Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:05

जाल पार्ट--81

गतान्क से आगे......

"मुझे मेरी गैरमौजूदगी मे हुई सभी मीटिंग्स,शूटिंग्स और बाकी सभी बातो की डीटेल्स चाहिए.",रंभा अपने दफ़्तर मे बैठी थी.उसे पूरा यकीन था कि उसकी जान लेने के लिए गोआ मे उस शख्स को कामया ने ही भेजा था & अब वो उसे इस बात की सज़ा ज़रूर देगी.1 घंटे तक वो उसके पीछे मे हुई सभी बातो की जानकारी लेती रही.उसके बाद उसने मानेजमेंट की मीटिंग बुलाई.

"जो प्रॉजेक्ट्स चल रहे हैं,उनमे से 1 बिहाइंड शेड्यूल है..प्रॉजेक्ट 32..क्यू?",उसने उस फिल्म के एग्ज़िक्युटिव प्रोड्यूसर की ओर देखा.कंपनी का सीईओ रंभा के इस बदले रुख़ से हैरान था & बस चुपचाप सारी करवाई देख रहा था.अब अपने बॉस की बीवी की बात काट वो अपनी नौकरी तो ख़तरे मे नही डाल सकता था ना.

"मॅ'म,उस फिल्म की हेरोयिन कामया जी हैं & उन्होने अचानक 3 दिन की शूटिंग कॅन्सल कर दी थी.उनकी तबीयत खराब थी.",रंभा जानती थी कि कामया अपनी 'खराब तबीयत' का कैसा 'इलाज' किस 'डॉक्टर' से करवा रही थी.

"हूँ..& इन नये प्रपोज़ल्स मे ये 3 आपने चुने हैं?",उसने Cएओ से सवाल किया.

"जी,मॅ'म.सभी मुझे फ़ायदे के प्रपोज़ल्स लगे."

"वेरी गुड.मैने देखा कि सभी प्रपोज़ल्स के साथ आपने 1 टेंटेटिव टीम भी सोची है."

"येस,मॅ'म."

"बहुत अच्छा काम कर रहे हैं आप.मैने बस इन प्रपोज़ल्स मे छ्होटे-मोटे चेंजस किए हैं अगर आपको ठीक लगे तो इन प्रॉजेक्ट्स को शुरू करवा दीजिए & नही तो मैं अभी ही आपके काम मे दखल देने की माफी मांगती हू.",रंभा की जगह कोई और होता तो कामया का नाम नये प्रपोज़ल्स से काटने के बाद Cएओ को सख़्त ताकीद करता कि जो वो कहे वही हो मगर रंभा बहुत चालाक थी.उसने जानबूझ के इस तरह से बात की थी ताकि उसकी इतनी विनम्रता से कही बात को टालने का Cएओ के पास कोई बहाना ही ना रहे & फिर वो अभी भी मालिक की बीवी तो थी ही.शाम तक रंभा ने कामया के करियर के अंत की शुरुआत मे काफ़ी कदम उठा लिए थे & अब उसे थोड़ा सुकून था.

वो काफ़ी थकान महसूस कर रही थी & उसका दिल घर जाने को भी नही कर रहा था.देवेन ने उसे सख़्त हिदायत दी थी कि जब तक वो अपने घर के आस-पास के सारे इलाक़े को ठीक से चेक ना कर ले तब तक वो उस से मिलने ना आए.उसने उसे फोन किया & उसकी & विजयंत मेहरा की ख़ैरियत पुछि & फिर अपने ससुर से भी बात की.फोन रखने के बाद उसके दिल मे तैरने का ख़याल आया & उसने क्लब जाने की सोची & फिर दफ़्तर से निकालने की तैय्यारि करने लगी.

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देवेन ने घर पहुँचने के बाद फ्रेश होके सारे इलाक़ा का 1 चक्कर लगाया था & खाने-पीने & बाकी ज़रूरी समान लेके घर आ गया था.उसने देखा था कि डेवाले आने के बाद विजयंत थोड़ा चुप-2 रह रहा था.पहले उसने सोचा कि उस से इस बारे मे बात करे मगर फिर उसने इस ख़याल को छ्चोड़ दिया.उसने सोचा की ये काम रंभा ही करे तो ठीक था.

वो यहा अभी मेहरा परिवार के मुखिया के इस हाल का राज़ पता लगाने आया था मगर अभी भी वो दयाल से इन्टेक़ाम लेने की बात भुला नही था.उसका दिमाग़ हर पल दयाल को उसके बिल से बाहर निकालने की तरकीबे सोच रहा था मगर कोई ठोस आइडिया आ नही रहा था.

शाम को वो 1 यूज़्ड कार शोरुम मे गया & 1 फ़र्ज़ी आइडी से 1 कार खरीद के ले आया.उस कार से उसने आस-पास के इलाक़े का जायज़ा लिया.उसका घर मेहरा परिवार के बुंगलो से बस 10 मिनिट की दूरी पे था.उसने सोचा कि रंभा से सलाह कर वो 1 बार विजयंत को उसका घर ज़रूर दिखाएगा-शायद उसे कुच्छ याद आ जाए.रंभा से बात करने के बाद रात के खाने का इंतेज़ाम कर वो विजयंत को ले फिर से आस-पास के इलाक़े का चक्कर लगाने लगा.उसने कार के काले शीशे चढ़ाए रखे & उन रस्तो से बचता रहा जहा पोलीस की चेकिंग होती थी.उसका इरादा बस विजयंत को आस-पास के रस्तो से वाकिफ़ कराना था,ताकि अगर ज़रूरत पड़े तो उसे ख़ास मुश्किल ना हो & ये देखने का भी था कि कही कोई उनके पीछे तो नही लगा था या उनपे नज़र नही तो रख रहा था.1 1/2 घंटे बाद वो घर वापस आ गया & विजयंत के साथ खाना खाने के बाद कंप्यूटर ऑन कर सरफिंग करने लगा.

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रंभा दफ़्तर से निकली & सीधा क्लब गयी मगर उसकी जैसी सोच वाले वाहा कयि लोग थे & क्लब का पूल भरा हुआ था.रंभा का उस भीड़-भाड़ मे तैरने का दिल नही किया & उसने बस कुछ वक़्त वाहा बैठ के गुज़ारने की सोची.वो पूल साइड के किनारे रखी 1 कुर्सी पे बैठ गयी & 1 जूस का ऑर्डर दे दिया.

"गुड ईव्निंग,रंभा!कैसी हैं आप?",रंभा ने घूम के देखा,सामने महादेव शाह खड़ा था.

"गुड ईव्निंग,मिस्टर.शाह.मैं ठीक हू,आप कैसे हैं?"

"मैं भी ठीक हू.",रंभा का दिमाग़ उसे देखते ही तेज़ी से काम करने लगा था.प्रणव & ये बुड्ढ़ा शायद मिले हुए थे & उस बुड्ढे को परखने का ये बढ़िया मौका था.

"प्लीज़ बैठिए.",शाह को तो जैसे इसी का इंतेज़ार था.वो सामने की कुर्सी पे बैठ गया तो रंभा ने वेटर को बुलाके उसकी पसंद का ड्रिंक ऑर्डर किया.दोनो इधर-उधर की बाते करने लगे.आज सवेरे प्रणव ने मौका देख के उस से अपने मंसूबे ज़ाहिर किए थे.अब रंभा देख रही थी कि शाह क्या करता है.शाह को भी प्रणव & रंभा की सवेर की मुलाकात का पता प्रणव से चल चुका था & अभी इत्तेफ़ाक़ से हुई मुलाकात का फायडा उठाने के बारे मे वो सोच रहा था.

"आप इधर शहर से बाहर गयी थी?'

"हूँ.",रंभा ने जान बुझ के खुद को संजीदा कर लिया.

"बुरा ना माने तो मैं पुछ सकता हू कि कहा?"

"गोआ."

"सुना है बड़ी खूबसूरत जगह है.मेरा भी बहुत मन है वाहा जाने का मगर ना कभी मौका लगा &.."

"& क्या?"

"& ऐसी जगह बिना किसी खूबसूरत साथी जाने का क्या फायडा!आप खुशनसीब हैं,समीर साहब के साथ गयी होंगी आप तो..बल्कि मुझे तो ये कहना चाहिए कि समीर साहब खुशनसीब हैं जो आपके साथ उस खूबसूरत जगह की सैर का मौका उन्हे मिला."

"पता नही कौन खुशनसीब है!",रंभा फीकी हँसी हँसी.

"आपकी बातो से उदासी झलक रही है,मोहतार्मा.बुरा ना माने तो उसका सबब पुच्छ सकता हू.आपके जैसी खुशशक्ल ख़ातून के चेहरे पे ये परच्छाइयाँ अच्छी नही लगती.",रंभा को शाह की लच्छेदार बात सुन बड़ा मज़ा आया.इस खेल का वो भी माहिर खिलाड़ी लगता था & उसे भी मज़ा आ रहा था.

"पुछ्ने का शुक्रिया शाह साहब मगर क्यू मेरी परेशानी सुन आप अपनी शाम खराब करना चाहते हैं?"

"आपके साथ से ये शाम निखर आई है & अगर आपके गम को दूर कर सका तो इस से ज़्यादा खुशी की बात मेरे लिए & क्या हो सकती है."

"आप बहुत भले इंसान हैं,शाह साहब.मैं बस इतना कहूँगी की जिस ख़ुशनसीबी की बात आप कर रहे हैं,वो मुझे भी नसीब नही हुई.मैने भी गोआ अकेले ही घुमा.",शाह को पता तो था कि रंभा & समीर के बीच क्या हुआ है.उसने बात आगे बढ़ाई.

"आपको आपके गम की याद दिलाने की माफी चाहता हू.",मेज़ पे रखे रंभा के हाथ पे उसने अपना हाथ रख दिया,"..पता होता की आपका हसीन चेहरा मेरी बातो से यू मुरझा जाएगा तो मैं ऐसा हरगिज़ ना करता."

"प्लीज़,शाह साहब.मुझे शर्मिंदा ना करें बल्कि आज कयि दिनो बाद आपके साथ बात कर मैं खुद को हल्का महसूस कर रही हू.

"नही,मैने ग़लती तो की है & अब मैं इसकी भरपाई भी करूँगा.आप यहा सुकून पाने आई थी ना?"

"जी,सोचा था थोड़ा तैरुन्गि मगर यहा की भीड़ देख इरादा बदल दिया."

"आपको इरादा बदलने की कोई ज़रूरत नही.अब आपकी ख्वाहिश खाकसार पूरी करेगा.",शाह खड़ा हो गया & झुक के इस अंदाज़ मे बोला की रंभा को हँसी आ गयी,"आप बुरा ना माने तो मेरे ग़रीबखाने पे चलिए & वाहा के स्विम्मिंग पूल का इस्तेमाल कीजिए & फिर रात का खाना मेरे साथ खाइए."

"प्लीज़ शाह साहब,तकल्लूफ ना करें."

"तकल्लूफ कैसा!..ये तो मेरी ख़ुशनसीबी होगी..प्लीज़,मुझे 1 मौका दीजिए अपनी खातिर करने का."

"ओके,चलिए.",रंभा कुच्छ देर सोचती रही & फिर उठ खड़ी रही.शाह उसे अपनी कार मे ले गया.दोनो पिच्छली सीट पे बैठ गये तो ड्राइवर कार चलाने लगा.रंभा ने देखा की शाह की निगाहें उसकी स्कर्ट से निकलती गोरी टाँगो & कोट मे कसे सीने पे बार-2 जा रही थी.उसका दिल उसकी इस हर्कतो से धड़क उठा.उसने तय कर लिया कि आज की रात वो शाह को शीशे मे ज़रूर उतारेगी.

महादेव शाह ने रास्ते मे 1 जगह कार रुकवाई & उतर गया.वो 10-15 मिनिट बाद वापस आया.इस बीच रंभा ने देवेन को फोन कर बता दिया कि को वो कहा & किसके साथ जा रही है.देवेन ने भी उसे होशियार रहने की हिदायत दी & वाहा से निकलने के बाद सारी बात बताने को कहा.

शाह वापस आया & 20 मिनिट बाद दोनो उसके बुंगले पे थे.बुंगला आलीशान था मगर बिल्कुल वीरान.रंभा को थोडा डर लगने लगा था.उसे लग रहा था कि यहा के आके उसने कोई ग़लती तो नही की,"आपके घर-परिवार मे कौन-2 है,शाह साहब?"

"कोई नही,रंभा जी.मैं बिल्कुल तन्हा हू.मा-बाप तो बहुत पहले गुज़र गये & कोई है नही."

"आपने शादी नही की क्या?"

"जी नही.आज तक कोई मिली नही.",शाह ने 'आज तक' पे थोड़ा ज़्यादा ज़ोर दिया था.

"ये कैसी बात कर रहे हैं आप?आप जैसे कामयाब शख्स को कोई लड़की नही मिली."

"कामयाब होने का मतलब ये तो नही की जिसको चाहो वो आपको मिल ही जाए.",शाहा मुस्कुराया,"..खैर छ्चोड़िए,ये लीजिए..",शाह ने 1 पॅकेट उसे थमाया,"..माफी चाहूँगा पर मुझे रास्ते मे ख़याल आया कि पता नही आपके पास स्विम्मिंग कॉस्ट्यूम है कि नही & मैने ये खरीद लिया.",रंभा ने पॅकेट ले नज़रे नीची कर ली मानो उसे शर्म आ गयी हो,"..आप चेंज कर उधर पूल पे जाके जी भर के तैरिये.",शाह उसे 1 कमरे मे ले गया & फिर वाहा से चला गया.

