Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:15

जाल पार्ट--66

गतान्क से आगे......

"क्यूकी वो हमारे काबू मे रहेगी.जिस रास्ते समीर चल रहा है,उसपे आगे जाके वो रंभा को किनारे कर किसी & लड़की से शादी करेगा.",रीता ने बेटी की चूचियाँ छ्चोड़ी & उसकी कमर थाम उसे आगे झुका उसके हाथो पे किया & उसकी गंद को सहलाने लगी.

"तुमने कभी मेरी बेटी की गंद मारी है,प्रणव?",उसने बेटी की गंद के छेद को चूमा.

"नही,मोम.",वो सास के बेबाक सवाल से चौंक गया था.

"बहुत ग़लत बात है.मेरी बच्ची की इस खुशी से महरूम रखा है तुमने.",वो अपनी 1 उंगली शिप्रा की गंद मे घुसा तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगी.

"ओईईईईईई..मोम..नहियीईई..बहुत..दा..र्द..होगा.....हाईईईईईईईईईईईईईईईई..!",वो सर उपर झटकती च्चटपटाने लगी.प्रणव जल्दी-2 उसकी चूत चाट रहा था.शिप्रा झाड़ रही थी.रीता ने दामाद को मुस्कुरा के आँखो से इशारा किया & वो फ़ौरन घुटनो पे हो अपना लंड शिप्रा की गीली चूत मे घुसाने लगा.

"उउन्न्ह..हाईईईईईईई..!..तो क्या हुआ?..उस मनहूस की जगह कोई दूसरी ढंग की लड़की आए तो अच्छा ही होगा..आईियययययईए..नाहहिईीईईईईई..प्रनाववववववववव..!",प्रणव ने लंड को कुच्छ धक्को मे चूत के रस से गीला कर शिप्रा की गंद मे डाल दिया था & वो दर्द से कराह उठी थी.रीता ने बेटी के होंठ अपने होंठो मे कस लिए & उसकी चूचिया दबा उसे समझाने लगी.

"बस बेटा..हो गया..शुरू मे दर्द होता है फिर बहुत मज़ा आता है..!"

"तो आप लीजिए ना अपनी गंद मे इसे..हाईईईईईईईईईई..मर गयी मैं तो!..प्रणव तुम्हे देख लूँगी मैं!..ओवववव..",प्रणव ने बीवी की चूत के दाने को हाथ नीचे ले जाके रगड़ना शुरू कर दिया था,"..प्रणव..तुम्हे मोम की गंद भी मारनी होगी..आननह..!",मस्ती मे भीगी आवाज़ मे उसने पति से फरमाइश की.

"हां,मेरी जान ज़रूर."

"चुप बदतमीज़ो.शर्म नही आती मोम के बारे मे ऐसी बातें करते हुए..चलो बताओ कि समीर की दूसरी शादी से क्या नुकसान है हमे?",प्रणव के लंड & उंगली के कमाल से शिप्रा मस्ती मे पागल हो गयी थी & अपनी मस्तानी,आहो भरी आवाज़ मे अपने जिस्म के खुशी मे डूबे होने की बात कर रही थी.

"थॅंक्स मोम,आपकी वजह..से....आननह..आज मुझे..उफफफफफफ्फ़....ये खुशी मिली..आन्न्न्नह..!",वो सर उपर उठाते हुए झाड़ गयी तो प्रणव ने लंड गंद से निकाला & उसकी चूत मे डाल दिया.शिप्रा घुटनो पे खड़ी हो गयी & अपनी बाँह पीछे ले जा पति को थाम लिया.प्रणव ने उसके जिस्म को अपनी बाँहो मे कस लिया & उसकी चूचियाँ दबाते उसके चेहरे & गर्दन को चूमते उसे चोदने लगा.रीता सामने से दोनो के जिस्मो को बाहो मे भर घुटनो पे खड़ी हो गयी & शिप्रा & प्रणव-दोनो के होंठो का बारी-2 से लुत्फ़ उठाने लगी.उसके हाथ दामाद की गंद से लेके बेटी की चूचियो तक घूम रहे थे.

"जहा तक मैं जानता हू..",प्रणव ने रीता को चूमा जोकि शिप्रा की चूत को बाए हाथ से रगड़ते हुए दाए से उसकी चूचियाँ दबा रही थी,"..समीर रंभा को छ्चोड़ कामया से शादी करेगा."

"उउन्न्ह..तो इसमे बुराई क्या है कामया उस लड़की से कही ज़्यादा अच्छी है..ऊव्वववव..!",प्रणव के धक्को ने शिप्रा को मस्ती की कगार से नीचे धकेल दिया था & वो निढाल हो आगे गिरी तो रीता भी लड़खड़ा गयी & बिस्तर पे गिर गयी.प्रणव के लिए भी अब खुद को रोकना मुश्किल था & उसने बहुत ज़ोर से आह भरी & बीवी की कसी गंद की फांको को हाथो मे भींचते हुए अपना गर्म वीर्य उसकी चूत मे छ्चोड़ दिया.शिप्रा मा के उपर गिरी थी & रीता ने भी उसे बाहो मे भर लिया था.दोनो की चूचियाँ दोनो के जिस्मो के बीच आपस मे पिस गयी थी & दोनो 1 दूसरे को बड़ी शिद्दत से चूम रही थी.प्रणव घुटनो पे खड़ा उन्हे देख रहा था.

शिप्रा ने चूमते हुए करवट ली & अपनी मा को अपने उपर ले लिया.रीता का जोश से बुरा हाल था & वो अब बेटी के उपर सवार उसकी छातियों को अपनी चूचियो से पीसती उसकी चूत पे अपनी चूत दबाते हुए उसकी ज़ुबान चूस रही थी.शिप्रा ने आँखो से पति को मा की गंद की तरफ इशारा किया & उसका इशारा समझते हुए प्रणव धीरे से रीता के पीछे आ गया.

"कामया अगर इस घर मे आ गयी तो फिर हम सबका पत्ता तो कटा ही समझिए.",प्रणव ने सिकुदे लंड को थोड़ा हिलाया & फिर आगे झुक सास की गंद मे डाल दिया.

"आईईयइईईई..प्रणव....हाईईईईईईईईईईईईईई..!",लंड गंद के सुराख मे घुसते ही सख़्त होने लगा था & उसकी मोटाई ने रीता की गंद को फैला दिया था.वो दर्द से चीख उठी थी.इस से पहले विजयंत मेहरा ने काई बार उसकी गंद मारी थी मगर प्रणव ने अचानक उसकी नाज़ुक गंद पे हमला कर उसे चौंका दिया था.

"और समीर से तो किसी सहारे की उम्मीद बाकी रही नही है.आप और शिप्रा बस नाम के शेर्होल्डर्स रहेंगे & मैं तो हू ही नौकर ही.",प्रणव ने कमर पकड़ रीता को उपर कर लिया था & वो अब अपने घुटनो & हाथो पे झुकी दामाद से गंद मरवा रही थी.शिप्रा उठ के घुटनो पे खड़ी हो गयी थी & रीता उसकी चूत को जीभ से छेड़ रही थी. प्रणव आगे झुका & अपनी बीवी के होंठ चूमने लगा,"..इसीलिए कह रहा हू कि अगर समीर & रंभा की शादी बरकरार रहे तो हमारे लिए अच्छा है & उस से भी अच्छा होगा अगर रंभा हमारा मोहरा बन कंपनी की मालकिन बन जाए."

"उउम्म्म्मम...हुउन्न्ञणणन्..!",बेटी की चूत मे मुँह घुसाए गंद मरवाती रीता झाड़ रही थी मगर दामाद की बात से उसके कान खड़े हो गये थे.

"उउन्न्ह..मोम..!",उसने झाड़ते हुए मस्ती मे शिप्रा के दाने को हल्के से काट लिया था & वो चिहुनक उठी थी & उस से दूर च्चितक गयी थी.प्रणव ने सास की गंद से लंड निकाला & उसे सीधा किया & उसकी चूत मे लंड घुसा दिया.अब वो घुटनो पे खड़ा सास की टाँगे थामे उसे चोद रहा था.शिप्रा मा के सर के पीछे आई & अपनी चूत उसके मुँह पे लगा आगे झुकी & उसकी चूत के दाने को चाटने लगी.चूत पे दोहरी मार से रीता मस्ती मे पागल हो गयी & शिप्रा की गंद को भींचते,आहे भरते हुए उसकी चूत चाट कमर हिलाने लगी.

"तुम..आहह..क्या कहना चाह रहे हो..प्रा..नाव...खुल के कहो..नाआआआआअ....!..समीर मालिक है कंपनी का..ऊहह..वो कैसे हटेगा?..उउन्न्ह..!",प्रणव ने बीवी को उसकी मा के उपर से उठाया & सास के उपर लेट के उसे चूमते हुए उसकी चूचिया दबाते हुए उसे चोदने लगा.

"कुच्छ सोचना पड़ेगा कोई ऐसा उपाय की समीर को कोई तकलीफ़ भी ना पहुचे & रंभा कंपनी की मालकिन बन जाए.",शिप्रा को दोनो को इस तरह लिपटे देख कुच्छ जलन सी महसूस हुई & उसने प्रणव को मा के उपर से उठा दिया & फिर से मा के मुँह पे अपनी चूत रख के बैठ गयी & अपने पति के उपरी बाज़ू पकड़ उसे आगे खींचा & चूमने लगी.रीता बेटी की हरकत पे मुस्कुराते हुए उसकी चूत चाटने लगी.

"मगर हम ही क्यू नही बन जाते मालिक?..उउफफफफफफफ्फ़..!",शिप्रा मस्ती मे कमर उचकाते हुए पति के सीने पे हसरत भरे हाथ फिराने लगी.उसकी मस्ती अब बहुत बढ़ गयी थी.

"क्यूकी समीर की मौत या उसके कंपनी चलाने के नकबिल होने की सूरत मे सारे शेर्स रंभा के नाम हो जाएँगे इसीलिए वो मामूली सी लड़की हमारे लिए बहुत खास हो गयी है.",प्रणव खुशी मे पागल बीवी की चूचियाँ मसलता सास की चूत मे ज़ोरदार धक्के लगाए जा रहा था.रीता भी उसके धक्को के जवाब मे कमर उचकाती नीचे से बेटी की गुलाबी चूत चाट रही थी & शिप्रा मा की ज़ुबान का लुत्फ़ उठाते हुए पति के हाथो से अपनी चूचिया मसळवती,उसे चूम रही थी.

कमरे मे 3 मस्तानी आहें 1 साथ गूँजी & तीनो वासना मे डूबे जिस्म खेल के अंजाम तक 1 साथ पहुँचे.शिप्रा मा की ज़ुबान से झाड़ आगे अपने पति की बाहो मे झूल रही थी जोकि सास की चूत मे वीर्य की बौच्चरें छ्चोड़े जा रहा था & उस वीर्य और उसे चोदने वाले लंड की रगड़ से बहाल हो रीता दोनो के नीचे झाडे जा रही थी.कुच्छ पॅलो बाद प्रणव बिस्तर के बीच लेटा था & उसकी दाई बाँह मे रीता & बाई मे शिप्रा उस से चिपकी लेटी थी.रीता की दाई & शिप्रा की बाई टांग उसके जिस्म के उपर थी & दोनो उसे चूमे जा रही थी,"तुम्हे जो भी करना है करो,प्रणव..",रीता ने दामाद के होंठो को चूमा,"..अब हम तीनो 1 साथ हैं.",उसने बेटी की ओर देखा तो उसने मा के दाए हाथ को मुस्कुराते हुए थामा & पति को चूम लिया.तीनो वसाना के मस्ताने खेल मे 1 बार फिर डूब गये.

रंभा कार से उतरी & सामने के घर को देखने लगी.देवेन कार पार्क कर रहा था.दोनो अभी-2 सवेरे का नाश्ता कर होटेल छ्चोड़ के निकले थे.1 रात के किराए के साथ-2 देवेन ने अपनी दीवानगी भरी चुदाई के दौरान कमरे की हालत बिगाड़ने का मुआवज़ा भी भरा.सामने का घर ना बहुत बड़ा था ना ही बहुत छ्होटा.लकड़ी के छ्होटे से गेट को खोल देवेन & वो घर के अहाते मे दाखिल हुए.सामने 1 सिल्वर कलर की मारुति ज़ेन खड़ी & उसके दोनो तरफ फूलो की क्यारिया थी.देवेन आगे बढ़ा & घर के बरामदे के दरवाज़े के बाहर लगी घंटी का स्विच दबाया.

