मैं और मेरी मम्मी

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The Romantic
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Re: मैं और मेरी मम्मी

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 16:55



मैंने कहा- ठीक है माँ ! आप इतना कहती हैं तो !


मैं उनकी चूचियाँ दबाने और चूसने लगा ब्लाऊज़ के ऊपर से ही।


मैंने कहा- माँ, मैंने कभी सुहागरात नहीं मनाई ! मैं आपके साथ सुहागरात मनाना चाहता हूँ ।


तो वो बोली- अब तो मैं पूरी तेरी हूँ, जो करना है वो कर ना।


मैंने कहा- ऐसे नहीं ! जैसे टीवी पर, फिल्मो में दिखाते हैं, धीरे-धीरे !


तो वो बोली- अच्छा तो तू ये सब चीजें भी देखता है?


मैंने कहा- और नहीं तो क्या ? माँ, अब मैं बड़ा हो गया हूँ न इसलिए !


वो बोली- ठीक है, मैं तो पहले से तैयार हूँ, तू भी तैयार हो जा ! फिर हम दोनों माँ-बेटे पति-पत्नी बन कर सुहागरात मनाएंगे।


बाहर आकर नहाने के लिए बाथरूम में गया और सेंट लगाकर, अपनी शेरवानी पहन कर मैं तैयार हो गया और माँ के कमरे में आ गया।
वो तो तैयार बैठी थी, टीवी पर ब्लू फिल्म देख रही थी।


मैंने कहा- माँ, यह क्या है?


वो बोली- अब क्या करूँ? तेरे पापा तो काम से ज्यादातर बाहर ही रहते हैं, तो मुझे भी तो अपनी प्यास बुझानी होती है न।


तो मैं बोला- अब आगे से जब भी पापा बाहर जाएंगे तो मैं आपको चोदूँगा ! मैं आपका छोटा पति !


वो बोली- अरे हाँ हाँ ! मेरे स्वामी अब तो आप भी मेरे दूसरे स्वामी हो।



और मैंने उनको उठाया और उनसे इस तरह चिपक गया जैसे दो जान एक शरीर ! बिल्कुल जैसे सांप सेक्स करते हैं। मैंने उनको ऊपर से नीचे तक इतना चूसा कि वो कहने लगी- अब डाल दे लौड़ा मेरी चूत में जालिम। अब छोड़ मेरे चूचे ! डाल दे अब मेरी चूत में ! फाड़ दे मेरी चूत ! अब नहीं रुका जाता।


मैंने कहा- अरे इतनी जल्दी क्या है माँ ! थोड़ा रुक ! तुमसे ज्यादा तो मैं प्यासा हूँ। आज तो मैं तुम्हें इतना चोदूंगा कि तुम आगे से कभी भी पापा के साथ सेक्स करना पसंद नहीं करोगी।


वो बोली- हम्म ! तू तो बड़ा ज़ालिम है बेटा ! इस चूत पर हक तो तेरे पापा का ही है। इस मकान में तो तू केवल किरायेदार है बेटा !


मैंने बोला- हम्म वो तो है .....


और मैंने उनको अपनी बांहों में लेकर बिस्तर पर लेटा दिया और अपने सारे कपड़े उतार दिए और सबसे पहले उनके होंटों को कम से कम दस मिनट तक चूसता रहा और बीच बीच में उनकी चूत भी साड़ी के ऊपर से सहला रहा था और वो सिसकारियाँ भर रही थी।


मैंने धीरे-धीरे उनके कपड़े उतारे और लगभग पूरा नंगा कर दिया, केवल ब्रा और पैंटी रह गई थी वो भी लाल रंग की।


मैंने कहा- तुम तो इतनी खूबसूरत हो कि मैं तुमसे शादी कर लूँ और तुम्हें रोजाना इतना चोदूँ, इतना चोदूँ कि अब क्या बोलूँ कि कितना चोदूँ।


तो वो बोली- तो चोद ना साले ! मैं तो मरी जा रही हूँ कबसे ! अब तो मैं पूरी तेरी ही हूँ ! जब चाहे तब चोद मैंने कब मना किया है


मैं उनकी ब्रा उतारने लगा और इतने में उन्होंने मेरा लौड़ा अपने हाथ में ले लिया, उसके साथ खेलने लगी, कहने लगी- बाथरूम में तो इसकी लम्बाई ढंग से नहीं नाप पाई, पर यहाँ पर तो इसको पूरा खा जाऊंगी !


