Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:12

जाल पार्ट--63

गतान्क से आगे......

“रंभा..प्लीज़..समझने की कोशिश करो..वो बहुत परेशान थी & हम दोनो जज़्बातों मे बह गये थे..ग़लती हो गयी मुझसे..आइ’म सॉरी!”,रंभा अपनी अलमारी से कपड़े निकाल के सूटकेस मे भर रही थी.

“समीर,मैने अपनी आँखो से देखा है सब.प्लीज़,इस तरह से झूठ बोल के खुद को खुद की ही नज़रो मे मत गिराव.”,रंभा ने सूटकेस बंद किया.

“ऐसे इस वक़्त कहा जाओगी तुम?..अभी गुस्से मे हो..मैं समझ सकता हू तुम्हारा गुस्सा,रंभा..”,समीर उसके सामने उसके कंधो पे हाथ रख के खड़ा हो गया था,”..मगर बातों से सब हल हो सकता है ना?”

“हां,मैं गुस्से मे हू & बातो से सब हल भी हो सकता है मगर अभी मैं कोई भी बात करने की हालत मे नही हू.”,उसने सूटकेस बेड से उतार के फर्श पे रखा & अपना हॅंडबॅग कंधे पे टांग 1 दूसरा बॅग सूटकेस के उपर रखा,”..इसीलिए मैं जा रही हू,समीर.तुम्हारे साथ इस घर मे..इस कमरे मे 1 पल भी और गुज़ारा तो मैं पागल हो जाऊंगी.”,उसने उसके हाथ अपने कंधो से हटाए & सूटकेस के पुल्लिंग हॅंडल को बाहर निकल उसे पहियो के सहारे खींचा,”..मुझे ढूँढने की कोशिश मत करना..”,वो कमरे के दरवाज़े पे पहुँच के रुकी & मूडी,”..घबराओ मत मैं कुच्छ दिनो मे लौट आऊँगी.तुम्हारा ये राज़ राज़ ही रहेगा & जब तक तुम मानपुर का टेंडर जीत के उसपे काम नही शुरू कर देते,तब तक मैं म्र्स.समीर मेहरा ही रहूंगी.पर प्लीज़,समीर आज से तुम्हारे & मेरे रास्ते अलग हैं इसीलिए मेरी ज़िंदगी मे दखल देने की कोशिश मत करना.”,वो कमरे से बाहर निकल गयी.उसका दिल खुशी से झूम रहा था.इतनी जल्दी उसे फिर से देवेन के पास जाने का मौका मिलेगा ये उसने सपने मे भी नही सोचा था & अब समीर की बेवकूफी ने खुद ही उसकी आगे की मुश्किल भी आसान कर दी थी.अब तलाक़ तो होना ही था & वो भी उसकी शर्तो पर.

“हाई!प्रणव..”,एरपोर्ट पहुँच उसने गोआ की अगली फ्लाइट का टिकेट लिया,”..मैं कुच्छ दिनो के लिए बाहर जा रही हू.”

“क्या?क्यू..& कहा,रंभा?!”

“वो सब मैं बता नही सकती.बस इतना समझो की जाना पड़ रहा है.”

“कोई मुश्किल है रंभा?”

“नही.मैं तुम्हे फोन करती रहूंगी & जब भी तुम्हे अपने काम मे मेरी ज़रूरत पड़ेगी,मैं आ जाऊंगी.ओके,बाइ!”,प्रणव अपने मोबाइल को थामे बैठा सोच रहा था कि अचानक आख़िर ऐसा हुआ क्या?अगला फोन रंभा ने सोनम को किया.उसने उसे ना तो पहले देवेन & विजयंत मेहरा के बारे मे बताया था ना अब बताया.बस इतना कहा क़ि समीर की बेवफ़ाई से दुखी हो वो जा रही है.उसने उस से भी फोन करते रहने की बात कही.

डबोलिं एरपोर्ट पे शाम 8 बजे उतार वो टॅक्सी से सीधा हॉलिडे इन्न गोआ गयी & 2 लोगो के लिए 1 कमरा बुक किया & फिर देवेन को फोन किया.देवेन ने उस से कहा कि वो 1 घंटे मे उसके पास पहुँच रहा था.वो 1 घंटा रंभा ने होटेल के कमरे मे चहलकदमी करते काटा.अब उस से 1 पल भी इंतेज़ार नही हो रहा था.अपने महबूब के शहर पहुँच गयी थी वो & अब बस उसकी बाहो मे समा जाना चाहती थी वो.रंभा ने हल्के नीले रंग की कसी जीन्स & काले रंग की गोल गले की कसी टी-शर्ट पहनी थी.इस लिबास मे उसके जिस्म के कटाव पूरी तरह से उभर रहे थे.उपर से महबूब से जल्द ही मिलने की उमंग का खुशनुमा रंग उसके चेहरे पे झलक रहा था & उसका हुस्न & भी दिलकश लग रहा था.

दरवाज़े की घंटी बजी तो वो भागती हुई गयी & दरवाज़ा खोला.सामने देवेन खड़ा था.उसकी आँखो मे हैरत थी & खुशी भी & दिलरुबा की चाहत भी.दोनो 1 पल 1 दूसरे को देखते रहे फिर देवेन आगे बढ़ा & कमरे मे दाखिल हुआ.उसने दरवाज़े के अंदर के नॉब से लटका ‘डू नोट डिस्टर्ब’ का कार्ड निकाला & बाहर के नॉब पे लटका दिया.इस सबके दौरान दोनो प्रेमियो की आँखे आपस मे उलझी रही-ना देवेन ने पालक झपकाई ना ही रंभा ने.रंभा का दिल अब बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था & उसकी कसी टी-शर्ट मे क़ैद उसके उभर उपर-नीचे हो उसके आशिक़ को उसका हाल बयान कर रहे थे.देवेन ने बिना घूमे हाथ पीछे ले जाके दरवाज़ा बंद किया & उसके बाद जैसे कमरे मे तूफान आ गया.

रंभा भागती हुई आगे बढ़ी & उस से लिपट गयी.देवेन ने भी उसे बाहों मे भर लिया & दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे,पागलो की तरह,दीवानो की तरह.कहने मुश्किल था कि किसकी ज़ुबान किसके मुँह मे थी & कौन किसके चेहरे पे अपने बेसबरे लब फिरा रहा था.रंभा देवेन के गले मे बाहें डाले उसके बॉल खिचती उसे चूम रही थी & वो उसकी कमर को बहुत ज़ोर से जकड़े हुए उसकी ज़ुबान का लुत्फ़ उठा रहा था.देवेन ने उसे कमर से उठाया & कमरे मे रखे 1 शेल्फ पे बिठा दिया.खुद को संभालती कनपटी रंभा ने हाथ शेल्फ पे रखे & उसपे रखा गुल्दान उसके हाथो से टकरा के नीचे गिर गया.उस शेल्फ पे फोन & और भी कुच्छ सजावटी समान रखे थे.देवेन ने उन सारे सामानो को अपने हाथो से धकेल के नीचे गिराया & अपनी महबूबा की खुली टाँगो के बीच खड़ा हो उसकी चूत पे लंड दबाते हुए उसे चूमने लगा.रंभा के हाथ देवेन की पीठ पे घूम रहे थे.

देवेन उसकी ज़ुबान चूस्ते हुए उसकी बाई छाती को शर्ट के उपर से ही दबा रहा था & वो अब ज़ोर-2 से आहें भर रही थी.रंभा ने उसके कोट को उसके कंधो से नीचे सरकया & उसकी कमीज़ के उपर से ही उसके चौड़े सीने & कंधो पे हाथ फिराया.देवेन ने उसकी टी-शर्ट उपर की & उसके ब्रा को उपर कर झुक के उसकी नुमाया छातियो को चूसने लगा.

“आन्न्न्नह..देवेन..!”,रंभा की आँखे बिल्कुल फैल गयी थी & वो सर उपर किए अपने प्रेमी के बालो को खींचती झटके खा रही थी.देवेन उसकी छातियो को जैसे मुँह मे पूरा भर के चूसना चाहता था.उन भारी-भरकम मगर पुष्ट गोलैईयों को वो अपने मुँह मे बार-2 भरने की कोशिश करते हुए चूस रहा था.नीचे रंभा की चूत पे उसका सख़्त लंड वैसे ही लगातार रगड़ खा रहा था.शाम से ही रंभा उस से मिलने की हसरत की उमंग से भरी थी & अब उसके मिल जाने पे उसके जिस्म की नज़दीकी & उसकी दीवानगी भरी हर्कतो ने उसके सब्र का बाँध तोड़ दिया था & वो झाड़ रही थी.

देवेन ने उसकी टी-शर्ट को सर के उपर से खींच के निकाला तो उसकी चूचियो ने छल्छलाते हुए ब्रा की क़ैद से छूटने की ख्वाहिश जताई.अपनी दिलरुबा के मस्ताने उभारो की इल्टीजा ना मानने की हिमाकत भला देवेन कैसे कर सकता था.उसने उसके ब्रा स्ट्रॅप्स को कंधो के उपर से पकड़ा & इतनी ज़ोर से खींचा की उसके हुक्स अलग हो गये & खुली ब्रा उसके हाथो मे आ गयी.उसने ब्रा को उच्छाल दिया & झुक के रंभा की दिलकश चूचियो से अपने प्यासे होंठ सटा दिए.वो उन्हे ऐसे चूस रहा था मानो उनसे दूध निकाल के अपनी प्यास बुझाना चाहता हो.रंभा के हुस्न को देख मर्द अपना आपा खो देते थे लेकिन फिर भी ये शिद्दत,ये दीवानापन उसने कभी किसी & के प्यार करने मे नही महसूस किया था.खुद देवेन भी हराड मे उस रात ऐसा दीवाना कहा था.

रंभा का भी हाल देवेन से अलग थोड़े ही था.वो भी बावली हो गयी थी.उसने महबूब के बाल पकड़ उसके सर को अपने सीने से अलग किया & उपर कर 1 लंबी किस दी.उसके हाथ देवेन की शर्ट को उसकी पॅंट से बाहर खींच रहे थे.अब उसे भी सब्र नही था & उसने उसकी कमीज़ को पकड़ के इस तरह खींचा की सारे बटन टूट गये.खुली कमीज़ को उसने देवेन के कंधो से उतार फेंका & आगे झुक उसके सीने के बालो मे मुँह घुसा के रगड़ने लगी.उसके गले से अजीब सी आवाज़ें निकाल रही थी जो उसके मस्ती मे सब भूल जाने का सबूत थी.उसने देवेन के निपल्स को चूसा & फिर काट लिया.देवेन ने सर उपर किया & कराहा मगर रंभा के सर को सीने से अलग करने के बजाय उसे और सटा दिया.रंभा के हाथ उसके बदन के बगल मे घूमते हुए उसके कंधो & मज़बूत बाजुओ पे फिर रहे थे.रंभा गर्देन झुका के उसके सीने से चूमते हुए उसके पेट पे जहा तक जा सकती थी,जाके चूम रही थी.वो & झुकने मे असमर्थ थी & उसके होंठ देवेन के लंड तक नही पहुँच रहे थे तो उसने अपने हाथो मे ही उसके लंड & अंदो को दबोच लिया & ज़ोर-2 से दबाने लगी.

“ओह..रंभा..!”,देवेन मस्ती मे आहत हो गया & उसके बाल पकड़ के उपर खींचा & 1 बार फिर उसके गुलाबी लबो को अपने लबो की क़ैद मे ले लिया.वो रंभा की कमर के गुदाज़ हिस्से को दबाते हुए चूम रहा था & वो उसके लंड को.देवेन के हाथ दिलरुबा की रेशमी पीठ पे सरक रहे थे.हाथ उसकी कमर से उपर गर्दन तक गये & फिर वापस लौटे & इस बार & नीचे गये & उसकी गंद से सॅट गये.रंभा चिहुनकि & उसने देवेन की पॅंट खोल अपना हाथ अंदर डाल दिया.देवेन फिर से कराहा & रंभा शेल्फ से उतर गयी & देवेन की कमर पकड़ उसे शेल्फ की बगल की दीवार से लगा दिया.

उसने देवेन की पॅंट को फ़ौरन नीचे किया & उसके अंडरवेर को भी.सामने प्रेकुं से भीगा उसका 9.5 इंच लंबा लंड अपने पूरे शबाब मे उसकी निगाहो के सामने था.रंभा अपने पंजो पे बैठ गयी & देवेन की गंद के बगल मे हाथ लगते हुए उसे आगे खींचा & खुद आगे झुकाते हुए उसके लंड के सूपदे को मुँह मे भर लिया.देवेन ने दीवार पे हाथ लगाए & सर उठाके आह भरी.रंभा उसकी झांतो मे नाक घुसा के वही हरकत दोहराई जो कुच्छ देर पहले उसने उसके सीने पे की थी.उसने देवेन के लंड को उठा उसके पेट से सटा दिया & अपनी जीभ को लंड की जड़ से लेके उसके सूपदे की नोक तक चलाया.देवेन का जिस्म सिहर उठा.रंभा की जीभ सूपदे से वापस जड़ तक आई & उसके भी नीचे देवेन के आंडो के बीच पहुँच के रुकी.उसने अपनी नाक लंड की जड़ मे घुसा के दबाते हुए उसके आंडो को मुँह मे भर के चूसना शुरू कर दिया.देवेन उसके बालो को पकड़ सर को अपनी गोद मे दबा रहा था.रंभा ने आंडो को मुँह से निकाला & लंड को मुँह मे भर लिया.अंगूठे & पहली उंगली का दायरा बना लंड को उसमे फँसा उसे हिलाते हुए उसने उसे चूसना शुरू कर दिया.देवेन अब कमर हिलाते हुए उसके मुँह को चोद रहा था.रंभा उसके अंग को मुँह मे भरे बस उस से खेलती चली जा रही थी.देवेन को लगा कि अगर वो इसी तरह जुटी रही तो वो फ़ौरन झाड़ जाएगा.उसने झुक के रंभा के कंधे पकड़ उसे उपर उठाया & उसे बाहो मे भर चूमते हुए उसकी कमर को जाकड़ हवा मे उठा लिया & शेल्फ के दूसरी तरफ रखी राइटिंग टेबल पे बिठा दिया.

उसने रंभा को धकेलते हुए टेबल पे लिटाया मगर उसपे रखे राइटिंग पेपर्स,पेन स्टॅंड,टेबल लॅंप वग़ैरह आड़े आ रहे थे.देवेन ने दोनो हाथो से सारे समान को धकेला तो रंभा ने भी लेटते हुए अपने हाथ फैला दिए.ज़ोर की आवाज़ के साथ लॅंप फर्श पे गिर के चूर-2 हो गया.बाकी चीज़ें भी नीचे गिर के च्चितरा गयी मगर दोनो को इन बातों से कोई मतलब नही था.रंभा को टेबल पे लिटा के उसकी गर्देन चूमते हुए वो उसकी चूचियो पे आया & उनके निपल्स को दांतो से पकड़ के खींचा.

“आईईयईईए..!”,रंभा मस्ती भरे दर्द से कराही.देवेन अब उसके पेट को चूमते हुए,उसकी नाभि को चूस्ते हुए नीचे आया & उसकी जीन्स के बटन को खोला & ज़िप खींची.देवेन ने जीन्स को नीचे खींचा तो रंभा ने भी गंद उपर उठा दी.अगले ही पल जीन्स & उसकी काली पॅंटी कमरे के फर्श पे बिखरे बाकी समान का हिस्सा थे.देवेन उसकी बाई टांग को उठा के चूम रहा था & रंभा अपने दाए पैर को उसके सीने पे चला रही थी.

“ओह..!”,देवेन कराहा.रंभा ने दाए पाँव के अंगूठे & उंगली के बीच उसके बाए निपल को फँसा खीच दिया था.देवेन ने उसकी दाई टांग को पकड़ बाए कंधे पे रखा & चूमते हुए बल्कि यू कहा जाए कि चूस्ते हुए उसकी जाँघ की तरफ बढ़ने लगा.

“आननह..उउम्म्म्ममममम..हान्ंननणणन्..ऊहह..!”,रंभा मस्ती मे चीख रही थी.देवेन उसकी मोटी जाँघो को होटो से काट रहा था & चूस रहा था.जब वो होठ हटता तो वाहा पे 1 निशान दिखने लगता.कुच्छ ही देर मे रंभा की दोनो अन्द्रुनि जंघे आशिक़ के होटो के दस्तख़त से भर गयी थी,”..उउन्न्ञनननणणनह..!”,रंभा अपनी कमर उचकाते हुए अपनी चूचिया अपने ही हाथो से दबा रही थी.रंभा ने अपने दोनो पाँव अब घुटने मोड़ टेबल पे जमा दिए थे & देवेन की ज़ुबान उसकी चूत तक पहुँच गयी थी & उस से बह रहे रस को लपलपाते हुए चाट रही थी.देवेन उसकी चूत मे जीभ घुसाते हुए उसके दाने को दाए हाथ की उंगली से रगडे जा रहा था.अगले ही पल रंभा कमर उचकती हुई झाड़ गयी.देवेन ने उसकी टाँगे फैलाई & अपने कंधो पे चढ़ा ली & 1 ज़ोर दार धक्के मे ही अपने लंड को जड तक उसकी चूत मे घुसा दिया.

