पिंकी की ब्लू फिल्म compleet

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raj..
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पिंकी की ब्लू फिल्म compleet

Unread post by raj.. » 14 Dec 2014 04:49

पिंकी की ब्लू फिल्म

मेरा नाम पिंकी है. में सौथेर्न देल्ही में अपने मम्मी पापा के साथ रहती हूँ. मेरी उम्र 19 साल है, गोरा बदन, काले लंबे बाल, 5"4 की हाइट और मेरी आँखों का रंग भूरा है. एक दिन में अपनी सहेलियों के साथ शूपिंग कर घर पहुँची. अपने कमरे में पहुँच मेने अपनी मेज़ की दाराज़ खोली तो पाया कि मेरी ब्लू रंग की पॅंटी वहाँ रखी हुई थी. मेने कभी अपनी पॅंटी वहाँ रखी हो ये मुझे याद नही आ रहा था. इतने में में कदमों की आवाज़ मेरे कमरे की और बढ़ते सुनी, मेरी समझ में नही आया की में क्या करूँ. में दौड़ कर अलमारी जा छुपी. देखती हूँ कि मेरा छोटा भाई अरुण जो 18 साल का है अपने दोस्त जे के साथ मेरे कमरे में दाखिल हुआ. "पिंकी " अरुण ने आवाज़ लगाई. में चुप चुप चाप अलमारी छुपी उनको देख रही थी. "अच्छा है वो घर पर नही है. जे में पहली और आखरी बार ये सब तुम्हारे लिए कर रहा हूँ. अगर उसे पता चल गया तो वो मुझे जान से मार डालेगी" अरुण ने कहा. "शुक्रिया दोस्त, तुम्हे तो पता है तुम्हारी बेहन कितनी सुन्‍दर और सेक्सी है." जे ने कहा. अरुण मेरा ड्रॉयर खोला और वो ब्लू पॅंटी निकाल कर जे को पकड़ा दी. जे ने वो पॅंटी हाथ में लेकर उसे सूंघने लगा, "अरुण तुम्हारी बेहन की चूत की खुश्बू अभी भी इसमे से आ रही है." अरुण ज़मीन पर नज़रें गड़ाए खामोश खड़ा था. "यार ये धूलि हुई है अगर ना धूलि होती तो चूत के पानी की भी खुश्बू आ रही होती." जे ने पॅंटी को चूमते हुए कहा. "तुम पागल हो गये हो." अरुण हंसते हुए बोला. "कम ऑन अरुण, माना वो तुम्हारी बेहन है लेकिन तुम इस बात से इनकार नही कर सकते कि वो बहोत ही सेक्सी है." जे ने कहा. "में मानता हूँ वो बहोत ही सुन्दर और सेक्सी है, लेकिन मेने ये सब बातें अपने दिमाग़ से निकाल दी है. " अरुण ने जवाब दिया. "अगर वो मेरी बेहन होती तो…….." जे कहने लगा, "क्या तुम उसके नंगे बदन की कल्पना करते हुए मूठ नही मारते हो?" अरुण कुछ बोला नही और खामोश खड़ा रहा. "शरमाओ मत यार, अगर में तुम्हारी जगह होता तो यही करता." जे ने कहा. "क्या तुम्हारी बेहन कोई बिना धूलि हुई पॅंटी यहाँ नही है" "ज़रूर यही कही होगी, में ढूनडता हूँ तब तक खिड़की पर निगाह रखो अगर पिंकी आती दिखे तो बताना." अरुण कमरे में मेरी पॅंटी ढूँडने लगा. अरुण और जे ये नही पता थी कि में घर आ चुकी थी और अलमारी में छिप कर उनकी हरकत देख रही थी. "वो रही मिल गयी." अरुण ने गंदे कपड़े के ढेरसे मेरी मेरी लाल पॅंटी की और इशारा करते हुए कहा. जे ने कपड़ों के ढेर में से मेरी लाल पॅंटी उठाई जो मेने दो दिन पहले पहनी थी. पहले वो कुछ देर उसे देखता रहा. फिर मेरी पॅंटी पे लगे धब्बे को अपनी नाक के पास ले जा सूंघने लगा, "एम्म्म क्या सेक्सी सुगंध है अरुण." कहकर वो पॅंटी को अपने गालों पे रगड़ने लगा. "मुझे अब भी उसकी चूत और गांद की महेक आ रही इसमे से." जे बोला. "तुम सही में पागल हो गये हो." अरुण बोला. "क्या तुम सूंघना छोड़ोगे?" जे ने पूछा. "किसी हालत में नही." अरुण शरमाते हुए बोला. "में जानता हूँ तुम इसे सूंघना चाहते हो. पर मुझसे कहते शर्मा रहे हो." जे बोला, "चलो यार इसमे शरमाना कैसा आख़िर हम दोस्त है." अरुण कुछ देर तक कुछ सोचता रहा, "तुम वादा करते हो कि इसके बारे में किसी से कुछ नही कहोगे." "पक्का वादा करता हूँ," जे ने कहा, "आओ अब और शरमाओ मत, सूँघो इसे कितनी मादक खुश्बू है." अरुण जे के नज़दीक पहुँचा और उसे हाथ से मेरी पॅंटी ले ली. थोड़ी देर उसे निहारने के बाद वो उसे अपनी नाक पे ले ज़ोर से सूंघने लगा जैसे कोई पर्फ्यूम की महेक निकल रही हो. मुझे ये देख के विश्वास नही हो रहा था कि मेरा भाई मेरी ही पॅंटी को इस तरह सूँघेगा. "सही में जे बहोत ही सेक्सी स्मेल है, मानना पड़ेगा." अरुण सिसकते हुए बोला, "मेरा लंड तो इसे सूंघते ही खड़ा हो गया है." "मेरा भी." जे अपने लंड को सहलाते हुए बोला, "क्या तुम अपना पानी इस पॅंटी में छोड़ना चाहोगे?" "क्या तुम सीरीयस हो?" अरुण ने पूछा. "हां" जे ने जवाब दिया. "मगर मुझे किसी के सामने मूठ मारना अछा नही लगता." अरुण ने कहा. "अरे यार में कोई पराया थोड़े ही हूँ. हम दोस्त है और दोस्ती में शरम कैसी." जे बोला. "ठीक है अगर तुम कहते हो तो!" जे ने अपनी पॅंट के बटन खोले और उसे नीचे कर ली. पॅंट नीचे ख़ासकते ही उसका खड़ा लॉडा उछल कर बाहर निकल पड़ा.