"हेलो,देवेन.",घर का दरवाज़ा 1 मोटे,बूढ़े करीबन 60-65 बरस के विदेशी ने खोला.दोनो मर्दो ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया.

"हेलो,डॉक्टर.",देवेन ने रंभा की ओर इशारा किया,"..ये रंभा है,डॉक्टर."

"हेलो,रंभा.",डॉक्टर ने अपना हाथ रंभा की ओर बढ़ाया & उसे तारीफ भरी निगाहो से देखा.रंभा ने फूलों के प्रिंट वाली पीली सारी & स्लीव्ले ब्लाउस पहना था.सारी के झीने कपड़े से उसका गोल पेट & ब्लाउस के गले मे से झँकता क्लेवेज़ तो नुमाया हो ही रहे थे साथ ही उसकी नर्म,गुदाज़ बाहे भी सभी के देखने के लिए खुली थी,"..कैसी हैं आप?"

"हाई..ठीक हू.",उसकी बिल्कुल सॉफ लहजे मे बोली हिन्दुस्तानी सुन रंभा चौंक उठी.उस विदेशी के गोरे चेहरे पे गर्मी की वजह से गुलाबी चकत्ते पड़े हुए थे.लगता था जैसे उसे यहा की गर्मी की आदत नही थी.शक्ल से ही वो बहुत खुशमिजाज़ इंसान लग रहा था,"..आप कैसे हैं?"

"बहुत अच्छा.",उसने रंभा से हाथ मिलाया,"..मेरा नाम यूरी पोपव है.आप मुझे यूरी कह सकती हैं."

"यही हमारे मरीज़ के डॉक्टर हैं,रंभा.",देवेन & डॉक्टर उसके हैरत भर्रे चेहरे को देख हंस रहे थे,"..तुम इनकी हिन्दुस्तानी सुन चौंक गयी हो ना!लो डॉक्टर,1 & देसी तुम्हे देख चौंक गया!",दोनो ने फिर ठहाका लगाया,"..रंभा,ड्र.पोपव रशिया से हैं & हमारे मुल्क मे पिच्छले 20 सालो से रह रहे हैं.इनके घर & इस क्लिनिक..",दोनो घर के ड्रॉयिंग रूम से होते हुए 1 गलियारे से हो घर के पिच्छले हिस्से मे आ गये थे जहा यूरी का क्लिनिक था.दरअसल ये घर का पिच्छला हिस्सा नही सामने का हिस्सा था,"..को देख ये मत सोचना कि ये कोई मामूली डॉक्टर हैं.यूरी इंसान के जिस्म की कोई भी बीमारी ठीक कर सकता है."

"ना!",यूरी ने दोनो को बैठने का इशारा किया & खुद अपनी कुर्सी पे बैठ गया,"..ठीक करना केवल ऑल्माइटी के हाथ मे है.मैं बस बीमारी समझ के ट्राइ कर सकता हू."

"ओके,भाई.चलो अब हमारे मरीज़ के बारे मे बताओ."

"उस से पहले ज़रा मैं मोहतार्मा की थोड़ी खातिर तो कर लू!",यूरी उठा & कमरे से बाहर गया जब वापस आया तो उसके हाथो मे 3 ग्लास & 1 जग था.उसने तीनो के लिए नींबू-पानी धारे & दोनो को 1-1 ग्लास दिया & खुद भी 1 ग्लास ले लिया,"..मैने विजयंत के काफ़ी टेस्ट्स किए.इनके जिस्म मे इनका दिल,हाज़मे के अंग,किड्नी,लिवर वग़ैरह सब बिल्कुल ठीक काम कर रहे हैं.इनका जो भी आक्सिडेंट हुआ उसमे इन अंगो को ना ही कोई नुकसान पहुँचा & ना ही जिस्म की कोई भी हड्डी टूटी..",उसने अपना कंप्यूटर ओन कर स्क्रीन रंभा की ओर किया.

"..पर इनको सर पे चोट लगी है जोकि उस वाइड ने अपनी जड़ी बूटियो से ठीक करने की कोशिश की.उसकी दवा से उपर चमड़ी का घाव तो भर गया लेकिन अन्द्रुनि चोट पे कोई असरा नही हुआ.मैने उसके दिमाग़ के हर तरह के स्कॅन्स किए हैं.अब चोट इतनी भी गहरी नही लगती उन रिपोर्ट्स के मुताबिक की उसे कोई बहुत नुकसान पहुचे मगर इंसानी जिस्म के बारे मे आप कुच्छ कह नही सकते..",वो अपना शरबत पीना तो भूल ही गया था & बस विजयंत के केस के बारे मे बोले जा रहा था.

"..वो बोल सकता है,अपने सारे काम कर सकता है मगर जैसे इस कंप्यूटर की हार्ड डिस्क्स कोई डेलीट कर दे,उसी तरह वो भी सब भूल गया है.सब कुच्छ!"

"तो कोई तरीका नही डॉक्टर,जिस से याददाश्त वापस आए?"

"कंप्यूटर मे डाटा तो रिट्रीव हो सकता है मगर मेडिकल साइन्स ने कोई ऐसी दवा तो ईजाद की नही है लेकिन हा हम कोशिश कर सकते हैं."

"कैसी कोशिश?"

"उस से बातें कीजिए.उसे उसकी पिच्छली ज़िंदगी के बारे मे बताइए.फोटोस दिखाइए,उन जगहो पे ले जाइए जहा वो गया था या जिनसे कुच्छ ज़रूरी यादें जुड़ी हैं."

"ऐसे लोग जिनसे उसकी ज़िंदगी की ज़रूरी यादें जुड़ी हो,उनसे भी तो मिलवा सकते हैं?"

"हां ज़रूर.बस इतना ध्यान रहे की इसके दिमाग़ पे बहुत ज़्यादा ज़ोर ना पड़े वरना हो सकता है की उसके दिमाग़ को झटका लगे & उसे डॅमेज हो जाए."

"हूँ."

"विजयंत!",डॉक्टर ने आवाज़ दी तो अंदर के 1 कमरे से विजयंत बाहर आया.रंभा ने उसे देखा.सलीके से रहने की वजह से अब वो अच्छा लग रहा था मगर उसकी आँखे अभी भी वैसे ही बेनूर थी.

"मैने कल रात तुम्हारा फोन आने पे इसे यूरी के पास छ्चोड़ दिया था.",देवेन उठ खड़ा हुआ था,"ओके,यूरी चलते हैं.थॅंक्स फॉर एवेरतिंग.अरे हां..1 मिनिट.",देवेन बाहर गया & कुच्छ देर बाद वापस आया तो उसके हाथ मे 1 पॅकेट था,"..कार मे छूट गया था.ये लो.अभी-2 मँगवाया है खास तुम्हारे लिए.",यूरी ने पॅकेट खोला & अंदर से निकली असली रशियन वोड्का देख उसकी आँखे चमक उठी.

"बैठी,दोस्त.इसे ख़त्म कर के जाना."

"नही यूरी..",देवेन हंसा,"..आज तो तुम इसे अकेले ही ख़त्म करो या फिर वेरा को बुला लो.",उसने शरारत से कहा तो दोनो दोस्त फिर हंस पड़े.कुच्छ देर बाद देवेन,रंभा & विजयंत देवेन की कार मे बैठे उसके घर जा रहे थे

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क्रमशः.......

JAAL paart--66

gataank se aage......

"kyuki vo huamre kabu me rahegi.jis raste sameer chal raha hai,uspe aage jake vo rambha ko kinare kar kisi & ladki se shadi karega.",rita ne beti ki chhatiya chhodi & uski kamar tham use aage jhuka uske hatho pe kiya & uski gand ko sehlane lagi.

"tumne kabhi meri beti ki gand mari hai,pranav?",usne beti ki gand ke chhed ko chuma.

"nahi,mom.",vo saas ke bebak sawal se chaunk gaya tha.

"bahut galat baat hai.meri bachchi ki is khushi se mehrum rakha hai tumne.",vo apni 1 ungli shipra ki gand me ghusa tezi se andar-bahar karne lagi.

"ouiiiiiiiii..mom..nahiiiiii..bahut..da..rd..hoga.....haiiiiiiiiiiiiiiiii..!",vo sar upar jhatakti chhatpatane lagi.pranav jaldi-2 uski chut chaat raha tha.shipra jhad rahi thi.rita ne damad ko muskura ke aankho se ishara kiya & vo fauran ghutno pe ho apna lund shipra ki gili chut me ghusane laga.

"uunnhhhhh..haiiiiiiii..!..to kya hua?..us manhus ki jagah koi dusri dhang ki ladki aaye to achha hi hoga..AAIIYYYYYEEEEE..NAHHHHHIIIIIIIII..PRANAVVVVVVVVV..!",pranav ne lund ko kuchh dhakko me chut ke ras se gila kar shipra ki gand me daal diya tha & vo dard se karah uthi thi.rita ne beti ke honth apne hotho me kas liye & uski choochiya daba use samjhane lagi.

"bas beta..ho gaya..shuru me dard hota hai fir bahut maza aata hai..!"

"to aap lijiye na apni gand me ise..haiiiiiiiiiii..mar gayi main to!..pranav tumhe dekh lungi main!..ow.",pranav ne biwi ki chut ke dane ko hath neeche le jake ragadna shuru kar diya tha,"..pranav..tumhe mom ki gand bhi marni hogi..aannhhhhhhhh..!",masti me bhigi aavaz me usne pati se farmaish ki.

"haan,meri jaan zarur."

"chup badtamizo.sharm nahi aati mom ke bare me aisi baaten karte hue..chalo batao ki sameer ki dusri shadi se kya nuksan hai hume?",pranav ke lund & ungli ke kamal se shipra masti me pagal ho gayi thi & apni mastani,aaho bhari aavaz me apne jism ke khushi me doobe hone ki baat kar rahi thi.

"thanx mom,aapki vajah..se....aannhhhhh..aaj mujhe..ufffffff....ye khushi mili..aannnnhhhhhhhhh..!",vo sar upar uthate hue jhad gayi to pranav ne lund gand se nikala & uski chut me daal diya.shipra ghutno pe khadi ho gayi & apni banh peechhe le japati ko tham liya.pranav ne uske jism ko apni bahao me kas liya & uski chhatiya dabate uske chehre & gardan ko chumte use chodne laga.rita samne se dono ke jismo ko baaho me bhar ghutno pe khadi ho gayi & shipra & pranav-dono ke hotho ka bari-2 se lutf uthane lagi.ukse hath damad ki gand se leke beti ki choochiyo tak ghum rahe the.

"Jaha tak main janta hu..",Pranav ne Rita ko chuma joki Shipra ki chut ko baye hath se ragadte hue daye se uski chhatiyan daba rahi thi,"..Sameer Rambha ko chhod Kamya se shadi karega."

"uunnhhhhhhhh..to isme burai kya hai kamya us ladki se kahi zyada achhi hai..ooww.!",pranav ke dhakko ne shipra ko masti ki kagar se neeche dhakel diya tha & vo nidhal ho aage giri to rita bhi ladkhada gayi & bistar pe gir gayi.pranav ke liye bhi ab khud ko rokna mushli tha & usne bahut zor se aah bhari & biwi ki kasi gand ki fanko ko hatho me bhinchte hue apna garm virya uski chut me chhod diya.shipra maa ke upar giri thi & rita ne bhi use baaho me bhar liya tha.dono ki chhatiya dono ke jismo ke beech aapas me pis gayi thi & dono 1 dusre ko badi shiddat se chum rahi thi.pranav ghutno pe khada unhe dekh raha tha.

shipra ne chumte hue karwat li & apni maa ko apne upar le liya.rita ka josh se bura haal tha & vo ab beti ke upar sawar uski chhatiyo ko apni choochiyo se peesti uski chut pe apni chut dabate hue uski zuban chus rahi thi.shira ne aankho se pati ko aa ki gand ki taraf ishara kiya & uska ishar samajhte hue pranav dhire se rita ke peechhe aa gaya.

