बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई

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बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 09:45

बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई-- 1

रवि की शादी हुए 2 साल हो चुके थे. रीमा नाम है उसकी बीबी का. रवि का गारमेंट बनाने की फॅक्टरी है. उसके कारखाने मे बनाए हुए लॅडीस नाइटी बहुत पॉपुलर है. काफ़ी सेक्सी नाइटी बनता है. कभी कभी अपनी फॅक्टरी की बनी हुई नाइटी को और कांट छ्चांट कर अपनी बीबी रीमा के लिए घर ले कर आ जाता था. रीमा के गौरे और सुंदर बदन पर यह नाइटी काफ़ी सेक्सी लगती थी. उसके बदन पर नाइटी से ज़्यादा उसका बदन झलकता था. रवि भी चाहता था की रीमा जब रात को रूम मे आए तो उसके मखमली बदन को देखनाए के लिए ज़्यादा तदफ़ना ना पड़े. उसकी गौरी चीटी चुचिया उसकी नाइटी से झलक पड़ती थी. उसे देखकर रवि का लंड हमेशा फड़फदता रहता था.

रीमा प्रेग्नेंट है और उसकी डेलिवरी का टाइम आ चुका था. रीमा ने अपने पिहर फोन करके अपनी चचेरी बहन रोमा को बुलवाया था. रोमा अपनी एक और बहन लीना के साथ अपने जीजी के घर पर आती है. लीना को पैंटिंग करना पसंद था. वो अपनी पैंटिंग की प्रदर्शिनी लगवाना चाहती थी इसीलिए रोमा के साथ चली आई. लीना एक कुशल डॅन्सर भी थी. कॉलेज के फंक्षन मे जब वो डॅन्स करती थी तो काई मनचलो की दिल की धड़कन बढ़ जया करती थी. रोमा जब पिच्छली बार एक साल पहले जब अपने जीजी के घर आई थी तब रीमा, रवि और रोमा काफ़ी हँसी मज़ाक कर के अपना टाइम पास कर लिया करते थे. रोमा अपने जीजू के काफ़ी करीब हो गयी थी. हालाँकि उनके सरिरिक संबंध नहीं बने थे लेकिन अपनी जीजी के सामने रवि से काफ़ी लिपट छिपात कर रहती थी. आलिंगन और चुंबन तक ही संबंध कायम हो पाए थे. और रीमा भी उसे बुरा नही मनती थी. कहती थी की जीजा और साली के बीच मे यह सब चलता है. रीमा, रोमा और लीना आपस मे चचेरी बहाने थी. उनकी उमरा मे ज़्यादा फराक नही था. तीनो काफ़ी गौरी और सेक्सी बदन की मलिक थी. तीनो

मे कौन ज़्यादा खूबसूरत है यह कहना काफ़ी मुश्किल था. जब शाम को रवि घर आया तो उसने बेडरूम से काफ़ी आवाज़े और हँसने की आवाज़े सुनाई दी. वो समझ गया की रोमा आ गयी है. उसका मून हिचकोले खाने लगा. क्यों नही आख़िर उसकी सबसे सेक्सी साली जोत ही. वो जैसे ही रूम मे घुसा तो देखता है की उसकी साली एक नही दो-दो सालिया रीमा के साथ बेड पर बैठ कर उसके द्वारा लाई गयी नाइटी को देख रही है. रवि सीधा रोमा के पीच्चे जाकर उसकी आँखों को अपने हाथों से बूँद कर अपने से चिपका लिया. रोमा कहने लगी, "आरे क्या जीजू, बड़ी देर करदी घर आने मे. हम लोग तो आज ही आने वेल थे फिर भी देर से आए हो." रवि ने पलट-ते हुए जबाब दिया, "सॉरी मी डार्लिंग. तोड़ा ऑफीस मे काम आगेया था इसलिए लाते हो गयी. चलो अब माफ़ कर दो." रोमा ने रवि के हाथों को अपने हाथों मे लेते हुए कहा, "चलो माफ़ किया. लेकिन आपको भी हमारी जीजी का ध्यान रखना चाहिए. इस हाल मे ज़्यादा अकेले नही छ्चोड़ना चाईए." तभी लीना बोल पड़ी, "हम भी है इस महफ़िल मे." रवि लीना की तरफ आँख मरते हुए बोला, "अब तुम्हारी जीजी को तो क्या, तुम दोनो को भी अकेले नही छ्चोड़ूँगा." फिर रवि लीना को तोड़ा खिसका कर वहीं बेड पर ही अपने लिए जगह बना कर बोला, "क्या बात है. नाइटी की प्रदर्शिनी लगा रखी है." रोमा ने एक नाइटी को उठाकर उसके बीच मे से झनखटे हुए बोली," नही जीजू. हम सब तो यह देख रहे थे की इन नाइटी को पहने के बाद बदन पर नाइटी दीखती है या हमारा बदन."लीना आँख मरते हुए बोली, "जीजू बड़ी सेक्सी नाइटी डिज़ाइन करते हो. पूरा बदन उघड़ कर रख देती है." रवि भी हाज़िर-जवाब था. तुरंत बोल पड़ा, "जाओ इने पहनकर आओ. हम भी देखें की हमारी नाइटी ज़्यादा सेक्सी है या तुम्हारा बदन." इसी तरह उनके बीच हँसी मज़ाक चल रहा था. तभी एक जोक्स के बीच रीमा को ज़्यादा ही हँसी च्छुत गयी. ज़्यादा हँसने से उसके दारद उठाने लगा. सो फॉरून रीमा को ले कर वो तीनो हॉस्पिटल रवाना हो

गये. और आधे घंटे के बाद नर्स ने एक लड़के के जानम लेने की बधाई उनको दी. रवि, रोमा और लीना तीनो ही लड़के के जानम पर काफ़ी खुस हुए. और एक दूसरे को बधाइयाँ दी. फिर डॉक्टर. की इज़ाज़त ले कर अंदर जा कर रीमा को भी बधाई दी. रात को रुकने के नाम पर पहले तो डॉक्टर. ने सॉफ माना कर दिया पर ज़्यादा ज़ोर देने पर डॉक्टर. ने कहा, "चलो आज रात तो एक जान रुक सकता है लेकिन कल किसी को रुकने की इज़ाज़त नही दूँगी. आख़िर हमारी नर्से है जच्चा और बच्चा की देखभाल के लिए." एक रात के लिए हन भरने पर रोमा ने वहीं रुकने का फ़ैसला लिया. रवि रोमा को वहीं रुकते देख तोड़ा मायूष हुवा क्योंकि वो आज रात रोमा के साथ सेलेब्रेट करने का प्लान बना रहा था. लेकिन कुछ ना कहकर लीना को लेकर वापस घर की चल पड़ा. घर के नीचे लीना को छ्चोड़ उस-से कहा की मई आधे घंटे मे आता हूँ. रवि आधे घंटे बाद एक विस्की की बॉटल और एक शमपने की बॉटल