उसने एक पॅंटी को अपने लंड के चारों तरफ लपेट लिया और दूसरी को अपनी नाक पे लगा ली. फिर अरुण ने भी अपनी पॅंट उत्तर जे की तरह ही करने लगा. दोनो लड़के उत्तेजना में भरे हुए थे और अपने लंड को हिला रहे थे. दोनो को इस हालत में देखते हुए मेरी भी हालत खराब हो रही थी. मेने अपना हाथ अपनी पॅंट के अंदर डाल अपनी चूत पे रखा तो पाया की मेरी चूत गीली हो गयी थी और उससे पानी चू रहा था. अलमारी में खड़े हुए मुझे काफ़ी दिक्कत हो रही थी पर साथ ही अपने भाई और उसके दोस्त को मेरी पॅंटी में मूठ मारते में पूरी गरमा गयी थी. "मेरा आब छूटने वाला है." मेरे भाई ने कहा. मेने साफ देखा की मेरे भाई का शरीर थोडा आकड़ा और उसके लंड से सफेद वीर्या की पिचकारी निकल मेरी पॅंटी में गिर रही थी. वो तब तक अपना लंड हिलाता रहा जब तक कि उसका सारी पानी नही निकल गया. फिर उसने अपने लंड को अच्छी तरह मेरी पॅंटी से पोंचा और अपने हाथ भी पौच् लिए. थोड़ी देर में जे ने भी वैसा ही किया. "इससे पहले कि तुम्हारी बेहन आ जाए और हमे ये करता हुआ पकड़ ले, मुझे यहाँ से जाना चाहिए." जे अपनी पॅंट पहनते हुए बोला. दोनो लड़के मेरे कमरे से चले गये. में भी खिड़की से कूद कर घूमते हुए घर के मैं दरवाजे अंदर दाखिल हुई तो देखा अरुण डाइनिंग टेबल पे बैठा सॅंडविच खा रहा था. "हाई पिंकी." अरुण बोला. "हाई अरुण कैसे हो?" मेने जवाब दिया. "आज तुम्हे आने में काफ़ी लेट हो गयी?" "हां फ्रेंड्स लोग के साथ शॉपिंग में थोड़ी देर हो गयी." मेने जवाब दिया. में किचन मे गयी और अपने लिए कुछ खाने को निकालने लगी. मुझे पता था कि मेरा भाई मेरी ओर कितना आकर्षित है. जैसे ही मे थोडा झुकी मेने देखा की वो मेरी झँकति पॅंटी को ही देख रहा था. दूसरे दिन में सो कर लेट उठी. मुझे काम पर जाना नही था. अरुण कॉलेज जा चुक्का था और मम्मी पापा काम पे जा चुके थे. में अपनी बिस्तर पे पड़ी थी. अब भी मेरी आँखों के सामने कल दृश्या घूम रहा था. मेने अपने कपड़ों के ढेर की तरफ देखा और कल जो हुआ उसके बारे में सोचने लगी. किस तरह मेरे भाई और उसके दोस्त ने मेरी पॅंटी में अपना वीर्या छोड़ा था. पता नही ये सब सोचते हुए मेरा हाथ कब मेरी चूत पे चला गया और मैं अपनी उंगली से अपनी चूत की चुदाई करने लगी. में इतनी उत्तेजना में थी कि खुद ही ज़ोर से अपनी चूत को चोद रही थी, थोड़ी ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया. में बिस्तर से खड़ी हो अपने पूरे कपड़े उतार दिए. अब में आईने के सामने नंगी खड़ी हो अपने बदन को निहार रही थी. मेरा पतला जिस्म, गुलाबी चूत सही में सुन्‍दर दिख रही थी. में घूम कर अपने चुतताड पर हाथ फिराने लगी. मेरे भाई और उसके दोस्त ने सही कहा था में सही में सेक्सी दिख रही थी. मेने अपने कपड़ो के पास पहुँची और अपनी लाल पॅंटी को उठा लिया. जे के विर्य के धब्बे उसपे साफ दिखाई दे रहे थे. में पॅंटी को अपने नाक पे लोग ज़ोर से सूंघने लगी. जे के वीर्या की महक मुझे गरमा रही थी. में अपनी जीब निकाल उसधब्बे को चाटने लगी. मेरी चूत में जोरों की खुजली हो रही थी, ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत से अँगारे निकल रहे हो. अरुण ने जो पॅंटी में अपना वीर्या छोड़ा था उसे भी उठा सूंघने और चाटने लगी. मेने सोच लिया था कि जिस तरह अरुण ने मेरे कमरे की तलाशी ली थी उसी तरह में भी उसके कमरे में जा कर देखोंगी. बहुत सालों के बाद में उसके कमरे में जा रही थी. मैने उसके बिस्तर के नीचे झाँक कर देखा तो पाया बहोत सी गंदी मॅगज़ीन्स पड़ी थी. फिर उसके कपड़ों को टटोलने लगी, उसके कपड़ों में मुझे उसकी शॉर्ट्स मिल गयी. मेरी पॅंटी की तरह उसपर भी धब्बो की निशान थे. में उसकी शॉर्ट्स को अपनी नाक पे ले जा सूंघने लगे. उसके वीर्या की खुश्बू आ रही थी. शायद ऐसी हरकत मेने अपनी जिंदगी में नही की थी. उसकी शॉर्ट्स को ज़ोर से सूंघते हुए में अपनी चूत में उंगली कर रही थी. उत्तेजना में मेरी साँसे उखड़ रही थी. थोड़ी देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.