“ऊउउईईईईईई माआआआआअ..!”,रंभा चीखी & दोनो हाथ सर के पीछे ले जाके टेबल को पकड़ लिया.देवेन उसकी जाँघो को सहलाता,उसकी टाँगो को चूमता उसे चोद रहा था.रंभा टेबल को पकड़े अपनी कमर उचका रही थी.बस 3 दिनो की जुदाई का ये असर था!

देवेन का लंड रंभा की कोख पे लगातार चोट कर रहा था & जब भी वो उसके नरित्व के सबसे अहम हिस्से से टकराता तो 1 अनोखे,मस्ताने दर्द से वो तड़प उठती जिसमे बेइंतहा मज़ा भी च्छूपा होता.दोनो की नासो मे मानो लहू की जगह बेसब्री बह रही थी जोकि जिस्मो के मिलने के बावजूद ख़त्म होने का नाम ही नही ले रही थी.देवेन के चेहरे पे भी अचानक दर्द के भाव आ गये.रंभा की चूत ने सिकुड़ने-फैलने की हरकत शुरू कर दी थी & उसका लंड अब उसकी कसी चूत के & कसने की वजह से जैसे चूत की फांको मे पीस रहा था मगर कितना मज़ा था..कितनी खुशी..उसका दिल किया की अभी इसी पल झाड़ जाए मगर नही.अभी उसे अपनी जान से प्यारी महबूबा के साथ जन्नत की & सैर करनी थी.रंभा टेबल को थामे कमर उचकाती अपने सीने को उपर उठती & सर को पीछे फेंकती चीखती झाड़ रही थी मगर देवेन अपने उपर काबू रखे वैसे ही धक्के लगा रहा था.

रंभा ने हाथ सर के पीछे टेबल से हटाए & आगे लाके अपने दिलबर के सीने & पेट के बालो मे हसरत से फिराए तो उसने भी उसकी टाँगो को कंधो से उतार दिया & उसकी मरमरी बाहें थाम उसे उपर खींचा.रंभा उठाते हुए उसके आगोश मे आ गयी & अपनी बाहें उसके कंधे पे रखते हुए उसकी गर्देन मे डाल दी & उसकी गर्देन चूमने लगी.देवेन भी धक्के लगाता हुआ उसके डाए कान मे जीभ फिरने लगा.रंभा के होंठ उसके कंधो पे पहुँचे & वो उनपे हौले-2 काटने लगी.देवेन उसकी हरकत से & जोश मे आ गया & उसने कुच्छ ज़्यादा ही तेज़ धक्के लगाने शुरू कर दिए.जिस्म मे उठे दर्द & मज़े के मिलेजुले मस्ताने एहसास से आहत हो रंभा ने उसके दाए कंधे के उपर थोडा ज़ोर से दाँत गढ़ा दिए.

“ओह..!”,देवेन कराहा & रंभा की पुष्ट जाँघो के नीचे बाहें घुसके उसकी गंद की फांको को अपने हाथो मे थमते हुए उसने उसे मेज़ से उठाया & घुमा के कमरे की दूसरी तरफ की दीवार से लगा दिया & ज़ोर-2 से धक्के लगाने लगा.रंभा आहें भरती हुई उसके कंधो के उपर से बाहें ले जाते हुए उसकी पीठ को नोच रही थी.देवेन का लंड सीधा उसकी कोख पे क़ातिल चोटें कर रहा था & बस चंद लम्हो मे ही वो उसके लंड से दोबारा झाड़ गयी & अपने हाथ पीछे अपने सर के उपर ले जाते हुए अपने नाख़ून दीवार पे ज़ोर से रगड़ उसपे अपनी बेचैनी के निशान छ्चोड़ दिए.

देवेन उसे उठाए हुए घुमा & बिस्तर पे लिटा दिया & धक्के लगाने लगा.धक्के लगाते हुए वो बिस्तर पे घुटने जमाके उपर चढ़ने लगा तो रंभा भी अपने हाथ बिस्तर पे रख उसके सहारे उपर होने लगी.देवेन उसके उपर लेटा उसके चेहरे,उसकी गर्देन को चूमते हुए उसे चोद रहा था.रंभा बेचैनी से बिस्तर पे अपने हाथ फिरा रही थी & चादर को खींच रही थी.उसका बाया हाथ तकिये से टकराया तो उसने उसे उठाके फर्श पे फेंक दिया.देवेन के धक्के अब बहुत तेज़ हो गये थे & उसका लंड अब चूत की दीवारो को बहुत बुरी तरह रगड़ रहा था.रंभा कनपटी आवाज़ मे चीख रही थी.उसकी टाँगे देवेन की कमर से लेके उसके घुटनो के पिच्छले हिस्सो तक घूम रही थी & वो उन्ही के सहारे कमर उचका भी रही थी.देवेन के हर धक्के पे उसका जिस्म सिहर उठता.वो बहुत तेज़ी से अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रही थी.

देवेन का लंड भी उसकी चूत की कसावट से अब बहाल हो गया था.उसके आंडो मे मीठा दर्द होने लगा था & उनमे उबल रहा उसका लावा अब फूटने को बिल्कुल तैय्यर था.रंभा उसकी पीठ से लेके उसकी गंद तक अपने हाथ चलाते हुए उसे नोच रही थी.2 जिस्म अब 1 दूसरे के सहारे अपनी-2 मंज़िल के बिल्कुल करीब पहुँच चुके थे.देवेन ने अपनी बाई बाँह रंभा की गर्देन के नीचे & दाई उसकी कमर के नीचे सरका उसे अपने आगोश मे क़ैद कर खुद से बिल्कुल चिप्टा लिया था.रंभा भी उसे अपनी बाहो & टाँगो मे बाँध चुकी थी.

“देवेन्न्ननननननननणणन्.......रंभा....................!”,तभी जैसे ज़ोर का धमाका हुआ जिसमे कोई आवाज़ नही थी बस बहुत तेज़,चमकीली रोशनी थी जो केवल दोनो प्रेमियो को ही दिखी.रंभा के थरथरते होंठो से सिसकियाँ निकल रही थी ,उसकी आँखो से आँसू बह रहे थे.उसका जिस्म दिलबर की बाहो मे मस्ती की इंतेहा से कांप रहा था.उसकी चूत मे मज़े की नदी सारे बंधन तोड़ सैलाब की शक्ल इकतियार कर चुकी थी.वो झाड़ रही थी,ऐसे जैसे पहले कभी नही झड़ी थी.देवेन के आंडो का मीठा दर्द अपने चरम पे पहुँचा & उसी वक़्त उसके लंड मे भी ज्वालामुखी फूटा & उसका गर्म लावा उसकी महबूबा की चूत मे भरने लगा.रंभा की चूत तो अपनी मस्तानी हरकत किए चली जा रही थी & देवेन के लंड को निचोड़ रही थी.देवेन उसे बाहों मे भरे,सर उपर उठाए आहें भरता चला जा रहा था.जिस्म मे ऐसा मज़ा उसने भी अपनी ज़िंदगी मे पहले कभी महसूस नही किया था.उसने सर नीचे किया तो रंभा की आँखो से मोती छलक्ते नज़र आए.वो झुका & उन मोतियो को चखने लगा.इश्क़ के शिद्दत भरे इज़हार के अंजाम पे पहुँचने का एलान करती उन बूँदो को अपनी ज़ुबान पे महसूस करते ही देवेन को & उसकी ज़ुबान का उसके गालो से उन बूँदो को उठाना महसूस करते ही रंभा को उस सुकून से भी बड़ा सुकून मिला जो उन्हे अभी-2 चुदाई ख़त्म होने पे मिला था.रंभा के काँपते होठ मुस्कुराने लगे तो उन्हे देख देवेन के लब भी हंस दिए.दिल मे खुशी की लहर उठी तो दोनो सुकून & चैन से भरे जिस्म 1 दूसरे को आगोश मे भर चूमने लगे.

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क्रमशः.......

JAAL paart--63

gataank se aage......

“Rambha..please..samajhne ki koshish karo..vo bahut pareshan thi & hum dono jazbaton me beh gaye the..galti ho gayi mujhse..i’m sorry!”,Rambha apni almari se kapde nikal ke suitcase me bhar rahi thi.

“Sameer,maine apni aankho se dekha hai sab.please,is tarah se jhuth bol ke khud ko khud ki hi nazro me mat girao.”,rambha ne suitcase band kiya.

“aise is waqt kaha jaogi tum?..abhi gusse me ho..main samajh sakta hu tumhara gussa,rambha..”,sameer uske samne uske kandho pe hath rakh ke khada ho gaya tha,”..magar baton se sab hal ho sakta hai na?”

“haan,main gusse me hu & baato se sab hal bhi ho sakta hai magar abhi main koi bhi baat karne ki halat me nahi hu.”,usne suitcase bed se utar ke farsh pe rakha & apna handbag kandhe pe tang 1 dusra bag suitcase ke upar rakha,”..isiliye main ja rahi hu,sameer.tumhare sath is ghar me..is kamre me 1 pal bhi & guzara to main pagal ho jaoongi.”,usne uske hath apne kandho se hataye & suitcase ke pulling handle ko bahar nikal use pahiyo ke sahare khincha,”..mujhe dhoondane ki koshish mat karna..”,vo kamre ke darwaze pe pahunch ke ruki & mudi,”..ghabrao mat main kuchh dino me laut aaoongi.tumhara ye raaz raaz hi rahega & jab tak tum Manpur ka tender jeet ke uspe kaam nahi shuru kar dete,tab tak main Mrs.Sameer Mehra hi rahungi.par please,sameer aaj se tumhare & mere raste alag hain isiliye meri zindagi me dakhal dene ki koshish mat karna.”,vo kamre se bahar nikal gayi.uska dil khushi se jhoom raha tha.itni jaldi use fir se Deven ke paas jane ka mauka milega ye usne sapne me bhi nahi socha tha & ab sameer ki bevkufi ne khud hi uski aage ki mushkil bhi aasan kar di thi.ab talaq to hona hi tha & vo bhi uski sharto par.

“hi!Pranav..”,airport pahunch usne Goa ki agli flight ka ticket liya,”..main kuchh dino ke liye bahar ja rahi hu.”

“kya?kyu..& kaha,rambha?!”

“vo sab main bata nahi sakti.bas itna samjho ki jana pad raha hai.”

“koi mushkil hai rambha?”

“nahi.main tumhe fone karti rahungi & jab bhi tumhe apne kaam me meri zarurat padegi,main aa jaoongi.ok,bye!”,pranav apne mobile ko thame baitha soch raha tha ki achanak aakhir aisa hua kya?agla fone rambha ne sonam ko kiya.usne use na to pehle deven & Vijayant Mehra ke bare me bataya than a ab bataya.bas itna kaha ki sameer ki bewafai se dukhi ho vo ja rahi hai.usne us se bhi fone karte rehne ki baat kahi.

Dabolim airport pe sham 8 baje utar vo taxi se seedha Holiday Inn Goa gayi & 2 logo ke liye 1 kamra book kiya & fir deven ko fone kiya.deven ne us se kaha ki vo 1 ghante me uske paas pahunch raha tha.vo 1 ghanta rambha ne hotel ke kamre me chahalkadmi karte kaata.ab us se 1 pal bhi intezar nahi ho raha tha.apne mehboob ke shehar pahunch gayi thi vo & ab bas uski baaho me sama jana chahti thi vo.rambha ne halke nile rang ki kasi jeans & kale rang ki gol gale ki kasi t-shirt pehni thi.is libas me uske jism ke katav puri tarah se ubhar rahe the.upar se mehboob se jald hi milne ki umang ka khushnuma rang uske chehre pe jhalak raha tha & uska husn & bhi dilkash lag raha tha.

Darwaze ki ghanti baji to vo bhagti hui gayi & darwaza khola.samne deven khada tha.uski aankho me hairat thi & khushi bhi & dilruba ki chahat bhi.dono 1 pal 1 dusre ko dekhte rahe fir deven aage badha & kamre me dakhil hua.usne darwaze ke andar ke knob se latka ‘do not disturb’ ka card nikala & bahar ke knob pe latka diya.is sabke dauran dono premiyo ki aankhe aapas me uljhi rahi-na deven ne palak jhapkayi na hi rambha ne.rambha ka dil ab bahut zoro se dhadak raha tha & uski kasi t-shirt me qaid uske ubhar upar-neeche ho uske aashiq ko uska haal bayan kar rahe the.deven ne bina ghume hath peechhe le jake darwaza band kiya & uske baad jaise kamre me toofan aa gaya.

Rambha bhagti hui aage badhi & us se lipar gayi.deven ne bhi use baahon me bhar liya & dono 1 dusre ko chumne lage,paglo ki tarah,deewano ki tarah.kehne mushkil tha ki kiski zuban kiske munh me thi & kaun kiske chehre pe apne besabr lab fira raha tha.rambha deven ke gale me baahen dale uske baal khincti use chum rahi thi & vo uski kamar ko bahut zor se jakde hue uski zuban ka lutf utha raha tha.deven ne use kamar se uthaya & kamre me rakhe 1 shelf pe bitha diya.khud ko sambhalti kanpti rambha ne hath shelf pe rakhe & uspe rakha guldan uske hatho se takra ke neeche gir gaya.us shelf pe fone & aur bhi kuchh sajawati saman rakhe the.deven ne un sare samano ko apne hatho se dhakel ke neeche giraya & apni mehbooba ki khuli tango ke beech khada ho uski chut pe lund dabate hue use chumne laga.rambha ke hath deven ki pith pe ghum rahe the.

Deven uski zuban chuste hue uski bayi chhati ko shirt ke upar se hi daba raha tha & vo ab zor-2 se aahen bhar rahi thi.rambha ne uske coat ko uske kandho se neeche sarkaya & uski kamiz ke upar se hi uske chaude seene & kandho pe hath firaya.deven ne uski t-shirt upar ki & uske bra ko upar kar jhuk ke uski numaya chhatiyo ko chusne laga.

“aannnnhhhhhh..deven..!”,rambha ki aankhe bilkul phail gayi thi & vo sar upar kiye apne premi ke baalo ko khinchti jhatke kha rahi thi.deven uski chhatiyo ko jaise munh me pura bhar ke chusna chahta tha.un bhari-bharkam magar pusht golaiyon ko vo apne munh me baar-2 bharne ki koshish karte hue chus raha tha.neeche rambah ki chut pe uska sakht lund vaise hi lagatar ragad kha raha tha.sham se hi rambha us se milne ki hasrat ki umang se bhari thi & ab uske mil jane pe uske jism ki nazdiki & uski deewangi bhari harkato ne uske sabr ka bandh tod diya tha & vo jhad rahi thi.

Deven ne uski t-shirt ko sar ke upar se khinch ke nikala to uski choochiyo ne chhalchhalate hue bra ki qaid se chhutne ki khwahish jatayi.apni dilruba ke mastane ubharo ki iltija na maanane ki himakat bhala deven kaise kar sakta tha.usne uske bra straps ko kandho ke upar se pakda & itni zor se khincha ki uske hooks alag ho gaye & khuli bra uske hatho me aa gayi.usne bra ko uchhal diya & jhuk ke rambha ki dilkash choochiyo se apne pyase honth sata diye.vo unhe aise chus raha tha mano unse doodh nikal ke apni pyas bujhana chahta ho.rambha ke husn ko dekh mard apna aapa kho dete the lekin fir bhi ye shiddat,ye deewanapan usne kabhi kisi & ke pyar karne me nahi mehsus kiya tha.khud deven bhi Haraad me us raat aisa deewana kaha tha.

Rambha ka bhi haal deven se alag thode hi tha.vo bhi bawli ho gayi thi.usne mehboob ke baal pakad uske sar ko apne seene se alag kiya & upar kar 1 lambi kiss di.uske hath deven ki shirt ko uski pant se bahar khinch rahe the.ab use bhi sabr nahi tha & usne uski kamiz ko pakad ke is tarah khincha ki sare button toot gaye.khuli kamiz ko usne deven ke kandho se utar fenka & aage jhuk uske seene ke baalo me munh ghusa ke ragadne lagi.uske gale se ajib si aavazen nikal rahi thi jo uske masti me sab bhul jaane ka sabot thi.usne deven ke nipples ko chusa & fir kaat liya.deven ne sar upar kiya & karaha magar rambha ke sar ko seene se alag karne ke bajay use & sata diya.rambha ke hath uske badan ke bagal me ghumte hue uske kandho & mazbut bazuo pe fir rahe the.rambha garden jhuka ke uske seene se chumte hue uske pet pe jaha tak ja sakti thi,jake chum rahi thi.vo & jhukne me asamarth thi & uske honth deven ke lund tak nahi pahunch rahe the to usne apne hatho me hi uske lund & ando ko daboch liya & zor-2 se dabane lagi.

“ohhhhhh..rambha..!”,deven masti me aahat ho gaya & uske baal pakad ke upar khincha & 1 baar fir uske gulabi labo ko apne labo ki qaid me le liya.vo rambha ki kamar ke gudaz hisse ko dabate hue chum raha tha & vo uske lund ko.deven ke hath dilruba ki reshmi pith pe sarak rahe the.hath uski kamar se upar gardan tak gaye & fir vapas laute & is baar & neeche gaye & uski gand se sat gaye.rambha chihunki & usne deven ki pant khol apna hath andar daal diya.deven fir se karaha & rambha shelf se utar gayi & deven ki kamar pakad use shelf ki bagal ki deewar se laga diya.