ले कर घर पर आ गया. ड्यूप्लिकेट चाबी से दरवाज़ा खोल लीना को आवाज़ दी. लीना उस समय बाथरूम मे थी. बाथरूम से वापस जवाब दिया, "जीजू बातरूम मे नहा रही हून. पंधराह बीस मिनिट मे आती हून." रवि लीना को बाथरूम मे देख हॉल मे विस्की की बॉटल, आइस और ग्लास लेकर सोफा पर ही पसार गया. साथ ही VCड प्लेयर चालू कर एरॉटिक डॅन्स की एक Cड चालू कर दी. Cड मे इंग्लीश धुन के साथ काई लड़किया आधी से ज़्यादा नंगी हो कर नाच रही थी. रवि भी इंग्लीश धुन के साथ बैठा बैठा झूम रहा था. उसकी भूखी आँखे उन गौरी लड़कियों के बदन पर जमी हुई थी. उसका भूखा लंड भी उनको नंगा देख बैचेनी से अंदर ही अंदर मचल रहा था. भूखा तो होना ही था कारण की डॉक्टर. ने रीमा के साथ सोने से पिछले एक महीने से ना कर रखा था जो. जब तक लीना बाथरूम से आई तब तक रवि दो पेग चढ़ा चक्का था. उसके आँखों मे विस्की का शरूर चढ़ने लग गया था. लीना ने अपनी जीजी रीमा की एक नाइटी निकल कर पहन ली. जब काँच से अपने बदन को देखा तो कुच्छ झेंप सी गयी. बदन पर नाइटी तो थी फिर भी पूरा बदन सॉफ दिखाई दे रहा था. काँच मे अपने बदन को गौर से देखने लगी. अपने दोनो हाथों से अपने निपल्स को दबाने लगी. रूम मे बैठकर चारो जब हँसी मज़ाक कर रहे थे तभी से ही उसकी चूत

मे खलबली मची हुई थी. नों-वेग. जोक्स से पूरे बदन मे स्त्री और पुरुष के संबंध की विवेचना चल रही थी. साथ मे जीजू का बारबार उसके गालों पर चुंबन उसको वासना की आग मे जला रहा था. मान ही मन जीजू के टेस्ट के दाद देने लगी. फिर भी उसने उसके उपर एक झीना गाउन और पहन लिया. हॉल मे पहुँची तो उसकी आग और बढ़ गयी. टV मे मादक धुन के साथ नाच रही इंग्लीश मेमो को अपने बदन पर से बचे कुचे कपड़े उतार कर फेंकते हुए देख उसके दिल की धड़कन और बढ़ गयी. खुद एक अच्च्ची डॅन्सर तो वो थी ही. पीछे से आकर अपना चेहरा जीजू के गाल से चिपका कर बोली, "बोलो क्या बोल रहे थे." रवि ने कहा कुच्छ नही. आओ बैठो. लीना वहीं खड़ी खड़ी बोली, "अकले ही पियोगे या हमे भी कुच्छ चखने दोगे."

रवि ने अपनी ग्लास को लीना के चेहरे के नज़दीक ला कर उसके मदमटे होठों से लगा दिया. लीना एक साँस मे ग्लास मे जितना था (आधे पेग

से भी ज़्यादा) गतक लिया और लगी खांसने. अपना मुह्न बिगाड़ते हुए

बोली, "अफ, कैसी कड़वी है यह सराब." रवि हुँसने लगा. फिर लीना को अपने करीब खींच कर उसके होठों पर पड़ी सराब की कुच्छ बूँदो को छत लिया और बोला, "हमे तो कड़वी नही लगती. लगता है पहली बार टेस्ट कर रही हो."

लीना की उखड़ी साँस थोड़ी शांत हुई तब बोली, "हा, फल्ली बार पी रही हूँ. इससे पहले एक दो बार बियर ज़रूर पी है." फिर टV पर डॅन्स देखने लगी. रवि निब भी लीना को अपने पास सोफा पर बैठाकर एक-दो घूँट और पीला दिया. नशा जब हल्का हल्का चढ़ने लगा तो लीना बोली, "क्या ऐसा डॅन्स देख रहे हो. इससे अच्छा तो मे नाच सकती हून." रवि ने पहले सोचा की सायद नशा होने की वजह से वो बोल रही होगी. लेकिन दूसरी बार कहने पर उसने टV बूँद कर दिया और बोला, "तो दिखाओ मेरी जान. हम भी देखें तुम कितना अच्च्छा नाच सकती हो." चेल्लेंज मान कर लीना ने एक ऑडियो Cड लगा कर