रंभा ने पॅकेट खोला तो अंदर से 1 सिंगल पीस,काले रंग की बिकिनी निकली.रंभा ने कपड़े उतारे & बिकिनी पहन ली & कमरे मे लगे ड्रेसिंग टेबल के शीशे के सामने खड़ी हो गयी.बिकिनी का बॅक बहुत गहरा था & केवल उसकी गंद को ढके हुए था.उसकी पीठ पूरी नंगी थी.रंभा मुस्कुराने लगी..शाह बहुत शातिर खिलाड़ी था..उसे ये तो पता था नही कि रंभा के दिल मे क्या है,अगर 2 पीस बिकिनी लेता तो हो सकता था वो बुरा मान जाती.पर ये सिंगल पीस बिकिनी ले वो केवल उसके लिए अपनी फ़िक्र जता रहा था & साथ ही बड़ी चालाकी से इतने गहरे बॅक वाली बिकिनी चुनी उसने उसे अपना जिस्म दिखाने पे भी मजबूर कर दिया था.

रंभा मुस्कुराती हुई कमरे से बाहर शाह के बताए बंगल के पिच्छले हिस्से मे गयी.सामने बिलजुल सॉफ पानी से भरा पूल उसे बुलाता दिख रहा था.रंभा फ़ौरन पानी मे उतर गयी & तैरने लगी.पूल के 2-3 चक्कर लगाने के बाद उसने देखा की 1 घुटनो तक का बाथिंग गाउन पहने शाह हाथो मे 2 ग्लास लिए वाहा आ रहा है.रंभा ने उसे देख हाथ हिलाया तो शाह ने उसे किनारे आने का इशारा किया.

रंभा तैरती हुई पूल के किनारे आ गयी,"मिस्टर.शाह,आपके कैसे शुक्रिया अदा करू,मेरी समझ मे नही आ रहा.कितना शानदार पूल है आपका!",उसने उसके हाथ से जूस का 1 ग्लास ले 1 घूँट भरा & उसी तरह पानी मे खड़े हुए ग्लास को किनारे पे रखा.शाह की निगाहें उसके गीले जिस्म को घूर रही थी.

"आप कुच्छ ज़्यादा शर्मिंदा कर रही हैं,रंभा जी.अब ये मत कहिएगा की मेहरा खानदान के बुंगलो का पूल ऐसा नही."

"हां,कहूँगी.नही है ऐसा पूल क्यूकी आपको हैरत होगी पर हमारे बुंगलो मे से किसी मे भी स्विम्मिंग पूल नही है!",दोनो इस बात पे हंस पड़े,"..आप वाहा क्यू बैठे हैं?आइए ना,तैरिये.ऐसा पूल हो तो इंसान बाहर कैसे बैठ सकता है?"

"आपकी बात टालने की जुर्रत तो मैं कर नही सकता.",शाह ने अपना गाउन उतारा.अब वो सिर्फ़ 1 काले रंग के ट्रंक मे था.रंभा ने देखा की शाह का सीना सफेद बालो से भरा हुआ था.वो बुड्ढ़ा था & उसका जिस्म बहुत गथिला भी नही था मगर चुस्त था.रंभा की निगाहें उसके सीने से नीचे उसकी ब्रीफ्स पे आई & उसे फूला देखा वो मन ही मन मुस्कुराइ,"..पर केवल पूल का होना काफ़ी नही,आप जैसा साथी भी होना चाहिए जिसके साथ तैरने का पूरा लुत्फ़ उठाया जा सके.",शाह पानी मे उतर गया & तैरने लगा.

"चलिए,मेरे साथ मुक़ाबला कीजिए.देखे कौन इस पूल के 2 चक्कर पहले पूरे करता है.",रंभा ने हँसते हुए गोता लगाया & तैरने लगी.शाह भी हंसते हुए उसके साथ तैरने लगा.रंभा आगे थी & वो पीछे.शाह पानी मे अठखेलिया करती रंभा की गोरी टाँगो & नंगी पीठ को ललचाई निगाहो से देखता उसके पीछे आ रहा था.

"मैं जीत गयी!",रंभा पूल के सिरे पे पहुँच उसके किनारे पे कम पानी मे खड़े हो खुशी से चिल्लाई.शाह मुस्कुराता हुआ उसके पास आ गया & उसके सामने खड़ा हो उसके चेहरे को गौर से देखने लगा,"क्या देख रहे हैं?",उसकी निगाहो से रंभा के चेहरे का रंग भी बदल गया था.

"देख रहा हू कि ये पानी की बूंदे कितनी खुशकिस्मत हैं जो आपके होंठो को चूम रही हैं.",शाह उसके करीब आ गया था & रंभा को उसके सांसो की गर्मी अपने चेहरे पे महसूस हो रही थी.रंभा ने नज़रे झुका ली & घूम के अपनी पीठ शाह की ओर कर खड़ी हो गयी.उसने जान बुझ के अपनी नंगी पीठ शाह की ओर की थी.शाह ने पानी के नीचे उसकी झिलमिलाती गंद को देखा & फिर उसकी गीली पीठ को.उसका दिल किया की उसे बाँहो मे भर उसकी मखमली त्वचा को अपने होंठो से चूम ले मगर उसने खुद पे काबू रखा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--81

gataank se aage......

"Mujhe meri gairmaujudgi me hui sabhi meetings,shootings & baki sabhi baato ki details chahiye.",Rambha apne daftar me baithi thi.use pura yakin tha ki uski jaan lene ke liye Goa me us shakhs ko Kamya ne hi bheja tha & ab vo use is baat ki saza zarur degi.1 ghnate tak vo uske peechhe me hui sabhi baato ki jankari leti rahi.uske baad usne managemnet ki meeting bulayi.

"jo projects chal rahe hain,unme se 1 behind schedule hai..project 32..kyu?",usne us film ke executive producer ki or dekha.company ka CEO kamya ke is badle rukh se hairan tha & bas chupchap sari karvayi dekh raha tha.ab apne boss ki biwi ki baat kaat vo apni naukri to khatre me nahi daal sakta tha na.

"ma'am,us film ki heroine Kamya ji hain & unhone achanak 3 din ki shooting cancel kar di thi.unki tabiyat kharab thi.",rambha janti thi ki kamya apni 'kharab tabiyat' ka kaisa 'ilaj' kis 'doctor' se karwa rahi thi.

"hun..& in naye proposals me ye 3 aapne chune hain?",usne CEO se sawal kiya.

"ji,ma'am.sabhi mujhe fayde ke proposals lage."

"very good.maine dekha ki sabhi proposals ke sath aapne 1 tentative team bhi sochi hai."

"yes,ma'am."

"bahut achha kaam kar rahe hain aap.maine bas in proposals me chhote-mote changes kiye hain agar aapko thik lage to in projects ko shuru karwa dijiye & nahi to main abhi hi aapke kaam me dakhal dene ki mafi mangti hu.",rambha ki jagah koi & hota to kamya ka naam naye proposals se katne ke baad CEO ko sakht takeed karta ki jo vo kahe vahi ho magar rambha bahut chalak thi.usne jaanbujh ke is tarah se baat ki thi taki uski itni vinamrata se kahi baat ko talne ka CEO ke paas koi bahana hi na rahe & fir vo abhi bhi malik ki biwi to thi hi.sham tak rambha ne kamya ke career ke ant ki shuruat me kafi kadam utha liye the & ab use thoda sukun tha.

vo kafi thakan mehsus kar rahi thi & uska dil ghar jane ko bhi nahi kar raha tha.deven ne use sakht hidayat di thi ki jab tak vo apne ghar ke aas-pas ke sare ilake ko thik se check na kar le tab tak vo us se milne na aaye.usne use fone kiya & uski & Vijayant Mehra ki khairiyat puchhi & fir apne sasur se bhi baat ki.fone rakhne ke baad uske dil me tairne ka khayal aaya & usne club jane ki sochi & fir daftar se nikalne ki taiyyari karne lagi.

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deven ne ghar pahunchne ke baad fresh hoke sare ilaka ka 1 chakkar lagaya tha & khane-pine & baki zaruri saman leke ghar aa gaya tha.usne dekha tha ki Devalay aane ke baad vijayant thoda chup-2 reh raha tha.pehle usne socha ki us se is bare me baat kare magar fir usne is khayal ko chhod diya.usne socha ki ye kaam rambha hi kare to thik tha.

vo yaha abhi Mehra parivar ke mukhiya ke is haal ka raaz pata lagane aaya tha magar abhi bhi vo Dayal se inteqam lene ki baat bhula nahi tha.uska dimagh har pal dayal ko uske bil se bahar nikalne ki tarkeeb e soch raha tha magar koi thos idea aa nahi raha tha.

sham ko vo 1 used car showroom me gaya & 1 farzi id se 1 car kharid ke le aaya.us car se usne aas-pas ke ilake ka jayza liya.uska ghar mehra parivar ke bunglo se bas 10 minute ki duri pe tha.usne socha ki rambha se salah kar vo 1 baar vijayant ko uska ghar zarur dikhayega-shayad use kuchh yaad aa jaye.rambha se baat karne ke baad raat ke khane ka intezam kar vo vijayant ko le fir se aas-paas ke ilake ka chakkar lagane laga.usne car ke kale shishe chadahye rakhe & un rasto se bachta raha jaha police ki checking hoti thi.uska irada bas vijayant ko aas-paas ke rasto se vakif karana tha,taki agar zarurat pade to use kahs mushkil na ho & ye dekhne ka bhi tha ki kahi koi unke peechhe to nahi laga tha ya unpe nazar nahi to rakh raha tha.1 1/2 ghante baad vo ghar vapas aa gaya & vijayant ke sath khana khane ke baad computer on kar surfing karne laga.

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rambha daftar se nikli & seedha club gayi magar uski jaisi soch vale vaha kayi log the & club ka pool bhara hua tha.rambha ka us bhid-bhad me tairne ka dil nahi kiya & usne bas kuch waqt vaha baith ke guzarne ki sochi.vo pool side ke kinare rakhi 1 kursi pe baith gayi & 1 juice ka order de diya.

"good evening,rambha!kaisi hain aap?",rambha ne ghum ke dekha,samne Mahadev Shah khada tha.

"good evening,Mr.Shah.main thik hu,aap kaise hain?"

"main bhi thik hu.",rambha ka dimagh use dekhte hi tezi se kaam karne laga tha.pranav & ye buddha shayad mile hue the & us buddhe ko parakhne ka ye badhiya mauka tha.

"please baithiye.",shah ko to jaise isi ka intezar tha.vo samne ki kursi pe baith gaya to rambha ne waiter ko bulake uski pasand ka drink order kiya.dono idhar-udhar ki baate karne lage.aaj savere pranav ne mauka dekh ke us se apne mansube zahir kiye the.ab rambha dekh rahi thi ki shah kya karta hai.shah ko bhi pranav & rambha ki saver ki mulakat ka pata pranav se chal chuka tha & abhi ittefaq se hui mulakat ka fayda uthane ke bare me vo soch raha tha.

"aap idhar shehar se bahar gayi thi?'

"hun.",rambha ne jaan bujh ke khud ko sanjida kar liya.

"bura na mane to main puchh sakta hu ki kaha?"

"Goa."

"suna hai badi khubsurat jagah hai.mera bhi bahut man hai vaha jane ka magar na kbhi mauka laga &.."

"& kya?"

"& aisi jagah bina kisi khubsurat sathi jane ka kya fayda!aap khushnasib hain,Sameer sahab ke sath gayi hongi aap to..balki mujhe to ye kehna chahiye ki sameer sahab khushnasib hain jo aapke sath us khubsurat jagah ki sair ka mauka unhe mila."

"pata nahi kaun khushnasib hai!",rambha fiki hasni hansi.

"aapki baato se udasi jhalak rahi hai,mohtarma.bura na mane to usk sabab puchh sakta hu.aapke jaisi khushshakl khatun ke chehre pe ye parchhaiyan achhi nahi lagti.",rambha ko shah ki lachhedar baat sun bada maza aaya.is khel ka vo bhi mahir khiladi lagta tha & use bhi maza aa raha tha.

"puchhne ka shukriya shah sahab magar kyu meri pareshani sun aap apni sham kharab karna chahte hain?"

"aapke sath se ye sham nikhar aayi hai & agar aapke gham ko door kar saka to is se zyada khushi ki baat mere liye & kya ho sakti hai."

"aap bahut bhale insan hain,shah sahab.main bas itna kahungi ki jis khushnasibi ki baat aap kar rahe hain,vo mujhe bhi nasib nahi hui.maine bhi goa akele hi ghuma.",shah ko pata to tha ki rambha & sameer ke beech kya hua hai.usne baat aage badhayi.

"aapko aapke gham ki yaad dilane ki mafi chahta hu.",mez pe rakhe rambha ke hath pe usne apna hath rakh diya,"..pata hota ki aapka haseen chehra meri baato se yu murjha jayega to main aisa hargiz na karta."

"please,shah sahab.mujhe sharminda na karen balki aaj kayi dino baad aapke sath baat kar main khud ko halka mehsus kar rahi hu.

"nahi,maine galti to ki hai & ab main iski bharpai bhi karunga.aap yaha sukun pane aayi thi na?"

"ji,socha tha thoda tairungi magar yaah ki bhid dekh irada badal diya."

"aapko irada badlane ki koi zarurat nahi.ab aapki khwahish khaksar puri karega.",shah khada ho gaya & jhuk ke is andaz me bola ki rambha ko hansi aa gayi,"aap bura na mane to mere garibkhane pe chaliye & vaha ke swimming pool ka istemal kijiye & fir raat ka khana mere sath khaiye."

