Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:11

जाल पार्ट--90

गतान्क से आगे......

तभी दोनो को किसी कार के आने की आवाज़ सुनाई दी.शाह ने फ़ौरन लंड बाहर खींचा & रंभा की सारी नीचे कर उसे कार मे बिठाया,फिर वही ज़मीन पे गिरे उसके बॅग & फटे ब्लाउस को उठाया & उसे थमाके खुद कार मे बैठ गया.उसने कार स्टार्ट की तभी 1 और कार पार्किंग मे आई.रंभा ने देखा & उसके मुँह से हैरत भरी आवाज़ निकलते-2 बची..सामने वाली कार देवेन की थी.रंभा ने बॅग से अपना मोबाइल निकाला & पहले शाह को कनखियो से देखा..वो कार निकालने मे मशगूल था.

काली कार वाहा आई & रुक गयी.देवेन 1 खाली जगह मे कार लगा उसके ड्राइवर के उतरने का इंतेज़ार कर रहा था.काली कार का दरवाज़ा अंदर से खुला & वो बाहर की तरफ धकेला ही जा रहा था कि कुच्छ देख वो रुक गया.शाह की कार बाहर निकल रही थी & वो काली कार का ड्राइवर शायद उसे देख रुक गया था.देवेन भी शाह की कार को देख रहा था मगर उसे पता नही था कि अंदर कौन है.

तभी वो चौंक गया,काली कार के ड्राइवर ने कार स्टार्ट कर उसे तेज़ी से एग्ज़िट की तरफ बढ़ा दिया था.ठीक उसी वक़्त लिफ्ट आई & उसमे से 2 लोग उतर अपनी कार की तरफ बढ़े.देवेन ने अपनी कार काली कार के पीछे लगाई पर तभी वो दो लोग अपनी कार मे बैठ उसे रिवर्स कर उसी की कार के सामने ले आए थे.देवेन ने झल्ला के हॉर्न बजाया पर रास्ता सॉफ होने 2 मिनिट लगे & जब वो बाहर आया तो काली कार नदारद थी.वो आधे घंटे आस-पास के इलाक़े को छानता रहा मगर वो कार नही मिली.

रंभा मोबाइल पे मेसेज टाइप कर रही थी जब महदेव शाह ने उस से मोबाइल छीन पीछे की सीट पे फेंका & दाए हाथ से स्टियरिंग संभाले बाए से उसे अपनी ओर खींचा & चूमते हुए कार चलाने लगा.रंभा समझ गयी की अब मेसेज करना ख़तरे से खाली नही & फिर पार्किंग मे हुई चुदाई के बाद वो बहुत मस्त भी हो गयी थी.उसने बाया हाथ शाह के लंड पे रखा जोकि अभी भी उसकी पॅंट से बाहर था & उसके बाए गालो को चूमने लगी.

कार 1 सिग्नल पे रुकी तो शाह ने उसके सीने पे पड़ा आँचल हटाया & उसकी चूचियो चूसने लगा.रंभा सीट पे आडी उसकी ज़ुबान से मस्त होने लगी..कितना मस्ताना एहसास था ये!..वो शहर की भीड़ के बीचोबीच थी..उसकी खिड़की के बाहर 1 बाइक पे लड़का बैठा था..हर तरफ लोग थे पर किसी को ये खबर नही थी कि वो कार मे नगी थी & उसका आशिक़ उसकी चूचियाँ पी रहा था..उफफफ्फ़..रंभा ने आँखे बंद कर शाह के बॉल नोचे!

कुच्छ देर बाद बत्ती हरी हुई तो शाह ने महबूबा की चूचियाँ छ्चोड़ी & कार अपने गहर की तरफ बढ़ा दी.गहर पहुँचते ही गेट के बाहर खड़े दरबान ने सलाम ठोनकतेहुए गेट खोला & कार अंदर दाखिल हो गयी.दरबान गेट के बाहर था & आज भी शाह का घर बिल्कुल सुनसान था.

रंभा के कार से उतरते ही शाह ने उसे बाहो मे भर लिया & वही खुले मे ही उसे चूमने लगा.उसे खुद पे हैरत हो रही थी..इस लड़की मे ऐसी क्या कशिश थी..क्या जादू था जो वो इस तरह दीवानो सी हरकतें कर रहा था!..रंभा ने उसकी शर्ट पकड़ ज़ोर से खींची तो उसके बटन्स टूट के बिखर गये.रंभा ने कमीज़ को उसके जिस्म से अलग किया & उसके निपल्स को चूसने लगी.

शाह उसकी पीठ पे हाथ फिरा रहा था.रंभा उसके सीने को चूमती नीचे झुकी & उसकी पॅंट भी उतार दी.अब शाह पूरा नंगा था & वो सिर्फ़ सारी मे.वो शाह के लंड को चूसने मे जुट गयी तो शाह गाड़ी की बॉनेट से टिक के खड़ा हो गया & उसके बालो मे उंगलिया फिराने लगा.रंभा शाह के आंडो को चूस रही थी & अपनी उंगली से उसके लंड के छेद को हौले-2 छेड़ रही थी.शाह के लंड मे उसके छुने से सनसनी दौड़ गयी.उसने रंभा को पकड़ के उपर उठाया तो रंभा ने उसके गले मे बाहे डाल दी & उसे चूमने लगी.

शाह उसकी मांसल कमर & गुदाज़ गंद को सहलाते हुए उसकी किस का जवाब दे रहा था.शाह के गर्म हाथो की हरारत रंभा को फिर से मस्ती मे बावली कर रहे थे.रंभा चूमते हुए आहे भरने लगी थी & आगे होके अपनी चूत शाह के लंड पे दबा रही थी.अब उसे बस वो लंड अपनी चूत मे चाहिए था.शाह ने उसकी गंद की कसी फांको को पकड़ा & बाहर की ओर फैलाया तो रंभा ने आह भरते हुए किस तोड़ी & सर पीछे झटका.

उसके ऐसा करने से रंभा की चूचियाँ शाह के सामने उभर गयी & उसने अपना मुँह उनसे लगा दिया.रंभा ने भी चूचियाँ आगे उचका दी ताकि उसका आशिक़ आराम से उन्हे चूस सके.रंभा के जिस्म मे बिजली दौड़ने लगी.शाह उसके निपल्स को दन्तो से काटने के बाद पूरी की पूरी चूची को मुँह मे भर ज़ोर से चूस्ता तो वो सिहर उठती.शाह का दिल उसके मस्ताने उभारो को दबाने का किया तो उसने उसकी कमर पकड़े हुसे उसे घुमा के बॉनेट से लगाया & फिर उसकी कमर पकड़ उसे उसपे बिठा दिया.

रंभा ने अपनी टाँगे खोल उसे आगे खींचा तो उसने उसकी चूचिया पकड़ ली & मसलते हुए चूसने लगा.रंभा पीछे झुकती हुई आहे भर रही & अपनी ज़ूलफे झटक रही थी.उसके हाथ अभी तक शाह के सर से लगे अपने सीने पे उसे दबा रहे थे मगर अब उसकी चूत की कसक बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी.रंभा के हाथ शाह के सरक के नीचे उसकी पीठ से होते हुए उसकी गंद पे आए & उसे दबाया.

शाह उसका इशारा समझ गया & उसके होंठ रंभा की चूचियो से फिसलते हुए उसके पेट के रास्ते उसकी चूत तक पहुँचे.थोड़ी देर उसने बॉनेट पे बैठी रंभा की अन्द्रुनि जाँघो को चूमा & फिर उसकी चूत मे जीभ फिराने लगा.रंभा का जिस्म झटके खाने लगा & वो मस्ती मे आहें भरते हुए अपनी टाँगो से शाह के जिस्म को & अपने हाथो से उसके सर को अपनी चूत पे दबाने लगी.शाह काफ़ी देर उसकी चूत चाटता रहा & जैसे ही उसने महसूस किया कि वो झड़ने की कगार पे है वो खड़ा हो गया & उसकी जंघे थाम अपना लंड उसकी चूत मे धकेला.

रंभा ने उसके कंधे थाम लिया & अपनी जंघे पूरी फैला उसके लंबे & बेहद मोटे लंड को चूत मे घुसने मे मदद की.वो उस से चिपेट गयी & उसके बाए कंधे पे ठुड्डी टीका उसकी पीठ & गंद से लेके उसके बालो तक बेसब्र हाथ चलाती उस से चुदने लगी.शाह के धक्के सीधे उसकी कोख पे पद रहे थे & उसके जिस्म मे मज़े की धाराएँ बहने लगी थी.चाँद धक्को के बाद उसके नाख़ून शाह के जिस्म को कहरोंछने लगे & वो झाड़ गयी.

झाड़ते ही वो निढाल हो बॉनेट पे लेट गयी.शाह ने बाया हाथ उसके पेट पे रखा & दाए से उसकी चूचिया मसलता उसे चोदने लगा.बंगल के खुले अहाते मे चिड़ियो की चाहचाहाहट के साथ दोनो की आहें,दोनो के जिस्मो के टकराने की आवाज़ & चुदाई से बॉनेट मे होती आवाज़ गूँज रही थी.

रंभा ने अपने सीने को मसल्ते आशिक़ के हाथो के उपर अपने हाथ जमा दिए थे & अपनी टाँगे उसकी कमर पे कसे उसकी चुदाई से पागल हुए जा रही थी.शाह भी बस अब उसकी चूत मे झड़ना चाहता था.वो आगे झुका & रंभा के कंधो के नीचे से हाथ लगाते हुए उसे अपनी बाहो मे भर लिया & उसके चेहरे को चूमते हुए धक्के लगाने लगा.रंभा भी उसके जिस्म को बाहो मे भर उसे खरोंछती अपनी कमर उचकाती उसका भरपूर साथ दे रही थी.

"आन्न्ग्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह...!"

"ओह..!",रंभा शाह की चुदाई से बहाल हो कराही & झाड़ गयी.झाड़ते ही उसकी चूत ने शाह के लंड को दबोचा & वो भी आपे से बाहर हो वीर्य उगलने लगा.दोनो ने मंज़िल पा ली थी & अब बहुत सुकून था उनके चेहरो पे पर दोनो को पता था कि ये तो बस पहला पड़ाव है.अभी दोनो को शाम तक इस सफ़र को करना था & उसमे ऐसी काई मंज़िले तय करनी थी.

वो काली कार शाह के बंगल के बाहर आई & रुक गयी & उसका शीशा कुच्छ इंच नीचे हुआ,अभी भी उसके ड्राइवर की शक्ल च्छूपी थी.जब दोनो प्रेमियो ने साथ-2 मंज़िल पा के अपनी मस्तानी आहो से उसका इज़हार किया तो वो आवाज़ बाहर बैठे दरबान के कानो & उस कार के ड्राइवर तक पहुँची.दरबान अपने मालिक की हर्कतो से अच्छी तरह वाकिफ़ था & वो बैठा-2 मुस्कुराया & उस कार के ड्राइवर ने आवाज़ें सुनते ही शीशा बंद किया & कार वापस ले ली.

उस कार से बेख़बर शाह ने अपनी माशुका को अपनी बाहो मे उठाया & उसके हुस्न & जवानी का और लुफ्त उठाने के मक़सद से बंगल के अंदर चला गया.