नाचना चालू कर दिया. ऑडियो Cड रीमिक्स सॉंग्स कीट ही. और पहला गाना ही "काँटा लगा" था. लीना काँटा लगा की धुन पर नाचने लगी. इसी बीच जो झीना गाउन पहने हुए थी उसे निकाल कर रवि की और उछाल फेंका. रवि की साँसे ये सब देख कर भारी हो उठी. उसेके पूरे सरीर मे वासना की लहरे हिलोरे मार रही थी. लंड उत्तेजना से पागल हो रहा था. पूरे बदन मे लहू सन-सन-सन करके दौड़ रहा था. लीना का बदन कहीं से भी स्थिर नही था. उसका जलवा अपने पूरे उफान पर था. कभी नज़दीक आकर तो कभी डोर से ही रवि को अपने बदन की नुमाइश कर के उकसा रही थी. सराब और सबब अपने पूरी जवानी पर था. पूरा हॉल मे ज़ोर ज़ोर से उठ बैठ रही साँसे म्यूज़िक से ताल से ताल मिला रही थी. लीना हर ढूँ के साथ अपनी तालमेल बैठा कर रवि को बेकाबू करने मे लगी थी. रवि भी बेकाबू हो कर अपने सुख रहे होठों पर जीभ बार बार सहला रहा था. लीना की भारी भारी छातियाँ उच्छल उच्छल कर रवि को आमंत्रण दे रही थी की आओ मुझे दाभोच लो. उसकी मस्त जंघे हाथी की सूंड की तरह झूम रही थी. कभी फैला कर तो कभी सिकोड कर अपनी चूत को दिखा और छुपा रही थी. पीच्चे घूम कर अपने चूतड़ मटका मटका कर नाच कर रवि के लंड को पूरी तरह बेकाबू कर दिया. तभी रवि सोफे से उठकर लीना के पास जा ही रहा था की लीना ने उसको वापस धकेल कर सोफा पर वापस बैठा दिया और अपने चूतड़ को उसकी जाँघो पर रख कर उसके लंड को रगड़ने लगी. लंड इस रागड़ाई से एकदम बोखला गया. रवि के बदन का सारा लहू मानो इस वक़्त उसके लवदे मे समाया हुआ था. उसने अपने दोनो हाथों से लीना के कबूतरो को जाकड़ लिया. भारी भारी दोनो उरोज रवि के हाथों मे भी नही समा रहे थे. चिकनी निघट्य की वजह से दोनो कबूतर उसके हाथ से फिसल रहे थे. लीना के कबूतर शिकारी को इतना नज़दीक देख कर फड़फड़ने लगे. रवि ने पागल होते हुए उसकी नाइटी को उरजो के सामने से पकड़ कर फाड़ दिया और उसके बूब्स को अपने हाथो मे लेकर तोलने लगा. फिर उसके दोनो निपल्स को अंगुली के बीच मे लेकर ज़ोर

से मसल दिया. लीना के मुहन से सिसकारी निकल गयी. "उउईए माआ..... धीरे से." रवि ने आराम से उसकी चुचियो को सहलाने लगा. लीना अपने चूतड़ की

रागड़ाई चालू रखी थी. रवि के लंड को काफ़ी दीनो बाद चूत की महक मिल रही थी. फिर यह तो साली की चूत. नशा सराब के साथ सबब का डबल हो रहा था. उसके नशीले बदन को अपनी बाहों मे समेत कर इस रगड़ाई को रोक कर अपनी अनियंत्रित हो रही सांसो को समेटने मे लगा. लीना के शरीर को सामने कर उसके रसीले होठों को चूमने लगा. उसके होठों के रूस को पीकर वो और मतवाला हो गया. अपनी जीभ को लीना की जीभ से टकरा रहा था. दोनो की जीबे पेंच लड़ा रही थी और हाथ उसके दोनो कबूतरो को अपने मे समाते हुए धीरे धीरे मसल रहे थे. रवि होतो से अपने होतो को च्छुदा कर अपनी जीभ को लीना के उरजो की तरफ ले आया. "अफ क्या कयामत है," ऐसे कहते हुए अपनी जीभ से उसके गुलाबी चूचियो चाटने लगा. लीना के मूह से सिसकारी निकल रही थी. उसके दोनो उरोज भारी हो चुके थे. उसकी साँसे ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे होने लगी. "और ज़ोर ज़ोर से मेरी चुची को मसालो, बहुत मज़ा आ रहा है. तुम्हारे हाथ मे जादू है. इधर तुम मेरी चुची

को दबा रहे हो और उधर मेरी चूत पानी छोड़ रही है," लीना बेकाबू हो कर बड़बड़ाने लगी. दोनो निपल्स कड़क हो कर रवि के मूह मे जाने को उतावले थे. फिर बेकाबू हो कर चीख पड़ी, "सक इट. टके इट इन युवर मौत."

रवि निब ही अपने होठों को खोलकर उसके एक निपल को अपने बीच दबा लिया. "एस्स... एस्स... जीजू.... ऐसे ही चुसो....देखो मेरे निपल्स की खाज मिटा दो," लीना अपनी चाहत च्छूपा नही पाई. "ऊउउफ्फ्फ..ऽअ.. हह.. आआ.. हह प्लीज़ तोड़ा धीरे.... कतो ना..... उूउउइइ और ज़ोर से चूसो मेरे बूब्स को."

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Re: बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 09:46

दोनो निपल्स को बरी बरी से अपने मूह मे लेकर चूसने के बाद रवि खड़ा होकर लीना को अपनी बाहों मे लेकर उसके पूरे बदन को जाकड़ लिया. ऐसा कस कर आलिंगन किया की लीना के मूह से चीख निकल पड़ी. `जब तुम्हारी चूंची इतनी खूबसूरत है तो छूट तो और भी खूबसूरत होगी," कहकर रवि उसके बदन पर लिपटी नाइटी के बाकी हिस्से को भी फाड़ने लगा. लेकिन लीना उसको रोकते हुए कहा, "उफ़फ्फ़... इतने बेकाबू क्यों हो रहे हो. पहले मुझे अपना झुनझुना तो दिखाओ. मुझे भी उससे खेलना है." रवि बेकाबू था लेकिन लीना वापस बोल पड़ी, "तुम अपना लंड मुझे दिखाओ मई तुम्हे अपनी चूत दिखा दूँगी." लीना ने अपने हाथ को बढ़कर रवि की पंत टटोलने मे लग गई. उसे अपना खिलोना चाहिए था. उसका खिलोना भूके शेर की तरह अपने

पिंजरे मे उच्छल कूद मचा रहा था. लीना का हाथ उस पिंजरे की तरफ बढ़ कर उसके पहले तले यानी पंत की चैन को खोल दिया. रवि ने उसके दोनो कबूतरो को सहलाते हुए अपनी पंत को नीचे की और खिसका दिया ताकि लंड को बाहर निकालने मे ज़्यादा परेशानी ना हो. फिर लीना घुटने के बुल बैठकर अंडरवेर की क़ैद मे बैठे उस भूके शेर की दहाड़ सुनने लग गई. उसका फूला हुआ लंड अंडरवेर मे मचल रहा था. लीना ने अपने हाथो से उसको पूछकर कर शांत करने की कोशिश की. जब लंड ज़्यादा ही मचलने लगा तो अपने होठों से रवि के लवदे को अंडरवेर के साथ ही दबा लिया. अब बरी थी रवि के सिसकरने की. एक महीने मे डॉक्तोर्र. के ना करने के कारण वो अपनी बीबी,

