समलिंगी कहानियाँ

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories ,erotic stories. Visit mz.skoda-avtoport.ru
rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:26

यार बना प्रीतम - भाग (6)

गतान्क से आगे........

चल आधी तो ले ली, आज रह'ने दे, पर मा कसम, पूरी चप्पल तेरे मुँह में कभी ना कभी ठूनसावा कर ही रहूँगा. दोनों पट्टे और आधी चप्पल मेरे मुँह में थे जिन्हें मैं पूरी शक्ति से चबाते हुए चूस रहा था. अपना मनचाहा सपना पूरा होने के कारण इतनी वासना में मैं डूबा हुआ था की मेरी आँखें पथारा गयी थी. मेरे ये कारनामे देख'कर प्रीतम का लंड मचल'कर मेरी गान्ड में और गहरा घुस गया. आख़िर उससे ना रहा गया और वह मुझे वहीं सोफे पर पटक कर मेरे ऊपर चढ बैठा. अपनी दूसरी चप्पल उस'ने मेरे लौडे से निकाल कर मेरे ओन्धे चेहरे के नीचे तकिया बना'कर रख दी और हुमक हुमक कर मेरी गान्ड मार'ने लगा.

पूरे प्रयास के बावजूद वह अप'ने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाया और दस मिनिट में ही झड गया. मेरा लंड अब इतना उत्तेजित था कि उस'के पूरा झडते ही मैं उसे हट'कर उठ बैठा और उसे पलट'कर उसपर चढ'ने की कोशिश कर'ने लगा.

दस मिनिट रुक यार, मुझे दम लेने दे, फिर मैं जैसे कहूँ वैसे मार मेरी गान्ड . आज तेरे इस मस्ता'ने लौडे से मन भर कर मरावाऊंगा. बस थोड़ा लंड खड़ा हो जा'ने दे मुझे रोकते हुए प्रीतम बोला. तब तक मैं चप्पल मुँह में लिए चूस'ता रहा और प्रीतम के भारी भरकम चूतड सहलाता रहा. उस'की गान्ड में मक्खन लगाया और उस'ने मेरे लंड को चिकना किया. जब उसका लंड फिर कुच्छ उठ'ने लगा तो वह उठा और सोफे की पीठ पकड़'कर झुक'कर खड़ा हो गया.

अब डाल यार अंदर धीरे धीरे और मार मेरी खड़े खड़े अपनी गान्ड ढीली कर'ता हुआ वह बोला. मैने तुरंत उस'की गान्ड में लंड डाल दिया. धीरे धीरे नहीं, एक ही बार में सॅट से. वह थोड़ा हुमका और फिर बोला.

चल कोई बात नहीं, आज तो तू तैश में है, पर राजा कल से धीरे धीरे डालना और घंटे भर मारना. आज भी कम से कम आधे घंटे मार यार नहीं तो सब मज़ा किरकिरा हो जाएगा. उस'के चूतड पकड़'कर पंजों के बल खड़े होकर मैने उस'की मारना शुरू कर दी. पहले स्ट्रोक थोड़े धीमे थे पर फिर उस'के कह'ने से मैं घचाघाच चोद'ने लगा. मेरा पेट बार बार उस'के नितंबों से टकराता और फॅक फॅक फॅक आवाज़ होती. बीच बीच में मैं रुक जाता जिससे झड ना जाउ. अति वासना के बावजूद अब मैं अप'ने आप पर कंट्रोल कर पा रहा था इस'लिए उस'की खूब देर मार पाया जैसी उस'की इच्च्छा थी.

सारे समय प्रीतम की चप्पल मेरे मुँह में थी जिसे मैं चूस और चबा रहा था. कुच्छ देर बाद वह खुद ही चल'कर दीवार से मुँह के बल सॅट कर खड हो गया और मुझसे खड़े खड़े गान्ड मरवाई. आख़िर इसी आसान में मैं झड गया. अपनी चप्पल जब उस'ने मेरे मुँह से निकाली तो चूस चूस कर मैने बिलकुल सॉफ कर दी थी. उसपर जगह जगह मेरे दाँतों के गहरे निशाम. भी बन गये थे. उसे देख'कर वह बोला.

हाय मेरी जान, इतनी अच्छी लगी अप'ने सैंया की चप्पल? तू फिकर मत कर, अब रात को तो ऐसे आसान से तुझे चोदून्गा कि तू खुश हो जाएगा. थक कर मैं पलंग पर लेट गया. प्रीतम मेरे पास बैठ गया और मेरे पैर उठ'कर अपनी गोद में रख लिए. मैं अपनी चप्पलें पहना हुआ था. मेरे पैरों और तलवों को सहलाता हुआ प्रीतम बोला.

यार तू तो बड़ा सुंदर है ही, तेरे पैर भी बड़े खूबसूरत हैं. एकदम चिक'ने और कोमल, तलवे तो देख, बच्चों जैसे गुलाबी हैं. और मेरे पैर उठ'कर वह उन्हें चूम'ने लगा. मैं सुख से सित्कार उठा. मेरे पैरों को चप्पलो समेत वह चूम रहा था. बीच में मेरी चप्पलें भी चाट लेता. मेरी उंगलियों को भी उस'ने मुँह में ले'कर चूसा. उसका एकदम तन्ना'कर खड़ा हो गया था.

मुझसे ना रहा गया. मैने प्रीतम के पैर खींच'कर अप'ने मुँहासे लगा लिए और उन्हें बेताशा चूम'ने और चाट'ने लगा. उस'के पैर बड़े थे, पर एकदम चिक'ने और साफ. मुझे उस'के गोरे तलवे चाट'ने में बहुत मज़ा आया. हम दोनों फिर मस्त हो गये थे. चुदाई का एक नया दौर शुरू होने ही वाला था. पर फिर प्रीतम ने उठ'कर कहा.

अभी नहीं यार, अब बाद में. शाम को मैं तेरे पैरों को छोड़ूँगा. अभी सो ले. नहीं तो चोद चोद कर हम दोनों बुरी तरह तक जाएँगे. वैसे तू क्यों चप्पल चटक'कर नहीं चलता, मेरी तरह? मैने कहा,

कोशिश तो की थी पर मुझे जम'ता नहीं प्रीतम बोला

पंजों के बल उचक उचक कर चल'ने की कोशिश कर, लड़कियों जैसी. मस्त चटकेंगी. एक दूसरे के लंड हम'ने चूस कर साफ किए और फिर कुच्छ देर आराम किया. घंटे भर सो भी लिए. मैं सो कर उठ तो वह पढ रहा था. वह पढाइ का भी पक्का था. शाम तक वह खुद पढ़ाता रहा और मुझे भी पढावाया. रात को हम'ने वहीं खाना बनाया. खाना खा'कर फिर पढ़ाई की और नहा'कर हम फिर कामक्रीड़ा में जुट गये. प्रीतम मुझसे बोला.