“क्या हुआ?”,देवेन के वापस लौटते ही विजयंत मेहरा ने उस से सवाल किया.देवेन ने कंधे झटके जैसे उसे भी कुच्छ पता नही.विजयंत के माथे पे उसका जवाब सुन शिकन पड़ी तो उसने बताया कि कैसे उसने काली कार को खो दिया.

“हूँ..अच्छा,देवेन क्या ऐसा हो सकता है कि उस काली कार वाले को तुम्हारे पीछा करने का पता चल गया हो & उसने तुम्हे चकमा दिया हो?”

“लगता तो नही पर पक्का नही कह सकता.”

“तब तो हमारे पास तुम्हारी इश्तेहार मे दी तारीख तक इंतेज़ार करने के अलावा & इस सामने वाले घर पे नज़र रखने के अलावा & कोई चारा नही.”

“हाँ.”,देवेन ने ताकि आवाज़ मे जवाब दिया.उसके दिमाग़ मे बार-2 पिच्छले घंटे की बाते घूम रही थी.कभी उसे खुद पे गुस्सा आता कि क्यू उसने उस कार को नज़रो से ओझल होने दिया तो कभी वो इस सोच मे डूब जाता कि क्या सचमुच दयाल ही था उस कार मे.कुच्छ देर बाद उसने इस फ़िज़ूल की जद्दोजहद को अपने ज़हन से निकाला & रंभा का नंबर मिलाने लगा.घंटी बजती रही पर उसने फोन नही उठाया.देवेन ने 2-3 बार & उसका नंबर ट्राइ किया & फिर छ्चोड़ दिया.उसने सोचा कि ज़रूर वो किसी काम मे फँसी होगी मगर किस काम मे ये उसे पता नही था.

रंभा उस वक़्त महादेव शाह के सीने पे हाथ जमाए उसके लंड को अपनी चूत मे लिए कूद रही थी.उसका मोबाइल वही कार की पिच्छली सीट पे बज रहा था पर उसे उस वक़्त फोन क्या खुद का भी होश नही था.शाह के सख़्त हाथ उसकी कोमल चूचियो को मसल रहे थे & उसकी मस्ती का कोई ठिकाना नही था.शाह 2 बार झाड़ उसके जिस्म मे झाड़ चुका था & इसी वजह से अब वो झड़ने मे ज़्यादा वक़्त ले रहा था.रंभा ने देखा की वो थोडा थका भी लग रहा था.अपनी उम्र के हिसाब से तो इस वक़्त उसे गहरी नींद मे होना चाहिए था मगर वो किसी जवान मर्द की तरह 2 घंटे मे तीसरी बार उसे चोद रहा था.ये तो शायद कयि जवानो के बस की बात भी नही थी..पर फिर भी मुझे इसका ख़याल रखना होगा..रंभा ने सोचा & उसी वक़्त उसकी चूत ने अपनी मस्तानी हरकते शुरू कर दी & नतीजतन उसके साथ-2 शाह भी झाड़ गया.

“ओह्ह..थक गयी मैं तो..”,रंभा हाँफती उसके सीने पे पड़ी हुई थी,”..पागल कर देते हैं आप!“,शाह ने उसे हंसते हुए अपने उपर से उतारा तो रंभा उसकी बाहो के घेरे मे उसके बाई तरफ लेट गयी.

“पागल तो तुमने मुझे कर दिया है.”,शाह उसके जिस्म को प्यार से सहला रहा था,”अच्छा,ये बताओ कि समीर की अपायंट्मेंट्स के बारे मे पता किया तुमने?”

“आप मुझे इसके अलावा..”,रंभा ने उसके सिकुदे लंड पे चपत लगाई,”..किसी और बात के बारे मे सोचने का वक़्त दें तब तो पता लगाऊं!”,शाह उसके जवाब पे हंस पड़ा & फिर उबासी ली.रंभा ने इसीलिए झूठ बोला क्यूकी पहले उसे सब कुच्छ देवेन को बताना था & उसके साथ मिलके सारी प्लॅनिंग करनी थी.

“थोडा आराम कीजिए अब.”,रंभा ने उसका सीना सहलाया.

“हूँ.”,शाह को भी नींद आ रही थी,”मैं इसलिए पुच्छ रहा था क्यूकी मुझे पता चला है कि बस 4 दिन बाद ही मानपुर प्रॉजेक्ट का टेंडर खुलने वाला है.”

“ ओह.आप बेफ़िक्र रहिए,मैं जल्द ही ये काम पूरा करूँगी.”

“ओके,डार्लिंग.”,रंभा ने उसके सीने पे सर रख दिया & उसका पेट सहलाने लगी.कुच्छ ही देर मे शाह सो गया.कुच्छ देर तो रंभा वैसे ही पड़ी रही पर जब उसे यकीन हो गया कि शाह गहरी नींद मे चला गया है तब वो धीरे से उसकी बाँह केग हियर मे से निकालते हुए उठी & शाह की अलमारी खोल उसका 1 ड्रेसिंग गाउन निकाल के पहना.

“हेलो,देवेन.सॉरी पहले आपका फोन नही उठाया.”,वो बाहर आके कार से अपना मोबाइल निकाल उसपे बात कर रही थी.

“तुम हो कहा?”

“शाह के घर पे.”,रंभा को ना जाने क्यू ये बात बताते हुए थोड़ी ग्लानि सी हुई.

“ओह.”,देवेन की आवाज़ मे भी कुच्छ ऐसा था जोकि रंभा को आहत कर गया,”..तो वो कहा है?”

“सो रहा है.”

“अच्छा.”,देवेन की आवाज़ कुच्छ ज़्यादा भारी थी मगर उसने फ़ौरन खुद को संभाला,”..अच्छा ये सुनो,कोई आया था इश्तेहार मे दिए पते पे?”

“क्या?!कौन?!”,रंभा की धड़कने भी तेज़ हो गयी थी.देवेन ने उसे पूरी बात बताई,”..अच्छा,देवेन.ये शाह समीर का आक्सिडेंट करवाने को उतावला हो रहा है.उपर से मानपुर का टेंडर भी बस 4 दिनो मे खुलने वाला है.”

“समीर की अपायंट्मेंट्स मिली तुम्हे?”

“हां.”

“तो ठीक है.तुम इस शाह से ये निकलवाने की कोशिश करो की आख़िर वो समीर के साथ ये हादसा करवाएगा कैसे?..किस जगह पे?..किस से?..सब कुच्छ मगर होशियारी से.ये मुझे बहुत शातिर इंसान लगता है.ऐसे इंसान को ज़रा भी शक़ हुआ तो वो खुद को बचाने के लिए कुच्छ भी कर सकता है.”

“आप चिंता ना करें,देवेन.मैं सब संभाल लूँगी.”

“मुझे पूरा भरोसा है रंभा पर तुम्हे यू अकेला छ्चोड़ने मे फ़िक्र तो होती ही है ना.”

“बस ये सब निपट जाए,देवेन फिर सुकून ही सुकून होगा.”

“बस ऐसा जल्द से जल्द हो.”

“हाँ.अच्छा अब फोन रखती हू.शाम को आऊँगी.”

“ठीक है..अरे!रूको,अभी फोन मत काटो.”,देवेन के ज़हन मे तभी 1 ख़याल आया.

“हां,क्या हुआ?”

“रंभा,अब तुम यहा अपनी कार से नही आना & ना ही सामने के दरवाज़े से.जब भी आना पहले मुझे फोन करना & आते वक़्त अपनी शक्ल च्छुपाए रखना.देखो,आज जो आया वो आगे भी आ सकता है.तुम्हारी शक्ल लोग पहचानते हैं.अब मैं नही चाहता कि अगर वो काली कार फिर आती है तो उसका ड्राइवर कही तुम्हे देख कोई अटकल ना लगाए.”

“ठीक है,देवेन.मैं ख़याल रखूँगी.अब रखू फोन?”

हां.बाइ!”

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क्रमशः.......

JAAL paart--90

gataank se aage......

tabhi dono ko kisi car ke aane ki aavaz sunai di.shah ne fauran lund bahar khincha & rambha ki sari neeche kar use car me bithaya,fir vahi zamin pe gire uske bag & phate blouse ko uthaya & use thamake khud car me baith gaya.usne car start ki tabhi 1 & car parking me aayi.rambha ne dekha & uske munh se hairat bhari aavaz nikalte-2 bachi..samne vali car deven ki thi.rambha ne bag se apna mobile nikala & pehle shah ko kankhiyo se dekha..vo car nikalne me mashgul tha.

kali car vaha aayi & ruk gayi.deven 1 khali jagah me car laga uske driver ke utarne ka intezar kar raha tha.kali car ka darwaza andar se khula & vo bahar ki taraf dhakela hi ja raha tha ki kuchh dekh vo ruk gaya.shah ki car bahar nikal rahi thi & vo kali car ka driver shayad use dekh ruk gaya tha.deven bhi shah ki car ko dekh raha tha magar use pata nahi tha ki andar kaun hai.

tabhi vo chaunk gaya,kali car ke driver ne car start kar use tezi se exit ki taraf badha diya tha.thik usi waqt lift aayi & usme se 2 log utar apni car ki taraf badhe.deven ne apni car kali car ke peechhe lagayi par tabhi vo do log apni car me baith use reverse kar usi ki car ke samne le aaye the.deven ne jhalla ke horn bajaya par rasta saaf hone 2 minute lage & jab vo bahar aaya to kali car nadarad thi.vo aadhe ghante aas-paas ke ilake ko chhanta raha magar vo car nahi mili.

Rambha mobile pe message type kar rahi thi jab Mahdev Shah ne us se mobile chhen peechhe ki seat pe phenka & daye hath se steering sambhale baye se use apni or khincha & chumte hue car chalane laga.rambha samajh gayi ki ab message karna khatre se kahli nahi & fir parking me hui chudai ke baad vo bahut mast bhi ho gayi thi.usne baya hath shah ke lund pe rakha joki abhi bhi uski pant se bahar tha & uske baye gaalo ko humne lagi.

car 1 signal pe ruki to shah ne uske seene pe pada aanchal hataya & uski chhatiyan chusne laga.rambha seat pe adi uski zuban se mast hone lagi..kitna mastana ehsas tha ye!..vo shehar ki bheed ke beechobeech thi..uski khidki ke bahar 1 bike pe ladka baitha tha..har taraf log the par kisi ko ye khabar nahi thi ki vo car me nagi thi & uska aashiq uski chhatiya pi raha tha..uffff..rambha ne aankhe band kar shah ke baal noche!

kuchh der baad batti hari hui to shah ne mehbooba ki choochiyan chhodi & carapne gahr ki taraf badha di.gahr pahunchte hi gate ke bahar kahde darban salamthonkte hue gate khola & car andar dakhil ho gayi.darban gate ke bahar tha & aaj bhi shah ka ghar bilkul sunsan tha.

rambha ke car se utarte hi shah ne use baaho me bhar liya & vahi khule me hi use chumne laga.use khud pe hairat ho rahi thi..is ladki me aisi kya kashish thi..kya jadu tha jo vo is tarah deewano si harkaten kar raha tha!..rambha ne uski shirt pakad zor se khinchi to uske buttons tut ke bikhar gaye.rambha ne kamiz ko uske jism se alag kiya & uske nipples ko chusne lagi.