"Kamya agar is ghar me aa gayi to fir hum sabka patta to kata hi samajhiye.",pranav ne sikude lund ko thoda hilaya & fir aage jhuk saas ki gand me daal diya.

"AAIIYYEEEEEEEEE..PRANAV....HAIIIIIIIIIIIIIII..!",lund gand ke surakh me ghuste hi sakht hone laga tha & uski motai ne rita ki gand ko phaila diya tha.vo dard se chikh uthi thi.is se pehle Vijayant Mehra ne kayi baar uski gand mari thi magar pranav ne achanak uski nazuk gand pe humla kar use chaunka diya tha.

"& sameer se to kisi sahare ki umeed baki rahi nahi hai.aap & shipra bas naam ke shareholders rahenge & main to hu hi naukar hi.",pranav ne kamar pakad rita ko upar kar liya tha & vo ab apne ghutno & hatho pe jhuki damad se gand marwa rahi thi.shipra uth ke ghutno pe khadi ho gayi thi & rita uski chut ko jibh se chhed rahi thi.ranav aage jhuka & apni biwi ke honth chumne laga,"..isiliye keh raha hu ki agar sameer & rambha ki shadi barkarar rahe to humare liye achha hai & us se bhi achha hoga agar rambha humara mohra ban company ki malkin ban jaye."

"uummmmm...huunnnnnn..!",beti ki chut me munh ghusaye gand marwati rita jhad rahi thi magar damad ki baat se uske kaan khade ho gaye the.

"uunnhhhhhhhh..mom..!",usne jhadte hue masti me shipra ke dane ko halke se kaat liya tha & vo chihunk uthi thi & us se door chhitak gayi thi.pranav ne saas ki gand se lund nikala & use seedha kiya & uski chut me lund ghusa diya.ab vo ghutno pe khada saas ki tange thame use chod raha tha.shipra maa ke sar ke peechhe aayi & apni chut uske munh pe laga aage jhuki & uski chut ke dane ko chatne lagi.chut pe dohri maar se rita masti me pagal ho gayi & shipra ki gand ko bhinchte,aahe bharte hue uski chut chat kamar hilane lagi.

"tum..aahhhhh..kya kehna chah rahe ho..pra..nav...khul ke kaho..naaaaaaaaaaa....!..sameer malik hai company ka..oohhhhhhhhh..vo kaise hatega?..uunnhhhhhhhh..!",pranav ne biwi ko uski maa ke upar se uthaya & saas ke upar let ke use chumte hue uski choochiya dabate hue use chodne laga.

"kuchh sochna padega koi aisa upay ki sameer ko koi taklif bhi na pahuche & rambha company ki malkin ban jaye.",shipra ko dono ko is tarah lipte dekh kuchh jalan si mehsus hui & usne pranav ko maa ke upar se utha diya & fir se maa ke munh pe apni chut rakh ke baith gayi & apne pati ke upri bazu pakad use aage khincha & chumne lagi.rita beti ki harkat pe muskurate hue uski chut chatne lagi.

"magar hum hi kyu nahi ban jate malik?..uuffffffff..!",shipra masti me kamar uchkate hue pati ke seene pe hasrat bhare hath firane lagi.uski masti ab bahut badh gayi thi.

"kyuki sameer ki maut ya uske company chalane ke nakabil hone ki surat me sare shares rambha ke naam ho jayenge isiliye vo mamuli si ladki humare liye bahut khas ho gayi hai.",pranav khushi me pagal biwi ki choochiyan masalta saas ki chut me zordar dhakke lagaye ja raha tha.rita bhi uske dhakko ke jawab me kamar uchkati neeche se beti ki gulabi chut chaat rahi thi & shipra maa ki zuban ka lutf uthate hue pati ke hatho se apni choochiya masalwati,use chum rahi thi.

kamre me 3 mastani aahen 1 sath gunji & teeno vasna me doobe jism khel ke anjam tak 1 sath pahunche.shipra maa ki zuban se jhad aage apne pati ki baaho me jhul rahi thi joki saas ki chut me virya ki bauchharen chhode ja raha tha & us virya & use chhodne vale lund ki ragad se behaal ho rita dono ke neeche jhade ja rahi thi.kuchh palo baad pranav bistar ke beech leta tha & uski dayi banh me rita & bayi me shipra us se chipki leti thi.rita ki dayi & shipra ki bayi tang uske jism ke upar thi & dono use chume ja rahi thi,"tumhe jo bhi karna hai karo,pranav..",rita ne damad ke hotho ko chuma,"..ab hum teeno 1 sath hain.",usne beti ki or dekha to usne maa ke daye hath ko muskurate hue thama & pati ko chum liya.teeno vsana ke mastane khel me 1 baar fir doob gaye.

Rambha car se utri & samne ke ghar ko dekhne lagi.Deven car park kar raha tha.dono abhi-2 savere ka nashta kar hotel chhod ke nikle the.1 raat ke kiraye ke sath-2 deven ne apni deewangi bhari chudai ke dauran kamre ki halat bigadne ka muawaza bhi bhara.samne ka ghar na bahut bada tha na hi bahut chhota.lakdi ke chhote se gate ko khol deven & vo ghar ke ahate me dakhil hue.samne 1 silver color ki Maruti Zen khadi & uske dono taraf phoolo ki kyariya thi.deven aage badha & ghar ke baramde ke darwaze ke bahar lagi ghanti ka switch dabaya.

"hello,deven.",ghar ka darwaza 1 mote,boodhe kariban 60-65 baras ke videshi ne khola.dono mardo ne garmjoshi se hath milaya.

"hello,doctor.",deven ne rambha ki or ishara kiya,"..ye rambha hai,doctor."

"hello,rambha.",doctor ne apna hath rambha ki or badhaya & use tarif bhari nigaho se dekha.rambha ne phoolon ke print vali pili sari & sleeveless blouse pehna tha.sari ke jhine kapde se uska gol pet & blouse ke gale me se jhankta clevagae to numaya ho hi rahe the sath hi uski narm,gudaz baahe bhi sabhi ke dekhne ke liye khuli thi,"..kaisi hain aap?"

"hi..thik hu.",uski bilkul saaf lehje me boli Hindustani sun rambha chaunk uthi.us videshi ke gore chehre pe garmi ki vajah se gulabi chakatte pade hue the.lagta tha jaise use yaha ki garmi ki aadat nahi thi.shakl se hi vo bahut khushmijaz insan lag raha tha,"..aap kaise hain?"

"bahut achha.",usne rambha se hath milaya,"..mera naam Yuri Popov hai.aap mujhe yuri keh sakti hain."

"yehi huamre mariz ke doctor hain,rambha.",deven & doctor uske hairat bharre chehre ko dekh hans rahe the,"..tum inki hindustani sun chaunk gayi ho na!lo doctor,1 & desi tumhe dekh chaunk gaya!",dono ne fir thahaka lagaya,"..rambha,dr.popov Russia se hain & huamre mulk me pichhle 20 salo se reh rahe hain.inke ghar & is clinic..",dono ghar ke drawing room se hote hue 1 galiyare se ho ghar ke pichhle hisse me aa gaye the jaha yuri ka clinic tha.darasal ye ghar ka pichhla hissa nahi samne ka hissa tha,"..ko dekh ye mat sochna ki ye koi mamuli doctor hain.yuri insan ke jism ki koi bhi bimari thik kar sakta hai."

"na!",yuri ne dono ko baithne ka isha kiya & khud apni kursi pe baith gaya,"..thik karna keval almighty ke hath me hai.main bas bimari samajh ke try kar sakta hu."

"ok,bhai.chalo ab humare mariz ke bare me batao."

"us se pehle zara main mohtarma ki thodi khatir to kar lu!",yuri utha & kamre se bahar gaya jab vapas aaya to uske hatho me 3 glass & 1 jug tha.usne teeno ke liye nimbu-pani dhaare & dono ko 1-1 glass diya & khud bhi 1 glass le liya,"..maine vijayant ke kafi tests kiye.inke jism me inka dil,hazme ke ang,kidney,liver vagairah sab bilkul thik kaam kar rahe hain.inka jo bhi accident hua usme in ango ko na hi koi nuksan pahuncha & na hi jism ki koi bhi haddi tuti..",usne apna computer on kar screen rambha ki or ki.

"..par inko sar pe chot lagi hai joki us vaid ne apni jadi butiyo se thik karne ki koshish ki.uski dawa se upar chamdi ka ghav to bhar gaya lekin andruni chot pe koi asra nahi hua.maine uske dimagh ke har tarah ke scans kiye hain.ab chot itni bhi gehri nahi lagtyi un reports ke mutabik ki use koi bahut nuksan pahuche magar insani jism ke bare me aap kuchh keh nahi sakte..",vo apna sharbat pina to bhul hi gaya tha & bas vijayant ke case ke bare me bole ja raha tha.

"..vo bol sakta hai,apne sare kaam kar sakta hai magar jaise is computer ki hard disks koi delete kar de,usi tarah vo bhi sab bhool gaya hai.sab kuchh!"

"to koi tarika nahi doctor,jis se yaddasht vapas aaye?"

"computer me data to retrieve ho sakta hai magar medical science ne koi aisi dawa to ijad ki nahi hai lekin haa hum koshish kar sakte hain."

"kaisi koshish?"

"us se baaten kijiye.use uski pichhli zindagi ke bare me bataiye.photos dikhaiye,un jagaho pe le jaiye jaha vo gaya tha ya jinse kuchh zaruri yaaden judi hain."

"aise log jinse uski zindagi ki zaruri yaaden judi ho,unse bhi to milwa sakte hain?"

"haan zarur.bas itna dhyan rahe ki iuske dimagh pe bahut zyada zor na pade varna ho sakta hai ki uske dimagh ko jhatka lage & use damage ho jaye."

"hun."

"vijayant!",doctor ne aavaz di to andar ke 1 kamre se vijayant bahar aaya.rambha ne use dekha.salike se rehne ki vajah se ab vo achha lag raha tha magar uski aankhe abhi bhi vaise hi benoor thi.

"maine kal raat tumhara fone aane pe ise yuri ke paas chhod diya tha.",deven uth khada hua tha,"ok,yuri chalte hain.thanx for everything.are haan..1 minute.",deven bahar gaya & kuchh der baad vapas aaya to uske hath me 1 packet tha,"..car me chhut gaya tha.ye lo.abhi-2 mangwaya hai khas tumahre liye.",yuri ne packet khola & andar se nikli asli Russian Vodka dekh uski aankhe chamak uthi.

"baithi,dost.ise khatm kar ke jana."

"nahi yuri..",deven hansa,"..aaj to tum ise akele hi khatm karo ya fir Vera ko bula lo.",usne shararat se kaha to dono dost fir hans pade.kuchh der baad deven,rambha & vijayant deven ki car me baithe uske ghar ja rahe the

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:16

जाल पार्ट--67

गतान्क से आगे......

"ये ड्र.यूरी गोआ मे कब से हैं?",रंभा कार की खिड़की से बाहर के नज़ारे को देख रही थी.कार गोआ के भीड़-भाड़ वाले इलाक़े से बाहर निकल आई थी.

"उस इंसान के बारे मे तुम्हारे दिल मे सवाल पे सवाल मचल रहे हैं.है ना?",देवेन हंसा,"..रंभा,यूरी 1 नुरोसर्जन है.रशिया मे वो क्या करता था मुझे ठीक से नही पता,बस लोगो से कभी-कभार ये सुना है की वो शायद पुराने सोवियट संघ यानी यूयेसेसार की जासूसी एजेन्सी केजीबी मे काम करता था.अब वाहा क्या हुआ कि उसे अपना मुल्क छ्चोड़ यहा आना पड़ा ये मुझे नही पता.बस इतना जानता हू कि,वो 1 कमाल का डॉक्टर है & मैने उसे आज तक किसी के मर्ज़ को नही पकड़ते नही देखा है."

"हूँ.",रंभा ने सर घुमा के विजयंत मेहरा को देखा.वो बस खिड़की से बाहर देखे जा रहा था.उसने रंभा को देखा तो रंभा मुस्कुरा दी मगर उसके चेहरे पे कोई भाव नही आए.रंभा ने सर आगे किया & सामने के रास्ते को देखने लगी.कुच्छ ही देर मे कार देवेन के घर के अहाते मे खड़ी थी.