"please shah sahab,takalluf na karen."

"takalluf kaisa!..ye to meri khushnasibi hogi..please,mujhe 1 mauka dijiye apni khatir karne ka."

"ok,chaliye.",rambha kuchh der sochti rahi & fir uth khadi rahi.shah use apni car me le gaya.dono pichhli seat pe baith gaye to driver car chalane laga.rambha ne dekha ki shah ki nigahen uski skirt se nikalti gori tango & coat me kase seene pe baar-2 ja rahi thi.uska dil uski is harkato se dhadak utha.usne tay kar liya ki aaj ki raat vo shah ko shishe me zarur utaregi.

Mahadev Shah ne raste me 1 jagah car rukwai & utar gaya.vo 10-15 minute baad vapas aaya.is beech Rambha ne Deven ko fone kar bata diya ki ko vo kaha & kiske sath ja rahi hai.deven ne bhi use hoshiyar rehne ki hidayat di & vaha se nikalne ke baad sari baat batane ko kaha.

shah vapas aaya & 20 minute baad dono uske bungle pe the.bungla aalishan tha magar bilkul veeran.rambha ko thoda darr lagne laga tha.use lag raha tha ki yaha ke aake usne koi galti to nahi ki,"aapke ghar-parivar me kaun-2 hai,shah sahab?"

"koi nahi,rambha ji.main bilkul tanha hu.maa-baap to bahut pehle guzar gaye & koi hai nahi."

"aapne shadi nahi ki kya?"

"ji nahi.aaj tak koi mili nahi.",shah ne 'aaj tak' pe thoda zyada zor diya tha.

"ye kaisi baat kar rahe hain aap?aap jaise kamyab shakhs ko koi ladki nahi mili."

"kamyab hone ka matlab ye to nahi ki jisko chaho vo aapko mil hi jaye.",shaha muskuraya,"..khair chhodiye,ye lijiye..",shah ne 1 packet use thamaya,"..mafi chahunga par mujhe raste me khayal aaya ki pata nahi aapke paas swimming costume hai ki nahi & maine ye kharid liya.",rambha ne packet le nazre neechi akr li mano use sharm aa gayi ho,"..aap change kar udhar pool pe jake ji bhar ke tairiye.",shah use 1 kamre me le gaya & fir vaha se chala gaya.

rambha ne packet khola to andar se 1 single piece,kale rang ki bikini nikli.rambha ne kapde utare & bikini pehan li & kamre me lage dressing table ke shishe ke samne kahdi ho gayi.bikini ka back bahut gehra tha & keval uski gand ko dhake hue tha.uski pith puri nangi thi.rambha muskurane lagi..shah bahut shatir khiladi tha..use ye to pata tha nahi ki rambha ke dil me kya hai,agar 2 piece bikini leta to ho sakta tha vo bura maan jati.par ye single piece bikini le vo keval uske liye apni fikr jata raha tha & sath hi badi chalaki se itne gehre back vali bikini chun usne use apna jism dikhane pe bhi majbur kar diya tha.

rambha muskurati hui kamre se bahar shah ke bataye bungle ke pichhle hisse me gayi.samne biljul saaf pani se bhara pool use bulata dikh raha tha.rambha fauran pani me utar gayi & tairne lagi.pool ke 2-3 chakkar lagane ke baad usne dekha ki 1 ghutno tak ka bathing gown pehne shah hatho me 2 glass liye vaha aa raha hai.rambha ne use dekh hath hilaya to shah ne sue kinare aane ka ishar kiya.

rambha tairti hui pool ke kinare aa gayi,"mr.shah,aapke kaise shukriya ada karu,meri samajh me nahi aa raha.kitna shandar pool hai aapka!",usne uske hath se juice ka 1 glass le 1 ghunt bhara & usi tarah pani me khade hue glass ko kinare pe rakha.shah ki nigahen uske gile jism ko ghur rahi thi.

"aap kuchh zyada sharminda kar rahi hain,rambha ji.ab ye mat kahiyega ki Mehra khandan ke bunglo ka pool aisa nahi."

"haan,kahungi.nahi hai aisa pool kyuki aapko hairat hogi par humare bunglo me se kisi me bhi swimming pool nahi hai!",dono is baat pe hans pade,"..aap vaha kyu baithe hain?aaiye na,tairiye.aisa pool ho to insan bahar kaise baith sakta hai?"

"aapki baat talne ki jurrat to main kar nahi sakta.",shah ne apna gown utara.ab vo sirf 1 kale rang ke trunk me tha.rambha ne dekha ki shah ka seena safed baalo se bhara hua tha.vo buddha tha & uska jim bahut gathila bhi nahi tha magar chust tha.rambha ki nigahen uske seene se neeche uski briefs pe aayi & use phoola dekha vo man hi man muskurayi,"..par keval pool ka hona kafi nahi,aap jaisa sathi bhi hona chahiye jiske sath tairne ka pura lutf uthaya ja sake.",shah pani me utar gaya & tairne laga.

"chaliye,mere sath muqabla kijiye.dekhe kaun is pool ke 2 chakkar pehle pure karta hai.",rambha ne hasnte hue gota lagaya & tairne lagi.shah bhi hanste hue uske sath tairne laga.rambha aage thi & vo peechhe.shah pani me athkheliya karti rambha ki gori tango & nangi pith ko lalchayi nigaho se dekhta uske peechhe aa raha tha.

"main jeet gayi!",rambha pool ke sire pe pahunch uske kinare pe kam pani me kahde ho khushi se chillayi.shah muskurata hua uske paas aa gaya & uske samne khada ho uske chehre ko gaur se dekhne laga,"kya dekh rahe hain?",uski nigaho se rambha ke chehre ka rang bhi badal gaya tha.

"dekh raha hu ki ye pani ki boonde kitni khushkismat hain jo aapke hotho ko chum rahi hain.",shah uske karib aa gaya tha & rambha ko uske sanso ki garmi apne chehre pe mehsus ho rahi thi.rambha ne nazre jhuka li & ghum ke apni pth shah ki or kar khadi ho gayi.usne jaan bujh ke apni nangi pith shah ki or ki thi.shah ne pani ke neeche uski jhilmilati gand ko dekha & fir uski gili pith ko.uska dil kiya ki use bahao me bhar uski makhmali tvacha ko apne hotho se chum le magar usne khud pe kabu rakha.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:05

जाल पार्ट--82

गतान्क से आगे......

"क्या बात है,रंभा?",उसना दाया हाथ रंभा के दाए कंधे पे रखा,"..मेरी बात बुरी लगी तो माफी चाहता हू."

"ऐसी बातो का क्या फायडा,शाह साहब जब ये जिस नज़म तक हमे ले जाती हैं मैं वाहा जा नही सकती.",रंभा ने आधा जिस्म घुमाया & उदासी से बोली.

"मगर क्यू नही जा सकती?",शाह ने उसे अपनी ओर पूरा घुमाया & उसके दोनो कंधो पे अपने हाथ जमा दिए,"..मैं तुम्हारे लायक नही क्या इसीलिए?"

"नही-2..",रंभा ने परेशान हो उसकी तरफ देखा,"..ये बात नही पर..",उसने बात अधूरी छ्चोड़ फिर से नज़रे झुका ली.

"तो क्या बात है?!",शाह ने उसे झकझोरा.

"मुझे..मुझे डर लगता है.",रंभा ने धीमी आवाज़ मे कहा.

"किस बात से डर लगता है?"

"कही किसी को पता चल गया तो?",रंभा ने उसकी ओर परेशान निगाहो से देखा.

"तो?!..तो अच्छा होगा..फिर मैं हमेशा तुम्हारे साथ रह सकता हू.",शाह ने उसके हाथ थाम लिए.

"पागल मत बानिए.मैं शादीशुदा हू."

"जो आदमी तुम्हारी कद्र नही करता,तुम्हे छ्चोड़ किसी और की बाहो मे घुसा रहता है,उसके चलते तुम मेरी मोहब्बत ठुकरा रही हो!",रंभा ने उसे ऐसे देखा जैसे उसे हैरत हुई हो कि शाह को कैसे पता चला समीर की हर्कतो के बारे मे,"हां,मुझे पता है सब कुच्छ.अब बताओ,उस इंसान के लिए तुम ना बोल रही हो?"

"नही..",रंभा बहुत पशोपेश मे होने का नाटक कर रही थी,"..देखिए शाह साहब,आप प्रणव को जानते है ना?"

"हां."

"तो मैं और वो..",रंभा ने फिर नज़रे नीची कर ली.

"हां तो क्या हुआ?",रंभा ने जैसे सोचा था गुफ्तगू वैसे ही आगे बढ़ रही थी.

"तो अब आपके साथ ये सब..शाह साहब,कल को समीर और मैं अलग हो जाएँगे तब मेरा क्या होगा?..क्या मैं प्रणव से लेके आपके बिस्तर तक घूमती रहूंगी?..यही वजूद रह जाएगा मेरा?!",रंभा की आँखो मे गुस्से के साथ-2 पानी छल्छला आया था.

"नही,ऐसा नही होगा.",शाह बहुत गंभीर आवाज़ मे बोला,"..मुझे पता है तुम्हारे & प्रणव के बारे मे.तुम किसके साथ क्या रिश्ता रखती हो,ये तुम्हारा फ़ैसला होगा मगर अगर तुम चाहोगी तो..",शाह के दिमाग़ मे रंभा की बात से बिजली कौंधी थी-अगर रंभा मान गयी तो उसे प्रणव या किसी और की कोई ज़रूरत नही रहेगी & उसका काम भी हो जाएगा,"..महादेव शाह ये वादा करता है कि तुम्हे अपनी दुल्हन बनाएगा & अपनी आख़िरी सांस तक तुम्हारे साथ रहेगा."..हां..हां..जब करोड़ो के शेर्स लेके दहेज मे आऊँगी तो दुल्हन तो बनाओगे ही!..रंभा ने मन ही मन सोचा.

"आप..आप मुझे बहला रहे हैं.",उसने काँपती आवाज़ मे कहा.

"हां,मेरा फ़र्ज़ है कि तुम परेशान हो तो तुम्हे बहलाउ लेकिन मैने जो कहा है वो बिल्कुल सच है.चाहो तो आज़मा लेना मुझे.समीर तुम्हे छ्चोड़ेगा & तुम चाहोगी तो मैं तुमसे शादी कर लूँगा."

"महादेव..",रंभा ने काँपते होंठो से बोला & फिर सुबक्ते हुए हाथ छुड़ा के घूम के अपनी पीठ शाह की ओर कर ली..उसकी चाल काम कर गयी थी..अब उसे पता चल सकता था कि कही विजयंत मेहरा के हाल के पीछे इन दोनो का हाथ तो नही था.

शाह जानता था कि मच्चली अब जाल मे फँस चुकी है.उसने रंभा के कंधे पकड़ उसे अपनी ओर घुमाया & अपने आगोश मे भर लिया.रंभा कुच्छ देर उसके सीने पे हाथ रखे मुँह च्छुपाए सिसकने का नाटक करती रही & फिर खामोश हो गयी.शाह उसकी नंगी पीठ सहलाए जा रहा था & जब उसने देखा की उसकी सिसकिया रुक गयी है तो उसने दाए हाथ से उसकी ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा उपर किया.

"तुम्हे पहली बार देखा था तब से तुम्हे पाने की हसरत थी.आज भी यही सोच के तुम्हे दावत दी थी कि शायद मेरी किस्मत मेहेरबान हो जाए.",वो उसकी काली आँखो मे झाँक रहा था,"..& किस्मत मेहेरबान हुई भी तो किस तरह,कहा मुझे बस तुम्हारे साथ बस 1 रात की चाह थी & तुमने अपनी तमाम राते मेरे नाम कर दी.",..कितना शातिर शख्स था?!..& बातो का जाल बुनने मे माहिर..ना जाने आज तक कितनी लड़कियो को इसने इस तरह फाँसा होगा!..2 घंटे भी नही हुए मिले हुए & मुझसे शादी के लिए हां भी करवा ली इसने..तुम इसी बदगुमानी मे रहो,मिस्टर.शाह & देखो मैं तुम्हे कैसे मज़ा चखाती हू!

शाह झुका & रंभा के होंठो से पानी की बूंदे चखने लगा.रंभा ने शर्मा के मुँह बाई तरफ फेरा मगर शाह के हाथ ने उसके गाल को थाम 1 बार फिर उसके चेहरे को अपने सामने किया & इस बार दोनो हाथो मे उसके चेहरे को थाम उसके होंठो को अपने होंठो से सटने पे मजबूर कर दिया.रंभा अपने होठ नही खोल रही थी & बस शाह को उन्हे चूमने दे रही थी मगर थोड़ी देर बाद शाह की ज़ुबान ने इसरार कर-2 के उसके होंठो को खुलवा ही लिया & फिर उसके मुँह मे घुस उसकी ज़ुबान को प्यार करने लगी.

अगर शाह शातिर था तो रंभा भी जिस्मो के खेल की माहिर थी.शुरू मे शरमाती रंभा ने अब ये जताया कि शाह के होंठो ने उसे मस्त कर दिया है & अब वो अपनी शर्मोहाया भूल रही है.उसने अपने हाथ शाह के कंधो पे जमा दिए & उसकी किस का जवाब देने लगी.शाह के हाथ पानी के नीचे उसकी नंगी पीठ को सहला रहे थे.