raj..
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Re: पिंकी की ब्लू फिल्म

Unread post by raj.. » 14 Dec 2014 04:50

मेने तय कर लिया था कि आज शाम को जब अरुण कॉलेज से वापस आएगा तो में घर पर ना होने का बहाना कर छुप कर फिर उसे देखोंगी. और मुझे उमीद थी कि वो कल की तरह मुझे घर पर ना पाकर फिर मेरी पॅंटी में मूठ मरेगा. जब अरुण का आने का समय हो गया तो मेने अपनी दिन भर पहनी हुई पॅंटी कपड़ों के ढेर पे फैंक दी और कमरे से बाहर जा कर खिड़की के पीछे चुप गयी. मेने अरुण के लिए एक नोट लिख कर छोड़ दिया था की में रात को देर से घर आवँगी. अरुण जैसे ही घर आया तो उसने घर पर किसी को ना पाया. वो सीधे मेरे कमरे पहुँचा और मेरी छोड़ी हुई पॅंटी उठा कर सूंघने लगा. उसने अपनी पॅंट खोली और अपने खड़े लंड के चोरों और मेरी पॅंटी को लगा मूठ मारने लगा. दूसरे हाथ से उसने दूसरी पॅंटी उठा सूंघ रहा था. में पागलों की तरह अपने भाई को मूठ मारते देख रही थी. मेने सोच लिया था कि में चुप चाप कमरे में जाकर अरुण को ये करते हुए रंगे हाथों पकड़ लूँगी. में चुपके से खिड़की से हटी और दबे पाँव चलते हुए अपने कमरे के पास पहुँची. कमरे का दरवाज़ा तोड़ा खुला था. में धीरे से कमरे में दाखिल हो उसे देखने लगी. उसकी आँखें बंद थी और वो मेरी पॅंटी को अपने लंड पे लापते ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था. "अरुण ये क्या हो रहा है?" में ज़ोर से पूछा. उसने मेरी ओर देखा, "ओह मर गये." कहकर वो बिस्तर से उछाल कर खड़ा हो गया. जल्दी से अपनी पॅंट उपर कर बंद की और मेरी पॅंटी को मेरे कपड़ों को ढेर पे रख दी. उसकी आँखों में डर और शरम के भाव थे. हम दोनो एक दूसरे को घुरे जा रहे थे. "आइ आम सॉरी, में इस तरह कमरे में नही आना चाहती थी, पर मुझे मालूम नही था कि तुम मेरे कमरे में होगे." मेने कहा. अरुण मुँह खोल कुछ कहना चाहता था, पर शायद डर के मारे उसके ज़ुबान से एक शब्द भी नही निकला. "तुम ठीक तो हो ना?" मेने पूछा. "मुझे माफ़ कर दो." वो इतना ही कह सका. मुझे उसपर दया आ रही थी, में उसे इस तरह शर्मिंदा नही करना चाहती थी. "कोई बात नही, अब यहाँ से जाओ और मुझे नाहकार कपड़े बदलने दो." मेने शांत स्वरमे कहा जैसे कि कुछ हुआ ही नही है. उसने अपनी गर्दन हिलाई और चुपचाप वहाँ से चला गया. रात तक वो अपने कमरे में ही बंद रहा. जब मम्मी कम पर से वापस आ खाना बनाया तो हम सब खाना खाने डिन्निंग टेबल पर बैठे थे. अरुण लेकिन शांत ही बैठा था. "बेटा अरुण क्या बात है आज इतने खामोश क्यों बैठे हो?" मम्मी ने पूछा. "कुछ नही मा बस थक गया हूँ," उसने मेरी और देखते हुए जवाब दिया. में उसे देख कर मुस्कुरा दी और वो भी मुस्कुरा दिया. खाने खाने के बात रात में मेने उसके कमरे पर दस्तक दी, उसने दरवाज़ा खोला. "हाई" मेने कहा. "हाई" "क्या बात है आज बात नही कर रहे, तुम ठीक तो हो?" मेने पूछा. "ऐसे तो ठीक हूँ, बस आज जो हुआ उसकी शर्मिंदगी हो रही है." उसने जवाब दिया. "शर्मिंदा होने की ज़रूरत नही है, ये सब होते रहता है, पर ये काब्से चल रहा है मुझे सच सच बताओ?" मेने कहा. "वो ऐसा है ना मेरा दोस्त जे, तुम तो उसे जानती ही हो. वो तुमसे प्यार करता है. उसने मुझे 100 रुपए दिया अगर में उसे तुम्हारे में कमरे में लाकर तुम्हारी पॅंटी दिखा दू." "तो क्या तुम उसे लेकर आए?" मेने पूछा. "मुझे कहते हुए शर्म आ रही है, पर में उसे लेकर आया था और उसने तुम्हारी पॅंटी को सूँघा था. उसने मुझे भी सूंघने को कहा और में अपने आपको रोक ना पाया. तुम्हारी पॅंटी को सूंघते हुए में इतना गरमा गया कि में आज आपने आपको वापस ये करने से रोक ना पाया." "वैसे तो बहोत गंदी हरकत थी तुम दोनो की, फिर भी मुझे अच्छा लगा." मेने हंसते हुए कहा, "तुम्हारा जब जी चाहे तुम ये कर सकते हो." "सही में! क्या में अभी कर सकता हूँ? मम्मी पापा सो रहे है." उसने पूछा. "एक ही शर्त पर जब में देख सकती हूँ तभी." मेने कहा. हम लोग बिना शोर मचाए मेरे कमरे में पहुँचे.