देवेन का घर कोई बुंगला तो नही था मगर था काफ़ी बड़ा.देवेन ने कार अहाते मे लगा के गेट बंद किया & डिकी से रंभा का समान निकाल घर के अंदर चला गया.उसके पीछे-2 रंभा भी आगे बढ़ी.

आगे बढ़ती रंभा अचानक रुक गयी & पीछे घूम के देखा.विजयंत मेहरा उसका आँचल पकड़े खड़ा था.रंभा घूमी तो आँचल उसके सीने से पूरा हट गया & उसका स्लीव्ले ब्लाउस मे ढँका सीना & गोरा पेट दिखने लगे.रंभा विजयंत के चेहरे को गौर से देख रही थी,उसकी आँखे अब बेजान नही बल्कि उलझन से भरी दिख रही थी.रंभा ने गर्देन घुमाई & देवेन को देखा.उसका समान कमरे मे रख के वापस लौटने के बाद वो भी विजयंत की हरकत देख चौंक गया था.उसने भी रंभा को देखा & हल्के से सर हिलाया जैसे ये कह रहा हो कि उसे भी कुच्छ समझ नही आ रहा था.रंभा ने वापस चेहरा विजयंत की ओर किया & उसकी आँखो मे आँखे डाल दी.उसे ज़रूर कुच्छ याद आया था & तभी उसने उसका आँचल पकड़ा था..शायद रंभा & उसकी पहली रात याद आई थी उसे.ये ख़याल आते ही रंभा के दिमाग़ मे बिजली कौंधी..ड्र.पोपव ने कहा था कि उन्हे विजयंत को बीती बाते याद दिलाने के लिए उसे उन बातो के बारे मे बताना चाहिए..& अगर बताने के बजाय जताया जाए तो!

रंभा ने 1 क़ातिल मुस्कान अपने ससुर की ओर फेंकी & घूमते हुए कमरे मे आगे देवेन की ओर बढ़ने लगी,इस तरह की उसकी सारी खुलती जा रही थी.देवेन अब उसे भी हैरत से देख रहा था कि तभी उसके दिमाग़ मे बिजली कौंधी & उसे अपनी प्रेमिका की हरकत की वजह समझ आ गयी & वो भी मुस्कुराने लगा.रंभा अब अपने दोनो प्रेमियो के बिल्कुल बीच मे खड़ी थी.विजयंत उसे कुच्छ पल देखता रहा & फिर उसके करीब आने लगा.रंभा के करीब पहुँच उसने उसका आँचल छ्चोड़ दिया.वो अपनी बहू के बिल्कुल करीब खड़ा उसकी आँखो मे देख रहा था.अपने चेहरे पे उसकी गर्म साँसे महसूस करते ही रंभा को भी उसके साथ बिताए पॅलो की याद आ गयी & उसका दिल धड़क उठा.अब उसका दिल देवेन का था मगर विजयंत के साथ भी उसने केयी खुशनुमा पल बिताए थे.

विजयंत की आँखे अभी भी उलझन भरी जैसे कुच्छ समझने की कोशिश करती दिख रही थी.वो बहुत धीरे-2 आगे झुक रहा था.रंभा के होंठ खुद बा खुद खुल गये थे.वो समझ गये थे कि विजयंत के लब उनसे मिलने ही वाले थे & अगले ही पल वही हुआ.विजयंत उसके होंठ चूम रहा था & वो उसका पूरा साथ दे रही थी.उसकी आँखे बंद हो गयी & वो बस अपने होंठो पे विजयंत के होंठो की लज़्ज़त महसूस किए जा रही थी.काई पॅलो बाद जब किस तोड़ी & उसने आँखे खोली तो विजयंत को वैसे ही कुच्छ समझने की कोशिश करते उसे देखता पाया.वो कुच्छ करती उस से पहले ही 1 जोड़ी हाथो ने उसकी उपरी बाहे थाम उसे थोड़ा पीच्चे किया & फिर उसके दाए कंधे के उपर से 1 सर आगे झुका & देवेन के होंठ उसके होंठो के रस को पीने लगे.रंभा की आँखे फिर मूंद गयी.घर की दहलीज़ पे कदम रखते हुए उसने सोचा भी नही था कि यहा माहौल ऐसा नशीला हो जाएगा.

“हुन्न्ञन्..!”,उसने देवेन के होंठ छ्चोड़े तो विजयंत ने फिर उसके होंठो को अपने लबो की गिरफ़्त मे ले लिया था.इधर विजयंत उसके गुलाबी होंठो को चूमते हुए उसकी ज़ुबान से ज़ुबान लड़ा रहा था & उधर देवेन उसके बालो को उठा उसकी गर्देन के पिच्छले हिस्से को चूम रहा था.रंभा इतनी सी देर मे ही पूरी तरह से मस्त हो गयी थी विजयंत की जीभ को पूरे जोश से चूस रही थी.देवेन उसकी गर्देन को चूमते हुए नीचे जा रहा था.उसके तपते होंठ रंभा की रीढ़ पे चलते हुए नीचे जा रहे थे.रंभा का जिस्म सिहर रहा था.देवेन उसकी पीठ के बीचोबीच चूमता उसकी कमर तक पहुँच गया था & दोनो तरफ के मांसल हिस्सो को दबाते हुए चूमे जा रहा था.

विजयंत अपने चेहरे को घूमाते हुए उसकी ज़ुबान से खेल रहा था की रंभा ने महसूस किया की देवेन के हाथ उसकी कमर की बगलो से आगे आए & उसके पेट को सहलाते हुए उसकी कमर मे अटकी सारी को खींच दिया.उसी वक़्त विजयंत उसके होंठो को छ्चोड़ उसके गालो & ठुड्डी को चूमने लगा.देवेन उसकी सारी को उसके जिस्म से अलग कर चुक्का था & उसके होंठ अब रंभा की पीठ पे उपर बढ़ने लगे थे.विजयंत उसकी गर्देन चूमता हुआ नीचे आया & ब्लाउस के गले मे से झँकते उसके क्लीवेज को चूमा.रंभा की धड़कने अब बहुत तेज़ हो गयी थी.देवेन उसके ब्लाउस की बॅक से दिखती उसकी पीठ चूम रहा था & विजयंत उसकी चूचियाँ.देवेन थोड़ा & उपर बढ़ा & विजयंत नीचे.थोड़ी ही देर बाद रंभा पीछे हुई & देवेन के चौड़े सीने के सहारे खड़ी हो गयी.देवेन उसकी गुदाज़ बाहो को दबाता हुआ उसके होंठ चूम रहा था & विजयंत उसकी कमर को थामे उसके पेट पे अपनी ज़ुबान फिरा रहा था.

“उउम्म्म्ममम..आन्न्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..!”,रंभा का जिस्म कांप रहा था & उसने देवेन के होंठो से अपने होठ खींच लिए.विजयंत उसकी नाभि की गहराई मे अपनी जीभ उतारे बैठा था & देवेन उसकी गर्दन & दाए कंधे को चूमे जा रहा था.रंभा की शक्ल देख ऐसा लग रहा था कि वो बहुत तकलीफ़ मे है जबकि हक़ीक़त ये थी कि इस वक़्त तो वो खुशियो के आसमान मे उड़ रही थी.वो दोनो प्रेमियो की हर्कतो से पहली बार झाड़ गयी थी.देवेन ने पाने हाथ आगे किए & उसकी कसी छातियो की गोलाईयो पे अपने दोनो हाथो की 1-1 उंगली को चलाने लगा.विजयंत भी उसके पेटिकोट के उपर से उसकी गंद की फांको पे अपनी हथेलिया फिरा रहा था.रंभा ने खुद को दोनो मर्दो को बिल्कुल सौंप दिया था.वो कुच्छ भी नही कर रही थी बस उनकी हर्कतो का लुत्फ़ उठा रही थी.

देवेन के हाथ उसकी चूचियो पे घूमने के बाद उनके बीच आए & उसके ब्लाउस के हुक्स खोल दिए.विजयंत भी उसकी कमर की दाई तरफ लगे पेटिकोट के हुक्स को खोल रहा था.जब देवेन ने उसकी बाहे पीछे करते हुए उसके ब्लाउस को निकाला,तब विजयंत ने भी उसके आख़िरी हुक को खोल उसके पेटिकोट को उसकी कमर से नीचे सरका दिया.अब रंभा पीले लेस की ब्रा & पॅंटी मे थी.विजयंत लेस के झीने कपड़े मे से झँकति अपनी बहू की चूत को देख रहा था & देवेन अपनी महबूबा के कड़े निपल्स को ब्रा मे नुकीले उभार बनाते हुए.रंभा अपने ससुर की गर्म साँसे पॅंटी के जालीदार लेस से होती हुई सीधी अपनी गीली चूत पे महसूस कर रही थी.देवेन उसकी चूचियो के नीचे अपनी हथेलिया जमा उसकी गर्दन & कंधो को चूम रहा था & विजयंत उसकी गंद को दबाते हुए उसकी पॅंटी के वेयैस्टबंड & नाभि के बीच के पेट के हिस्से को.रंभा अब ज़ोर-2 से आहे ले रही थी.

वो बेचैन हो घूमी & अपने पंजो पे थोड़ा उचक के अपने महबूब के होंठो को बड़ी शिद्दत से चूमा.नीचे बैठा विजयंत उसकी इस हरकत पे चौंका मगर अगले ही पल उसके होठ रंभा की चिकनी कमर & पीठ को चखने मे लग गये.रंभा ने अपने बेसब्र हाथो से अपने आशिक़ की कमीज़ के बटन्स खोल उसे उसके जिस्म से जुदा किया & उसके बालो भरे सीने को चूमने लगी.उसके हाथ देवेन की पीठ को उपर से नीचे तक खरोंच रहे थे.देवेन के सीने को जी भर के चूमने के बाद वो फिर घूमी & विजयंत को उपर उठाया & उसकी टी-शर्ट निकाल उसके साथ भी वैसा ही बर्ताव किया.जब वो विजयंत के सीने को चूम रही थी देवेन उसकी पीठ से लेके गंद तक अपने हाथ चला रहा था.

रंभा विजयंत के सीने को चूमते हुए नीचे उसके पेट तक पहुँच गयी थी & उसकी नाभि मे जीभ घुसा उसे मस्त करते हुए उसने उसकी जीन्स उतार दी & फिर उसके अंडरवेर के उपर से ही उसके लंड को चूम लिया.देवेन के दिल मे जलन की लहर दौड़ गयी.उसका दिल किया कि इसी वक़्त रंभा को खींच विजयंत से अलग करे & अपने कमरे मे ले जाए.उसने अपना सर झटका..वो जो भी कर रही थी उस शख्स की याददाश्त लौटाने की गरज से कर रही थी..आख़िर वो उसकी बहू के अलावा उसकी प्रेमिका भी रही थी..& अगर वो उस इरादे से नही बल्कि अपनी वासना के चलते भी ऐसा कर रही थी तो भी उसके दिल मे इस जलन के पैदा होने का कोई मतलब नही था..जब रंभा की मर्ज़ी ही यही थी तो वो क्या कर सकता था!..,”..आहह..!”,अपने लंड पे 1 गीला & गर्म एहसास होते ही वो चौंक उठा & अपने ख़यालो से बाहर आ नीचे देखा.

जब तक वो सोच मे डूबा था तब तक रंभा ने विजयंत के अंडरवेर को उतार उसे पूरा नंगा कर दिया था & उसके लंड & आंडो को जम के चूसा था.मगर इस सब के दौरान वो देवेन को भूली नही थी & पंजो पे बैठे हुए ही उसने घूम के उसकी पतलून की ज़िप नीचे कर उसके अंडरवेर मे सेउसके खड़े लंड को निकाल अपने मुँह मे भर लिया था.उसके दाए हाथ मे विजयंत का लंड था जिसे वो हिला रही थी & बाए मे देवेन के अंडे.देवेन ने उसके सर को पकड़ उसकी निगाहो से निगाहें मिलाई & रंभा उसके दिल का हाल समझ गयी.उसने लंड को हलक तक उतार लिया & देवेन को मस्ती मे पागल कर दिया.देवेन अपने उपर काबू खोने ही वाला था कि किसी तरह उसने लंड को बाहर खींचा & फ़ौरन उसे उपर उठाया.

