Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 13 Dec 2014 02:15

जाल पार्ट--10

गतान्क से आगे.

उस बहुत बड़े खाली मैदान मे बस जंगंग्ली झाड़िया & पेड़ उगे हुए थे.उस मैदान के कच्चे रास्ते पे 2 मर्सिडीस आके रुकी.आगे वाली कार से विजयंत & समीर मेहरा प्रणव के साथ उतरे & पीछे वाली से ट्रस्ट ग्रूप के कुच्छ ऊँचे अफ़सर,"डॅड,ये जगह डेवाले से बस 20 किमी की दूरी पे है & हमारी फिल्म सिटी के लिए बिल्कुल पर्फेक्ट है.वो देखिए,उधर 1 छ्होटी सी झील भी है.इधर पहाड़ियाँ भी हैं.इस सपाट मैदान मे दफ़्तर,स्टूडियोस पर्मनेंट & टेंपोररी सेट्स बन जाएँगे.डेवाले के स्टूडियोस पुराने हैं फिर उनकी लोकेशन ऐसी है कि बिना ट्रॅफिक जाम मे फँसे ना वाहा पहुँचा जा सकता है ना निकला जा सकता है.मानपुर एक्सप्रेसवे से जुड़ा है तो ट्रॅफिक की प्राब्लम तो है ही नही फिर इस जगह हम बिल्कुल मॉडर्न सुविधाएँ मुहैय्या करा सकते हैं."

"1 बात और,सर.",प्रणव घर के अलावा विजयंत को कभी डॅडी नही बुलाता था,उसने कार के बॉनेट पे फैले अपने साले के प्लान के 1 कोने पे उंगली रखी,"ये ज़मीन जो यहा से बस 4 किमी के फ़ासले पे है,हमारी है & यहा हम अपना रेसिडेन्षियल प्रॉजेक्ट शुरू कर रहे हैं.इस प्रॉजेक्ट के सामने सड़क के इस दूसरी तरफ हमारा होटेल भी बनाने का प्लान है.ये तीनो जगहें यानी कि ये ज़मीन जहा हम खड़े हैं & हमारे ये दोनो प्रॉजेक्ट्स मानपुर मे आते हैं & यहा डेवाले के रोड टॅक्स रेट्स नही लगेंगे & ये सारी जगह एरपोर्ट से बस 6 किमी की दूरी पे है."

"यानी ये प्रॉजेक्ट हमे मिल गया तो फायडा ही फायडा है.",विजय्न्त ने गहरे नीले रंग का सूट पहना था & आँखो पे काला चश्मा था.वो मैदान मे दूर तक देख रहा था.सामने उसे 1 छ्होटा सा बिंदु हिलता दिखा,वो 1 कार थी.वो मुस्कुराया,वो जानता था कि वो किसकी कार है.

"आउच!",मर्सिडीस का कमाल का सस्पेन्षन भी उस ऊबड़-खाबड़ रास्ते के हचको से सोनिया को नही बचा पाया था,"ये कहा आ गये हैं हम,डार्लिंग?",उसने ब्रिज कोठारी के कंधे पे सर रख उसके सीने पे हाथ फिराया.

"सोने की ख़ान मे.",वो अपनी बीवी को देख मुस्कराया.

"क्या?!"

"हां,बाकी बातें फ्लाइट पे बताउन्गा.",वो यहा से सीधा एरपोर्ट जा रहे थे जहा से वो अपने हनिमून के लिए रवाना हो रहे थे.कार रुकी & दोनो उतरे.उसके पीछे भी दूसरी कार मे उसकी कंपनी के अफ़सर आए थे & ब्रिज उनके साथ ज़मीन के बारे मे बातें करने लगा.सोनिया उनसे अलग अपनी कार के सहारे खड़ी थी.उसने छ्होटे बाज़ू का गुलाबी टॉप & पॅंट पहनी थी.उसने दूर देखा,कोई आदमी चला आ रहा था,उसने अपनी आँखो पे लगा काला चस्मा उपर अपने सर पे किया & उधर देखने लगी.चमकती धूप मे सामने से विजयंत लंबे-2 डॅग भरता अकेला चला आ रहा था.लंबा-चौड़ा डील-डौल,आँखो पे काला चस्मा,गोरे,हसीन चेहरे पे सुनेहरी दाढ़ी & विश्वास से भरे कदम..सोनिया तो उसे देखती ही रह गयी.

"हेलो,मेहरा.",ब्रिज मुस्कुराया,"शहर बसा नही लूटेरे पहले आ गये!",उसके & उसके आदमियो के साथ विजयंत भी हंसा & अपना चश्मा उतार अपनी कोट की जेब मे डाला.

"तुम शायद अपनी बात कर रहे हो,कोठारी.मैं तो मालिक हू..वैसे मैं तुम्हे मुबारकबाद देने आया था.",उसने हाथ बढ़ाया जिसे कोठारी ने थाम लिया,"..शादी मुबारक हो."

"थॅंक्स."

"& ये शायद मसेज.कोठारी हैं.",विजयंत ने उसका हाथ छ्चोड़ा & सोनिया के सामने आ खड़ा हुआ.सोनिया का दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था & उसे उसका कारण समझ नही आ रहा था.

"शादी मुबारक हो,मिसेज़.कोठारी.",उसने अपनी आँखे सोनिया की आँखो मे डाल दी & अपना हाथ आगे बढ़ाया तो सोनिया ने भी अपना कांपता दाया हाथ आगे कर दिया.विजयंत ने उसे थामा & उसे चूम लिया.इस सब के दौरान 1 पल को भी उसकी नज़रो ने सोनिया की निगाहो को देखना नही छ्चोड़ा था.उसकी पीठ ब्रिज की तरफ थी इसलिए ब्रिज उसके चेहरे & आँखो को देख नही पा रहा था.विजयंत के होंठो से हाथ सटाते ही सोनिया ने हाथ पीछे खींच लिया.ब्रिज मुस्कुराया,उसे लगा उसकी बीवी को विजयंत की ये हरकत बदतमीज़ी लगी है & उसने अपना हाथ झटक लिया है जबकि सोनिया के जिस्म मे विजयंत के होंठो की च्छुअन से बिजली दौड़ गयी थी & उसने आहत हो हाथ खींचा था.

"थॅंक्स.",उसकी आँखे उसके दिल का हाल बयान कर रही थी.उसने झट से उन्हे काले चश्मे के पीछे च्छुपाया & कार मे बैठ गयी.विजयंत मुस्कुराया & वहाँ से जाने लगा.

"मेहरा,ये ज़मीन तुम्हारे लिए सपना ही रहेगी."

"देखेंगे,कोठारी.",जाते हुए विजयंत ने पीछे खड़े ब्रिज की बात सुन बस हवा मे अलविदा का इशारा करते हुए हाथ हिलाया.

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प्लेन हवा मे था,एर होस्टेसेस सभी को ड्रिंक्स सर्व कर रही थी.बिज़्नेस क्लास मे बैठा ब्रिज अपनी बीवी को उस ज़मीन के बारे मे बता रहा था मगर वो सुन कहा रही थी.उसे अभी भी विजयंत की गहरी निगाहे खुद को देखती हुई लग रही थी.अपने हाथ पे उसके होंठो की गर्माहट वो अभी भी महसूस कर रही थी..क्या था ये सब?..उसका दिल ऐसे क्यू धड़का था उस इंसान की मौजूदगी से?..वो ब्रिज की किसी बात पे मुस्कुराइ & फिर उसकी बाँह मे अपनी बाँह फँसा खिड़की से बाहर देखा.खिड़की के शीशे मे उसे अपना धुँधला सा अक्स दिखा....विजयंत ने तुम्हारा दिल धड़का दिया इसका तो 1 ही मतलब है!..उसका अक्स फिर उसे परेशान कर रहा था..नही!..ऐसी कोई बात नही है..मैं ब्रिज की बीवी हू & केवल उसी की हू..उसने मन ही मन कहा..वो बस 1 पल की बात थी..& वैसे भी मैं अब उस इंसान से फिर कभी नही मिलने वाली..उसने खिड़की से मुँह फेरा & बोलते हुए ब्रिज के होंठ चूम लिए.वो चौंक उठा.

"मुझे नही जानना उस ज़मीन के बारे मे!",वो उसके और करीब हो गयी,"..बस अपने बारे मे बताओ.",वो उसके कंधे पे सर रख के उस से आड़ गयी.ब्रिज खुशी से मुस्कुराया & उसके सर को चूम लिया.

सोमवार की सुबह रंभा बाकी 4 लड़कियो के साथ ट्रस्ट ग्रूप के दफ़्तर की इमारत की 12वी मंज़िल पे 1 कमरे मे बैठी थी.इंटरव्यू से पहले की नर्वुसनेस ने उसे आ घेरा था.थोड़ी देर पहले कंपनी के 1 आदमी ने उन्हे आके बताया था कि बस थोड़ी ही देर मे खुद विजयंत मेहरा 1-1 करके सबका इंटरव्यू लेंगे.रंभा ने आँखो के कोने से सोनम रौत को देखा.साँवली सी लड़की खूबसूरत तो थी & इस वक़्त बड़ी विश्वास से भरी भी लग रही थी.

विजयंत अपने दफ़्तर पहुँचा & जहा सारी लड़किया बैठी थी उस कमरे मे झाँका.कमरे मे 1 शीशा लगा था जिसके पार कमरे मे बैठे लोगो को तो दिखाई नही देता मगर शीशे के उस पार खड़ा इंसान सब देख सकता था.विजयंत की नज़रे सभी लड़कियो से होती हुई रंभा पे आके टिक गयी.रंभा शीशे के बिल्कुल करीब बैठी थी & विजयंत उसे उसकी बाई तरफ से देख रहा था.उसके हुस्न को देख वो हैरान रह गया था.

रंभा ने आधे बाज़ू की सफेद शर्ट & घुटनो से थोड़ी उपर की काली स्कर्ट पहनी थी & पैरो मे हाइ हील सॅंडल्ज़ थे.विजय्न्त ने स्कर्ट से निकलती उसकी गोरी,मखमली जाँघो & लंबी टाँगो पे नज़रे दौड़ाई.शर्ट की बाजुओ से निकलती उसकी गुदाज़ बाहो को देख उसके दिल मे उन्हे थाम उस हसीना को बाहो मे भर उसके गुलाबी होंठो को चखने की बहुत तेज़ ख्वाहिश पैदा हुई और जब कमीज़ मे काफ़ी बड़ा उभार बनाते उसके सीने पे उसकी नज़र गयी तो उसने मन ही मन ये तय कर लिया की चाहे जैसे भी हो इस रूप की रानी की जवानी के समंदर मे वो ज़रूर गोते लगाएगा.रंभा को ऐसा लगा जैसे कोई उसे घूर रहा है & उसने गर्दन घुमाई मगर वाहा तो 1 शीशा लगा था जिसमे उसे अपना अक्स दिखाई दिया.

वो शीशे मे देख अपने खुले बालो को हाथो से सँवारने लगी & अपना चेहरा देखने लगी.विजयंत अब सीधा उसकी आँखो मे देख रहा था.कितना मासूम चेहरा था & कैसी बड़ी-2 काली आँखें.उसका दिल अब बिल्कुल बेचैन हो गया था & जैसे ही रंभा ने शीशे मे खुद को निहरना बंद किया,वो वाहा से अपने कॅबिन मे चला गया.

1-1 करके सभी लड़कियो को अंदर बुलाया जाने लगा.रंभा ने देखा जो भी लड़की कमरे से बाहर जाती वो वापस कमरे मे नही आती.उसके साथ जो लड़की बैठी थी,उस से उसने बात की थी & दोनो ने तय किया था कि जो भी पहले अंदर जाएगी वो दूसरी को पुछे गये सवालो के बारे मे ज़रूर बताएगी लेकिन वो लड़की तो वापस कमरे मे आई ही नही.थोड़ी देर बाद कमरे मे बस सोनम & रंभा बचे थे & फिर सोनम का नाम पुकारा गया.