Usne deven ki pant ko fauran neeche kiya & uske underwear ko bhi.samne precum se bhiga uska 9.5 inch lumba lund apne pure shabab me uski nigaho ke samne tha.rambha apne panjo pe baith gayi & deven ki gand ke bagal me hath lagate hue use aage khincha & khud aage jhukte hue uske lund ke supade ko munh me bhar liya.deven ne deewar pe hath lagaye & sar uthake aah bhari.rambha uski jhanto me naak ghusa ke vahi harkat dohrayi jo kuchh der pehle usne uske seene pe kit hi.usne deven ke lund ko utha uske pet se sata diya & apni jibh ko lund ki jad se leke uske supade ki nok tak chalaya.deven ka jism sihar utha.rambha ki jibh supade se vapas jad tak aayi & uske bhi neeche deven ke ando ke beech pahunch ke ruki.usne apni naak lund ki jad me ghusa ked abate hue uske ando ko munh me bahr ke chusna shuru kar diya.deven uske baalo ko pakad sar ko apni god me daba raha tha.rambha ne ando ko munh se nikala & lund ko munh me bhar liya.anguthe & pehli ungli ka dayra bana lund ko usme phansa use hilate hue usne use chusna shuru kar diya.deven ab kamar hilate hue uske munh ko chod raha tha.rambha uske ang ko munh me bhare bas us se khelti chali ja rahi thi.deven ko laga ki agar vo isi tarah juti rahi to vo fauran jhad jayega.usne jhuk ke rambha ke kandhe pakad use upar uthaya & use baaho me bhar chumte hue uski kamar ko jakad hawa me utha liya & shelf ke dusri taraf rakhi writing table pe bitha diya.

Usne rambha ko dhakelte hue table pe litaya magar uspe rakhe writing papers,pen stand,table lamp vagairah aade aa rahe the.deven ne dono hatho se sare saman ko dhakela to rambha ne bhi letate hue apne hath faila diye.zor ki aavaz ke sath lamp farsh pe gir ke chur-2 ho gaya.baki chizen bhi neeche gir ke chhitra gayi magar dono ko in baton se koi matlab nahi tha.rambha ko table pe lita ke uski garden chumte hue vo uski choochiyo pe aaya & unke nipples ko danto se pakad ke khincha.

“aaiiyyeeeee..!”,rambha masti bhare dard se karahi.deven ab uske pet ko chumte hue,uski nabhi ko chuste hue neeche aaya & uski jeans ke button ko khola & zip khinchi.deven ne jeans ko neeche khincha to rambha ne bhi gand upar utha di.agle hi pal jeans & uski kali panty kamre ke farsh pe bikhre baki saman ka hissa the.deven uski bayi tang ko utha ke chum raha tha & rambha apne daye pair ko uske seene pe chala rahi thi.

“ohhhhhh..!”,deven karaha.rambha ne daye panv ke anguthe & ungli ke beech uske baye nipple ko fansa khicnh diya tha.deven ne uski dayi tang ko pakad baye kandhe pe rakha & chumte hue balki yuk aha jaye ki chuste hue uski jangh ki taraf badhne laga.

“aannhhhhhhhh..uummmmmmmm..haannnnnnn..oohhhhhhhhhhh..!”,rambah masti me chikh rahi thi.deven uski moti jangho ko hotho se kaat raha tha & chus raha tha.jab vo hoth hatata to vaha pe 1 nishan dikhne lagta.kuchh hi der me rambha ki dono andruni janghe aashiq ke hotho ke dastkhat se bhar gayi thi,”..uunnnnnnnnnhhhhhhhh..!”,rambha apni kamar uchkate hue apni choochiya apne hi hatho se daba rahi thi.rambha ne apne dono panv ab ghutne mod table pe jama diye the & deven ki zuban uski chut tak pahunch gayi thi & us se beh rahe ras ko laplapate hue chaat rahi thi.deven uski chut me jibh ghusate hue usk dane ko daye hath ki ungli se ragde ja raha tha.agle hi pal rambha kamar uchkati hui jhad gayi.Deven ne uski tange failayi & apne kandho pe chadha li & 1 zor daar dhakke me hi apne lund ko jud tak uski chut me ghusa diya.

“OOUUIIIIIIIIII MAAAAAAAAAAA..!”,rambha chikhi & dono hath sar ke peechhe le jake table ko pakad liya.deven uski jangho ko sehlata,uski tango ko chumta use chod raha tha.rambha table ko pakde apni kamar uchka rahi thi.bas 3 dino ki judai ka ye asar tha!

Deven ka lund rambha ki kokh pe lagatar chot kar raha tha & jab bhi vo uske naritva ke sabse aham hisse se takrata to 1 anokhe,mastane dard se vo tadap uthati jisme beintaha maza bhi chhupa hota.dono ki naso me mano lahu ki jagah besabri beh rahi thi joki jismo ke milne ke bavjud khatm hone ka naam hi nahi le rahi thi.deven ke chehre pe bhi achanak dard ke bhav aa gaye.rambha ki chut ne sikudne-failne ki harkat shuru kar di thi & uska lund ab uski kasi chut ke & kasne ki vajah se jaise chut ki fanko me pis raha tha magar kitna maza tha..kitni khushi..uska dil kiya ki abhi isi pal jhad jaye magar nahi.abhi use apni jaan se pyari mehbooba ke sath jannat ki & sair karni thi.rambha table ko thame kamar uchkati apne seene ko upar uthati & sar ko peechhe fenkti chikhti jhad rahi thi magar deven apne upar kabu rakhe vaise hi dhakke laga raha tha.

Rambha ne hath sar ke peechhe table se hataye & aage lake apne dilbar ke seene & pet ke balo me hasrat se firaye to usne bhi uski tango ko kandho se utar diya & uski marmari baahen tham use upar khincha.rambha uthate hue uske agosh me aa gayi & apni baahen uske kandhe pe rakhte hue uski garden me daal di & uski garden chumne lagi.deven bhi dhakke lagata hua uske daye kaan me jibh firane laga.rambha ke honth uske kandho pe pahunche & vo unpe haule-2 kaatne lagi.deven uski harkat se & josh me aa gaya & usne kuchh zyada hi tez dhakke lagane hsuru kar diye.jism me uthe dard & maze ke milejule mastane ehsas se aahat ho rambha ne uske daye kandhe ke upar thoda zor se dant gada diye.

“ohhhhhhh..!”,deven karaha & rambha ki pusht jangho ke neeche baahen ghusake uski gand ki fanko ko apne hatho me thamte hue usne use mez se uthaya & ghuma ke kamre ki dusri taraf ki deewar se laga diya & zor-2 se dhakke lagane laga.rambha ahen bharti hui uske kandho ke upar se baahen le jate hue uski pith ko noch rahi thi.deven ka lund seedha uski kokh pe qatil choten kar raha tha & bas chand lamho me hi vo uske lund se dobara jhad gayi & apne hath peechhe apne sar ke upar le jate hue apne nakhun deewar pe zor se ragad uspe apni bechaini ke nishan chhod diye.

Deven use uthaye hue ghuma & bistar pe lita diya & dhakke lagane laga.dhakke lagate hue vo bistar pe ghutne jamake upar chadhne laga to rambha bhi apne hath bistar pe rakh uske sahare upar hone lagi.deven uske upar leta uske chehre,uski garden kom chumte hue use chod raha tha.rambha bechaini se bistar pe apne hath fira rahi thi & chadar ko khinch rahi thi.uska baya hath takiye se takraya to usne use uthake farsh pe fenk diya.deven ke dhakke ab bahut tez ho gaye the & uska lund ab chut ki deewaro ko bahut buri tarah ragad raha tha.rambha kanpti aavaz me chikh rahi thi.uski tange deven ki kamar se leke uske ghutno ke pichhle hisso tak ghum rahi thi & vo unhi ke sahare kamar uchka bhi rahi thi.deven ke har dhakke pe uska jism sihar uthata.vo bahut tezi se apni manzil ki or badh rahi thi.

Deven ka lund bhi uski chut ki kasawat se ab behaal ho gaya tha.uske ando me nitha dard hone laga tha & unme ubal raha uska lava ab phutne ko bilkul taiyyar tha.rambha uski pith se leke uski gand tak apne hath chalate hue use noch rahi thi.2 jism ab 1 dusre ke sahare apni-2 manzil ke bilkul karib pahunch chuke the.deven ne apni bayi banh rambha ki garden ke neeche & dayi uski kamar ke neeche sarka use apne agosh me qaid kar khud se bilkul chipta liya tha.rambha bhi use apni baaho & tango me bandh chuki thi.

“devennnnnnnnnnnnn.......rambha....................!”,Tabhi jaise zor ka dhamaka hua jisme koi aavaz nahi thi bas bahut tez,chamkili roshni thi jo keval dono premiyo ko hi dikhi.rambha ke thartharate hontho se siskiyan nikalr rahi thi ,uski aankho se aansoo beh rahe the.uska jism dilbar ki baaho me masti ki inteha se kanp raha tha.uski chut me maze ki nadi sare bandhan tod sailab ki shakl ikhtiyar kar chuki thi.vo jhad rahi thi,aise jaise pehle kabhi nahi jhadi thi.deven ke ando ka mitha dard apne charam pe pahuncha & usi waqt uske lund me bhi jwalamukhi phuta & uska garm lava uski mehbooba ki chut me bharne laga.rambha ki chut to apni mastani harkat kiye chali ja rahi thi & deven ke lund ko nichod rahi thi.deven use baahon me bhare,sar upar uthaye aahen bharta chala ja raha tha.jism me aisa maza usne bhi apni zindagi me pehle kabhi mehsus nahi kiya tha.usne sar neeche kiya to rambha ki aankho se moti chhalakte nazar aaye.vo jhuka & un motiyo ko chakhne laga.ishq ke shiddat bhare izhar ke anjam pe pahunchne ka elan karti un boondo ko apni zuban pe mehsus karte hi deven ko & uski zuban ka uske galo se un boondo ko uthana mehsus karte hi rambha ko us sukun se bhi bada sukun mila jo unhe abhi-2 chudai khatm hone pe mila tha.rambha ke kanpte hoth muskurane lage to unhe dekh deven ke lab bhi hans diye.dil me khushi ki lehar uthi to dono sukun & chain se bhare jism 1 dusre ko agosh me bhar chumne lage.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:13

जाल पार्ट--64

गतान्क से आगे......

"इस तरह अचानक कैसे आ गयी तुम?",जो बात उसे आते ही पुच्छनी चाहिए थी,वो देवेन अब पुच्छ रहा था.इसमे उसकी भी ग़लती नही थी.दिले मे उठते तूफान को शांत करते वक़्त & किसी बात का होश कहा था उसे & रंभा को.वो उसके उपर अभी भी सवार था & लंड सिकुड़ने के बावजूद चूत के अंदर ही था.

"आपकी याद ने इतना तडपया कि मुझसे रहा नही गया.",रंभा उसके गाल के निशान को सहला रही थी.

"अच्छा?",देवेन को जैसे यकीन नही हुआ.वो मुस्कुराते हुए उसकी ठुड्डी के नीचे के हिस्से पे अपने दाए हाथ का पिच्छला हिस्सा फेर रहा था.

"तो क्या झूठ बोल रही हू मैं?",रंभा ने प्यार भरी नाराज़गी से पुछा तो देवेन हंस दिया.

"नही,झूठ नही बोल रही मगर कुच्छ छुपा भी रही हो.क्या बोलके आई हो वाहा?"

"कुच्छ बोल के नही आई.सब छ्चोड़ आई हूँ.",रंभा ने नज़रे झुका ली थी.उसकी आवाज़ की संजीदगी से देवेन के माथे पे शिकन पड़ गयी.उसने लंड बाहर खींचा & तकिये के सहारे लेटते हुए अपनी महबूबा को अपने आगोश मे खींच दोनो के जिस्मो के उपर चादर डाल ली.

"चलो,अब पूरी बात बताओ.",देवेन के सीने पे सर रखे उसके बालो मे उंगलिया फिराती रंभा ने उसे सारी बात बता दी.

"& तुम उसे छ्चोड़ आई?"

"हां तो क्या करती?",रंभा बाई कोहनी को बिस्तर पे जमा बाए हाथ पे सर को उसी हाथ पे टिकाते हुए देवेन को देखने लगी.उसका दाया हाथ अभी भी देवेन के सीने पे घूम रहा था.

"बुरा मत मानना मगर बेवफ़ाई तो तुम भी उस से करती आ रही थी.",देवेन उसके बालो को संवार रहा था.

"हां,मगर हालात क्या थे मेरे आपको पता है?..",रंभा की आवाज़ मे गुस्सा था,"..जब वो लापता था तब मैं उसके बाप के साथ सो रही थी क्यूकी उसके बाप ने शर्त रखी थी मेरे सामने की अगर मैं उसके साथ हुम्बिस्तर हुई तभी वो मुझे मेहरा खानदान का हिस्सा बना रहने देगा वरना बाहर कर देगा!"

"..मेरी कमज़ोरी थी कि मैने उसे ना नही किया.कुच्छ दौलत का लालच..कुच्छ..",रंभा की नज़रे झुक गयी,"..कुच्छ जिस्म की माँग & मैने उसकी बात मान ली.फिर डॅड अपनी ज़बान के पक्के थे.मेरे साथ पहली बार सोने के बाद ही उन्होने मुझसे कह दिया था कि आऐइन्दा वो मेरी मर्ज़ी के बिना मुझे नही चोदेन्गे.उसके बाद की सारी चुदाई मे मैं उनके साथ मर्ज़ी से शरीक थी.",रंभा चाह के भी देवेन से निगाहें नही मिला पा रही थी.

"पर समीर..वो तो जैसे मेरा इस्तेमाल कर रहा था.चाहे कुच्छ भी हो,मैं डॅड के साथ उसे ढूँढने तो निकली थी & वो..उसे तो मेरी परवाह ही नही..जब आपके साथ ये रिश्ता शुरू हुआ तो मैं उसकी बेवफ़ाई के बारे मे जानती थी & फिर..",रंभा खामोश हो गयी.

"& फिर क्या?",देवेन ने दाई करवट पे होते हुए उसे फिर से आगोश मे भर लिया & उसके दूसरी तरफ घूमे चेहरे को अपनी नाक से धकेल अपने चेहरे के सामने किया.

"मुझे चुदाई बहुत पसंद है..इसके बिना जी नही सकती मैं मगर इसका मतलब ये नही है की मैं कोई बाज़ारु औरत..कोई वेश्या हू!"

"रंभा!",देवेन को उसकी बात बहुत बुरी लगी थी.

"शादी से पहले भी मेरे मर्दो के साथ संबंध थे.शादी के बाद पति के अलावा मैने अपना जिस्म डॅड & प्रणव को भी सौंपा मगर आपसे मिलने के बाद मैने जाना कि मेरे किसी भी मर्द के साथ सोने की असल वजह मेरा चुदाई का शौक या मेरी मतलबपरस्ती नही थी..",रंभा की आँखो मे पानी आ गया था/

"..मुझे तलाश थी किसी की जोकि उस गाँव मे उस रात यहा आके..",उसने देवेन के सीने पे अपना हाथ रख वाहा इशारा किया,"..पूरी हो गयी.आपकी बाहो मे आने के बाद अब किसी & की चाहत नही रह गयी है मुझे.ये सच है कि मैने वापस जाने के बाद प्रणव के साथ चुदाई की है मगर मैं उसे अपने जाल मे उलझाए रखना चाहती हू ताकि जान सकु की डॅड की हालत के पीछे उसका हाथ है या नही.आप..-",देवेन ने बाया हाथ उसकी कमर से हटा उसके होंठो पे रख दिया.

"चुप!बिल्कुल चुप!..सफाई देके मुझे शर्मिंदा कर रही हो?..तुमसे प्यार करने का मतलब ये थोड़े ही है कि मैं तुम्हारी ज़िंदगी का मालिक बन गया..नही!तुम 1 समझदार,काबिल लड़की हो जो अपने फ़ैसले खुद लेने का माद्दा रखती है.हां,मुझे रश्क होता है तुम्हारी ज़िंदगी के बाकी मर्दो से लेकिन उसका मतलब ये नही कि मैं तुम्हे सबसे रिश्ता तोड़ने को कहु.मेरी मोहब्बत की बुनियाद इतनी कमज़ोर नही है."

"ओह!देवेन..",रंभा ने उसे बाहो मे भर लिया.उसकी आँखो का पानी उसके गालो को भिगोने लगा था.देवेन उसके दाए कंधे के उपर सर रखे उसके गले से लगा उसकी पीठ थपथपा रहा था,"..बस..1 बार मेहरा खानदान की गुत्थी सुलझ जाए,उसके बाद मैं सब छ्चोड़ बस आपकी बाहो मे यू ही सारी ज़िंदगी पड़ी रहूंगी.",उसकी बात सुन देवेन की पकड़ और कस गयी & उस्ने दाई बाँह उसकी गर्दन के नीचे सरकाते हुए उसे फिर से पीठ पे लिटा दिया & उसके माथे को चूमने लगा.