दस मिनट तक उन्होंने मेरे लौड़े को चूसा होगा।


मेरा लंड भी अब पूरे उफान पर था और फाड़ देना चाहता था माँ की चूत को।


जिस बात का मुझे इतनी दिनों से इंतज़ार था वो सपना पूरा होने वाला था।


माँ के दोनों संतरे मानो ऐसे लग रहे थे जैसे तो बड़े-बड़े खरबूजे ! मैंने कहा- माँ, इनको तो मैं खा जाऊंगा।


माँ तो खुशी के मारे जैसे उछल रही थी।


और मैंने अपना लंड माँ की चूत में बाड़ दिया और फिर चालू हुआ माँ-बेटे की चुदाई का कार्यक्रम ! वो बीच बीच में इतनी तेज चिल्ला रही थी, कह रही थी- बेटा चोद दे आज अपनी माँ को ! घुस जा पूरा इसके अन्दर ! फाड़ डाल इसको। ह्म्मम्म हाआअहाह उह्ह्हह ह्म्म्म मैं तो मर जाउंगी ....उह ह्म्मम्म उह्ह्ह


और मैंने तेज-तेज झटके लगाने चालू कर दिए। कम से कम आधे घंटे चूत मारने के बाद मैंने कहा- माँ, अब घोड़ी बन जाओ, मैं तुम्हारी गांड मारूँगा।


तो माँ ने घोड़ी बन कर अपनी सुडौल गाण्ड पीछे की ओर उभार दी और कहा- तुम मर्द लोगों को गांड में ऐसा क्या मजा आता है?


मैंने कहा- माँ गांड और चूचियाँ ही तो तुम्हारी जान है ! और तुम कह रही हो कि क्या मजा आता है? इनको देख कर तो मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है और इन्हीं चीजों को लेकर तुम औरतें इतना इतराती हो।


उन्होंने एक सेक्सी सी मुस्कुराहट दी और गांड को सेक्सी तरीके से हिलाने लगी। मैंने धीरे-धीरे से लण्ड गाण्ड में डाल दिया और मां मस्त हो गई।


बहुत आनन्द आ रहा था मुझे गांड मारने में। मम्मी की गाण्ड को मैंने बहुत देर तक बजाया। मम्मी भी, जब तक मैं नहीं झड़ गया, तब तक चुदती रही और मेरा पूरा साथ दिया.....

The Romantic
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Re: मैं और मेरी मम्मी

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 16:55


मैं झड़ चुका था और माँ भी....


तो माँ ने कहा- रुको, अब थोड़ा आराम कर लो बेटा !


मैंने कहा- हाँ माँ ! मैं भी बहुत थक गया हूँ....


तो वो बोली- चल तू यहीं रुक ! मैं तेरे लिए दूध लाती हूँ .....


माँ जैसे ही उठी दूध लाने के लिये, मैंने फिर से गोदी में खींच लिया और उनकी चूचियों को अपने मुख से दबा लिया और चूसने लगा और कहा- मेरा पैष्टिक दूध तो यह रहा माँ ! तुम तो मुझे बचपन में यही दूध पिलाती थी ना !


तो वो बोली- अरे ! तू नहीं सुधरेगा ! थोड़ी देर भी नहीं इंतज़ार कर सकता ?


मैंने कहा- माँ, ऐसा मौका फिर कहाँ मिलेगा? आज के बाद पता नहीं कब मौका मिलेगा !