रीमा, को छोड़ नही पाया था लेकिन यादा-कड़ा रीमा अपने हाथ से रवि के लंड को मसल ज़रूर देती थी. लीना उसके लंड को अंडरवेर के उपर से चाटने लगी. लंड फूल कर एक दम भड़क उठा. तभी लीना ने झटके से अंडरवेर खींच कर नीचे खिसका दिया. रवि का लंड एक दूं टन कर लीना के मूह के सामने नाचने लगा. "अफ... क्या मोटा लंड है तुम्हारा जीजू," कह कर अपने हाथों मे समेत लिया लीना ने. लेकिन लंड पूरा का पूरा हाथों मे आया कहाँ था. मोटे के साथ साथ पूरा 9" का लूंबा लंड था रवि का. लंड का सुपरा भुक्कड़ की तरह लीना का चेहरा देख रहा था. लीना ने लंड को अपने हाथों मे लेकर उसकी चाँदी को उपर-नीचे करने लगी."सचमुच तुम्हारा लंड तो बहुत लंबा और मोटा है," लीना के मूह से निकल पड़ा. रवि से अब रहा नही जा रहा था. लीना ने अपनी जीभ निकल कर लंड के सुपरे को धीरे-धीरे चाटने लगी. रवि का लंड उचक-उचक कर उच्छल रहा था. तोधी देर डाक लीना उसके सुपरे को ही छत रही थी. रवि और ज़्यादा बेकाबू होने लगा. उससे रहा नही जा रहा था. वो काँपते हुए स्वर मे

बोला, "आरीए, मेरी साअली, अब तो "टीज़िंग" बूँद करो. मेरे लंड को चूसो."

लेकिन लीना ने सुपरे को चाटना नही छ्चोड़ा. वो रवि को और भड़कना

चाहती थी. मर्द जब ज़्यादा भड़कता है तो औरत की चुदाई भी उतनी

ही ज़्यादा कर्ता है. लीना अपनी चूत की छुड़वा बहुत ज़ोर से करवाना चाहती थी. कारण यह था कॉलेज मे अपने बाय्फ्रेंड से उसकी सात- आठ बार जो चुदाई हुई थी वा जल्दी जल्दी हो गयी थी क्योंकि कोई आकर डिस्टर्ब ना कर दे या कोई आकर देख ना ले. एक बार उसकी फ्रेंड की चुदाई किसी ने देख ली थी तो उसको अपनी चूत कॉलेज के डूस-बारह स्टूडेंट के साथ एक साथ चुदवानि पड़ी थी. पर यहाँ तो रवि का लंड भड़कता ही जा रहा था. उसने लीना को

कहा, "साली मदरचोद, चूस मेरे लंड को. पूरा का पूरा खा जा मेरे

लंड को. साली यह लंड एक महीने से तरस रहा है और तुझे "टीज़िंग" की पड़ी है. अगर नही चूसाती तो मे तेरी चूत को ऐसा चोदुन्गा कितु भी जिंदंगी भर याद रखेगी." लीना का मकसद पूरा हो गया. वो रवि को ऐसे ही भड़कना चाहती थी. तभी रवि ने उसके बॉल पकड़ कर अपना पूरा नो इंची लंड उसके मूह मे गॅप से डाल दिया. "ले च्चिनाल चूस मेरे लंड को. बहुत ज़्यादा मटक रही तीन ना. अब चूस मेरे लंड को." रवि का लंड आठ इंच तक ही लीना के मूह मे घुस पाया. बाकी एक इंच बाहर ही रहा. उसके लंड का किनारा उसके मूह की आख़िरी दीवार को छ्छू गया था. लीना को साँस लेने मे तकलीफ़ होने लगी थी. उसने रवि के लंड को पूरा बाहर निकाल कर कहा, "जीजू, मार ही डालोगो क्या. तोड़ा सब्र करो. चूसाती हू तुम्हारे मूसल लंड को."

फिर लीना ने लंड को हाथ से पकड़ कर जो चूसैई की रवि तो पागल हो गया. उसे लगा अगर मेने अपने लंड को बाहर नही निकाला तो मेरी पिचकारी अभी छ्छूट जाएगी. उसने अपना लंड बाहर निकल कर लीना को खड़े कर अपनी बाहों मे उठा लिया और उसके होठों को चूमते हुए अपने बेडरूम की और चल पड़ा. बेडरूम मे बेड पर लीना को सुलते हुए उसकी नाइटी के बाकी कपड़ाए को फादते हुए उसकी जाँघो को चाटने लगा. लीना की गुदाज़ जंघे मखमल की तरह नरम और दूध जैसी गौरी थी. रवि उन जाँघो को चुसते हुए अपने हाथो को उसकी झांतो को सहलाने लगा. अफ क्या नरम नरम झांते थी. रवि तो झांतो मसालते हुए उसकी उठी हुई बर(चूत) को देख पागल हो गया. अपनी

उंगली को धुस से उसकी कोमल चूत मे धकेल दिया. लीना के मूह से निकल पड़ा, "उउईइ मा. धीरे से." रवि उसकी जाँघो को छ्चोड़ आस्की चूत की आस-पास अपनी जीभ से चाट रहा था और अपनी एक उंगली को उसकी चूत की उंगली-चुदाई कर रहा था. थोड़ी देर मे ही लीना बोल पड़ी, "है! क्यों टाइम बर्बाद कर रहे हो? मेरे चूत को उंगली नहीं चाहिए. अभी तुम इसको अपने जीभ से छोड़ो. बाद मे उसको अपना लंड खिलाना. वो तुम्हारे लंड खाने के लिए

तरस रही है." तभी रवि ने अपनी उंगली निकाल कर उसकी जगह अपनी जीभ को लगा दिया. उसके दाने को चूस कर अपनी जीभ को उसकी चूत की गहराई मे

उतार दिया. लीना मादक स्वर मे कहने लगी, ""है! काया चीज़ बनाई है भगवान ने, चूसो चूसो, और ज़ोर से चूसो मेरी चूत को. और अंदर तक अपनी जीभ घुसेदो. है! मेरी छूट के दाने को भी चातो. बहुत मज़ा आ रहा है." रवि ने उसकी चूत चूस चूस कर उसकी हालत खराब कर दी. लीना बैठ कर अपनी चूत को रवि के मूह पर धक्के लगाने लगी. साथ ही बाद-बड़ा रही थी, "एस डार्लिंग, चूसो मेरे राजा, चूत को को चूसो, अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर तक चूसो. एस बड़ा मज़ा आ रहा है जीजू. एस, एस, चूसाते जाओ. मेरे दाने को भी चूसो. आहह, एस, चूसो. लो मेरी छूट का पानी निकल रहा है. आहह, ऊहह, चूसो बहुत दीनो बाद मेरी चूत का पानी निकलेगा. चूवस्स्स्तीए रहो, एस, एस, एस, ओह, ओह, क्या जीभ से चोद रहे हो. लगता है यह जीभ नही, तुम्हारा लंड है. आआहह, और हूओसो,