रंभा 1 भोली-भाली लड़की का नाटक कर रही थी मगर उसे मज़ा बहुत आ रहा था.शाह ने चूमते हुए हाथो का दबाव बढ़ाया & रंभा को खुद से सटा लिया.उसका खड़ा लंड रंभा के पेट पे दब गया तो रंभा की चूत मे भी कसक उठने लगी.ठंडे पानी मे शाह के जिस्म का गर्म एहसास उसे रोमांच से भर रहा था.काफ़ी देर बाद रंभा ने सांस लेने के लिए होंठ लगा किए तो शाह ने उसके खूबसूरत चेहरे पे किस्सस की झड़ी लगा दी.

"छ्चोड़िए ना!..कही कोई आ गया तो?",रंभा ने उसे शरमाते हुए परे धकेलने की नाकाम कोशिश की.

"यहा कौन आएगा?",शाह उसके गाल चूमते हुए उसकी गर्दन पे गया था & उसकी कमर के मांसल हिस्सो को दबा रहा था.

"कोई नौकर..& वो आपका ड्राइवर..आहह..!",शाह ने उसके क्लीवेज पे अपने तपते होंठ रख दिए थे.

"मैने सबको घर से बाहर भेज दिया है.मैं तुम्हारे साथ 1-1 पल का भरपूर लुत्फ़ उठाना चाहता हू.",शाह ने उसे खुद से बिल्कुल चिपका लिया तो रंभा भी मस्ती मे भर गयी & अपनी आँखे बंद कर ली & उसकी हर्कतो का मज़ा लेने लगी.शाह उसके पूरे जिस्म को च्छुना चाहता था,चूमना चाहता था मगर पूल मे ये मुमकिन नही था.उसने रंभा को उठाया & पूल से निकाल के फर्श पे लिटा दिया.वो बुड्ढ़ा था मगर कमज़ोर नही.रंभा उसकी इस हरकत पे खुश हुई-शाह मे दम-खाँ था & रंभा को बिस्तर मे उस से खुश होने का नाटक नही करना पड़ेगा बल्कि बहुत मुमकिन था कि शाह उसे भरपूर मज़ा दे.

अब रंभा ज़मीन पे लेटी थी & शाह पूल मे खड़े-2 ही उसके होंठ चूम रहा था & उसके स्विमस्यूट से ढँके पेट को सहला रहा था.रंभा दाए हाथ से उसके सर को थामे थी & बाए को उसके पेट पे चलते हाथ के उपर रखे थी.शाह ने उसके होंठो को छ्चोड़ा & फिर उसके बाए हाथ को थाम उसकी गुदाज़ बाँह को चूमने लगा.उसकी दोनो बाहो को चूमने के बाद उसने रंभा को पलटा & पूल से निकल घुटनो पे बैठ उसकी गीली पीठ को अपने गर्म लबो से सुखाने लगा.रंभा उसके चूमने से कांप रही थी & उसकी पीठ की थरथराहट देख शाह भी जोश मे पागल हुआ जा रहा था.उसने स्विमस्यूट के स्ट्रॅप्स उसके कंधो से सरकाए & रंभा को घुमा के सीधा किया.

रंभा अब थोड़ी घबराई निगाहो से उसे देख रही थी & उसने अपने हाथ अपने सीने पे रख लिए थे.शाह की आँखो मे वासना थी.रंभा का उभरा सीना जिस तरह से उपर-नीचे हो रहा था & घबराते हुए उसने जिस तरह उसे च्छुपाया था-ये सब उसके जोश को बढ़ा रहे थे.उसने मुस्कुराते हुए उसके हाथो को सीने से हटाया & उसके स्ट्रॅप्स को पूरा नीचे खिचते हुए उसके स्विमस्यूट को उसकी कमर तक कर दिया.सामने का नज़ारा देख शाह का हलक सुख गया.वो जानता था कि रंभा बेहद हसीन है मगर उसका जिस्म इतना नशीला,इतना दिलकश होगा,इसका अंदाज़ा उसे नही था.रंभा की गोरी,मोटी छातियाँ उसके सामने उपर-नीचे हो रही थी,उनके गुलाबी निपल्स बिल्कुल कड़े उसे अपनी ओर बुलाते दिख रहे थे.उसका सपाट पेट थरथरा रहा था & उसके बीच उसकी गोल,गहरी नाभि जैसे उसकी ज़ुबान के इंतेज़ार मे ही थी.

घुटनो पे बैठ के महादेव शाह ने रंभा की छातियो को अपने हाथो से हल्के से दबाया तो उसके मुँह से आह निकल गयी & उसने अपनी छातियो पे दबे उसके दोनो हाथो को पकड़ लिया.शाह ने उसके हाथो को उठाके चूमा & फिर उन्हे उसके सर के उपर ले जाते हुए ज़मीन से लगाया & फिर रंभा के दाई तरफ लेट गया & अपने बाए हाथो मे उसके दोनो हाथो को पकड़ के उसके सीने पे झुक गया.उसने दाए हाथ मे उसकी बाई चूची को भरा & अपने मुँह को उसकी दाई चूची से लगा दिया.

बुंगले का वो खुला हिस्सा रंभा की मस्त आहो से गुलज़ार हो गया.शाह उसकी 1 चूची को मसलते हुए दूसरी को चूस रहा था.रंभा का दिल तो कर रहा था की उसके बालो को नोचे,उसकी पीठ को खरोन्चे मगर उसके हाथ शाह की गिरफ़्त मे थे & वो बेबस थी लेकिन ये बेबसी भी उसे अलग ही मज़ा दे रही थी.शाह तो उसकी चूचियो को देख पागल हो गया था.वो उन्हे पूरा का पूरा मुँह मे भर चूस रहा था & बीच-2 मे हल्के-2 दन्तो से काट भी रहा था.उसके निपल्स को वो दन्तो मे पकड़ उपर खींचता तो रंभा को हल्का दर्द होता मगर उस से भी कही ज़्यादा मस्ती का एहसास होता.

वो च्चटपटा रही थी & अपनी कसी जंघे आपस मे रगड़ रही थी.उसकी चूत की कसमसाहट अब बहुत बढ़ गयी थी.शाह उसके निपल्स को उंगलियो मे पकड़ के मसलते हुए चूचियो के उभारो के नीचे चूम रहा था & जीभ से छेड़ रहा था.उसने दोनो चूचियो के बीच मुँह घुसा के रगड़ा & वाहा भी चूसने लगा.वो रंभा के सीने पे अपने होंठो & दन्तो के निशान छ्चोड़ते जा रहा था & रंभा अब मस्ती मे सुबक्ते हुए च्चटपटा रही थी.उसकी चूत की कसक बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी & उसने बेचैन हो अपनी कमर उचकानी शुरू कर दी & बहुत जोरो से सिसकने लगी.शाह समझ गया कि वो झड़ने वाली है & उसने उसकी चूचियो को चूसना & तेज़ कर दिया अगले ही पल रंभा सिसकते हुए झाड़ गयी.

शाह ने उसके हाथ छ्चोड़े तो रंभा ने उसकी गर्दन को पकड़ उसे नीचे खीचा & उसे बड़ी शिद्दत से चूमने लगी.शाह केवल बाते बनाना ही नही जानता था वो 1 लड़की के जिस्म से खेल उसे खुश करना भी जानता था.रंभा ने उसके मुँह मे ज़ुबान घुसाई & फिर उसकी ज़ुबान को जम के चूसा.

काफ़ी देर तक चूमने के बाद शाह ने उसके होंठ छ्चोड़े & दोनो चूचियो पे 1-1 किस दी.उसके बाद वो नीचे गया & उसके गोरे पेट को चूमने लगा.रंभा जैसी हसीन लड़की से वो आज तक नही मिला था & उसके नशीले जिस्म के साथ खेलना उसके लिए बिल्कुल अनोखा & रोमांचकारी एहसास था.

रंभा 1 बार फिर आहे भरती हुई कसमसाने लगी थी.शाह की ज़ुबान उसके पेट को अपनी नोक से छेड़ते हुए उसकी नाभि मे उतर गयी थी & उसे चाट रही थी.रंभा उसके सर को पकड़े बेचैनी से अपने पेट से अलग करना चाह रही थी.उसकी ज़ुबान की हरकते उसे पागल कर रही थी मगर शाह भी उसके हाथो की परवाह ना करता हुआ उसके पेट पे जुटा हुआ था.जब रंभा 1 बार फिर मस्ती मे नही डूब गयी शाह ने उसकी नाभि से जीभ नही निकाली.

रंभा अब नशीली आँखो से उसे देख रही थी.उसका दिल कर रहा था की जल्दी से वो उसकी बिकिनी को उतारे & उसकी प्यासी चूत को प्यार करे.शाह ने उसके पेट से सर उठाया & उसकी तरफ देखा & जैसे उसकी आँखो मे झलक रही उसकी हसरत को पढ़ लिया.उसने उसकी कमर पे अटकी बिकिनी को नीचे खींचा तो रंभा ने अपनी गंद उठा दी.अगले ही पल वो अपने नये प्रेमी के सामने बिल्कुल नंगी थी.

रंभा के हाथ 1 बार फिर उसके सीने पे आ गये थे & वो बस शाह की अगली हरकत का इंतेज़ार कर रही थी.शाह ने उसकी चूत को देखा-ऐसी चिकनी,गुलाबी,नाज़ुक & कसी चूत उसने अपनी ज़िंदगी मे पहले कभी नही देखी थी.आज वो इस से जी भर के खेलेगा मगर उस से पहले उसे उसकी जाँघो & टाँगो का स्वाद चखना था जिन्होने शाम से ही लुभा & ललचा के उसका बुरा हाल किया हुआ था.

उसने रंभा की जाँघो को सहलाया तो उसने अपने घुटने उपर मोड़ दिए.शाह उसके उठे डाए घुटने को चूमने लगा & उसके हाथ रंभा की टांगो से लेके जाँघो के अन्द्रुनि हिस्सो पे घूमने लगे.रंभा च्चटपतती हुई अपने बालो से खेलते हुए आहे भर रही थी & अपनी जाँघो को आपस मे रगड़ अपनी चूत को शांत करने की कोशिश कर रही थी.

शाह उसके घुटने से नीचे उसकी मोटी जाँघ पे आया & चूमने के साथ-2 उसकी गुदाज़ जाँघ को चूसने भी लगा.रंभा तो मस्ती मे पागल ही हो गयी.शाह तुरंत अपने घुटनो पे बैठ गया & उसकी दाई टांग को हवा मे उठा दिया & फिर उसकी जाँघ के निचले हिस्से को चूमने,चाटने लगा.रंभा ने बाया हाथ बढ़ा उसके बाल पकड़ लिए & नोचने लगी.

आसमान के सितारे शाह की किस्मत से रश्क कर रहे थे & चाँद रंभा के हुस्न को देख जल गया & कुच्छ बादलो के पीछे च्छूप गया.ठंडी हवा के झोंके ने रंभा के जिस्म को कंपा दिया मगर शाह की हर्कतो ने उसके बदन की गर्मी को बढ़ाए रखा था.

शाह ने उसकी जाँघ चूमते हुए उसके नीचे हाथ लगा उसे पलट दिया & फिर उसकी चौड़ी गंद पे हाथ फिराने लगा.उसने उसकी गंद पे हल्की-2 च्पते लगानी शुरू की & उन चपतो पे जिस दिलकश अंदाज़ मे वो थरथराती,उसे देख उसका लंड उसके ट्रंक्स मे & कुलबुलाने लगा.शाह झुका & उसकी कमर के मांसल हिस्सो को दबाते हुए उसकी गंद की फांको को चूमने लगा.रंभा अपनी कोहनियो पे उचक अपने सर को झटकती आहे भरने लगी.

शाह उसकी फांको को भींचते हुए चूम रहा था & उसकी छातियो की तरह यहा भी अपने दन्तो से हल्के-2 काट रहा था.रंभा की मस्ती बा बहुत बढ़ गयी थी & उसने कमर हिला पानी चूत को ठंडी ज़मीन पे दबा उसका इज़हार किया.शाह भी जाल मे ताज़ा-2 फँसी मच्चली की च्चटपटाहत देख उसकी बेचैनी का सबब समझ गया & उसने उसे पलट के सीधा किया & उसकी टाँगे खोल दी.

रंभा की चूत से बहता रस उसकी जाँघो पे टपक आया था.उसने पहले उसकी जाँघो से उसे सॉफ किया & फिर उसकी गुलाबी चूत मे अपनी ज़ुबान उतार उसे सुड़कने लगा.रंभा की टाँगे अपने-आप हवा मे उठ गयी & वो उसके सर को पकड़ अपनी चूत पे भींचती,कमर उचकती चीखने लगी.शाह उसकी गंद के नीचे हाथ लगाए उसे हवा मे उठाके उसकी चूत को ज़ोर-2 से अपनी लपलपाति जीभ से चाट रहा था.रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ रही थी.उसने शाह के बाल पकड़ के उसे अपनी चूत पे बहुत ज़ोर से दबाते हुए कमर उचकाई & झाड़ गयी.काफ़ी देर तक रंभा झड़ने की खुमारी मे सिसकती रही & शाह भी उसकी चूत चाटता रहा.जब उसकी सिसकिया रुकी तो शाह उपर आया & उसे चूमने लगा.रंभा ने भी उसे बाँहो मे भर लिया & चूमने मे उसका साथ देने लगी.इस वक़्त शाह शक़ के दायरे मे खड़ा शख्स नही बस 1 मर्द था जो उसे भरपूर जिस्मानी खुशी से रूबरू करवा रहा था.