इधर आ यार चप्पल पहन'कर और इस स्टूल पर खड हो जा, दीवाल का सहारा ले कर. मुँह दीवाल की ओर कर'के मैं खड हो गया. बड़ी उत्सुक'ता थी कि मेरा यार अब क्या गुल खिलाएगा! वह खुद स्टूल के पास नीचे घुट'ने टेक कर बैठ गया.

अब अप'ने पंजों के बल खड हो जा. मेरी ऐडिया अब मेरी चप्पालों से ऊपर उठ गयी थी. बड़े प्यार से उस'ने अपना लंड मेरे पाँव के तलवे और चप्पल के बीच घुसेडा. फिर बोला.

अब नीचे हो जा. ख़ड़ा हो जा मेरे लौडे पर. अप'ने तलवे और चप्पल के बीच दबा ले. उस'के कड़े लंड के मेरे तलवों पर होते स्पर्श से मुझे मज़ा आ गया. मैं पैर हिला कर उस'की मालिश कर'ने लगा. मेरे पैर पकड़'कर प्रीतम अब अपना लंड मेरे तलवों और चप्पल के बीच पेल'ने लगा.

देख इसे कहते हैं पैरों को चोदना. बहुत मज़ा आता है, ख़ास कर जब तेरे जैसे चिक'ने पैरों वाला कोई मिल जाए. और तू पूरा वजन दे कर खड हो जा मेरे लंड पर, घबरा मत, मेरा लॉडा आराम से झेल लेगा. पैरों से दबा दबा कर मालिश कर उसकी मैं ऊपर नीचे होकर प्रीतम के लंड को पैर तले रौंद'ने लगा. जैसे मेरा पैर उठता, प्रीतम और पेल'ने लगता. एक चप्पल से मन भर गया तो उस'की दूसरी चप्पल में लंड डाल दिया. मेरे दोनों पैरों और चप्पालों को प्रीतम ने मन भर कर चोदा. झड'ने के करीब आ'कर रुक गया और बोला.

अब बंद करते हैं यार नहीं तो यहीं तेरी चप्पालों में झड जाऊँगा. वैसे उस'में भी मज़ा है, तुझसे चटवा कर सॉफ करा'ने में मज़ा आएगा. पर अभी तो मैं तेरी गान्ड मारूँगा. हम'ने अब अप'ने लंड और गुदा मक्खन से चिक'ने कर लिए की बीच में ना रुकना पड़े. मुझे गोद में लेकर प्रीतम मुझे प्यार कर'ने लगा.

कुच्छ देर की चूमा चॅटी के बाद उस'ने मुझे चित बिस्तर पर लिटाया और मेरे सीधे खंबे से खड़े लंड को प्यार से चूसा. चूसाते चूसाते वह उलटी तरफ से मेरी छा'ती के दोनों ओर घुट'ने टेक कर मेरे ऊपर आ गया. मुझे लगा कि लंड चुसवाना चाह'ता है पर थोड़ा सिमट'कर जब वह उकड़ू हुआ तो उस'के चूतड मेरे मुँह पर लहरा रहे थे. गांद का छेद खुल और बंद हो रहा था.

मैं समझ गया कि मुझसे गान्ड चुसवाना चाह'ता है. मैने उस'के नितंबों को दबाते हुए उसका गुदा चूसना शुरू कर दिया. उसे इतना मज़ा आया कि वह अपना पूरा वजन देकर मेरे मुँह पर ही बैठ गया. वह अपनी चप्पलें पहना हुआ था. चप्पलें भी मैं हाथ से पकड़'कर दबाता रहा.

दस मिनिट बाद वह उठा और झुक कर मेरे पेट के दोनों ओर पैर जमा कर तैयार हो गया. मेरी ओर मुँह कर के मेरा लंड उस'ने अप'ने गुदा पर जमाया और उसे अंदर लेता हुआ नीचे बैठ गया. मेरा लॉडा उस'की चिकनी खुली गान्ड में आसानी से घुस गया. पूरा लंड अंदर लेकर उस'के चूतड मेरे पेट पर टिक गये. प्रीतम ने फिर दोनों पैर उठ'कर मेरे चेहरे पर रखे और हाथ बिस्तर पर टेक कर ऊपर नीचे होते हुए खुद ही अपनी गान्ड मरा'ने लगा. चप्पलें पह'ने हुए उस'के पैर मेरे मुँह पर थे. उन'के तलवे मेरे गालों और मुँह पर रगड़'ता हुआ वह बोला.

ले अब यार, मन भर कर मेरी चप्पल चाट और चूस. मुँह में ले. मज़ा कर. मैं भी मन भर कर आराम से अपनी गान्ड से तेरे लंड को चोद'ता हूँ. मेरे लिए तो मानो खजा'ने का दरवाजा खुल गया. यहाँ प्रीतम की गान्ड का मुलायम तप'ता घर्षण मेरे लंड को अपूर्व सुख दे रहा था उधर मेरे मुँह पर टिके उस'के चप्पालों में लिपटे पैर मुझे मदहोश कर रहे थे. मैने हाथों से पकड़'कर उन्हें मुँह से लगा लिया और बेतहाशा चूम'ने और चाट'ने लगा. कभी उस'की चप्पल चाटता, कभी चप्पल का सिरा मुँह में लेकर चबाता और चूस'ता और कभी प्रीतम के तलवे चाट'ने लगता. बीच में उस'के पैरों की उंगलियाँ और अंगूठा मुँह में लेकर चूस'ने लगता.

प्रीतम ने तरसा तरसा कर आधे घंटे मुझे इस मीठी छुरी से हलाल किया और फिर ज़ोर ज़ोर से अपनी गान्ड से चोदते हुए मुझे झड़ाया. मैं इतनी ज़ोर से झाड़ा कि मेरा शरीर काँप गया. इस बार प्रीतम ने एक और करम मेरे ऊपर किया. मेरा स्खलन होने के बाद भी मुझे चोदना बंद नहीं किया, बल्कि ऊपर नीचे उच्छल'ता हुआ मेरे लंड को अप'नी गान्ड में लिए मरावाता रहा. लंड अब भी खड़ा था पर झड'ने के बाद सुपाड़ा बहुत संवेदनशील हो गया था. इस'लिए उसपर गान्ड का घर्षण मुझे सहन नहीं हुआ. जब भी वह ऊपर नीचे होता, मैं सिसकारी भरते हुए तडप तडप जाता पर वह हरामी हँसते हुए मेरे लंड को अपनी गान्ड की म्यान से रगड़'ता रहा. मुझे ऐसा निचोड़ा कि मैं किसी काम का नहीं रहा, करीब करीब बेहोश हो गया. वह तभी रुका जब मेरा लंड बिलकुल मुरझा कर उस'की गान्ड से बाहर आ गया.

