एडिटर & कॅमरमन को.

"देखिए,मॅ'म.असल कहानी वैसी ही है जैसी आप कह रही हैं लेकिन कामया फिर फिल्म मे काम नही करती & उसे खोने का रिस्क हम ले नही सकते थे."

"ओके.तो उस लड़की के बस 3-4 सीन्स बढ़ाते हैं.कहानी तो तब भी मज़बूत हो जाएगी.कामया का रोल काटने की भी ज़रूरत नही है."

"तो फिर फिल्म की लंबाई बढ़ जाएगी,मॅ'म."

"कोई बात नही.अभी फिल्म 130 मिनिट की है.हमारे एडिटर साहब अगर उसे किसी तरह बस 140 मिनिट या उस से कम की कर दें तो ज़्यादा फ़र्क नही पड़ेगा.",डाइरेक्टर ने एडिटर को देखा तो उसने हां मे सर हिलाया.

"पर मॅ'म 1 दूसरी उलझन खड़ी हो जाएगी फिर."

"वो क्या?"

"कामया को शायद ये पसन्द ना आए कि उसके स्टारिंग रोल वाली फिल्म मे सपोर्टिंग आक्ट्रेस का भी दमदार रोल है."

"डाइरेक्टर साहब..",रंभा हँसी,"..कामया भूल गयी होगी कि उसकी शुरुआत भी इसी तरह हुई होगी छ्होटे-मोटे रोल्स से मगर आप तो नही भूले होंगे.सबसे अहम चीज़ है फिल्म,ना कामया ना वो सपोर्टिंग हेरोयिन.लोग अपने पैसे खर्च कर फिल्म केवल कामया को देखने के लिए नही जाते,वो जाते हैं 1 अच्छी फिल्म देखने अब चाहे वो कामया के फॅन्स हो चाहे ना हों.अगर केवल किसी सितारे की वजह से ही फिल्म देखी जाती तो बच्चन साहब की कोई फिल्म तो कभी पिटी ही नही होती क्यूकी उनसे ज़्यादा फॅन्स तो शायद ही किसी सितारे के होंगे!"

"ओके.मॅ'म.",उसकी आख़िरी बात पे सभी हंस पड़े थे,"..जैसा आप कहें."

"ओके,डाइरेक्टर साहब.कामया को मैं संभाल लूँगी.आप उसकी फ़िक्र मत कीजिएगा.",इसके बाद रंभा सीधा वाहा पहुँची थी जहा कि उसे पता था कि कामया & समीर उसे ज़रूर मिलेंगे-कामया के दफ़्तर.कामया शहर मे थी नही तो दफ़्तर बंद होगा & वाहा कोई स्टाफ भी नही आएगा.अब ऐसी जगह से बेहतर जगह कौन होगी छुप के मिलने के लिए.2 घंटे बाद रंभा की सोच बिल्कुल सही साबित हुई थी.

वो कामया के दफ़्तर से निकली & अपनी कार मे बैठ अपने बंगल की ओर चल दी.पिच्छले 3 दिनो से वो इस बात को लेके परेशान थी कि देवेन से मिलने & विजयंत मेहरा की हालत के बारे मे जानने के लिए गोआ जाए तो क्या बहाना बना के जाए.आज उसके पति ने खुद ही उसे बहाना पेश कर दिया था..थॅंक यू,समीर!..वो हँसी & कार की रफ़्तार बढ़ा दी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--62

gataank se aage......

"Oh!Sameer..aahhhhh..aise hi pyar karte raho..!",apni dayi banh sameer ki gardan me dale Kamya uski god me baithi thi.usne 1 skirt & blouse pehna tha & sameer uski gardan se leke cleavage tak apne honth chala raha tha.uska baya hath kamya ki kamar ko thame tha & daya uski jangho ke beech ghusa vaha ki komalta parakh raha tha.