“अच्छा नही लगा..-“,उसने देवेन को बाहो मे भर अपनी चूचियो को उसके सीने से दबाते हुए आगे बढ़ने की इजाज़त माँगनी ही चाही थी कि देवेन ने उसके होंठो को अपने होंठो से बंद कर उसे सवाल करने से रोक दिया.

“माफ़ करना,जान..”,उसने उसकी ब्रा के हुक्स खोले तो रंभा ने अपनी बाहे उसके जिस्म से अलग कर ब्रा को उतार दिया,”..पर क्या करू?..मर्द हू ना..अपनी महबूबा को दूसरे के साथ देख के जलन तो होगी ही.पर मेरी छ्चोड़ो & वोही करो जो तुम्हारा दिल कहता है.”,रंभा आगे बढ़ी & उसे बाहो मे कस लिया & उसे पागलो की तरह चूमने लगी..बस जल्द से जल्द ये उलझने सुलझे & फिर वो इस शख्स के साथ सारी ज़िंदगी यू ही उसकी बाहो मे बिताएगी!

“उउन्न्ह..ऊव्वववववव..!”,देवेन आगे झुक उसकी चूचिया चूस रहा था & अपने हाथो से उन मस्त उभारो को दबा रहा था.रंभा मस्ती मे आहे भर रही थी की उसे अपनी गंद पे कुच्छ महसूस हुआ.उसने गर्देन पीछे घुमाई तो देखा कि विजयंत उसकी पॅंटी उतार उसकी गंद चूम रहा था..इसे कुच्छ याद आ रहा था या बस इसके अंदर का मर्द जगा था?..मगर उसने उसका आँचल पकड़ के रोका था..यानी की उसे उनकी पहली रात की कुच्छ तो याद आई थी..अब देखना था कि इस खेल का उसपे क्या असर होता था.

विजयंत उसकी कमर को जकड़े उसकी मोटी गंद को चूमे जा रहा था.उसकी ज़ुबान रंभा के गंद के छेद से लेके गीली चूत तक घूम रही थी.रंभा ने आहे भरते हुए अपना सर पीछे कर लिया & देवेन के सर को जाकड़ अपने सीने पे और दबा दिया.देवेन उसकी चूचियो को मुँह मे भरे जा रहा था.रंभा का जिस्म दोनो मर्दो की हर्कतो से जोश मे पागल हो गया था.उसने अपने जिस्म को दोनो की बाहो मे बिल्कुल ढीला छ्चोड़ दिया था.देवेन की ज़ुबान उसके निपल्स को छेड़ रही थी & विजयंत की ज़ुबान उसके दाने को.रंभा की चूत मे फिर वही तनाव पैदा हो गया था जिसके चरम पे पहुचने के बाद वोही अनोखी खुशी मिलती थी.उसने बाए हाथ से देवेन के बालो को नोचते हुए उसके सर को अपनी चूचियो पे दबाते हुए चूमा & दाए को नीचे ले जाके पीछे की ओर किया & विजयंत के सर को अपनी गंद पे ऐसे दबाया की उसकी ज़ुबान चूत मे और अंदर घुसा गयी.

"आननह..!",उसने सर झटका & ज़ोर से करही.वो दोबारे झाड़ रही थी.कुच्छ पल वो वैसे ही अपने जिस्म को अपने दोनो प्रेमियो की बाहो के सहारे छ्चोड़ खड़ी रही.उसके बाद जब समभली तो उसने विजयंत के बाल पकड़ उसे उठाया & उसे सामने ला देवेन के बाई तरफ खड़ा किया & दोनो को धकेलने लगी.दोनो पीछे हुए तो उसने दोनो को हॉल मे रखे बड़े सोफे पे बिठा दिया.बाया हाथ देवेन के सीने & दाया विजयंत के सीने पे दबाते हुए वो आगे झुकी & पहले देवेन & फिर विजयंत के होंठो को चूमा.दोनो ने उसे पकड़ के सोफे पे अपने बीच गिराने की कोशिश की मगर उसने उनकी कोशिश नाकाम कर दी & सोफे के पीछे चली गयी.

रंभा ने अपना दाया हाथ देवेन के सीने पे रखा & बाया विजयंत मेहरा के सीने पे & उनके सीने के बालो से खेलते हुए सोफे की बॅक के उपर से इस तरह से झुकी उसकी छातियो दोनो मर्दो के बीच लटक गयी.दोनो ने फ़ौरन अपने-2 मुँह उसकी छातियो से लगा दिए.देवेन उसकी दाई चूची चूस रहा था & विजयंत बाई.रंभा ने अपने ससुर को देखा,उसकी हरकतें तो पूरी जोश से भरी हुई थी मगर अभी भी उसके चेहरे पे पुराने भाव नही आए थे.उसके हाथ दोनो मर्दो के सीनो से होते हुए नीचे गये & उनके लंड से खेलने लगे.

दोनो मर्दो ने भी अपना 1-1 हाथ पीछे ले जाके उसकी गंद की 1-1 फाँक को दबोच लिए & मुँह से उसकी चूचियो को & हाथो से गंद को मसलने लगे.रंभा मुस्कुराती हुई आहे बढ़ने लगी.इस मस्ताने खेल मे अब उसे बहुत मज़ा आ रहा था.तभी विजयंत ने उसे चौंका दिया.उसने उसकी चूची से मुँह हटाते हुए उसके जिस्म को पकड़ उसे सोफे की बॅक के उपर से आगे खींचा.रंभा अचानक की गयी इस हरकत से समभाल नही पाई & आगे गिर गयी.उसका मुँह सीधा विजयंत की गोद मे उसके लंड से जा टकराया.विजयंत ने उसकी कमर को पकड़ा & उसकी गंद की दरार मे जीभ फिराते हुए उसकी गंद की छेद मे उंगली अंदर-बाहर करने लगा.देवेन उसे गौर से देख रहा था.शुरू मे उसे लगा था कि विजयंत को सब याद है & वो बस भूलने का नाटक कर रहा है मगर अभी की थोड़ी जुंगलिपने वाली हरकत ने उसकी सोच को ग़लत साबित कर दिया था.रंभा भी हैरत से बाहर आ गयी थी & विजयंत के लंड को चूसने लगी थी.विजयंत ने उसकी कमर को अपनी तरफ किया & उसकी दोनो टाँगो के बीच मुँह घुसा उसकी चूत चाटते हुए उसकी गंद मे उंगली करता रहा.देवेन से यू अलग-थलग रहना बर्दाश्त नही हुआ & फिर वो उसकी महबूबा थी,विजयंत की नही!

उसने फ़ौरन रंभा की बाहे पकड़ उसे खींचा तो उसके मुँह से विजयंत का लंड निकल गया.रंभा मुस्कुराइ & जैसे ही देवेन ने उसके सर को अपनी ओर किया उसने सर झुका के उसके लंड को मुँह मे भर लिया/देवेन आहे भरता उसकी मखमली पीठ और कमर पे अपने बेसब्र हाथ चलाने लगा.अब उस से बर्दाश्त नही हो रहा था.उसे अब रंभा के जिस्म से मिलना ही था.उसने उसके सर को अपनी गोद से उठाया & उसके कंधे पकड़ के खींचा तो विजयंत के मुँह से रंभा की चूत अलग हो गयी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--67

gataank se aage......

"Ye Dr.Yuri Goa me kab se hain?",Rambha car ki khidki se bahar ke nazare ko dekh rahi thi.car Goa ke bhid-bhad vale ilake se bahar nikal aayi thi.

"us insan ke bare me tumhare dil me sawal pe sawal machal rahe hain.hai na?",Deven hansa,"..rambha,yuri 1 neurosurgeon hai.Russia me vo kya karta tha mujhe thik se nahi pata,bas logo se kabhi-kabhar ye suna hai ki vo shayad purane Soviet Sangh yani USSR ki jasoosi agency KGB me kaam karta tha.ab vaha kya hua ki use apna mulk chhod yaha aana pada ye mujhe nahi pata.bas itna janta hu ki,vo 1 kamal ka doctor hai & maine use aaj tak kisi ke marz ko nahi pakadte nahi dekha hai."

"hun.",rambha ne sar ghuma ke Vijayant Mehra ko dekha.vo bas khidki se bahar dekhe ja raha tha.usne rambha ko dekha to rambha muskura di magar uske chehre pe koi bhav nahi aaye.rambha ne sar aage kiya & samne ke raste ko dekhne lagi.kuchh hi der me car deven ke ghar ke ahate me khadi thi.

deven ka ghar koi bungla to nahi tha magar tha kafi bada.deven ne car ahate me laga ke gate band kiya & dicky se rambha ka saman nikal ghar ke andar chala gaya.uske peechhe-2 rambha bhi aage badhi.

Aage badhti Rambha achanak ruk gayi & peechhe ghum ke dekha.Vijayant Mehra uska aanchal pakde khada tha.rambha ghumi to aanchal uske seene se pura hat gaya & uska sleeveless blouse me dhanka seena & gora pet dikhne lage.rambha vijayant ke chehre ko gaur se dekh rahi thi,uski aankhe ab bejan nahi balki uljhan se bhari dikh rahi thi.rambha ne garden ghumayi & Deven ko dekha.uska saman kamre me rakh ke vapas lautne ke baad vo bhi vijayant ki harkat dekh chaunk gaya tha.usne bhi rambha ko dekha & halke se sar hilaya jaise ye keh raha ho ki use bhi kuchh samajh nahi aa raha tha.rambha ne vapas chehra vijayant ki or kiya & uski aankho me aankhe daal di.use zaroor kuchh yaad aaya tha & tabhi usne uska aanchal pakda tha..shayad rambha & uski pehli raat yaad aayi thi use.ye khayal aate hi rambha ke dimagh me bijli kaundhi..Dr.Popov ne kaha tha ki unhe vijayant ko beeti baate yaad dilane ke liye use un baato ke bare me batana chahiye..& agar batane ke bajay jataya jaye to!

Rambha ne 1 qatil muskan apne sasur ki or fenki & ghumte hue kamre me aage deven ki or badhne lagi,is tarah ki uski sari khulti ja rahi thi.deven ab use bhi hairat se dekh raha tha ki tabhi uske dimagh me bijli kaundhi & use apni premika ki harkat ki vajah samajh aa gayi & vo bhi muskurane laga.rambha ab apne dono premiyo ke bilkul beech me khadi thi.vijayant use kuchh pal dekhta raha & fir uske karib aane laga.rambha ke karib pahunch usne uska aanchal chhod diya.vo apni bahu ke bilkul karib khada uski aankho me dekh raha tha.apne chehre pe uski garm sanse mehsus karte hi rambha ko bhi uske sath bitaye palo ki yaad aa gayi & uska dil dhadak utha.ab uska dil deven ka tha magar vijayant ke sath bhi usne kayi khushnuma pal bitaye the.

Vijayant ki aankhe abhi bhi uljhan bhari jaise kuchh samajhne ki koshish karti dikh rahi thi.vo bahut dhire-2 aage jhuk raha tha.rambha ke honth khud ba khud khul gaye the.vo samajh gaye the ki vijayant ke lab unse milne hi vale the & agle hi pal vahi hua.vijayant uske honth chum raha tha & vo uska pura sath de rahi thi.uski aankhe band ho gayi & vo bas apne hotho pe vijayant ke hotho ki lazzat mehsus kiye ja rahi thi.kayi palo baad jab kiss todi & usne aankhe kholi to vijayant ko vaise hi kuchh samajhne ki koshish karte use dekhta paya.vo kuchh karti us se pehle hi 1 jodi hatho ne uski upri baahe tham use pthoda peechhe kiya & fir uske daye kandhe ke upar se 1 sar aage jhuka & deven ke honth uske hotho k eras ko pine lage.rambha ki aankhe fir mund gayi.ghar ki dehleez pe kadam rakhte hue usne socha bhi nahi tha ki yaha mahaul aisa nashila ho jayega.