मुझे ऑंढा पटक'कर उस'ने मेरी गान्ड मारना शुरू कर दी. चप्पलें उतार कर उस'ने मेरे मुँह के नीचे रख दीं और दोनों चप्पालों के पंजे मेरे मुँह में घुसा दिए. गांद मार'ने के साथ साथ वह लगातार चप्पालों को पकड़'कर मेरे मुँह में और अंदर ठेल'ने की कोशिश कर'ता रहा. लग'ता था कि पूरी जोड़ी मेरे मुँह में ठूंस देगा. गाल और जबड़े दुख'ने के बावज़ूद मैने भी चप्पलें चूस'ने का भरपूर मज़ा लिया. उन्हें मुँह में भर लेने की भी भरसक कोशिश की. जब प्रीतम आख़िर झाड़ा तो शांत होने पर मुझसे बोला.

मज़ा आ गया रानी. एक बात देखी तूने? आधी जोड़ी तेरे मुँह के अंदर है. देख, दोनों चप्पालों के पंजे और पट्टे तूने एक साथ मुँह में भर लिए हैं, सिर्फ़ ऐडिया बाहर हैं. इसका मतलब मालूम है मेरे यार? तू मेरी एक चप्पल पूरी मुँह में ले सक'ता है अब.

मैने भी गौर किया तो देखा सच था. मुझे चप्पलें चबाते हुए मरवा'ने में इतना मज़ा आया था कि मैने मन ही मन प्रण कर लिया कि रोज ऐसा ही करूँगा बल्कि मेरे यार की चप्पल खा जा'ने की कोशिश करूँगा. बस मौके का इंतजार था. प्रीतम के प्रति मेरी वासना इस हद तक बढ चुकी थी कि उस'की चप्पलें मेरे लिए स्वादिष्ट सेक्सी खाना बना गयी थी.

उस रात हम'ने एक बार और संभोग किया और फिर सो गये. यह सिक्सटी नाइन का आसन था और इस बार मैने उसका लंड काफ़ी हद तक मुँह में ले ही लिया. बस तीन चार इंच बाहर बचे होंगे. गले तक लंड निगल'कर चूसना और ख़ास कर गले में सुपाडे के कसी फिट होने से दम घुटना ये दोनों अनुभव बहुत मादक थे. प्रीतम ने तो आराम से मेरा लंड पूरा निगल कर चूसा. बोला.

अब जल्दी सिखाना पड़ेगा मेरी रानी को पूरा लॉडा मुँह में लेना. दूसरे दिन से हमारा जीवन धीरे धीरे एक कामुक'ता की लय में बँध गया. मैं प्रीतम की पत्नी जैसे उस'की सेवा कर'ने लगा. उस'के कपड़े धोता, सामान बटोर'ता और बा'की सब छोटे छोटे काम करता. सुबह प्रीतम मुझे संभोग नहीं कर'ने देता था क्योंकि कॉलेज जा'ने की जल्दी रह'ती थी. बस एक साथ नहाना, चूम चाटी करना, एक दूसरे के ऊपर मूतना इत्यादि बातें बाथ रूम में होती थी. नहाते समय मैं अपनी और उस'की चप्पलें धोता. उस'की पानी से गीली चप्पलें तो मैं चाट चाट कर और चूस कर सॉफ करता.

उन्हें मुँह में लेकर मेरा लंड ऐसा फड़फदाता की झड'ने को हो जाता. प्रीतम यह नज़ारा देख देख कर खूब गरम होता था और एक दो बार तो मेरी आशा बँध गयी थी कि शायद वहीं बाथ रूम में मुझे पटक कर वह चोद ले पर साला बड़ा कंट्रोल रख'ता था. सिर्फ़ छुट्टी के दिन बाथ रूम में ज़रूर संभोग होता था जब वह शवर के नीचे गोद में बिठा कर मेरी गान्ड मार'ता हुआ मुझसे चप्पलें चटवाता.

क्रमशः................


rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:27

YAAR BANA PRITAM - BHAAG (6)

gataank se aage........

Chal aadhee to le lee, aaj rah'ne de, par maa kasam, pooree chappal tere munh men kabhee na kabhee Thunsawa kar hee rahoongaa. Donon paTTe aur aadhee chappal mere munh men the jinhen main pooree shakti se chabaate hue choos raha thaa. Apana manachaaha sapana poora hone ke kaaraN itanee waasana men main Dooba hua tha ki meree aankhen pathara gayee thee. Mere ye kaaranaame dekh'kar Pritam ka lunD machal'kar meree gaanD men aur gahara ghus gayaa. Aakhir usase na raha gaya aur wah mujhe waheen sofe par paTak kar mere oopar chaDha baiThaa. Apanee doosaree chappal us'ne mere lauDe se nikaal kar mere ondhe chehare ke neeche takiya bana'kar rakh dee aur humak humak kar meree gaanD maar'ne lagaa.

Poore prayaas ke baawajood wah ap'ne aap par kantrol naheen kar paaya aur das minute men hee jhaD gayaa. Mera lunD ab itana uttejit tha ki us'ke poora jhaDate hee main use haTa'kar uTh baiTha aur use palaT'kar usapar chaDha'ne kee koshish kar'ne lagaa.

Das minute ruk yaar, mujhe dam lene de, fir main jaise kahoon waise maar meree gaanD . Aaj tere is masta'ne lauDe se man bhar kar marawaaoongaa. Bas thoDa lunD khaDa ho ja'ne de Mujhe rokate hue Pritam bolaa. Tab tak main chappal munh men liye choos'ta raha aur Pritam ke bhaaree bharakam chootaD sahalaata rahaa. Us'kee gaanD men makkhan lagaaya aur us'ne mere lunD ko chikana kiyaa. Jab usaka lunD fir kuchh uTh'ne laga to wah uTha aur sofe kee peeTh pakaD'kar jhuk'kar khaDa ho gayaa.

