पंडित & शीला compleet

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The Romantic
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Re: पंडित & शीला

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 08:00

पंडित & शीला पार्ट--22

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गतांक से आगे ......................

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गिरधर के अन्दर आने की वजह से अब जो भी बात होनी थी वो बाथरूम में छुपी हुई रितु आसानी से सुन सकती थी ...और पंडित को इसी बात का डर था ..वो नहीं चाहते थे की गिरधर कोई ऐसी बात कह दे जिसकी वजह से रितु को माधवी के बारे में भी पता चल जाए ..अभी तक जो माधवी से चुदाई की बात पंडित से गिरधर ने कही थी वो रितु नहीं सुन पायी थी पर अब जो भी वो कहेगा वो सुन लेगी ...उनके दिमाग ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया ..


गिरधर आगे कुछ बोलने ही वाला था की पंडित ने उससे कहा : "अरे वो बातें तो होती ही रहेंगी ...अभी तुम्हे इस लड़की को देखकर कुछ नहीं हो रहा क्या ..."


गिरधर : "अरे पंडित जी ...आप भी कैसी बातें करते हैं ..इस कमसिन सी लड़की को देखकर तो मुझे सच में रितु की याद आ गयी ...उसी की उम्र की लगती है ..है ना ..."


पंडित ने मुस्कुराते हुए हाँ में सर हिलाया ...


गिरधर का लंड उसकी धोती में खड़ा होकर बाहर निकलने को आतुर था ..


उसने एक नजर पंडित पर डाली और उन्होंने स्वीकृति में सर हिला दिया ..


अगले ही पल गिरधर की धोती जमीन पर थी और उसने अपना कच्छा भी उतार कर नीचे सरका दिया ..


पंडित ने एक नजर बाथरूम की तरफ डाली उन्हें पूरी आशा थी की वहां छिपी हुई रितु छेद में से सार खेल देख रही होगी ...अपने बाप की रंगरेलियां .


और ये सच भी था ..पहले तो रितु को लगा था की पंडित जी उसके पिताजी को किसी भी तरह बाहर से ही टरका देंगे ..पर उन्हें अन्दर आते पाकर और उनकी बातें सुनकर रितु को विशवास हो गया की जिस तरह उसके पिताजी संगीता के बारे में पूछ रहे हैं वो दोनों काफी अच्छी तरह से एक दुसरे को जानते हैं और जब उसके पिताजी ने संगीता के ऊपर से चादर निकाल कर फेंकी तो वो सकते में आ गयी ..और ना चाहते हुए भी उसकी चूत में से पानी की एक बूँद ये सोचते हुए निकल गयी की अगर वो संगीता के बदले में वहां पर होती तो आज अपने बाप के सामने वो नंगी लेटी होती और शायद उसका ठरकी बाप उसे बुरी तरह से चोद डालता जैसे अब वो तैयार हो रहा था संगीता को चोदने के लिए ..


अपनी पिताजी का लंड तो वो पहले महसूस भी कर चुकी थी जब उन्होंने उसे अपनी गोद में बिठाकर उसकी चूचियां मसली थी ..और उसने देखा भी था जब वो उसकी माँ को बुरी तरह से चोद रहे थे ..पर जार बार पिछली बार से ज्यादा क्लेरिटी मिल रही थी ..आज दिन के समय जब उसने अपने पिताजी का उफनता हुआ लंड देखा तो वो बूँद निकल कर बाहर टपक ही गयी ..जिसे वो अपनी उँगलियों में लेकर चूसने की सोच रही थी .


और दूसरी तरफ अपनी बेटी के अन्दर होने से अनभिज्ञ गिरधर पूरा नंगा होकर संगीता को चोदने को तैयार था ..


पर पंडित के मन में कुछ और ही चल रहा था ..उन्होंने कुछ सोचा और धीरे से गिरधर से बोले : "मैं देख रहा हु तुम इस लड़की को कैसी नजरों से देख रहे हो ...रितु की उम्र की लड़की है तो इसे कहीं रितु समझ के चोदने के मूड में तो नहीं हो ना ..."


पंडित ने जैसे उसे कुछ याद दिलाया ..


और अगले ही पल गिरधर ने अपना देहाती लंड मसलते हुए दबी आवाज में रितु का नाम लिया ...''ओह्ह्ह्ह्ह रितु ....उम्म्म्म ...''


अपने बाप को ऐसी हरकत करता देखकर अंदर घोड़ी बनकर सारा खेल देख रही रितु का मुंह खुला का खुला रह गया ..उसे अपने पिताजी से तो ये उम्मीद थी पर पंडित से ऐसी आशा कतई नहीं थी की वो भी उसके पिताजी का साथ देंगे ..


खेर आगे क्या होता है वो ये देखने के लिए और ज्यादा छेद के अन्दर घुस सी गयी ..


गिरधर बिस्तर के कोने पर बैठा और आगे बढकर संगीता की चिकनी टांगो को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया ..वो नींद में सोती हुई कुनमुना उठी ...गिरधर की नजरों में संगीता के मोटे मुम्मे खटक से रहे थे ..वो ऊपर खिसका और उसके एक मुम्मे को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और जोरों से चूसने लगा ...


थोड़ी देर तक चूसने के बाद संगीता के जिस्म में से भी लहरें उठने लगी ...उसकी टाँगे अपने आप एक दुसरे को घिसने लगी ...वो पगली शायद नींद की मदहोशी में अभी तक यही सोच रही थी की पंडित जी दोबारा उसका उद्धार करने आये हैं ..पर वो ये नहीं जानती थी की ये पंडित नहीं उनका दूत है जो उसे एक और लंड का मजा देने के लिए आया है .


संगीता ने गिरधर के सर को पकड़ कर ऊपर खींचा और उसके होंठों को अपने मुंह में लेकर जोर से चूम लिया ...


बस यही गिरधर पकड़ा गया ..क्योंकि पंडित जी का मुंह सफाचट था और गिरधर के चेहरे पर घनी मूंछे थी ..अपने मुंह में गिरधर की मूंछों के बाल आने से वो एकदम से हडबडा कर उठ बैठी और गिरधर को सामने देखते ही वो जोर से चिल्ला पड़ी ...


''कौन ...कौन हो तुम ...''

और इधर उधर नजर घुमा कर जैसे ही उसे पंडित जी दिखाई दिए वो भागकर उनसे लिपट गयी ..नंगी .


और धीरे से पंडित जी के कान में फुसफुसाई ...''पंडित जी ...ये ये कौन है ...और ...और रितु कहाँ है ...''


पंडित ने भी धीरे से उसके कानो में कहा : "रितु अन्दर है ...बाथरूम में ...और ये उसके पिताजी है ..इसलिए वो वहां जाकर छुप गयी है ...तुम्हे मेरा साथ देना होगा वर्ना वो बेचारी पकड़ी जायेगी ...अपने पिताजी के सामने वो अगर ऐसी हालत में आई तो वो उसे स्कूल से निकलवा कर घर बिठा देंगे ...इसलिए मैंने ही गिरधर को तुम्हारे साथ सब कुछ करने की छूट दे दी ..यही तरीका है जिससे तुम अपनी सहेली को बचा सकती हो ..और वैसे भी ..एक नए लंड से चुदने का अनुभव भी तो मिल रहा है ना तुम्हे ...''


पंडित की आखिरी बात सुनकर वो शर्म से झेंप गयी ..वैसे जो भी पंडित ने कहा था उसका कोई मतलब तो नहीं बनता था पर उनकी आखिरी बात उसकी समझ में आ गयी थी ..इसलिए वो धीरे से पंडित से अलग हुई और गिरधर की तरफ मुड़ गयी ..और धीरे-२ उसकी तरफ चल दी ..


पंडित ने उसके कान में क्या कहा ये ना तो रितु को सुनाई दिया और ना ही गिरधर को ...पर संगीता को अपनी तरफ आता हुआ देखकर गिरधर समझ गया की पंडित ने उसे सब समझा दिया है ...वो पंडित जी का ऋणी हो गया ...अपनी बेटी की उम्र की नंगी और मदमस्त लड़की को अपने सामने पाकर और वो भी चुदने को तैयार , वो फूला नहीं समाया ..वो अपनी जगह से उठा और एक ही झटके में संगीता को पकड़कर वापिस बेड पर पटक दिया और जानवरों की तरह उसके मुम्मों और होंठों को अपने मुंह से नोच खसोट कर चूसने लगा ..


संगीता ने ऐसा शायद एक दो ब्लू फिल्मों में देखा था की आदमी ज्यादा उत्तेजित होकर बुरी तरह से लड़की को चूमता और चोदता है ...उसी को याद करते हुए वो भी उत्तेजित हो गयी और गिरधर का साथ देते हुए उसने एक पलटी खाकर उसे नीचे लिटा दिया और जोरदार आवाज करते हुए अपना दांया मुम्मा पकड़कर उसके मुंह में ठूस दिया ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ......उम्म्म्म्म ....चूस इसे ...साले .....चूस ...''