शाह ने किस तोड़ी & उसे अपनी बाहो मे उठा लिया.रंभा ने अपनी बाँहे उसके गले मे डाल दी & उसे चूमने लगी.शाह उसे लेके बंगल के अंदर अपने बेडरूम मे ले आया & बिस्तर पे लिटा दिया.

रंभा उस आलीशान बेडरूम को देखने लगी.कमरे की 1 दीवार पे बड़ा सा आईना लगा था जोकि दर-असल उसके पार बाथरूम का दरवाज़ा था.जिस पलंग पे रंभा लेटी थी वो बहुत बड़ा था & उसपे मखमली चादर बिछि थी जिसका मुलायम एहसास उसके रूमानी ख़यालो को & भड़का रहा था.कमरे की सजावट देख के ही लगता था कि शाह बहुत रंगीन मिजाज़ आदमी है & इस बिस्तर पे उसने कयि लड़कियो को चोदा होगा.

रंभा ने दाई तरफ लगे बड़े शीशे मे देखा तो पाया की बिस्तर पे की जाने वाली 1-1 हरकत उसमे सॉफ दिखती थी.उसका दिल खुद को शाह की बाहो मे उस से चुद्ते देखने के ख़याल से ही मस्ती मे भर उठा.शाह उसे देखते हुए मुस्कुरा रहा था.जवाब मे रंभा भी मुस्कुराइ तो शाह उसके सर के पास आ खड़ा हुआ.

उसने रंभा की आँखो मे देखते हुए उसका दाया हाथ पकड़ के अपने स्विम्मिंग ट्रंक्स पे रखा तो रंभा ने हाथ पीछे खींचने की कोशिश करते हुए शरमाने का नाटक करते हुए आँखे बंद कर ली जबकि उसका दिल तो बड़ी देर से शाह के लंड को देखने के लिए मचल रहा था.

शाह ने उसके हाथ को पकड़ के अपनी ब्रीफ पे दबाया & वही पकड़े रखा.रंभा वैसे ही आँखे बंद किए गर्दन घुमाए पड़ी रही.शाह ने दूसरे हाथ से अपने ट्रंक्स नीचे सरकाए & अपना नंगा लंड रंभा के हाथ मे थमाया & फिर उसकी ठुड्डी पकड़ चेहरा अपनी ओर किया,"ज़रा देखो तो जान कैसे पागल हो रहा है ये तुम्हारे लिए."

"उन..हूँ..मुझे शर्म आती है.",रंभा ने मुँह फेर लिया & बया हाथ अपने चेहरे पे रख अपनी हया का इज़हार किया.शाह घुटनो के बल बिस्तर पे चढ़ा & अपना लंड उसके चेहरे के बिल्कुल करीब ले गया & उसका चेहरा फिर अपनी ओर घुमाया.

"बस 1 बार देख तो लो इसे.",थोड़ी मान-मनुहार के बाद रंभा ने अपनी आँखे खोली & शाह के लंड को देखा.शाह का लंड 9 इंच लंबा था.हाथो मे लेते ही रंभा को उसकी मोटाई का एहसास हो गया था मगर आँखे खोलने पे जब उसने उसे देखा तो उसकी आँखे हैरत से फैल गयी.इतना मोटा लंड ना तो देवेन का था ना ही विजयंत मेहरा का,"कैसा लगा?",रंभा उसके सवाल पे शरमाते हुए मुस्कुराइ & हाथ लंड से खींचने लगी मगर शाह ने उसे ऐसा नही करने दिया.

"क्या हुआ पसंद नही आया,जान?",शाह के सवाल पे रंभा ने & शरमाने का नाटक किया.शाह उसकी इन अदाओं से जोश मे पागल हो गया था,"..अब तो ये सिर्फ़ तुम्हारा है,मेरी रानी!",उसकी आवाज़ बिल्कुल जोश से भरी हुई थी,"इसे प्यार तो करो.",उसने रंभा का चेहरा थाम लंड को आगे ला उसके गाल से सताया.

"धात!",रंभा ने शरमाते हुए उसे झिड़का मगर लंड के चेहरे से सताते ही वो उसे मुँह मे भरने को पागल हो उठी थी.शाह झुका & उसे चूमा & फिर उसे लंड हिलाने को कहा.रंभा ने धीमे-2 लंड हिलाना शुरू किया तो शाह आहे भरने लगा.उसने रंभा का सर पकड़ा & फिर लंड को उसके होंठो पे रगड़ने लगा.रंभा ना-नुकर कर रही थी & उसकी शर्म,उसकी झिझक शाह की हवस की आग मे घी का काम कर रही थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--82

gataank se aage......

"kya baat hai,rambha?",usna daya hath rambha ke daye kandhe pe rakha,"..meri baat buri lagi to mafi chahta hu."

"aisi baato ka kya fayda,shah sahab jab ye jis najam tak hume le jati hain main vaha ja nahi sakti.",rambha ne aadha jism ghumaya & udasi se boli.

"magar kyu nahi ja sakti?",shah ne use apni or pura ghumaya & uske dono kandho pe apne hath jama diye,"..main tumhare layak nahi kya isiliye?"

"nahi-2..",rambha ne pareshan ho uski taraf dekha,"..ye baat nahi par..",usne baat adhuri chhod fir se nazre jhuka li.

"to kya baat hai?!",shah ne use jhakjhora.

"mujhe..mujhe darr lagta hai.",rambha ne dhimi aavaz me kaha.

"kis baat se darr lagta hai?"

"kahi kisi ko pata chal gaya to?",rambha ne uski or pareshan nigaho se dekha.

"to?!..to achha hoga..fir main humesha tumhare sath reh sakta hu.",shah ne uske hath tham liye.

"pagal mat baniye.main shadishuda hu."

"jo aadmi tumhari kadr nahi karta,tumhe chhod kisi & ki baaho me ghusa rehta hai,uske chalte tum meri mohabbat thukra rahi ho!",rambha ne use aise dekha jaise use hairat hui ho ki shah ko kaise pata chala Sameer ki harkato ke bare me,"haan,mujhe pata hai sab kuchh.ab batao,us insan ke liye tum na bol rahi ho?"

"nahi..",rambha bahut pashopesh me hone ka natak kar rahi thi,"..dekhiye shah sahab,aap Pranav ko jante hai na?"

"haan."

"to main & vo..",rambha ne fir nazre neechi akr li.

"haan to kya hua?",rambha ne jaise socha tha guftgu vaise hi aage badh rahi thi.

"to ab aapke sath ye sab..shah sahab,kal ko sameer & main alag ho jayenge tab mera kya hoga?..kya main pranav se lek aapke bistar tak ghumti rahungi?..yehi vajud reh jayega mera?!",rambha ki aankho me gusse ke sath-2 pani chhalchhala aaya tha.

"nahi,aisa nahi hoga.",shah bahut gambhir aavaz me bola,"..mujhe pata hai tumhare & pranav ke bare me.tum kiske sath kya rishta rakhti ho,ye tumhara faisla hoga magar agar tum chahogi to..",shah ke dimagh me rambha ki baat se bijli kaundhi thi-agar rambha maan gayi toi use pranav ya kisi & ki koi zarurat nahi rahegi & uska kaam bhi ho jayega,"..mahadev shah ye vada karta hai ki tumhe apni dulhan banayega & apni aakhiri sans tak tumhare sath rahega."..haan..haan..jab karodo ke shares leke dahej me aaoongi to dulhan to banaoge hi!..rambha ne man hi man socha.

"aap..aap mujhe behla rahe hain.",usne kanpti aavaz me kaha.

"haan,mera farz hai ki tum pareshan ho to tumhe behlaoon lekin maine jo kaha hai vo bilkul sach hai.chaho to aazma lena mujhe.sameer tumhe chhodega & tum chahogi to main tumse shadi kar lunga."

"mahadev..",rambha ne kanpte hotho se bola & fir subakte hue hath chhuda ke ghum ke apni pith shah ki or kar li..uski chaal kaam kar gayi thi..ab use pata chal sakta tha ki kahi Vijayant Mehra ke haal ke peechhe in dono ka hath to nahi tha.

shah janta tha ki machhli ab jaal me phans chuki hai.usne rambha ke kandhe pakad use apni or ghumaya & apne agosh me bhar liya.rambha kuchh der uske seene pe hath rakhe munh chhupaye sisakne ka natk karti rahi & fir khamosh ho gayi.shah uski nangi pith sehlaye ja raha tha & jab usne dekha ki uski siskiya ruk gayi hai to usne daye hath se uski thuddi pakad uska chehra upar kiya.

"tumhe pehli baar dekha tha tab se tumhe pane ki hasrat thi.aaj bhi yehi soch ke tumhe dawat di thi ki shayad meri kismat meherban ho jaye.",vo uski kali aankho me jhank raha tha,"..& kismat meherban hui bhi to kis tarah,kaha mujhe bas tumhare sath bas 1 raat ki chah thi & tumne apni tamam raate mere naam kar di.",..kitna shatir shakhs thai?!..& baato ka jaal bunane me mahir..na jane aaj tak kitni ladkiyo ko isne is tarah phansa hoga!..2 ghante bhi nahi hue mile hue & mujhse shadi ke liye haan bhi karwa li isne..tum isi badgumani me raho,mr.shah & dekho main tumhe kaise maza chakhati hu!

shah jhuka & ramnbha ke hotho se pani ki boonde chakhne laga.rambha ne sharma ke munh bayi taraf fera magar shah ke hath ne uske gaal ko tham 1 baar fir uske chehre ko apne samne kiya & is baar dono hatho me uske chehre ko tham uske hotho ko apne hotho se satne pe majbur kar diya.rambha apne hotnh nahi khol rahi thi & bas shah ko unhe chumne de rahi thi magar thodi der baad shah ki zuban ne israr kar-2 ke uske hotho ko khulwa hi liya & fir uske munh me ghus uski zuban ko pyar karne lagi.

agar shah shatir tha to rambha bhi jismo ke khel ki maahir thi.shuru me sharmati rambha ne ab ye jataya ki shah ke hotho ne use mast kar diya hai & ab vo apni sharmohaya bhul rahi hai.usne apne hath shah ke kandho pe jama diye & uski kiss ka jawab dene lagi.shah ke hath pani ke neeche uski nangi pith ko sehla rahe the.

rambha 1 bholi-bhali ladki ka natak kar rahi thi magar use maza bahut aa raha tha.shah ne chumte hue hatho ka dabav badhaya & rambha ko khud se sata liya.uska khada lund rambha ke pet pe dab gaya to rambha ki chut me bhi kasak uthne lagi.thande pani me shah ke jism ka garm ehsas use romnach se bhar raha tha.kafi der baad rambha ne sans lene ke liye honth laga kiye to shah ne uske khubsurat chehre pe kisses ki jhadi laga di.

"chhodiye na!..kahi koi aa gaya to?",rambha ne use sharmate hue pare dhakelne ki nakaam koshish ki.

"yaha kaun aayega?",shah uske gaal chumte hue uski gardan pe gaya tha & uski kamar ke mansal hisso ko daba raha tha.

"koi naukar..& vo aapka driver..aahhhhh..!",shah ne uske cleavage pe apne tapte honth rakh diye the.

"maine sabko ghar se bahar bhej diya hai.main tumhare sath 1-1 pal ka bharpur lutf uthana chahta hu.",shah ne use khud se bilkul chipka liya to rambha bhi masti me bhar gayi & apni aankhe badn kar li & uski harkato ka maza lene lagi.shah uske pure jism ko chhuna chhata tha,chumna chhata tha magar pool me ye mumkin nahi tha.usne rambha ko uthaya & pool se nikal ke farsh pe lita diya.vo buddha tha magar kamzor nahi.rambha uski is harkat pe khush hui-shah me dum-khum tha & rambha ko bistar me us se khush hone ka natak nahi karna padega balki bahut mumkin tha ki shah use bharpur maza de.

ab rambha zamin pe leti thi & shah pool me khade-2 hi uske honth chum raha tha & uske swimsuit se dhanke pet ko sehla raha tha.rambha daye hath se uske sar ko thame thi & baye ko uske pet pe chalte hath ke upar rakhe thi.shah ne uske hontho ko chhoda & fir uske baye hath ko tham uski gudaz banh ko chumne laga.uski dono baaho ko chumne ke baad usne rambha ko palta & pool se nikal ghutno pe baith uski gili pith ko apne garm labo se sukhane laga.rambha uske chumne se kanp rahi thi & uski pith ki thartharahat dekh shah bhi josh me pagal hua ja raha tha.usne swimsuit ke straps uske kandhos e sarkaye & rambha ko ghuma ke seedha kiya.

rambha ab thodi ghabrayi nigaho se use dekh rahi thi & usne apne hath apne seene pe rakh liye the.shah ki aankho me vasna thi.rambha ka ubhra seena jis tarah se upar-neeche ho raha tha & ghabrate hue usne jis tarah use chhupaya tha-ye sab uske josh ko badha rahe the.usne muskurate hue uske hatho ko seene se hataya & uske straps ko pura neech ekhinchte hue uske swimsuit ko uski kamar tak kar diya.samne ka nazara dekh shah ka halak sukh gaya.vo janta tha ki rambha behad haseen hai magar uska jism itna nashila,itna dilkash hoga,iska andaza use nahi tha.rambha ki gori,moti chhatiya uske samne upar-neeche ho rahi thi,unke gulabi nipples bilkul kade use apni or bulate dikh rahe the.usk sapat pet tharthara raha tha & uske beech uski gol,gehri nabhi jaise uski zuban ke intezar me hi thi.