और मैंने दूध मुंह में भर लिए और मां गुदगुदी के मारे सिसकारियाँ भरने लगी।


मेरा लण्ड फिर से फ़ुफ़कारने लगा था तो मैंने कहा- माँ यह तो फिर से खड़ा हो गया !


तो वो बोली- तो देर किस बात की? आ जा एक बार फिर !


मां ने अपनी दोनों खूबसूरत सी टांगें उठा ली। मां अपनी टांगें ऊपर उठा कर उछल-उछल कर चुदवा रही थी और मैं भी उन्हें काफी उछल-उछल कर चोद रहा था। मां को इस रूप में मैंने पहली बार देखा था, वो काम की देवी लग रही थी।माँ ने कहा- लगता है जिन्दगी भर की चुदाई आज ही कर डालोगे !


मैंने कहा- और नहीं तो क्या !


और मैंने तेज-तेज झटके मारने चालू कर दिए और सारा कमरा फिर से आवाजों से गूंजने लगा।उस रात मैंने उनको दो बार और चोदा।


अगली सुबह मेरी आँख दोपहर को तीन बजे खुली। मैं उठा और अपने कमरे में जाने लगा पर जैसे ही मैं बाहर आया, माँ झाड़ू लगा रही थी। उन्होंने गुलाबी सिल्की गाउन पहन रखा था वो उस समय झुकी हुई थी। मम्मी की गांड पीछे की तरफ़ उभरी हुए थी मैं पीछे से चुपचाप गया और उनकी गांड के छेद पर अपना लंड लगा दिया।


वो बोली- अरे रवि, जग गया मेरे राजा ! चल अब नहा धो ले ! फिर खाना खा ले !


मैंने कहा- ठीक है मम्मी, पर एक ट्रिप लेने के बाद !


मैंने उनको एक बार फिर से चोदा। अब जब तक पापा नहीं आ जाते, मैं उन्हें रोजाना चोदने वाला था। फिर से पूरा घर सेक्सी आवाजों से गूंज गया और फिर से एक बार हम दोनों माँ-बेटे पति-पत्नी बन गए।


काफ़ी देर की चुदाई के बाद मैं झड़ गया और माँ भी ....तो माँ ने कहा- पड़ गई तुझे शांति ! जा अब तो नहा ले !


मैंने कहा- ठीक है।


और रात भी मैंने मा को 7 बार फिर से चोदा....

The Romantic
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Re: मैं और मेरी मम्मी

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 16:57

मैं और मेरी मम्मी (भाग-3)


मेरा नाम रवि है और मेरी उम्र 22 साल की है। मई मुंबई में रहता हूँ .मेरे फ्लैट में मै एवं मेरे मम्मी बाप के अलावा कोई नही रहता। एक साल पहले बाइक चलाते वक्त मै गिर गया और मेरे दोनों हथेली में काफ़ी जख्म हो गए। डॉ० ने मेरे दोनों हथेलियों में एक महीने के लिए बेंडेज कर दिया। अब मै अपना कोई काम ख़ुद से नही कर सकता था। सब से अधिक दिक्कत मुझे बाथरूम जाने में हुई। क्यों की मेरी पांचो उँगलियाँ पट्टी से बंधी थी. पहले दिन तो मेरे पापा ने मुझे बाथरूम कराया एवं सफाई भी की। लेकिन अगले ही दिन उन्हें जरूरी काम से जयपुर जाना पड़ गया। अब फ्लैट में मेरी मम्मी और मै ही बच गए। मेरे पापा तो नही जाना चाहते थे लेकिन जब मम्मी ने कहा की वो संभाल लेगी तो वो चले गए। अगले दिन जब मझे बाथरूम जाना था तो समझ में नही आ रहा था की कैसे जाऊं। मैंने कुछ नही कहा।

लगभग दस बजे मेरी मम्मी ने कहा – रवि, तुम बाथरूम नही गए?

मैंने कहा – धोऊंगा कैसे?