संगीता को ऐसा करता देखकर गिरधर के अन्दर का भी आदमी जाग उठा ..उसने अपनी बलिष्ट बाजुओं का प्रयोग करते हुए संगीता को वापिस नीचे पटका और उसके दोनों हाथों को अपने पंजों से दबा कर उसे चित्त कर दिया ...संगीता किसी पागल बिल्ली की तरह अपनी लम्बी जीभ निकाल कर अपना मुंह ऊपर करके गिरधर के होंठों को चूसने का प्रयत्न कर रही थी ...पर गिरधर उसकी टांगो को अपने पैरों से फेला कर उसे सही आसन में लाने की कोशिश कर रहा था ...और जैसे ही उसे लगा की वो निशाने पर है ..उसने गोली चला दी और उसका लंड रूपी गोला सीधा संगीता की कच्ची चूत को फाड़ता हुआ अन्दर दाखिल हो गया ...


''अय्य्यीईईइ ......मरररर गयी .......अह्ह्ह्ह्ह्ह ...........मार डाला ....''


दरअसल उसकी चूत के चारों तरफ फेले हुए होंठ भी लंड के इस प्रहार के साथ अन्दर चले गए थे ..इसलिए उसे ज्यादा तकलीफ हो रही थी ...उसने किसी तरह से अपने हाथ छुडवाये और हाथ नीचे लेजाकर गिरधर का लंड बाहर निकाला ...और फिर अपने हाथों से अपनी चूत की पंखुड़ियों को फेलाकर उसे वापिस अन्दर आने को कहा ..और जैसे ही उसके लंड का सुपाड़ा अन्दर घुसा संगीता ने गिरधर की गांड पर अपने पंजे जमा कर और अपनी टाँगे उसके चारों तरफ लपेट कर उसे पूरा अन्दर निगल लिया ...


और उसके मुंह से एक एजीब सी हुंकार निकल गयी ..


पूरा लंड अन्दर महसूस करने की हुंकार ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .........उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ .......क्या लंड है आपका .....अंकल .....उम्म्म्म ......''


गिरधर : ''अह्ह्ह्ह ....अंकल नहीं ....पिताजी कहो ...पिताजी ....और तू है मेरी रितु ....समझी ...''


गिरधर ने उसे रोल प्ले करने को कहा ..


और गिरधर की ये बात सुनकर संगीता भी समझ गयी की उसके मन में उसकी सहेली याहि अपनी ही बेटी रितु के लिए क्या भाव है ...पर या सब जानते हुए भी पंडित जी ने उसे ऐसा करने को क्यों कहा ...सीधा ही रितु को बाहर निकलवा कर उसे उसके बाप से चुदवा देते ..


पर इस समय इन बातों को सोचकर कोई फायेदा नहीं था ..उसे तो बस अभी मजा आना शुरू ही हुआ था ..


और इस मजे को वो ज्यादा देर तक लेना चाहती थी ..

उसने नीचे से तेजी से धक्के मारकर गिरधर के झटकों से लय मिलानी शुरू कर दी ...और अपना रोल प्ले करना भी शुरू कर दिया ..


''अह्ह्ह .अह्ह्ह्ह ...ओह्ह्ह्ह ... पिताजी ....अह्ह्ह ....क्या लंड है आपका ....इतना मोटा ...इतना लंबा ...अह्ह्ह .....चोदो ...चोदो अपनी बेटी को ....अह्ह्ह्ह जोर से चोदो अपनी रितु को ...अह्ह्ह्ह्ह ...हाँ ...ऐसे ही ....अह्ह्ह्ह्ह .इताजी ....उम्म्म्म .....चुसो मेरी ब्रेस्ट ....अयीई ..धीरे ....अह्ह्ह्ह ...उम्म्म्म .....हां ....ऐसे ही ....ओह्ह्ह पिताजी ....उम्म्म्म्म्म ....अह्ह्ह्ह ....आई .....एम् ....कमिंग ....''


और अपनी चूत से निकलने वाले बाँध का एलान करते ही उसके अन्दर से एक ज्वालामुखी फुट गया ..और वो निढाल सी होकर बेहोशी की हालत में पहुँच गयी ...इतना जोरदार ओर्गास्म हुआ था उसके अन्दर की उसका होश ही चला गया ...


और उसे बेहोश सा होता देखकर गिरधर ने अपने धक्के और तेज कर दिये ..और जैसे ही उसके लंड का गर्म पानी संगीता की चूत में निकला वो जाग उठी ..उसे लगा उसकी चूत में आग लग गयी है ...इतना ज्यादा और गर्म था गिरधर के लंड का पानी ..वो चिल्ला रहा था ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह ...मेरी बेटी ....मेरी प्यारी रितु ....अह्ह्ह्ह .......ले ...ले अपने पिताजी का रस ....अपनी चूत के अन्दर ले ....अह्ह्ह्ह .....''


और वो भी उसके ऊपर निढाल सा होकर गिर गया ..


पंडित का मिशन सफल हो चुका था ..


रितु को ये सब दिखाकर उसने उसके मन में भी गिरधर के लिए एक चुदाई का रास्ता खोल दिया था ..और उससे भी ज्यादा उसे चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार कर दिया था ...


पंडित ने गिरधर और रितु को धीरे से कहा ..


''सुनो ...अब तुम दोनों जल्दी से जाओ ...भक्तों के आने का समय हो गया है ...''


दोनों समझ गए और जल्दी -२ कपडे पहन कर पहले गिरधर और फिर संगीता भी पीछे के दरवाजे से निकल गए ..


और जाते -२ संगीता ने पंडित से धीरे से कहा ..''पंडित जी ...आल द बेस्ट ..प्लीस धीरे से करना रितु के साथ ...पहली बार है न उसका ..''

वो शायद जानती थी की पंडित अब रितु की बुरी तरह से चुदाई करने वाले हैं ..


पंडित : "मुझे पता है ..तुम्हे तकलीफ हुई क्या ...जो उसे होने दूंगा ...''


और इतना कहकर उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया ...


अब उनके घर में रितु और पंडित के सिवाए कोई नहीं था ..

पंडित ने होले से मुस्कुराते हुए जैसे ही दरवाजा बंद किया ..पीछे से रितु भागकर आई और उनसे लिपट गयी ...पंडित जी की बगलों से हाथ निकाल कर उसने उनके कंधे अपने हाथों से दबोच लिए और अपने ठन्डे और गीले होंठ उनकी कमर से लगा दिये ..


पहले पंडित के हाथों से अपने बदन की मालिश और फिर अपने ही बाप को संगीता की चुदाई करते हुए देखने के बाद तो इतना गर्म होना स्वाभाविक ही था ..और सबसे बड़ी बात पंडित की दी हुई विद्या यानी काम ज्ञान को अपने ऊपर महसूस करने की चाहत अब रितु से ये सब करवा रही थी ..और शायद यही पंडित जी भी चाहते थे ...उन्होंने अपनी चालाकी से रितु के अन्दर काम की अग्नि इतनी भड़का दी थी की वो अपने आप ही चुदने के लिए मरी जा रही थी ..


पंडित जी ने रितु के हाथों को पकड़ कर आगे किया और अपनी पीठ से और जोर से दबा दिया ...तब पंडित को महसूस हुआ की वो ऊपर से नंगी है ...सालि… ...नंगी होकर आई और लिपट गयी मुझसे ....ये सोचते हुए जैसे ही पंडित ने पीछे मुड़कर उसे देखना चाहा वो शरमा गयी और पंडित जी से अपनी ब्रेस्ट को छुपाते हुए उनकी छाती से लिपट गयी ...


लड़कियां चाहे जितनी भी एडवांस हो जाएँ पहली बार किसी मर्द के सामने नंगे होने पर शरम जरुर आती है ...

उत्तेजना के आवेग में आकर वो बाथरूम में अपनी फ़्रोक को उतार फेंक तो आई पर पंडित जी से लिपटने के बाद उसे अपने नंगे होने पर काफी शरम आई ...पर अब काफी देर हो चुकी थी ...वो सिर्फ एक सफ़ेद कच्छी पहने हुए पंडित जी के गले लगकर खड़ी थी ..पंडित जी ने भी उसकी भावनाओ को समझा और उसकी चिकनी कमर को सहलाते हुए उसे चुदाई के लिए तैयार करने लगे ...


पंडित : "लगता है अब तुम पूरी तरह से तेयार हो ..."


वो कुछ ना बोली ..


पंडित ने उसके चेहरे को पकड़ कर ऊपर उठाया ..उसकी आँखे बंद थी ..पंडित जी ने अपने होंठों पर जीभ फेराई और उन्हें गीला किया ..और फिर नीचे झुककर उन्होंने धीरे से अपने तपते हुए होंठ रितु के होंठों पर रख दिए ...


उफ्फ्फ्फ़ ...क्या होंठ थे उसके ...इतने मुलायम ..इतने मीठे ...जैसे शहद लगाकर आई हो वो उनपर ...पंडित ने धीरे से अपनी जीभ निकाल कर उसके मुंह में धकेल दी ..और तब तक रितु भी अपनी तरफ से हरकत करने लगी थी ...उसने जैसे ही पंडित जी की जीभ को अपने मुंह में आते देखा वो बुरी तरह से उसपर टूट पड़ी ..और अपने पैने दांतों और रसीली जीभ की मिलीभगत से उनके होंठों और जीभ की पूरी तरह से सेवा करने लगी ...