Ghutno pe baith ke Mahadev Shah ne rambha ki chhatiyo ko apne hatho se halke se dabaya to uske munh se aah nikal gayi & usne apni chhatiyo pe dabe uske dono hatho ko pakad liya.shah ne uske hatho ko uthake chuma & fir une uske sar ke upar le jate hue zamin se lagaya & fir rambha ke dayi taraf let gaya & apne baye hatho me uske dono hatho ko pakad ke uske seene pe jhuk gaya.usne daye hath me uski bayi choohi ko bhara & apne munh ko uski dayi choochi se laga diya.

bungle ka vo khula hissa rambha ki mast aaho se gulzar ho gaya.shah uski 1 choochi ko maslate hue dusri ko chus raha tha.rambha ka dil to kar raha tha ki uske baalo ko noche,uski pith ko kharonche magar uske hath shah ki giraft me the & vo bebas thi lekin ye bebasi bhi use alag hi maza de rahi thi.shah to uski choochiyo ko dekh pagal ho gaya tha.vo unhe pura ka pura munh me bhar chus raha tha & beech-2 me halke-2 danto se kaat bhi raha tha.uske nipples ko vo danto me pakad upar khincta to rambha ko halka dard hota magar us se bhi kahi zyada masti ka ehsas hota.

vo chhatpata rahi thi & apni kasi janghe aapas me ragad rahi thi.uski chut ki kasmasahat ab bahut badh gayi thi.shah uske nipples ko ungliyo me pakad ke maslate hue choochiyo ke ubharo ke neeche chum raha tha & jibh se chhed raha tha.usne dono choochiyo ke beech munh ghusa ke ragda & vaha bhi chusne laga.vo rambha ke seene pe apne hotho & danto ke nishan chhodte ja raha tha & rambha ab masti me subakte hue chhatapata rahi thi.uski chut ki kasak bahut zyada badh gayi thi & usne bechain ho apni kamar uchakni shuru akr di & bahut zro se sisakne lagi.shah samajh gaya ki vo jhadne vali hai & usne uski choochiyo ko chusna & tez kar diya.gale hi pal rambha sisakte hue jhad gayi.

shah ne uske hath chhode to rambha ne uski gardam ko pakad use neehc ekhincha & use badi shiddat se chumne lagi.shah keval baate banana hi nahi janta tha vo 1 ladki ke jism se khel use khush karna bhi janta tha.rambha ne uske munh me zuban ghusayi & fir uski zuban ko jum ke chusa.

kafi der tak chumne ke baad shah ne uske honth chhode & dono chhatiyo pe 1-1 kiss di.uske baad vo neeche gaya & uske gore pet ko chumne laga.rambha jaisi haseen ladki se vo aaj tak nahi mila tha & uske nashile jism ke sath khelna uske liye bilkul anokha & romanchkari ehsas tha.

rambha 1 baar fir aahe bharti hui kasmasane lagi thi.shah ki zuban uske pet ko apni nok se chhedte hue uski nabhi me utar gayi thi & use chaat rahi thi.rambha uske sar ko pakde bechaini se apne pet se alag karna chah rahi thi.uski zuban ki harkate use pagal kar rahi thi magar shah bhi uske hatho ki parvah na karta hua uske pet pe juta hua tha.jab rambha 1 baar fir masti me nahi dub gayi shah ne uski nabhi se jibh nahi nikali.

rambha ab nashili aankho se use dekh rahi thi.uska dil kar raha tha ki jaldi se vo uski bikini ko utare & uski pyasi chut ko pyar kare.shah ne uske pet se sar uthaya & uski taraf dekha & jaise uski aankho me jhalak rahi uski hasrat ko padh liya.usne uski kamar pe atki bikini ko neeche khincha to rambha ne apni gand utha di.agle hi pal vo apne naye premi ke samne bilkul nangi thi.

rambha ke hath 1 baar fir uske seene pe aa gaye the & vo bas shah ki agli harkat ka intezar kar rahi thi.shah ne uski chut ko dekha-aisi chikni,gulabi,nazuk & kasi chut usne apni zindagi me pehle kabhi nahi dekhi thi.aaj vo is se ji bhar ke khelega magar us se pehle use uski jangho & tango ka swad chakhna tha jinhone sham se hi lubha & lalcha ke uska bura haal kiya hua tha.

usne rambha ki jangho ko sehlaya to usne apne ghutne upar mod diye.shah uske uthe daye ghutne ko chumne laga & uske hath rambha ki tango se leke jangho ke andruni hisso pe ghumne lage.rambha chhatapatati hui apne baalo se khelte hue aahe bhar rahi thi & apni jangho ko apas me ragad apni chut ko shant karne ki koshish kar rahi thi.

shah uske ghutne se neeche uski moti jangh pe aaya & chumne ke sath-2 uski gudaz jangh ko chusne bhi laga.rambha to masti me pagal hi ho gayi.shah turant apne ghutno pe baith gaya & uski dayi tang ko hawa me utha diya & fir uski jangh ke nichle hisse ko chumne,chatne laga.rambha ne baya hath badha uske baal pakad liye & nochne lagi.

aasman ke sitare shah ki kismat se rashk kar rahe the & chand rambha ke husn ko dekh jal gaya & kuchh badlo ke peechhe chhup gaya.thandi hawa ke jhonke ne rambha ke jism ko kanpa diya magar shah ki harkato ne uske badan ki garmi ko badhaye rakha tha.

shah ne uski jangh chumte hue uske neeche hath laga use palat diya & fir uski chaudi gand pe hath firane laga.usne uski gand pe halki-2 chpaten lagani shuru ki & un chapato pe jis dilkash andaz me vo thartharati,use dekh uska lund uske trunks me & kulbulane laga.shah jhuka & uski kamar ke mansal hisso ko dabate hue uski gand ki fanko ko chumne laga.rambha apni kohniyo pe uchak apne sar ko jhatakti aahe bahrne lagi.

shah uski fanko ko bhinchte hue chum raha tha & uski chhatiyo ki tarah yaha bhi apne danto se halke-2 kaat raha tha.rambha ki masti ba bahut badh gayi thi & usne kamar hila pani chut ko thandi zamin pe daba uska izhar kiya.shah bhi jaal me taza-2 phansi machhli ki chhatpatahat dekh uski bechaini ka sabab samajh gaya & usne use palat ke seedha kiya & uski tange khol di.

rambha ki chut se behta ras uski jangho pe tapak aaya tha.usne pehle uski jangho se use saaf kiya & fir uski gulabi chut me apni zuban utar use sudakne laga.rambha ki tange apne-aap hawa me uth gayi & vo uske sar ko pakad apni chut pe bhinchti,kamar uchkati chikhne lagi.shah uski gand ke neeche hath lagaye use hawa me uthake uski chut ko zor-2 se apni laplapati jibh se chaat raha tha.rambha ke jism me bijli daud rahi thi.usne shah ke baal pakad ke use apni chut pe bahut zor se dabate hue kamar uchkayi & jhad gayi.kafi der tak rambha jhadne ki khumari me sisakti rahi & shah bhi uski chut chaatata raha.jab uski siskiya ruki to shah upar aaya & use chumne laga.rambha ne bhi use bahao me bhar liya & chumne me usk sath dene lagi.is waqt shah shaq ke dayre me khada shakhs nahi bas 1 mard tha jo use bharpur jismani khushi se rubaru karwa raha tha.

shah ne kiss todi & use apni baaho me utha liya.rambha ne apni bahe uske gale me daal di & use chumne lagi.shah use leke bungle ke andar apne bedroom me le aaya & bistar pe lita diya.

rambha us aalishan bedroom ko dekhne lagi.kamre ki 1 deewar pe bada sa aaina laga tha joki darasla uske paar bathroom ka darwaza tha.jis palang pe rambha leti thi vo bahut bada tha & uspe makhmali chadar bichhi thi jiska mulayam ehsas uske rumani khayalo ko & bhadka raha tha.kamre ki sajawat dekh ke hi lagta tha ki shah bahut rangin mijaz aadmi hai & is bistar pe usne kayi ladkiyo ko choda hoga.

rambha ne dayi taraf lage bade shishe me dekha to paya ki bistar pe ki jane vali 1-1 harkat usme saaf dikhti thi.uska dil khud ko shah ki baaho me us se chudte dekhne ke khayal se hi masti me bhar utha.shah use dekhte hue muskura raha tha.jawab me rambha bhi muskurayi to shah uske sar ke paas aa khada hua.

usne rambha ki aankho me dekhte hue uska daya hath pakad ke apne swimming trunks pe rakha to rambha ne hath peechhe khinchne ki koshish karte hue shamramne ka natak karte hue aankhe band kar li jabki uska dil to badi der se shah ke lund ko dekhne ke liye machal raha tha.

shah ne uske hath ko pakad ke apni brief pe dabaya & vahi pakde rakha.rambha vaise hi aankhe band kiye gardan ghumaye padi rahi.shah ne dusre hath se apne trunks neeche sarkaye & apna nanga lund rambha ke hatyh me thamaya & fir uski thuddi pakad chehra pani or kiya,"zara dekho to jaan kaise pagal ho raha hai ye tumhare liye."

"un..hun..mujhe sharm aati hai.",rambha ne munh fer liya & baya hath apne chehre pe rakh apni haya ka izhar kiya.shah ghutno ke bal bistar pe chadha & apna lund uske chehre ke bilkul karib le gaya & uska chehra fir apni or ghumaya.

"bas 1 baar dekh to lo ise.",thodi maan-manuhar ke baad rambha ne apni aankhe kholi & shah ke lund ko dekha.shah ka lund 9 inch lamba tha.hatho me lete hi rambha ko uski motai ka ehsas ho gaya tha magar aankhe kholne pe jab usne use dekha to uski aankhe hairat se phail gayi.itna mota lund na to Deven ka tha na hi Vijayant Mehra ka,"kaisa laga?",rambha uske sawla pe sahrmate hue muskurayi & hath lund se khinchne lagi magar shah ne use aisa nahi karne diya.

"kya hua pasand nahi aay,jaan?",shah ke sawal pe rambha ne & sharmane ka natak kiya.shah uski in adaon se josh me pagal ho gaya tha,"..ab to ye srif tumhara hai,merir ani!",uski aavaz bilkul josh se bhari hui thi,"ise pyar to karo.",usne rambha ka chehra tham lund ko aage la uske gaal se sataya.

"dhat!",rambha ne sharmate hue sue jhidka magar lund ke chehre se satate hi vo use munh me bharne ko pagal ho uthi thi.shah jhuka & use hcuma & fir use lund hilane ko kaha.rambha ne dhime-2 lund hilana shuru kiya to shah aahe bharne laga.usne rambha ka sar pakda & fir lund ko uske hotho pe ragadne laga.rambha na-nukar kar rahi thi & uski sharm,uski jhijhak shah ki hawas ki aag me ghee ka kaam kar rahi thi.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:06

जाल पार्ट--83

गतान्क से आगे......

महादेव शाह अपने दाए हाथ मे लंड को पकड़,बाए से रंभा की ठुड्डी थाम उसके गुलाबी होंठो पे अपने लंड को रगड़ रहा था.कुच्छ देर बाद रंभा ने अपने होंठ ज़रा से खोले & उसके सूपदे को चूमा.शाह खुशी से भर गया & उसने लंड को अंदर धकेला,रंभा ने सुपादे को मुँह मे भरा & & फिर चूमा.

"हां..जान..आहह..चूसो..इसे ..प्यार करो..रानी..ओह..!",शाह उसे बढ़ावा देते हुए लंड को उसके मुँह मे धकेल रहा था.थोड़ी देर मे आधा लंड रंभा के मुँह मे था & वो उसकी कमर पकड़े उसे चूस रही थी.शाह उसके सर को थामे उसकी ज़ुल्फो से खेलता खुशी से आहे भर रहा था.रंभा ने कुच्छ देर बाद उसके लंड को बाए हाथ मे थामा & हिलाते हुए उसके सूपदे को चाटने लगी.

शाह तो जैसे जन्नत मे पहुँच गया था.उसे उम्मीद नही थी कि ये लड़की इतनी मस्त होगी.वो उसके आंडो को दबाते हुए लंड को चाट रही थी,उसकी झांतो मे नाक घुसा के मुँह रगड़ रही थी.रंभा भी उस तगड़े लंड को देख जोश मे आ गयी थी.उसके नाज़ुक हाथ मे वो लंड & बड़ा लग रहा था & उसके ज़हन मे ये ख़याल आया कि उसकी कोमल चूत का वो क्या हाल करेगा & वो और मस्त हो गयी.

शाह ने दोनो के जिस्मो को इस तरह घुमाया कि वो शीशे मे रंभा को अपना लंड चूस्ता देख सके.रंभा के लिए भी इस तरह खुद को लंड चूस्ते देखना बड़ा मस्ताना तजुर्बा था.शाह तो पागल ही हो गया था.कुच्छ देर बाद रंभा ने उसका लंड छ्चोड़ दिया,"अब हो गया.",शरमाते हुए वो बिस्तर पेलेट गयी & अपना मुँह तकिये मे च्छूपा लिया.

शाह ने उसकी उभरी गंद को सहलाया तो वो चिहुनकि.शाह ने उसकी टाँगे पकड़ उसे खींचा & उसकी गंद को बिस्तर के किनारे से लगा के टाँगे हवा मे उठा दी.अब वक्त आ गया था उस नज़नीन के जिस्म के साथ मिल इस खेल के सबसे मस्त हिस्से को अंजाम दे भरपूर मज़ा पाने का.रंभा धड़कते दिल के साथ अधखुली आँखो से उसे देख रही थी.