shah uski pith pe hath fira raha tha.rambha uske seene ko chumti neeche jhuki & uski pant bhi utra di.ab shah pura nanga tha & vo sirf sari me.vo shah ke lund ko chusne me jut gayi to shah gadi ki bonnet se tik ke khada ho gaya & uske balo me ungliya firane laga.rambha shah ke ando ko chus rahi thi & apni ungli se uske lund ke chhed ko haule-2 chhed rahi thi.shah ke lund me uske chhune se sansani daud gayi.usne rambha ko pakad ke upar uthaya to rambha ne uske gale me baahe daal di & use chumne lagi.

shah uski mansal kamar & gudaz gand ko sehlate hue uski kiss ka jawab de raha tha.shah ke garm hatho ki hararat rambha ko fir se masti me bawli kar rahe the.rambha chumte hue aahe bharne lagi thi & aage hoke apni chut shah ke lund pe daba rahi thi.ab use bas vo lund apni chut me chahiye tha.shah ne uski gand ki kasi fanko ko pakda & bahar ki or failaya to rambha ne aah bharte hue kiss todi & sar peechhe jhatka.

uske aisa karne se rambha ki chhatiya shah ke samne ubhar gayi & usne apna munh unse laga diya.rambha ne bhi chhatiya aage uchka di taki uska aashiq aaram se unhe chus sake.rambha ke jism me bijli daudne lagi.shah uske nipples ko danto se katne ke baad puri ki puri choochi ko munh me bhar zor se chusta to vo sihar uthati.shah ka dil uske mastane ubharo ko dabane ka kiya to usne uski kamar pakde huse use ghuma ke bonnet se lagaya & fir uski kamar pakd use uspe bitha diya.

rambha ne apni tange khol use aaeg khincha to usne uski choochiya pakad li & maslate hue chusne laga.rambha peechhe jhukti hui aahe bhar rahi & apni zulfe jhatak rahi thi.uske hath abhi tak shah ke sar se lage apne seene pe use daba rahe the magar ab uski chut ki kasak bahut zyada badh gayi thi.rambha ke hath shah ke sarak ke neeche uski pith se hote hue uski gand pe aaye & use dabaya.

shah uska ishara samajh gaya & uske honth rambha ki chhatiyo se fisalte hue uske pet ke raste uski chut tak pahunche.thodi der usne bonnet pe baithi rambha ki andruni jangho ko chuma & fir uski chut me jibh firane laga.rambha ka jsim jhatke khane laga & vo masti me aahen bharte hue apni tango se shah ke jism ko & apne hatho se uske sar ko apni chut pe dabane lagi.shah kafi der uski chut chaatata raha & jaise hi usne mehsus kiya ki vo jhadne ki kagar pe hai vo khada ho gaya & uski janghe tham apna lund uski chut me dhakela.

rambha ne uske kandhe tham liya & apni janghe puri faila uske lambe & behad mote lund ko chut me ghusne me madad ki.vo us se chipat gayi & uske baye kandhe pe thuddi tika uski pith & gand se leke suke baalo tak besabr hath chalati us se chudne lagi.shah ke dhakke seedhe uski kokh pe pad rahe the & uske jism me maze ki dharayen behne lagi thi.chand dhakko ke baad uske nakhun shah ke jism ko kahronchne lage & vo jhad gayi.

jhadte hi vo nidhal ho bonnet pe let gayi.shah ne baya hath uske pet pe rakha & daye se uski choochiya masalta use chodne laga.bungle ke khule ahate me chidiyo ki chahchahahat ke sath dono ki aahen,dono ke jismo ke takrane ki aavaaz & chudai se bonnet me hoti aavaz gunj rahi thi.

rambha ne apne seene ko masalte aashiq ke hatho ke upar apne hath jama diye the & apni tange uski kamar pe kase uski chudai se pagal hue ja rahi thi.shah bhi bas ab uski chut me jhadna chahta tha.vo aage jhuka & rambha ke kandho ke neeche se hath lagate hue use apni baaho me bhar liya & uske chehre ko chumte hue dhakke lagane laga.rambha bhi uske jism ko baaho me bhar use kharonchti apni kamar uchkati uska bharpur sath de rahi thi.

"aanngghhhhhhh...!"

"ohhhhhhhhhh..!",rambha shah ki chudai se behaal ho karahi & jhad gayi.jhadte hi uski chut ne shah ke lund ko dabocha & vo bhi aape se bahar ho virya ugalne laga.dono ne manzil pa li thi & ab bahut sukun tha unke chehro pe par dono ko pata tha ki ye to bas pehla padav hai.abhi dono ko sham tak is safar ko karna tha & usme aisi kayi manzile tay karni thi.

vo kali car shah ke bungle ke bahar aayi & ruk gayi & uska shisha kuchh inch neecvhe hua,abhi bhi uske driver ki shakl chhupi thi.jab dono premiyo ne sath-2 manzil pa ke apni mastani aaho se uska izhar kiya to vo aavaz bahar baithe darban ke kano & us car ke driver tak pahunchi.darban apne malik ki harkato se achhi tarah vakif tha & vo baitha-2 muskuraya & us car ke driver ne aavazen sunte hi shisha band kiya & car vapas le li.

us car se bekhabar shah ne apni mashuka ko apni baaho me uthaya & uske husn & jawani ka & kutf uthane ke maqsad se bungle ke andar chala gaya.

“Kya hua?”,Deven ke vapas lautate hi Vijayant Mehra ne us se sawal kiya.deven ne kandhe jhatke jaise use bhi kuchh pata nahi.vijayant ke mathe pe uska jawab sun shikan padi to usne batay ki kaise usne kali car ko kho diya.

“hun..achha,deven kya aisa ho sakta hai ki us kali car vale ko tumhare peechha karne ka pata chal gaya ho & usne tumhe chakma diya ho?”

“lagta to nahi par pakka nahi keh sakta.”

“tab to humare paas tumhari ishtehar me di tarikh tak intezar karne ke alawa & is samne vale ghar pe nazar rakhne ke alawa & koi chara nahi.”

“haan.”,deven ne thaki aavaz me jawab diya.uske dimagh me baar-2 pichhle ghante ki baate ghum rahi thi.kabhi use khud pe gussa aata ki kyu usne us car ko nazro se ojhal hone diya to kabhi vo is soch me doob jata ki kya sachmuch Dayal hi tha us car me.kuchh der baad usne is fizul ki jaddojahad ko apne zehan se nikala & Rambha ka number milane laga.ghanti bajti rahi par usne fone nahi uthaya.deven ne 2-3 baar & uska number try kiya & fir chhod diya.usne socha ki zarur vo kisi kaam me phansi hogi magar kis kaam me ye use pata nahi tha.

Rambha us waqt Mahadev Shah ke seene pe hath jamaye uske lund ko apni chut me liye kud rahi thi.uska mobile vahi car ki pichhli seat pe baj raha tha par use us waqt phone kya khud ka bhi hosh nahi tha.shah ke sakht hath uski komal chhatiyo ko masal rahe the & uski masti ka koi thikana nahi tha.shah 2 bar jhad uske jism me jhad chuka tha & isi wajah se ab vo jhadne me zyada waqt le raha tha.rambha ne dekha ki vo thoda thaka bhi lag raha tha.apni umra ke hisab se to is waqt use gehri nind me hona chahiye tha magar vo kisi jawan mard ki tarah 2 ghante me teesri baar use chod raha tha.ye to shayad kayi jawano ke bas ki baat bhi nahi thi..par fir bhi mujhe iska khayal rakhna hoga..rambha ne socha & usi waqt uski chut ne apni mastani harkate shuru kar di & nateejatan uske sath-2 shah bhi jhad gaya.

“ohh..thak gayi main to..”,rambha hanfti uske seene pe padi hui thi,”..pagal kar dete hain aap!“,shah ne use hanste hue apne upar se utara to rambha uski baaho ke ghere me uske bayi taraf let gayi.

“pagal to tumne mujhe kar diya hai.”,shah uske jism ko pyar se sehla raha tha,”achha,ye batao ki Sameer ki appointments ke bare me pata kiya tumne?”

“aap mujhe iske alawa..”,rambha ne uske sikude lund pe chapat lagayi,”..kisi & baat ke bare me sochne ka waqt den tab to pata lagaoon!”,shah uske jawab pe hans pada & fir ubasi li.rambha ne isiliye jhuth bola kyuki pehle use sab kuchh Deven ko batana tha & uske sath milke sari planning karni thi.

“thoda aaram kijiye ab.”,rambha ne uska seena sehlaya.

“hun.”,shah ko bhi nind aa rahi thi,”main isliye puchh raha tha kyuki mujhe pata chala hai ki bas 4 din baad hi Manpur project ka tender khulne wala hai.”

“ oh.aap befikr rahiye,main jald hi ye kaam pura karungi.”

“ok,darling.”,rambha ne uske seene pe sar rakh diya & uska pet sehlane lagi.kuchh hi der me shah so gaya.kuchh der to rambha vaise hi padi rahi par jab use yakin ho gaya ki shah gehri nind me chala gaya hai tab vo dhire se uski banh keg here me se nikalte hue uthi & shah ki almari khol uska 1 dressing gown nikal ke pehna.

“hello,deven.sorry pehle aapka fone nahi uthaya.”,vo bahar aake car se apna mobile nikal uspe baat kar rahi thi.

“tum ho kaha?”

“shah ke ghar pe.”,rambha ko na jane kyu ye baat batate hue thodi glani si hui.

“oh.”,deven ki aavaz me bhio kuchh aisa tha joki rambha ko aahat kar gaya,”..to vo kaha hai?”

“so raha hai.”

“achha.”,deven ki aavaz kuchh zyada bhari thi magar usne fauran khud ko sambhala,”..achha ye suno,koi aaya tha ishtehar me diye pate pe?”

“kya?!kaun?!”,rambha ki dhadkane bhi tez ho gayi thi.deven ne use puri baat batayi,”..achha,deven.ye shah sameer ka accident karwane ko utawla ho raha hai.upar se manpur ka tender bhi bas 4 dino me khulne vala hai.”

“sameer ki appointments mili tumhe?”

“haan.”

“to thik hai.tum is shah se ye nikalwane ki koshish karo ki aakhir vo sameer ke sath ye hadsa karwayega kaise?..kis jagah pe?..kis se?..sab kuchh magar hoshiyari se.ye mujhe bahut shatir insan lagta hai.aiseinsan ko zara bhi shaq hua to vo khud ko bachane ke liye kuchh bhi kar sakta hai.”

“aap chinta na karen,deven.main sab sambhal lungi.”

“mujhe pura bharosa hai rambha par tumhe yu akela chhodne me fikr to hoti hi hai na.”

“bas ye sab nipat jaye,deven fir sukun hi sukun hoga.”

“bas aisa jald se jald ho.”

“Haan.achha ab fone rakhti hu.sham ko aaoongi.”

“thik hai..are!ruko,abhi phone mat kato.”,deven ke zehan me tabhi 1 khayal aaya.

“haan,kya hua?”

“rambha,ab tum yaha apni car se nahi aana & na hi samne ke darwaze se.jab bhi aana pehle mujhe phone karna & aate waqt apni shakl chhupaye rakhna.dekho,aaj jo aaya vo aage bhi aa sakta hai.tumhari shakl log pehchante hain.ab main nahi chahta ki agar vo kali car fir aati hai to uska driver kahi tumhe dekh koi atkal na lagaye.”

“thik hai,deven.main khayal rakhungi.ab rakhu fone?”

Haan.bye!”

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:12

जाल पार्ट--91

गतान्क से आगे......