तब तक पंडित जी के हाथ उसके छोटे -२ स्तनों पर आ चुके थे ..जितने छोटे थे वो उतने ही सख्त ..जैसे अमरुद छोटे होने पर ज्यादा सख्त होते हैं ठीक वैसे ही ..वो उन्हें बुरी तरह से मसलने लगे ...उसके निप्पलस को कचोट कर बाहर निकालने लगे ...


इसी बीच रितु ने होसला दिखाते हुए पंडित जी की धोती की गाँठ खोल दी और उन्हें नीचे से भी नंगा कर दिया ...और अपना हाथ नीचे करके उसने पंडित जी के लंड को अपने हाथ में लिया तो उसका पूरा शरीर झनझना उठा ...


पंडित ने मौका देखकर उसे नीचे धकेल दिया और अपना हुआ लंड उसके चेहरे के सामने परोस दिया ...अब पंडित जी से इतनी शिक्षा लेकर वो इतना तो समझ ही चुकी थी की आगे करना क्या है ...उसने अपने हाथों से उनके मस्ताने लंड को पकड़ा और अपनी पूरी जीभ निकाल कर उसे चाट लिया ...पंडित जी के मुख से एक तीखी सी सिसकारी निकल गयी और वो अपने पंजों के बल पर ऊपर हवा में उठ से गए ...


और फिर पंडित जी की आँखों में देखते हुए उसने धीरे से अपना मुंह खोल और उनके बलिष्ट और बलशाली पट्ठे को निगल लिया ...और ऐसा करते हुए उसकी आँखे बंद होती चली गयी ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ......रितु .....उम्म्म्म ......बहुत अच्छे .....से ....सीखा है ....तुमने सब ...कुछ ...अह्ह्ह्ह ....अब उन्हें आजमाने का वक़्त आ गया है ....दिखाओ मुझे ....आज ...सब कुछ ... क्या सीखा है ...तुमने इतने दिनों में ..."


किसी अच्छे मोटिवेटर की तरह पंडित जी ने उसे जैसे कोई चुनोती दी ...और रितु ने उनकी चुनोती को स्वीकार भी कर लिया और किसी खरगोश की तरह से उनकी गाजर को वो अपने पंजों में दबाकर अपने दांतों और जीभ से कुतरने लगी ...


पंडित जी की हालत खराब कर दी उसने अगले पांच मिनट में ...कभी उनके लंड का अगला हिस्सा लेकर चूसती कभी उनके लंड को बीच में से अपने मुंह में लेकर चाटती और कभी उनकी गोटियों से खेलती और फिर उन्हें भी चूस लेती ...आज पंडित जी को वो सब भी महसुसू हो रहा था जो उन्होंने उसे सिखाया भी नहीं था ..पर जो भी था उन्हें इन सबमे काफी मजा आ रहा था ..


अचानक उन्हें लगा की वो झड़ने वाले हैं ...तो उन्होंने जल्दी से अपना हथेयार युद्ध छेत्र से बाहर निकाला और रितु को ऊपर उठा कर उसके होंठों को फिर से चूसने लगे ....


रितु के स्तनों पर जैसे कोई खारिश हो रही थी ...उसने पंडित जी के सर को पकड़ कर नीचे धकेल और अपनि बांयी ब्रेस्ट उनके मुंह में डाल दी ...और खुद उचक कर उनकी गोद में चढ़ गयी ...और जोर से चिल्ला पड़ी ...


"अह्ह्ह्ह्ह्ह .....पंडित जी ......उम्म्म्म्म ....मार ही डालोगे आप तो मुझे ....अह्ह्ह्ह्ह .......कितना तद्पाया है आपने मुझे ....कितनी रातें बितादी आपके बारे में सोचते हुए ...की क्या करोगे आप मेरे साथ ...ऐसा करोगे ....वो करोगे ...अह्ह्ह्ह ...आज ..मुझे तृप्त कर दो ...पंडित जी ....चुसो इन्हें ...खा जाओ मेरी ब्रेस्ट को ....बड़ी तरसी हैं ये आपसे मिलने के लिए ...अह्ह्ह ...."

और पंडित जी सच में उसकी ब्रेस्ट से बुरी तरह से मिलने में लगे हुए थे ...वो उनके मुंह में पूरी समा गयी थी ...इसलिए कभी वो उसे चूसते ...कभी बाहर निकाल कर सिर्फ निप्पल मुंह में लगाते और उसे पीते ...और कभी दूसरी ब्रेस्ट को मुह्ह में लेकर पहली वाली से ज्यादा मसलते ....रितु को गोद में उठा कर उन्होंने जन्नत की सेर करवा दी थी 2 मिनट के अन्दर ही ...


पंडित जी से अब और बर्दाश नहीं हो पा रहा था ...उन्होंने अपने बिस्तर का रुख किया और रितु को आराम से लेजाकर वहां लिटा दिया ...और फिर नीचे झुककर उन्होंने उसकी पेंटी को पकड़ा और नीचे खिसका दिया ...


वा ह…क्या नजारा था ...अनछुई सी चूत थी उसकी ...बिलकुल सफाचट ....चिकनी ....सफ़ेद ....रस निकालती हुई ...जैसे संतरे की नारंगी फांको के बीच चीरा लगा कर उसे सजा दिया हो ..

पंडित ने अपनी जीभ निकाली और कूद पड़े उसकी चूत की मालिश करने ...


''अह्ह्ह्ह ....पंडित जी ...उम्म्म्म्म ....''


ऋतू ने पंडित जी के चोटी वाले सर को पकड़ कर अपनी चूत पर जोरों से दबा दिया ...आज तक जैसा उसने सोचा था ठीक वैसा ही एहसास था पंडित जी की जीभ का वहां पर. ...


पंडित जी ने अपने मुंह के गीलेपन और उसकी चूत से निकले रस को मिलाकर ऐसा रसायन तेयार किया जिसका उपयोग करके वो आसानी से अपने लंड को उसकी कुंवारी चूत में प्रवेश दिला सकते थे ...


वो उठे और उसकी टांगो को चोडा करके उसे फेला दिया ...वो भी समझ गयी की अब वो हसीं पल आ चुका है जिसके बारे में सोचकर उसने ना जाने कितनी रातें बिता दी थी ...पर वो भी अब तेयार थी पूरी तरह से ...


पंडित जी नीचे झुके और उन्होंने अपना फनफनाता हुआ सा लंड उसकी सफ़ेद बिल्ली के मुंह पर लेजाकर रख दिया और थोडा सा दबा कर कर अपना भार उसपर डाल दिया ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ....पंडित जी .....धीरे ....दर्द हो रहा है ...''


पंडित : "वो तो होगा ही ...बस अब तुम अपनी आँखे बंद करो ...और कुछ ऐसा सोचो जिसे सोचकर आज तक तुम सबसे ज्यादा उत्तेजित हुई थी ...''


पंडित जी की बात सुनकर उसने अपनी आँखे बंद कर ली और अगले एक मिनट में ही उसकी पूरी जिन्दगी के वो सारे इरोटिक पल उसकी आँखों के सामने किसी पिक्चर की तरह से घूम गए जिनमे उसे सबसे ज्यादा मजा आया था ...और अंत में एक सीन उसकी आँखों में आकर ठहर सा गया ...जिसमे उसके पिताजी ने उसे अपनी गोद में बिठा रखा था ...और उसके अमरूदों को वो बुरी तरह से मसल रहे थे ....


''अह्ह्ह्ह्ह .......पिताजी .......धीरे ......करो ...''

उसके मुंह से निकल गया ...पंडित समझ गया की वो क्युआ सोच रही होगी ....पर जो भी सोच रही थी ...उसकी वजह से उन्हें उसकी चूत मारने में ज्यादा तकलीफ नहीं होने वाली थी ...


और ऐसा सोचते हुए उसकी चूत के अन्दर से गाड़े रस की एक ताजा लहर बाहर की तरफ चल दी ...


और ऐसा सोचते हुए उन्होंने अपनी पूरी शक्ति का प्रयोग किया और एक ही बार में उन्होंने अपना पूरा का पूरा लंड उसकी कमसिन सी चूत के अन्दर धकेल दिया ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ...अय्य्यीईई .......मरररर .....गयी ......अह्ह्ह्ह्ह्ह ....पंडित जी ......ये क्याआअ ........किया .....मर गयी रे ....दर्द हो रहा है ...पंडित जी ....बहुत ज्यादा .....अह्ह्ह्ह ....''


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Re: पंडित & शीला

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 08:01

पंडित & शीला पार्ट--23

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गतांक से आगे ......................

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पर पंडत अब कहाँ रुकने वाला था ...उसने दे दना दन धक्के मारकर उसकी चूत के परखच्चे उड़ा दिए ...और थोड़ी देर में ही रितु को भी मजा आने लगा ...वो मजा जिसके लिए वो कब से तरस रही थी ...ऐसा लग रहा था जैसे उसकी चूत को उसकी खुराक मिल गयी हो ...वो अन्दर तक खुश हो चुकी थी ...