"फ़िक्र मत करो.बहुत जल्द ये सारी उलझने ख़त्म हो जाएँगी.मुझे तफ़सील से सारी बात बताओ कि आख़िर वो प्रणव क्या हरकतें कर रहा है?",रंभा ने देवेन को सब कुच्छ बताया.उसने महादेव शाह के बारे मे भी बताया.

"हूँ..",देवेन का लंड रंभा के जिस्म की च्छुअन से फिर से खड़ा हो रहा था & उसके साथ-2 रंभा ने भी इस बात को महसूस किया,"..तुम्हे शाह से मिलके क्या लगा?..वो किस तरह का आदमी है?..क्या उसे वैसे बेवकूफ़ बनाया जा सकता है जैसे प्रणव सोच रहा है?",देवेन अब दाई करवट पे था & रंभा अपनी बाई करवट पे.वो बाए हाथ से उसके लंड को दबा रही थी & दाए को उसके जिस्म पे फिराते हुए उसके सीने के बालो मे मुँह घुमा रही थी.

"उउंम..नही मुझे तो वो बुड्ढ़ा बड़ा चालाक लगा..आहह..!",देवेन ने उसके सर को अपने सीने से उठाया & उसके बाल पकड़ पीछे कर उसकी गर्दन अपने सामने की ओर चूमने लगा.

"1 तरकीब सूझी है!",अचानक देवेन ने उसके होंठो से लब अलग किए & उसके चेहरे को देखा.रंभा को उसकी ये हरकत बिल्कुल भी अच्छी नही लगी & उसने उसके सर को पकड़ वापस अपनी गर्दन पे दबाया,"..क्यू ना हम दोनो के साथ ये खेल खेलें & कंपनी की मालकिन तुम बन जाओ."

"क्या?!",इस बार रंभा ने खुद देवेन के बाल पकड़ उसके सर को उपर कर दिया.

"हां,हम ये पता करते हैं कि विजयंत मेहरा के इस हाल का ज़िम्मेदार कौन है मगर साथ-2 शाह & प्रणव के साथ ये खेल भी खेलते रहते हैं.जैसे ही मामला सुलझेगा तो अगर प्रणव मुजरिम होगा तो वो सलाखो के पीछे होगा & अगर नही तो भी हम उसे & शाह को किनारे कर देंगे,फिर तुम कंपनी की मालकिन बनी रहोगी.",रंभा उसके चेहरे को गौर से देखते हुए उसे समझने की कोशिश कर रही थी.

"मगर 1 बात और है."

"क्या?"

"प्रणव का सारा प्लान इस बात पे टिका है कि समीर के शेर्स तुम्हे मिलें."

"हां."

"अब अगर तुम समीर को तलाक़ देती हो तो उसकी सारी मेहनत बर्बाद हो जाएगी."

"हां."

इसका मतलब तुम्हे अभी समीर की पत्नी बनाकर रहना होगा हां एक बात और भी है."

"वो क्या?"

"समीर के शेर्स तुम्हारे पास तो केवल 1 ही सूरत मे आ सकते हैं..",रंभा जानती थी वो सूरत क्या थी,"..जब उसकी मौत हो जाए.तो कभी ना कभी शाह या प्रणव तुम्हे टटोलेंगे कि तुम इस बात के लिए तैय्यार हो या नही और तुम्हे उन्हे यकीन दिलाना है कि तुम्हे समीर की मौत से कोई परेशानी नही बल्कि तुम खुद समीर को रास्ते से हटाओगि उनके लिए.",रंभा कुछ पल देवेन को देखती रही.उसे उसकी बात समझ आ गयी थी & उसके होंठो पे मुस्कान खेलने लगी.उसे मुस्कुराता देख देवेन भी मुस्कुराने लगा & अगले ही पल दोनो हंसते हुए 1 दूसरे को बाँहो मे बाहर बिस्तर पे लोटने लगे.रंभा जानती थी कि देवेन का प्लान कमाल का था & आगे की उनकी सारी ज़िंदगी बड़े सुकून से कटने वाली थी.

बिस्तर पे यू लोटने से उनके जिस्मो पे पड़ी चादर उनके गिर्द लिपट गयी थी मगर उन्हे किसी बात का होश नही था.1 बार फिर रंभा नीचे थी & देवेन उसके उपर.वो उसकी छातिया चूस्ते हुए लंड को चूत पे दबा रहा था.रंभा तो बस अपने बेचैन हाथो से उसके पूरे जिस्म को च्छू रही थी,"..उउम्म्म्म..भूख लग रही है मुझे..शाम से कुच्छ नही खाया है."

"अच्छा..",देवेन उस से अलग होने लगा.

"उउन्ण..जा कहा रहे हैं!"

"अरे!तो फोन तक कैसे जाऊं?",देवेन उसके बच्पने पे मुस्कुरा दिया.

"मुझे नही पता पर मुझसे अलग होना मना है!",देवेन को उसकी बात पे हँसी आ गयी.

"अच्छा बाबा!जैसा तुम कहो.",उसने रंभा को चादर समेत बाहो मे भरा & लिए दिए बिस्तर से उतर गया & चलते हुए शेल्फ के पास पहुँचा जिसके नीचे फोने & मेनू कार्ड गिरा था.उसने दोनो चीज़ें उठा के उपर रखी & फिर रूम सर्विस को ऑर्डर किया.वो रंभा को वैसे ही बाहो मे भरे हुए चूमते हुए दरवाज़े तक गया & उसे खोला & फिर उसे गोद मे उठा लिया & बिस्तर पे आ गया.दोनो हंसते हुए फिर से प्यार करने लगे.

चादर के नीचे देवेन रंभा के उपर चढ़ा उसे चूम रहा था & उसकी चूचिया दबा रहा था.रंभा भी उचक के बीच-2 मे उसके सीने को चूम रही थी & उसके निपल्स को अपनी उंगलियो से नोच रही थी की दरवाज़े की घंटी बजी.देवेन उसके उपर से उतर बिस्तर पे लेट गया & रंभा उसकी दाई बाँह के घेरे मे आ गयी & चादर को अपने गले तक खींच लिया.

"कम इन.",देवेन के कहने पे वेटर दरवाज़ा खोल 1 ट्रॉली धकेल्ता अंदर आया & कमरे की हालत & बिस्तर पे दोनो को देख चौंक गया मगर वो 1 नामी होटेल का वेटर था & उसने फ़ौरन खुद को संभाला.

"गुड ईव्निंग,मॅ'म!..गुड ईव्निंग,सर!",वो बिस्तर के दूसरी तरफ रखी 2 कुर्सियो & मेज़ की तरफ फर्श पे गिरे समान से बचाते हुए ट्रॉली को ले जा रहा था.

"अरे भाई!इस ट्रॉली को यही इधर लगा दो.",देवेन ने अपने दाई तरफ बिस्तर के किनारे इशारा किया.रंभा का दाया हाथ चादर के नीचे से सरक के देवेन के लंड पे आ गया था & वो उस से खेलने लगी थी.वेटर से चादर के नीचे होती हुलचूल छुपि तो नही ना ही च्छूपा था चादर के नीचे रंभा के नंगी होने का एहसास.

रंभा 1 बेबाक लड़की थी मगर इस हद्द तक जाने की उसने भी कभी नही सोची थी लेकिन आज जैसे सारी हदें टूट गयी थी.वेटर की मौजूदगी से उसे थोड़ी शर्म तो आई थी मगर जब उसने देखा कि वो उसे सीधा देखने से बच रहा है तो उसे हँसी आने लगी थी.देवेन की बाहो मे खुद को बहुत महफूज़ महसूस कर रही थी वो.

वेटर ट्रॉली लगाके जाने लगा तो रंभा ने देवेन को उसे टिप देने को कहा.देवेन ने वेटर को बुलाया तो वो उसके करीब आया & टिप लेते हुए उसकी नज़र नीचे हुई & चादर मे बना तंबू और उसमे होती हुलचूल उसे और करीब से दिखी.वेटर को पसीना आ गया.ऐसा नही था कि उसने कभी जोड़ो को इस तरह से 1 दूसरे से प्यार करते नही देखा था.विदेशी जोड़े अक्सर 1 दूसरे को चूमते लिपटाते रहते थे मगर ये पहला मौका था जब उसने किसी जोड़े को इस तरह बिस्तर मे देखा था.वो टिप लेके दरवाज़े की ओर गया & वाहा पहुचते ही आदत के मुताबिक घुमके 'हॅव ए नाइस स्टे!' बोलने ही वाला था कि सामने का नज़र देख उसका हलक सुख गया.

रंभा उसके घूमते ही देवेन के उपर आ गयी थी और उसे चूम रही थी.चादर उसकी कमर तक सरक गयी थी & उसकी गोरी पीठ कमरे की रोशनी मे चमक रही थी.उसकी दाई छाती का थोड़ा सा हिस्सा उसकी बगल से दिख रहा था.देवेन के हाथ उसकी कमर के मांसल हिस्से को दबा रहे थे.वेटर की आवाज़ उसके हलक मे ही अटक गयी थी.उसने दरवाज़ा बंद किया & माथे का पसीना पोन्छ्ता वाहा से चला गया.

"पहले खाना तो खा लो.",देवेन ने चादर के नीचे हाथ सरका के उसकी गंद को दबाया & फिर कमर पकड़ उसे अपने उपर से हटाया,"..फिर तुम्हे बताना है कि मुझे क्या नया पता चला है दयाल के बारे मे."

"दयाल के बारे मे?",रंभा ट्रॉली से प्लेट उठाके उसमे खाना परोसने लगी.

"ह्म..अब दयाल के बारे मे तो नही मगर समझो कि 1 नया सुराग मिला है.",देवेन ने रंभा को अपनी ओर खींचा.वो पलंग के हेडबोर्ड से टिक के बैठ गया था & उसने अपनी दाई बाँह रंभा के दाए कंधे के गिर्द डाल दी.रंभा उसे चम्चे से खाना खिलाने लगी & खुद भी खाने लगी,"..रंभा गोआ का 1 चेहरा जो तुम जानती हो या जिसके बारे मे तुमने सुना होगा,वो है इसके खूबसूरत,चमकीली रेत वाले बीचस,समंदर का नीला पानी..",उसने महबोबा के हाथ से 1 नीवाला लिया,"..यहा के लोगो की धीमी चाल से चलती आरामदेह ज़िंदगी,फेणी & यहा का म्यूज़िक."

"..मगर इस जगह का 1 दूसरा चेहरा भी है जो की इसके पहले चेहरे से बिल्कुल उलट है..",रंभा गौर से उसे सुन रही थी.देवेन के सीने के दाए हिस्से पे उसका बाया निपल चुभ रहा था & देवेन को मस्त कर रहा था.उसने अपना बाया हाथ अपनी महबूबा के सीने के दिलकश उभारो से लगा दिया,"..वो चेहरा है जुर्म का,ड्रग्स का,जिस्म्फरोशी का,करप्षन का.",वो रंभा की छातियो को हौले-2 दबा रहा था.रंभा को बहुत भला लग रह था उसके हाथो का दबाव मगर फिर भी उसे छेड़ने की गरज से वो चिहुनकि & बुरा सा मुँह बनाया तो देवेन ने उसके बाए गाल को चूम लिया & मुँह खोल अगले नीवाले को मुँह मे डालने की ख्वाहिश ज़ाहिर की.

"मैं यहा से पहले तमिल नाडु मे था & मैने हर तरह के काम किए वाहा-क़ानूनी भी & गैर क़ानूनी भी.",इस बार रंभा ने सच मे बुरा मुँह बनाया,"..रंभा,जैल से निकले शख्स को सभी ग़लत ही समझते हैं.तुम्हे पता नही कितनी मुश्किल होती है सज़ायाफ़्ता इंसान को वापस 1 आम ज़िंदगी जीने मे.तुम्हे इतना यकीन दिलाता हू कि अब मैं कोई ग़लत काम नही करता.",रंभा को उसकी आँखो मे ईमानदारी की झलक दिखी & उसने अगला नीवाला उसके मुँह मे डाला & उसके दाए गाल को चूम लिया.

"..तो मेन समाज मे उस लकीर के,जो अच्छे & बुरे को अलग करती है,दोनो तरफ के लोगो को अच्छे से जानता हू,समझता हू.यहा गोआ मे जुर्म का जो संसार है उसमे हुमारे मुल्क के लोग तो हैं ही मगर साथ-2 रशियन & इज़्रेली भी हैं.ये लोग यहा के ड्रग्स & जिस्म्फरोशी के धंधे को कंट्रोल करते हैं.मैं इन दोनो मुल्को के लोगो को जानता हू..",खाना ख़त्म हो चुका था.दोनो ने पानी पिया & देवेन ने अपनी महबूबा को बैठे हुए ही अपनी गोद मे खींचा & उसकी छातियो को चूसने लगा.उसके लंड पे बैठी उसके सर को प्यार से अपनी हाथो मे पकड़ चूमते हुए रंभा आँहे भरने लगी.

"..बालम सिंग अपने फार्म पे चरस उगाता था & उसी का धंधा करता था.उसके मरने पे ड्रग्स की गंदी दुनिया मे उथल-पुथल मच गयी & ये खबर यहा गोआ भी पहुँची..",देवेन की ज़ुबान रंभा को मस्त किए जा रही थी.वो अपने जिस्म का बाया हिस्सा उसके सीने से सटा अपनी दोनो टाँगे उसके जिस्म के बाई तरफ फैलाए उसकी गोद मे छॅट्पाटा रही थी.देवेन का लंड उसकी मुलायम गंद के दबाव से फ़ौरन खड़ा हो गया था.

"..तब मुझे पता चला कि बलम सिंग अपने जैल मे काम करने के दिनो से ही ड्रग्स के धंधे से जुड़ा था.पहले तो वो बस दयाल जैसे लोगो से लेके क़ैदियो को ड्रग्स सप्लाइ करता था मगर बाद मे वो उन लोगो के साथ मिलके इस धंधे मे पूरा उतर गया..",रंभा मस्त हो अपनी बाई बाँह देवेन के दाए कंधे पे टिकाते हुए उसकी गर्दन को जकड़ते हुए उसके दाए कान मे अपनी जीभ फिरा रही थी.

"आईिययययई..!",उसके चेहरे पे शिकन पड़ गयी & साथ ही 1 मस्त मुस्कान भी खेलने लगी.देवेन ने उसकी मोटी जाँघो के नीचे बाई बाँह लगाते हुए उन्हे उठाया था & जब नीचे किया तो उसकी चूत मे देवेन का लंबा,मोटा लंड घुस चुका था.उसने उसके सीने से सर उठाया तो रंभा ने अपना सर झुका उसके होंठ चूम लिए.दोनो की आँखो मे वासना के लाल डोरे तेर रहे थे.देवेन उसकी जाँघो को थाम के उपर-नीचे करते हुए उसकी चुदाई कर रहा था.रंभा की दोनो जंघे सटी होने की वजह से उसकी कसी चूत और कस गयी थी & उसकी दीवारो पे देवेन का लंड बहुत बुरी तरह रगड़ रहा था.

"..मगर बालम कोई बहुत बड़ी मछली नही था.उसका असली बॉस यहा से दूर मारिटियस मे बैठा है.अब मज़े की बात सुनो.बलम के बॉस से हमे कोई मतलब नही है.हमे मतलब है उस बॉस के धंधे के तरीके से.वो आदमी भी ड्रग्स & जवाहरतो का ग़ैरक़ानूनी धंधा 1 साथ करता है & सभी मुल्को की पोलीस से लेके इंटररपोल उसके दोनो धंधो मे उलझी रहती है मगर कोई 1 भी उसे रंगे हाथ नही पकड़ पाती..",रंभा लंड की ज़ोरदार रगड़ से बहुत मस्त हो गयी थी & उसने अपने दिलबर की गर्दन को जकड़ते हुए उसके सर को अपने सीने से चिपका लिया & कमर हिलाती च्चटपटाने लगी.उसने देवेन के बाल पकड़ पीछे खींचे & अपने लरजते लब उसके लबो से चिपका दिए & उसके लंड पे अपनी चूत की गिरफ़्त को & कस दिया.वो झाड़ रही थी & देवेन उसे वैसे ही गोद मे उच्छलते हुए चोद रहा था.

रंभा ने सिसकते हुए उसके हाथ को पानी जाँघो के नीचे से हटाया & दोनो टाँगे उसकी टाँगो के उपर करते हुए उसके सीने से टेक लगाके बैठ गयी & फिर कमर उच्छालने लगी.देवेन ने भी उसकी कमर थाम ली & उसकी पीठ & कंधे चूमने लगा.

"..जिस वक़्त दयाल मुझे फँसा के यहा से भागा उसके कुच्छ अरसे बाद ही बालम के बॉस ने जवाहरतो का भी धंधा शुरू किया था.खेल बहुत सीधा है.जैसे मुझे फँसाया गया था उसी तरह किसी मासूम शख्स से जवाहरतो की स्मुगलिंग कराई जाती.पोलीस का ध्यान उसपे रहता & इस बीच ड्रग्स किसी दूसरे रास्ते स्मगल हो जाते.ये तरीका सीधा दयाल की ओर इशारा करता है..",रंभा ज़ोर-2 से उछल रही थी & बीच-2 मे गर्दन घूमके अपने प्रेमी को चूम भी रही थी.