शाह ने उसकी टाँगे उठा के उसकी जाँघो के निचले हिस्से को पकड़ उसकी चूत को बिल्कुल नुमाया किया & फिर लंड को चूत पे रख दिया.जैसे ही लंड चूत से सटा रंभा की कमर अपने आप उचकी मानो कह रही हो की लंड को फ़ौरन चूत मे घुसाओ!शाह ने उसकी जाँघो के निचले हिस्सो पे हथेलिया जमा के आगे झुकना शुरू किया & कमरे मे रंभा की आह गूँज उठी.

"आहह..!",मोटा लंड उसकी चूत को बुरी तरह फैला रहा था & वो दर्द & मज़े मे कराह रही थी.उसका जिस्म कमान की तरह मूड गया & उसने सर पीछे ले जाके आँखे बंद कर ली थी.शाह धीरे-2 लंड को जड तक उसकी चूत मे उतार रहा था & पूरा अंदर जाते ही वैसे ही उसकी जाँघो को पकड़ वो ज़ोर-2 से धक्के लगाने लगा.

रंभा मस्ती मे चीखने लगी.लंड उसकी चूत की दीवारो को बुरी तरह रगड़ रहा था & वो मस्ती मे कभी अपने बाल नोचती तो कभी शाह के सीने को कराह रही थी.शाह भी उसकी चूत की कसावट से हैरान हो गया था & उसके धक्के भी खुद बा खुद तेज़ हो गये थे.इतना मस्ताना एहसास आज तक किसी लड़की की चुदाई मे उसे नही हुआ था.

उसके दिल मे खुद को इस हुसनपरी को चोद्ते हुए देखने की ख्वाहिश जागी & उसने उसकी जंघे छ्चोड़ी & आगे झुक उसके उपर लेट गया & उसे चूमते हुए चोदने लगा 7 घुटनो के बल बिस्तर पे चढ़ गया.थोड़ी ही देर मे उसने खुद को रंभा के उपर बिस्तर पे इस तरह कर लिया था कि अगर वो बाए & रंभा दाए देखती तो शीशे मे अपनी चुदाई को सॉफ-2 देख सकती थी.

"देखो,मेरी बाहो मे तुम कितनी हसीन लग रही हो,मेरी जान!",शाह ने रंभा के होंठो को चूमा & धक्के लगाते हुए उसका सर दाई तरफ घुमा शीशे की ओर इशारा किया.रंभा ने देखा तो शीशे मे उसे शाह उसके बाए गाल पे अपना दाया गाल जमाए खुशी से भरा उसे चोद्ता दिखा.रंभा नम अपनी बाहे & टाँगे उसके जिस्म पे कस दी & उसकी पीठ नोचने लगी.उसकी मस्ती शीशे मे अपने प्रेमी & अपने अक्स को देख बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी.

"उउन्न्ञनह..महादेव....आननह..!",उसने उसकी गंद को नोचा & उसकी कमर पे टाँगे फँसाए कमर उचकाने लगी.वो पूरी तरह से मदहोश थी.शाह का लंड उसकी कोख पे चोट कर रहा था & वो अब बिकुल बहाल थी.अगले ही पल ज़ोर से चीख मारते वो झाड़ गयी मगर शाह का काम अभी ख़त्म नही हुआ था.

वो झुक के उसकी चूचियाँ अपने हाथो मे दबोच के पीने लगा.उसके धक्के अब धीमे मगर गहरे हो गये थे.रंभा हर धक्के पे कराह उठती.शाह चुदाई मे माहिर था & रंभा उसका भरपूर लुत्फ़ उठा रही थी.शाह उसके बदन से उपर उठ गया & अपने हाथो के सहारे टिक के धक्के लगाने लगा.

रंभा मस्ती मे बेचैन हो उसके सीने के बालो से खेलते हुए उसके निपल्स को छेड़ रही थी.उसके चेहरे पे बस मस्ती ही मस्ती दिख रही थी.उसकी चूत ने झाड़ते वक़्त जो मस्ताना हरकत की थी,शाह उस से खुशी से पागल हो गया था & उस वक़्त उसने दिल ही दिल मे 1 अहम फ़ैसला लिया था.अभी तक वो रंभा को बस 1 मोहरे की तरह इस्तेमाल करना चाह रहा था.उसके ज़रिए वो ट्रस्ट ग्रूप पे क़ब्ज़ा जमाके प्रणव & सारे मेहरा परिवार को किनारे करने की सोच रहा था.अभी भी वो रंभा के ज़रिए ही ग्रूप को हथियाने की सोच रहा था मगर अब किनारे करने वालो मे रंभा का नाम नही था.वो इस लड़की के हस,उसके जिस्म का दीवाना हो चुका था & अब वो उस से शादी कर उसके साथ अपनी बाकी की ज़िंदगी उसके पति & ट्रस्ट के मालिक के रूप मे गुज़रना चाहता था.

रंभा उसके सीने से लेके कंधो तक हाथ चलाते हुए उसके चेहरे को सहला रही थी.उसके हाथ शाह के बालो से खेलने के बाद उसके जिस्म की बगलो से नीचे सरकते & उसकी पुष्ट गंद को दबा लंड को & गहरे धक्के लगाने का इसरार करने लगते.रंभा का जिश्म कांप रहा था & उसके होंठ लरज रहे थे.वो शाह को चूमना चाहती थी & इसके लिए उसने उसकी गर्दन मे हाथ डाला & उचकने लगी.शाह उसकी हसरत समझ गया & उसके हाथ गर्दन से अलग कर घुटनो पे हो गया.

उसने रंभा की गुदाज़ बाहे पकड़ उसे उपर उठाया & अब वो घुटनो पे था & रंभा उसकी कमर पे टाँगे फँसाए उसकी गोद मे बैठ गयी.शाह उसकी मखमली पीठ सहलाते हुए धक्के लगा रहा था & वो उसके कंधो के उपर से बाहे ले जाते हुए उसकी पीठ नोचती मस्ती मे सूबक रही थी.शाह उसकी गंद की मोटी,कसी फांको को मसल रहा था.उसके अंदो मे अब हल्का-2 दर्द हो रहा था जोकि इस बात का इशारा था कि उसका लंड अब और बर्दाश्त करने की हालत मे नही था.

उसने अपने हाथ आगे लाए तो रंभा ने दाई बाँह उसकी गर्दन मे डाली & बाई पीछे ले जा हाथ बिस्तर पे टीका दिया & कमर हिलने लगी.शाह उसकी चूचियो को मसल्ते हुए चूस रहा था.रंभा 1 बार फिर मस्ती के उसी आलम मे पहुँच गयी थी जहा बस नशा ही नशा होता था.शाह ने उसकी चूचियो से खेलने के बाद 1 बार फिर अपने दोनो हाथ उसकी गंद की फांको के नीचे लगाए तो रंभा फिर से उसकी गर्दन मे बाहे डालते हुए उसकी पीठ खरोंछने लगी & कमर उचकाने लगी.

शाह उसे पागलो की तरह चूमने लगा & उसकी गंद मसलने लगा.रंभा के नाख़ून उसकी पीठ छेद रहे थे.उसकी चूत उसके लंड पे सिकुड-फैल रही थी & वो अब खुद पे और काबू नही रख सकता था.दोनो के होंठ आपस मे सिले हुए थे मगर फिर भी दोनो की आहे बाहर आ रही थी.तभी रंभा ने किस्स तोड़ी & उसकी बाहो के सहारे पीछे झुक गयी & ज़ोर से

चीखी.उसका जिस्म कांप रहा था & उसकी कमर बहुत तेज़ी से हिल रही थी.वो झाड़ रही थी & उसकी चूत ने शाह के लंड के उपऱ अपनी मस्तानी हर्कतो को और तेज़ कर दिया था.उसी वक़्त उस हरकत से बहाल शाह ने भी आह भरी & उसका जिस्म झटके खाने लगा.उसका लंड रंभा की चूत मे अपना गाढ़ा,गर्म वीर्य छ्चोड़े जा रहा था.रंभा ने वीर्य को सीधा अपनी कोख मे च्छूटता महसूस किया & सुबक्ते हुए उसके होंठो पे हल्की सी मुस्कान तेर गयी.ये देखा और शाह भी मुस्कुराया & लंबी-2 साँसे लेता हुआ उसने रंभा को बाहो मे भर लिया & दोनो सुकून से भरे जिस्म अपनी साँसे संभालने मे लग गये.

महादेव शाह रंभा के उपर से उतरते हुए दाई करवट पे हुआ तो उसका सिकुदा लंड रंभा की चूत से बाहर आ गया मगर शाह ने अपनी बाई टांग रंभा की जाँघो के बीच घुसाए रखी & उसे बाहो मे भर चूमने लगा.वो रंभा की गंद को बाए हाथ से दबाते हुए उसके दाए कंधे & गर्दन को चूमते हुए शीशे मे देख रहा था.रंभा ने उसकी ये हरकत पकड़ ली & फ़ौरन उसे धकेलते हुए उसके उपर से होती हुई बिस्तर की दूसरी तरफ अपनी दाई करवट पे आ गयी.

“अरे!क्या हुआ?”,शाह ने अपनी दाई टांग उसकी जाँघो के बीच घुसा दाए हाथ से उसकी बाई जाँघ को पकड़ अपनी कमर पे चढ़ाया & उसे सहलाने लगा.

“क्या देख रहे थे आप शीशे मे?”,रंभा ने बनावटी गुस्से से उसके सीने पे मारा.

“तुम्हारी गंद..”,शाह ने उसकी गंद की बाई फाँक को हाथ मे भर के दबाया,”..बहुत मस्त है!& क्या हुआ अगर देख रहा था तो?”

“मुझे अच्छा नही लगता.”,रंभा ने इतराते हुए कहा.

“अच्छा.क्यू?”,शाह का हाथ उसकी गंद से उसके चेहरे पे आ गया था.

“बस ऐसे ही..शर्म आती है.”,रंभा ने लजाने का नाटक करते हुए उसके कंधे मे मुँह च्छूपा लिया.शाह उसकी अदओ के जाल मे अब पूरी तरह फँस चुका था.उसे अब यकीन हो गया था कि रंभा उसपे पूरा भरोसा करने लगी है.उसका दिल खुशी से भर गया..अब ट्रस्ट ग्रूप उसके करीब आता दिख रहा था..जिस दिन ग्रूप उसके हाथ आ गया उस दिन उसका मक़सद पूरा होगा..उस दिन उसके सारे सपने हक़ीक़त मे बदल जाएँगे & फिर कोई जद्दोजहद भी नही रहेगी..फिर वो इस हसीना के साथ ज़िंदगी का भरपूर मज़ा उठाएगा!

“इस सब के बाद भी शर्म आ रही है?”,शाह ने उसके चेहरे को उपर किया & उसके सुर्ख लब चूम लिए.

“हूँ.”,रंभा के गाल मस्ती मे लाल हो रहे थे जिसे शाह उसकी हया समझ रहा था.शाह का लंड फिर से जागने लगा था.उसने रंभा की जाँघ पे हाथ चलते हुए उसके गालो को चूमना शुरू कर दिया.

“उउन्न्ञणन्..सुनिए..”,शाह ने उसकी आवाज़ नही सुनी.वो तो सर झुका के रंभा की चूचियाँ चूमने मे मशगूल था,”..महादेव..सुनिए ना..उउन्न्ञन्..”,रंभा ने उसके बाल पकड़ उसका मुँह अपने सीने से अलग किया & फिर उसे धकेल के बिस्तर पे लिटाया & उसके उपर चढ़ गयी & उसके सीने पे अपनी चूचियाँ दबाते हुए उसके गाल सहलाने लगी,”1 बात पुच्छू आपसे?”

“पुछो.”,शाह उसकी ज़ूल्फेन उसके चेहरे से हटा रहा था.

“आप अपने वादे से मुकरेंगे तो नही?”,रंभा चिंतित नज़र आ रही थी.

“तुम्हे भरोसा नही मुझपे?”,शाह उसकी गुदाज़ बाहें सहला रहा था.

“बात वो नही है पर..मैं 1 बार धोखा खा चुकी हू & अब..”,रंभा ने नज़रे नीची कर ली & शाह के सीने पे 1 उंगली चलाने लगी.

“कहो तो करारनामे पे दस्तख़त कर दू कि तुम ही मेरी दुल्हन बनोगी!”,शाह ने उसे पलटा & उसके उपर सवार हो उसकी आँखो मे झाँका.रंभा उसे खामोशी से देख रही थी..लगता तो था कि ये सच कह रहा है मगर इसका कोई भरोसा नही..पर अभी इसका यकीन करने के अलावा & कोई चारा नही था.

“आप तो बुरा मान गये..”,रंभा ने उसे दोबारा पलटा & उसके उपर आ उसे चूमने लगी,”..मेरी हालत भी तो समझिए..दूध का जला छाछ भी फूँक-2 के पीता है.”,उसके पूरे चेहरे को उसने अपनी किस्सस से ढँक दिया.

“बुरा तो लगा मुझे..”,शाह उसकी कमर सहला रहा था,”..मेरी सच्ची मोहब्बत पे शुबहा किया तुमने.”

“आइ’म सॉरी,डार्लिंग!”,रंभा उसे चूमते हुए उसके सीने पे आ गयी & उसके सीने के बालो मे उंगलिया फिराती उसके निपल्स को हौले-2 काटने लगी. शाह उसकी ज़ूलफे सहला रहा था.रंभा उसके सीने को चूमते हुए नीचे जा रही थी.शाह उसके इरादे को भाँप के खुश हो गया & उसकी उंगलिया रंभा की ज़ुल्फो से & गर्मजोशी से खेलने लगी.रंभा उसके पेट को चूमते हुए उसकी झांतो तक पहुँच चुकी थी,”आइन्दा कभी ये ग़लती नही करूँगी.आप मुझसे खफा मत होइए,प्लीज़!”,मासूमियत से कहते हुए उसने शाह के लंड को मुँह मे भर लिया.