"oohhhh..sharir kahinke..!",kamya ne muskurate hue aashiq ke gaal pe pyar bhari chapat lagayi joki uski panty me hath ghusa uski chut ko sehla raha tha & uske cleavage ko danto se haule-2 kaat raha tha,"..uunnnnhhhhh..haaaannnnnnn..!",kamya ke jism me bijli daud rahi thi.sameer ki ungli uski chut ki deewaro ko ragadne lagi thi.

sameer apni naak uske cleavage me ghusa ke ragadte hue uske seene ko chum raha tha.kamya ka dil bhi ab uske hotho ki garmi ko seene pe mehsus karne ko machal raha tha.usne khud hi apne blouse ke buttons khol diye & apnmi chhatiyo ko bra ke cups se azad kar diya.sameer ne apne munh me uski chhatiyo ko bari-2 se bharna shuru kar diya to kamya sar peechhe jhatakte hue bahut tez aahen lene lagi.

"aahhhhh..ab raha nahi jata,sameer..ohhhhhhh..jaldi se mujhe apni dulhan banao..aannnnnnnnhhhhhhhhhh..!",sameer ki ungli & zuban ne use us kagar se neeche dhakel diya tha jaha se girne me jo maza milta hai vo & kabhi mehsus nahi hota,"..fir har raat,sari-2 raat tumhari baaho me aise hi guzarungi..1 pal ko bhi tumhe khud se door nahi jane dungi..",sameer ne uski panty khinchi to kamya ne khud hi skirt & panty ko nikala & uski pant dhili kar uske jism ke dono taraf tange kar uski god me baithate hue uske lund ko apni gili chut me le liya,"..oohhhhhhhh..!",lund andar ghusa to usne sar ko peechhe fenka & sameer ke sar ko pakad use apni chhatiyo me dabate hue kamar hilane lagi.

"bas Manpur vala tender khule & hume mile.uske baad main Rambha ko kinare karunga & tum banogi Mrs.Mehra.",sameer uski kamar ko jakde uski choochiyo ko chuste hue apni kamar hila raha tha.

"Mr.Mehra,Lambert Bank ke Mr.Suri aaj sham 6 baje ki aapse mil nahi payenge.",achanak darwaza khula & kisi ki gusse se bhari aavaz aayi.dono premi chaunke & kamya ne gardan ghumayi.jis kursi pe dono chudai kar rahe the vo bilkul darwaze ke samne thi & sameer ko unki mohabbat me khalal dalne vale ko dekhne ke liye gardan nahi ghumani padi thi.

"rambha..t-tum..!",sameer khada hone laga & usi waqt kamya bhi uski god se utarne lagi magar vo ladkhada gayi & farsh pe gir gayi.sameer jaise hi khada hua uski pant sarr se neeche sarak ke uski aediyo ke gird phans gayi.rambha ko dono ki halat pe bahut hansi aa rahi thi lekin usne apne dil ke bhav ko chehre pe nahi aane diya.use andaza to tha ki dono ka rishta chudai tak pahunch gaya hoga & shuru me is khayal se use kafi gussa bhi aaya tha magar ab uski zindagi me Deven aa chuka tha.ab use sameer ki koi zarurat nahi thi magar fir bhi in dono ko saza to deni hi thi.rambha kuchh pal angaray barsati aankho se dono ko dekhti rahi-dono jaldi-2 apne-2 kapde pehan rahe the,& fir darwaza zor se band karte hue vaha se nikal gayi,"..rambha..rambha suno to..!"

galiyare se bahar jati rambha ko sameer ke ghabraye chehre ko yaad kar bahut hansi aa rahi thi magar us se bhi zyada hansi use aayi thi use dekh ke chaunk uthe sameer ki god se farsh pe dono tange failayi girti kamya ko dekh ke.

Sameer ne rambha se kaha tha ki vo aaj der raat Bombay se lautega.yehi baat Sonam ko bhi pata thi magar dopahar 12 baje 1 fone aaya jise sonam ne receive kiya,"Trust Group,Sameer Mehra's office.how may i help you?"