होटेल वाय्लेट की 25वी मंज़िल के अपने बाप के सूयीट के बिस्तर पे समीर कामया को अपनी बाहो मे कसे लेटा चूम रहा था.कहने की ज़रूरत नही के दोनो नंगे थे & उनके हाथ 1 दूसरे के नाज़ुक अंगो से खिलवाड़ कर रहे थे.समीर दाए हाथ की उंगली से उसकी चूत कुरेदता हुआ उसके उपर झुका बाए से उसकी दाई चूची दबाता उसके चेहरे को चूम रहा था & दोनो जिस्मो के बीच अपना बाया हाथ घुसा कामया उसके लंड को हिला रही थी.

"समीर,रंभा तलाक़ देने मे कोई आना कानी तो नही करेगी ना?",समीर ने उसे अभी-2 मानपुर वाले टेंडर के 4 दिनो के बाद खुलने की बात बताई थी & साथ ही ये भी बाते था कि उसके बाद वो अपने वकील के ज़रिए रंभा को तलाक़ देने की करवाई शुरू करवा देगा.

"नही,कामया.",समीर ने अपना हाथ हटा के उसकी जगह अपना मुँह उसकी छाती से लगा दिया.

"उउम्म्म्म....तो फिर हमारे इंतेज़ार के दिन ख़त्म हुए?"

"हां,मेरी जान."

"ओह,समीर!",कामया ने हाथ उसके लंड से हटा उसे बाहो मे भरा & उसे पलट के उसके उपर आ गयी.उसका हाथ दोबारा दोनो जिस्मो के बीच गया & समीर के सख़्त लंड को पकड़ चूत के मुँह पे रखा,"..आख़िरकार हम 1 हो ही जाएँगे!..कितनी जद्ड़ोजेहाद की हमने इस सब के लिए!"

"हां,मेरी जान.अब तुम मेरी रानी बनोगी & हम दोनो मिलके इस सारी मिल्कियत पे राज करेंगे.",समीर ने उसकी कमर जाकड़ नीचे से अपनी कमर उचकाई & लंड उसकी चूत मे घुसा उसकी चुदाई शुरू कर दी.

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रंभा के लिए महादेव शाह और उसका रिश्ता बस जिस्मानी था.उसे उसके साथ सोने मे जो मज़ा आता था वो अनूठा था पर शाह उसके लिए शक़ के घेरे मे खड़ा वो शख्स था जोकि शायद उसके ससुर विजयंत मेहरा की मौजूदा हालत का ज़िम्मेदार था & अब उसके पति समीर की ज़िंदगी लेने की भी सोच रहा था.पर उसने महसूस किया था कि शाह के जज़्बात अब केवल जिस्मानी नही रह गये थे बल्कि उसके दिल मे भी रंभा के लिए जगह बन गयी थी.

रंभा ने सोच लिया था कि अब वो इस पहलू को मद्देनज़र रख के आगे की चाले चलेगी & इसी सोच को ध्यान मे रख वो देवेन से बात करने के बाद वो अंदर बंगल की रसोई मे आ गयी थी & अपने सोते हुए आशिक़ के लिए खाना बनाने मे लग गयी थी.खाना लगभग तैय्यार ही था जब उसका मोबाइल बजा.उसने देखा उसकी सहेली सोनम का फोन था.

"हाई!सोनम,बोल कैसी है?",रंभा ने मुस्कुराते हुए फोन कान से लगाया & दूसरे हाथ से खाने को प्लेट मे निकालने लगी.समीर अपनी माशुका से मिलने लंच के वक़्त गया था & ये खबर किसी तरह सोनम को पता चल गयी & उसने उसे ये बात फ़ौरन बताना ठीक समझा तो फोन कर दिया.रंभा को अभी अपने पति & उसकी प्रेमिका की रंगरलियो मे खलल डाला नही था तो उसके लिए ये खबर अभी किसी काम की नही थी पर तभी उसे 1 ख़याल आया.

"अच्छा सुन,छ्चोड़ उन दोनो को.आज शाम तो मिल रही है ना?",दोनो ने शाम मिलने की बात पहले ही तय की थी.सोनम ने हां बोला तो रंभा ने उस से समीर के अगले 10-15 दिनो की अपायंट्मेंट्स की कॉपी साथ लाने को कहा.वो उसके ब्लॅकबेरी से ये जानकारी निकाल चुकी थी मगर सोनम से दोबारा उसका शेड्यूल मंगवाने मे कोई हर्ज नही था.कुच्छ देर सहेली से बाते करने के बाद उसने फोन साइलेंट मोड पे किया & अपने बॅग मे डाला,फिर खाना ट्रे मे सज़ा अपने आशिक़ को जगाने चल दी.

टेंडर खुलने वाला था & मानपुर प्रॉजेक्ट मिलने की उमीद मे समीर ने कुच्छ प्रॉजेक्ट्स को जल्द से जल्द निपटाने की बात सोची थी.इसके चलते इधर काम बढ़ गया था & प्रणव भी बहुत मसरूफ़ हो गया था पर उस मसरूफ़ियत मे भी उसने अपने असली मक़सद & उसमे उसका साथ दे रहे महादेव शाह के बारे मे सोचना नही छ्चोड़ा था.

शाह उसे शुरू से ही थोड़ा अजीब इंसान लगा था.वो अपने घर से बहुत कम निकलता था & उसके यहा बहुत लोग आते-जाते भी नही थे पर समीर के लिए उसके घर के दरवाज़े हुमेशा खुले रहते थे.उसे शायद प्रणव पे पूरा भरोसा था पर प्रणव के उसके बारे मे ख़यालात ऐसे नही थे & इसीलिए उसने सोच रखा था कि समीर को शाह के ज़रिए रास्ते से हटवाने के बाद वो उसी बात का इस्तेमाल कर शाह को अपने रास्ते से हटा देगा.

पर इधर चंद दिनो से शाह उसे बदला-2 नज़र आ रहा था.1-2 बार उसने उस से मिलने का वक़्त बदल दिया था & जब मिला तो ना जाने किस जल्दी मे दिखा.जब उसने समीर को मारने के प्लान के बारे मे पुछा तो उसने बात टाल दी & कहा की वो फ़िक्र ना करे,काम हो जाएगा.प्रणव को उसका रुख़ कुच्छ ठीक नही लगा पर अब वो क्या कर सकता था!वो बहुत आगे आ चुका था & अब मुड़ना नामुमकिन था.उसने तय किया की चाहे जो भी हो वो अगली मुलाकात मे शाह से इस बारे पे ज़रूर बात करेगा.

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शाह इस वक़्त अपने बिस्तर मे बैठा खुद को दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान समझ रहा था.कुच्छ ही देर पहले उसकी महबूबा ने उसे जगाके अपने हाथो से लज़ीज़ खाना खिलाया था & उसके बाद शाह ने उसे बाहो मे भर उसके जिस्म पे लिपटे अपने ड्रेसिंग गाउन की बेल्ट खोल दी थी.दोनो पलंग के हेडबोर्ड से टेक लगा के बैठे थे & शाह ने अपनी माशुका को बाई बाँह मे घेरा हुआ था.रंभा उसकी ओर चेहरा किए घूम के बैठी थी & अपनी चूचियो पे घूमते उसके दाए हाथ से मस्त हो रही थी.

"तुमने इतनी तकलीफ़ क्यू उठाई?बस इस इंटरकम से फोन करना था & कोई नौकर आ जाता..",शाह ने साइड-टेबल पे रखे फोन की ओर इशारा किया,"..और खाना बना देता.",शाह ने उसकी चूचियाँ मसली तो रंभा ने गाउन से बाई टांग निकालते हुए शाह की टाँगो पे चढ़ा दी.

"उउंम्म....",उसने अपना बाया हाथ शाह की छाती दबाते हाथ के उपर रख दिया & उसे दबाने लगी,"..लगता है आपको मेरा बनाया खाना पसंद नही आया?"

"नही,मेरी जान.तुम तो मुझे ग़लत समझ गयी.",शाह उसके गालो को चूमने लगा,"..इतना लज़ीज़ खाना तो मैने ज़िंदगी मे पहले कभी खाया ही नही!मैं तो बस ये कह रहा था कि मुझे तुम्हे तकलीफ़ उठाते देख अच्छा नही लगता.",शाह नंगा था & उसने रंभा के सीने से हाथ हटा उसकी जाँघ को पकड़ जब अपनी टांग पे और चढ़ाया तो उसका लंड रंभा की चूत से जा लगा.

"आपके लिए खाना बनाने मे तकलीफ़ कैसी!",रंभा थोड़ा आगे हुई & खुले गाउन से झँकति अपनी चूचियो शाह के बालो भरे सीने से सटा दी & उसके कंधो पे अपने हाथ रख दिए,"..1 बात कान खोल के सुन लीजिए..",उसने उसके बाए गाल पे जीभ की नोक फिराते हुए उसे बाए कान मे उतरा & फिर उसे छेड़ने के बाद दन्तो से कान को काटा,"..शादी के बाद हर रोज़ कम से कम 1 बार आपको मेरे हाथ का खाना खाना ही पड़ेगा."

"ठीक है.",शाह का हाथ गाउन मे घुस उसकी गंद को सहला रहा था,"..अब तो हम आपके गुलाम हैं & आप हमारी मल्लिका!",शाह की बात रंभा हंस दी.शाह ने उसकी गंद सहलाते हुए उसपे चिकोटी काट ली.

"आउच!",रंभा ने बाए हाथ से उसका दाया हाथ पकड़ लिया,"..ऐसे पेश आते हैं अपनी मल्लिका से?",उसने बनावटी गुस्सा दिखाया.

"ये तो प्यार है जानेमन.",शाह ने मुस्कुराते हुए उसकी गंद मे 1 उंगली घुसा दी तो रंभा चिहुनक के उस से & सात गयी.शाह उसके गले को चूमते हुए उंगली से उसकी गंद मारने लगा.रंभा उसकी टाँगो पे टांग चढ़ाए उसके लंड पे चूत को दबाने लगी.

"ओह..महादेव....डार्लिंग..अब जल्दी से मुझे अपनी दुल्हन बनाइए!",रंभा की मस्ती बिल्कुल सच्ची थी पर उसके मुँह से निकलते बोल बिल्कुल झूठे.कमरे मे लगे शीशे मे वो खुद को शाह की बाहो मे देखा & जोश मे आ गयी थी & यही हाल शाह का भी था,"..अब मुझसे & इंतेज़ार नही होता.बताइए ना..हाईईईईईईईईईई..",उंगली गंद मे कुच्छ ज़्यादा अंदर घुस गयी & उसी वक़्त उसका बाया निपल शाह के दन्तो के बीच आ गया,"..कब उस गलिज़ इंसान को मेरी ज़िंदगी से निकालेंगे ताकि मैं हर पल आपकी बाहो मेसुकून से गुज़ार साकु..?..आननह..!",चूत पे दब्ता लंड & गंद मे चलती उंगली ने रंभा को फ़ौरन झाड़वा दिया.

"ये तो तुम्हारे उपर है,जानेमन.तुम समीर की अपायंट्मेंट्स के बारे मे बताओ तभी तो मैं उसकी मौत का वक़्त मुक़र्रर करू.",शाह ने उंगली गंद से बाहर खींची तो मस्ती मे डूबी रंभा खुद ही उसकी गोद मे बैठ गयी.दोनो घुटने शाह के दोनो ओर बिस्तर पे जमा के उसने खुद को शीशे मे देखा तो शाह ने उसके कंधो से गाउन नीचे सरका उसे नंगी कर दिया.वो आगे झुका & उसकी चूचियो को हाथो मे भर खींचते हुए उन्हे चूसने लगा.