“hunnnn..!”,usne deven ke honth chhode to vijayant ne fir uske hontho ko apne labo ki giraft me le liya tha.idhar vijayant uske gulabi hotho ko chumte hue uski zuban se zuban lada raha tha & udhar deven uske baalo ko utha uski garden ke pichhle hisse ko chum raha tha.rambha itni si der me hi puri tarah se mast ho gayi thi vijayant ki jibh ko pure josh se chus rahi thi.deven uski garden ko chumte hue neeche ja raha tha.uske tapte honth rambha ki ridh pe chalte hue neeche ja rahe the.rambha ka jism sihar raha tha.deven uski pith ke beechobeech chumta uski kamar tak pahunch gaya tha & dono taraf ke mansal hisso ko dabate hue chume ja raha tha.

Vijayant apne chehre ko ghumata hue uski zuban se kehl raha tha ki rambha ne mehsus kiya ki deven ke hath uski kamar ki baglo se aage aaye & uske pet ko sehlate hue uski kamar me atki sari ko khinch diya.usi waqt vijayant uske hotho ko chhod uske galo & thuddi ko chumne laga.deven uski sari ko uske jism se alag kar chukka tha & uske honth ab rambha ki pith pe upar badhne lage the.vijayant uski garden chumta hua neeche aaya & blouse ke gale me se jhankte uske cleavage ko chuma.rambha ki dhadkane ab bahut tez ho gayi thi.deven uske blouse ki back se dikhti uski pith chum raha tha & vijayant uski chhatiyan.deven thoda & upar badha & vijayant neeche.thodi hi der baad rambha peechhe hui & deven ke chaude seene ke sahare khadi ho gayi.deven uski gudaz baaho ko dabata hua uske honth chum raha tha & vijayant uski kamar ko thame uske pet pe apni zuban fira raha tha.

“uummmmmm..aanngghhhhhhhhhh..!”,rambha ka jism kanp raha tha & usne deven ke hotho se apne hoth khinch liye.vijayant uski nabhi ki gehrayi me apni jibh utare baitha tha & deven uski gardan & daye kandhe ko chume ja raha tha.rambha ki shakl dekh aisa lag raha tha ki vo bahut taklif me hai jabki haqeeqat ye thi ki is waqt to vo khushiyo ke aasman me ud rahi thi.vo dono premiyo ki harkato se pehli baar jhad gayi thi.deven ne pane hath aage kiye & uski kasi chhatiyo ki golaiyo pe apne dono hatho ki 1-1 ungli ko chalane laga.vijayant bhi uske petticoat ke upar se uski gand ki fanko pe apni hatheliya fira raha tha.rambha ne khud ko dono mardo ko bilkul saunp diya tha.vo kuchh bhi nahi kar rahi thi bas unki harkato ka lutf utha rahi thi.

Deven ke hath uski chhatiyo pe ghumne ke baad unke beech aaye & uske blouse ke hooks khol diye.vijayant bhi uski kamar ki dayi taraf lage petticoat ke hooks ko khol raha tha.jab deven ne uski baahe peechhe karte hue uske blouse ko nikala,tab vijayant ne bhi uske aakhiri hook ko khol uske petticoat ko uski kamar se neeche sarka diya.ab rambha pile lace ki bra & panty me thi.vijayant lace ke jhine kapde me se jhankti apni bahu ki chut ko dekh raha tha & deven apni mehbooba ke kade nipples ko bra me nukile ubhar banate hue.rambha apne sasur ki garm sanse panty ke jalidar lace se hoti hui seedhi apni gili chut pe mehsus kar rahi thi.deven uski chhatiyo ke neeche apni hatheliya jama uski gardan & kandho ko chum raha tha & vijayant uski gand ko dabate hue uski panty ke waistband & nabhi ke beech ke pet ke hisse ko.rambha ab zor-2 se aahe le rahi thi.

Vo bechain ho ghumi & apne panjo pe thoda uchak ke apne mehboob ke hotho ko badi shiddat se chuma.neeche baitha vijayant uski is harkat pe chaunka magar agle hi pal uske hoth rambha ki chikni kamar & pith ko chakhne me lag gaye.rambha ne apne besabr hatho se apne aashiq ki kamiz ke buttons khol use uske jism se juda kiya & uske baalo bhare seene ko chumne lagi.uske hath deven ki pith ko upar se neeche tak kharonch rahe the.deven ke seene ko ji bhar ke chumne ke baad vo fir ghumi & vijayant ko upar uthaya & uski t-shirt nikal uske sath bhi vaisa hi bartav kiya.jab vo vijayant ke seene ko chum rahi thi deven uski pith se leke gand tak apne hath chala raha tha.

Rambha vijayant ke seene ko chumte hue neeche uske pet tak pahunch gayi thi & uski nabhi me jibh ghusa use mast karte hue usne uski jeans utar di & fir uske underwear ke upar se hi uske lund ko chum liya.deven ke dil me jalan ki lehar daud gayi.uska dil kiya ki isi waqt rambha ko khinch vijayant se laga kare & apne kamre me le jaye.usne apna sar jhatka..vo job hi kar rahi thi us shakhs ki yaddasht lautaane ki garaj se kar rahi thi..aakhir vo uski bahu ke alawa uski premika bhi rahi thi..& agar vo us irade se nahi balki apni vasna ke chalet bhi aisa kar rahi thi to bhi uske dil me is jalan ke paida hone ka koi matlab nahi tha..jab rambha ki marzi hi yehi thi to vo kya kar sakta tha!..,”..aahhhhh..!”,apne lund pe 1 gila & garm ehsas hote hi vo chaunk utha & apne khayalo se bahar aa neeche dekha.

Jab tak vo soch me dooba tha tab tak rambha ne vijayant ke underwear ko utar use pura nanga kar diya tha & uske lund & ando ko jum ke chusa tha.magar is sab ke dauran vo deven ko bhooli nahi thi & panjo pe baithe hue hi usne ghum ke uski patlun ki zip neeche kar uske underwear me seuske khade lund ko nikal apne munh me bhar liya tha.uske daye hath me vijayant ka lund tha jise vo hila rahi thi & baye me deven ke ande.deven ne uske sar ko pakad uski nigaho se nigahen milayi & rambha uske dil ka haal samajh gayi.usne lund ko halak tak utar liya & deven ko masti me pagal kar diya.deven apne upar kabu khone hi vala tha ki kisi tarah usne lund ko bahar khincha & fauran use upar uthaya.

“achha nahi lag..-“,usne deven ko baaho me bhar apni choochiyo ko uske seene se dabate hue aage badhne ki ijazat mangni hi chahi thi ki deven ne uske hotho ko apne hotho se band kar use sawal karne se rok diya.

“maaf karna,jaan..”,usne uski bra ke hooks khole to rambha ne apni baahe uske jism se alag kar bra ko utar diya,”..par kya karu?..mard hu na..apni mehbooba ko dusre ke sath dekh ke jalan to hogi hi.par meri chhodo & vohi karo jo tumhara dil kehta hai.”,rambha aage badhi & use baaho me kas liya & use paglo ki tarah chumne lagi..bas jald se jald ye uljhane suljhe & fir vo is shakhs ke sath sari zindagi yu hi uski baaho me bitayegi!

“uunnhhhhhh..oowwww.!”,deven aage jhuk uski choochiya chus raha tha & apne hatho se un mast ubharo ko daba raha tha.rambha masti me aahe bhar rahi thi ki use apni gand pe kuchh mehsus hua.usne garden peechhe ghumayi to dekha ki vijayant uski panty utar uski gand chum raha tha..ise kuchh yaad aa raha tha ya bas iske andar ka mard jaga tha?..magar usne uska aanchal pakad ke roka tha..yani ki use unki pehli raat ki kuchh to yaad aayi thi..ab dekhna tha ki is khel ka uspe kya asar hota tha.

vijayant uski kamar ko jakde uski moti gand ko chume ja raha tha.uski zuban rambha ke gand ke chhed se leke gili chut tak ghum rahi thi.rambha ne aahe bharte hue apna sar peechhe kar liya & deven ke sar ko jakad apne seene pe & daba diya.deven uski chhatiyo ko munh me bhare ja raha tha.rambha ka jism dono mardo ki harkato se josh me pagal ho gaya tha.usne apne jism ko dono ki baaho me bilkul dhila chhod diya tha.deven ki zuban uske nipples ko chhed rahi thi & vijayant ki zuban uske dane ko.rambha ki chut me fir vahi tanav paida ho gaya tha jiske charam pe pahuchane ke baad vohi anokhio khushi milti thi.usne baye haths e deven ke baalo ko nochte hue uske sar ko apni choochiyo pe dabate hue chuma & daye ko neeche le jake peechhe ki or kiya & vijayant ke sar ko apnmi gand pe aise dabaya ki uski zuban chut me & andar ghusa gayi.

"aannhhhhhh..!",usne sar jhatka & zor se karahi.vo dobare jhad rahi thi.kuchh pal vo vaise hi apne jism ko apne dono premiyo ki baaho ke sahare chhod khadi rahi.uske baad jab samabhli to usne vijayant ke baal pakad use uthaya & use samne la deven ke bayi taraf khada kiya & dono ko dhakelne lagi.dono peechhe hue to usne dono ko hall me rakhe bade sofe pe bitha diya.baya hath deven ke seene & daya vijayant ke seene pe dabate hue vo aage jhuki & pehle deven & fir vijayant ke hotho ko chuma.dono ne use pakad ke sofe pe apne beech girane ki koshsih ki magar usne unki koshish nakaam kar di & sofe ke peechhe chali gayi.

Rambha ne apna daya hath Deven ke seene pe rakha & baya Vijayant Mehra ke seene pe & unke seene ke balo se khelte hue sofe ki back ke upar se is tarah se jhuki uski chhatiya dono mardo ke beech latak gayi.dono ne fauran apne-2 munh uski chhatiyo se laga diye.deven uski dayi choochi chus raha tha & vijayant bayi.rambha ne apne sasur ko dekha,suki harkaten to puri josh se bhari hui thi magar abhi bhi uske chehre pe purane bhav nahi aaye the.uske hath dono mardo ke seeno se hote hue neeche gaye & unke lundo se khelne lage.

dono mardo ne bhi apna 1-1 hath peechhe le jake uski gand ki 1-1 fank ko daboch liye & munh se uski choochiyo ko & hatho se gand ko maslane lage.rambha muskurati hui aahe bahrne lagi.is mastane khel me ab use bahut maza aa raha tha.tabhi vijayant ne use chaunka diya.usne uski choochi se munh hatate hue uske jism ko pakad use sofe ki back ke upar se aage khincha.rambha achanak ki gayi is harkat se samabhal nahi payi & aage gir gayi.uska munh seedha vijayant ki god me uske lund se ja takraya.vijayant ne uski kamar ko pakda & uski gand ki darar me jibh firate hue uski gand ki chhed me ungli andar-bahar karne laga.deven use gaur se dekh raha tha.shuru me use laga tha ki vijayant ko sab yaad hai & vo bas bhulne ka natak kar raha hai magar abhi ki thodi junglipane vali harkat ne uski soch ko galat sabit kar diya tha.rambha bhi hairat se bahar aa gayi thi & vijayant ke lund ko chusne lagi thi.vijayant ne uski kamar ko apni taraf kiya & uski dono tango ke beech munh ghusa uski chut chatate hue uski gand me ungli karta raha.deven se yu alag-thalag rehna bardasht nahi hua & fir vo uski mehbooba thi,vijayant ki nahi!

usne fauran rambha ki baahe pakad use khincha to uske munh se vijayant ka lund nikal gaya.rambha muskurayi & jaise hi deven ne uske sar ko apni or kiya usne sar jhuka ke uske lund ko munh me bhar liya/deven aahe bharta uski makihmali pith & kara pe apne besabr hath chalane laga.ab us se bardasht nahi ho raha tha.use ab rambha ke jism se milna hi tha.usne uske sar ko apni god se uthaya & uske kandhe pakad ke khincha to vijayant ke munh se rambha ki chut alag ho gayi.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:16

जाल पार्ट--68

गतान्क से आगे......