मम्मी ने कहा – जब तुम बच्चे थे तो कौन धोता था? आज भी मै धो दूंगी।

पहले तो मै नही माना ।

मम्मी ने गुस्से में आ कर कहा – मुझसे शरमाते हो?

वो अचानक खड़ी हुई और अपना गाउन उतार दी। अन्दर उसने पेंटी और ब्रा पहन रखी थी। झटके में अपना ब्रा उतार दी और बोली – यही वो मुममे है जिस से तुने ढाई साल तक दूध पिया है। तू कहाँ से आया वो देखना चाहता है? कहते हुए मम्मी ने अपनी पेंटी भी उतार दी और अपने चूत की तरफ़ इशारा करते हुए बोली- इसी से तू निकला है। देख, मुझे शर्म नही आती और तुझे कैसी शर्म? जब मै तुम्हारे सामने नंगी हो सकती हूँ तो तुम्हे क्यों आती है?

मै हक्का बक्का हो कर मम्मी को देख रहा था। वो पूरी तरह से नंगी मेरे सामने खड़ी थी। बड़े बड़े मुममे और बड़ा सा चूत काले काले घने बालों से ढके हुए मेरे सामने थे। थोड़ी देर मै शांत रहा एवं नजरें झुका कर बोला- आई ऍम सोरी मम्मी। अब मै आपसे नही शर्माऊंगा आप प्लीज़ कपड़े पहन लें।

मम्मी ने अपने सारे कपड़े पहन लिए और मुझे बाथरूम ले कर गई। वहां मम्मी ने मेरे सारे कपड़े उतरे और मुझे नंगा कर दिया और टोइलेट सीट पर बैठ जाने को कहा और बोली- जब हो जाएगा तो मुझे बोलना। अब मुझे मम्मी के सामने नंगा होने में कोई शर्म नही आ रही थी। थोड़ी देर में जब मैंने पैखाना कर लिया तो मैंने मम्मी को आवाज़ लगाई। वो बाथरूम में आई और मुझे नल के पास ला कर अपने हाथो से मेरे गांड की सफाई उसी तरह की जिस तरह मेरे बचपन में वो मेरी गांड धोती थी।

मेरी सफाई करने के बाद मेरे सारे कपड़े पहना कर मुझे बाहर भेज दिया और ख़ुद बाथरूम में स्नान करने लगी। मै बाहर आ कर काफ़ी हल्का महसूस कर रहा था। अब मै खुश था। अगले दिन जब मै बाथरूम गया और पैखाना करने के बाद मम्मी को आवाज़ लगाई तो मम्मी अन्दर आ कर अपना गाउन उतार दी।

बोली – रवि, तेरे धोने के कारण पानी पड़ने से गन्दा हो जाता है। वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में रहते हुए मेरी गांड की सफाई की। अब यह क्रम रोज़ का हो गया। 3-4 दिनों के बाद पापा का फ़ोन आया कि उन्हें यहाँ 22-25 दिन और लग सकता है। 5 दिन के बाद मै सो कर उठा तो देखा की रात में सोने में ही नाईट फाल हो गया (मेरे लंड से माल निकल गया ) था। मै बहूत असहज महसूस कर रहा था। क्यों कि आजकल मेरे सारे कपड़े मेरी मम्मी ही साफ़ करती थी। फ़िर सोचा, मम्मी पूछेगी तो बता दूँगा। जब बाथरूम में मम्मी मेरे कपड़े उतार रही थी तो मेरे अंडरवियर में मेरा वीर्य देखा । बोली- ये क्या है?