''अह्ह्ह्ह्ह ...पंडित जी ......अह्ह्ह्ह ...सच में ....आप महान हो .....क्या मजा आ रहा है ....अह्ह्ह्ह्ह ......अह्ह्ह्ह्ह . ...उम्म्म्म ... जोर से करो .....पंडित जी ....और तेज ....जैसे आपने .....संगीता के साथ किया ......अह्ह्ह्ह्ह ...जैसे पिताजी ने माँ के साथ किया ....अह्ह्ह्ह्ह ....जैसे पिताजी ने संगीता की मारि…. ... अह्ह्ह्ह्ह .....हाँ ....ऐसे ही ....उफ्फ्फ मा ......मैं तो गयी ....पंडित जी ..."


और इतना कहकर उसने अपनी चूत की खान से निकाल कर सोने जैसा रस पंडित जी के लंड के नाम कुर्बान कर दिया ...


और पंडित जी ने भी काफी देर से दबा कर रखा हुआ ज्वालामुखी अपने अन्दर से निकाला और उसकी चूत के अन्दर अपना लावा निकाल कर वहीं ढेर हो गए ...


अब दोनों के गर्म जिस्म एक दुसरे को सहला रहे थे ...


पंडित ने सोचा की उसके दिल की बात जानी जाए इसलिए उन्होंने रितु से बात करनी शुरू की ...


पंडित : "अच्छा एक बात तो बताओ ...तुम्हे अपने पिताजी के इरादे तो शुरू से मालुम है ..वो तुम्हारे साथ घर पर भी वो छेड़ छाड़ कर ही चूका है ...और आज तो उसने तुम्हारी सहेली को भी चोद डाला ये सोचते हुए की वो तुम हो ...तुम ये सब जानने के बाद उनके बारे में क्या सोचती हो ..."



पहले तो वो चुप रही पर फिर धीरे से उसने बोलना शुरू किया ..: "मुझे पता है की ऐसा सोचना और करना गलत है ..उनकी हरकतें मुझे शुरू में बुरी लगती थी ..पर अब ...अब ...मुझे भी वो सब अच्छा लगने लगा है ...पिताजी को जब उस दिन माँ के साथ सेक्स करते हुए देखा और आज अपनी सहेली के साथ भी ...तो मुझे ऐसा लगा की उनकी जगह पर मुझे होना चाहिए था ...वो मेरा हक़ था जो वो लूट रही थी ...''


पंडित समझ गया की आगे का काम करने में उन्हें ज्यादा मुश्किल नहीं होने वाली ...उनके दिमाग में नयी - २ योजनायें बननी शुरू हो गयी ..

समय काफी हो चूका था इसलिए पंडित जी ने रितु को घर जाने को कहा ..शाम को मंदिर के कार्यों से निपट कर पंडित जी को नूरी का ख़याल आया ...वैसे तो पंडित जी में चोदने की हिम्मत नहीं बची थी ..पर फिर भी नूरी के बारे में सोचते ही उनके लंड की नसों ने फड़कना शुरू कर दिया ...


उन्होंने अपना कुरता और धोती पहना और बाहर निकल गए .


और चल दिए नूरी के घर की तरफ .


वहां पहुंचकर पंडित जी ने इरफ़ान भाई को दूकान पर बैठे देखा ..वो काफी परेशान से थे .


पंडित : "इरफ़ान भाई ..क्या हुआ ..आप इतने परेशान से क्यों लग रहे हैं .."


इरफ़ान : "अरे पंडित जी ...अच्छा हुआ आप आ गए ...मैं अभी आपके बारे में ही सोच रहा था ...दरअसल आज सुबह ही नूरी के ससुराल से फ़ोन आया था ..वो पूछ रहे थे की आगे का क्या इरादा है ..मैंने जब नूरी से पुछा तो उसने मुझसे लडाई करनी शुरू कर दी ...अब आप ही बताइए पंडित जी ..भला इस तरह कोई लड़की अपने पति का घर छोड़कर बैठ सकती है क्या ..दुनिया वाले भी बातें बनाने लगते हैं ..उसके ससुराल वालों पर भी आस पास के लोग इल्जाम लगा रहे है ..मुझे तो लगा था की आपने समझा दिया है ..और वो जल्दी ही मान कर वापिस चली जायेगी ..पर वो अपनी जिद्द लेकर बैठी है की उसकी जब मर्जी होगी तभी वापिस जायेगी .."


पंडित : "और उसकी मर्जी कब होगी वापिस जाने की ...?"


पंडित ने जैसे जानते हुए भी ये सवाल इरफ़ान भाई से पुछा ..


इरफ़ान : "अब ये तो वही जाने ...पर कह रही थी की कम से कम एक हफ्ता और उन्हें मजा चखना चाहती है वो ...अब आप ही बताइए पंडित जी ..एक हफ्ते में ऐसा क्या कर लेगी वो .."


पंडित मन ही मन मुस्कुरा दिया ..वो जानता था की एक हफ्ता और वो उनसे चुदना चाहती है ...और प्रेग्नेंट होकर ही वापिस जाना चाहती है .


पंडित जी : "आप चिंता मत करो ...मैं बात करता हु उस से ...."


इतना कहकर वो ऊपर जाने लगे तो इरफ़ान भाई ने रोक दिया : "वो ऊपर नहीं है पंडित जी ..मुझे लडाई करके अभी बाहर निकली है ..मैं तो इसके ऐसे रव्वैय्ये से परेशान हो चूका हु ..वो बाहर जो बड़ा पार्क है वहीँ गयी होगी .."


इरफ़ान भाई बडबडाने लगे ..पंडित ने एक बार तो सोचा की वापिस अपने कमरे में चला जाए पर फिर ना जाने क्या सोचकर वो पार्क की तरफ चल दिए ..शायद वो नूरी को इस तरह परेशान नहीं देख सकते थे .


रात का अँधेरा हो चूका था ..ये पार्क उनके इलाके का सबसे बड़ा पार्क था, जहाँ आस पास के लोग सुबह और शाम को सैर करने आते थे ..


पंडित जी पार्क के अन्दर आ गए, वो काफी बड़ा था और वहां काफी लोग भी थे , कुछ लोग सैर कर रहे थे, कहीं पर बच्चे फूटबाल खेल रहे थे ..और कहीं दूर अँधेरे में पेड़ ने नीचे कुछ जवान जोड़े एक दुसरे की गोद में बैठे हुए , दुनिया से बेखबर प्यार की चोंच लड़ा रहे थे ..


पर अभी पंडित जी की नजरें नूरी को ढूंढ रही थी ..


तभी उन्हें पीछे से किसी ने पुकारा : "अरे पंडित जी ...आप और यहाँ .."


उन्होंने पीछे मूढ़ कर देखा तो वहां निर्मल भाभी खड़ी थी ..वो उनके मंदिर में सुबह शाम आया करती थी और उनकी एक कीर्तन मण्डली भी थी ..जो घर-२ जाकर कीर्तन करती थी, वैसे उनकी उम्र ज्यादा नहीं थी ...लगभग 40 के आस पास थी वो ..उनके पति अक्सर बाहर रहा करते थे ..इसलिए अपना ज्यादातर समय वो भगवान के भजन गाने में निकाल देती थी ..वो शायद पार्क में घूमने आई थी .

पंडित : "अरे निर्मल भाभी ..नमस्कार ..मैं तो बस आज ऐसे ही चला आया यहाँ ...आज काफी गर्मी थी ना ..सोचा थोड़ी देर पार्क में आकर ताजा और ठंडी हवा का आनद ले लू .."


निर्मल भाभी : "हा हा .ये तो आपने अच्छा सोचा ...वर्ना हम लोगों को तो आज तक यही लगता था की आप सिर्फ मंदिर के अन्दर ही रहा करते हैं ..बाहर जाने का आपका मन ही नहीं करता ..आ जाया कीजिये रोज शाम को पार्क में ..मैं भी आती हु .."

उसने जैसे पंडित जी को लालच दिया ..

पंडित बेचारा मुस्कुरा कर रह गया ..

पंडित की निगाहें अभी भी नूरी को ढूंढ रही थी ..वैसे निर्मल भाभी उनसे थोड़ी देर तक और बातें करना चाहती थी ..पर पंडित उन्हें अनदेखा सा करता हुआ आगे चल दिया ..

और आखिर में उन्हें एक बड़े से पेड़ के नीचे बैठी हुई नूरी दिखाई दे गयी .

पंडित उसकी तरफ चल दिया ..वो दूर खेलते हुए छोटे - २ बच्चों को देख रही थी ..पंडित जी उसके सामने आकर खड़े हो गए .


नूरी : "पंडित जी ...आप ...और यहाँ ..."


पंडित : "हाँ ..मैं ..दरअसल मैं तुम्हारे घर गया था ..और तुम्हारे अब्बा ने बताया की तुम यहाँ पार्क में आई हो ..और परेशान भी हो ..इसलिए मैंने सोचा की ... "


नूरी : "यानी ..आप मेरे लिए यहाँ आये हैं ...ओह्ह पंडित जी ...आपका बहुत -२ धन्यवाद ...वैसे मैं अक्सर शाम को यहाँ आती हु ..पर आज अब्बू के साथ कुछ कहा सुनी हो गयी तो मन खराब सा हो गया इसलिए यहाँ आ गयी ..."