मेने टीवी ऑन कर दिया और कमरा बंद कर लिया जिससे सब यही समझे कि हम टीवी देख रहे है. अरुण मेरे कपड़ों के पास पहुँच मेरी पॅंटी को ले सुंगने लगा. "मुज़ेः देखने दो." हंसते हुए मेने उसेके हाथ से अपनी पॅंटी खींची और ज़ोर सूँघी, "एम्म्म अहसी स्मेल है." हम दोनो धीमे से हँसे और बेड पर बैठ गये. "तो तुम दिन में कितनी बार मूठ मारते हो?" मेने पूछा. "दिन में कमसे कम 3 बार." उसने जवाब दिया. "क्या तुम ये जे को बताओगे कि आज मेने तुम्हे ये करते हुए पकड़ लिया?" मेने फिर पूछा. "अभी तक इसके बारे मैने सोचा नही है." "मेने जे को कई बार तुम्हारे साथ देखा है. दिखने में स्मार्ट लड़का है." मेने कहा. "वो तुम्हे पाने के लिए तड़प रहा है." उसने कहा. "तुम्हे क्या लगता है मुझे उसके साथ सोना चाहिए?" मेने पूछा. "हां इससे उसका सपना पूरा हो जाएगा." उसने कहा. हम दोनो कुछ देर तक यूँ ही खामोश बैठे रहे, फिर मैं उसकी आँखों मे झँकते हुए मुस्कुरा दी. "अरुण अगर तुम मुझे अपना लंड दिखाओ तो में तुम्हे अपनी चूत दिखा सकती हूँ." मेने कहा. अरुण ने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए हां कर दी. हम दोनो कुछ देर चुप चाप ऐसे ही बैठे रहे आख़िर उसने पूछा "पहले कौन दिखाएगा?" "मुझे नही पता." मेने शरमाते हुए कहा. "तुम मेरा लंड दिन में देख चुकी है इसलिए पहले तुम्हे अपनी चूत दिखानी होगी." वो बोला. "ठीक है पहले मैं दिखाती हूँ, लेकिन तुम्हे दुबारा से अपना लंड दिखना होगा, पहली बार में आछे से देख नही पाई थी." मेने कहा. उसने गर्दन हिला हां कर दी. में बिस्तर से उठ उसके सामने जाकर खड़ी हो गयी. मेने अपनी जीन्स के बटन खोल कर उसे नीचसे खिसका दी और अपनी काली पॅंटी भी नीचे कर दी. अब मेरी गुलाबी चूत ठीक उसके चेहरे के सामने थी. अरुण 10 मिनिट तक मेरी चूत को घूरते रहा. मेने अपनी जीन्स उपर खींच बटन बंद कर बिस्तर पर बैठ गयी, "अब तुम्हारी बारी है." अरुण बिस्तर से खड़ा हो अपनी जीन्स और शॉर्ट्स नीचे खिसका दी. उसका 7 इंची लंड उछाल कर बाहर आ गया.

क्रमशः........................

raj..
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Re: पिंकी की ब्लू फिल्म

Unread post by raj.. » 14 Dec 2014 04:50

Pinky Ki Blue Film!!!" paart--1

Mera naam Pinky hai. Mein southern Delhi mein apne mummy papa ke sath rehti hun. Meri umra 19 saal hai, Gora badan, kaale lambe baal, 5"4 ki height aur meri aankhon ka rang bhura hai. Ek din mein apni saheliyon ke sath shooping kar ghar pahunchi. Apne kamre mein pahunch meine apni mez ki daaraz kholi to paaya ki meri blue rang ki panty wahan rakhi hui thi. Meine kabhi apny pany wahan rakhi ho ye mujhe yaad nahi aa raha tha. Itne mein mein kadmon ki awaz mere kamre ki aur badhte suni, meri samajh mein nahi aaya ki mein kya karun. Mein doud kar almari jaa chupi. Dekhti hun ki mera chota bhai Arun jo 18 saal ka hai apne dost Jay ke sath mere kamre mein dakhil hua. "Pinky " Arun ne awaz lagayi. Mein chup chup chap almari chupi unko dekh rahi thi. "Accha hai wo ghar par nahi hai. Jay mein pehli aur aakhri baar ye sab tumhare liye kar raha hun. Agar use pata chal gaya to wo mujhe jaan se mar dalegi" Arun ne kaha. "Shkriya dost, tumhe to pata hai tumhari behan kitni sunder aur sexy hai." Jay ne kaha. Arun mera drawer khola aur wo blue panty nikal kar