"मिस.रौत,इतनी कम उम्र मे भी काफ़ी तजुर्बा है आपको?",ब्रिज कोठारी ने सोनम की तैय्यरी मे कोई कसर नही छ्चोड़ी थी.वो जानता था कि यहा इंटरव्यू देने वाली हर लड़की के CV मे लिखी 1-1 बात की सच्चाई परखने के बाद ही विजयंत उन्हे इंटरव्यू के लिए बुलाता & उसने इस बात को मद्देनज़र रखते सोनम का CV बनाया था.यहा आने से पहले सोनम को भी बहुत ज़्यादा घबराहट नही हो रही थी लेकिन विजयंत की ज़ोरदार शख्शियत & रोबिली आवाज़ ने उसके कदम लड़खड़ा दिए थे 7 उसका दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था.

"सर,मैं जिस कंपनी मे काम कर रही थी वो थी तो छ्होटी मगर उसके ऑपरेशन्स काफ़ी फैले थे इसलिए मेरे बॉस की मदद करते हुए मैने वाहा ये तजुर्बा हासिल किया.

"हूँ.",विजयंत कुच्छ सोच रहा था,"..हमारे यहा दफ़्तर आने का वक़्त तो है मगर जाने का नही,इस बात से आपको तकलीफ़ हो सकती है."

"सर,मैं यहा काम करने आना चाहती हू & मुझे काम करने मे कोई तकलीफ़ नही होती."

"हूँ.",विजयंत मुस्कुराया,"..आप बाहर इंतेज़ार कीजिए."

"थॅंक यू,सर.",सोनम कॅबिन से बाहर निकली तो उसे 1 दूसरे कमरे मे बिठा दिया गया.उसने अपने माथे पे आया पसीना पोंच्छा..इस आदमी के साथ काम करना पड़ेगा उसे!..इसे कोई कैसे धोखा दे सकता है?..ये तो इतना..इतना..उसे समझ मे नही आ रहा था कि विजयंत के रोब,उसकी चुंबकिया शख्सियत के लिए वो कौन्से लफ्ज़ इस्तेमाल करे..अरे पहले वो तुम्हे रखे तो यहा!..उसके दिल ने उसे समझाया & वो बगल मे रखे कूलर से पानी लेके गतगत पीने लगी.

"मे आइ कम इन,सर?",रंभा ने विजयंत के कॅबिन मे कदम रखा.उसे कॅबिन कहना ग़लत होगा,वो 1 बड़ा सा हॉल था.सामने 1 बड़ी डेस्क के पीछे विजयंत मेहरा बैठा था.उस हॉल के 1 कोने मे 1 सोफा सेट लगा था,1 दीवार पे बड़ा सा एलसीडी टीवी & पूरे फर्श पे मोटा कालीन बिच्छा था.कॅबिन मे रोशनी बहुत मद्धम थी विजयंत के डेस्क पे 1 लॅंप जल रहा था & पूरे हॉल मे जो कन्सील्ड लाइट्स थी उन्हे विजयंत ने जानबूझ के बहुत हल्का कर रखा था.

"यस.",उसकी रोबदार,भरी आवाज़ ने रंभा को थोड़ा और नर्वस कर दिया फिर भी वो हल्के से मुस्कुराते हुए नपे-तुले कदमो से आगे बढ़ी.उसने विजयंत की शक्ल पहली बार देखी थी & उसकी मर्दाना खूबसूरती ने उसपे गहरा असर छ्चोड़ा.विजयंत भी उसके हुस्न को आँखो से पी रहा था.जब वो लड़की उसके सामने आके बैठी तो उसका लंड उसके जिस्म की नज़दीकी & उस से आती मदमाती खुश्बू के असर से फ़ौरन खड़ा हो गया.

रंभा विजयंत के हर सवाल का जवाब दे रही थी & अब उसकी घबराहट थोड़ी कम भी हो गयी थी,"मिस.रंभा,यहा आई पाँचो लड़कियो मे से आपका तजुर्बा सबसे कम है,आप ये बात जानती हैं?"

"यस,सर."

"तो मेरी समझ मे ये नही आता कि एजेन्सी ने आपको यहा कैसे भेज दिया?",वो इस लड़की की मज़बूती को परखना चाहता था.

"क्यूकी मैने उनकी नाक मे दम कर दिया था.",रंभा ने विजयंत की आँखो मे आँखे डाल के कहा.

"क्या?!",विजयंत हंसा.उसे लड़की का जवाब पसंद आया था,"लेकिन क्यू?"

"सर,आपके लिए काम करना बहुत फख्र की बात है & फिर इतने रिप्यूटेड ग्रूप मे कौन नही काम करना चाहेगा खास कर के जब काम ग्रूप के चेअरमेन के लिए करना हो.",रंभा बहुत शालीन ढंग से मुस्कुराइ & विजयंत के ज़हन मे उस मुस्कान ने धमाका कर दिया.उसका दिमाग़ कल्पना के घोड़े दौड़ाने लगा..ये मासूम चेहरा हवस मे अँधा हो कैसा लगता होगा?..ये मस्ती मे कैसे मुस्कुराती होगी?..ये रसीले,गुलाबी होंठ मेरे लंड के गिर्द कैसे लगेंगे?..इस गोरे,तराशे जिस्म की हरारत मुझपे क्या असर करेगी?..इसका नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म से टकराएगा तो..

"आप बाहर वेट करिए.",उसने खुद पे काबू किया.

"थॅंक यू,सर.",रंभा भी उसी दूसरे कमरे मे आ गयी जहा बाकी लड़किया बैठी थी.

विजयंत पशोपेश मे पड़ा था.उसने अपनी कुर्सी के पीछे लगे पर्दे को रिमोट से खोला & सामने धूप मे चमकती डेवाले की ऊँची इमारतो को देखने लगा जिनमे से ज़्यादातर उसी की थी.वो लड़कियो का शौकीन था,जो लड़की उसके दिल को भा जाए उसे वो अपने बिस्तर की शोभा ज़रूर बनाता था लेकिन आज उसके सामने 1 अजीब सी उलझन थी.उसने अपने बिज़्नेस के रास्ते मे कभी अपने शौक को आने नही दिया था मगर आज जैसे उसका इम्तिहान लिया जा रहा था कि वो किसे तवज्जो देता है-अपने बिज़्नेस को या अपने शौक को.सोनम यक़ीनन तजुर्बे मे रंभा से कही आगे थी लेकिन उसे चुनने का मतलब रंभा को खोना था.

अपने हाथो को जोड़ अपनी नाक से लगा आँखे बंद कर वो इस परेशानी का हाल सोचने लगा कि उसका इंटरकम बजा,उसने उसे ऑन किया,"सर,समीर सर आ गये हैं.आपने बोला था उनके आने पे आपको बता दू.",अगली सेक्रेटरी के चुने जाने तक 1 टेंपोररी असिस्टेंट उसने रखी थी,ये वही थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--10

gataank se aage.

us bahut bade khali maidan me bas jungli jhadiya & ped uge hue the.us maidan ke kachche raste pe 2 Mercedes aake ruki.aage vali car se Vijayant & Sameer Mehra Pranav ke sath utre & peechhe vali se trust group ke kuchh oonche afsar,"dad,ye jagah devalay se bas 20 km ki doori pe hai & humari film city ke liye bilkul perfect hai.vo dekhiye,udhar 1 chhoti si jhil bhi hai.idhar pahadiyan bhi hain.is sapat maidan me daftar,studios & permanent & temporary sets ban jayenge.devalay ke studios purane hain fir unki location aisi hai ki bina traffic jam me fanse na vaha pahuncha ja sakta hai na nikla ja sakta hai.Manpur expressway se juda hai to traffic ki problem to hai hi nahi fir is jagah hum bilkul modern suvidhayen muhaiyya kara sakte hain."

"1 baat aur,sir.",pranav ghar ke alawa vijayant ko kabhi daddy nahi bulata tha,usne car ke bonnet pe faile apne sale ke plan ke 1 kone pe ungli rakhi,"ye zamin jo yaha se bas 4 km ke fasle pe hai,humari hai & yaha hum apna residential project shuru kar rahe hain.is project ke samne sadak ke is dusri taraf hamara hotel bhi banaane ka plan hai.ye teeno jagahen yani ki ye zamin jaha hum khade hain & humare ye dono projects manpur me aate hain & yaha devalay ke oknche tax rates nahi lagenge & ye sari jagah airport se bas 6 km ki doori pe hai."

"yani ye project hume mil gaya to fayda hi fayda hai.",vijaynat ne gehre nile ramg ka suit pehna tha & aankho pe kala chashma tha.vo maidan me door tak dekh raha tha.samne use 1 chhota sa bindu hilta dikha,vo 1 car thi.vo muskuraya,vo janta tha ki vo kiski car hai.

"ouch!",mercedes ka kamal ka suspension bhi us oobad-khabad raste ke hachko se Soniya ko nahi bacha paya tha,"ye kaha aa gaye hain hum,darling?",usne Brij Kothari ke kandhe pe sar rakh uske seene pe hath firaya.

"sone ki khan me.",vo apni biwi ko dekh muskraya.

"kya?!"

"haan,baki baaten flight pe bataunga.",vo yaha se seedha airport ja rahe the jaha se vo apne honeymoon ke liye rawana ho rahe the.car ruki & dono utre.uske peechhe bhi dusri car me uski company ke afsar aaye the & brij unke sath zamin ke bare me baaten karne laga.soniya unse alag apni car ke sahar ekhadi thi.usne chhote bazu ka gulabi top & pant pehni thi.usne door dekha,koi aadmi chala aa raha tha,usne apni aankho pe laga kala chasma upar apne sar pe kiya & udhar dekhne lagi.chamkti dhoop me samne se vijayant lambe-2 dag bharta akela chala aa raha tha.lamba-chauda deel-daul,aankho pe kala chasma,gore,haseen chehre pe sunehri dadhi & vishwas se bhare kadam..soniya to use dekhti hi reh gayi.

"hello,mehra.",brij muskuraya,"shehar basa nahi lootere pehle aa gaye!",uske & uske aadmiyo ke sath vijayant bhi hansa & apna chashma utar apni coat ki jeb me dala.

"tum shayad apni baat kar rahe ho,kothari.main to malik hu..vaise main tumhe mubarakbaad dene aaya tha.",usne hath badhaya jise kothari ne tham liya,"..shadi mubarak ho."

"thanx."

"& ye shayad Mrs.kothari hain.",vijayant ne uska hath chhoda & soniya ke samne aa khada hua.soniya ka dil bahut zoro se dhadak raha tha & use uska karan samajh nahi aa raha tha.

"shadi mubarak ho,mrs.kothari.",usne apni aankhe soniya ki aankho me daal di & apna hath aage badhaya to soniya ne bhi apna kanpta daya hath aage kar diya.vijayant ne use thama & use chum liya.is sab ke dauran 1 pal ko bhi uski nazro ne soniya ki nigaho ko dekhna nahi chhoda tha.uski pith brij ki taraf thi isliye brij uske chehre & aankho ko dekh nahi pa raha tha.vijayant ke hotho se hath satate hi soniya ne hatah peechhe khinch liya.brij muskuraya,use laga uski biwi ko vijayant ki ye harkat badtamizi lagi hai & usne apna hath jhatak liya hai jabki soniya ke jism me vijayant ke hotho ki chhuan se bijli daud gayi thi & usne aahat ho hath khincha tha.

"thanx.",uski aankhe uske dil ka haal bayan kar rahi thi.usne jhat se unhe kale chashme ke peechhe chhupaya & car me baith gayi.vijayant muskuraya & vah se jane laga.

"mehra,ye zamin tumhare liye sapna hi rahegi."