पंडित : "मैं समझ सकता हु ..उन्होंने मुझे सब बता दिया है ..मेरे हिसाब से तो तुम्हे उनकी बात मान लेनी चाहिए .."

नूरी : "पर पंडित जी ..अभी तो ..मैं ..प्रेग्नेंट हुई भी नहीं हु ..और वैसे भी ...मेरा मन अभी नहीं भरा है आपसे ..."


उसने बेशर्मी से अपने दिल की बात उगल दी .


पंडित भी बेशर्मी से बोला : "तभी तो मैं आया था तुम्हारे घर ...अगर इस वक़्त तुम घर पर होती तो शायद मेरे लंड से चुद रही होती .."

पंडित ने अपनी धोती की तरफ इशारा करते हुए उससे कहा ..

नूरी की आँखों में जैसे आग उतर आई हो ..पंडित के लंड की तरफ उसने भूखी नजरों से देखा और अपने होंठों पर जीभ फेराई ..


नूरी : "तो देर किस बात की है पंडित जी ..शुरू हो जाओ ..मैंने कब मना किया है आपको .."

पंडित (हेरानी से ) : "यहाँ ...इस जगह ..."

नूरी : "हाँ ..और कहाँ ...डर गए क्या ..उन्हें देखो जरा .."

उसने दूसरी तरफ इशारा किया ..जहाँ एक जवान लड़का लड़की अँधेरे वाली जगह पर पेड़ के नीचे बैठे हुए एक दुसरे को स्मूच कर रहे थे ..लड़के के हाथ लड़की की टी शर्ट के अन्दर थे और वो उसके स्तनों को बुरी तरह से मसल रहा था ..


पंडित : "ये सब उनके लिए ठीक है ...मेरा एक ओहदा है ..समाज में पहचान है ..अगर किसी ने देख लिया, पहचान लिया तो .."


पंडित ने अपनी बेचारगी उसे सुनाई .


नूरी : "उसकी चिंता आप मत करो ..हम सब कुछ छुप कर ही करेंगे उनकी तरह खुले आम नहीं ..आप बस करने वाले बनो ..जब लड़की होते हुए मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है तो आप क्यों डर रहे हैं .."

नूरी ने जैसे उनकी मर्दानगी को ललकारा ..

अब तो पंडित के सामने अजीब दुविधा खड़ी हो गयी थी ..पर नूरी की बातें सुनते हुए और उसके तेवर देखते हुए उनका भी मन करने लगा था ..

पंडित को गहरी सोच में डूबा देखकर नूरी बोली : "क्या हुआ पंडित जी ...मूड नहीं बन रहा है क्या ..."

और इतना कहते हुए उसने अपनी टी शर्ट के गले को पकड़कर नीचे खींच दिया ..और तब तक खींचती रही जब तक उसके उभार पंडित की आँखों के सामने पूरी तरह से दिखाई नहीं दिए ..पंडित उसकी इस बेशरम हरकत को देखकर हैरान रह गया ..वो तब भी नहीं रुकी ..उसने एक दो बार इधर उधर देखा और जब लगा की कोई उसकी तरफ नहीं देख रहा है तो उसने अपनी टी शर्ट को ब्रा समेत और नीचे खिसका दिया और उसकी दांयी ब्रेस्ट का खड़ा हुआ निप्पल पंडित जी को सलाम ठोकने लगा .

पंडित जी की दोनों आँखों में उसके निप्पल की परछाई जैसे छप कर रह गयी ...उनकी धोती में से उनका लंड किसी क्रेन की तरह उठ खड़ा हुआ ....उन्होंने अपने हाथ से उसे मसल कर वापिस नीचे दबा दिया ..

नूरी की इस हरकत ने पंडित का रहा सहा मूड भी पूरी तरह से बना दिया था.

नूरी (अपना निचला होंठ दांतों में दबाते हुए ) : "क्यों उसका गला दबाकर उसकी क्रांति को ख़त्म कर रहे हैं पंडित जी ...आजाद कर दो इसे और कर लेने दो उसे अपनी मनमानी ..."

नूरी अब किसी धंधे वाली की तरह व्यवहार कर रही थी ..

पंडित ने पहले आस पास का जायजा लिया ..कोई उन्हें और नूरी को देख तो नहीं रहा है ना ...और फिर वो धीरे से नूरी से बोले : "अच्छा ठीक है ...लेकिन सिर्फ ऊपर -२ से ही हो पायेगा ...''

नूरी : "आप आओ तो सही ...''

उसे भी मालुम था की वहां ज्यादा कुछ संभव नहीं है ...इतने लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा चुसम चुसाई ही हो पाएगी ...और कुछ नहीं ..पर अभी उनके लिए वही बहुत था ...और ऐसा नहीं था की नूरी अपने घर जाकर पंडित जी से चुदाई नहीं करवा सकती थी ...पर ऐसे खुले में कुछ करने की चाहत उसके मन में कई सालों से थी ...और अक्सर उसने पार्क में दुसरे जोड़ों को जिस तरह से मस्ती करते हुए देखा था उसका भी मन करता था की वो भी ये सब कर पाती ...पर घर की बंदिशे और फिर कम उम्र में शादी होने की वजह से उसकी ऐसी ख्वाहिशें मन में ही रह गयी थी ...और आज वो पंडित के जरिये अपने मन की हर मुराद पूरी कर लेना चाह रही थी ..और दूसरी तरफ पंडित था जो अपनी मान मर्यादा को ताक पर रखकर उसके साथ खुलेआम मस्ती करने को तैयार हो गया था ...क्योंकि खड़े लंड वालों के पास दिमाग की कमी होती है ..एक बार जब लंड खड़ा हो जाए तो ऊपर वाला दिमाग काम करना बंद कर देता है और उसके बाद जो भी होता है वो नीचे वाले खड़े लंड की मर्जी से ही होता है .

पंडित जी उसकी बगल में जाकर बैठ गए ..

उन्होंने एक बार फिर से दूसरी तरफ बैठे हुए जोड़े को देखा ..इतनी दूर से और अँधेरे की वजह से उनके चेहरे तो दिखाई नहीं दे रहे थे पर उनकी हरकतें साफ दिख रही थी .

लड़के ने अपना चेहरा अब लड़की की टी शर्ट के अन्दर डाल दिया था ...और वो उसके रसीले आमों को जोर जोर से चूस रहा था ...और लड़की उसके सर को अपनी छाती पर दबाकर जोर से साँसे ले रही थी ..

पंडित ने भी हिम्मत करके नूरी की कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया ...

दोनों के जिस्म आग की तरह जल रहे थे ..

दोनों के लिए इस तरह खुले में प्यार की मस्ती करने का ये पहला मौका जो था ...

पंडित ने ऐसा कभी सोचा भी नहीं था की वो किसी युगल जोड़े की तरह इस तरह पार्क में बैठकर खुले आम रास लीला करेगा ..पर हालात ही ऐसे बन गए थे की वो चाह कर भी मना नहीं कर पा रहा था ..


पंडित ने एक बार फिर से दूर बैठे हुए जोड़े की तरफ गया ..लड़की ने अब अपना सर लड़के की गोद में रख दिया था और पैर सामने की तरफ फेला दिए थे ..लड़के ने अपना सर नीचे झुकाया और लड़की के चेहरे को स्पाईडर मेन वाले स्टाईल में उलटी किस्स करी ..और लड़के के दोनों हाथ आगे की तरफ जा कर उसके मुम्मों का बुरी तरह से मर्दन कर रहे थे ..और वो भी टी शर्ट के अन्दर से ..उनके जिस्मो में लगी हुई आग की तपिश पंडित और नूरी तक पहुँच कर उन्हें भी गरम कर रही थी .


पंडित ने आखिरकार पहल करी और इधर उधर देखने के बाद एकदम से नूरी के होंठों पर एक पप्पी दे डाली ..और फिर अपनी नजरें इधर उधर करके वो देखने लगा की किसी ने देखा तो नहीं ..


नूरी उनकी इस हरकत को देखकर हंसने लगी ..और बोली : "पंडित जी ..आप भी कमाल के हैं ..इतना एक्सपेरिएंस होने के बावजूद ऐसे डर रहे हैं जैसे पहली बार कर रहे हो ...रुको मैं दिखाती हु किस तरह की किस्स पसंद है मुझे ...''


और इतना कहकर उसने पंडित की गर्दन के ऊपर हाथ रखा और उसे अपनी तरफ खींच लिया ..और खुद पीछे होती हुई घांस पर लेट गयी ..और पंडित को अपने बांये मुम्मे के ऊपर लिटा सा लिया ..और अगले ही पल उनके होंठों को अपने मुंह में दबोच कर उन्हें अपने होंठों की चाशनी से भिगोने लगी ..


'उम्म्म्म्म्म ......पंडित जी ....'