Jay ko pakda di. Jay ne wo panty hath mein lekar use sunghne laga, "Arun tumhari behan ki choot ki khushboo abhi bhi isme se aa rahi hai." Arun jameen par nazren gadaye khamosh khada tha. "Yaar ye dhuli hui hai agar na dhuli hoti to choot ke pani ki bhi khushboo aa rahi hoti." Jay ne panty ko chumte hue kaha. "Tum pagal ho gaye ho." Arun hanste hue bola. "Come on Arun, mana wo tumhari behan hai lekin tum is baat se inkaar nahi kar sakte ki wo bahot hi sexy hai." Jay ne kaha. "Mein manta hun wo bahot hi sunder aur sexy hai, lekin meine ye sab baatein apne dimag se nikal di hai. " Arun ne jawab diya. "Agar wo meri behan hot to…….." Jay kehne laga, "Kya tum uske nange badan ki kalpana karte hue muth nahi marte ho?" Arun kuch bola nahi aur khamosh khada raha. "Sharmao mat yaar, agar mein tumhari jagah hota to yahi karta." Jay ne kaha. "kya tumhari behan koi bina dhuli hui panty yahan nahi hai" "Jaroor yahi kahi hogi, mein dhundta hun tab tak khidki par nigah rakho agar Pinky aati dikhe to batana." Arun kamre mein meri panty dhundne laga. Arun aur Jay ye nahi pata thi ki mein ghar aa chuki thi aur almari mein chip kar unki harkat dekh rahi thi. "Wo rahi mil gayi." Arun ne gande kapde ke dher mien meri lal panty ki aur ishara karte hue kaha. Jay ne kapdon ke dher mein se meri lal panty uthai jo meine do din pehle pehni thi. Pehle wo kuch der use dekhta raha. Phir meri panty pe lage dhabbe ko apni naak ke pas le ja sunghne laga, "MMMM KYA SEXY SUGANDH HAI ARUN." Kehkar wo panty ko apne gaalon pe ragadne laga. "Mujhe ab bhi uski choot aur gaand ki mehek aa rahi isme se." Jay bola. "Tum sahi mein pagal ho gaye ho." Arun bola. "Kyat um sunghna chohoge?" Jay ne pucha. "Kisi halat mein nahi." Arun sharmate hue bola. "Mein janta hun tum ise sunghna chahte ho. Par mujhse kehte sharma rahe ho." Jay bola, "Chalo yaar isme sharmana kaisa aakhir hum dost hai." Arun kuch der tak kuch sochta raha, "Tum wada karte ho ki iske bare mein kisi se kuch nahi kahoge." "Pakka wada karta hun," Jay ne kaha, "Aao ab aur sharmao mat, sungho ise kitni madak khushboo hai." Arun Jay ke najdeek pahuncha aur use haath se meri panty le li. Thodi der use niharne ke baad wo use apni naak pe le jor se sunghne laga jaise koi perfume ki mehek nikal rahi ho. Mujhe ye dekh ke wishwas nahi ho raha tha ki mera bhai meri hi panty ko is tarah sunghega. "Sahi mein Jay bahot hi sexy smell hai, manna padega." Arun siskate hue bola, "Mera Lund to ise sunghte hi khada ho gaya hai." "Mera bhi." Jay apne Lund ko sehlate hue bola, "kya tum apna pani is panty mein chodna chahoge?" "Kyat um serious ho?" Arun ne pucha. "Haan" Jay ne jawab diya. "Magar mujhe kisi ke samne muth marna acha nahi lagta." Arun ne kaha. "Are yaar mein koi paraya thode hi hun. Hum dost hai aur dosti mein sharam kaisi." Jay bola. "Thik hai agar tum kehte ho to!" Jay ne apni pant ke button khole aur use niche khaska di. Pant niche khasakte hi uska khada lauda uchal kar bahar nikal pada.