Ab Daal yaar andar dheere dheere aur maar meree khaDe khaDe Apanee gaanD Dheelee kar'ta hua wah bolaa. Maine turant us'kee gaanD men lunD Daal diyaa. Dheere dheere naheen, ek hee baar men saT se. Wah thoDa humaka aur fir bolaa.

Chal koee baat naheen, aaj to too taish men hai, par raaja kal se dheere dheere Daalana aur ghante bhar maaranaa. Aaj bhee kam se kam aadhe ghante maar yaar naheen to sab maja kirakira ho jaayegaa. Us'ke chootaD pakaD'kar panjon ke bal khaDe hokar maine us'kee maarana shuroo kar dee. Pahale sTrok thoDe dheeme the par fir us'ke kah'ne se main ghachaaghach chod'ne lagaa. Mera peT baar baar us'ke nitambon se Takaraata aur fach fach fach aawaaj hotee. Beech beech men main ruk jaata jisase jhaD na jaaun. Ati waasana ke baawajood ab main ap'ne aap par kantrol kar pa raha tha is'liye us'kee khoob der maar paaya jaisee us'kee ichchha thee.

Saare samay Pritam kee chappal mere munh men thee jise main choos aur chaba raha thaa. Kuchh der baad wah khud hee chal'kar deewaar se munh ke bal saT kar khaDa ho gaya aur mujhase khaDe khaDe gaanD marawaayee. Aakhir isee aasan men main jhaD gayaa. Apanee chappal jab us'ne mere munh se nikaalee to choos choos kar maine bilakul saaf kar dee thee. Usapar jagah jagah mere daanton ke gahare nishaam bhee ban gaye the. Use dekh'kar wah bolaa.

Haay meree jaan, itanee achchhee lagee ap'ne sainya kee chappal? Too fikar mat kar, ab raat ko to aise aasan se tujhe chodoonga ki too khush ho jaayegaa. Thak kar main palang par leT gayaa. Pritam mere paas baiTh gaya aur mere pair uTha'kar apanee god men rakh liye. Main apanee chappalen pahana hua thaa. Mere pairon aur talawon ko sahalaata hua Pritam bolaa.

Yaar too to baDa sundar hai hee, tere pair bhee baDe khoobasoorat hain. Ekadam chik'ne aur komal, talawe to dekh, bachchon jaise gulaabee hain. Aur mere pair uTha'kar wah unhen choom'ne lagaa. Main sukh se sikar uThaa. Mere pairon ko chappalon samet wah choom raha thaa. Beech men meree chappalen bhee chaaT letaa. Meree ungaliyon ko bhee us'ne munh men l'kar choosaa. Usaka ekadam tanna'kar khaDa ho gaya thaa.

Mujhase na raha gayaa. Maine Pritam ke pair kheench'kar ap'ne munhase laga liye aur unhen betaasha choom'ne aur chaaT'ne lagaa. Us'ke pair baDe the, par ekadam chik'ne aur saaf. Mujhe us'ke gore talawe chaaT'ne men bahut maja aayaa. Ham donon fir mast ho gaye the. Chudaayee ka ek naya daur shuroo hone hee waala thaa. Par fir Pritam ne uTh'kar kahaa.

Abhee naheen yaar, ab baad men. Shaam ko main tere pairon ko chodoongaa. Abhee so le. Naheen to chod chod kar ham donon buree tarah thak jaayenge. Waise too kyon chappal chaTaka'kar naheen chalataa, meree taraha? Maine kaha,

Koshish to kee thee par mujhe jam'ta naheen Pritam bola

Panjon ke bal uchak uchak kar chal'ne kee koshish kar, laDakiyon jaisee. Mast chaTakengee. Ek doosare ke lunD ham'ne choos kar saaf kiye aur fir kuchh der aaraam kiyaa. Ghante bhar so bhee liye. Main so kar uTha to wah paDha raha thaa. Wah paDhaaayee ka bhee pakka thaa. Shaam tak wah khud paDhaata raha aur mujhe bhee paDhaawaayaa. Raat ko ham'ne waheen khaana banaayaa. Khaana kha'kar fir paDhaaayee kee aur naha'kar ham fir kaamakreeDa men juT gaye. Pritam mujhase bolaa.

idhar aa yaar chappal pahan'kar aur is sTool par khaDa ho jaa, deewaal ka sahaara le kar. Munh deewaal kee or kar'ke main khaDa ho gayaa. BaDee utsuk'ta thee ki mera yaar ab kya gul khilaayegaa! Wah khud sTool ke paas neeche ghuT'ne Tek kar baiTh gayaa.

Ab ap'ne panjon ke bal khaDa ho jaa. Meree aiDiyaan ab meree chappalon se oopar uTh gayee thee. BaDe pyaar se us'ne apana lunD mere paanv ke talawe aur chappal ke beech ghuseDaa. Fir bolaa.

Ab neeche ho jaa. KhaDa ho ja mere lauDe par. Ap'ne talawe aur chappal ke beech daba le. Us'ke kaDe lunD ke mere talawon par hote sparsh se mujhe maja aa gayaa. Main pair hila kar us'kee maalish kar'ne lagaa. Mere pair pakaD'kar Pritam ab apana lunD mere talawon aur chappal ke beech pel'ne lagaa.

Dekh ise kahate hain pairon ko chodanaa. Bahut maja aata hai, khaas kar jab tere jaise chik'ne pairon waala koee mil jaaye. Aur too poora wajan de kar khaDa ho ja mere lunD par, ghabara mat, mera lauDa aaraam se jhel legaa. Pairon se daba daba kar maalish kar usakee Main oopar neeche hokar Pritam ke lunD ko pair tale raund'ne lagaa. Jaise mera pair uThataa, hamant ue pel'ne lagataa. Ek chappal se man bhar gaya to us'ke doosaree chappal men lunD Daal diyaa. Mere donon pairon aur chappalon ko Pritam ne man bhar kar chodaa. JhaD'ne ke kareeb a'kar ruk gaya aur bolaa.

Ab band karate hain yaar naheen to yaheen teree chappalon men jhaD jaaoongaa. Waise us'men bhee maja hai, tujhase chaTawa kar saaf kara'ne men maja aayegaa. Par abhee to main teree gaanD maaroongaa. Ham'ne ab ap'ne lunD aur guda makhkhan se chik'ne kar liye ki beech men na rukana paDe. Mujhe god men lekar Pritam mujhe pyaar kar'ne lagaa.