नूरी की मदहोश होती हुई नजरों ने पंडित के दिमाग पर भी पर्दा डाल दिया ..वो भूल गया की वो कौन है और कहाँ पर बैठकर ऐसे कर्म कर रहा है ..पर अब कुछ नहीं हो सकता था ..उसने अपने बांये हाथ को उसके दांये मुम्मे पर रखा और गाडी के भोंपू की तरह उसे बजाने लगा ..और नूरी के मुंह से संगीत निकलने लगा ..


अब पंडित भी जोश में आ चुका था ..उसने भी नूरी के जिस्म पर लेते हुए उसके गुलाबी होंठों को चूस चूसकर उन्हें लाल सुर्ख कर दिया .


पंडित की धोती के अस्तबल में बंधा हुआ उनका लंड रूपी घोड़ा ऐसी अवस्था में आकर बुरी तरह से हिनहिना रहा था ..




नूरी की टी शर्ट के गले को नीचे खिसका कर पंडित ने उसकी एक ब्रेस्ट को नंगा कर दिया और उसपर लगी हुई चेरी को चूसकर उसका मीठापन पीने लगा ..नूरी ने भी कोई विरोध नहीं किया ..पंडित की हरकतों को महसूस करते हुए उसकी दक्षिण दिशा में स्थित फेक्ट्री में से गर्म पानी निकल कर पार्क की घांस में सिंचाई कर रहा था ..


पंडित ने उसके दुसरे मुम्मे को भी घोंसले से बाहर निकाला और दोनों गुब्बारों के ऊपर अपने चेहरे को रगड़ कर उनकी नरमी को महसूस करने लगा… उसने नूरी के मुम्मों को अपने दोनों हाथों में दबोचा तो उसके दोनों निप्पल किसी भाले की तरह से बाहर निकल आये और फिर उन ताने हुए निप्पलों को अपने होंठों , गालों , नाक और आँखों में चुभा - २ कर उनका आनंद लेने लगा ...


पंडित की ऐसी हरकत करता देखकर वो बेचारी जमीन पर किसी मछली की तरह से तड़प रही थी ..उसकी आँखे जब खुलती तो सिंदूरी आसमान पर नींद से जाग रहे सितारों की टिमटिमाहट ही दिखाई देती ...पर पंडित जी के होंठों की पकड़ अपने स्तनों पर पाकर वो आँखे फिर से बंद हो जाती .


उसने मचलते हुए अपने हाथ से टटोल कर पंडित की धोती में प्रवेश किया ..और अपनी पतली - २ उँगलियों से उनके मोटे रेसलर को पकड़ लिया ..पंडित के दांतों ने एक जोरदार कट मार उसके बांये स्तन पर ..और वो सिहर कर धीरे से चिल्ला पड़ी ..


''अयीईई ....उफ्फ्फ पंडित जी ....काटो मत ...दर्द होता है ..प्यार से चुसो इन्हें ..सिर्फ ..चुसो ..''


पंडित ने उसकी बात मान ली और अपने होंठ और जीभ से ही उसकी ब्रेस्ट की मसाज करने लगा ..


इसी बीच नूरी की जादुई उँगलियों ने पंडित के कच्छे का नाड़ा खोल दिया और अन्दर जाकर उसपर अपनी उँगलियों की पकड़ बना दी .


आज पंडित कुछ ज्यादा ही उत्तेजित था ..उसके लंड की मोटी -२ नसें नूरी को अपने हाथ पर साफ़ महसुस हो रही थी ..वो उन नसों की थरथराहट अपने होंठों पर महसुसू करना चाहती थी ..वो उठी और पंडित के होंठों के चुंगल से अपने नन्हे निप्पलों को छुड़ाया और पंडित जी को पेड़ का सहारा लेकर बिठा दिया ...और खुद उनकी गोद में सर रखकर धीरे -२ उनकी धोती की परतों को हटाने लगी ...और फिर उनके नीचे खिसक रहे कच्छे को भी नीचे करके उनके उफान खा रहे लंड को अपनी आँखों के सामने ले आई ..


और फिर एक लम्बी सांस लेकर उनके लहराते हुए लंड को अपने होंठों की सरहद के पार ले गयी .


''उम्म्म्म्म .....पुच्च्छ्ह ...... ...अह्ह्ह्ह्ह ....... उम्म्म्म्म ......''


उसने एक मिनट के अन्दर ही उसे अपनी लार से नेहला डाला ...इतना प्यार आ रहा था उसे इस वक़्त पंडित जी के लंड पर की उसे कच्चा खा जाने का मन कर रहा था उसका ..


The Romantic
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Re: पंडित & शीला

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 08:02

पंडित & शीला पार्ट--24

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गतांक से आगे ......................

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उसने सड़प -२ कर उनके लंड की हालत ऐसे कर दी मानो गन्ने की मशीन में डला हुआ कोई गन्ना हो वो ...उसके जूस को अन्दर से बाहर निकालने के लिए नूरी ने अपनी पूरी जान लगा दी ..


इसी बीच पंडित जी के हाथ उसकी गांड को सहला रहे थे ..जींस में कैद उसका पिछवाड़ा काफी मोहक और गुदाज लग रहा था ..पंडित अपने हाथों से उसके कूल्हों को मसल कर उनका लुत्फ़ उठा रहे थे .


और फिर उन्होंने उसकी जींस के बटन खोल दिए ..और पीछे से हाथ अन्दर डाल कर उसकी गरमा गरम गांड को अपने नंगे हाथों में समेट लिया ..और अपनी उँगलियों को अन्दर धंसा कर उसके गुदाजपन का जाएजा लेने लगे ..


ऐसी हालत में किसी भी लड़की या औरत की गांड की मालिश की जाए तो वो पूर्ण रूप से उत्तेजित हो जाती है ...ये पंडित को अच्छी तरह से मालुम था ...और इसी के परिणाम स्वरुप नूरी की लंड चूसने की स्पीड और भी तेज हो गयी ..और वो हुंकारते हुए पंडित की गोद में पड़ी हुई किसी पागल कुतिया की तरह उनका लंड चूस रही थी .


अँधेरा काफी गहरा हो चुका था ..इसलिए पार्क में खेल रहे बच्चे और उनके साथ आये हुए उनके पेरेंट्स भी अब घर जाने लगे थे ..कुछ ही लोग रह गए थे वहां अब ..वैसे भी आई पी एल के मैच का टाईम हो चुका था ..इसलिए पार्क अब लगभग पूरा सुनसान हो गया था ..


पंडित ने पहले सोच रखा था की सिर्फ ऊपर -२ का ही मजा ले पायेगा यहाँ तो ..पर नूरी ने उसके जज्बातों को इस कदर भड़का दिया था की वो अब वहां पर चुदाई के विकल्प पर भी विचार करने लगा था ..


उसकी नजरें फिर से दूर बैठे हुए जोड़े की तरफ गयी ..वो अब उठकर उनकी तरफ ही आ रहे थे ...पंडित ये देखकर एक दम से घबरा गया और नूरी के मुंह से बड़ी मुश्किल से अपने लंड को निकाल कर उसे वापिस अपनी धोती में छुपा दिया और उसे भी सीधा होकर कपडे सही करके बैठने को कहा ..


वो जोड़ा उनसे थोड़ी दूर पहले ही रुक गया ..वहां पर एक घनी सी दो फुट ऊँची झाडी थी और उसके ठीक पीछे एक घांस का टीला था ..जिसपर घनी और मुलायम घांस की चादर बिछी हुई थी . वो दोनों वहां जाकर बैठ गए ..इस तरह से वो बाहर दिख रही दुनिया से तो छुप गए पर पंडित और नूरी के और करीब आकर उन्हें पूर्ण रूप से दर्शन देने लगे ..पर उनकी हालत देखकर पंडित को पता चल गया की उन्हें भी अब चुदाई का भूत चढ़ चूका है ..जो उनकी बर्दाश्त की सीमा से परे है ..


और उस टीले पर बैठने के साथ ही उन्होंने पंडित और नूरी की परवाह किये बिना अपनी जींस उतारनी शुरू कर दी ..


और दोनों नीचे से नंगे होकर एक दुसरे से बुरी तरह से लिपट गए ..


पंडित और नूरी अवाक से होकर अपने से सिर्फ दस गज के फांसले पर हो रही गुथम गुत्था को देख रहे थे ..लड़के ने अपना मुंह नीचे लेजाकर लड़की की चूत पर रख दिया और लड़की ने भी अपनी टांगो से उसकी गर्दन को बुरी तरह से जकड लिया ..और जोर से सिसकारी मार कर अपने प्रेमी को पुकारा ..


''अह्ह्ह्ह्ह .....बद्री.....मेरे राजा ....अह्ह्ह ........खा जा मुझे ...मेरे राजा ...खा जा मुझे ...''


वो लड़की अपनी मिठाई की दूकान खोलकर अपने प्रेमी बद्री को अपने मिष्ठान खिला रही थी .

बद्री के दोनों हाथ ऊपर जाकर उसकी टी शर्ट और ब्रा को ऊपर कर चुके थे और अन्दर बैठे हुए कबूतरों को मसल कर उनका मजा ले रहे थे .