Usne ek panty ko apne Lund ke charon taraf lapet liya aur dusri ko apni naak pe laga li. Phir Arun ne bhi apni pant uttar Jay ki tarah hi karne laga. Dono ladke uttejna mein bhare hue the aur apne Lund ko hila rahe the. Dono ko is halat mein dekhte hue meri bhi halat kharab ho rahi thi. Meine apna badha apni pant ke andar dal apni choot pe rakha to paya ki meri choot gili ho gayi thi aur usse pani choo raha tha. Almari mein khade hue mujhe kafi dikkat ho rahi thi par sath hi apne bhai aur uske dost ko meri panty mein muth marte mein puri garma gayi thi. "Mera aab chootne wala hai." Mere bhai ne kaha. Meine saf dekha ki mere bhai ka sharir thoda akda aur uske Lund se safed virya ki pickari nikal meri panty mein gir rahi thi. Wo tab tak apna Lund hilata raha jab tak ki uska sari pani nahi nikal gaya. Phir usne apne Lund ko achi tarah meri panty se poncha aur apne hath bhi pauch liye. Thodi der mein Jay ne bhi waisa hi kiya. "Isse pehle ki tumhari behan aa jaye aur hame ye karta hua pakad le, mujhe yahan se jana chahiye." Jay apni pant pehnte hue bola. Dono ladke mere kamre se chale gaye. Mein bhi khidki se kud kar ghumte hue ghar ke main darwaje andar dakhil hui to dekha Arun dining table pe baitha sandwitch kha raha tha. "Hi Pinky." Arun bola. "Hi Arun kaise ho?" meine jawab diya. "Aaj tumhe aane mein kafi late ho gayi?" "Haan friends log ke sath shopping mein thodi der ho gayi." Meine jawab diya. Mein kitchen mien gayi aur apne liye kuch khane ko nikalne lagi. Mujhe pata tha ki mera bhai meri aur kitna aakarshit hai. Jaise hi mieh thoda jhuki meine dekha ki wo meri jhankti panty ko hi dekh raha tha. Dusre din mein so kar late uth. Mujhe kaam par jaana nahi tha. Arun college ja chukka tha aur mummy papa kam pe ja chuke the. Mein apni khole bistar pe padi thi. Ab bhi meri aankhon ke samne kal drishya ghum raha tha. Meine apne kapdon ke dher ki taraf dekha aur kal jo hua uske bare mein sochne lagi. Kis tarah mere bhai aur uske dost ne meri panty mein apna virya choda tha. Pata nahi ye sab sochte hue mera hath kab meri choot pe chala gaya aur mien apni ungli se apni choot ki chudai karne lagi. Mein itni uttejna mein thi ki khud hi jor se apni choot ko chod rahi thi, Thodi hi der mein meri choot ne pani chod diya. Mein bistar se khadi ho apne pure kapde uttar diye. Ab mein aine ke samne nangi khadi ho apne badan ko nihar rahi thi. Mera patla jism, gulabi choot sahi mein sunder dikh rahi thi. Meine ghum kar apne chuttad par hath phirane lagi. Mere bhai aur uske dost ne sahi kaha tha mein sahi mein sexy dikh rahi thi. Meine apne kapdo ke paas pahunchi aur apni lal panty ko utha liya. Jay ke virya ke dhabbe uspe saf dikhayi de rahe the. Mein panty ko apne nak pe log jor se sunghne lagi. Jay ke virya ki mehak mujhe garma rahi thi. Mein apni jib nikal us bhabbe ko chatne lagi. Meri choot mein joron ki khujli ho rahi thi, aisa lag raha tha ki meri choot se angare nikal rahe ho. Arun ne jo panty mein apna virya choda tha use bhi utha sunghne aur chatne lagi. Meine soch liya tha ki jis tarah Arun ne mere kamre ki talashi li thi usi tarah mein bhi uske kamre mein jaa kar dekhongi. Bahot saalon ke baad mein uske kamre mein jaa rahi thi. Meien uske bistar ke niche jhank kar dekha to paya bahot si gandi magazines padi thi. Phir uske kapdon ko tatolne lagi, Uske kapdon mein mujhe uski shorts mil gayi. Meri panty ki tarah uspar bhi dhabbo ki nishan the. Mein uski shorts ko apni naak pe le ja sunghne lage. Uske virya ki khushboo aa rahi thi. Shayad aisi harkat meine apni jindagi mein nahi ki thi. Uski shorts ko jor se sunghte hue mein apni choot mein ungli kar rahi thi. Uttejna mein meri sanse ukhad rahi thi. Thodi der mein meri choot ne pani chod diya.