Kuchh der kee choonaachaaTee ke baad us'ne mujhe chit bistar par liTaaya aur mere seedhe khambe se khaDe lunD ko pyaar se choosaa. Choosate choosate wah ulaTee taraf se meree chha'tee ke donon or ghuT'ne Tek kar mere oopar aa gayaa. Mujhe laga ki lunD chusawaan chaah'ta hai par thoDa simaT'kar jab wah ukaDoon hua to us'ke chootaD mere munh par lahara rahe the. GaanD ka chhed khul aur band ho raha thaa.

Main samajh gaya ki mujhase gaanD chusawaan chaah'ta hai. Maine us'ke nitambon ko dabaate hue usaka guda choosana shuroo kar diyaa. Use itana maja aaya ki wah apana poora wajan dekar mere munh par hee baiTh gayaa. Wah apanee chappalen pahana hua thaa. Chappalen bhee main haath se pakaD'kar dabaata rahaa.

Das minute baad wah uTha aur jhuk kar mere peT ke donon or pair jama kar taiyaar ho gayaa. Meree or munh kar ke mera lunD us'ne ap'ne guda par jamaaya aur use andar leta hua neeche baiTh gayaa. Mera lauDa us'kee chikanee khulee gaanD men aasaanee se ghus gayaa. Poora lunD andar lekar us'ke chootaD mere peT par Tik gaye. Pritam ne fir donon pair uTha'kar mere chehare par rakhe aur haath bistar par Tek kar oopar neeche hote hue khud hee apanee gaanD mara'ne lagaa. Chappalen pah'ne hue us'ke pair mere munh par the. Un'ke talawe mere gaalon aur munh par ragaD'ta hua wah bolaa.

Le ab yaar, man bhar kar meree chappal chaaT aur choos. Munh men le. Maja kar. Main bhee man bhar kar aaraam se apanee gaanD se tere lunD ko chod'ta hoon. Mere liye to maano khaja'ne ka darawaaja khul gayaa. Yahaan Pritam kee gaanD ka mulaayam tap'ta gharShaN mere lunD ko apoorv sukh de raha tha udhar mere munh par Tike us'ke chappalon men lipaTe pair mujhe madahosh kar rahe the. Maine haathon se pakaD'kar unhen munh se laga liya aur betahaasha choom'ne aur chaaT'ne lagaa. Kabhee us'kee chappal chaaTataa, kabhee chappal ka sira munh men lekar chabaata aur choos'ta aur kabhee Pritam ke talawe chaaT'ne lagataa. Beech men us'ke pairon kee ungaliyaan aur angooTha munh men lekar choos'ne lagataa.

Pritam ne tarasa tarasa kar aadhe ghante mujhe is meeThee chhuree se halaal kiya aur fir jor jor se apanee gaanD se chodate hue mujhe jhaDaayaa. Main itanee jor se jhaDa ki mera shareer kaamp gayaa. is baar Pritam ne ek aur karam mere oopar kiyaa. Mera skhalan hone ke baad bhee mujhe chodana band naheen kiyaa, balki oopar neeche uchhal'ta hua mere lunD ko ap'ne gaanD men liye marawaata rahaa. LunD ab bhee khaDa tha par jhaD'ne ke baad supaaDa bahut sanwedanasheel ho gaya thaa. is'liye usapar gaanD ka gharShaN mujhe sahan naheen huaa. Jab bhee wah oopar neeche hotaa, main sisakaaree bharate hue taDap taDap jaata par wah haraamee hansate hue mere lunD ko apanee gaanD kee myaan se ragaD'ta rahaa. Mujhe aisa nichoDa ki main kisee kaam ka naheen rahaa, kareeb kareeb behosh kee ho gayaa. Wah tabhee ruka jab mera lunD bilakul murajha kar us'kee gaanD se baahar aa gayaa.

Mujhe ondha paTak'kar us'ne meree gaanD maarana shuroo kar dee. Chappalen utaar kar us'ne mere munh ke neeche rakh deen aur donon chappalon ke panje mere munh men ghusa diye. GaanD maar'ne ke saath saath wah lagaataar chappalon ko pakaD'kar mere munh men aur andar Thel'ne kee koshish kar'ta rahaa. Lag'ta tha ki pooree joDee mere munh men Thoons degaa. Gaal aur jabaDe dukh'ne ke baawajooD maine bhee chappalen choos'ne ka bharapoor maja liyaa. Unhen munh men bhar lene kee bhee bharasak koshish kee. Jab Pritam aakhir jhaDa to shaamt hone par mujhase bolaa.

Maja aa gaya raanee. Ek baat dekhee toone? Aadhee joDee tere munh ke andar hai. Dekh, donon chappalon ke panje aur paTTe toone ek saath munh men bhar liye hain, sirf aiDiyaan baahar hain. isaka matalab maaloom hai mere yaar? too meree ek chappal pooree munh men le sak'ta hai ab.

Maine bhee gaur kiya to dekha sach thaa. Mujhe chappalen chabaate hue marawa'ne men itana maja aaya tha ki maine man hee man praN kar liya ki roj aisa hee karoonga balki mere yaar kee chappal kha ja'ne kee koshish karoongaa. Bas mauke ka intajaar thaa. Pritam ke prati meree waasana is had tak baDha chukee thee ki us'kee chappalen mere liye swaadiShT seksee khaana bana gayee thee.

Us raat ham'ne ek baar aur sambhog kiya aur fir so gaye. Yah siksaTee naain ka aasan tha aur is baar maine usaka lunD kaafee had tak munh men le hee liyaa. Bas teen chaar inch baahar bache honge. Gale tak lunD nigal'kar choosana aur khaas kar gale men supaaDe ke kasee fiT hone se dam ghuTana ye donon anubhav bahut maadak the. Pritam ne to aaraam se mera lunD poora nigal kar choosaa. Bolaa.

Ab jaldee sikhaana paDega meree raanee ko poora lauDa munh men lenaa. Doosare din se hamaara jeevan dheere dheere ek kaamuk'ta kee lay men bandh gayaa. Main Pritam kee patnee jaise us'kee sewa kar'ne lagaa. Us'ke kapaDe dhotaa, saamaan baTor'ta aur ba'kee sab chhoTe chhoTe kaam karataa. Subah Pritam mujhe sambhog naheen kar'ne deta tha kyonki college ja'ne kee jaldee rah'tee thee. Bas ek saath nahaanaa, choom chaaTee karanaa, ek doosare ke oopar mootana ityaadi baaten bath room men hotee thee. Nahaate samay main apanee aur us'kee chappalen dhotaa. Us'kee paanee se geelee chappalen to main chaaT chaaT kar aur choos kar saaf karataa.