"dekhenge,kothari.",jate hue vijayant ne peechhe khade brij ki baat sun bas hawa me alvida ka ishara karte hue hath hilaya.

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plane hawa me tha,air hostesses sabhi ko drinks serve kar rahi thi.business class me baitha brij apni biwi ko us zamin ke bare me bata raha tha magar vo sun kaha rahi thi.use abhi bhi vijayant ki gehri nigahe khud ko dekhti hui lag rahi thi.apne hath pe uske hotho ki garmahat vo abhi bhi mehsus kar rahi thi..kya tha ye sab?..uska dil aise kyu dhadka tha us insan ki maujoodgi se?..vo brij ki kisi baat pe muskurayi & fir uski baanh me apni banh fansa khidki se bahar dekha.khidki ke shishe me use apna dhundhla sa aks dikha....vijayant ne tumhara dil dhadka diya iska to 1 hi matlab hai!..uska aks fir use pareshan kar raha tha..nahi!..aisi koi baat nahi hai..main brij ki biwi hu & kewal usi ki hu..usne man hi man kaha..vo bas 1 pal ki baat thi..& vaise bhi main ab us insan se fir kabhi nahi milne wali..usne khidki se munh fera & bolte hue brij ke honth chum liye.vo chaunk utha.

"mujhe nahi jaanana us zamin ke bare me!",vo uske aur karib ho gayi,"..bas apne bare me batao.",vo uske kandhe pe sar rakh ke us se ad gayi.brij khushi se muskuraya & uske sar ko chum liya.

Somvar ki subah Rambha baki 4 ladkiyo ke sath Trust group ke daftar ki imarat ki 12vi manzil pe 1 kamre me baithi thi.interview se pehle ki nervousness ne use aa ghera tha.thodi der pehle company ke 1 aadmi ne unhe aake bataya tha ki bas thodi hi der me khud Vijayant Mehra 1-1 karke sabka interview lenge.rambha ne aankho ke kone se Sonam Raut ko dekha.sanvli si ladki khubsurat to thi & is waqt badi vishwas se bhari bhi lag rahi thi.

vijayant apne daftar pahuncha & jaha sari ladkiya baithi thi us kamre me jhanka.kamre me 1 shisha laga tha jiske paar kamre me baithe logo ko to dikhayi nahi deta magar shishe ke us paar khada insan sab dekh sakta tha.vijayant ki nazre sabhi ladkiyo se hoti hui rambha pe aake tik gayi.rambha shishe ke bilkul karib baithi thi & vijayant use uski bayi taraf se dekh raha tha.uske husn ko dekh vo hairan rah gaya tha.

rambha ne aadhe bazu ki safed shirt & ghutno se thodi upar ki kali skirt pehni thi & pairo me high heel sandals the.vijaynat ne skirt se nikalti uski gori,makhmali jangho & lambi tango pe nazre daudayi.shirt ki bazuo se nikalti uski gudaz baaho ko dekh uske dil me unhe tham us haseena ko baaho me bhar uske gulabi hotho ko chakhne ki bahut tez khwahish paida hui aur jab kamiz me kafi bada ubhar banate uske seene pe uski nazar gayi to usne man hi man ye tay kar liya ki chahe jaise bhi ho is roop ki rani ki jawani ke samnadar me vo zaroor gote lagayega.rambha ko aisa laga jaise koi use ghoor raha hai & usne gardan ghumayi magar vaha to 1 shisha laga tha jisme use apna aks dikhayi diya.

vo shishe me dekh apne khule baalo ko hatho se sanwarne lagi & apna chehra dekhne lagi.vijayant ab seedha uski aankho me dekh raha tha.kitna masoom chehra tha & kaisi badi-2 kali aankhen.uska dil ab bilkul bechain ho gaya tha & jaise hi rambha ne shishe me khud ko niharna band kiya,vo vaha se apne cabin me chala gaya.

1-1 karke sabhi ladkiyo ko andar bulaya jane laga.rambha ne dekha jo bhi ladki kamre se bahar jati vo vapas kamre me nahi aati.uske sath jo ladki baithi thi,us se usne baat ki thi & dono ne tay kiya tha ki jo bhi pehle andar jayegi vo dusri ko puchhe gaye sawalo ke bare me zarur batayegi lekin vo ladki to vapas kamre me aayi hi nahi.thodi der baad kamre me bas sonam & rambha bache the & fir sonam ka naam pukara gaya.

"ms.raut,itni kam umra me bhi kafi tajurba hai aapko?",Brij Kothari ne sonam ki taiyyari me koi kasar nahi chhodi thi.vo janta tha ki yaha interview dene vali har ladki ke CV me likhi 1-1 baat ki sachchai parakhne ke baad hi vijayant unhe interview ke liye bulata & usne is baat ko maddenazar rakhte sonam ka cv banaya tha.yaha aane se pehle sonam ko bhi bahut zyada ghabrahat nahi ho rahi thi lekin vijayant ki zordar shkhsiyat & robili aavaz ne uske kadam ladkhada diye the 7 uska dil bahut zoro se dhadak raha tha.

"sir,main jis company me kaam kar rahi thi vo thi to chhoti magar uske operations kafi faile the isliye mere boss ki madad karte hue maine vaha ye tajurba hasil kiya.

"hun.",vijayant kuchh soch raha tha,"..humare yaha daftar aane ka waqt to hai magar jane ka nahi,is baat se aapko taklif ho sakti hai."

"sir,main yaha kaam karne aana chahti hu & mujhe kaam karne me koi taklif nahi hoti."

"hun.",vijayant muskuraya,"..aap bahar intezar kijiye."

"thank you,sir.",sonam cabin se bahar nikli to use 1 dusre kamre me bitha diya gaya.usne apne mathe pe aaya paseena ponchha..is aadmi ke sath kaam karna padega use!..ise koi kaise dhokha de sakta hai?..ye to itna..itna..use samajh me nahi aa raha tha ki vijayant ke rob,uski chumbakiya shakhsiyat ke liye vo kaunse lafz istemal kare..are pehle vo tumhe rakhe to yaha!..uske dil ne use samjhaya & vo bagal me rakhe cooler se pani leke gatagat peene lagi.

"may i come in,sir?",rambha ne vijayant ke cabin me kadam rakha.use cabin kehna galat hoga,vo 1 bada sa hall tha.samne 1 badi desk ke peechhe vijayant mehra baitha tha.us hall ke 1 kone me 1 sofa set laga tha,1 deewar pe bada sa LCD tv & pure farsh pe mota kaleen bichha tha.cabin me roshni bahut maddham thi vijayant ke desk pe 1 lamp jal raha tha & pure hall me jo concealed lights thi unhe vijayant ne jaanbujh ke bahut halka kar rakha tha.

"yes.",uski robdar,bhari aavaz ne rambha ko thoda uar nervous kar diya fir bhi vo halke se muskurate hue nape-tule kadmo se aage badhi.usne vijaynat ki shakl pehli baar dekhi thi & uski mardana khubsurti ne uspe gehra asar chhoda.vijayant bhi uske husn ko aankho se pee raha tha.jab vo ladki uske samne aake baithi to uska lund uske jism ki nazdiki & us se aati madmati khushbu ke asar se fauran khada ho gaya.

rambha vijayant ke har sawal ka jawab de rahi thi & ab uski ghabrahat thodi kam bhi ho gayi thi,"ms.rambha,yaha aayi pancho ladkiyo me se aapka tajurba sabse kam hai,aap ye baat janti hain?"

"yes,sir."

"to meri samajh me ye nahi aata ki agency ne aapko yaha kaise bhej diya?",vo is ladki ki mazbuti ko parakhna chahta tha.

"kyuki maine unki naak me dum kar diya tha.",rambha ne vijayant ki aankho me aankhe daal ke kaha.

"kya?!",vijayant hansa.use ladki ka jawab pasand aaya tha,"lekin kyu?"

"sir,aapke liye kaam karna bahut fakhr ki baat hai & fir itne reputed group me kaun nahi kaam karna chahega khas kar ke jab kaam group ke chairman ke liye karna ho.",rambha bahut shalin dhang se muskurayi & vijayant ke zehan me us muskan ne dhamaka kar diya.uska dimagh kalpana ke ghode daudane laga..ye masoom chehra hawas me andha ho kaisa lagta hoga?..ye masti me kaise muskurati hogi?..ye rasile,gulabi honth mere lund ke gird kaise lagenge?..is gore,tarashe jism ki hararat mujhpe kya asar karegi?..iska nanga jism mere nange jism se takrayega to..

"aap bahar wait kariye.",usne khud pe kabu kiya.

"thank you,sir.",rambha bhi usi dusre kamre me aa gayi jaha baki ladkiya baithi thi.

vijayant pashopesh me pada tha.usne apni kuris ke peechhe lage parde ko remote se khola & samne dhoop me chamakti devalay ki oonchi imarrato ko dekhne laga jinme se zyadatar usi ki thi.vo ladkiyo ka shaukeen tha,jo ladki uske dil ko bha jaye use vo apne bistar ki shobha zaroor banata tha lekin aaj uske samne 1 ajib si uljhan thi.usne apne business ke raste me kabhi apne shauk ko aane nahi diya tha magar aaj jaise uaka imtihan liya ja raha tha ki vo kise tavajjoh deta hai-apne business ko ya apne shauk ko.sonam yakinan tajurbe me rambha se kahi aage thi lekin use chunane ka matlab rambha ko khona tha.

apne hatho ko jod apni naak se laga aankhe band kar vo is pareshani ka hal sochne laga ki uska intercom baja,usne use on kiya,"sir,Sameer sir aa gaye hain.aapne bola tha unke aane pe aapko bata du.",agli secretary ke chune jane tak 1 temporary assistant usne rakhi thi,ye vahi thi.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 13 Dec 2014 02:16

जाल पार्ट--11

गतान्क से आगे.

"थॅंक्स.",उसने इंटरकॉम बंद किया & ठीक उसी वक़्त उसके दिमाग़ मे उसकी परेशानी का हाल कौंधा.तजुर्बे & क्वालिफिकेशन्स की बिना पे बस सोनम ही उसकी सेक्रेटरी बन सकती थी.आज तक उसने अपने बिज़्नेस के साथ समझौता नही किया था & आज भी नही करेगा.उसने इंटरकम का बटन दबाया,"मिस.सोनम रौत & मिस.रंभा वेर्मा के अलावा बाकी लड़कियो को जाने को कहो & फिर मिस.रौत को मेरे पास भेजो."

"मिस.रौत,कंग्रॅजुलेशन्स!",विजयंत ने उस से हाथ मिलाया तो सोनम के बदन मे झुरजुरी दौड़ गयी.उसके कॅबिन मे घुसने पे विजयंत ने खड़े होके उसका स्वागत किया था,"आप इस पोस्ट के लिए चुन ली गयी हैं."

"थॅंक्स,सर."

"उमीद है हमारे साथ काम करके आपको अच्छा लगेगा.आप बाहर जाएँगी तो आपको मिस्टर.कुमार मिलेंगे जोकि आपको ऑफर लेटर देंगे अगर उसमे लिखी बातें आपको मंज़ूर होंगी तो आपका अपायंटमेंट लेटर आपको थमा दिया जाएगा."

"थॅंक यू,सर.",सोनम बाहर आई & कुमार नाम के शख्स के साथ बैठ अपनी सॅलरी & बाकी बातें समझने लगी.

"आइए मिस.रंभा.",विजयंत खड़ा मुस्कुरा रहा था,अब कॅबिन मे रोशनी भी ज़्यादा थी.उसके लंबे-चौड़े डील-डौल & हॅंडसम चेहरे को देख रंभा के दिल मे 1 कसक उठी.उसका दिल किया कि अपने हाथ से उसकी सुनेहरी दाढ़ी मे हाथ फिरा दे.उसने रंभा को बैठने को इशारा किया तो रंभा डेस्क के सामने की 1 कुर्सी पे बैठ गयी.विजयंत उसके करीब आया & डेस्क पे बैठ गया.1 पल को उसकी निगाहे रंभा की मक्खनी जाँघो पे पड़ी फिर उसने अपनी नज़रे उसकी नज़रो से मिला दी.