"..लेकिन इंटररपोल की रिपोर्ट के मुताबिक वो शख्स मारिटियस का ही कोई बंदा था-रोशन पेरषद.पर मेरा दिल कहता है कि वो दयाल ही था & आदत से मजबूर नाम बदल के काम कर रह था.खैर,वो रोशन पेरषद काफ़ी दिनो तक इस धंधे से जुड़े रहने के बाद अचानक 1 दिन गायब हो गया..",रंभा ने अपने होंठ भींच लिए थे.उसके दिल मे मस्ती का 1 गुबार उठ रहा था,प्री जिस्म मे दौड़ती मस्ती बस 1 धमाके के साथ फूटने ही वाली थी.

"..कुछ दिनो बाद इसी तरीके से युरोप मे ड्रग्स स्मुग़ले किए गये & वाहा जो नाम सामने आया वो था दानिश सुलेमान.मेरे हिसाब से ये भी दयाल ही था.इंटररपोल वाले भी समझ गये थे कि हो ना हो ये सब 1 ही इंसान हैं जो नाम बदल के उन्हे हर बार गुमराह कर रहा है मगर 1 रोज़ आम्सटरडॅम के बदनाम डे वॉलेन इलाक़े मे सुलेमान की लाश मिली & उस तरीके से स्मुगलिंग भी बंद हो गयी.कुच्छ दिनो बाद इंटररपोल ने भी फाइल बंद कर दी."

"आहह..!",1 लंबी आह के साथ रांभ अपनी कमर बेचिनी से हिलाती & जिस्म को कमान की तरह मोदती झाड़ गयी & निढाल हो लंबी-2 साँसे भरती देवेन के सीने पे गिर गयी.देवेन ने दाई बाँह उसके पेट पे कसी & बाई उसकी चूचियो के नीचे & नीचे से ज़ोर-2 से कमर उचक के धक्के लगाने लगा.रंभा आहें भरती उसके सर को थामे उसके बाए गाल को चूमती उसका भरपूर साथ दे रही थी & चंद पॅलो बाद दोनो प्रेमियो ने 1 साथ आह भरी & रंभा के चेहरे पे मस्ती भरी मुस्कान खेलने लगी-वो अपनी चूत मे अपने प्रेमी के वीर्य को भरता सॉफ महसूस कर रही थी.

"..मगर मुझे अंदर की बात पता है कि सुलेमान ने अपनी जगह किसी & शख्स की लाश फिंकवा दी थी & अपने मरने की अफवाह उड़वा दी थी.किसी भी एजेन्सी के पास दयाल/पेरषद/सुलेमान का कोई डीयेने या बाइयोलॉजिकल रेकॉर्ड था नही & जब स्मगलिंग का वो तरीका बंद हो गया तो उन्होने भी उसकी मौत को सही मान लिया.."

"..जहा सारी एजेन्सीस धोखा खा गयी वाहा आपको कैसे पता ये सब,जानेमन?",रंभा अभी भी वैसे ही देवेन के बाए कंधे पे सर रखे उसके दाए गाल को सहलाती बाए को चूम रही थी.

"क्यूकी जिस शख्स ने पेरषद & सुलेमान के नामो के झूठे पासपोर्ट्स बनाए थे उसे मैं जानता हू

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क्रमशः.......

JAAL paart--64

gataank se aage......

"Is tarah achanak kaise aa gayi tum?",jo baat use aate hi puchhni chahiye thi,vo Deven ab puchh raha tha.isme uski bhi galti nahi thi.dile me uthate toofan ko shant karte waqt & kisi baat ka hosh kaha tha use & rambha ko.vo uske upar abhi bhi sawar tha & lund sikudne ke bavjud chut ke andar hi tha.

"aapki yaad ne itna tadpaya ki mujhse raha nahi gaya.",rambha uske gaal ke nishan ko sehla rahi thi.

"achha?",deven ko jaise yakin nahi hua.vo muskurate hue uski thuddi ke neeche ke hisse pe apne daye hath ka pichhla hissa fer raha tha.

"to kya jhuth bol rahi hu main?",rambha ne pyar bhari narazgi se puchha to deven hans diya.

"nahi,jhuth nahi bol rahi magar kuchh chhupa bhi rahi ho.kya bolke aayi ho vaha?"

"kuchh bol ke nahi aayi.sab chhod aayi hun.",rambha ne nazre jhuka li thi.uski aavaz ki sanjidgi se deven ke mathe pe shikan pad gayi.usne lund bahar khincha & takiye ke sahare letate hue apni mehbooba ko apne agosh me khinch dono ke jismo ke upar chadar daal li.

"chalo,ab puri baat batao.",deven ke seene pe sar rakhe uske baalo me ungliya firati rambha ne use sari baat bata di.

"& tum use chhod aayi?"

"haan to kya karti?",rambha bayi kohni ko bistar pe jama baye hath pe sar ko usi hath pe tikate hue deven ko dekhne lagi.uska daya hath abhi bhi deven ke seene pe ghum raha tha.

"bura mat maanana magar bewafai to tum bhi us se karti aa rahi thi.",deven uske baalo ko sanwar raha tha.

"haan,magar halaat kya the mere aapko pata hai?..",rambha ki aavaz me gussa tha,"..jab vo lapata tha tab main uske baap ke sath so rahi thi kyuki uske baap ne shart rakhi thi mere samne ki agar main uske sath humbistar hui tabhi vo mujhe Mehra khandan ka hissa bana rehne dega varna bahar kar dega!"

"..meri kamori thi ki maine use naa nahi kiya.kuchh daulat ka lalach..kuchh..",rambha ki nazre jhuk gayi,"..kuchh jism ki mang & maine uski baat maan li.fir dad apni zaban ke pakke the.mere sath pehli baar sone ke baad hi unhone mujhse keh diya tha ki aaainda vo meri marzi ke bina mujhe nahi chodenge.uske baad ki sari chudai me main unke sath marzi se sharik thi.",rambha chah ke bhi deven se nigahen nahi mila pa rahi thi.

"par Sameer..vo to jaise mera istemal kar raha tha.chahe kuchh bhi ho,main dad ke sath use dhoondane to nikli thi & vo..use to meri parwah hi nahi..jab aapke sath ye rishta shuru hua to main uski bewafai ke bare me janti thi & fir..",rambha khamosh ho gayi.

"& fir kya?",deven ne dayi karwat pe hote hue use fir se agosh me bhar liya & uske dusri taraf ghume chehre ko apni naak se dhakel apne chehre ke samne kiya.

"mujhe chudai bahut pasand hai..iske bina ji nahi sakti main magar iska matlab ye nahi hai ki main koi bazaru aurat..koi veshya hu!"

"rambha!",deven ko uski baat bahut buri lagi thi.

"shadi se pehle bhi mere mardo ke sath sambandh the.shadi ke baad pati ke alawa maine apna jism dad & Pranav ko bhi saunpa magar aapse milne ke baad maine jana ki mere kisi bhi mard ke sath sone ki asal vajah mera chudai ka shauk ya meri matlabparasti nahi thi..",rambha ki aankho me pani aa gaya tha/

"..mujhe talash thi kisi ki joki us ganv me us raat yaha aake..",usne deven ke seene pe apna hath rakh vaha ishara kiya,"..puri ho gayi.aapki baaho me aane ke baad ab kisi & ki chahat nahi reh gayi hai mujhe.ye sach hai ki maine vapas jane ke baad pranav ke sath chudai ki hai magar main use apne jaal me uljhaye rakhna chahti hu taki jaan saku ki dad ki halat ke peechhe uska hath hai ya nahi.aap..-",deven ne baya hath uski kamar se hata uske hotho pe rakh diya.

"chup!bilkul chup!..safai deke mujhe sharminda kar rahi ho?..tumse pyar karne ka matlab ye thode hi hai ki main tumhari zindagi ka malik ban gaya..nahi!tum 1 samajhdar,kabil ladki ho jo apne faisle khud lene ka madda rakhti hai.haan,mujhe rashk hota hai tumahri zindagi ke baki mardo se lekin usk matlab ye nahi ki main tumhe sabse rishta todne ko kahu.meri mohabbat ki buniyad itni kamzor nahi hai."

"oh!deven..",rambha ne use baaho me bhar liya.uski aankho ka pani uske galo ko bhigone laga tha.deven uske daye kandhe ke upar sar rakhe uske gale se laga uski pith thapthapa raha tha,"..bas..1 baar mehra khandan ki gutthi sulajh jaye,uske baad main sab chhod bas aapki baaho me yu hi sari zindagi padi rahungi.",uski baat sun deven ki pakad & kas gayi & usne dayi banh uski gardan ke neeche sarkate hue use fir se pith pe lita diya & uske mathe ko chumne laga.

"fikr mat karo.bahut jald ye sari uljhane khatm ho jayengi.mujhe tafsil se sari baat batao ki aakhir vo pranav kya harkaten kar raha hai?",rambha ne deven ko sab kuchh bataya.usne Mahadev Shah ke bare me bhi bataya.

"hun..",deven ka lund rambha ke jism ki chhuan se fir se khada ho raha tha & uske sath-2 rambha ne bhi is baat ko mehsus kiya,"..tumhe shah se milke kya laga?..vo kis tarah ka admi hai?..kya use vaise bevkuf banaya ja sakta hai jaise pranav soch raha hai?",deven ab dayi karwat pe tha & rambha apni bayi karwat pe.vo baye hath se uske lund ko daba rahi thi & daye ko uske jism pe firate hue uske seene ke baalo me munh ghuma rahi thi.

"uumm..nahi mujhe to vo buddha bada chalak laga..aahhhhh..!",deven ne uske sar ko apne seene se uthaya & uske baal pakad peechhe kar uski gardan apne samne ki & chumne laga.

"1 tarkib sujhi hai!",achanak deven ne uske hothos e lab alag kiye & uske chehre ko dekha.rambha ko uski ye harkat bilkul bhi achhi nahi lagi & usne suke sar ko pakad vapas apni gardan pe dabaya,"..kyu na hum dono ke sath ye khel khelen & company ki malkin tum ban jao."

"kya?!",is baar rambha ne khud deven ke baal pakad uske sar ko upar kar diya.

"haan,hum ye pata karte hain ki Vijayant Mehra ke is haal ka zimmedar kaun hai magar sath-2 shah & pranav ke sath ye khel bhi khelte rehte hain.jaise hi mamla suljhega to agar pranav mujrim hoga to vo salakho ke peechhe hoga & agar nahi to bhi hum use & shah ko kinare kar denge,fir tum company ki malkin bani rahogi.",rambha uske chehre ko gaur se dekhte hue use samajhne ki koshish kar rahi thi.

"magar 1 baat & hai."

"kya?"

"pranav ka sara plan is baat pe tika hai ki sameer ke shares tumhe milen."

"haan."

"ab agar tum sameer ko talaq deti ho to uski sari mehnat barbad ho jayegi."

"haan."

"to tumhe filhal sameer ki patni bana rehna padega.lekin 1 baat & bhi hai."

"vo kya?"

"sameer ke shares tumhare paas to keval 1 hi surat me aa sakte hain..",rambha janti thi vo surat kya thi,"..jab uski maut ho jaye.to kabhi na kabhi shah ya pranav tumhe tatolenge ki tum is baat ke liye taiyyar ho ya nahi & tumhe unhe yakin dilana hai ki tumhe sameer ki maut se koi pareshani nahi balki tum khud sameer ko raste se hataogi unke liye.",rambha kuichh pal deven ko dekhti rahi.use uski baat samajh aa gayi thi & uske hotho pe muskan khelne lagi.use muskurata dekh deven bhi muskurane laga & agle hi pal dono hasnte hue 1 dusre ko bahao me bahr bistar pe lotne lage.rambha janti thi ki deven ka plan kamal ka tha & aage ki unki sari zindagi bade sukun se katne vali thi.

bistar pe yu lotne se unke jismo pe padi chadar unke gird lipat gayi thi magar unhe kisi baat ka hosh nahi tha.1 baar fir rambha neeche thi & deven uske upar.vo uski chhatiya chuste hue lund ko chut pe daba raha tha.rambha to bas apne bechain hatho se uske pure jism ko chhu rahi thi,"..uummmm..bhukh lag rahi hai mujhe..sham se kuchh nahi khaya hai."

"achha..",deven us se alag hone laga.

"uunn..ja kaha rahe hain!"

"are!to fone tak kaise jaoon?",deven uske bachpane pe muskura diya.

"mujhe nahi pata par mujhse alag hona mana hai!",deven ko uski baat pe hansi aa gayi.

"achha baba!jaisa tum kaho.",usne rambha ko chadar samet baaho me bhara & liye diye bistar se utar gaya & chalte hue shelf ke paas pahuncha jiske neeche fone & menu card gira tha.usne dono chizen utha ke upar rakhi & fir room service ko order kiya.vo rambha ko vaise hi baaho me bhare hue chumte hue darwaze tak gaya & use khola & fir use god me utha liya & bistar pe aa gaya.dono hanste hue fir se pyar karne lage.

chadar ke neeche deven rambha ke upar chadha use chum raha tha & uski choochiya daba raha tha.rambha bhi uchak ke beech-2 me uske seene ko chum rahi thi & uske nipples ko apni ungliyo se noch rahi thi ki darwaze ki ghnati baji.deven uske upar se utar bistar pe let gaya & rambha uski dayi banh ke ghere me aa gayi & chadar ko apne gale tak khinch liya.

"come in.",deven ke kehne pe waiter darwaza khol 1 trolley dhakelta andar aaya & kamre ki halat & bistar pe dono ko dekh chaunk gaya magar vo 1 nami hotel ka waiter tha & usne fauran khud ko sambhala.

"good evening,ma'am!..good evening,sir!",vo bistar ke dusri taraf rakhi 2 kursiyo & mez ki taraf farsh pe gire saman se bachate hue trolley ko le ja raha tha.

"are bhai!is trolley ko yehi idhar laga do.",deven ne apne dayi taraf bistar ke kinare ishara kiya.rambha ka daya hath chadar ke neeche se sarak ke deven ke lund pe aa gaya tha & vo us se khelne lagi thi.waiter se chadar ke neeche hoti hulchul chhupi to nahi na hi chhupa tha chadar ke neeche rambha ke nangi hone ka ehsas.

rambha 1 bebak ladki thi magar is hadd tak jane ki usne bhi kabhi nahi sochi thi lekin aaj jaise sari haden toot gayi thi.waiter ki maujoodgi se use thodi sharm to aayi thi magar jab usne dekha ki vo use seedha dekhne se bach raha hai to use hansi aane lagi thi.deven ki baaho me khud ko bahut mehfuz mehsus kar rahi thi vo.

waiter trolley lagake jane laga to rambha ne deven ko use tip dene ko kaha.deven ne waiter ko bulaya to vo uske karib aaya & tip lete hue uski nazar neeche hui & chadar me bana tambu & usme hoti hulchul use & karib se dikhi.waiter ko pasina aa gaya.aisa nahi tha ki usne kabhi jodo ko is tarah se 1 dusre se pyar karte nahi dekha tha.videshi jode aksar 1 dusre ko chumte lipatate rehte the magar ye pehla mauka tha jab usne kisi jode ko is tarah bistar me dekha tha.vo tip leke darwaze ki or gaya & vaha pahuchte hi aadat ke mutabik ghumke 'have a nice stay!' bolne hi vala tha ki samne ka nazar dekh uska halak sukh gaya.

rambha uske ghumte hi deven ke upar aa gayi thi & use chum rahi thi.chadar uski kamar tak sarak gayi thi & uski gori pith kamre ki roshni me chamak rahi thi.uski dayi chhati ka thoda sa hissa uski bagal se dikh raha tha.deven ke hath uski kamar ke mansal hisse ko daba rahe the.waiter ki aavaz uske halak me hi atak gayi thi.usne darwaza band kiya & mathe ka pasina ponchhta vaha se chala gaya.

"pehle khana to kha lo.",deven ne chadar ke neeche hath sarka ke uski gand ko dabaya & fir kamar pakad use apne upar se hataya,"..fir tumhe batana hai ki mujhe kya naya pata chala hai Dayal ke bare me."

"Dayal ke bare me?",Rambha trolley se plate uthake usme khana parosne lagi.

"hmm..ab dayal ke bare me to nahi magar samjho ki 1 naya surag mila hai.",Deven ne rambha ko apni or khincha.vo palang ke headboard se tik ke baith gaya tha & usne apni dayi banh rambha ke daye kandhe ke gird dal di.rambha use chamche se khana khilane lagi & khud bhi khane lagi,"..rambha Goa ka 1 chehra jo tum janti ho ya jiske bare me tumne suna hoga,vo hai iske khubsurat,chamkili ret vale beaches,samandar ka nila pani..",usne mehboba ke hath se 1 nivala liya,"..yaha ke logo ki dhimi chal se chalti aramdeh zindagi,feni & yaha ka music."