ह, मेरा पााअनी निकल रहा है. ऑश एससस्स, मेरा पानी निकल आआआआआआ......" लेकिन रवि ने उसकी चूत को छ्चोड़ा नही. वो बहुत देर तक चूसाता रहा जब तक उसकी जीभ नही तक नही गयी. लीना की चूत की खाज और ज़्यादा बढ़ गयी. लेकिन अब वा अपनी चूत को चटवा कर नही बल्कि

असली खेल कर अपनी प्यास बुझवाना चाहती थी. उसने अपने हाथ बढ़ा कर रवि के लंड को अपने हाथ मे लेकर आयेज पिच्चे करने लगी. जब लंड एकदम मूसल हो गया तो अपनी चूत को उसके मूह से हाता कर उसके लंड पर बैठ गयी. रवि के लंड को और क्या चाहिए. उसका लंड तो चूत का प्यासा था. चूत को देख कर लंड अपनी जगह पर ही उच्छल- कूद मशीन लगा. रवि ने अपने हाथ बढ़ा कर अपने लंड के सुपरे को लीना की चूत के मूह पर रख दिया. लीना ने उपर से बैठे बैठे अपनी चूत को तोड़ा धक्का दिया तो रवि का लंड फुररररर करके उसकी चूत मे जा कर फँस गया. इसी के साथ लीना के मूह चीख निकल पड़ी. यह चीख दर्द भारी नही थी बुल्की आनंद से भारी थी.

लीना रवि के उपर बैठ कर अपनी चूत की खाज मिटाने लग गयी. अपनी चूत की जाकड़ मे लंड को ले कर उच्छल-कूद मचाने लगी. साथ ही उसके मूह से सिसकारियाँ निकल रही थी. रवि अपने हाथो से उसके मुम्मे पकड़ कर सहला रहा था. लीना उसकी च्चती पर हाथ रख कर अपनी चूत खुद ही चुड़वा रही थी. आनंद से मदहोश हो कर चुड़वा रही थी. स्पीड धीरे-धीरे बढ़ कर अपनी चरम सीमा पर चली गयी. फुल फास्ट स्पीड मे चुड़वाने से लीना की सिसकारी बड़बाधत मे बदलने लगी. "एस.. एस.. क्या मज़ा आ रहा है.. एस.. एस.. आज बहुत दीनो बाद चूत को मज़ा मिल रहा है.. श.. क्या जन्नत का मज़ा मिल रहा है.. उफ़फ्फ़.. जीजू तुम्हारा लंड एक दूं लोहे के जैसा सख़्त है... अफ... मेरी चूत... है... मैं .... आहह... मेरी चूत का पानी निकालने वेल हा... ऑश... क्या हो रहा है मुझे... है... मेरी चूत... उफफफ्फ़... मेरा पानी निकला... येस.ंएर पानी निकला... एस... उउई... एस... मेरा पानी निकल गया..." ऐसा कह कर लीना उसकी च्चती पर गिर कर लंबी-लंबी साँसे छ्चोड़ने लगी. चूत का पानी निकलते हुए वो अब हल्के हल्के धक्के मार कर एकदम से निढाल हो गयी. रवि ने अपनी बाहों मे भरकर उसके होठों को अपने होठों से जाकड़ लिया. थोड़ी दे बाद जब लीना की धड़कन एकदम नॉर्मल हुई तो अपने सरीर से उसे उतारकर अपने बाजू मे सुला लिया और उसके बूब्स को सहलाता हुआ एक मुममे को मूह मे दबा लिया. थोड़ी देर मे दोनो मुममे को चूस कर अपनी उंगली से उसकी चूत के दाने को सहलाने लगा. उसकी चूत को सहला कर उसकी छूट की चुदाई की तय्यरी कर रहा था. उसका भूखा लंड अब उसे चोदने को एकदम तय्यार था. लीना के मूह से जब सिसकारी निकालने लगी तो उसे डॉग्गी स्टाइल मे लेता कर उसके चूतड़ो को अपने हाथ से सहलाने लगा. उसकी चूत दोनो चूतड़ो के बीच एकद्ूम से दबी हुई थी. अपने लंड को हाथ मे लेकर उसके चूतड़ो पर हल्के से सहला रहा था. लीना की चूत काफ़ी गरम हो चुकी थी. उससे अब सहा नही जा रहा था. वो बोल पड़ी, "है जीजू, क्यों तडफा रहे हो. लंड हुमारी चुदासी चूत को दिखा रहे हो और उसको चूत के अंदर नही पेल रहे हो. अब जल्दी से अपने मूसल जैसे लंड को चूत मे घुसाओ, प्ल्ज़्ज़.' तभी अपने लंड को उसकी चूत की खाई के सामने रखकर उसकी दरार मे टीका दिया और एक ज़ोर का धक्का मारा की लीना के मूह से आनंद-भारी चीख निकल पड़ी. "है.. दैया." लंड आधा एक ही धक्के मे छूट के अंदर घुस गया. दूसरे धक्के मे लंड पूरा का पूरा चूत के अंदर था. रवि ने धीरे-धीरे अपने धक्के लगाने चालू रखे. लंड छूटमे पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहा था. उसका लंड चूत की गर्मी पाकर और फूल गया. लीना भी धक्के का जवाब धक्के से दे रही थी. फिर अपने हाथ बढ़ा कर रवि ने लीना के मुममे को अपनी गिरफ़्त मे ले लिया और धक्को की स्पीड बढ़ा दी. लंड चूत की जड़ तक जा रहा था. रवि का लंड छूट के धक्के से एकदम बेकाबू हो उठा. रवि के मूह से आवाज़े आनी शुरू हो गयी. "लो रानी... मेरे लंड के झटके... खाओ, खूब खाओ.. देखो तुम्हारी छूट की प्यास बाकी नही रहे.. लो यह लो.. " लीना की छूट धक्के पर धक्के खा कर अपना पानी छ्चोड़ना शुरू कर दिया. "एस.. मेरे जीजू... उउफ्फ.. मरो धक्के.. और मरो धक्के... मेरी छूट से फिर से पानी निकल रहा है. तुम्हारा सख़्त लंड ही मेरा पानी इतनी जल्दी-जल्दी निकल पाया." फिर भी रवि अपने धक्के मरने चालू रखा. वो भी अपना पानी निकलना चाहता था. लीना ने देखा की रवि इसी तरह छोड़ता रहा तो पानी उसकी छूट मे ही छ्चोड़ देगा तो अपनी चूत को एकद्ूम से हटा लिया. रवि चिहुनक पड़ा, "यह क्या रानी. मेरा पानी निकालने वाला था." "यही तो मैं नही चाहती की तुम मेरे अंदर झड़ो. मैं तुम्हारे वीर्या को अपने पूरे बदन पर झाड़वाना चाहती हून." "ऐसी बात है तो लो अपना मुहन खोलो और इसको चूसो. अब तोड़ा