"मिस.रंभा,मैं आपको अपनी सेक्रेटरी की जगह नही दे सकता.",मायूस रंभा ने सर झुका लिया,"..लेकिन मैं आपको 1 दूसरी पोस्ट ऑफर कर सकता हू.",रंभा ने हैरत से सर उठाया.

"क्या आप मेरे बेटे की सेक्रेटरी बनाना पसंद करेंगी?"

"सर!",रंभा इस नये ऑफर से चौंक गयी थी.

"जी,देखिए कोई और उमीदवार था जोकि आपसे बेहतर था लेकिन इसका ये मतलब नही कि आप काबिल नही हैं.आप काबिल हैं & इसलिए मैं आपको खोना नही चाहता..",खोना लफ्ज़ पे विजयंत ने ज़ोर दिया था,"..तो क्या आपको ये ऑफर मंज़ूर है?"

"ज़रूर,सर..",रंभा खुशी & रहट से मुस्कुराइ,"..आपके ग्रूप मे काम करने का मौका मैं गँवाने की सोच भी नही सकती."

"तो ठीक है.कंग्रॅजुलेशन्स!",उसने उसकी ओर हाथ बढ़ाया & उसके कोमल,नाज़ुक से हाथ के एहसास से वो फिर पागल हो गया.उसका दिल किया कि उसे खींच बाहो मे भर उसके चेहरे को अपने बेकरार होंठो के निशानो से ढँक दे!

"आप बाहर जाइए,आपको सभी बातें समझा दी जाएँगी.",ना चाहते हुए भी उसने उसका हाथ छ्चोड़ा & उसे विदा किया.रंभा तो हवा मे उड़ रही थी.इतना बड़ा इंसान खुद उसका इंटरव्यू ले & फिर खुद उसे बेटे की सेक्रेटरी बनाने को कहे.ये काम तो वो अपने किसी आदमी से भी करवा सकता था लेकिन उसने खुद उसे बुला के जॉब की ऑफर दी,ये सब उसके बड़प्पन की निशानी थी!

विजयंत के असली मंसूबो से अंजान रंभा खुशी मे चूर बाहर आके अपनी नयी नौकरी के बारे मे जानने-समझने लगी.

जब नयी नौकरी की सारी बातें पक्की कर रंभा ट्रस्ट ग्रूप के ऑफीस से निकली तो उसकी खुशी का ठिकाना नही था.वो बेकरार हो रही थी अपनी खुशी किसी से बाँटने के लिए लेकिन कौन था इस शहर मे जिसके साथ वो अपनी खुशी बाँटती?..& तब उसे विनोद का ख़याल आया जिसकी मदद के बिना ये होना नामुमकिन था.उसने फ़ौरन उसे फोन लगाया.

"हेलो,डार्लिंग!कैसा रहा इंटरव्यू?"

"बढ़िया."

"तो क्या नौकरी मिल गयी तुम्हे?"

"नही & हां."

"क्या पहेलियाँ बुझा रही हो?",रंभा हंस पड़ी.

"आज शाम को मिलो.इस पहेली का हल भी बताउन्गि & ट्रीट भी दूँगी.चलो ना,कही बाहर खाना खाएँगे!"

"आज तो मुश्किल है,जानेमन.बहुत काम है."

"ओह.",रंभा मायूस हो गयी.

"ऐसा क्यू नही करती कि सीधा मेरे घर पहुँचो.वही जश्न मनाते हैं.",रंभा उसके जश्न का मतलब समझ मुस्कुराइ.

"ओके."

"ठीक है,मैं फोन करूँगा & बताउन्गा की कितने बजे तक तुम घर आ जाओ."

"बाइ."

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"हेलो,डार्लिंग.",कामया ने होटेल वाय्लेट मे विजयंत के प्राइवेट सूयीट मे कदम रखा.1 लिफ्ट सीधा सूयीट मे खुलती थी & विजयंत ने उसका 1 कार्ड कामया को दे रखा था.विजयंत केवल 1 ड्रेसिंग गाउन पहने बिस्तर पे अढ़लेटा वाइन पी रहा था.गाउन के गले मे से उसका सुनहरे बालो से भरा सीना & नीचे मज़बूत टांगे नुमाया हो रहे थे.कामया समझ गयी थी की गाउन के नीचे उसका प्रेमी नंगा है & उसने 1 वासना भरी मुस्कान फेंकी.उसने 1 पीले रंग का कसा हुआ स्लीवेलसस टॉप & स्किन टाइट जीन्स पहनी हुई थी.वो विजयंत के करीब आई & उसके सामने बाई बाँह पे अढ़लेटी हो गयी & उसके हाथ से वाइन का ग्लास ले 1 घूँट भरा & फिर उसके होंठ चूम लिए.

अगले ही पल दोनो 1 दूसरे को बाहो मे भरे अपने जिस्मो को आपस मे रगड़ते हुए बड़ी शिद्दत के साथ किस्सिंग कर रहे थे.विजयंत का बाया हाथ कामया की गंद से लेके पीठ को मसल रहा था.कामया ने मस्त हो अपनी दाई टांग उसकी टाँगो के उपर चढ़ा दी.उसके हाथ विजयंत के सर & सीने के बालो मे घूम रहे थे & ज़ुबान विजयंत के मुँह मे.

"तुम्हे मेरा 1 काम करना होगा.",कामया ने विजयंत का गाउन खोल दिया था & उसके सीने को चूमने & उसके निपल्स को चूसने के बाद नीचे जा रही थी.कुच्छ ही लम्हो बाद विजयंत का सख़्त लंड उसके मुँह मे अंदर-बाहर हो रहा था.विजयंत ने हाथ बढ़ा उसकी शर्ट को उपर किया & उसकी गोरी पीठ को सहलाते हुए अपना हाथ नीचे कर उसकी चूचियो को दबाने लगा.

"कैसा काम?",लंड ने हमेशा की तरह कामया को तुरंत मदहोश कर दिया था.वो उठी & 1 ही झटके मे अपना टॉप & ब्रा निकाल दिए & विजयंत को धकेल बिस्तर पे सुला उसके उपर आई & अपनी बाई चूची को पकड़ उसके मुँह मे दे दिया & जैसे ही विजयंत ने उसे चूसने शुरू किया वो च्चटपटाते हुए आहें भरने लगी.

"तुम्हे मुझे सोनिया कोठारी से मिलवाना होगा लेकिन इस तरह की उसे लगे कि ये 1 इत्तेफ़ाक़ है कि हम दोनो 1 ही जगह पे हैं.",उसने कामया को पलटा & फिर उसकी दूधिया चूचियो को चूसने लगा.कामया आहे भरते हुए हाथ नीचे ले जाके उसके लंड से खेलने लगी.

"ओह..विजयंत लेकिन ये कैसे मुमकिन होगा..ऊहह..मेरी पॅंट उतारो..",उसने विजयंत की जीन्स उतारने मे मदद की,"..पहले की बात और थी वो पार्टीस ऑर्गनाइज़ करने का ही काम करती थी तो मुलाकात हो जाती थी लेकिन अब वो कोठारी की बीवी है,मैं किस तरह से उसकी & तुम्हारी मुलाकात कर्वाऊं?!..ओईईईईईईईईईईईईई..!",विजयंत ने उसे नगी कर उसकी चूत मे उंगली करते हुए उसके दाने को चूम लिया था.

"वो सोचना तुम्हारा काम है,डार्लिंग.",विजयंत ने उसकी चूत मे 2 उंगलिया घुसा दी थी,"..मुझे बस सोनिया से मिलना है."

"हूँ.",कामया ने विजयंत का सर पकड़ उसके मुँह को अपनी चूत पे दबा उसे खामोश कर दिया & दोनो जिस्मो का मस्ती भरा खेल खेलने लगे.

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"उउम्म्म्म..विनोद..ऊव्व..!",विनोद के घर मे कदम रखते ही उसने रंभा को दबोच लिया था & उसके चेहरे पे किस्सस की बौछार करते हुए उसकी गंद पे चिकोटी काट ली थी.रंभा ने 1 दिला-ढाला टॉप & लंबी,ढीली स्कर्ट पहनी हुई थी जिसे उठा के विनोद उसकी मोटी गंद को दबाए जा रहा था.

"नयी नौकरी की बधाई कबूल करो जानेमन!",उसने उसे गोद मे उठा लिया & अपने बेडरूम मे ला बिस्तर पे लिटा उसे बाहो मे भर उसके जिस्म के साथ खेलने लगा.

"बड़े बेसब्र हो तुम!....उउम्म्म्मम..!",विनोद ने उसकी स्कर्ट को कमर तक उपर कर दिया था & उसकी जाँघो को सहलाते हुए उसकी गर्दन चूम रहा था.

"अब बताओ दिन मे क्या पहेली बुझा रही थी.",उसने उसका टॉप उपर किया & उसके चिकने पेट को चूमने लगा.

"उउन्न्ञन्..मुझे ट्रस्ट मे नौकरी मिल गयी मगर वो नही जिसके लिए मैने अर्ज़ी दी थी..आहह..!",विनोद उसकी नाभि चाट रहा था.

"तो फिर कौन सी नौकरी मिली?",रंभा ने उसके बाल पकड़ उसे उपर खींचा & बाहो मे भर उसे पलट के उसके उपर सवार हो गयी & उसकी टी-शर्ट को निकाल उसके सीने को चूमने लगी.उसकी गर्म सांसो के साथ जब उसने विनोद के सीने पे पहले बहुत हल्की किस्सस दी & फिर दांतो से धीरे-2 काटा तो विनोद आहे भरने पे मजबूर हो गया.

"मुझे विजयंत मेहरा के बेटे समीर की सेक्रेटरी की नौकरी मिली है.",रंभा विनोद के जिस्म के दोनो ओर घुटने जमा के उसके उपर बैठी थी & उसके हाफ-पॅंट मे से उसका लंड उसकी गंद मे चुभ रहा था.उसने झट से विनोद की पॅंट सर्काई & उसके तने लंड को पकड़ के अपने मुँह के हवाले किया.

"आहह..ये तो कमाल हो गया!",विनोद ने उसके बाल पकड़ उसके सर को अपने लंड पे दबा दिया.

"हूँ..",उसका मुँह विनोद के लंड से भरा हुआ था जिसके नीचे लटके आंडो को वो दबाए जा रही थी.विनोद को लगा की अगर रंभा इसी तरह उसके लंड को चुस्ती रही तो वो फ़ौरन झाड़ जाएगा.उसने उसके बाल पकड़ उसे उपर खींचा तो वो उसके उपर आ गयी & उसे चूमने लगी.दोनो पागलो की तरह 1 दूसरे को चूम रहे थे.विनोद के हाथ तो उसकी गंद से जैसे चिपक ही गये थे & उसकी पॅंटी की बगलो से अंदर घुस उसकी कसी फांको को दबोचे हुए थे.

"तुम्हारी बीवी अभी भी मयके मे है?",विनोद ने उसे लिटा दिया था & जल्दी-2 उसके कपड़े उतार रहा था.

"हां.",उसने उसकी पॅंटी निकाली & उसकी टाँगे फैला झुक के अपना मुँह उसकी गीली चूत से लगा दिया.

"कब लौटेगी?...ऊऊओह..!"

"कल.",उसने जवाब दिया & वापस उसकी चूत से बहते रस को पीने लगा.

"यही है वो....आन्न्न्नह.....हाआंन्‍णणन्..!",उसने दीवार पे लगी विनोद & उसकी बीवी की तस्वीर की ओर इशारा किया & ठीक उसी वक़्त विनोद ने उसके दाने को मुँह मे भर के उसपे जीभ फिराई & वो झाड़ गयी.