उन्हें पास बैठे हुए पंडित और नूरी की जैसे कोई चिंता थी ही नहीं ..शायद उन्होंने भी दूर से उन्हें आपस में चूमा चाटी करते हुए देख लिया था इसलिए उन्हें भी अपनी ही केटागीरी का मान कर बेशर्मों की तरह उनके सामने ही शुरू हो गए थे .


उन्हें ऐसा करते हुए देखकर नूरी धीरे से फुसफुसाई : ''जब उन्हें कोई शर्म नहीं है तो हम क्यों करे ..''


और इतना कहकर वो फिर से पंडित की टांगो के बीच घुस गयी और खोद कर उनके लंड को फिर से बाहर निकाल लिया ..वो अब तक मुरझा चुका था ..पर मर्द के लंड को खडा करने में देर ही कितनी लगती है ..नूरी ने उनके मुरझाये हुए लंड को मुंह में लेकर जब चूसना शुरू किया तो वो फिर से अपनी रंगत में आने लगा और सिर्फ तीस मिनट में ही वो फिर से पुरो तरह खडा होकर पहले जैसा हष्ट पुष्ट हो गया ..


पंडित की नजरें अब उस लड़की पर थी ..जो जमीन पर पड़ी हुई अपने आशिक से चूत चुसवा रही थी ..


उसकी उम्र करीब बीस साल के आस पास थी ..और लड़का भी लगभग हम उम्र ही था ..


उसकी टी शर्ट ऊपर होने की वजह से वो लगभग पूरी नंगी थी पंडित की आँखों के सामने ..उसकी ब्रेस्ट और थाई दोनों ही गजब की थी ..एकदम सफ़ेद और चिकनी ..36 की ब्रेस्ट होगी उसकी ..उन्हें लड़का बुरी तरह से मसल रहा था ..पर उसके मसलने से उस ब्रेस्ट के करारेपन पर कोई असर नहीं हो रहा था ..वो चट्टान की तरह तन कर खड़ी थी ..


पीछे की तरफ से आ रही हलकी लाईट अब उन चारों पर पड़ रही थी जिसकी वजह से वो लोग एक दुसरे को और साफ़ तरीके से देख पा रहे थे ..


पंडित ने उन दोनों के चेहरों को गौर से देखा ..उन दोनों को उसने पहले कभी नहीं देखा था ..शायद कहीं दूर से आये थे दोनों ..इस बड़े से पार्क में चुदाई करने ..पर उन्हें इतनी इतने करीब नंगा सा देखकर उनकी उत्तेजना में चार चाँद लग गए थे .नूरी भी लगभग बूखी डायन की तरह उनके लंड के मांस को नोचने में लगी हुई थी ..


और पंडित के मुंह से भी अब अह्ह्ह उन्नह निकल रही थी ..


''अह्ह्ह्ह नूरी ....उम्म्म्म .....धीरे कर .....अह्ह्ह्ह ...उफ़्फ़्फ़्फ़… ''


पंडित जी उसके सर को अपने लंड पर दबा कर और कभी बाहर खींच कर उसे हिदायत दे रहे थे ..

उनकी सिस्कारियां सुनकर वो लड़की भी उस तरफ देख रही थी ..पंडित और उस लड़की की नजरें मिली तो उसने पंडित जी को एक स्माईल पास कर दी ..नूरी उनका लंड चूस रहीथी और वो लड़का उस लड़की की चूत ..इसलिए उन दोनों को एक दुसरे से आँखे लड़ाने का मौका मिल गया था ..


पंडित की नजरें उसकी ब्रेस्ट को घूर रही थी ..लड़की को इसका आभास हो गया ..उसने अपनी बेशर्मी का परिचय देते हुए अपनी टी शर्ट को सर से घुमा कर पूरा उतार दिया ..और पूरी नंगी हो गयी ..उसे ना तो किसी के आने का कोई डर था और ना ही पंडित के घूरने का ..सच में कितनी आगे निकल चुकी है ये दुनिया ..पंडित ने मन ही मन सोचा ..


और अब वो अपनी उँगलियों से अपने निप्पल पकड़ कर उन्हें मसल रही थी ..अपने आशिक से अपनी चूत चुसवा रही थी और पंडित की आँखों में देखकर उसे भी लाईन मार रही थी .


अब पंडित से भी रुकना मुश्किल हो रहा था ..उसने नूरी की जींस घुटनों तक उतार दी ..और नीचे झुक कर उसकी चूत से निकल रही खुशबू को सूंघा ..और अगले ही पल वहां पर मुंह लगाकर जोरों से चूसने लगा ..


नूरी चिल्ला पड़ी ..''ओह्ह्ह्ह पंडित जी .....येस्स्स्स .....चुसो इसे ...अह्ह्ह्ह ...चुसो मेरी चूत को पंडित जी ...अह्ह्ह्ह ...''


पंडित ने एकदम से बाहर निकल कर उसका मुंह बंद किया ..आवेश में आकर उसने जिस तरह से पंडित जी कहा था उन्हें डर लगने लगा था की वो लड़की या लड़का कहीं वो सुन ना ले ..और उन्हें कोई पहचान ना ले ..पर शायद उन्होंने सूना नहीं था या फिर अपनी मस्ती में होने की वजह से उनका ध्यान नहीं गया था नूरी की बात पर ..


पंडित जी को अब लगने लगा था की वो झड़ने वाले हैं ..इसलिए उन्होंने अब सीधा चूत पर हमला करने की सोची ..


दूसरी तरफ वो लड़का भी ऊपर आ गया था और उसने अपनी जींस उतार कर अपना लंड बाहर निकाल लिया था ..


पंडित ने भी अपनी धोती गिरा दी और अपने लंड को सबके सामने उजागर कर दिया ..


पंडित और नूरी की नजरें उस लड़के के लंड को और उन दोनों लड़का लड़की की नजरें पंडित के लंड की लम्बाई को नाप रही थी ..


और दोनों तरफ की पार्टियों को मालुम था की किसका लंड बड़ा है .


पंडित जी के आठ इंच लम्बे और मोटे लंड के सामने भला उस चूजे जैसे लंड की क्या बिसात थी ..उस लड़के ने लड़की को घोड़ी बनाया और उसके पीछे से अपना 5 इंच का लंड डाल कर धक्के मारने लगा ..


और सिस्कारियां मारने लगा ..


''अह्ह्ह्ह्ह ......प्रियंका .....माय डार्लिंग ......यु आर सो टाईट .....ओह्ह्ह फक्क बेबी ....''


ओहो तो इसका नाम प्रियंका है ...पंडित ने मन ही मन सोचा


प्रियंका की नजरें भी अब मदहोशी में आकर मस्त होने लगी थी ..


पंडित ने भी प्रियंका की नजरों में देखते हुए नूरी को घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत का दरवाजा अपनी उँगलियों से खोलकर उसमे अपना लंड पेल दिया ..और एक जोरदार झटका मारा ..


''अयीईई ...पंडित जी ....अह्ह्ह्ह ...धीरे ...आप तो जान ही निकाल देते हो ...''


और फिर शुरू हुआ एक उत्तेजना से भरा हुआ खेल ...धक्कों वाला ...मुम्मे हिलाने वाला ..सिस्कारियों से भरा हुआ ...


नूरी और प्रियंका के चेहरे एक दुसरे की तरफ थे ..और पंडित और बद्री दोनों पीछे से धक्के मारकर उनका बुरा हाल करने में लगे हुए थे ..

अचानक बद्री जोर से चिल्लाया ..''अह्ह्ह्ह्ह ...पप्रिया डार्लिंग ...आई एम् कमिंग ...अह्ह्ह ...''


और अगले ही पल उसने अपना सार रस प्रियंका के नाम कुर्बान कर दिया ..उसकी चूत के अन्दर ही ..


पर पंडित का स्टेमिना उस से कही ज्यादा था ..वो तो जैसे अभी शुरू ही हुए थे ..


शायद प्रियंका भी झड चुकी थी ..उसने एक रुमाल निकाल कर अपनी चूत साफ़ की और दोनों ने अपने -२ कपडे पहन लिए ..और आराम से बैठ कर पंडित और नूरी की चुदाई को देखने लगे .


और अगले दस मिनट के बाद आखिर पंडित जी के लंड से गर्म पानी की बोछारें निकल कर नूरी के अन्दर जाने लगी ..


और नूरी नीचे पड़ी हुई ना जाने कितनी बार झड चुकी थी ..शायद तीन या चार बार ..


और आखिर में पंडित ने अपना लंड बाहर निकाला और साफ़ सफाई के लिए उसे नूरी ने अपने कब्जे यानी मुंह में ले लिया ..और साफ़ सुथरा करके वापिस कर दिया ..पंडित आँखे बंद किये हुए उसके गर्म मुंह का मजा ले रहे थे ..


उसके बाद दोनों ने अपने -२ कपडे ठीक किये ..


पंडित ने देखा की बद्री और प्रियंका तब तक जा चुके थे .


वो भी वापिस चल दिए ..


पंडित अपने घर और नूरी अपने ..