इंतज़ार करना पड़ेगा मेरे झदाने का." लीना ने रवि के लंड को हाथ से पकड़ कर पहले अपने मुम्मो पर सहलाया फिर लेट कर उसके मूसल को अपने दोनो बूब्स के बीच दल कर रवि से बोली, "लो जीजू, अब मेरे टिट्स को चोदो. अपने लंड को मेरे बूब्स की खाई मे डाल कर यहाँ भी अपना झंडा गाड़ दो."

रवि अपने लंड को लीना के कबूतरो के बीच मे लाकर उसकी टिट- फक्किंग चालू कर दी. लेकिन जो टेंपो डॉग्गी-स्टाइल मे बना हुया था वो वापस नही बन रहा था. पानी निकलता नही देख उसने अपना ध्यान उसके कबूतरो पर टीका दिया. "मेरी प्यारी साली, अब इस टिट-फक्किंग के बाद तुम्हारी चूत की फिर एक

बार चुदाई करूँगा. तेरे कबूतरो का जवाब नहिन.....तेरे बूब कितने मलाई जिट्नी चिकान्य है....ऽउर तेरे गुलाबी निप्प्लेस...इनेह तो मैं खा जाऊँगा," कहता हुआ अपने लंड को मुम्मो से निकाल कर उसके उपर टूट पड़ा और उसकी चुचियों को मसल मसल कर दबोचने लगा. "प्लीज़ मेरी चुची को और ज़ोर से दब्ाओ, बहुत मज़ा आ रहा है. मुझे नशा सा हो रहा है. तुम मेरी चुची दबा रहे हो और मेरी चूत मे कुच्छ कुच्छ हो रहा है. है! तुम्हारा तो लंड भी अब वापस से कड़क हो गया है." लीना नीचे पड़ी पड़ी अपनी चुचियों की खाज मिटा रही थी. जीजू को पागल हटे देख उसकी छूट मे खाज शुरू हो गयी थी. अपनी छूट पर उसके लंड को रख कर अपने बदन को उसके बदन से जाकड़ लिया और कहने लगी, "मुझे छूट में अहुत..ऽआह....खुज्ली हो रही है..... अब अपना चाकू मेरी छूट पे छाला दो...... मितादो मेरी खुजली..... मिताआओ." लीना को भी तड़फते देख अपने लंड को उसकी छूट के उपर रख कर एक ज़ोर से धक्का दिया और बोला, "ही! मेरी रानी, ले! लीईए! और ले, जी भर कर खा अपनी चूत मे मेरे लंड के धक्के." फिर धक्के पर धक्के चालू हो गये. थोड़ी देर तक कमरे मैं केवल "अफ" "है" "श" की ही आवाज़े आ रही थी. तभी रवि और लीना दोनो एक साथ ही चीख पड़े. दोनो का ही पानी एक साथ च्छुटने लगा. दोनो निढाल हो कर पलंग पर लेते रहे और उसी हालत मे नींद आ गयी.

The Romantic
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Re: बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 09:50