Unhen munh men lekar mera lunD aisa faDafaDaata ki jhaD'ne ko ho jaataa. Pritam yah najaara dekh dekh kar khoob garam hota tha aur ek do baar to meree aasha bandh gayee thee ki shaayad waheen bath room men mujhe paTak kar wah chod le par saala baDa kantrol rakh'ta thaa. Sirf chhuTTee ke din bath room men jaroor sambhog hota tha jab wah shower ke neeche god men biTha kar meree gaanD maar'ta hua mujhase chappalen chaTawaataa.

kramashah................


rajaarkey
Platinum Member
Posts: 3125
Joined: 10 Oct 2014 04:39

Re: समलिंगी कहानियाँ

Unread post by rajaarkey » 18 Dec 2014 16:27

यार बना प्रीतम - भाग (7)

गतान्क से आगे........

रात को खा'ने के बाद संभोग शुरू होता तो फिर तीन चार घंटे नहीं रुकता. एकाध बार हम सिक्सटी नाइन करते या और तरह तरह से अप'ने यार के लंड चूस कर वीर्य पान करते पर बा'की अधिकतर समय ज़ोर ज़ोर से गान्ड मार'ने और मरवा'ने में जाता. गांद मारना हमारे लिए एक ऐसा खेल था कि उसे ज़ोर ज़ोर से वर्ज़िश सी करते हुए कर'ने में ह'में बड़ा मज़ा आता था. उच्छल उच्छल कर हम पूरे जोरों से एक दूसरे की मारते थे.

हां कभी कभी प्यार से गोद में बिठा'कर हौले हौले चूमा चॅटी करते हुए गान्ड चोदना भी बहुत प्यारा लग'ता था. इस'में अक्सर मैं प्रीतम की गोद में होता पर एक दो बार वह भी मेरा लंड अपनी गान्ड में लेकर मेरी गोद में बैठ जाता. इस आसन में हम कोई पोथी साथ साथ पढ़ते या फिर एक ब्लू फिल्म देखते.

प्रीतम की चप्पलें चूसना मेरा ख़ास शौक बन गया था. प्रीतम भी अक्सर मेरी चप्पालों से खेल'ता या फिर मेरे पैरों को चूम चूम कर प्यार कर'ता पर मैं तो उस'की चप्पालों का दीवाना हो गया था. गांद मरवाते या उस'की गान्ड मारते हुए प्रीतम की चप्पलें हमेशा मेरे मुँह में रह'ती थी. बस जब उसे मेरे मुँह को चूम'ने की या अपना लंड चुसवा'ने की बहुत इच्च्छा होती तभी मैं उन्हें मुँह से निकालता.

दोपहर को कॉलेज से वापस आ'कर भी खाना खा'ने के बाद दो घंटे पढ़ाई होती थी. इस बारे में वह पक्का था. हां दो तीन घंटे की इस पढ़ाई में हम कुच्छ मज़ा कर लेते थे और वह भी ऐसी कि पढ़ाई भी तेज होती थी. प्रीतम ने ही इस तरह की पढ़ाई की शुरुआत की. एक दिन जब मैं टेबल कुर्सी पर बैठ कर रिपोर्ट लिख रहा था तो वह उठ कर आया और मुझे चूम कर प्यार से बोला.

अगर तू हाथ ना रोक'ने का और लिखते रह'ने का वायदा करेगा तो एक मस्त आसन दिखाता हूँ. तू बस लिख'ता जा. देख क्या फटाफट पढाइ होती है. लंड में होते चुदासी के सुख से पढ़ाई ज़्यादा तेज होती है अगर ठीक से कोन्सन्ट्रेट किया जाए. बोल है तैयार? मेरे हामी भरते ही वह टेबल के नीचे घुस गया और मेरे साम'ने आराम से बैठ'कर मेरा तना हुआ लंड हाथ में लेकर कुच्छ देर उसे मुठियाया. फिर अपना मुँह खोल कर पूरा लंड निगल लिया. उस'के बाद बस वैसे ही बैठ रहा, मेरा लंड उस'ने चूसा नहीं. अपनी आँखों से इशारा किया कि मैं लिख'ता रहूं. उस'के गरम गीले तपते मुँह का स्पर्श मुझे मदहोश कर रहा था. मैने पढ़ाई शुरू कर दी.

एक घंटे में मेरी इतनी पढ़ाई हुई जैसी दो घंटों में नहीं होती. बस अप'ने आप पर इतना कंट्रोल करना था कि ऊपर नीचे होकर उस'के मुँह को चोद'ने की इच्च्छा दबाता रहूं. प्रीतम बस अपनी जीभ और तालू के बीच मेरे लंड को लेकर बैठ था, कभी कभी हौले से जीभ से मेरे लंड के निचले भाग को गुदगुदा देता. इतना सुख मेरी नसों मे दौड़ जाता था कि सहन नहीं होता था. घंटे भर बाद रिपोर्ट ख़तम होने पर आख़िर जब मुझसे ना रहा गया तो मैने पेन नीचे रख'कर प्रीतम का सिर अप'ने पेट पर दबाया और कुर्सी में बैठ बैठ उस'के मुँह को चोद'ता हुआ झड गया.

बाद में उसे चूमते हुए मैने कहा कि मैं भी उसे वैसा ही सुख देना चाह'ता हूँ. उस'के लिए लंड पूरा मुँह में लेना सीखना बहुत ज़रूरी था. प्रीतम बोला,

इस'में क्या बड़ी बात है, आज ही तुझे सिखा दूँगा उसी रात उस'ने मुझे लंड मुँह में पूरा लेना सिखा दिया. खड़ा लंड मुँह में लेने में कठिनायी होती थी इस'लिए उस'ने मेरी गान्ड मार'ने के बाद अपना मुरझाया लंड मेरे मुँह में दिया और पलंग पर लेट गया. तीन चार इंच की वह लुल्ली मैं आराम से पूरी मुँह में लेकर चूस'ता रहा. दस मिनिट बाद जब उसका खड़ा होना शुरू हुआ तो उस'ने मुझे आगाह किया.

अब घबराना नहीं सुकुमार राजा. गले में जाएगा तो गला ढीला छोडना. देख कैसा हलक तक उतार जाएगा. शुरू में जब उसका लंड धीरे धीरे खड़ा हुआ तो मुझे बहुत मज़ा आया. अधप'के उस लंड को मैं ऐसे चूस रहा था जैसे आइसक्रीम हो. पर जब उसका मोटा सुपाड़ा आख़िर मेरे गले में उतर'ने लगा तो मेरा दम घुट'ने लगा. साँस लेने में भी तकलीफ़ होने लगी. जब मैं लंड निकाल'ने की कोशिश कर'ने लगा तो मेरा यार मुझे पटक'कर मेरे ऊपर अपना वजन देकर लेट गया.