"उउन्न्ञणन्..वो तो बता दूँगी पर 1 बात बताइए उसे मारेंगे कैसे & फिर क्या हम फँसेगे नही उसके क़त्ल के जुर्म मे?",शाह ने उसकी चूचिया छ्चोड़ी & अपने लंड को उसकी चूत पे टीका के उसे नीचे बिठाया.रंभा आँखे बंद कर उसके लंड को अंदर लेने लगी.

"उसका क़त्ल नही होगा,1 हादसा होगा & हादसे के ज़िम्मेदार हम नही होंगे.",शाह की आवाज़ मे खून जमाने वाला ठण्दपन था.रंभा बेइंतहा मस्ती मे डूबी थी पर उस वक़्त शाह की आवाज़ की ठंडक से डर उसकी आँखे खुल गयी,"..सड़क पे 1 ट्रक उसकी कार से टकराएगा जिसमे उसकी मौत होगी.उसके बाद ट्रक ड्राइवर गिरफ्तार होगा.पता चलेगा कि वो नशे मे धुत था और उसे सज़ा होगी."

"पर कोई हमारे लिए क्यू फाँसी चढ़ेगा?",दोनो 1 दूसरे से जुड़े बैठे थे.चुदाई अभी शुरू नही हुई थी.

"फाँसी नही जैल होगी उसे.उसने जान बुझ के धक्का नही मारा था & मेरी जान,इस काम के लिए उसके परिवार को वो दौलत मिलेगी जो उसने सपने मे भी नही सोची होगी & फिर भी अगर किसी को इसके बारे मे पता चलेगा तो भी वो उस ड्राइवर से हमारे तक के सिरे को ढूंड नही पाएगा,ये मेरी गॅरेंटी है."

"& अगर समीर आक्सिडेंट मे बच गया तो?"

"ऐसा नही होगा.",शाह कुटिलता से मुस्कुराया,"..वो ड्राइवर ये पक्का करेगा कि पोलीस को समीर की बेजान लाश मिले.अगर समीर ट्रक के धक्के से नही मारा तो फिर ड्राइवर अपने हाथो से उसे मारेगा.",रंभा कुच्छ पल उसे देखती रही.उसे शाह से डर लगने लगा था पर इस वक़्त वो अपने दिल के जज़्बातो को ज़ाहिर करने की ग़लती नही कर सकती थी.वो भी शाह की तरह ही उसकी आँखो मे झँकते हुए मुस्कुराने लगी.

"आइ लव यू,महादेव!",वो आगे झुकी & शाह को इस शिद्दत से चूमा की वो सिहर उठा.रंभा ने काफ़ी देर बाद अपने लब उसके लाबो से जुदा किए & उसके चेहरे को हाथो मे भर उसकी आँखो से अपनी आँखे मिला दी.उसका चेहरा तमतमाया हुआ था,शाह को चूमते वक़्त उसका डर बहुत कम हो गया था & 1 विश्वास उसके अंदर आ गया था कि वो इस इंसान को अपनी उंगलियो पे जैसे मर्ज़ी नचा सकती है.इस ख़याल से उसे बहुत रोमांच हुआ जोकि उसके चेहरे पे सॉफ दिख रहा था.

"महादेव,1 बात का वादा कीजिए.",रंभा वैसे ही उसकी आँखो मे देख रही थी.

"किया मेरी जान."

"उस कामीने को मारने मे आप मुझे अपने साथ रखेंगे."

"क्या?!..तुम ये तकलीफ़ क्यू उठाओगी,मेरी रानी.तुम बेफ़िक्र रहो,मैं हू ना तुम्हारे साथ."

"बात वो नही है.आप जब भी अपने प्लान पे अमल करें तो मुझे अपने साथ रखें.मेरी दिली तमन्ना थी की अपने बेवफा पति को अपने हाथो से मारू.वो करना तो बेवकूफी होगी तो उसे मारने के प्लान को अंजाम देने मे मैं आपके साथ रह अपनी ये हसरत इस तरह पूरी करना चाहती हू.",शाह उसे गौर से देख रहा था..इतनी मोहब्बत थी इसे समीर से तभी तो इतनी नफ़रत भी है!..ये शिद्दत..ये जुनून उसकी मोहब्बत मे भी दिखता था & इसी ने उसके हुस्न के साथ मिलके उसपे जादू कर दिया था!..अब ये हुसनपरी मेरी है..सिर्फ़ मेरी..इसकी हर ख्वाहिश पूरी करूँगा मैं..चाहे कुच्छ भी हो जाए!

"ठीक है,रंभा.मैं तुम्हारी ख्वाहिश ज़रूर पूरी करूँगा.",रंभा आगे झुकी & अपने आशिक़ को चूमने लगी.शाह ने उसे बाहो मे भरा & उसकी किस का जवाब देते हुए कमर उचकते हुए चुदाई शुरू कर दी.

देवेन 1 झटके से उठ बैठा.वो दोपहर का खाना खा के सोने चला गया था.कुच्छ देर पहले हुई बातो को सोचते हुए वो बस सोने ही वाला था कि 1 ख़याल उसके दिमाग़ मे बिजली की तरह कौंधा..दयाल जितना शातिर था उतना ही ख़तरनाक भी..ड्रग्स के धंधे के आकाओं को भी झांसा दिया था उसने & इंटररपोल जैसी एजेन्सी को भी..वो काली कार कही बस इलाक़े का मुआयना करने तो नही आई थी..हमले के पहले का मुआयना!

देवेन बिस्तर से उतरा & फटाफट समान पॅक करने लगा.अपना समान बाँधने के बाद उसने विजयंत मेहरा को जगाया & उसे सारी बात बताई,"पर अब हम जाएँगे कहा?",विजयंत जल्दी-2 अपना समान अपने बॅग मे डाल रहा था.

"पता नही.पर इस शहर से बाहर जाना पड़ेगा.",देवेन रंभा का फोन लगा रहा था पर वो फिर से फोन नही उठा रही थी.उसने कुच्छ सोच के इस बार अमोल बपत को फोन लगाया.

"क्या यार!तू तो गायब ही हो गया."

"बात ही कुच्छ ऐसी थी,बपत साहब."

"अच्छा & यार..तुम भी कमाल हो.",बपत हँसने लगा,"..अख़बार मे इशतहार देने से वो साला आ जाएगा क्या?!",बपत ने इशतहार देख लिया था.

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क्रमशः.......

JAAL paart--91

gataank se aage......

Hotel Violet ki 25vi manzil ke apne baap ke suite ke bistar pe Sameer kamya ko apni baaho me kase leta chum raha tha.kehne ki zarurat nahi ke dono nange the & unke hath 1 dusre ke nazuk ango se khilwad kar rahe the.sameer daye hath ki ungli se uski chut kuredta hua uske upar jhuka baye se uski dayi chhati dabata uske chehre ko chum raha tha & dono jismo ke beech apna baya hath ghusa kamya uske lund ko hila rahi thi.

"sameer,Rambha talaq dene me koi aana kani to nahi karegi na?",sameer ne use abhi-2 Manpur vale tender ke 4 dino ke baad khulne ki baat batayi thi & sath hi ye bhi batay tha ki uske baad vo apne vakil ke zariye rambha ko talaq dene ki karvai shuru karwa dega.

"nahi,kamya.",sameer ne apna hath hatake uski jagah apna munh uski chhati se laga diya.

"uummmm....to fir humare intezar ke din khatm hue?"

"haan,meri jaan."

"oh,sameer!",kamya ne hath uske lund se hata use baaho me bhara & use palat ke uske upar aa gayi.uska hath dobara dono jismo ke beech gaya & sameer ke sakht lund ko pakad chut ke munh pe rakha,"..aakhirkaar hum 1 ho hi jayenge!..kitni jaddojehad ki humne is sab ke liye!"

"haan,meri jaan.ab tum meri rani banogi & hum dono milke is ari milkiyat pe raaj karegne.",sameer ne uski kamar jakad neeche se apni kamar uchkayi & lund uski chut me ghusa uski chudai shuru kar di.

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Rambha ke liye Mahadev Shah & uska rishta bas jismani tha.use uske sath sone me jo maza aata tha vo anutha tha par shah uske liye shaq ke ghere me khada vo shakhs tha joki shayad uske sasur Vijayant Mehra ki maujuda halat ka zimmedar tha & ab uske pati sameer ki zindagi lene ki bhi soch raha tha.par usne mehsus kiya tha ki shah ke jazbat ab kewal jismani nahi reh gaye the balki uske dil me bhi rambha ke liye jagah ban gayi thi.

rambha ne soch liya tha ki ab vo is pehlu ko maddenazar rakh ke aage ki chaale chalegi & isi soch ko dhyan me rakh vo Deven se baat karne ke baad vo andar bungle ki rasoi me aa gayi thi & apne sote hue aashiq ke liye khana banane me lag gayi thi.khana lagbhag taiyyar hi tha jab uska mobile baja.usne dekha uski saheli Sonam ka phone tha.

"hi!sonam,bol kaisi hai?",rambha ne muskurate hue phone kaan se lagaya & dusre haths e khane ko plate me nikalne lagi.sameer apni mashuka se milne lunch ke waqt gaya tha & ye khabar kisi tarah sonam ko pata chal gayi & usne use ye baat fauran batana thik samjha to fone kar diya.rambha ko abhi apne pati & uski premika ki rangraliyo me khalal dala nahi tha to uske liye ye khabar abhi kisi kaam ki nahi thi par tabhi use 1 khayal aaya.

"achha sun,chhod un dono ko.aaj sham to mil rahi hai na?",dono ne sham milne ki baat pehle hi tay ki thi.sonam ne haan bola to rambha ne us se sameer ke agle 10-15 dino ki appointments ki copy sath lane ko kaha.vo uske Blackberry se ye jankari nikal chuki thi magar sonam se dobara uska schedule mangwane me koi harj nahi tha.kuchh der saheli se baate karne ke baad usne fone silent mode pe kiya & apne bag me dala,fir khana tray me saja apne aashiq ko jagane chal di.

Tender khulne wala tha & Manpur Project milne ki umeed me Sameer ne kuchh projects ko jald se jald niptane ki bat sochi thi.iske chalte idhar kaam badh gaya tha & Pranav bhi bahut masruf ho gaya tha par us masrufiyat me bhi usne apne asli maqsad & usme uska sath de rahe Mahadev Shah ke bare me sochna nahi chhoda tha.

shah use shuru se hi thoda ajib insan laga tha.vo apne ghar se bahut kam nikalta tha & uske yaha bahut log aate-jate bhi nahi the par sameer ke liye uske ghar ke darwaze humesha khule rehte the.use shayad pranav pe pura bharosa tha par pranav ke uske bare me khayalat aise nahi the & isiliye usne soch rakha tha ki Sameer ko shah ke zariye raste se hatwane ke baad vo usi baat ka istemal kar shah ko apne raste se hata dega.

par idhar chand dino se shah use badla-2 nazar aa raha tha.1-2 baar usne us se milne ka waqt badal diya tha & jab mila to na jane kis jaldi me dikha.jab usne sameer ko marne ke plan ke bare me puchha to usne baat taal di & kaha ki vo fikr na kare,kaam ho jayega.pranav ko uska rukh kuchh thik nahi laga par ab vo kya kar sakta tha!vo bahut aage aa chuka tha & ab mudna namumkin tha.usne tay kiya ki chahe jo bhi ho vo agli mulakat me shah se is bare pe zarur baat karega.