Meine tay kar liya tha ki aaj shaam ko jab Arun college se wapas aayega to mein ghar par na hone ka bahana kar chup kar phir use dekhongi. Aur mujhe umeed thi ki wo kal ki tarah mujhe ghar par na paakar phir meri panty mein muth marega. Jab Arun ka aane ka samay ho gaya to meine apni din bhar pehni hui panty kapdon ke dher pe faink di aur kamre se bahar ja kar khidki ke piche chup gayi. Meine Arun ke liye ek note likh kar chod diya tha ki mein raat ko der se ghar aaoungi. Arun jaise hi ghar aaya to usne ghar par kisi ko na paya. Wo sidhe mere kamre pahuncha aur meri chodi hui panty utha kar sunghne laga. Usne apni pant kholi aur apne khade Lund ke choron aur meri panty ko laga muth marne laga. Dusre hath se usne dusri panty utha sung raha tha. Mein paglon ki tarah apne bhai ko muth marte dekh rahi thi. Meine soch liya tha ki mein chup chap kamre mein jaakar Arun ko ye karte hue range hathon pakad loongi. Mein chupke se khidki se hati aur dabe paun chalte hue apne kamre ke pas pahunchi. Kamre ka darwaza thoda khula tha. Mein dhire se kamre mein dakhil ho use dekhne lagi. Uski aankhen band thi aur wo meri panty ko apne Lund pe lapate jor jor se hila raha tha. "Arun ye kya ho raha hai?" mein jor se pucha. Usne meri aur dekha, "Oh mar gaye." Kehkar wo bistar se uchal kar khada ho gaya. Jaldi se apni pant upar kar band ki aur meri panty ko mere kapdon ko dher pe rakh di. Uski aankhon mein dar aur sharam ke bahv the. Hum dono ek dusre ko ghure jaa rahe the. "I am sorry, mein is tarah kamre mein nahi aana chahti thi, par mujhe malum nahi tha ki tum mere kamre mein hoge." Meine kaha. Arun munh khol kuch kehna chahta tha, par shayad dar ke mare uske juban se ek shabd bhi nahi nikla. "Tum thik to ho na?" meine pucha. "Mujhe maaf kar do." Wo itna hi kah saka. Mujhe uspar daya aa rahi thi, mein use is tarah sharminda nahi karna chahti thi. "Koi baat nahi, ab yahan se jao aur mujhe nahakar kapde badalne do." Meine shant bahre swar kaha jaise ki kuch hua hi nahi hai. Usne apni gardan hilai aur chupchap wahan se chala gaya. Raat tak wo apne kamre mein hi band raha. Jab mummy kam par se wapas aa khana banaya to hum sab khana khane dinning table par baithe the. Arun lekin shant hi baitha tha. "Beta Arun kya baat hai aaj itne khamosh kyon baithe ho?" mummy ne pucha. "Kuch nahi Maa bas thak gaya hun," usne meri aur dekhte hue jawab diya. Mein use dekh kar muskura di aur wo bhi muskura diya. Khane khane ke baat raat mein meine uske kamre par dastak di, usne darwaza khola. "Hi" meine kaha. "Hi" "Kya baat hai aaj bat nahi kar rahe, tum thik to ho?" meine pucha. "Aise to thik hun, bas aaj jo hua uski sharmindgi ho rahi hai." Usne jawab diya. "Sharminda hone ki jarurat nahi hai, ye sab hote rehta hai, par ye kabse chal raha hai mujhe sach sach batao?" meine kaha. "Wo aisa hai na mera dost Jay, tum to use janti hi ho. Wo tumse pyar karta hai. Usne mujhe 100 rupaiye diya agar mein use tumhare mein kamre mein lakar tumhari panty dikha du." "To kya tum use lekar aaye?" meine pucha. "Mujhe kehte hue sharm aa rahi hai, par mein use lekar aaya tha aur usne tumhari panty ko sungha tha. Usne mujhe bhi sunghne ko kaha aur mein apne aapko rok na paya. Tumhari panty ko sunghte hue mein itna garma gaya ki mein aaj aapne aapko wapas ye karne se rok na paya." "Waise to bahot gandi harkat thi tum dono ki, phir bhi mujhe accha laga." Meine hanste hue kaha, "tumhara jab jee chahe tum ye kar sakte ho." "Sahi mein! Kya mein abhi kar sakta hun? Mummy papa so rahe hai." Usne pucha. "Ek hi shart par jab mein dekh sakti hun tabhi." Meine kaha. Hum log bina shor machaye mere kamre mein pahunche.