बीबी का नौवा महीना - साली ने आग लगाई {पार्ट --2}

सुबह लीना ने उठकर रवि को उठाया. रात की मस्ती झड़ी नही थी. एक बार फिर दोनो आपस मे लग कर चुदाई शुरू कर दी. रवि लीना को नीचे ले कर कस कस कर उसकी चूत को चोदना शुरू कर दिया. सिसकारीओं से कमरे का वातावरण काफ़ी मदहोश हो गया. लीना नीचे से हर धक्के का जवाब अपनी सिसकारी से दे रही थी. "सचमुच तुम्हारा लंड तो बहुत लंबा और मोटा है. उस लड़की को बहुत मज़ा आएगा जो तुमसे चुड़वाएगी," लीना रवि से चुदवाती हुई बोली. रवि कस-कस कर धक्के मारते हुए बोला, "हां जाने-बहार, तुम्हारी चूत भी एकदम लाज़वाब है. लगता है इसे चोदता ही जाऊं." नीचे से लीना सिसकारी मारते हुए बोली, "ओह्ह! मेरे राजा और पेलो और पेलो अपनी रानी की चूत मे अपना मोटा लंड. आ! मेरी चूत तुम्हारा लंड खा कर निहाल हो रही है. हाया! लंबे और मोटे लंड की चुदाई ही कुछ और ही होती है. बस मज़ा आ गया. हाँ हाँ, तुम ऐसे ही अपनी कमर उच्छाल उच्छाल कर मेरी चूत मे अपने लंड से धक्का मारते रहो. मेरी चूत को भी बहुत दीनो से शौक था तगड़ा और लंबा लंड खाने का. उसको और ज़ोर ज़ोर से खिलाओ अपना लंबा-तगड़ा लंड." लेकिन जल्दी ही ख़तम हो गयी उनकी चुदाई. दोनो का पानी आधे मिनिट के फराक पर निकल गया. लीना ऐसी चुदाई पा कर मस्त हो गयी. रात की चुदाई से ज़्यादा कड़क चुदाई उसे अभी वाली लगी. हॉस्पिटल जाकर रीमा को देखने और रोमा को फ्री करने के कारण रवि को बिस्तर पर से जल्दी उतना पड़ा. बाथरूम मे जाने के बाद पता चला की बाथटब का शावर और नाल दोनो खराब हो गये है. पानी नही आ रहा था. तो रवि यह कहकर निकल गया की मैं प्लमबर को भेज रहा हून. अगर जल्दी आ गया तो ठीक है नही तो रोमा को बता देना की प्लमबर से नाल ठीक करवाना है. रवि ने हॉस्पिटल जाकर रोमा को फ्री किया और बोला की घर पहुँचकर लीना को जल्दी भेज देना ताकिवो खुद ऑफीस जा सके. रोमा घर पहुँची तो लीना बाथरूम से निकल कर अपने कपद बदल रही थी. बाथरूम मे स्टोरेज किए हुए पानी से उसने अपना काम चला लिया था. लीना के चेहरे पर छायी हुई खुशी को देखकर रोमासमझ गयी की रात भर क्या क्या हुआ होगा. फिर भी अंजान बनते हुएउसने लीना को छेदते हुए पूचछा, "है मेरी जान, बड़ी खुश दिखरही हो. रात भर सोई नही थी क्या? लगता है जीजू ने बहुत परेशान किया है." "नही तो. ऐसी तो कोई बात नही है." "अच्छा हमसे ही नाटक." "जब कुच्छ हुआ ही नही तो क्या नाटक करूँ." फिर धीरे धीरे सारी बात रात की उगल दी लीना ने. रोमा और लीना रात की बात करते करते दोनो ही उत्तेजित हो गये. आपस मे अंजाने ही एक दूसरे के बदन को सहलाने लगे. दोनो की चूते अंदर की गर्मी से पिघलाने लगी. तभी टेलिफोन की घंटी बाजी. लीना ने फोन उठाया. "मैं रवि बोल रहा हून." "बोलो जीजू, मैं लीना बोल रही हून.""देखो प्लमबर को बोल दिया है. थोड़ी देर मैं आ जाएगा. लेकिन तुम जल्दी आ जाओ. मुझे कुच्छ मेडिसिन्स लाना है फिर मैं ऑफीस निकल जाऊँगा." लीना जल्दी ही हॉस्पिटल के लिए निकल गयी साथ मे कह कर गयी की बाथरूम का नाल खराब है, प्लमबर आएगा. रोमा मान मसोस कर रह गयी. रात मे भी मौका नही मिला और अब सुबह थोड़ी बहुत गर्मी शांत होती वा भी नही हुई. आख़िर चूत तड़फती ही रह गयी. वो उसे शांत करने के लिए जीजी की एक नाइटी पहन कर बातरूम मे चली गयी. उससे बदन तो धक गया लेकिन गला काफ़ी खुला हुआ था और नीचे से भी घुटने के उपर तक ही थी. नाइटी को उतार कर जैसे हीनाल खोला तो ध्यान आया की वो तो खराब है. उसी हालत मे बैठी बैठी अपनी चूत को हाथ से सहलाने लगी. चूत को सहलाते-सहलाते उसे ध्यान ही नही पड़ा की डोर बेल कितनी देर से बाज रही है. फटा- फॅट नाइटी पहन कर बाहर निकली और गाते खोल दिया. सामने खड़ा था प्लमबर. एक मजबूत किस्म का इंसान. रंग सांवला लेकिन कद कती कसरती. वो भी अपने सामने खड़ी रोमा को देखता रह गया. अफ क्या नशीला बदन है. एक मिनी नाइटी पहने हुए तो कयामत ढा रही थी. छातियां नाइटी मे समा नही रही थी. आधे मुम्मे बाहर छलक रहे थे. गहरी साँस लेते हुए बोला, "रवि साहेब ने बुलाया है. क्या कोई नाल खराब है." "हन.. हन. बाथरूम का शावर और नाल दोनो खराब है. पानी नही आ रहा है." सुरेश, यही नाम था प्लमबर का, सीधे बाथरूम मे चला गया. बाथटब का शवर और नाल चालू कर के देखा लेकिन पानी नही आ रहा था. तो उसने शोवेर को निकाल दिया और फिर बाथरूम के अंदर बनी हुई टंकी जो सीलिंग से लगी हुई थी से नाल को चेक करने लगा. "लगता है की टंकी से पानी नही आ रहा है. उपर चेक करनापड़ेगा. कोई तबले है क्या?" रोमा ने एक मिड्ल साइज़ की तबले ला कर दी. वो उस पर चढ़ कर टंकी चेक करने लगा और बोला, "पानी तो पूरा भरा पड़ा है. पीपे और फिटिंग चेक करना पड़ेगा." यह कह कर अपनी पॅंट और शर्ट निकालने लगा. एक बनियान और स्विम्मिंग कॉस्ट्यूम जैसा अंडरवेर पहने हुया तबले पर चढ़ गया. रोमा उसके गतीले बदन को देखी तो देखते ही रह गयी. मज़दूर आदमी का जिस्म था. एक दूं कड़क. उपर से पीपे को खोलते हुआ बोला "मेमसाहेब, आप ज़रा बाथटब के पास रहना. जब पानी आए तो शावर को पीपे के उपर पकड़ कर रखना." बाथरूम मे जगह कम थी. तबले ने जगह घेर कर रखी थी. रोमा बाथटब मे जाकर खड़ी हो गयी. जब पानी आने लगा तो वो शोवेर को पीपे के उपर लगाने लगी लेकिन बाथटब मे खड़ी होने की वजह से रोमा पूरी तरह से भीग गयी. उसका बदन नाइटी से झलकने लगा. उसके कबूतर नाइटी से आधे तो पहले ही दिख रहे थे अब बाकी