"hello,main lambert bank se Rajinder Suri bol raha hu.aaj sham 6 baje mujhe mr.mehra se Grand Violet me milna tha magar kuchh aisi emergency aa gayi hai ki main aaj unse mil nahi paoonga.maine unka mobile try kiya tha magar vo mil nahi raha to please unhe ye message de dijiyega & ye bhi keh dijiyega ki is baat ke liye main mafi chahta hu.ok..thanx!"

"ji..lekin..vo..",tab tak suri ne fone rakh diya tha,"..to aaj raat ko vapas aa rahe the.",sonam soch me pad gayi thi & usne ye baat fauran apni saheli ko bata di jisne use ye baat sameer ko batane se mana kiya.jis waqt sonam ka fone aaya tha us waqt rambha Pranav ke sath 1 shopping mall ke bahar car me baithi thi.us mall me videshi designers ke stores the & vaha use aaj us shakhs se milna tha jiska usne abhi tak bas naam hi suna tha-Mahadev Shah.

"kya baat hai?kiska fone tha?",use pareshan dekh pranav ne puchha.

"meri 1 saheli thi.us se bhi milna hai.vahi soch rahi thi."

"achha,thodi der ke liye use bhool jao & dhyan se suno.shah ne mujhe kaha tha ki vo tumse aise milna chahta hai ki lage ki tum dono kahi takra gaye fir vo tumse mel-jol badhayega & meri tarif karega magar kuchh is tarah ki tumhe ye shaq na ho ki hum mile hain."

"achha.yani abhi tum dono ho to mile hue magar duniya ke liye tumne bhi dad ki tarah uska offer thukra diya hai.ab vo mujhse tumhare bare me aise baat karega ki mujhe lage ki tum dono dost to bilkul nahi ho magar vo fir bhi tumhari kabiliyat ka loha manta hai.hai na?"

"haan.vo yehi sochta rahega ki vo mere sath milke tumhara istemal kar raha hai jabki haqeqat ye hogi ki hum dono us buddhe ka istemal kar rahe honge.",pranav uski hoshiyari pe fir hairan ho gaya tha & 1 pal ko use ye laga ki kahi usne is ladki ko apne sath milake koi galti to nahi ki hai?..kahi aisa na ho ki aage jake vo use hi koi dhokha na de de..nahi..nahi..aisa nahi ho sakta..ise bhi sahare ki zarurat hai & jab sameer jayega to mere siwa & milega kaun ise?..,"..chalo,jao mall me & us se mulakat kar lo."

"ok,darling."rambha ne sue chuma & fir car se utar ke mall me chali gayi.kuchh palo baad 1 mashoor italian designer ka design kiya 1 evening gown vo dekh rahi thi & 1 assistant use us dress ke bare me bata rahi thi jab safed balo vala 1 boodha magar chust shakhs uske samne aa khada hua.assistant use dekh badi shalinta se peechhe hat gayi.

"excuse me,aap Mrs.Mehra hai na?..Mrs.rambha Mehra?"

"ji."

"is tarah se aapko pareshan karne ke liye mafi chahta hu magar aapko dekha to aapse milne se khud ko rok nahi paya.",rambha ne use nigaho se tola.buddha dekhne me achha tha & cream color ki kamiz,bhuri tie & kale suit ke sath aankho pe chadha rimless chashma uski shakhsiyat ko robdar bana rahe the.use dekhne se aisa lagta tha jaise ki vo kisi oonche khandan se talluk rakhta hai.

"hello.",rambha ne hatha aage badhaya.

"hi,mujhe mahadev shah kehte hain.",usne rambha ka hath tham use badi shalinta se chuma..buddha ladkiyo ko impress karna bhi janta tha,"..jab aapke pati lapata hue the tab maine aapko khabron me dekha tha & aapki himmat ki daad diye bina nahi raha tha."

"thank you."

"aapke sasur mr.mehra ke liye bhi mere dil me bas izzat & tarif hi thi.main unke sath kaam bhi karna chahta tha lekin unhe manzoor nahi tha.",ramnbha ne sue sawaliyo nigaho se dekha.