"हां.",विनोद उसकी फैली टाँगे थम घुटनो पे बैठा अपना लंड उसकी चूत मे घुसा रहा था.रंभा ने गौर किया कि विनोद अपनी बीवी के बारे मे बात करने से कतरा रहा था.उसने विनोद को अपने उपर गिराया & बाहो मे भर उसे चूमने लगी.उसका लंड चूत मे उसे बहुत भला लग रहा था & जिस्म मे वोही जाना-पहचाना मज़ेदार एहसास अपनी शिद्दत की ओर पहुँच रहा था.विनोद उसे चूमते,उसकी गर्दन को चूमते हुए बहुत ज़ोरदार धक्के लगा रहा था.रंभा ने अपनी बाहें & टाँगे उसके जिस्म के गिर्द लपेट दी थी & अपनी कमर जोश मे उचका रही थी.

"विनोद,तुम मेरे सवालो से परेशान हो गये थे ना?",उसने उसे पलटा & उसके उपर आ गयी.उसकी मस्त चूचियाँ विनोद के सीने पे दबी हुई थी & उसने उसके चेहरे को हाथो मे थामा हुआ था.विनोद ने जवाब नही दिया & अपना मुँह फेर लिया.

"उउम्म्म्म..डार्लिंग..घबराते क्यू हो?",कमर हिलाते हुए रंभा उसके चेहरे को चूम रही थी,"..तुम्हे क्या लगता है कि मैं तुम्हारे पीछे पड़ जाऊंगी?..तुम शादीशुदा हो इस बात का फयडा उठा तुम्हे धमकाऊँगी..हूँ?",विनोद उसकी आँखो मे देखने लगा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--11

gataank se aage.

"thanx.",usne intrecom band kiya & thik usi waqt uske dimagh me uski pareshani ka hal kaundha.tajurbe & qualifications ki bina pe bas sonam hi uski secretary ban sakti thi.aaj tak usne apne business ke sath samjhauta nahi kiya tha & aaj bhi nahi karega.usne intercom ka button dabaya,"ms.sonam raut & ms.Rambha Verma ke alawa baki ladkiyo ko jane ko kaho & fir ms.raut ko mere paas bhejo."

"ms.raut,congratulations!",vijayant ne us se hath milaya to sonam ke badan me jhurjhuri daud gayi.uske cabin me ghusne pe vijayant ne khade hoke uska swagat kiya tha,"aap is post ke liye chun li gayi hain."

"thanx,sir."

"umeed hai huamre sath kaam karke aapko achha lagega.aap bahar jayengi to aapko Mr.Kumar milenge joki aapko offer letter denge agar usme likhi baaten aapko manzur hongi to aapka appointment letter aapko thama diya jayega."

"thank you,sir.",sonam bahar aayi & kumar naam ke shakhs ke sath baith apni salary & baki baaten samajhne lagi.

"aaiye ms.rambha.",vijayant khada muskura raha tha,ab cabin me roshni bhi zyada thi.uske lambe-chaude deel-daul & handsome chehre ko dekh rambha ke dil me 1 kasak uthi.uska dil kiya ki apne hath se uski sunehri dadhi me hath fira de.usne rambha ko baithne ko ishara kiya to rambha desk ke samne ki 1 kursi pe baith gayi.vijayant uske kareeb aaya & desk pe baith gaya.1 pal ko uski nigahe rambha ki makkhani jangho pe padi fir usne apni nazre uski nazro se mila di.

"ms.rambha,main aapko apni secretary ki jagah nahi de sakta.",mayus rambha ne sar jhuka liya,"..lekin main aapko 1 dusri post offer kar sakta hu.",rambha ne hairat se sar uthaya.

"kya aap mere bete ki secretary banana pasand karengi?"

"sir!",rambha is naye offer se chaunk gayi thi.

"ji,dekhiye koi aur umeedvar tha joki aapse behtar tha lekin iska ye matlab nahi ki aap kabil nahi hain.aap kabil hain & isliye main aapko khona nahi chahta..",khona lafz pe vijayant ne zor diya tha,"..to kya aapko ye offer manzoor hai?"

"zaroor,sir..",rambha khushi & rahat se muskurayi,"..aapke group me kaam karne ka mauka main ganwane ki soch bhi nahi sakti."

"to thik hai.congratulations!",usne uski or hath badhaya & uske komal,nazuk se hath ke ehsas se vo fir pagal ho gaya.uska dil kiya ki use khinch baaho me bhar uske chehre ko apne bekarar hotho ke nishano se dhank de!

"aap bahar jaiye,aapko sabhi baaten samjha di jayengi.",na chhate hue bhi usne uska hath chhoda & use vida kiya.rambha to hawa me ud rahi thi.itna bada insan khud uska interview le & fir khud use bete ki secretary banane ko kahe.ye kaam to vo apne kisi aadmi se bhi karwa sakta tha lekin usne khud use bulake job ki offer di,ye sab uske badappan ki nishani thi!

vijayant ke asli mansoobo se anjan rambha khushi me choor bahar aake apni nayi naukri ke bare me jaanane-samajhne lagi.

Jab nayi naukri ki sari baaten pakki kar Rambha Trust group ke office se nikli to uski khushi ka thikana nahi tha.vo bekarar ho rahi thi apni khushi kisi se baantane ke liye lekin kaun tha is shehar me jiske sath vo apni khushi baantati?..& tab use Vinod ka khayal aaya jiski madad ke bina ye hona namumkin tha.usne fauran use fone lagaya.

"hello,darling!kaisa raha interview?"

"badhiya."

"to kya naukri mil gayi tumhe?"

"nahi & haan."

"kya paheliyan bujha rahi ho?",rambha hans padi.

"aaj sham ko milo.is paheli ka hal bhi bataungi & treat bhi dungi.chalo na,kahi bahar khana khayenge!"

"aaj to mushkil hai,janeman.bahut kaam hai."

"oh.",rambha mayoos ho gayi.

"aisa kyu nahi karti ki seedha mere ghar pahuncho.vahi jsahn manate hain.",rambha uske jashn ka matlab samajh muskurayi.

"ok."

"thik hai,main fone karunga & bataunga ki kitne baje tak tum ghar aa jao."

"bye."

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"hello,darling.",Kamya ne Hotel Violet me Vijayant ke private suite me kadam rakha.1 lift seedha suite me khulti thi & vijayant ne uska 1 card kamya ko de rakha tha.vijayant kewal 1 dressing gown pehne bistar pe adhleta wine pi raha tha.gown ke gale me se uska sunahre baalo se bhara seena & neeche mazbut tabge numaya ho rahe the.kamya samajh gayi thi ki gown ke neeche uska premi nanga hai & usne 1 vasna bhari muskan fenki.usne 1 pile rang ka kasa hua sleevelss top & skin tight jeans pehni hui thi.vo vijayant ke karib aayi & uske samne bayi banh pe adhleti ho gayi & uske hath se wine ka glass le 1 ghunt bhara & fir uske honth chum liye.

agle hi pal dono 1 dusre ko baaho me bhare apne jismo ko aapas me ragadte hue badi shiddat ke sath kissing kar rahe the.vijayant ka baya hath kamya ki gand se leke pith ko masal raha tha.kamya ne mast ho apni dayi tang uski tango ke upar chadha di.uske hath vijayant ke sar & seene ke baalo me ghum rahe the & zuban vijayant ke munh me.

"tumhe mera 1 kaam karna hoga.",kamya ne vijayant ka gown khol diya tha & uske seene ko chumne & uske nipples ko chusne ke baad neeche ja rahi thi.kuchh hi lamho baad vijayant ka sakht lund uske munh me andar-bahar ho raha tha.vijayant ne hath badha uski shirt ko upar kiya & uski gori pith ko sehlate hue apna hath neeche kar uski chhatiyo ko dabane laga.

"kaisa kaam?",lund ne humesha ki tarah kamya ko turant madhosh kar diya tha.vo uthi & 1 hi jhatke me apna top & bra nikal diye & vijayant ko dhakel bistar pe sula uske upar aayi & apni bayi chhati ko pakd uske munh me de diya & jaise hi vijayant ne use chusne shuru kiya vo chhatpatate hue aahen bharne lagi.

"tumhe mujhe Soniya Kothari se milwana hoga lekin is tarah ki use lage ki ye 1 ittefaq hai ki hum dono 1 hi jagah pe hain.",usne kamya ko palta & fir uski doodhiya choochiyo ko chusne laga.kamya aahe bharte hue hath neeche le jake uske lund se khelne lagi.

"ohhhhhhh..vijayant lekin ye kaise mumkin hoga..oohhhhh..meri pant utaro..",usne vijayant ki jeans utarne me madad ki,"..pehle ki baat aur thi vo parties organize karne ka hi kaam karti thi to mulakat ho jati thi lekin ab vo Kothari ki biwi hai,main kis tarah se uski & tumhari mulakat karwaoon?!..ouiiiiiiiiiiiiiiii..!",vijayant ne use nagi kar uski chut me ungli karte hue uske dane ko chum liya tha.

"vo sochna tumhara kaam hai,darling.",vijayant ne uski chut me 2 ungliya ghusa di thi,"..mujhe bas soniya se milna hai."

"hun.",kamya ne vijayant ka sar pakad uske munh ko apni chut pe daba use khamosh kar diya & dono jismo ka masti bhara khel khelne lage.

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"uummmm..vinod..ooww..!",vinod ke ghar me kadam rakhte hi usne rambha ko daboch liya tha & uske chehre pe kisses ki bauchhar karte hue uski gand pe chikoti kaat li thi.rambha ne 1 dila-dhala top & lambi,dhili skirt pehni hui thi jise utha ke vinod uski moti gand ko dabaye ja raha tha.

"nayi naukri ki badhayi kabul karo janeman!",usne use god me utha liya & apne bedroom me la bistar pe lita use baaho me bhar uske jism ke sath kehlen laga.

"bade besabr ho tum!....uummmmm..!",vinod ne uski skirt ko kamar tak upar kar diya tha & uski jangho ko sehlate hue uski gardan chum raha tha.

"ab batao din me kya paheli bujha rahi thi.",usne uska top upar kiya & uske chikne pet ko chumne laga.

"uunnnn..mujhe Trust me naukri mil gayi magar vo nahi jiske liye maine arzi di thi..aahhhh..!",vinod uski nabhi chat raha tha.

"to fir kaun si naukri mili?",rambha ne uske baal pakad use upar khincha & baaho me bhar use palat ke uske upar sawar ho gayi & uski t-shirt ko nikal uske seene ko chumne lagi.uski garm sanso ke sath jab usne vinod ke seene pe pehle bahut halki kisses di & fir danto se dhire-2 kaata to vinod aahe bharne pe majbur ho gaya.

"mujhe Vijayant Mehra ke bete Sameer ki secretary ki naukri mili hai.",rambha vinod ke jism ke dono or ghutne jama ke uske upar baithi thi & uske half-pant me se uska lund uski gand me chubh raha tha.usne jhat se vinod ki pant sarkayi & use tane lund ko pakad ke apne munh ke hawale kiya.

"aahhhh..ye to kamaal ho gaya!",vinod ne uske baal pakad uske sar ko apne lund pe daba diya.

"hun..",uska munh vinod ke lund se bhara hua tha jiske neeche latke ando ko vo dabaye ja rahi thi.vinod ko laga ki agar rambha isi tarah uske lund ko chusti rahi to vo fauran jhad jayega.usne uske baal pakad use upar khincha to vo uske upar aa gayi & use chumne lagi.dono paglo ki tarah 1 dusre ko chum rahe the.vinod ke hath to uski gand se jaise chipak hi gaye the & uski panty ki baglo se andar ghus uski kasi fanko ko daboche hue the.

"tumhari biwi abhi bhi mayke me hai?",vinod ne use lita diya tha & jaldi-2 uske kapde utar raha tha.