देवेन ने उसकी कमर थाम उसे अपनी गोद मे अपने लंड पे बिठाया तो रंभा ने भी दाया हाथ पीछे ले जा उसके लंड को थाम उसे अपनी चूत का रास्ता दिखाया.रंभा उसके कंधो पे कोहनिया टीका उसे चूमते हुए उसके लंड पे कूदने लगी.देवेन भी उसकी कमर के मांसल हिस्सो को दबाते हुए,उसकी पीठ को जकड़ते हुए उसकी किस का जवाब दे रहा था.उसने रंभा की गर्दन को जम के चूम & फिर अपने होंठ उसकी चूचियो से लगा दिए.

"एयेयीयैआइयीईयेयीईयी..!",रंभा चीखी तो देवेन ने भी चौंक के उसके सीने से सर उठाया.कब विजयंत सोफे से उठ रंभा के पीछे आ गया था & उसकी गंद मे अपना लंड घुसा दिया था उसे पता ही नही चला था.देवेन की आँखो मे गुस्सा उतर आया & वो विजयंत को परे धकेलने ही वाला था कि रंभा ने आँखो से इशारा कर उसे रोका & उसे चूमा.विजयंत आधा लंड अंदर घुसा बहुत धीरे-2 उसकी गंद मार रहा था.रंभा ने अपने दाए कंधे के उपर से गर्दन घुमाई तो वो आगे झुका & उसके होंठ चूमने लगा.

"उउंम..मैं कौन हू,डॅड..आपको याद है?",रंभा ने दाई बाँह उसकी गर्दन मे डाल दी.वो मस्ती मे पागल हो गयी थी.विजयंत ने उसके होंठो को छ्चोड़ा & उसे देखने लगा जैसे याद करने की कोशिश कर रहा हो कि वो कौन है.उसके माथे पे शिकन पड़ती जा रही थी & रंभा को लगा कि कही वो दिमाग़ पे ज़्यादा ज़ोर ना डाल ले & उसने दोबारा उसके सर को नीचे झुका उसके होंठो को चूम लिया.विजयंत & देवेन दोनो ही उसकी चूचियाँ मसल रहे थे & जब 1 उसके होंठ छ्चोड़ता तो दूसरा चूमने लगता.

"आननह..!",रंभा फिर चीखी.विजयंत ने लंड & अंदर धकेल दिया था.इतनी अंदर तक उसकी गंद मे कुच्छ भी नही घुसा था & उसे दर्द हो रहा था.उसकी कमर थामे विजयंत हल्के-2 उसकी गंद मार रहा था & वो चूत मे घुसे देवेन के लंड पे उच्छल रही थी.उसकी आँखे बंद हो गयी थी & जिस्म मे जैसे जान ही नही थी बस मस्ती ही मस्ती थी.वो झाडे जा रही थी मगर दोनो मर्द रुकने का नाम ही नही ले रहे थे.देवेन ने उसके सीने के उभारो को छूने के बाद सर उठाया तो महबूबा की हालत समझ गया.

"विजयंत,रूको.",उसने बड़ी सायंत मगर हुक्म देती आवाज़ मे विजयंत से कहा.विजयंत रुक गया,"..लंड बाहर खिँचो.",उसने वैसा ही किया.रंभा आश्चर्य से देख रही थी.दुनिया भर को हुक्म देने वाला विजयंत देवेन के हुक्म कैसे मान रहा था!देवेन ने रंभा की कमर को बाहो मे जकड़ा & उसे थाम के खड़ा हुआ & फिर सोफे पे लिटा के उसके उपर आ उसे चूमते हुए चोदने लगा.विजयंत दोनो को खड़ा देख रहा था.

"उउंम..ऊव्ववव..",देवेन का लंड उसकी कोख पे चोट कर रहा था & वो मस्ती मे उसकी पीठ नोच रही थी,"..सुनिए..बुरा मत मानिए प्लीज़..पर इन्हे आने दीजिए ना!..मुझे लगता है इन्हे इस से...आहह..कुच्छ याद आ जाए..उउन्न्ह..!",विजयंत के लंड ने उसे कगार के उपर से धकेल दिया था & वो फिर मस्ती की खुमारी मे खो गयी थी.

देवेन का दिल तो नही कर रहा था मगर रंभा की बात सही थी लेकिन उसने सोच लिया था कि इस बार वो उसे उसके जिस्म के साथ जुंगली पने से नही खेलने देगा.उसने रंभा को दाई करवट पे घुमाया & उसके पीछे आया & बाई बाँह उसकी कमर पे डाल उसके पेट को सहलाते हुए उसकी गर्दन चूमने लगा.वो भी बाया हाथ पीछे ले जा मुस्कुराते हुए उसके बालो से खेलने लगी.देवेन उसकी गर्दन चूमते हुए उसकी पीठ पे आया & उसे पेट के बल लिटा उसकी चिकनी पीठ को अपने होंठो से तपाने लगा.रंभा सोफे मे मुँह च्चिपाए चिहुनक रही थी.देवेन उसकी पीठ चूमते हुए नीचे उसकी गंद तक आया & उसकी फांको को फैला उसकी गंद के छेद को चूमने लगा.रंभा उसका इरादा भाँप गयी,"..उउन्न्ह..नही..वाहा बहुत दर्द होता है..ऊहह..!",देवेन अपनी उंगली से उसकी गंद मारने लगा था.रंभा आहे भरती अपनी कमर उचका रही थी.

"आननह..!",देवेन ने उसकी कमर थाम उसकी गंद को हवा मे उठाया & अगले ही पल उसका आधा लंड उसकी महबूबा की गंद मे था.इस बार वो उसके इस नाज़ुक अंग के साथ विजयंत को कोई बेरेहमी करने का मौका नही देना चाहता था.लंड गंद मे धंसाए बिना हिलाए वो उसके उपर लेट गया & उसकी गर्दन & बाल चूमने लगा.जब रंभा थोड़ा संभली तो उसके सीने के नीचे हाथ घुसा उसकी चूचियो को बहुत हल्के-2 दबा के उसने उसकी गंद मारना शुरू किया.रंभा अब आहे भर रही थी & उसके हाथ उसकी बेचैनी की कहानी कहते सोफे के गद्दे मे धँस रहे थे.देवेन ने रंभा के जिस्म को अपनी बाहो मे कसा & करवट ली & अगले पल वो उसके उपर लेटी थी & वो उसके नीचे.

"आओ,विजयंत.",अपने दिल पे पत्थर रख देवेन ने विजयंत को अपनी प्रेमिका की चूत चोदने का न्योता दिया.विजयंत आगे बढ़ा & सोफे पे दोनो के पैरो के पास घुटनो पे बैठ गया.रंभा का दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था.विजयंत ने उसकी चूत मे उंगली घसाई तो वो चिहुनक उठी & उसके बदन मे सिहरन दौड़ गयी.उसकी चूत बहुत गीली थी.विजयंत ने उसकी टाँगे फैलाई & आगे झुक के लंड को उसकी चूत मे घुसाया & उसके उपर झुकने लगा.थोड़ी देर बाद लंड जड तक चूत मे था & वो उसके उपर झुका उसकी आँखो मे देख रहा था.रंभा ने अपने हाथ उसके मज़बूत उपरी बाजुओ पे लगाए & उचक के उसके होंठ चूमे तो विजयंत ने कमर हिला उसकी चुदाई शुरू कर दी.रंभा उसके होंठ छ्चोड़ नीचे हुई & आँखे बंद कर देवेन के सीने पे लेटी दोनो लंड का मज़ा लेने लगी.

विजयंत की आँखे अभी भी उसे जैसे पहचानने की कोशिश कर रही थी.उसका दिल,उसका दिमाग़ शायद उसे नही पहचानते थे मगर उसके जिस्म को तो रंभा के जिस्म से मिलते ही मानो सब याद आ गया था.उसका लंड उसकी चूत की दीवारो को रगड़ते हुए उसकी कोख पे चोट कर रहा था.रंभा ने अपना सर देवेन के दाए कंधे पे रख दिया था & वो कभी उसे चूमती तो कभी उपर झुके विजयंत को.अब तीनो के जिस्म मस्ती के आसमान मे बहुत ऊँचे उड़ रहे थे.दोनो मर्दो ने भी बहुत देर से अपने उपर काबू रखा हुआ था & अब बात उनके बस के भी बाहर थी.वो भी अब बस जल्द से जल्द अपनी मंज़िल पे पहुचना चाहते थे.देवेन उसकी कमर थामे नीचे से अपनी कमर उचका के आधे लंड से उसकी गंद मार रहा था & उसके उपर झुका मस्ती की शिद्दत से दाँत पिसता विजयंत उसकी चूत मे बहुत तेज़ धक्के लगा रहा था.रंभा को अब कुच्छ होश नही था.पिच्छले कुच्छ पलो मे वो कितनी बार झड़ी थी उसे कुच्छ होश ही नही था बल्कि उसे तो ये लग रहा था कि वो1 लंबी झदान है जो ख़त्म ही नही हो रही है.

"याआह्ह्ह्ह्ह..!",देवेन करहा & रंभा ने गंद मे उसके गर्म वीर्य की बौच्चरें महसूस की & उसकी चूत ने भी जवाब दे दिया.

"आननह..!",उसने आह भरी & उसका जिस्म अकड़ सा गया & वो जिस्म को कमान की तरह मोदते झड़ने लगी.उसकी चूत विजयंत के लंड पे सिकुड़ने-फैलने लगी & उस वक़्त विजयंत के दिमाग़ मे जैसे 1 धमाका सा हुआ.उसके ज़हन मे काई तस्वीरे 1 साथ कौंध गयी.हर तस्वीर मे वो लड़की जिसकी चूत मे वो लंड धंसाए था उस से चिपकी मदहोश हो रही थी & वो उसके साथ अपने जोश को शांत कर रहा था.

"रंभा..!",वो चीखा & उसने रंभा की चूत मे अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया.रंभा हैरान होके उसे देखने लगी & देवेन भी..क्या उसकी याददाश्त वापस आ गयी थी?विजयंत उसके उपर झुका हुआ हाँफ रहा था,"..तुम रंभा हो.",उसे अभी भी भरोसा नही था.

"हां,मैं रंभा हू.",रंभा खुश हो गयी & उसका चेहरा थामा,"..क्या लगती हू मैं आपकी बताइए?",विजयंत सोचने लगा.उसके माथे पे पहले हल्की शिकन पड़ी मगर धीरे-2 वो गहरी होने लगी.उसके चेहरे पे दर्द के भाव आने लगे,"बस..नही याद आता तो छ्चोड़ दीजिए.",रंभा ने उसे खींच अपने सीने पे उसका सर रख लिया & सहलाने लगी.

कुच्छ पॅलो बाद उसने उसके सर को उठाया & अपने उपर से उठने का इशारा किया तो विजयंत ने उसकी चूत से लंड बाहर खींचा & खड़ा हो गया.रंभा ने अपनी गंद से देवेन का सिकुदा लंड बाहर निकाला & सोफे से नीचे उतरी.देवेन भी उसके पीछे-2 उठा & रंभा को गोद मे उठा लिया & अपने कमरे की ओर बढ़ गया.उनके पीछे-2 विजयंत भी आगे बढ़ा.

"बस,अब ये आराम करेगी,विजयंत.ठीक है?",कमरे की दहलीज़ पे वो रुका & विजयंत से मुखातिब हुआ.विजयंत ने हां मे सर हिलाया,"..& इस कमरे मे तुम इसे नही चोदोगे.ओके?..यहा के अलावा कही भी..पर इस कमरे मे नही..हूँ..अब जाओ..कपड़े पहन अपने कमरे मे आराम करो.मैं कुच्छ देर बाद हम खाना खाएँगे.",विजयंत ने समझने का इशारा करते हुए सर हिलाया & अपने कमरे मे चला गया.

"थोड़ी देर मेरे पास रहिए.",देवेन रंभा को बिस्तर पे लिटा के वाहा से जा रहा था कि उसने उसे रोक लिया.वो उसके बगल मे लेट गया तो रंभा उसके पहलू मे आ गयी,"..इस कमरे मे उन्हे क्यू नही आने दिया?",उसकी आँखो मे शरारत थी,चुदाई के दौरान भी देवेन की उलझन उस से छिपि नही थी & उसे इस वक़्त बहुत प्यार आ रहा था अपने प्रेमी पे.