"..magar is jagah ka 1 dusra chehra bhi hai jo ki iske pehle chehre se bilkul ulat hai..",rambha gaur se use sun rahi thi.deven ke seene ke daye hisse pe uska baya nipple chubh raha tha & deven ko mast kar raha tha.usne apna baya hath apni mehbooba ke seene ke dilkash ubharo se laga diya,"..vo chehra hai jurm ka,drugs ka,jismfaroshi ka,corruption ka.",vo rambha ki chatiyo ko haule-2 daba raha tha.rambha ko bahut bhala lag rah tha uske hatho ka dabav magar fir bhi use chhedne ki garaj se vo chihunki & bura sa munh banaya to deven ne uske baye al ko chum liya & munh khol agle nivale ko munh me dalne ki khwahish zahir ki.

"main yaha se pehle Tamil Nadu me tha & maine har tarah ke kam kiye vaha-kanooni bhi & gair kanooni bhi.",is bar rambha ne sach me bura munh banay,"..rambha,jails e nikle shakhs ko sabhi galat hi samajhte hain.tumhe pata nahi kitni mushkil hoti hai sazayafta insan ko vapas 1 aam zindagi jine me.tumhe itna yakin dilata hu ki ab main koi galat kam nahi karta.",rambha ko uski aankho me imandari ki jhalak dikhi & usne agla niwala uske munh me dala & uske daye gaal ko chum liya.

"..to main samaj me us lakir ke,jo achhe & bure ko alag karti hai,dono taraf ke logo ko achhe se janta hu,samajhta hu.yaha goa me jurm ka jo sansar hai usme humare mulk ke log to hain hi magar sath-2 russian & israeli bhi hain.ye log yaha ke drugs & jismfaroshi ke dhandhe ko control karte hain.main in dono mulko ke logo ko janta hu..",khana khatm ho chuka tha.dono ne pani piya & deven ne apni mehbooba ko baithe hue hi apni god me khincha & uski chatiyo ko chusne laga.uske lund pe baithi uske sar ko pyar se apni hatho me pakad chumte hue rambha he bharne lagi.

"..Baalam Singh apne farm pe charas ugata tha & usi ka dhandha karta tha.uske marne pe drugs ki gandi duniya me uthal-puthal mach gayi & ye khabar yaha goa bhi pahunchi..",deven ki zuban rambha ko mast kiye ja rahi thi.vo apne jism ka baya hisa uske seene se sataye apni dono tange uske jism ke bayi taraf failaye uski god me chhatpata rahi thi.deven ka lund uski mulayam gand ke dabav se fauran khada ho gaya tha.

"..tab mujhe pata chala ki balam singh apne jail me kaam karne ke dino se hi drugs ke dhandhe se juda tha.pehle to vo bas dayal jaise logo se leke qaidiyo ko drugs supply karta tha magar bad me vo un logo ke sath milke is dhandhe me pura utar gaya..",rambha mast ho apni bayi banh deven ke daye kandhe pe tikate hue uski gardan ko jakadte hue uske daaye kaan me apni jibh fira rahi thi.

"aaiiyyyyeeee..!",uske chehre pe shikan pad gayi & sath hi 1 mast muskan bhi khelne lagi.deven ne uski moti jangho ke neche bayi banh lagate hue unhe uthaya tha & jab neeche kiya to uski chut me deven ka lamba,mota lund ghus chuka tha.usne uske sene se sar uthay to rambha ne apna sar jhuka uske honth chum liye.dono ki ankho me vasna ke laal dore tair rahe the.deven uski jangho ko tham ke upar-neeche karte hue uski chudai kar raha tha.rambha ki dono janghe sati hone ki vajahs e uski kasi chut & kas gayi thi & uski deewaro pe deven ka lund bahut buri tarah ragd raha tha.

"..magar baalam koi bahut badi machli nahi tha.uska asli boss yaha se door Mauritius me baitha hai.ab maze ki baat suno.balam ke boss se hume koi matlab nahi hai.hume matlab hai us boss ke dhandhe ke tarike se.vo aadmi bhi drugs & jawaharato ka gairkanooni dhandha 1 sath karta hai & sabhi mulko ki police se leke interpol uske dono dhandho me uljhi rehti hai magar kisi 1 me bhi use range hath nahi pakad pati..",rambha lund ki zordar ragad se bahut mast ho gayi thi & usne apne dilbar ki gardan ko jakadte hue uske sar ko apne seene se chipka liya & kamar hilati chhatpatane lagi.usne deven ke baal pakad peechhe khinche & apne larajte lab uske labo se chipka diye & uske lund pe apni chut ki giraft ko & kas diya.vo jhad rahi thi & deven use vaise hi god me uchhalte hue chod raha tha.

rambha ne sisakte hue uske hath ko pani jangho ke neeche se hataya & dono tange uski tango ke upar karte hue uske seene se tek lagake baith gayi & fir kamar uchhalne lagi.deven ne bhi uski kamar tham li & uski pith & kandhe chumne laga.

"..jis waqt dayal mujhe phansa ke yaha se bhaga uske kuchh arse bad hi balam ke boss ne jawaharato ka bhi dhandha shuru kiya tha.khel bahut seedha hai.jaise mujhe phansaya gay tha usi tarah kisi masom shakhs se jawaharato ki smugling karayi jati.police ka dhyan uspe rehta & is beech drugs kisi dusre raste smuggle ho jate.ye tarika seedha dayal ki or ishara karta hai..",rambha zor-2 se uchal rahi thi & beech-2 me gardan ghumake apne premi ko chum bhi rahi thi.

"..lekin interpol ki report ke mutabik vo shakhs mauritius ka hi koi banda tha-Roshan Pershad.par mera dil kehta hai ki vo dayal hi tha & adat se majbur nam badal ke kam kar rah tha.khair,vo roshan pershad kafi dino tak is dhandhe se jude rehne ke bad achanak 1 din gayab ho gaya..",rambha ne apne honth bhinch liye the.uske dil me masti ka 1 gubar uth raha tha,pre jism me daudati masti bas 1 dhamake ke sath phootne hi vali thi.

"..kuch dino baad isi tarike se Europe me drugs smugle kiye gaye & vaha jo naam samne aya vo tha Danish Suleman.mere hisab se ye bhi dayal hi tha.interpol vale bhi samajh gaye the ki ho na ho ye sab 1 hi insan hain jo nam badal ke unhe har bar gumrah kar raha hai magar 1 roz Amsterdam ke badnam De Wallen ilake me suleman ki lash mili & us tarike se smugling bhi band ho gayi.kuchh dino bad interpol ne bhi file band kar di."

"AAHHHHHHHH..!",1 lambi ah ke sath rambh apni kamar bechini se hilati & jism ko kaman ki tarah modti jhad gayi & nidhal ho lambi-2 sane bharti deven ke seene pe gi r gayi.deven ne dayi banh uske pet pe kasi & bayi uski chochiyo ke neeche & neeche se zor-2 se kamar uchak ke dhakke lagane laga.rambha ahen bharti uske sar ko thame uske baye gal ko chumti uska bharpur sath de rahi thi & chand palo bad dono premiyo ne 1 sath ah bhari & rambha ke chehre pe masti bhari muskan khelne lagi-vo apni chut me apne premi ke virya ko bharta saaf mehsus kar rahi thi.

"..magar mujhe andar ki bat pata hai ki suleman ne apni jagah kisi & shakhs ki lash phinkwa di thi & apne marne ki afwah udwa di thi.kisi bhi agency ke pas dayal/pershad/suleman ka koi DNA ya biological record tha nahi & jab smuggling ka vo tarika band ho gaya to unhone bhi uski maut ko sahi maan liya.."

"..jaha sari agencies dhokha kha gayui vaha aapko kaise pata ye sab,janeman?",rambha abhi bhi vaise hi deven ke baye kandhe pe sar rakhe uske daye gal ko sehlati baye ko chum rahi thi.

"kyuki jis shakhs ne pershad & suleman ke namo ke jhuthe passports banaye the use main janta hu

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:14

जाल पार्ट--65

गतान्क से आगे......

"क्या?!..कैसे?!",रंभा चौंकी.देवेन ने उसकी चूत से लंड निकालते हुए उसे बिस्तर पे लिटाया तो वो बाई करवट पे लेट गयी.देवेन उसके पीछे उसी की तरह लेटा और दाई बाँह मे उसके जिस्म को घेर लिया.

"क्या और कैसे क़ी तो 1 अलग ही दास्तान है.तुम बस इतना जानो कि उस जालसाज़ ने मुझे ये बताया की उसने मारिटियस मे 1 हमारे मुल्क के शख्स को वो 3 नक़ली पासपोर्ट्स बना के दिए थे जिनमे से पहला पेरषद के नाम का मारिटियस का था.दूसरा सुलेमान के नाम का बांग्लादेश का & तीसरा था बीसेसर गोबिंद के नाम का जोकि फिर से मारिटियस का ही था..",रंभा उनिंदी हो रही थी मगर देवेन की बातें उसे बड़ी दिलचस्प भी लग रही थी.

"..इस तीसरे पासपोर्ट के नाम वाला शख्स अभी तक दुनिया के किसी भी पोलीस एजेन्सी की नज़र मे नही आया है.इसका 1 ही मतलब है कि दयाल अब ड्रग्स का धंधा नही कर रहा.आम्सटरडॅम मे अपनी मौत की अफवाह उड़वा के वो किसी दूसरी पहचान को अपना के किसी & ग़लत काम मे जुट गया है."

"मगर इतनी बड़ी दुनिया के किस कोने मे वो है ये हमे कैसे पता चलेगा?",रंभा ने उबासी ली.

"मुझे पता चल गया है."

"क्या?!",रंभा 1 बार फिर चौंकी & गर्दन पीछे घुमाई.देवेन मुस्कुरा रहा था.

"मैने अपनी ज़िंदगी मे काई अच्छे-बुरे लोगो की मदद की है,रंभा & अब उस सब को भूना रहा हू.मुझे पक्का पता है कि 1 लंबे समय का वीसा ले बीसेसर गोबिंद मुल्क मे दाखिल हो चुका है.अब वो कहा है,क्या कर रहा है ये पता लगाने के लिए मुझे उसे या तो ललचाना है या फिर डराना है."

"मगर कैसे करेंगे ये?",रंभा ने करवट ली & अपनी चूचियाँ अपने प्रेमी के सीने मे दबाती हुई उस से बिल्कुल सॅट गयी & चादर को दोनो के जिमो पे डाल लिया.देवेन ने उसका माथा चूमा & उसकी कमर के गुदाज़ हिस्से को सहलाने लगा.

"उसे डराउँगा कि मुझे पता चल गया है कि गोबिंद & दयाल 1 ही शख्स के 2 नाम हैं & चारा डालूँगा जिसे खाने के चक्कर मे वो अपने बिल से बाहर आए & फिर मैं उसे वो सज़ा दू जिसे देने के बाद ही मुझे चैन & मेरी सुमित्रा की रूह को सुकून मिलेगा.",उसकी मा के लिए देवेन के प्यार भरे जज़्बे को देख वो भी जज़्बाती हो गयी.उसका दिल भर आया & उसने अपना चेहरा देवेन के सीने मे च्छूपा लिया & उसके जिस्म के गिर्द अपनी बाहें & कस दी.

"मगर वो चारा होगा क्या?",वो वैसे ही मुँह च्छुपाए उस से चिपकी थी.

"क्या नही कौन.वो चारा होगा खुद मैं.",रंभा ने फ़ौरन मुँह उपर किया.उसका दिल ज़ोरो से धड़क उठा था.वो इस शख्स को खोना नही चाहती थी..उसे खोने का मतलब था फिर से वही तलाश..1 बिस्तर से दूसरे बिस्तर तक का अंतहीन लगने वाला सफ़र..क्या ज़रूरत थी इंटेक़ाम लेने की?..सब भूल के इस खूबसूरत जगह दोनो 1 दूसरे मे समाए क्या पूरी उम्र नही बिता सकते?

"मैं तुम्हे अकेला नही छ्चोड़ूँगा..",देवेन ने जैसे उसके दिल मे घूमाड़ते सवालो को सुन लिया था,"..इतने दिनो बाद मेरी ज़िंदगी मे तुम्हारी शक्ल मे खुशी आई है.मगर सुमित्रा की तकलीफो का खामियाज़ा तो उस कामीने को चुकाना ही पड़ेगा ना!..1 भरपूर ज़िंदगी तुम्हारे साथ बिताने का वादा करता हू मैं तुमसे & फ़िक्र मत करो ये वादा तोड़ूँगा नही.",रंभा ने उसे बहुत कस के जाकड़ लिया & उसके सीने मे चेहरा च्छूपा लिया.देवेन ने हाथ पीछे ले जा कमरे की बत्ती बुझाई & अपनी महबूबा को आगोश मे भर उसके साथ ख्वाबो की दुनिया की सारी करने लगा.

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"मोम..",प्रणव रीता के कमरे मे खड़ा उसके गाउन मे नीचे से दाया हाथ घुसा रहा था & बाए हाथ से उसकी कमर को जकड़े उसकी गर्दन चूम रहा था.रीता दामाद की हर्कतो से खुशी मे मुस्कुरा रही थी.विजयंत के जाने के बाद उसे बड़ा हल्का लगने लगा था.दामाद के साथ यू छुप-2 के इश्क़ लड़ाना उसे बहुत मज़ेदार लगने लगा था & अब तो उसे इसका नशा हो गया था.हर रात बिस्तर मे वो खुद से खेलती उसका इंतेज़ार करती.जिस रात वो नही आता,वो रात तो मायूसी मे बीतती मगर इस से अगली मुलाकात मे उसका जोश दुगुना हो जाता था & फिर चुदाई मे वो मज़ा आता था कि पुछो मत!

"हूँ..",रीता ने उसक्के बालो को बाए हाथ मे पकड़ उसके सर को नीचे अपने सीने की ओर धकेला & दाए हाथ से उसकी ट्रॅक पॅंट के उपर से उसकी पुष्ट गंद दबाई.प्रणव ने जैसे उसे फिर से जवान कर दिया था.उसका हाथ अगले ही पल उसकी पॅंट मे घुसा & प्रणव की नंगी गंद को हसरत से खरोंछने लगा.

"समीर & रंभा के बीच कुच्छ अनबन हुई है क्या?",प्रणव का हाथ सास की पॅंटी मे घुस गया था & अब वो भी वही कर रहा था जो रीता उसकी गंद के साथ कर रही थी.

"उउम्म्म्म..मुझे क्या पता!..इस वक़्त उस मनहूस लड़की का नाम लेके मेरा मूड मत खराब करो.",रीता ने उसकी गंद पे चिकोटी काटी & फिर पॅंट को नीचे सरका दिया.प्रणव ने फ़ौरन टाँगे बारी-2 से उपर कर पॅंट को अपने जिस्म से अलग किया & बाए हाथ को उपर कर उसके गाउन के स्ट्रॅप को उसके दाए कंधे से नीचे सरका के उसकी दाई छाती को नुमाया किया & फिर उसे चूस्ते हुए उसकी गंद की दरार मे से उंगली सरकाते हुए पीछे से ही उसकी चूत कुरेदने लगा,"..आहह..ओह..प्रणव....!"

"फिर भी मोम समीर की तो फ़िक्र है आपको.उस से पुछिये..हो सकता है बेचारा परेशान हो मगर अपनी परेशानी आपसे या किसी & से भी कहते हिचकिचा रहा हो.",प्रणव ने गाउन के दूसरे स्ट्रॅप को भी नीचे सरका दिया था & अब बाई चूची भी उसकी ज़ुबान से गीली हो रही थी.रीता ने मस्ती मे उसकी टी-शर्ट मे हाथ घुसा के अपने नाख़ून उसकी पीठ पे चलाए & फिर उसे भी निकाल अपने दामाद को नंगा कर दिया.

"ओह..& चूसो..हाआंन्‍णणन्..उसे भी तो मेरी खबर लेने आना चाहिए,प्रणव..ऊव्ववव..शरीर कहिनके..काटते क्यू हो?..मगर देखा तुमने उसे आजकल..बस ऐसे मिलके चला जाता है मानो कोई काम पूरा कर रहा हो..हाईईईईईईईई..आराम से घुसाओ ना..ओईईईईईईई..दर्द होता है..आन्न्‍नननणणनह..!",रीता ने दामाद के मोटे लंड को जाकड़ के उसके मुँह को अपने सीने पे ज़ोर से दबाया तो उसने भी उसके बाए निपल पे हल्के से काट लिया & फिर उसकी पॅंटी नीचे कर दी & उसकी चूत मे ज़ोर-2 से उंगली करने लगा.

"वाउ!",दरवाज़ा खुला & 1 लड़की की आवाज़ से दोनो चौंक के अलग हो गये,"..क्या नज़ारा है!..दामाद & सास नंगे 1 दूसरे की बाहो मे..वाह!",कमरे की दहलीज़ पे उस से बाया हाथ लगाए & दाया अपनी कमर पे रखे शिप्रा खड़ी थी,"..तो माइ डार्लिंग हज़्बेंड..",वो आगे आई.उसके होंठो पे 1 मुस्कान थी जिसे दोनो समझने की कोशिश कर रहे थे,"..तो ये है तुम्हारा ज़रूरी काम.सास की सेवा!",उसने व्यंग्य से कहा.रीता शर्म से पानी-2 हो गयी थी & सर झुका लिया था.उसकी पॅंटी उसके घुटनो पे फँसी हुई थी.उसने हाथ नीचे घुसा उसे उपर करना चाहा तो शिप्रा ने तेज़ी से आगे बढ़ उसका हाथ पकड़ लिया.रीता चौंक के बेटी को देखने लगी.