ऐसे थोड़े निकाल'ने दूँगा मेरी जान, आज तो पूरा लेना ही पड़ेगा. कह'कर उस'ने मेरा सिर कस के पेट पर दबा लिया. जब मैं हाथों से उस'की कमर पकड़'कर उसे हटा'ने की कोशिश कर'ने लगा तो उस'ने मेरे हाथ पकड़ लिए, अब उस'के वज़नदार शरीर को हटाना मेरे लिए असंभव था. मेरी साँस अब रुक गयी थी और लग'ता था कि बेहोश हो जाऊँगा. प्रीतम प्यार से बोला,

साले, मेरी बात मान'ता क्यों नहीं? गला ढीला छोड और हाथ पैर फेकना बंद क दे, तुझे कुच्छ नहीं होगा आख़िर मैने हार मान ली और चुपचाप गला ढीला छोड'ने की कोशिश कर'ने लगा. दो मिनिट में मेरा गला एकदम ढीला पड़ गया और दम घुटना भी बंद हो गया. प्रीतम का लॉडा अब जड़ तक मेरे मुँह में उतार चुका था और मेरी नाक और होंठ उस'की झांतों में समा गये थे. अब सहसा मैने महसूस किया कि दम भी नहीं घुट रहा है और उस मोटे ताजी ककडी को चूस'ने में भी मज़ा आ रहा है. मेरे शरीर के ढीले पड़ते ही प्रीतम ने मेरे हाथ छोड दिए. प्यार से मैने अप'ने हाथ उस'के चूतडो के इर्द गिर्द जकड लिए और गान्ड में उंगली करते हुए चूस'ने लगा.

सीख गया मेरा यार, चल अब इनाम ले ले अपना, चूस डाल. और लगे हाथ गला चुदवा भी ले. देख कैसे मुँह चोदा जाता है और मेरे सिर को पेट से सटा'कर वह घचाघाच मेरे मुँह में लंड पेल'ने लगा. बिलकुल ऐसे वह लंड पेल रहा था जैसे गान्ड मार रहा हो, उसका आधा लंड मेरे मुँह से अंदर बाहर हो रहा था. गले में जब सुपाड़ा घुस'ता और निकल'ता तो मेरा दम थोड़ा घुट'ता पर बहुत मज़ा भी आता था. मेरे मुँह को उस'ने पाँच मिनिट में किसी चूत की तरह चोद डाला. जब मैं उसका पूरा वीर्य पी गया तभी उस'ने मुझे छोडा.

इस'के बाद बारी बारी से हम पढाई के समय एक दूसरे का लंड चूसाते. उस'के साम'ने बैठ कर अपना चेहरा उस'की घनी झांतों में छुपा कर उसका लंड पूरा निगल कर वह सुख मिल'ता कि कहा नहीं जा सकता. हाँ, मुझे चुपचाप लंड मुँह में लेकर बैठ'ने की प्रैक्टिस करना पड़ी क्योंकि शुरू के दो तीन दिन मैं उसका लंड चूस'ने को ऐसा तरस जाता कि चूस कर उसे पढाइ पूरी होने के पहले ही सिर्फ़ आधे घंटे में ही झड देता.

यार का शरबत

एक दूसरे के बदन के लिए हमारी हवस का एक और चरण पूरा हुआ जब एक दूसरे के मूत्र को सिर्फ़ शरीर पर या चेहरे पर लेने के बजाय हम'ने उसे पीना शुरू कर दिया. पहल मैने ही की. अब तक बहुत किताबों में और फिल्मों में मैं देख चुका था की कैसे प्रेमी युगल आप'ने साथी का मूत्र बड़ी आसानी से पी जाते हैं. मैं भी यह करना चाह'ता था पर थोड डर'ता था.

आख़िर एक दिन जब टेबल के नीचे बैठ'कर मेरी बारी उसका लंड चूस'ने की थी तो मैं तैश में आ गया. उस दिन मैने लगातार ढाई घंटे की पढाई उससे कराई थी, बिना उसे झडाये. बाद में वह ऐसा झाड़ा की चार पाँच चम्मच भर कर अपनी मलाई मेरे मुँह में उगली. फिर तृप्ति की साँस लेता हुआ वह मेरे मुँह से लंड निकाल कर कुर्सी से उठ'ने की कोशिश कर'ने लगा. मैने उसे नहीं छोडा बल्कि कस कर पकड़ लिया और झाड़ा हुआ लॉडा चूस'ता ही रहा.

छ्होड दे यार, क्या कर रहा है? मुझे पिशाब लगी है ज़ोर की. छ्होड नहीं तो तेरे मुँह में ही कर दूँगा. उस'ने झल्ला कर कहा. उस'की बात को अनसुनी कर'के मैं चूस'ता ही रहा. आँखें उठा कर उस'की आँखों में झाँका और उसे आँख मार दी. वह समझ गया. . वासना से उस'की आँखें लाल हो गयीं. कुर्सी पर बैठ कर मेरे बाल बिखेर'ता हुआ वह बोला.

तो यह मूड है तेरा? देख, एक बार शुरू करूँगा तो रुकूंगा नहीं, पूऱ पीना पड़ेगा. और नीचे नहीं गिराना साले नहीं तो बहुत मारूँगा. उसे शायद डर था कि मैं बिचक ना जाऊं इस'लिए उस'ने मेरा सिर अप'ने पेट पर कस कर दबाया और मूत'ने लगा. उसका लंड मेरे गले तक उतरा हुआ था ही, सीधे गरमागरम मूत की तेज मोटी धार मेरे गले में उतर'ने लगी. मैं निहाल हो गया. मेरा लंड ऐसा खड़ा हुआ कि पूच्छो मत. घटागट उस खारे शरबत को मैं पीने लगा. इत'ने चाव से मैं पी रहा था कि उस'ने भी देखा कि ज़बरदस्ती की ज़रूरत नहीं है और अपना हाथ हटा'कर मेरे गाल पुचकार'ता हुआ आराम से मूत'ने लगा.