"तुम्हे नही पता क्या?..कोई और हालात होते तो..",उसने बात अधूरी छ्चोड़ दी.

"तो?",रंभा ने उसके निपल को खरोंचा.

"तो मैं यहा से बाहर चला जाता.तुमपे अपना ज़ोर चलाने की हिमाकत तो कभी नही करूँगा मगर इस तरह गैर की बाहो मे देखना मेरे लिए बहुत मुश्किल होता है."

"ओह!देवेन..",रंभा ने उसे पीठ के बल लिटाया,"..आइ'म सॉरी!..मेरा यकीन मानिए..बस 1 बार ये उलझने ख़त्म हो जाएँ..फिर इस दिल,इस बदन को आपके सिवा किसी & को सौंपने के बजाय मर जाना पसंद करूँगी.",

"चुप!",देवेन ने उसके होंठो पे अपना हाथ रखा,"..ऐसी मनहूस बात आगे मत करना.मुझे पूरा भरोसा है तुमपे,रंभा.मैं तो बस अपने दिल का हाल कह रहा था.",उसने उसे अपने आगोश मे भर लिया,"..चलो अब सो जाओ.बहुत थकाया है तुम्हे हमने.",वो प्यार से उसे थपकीया देते हुए सुलाने लगा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--68

gataank se aage......

deven ne uski kamar tham use apni god me apne lund pe bithaya to rambha ne bhi daya hath peechhe le ja uske lund ko tham use apni chut ka rasta dikhaya.rambha uske kandho pe kohniya tika use chumte hue uske lund pe kudne lagi.deven bhi uski kamar ke mansal hisso ko dabate hue,uski pith ko jakadte hue uski kiss ka jawab de raha tha.usne rambha ki gardan ko jum ke chum & fir apne honth uski choochiyo se laga diye.

"AAIIYYYYEEEEEE..!",rambha chikhi to deven ne bhi chaunk ke uske seene se sar uthaya.kab vijayant sofe se uth rambha ke peechhe aa gaya tha & uski gand me apna lund ghusa diya tha use pata hi nahi chala tha.deven ki aankho me gussa utar aaya & vo vijayant ko pare dhakelne hi wala tha ki rambha ne aankho se ishara kar use roka & use chuma.vijayant aadha lund andar ghsua bahut dhire-2 uski gand maar raha tha.rambha ne apne daye kandhe ke uapr se gardan ghumayi to vo aage jhuka & uske honth chumne laga.

"uumm..main kaun hu,dada..aapko yaad hai?",rambha ne dayi banh uski gardan me daal di.vo masti me pagal ho gayi thi.vijayant ne uske hotho ko chhoda & use dekhne laga jaise yaad karne ki koshish kar raha ho ki vo kaun hai.uske mathe pe shikan padti ja rahi thi & rambha ko laga ki kahi vo dimagh pe zyada zor na daal le & usne dobara uske sar ko neeche jhuka uske htoho ko chum liya.vijayant & deven dono hi uski choochiyan masal rahe the & jab 1 uske honth chhodta to dusra chumne lagta.

"AANNHHHHH..!",rambha fir chikhi.vijayant ne lund & andar dhakel diya tha.itni andar tak uski gand me kuchh bhi nahi ghsua tha & use dard ho raha tha.uski kamar thame vijayant halke-2 uski gand maar raha tha & vo chut me ghuse deven ke lund pe uchhal rahi thi.uski aankhe band ho gayi thi & jism me jaise jaan hi nahi thi bas masti hi masti thi.vo jhade ja rahi thi magar dono mard rukne ka naam hi nahi le rahe the.deven ne uske seene ke ubharo ko chune ke baad sar utahya to mehbooba ki halat samajh gaya.

"vijayant,ruko.",usne badi sayant magar hukm deti aavaz me vijayant se kaha.vijayant ruk gaya,"..lund bahar khincho.",usne vaisa hi kiya.rambha aashcharya se dekh rahi thi.duniya bhar ko hukm dene vala vijayant deven ke hukm kaise maan raha tha!deven ne rambha ki kamar ko baaho me jakda & use tham ke khada hua & fir sofe pe lita ke uske upar aa use chumte hue chodne laga.vijayant dono ko khada dekh raha tha.

"uumm..oow.",deven ka lund uski kokh pe chot kar raha tha & vo masti me uski pith noch rahi thi,"..suniye..bura mat maniye please..par inhe aane dijiye na!..mujhe lagta hai inhe is se...aahhhhh..kuchh yaad aa jaye..uunnhhhhhh..!",vijayant ke lund ne use kagar ke upar se dhakel diya tha & vo fir masti ki khumari me kho gayi thi.

deven ka dil to nahi kar raha tha magar rambha ki baat sahi thi lekin usne soch liya tha ki is baar vo use uske jism ke sath jungli pane se nahi khelne dega.usne rambha ko dayi karwat pe ghumaya & uske peechhe aaya & bayi banh uski kamar pe daal uske pet ko sehlate hue uski gardan chumne laga.vo bhi baya hath peechhe le ja muskurate hue uske baalo se khelne lagi.deven uski gardan chumte hue uski pith pe aaya & use pet ke bal lita uski chikni pith ko apne hotho se tapaane laga.rambha sofe me munh chhipaye chihunk rahi thi.deven uski pith chumte hu neeche uski gand tak aaya & uski fanko ko faila uski gand ke chhed ko chumne laga.rambha uska irada bhanp gayi,"..uunnhhhh..nahi..vaha bahut dard hota hai..oohhhhh..!",deven apni ungli se uski gand marne laga tha.rambha aahe bharti apni kamar uchka rahi thi.

"AANNHHHHH..!",deven ne uski kamar tham uski gand ko hawa me uthaya & agle hi pal uska aadha lund uski mehbooba ki gand me tha.is baar vo suke is nazuk ang ke sath vijayant ko koi berehmi karne ka mauka nahi dena chahta tha.lund gand me dhansaye bina hilaye vo uske upar let gaya & uski gardan & baal chumne laga.jab rambha thoda sambhli to uske seene ke neeche hath ghusa uski chhatiyo ko bahut halke-2 daba ke usne uski gand marna shuru kiya.rambha ab aahe bhar rahi thi & uske hath uski bechaini ki kahani kehte sofe ke gadde me dhans rahe the.deven ne rambha ke jism ko apni baaho me kasa & karwat li & agle pal vo uske upar leti thi & vo uske neeche.

"aao,vijayant.",apne dil pe patthar rakh deven ne vijayant ko apni premika ki chut chodne ka nyota diya.vijayant aage badha & sofe pe dono ke pairo ke paas ghutno pe baith gaya.rambha ka dil bahut zoro se dhadak raha tha.vijayant ne uski chut me ungli ghsayi to vo chihunk uthi & uske badan me sihran daud gayi.uski chut bahut gili thi.vijayant ne uski tange failayi & aage jhuk ke l;und ko uski chut me ghusaya & uske upar jhukne laga.thodi der baad lund jud tak chut me tha & vo uske upar jhuka uski aankho me dekh raha tha.rambha ne apne hath uske mazbut upri bazuo pe lagaye & uchak ke uske honth chume to vijayant ne kamar hila uski chudai shuru kar di.rambha uske honth chhod neeche hui & anakhe band kar deven ke seene pe leti dono lundo ka maza lene lagi.

vijayant ki aankhe abhi bhi use jaise pehchanane ki koshish kar rahi thi.uska dil,uska dimagh shayad use nahi pehchante the magar uske jism ko to rambha ke jism se milte hi mano sab yaad aa gaya tha.uska lund uski chut ki deewaro ko ragadte hue uski kokh pe chot kar raha tha.rambha ne apna sar deven ke daye kandhe pe rakh diya tha & vo kabhi use chumti to kabhi upar jhuke vijayant ko.ab teeno ke jism masti ke aasman me bahut oonche ud rahe the.dono mardo ne bhi bahut der se apne upar kabu rakha hua tha & ab baat unke bas ke bhi bahar thi.vo bhi ab bas jald se jald apni manzil pe pahuchana chahate the.deven uski kamar thame neeche se apni kamar uchka ke aadhe lund se uski gand maar raha tha & uske uapr jhuka masti ki shiddat se dant pista vijayant uski chut me bahut tez dhakke laga raha tha.rambha ko ab kuchh hosh nahi tha.pichhle kuchh palo me vo kitni baar jhadi thi use kuchh hosh hi nahi tha balki use to ye lag raha tha ki vo1 lambi jhadan hai jo khatm hi nahi ho rahi hai.

"yaaaahhhhh..!",deven karaha & rambha ne gand me uske garm virya ki bauchharen mehsus ki & uski chut ne bhi jawab de diya.

"aannhhhhhhhhh..!",usne aah bhari & uska jism akad sa gaya & vo jism ko kaman ki tarah modte jhadne lagi.uski chut vijayant ke lund pe sikudne-failnae lagi & us waqt vijayant ke dimagh me jaise 1 dhamaka sa hua.uske zehan me kayi tasveere 1 sath kaundh gayi.har tasveer me vo ladki jsiki chut me vo lund dhansaye tha us se chipki madhosh ho rahi thi & vo uske sath apne josh ko shant kar raha tha.

"rambha..!",vo chikha & usne rambha ki chut me apna garm virya chod diya.rambha hairan hoke use dekhne lagi & deven bhi..kya uski yaaddasht vapas aa gayi thi?vijayant uske upar jhuka hua hanf raha tha,"..tum rambha ho.",use abhi bhi bharosa nahi tha.

"haan,main rambha hu.",rambha khush ho gayi & uska chhera thama,"..kya lagti hu main aapki bataiye?",vijayant sochne laga.uske mathe pe pehle halki shikan padi magar dhire-2 vo gehri hone lagi.uske chehre pe dard ke bhav aane lage,"bas..nahi yaad aata to chhod dijiye.",rambha ne use khinch apne seene pe uska sar rakh liya & sehlane lagi.

kuchh palo baad usne uske sar ko uthaya & apne uapr se uthne ka ishara kiya to vijayant ne uski chut se lund bahar khincha & khada ho gaya.rambha ne apni gand se deven ka sikuda lund bahar nikala & sofe se neeche utri.deven bhi uske peechhe-2 utha & rambha ko god me utha liya & apne kamre ki or badh gaya.unke peechhe-2 vijayant bhi aage badha.

"bas,ab ye aaram karegi,vijayant.thik hai?",kamre ki dehleez pe vo ruka & vijayant se mukhatib hua.vijayant ne haan me sar hilaya,"..& is kamre me tum ise nahi chodoge.ok?..yaha ke alawa kahi bhi..par is kamre me nahi..hun..ab jao..kapde pehan pane kamre me aaram karo.main kuchh der baad hum khana khayenge.",vijayant ne samajhne ka ishara karte hue sar hilaya & apne kamre me chala gaya.

"thodi der mere paas rahiye.",deven rambha ko bistar pe lita ke vaha se ja raha tha ki usne use rok liya.vo uske bagal me let gaya to rambha uske pehlu me aa gayi,"..is kamre me unhe kyu nahi aane diya?",uski aankho me shararat thi,chudai ke dauran bhi deven ki uljhan us se chhipi nahi thi & use is waqt bahut pyar aa raha tha apne premi pe.

"tumhe nahi pata kya?..koi & halaat hote to..",usne baat adhuri chhod di.

"to?",rambha ne uske nipple ko kharoncha.

"to main yaha se bahar chala jata.tumpe apna zor chalane ki himakat to kabhi nahi karunga magar is tarah gair ki baaho me dekhna mere liye bahut mushkil hota hai."

"oh!deven..",rambha ne use pith ke bal litaya,"..i'm sorry!..mera yakin maniye..bas 1 baar ye uljhane khatm ho jayen..fir is dil,is badan ko aapke siwa kisi & ko saunpne ke bajay mar jana pasand karungi.",

"chup!",deven ne uske htoho pe apna hath rakha,"..aisi manhus baat aage mat karna.mujhe pura bharosa hai tumpe,rambha.main to bas apne dil ka haal keh raha tha.",usne use apne agosh me bhar liya,"..chalo ab so jao.bahut thakaya hai tumhe humne.",vo pyar se use thapkiya dete hue sulane laga.

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kramashah.......