शिप्रा ने मुस्कुराते हुए पॅंटी को घुटने से भी नीचे सरकया & फिर सीधी खड़ी हो दाई टांग उठाके पॅंटी को पूरा नीचे कर दिया.रीता का शर्म & हैरत से बुरा हाल था.प्रणव भी अपनी बीवी को समझाने की कोशिश कर रहा था,"प्लीज़ मोम,अपनी खूबसूरती देखने तो दो मुझे.",शिप्रा उसके सामने खड़ी उसे सर से पाँव तक निहार रही थी,"..हूँ..मैं समझ सकती हू कि प्रणव क्यू दीवाना है तुम्हारा,मोम.तुम अपनी असल उम्र से कितनी छ्होटी लगती हो & तुम्हारा जिस्म अभी भी कितना कसा हुआ है!",उसकी बातो मे सच्ची तारीफ थी.

"पर प्रणव..",उसकी आँखे च्चालच्छला आई थी,"..तुम्हे मेरा ज़रा भी ख़याल नही है ना!..मैं वाहा अकेली पड़ी रहती थी & तुम यहा..",वो सिसकी तो प्रणव ने उसे बाहो मे भर लिया.

"आइ'म सॉरी,बेबी!",वो उसकी पीठ सहला रहा था,"..सब कब,कैसे अचानक हुआ कुच्छ पता ही नही चला &..-",शिप्रा ने फ़ौरन सर उपर उठाया.

"-..पर अब तो सबको सब पता चल गया ना!",शिप्रा मुस्कुरा रही थी.प्रणव ने उसे देखा & दोनो हँसने लगे.प्रणव ने उसे बाहो मे भरा & दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे.प्रणव ने जल्दी से बीवी के गाउन की बेल्ट खोल उसे उसके कंधो से सरकाया & फिर उसकी नेग्लिजी को उपर करने लगा.रीता दोनो को हैरत से देख रही थी.शिप्रा ने किस तोड़ी & खुद बाहे उपर कर अपनी नेग्लिजी निकल अपनी मा के सामने खड़ी हो गयी.

"मोम,इतनी अकेली थी आप!",उसने उसके चेहरे को हाथो मे भर लिया,"..& आपने मुझे क्यू नही बताया आप दोनो के बारे मे..हूँ?",रीता हैरत से उसे देख रही थी,"..वो तो आज मैने सोने का बहाना किया & फिर इस बदमाश के पीछे-2 आई देखने की आख़िर ये रात को करता क्या है!",उसने घूम के पति को देखा,"..पर आपसे नाराज़ हू.मुझे बताना तो चाहिए था या फिर सारा मज़ा अकेले-2 ही लूटना चाहती थी..हूँ?!",उसने शरारत से पुछा.अब रीता को एहसास हुआ कि उसकी बेटी उस से नाराज़ नही थी.

"सॉरी बेटा!",वो बस इतना कह पाई.बेटी के सामने यू नंगी रहने मे उसे अभी भी शर्म आ रही थी.प्रणव आगे बढ़ा & बाया हाथ शिप्रा की पीठ & दया रीता की पीठ पे रखा.

"इस सब का ज़िम्मेदार मैं हू.",उसने कहा & दोनो की पीठ सहलाई.

"तो अब इसकी सज़ा भी मिलेगी तुम्हे.अब दोनो को खुश करो 1 साथ.",शिप्रा ने अपना बाया हाथ आगे कर उसका लंड पकड़ के दबाया & दाए हाथ को मा के बाए कंधे पे रखा.रीता उसकी बात सुन हैरान हो गयी लेकिन उसका दिल भी ज़ोरो से धड़क उठा.प्रणव बीवी की बात सुन मुस्कुराने लगा & उसकी तरफ झुक उसके होंठ चूमे & फिर दूसरी तरफ गर्दन घुमा सास को चूमा जोकि अभी भी थोड़ी झिझकति दिख रही थी.

प्रणव ने रीता को अपनी तरफ खींच अपने सीने से चिपका लिया.रीता ने थोड़ा शरमाते हुए बेटी को देखा मगर वो तो बिंदास मुस्कुरा रही थी.प्रणव ने अपनी दोनो बाहे सास की कमर मे डाल उसे अपने से बिल्कुल चिपका लिया & उसके गुलाबी होंठो के पार अपनी ज़ुबान घुसा दी.रीता शुरू मे तो थोड़ा झिझक रही थी,बेटी की मौजूदगी उसे अभी भी सहज नही होने दे रही थी मगर प्रणव की आतुर ज़ुबान ने उसे जल्दी ही मस्त कर दिया & उसने भी अपनी बाहे उसके बदन पे लपेट दी & उसकी पीठ & कंधो पे हाथ फिराते हुए उसकी किस का जवाब देने लगी.शिप्रा मुस्कुराते हुए प्रणव के पीछे आई & उसके मज़बूत बाजुओ पे अपने हसरत भरे हाथ फिराते हुए उसके दोनो कंधो को चूमने लगी.

उसके हाथ पति के जिस्म पे फिसलते हुए उसके बगल से नीचे आ आगे गये & उसके लंड & आंडो को पकड़ लिया & उनसे खेलने लगी.प्रणव के हाथ भी नीचे आके सास की चौड़ी गंद से चिपक गये थे.रीता अब मस्त हो गयी थी & बेटी की मौजूदगी अब उसे असहज नही कर रही थी बल्कि अब उसे इस खेल मे मज़ा आ रहा था.उसने भी अपने हाथ नीचे किए & अपने दामाद की पुष्ट गंद को दबाने लगी.उसके होंठ प्रणव के होंठो को छ्चोड़ नीचे आ रहे थे & उसके सीने पे घूम रहे थे.उसके बालो को जीभ से अलग करती वो उसके निपल्स को छेड़ रही थी.

"ओह्ह..प्रणव..आइ लव यू,डार्लिंग!",शिप्रा ने हाथ पति के नाज़ुक अंगो से उपर खींच उसके सीने पे लगाए तो उसकी मा के होंठ और नीचे चले गये & दामाद की नाभि तक पहुँच गये.शिप्रा प्रणव की पीठ मे अपनी छातिया धँसती उसके कंधे को चूमते हुए अपने प्यार का इज़हार कर रही थी.उसने भी सर बाए कंधे के उपर से पीछे घुमाया & अपनी बीवी के गुलाबी होंठ चूम लिए.

"आहह..!",उसने शिप्रा के होंठ छ्चोड़ नीचे देखा.फर्श पे बैठी रीता उसके लंड को चूसने मे जुट गयी थी.शिप्रा उसके बाए कंधे से होंठ नीचे ले जाते हुए उसके बाए,उपरी बाज़ू को काट रही थी.प्रणव ने अपने हाथ नीचे किए और दाया सास के सर पे रख उसे अपने लंड पे दबाया & बाए को पीछे ले गया तो शिप्रा थोड़ा बाई तरफ हुई & उसने उसकी चूत मे उंगली घुसा दी.रीता ने लंड चूस्ते हुए बेटी की छ्होटी सी कसी चूत को देखा & दिल ही दिल मे उसकी खूबसूरती की तारीफ किए बिना नही रह सकी.शिप्रा ने पति के हाथ के अपने नाज़ुक अंग को सहलाते ही दोबारा उसके होंठो से अपने होठ सटा दिए.

उसका बाया हाथ पति के जिस्म पे फिरता नीचे आया तो उसे रीता ने थाम अपनी ओर खींचा.शिप्रा ने चौंक के मा को देखा जो लंड चुस्ती उसे अपनी ओर बुला रही थी.शिप्रा प्रणव के सामने गयी तो रीता ने उसे भी अपने साथ बिठा लिया & दामाद का लंड अपने मुँह से निकाल बेटी के मुँह मे दे दिया.शिप्रा ने मुस्कुराते हुए मा को देखा & लंड चूसने लगी.रीता दामाद के आंडो को अपने हाथो से दबा रही थी.

रीता की निगाह शिप्रा की गोल छातियों पे पड़ी तो वो उन्हे छुने से खुद को रोक नही पाई.शिप्रा मा के हाथो की च्छुअन से सिहर उठी & लंड चूस्ते हुए मा को देखा.रीता ने झिझक भरी मुस्कान के साथ हाथ पीछे खिचना चाहा तो शिप्रा ने हाथ वापस अपनी छातियो पे दबा दिया.अब रीता बाए हाथ से प्रणव के अंडे & दाए से शिप्रा की छातिया दबाने लगी.प्रणव तो इस वक़्त खुशी से पागल हुआ जा रहा था.2-2 खूबसूरत औरतें उसके कदमो मे बैठी उसकी मर्दानगी की इबादत कर रही थी.1 मर्द के लिए इस से मस्तानी बात क्या हो सकती थी!

शिप्रा की छातियो मे दर्द हो रहा था & उसका दिल कर रहा था की कोई उन्हे मसले & जम के चूसे.प्रणव तो खड़ा था तो उसने मा की गर्दन पकड़ उसके मुँह को ही अपनी चूचियो पे दबा दिया.रीता चौंकी तो ज़रूर मगर बेटी की हसरत पूरी करते हुए उसने उसकी चूचियो को मुँह मे भर ज़ोर-2 से चूसना शुरू कर दिया.दोनो औरतो के लिए ये पहला मौका था जब वो किसी दूसरी औरत के जिस्म से यू खेल रही थी & दोनो को एहसास हुआ की दोनो को इसमे काफ़ी मज़ा आ रहा था.

कुच्छ देर बाद शिप्रा ने मा के सर को अपने सीने से उठाया & उसके होटो पे हल्के से चूमा & फिर उसके मुँह मे अपने पति का लंड दिया & फिर अपना मुँह मा की भारी-भरकम & थोड़ी सी लटकी मगर दिलकश छातियो से लगा

दिया.रीता के जिस्म मे तो जैसे बिजली की लहर दौड़ गयी & उसके होंठ प्रणव के लंड पे & कस गये.प्रणव ने आह भरी & रीता ने भी.बेटी के चूचिया चूसने से ही वो झाड़ गयी थी.

उसने लंड मुँह से निकाला & उसे शिप्रा की तरफ मोदते हुए प्रणव के आंडो को मुँह मे भर लिया & उन्हे चूसने लगी.शिप्रा ने भी मा की छातियो छ्चोड़ अपना मुँह प्रणव के लंड से लगा दिया.प्रणव ने कैसे खुद को झड़ने से रोका था ये वोही जानता था.उसने अपना ध्यान इन दो मस्तानी हुसनपरियो से थोड़ा भटकने के लिए फिर से समीर & रंभा की बात छेड़ दी,"..मगर मोम आपको समीर से पुच्छना चाहिए कि उसकी शादीशुदा ज़िंदगी मे कुच्छ गड़बड़ तो नही."

"रीता ने फिर बुरा सा मुँह बनाया & उसके आंडो के उपर की त्वचा को आगे के दन्तो मे पकड़ के हल्के से खींचा तो प्रणव की आह निकल गयी,"..फिर वही बात.मैने कहा ना समीर आजकल मेरी परवाह नही करता.",मा & बेटी प्रणव की अन्द्रुनि टाँगो & जाँघो पे हाथ फिराते हुए उसकी गंद को भी मसल रही थी.

"वैसे मोम,आजकल समीर प्रणव की भी इज़्ज़त नही करता.",शिप्रा ने शिकायत की.

"क्या?!"

"छ्चोड़ो शिप्रा.",प्रणव ने बीवी के मुँह से लंड निकाला & दोनो औरतो को खड़ा कर अपने आगोश मे भर लिया & बारी-2 से चूमने लगा.उसके दाया हाथ रीता को थामे था & बाया शिप्रा को.रीता का बाया प्रणव की कमर मे था और दाया शिप्रा की और शिप्रा दाए हाथ से पति के बदन को पकड़े थी & बाए मे मा की पीठ.दोनो के होटो का रस पीने के बाद प्रणव ने दोनो को बिस्तर पे जाने का इशारा किया.दोनो औरतें बिस्तर पे चढ़ि.दोनो ही 1 दूसरे के जिस्मो को निहार रही थी.

"नही प्रणव.समीर का रवैयय्या कुच्छ ठीक नही आजकल.ये क्या कि बस कंपनी की परवाह है उसे हम सब की नही!",रीता ने बेटी को बाहो मे भर लिया तो उसने मा की चूचियो मे अपना चेहरा दफ़्न कर दिया,"..आहह..तू तो बड़ी शरारती है!",रीता ने अपने निपल को दन्तो से काटती शिप्रा के बाए गाल पे प्यार भरी चपत लगाई & अपना हाथ उसकी चूत पे रख दिया तो शिप्रा ने शरारत से हंसते हुए मा का हाथ हटाया & उसे पलंग पे चित लिटा दिया & बिजली की तेज़ी से नीचे हो उसकी टाँगो को फैला उसकी चूत से ज़ुबान लगा दी.

"आहह..!",रीता करही & अपनी कोहनियो पे उचकति हुई टाँगे और फैला दी.शिप्रा की लपलपाति जीभ उसकी चूत से बहते रस को चाते जा रही थी.प्रणव ने दाई बाँह सास की गर्दन के नीचे लगाते हुए उसकी छातियों को दोनो हाथो से दबवाते हुए उन्हे चूसना शुरू कर दिया.

"मगर रंभा का उसकी बीवी बने रहना बहुत ज़रूरी है.",उसने सास की चूचियो को अपने होंठो के निशानो से ढँकने के बाद अपने जिस्म को अपने घुटनो पे किया & रीता के मुँह मे अपना लंड दे दिया जिसे वो बड़ी खुशी से चूसने लगी.उसकी आँखो मे दामाद की बात सुन सवालिया भाव उभर आए थे,"..वो इसीलिए की मुझे लगता है कि रंभा को कंपनी की मालकिन बनाना हम सब के फ़ायदे मे होगा.",प्रणव ने बहुत सोच समझ के आज सास को अपनी तरफ पूरी तरह से करने का फ़ैसला कर लिया था.

"ऊहह..!",रीता उसके लंड को छ्चोड़ बिस्तर पे गिर गयी & च्चटपटाने लगी.शिप्रा की जीभ ने उसकी चूत मे उधम मचाके उसे झड़ने पे मजबूर कर दिया था.कुच्छ देर बाद वो संभली तो वो उठी & शिप्रा अपने घुटनो पे खड़ी हो गयी & मा-बेटी 1 दूसरे को शिद्दत से चूमने लगी.प्रणव बिजली की तेज़ी से बीवी के पीछे आया और उसकी नुमाया चूत से मुँह लगा दिया.

"ओवववव..प्रणव..क्या करते हो!..& उस लड़की को हमारे सर पे बिठाने की क्या बकवास कर रहे थे..ऊहह..मोम....आप भी..!",शिप्रा प्रणव की ज़ुबान के चूत मे घुसते ही घुटनो पे खड़ी हो गयी थी & उसी वक़्त रीता ने उसे बाहो मे भर उसकी चूचियो से मुँह लगा दिया था और बहुत ज़ोर-2 से चूसने लगी थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--65

gataank se aage......

"Kya?!..kaise?!",Rambha chaunki.Deven ne uski chut se lund nikalte hue use bistar pe litaya to vo bayi karwat pe let gayi.deven uske peechhe usi ki tarah leta & dayi banh me uske jism ko gher liya.

"kya & kaise ki to 1 alag hi dastan hai.tum bas itna jano ki us jalsaaz ne mujhe ye bataya ki usne Mauritius me 1 humare mulk ke shakhs ko vo 3 naqli passports bana ke diye the jinme se pehla Pershad ke naam ka mauritius ka tha.dusra Suleman ke naam ka Bangladesh ka & teesra tha Bisesar Gobind ke naam ka joki fir se mauritius ka hi tha..",rambha unindi ho rahi thi magar deven ki baaten use badi dilchasp bhi lag rahi thi.

"..is teesre passport ke naam vala shakhs abhi tak duniya ke kisi bhi police agency ki nazar me nahi aaya hai.iska 1 hi matlab hai ki Dayal ab drugs ka dhandha nahi kar raha.Amsterdam me apni maut ki afwah udwa ke vo kisi dusri pehchan ko apna ke kisi & galat kaam me jut gaya hai."

"magar itni badi duniya ke kis kone me vo hai ye hume kaise pata chalega?",rambha ne ubasi li.

"mujhe pata chal gaya hai."

"kya?!",rambha 1 baar fir chaunki & gardan peechhe ghumayi.deven muskura raha tha.

"maine apni zindagi me kayi achhe-bure logo ki madad ki hai,rambha & ab us sab ko bhuna raha hu.mujhe pakka pata hai ki 1 lumbe samay ka visa le bisesar gobind mulk me dakhil ho chuka hai.ab vo kaha hai,kya kar raha hai ye pata lagane ke liye mujhe use ya to lalchana hai ya fir darana hai."

"magar kaise karenge ye?",rambha ne karwat li & apni chhatiya apne premi ke seene me dabati hui us se bilkul sat gayi & chadar ko dono ke jimo pe daal liya.deven ne uska matha chuma & uski kamar ke gudaz hisse ko sehlane laga.