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shah is waqt apne bistar me baitha khud ko duniya ka sabse khushnasib insan samajh raha tha.kuchh hi der pehle uski mehbooba ne use jagake apne hatho se laziz khana khilaya tha & uske baad shah ne use baaho me bhar uske jism pe lipte apne dressing gown ki belt khol di thi.dono palang ke headboard se tek laga ke baithe the & shah ne apni mashuka ko bayi banh me ghera hua tha.rambha uski or chehra kiye ghum ke baithi thi & apni chhatiyo pe ghumte uske daye hath se mast ho rahi thi.

"tumne itni taklif kyu uthayi?bas is intercom se phone karna tha & koi naukar aa jata..",shah ne side-table pe rakhe phone ki or ishara kiya,"..& khana bana deta.",shah ne uski chhatiya masli to rambha ne gown se bayi tang niklate hue shah ki tango pe chadha di.

"uummm....",usne apna baya hath shah ke chhati dabate hath ke upar rakh diya & use dabane lagi,"..lagta hai aapko mera banaya khana pasand nahi aaya?"

"nahi,meri jaan.tum to mujhe galat samajh gayi.",shah uske galo ko chumne laga,"..itna laziz khana to maine zindagi me pehle kabhi khaya hi nahi!main to bas ye keh raha tha ki mujhe tumhe taklif uthate dekh achha nahi lagta.",shah nanga tha & usne rambha ke seene se hath hata uski jangh ko pakad jab apni tang pe & chadhaya to uska lund rambha ki chut se ja laga.

"aapke liye khana banane me taklif kaisi!",rambha thoda aage hui & khule gown se jhankti apni chhatiya shah ke baalo bhare seene se sata di & uske kandho pe apne hath rakh diye,"..1 baat kaan khol ke sun lijiye..",usne uske baye gaal pe jibh ki nok firate hue use baye kaan me utara & fir use chhedne ke baad danto se kaan ko kata,"..shadi ke baad har roz kam se kam 1 baar aapko mere hath ka khana khana hi padega."

"thik hai.",shah ka hath gown me ghus uski gand ko sehla raha tha,"..ab to hum aapke ghulam hain & aap humari mallika!",shah ki baat rambha hans di.shah ne uski gand sehlate hue uspe chikoti kaat li.

"ouch!",rambha ne baye hath se uska daya hath pakad liya,"..aise pesh aate hain apni mallika se?",usne banwati gussa dikhaya.

"ye to pyar hai janeman.",shah ne muskurate hue uski gand me 1 ungli ghusa di to rambha chihunk ke us se & sat gayi.shah uske gale ko chumte hue ungli se uski gand marne laga.rambha uski tango pe tang chadhaye uske lund pe chut ko dabane lagi.

"oh..mahadev....darling..ab jaldi se mujhe apni dulhan banaiye!",rambha ki masti bilkul sachchi thi par uske munh se nikalte bol bilkul jhoothe.kamre me lage shishe me vo khud ko shah ki baaho me dekha & josh me aa gayi thi & yehi haal shah ka bhi tha,"..ab mujhse & intezar nahi hota.bataiye na..haiiiiiiiiiii..",ungli gand me kuchh zyada andar ghus gayi & usi waqt uska baya nipple shah ke danto ke beech aa gaya,"..kab us galiz insan ko meri zindagi se nikalenge taki main har pal aapki baaho mesukun se guzar saku..?..aannhhhhhhhhhhhh..!",chut pe dabta lund & gand me chalti ungli ne rambha ko fauran jhadwa diya.

"ye to tumhare upar hai,janeman.tum Sameer ki appointments ke bare me batao tabhi to main uski maut ka waqt mukarrar karu.",shah ne ungli gand se bahar khinchi to masti me dubi rambha khud hi uski god me baith gayi.dono ghutne shah ke dono or bistar pe jama ke usne khud ko shishe me dekha to shah ne uske kandho se gown neeche sarka use nangi kar diya.vo aage jhuka & uski choohciyo ko hatho me bhar khicnhte hue unhe chusne laga.

"uunnnnn..vo to bata dungi par 1 baat bataiye use marenge kaise & fir kya hum phansege nahi uske qatl ke jurm me?",shah ne uski choochiya chhodi & apne lund ko uski chut pe tika ke use neeche bithaya.rambha aankhe band kar uske lund ko andar lene lagi.

"uska qatl nahi hoga,1 hadsa hoga & hadse ke zimmedar hum nahi honge.",shah ki aavaz me khun jamane vala thandapan tha.rambha beintaha masti me dubi thi par us waqt bjhi shah ki aavaz ki thandak se darr uski aankhe khul gayi,"..sadak pe 1 truck uski car se takrayega jisme uski maut hogi.uske baad truck driver giraftar hoga.pata chalega ki vo nashe me dhut tha & use saza hogi."

"par koi humare liye kyu phansi chadhega?",dono 1 dusre se jude baithe the.chudai abhi shuru nahi hui thi.

"phansi nahi jail hogi use.usne jaan bujh ke dhakka nahi mara tha & meri jaan,is kaam ke liye uske parivar ko vo daulat milegi jo usne sapne me bhi nahi sochi hogi & fir bhi agar kisi ko iske bare me pata chalega to bhi vo us driver se humare tak ke sire ko dhund nahi payega,ye meri guarantee hai."

"& agar sameer accident me bach gaya to?"

"aisa nahi hoga.",shah kutilta se muskuraya,"..vo driver ye pakka karega ki police ko sameer ki bejaan lash mile.agar sameer truck ke dhakke se nahi mara to fir driver apne hatho se use marega.",rambha kuchh pal use dekhti rahi.use shah se darr lagne laga tha par is waqt vo apne dil ke jazbato ko zahir karne ki galti nahi kar sakti thi.vo bhi shah ki tarah hi uski aankho me jhankte hue muskurane lagi.

"i love you,mahadev!",vo aage jhuki & shah ko is shiddat se chuma ki vo sihar utha.rambha ne kafi der baad apne lab uske labos e juda kiye & uske chehre ko hatho me bhar uski aankho se apni aankhe mila di.uska chehra tamtamaya hua tha,shah ko chumte waqt uska darr bahut kam ho gaya tha & 1 vishwas uske andar aa gaya tha ki vo is insan ko apni ungliyo pe jaise marzi nacha sakti hai.is khayal se use bahut romanch hua joki uske chehre pe saaf dikh raha tha.

"mahadev,1 baat ka vada kijiye.",rambha vaise hi uski aankho me dekh rahi thi.

"kiya meri jaan."

"us kamine ko marne me aap mujhe apne sath rakhenge."

"kya?!..tum ye taklif kyu uthaogi,meri rani.tum befikr raho,main hu na tumhare sath."

"baat vo nahi hai.aap jab bhi apne plan pe amal karen to mujhe apne sath rakhen.meri dili tamanna thi ki apne bewafa pati ko apne hatho se maru.vo karna to bevkufi hog to use marne ke plan ko anjam dene me main aapke sath reh apni ye hasrat is tarah puri karna chahti hu.",shah use gaur se dekh raha tha..itni mohabbat thi ise sameer se tabhi to itni nafrat bhi hai!..ye shiddat..ye junun uski mohabbat me bhi dikhta tha & isi ne uske husn ke sath milke uspe jadu kar diya tha!..ab ye husnpari meri hai..sirf meri..iski har khwahish puri karunga main..chahe kuchh bhi ho jaye!

"thik hai,rambha.main tumhari khwahish zarur puri karunga.",rambha aage jhuki & apne aashiq ko chumne lagi.shah ne use baaho me bhara & uski kiss ka jawab dete hue kamar uchakte hue chudai shuru kar di.

Deven 1 jhatke se uth baitha.vo dopahar ka khana kha ke sone chala gaya tha.kuchh der pehle hui baato ko sochte hue vo bas sone hi wala tha ki 1 khayal uske dimagh me bijli ki tarah kaundha..Dayal jitna shatir tha utna hi khatarnak bhi..drugs ke dhandhe ke aakaon ko bhi jhansa diya tha usne & Interpol jaisi agency ko bhi..vo kali car kahi bas ilake ka muayana karne to nahi aayi thi..humle ke pehle ka muayana!

deven bistar se utra & fatafat saman pack karne laga.apna saman bandhne ke baad usne Vijayant Mehra ko jagaya & use sari baat batayi,"par ab hum jayenge kaha?",vijayant jaldi-2 apna saman apne bag me daal raha tha.

"pata nahi.par is shehar se bahar jana padega.",deven rambha ka fone laga raha tha par vo fir se fone nahi utha rahi thi.usne kuchh soch ke is baar Amol Bapat ko fone lagaya.

"kya yaar!tu to gayab hi ho gaya."

"baat hi kuchh aisi thi,bapat sahab."

"achha & yaar..tum bhi kamal ho.",bapat hansne laga,"..akhbar me ishtehar dene se vo sala aa jayega kya?!",bapat ne ishtehar dekh liya tha.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:13

जाल पार्ट--92

गतान्क से आगे......

"बपत साहब,अब मच्चली पकड़नी हो तो चारा डालना ही पड़ेगा ना & लगता है मच्चली ने चारा खा भी लिया है."

"क्या?!",देवेन ने उसे सारी बात बताई,"हूँ..मामला ख़तरनाक लगता है पर भाई,तुम निकल जाओगे तो वो साला पकड़ मे कैसे आएगा?”

“आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे मैं को पोलिसेवला हू.”,देवेन ने उसी के अंदाज़ मे जवाब दिया तो बपत ने ठहाका लगाया,”..बपत साहिब,मुझे अपनी परवाह नही पर कुच्छ लोग हैं जिनकी ज़िम्मेदारी मेरे सर है & मैं उन्हे तकलीफ़ मे नही डाल सकता इसीलिए तो आपको फोन किया है कि किसी तरह डेवाले पोलीस को उसके बारे मे सुराग दे दीजिए की वो यहा आ सकता है.

“हूँ..करता हूँ कुच्छ.”,दोनो की बात ख़त्म हो गयी.

“महादेव डार्लिंग.”,रंभा अपने आशिक़ के सीने पे सर रखे उसकी झांतो मे बाए हाथ को फिरा रही थी.

“बोलो जानेमन.”,शाह उसकी ज़ुल्फो की खुश्बू मे मदहोश रहा था.

“उस कामीने के मारने के बाद हम शादी कब करेंगे?”

“1 महीने का इंतेज़ार करना होगा हमे.”

“इतना लंबा!”,रंभा बाई कोहनी पे उचकी.उसके चेहरे पे नाखुशी सॉफ दिख रही थी.

“मेरी जान,इतना इंतेज़ार तो ज़रूरी है वरना किसी को शक़ सकता है.”

“पर मैं कैसे रहूंगी इतने दिनो तक आपके बिना.”,वो किसी बच्चे की तरह मचल रही थी.

“अरे!बस चंद दिनो की तो बात है.”

“नही!मैं नही जानती कुच्छ वो मरेगा & मैं आपके पास आ जाऊंगी.”,शाह उसकी बचकानी ज़िद सुनके थोड़ा घबरा गया था.रंभा ने भी भाँप लिया कि उसने कुच्छ ज़्यादा नाटक कर दिया है,”..मैं क्या करू!जानती हू आप सही कह रहे हैं..”वो फिर उसके सीने पे लेट गयी,”..पर अब सब्र नही होता ना!”