"haan.",usne uski panty nikali & uski tange faila jhuk ke apna munh uski gili chut se laga diya.

"kab lautegi?...ooooohhhhhhhhhhh..!"

"kal.",usne jawab diya & vapas uski chut se behte ras ko pine laga.

"yehi hai vo....aannnnhhhhhhhhh.....haaaannnnn..!",usne deewar pe lagi vinod & uski biwi ki tasvir ki or ishara kiya & thik usi waqt vinod ne uske dane ko munh me bhar ke uspe jibh firayi & vo jhad gayi.

"haan.",vinod uski faili tange tham ghutno pe baitha apna lund uski chut me ghusa raha tha.rambha ne gaur kiya ki vinod apni biwi ke bare me baat karne se katra raha tha.usne vinod ko apne upar giraya & baaho me bhar use chumne lagi.uska lund chut me use bahut bhala lag raha tha & jism me vohi jana-pehchana mazedar ehsas apni shiddat ki or pahunch raha tha.vinod use chumte,uski gardan ko chumte hue bahut zordar dhakke laga raha tha.rambha ne apni baahen & tange uske jism ke gird lapet di thi & apni kamar josh me uchka rahi thi.

"vinod,tum mere sawalo se pareshan ho gaye the na?",usne use palta & uske upar aa gayi.uski mast chhatiyan vinod ke seene pe dabi hui thi & usne uske chehre ko hatho me thama hua tha.vinod ne jawab nahi diya & apna munh fer liya.

"uummmm..darling..ghabrate kyu ho?",kamar hilate hue rambha uske chehre ko chum rahi thi,"..tumhe kya lagta hai ki main tumahre peechhe pad jaoongi?..tum shadishuda ho is baat ka fayda utha tumhe dhamkaoongi..hun?",vinod uski aankho me dekhne laga.

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raj..
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Re: Jaal -जाल

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जाल पार्ट--12

गतान्क से आगे.

"विनोद,मुझे कुच्छ चाहिए था.तुमने उसकी कीमत माँगी & मैने वो अदा की..",रंभा अब उसके सीने से उठ गयी थी & उसके सीने से लेके पेट तक हाथ चलाती,अपनी चूचिया उछालती कमर हिला रही थी,"..तुमने अपना वादा निभाया & मुझे मेरी चीज़ दे दी.कल को मेरी शादी हो जाएगी तब क्या मैं तुमसे डरती फिरुन्गि कि कही तुम मेरे पति को कुच्छ ना कह दो?..नही,विनोद..ये जो हो रहा है दो इंसानो की मर्ज़ी से हो रहा है.इसमे तुम्हारी बीवी या मेरा होने वाला बाय्फ्रेंड या पति का क्या काम!"

"..इसलिए मेरी जान,इन बेकार की बातो को दिल से निकालो & ये बताओ कि कल जब तुम्हारी बीवी वापस आ जाएगी तो हम कैसे मिलेंगे?",विनोद अब मुस्कुरा रहा था.रंभा ने जैसे उसके ज़हन को पढ़ लिया था & उसकी सारी उलझन को दूर कर दिया था.उसने उसकी चूचिया थाम ली & उन्हे दबाया.

"जब भी फ़ुर्सत मिलेगी मैं आपकी खिदमत मे हाज़िर हो जाऊँगा,हुज़ूर!",उसकी मटकिया अंदाज़ मे कही बात से रंभा हंस पड़ी.विनोद ने उसकी चूचिया पकड़ उसे नीचे खींचा,"..पर पहले तुम उस हॉस्टिल को छोड़ दो & कोई किराए का घर ले लो.",उसने उसे पलट के खुद के नीचे किया & अब बहुत ही गहरे धक्के लगाने लगा.

"उउन्न्ञणनह..सोच तो मैं भी कुच्छ ऐसा रही थी..हाईईईईईईईई....!",देर से हो रही चुदाई रंग लाई & रंभा झाड़ गयी.

"..लेकिन कैसे मिलेगा घर?",कुच्छ पलो बाद जब खुमारी थोड़ी कम हुई तो उसने अपनी चूचियो से चिपके विनोद का सर उपर उठाया.

"मैं तुम्हे 1 एजेंट का पता बताउन्गा,उस से मिल लेना.",अब उसकी बारी थी.वो उसके सीने से उठा & अपना वज़न अपने हाथो पे रख बहुत ज़ोर से अपनी कमर हिलाने लगा.रंभा अब जोश से चीख रही थी & विनोद भी उसकी चूत की सिकुड़ने-फैलने की मस्तानी हरकत से आहत हो आहें भर रहा था.रंभा ने अपने नाख़ून विनोद की बाहो मे धंसा दिए & कमर उचकाती हुई बदन को मोड़ अपना सर पीछे झटका.वो झाड़ गयी थी & झाड़ते ही उसकी चूत ने विनोद के लंड को और कस लिया.

"आहह..!",विनोद के मुँह से आह निकली & उसका जिस्म झटके खाने लगा.उसका गाढ़ा वीर्य रंभा की चूत मे भर रहा था.वो हांफता उसके सीने पे लेट गया & सुकून से मुस्कुराती रंभा ने उसे बाहो मे भर लिया.

पॅरिस के फोर सीज़न्स जॉर्ज व होटेल के हनिमून सूयीट के बिस्तर पे सोनिया पेट के बल नंगी पड़ी थी.उसके हाथो ने बिस्तर की चादर को ज़ोर से भींच रखा था & होटो पे मस्ती भरी मुस्कान खेल रही थी.उसके पीछे ब्रिज कोठारी उसकी सुडोल दाई तंग के पिच्छले गुदाज़ हिस्से को चूम नही बल्कि धीमे-2 चूस रहा था.सोनिया ने हल्की सी आह भारी & अपना मुँह बिस्तर मे च्छूपा लिया & फिर अपने सीने को देखा,उसके जिस्म पे कयि जगह छ्होटे-2 निशान पड़े हुए थे जोकि सब ब्रिज के होटो की मेहेरबानी थी.

"आन्न्ह्ह्ह्ह..!",सोनिया ने बिस्तर से सर उठा के झटका,ब्रिज उसकी मोटी गंद को मसल्ते हुए उसकी चूत मे अपनी लपलपाति जीभ फिरा रहा था.सोनिया की आँखे मस्ती के नशे से भर गयी & उसने बेसब्री से कमरे मे नज़र घुमाई,चारो तरफ वो तोहफे पड़े थे जो ब्रिज ने हनिमून के पहले दिन से उसके लिए खरीदने शुरू कर दिए थे.अब तो उसे किसी चीज़ की तारीफ करने मे भी डर लगने लगा था.इधर वो तारीफ करती उधर ब्रिज उसकी कीमत अदा करता नज़र आता.सोनिया ज़िंदगी मे इतनी खुश पहले कभी नही थी.

उसके बदन मे बिजली दौड़ रही थी & वो काँप रही थी,ब्रिज की जीभ ने उसकी मस्ती को अंजाम तक पहुँचा ही दिया था.उसने 1 लंबी आह भरी,अब ब्रिज उसकी गंद को हवा मे उठा उसकी चूत मे लंड घुसा रहा था.सोनिया फ़ौरन अपने घुटनो & हाथो पे हो गयी.ब्रिज के साथ चुदाई मे उसे जो मज़ा आया था वो आजतक उसने कभी महसूस नही किया था.ब्रिज धक्के लगाने लगा & वो चादर भिंचे अपने सर को हिलाती,ज़ूलफे झटकाती मदहोश हो आसमान मे उड़ने लगी.

तभी ब्रिज का फोन बजा,बिस्तर पे लेटते हुए अपने सीने को उसपे दबाते हुए उसने फोन उठा के नंबर देखा,"ये सोनम कौन है..ऊन्नह..?",ब्रिज ने लंड पूरा बाहर खींच फिर 1 ही झटके मे ज़ोर से अंदर घुसेड दिया था.

"रानी है."

"क्या?!",जलन,गुस्से,हैरत से भरी आवाज़ के साथ उसने सर घुमा के बाए कंधे के उपर से उसे देखा.ब्रिज बीवी की इस अदा पे हंस दिया.

"अभी समझाता हू.",उसने उसके हाथ से मोबाइल लेके अपने कान से लगाया,"हेलो."

"मुझे विजयंत मेहरा के सेक्रेटरी की नौकरी मिल गयी है."

"वेरी गुड.",ब्रिज ने चुदाई रोक दी तो परेशान हो सोनिया ने खुद ही गंद आगे- पीछे करते हुए खुद ही अपनी चुदाई शुरू कर दी,"..अब तुम अगले 3 महीनो तक मुझे उसके ग्रूप के बारे मे कोई खबर नही दोगि."

"क्या?!"

"हां,मैं चाहता हू कि मेहरा को पूरा यकीन हो जाए कि तुम 1 वफ़ादार इंसान हो.तुम्हारे इस फोन नंबर के बारे मे किसी को भी नही पता चलना चाहिए.इसे हर वक़्त ऑन रखना ताकि मुझे तुमसे कॉंटॅक्ट करने मे कोई परेशानी ना हो लेकिन इसे साइलेंट मोड पे रखना.बस जैसा कहा है करती जाओ तो जीत अपनी ही होगी."

"ओके & आपका हनिमून कैसा चल रहा है?..अपनी बीवी की चूत का तो बॅंड बजा दिया होगा आपने अब तक!",उसने चुहल की.ब्रिज ज़ोर से हंसा & फोन बंद कर दिया.सोनिया अब बहुत ज़ोर से कमर हिलाते हुए आहें भर आयी थी.ब्रिज उसके उपर झुका & उसे बिस्तर & अपने जिस्म के बीच दबा दिया.अपने हाथ उसने सोनिया के जिस्म के नीचे घुसा के उसकी गोल छातियो को दबोच लिया & तेज़ी से उसकी चुदाई करने लगा.

"कौन थी....चुड़ैल?!",ब्रिज ने उसके दाए कंधे के उपर से सर झुकाते हुए उसके होंठ चूमने की कोशिश की तो उसने मुँह फेर लिया.ब्रिज उसकी जलन देख हंसा.

"अरे मेरी जान,वो मेरी बिच्छाई शतरंज की बाज़ी का वो प्यादा है जो दुश्मन के खेमे मे घुस बिसात की आख़िरी पाले तक पहुच अब रानी मे तब्दील हो गयी है & मुझे ये बाज़ी मेरा यही मोहरा जितवायेगा."

"क्या कह रहे हो मेरी कुच्छ समझ नही आ रहा..उउम्म्म्मम..!",पति की बातो से उसका गुस्सा थोड़ा कम तो हुआ था & इस बार उसने उसे अपने लब चूमने की इजाज़त दे दी थी.

"तुम छ्चोड़ो ये बातें,मेरी जान..वो मेरी नौकर है & इस वक़्त मेरे 1 बहुत अहम काम को अंजाम देने मे जुटी है.मेरे दिल की रानी तो सिर्फ़ तुम हो मेरी बेगम सिर्फ़ तुम!",सोनिया थोड़ी देर खफा हो ब्रिज को थोड़ा तड़पाना चाहती थी मगर उसने ऐसे लहजे मे बात कही थी कि वो मुस्कुराए बिना नही रह सकी.ब्रिज ने होंठ उसकी गर्दन के थोड़ा नीचे उसकी पीठ पे चिपका दिए & बड़े गहरे धक्के लगाने लगा.पूरा सूयीट सोनिया की आहो से गुलज़ार हो गया.अपने पति की क़ातिल चुदाई से बहाल वो फ़ौरन झाड़ गयी & उसके पीछे उस से सटा उसका पति भी झटके ख़ाता झाड़ गया.