Meine TV on kar diya aur kamra band kar liya jisse sab yahi samjhe ki hum TV dekh rahe hai. Arun mere kapdon ke paas pahunch meri panty ko le sungne laga. "Mujeh dekhne do." Hanste hue meine useke hath se apni panty khinchi aur jor sunghi, "mmmm ahci smell hai." Hum dono dhime se hanse aur bed par baith gaye. "To tum din mein kutni bar muth marte ho?" meine pucha. "Din mein kamse kam 3 baar." Usne jawab diya. "Kya tum ye Jay ko bataoge ki aaj meine tumhe ye karte hue pakad liya?" meine phir pucha. "Abhi tak iske bare mien socha nahi hai." "Meine Jay ko kai bar tumhare sath dekha hai. Dikhne mein smart ladka hai." Meine kaha. "Wo tumhe pane ke liye tadap raha hai." Usne kaha. "Tumhe kya lagta hai mujhe uske sath sona chahiye?" meine pucha. "Haan isse uska sapna pura ho jayega." Usne kaha. Hum dono kuch der tak yun hi khamosh baithe rahe, Phir mien uski ankhon mien jhankte hue muskura di. "Jay agar tum mujhe apna Lund dikhao to mein tumhe apni choot dikha sakti hun." Meine kaha. Arun ne meri taraf muskurate hue haan kar di. Hum dono kuch der chup chap aise hi baithe rahe aakhir usne pucha "Pehle kaun dikhayega?" "Mujhe nahi pata." Meine sharmate hue kaha. "Tum mera Lund din mein dekh chuki hai isliye pehle tumhe apni choot dikhani hogi." Wo bola. "Thik hai pehle mien dikhati hun, lekin tumhe dubara se apna Lund dikhana hoga, pehli baar mein ache se dekh nahi payi thi." Meine kaha. Usne gardan hila haan kar di. Mein bistar se uth uske samne jaakar khadi ho gayi. Meine apni jeans ke button khol kar use nichce khiska di aur apni kali panty bhi niche kar di. Ab meri gulabi choot thik uske chehre ke samne thi. Arun 10 minute tak meri choot ko ghoorte raha. Meine apni jeans upar khinch button band kar bistar par baith gayi, "Ab tumhari bari hai." Arun bistar se khada ho apni jeans aur shorts niche khiska di. Uska 7 inchi Lund uchal kar bahar aa gaya.

kramshah..............................