“मैं समझता हू,रंभा.ऐसा ही कुच्छ तो मेरा भी हाल है.”

“अच्छा छ्चोड़िए उस बात को..”,रंभा ने बात बदली,”..हम शादी करेंगे कहा & कैसे?”

“यही तो मैं भी सोच रहा था.किसी मंदिर मे शादी कर के मॅरेज रिजिस्ट्रार के ऑफीस से सर्टिफिकेट निकलवा लेंगे.”

“हां,पर किस मंदिर मे शादी करेंगे?इस शहर मे तो हमे कोई भी पहचान सकता है.”

“हां,यहा से दूर जाना होगा पर ज़्यादा दूर नही जा सकते.वरना किसी को शक़ हो सकता है कि पति की मौत के महीने भर बाद ही तुम कहा चल दी.”,शाह सोचने लगा.रंभा के ज़हन मे फ़ौरन ही इस काम के लिए सही जगह आ गयी थी पर वो चुप रही & थोड़ी देर सोचने का नाटक करती रही.

“1 जगह है.”,वो किसी बच्ची की तरह उच्छली जिसने होमवर्क मे मिले मुश्किल सवाल का सही जवाब ढूंड लिया हो.

“कौन सी?”

“क्लेवर्त.”,शाह उसे गौर से देखने लगा.रंभा का दिल धड़क उठा पर उसने बड़ी मासूमियत से पुछा,”क्या हुआ?..वो जगह ठीक नही रहेगी क्या?”

“नही मेरी रानी,वो बिल्कुल सही जगह है!”,शाह का संजीदा चेहरा अचानक हंसते चेहरे मे तब्दील हो गया & वो रंभा को बाँहो मे भर चूमने लगा,कैसे सोचा तुमने उस जगह के बारे मे?”

“आपको याद होगा जब समीर लापता हुआ था तो मैं उसके डॅडी के साथ उसे ढूँदने के चक्कर मे वाहा गयी थी.वाहा जो हुआ बहुत बुरा हुआ पर उस जगह की खूबसूरती & सैलानियो की पसंदीदा जगह होने के बावजूद वाहा की शान्ती ने मेरे दिल मे घर कर लिया.हम बड़ी आसानी से वाहा जाके चुपचाप शादी कर सकते हैं.”

“अच्छा ये बताइए..”,रंभा ने सवाल किया,”..समीर की मौत के बाद ट्रस्ट ग्रूप की मीटिंग कब होगी?”

“मुझे लगता है कि उसकी मौत के बाद क्रिया-कर्म & फिर क़ानूनी फॉरमॅलिटीस निपटाते हुए 1 महीने का वक़्त गुज़र जाएगा.मीटिंग भी तब ही होगी.”

“अच्छा,तो फिर 1 काम करते हैं ना!हम उसकी मौत के 15-20 दिन बाद ही वाहा चले जाते हैं & शादी कर लेते हैं फिर वापस आ जाएँगे & फिर जब सही मौका आएगा तब दुनिया को बताएँगे की आप & मैं पति-पत्नी हैं.”

“हूँ.बात तो ठीक लगती है तुम्हारी.”,शाह सोच रहा था.

“अच्छा,अब जब भी उसकी मौत का इंतेज़ाम करें तब मुझे बुला लीजिएगा.”,रंभा बिस्तर से उतरी & सोच मे पड़ गयी.उसका ब्लाउस तो शाह लगभग फाड़ ही चुका था.शाह उसकी उलझन समझ गया & मुस्कुराता हुआ बिस्तर से उठा & अलमारी खोल 1 पॅकेट रंभा को थमाया जिसमे 1 ड्रेस थी.

“ये किसकी है?”,रंभा ने उसे छेड़ा.

“जिसकी भी हो,अब तो तुम्हारी है.”,शाह ने भी वैसे ही जवाब दिया तो दोनो खिलखिला उठे.

देवेन विजयंत मेहरा को लेके उस घर से निकला & डेवाले की सड़को पे घूमने लगा.रंभा ने महादेव शाह के घर से निकलते ही उसे फोन किया तो उसने रंभा को सारी बात बताई.रंभा फ़ौरन उनके पास पहुँची & तीनो देवेन के साथ उसकी कार मे बैठ आगे के बारे मे सोचने लगे.

"रंभा,इस वक़्त हमे दयाल को छ्चोड़ सिर्फ़ शाह पे ध्यान देना चाहिए.मुझे लगता है कि जैसे ही हम उसकी पोल खोल विजयंत को दुनिया के सामने लाएँगे,विजयंत के इस हाल का राज़ भी खुद बा खुद खुल जाएगा."

"हां,आपकी बात ठीक है पर अभी आप जाएँगे कहा?"

"तुम्हारी बात से मुझे आइडिया आया है."

"क्या?"

"हम क्लेवर्त जाते हैं."

"क्या?!पर वाहा रहेंगे कहा?"

"अरे!उसके पास वो गाँव भूल गयी,हराड.",रंभा के गाल उस गाँव मे उसकी & देवेन की पहली रात को याद कर सुर्ख हो गये.

"वाहा उसी बुड्ढे की मदद लेंगे?"

"हां."

"ठीक है.पर फिर समीर का काम."

"उसकी फ़िक्र मत करो.बस तुम मुझे फोन से सब बताती रहना."

"ओके.",रंभा दोनो मर्दो से गले मिली & उन्हे अलविदा कह के वाहा से सोनम से मिलने चली गयी.सोनम के साथ उसके घर पे बैठी वो काफ़ी देर तक गप्पे लड़ाती रही फिर उसकी दी गयी समीर के शेड्यूल की कॉपी ले वाहा से चली आई.घर आके उसने देखा की सोनम के दिए गये & समीर की ब्लॅकबेरी से निकले शेड्यूल बिल्कुल 1 जैसे थे.

अगले दिन देवेन हराड पहुँचा & उसे फोन किया तो रंभा ने उसे समीर के शेड्यूल के गॅप के बारे मे बता दिया.देवेन ने उसे ये बात शाह को बताने को कहा.रंभा ने ऐसा ही किया तो शाह ने उसे अगले दिन मिलने को कहा.

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इधर देवेन हराड गया उधर दयाल उसके घर के सामने वाले मकान पर गया उसकी तलाश मे.उसने भी उस काली कार की ही तरह पूरे इलाक़े का चक्कर लगाया पर उसे कुच्छ ना मिला.काली कार के ड्राइवर ने उसे बताया था कि वाहा कुच्छ भी गड़बड़ नही दिखी थी.दयाल वापस लौट गया पर उसने सोच लिया था कि उस पते पे नज़र तो रखनी ही पड़ेगी.

उसने 1 आदमी को इस काम पे लगाया भी पर कुच्छ नतीजा नही निकला.वो तारीख भी आके चली गयी जो इशतहार मे लिखी थी पर उस दिन भी दयाल के आदमी को वाहा कोई नही दिखा.

इस सब से पहले कुच्छ & हुआ जिस से चारो तरफ सनसनी फैल गयी.

जिस रोज़ देवेन & विजयंत डेवाले से निकले उसके ठीक 4 दिन बाद मानपुर प्रॉजेक्ट का टेंडर खुला & जैसी की उमीद थी वो ट्रस्ट ग्रूप को ही मिला.समीर इस बात का जश्न मानने के लिए शहर के बाहर बने मेहरा परिवार के फार्महाउस के लिए रवाना हो गया.कामिनी वाहा पहले से ही पहुँच चुकी थी.

डेवाले से बाहर निकलते हाइवे पे 5 किमी के सफ़र के बाद 1 रास्ता बाई तरफ चला जाता है जिसके दोनो तरफ खाली झाड़-झंखाड़ से भरी ज़मीन है.इस रास्ते पे कोई 2किमी चलने के बाद बड़े ही आलीशान & खूबसूरत फार्म्हाउसस दिखने लगते हैं.इन्ही मे से 1 फार्महाउस मेहरा परिवार का था.समीर खुशी मे डूबा सीटी बजाता उस सड़क पे बढ़ा जा रहा था कि पीछे से 1 ट्रक ने हॉर्न बजाया.उसने उसे आगे जाने देने के लिए कार थोड़ी किनारे की.वो ट्रक बगल से आगे जाने लगा पर जब उस ट्रक का पिच्छला हिस्सा समीर की ड्राइविंग सीट के बराबर आया तो ट्रक ड्राइवर ने अचानक ट्रक को बाई तरफ मोड़ा.ट्रक का पिच्छला हिस्सा समीर की कार से टकराया जो अपना बॅलेन्स खोती सड़क के किनारे की कच्ची ज़मीन पे चली गयी & 1 पेड़ से टकराई.

शाम 5 बजते-2 कामया बहुत घबरा गयी.समीर ना तो अपना फोन उठा रहा था ना ही वो दफ़्तर मे था.2 बजे मिलने की बात तय हुई थी & अब 3 घंटे बीट चुके थे.उसकी समझ मे नही आ रहा था कि क्या करे.उसने 5 बजे फिर समीर के दफ़्तर फोन किया & सोनम को सारी बात बताई.सोनम ने सबसे पहले ये खबर प्रणव को दी & उसके बाद अपने मोबाइल से अपनी सहेली को.

प्रणव ने भी समीर को ढूंडना शुरू किया पर जब उसे भी समीर कही नही मिला तो उसने पोलीस कमिशनर के दफ़्तर फोन करने की सोची पर वो फोन मिलाता उस से पहले ही घबराई & बौखलाई सोनम उसके कॅबिन मे घुसी,"सर.."

"क्या हुआ सोनम?"

"सर,पोलीस आई है."

"हां तो.",प्रणव खड़ा हुआ.

"समीर सर की कार मिली है."

"क्या?!..कहा?!",प्रणव तेज़ी से उसकी तरफ बढ़ा..शाह ने उसे तो कुच्छ नही बताया था फिर क्या उसने उसे बिना बताए सब कर दिया?

"उनकी लाश मिली है,सर."

"क्या बकती हो?!",प्रणव की आँखे हैरत से फॅट गयी.तभी 1 पोलीस वाला उसके कॅबिन के खुले दरवाज़े से अंदर घुसा.

"ये सही कह रही है,मिस्टर.प्रणव.हमे समीर जी की कार मिली है.उसका आक्सिडेंट हुआ लगता है पर साथ ही 1 लाश भी मिली है उस कार मे जिसका चेहरा बुरी तरह ज़ख़्मी है.मैं इसीलिए यहा आया हू ताकि आप या फिर कोई ऐसा शख्स जो उन्हे करीब से जानता हो,वो चल के उस लाश की शिनाख्त कर ले."

"मिस्टर.समीर मेहरा की वसीयत मे कही भी ये ज़िक्र नही है कि ट्रस्ट ग्रूप के उनके शेर्स का क्या किया जाए.इस सूरते हाल मे ये शेर्स उनकी बीवी रंभा मेहरा को जाने चाहिए..",समीर की मौत के 10 दिन बाद मेहरा परिवार के बुंगले के हॉल मे वकील समीर की वसीयत पढ़ने के बाद बोल रहा था जिसे सारे परिवार वाले सुन रहे थे,"..पर अगर आप मे से किसी को भी इस बात से ऐतराज़ हो तो आप अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं.",वकील ने सभी की ओर देखा.