"main 1 investor hu.companies me paisa lagata hu & badle me unke chand shares mujhe milte hain & yehi meri kmayai ka zariya hai.Trust me bhi invest karne ki meri khwahish thi magar mr.mehra nahi mane."

"oh.ye karobari baaten to main nahi janti.",rambnha is waqt 1 amir khandan ki bahu thi jiski zindagi bas kapde,gehno & parties ke gird hi ghumti thi.

"& main aapse koi shikva bhi nahi kar raha!",vo hansa to rambha bhi thoda sharmate hue hans di..agar us buddhe ko ladkiyo se chikni-chupdi baaten karna aata tha to vo bhi mardon ko apni ungliyo pe nachane me mahir thi!

"aapke pati se milne ki khushnasibi to abhi tak hasil nahi hui hai mujhe magar Mr.Pranav se main kayi martaba mila hu.unhone bhi meri peshkash thukra hi di thi lekin vo aadmi bahut kabil hain.jab tak vo group me hain,aapki company mehfuz hai."

"ji.vo bahut bhale insan hai & humsab unhe bahut pasand karte hain.karobar me aap huamre sath nahi jud paye par zati taur pe to jud sakte hain..",ye baat rambha nekuchh is tarah se kahi ki shah ko laga ki kahi vo us se dohre matlab vali baat to nahi kar rahi lekin rambha ke masoomiyat se muskurate chehre ko dekh use apni soch galat lagi magar vo soch me to pad hi gaya tha.yehi to rambha chahti thi & jaan bujh ke usne vo baat kahi thi,"..kabhi aaiye humare ghar.aap aadmi dilchasp malum hote hain.",shah fir se uski baat me matlab dhundane laga magar 1 baar fir rambha ke masoom chehre ne use uljha diya.

"zarur aaoonga lekin uske pehle aapko kabhi huamri mehmannawazi kabulni padegi."

"zarur.aisa karna to mere liye badi khushi ki baat hogi."

"mera yaki kijiye rambha ji,aapse zyada khushi mujhe hogi.achha,ab bahut waqt liya aapka.ab & pareshan nahi karunga.",vo 1 kinare ho gaya to rambha ne apna hath fir se aage badhaya.

"nice meeting you,mr.shah."

"same here.",shah ne uske hath ko dobara chuma & fir store se bahar chala gaya.

Rambha koi 15 minute baad kuchh saman kahrid mall se nikli & Pranav ko fone kiya,"milk liya us se.sab thik raha."

"very good,darling.",rambha ka agla padav tha Trust Films ka office.vo film jiske bare me rambha ne gaur kiya tha ki agar usme 1 siede heroine ka role thoda badha diya jaye to vo & nikhar jayegi,uski shooting 70% ho gayi thi & usi footage ko aaj director,editor,cameraman,writer & baki log dekhne vale the.film ka hero abhi shehar se bahar tha & Kamya videsh se abhi lauti nahi thi.

Sonam ke fone se rambha ka matha thanka tha & usne ye faisla kiya ki pehle to ye pata karegi ki kamya shehar me hai ya nahi.agar vo shehar me hoti to bahut mumkin tha ki us se milne ke liye sameer ne jhuth bola ho.rambha car chalate hue soch rahi thi ki kaun ho sakta hai jo use kamya ke shehar me hone ki sahi khabar de sakta tha.usne 1-2 fone ghumaye to pata chala ki kamya ke shehar me 4 makan hain.vo jis makan me rehti hai usme uski maa bhi sath hi rehti hai.2 usne kiraye pe de rakhe hain.ab bacha 1 & 1 filmi reporter se use pata chala ki yahi vo Kabir ke sath rangraliyan manati hai.