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अगले 4 दिन रंभा के लिए काफ़ी भाग-दौड़ से भरे थे.नये दफ़्तर मे 3 दिन उसकी ट्रैनिंग हुई & फिर चौथे दिन से उसकी नौकरी शुरू हो गयी.पहली मुलाकात मे ही उसे समीर बड़ा अच्छा लगा था.बाप ही की तरह हॅंडसम & बहुत शालीन इंसान लगा था उसे वो लेकिन जहा विजयंत को देख वो थोड़ा असहज हो जाती थी वही समीर के साथ उसे ज़रा भी घबराहट नही होती थी.

अब इसका कारण क्या था ये उसकी समझ मे नही आया था,उसकी रोबिली शख्सियत,उसका रुतबा या फिर उसकी नज़रें.विजयंत को देख उसके दिल मे 1-2 बार गुस्ताख ख्याल भी आए थे,अब वो क्या करती वो था ही इतना हॅंडसम!

अगले दिन सभी लोग गुजरात जा रहे थे जहा समीर की निगरानी मे पूरे हुए प्रॉजेक्ट का उद्घाटन करने खुद PM आ रहे थे मगर उस से पहले रंभा को 1 बहुत ज़रूरी काम निपटाना था.विनोद के बताए एजेंट ने उसे काई मकान दिखाए थे मगर उसे कोई पसंद नही आया & जो आया उसका मकान मालिक म्यूज़्ज़ मकान देने को तैयार नही था.वो विनोद का जान-पहचान वाला था लेकिन फिर भी वो मकान देने को राज़ी नही हो रहा था.

रंभा को वो घर बहुत पसंद आ गया था & उसने ठान लिया था कि जो भी हो उसे किराए पे यही मकान चाहिए.मकान मालिक विनोद की उम्र का ही था बस थोड़ा मोटा था,वो विदेश मे रहता था डेवाले मे उसका 4 कमरो का फ्लॅट था जिसके 2 कमरे वो किराए पे देना चाहता था.बाकी 2 कमरो को वो अपने समान के साथ बंद अपने क़ब्ज़े मे रखना चाहता था.

रंभा ब्यूटी पार्लर मे थी,गुजरात के फंक्षन के लिए उसने लाल बॉर्डर की सफेद सारी & लाल ब्लाउस लिया था.पार्लर मे वो उस लिबास को ट्राइ करते हुए अपना साज़-सिंगर करवा रही थी.वो फंक्षन के पहले 1 बार खुद को उस लिबास मे देख लेना चाहती थी ताकि उस दिन उसे तैय्यार होने मे ना परेशानी हो ना वक़्त लगे.

वो पार्लर मे बैठी थी कि विनोद का फोन आया की वो फ़ौरन उसके पहचान वाले के मकान पे पहुँचे,दोनो ने तय किया था की 1 आख़िरी बार मकान मालिक से बात करके देखेंगे.रंभा तुरंत पार्लर से निकल गयी & उस बिल्डिंग के नीचे खड़ी हो विनोद का इंतेज़ार करने लगी जिस इमारत मे वो फ्लॅट था.सजी-सँवरी रंभा को आने-जाने वाले घूर रहे थे मगर विनोद का कही पता नही था,उपर से वो फोन भी नही उठा रहा था.रंभा खिज उठी & तय किया कि वो उपर फ्लॅट मे जाके सीधा मकान मालिक से बात कर ले.

"हेलो.",मकान मालिक परेश ने दरवाज़ा खोला,"..विनोद ने कहा था कि आप दोनो आने वाले हैं.",रंभा अंदर आई.जो हॉल & कमरा किराए पे देना था वो खाली था,बाकी 2 कमरो मे परेश का समान था.परेश ने उसे 1 कमरे मे बिस्तर पे बिठाया.

"परेश जी,आप मुझे मकान क्यू नही देना चाहते?",रंभा सीधा मुद्दे पे आई.परेश उसके सजे-सँवरे रूप को देखे जा रहा था.रंभा के सवाल से जैसे वो होश मे आया.

"ज-जी..हां..वो बात ये है कि..",रंभा ने भी उसकी निगाहो की गुस्ताख़ी देख ली थी & उसके दिमाग़ मे ख़याल कौंधा कि शायद उसके जिस्म का जादू यहा भी चल जाए & उसने सारी ठीक करने के बहाने पल्लू थोड़ा किनारे कर अपना गोरा पेट उसकी निगाहो के सामने कर दिया,"..मैं किसी अकेली लड़की को घर देने मे डरता हू.बुरा मत मानीएगा..",उसकी निगाहें रंभा के पेट & चेरे के बीच ही घूम रही थी,"..मगर कल कही कुच्छ उल्टा-सीधा हो जाए तो मेरे घर का तो नाम खराब होगा ना."

"आपको मैं ऐसी-वैसी लड़की लगती हू?",रंभा ने भोलेपन से कहा & अपना बाया हाथ अपने पेट पे फिराया.ऐसा करने से पल्लू थोड़ा सा सरका & परेश को उसका हल्का सा क्लीवेज दिखाई दे गया.

"मेरा वो मतलब नही था..",वो बिस्तर मे उसके बगल मे ही बैठा था,"..लेकिन आप मेरी बात समझने की कोशिश तो कीजिए.आप अकेली रहेंगी यहा &.."

"& क्या?",रंभा थोड़ा सर्की & अपना दाया घुटना उसके बाए से सटाते हुए उसका हाथ पकड़ लिया,"..अब आप जैसा शरीफ इंसान मुझे घर नही देगा तो कौन देगा!..आप मेरे नज़रिए से भी तो देखिए कही मुझे किसी ऐसे-वैसे आदमी ने घर दे दिया तो..&..कही..",रंभा ने उसके हाथ पे हाथ रखे नज़रे नीची कर ली.

"कही ..क्या रंभा जी?",परेश था तो मर्द ही,उसने रंभा का हाथ थाम लिया.अब इतनी खूबसूरत लड़की खुद हाथ पकड़े तो वो मौका क्यू छ्चोड़े!

"कही उसने मेरे साथ कुच्छ कर दिया तो?",रंभा ने सर झुकाए शर्म से कहा.

"कुच्छ क्या?",परेश को ऐसी बात करने मे मज़ा आने लगा था.

"कही मेरे अकेलेपन का फ़ायदा उठा लिया तो."

"मैं समझा नही."

"बानिए मत!",रंभा ने शर्म से मुस्कुराते हुए उसे देखा,"..प्लीज़ परेश जी,दे दीजिए ना..प्लीज़!",वो मचलते हुए उसके & करीब हुई तो परेश थोड़ा पीछे हुआ & लड़खड़ा बिस्तर पे गिर गया.रंभा उसके उपर सवार हो गयी.

"परेश जी,मुझे आपका मकान पसंद है & आप भी.",उसका आँचल खिसक गया था & झुके होने की वजह से सीने को उभर ब्लाउस से बाहर छलक्ने को तैय्यार थे.परेश के माथे पे पसीना च्छच्छला आया,"..मैं अभी सेक्यूरिटी डेपॉज़िट देने को तैयार हू.",अपना चेहरा परेश के बिल्कुल करीब ला अपने होंठ उसके होंठो से बस 2 इंच की दूरी पे रोक लिए.उसकी गर्म साँसे,मदमाती खुसबु से परेश का दिमाग़ घूम गया.

"म-मगर..र-रंभा जी..-"

"-..सिर्फ़ रंभा.",रंभा ने उसके होंठ चूम लिए,"..आप मुझे ही मकान देंगे.",उसने उसका बाया गाल चूमा,"बोलिए?",& फिर दाया गाल चूमा & उसकी आँखो से आँखे मिला दी.

"ल-लेकिन.."

"परेश जी,मुझे किराए पे घर दीजिए & जब भी आप यहा आएँगे,किराए के अलावा किरायेदार भी आपकी बाहो मे होगा.कहिए इतनी बढ़िया डील दे सकता है कोई आपको?"

परेश ने अपने हाथ उसकी नगी पीठ पे जमा दिए & उचक के उसे चूमने को हुआ पर रंभा ने अपना सर पीछे खींच लिया,"ना पहले कहिए कि घर मुझे देंगे."

"तुम्हे ही दूँगा मेरी जान!",परेश ने उसे बाहो मे कस बिस्तर पे पलट दिया & चूमने लगा.वो उस हुसनपरी को बाहो मे पा दीवाना हो गया था.रंभा ने उसे परे धकेला & खड़ी हो गयी.

"मेरी सारी खराब हो जाएगी.",वो शोखी से मुस्कुराइ & अपनी सारी उतारने लगी.परेश की साँसे तेज़ हो गयी & वो भी अपनी कमीज़ के बटन खोलने लगा.मुस्कुराती रंभा ने बेझिझक अपने सारे कपड़े उतार दिए.उसके नंगे,गोरे जिस्म को देख परेश का मुँह हैरत से खुला रह गया.उसकी नज़रे ये तय नही कर पा रही थी कि कहा देखे-रंभा के ऊँचे सीने को,उसके गोल पेट को या फिर सुडोल टाँगो & कसी जाँघो के बीच उसकी गुलाबी चूत को!

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क्रमशः.......

JAAL paart--12

gataank se aage.

"vinod,mujhe kuchh chahiye tha.tumne uski keemat mangi & maine vo ada ki..",rambha ab uske seene se uth gayi thi & uske seene se leke pet tak hath chalaati,apni chhatiya uchhlati kamar hila rahi thi,"..tumne apna vada nibhaya & mujhe meri chiz de di.kal ko meri shadi ho jayegi tab kya main tumse darti firungi ki kahi tum mere pati ko kuchh na keh do?..nahi,vinod..ye jo ho raha hai do insano ki marzi se ho raha hai.isme tumhari biwi ya mera hone wala boyfriend ya pati ka kya kaam!"

"..isliye meri jaan,in bekar ki baato ko dil se nikalo & ye batao ki kal jab tumhari biwi vapas aa jeygi to hum kaise milenge?",vinod ab muskura raha tha.rambha ne jaise uske zehan ko padh liya tha & uski sari uljhan ko door kar diya tha.usne uski choochiya tham li & unhe dabaya.

"jab bhi fursat milegi main aapki khidmat me hazir ho jaoonga,huzur!",uski matkiya andaz me kahi baat se rambha hans padi.vinod ne uski choochiya pakad use neeche khincha,"..par pehle tum us hostel ko chhodod & koi kiraye ka ghar le lo.",usne use palat ke khud ke neeche kiya & ab bahut hi gehre dhakke lagane laga.

"uunnnnnhhhhhhhh..soch to main bhi kuchh aisa rahi thi..haiiiiiiiii....!",der se ho rahi chudai rang layi & rambha jhad gayi.

"..lekin kaise milega ghar?",kuchh palo baad jab khumari thodi kam hui to usne apni choochiyo se chipke vinod ka sar upaar uthaya.

"main tumhe 1 agent ka pata bataunga,us se mil lena.",ab uski bari thi.vo uske seene se utha & apna vazan apne hatho pe rakh bahut zor se apni kamar hilane laga.rambha ab josh se chukh rahi thi & vinod bhi uski chut ki skudne-failne ki mastani harkat se aahat ho aahen bhar raha tha.rambha ne apne nakhun vinod ki baaho me dhansa diye & kamar uchakti hui badan ko mod apna sar peechhe jhatka.vo jhad gayi thi & jhadte hi uski chut ne vinod ke lund ko aur kas liya.

"aahhhhh..!",vinod ke munh se aah nikli & uska jism jhatke khane laga.uska gadha virya rambha ki chut me bhar raha tha.vo hanfta uske seene pe let gaya & sukun se muskurati rambha ne use baaho me bhar liya.

Paris ke Four Seasons George V hotel ke honeymoon suite ke bistar pe Soniya pet ke bal nangi padi thi.uske hatho ne bistar ki chadar ko zor se bhinch rakha tha & hotho pe masti bhari muskan khel rahi thi.uske peechhe Brij Kothari uski sudol dayi tang ke pichhle gudaz hisse ko chum nahi balki dheeme-2 chus raha tha.soniya ne halki si aah bhari & apna munh bistar me chhupa liya & fir apne seene ko dekha,uske jism pe kayi jagah chhote-2 nishan pade hue the joki sab brij ke hotho ki meherbani thi.