आधेनाइटी के पारदर्शी (ट्रॅन्स्परेंट) हो जाने की वजह से दीखने लगे. उसके डार्क निपल एक दूं से तन कर आमंत्रण दे रहे थे. जाँघों से नाइटी चिपक गयी थी. उसके उभरे हुए नितंब आकर्षित कर रहे थे. सुरेश ने जब नज़र नीचे कर यह नज़ारा देखा तो उसका लंड दान-दान करता हुआ खड़ा हो गया. उसका लंड एक गोरी और मस्त लौंडिया को देख कर फड़फड़ाने लगा. वो पीपे वापस फिटिंग करते हुए कभी पीपे को देख रहा था तो कभी रोमा की उफनती हुई जवानी को देख रहा था. तभी उसके हाथ से रेंच-पाना (आन इन्स्ट्रुमेंट तो टाइट पीपे) नीचे बाथटब मे गिर गया और उसके हाथ से पीपे भी छूट गया. पानी उपर पीपे से नीचे गिरने लगा. खुद भी पूरी तरह से भीग गया. उसके बदन के कपड़े भी भीग गये. कॉस्ट्यूम जैसे अंडरवेर से लंड का साइज़ सॉफ दिख रहा था. उपर से ही कहा, "मेमसाहेब, ज़रा वारेणच-पाना देना प्ल्ज़्ज़." रोमा ने रेणच-पाना उठाया तो शवर अपनी जगह से खिसक गया. जिसकी वजह से पानी फिर गिरने लगा. एक हाथ से शवर को पकड़े हुए दूसरे हाथ से उस रेणच-पाना को देने लगी. लेकिन पानी गिरते रहने की वजह उसका ध्यान शवर की तरफ ही था. दूसरा हाथ रेणच-पानासुरेश को देने के लिए आयेज बढ़ाया हुआ था. उपर सुरेश भी पीपे से पानी गिरते रहने की वजह से पीपे की और ही देख रहा था. उसने उपर ही मूह किए हुए वापस कहा, "मेमसाहेब, प्ल्ज़्ज़. वा रेणच-पाना देना." रोमा भी शवर की और देखते देखते बोली, "दिया तो है. लेलो." तभी दोनो की नज़र आपस मे टकराई तो देखा की रेणच-पाना रोमा ने अंजान-वश सुरेश के मोटे फूले हुए लंड मे फँसा दिया था. सुरेश यह देखकर मुश्कराया और रोमा ने अपनी नज़र नीचे झुका ली. सुरेश रेणच-पाना अपने लंड पर से निकाल कर पीपे को फिटिंग करने लग गया. रोमा ने नज़र उठा कर देखा की है रब्बा कितना मजबूत लंड है. एक मूसल की तरह खड़ा था. उसकी साइज़ 10" इंच से कम नही होगी और मोटा भी पूरा था. उसकी छूट तो कल रात से ही उसके काबू मे नही थी. अब तो उसकी हालत एकद्ूम से बेकाबू हो गयी. पूरे बदन मे खून सई-सई कर के बहने लगा. चूत का पानी रोके से नही रुक रहा था.बार-बार नज़र सुरेश के लवदे पर जाकर अटक रही थी. "उफ़फ्फ़," ऐसी सिसकारी निकल पड़ी. "काश ऐसे लंड से मेरी चुदाई हो जाती तो मैं निहाल हो जाऊं."उधर सुरेश का मान भी कुच्छ ऐसा ही सोच रहा था. "काश मेमसाहिबकी गौरी चूत चोदने को मिल जाए तो .. " तभी पीपे को आधा फिट किया तो शवर का पानी आना बंद हो गया. सो उसने रोमा से कहा, "मेमसाहिब, आप ज़रा यहाँ तबले पर खड़ी हो जाए तो मैं शवर को भी वापस चेक कर लू."रोमा तो लंड और चुदाई की सोच मे खोई हुई तबले पर खड़ी हो गयी. उसे होश ही नही था की उसकी भीगी हुई नाइटी से उसका पूरा जिस्म झाँक रहा है. बदन की कोई भी चीज़ छुपि हुई नही थी. उसकी मखमली झाँटे केवल उसकी चूत को हल्का सा उपर से केवल च्छुपाए हुई थी. जब उसने अपना हाथ बढ़ा कर पीपे को पकड़ा तो उसकी नाइटी भी उपर हो गयी. चूत जो तोड़ा बहुत झांतों से च्छूपी हुई थी वा भी बेपर्दा हो गयी. वासना की आग मे जलते हुए बदन की गर्मी पूरे बाथरूम मे तूफान ला दिया. सुरेश ने नीचे से यह नज़ारा देखा तो सुलग उठा. उसके सामने रोमा का नशीला बदन ही नाच रहा था. सुडोल बदन की मल्लिका, गड्राया हुआ सनडर बदन, गोल-गोल गाल, होंठ एसे की जेसे शहद से भारी दो पंखुड़ीयान, बॉल लूंबे-लंबे नितंब को छूते हुए, गर्दन सुराही की तरह, उरोज मुम...ंउम्मे भरे-भरे, दो कलश, गोल-गोल उभरे हुए सख़्त-सख़्त कसे हुए हापूस-आम. मलाई जैसा बदन, गुलाबी होत चूसने के लिया तैयार और न्योता देते हुए. चुची उठी हुई मस्त मस्त नाइटी से बाहर आने के लिए बेकरार. देखते ही लगता था हाथ बढ़ा कर दबा दो. कब इसे चोद पाऊँगा, कब इसकी चूत कोचूसूंगा, कब इसकी चुचियों को कस कर दब्ाओंगा, कब इसके होठों को चूस चूस कर मज़ा लूँगा, कब इसकी चूत मे मेरा लंड घुसेगा, और कब इसे कस कस कर दबोच पाऊँगा. आह हा, क्या माममे हैं - एकद्ूम ताने हुए मानो की कह रहे हों - आओ मुझे पकड़ लो, मुझे दब्ाओ, मुझे चूसो. होठों पर एक मुस्कुराहट सी खेल रहती है. गीला गीला गुलाबी जिस्म बुला रहे है की आओआ ना, मुझे चूसो ना. यह सोचते सोचते उससे रहा नही गया. उसने शवर को छ्चोड़ बाथटब से बाहर आ कर अपने होतो से उसकी चूत के होतो के साथ संगम कर लिया. "उफ़फ्फ़.. कितनी गरम है." रोमा चुदाई के सपने मे खोई हुई थी की उसे लगा की यह चूत मे अचानक वोल्टेज कैसे बढ़ गया. नीचे देखा तो सुरेश अपने होठों से उसकी चूत चूज़ रहा है. वो मान कड़ा कर बोली, "यह क्या कर रहे हो." सुरेश ने कुच्छ भी ना बोलते हुए उसकी चूत और उसके दाने को चूसना चालू रखा. रोमा विरोध करती रही लेकिन धीरे-धीरे उसका विरोध सिसकारीओं मे बदल गया. अब यह छूसा उसे शकून दे रही थी. शकून के साथ-साथ जिस्म मे एक आग भी भर रही थी.चूत पर से मुहन ना हटते हुए सुरेश ने रोमा को तबले से उतारकर बाथटब पर बैठा दिया. बाथटब पर बैठी हुई वा अपने हाथ से सुरेश का बॉल पकड़ कर उसे और ज़ोर से चूसने के लिए प्रेरित कर रही थी. उसकी सिसकारियाँ बड़ाती ही जेया रही थी. तभी उसके मुहन से निकलना शुरू हो गया, "एस.. एस.. ज़ोर से चूसो मेरी चूत को.. अफ .. जीभ पूरी अंदर डाल दो. एस... मेरी चूत की गर्मी पूरी तरह से शांत कर दो. चूसाते रहो.. आअहह.. मुझसे अब रहा नही जेया रहा है... अफ.. क्या ... एस... जीभ से ऐसे ही चोदो.. चूवसो..." सुरेश अपनी जीभ की स्पीड उसकी चूत मे बढ़ा दी.