वो तो चल दिए अपने घर की तरफ पर वहीँ एक दुसरे पेड़ के पीछे छुपी हुई निर्मल भाभी बाहर निकल कर आई ...


उसने सब देख लिया था ..


उसका चेहरा लाल सुर्ख था ..उसके कानों से धुंवा निकल रहा था ..इतनी मस्त और वो भी डबल चुदाई देख कर ..


और सबसे बड़ी बात ... पंडित जी को ऐसी हरकत करते देखकर ...और वो भी खुले पार्क में ..उसे ये उम्मीद तो बिलकुल नहीं थी ..पंडित जी को उसने आज तक इस नजरिये से नहीं देखा था ..की ऐसे धरम करम करने वाले बन्दे का ऐसी चीजों से क्या लेना देना होगा ..मंदिर में भी उनके स्वभाव को देखकर आज तक उसे ऐसा कभी नहीं लगा था ..पर आज जो भी उसने देखा वो देखकर उसकी विचारधारा के साथ साथ चूत से भी अविरल धारा बह कर उसके हर विचार को नकार रही थी ..

उन्हें चुदाई करते देखकर ना जाने कितनी बार उसने अपनी मोटी चूत को मसला होगा और कितनी बार वो झड़ी होगी उसे भी पता नहीं चला ..


पर अब उसके धार्मिक विचारों को मानने वाले दिमाग में शेतानी विचार आने लगे थे ...उसने सोच लिया था की चाहे जो भी हो जाए वो पंडित के लंड से चुद कर ही रहेगी ..


और दूसरी तरफ पंडित अपने कमरे में जाकर लेट गया ...


वो आज काफी थक चुका था ..पुरे दिन की बातें सोचकर वो यकीं नहीं कर पा रहा था की चुदाई का खेल खेलते हुए वो इतना आगे निकल जाएगा की समाज और लोगों के डर के बिना इस तरह खुल्ले में चुदाई करेगा ...पर अच्छा हुआ किसी ने ऐसा करते हुए देखा नहीं उन्हें ...वो दुसरे जोड़े ने जो भी देखा उसका डर नहीं था ..क्योंकि वो उन्हें जानते नहीं थे ..


ऐसा सोचते हुए पंडित जी थोड़ी देर के लिए सो गए ..


पर उन्हें क्या मालुम था की उस जोड़े के अलावा निर्मल भाभी ने उन्हें सब कुछ करते हुए देख लिया है ..और वो आगे क्या करेंगी वो शायद पंडित भी नहीं जानता था ..


पंडित को सपने में भी नूरी दिखाई दे रही थी ..और वो भी उसके घर पर ..अपने बाप के सामने वो बेशर्मी से पंडित जी का लंड चूस रही थी ..और उसका बाप कुछ भी नहीं कर पा रहा था .. वो पूरी नंगी थी और पंडित जी के सामने बैठ कर उनका लम्बा और जानदार लंड चूस रही थी ..पंडित जी को बहुत मजा आ रहा था ..अचानक उन्हें लगा की उनका निकलने वाला है ..और उनकी नींद खुल गयी ..और वो ये देखकर दंग रह गए की उनका लंड सच में चूसा जा रहा था ..


और चूसने वाली और कोई नहीं ..


शीला थी .

पंडित जी ने कांपती हुई आवाज में उससे पूछा : "अरे ....श ..शीला ..त .. त. ..तुम ...और इस वक़्त ...अहह .."


शीला ने उनका लंड बाहर निकाला और बोली : "पंडित जी ...मुझसे कोई अपराध हुआ है क्या ..जो आप मुझे भूल ही चुके हैं ..आपने मेरे नीरस जीवन में काम की अग्नि तो भड़का दी ..पर समय -२ पर उसपर पानी डालकर उसे बुझाना भूल जाते हैं ..और मैं जलती रहती हु ..आप ही बताइए मैं क्या करू ..आज सुबह से मेरी हालत ऐसी हो रही है ..जैसे जल बिन मछली ..और आप हैं की आराम से सो रहे हैं ..और ना जाने किसके बारे में सोचकर आपका ..ये ..ल ..लंड हुंकार रहा था ..मैं तो आपसे शिकायत करने आई थी ..पर आपकी धोती में इसे इस हालत में देखकर मेरे अन्दर की अग्नि और भड़क उठी और इसलिए मैंने ये सब किया ...''


पंडित शायद दरवाजा खुला छोड़कर सो गया था ..उसका ध्यान सीधा दरवाजे की तरफ गया .


शीला : "बंद कर दिया है मैंने दरवाजा अब ..पहले खुला था ..''


वो निश्चिन्त हो गया ..और शीला से बोला : "ऐसी बात नहीं है शीला ..मैं तुम्हे कैसे भूल सकता हु ..तुम्हारी वजह से ही तो मेरे भी नीरस जीवन में इतनी बहारें आई है ..''


पंडित का इशारा समझ कर शीला तुनक कर बोली : "हाँ ..हाँ ..पता है ..कौनसी बहारों के मजे लूट रहे हो आप ..मैं उसके लिए तो आपको मना नहीं कर रही पंडित जी ..आप तो मेरे लिए सब कुछ है. ..आप जो चाहे करें ..मुझे कोई आपत्ति नहीं है ...बस मैं यही चाहती हु की मेरा भी ध्यान रखा कीजिये ..''


पंडित ने प्यार से उसके गालों पर हाथ रखा और उसे अपनी तरफ खींच लिया ..और अपने ऊपर लिटा कर उसके चेहरे को अपनी हथेलियों से थाम लिया ..और बोले : "ठीक है ..शीला ..अब से ऐसा नहीं होगा ..मैं इस बात का ध्यान रखूंगा ...''


और इतना कहकर उन्होंने उसके होंठों को अपने होंठो से जोड़ कर एक दुसरे के मुंह में वाटर सप्लाई करनी शुरू कर दी ..


उसने साडी पहनी हुई थी ..


पंडित ने उसकी जाँघों पर हाथ रखकर उसकी साडी को ऊपर उठाना शुरू कर दिया ..और तब तक उठाता रहा जब तक उसकी नंगी गांड पर पंडित जी के हाथ नहीं फिसलने लगे ..


वो हमेशा की तरह आज भी पेंटी पहन कर नहीं आई थी ..


वैसे इस बात से याद आया ..अमेरिका में एक सर्वे हुआ था ..जिसमे ये पता चला था की जो महिलायें कभी कभार पेंटी पहने बिना ही अपने पति के साथ सोने चली आती है ..वो चुदने के लिए 99.9 परसेंट तेयार होती हैं ..यकीं नहीं होता तो कभी ट्राई करके देख लेना ..


खेर ..


पंडित जी को भी अपने ट्रांसफोर्मर को बाहर निकालने में ज्यादा टाईम नहीं लगा ..ट्रांसफोर्मर इसलिए की थोड़ी देर पहले वो मरे हुए चूहे की तरह पड़ा हुआ था ..पर शीला के गुदाज जिस्म को देखकर उसने ट्रांसफॉर्म होकर एक जानदार और शानदार खीरे का रूप धारण कर लिया ..जो उसकी चूत में जाकर कोहराम मचाने को तैयार था ..


पंडित जी का कुर्ता और शीला की साडी और ब्लाउस अभी तक अपनी जगह पर ही थे ..


पर शीला की चूत में आग इतनी भयंकर लगी हुई थी की उसकी अरजेंसी में चुदाई करना जरुरी था ..इसलिए उसने पंडित जी के लंड को अपनी चूत के ऊपर रखा और माखन से भीगी हुई चूत की चिकनाई का उपयोग करते हुए उसे पूरा निगल गयी ..


एक ही बार में ..


पूरा अन्दर ..


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ......पंडित जी ....उम्म्म्म ....तरस गयी थी मैं ...इसे अन्दर लेने के लिए ...अह्ह्ह्ह्ह ...मारो मेरी ...चूत ...आज ....जोरों से ...हिला डालो ...मुझे ...बुझा दो मेरी सारी प्यास ... अह्ह्ह्ह्ह ...''


पंडित तो अपनी जगह पर पडा रहा पर शीला ने अपने कुल्हे उठा कर पंडित के लंड के ऊपर मारने शुरू कर दिये ..


और लगभग दस मिनट की चूत मरवाई के बाद जैसे ही शीला को लगा की वो झड़ने वाली है ..उसने पंडित जी का लंड निकाल लिया ...और सीधा उसे अपने मुंह में लेकर चूसने लगी ..


इतना गीला लंड और वो भी उसकी चूत के रस में नहाया हुआ ..ऐसा लगा उसने कोई स्क्वेश पी लिया है ..पंडित को उसकी हरकत पर प्यार आ रहा था ..पर वो अपने हाथों को सर के नीछे रखकर बस तमाशा देखता रहा ..


शीला बेड पर खड़ी हो गयी ..और आनन फानन में उसने अपनी साडी निकाल कर नीचे फेंक दी ..और पंडित के शरीर के दोनों तरफ पैर रखकर खड़ी हो गयी ..और फिर अपना ब्लाउस और ब्रा भी निकाल कर नीचे फेंक दिया ..