"aannhhhh..!",soniya ne bistar se sar utha ke jhatka,brij uski moti gand ko masalte hue uski chut me apni laplapati jibh fira raha tha.soniya ki aankhe masti ke nashe se bhar gayi & usne besabri se kamre me nazar ghumayi,charo taraf vo tohfe pade the jo brij ne honeymoon ke pehle din se uske liye kharidne shuru kar diye the.ab to use kisi chiz ki tarif karne me bhi darr lagne laga tha.idhar vo tarif karti udhar brij uski keemat ada karta nazar aata.soniya zindagi me itni khush pehle kabhi nahi thi.

uske badan me bijli daud rahi thi & vo mkanp rahi thi,brij ki jibh ne uski masti ko anjam tak pahuncha hi diya tha.usne 1 lambi aah bhari,ab brij uski gand ko hawa me utha uski chut me lund ghusa raha tha.soniya fauran apne ghutno & hatho pe ho gayi.brij ke sath chudai me use jo maza aaaya tha vo aajtak usne kabhi nehsus nahi kiya tha.brij dhakke lagane laga & vo chadar bhinche apne sar ko hilati,zulfe jhatakti madhosh ho aasman me udne lagi.

tabhi brij ka fone baja,bistar pe letate hue apne seene ko uspe dabate hue usne fone utha ke number dekha,"ye Sonam kaun hai..oonnhhhhh..?",brij ne lund pura bahar khinch fir 1 hi jhatke me zor se andar ghused diya tha.

"rani hai."

"kya?!",jalan,gusse,hairat se bhari aavaz ke sath usne sar ghumake baye kandhe ke upar se use dekha.brij biwi ki is ada pe hans diya.

"abhi samjhata hu.",usne uske hath se mobile leke apne kaan se lagaya,"hello."

"mujhe Vijayant Mehra ke secretary ki naukri mil gayi hai."

"very good.",brij ne chudai rok di to pareshan ho soniya ne khud hi gand aage- peechhe karte hue khud hi apni chudai shuru kar di,"..ab tum agle 3 mahino tak mujhe uske group ke bare me koi khabar nahi dogi."

"kya?!"

"haan,main chahta hu ki mehra ko pura yakin ho jaye ki tum 1 wafadar insan ho.tumhare is fone number ke bare me kisi ko bhi nahi pata chalna chahiye.ise har waqt on rakhna taki mujhe tumse contact karne me koi pareshani na ho lekin ise silent mode pe rakhna.bas jaisa kaha hai karti jao to jeet apni hi hogi."

"ok & aapka honeymoon kaisa chal raha hai?..apni biwi ki chut ka to band baja diya hoga aapne ab tak!",usne chuhal ki.brij zor se hansa & fone band kar diya.soniya ab bahut zor se kamar hilate hue aahen bhar ahi thi.brij uske upar jhuka & use bistar & apne jism ke beech daba diya.apne hath usne soniya ke jism ke neeche ghusa ke uski gol chhatiyo ko daboch liya & tezi se uski chudai karne laga.

"kaun thi....chudail?!",brij ne uske daye kandhe ke upar se sar jhukate hue uske honth chumne ki koshish ki to usne munh fer liya.brij uski jalan dekh hansa.

"are meri jaan,vo meri bichhayi shatranj ki baazi ka vo pyada hai jo dushman ke kheme me ghus bisat ki aakhiri pale tak pahucnh ab rani me tabdil ho gayi hai & mujhe ye bazi mera yehi mohra jitwayega."

"kya keh rahe ho meri kuchh samajh nahi aa raha..uummmmm..!",pati ki baato se uska gussa thoda kam to hua tha & is baar usne use apne lab chumne ki ijazat de di thi.

"tum chhodo ye baaten,meri jaan..vo meri naukar hai & is waqt mere 1 bahut aham kaam ko anjam dene me juti hai.mere dil ki rani to sirf tum ho meri begum sirf tum!",soniya thodi der khafa ho brij ko thoda tadpana chahti thi magar usne aise lahje me baat kahi thi ki vo muskuraye bina nahi reh saki.brij ne honth uski gardan ke thoda neeche uski pith pe chipka diye & bade gehre dhakke lagane laga.pura suite soniya ki aaho se gulzar ho gaya.apne pati ki qatil chudai se behal vo fauran jhad gayi & uske peechhe us se sata uska pati bhi jhatke khata jhad gaya.

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agle 4 din Rambha ke liye kafi bhag-daud se bhare the.naye daftar me 3 din uski training hui & fir chauthe din se uski naukri shuru ho gayi.pehli mulakat me hi use Sameer bada achha laga tha.baap hi ki tarah handsome & bahut shaleen insan laga tha use vo lekin jaha vijayant ko dekh vo thoda asahaj ho jati thi vahi sameer ke sath use zara bhi ghabrahat nahi hoti thi.

ab iska karan kya tha ye uski samajh me nahi aaya tha,uski robili shakhsiyat,uska rutba ya fir uski nazren.vijayant ko dekh uske dil me 1-2 baar gustakh kahyal bhi aaye the,ab vo kya karti vo tha hi itna handsome!

agle din sabhi log Gujrat ja rahe the jaha sameer ki nigrani me pure hue project ka udghatan karne khud PM aa rahe the magar us se pehle rambha ko 1 bahut zaruri kaam niptana tha.Vinod ke bataye agent ne use kayi makan dikhaye the magar use koi pasand nahi aaya & jo aaya uska makan malik muse makan dene ko taiyyar nahi tha.vo vinod ka jaan-pehchan vala tha lekin fir bhi vo makan dene ko razi nahi ho raha tha.

rambha ko vo ghar bahut pasand aa gaya tha & usne than liya tha ki jo bhi ho use kiraye pe yehi makan chahiye.makan malik vinod ki umra ka hi tha bas thoda mota tha,vo videsh me rehta tha Devalay me uska 4 kamro ka flat tha jiske 2 kamre vo kiraye pe dena chahta tha.baki 2 kamro ko vo apne samn ke sath band apne kabze me rakhna chhata tha.

rambha beauty parlour me thi,gujrat ke function ke liye usne laal border ki safed sari & laal blouse liya tha.parlour me vo us libas ko try karte hue apna saaj-singar karwa rahi thi.vo function ke pehle 1 baar khud ko us libas me dekh lena chahti thi taki us din use taiyyar hone me na pareshani ho na waqt lage.

vo parlour me baithi thi ki vinod ka fone aaya ki vo fauran uske pehchan vale ke makan pe pahunche,dono ne tay kiya tha ki 1 aakhiri baar makan malik se baat karke dekhenge.rambha turant parlour se nikal gayi & us building ke neeche khadi ho vinod ka intezar karne lagi jis imarat me vo flat tha.saji-sanwri rambha ko aane-jane vale ghur rahe the magar vinod ka kahi pata nahi tha,upar se vo fone bhi nahi utha raha tha.rambha khij uthi & tay kiya ki vo upar flat me jake seedha makan malik se baat kar le.

"hello.",makan malik Paresh ne darwaza khola,"..vinod ne kaha tha ki aap dono aane vale hain.",rambha andar aayi.jo hall & kamra kiraye pe dena tha vo khali tha,baki 2 kamro me paresh ka saman tha.paresh ne use 1 kamre me bistar pe bithaya.

"paresh ji,aap mujhe makan kyu nahi dena chahte?",rambha seedha mudde pe aayi.paresh uske saje-sanwre roop ko dekhe ja raha tha.rambha ke sawal se jaise vo hosh me aaya.

"j-ji..haan..vo baat ye hai ki..",rambha ne bhi uski nigaho ki gustakhi dekh li thi & uske dimagh me khayal kaundha ki shayad uske jism ka jadu yaha bhi chal jaye & usne sari thik karne ke bahane pallu thoda kinare kar apna gora pet uski nigaho ke samne kar diya,"..main kisi akeli ladki ko ghar dene me darta hu.bura mat maniyega..",uski nigahen rambha ke pet & chere ke beech hi ghum rahi thi,"..magar kal kahi kuchh ulta-seedha ho jaye to mere ghar ka to naam kharab hoga na."

"aapko main aisi-vaisi ladki lagti hu?",rambha ne bholepan se kaha & apna baya hath apne pet pe firaya.aisa karne se pallu thoda sa sarka & paresh ko uska halka sa cleavage dikhayi de gaya.

"mera vo matlab nahi tha..",vo bistar me uske bagal me hi baitha tha,"..lekin aap meri baat samajhne ki koshish to kijiye.aap akeli rahengi yaha &.."

"& kya?",rambha thoda sarki & apna daya ghutna uske baye se satate hue uska hath pakad liya,"..ab aap jaisa sharif insan mujhe ghar nahi dega to kaun dega!..aap mere nazariye se bhi to dekhiye kahi mujhe kisi aise-vaise aaadmi ne ghar de diya to..&..kahi..",rambha ne uske hath pe hath rakhe nazre neechi kar li.

"kahi ..kya rambha ji?",paresh tha to mard hi,usne rambha ka hath tham liya.ab itni khubsurat ladki khud hath pakde to vo mauka kyu chhode!

"kahi usne mere sath kuchh ka diya to?",rambha ne sar jhukaye sharm se kaha.

"kuchh kya?",paresh ko aisi baat karne me maza aane laga tha.

"kahi mere akelepan ka fayda utha liya to."

"main samjha nahi."

"baniye mat!",rambha ne sharm se muskurate hue use dekha,"..please paresh ji,de dijiye na..please!",vo machalte hue uske & karib hui to paresh thoda peechhe hua & ladkhada bistar pe gir gaya.rambha uske upar sawar ho gayi.

"paresh ji,mujhe aapka makan pasand hai & aap bhi.",uska aanchal khisak gaya tha & jhuke hone ki vajah se seene ko ubhar blouse se bahar chhalakne ko taiyyar the.paresh ke mathe pe paseena chhachhala aaya,"..main abhi security deposit dene ko taiyyar hu.",apna chehra paresh ke bilkul karib la apne honth uske hontho se bas 2 inch ki duri pe rok liye.uski garm sanse,madmati khusbu se paresh ka dimagh ghum gaya.

"m-magar..r-rambha ji..-"

"-..sirf rambha.",rambha ne uske honth chum liye,"..aap mujhe hi makan denge.",usne uska baya gaal chuma,"boliye?",& fir daya gaal chuma & uski aankho se aankhe mila di.

"l-lekin.."

"paresh ji,mujhe kiraye pe ghar dijiye & jab bhi aap yaha aayenge,kiraye ke alawa kirayedar bhi aapki baaho me hoga.kahiye itni badhiya deal de sakta hai koi aapko?"

paresh ne apne hath uski nagi pith pe jama diye & uchak ke use chumne ko hua par rambha ne apna sar peechhe khinch liya,"na pehle kahiye ki ghar mujhe denge."

"tumhe hi dunga meri jaan!",paresh ne use baaho me kas bistar pe palat diya & chumne laga.vo us husnpari ko baaho me paa deewana ho gaya tha.rambha ne use pare dhakela & khadi ho gayi.

"meri sari kharab ho jayegi.",vo shokhi se muskurayi & apni sari utarne lagi.paresh ki sanse tez ho gayi & vo bhi apni kamiz ke button kholne laga.muskurati rambha ne bejhijhak apne sare kapde utar diye.uske nange,gore jism ko dekh paresh ka munh hairat se khula reh gaya.uski nazre ye tay nahi kar pa rahi thi ki kaha dekhe-rambha ke oonche seene ko,uske gol pet ko ya fir sudol tango & kasi jangho ke beech uski gulabi chut ko!

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kramashah.......