"use daraunga ki mujhe pata chal gaya hai ki gobind & dayal 1 hi shakhs ke 2 naam hain & chara dalunga jise khane ke chakkar me vo apne bil se bahar aaye & fir main use vo saza du jise dene ke baad hi mujhe chain & meri Sumitra ki rooh ko sukun milega.",uski maa ke liye deven ke pyar bhare jazbe ko dekh vo bhi jazbati ho gayi.uska dil bhar aaya & usne apna chehra deven ke seene me chhupa liya & uske jism ke gird apni baahen & kas di.

"magar vo chara hoga kya?",vo vaise hi munh chhupaye us se chipki thi.

"kya nahi kaun.vo chara hoga khud main.",rambha ne fauran munh upar kiya.uska dil zoro se dhadak utha tha.vo is shakhs ko khona nahi chahti thi..use khone ka matlab tha fir se vahi talash..1 bistar se dusre bistar tak ka antheen lagne vala safar..kya zarurat thi inteqam lene ki?..sab bhool ke is khubsurat jagah dono 1 dusre me samaye kya puri umra nahi bita sakte?

"main tumhe akela nahi chhodunga..",deven ne jaise uske dil me ghumadte sawalo ko sun liya tha,"..itne dino baad meri zindagi me tumhari shakl me khushi aayi hai.magar sumitra ki taklifo ka khamiyaza to us kamine ko chukana hi padega na!..1 bharpur zindagi tumhare sath bitane ka vada karta hu main tumse & fikr mat karo ye vada todunga nahi.",rambha ne use bahut kas ke jakad liya & uske seene me chehra chhupa liya.deven ne hath peechhe le ja kamre ki batti bujhayi & apni mehbooba ko agosh me bhar uske sath khwabo ki duniya ki sari karne laga.

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"mom..",Pranav Rita ke kamre me khada uske gown me neeche se daya hath ghusa raha tha & baye hath se uski kamar ko jakde uski gardan chum raha tha.rita damad ki harkato se khushi me muskura rahi thi.Vijayant ke jane ke baad use bada halka lagne laga tha.damad ke sath yu chhup-2 ke ishq ladana use bahut mazedar lagne laga tha & ab to use iska nasha ho gaya tha.har raat bistar me vo khud se khelti uska intezar karti.jis raat vo nahi aata,vo raat to maayusi me beetati magar is se agli mulakat me uska josh duguna ho jata tha & fir chudai me vo maza aata tha ki puchho mat!

"hun..",rita ne uskke baalo ko baye hath me pakad uske sar ko neeche apne seene ki or dhakela & daye hath se uski track pant ke upar se uski pusht gand dabayi.pranav ne jaise use fir se jawan kar diya tha.uska hath agle hi pal uski pant me ghusa & pranav ki nangi gand ko hasrat se kharonchne laga.

"Sameer & rambha ke beech kuchh anban hui hai kya?",pranav ka hath saas ki panty me ghus gaya tha & ab vo bhi vahi kar raha tha jo rita uski gand ke sath kar rahi thi.

"uummmm..mujhe kya pata!..is waqt us manhus ladki ka naam leke mera mood mat kharab karo.",rita ne uski gand pe chikoti kati & fir pant ko neeche sarka diya.pranav ne fauran tange bari-2 se upar kar pant ko apne jism se alag kiya & baye hath ko upar kar uske gown ke strap ko uske daye kandhe se neeche sarka ke uski dayi chhati ko numaya kiya & fir use chuste hue uski gand ki darar me se ungli sarkate hue peechhe se hi uski chut kuredne laga,"..aahhhhhh..ohhhhhhh..pranav....!"

"fir bhi mom sameer ki to fikr hai aapko.us se puchhiye..ho sakta hai bechara pareshan ho magar apni pareshani aapse ya kisi & se bhi kehte hichkicha raha ho.",pranav ne gown ke dusre strap ko bhi neeche sarka diya tha & ab bayi chhati bhi uski zuban se gili ho rahi thi.rita ne masti me uski t-shirt me hath ghusa ke apne nakhun uski pith pe chalaye & fir use bhi nikal apne damad ko nanga kar diya.

"ohhhhh..& chuso..haaaannnnn..use bhi to meri khabar lene aana chahiye,pranav..oow.sharir kahinke..kaatate kyu ho?..magar dekha tumne use aajkal..bas aise milke chala jata hai mano koi kaam pura kar raha ho..haiiiiiiiii..aaram se ghusao na..ouiiiiiiiiii..dard hota hai..aannnnnnnnhhhhhhhh..!",rita ne damad ke mote lund ko jakad ke uske munh ko apne seene pe zor se dabaya to usne bhi uske baye nipple pe halke se kaat liya & fir uski pantgy neeche kar di & uski chut me zor-2 se ungli karne laga.

"wow!",darwaza khula & 1 ladki ki aavaz se dono chaunk ke alag ho gaye,"..kya nazara hai!..damad & saas nange 1 dusre ki baaho me..vaah!",kamre ki dehliz pe us se baya hath lagaye & daya apni kamar pe rakhe Shipra khadi thi,"..to my darling husband..",vo aage aayi.uske hotho pe 1 muskan thi jise dono samajhne ki koshish kar rahe the,"..to ye hai tumhara zaruri kaam.saas ki seva!",usne vyangya se kaha.rita sharm se pani-2 ho gayi thi & sar jhuka liya tha.uski panty uske ghutno pe phansi hui thi.usne hath neeche ghusa use upar karna chaha to shipra ne tezi se aage badh uska hath pakad liya.rita chaunk ke beti ko dekhne lagi.

shipra ne muskurate hue panty ko ghutne se bhi neeche sarkaya & fir seedhi khadi ho dayi tang uthake panty ko pura neeche kar diya.rita ka sharm & hairat se bura haal tha.pranav bhi apni biwi ko samajhne ki koshish kar raha tha,"please mom,apni khubsurti dekhne to do mujhe.",shipra uske samne khadi use sar se panv tak nihar rahi thi,"..hun..main samajh sakti hu ki pranav kyu deewana hai tumhara,mom.tum apni asal umra se kitni chhoti lagti ho & tumhara jism abhi bhi kitna kasa hua hai!",uski baato me sachchi tarif thi.

"par pranav..",uski aankhe chhalchhala aayi thi,"..tumhe mera zara bhi khayal nahi hai na!..main vaha akeli padi rahti thi & tum yaha..",vo siski to pranav ne use baaho me bhar liya.

"i'm sorry,baby!",vo uski pith sehla raha tha,"..sab kab,kaise achanak hua kuchh pata hi nahi chala &..-",shipra ne fauran sar upar uthaya.

"-..par ab to sabko sab pata chal gaya na!",shipra muskura rahi thi.pranav ne use dekha & dono hansne lage.pranav ne use baaho me bhara & dono 1 dusre ko chumne lage.pranav ne jaldi se biwi ke gown ki belt khol use uske kandho se sarkaya & fir uski negligee ko upar karne laga.rita dono ko hairat se dekh rahi thi.shipra ne kiss todi & khud baahe upar kar apni negligee nikal apni maa ke samne khadi ho gayi.

"mom,itni akeli thi aap!",usne uske chehre ko hatho me bhar liya,"..& aapne mujhe kyu nahi bataya aap dono ke bare me..hun?",rita hairat se use dekh rahi thi,"..vo to aaj maine sone ka bahana kiya & fir is badmash ke peechhe-2 aayi dekhne ki aakhir ye raat ko karta kya hai!",usne ghum ke pati ko dekha,"..par aapse naraz hu.mujhe batana to chahiye tha ya fir sara maza akele-2 hi lootna chahti thi..hun?!",usne shararat se puchha.ab rita ko ehsas hua ki uski beti us se naraz nahi thi.

"sorry beta!",vo bas itna keh payi.beti ke samne yu nangi rehne me use abhi bhi sharm aa rahi thi.pranav aage badha & baya hath shipra ki pith & daya rita ki pith pe rakha.

"is sab ka zimmedar main hu.",usne kaha & dono ki pith sehlayi.

"to ab iski saza bhi milegi tumhe.ab dono ko khush karo 1 sath.",shipra ne apna baya hath aage kar uska lund pakad ke dabaya & daye hath ko maa ke baye kandhe pe rakha.rita uski baat sun hairan ho gayi lekin uska dil bhi zoro se dhadak utha.pranav biwi ki baat sun muskurane laga & uski taraf jhuk uske honth chume & fir dusri taraf gardan ghuma saas ko chuma joki abhi bhi thodi jhijhakti dikh rahi thi.

pranav ne rita ko apni taraf khinch apne seene se chipka liya.rita ne thoda sharmate hue beti ko dekha magar vo to bindas muskura rahi thi.pranav ne apni dono baahe saas ki kamar me daal use apne se bilkul chipka liya & uske ghulabi hotho ke paar apni zuban ghusa di.rita shuru me to thoda jhijhak rahi thi,beti ki maujoodgi use abhi bhi sahaj nahi hone de rahi thi magar pranav ki aatur zuban ne use jaldi hi mast kar diya & usne bhi apni baahe uske badan pe lapte di & uski pith & kandho pe hath firate hue uski kiss ka jawab dene lagi.shipra muskurate hue pranav ke peechhe aayi & uske mazbut bazuo pe apne hasrat bhare hath firate hue uske dono kandho ko chumne lagi.

uske hath pati ke jism pe fisalte hue uske bagal se neeche aa aage gaye & uske lund & ando ko pakad liya & unse khelne lagi.pranav ke hath bhi neeche aake saas ki chaudi gand se chipak gaye the.rita ab mast ho gayi thi & beti ki maujudgi ab use asahaj nahi kar rahi thi balki ab use is khel me maza aa raha tha.usne bhi apne hath neeche kiye & apne damad ki pusht gand ko dabane lagi.uske honth pranav ke hotho ko chhod neeche aa rahe the & uske seene pe ghum rahe the.uske baalo ko jibh se alag karti vo uske nipples ko chhed rahi thi.

"ohh..pranav..i love you,darling!",shipra ne hath pati ke nazuk ango se upar khinch uske seene pe lagaye to uski maa ke honth & neeche chale gaye & damad ki nabhi tak pahunch gaye.shipra pranav ki pith me apni chhatiya dhansati uske kandhe ko chumte hue apne pyar ka izhar kar rahi thi.usne bhi sar baye kandhe ke upar se peechhe ghumaya & apni biwi ke gulabi honth chum liye.

"aahhhhhhh..!",usne shipra ke honth chhod neeche dekha.farsh pe baithi rita uske lund ko chusne me jut gayi thi.shipra uske baye kandhe se honth neeche le jate hue uske baye,upri bazu ko kaat rahi thi.pranav ne apne hath neeche kiye & daya saas ke sar pe rakh use apne lund pe dabaya & baye ko peechhe le gaya to shipra thoda bayi taraf hui & usne uski chut me ungli ghusa di.rita ne lund chuste hue beti ki chhoti si kasi chut ko dekha & dil hi dil me uski khubsurti ki tarif kiye bina nahi reh saki.shipra ne pati ke hath ke apne nazuk ang ko sehlate hi dobara uske hotho se apne hoth sata diye.

uska baya hath pati ke jism pe firta neeche aaya to use rita ne tham apni or khincha.shipra ne chaunk ke maa ko dekha jo lund chusti use apni or bula rahi thi.shipra pranav ke samne gayi to rita ne use bhi apne sath bitha liya & damad ka lund apne munh se nikal beti ke munh me de diya.shipra ne muskurate hue maa ko dekha & lund chusne lagi.rita damad ke ando ko apne hatho se daba rahi thi.

rita ki nigah shipra ki gol chhatiyo pe padi to vo unhe chhune se khud ko rok nahi payi.shipra maa ke hatho ki chhuan se sihar uthi & lund chuste hue maa ko dekha.rita ne jhijhak bhari muskan ke sath hath peechhe khichna chaha to shipra ne hath vapas apni chhatiyo pe daba diya.ab rita baye hath se pranav ke ande & daye se shipra ki chhatiya dabane lagi.pranav to is waqt khushi se pagal hua ja raha tha.2-2 khubsurat auraten uske kadmo me baithi uski mardangi ki ibadat kar rahi thi.1 mard ke liye is se mastani baat kya ho sakti thi!

shipra ki chhatiyo me dard ho raha tha & uska dil kar raha tha ki koi unhe masle & jum ke chuse.pranav to khada tha to usne maa ki gardan pakad uske munh ko hi apni choochiyo pe daba diya.rita chaunki to zarur magar beti ki hasrat puri karte hue usne uski choochiyo ko munh me bhar zor-2 se chusna shuru kar diya.dono aurato ke liye ye pehla mauka tha jab vo kisi dusri aurat ke jism se yu khel rahi thi & dono ko ehsas hua ki dono ko isme kafi maza aa raha tha.

kuchhd er baad shipra ne maa ke sar ko apne seene se uthaya & uske hotho pe halke se chuma & fir uske munh me apne pati ka lund diya & fir apna munh maa ki bhari-bharkam & thodi si latki magar dilkash chhatiyo se lag

diya.rita ke jism me to jaise bijli ki lehar daud gayi & uske honth pranav ke lund pe & kas gaye.pranav ne aah bhari & rita ne bhi.beti ke choochiya chusne se hi vo jhad gayi thi.

usne lund munh se nikala & use shipra ki taraf modte hue pranav ke ando ko munh me bhar liya & unhe chusne lagi.shipra ne bhi maa ki chhatiya chhod apna munh pranav ke lund se laga diya.pranav ne kaise khud ko jhadne se roka tha ye vohi janta tha.usne apna dhyan in do mastani husnpariyo se thoda bhatkane ke liye fir se sameer & rambha ki baat chhed di,"..magar mom aapko sameer se puchhna chhaiye ki uski shadishuda zindagi me kuchh gadbad to nahi."

"rita ne fir bura sa munh banaya & uske ando ke upar ki tvacha ko aage ke danto me pakad ke halkes e khincha to pranav ki aah nikal gayi,"..fir vahi baat.maine kaha na sameer aajkal meri parvah nahi karta.",maa & beti pranav ki andruni tango & jangho pe hath firate hue uski gand ko bhi masal rahi thi.

"vaise mom,aajkal sameer pranav ki bhi izzat nahi karta.",shipra ne shikayat ki.

"kya?!"

"chhodo shipra.",pranav ne biwi ke munh se lund nikala & dono aurato ko khada kar apne agosh me bhar liya & bari-2 se chumne laga.uske daya hath rita ko thame tha & baya shipra ko.rita ka baya pranav ki kama me tha & daya shipra ki & shipra daye hath se pati ke badan ko pakde thi & baye me maa ki pith.dono ke hotho ka ras pine ke baad pranav ne dono ko bistar pe jane ka ishara kiya.dono auraten bistar pe chadi.dono hi 1 dusre ke jismo ko nihar rahi thi.

"nahi pranav.sameer ka ravaiyya kuchh thik nahi aajkal.ye kya ki bas company ki parvah hai use hum sab ki nahi!",rita ne beti ko baaho me bhar liya to usne maa ki choochiyo me apna chehra dafn kar diya,"..aahhhhh..tu to badi shararati hai!",rita ne apne nipple ko danto se kaatati shipra ke baye gaal pe pyar bhario chapat lagayi & apna hath uski chut pe rakh diya to shipra ne sharata se hanste hue maa ka hath hataya & use palang pe chit lita diya & bijli ki tezi se neeche ho uski tango ko faila uski chut se zuban laga di.

"aahhhhh..!",rita karahi & apni kohniyo pe uchakti hui tange & faila di.shipra ki laplapati jibh uski chut se behte ras ko chaate ja rahi thi.pranav ne dayi banh saas ki gardan ke neeceh lagate hue uski chhatiyo ko dono hatho se dsabate hue unhe chusna shuru kar diya.

"magar rambha ka uski biwi bane rehna bahut zaruri hai.",usne saas ki chhatiyo ko apne hotho ke nishano se dhankne ke baad apne jism ko apne ghutno pe kiya & rita ke munh me apna lund de diya jise vo badi khushi se chusne lagi.uski aankho me damad ki baat sun sawaliya bhav ubhar aaye the,"..vo isiliye ki mujhe lagta hai ki rambha ko company ki malkin banana hum sab ke fayde me hoga.",pranav ne bahut soch samajh ke aaj saas ko apni taraf puri tarah se karne ka faisla kar liya tha.

"oohhhhhhhhh..!",rita uske lund ko chhod bistar pe gir gayi & chhatpatane lagi.shipra ki jibh ne uski chut me udham machake use jhadne pe majbur kar diya tha.kuchh der baad vo sambhli to vo uthi & shipra apne ghutno pe khadi ho gayi & maa-beti 1 dusre ko shiddat se chumne lagi.pranav bijli ki tezi se biwi ke peechhe aaya & uski numaya chut se munh laga diya.

"ow.pranav..kya karte ho!..& us ladki ko humare sar pe bithane ki kya bakwas kar rahe the..oohhhhhhh..mom....aap bhi..!",shipra pranav ki zuban ke chut me ghuste hi ghutno pe khadi ho gayi thi & usi waqt rita ne use baaho me bhar uski chhatiyo se munh laga diya tha & bahut zor-2 se chusne lagi thi.

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kramashah.......