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क्रमशः.......

JAAL paart--83

gataank se aage......

Mahadev Shah apne daye hath me lund ko pakad,baye se Rambha ki thuddi tham uske gulabi hotho pe apne lund ko ragad raha tha.kuchh der baad rambha ne apne honth zara se khole & uske supade ko chuma.shah khushi se bhar gaya & usne lund ko andar dhakela,rambha ne suapde ko munh me bhara & & fir chuma.

"haan..jaan..aahhhhhhh..chuso..ise ..pyar karo..rani..ohhhhhh..!",shah use badhava dete hue lund ko uske munh me dhakel raha tha.thodi der me aadha lund rambha ke munh me tha & vo uski kamar pakde sue chus rahi thi.shah uske sar ko thame uski zulfo se khelta khushi se aahe bhar raha tha.rambha ne kuchh der baad uske lund ko baye hath me thama & hilate hue uske supade ko chatne lagi.

shah to jaise jannat me pahunch gaya tha.use umeed nahi thi ki ye ladki itni mast hogi.vo uske ando ko dabate hue lund ko chaat rahi thi,uski jhanto me naak ghusa ke munh ragad rahi thi.rambha bhi us tagde lund ko dekh josh me aa gayi thi.uske nazuk hath me vo lund & bada lag raha tha & uske zehan me ye khayal aaya ki uski komal chut ka vo kya haal karega & vo & mast ho gayi.

shah ne dono ke jismo ko is tarah ghumaya ki vo shishe me rambha ko apna lund chusta dekh sake.rambha ke liye bhi is tarah khud ko lund chuste dekhna bada mastana tajurba tha.shah to pagal hi ho gaya tha.kuchh der baad rambah ne uska lund chhod diya,"ab ho gaya.",sharmate hue vo bistar pelet gayi & apna munh takiye me chhupa liya.

shah ne uski ubhri gand ko sehlaya to vo chihunki.shah ne uski tange pakad use khincha & uski gand ko bistar ke kinare se laga ke tange hawa me utha di.ab wqaqt aa gaya tha us naznin ke jism ke sath mil is khel ke sabse mast hisse ko anjam de bharpur maza pane ka.rambha dhadkte dil ke sath adhkhuli aankho se used ekh rahi thi.

shah ne uski tange utha ke uski jangho ke nichle hisse ko pakad uski chut ko bilkul numaya kiya & fir lund ko chut pe rakh diya.jaise hi lund chut se sata rambha ki kamar apne aap uchki mano keh rahi ho ki lund ko fauran chut me ghusao!shah ne uski jangho ke nichle hisso pe hatheliya jama ke aage jhukna shuru kiya & kamre me rambha ki aah gunj uthi.

"aahhhhhhhh..!",mota lund uski chut ko buri tarah faila raha tha & vo dard & maze me karah rahi thi.uska jism kaman ki tarah mud gaya & sne sar peechhe le jake aankhe band kar li thi.shah dhire-2 lund ko jud tak uski chut me utar raha tha & pura andar jate hi vaise hi uski jangho ko pakad vo zor-2 se dhakke lagane laga.

rambha masti me chikhne lagi.lund uski chut ki deewaro ko buri tarah ragad raha tha & vo masti me kabhi apne baal nochti to kabhi shah ke seene ko karah rahi thi.shah bhi uski chut ki kasavat se hairan ho gaya tha & uske dhakke bhi khud ba khud tez ho gaye the.itna mastana ehsas aaj tak kisi ladki ki chudai me use nahi hua tha.

uske dil me khud ko is husnpari ko chodte hue dekhne ki khwahish jagi & usne uski janghe chhodi & aage jhuk uske uapr let gaya & sue chumte hue chodne laga 7 ghutno ke bal bistar pe chadh gaya.thodi hi der me usne khud korambha ke uapr bistar pe is tarah kar liya tha ki agar vo baye & rambha daye dekhti to shishe me apni chudai ko saaf-2 dekh sakte the.

"dekho,meri baaho me tum kitni haseen lag rahi ho,meri jaan!",shah ne rambha ke hotho ko chuma & dhakke lagate hue uska sar dayi taraf ghuma shishe ki or ishara kiya.rambha ne dekha to shishe me use shah uske baye gaal pe apna daya gaal jamaye khushi se bhara use chodta dikha.rambha nme apni baahe & tange uske jism pe kas di & uski pith nochne lagi.uski masti shishe me apne premi & apne aks ko dekh bahut zyada badh gayi thi.

"uunnnnhhhhhh..mahadev....aannhhhhhhhhh..!",usne uski gand ko nocha & uski kamar pe tange phansaye kamar uchkane lagi.vo puri tarah se madhosh thi.shah ka lund uski kokh pe chot kar raha tha & vo ab bikul behaal thi.agle hi pak zor se chikh marte vo jhad gayi magar shah ka kaam abhi khatm nahi hua tha.

vo jhuk ke uski chhatiya apne hatho me daboch ke pine laga.uske dhakke ab dhime magar gehre ho gaye the.rambha har dhakke pe karah uthati.shah chudai me mahir tha & rambha uska bharpur lutf utha rahi thi.shah uske badan se upar uth gaya & apne hatho ke sahare tik ke dhakke lagane laga.

rambha masti me bechain ho uske seene ke balo se khelte hue uske nipples ko chhed rahi thi.uske chehre pe bas mati hi masti dikh rahi thi.uski chut ne jhadte waqt jo mastana harkat ki thi,shah us se khushi se pagal ho gaya tha & us waqt usne dil hi dil me 1 aham faisla liya tha.abhi tak vo rambha ko bas 1 mohre ki tarah istemal karna chah raha tha.uske zariye vo Trust Group pe kabza jamake Pranav & sare Mehra parivar ko kinare karne ki soch raha tha.abhi bhi vo rambha ke zariye hi group ko hathiyane ki soch raha tha magar ab kinare karne valo me rambha ka naam nahi tha.vo is ladki ke hus,uske jism ka deewana ho chuka tha & ab vo us se shadi kar uske sath apni baki ki zindagi uske pati & trust ke malik ke roop me guzarna chahta tha.

rambha uske seene se leke kandho tak hath chalate hue uske chehre ko sehla rahi thi.uske hath shah ke baalo se khelne ke baad uske jism ki bagalo se neeche sarakte & uski pusht gand ko daba lund ko & gehre dhakke lagane ka israr karne lagte.rambha ka jsim kanp raha tha & uske honth laraj rahe the.vo shah ko chumna chahti thi & iske liye usne uski gardan me hath daala & uchakne lagi.shah uski hasrat samajh gaya & uske hath gardan se alag kar ghutno pe ho gaya.

usne rambha ki gudaz baahe pakad use upar uthaya & ab vo ghunto pe tha & rambha uski kamar pe tange phansaye uski god me baith gayi.shah uski makhmali pith sehlate hue dhakke laga raha tha & vo uske kandho ke upar se baahe le jate hue uski pith nochti masti me subak rahi thi.shah uski gand ki moti,kasi fanko ko masal raha tha.uske ando me ab halka-2 dard ho raha tha joki is baat ka ishara tha ki uska lund ab & bardasht karne ki halat me nahi tha.

usne apne hath aage laye to rambha ne dayi banh uski gardan me dali & bayi peechhe le ja hath bistar pe tika diya & kamar hilane lagi.shah uski chhatiyo ko masalte hue chus raha tha.rambha 1 baar fir masti ke usi alam me pahunch gayi thi jaha bas nasha hi nasha hota tha.shah ne uski choochiyo se khelne ke baad 1 baar fir apne dono hath uski gand ki fanko ke neeche lagaye to rambha fir se uski gardan me baahe dalte hue suki pith kharonchne lagi & kamar uchkane lagi.

shah use paglo ki tarah chumne laga & uski gand maslane laga.rambha ke nakhun uski pith chhed rahe the.uski chut uske lund pe sikud-phail rahi thi & vo ab khud pe & kabu nahi rakh sakta tha.dono ke honth aapas me sile hue the magar fir bhi dono ki aahe bahar aa rahi thi.tabhi rambha ne kss todi & uski baahop ke sahare peechhe jhuk gayi & zor se chikhi.uska jism kanp raha tha & uski kamar bahut etzi se hil rahi thi.vo jhad rahi thi & uski chut ne shah ke lund ke uapr apni mastani harkato ko & tez kar diya tha.usi waqt us harkat se behaal shah ne bhi aah bhari & uska jism jhatke khane laga.uska lund rambha ki chut me apna gadha,garm virya chhode ja raha tha.rambha ne virya ko seedha apni kokh me chhutata mehsus kiya & subakte hue uske hotho pe halki si muskan tair gayi.ye dekha & shah bhi muskuraya & lambi-2 sanse leta hua usne rambha ko baaho me bhar liya & dono sukun se bhare jism apni sanse sambhalne me lag gaye.

Mahadev Shah Rambha ke upar se utarte hue dayi karwat pe hua to uska sikuda lund rambha ki chut se bahar aa gaya magar shah ne apni bayi tang rambha ki jangho ke beech ghusaye rakhi & use baaho me bhar chumne laga.vo rambha ki gand ko baye hath se dabate hue uske daye kandhe & gardan ko chumte hue shishe me dekh raha tha.rambha ne uski ye harkat pakad li & fauran use dhakelte hue uske upar se hoti hui bistar ki dusri taraf apni dayi karwat pe aa gayi.

“are!kya hua?”,shah ne apni dayi tang uski jangho ke beech ghusa daye hath se uski bayi jangh ko pakad apni kamar pe chadhaya & use sehlane laga.

“kya dekh rahe the aap shishe me?”,rambha ne banwati gusse se uske seene pe mara.

“tumhari gand..”,shah ne uski gand ki bayi fank ko hath me bhar ke dabaya,”..bahut mast hai!& kya hua agar dekh raha tha to?”

“mujhe achha nahi lagta.”,rambha ne itrate hue kaha.

“achha.kyu?”,shah ka hath uski gand se uske chehre pe aa gaya tha.

“bas aise hi..sharm aati hai.”,rambha ne lajane ka natak karte hue uske kandhe me munh chhupa liya.shah uski adao ke jaal me ab puri tarah phans chuka tha.use ab yakeen ho gaya tha ki rambha uspe pura bharosa karne lagi hai.uska dil khushi se bhar gaya..ab Trust Group uske karib aata dikh raha tha..jis din group uske hath aa gaya us din uska maqsad pura hoga..us din uske sare sapne haqeeqat me badal jayenge & fir koi jaddojahad bhi nahi rahegi..fir vo is haseena ke sath zindagi ka bharpur maza uthayega!

“is sab ke baad bhi sharm aa rahi hai?”,shah ne uske chehre ko upar kiya & uske surkh lab chum liye.

“hun.”,rambha ke gaal masti me laal ho rahe the jise shah uski haya samajh raha tha.shah ka lund fir se jagne laga tha.usne rambha ki jangh pe hath chalate hue uske gaalo ko chumna shuru kar diya.

“uunnnnn..suniye..”,shah ne uski aavaz nahi suni.vo to sar jhuka ke rambha ki chhatiya chumne me mashgul tha,”..Mahadev..suniye na..uunnnn..”,rambha ne uske baal pakad uska munh apne seene se alag kiya & fir use dhakel ke bistar pe litaya & uske upar chadh gayi & uske seene pe apni chhatiya dabate hue uske gaal sehlane lagi,”1 baat puchhu aapse?”

“puchho.”,shah uski zulfen uske chehre se hata raha tha.

“aap apne vade se mukrenge to nahi?”,rambha chintit nazar aa rahi thi.

“tumhe bharosa nahi mujhpe?”,shah uski gudaz baahen sehla raha tha.

“baat vo nahi hai par..main 1 baar dhokha kha chuki hu & ab..”,rambha ne nazre neechi kar li & shah ke seene pe 1 ungli chalane lagi.

“kaho to kararname pe dastkhat kar du ki tum hi meri dulhan banogi!”,shah ne use palta & uske upar sawar ho uski aankho me jhanka.rambha use khamoshi se dekh rahi thi..lagta to tha ki ye sach keh raha hai magar iska koi bharosa nahi..par abhi iska yakin karne ke alawa & koi chara nahi tha.

“aap to bura maan gaye..”,rambha ne use dobara palta & uske upar aa use chumne lagi,”..meri halat bhi to samajhiye..doodh ka jala chhachh bhi phunk-2 ke pita hai.”,uske pure chehre ko usne apni kisses se dhank diya.

“bura to laga mujhe..”,shah uski kamar sehla raha tha,”..meri sachchi mohabbat pe shubaha kiya tumne.”

“i’m sorry,darling!”,rambha use chumte hue uske seene pe aa gayi & uske seene ke balo me ungliya firati uske nipples ko haule-2 kaatne lagi. Shah uski zulfe sehla raha tha.rambha uske seene ko chumte hue neeche ja rahi thi.shah uske itade ko bhanp ke khush ho gaya & uski ungliya rambha ki zulfo se & garmjoshi se khelne lagi.rambha uske pet ko chumte hue uski jhanto tak pahunch chuki thi,”aainda kabhi ye galti nahi karungi.aap mujhse khafa mat hoiye,please!”,masumiyat se kehte hue usne shah ke lund ko munh me bhar liya.

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kramashah.......