उसे ज़ोर की पेशाब लगी थी, दो गिलास तो ज़रूर मूता होगा. मूतना ख़तम होते होते वह भी तैश में आ गया. उसका लंड फिर खड़ा हो गया था और उस'ने लगे हाथ बैठे बैठे मेरा मुँह चोद डाला. दूसरी बार उसका वीर्य पीकर मैं उठा और उसे कुर्सी से उठा'कर वहीं ज़मीन पर पटक'कर उस'की गान्ड मार ली. वह दो बार झड कर लस्त हो गया था इस'लिए चुपचाप ज़मीन पर पड़ा पड़ा मरवाता रहा. उस'के गुदाज मासल शरीर को भोगना मुझे तब ऐसा लग रहा था जैसे किसी औरत को भोग रहा हूँ. वह भी आज किसी औरत की तरह बिलकुल शांत पड़ा पड़ा मरवा रहा था.

उसका भी मेरे शरीर की ओर कितना आकर्षण था यह उस'ने तुरंत दिखा दिया. उसी रात सिक्सटीनाइन कर'ने के बाद उस'ने तो मेरे मुँहे में मूता ही, साथ साथ मुझसे भी मुतवा लिया. एक दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर पड़े पड़े ही हम एक दूसरे के मुँह में मूतते रहे. वा मेरा मूत इत'ने चाव से पी रहा था कि ख़तम होने पर भी छोड'ने को तैयार नहीं हुआ. इस'के बाद सिक्सटी नाइन के तुरंत बाद अप'ने साथी के मुँह में मूतना हमारा एक प्रिय कार्यक्रम बन गया. प्रीतम को मेरे बाल बहुत अच्छे लगते थे. उन'में वा अक्सर उंगलियाँ चलाता. कहता,

क्या ज़ूलफे हैं मेरी जान तेरी, और लंबी कर ले, मा कसम, बहुत प्यारी लगेंगी. मेरे बाल पहले ही काफ़ी लंबे थे. प्रीतम के कह'ने पर मैने बाल कटाना बंद कर दिया. उसका कहना था कि मेरी लड़कियों जैसी सूरत उससे और प्यारी लग'ती है. शायद वह बाद में मुझे लड़'की के रूप में देखना चाह'ता था.



चप्पल भोग

हमारे संभोग का अगला मादक मोड़, ख़ास कर मेरे लिए एक बड कामुक क्षण, करीब एक माह बाद एक रविवार को आया. अब तक हम रोज के क्रिया कलाप में ढल चुके थे. मैं बहुत खुश था. समझ में नहीं आता था कि प्रीतम के बिना कैसे इत'ने दिन रहा. मेरे बाल लंबे हो गये थे और प्रीतम अब प्यार से मुझे रानी कह'कर बुला'ने लगा था.

उस'की चप्पालों के प्रति मेरी आसक्ति भी चरम सीमा तक पहुँच गयी थी. जब मौका मिलता, उन्हें मैं चूम'ने और चाट'ने में लग जाता, ख़ास कर जब वे प्रीतम के पैरों में होतीं. प्रीतम अब दिन रात चप्पल पहनता. मेरे ज़िद कर'ने के कारण रात को भी पहन कर सोता था.

दो हफ्ते पहले प्रीतम ने अचानक अपनी चप्पल बदल ली थी. मुझे तो उसका कण कण पहचान का हो गया था. सहसा एक दिन उस'के पैर में उस क्रीम कलर की चप्पल के बजाय एक हल्के नीले सफेद रंग की चप्पल थी. थी यह भी रब्बर की हवाई चप्पल पर बड़ी ही नाज़ुक थी. इतनी पुरानी थी कि घिस घिस कर उस'के सोल ज़रा से रह गये थे. पट्टे भी घिस कर पतले हो गये थे और टूट'ने को आ गये थे. मुलायम तो इतनी थी जैसे रेशम की बनी हो. मुझे वह बड़ी पसंद आई. मैने पूचछा भी कि कहाँ से लाया तो कुच्छ नहीं बोला.

तुझे पसंद आई ना रानी, बस मज़ा कर. जहाँ से लाया हूँ वहाँ और भी हैं. रविवार को हम बाथ रूम में ही बहुत देर रहते और चुदाई करते. उस रविवार को हमेशा की तरह पहले मैं उस'के मुँह में मूता और उसे पेट भर'कर अपना मूत पिलाया. उस'ने मेरे मुँह में मूत'ने से इनकार कर दिया. बोला कि उसे पेशाब नहीं लगी. वह सिर्फ़ बहाना था यह मैं जान'ता था.

उस दिन उस'के दिमाग़ में ज़रूर कोई नयी शैतानी थी. वह साथ में रेशम की मुलायम रस्सी के दो टुकडे और रब्बर का एक बड चार पाँच इंच चौड छह सात इंच व्यास का बैंड लाया था. शायद किसी टायर ट्यूब में से काट हो. मेरे पूच्छ'ने पर, कि यह क्या है, कुच्छ ना बोला और हंस दिया.

मैने रोज की तरह प्रीतम की उन भीगी पतली चप्पालों के पंजे अप'ने मुँह में लिए और चूस'ने लगा. फिर वह मुझे दीवार से टिका कर मेरी गान्ड मार'ने लगा. ऊपर से गिरते शवर के ठंडे पानी के नीचे बहुत देर उस'ने मेरी गान्ड चोदी. झड'ने के बाद उस'की गान्ड मार'ने की बारी मेरी थी पर वह मुझ पर चढ़ा रहा और अपना झाड़ा लंड मेरे गुदा में ही रह'ने दिया. मुझे नीचे लिटा कर वह मेरे ऊपर सो गया. मेरा लंड टटोल कर बोला.

मस्त खड़ा है यार, अब और खड करूँ? मैने चप्पल मुँह में लिए हुए ही अस्पष्ट स्वर में कहा कि इससे ज़्यादा खड़ा वह क्या करेगा? उस'ने एक चप्पल मेरे मुँह से निकाल'कर नीचे रख दी और मुझे बची हुई चप्पल पूरी मुँह के अंदर लेने को कहा.

देख'ता जा कैसे तेरा और खड़ा कर'ता हूँ. पर पहले आज पूरी चप्पल मुँह में ले ले यार. यह पतली वाली है. तू ले लेगा. मैं कब से तेरे मुँह में अपनी पूरी चप्पल ठूँसी देखना चाह'ता हूँ. मेरी पुरानी वाली ज़रा मोटी थी, उसे तू नहीं ले पाता इसीलिए तो ये वाली मंगाई है मुझे भी यही चाहिए था. उस'की सहाय'ता से आधी से ज़्यादा चप्पल मैने आप'ने मुँह में आराम से ठूंस ली. बीच में वह बोला.

क्रमशः................