rambha ne film company ke 1 karmchari ko kamya se koi costumes ki fitting sessions ka appointment fix karane ke bahane usi flat pe bheja.lye kaam vaise to kamya ke secretary ka tha magar us se kehne se ye pata nahi chalta ki kamya shehar me thi ya nahi.ladka tez-tarrar tha & 1 ghante me hi is khabar ke sath vapas lauta ki kamya flat pe to nahi thi magar shehar me thi.vo savere hi lauti thi & seedha apne flat pe gayi thi lekin us ladke ke vaha pahuchane se 30 minute pehle hi vo vaha se akeli kahi chali gayi thi.

rambha ab samajh gayi thi ki kamya kaha milegi.vo preview theater pahunchi & baki logo ke sath film ke rushes dekhne lagi,"ab mujhe film making ki barikiyo ke bare me to pata nahi..",sari footage dekhne ke baad vo director se mukhatib hui,"..magar jo dekha vo kamal ka tha!"

"thank you,ma'am.",director tarif sun khush ho gaya tha.producers amuman aisa kam hi karte the.

"vaise 1 baat kahne ki himakat karu?"

"are!kaisi baat kar rahi hain,ma'am!aap producer hain.aap huk kijiye."

"ji nahi..",.rambha hansi,"..hukm nahi karungi vo aapka kaam hai.1 baat puchhni thi mujhe."

"haan-2."

"vo jo side heroine hai uska kirdar bada powerful hai.maan lijiye use thoda badhate hain to film & achhi nahi ho jayegi?",director uske sawal pe kuchh bola nahi & sath baithe writer ko dekha & fir editor & cameraman ko.

"dekhiye,ma'am.asal kahani vaisi hi hai jaisi aap keh rahi hain lekin kamya fir film me kaam nahi karti & use khone ka risk hu le nahi sakte the."

"ok.to us ladki ke bas 3-4 scenes badhate hain.kahani to tab bhi mazbut ho jayegi.kamya ka role katne ki bhi zarurat nahi hai."

"to fir film ki lambai badh jayegi,ma'am."

"koi baat nahi.abhi film 130 minute ki hai.humare editor sahab agar use kisi tarah bas 140 minute ya us se kam ki kar den to zyada fark nahi padega.",director ne editor ko dekha to usne haan me sar hilaya.

"par ma'am 1 dusri uljhan kahdi ho jayegi fir."

"vo kya?"

"kamya ko shayad ye pasnd na aaye ki uske starring role vali film me supporting actress ka bhi dumdar role hai."

"director sahab..",rambha hansi,"..kamya bhul gayi hogi ki uski shuruat bhi isi tarah hui hogi chhote-mote roles se magar aap to nahi bhule honge.sabse aham chiz hai film,na kamya na vo supporting heroine.log apne paise kharch kar film keval kamya ko dekhne ke liye nahi jate,vo jate hain 1 achhi film dekhne ab chahe vo kamya ke fans ho chahe na hon.agar keval kisi sitare ki vajah se hi film dekhi jati to Bachchan Sahab ki koi film to kabhi piti hi nahi hoti kyuki unse zyada fans to shayad hi kisi sitare ke honge!"

"ok.ma'am.",uski aakhiri baat pe sabhi hans pade the,"..jaisa aap kahen."

"ok,director sahab.kamya ko main sambhal lungi.aap uski fikr mat kijiyega.",iske baad rambha seedha vaha pahunchi thi jaha ki use pata tha ki kamya & sameer use zarur milenge-kamya ke daftar.kamya shehar me thi nahi to daftar band hoga & vaha koi staff bhi nahi ayega.ab aisi jagah se behtar jagah kaun hogi chhup ke milne ke liye.2 ghante baad rambha ki soch bilkul sahi sabit hui thi.

vo kamya ke daftar se nikli & apni car me baith apne bungle ki or chal di.pichhle 3 dino se vo is baat ko leke pareshan thi ki Deven se milne & Vijayant Mehra ki halat ke bare me jaanane ke liye Goa jaye to kya bahana bana ke jaye.aaj uske pati ne khud hi use bahana pesh kar diya tha..thank you,sameer!..vo hansi & car ki raftar badha di.

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kramashah.......