मैंने नजरे झुका के कह दिया- वो, रात को कुछ हो गया होगा।

मम्मी समझ गई और थोड़ा मुस्कुरा के बोली- अरे रवि, अब तू जवान हो रहा है। चल कोई बात नही मै साफ़ कर दूँगी।

कह के वो बाहर चली गई। जब मै पैखाना कर रहा था तो मेरी मुठ मारने की काफ़ी इच्छा होने लगी। क्यों कि पिछले कई दिन से मैंने मुठ नही मारी थी। लेकिन मन मसोस के रह गया। क्योँ की मेरे हाथ पट्टियों से बंधे थे। लेकिन मेरे लंड में कडापन आ गया जो ख़तम ही नही हो रहा था। किसी तरह से वो थोड़ा मुरझाया तो मैंने मम्मी को आवाज़ दी। मम्मी जब मेरी गांड की सफाई करने लगी तो मेरा लंड खड़ा हो गया।

मम्मी ने मुझे अंडरवियर पहनाते हुए मेरे लंड को देखा। लेकिन कुछ बोली नही। मै किसी तरह से बाहर चला आया। अगले दिन मेरे लंड की हालत एक दम ख़राब हो गई थी। यह बिना मुठ मारे शांत ही नही हो रहा था। मन कर रहा था की किस तरह से मुठ मारूं। जब मेरे कपड़े मम्मी ने उतारे तो ये तन के खड़ा हो गया। मै झट से दूसरी और घूम गया ताकि मम्मी मेरे खड़े लंड को ना देख पाये। लेकिन मम्मी ने देख लिया था।

वो बोली – आज तुम पैखाना करने के बाद नहा कर ही बाहर जाना. हड़बड़ी में मै तुझे ठीक से नहला भी नही पाती हूँ।

जब मैंने मम्मी को आवाज़ लगाई तो वो आई और नल पे मेरा गांड साफ़ करने के बाद

बोली- रवि, नहा भी लो ना।

मम्मी सिर्फ़ पेंटी और ब्रा पहन रखी थी। ब्रा में मम्मी के मुममे उभरे हुए और बहुत ही आकर्षक लग रहे थे । मेरा लंड एकदम टाईट हुआ जा रहा था। मम्मी ने मेरे शरीर पर पानी डाल कर मेरे बदन को रगड़ना शुरू किया तो मेरे लंड को छू कर कहा इतना टाईट क्यों कर रखा है इसे?

मैंने कहा- तुम नही समझोगी।

मम्मी को तुरंत गुस्सा आया गया और बोली- अभी भी मुझसे शर्माता है। कह कर अपने ब्रा और पेंटी को खोल दिया॥ अब हम दोनों बिलकूल नंगे बाथरूम में खड़े थे।

मम्मी ने मेरे लंड को पकड़ के कहा – बता क्या बात है?

अब इस स्थिति में कुछ भी छुपाने लायक नही था।

मैंने कहा कि पिछले कई दिनों से मुठ नही मारा है इसलिए ये टाईट हो गया है।

मम्मी बोली- पहले बोलना चाहिए था ना? ला मै मार देती हूँ ।

मैंने कहा- तुम , लेकिन …… ???।

मम्मी ने मेरी बात बीच में ही काटते हुए कहा – जब तेरी गांड धो सकती हूँ तो तेरी मुठ क्यों नही मार सकती।

मैंने कहा – ठीक है।

मम्मी ने मेरे लंड पर नारियल तेल लगाया और इसे सहलाने लगी। मेरा लंड और भी लंबा और मोटा हो गया। मेरा लंड टाइट होते के बात नौ इंच का हो जाता है । मम्मी के मुममे और चूत को सामने देख मुझे काफ़ी गर्मी चढ़ गई। मम्मी ने मेरे लंड को अपने दोनों हाथों में भर कर मुठ मारना शुरू कर दिया। पहली बार कोई अन्य मेरे लंड का इस तरह से मुठ मार रहा था। 20-25 बार ही मम्मी ने मेरे लंड को आगे- पीछे किया होगा की मेरे लंड ने माल की पिचकारी छोड़ दी जो सीधे मम्मी के पेट पर जा कर गिरी। मै सिसकारी मारने लगा। अब जा कर मेरा लंड शांत हुआ। मम्मी ने अच्छी तरह नहलाया और बाथरूम के बाहर भेज दिया। अब मै काफ़ी शांत था। सारा दिन सामान्य स्थिति में गुजर गया।