तीनो औरतें सफेद सारी मे बैठी थी.रंभा सर झुकाए थी & ऐसे बैठे थी जैसे उसे किसी बात से कोई मतलब नही पर हक़ीक़त ये थी कि वो सब कुच्छ बड़े ध्यान से सुन-देख रही थी.

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क्रमशः.......

JAAL paart--92

gataank se aage......

"bapat sahab,ab machhli pakadni ho to chara dalna hi padega na & lagta hai machhli ne chara kha bhi liya hai."

"kya?!",deven ne use sari baat batayi,"hun..mamla khatarnak lagta hai par bhai,tum nikal jaoge to vo sala pakad me kaise aayega?”

“aap to aise keh rahe hain jaise main ko policevala hu.”,deven ne usi ke andaz me jawab diya to bapat ne thahaka lagaya,”..bapat sahib,mujhe apni parvah nahi par kuchh log hain jinki zimmedari mere sar hai & main unhe taklif me nahi daal sakta isiliye to aapko fone kiya hai ki kisi tarah Devalay police ko uske bare me surag de dijiye ki vo yaha aa sakta hai.

“hun..karta hun kuchh.”,dono ki baat khatm ho gayi.

“Mahadev darling.”,Rambha apne aashiq ke seene pe sar rakhe uski jhanto me baye hath ko fira rahi thi.

“bolo janeman.”,shah uski zulfo ki khushbu me madhosh raha tha.

“us kamine ke marne ke baad hum shadi kab karenge?”

“1 mahine ka intezar karma hoga hume.”

“itna lumba!”,rambha bayi kohni pe uchaki.uske chehre pe nakhushi saaf dikh rahi thi.

“meri jaan,itna intezar to zaruri hai varna kisi ko shaq sakta hai.”

“par main kaise rahungi itne dino tak aapke bina.”,vo kisi bachche ki tarah machal rahi thi.

“are!bas chand dino ki to baat hai.”

“nahi!main nahi janti kuchh vo marega & main aapke paas aa jaoongi.”,shah uski bachkani zid sunke thoda ghabra gaya tha.rambha ne bhi bhanp liya ki usne kuchh zyada natak kar diya hai,”..main kya karu!janti hu aap sahi keh rahe hain..”vo fir uske seene pe let gayi,”..par ab sabr nahi hota na!”

“main samajhta hu,rambha.aisa hi kuchh to mera bhi haal hai.”

“achha chhodiye us baat ko..”,rambha ne baat badli,”..hum shadi karenge kaha & kaise?”

“yehi to main bhi soch raha tha.kisi mandir me shadi kar ke marriage registrar ke office se certificate nikalwa lenge.”

“haan,par kis mandir me shadi karenge?is shehar me to hume koi bhi pehchan sakta hai.”

“haan,yaha se door jana hoga par zyada door nahi ja sakte.varna kisi ko shaq ho sakta hai ki pati ki maut ke mahine bhar baad hi tum kaha chal di.”,shah sochne laga.rambha ke zehan me fauran hi is kaam ke liye sahi jagah aa gayi thi par vo chup rahi & thodi der sochne ka natak karti rahi.

“1 jagah hai.”,vo kisi bachchi ki tarah uchhli jisne homework me mile mushkil sawal ka sahi jawab dhoond liya ho.

“kaun si?”

“Clayworth.”,shah use gaur se dekhne laga.rambha ka dil dhadak utha par usne badi masumiyat se puchha,”kya hua?..vo jagah thik nahi rahegi kya?”

“nahi meri rani,vo bilkul sahi jagah hai!”,shah ka sanjida chehra achanak hanste chehre me tabdil ho gaya & vo rmabha ko bahao me bahr chumne laga,kaise socha tumne us jagah ke abre me?”

“aapko yaad hoga jab sameer lapata hua tha to main uske daddy ke sath use dhoondne ke chakkar me vaha gayi thi.vaha jo hua bahut bura hua par us jagah ki khubsurti & sailaniyo ki pasandeeda jagah hone ke bavjud vaha ki shanty ne mere dil me ghar kar liya.hum badi asani se vaha jake chupchap shadi kar sakte hain.”

“achha ye bataiye..”,rambha ne sawal kiya,”..sameer ki maut ke baad Trust Group ki meeting kab hogi?”

“mujhe lagta hai ki uski maut ke baad kriya-karm & fir kanooni formalities niptate hue 1 mahine ka waqt guzar jayega.meeting bhi tab hi hogi.”

“achha,to fir 1 kaam karte hain na!hum uski maut ke 15-20 din baad hi vaha chale jate hain & shadi kar lete hain fir vapas aa jayenge & fir jab sahi mauka aayega tab duniya ko batayenge ki aap & main pati-patni hain.”

“hun.baat to thik lagti hai tumhari.”,shah soch raha tha.

“achha,ab jab bhi uski maut ka intezam Karen tab mujhe bula lijiyega.”,rambha bistar se utri & soch me pad gayi.uska blouse to shah lagbhag phaad hi chuka tha.shah uski uljhan samajh gaya & muskurata hua bistar se utha & almari khol 1 packet rambha ko thamaya jisme 1 dress thi.

“ye kiski hai?”,rambha ne use chheda.

“iiski bhi ho,ab to tumhari hai.”,shah neb hi vaise hi jawab diya to dono khilkhila uthe.

Deven vijayant Mehra ko leke us ghar se nikla & Devalay ki sadko pe ghumne laga.Rambha ne Mahadev Shah ke ghar se niklate hi use phone kiya to usne rambha ko sari baat batayi.rambha fauran unke paas pahunchi & teeno deven ke sath uski car me baith aage ke bare me sochne lage.

"rambha,is waqt hume Dayal ko chhod sirf shah pe dhyan dena chahiye.mujhe lagta hai ki jaise hi hum uski pol khol vijayant ko duniya ke samne layenge,vijayant ke is haal ka raaz bhi khud ba khud khul jayega."

"haan,aapki baat thik hai par abhi aap jayenge kaha?"

"tumhari baat se mujhe idea aaya hai."

"kya?"

"hum Clayworth jate hain."

"kya?!par vaha rahenge kaha?"

"are!uske paas vo ganv bhul gayi,Haraad.",rambha ke gaal us ganv me uski & deven ki pehli raat ko yaad kar surkh ho gaye.

"vaha usi buddhe ki madad lenge?"

"haan."

"thik hai.par fir sameer ka kaam."

"uski fikr mat karo.bas tum mujhe fone se sab batati rehna."

"ok.",rambha dono mardo se gale mili & unhe alvida keh ke vaha se Sonam se milne chali gayi.sonam ke sath uske ghar pe baithi vo kafi der tak gappe ladati rahi fir uski di gayi sameer ke schedule ki copy le vaha se chali aayi.ghar aake usne dekha ki sonam ke diye gaye & sameer ki Blackberry se nikale schedule bilkul 1 jaise the.

agle din deven haraad pahuncha & use phone kiya to rambha ne use sameer ke schedule ke gap ke bare me bata diya.deven ne use ye baat shah ko batane ko kaha.rambha ne aisa hi kiya to shah ne use agle din milne ko kaha.

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idhar deven haraad gaya udhar dayal uske ghar ke samne vale makan par gaya uski talsh me.usne bhi us kali car ki hi tarah pure ilake ka chakkar lagaya par use kuchh na mila.kali car ke driver ne use bataya tha ki vaha kuchh bhi gadbad nahi dikhi thi.dayal vapas laut gaya par usne soch liya tha ki us pate pe nazar to rakhni hi padegi.

usne 1 aadmi ko is kaam pe lagaya bhi par kuchh natija nahi nikla.vo tarikh bhi aake chali gayi jo ishtehar me likhi thi par us din bhi dayal ke aadmi ko vaha koi nahi dikha.

is sab se pehle kuchh & hua jis se charo taraf sansani phail gayi.

jis roz deven & vijayant devalay se nikle uske thik 4 din baad Manpur project ka tender khula & jaisi ki umeed thi vo Trust Group ko hi mila.sameer is baat ka jashn manane ke liye shehar ke bahar bane Mehra parivar ke farmhouse ke liye ravana ho gaya.Kamini vaha pehle se hi pahunch chuki thi.

devalay se bahar nikalte highway pe 5 km ke safar ke baad 1 rasta bayi taraf chala jata hai jiske dono taraf khali jhad-jhankhad se bhari zamin hai.is raste pe koi 2km chalne ke baad bade hi aalishan & khubsurat farmhouses dikhne lagte hain.inhi me se 1 farmhouse mehra parivar ka tha.sameer khushi me duba seeti bajata us sadak pe badha ja raha tha ki peechhe se 1 truck ne horn bajaya.usne use aage jane dene ke liye car thodi kinare ki.vo truck bagal se aage jane laga par jab us truck ka pichhla hissa sameer ki driving seat ke barabar aaya to truck driver ne achanak truck ko bayi taraf moda.truck ka pichhla hissa sameer ki car se takraya jo apna balance khoti sadak ke kinare ki kachchi zamin pe chali gayi & 1 ped se takrayi.

sham 5 bajte-2 kamya bahut ghabra gayi.sameer na to apna fone utha raha tha na hi vo daftar me tha.2 baje milne ki baat tay hui thi & ab 3 ghante beet chuke the.uski samajh me nahi aa raha tha ki kya kare.usne 5 baje fir sameer ke daftar fone kiya & sonam ko sari baat batayi.sonam ne sabse pehle ye khabar pranav ko di & uske baad apne mobile se apni saheli ko.

pranav ne bhi sameer ko dhundna shuru kiya par jab use bhi sameer kahi nahi mila to usne police commissioner ke daftar phone karne ki sochi par vo fone milata us se pehle hi ghabrayi & baukhlayi sonam uske cabin me ghusi,"sir.."

"kya hua sonam?"

"sir,police aayi hai."

"haan to.",pranav khada hua.

"sameer sir ki car mili hai."

"kya?!..kaha?!",pranav tezi se uski taraf badha..shah ne use to kuchh nahi bataya tha fir kya usne use bina bataye sab kar diya?

"unki lash mili hai,sir."

"kya bakti ho?!",pranav ki aankhe hairat se phat gayi.tabhi 1 police vala uske cabin ke khule darwaze se andar ghusa.

"ye sahi keh rahi hai,mr.pranav.hume sameer ji ki car mili hai.uska accident hua lagta hai par sath hi 1 lash bhi mili hai us car me jiska chehra buri tarah zakhmi hai.main isiliye yaha aaya hu taki aap ya fir koi aisa shakhs jo unhe karib se janta ho,vo chal ke us lash ki shinakht kar le."

"Mr.Sameer Mehra ki vasiyat me kahi bhi ye zikr nahi hai ki Trust Group ke unke shares ka kya kiya jaye.is surate haal me ye shares unki biwi Rambha Mehra ko jane chahiye..",sameer ki maut ke 10 din baad mehra parivar ke bungle ke hall me vakil sameer ki vasiyat padhne ke baad bol raha tha jise sare parivar vale sun rahe the,"..par agar aap me se kisi ko bhi is baat se aitraz ho to aap adalat ka darwaza khatkhata sakte hain.",vakil ne sabhi ki or dekha.

teeno auraten safed sari me baithi thi.rambha sar jhukaye thi & aise baithe thi jaise use kisi baat se koi matlab nahi par haqeeqat ye thi ki vo sab kuchh bade dhyan se sun-dekh rahi thi.

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kramashah.......